Monday, July 6, 2026
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अश्विनी बजाज ने वित्त परामर्श के क्षेत्र में पूरे किए 10 साल

अब तक 30 हजार विद्यार्थियों को दे चुके हैं प्रशिक्षण
इंटरनेशनल बुक्स ऑफ रिकॉर्ड विजेता हैं
कोलकाता । फाइनेंस के कुशल जानकार, मेंटर, प्रसिद्ध शिक्षक और एक कॉर्पोरेट कोच, ‘अश्विनी बजाज’ वैश्विक स्तर पर फाइनेंस एवं अन्य शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रभाव डाल रहे हैं। योग्यताओं की एक विस्तृत श्रृंखला पर गौर करें तो, सीए, सीएस, सीएफए, एफआरएम, सीएआईए, सीआईपीएम, सीएफपी, आरवी, सीसीआरए, सीआईआईबी, सीआईआरए और एआईएम सहित 12 से अधिक शैक्षणिक डिग्रियों के साथ श्री बजाज इस क्षेत्र में एक अग्रणी मेंटर के रूप में उभरे है। अबतक वह 100 से अधिक देशों में 25,000 से अधिक छात्रों को अपने शिक्षा के अनुभव से शिक्षित कर चुके हैं। उनके शानदार कैरियर में उल्लेखनीय मील का पत्थर फाइनेंस में छात्रों को सलाह देने का एक दशक पूरा करना, नरसी मोनजी फाइनेंस एंड इन्वेस्टमेंट सेल के माध्यम से व्यक्तिगत वित्त में 12,000 से अधिक छात्रों को प्रशिक्षण देकर ‘इंटरनेशनल बुक्स ऑफ रिकॉर्ड’ में अपना सुनहरा नाम अर्जित कर विशेष सम्मान के साथ सम्मानित होना शामिल है। 2019 में इंडिया एजुकेशन अवार्ड्स द्वारा भारत में फाइनेंस के मेंटर अश्विनी बजाज 2021 में भारत के 40 सर्वश्रेष्ठ फाइनेंस प्रशिक्षकों में से एक हैं।
इसके अलावा अश्विनी बजाज लीवरेज्ड ग्रोथ के सीईओ हैं, जो 2016 में स्थापित एक विशिष्ट वित्तीय परामर्श देनेवाली कंपनी है। लीवरेज्ड ग्रोथ अनुसंधान, रणनीति, मूल्यांकन, परामर्श, सलाह और प्रशिक्षण में माहिर है, जो 50+ उद्योगों में 150+ से अधिक घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय स्टार्ट-अप को अपनी प्रभावशाली सेवाएं प्रदान करता है। जिसमें फिनटेक, इंश्योरटेक, एडटेक, रियल्टीटेक, लीगलटेक, लॉजिटेक, एआई और ब्लॉकचेन, साइबर सुरक्षा, हेल्थकेयर, एफएमसीजी, तेल और गैस आदि जैसे विविध क्षेत्र शामिल हैं। इसके अलावा कॉर्पोरेट प्रशिक्षण की बात करें तो उन्होंने बार्कलेज, टाटा, ग्रासिम जैसी प्रमुख कंपनियों के बड़े अधिकारियों को व्यक्तिगत तौर पर प्रशिक्षित किया है।
उनकी विशेषज्ञता और प्रभावशाली गुण ने ज़ी बिजनेस, आरएसटीवी चैनल, एएनआई न्यूज, बिजनेस लाइन, द वीक, द इंडियन वायर, द इकोनॉमिक टाइम्स और सुदर्शन न्यूज सहित विभिन्न मीडिया संगठन का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है, जिन्होंने फाइनेंस क्षेत्र में उनके अहम योगदान को मान्यता दी है। अश्विनी बजाज पढ़ाई के काफी शौकीन होने के अलावा एक ट्रैवेलर भी हैं।
अपने कई प्रयासों के अलावा एक पेशेवर के तौर पर विश्व स्तर पर छात्रों में उन्नत एक्सेल, कॉर्पोरेट डेक और फाइनेंशियल मॉडलिंग के साथ-साथ सीएफए, एफआरएम, सीए जैसे पाठ्यक्रम में शिक्षा का प्रसार कर छात्रों को प्रशिक्षण दे रहे हैं। उन्होंने आईआईटी, आईआईएम, एक्सएलआरआई जमशेदपुर, एसपी जैन, एमडीआई गुड़गांव, आईएसबी हैदराबाद, आईसीएआई, एआईईएसईसी जैसे लगभग 100 प्रतिष्ठित संस्थानों और संगठनों में व्याख्यान, सेमिनार, कार्यशालाएं, पैनल चर्चा और सत्र पर अपने अनुभवों को प्रकट किया हैं। उनकी विशेषज्ञता में निजी फाइनेंस, फाइनेंस में कैरियर, स्टार्टअप, मूल्यांकन, इक्विटी अनुसंधान, जीडीपीआई और उत्पादकता सहित अन्य विषय शामिल हैं।
उन्होंने अपने छात्रों एवं प्रशंसकों से जुड़ने के लिए कई वेबसाइट और सोशल मीडिया प्रोफाइल स्थापित किए हैं। वह यूट्यूब, इंस्टाग्राम, लिंक्डइन, फेसबुक और ट्विटर जैसे प्लेटफार्मों के माध्यम से अपने अनुयायियों के साथ सक्रिय रूप से जुड़े रहते हैं, जहां वह वित्त से संबंधित विषयों पर मूल्यवान अंतर्दृष्टि और अपडेट साझा करते हैं। अपने एक ट्विटर पोस्ट में अश्विनी कहते हैं, ‘हमेशा कोई न कोई आपसे ज्यादा स्मार्ट और अमीर होता है। शांति से रहने, सही मानसिकता रखने, अच्छे निर्णय लेने और सफल होने के लिए बिना किसी सोच के अपना ‘कर्तव्य’ निभाएं। धन के साथ-साथ आत्मविश्वास और आत्म-मूल्य की भावना भी संचित करें।‘ अश्विनी बजाज का अपने छात्रों को अपने अति कुशल अनुभव एवं प्रतिभा के साथ ज्ञान प्रदान करने का जुनून उन्हें एक अग्रणी व्यक्ति की पहचान दिलाता है। अपने परामर्श, प्रकाशन, सामुदायिक सेवा के माध्यम से श्री बजाज फाइनेंस में प्रभाव डालते है। फाइनेंस और शिक्षा क्षेत्रों में उनकी उल्लेखनीय प्रतिभा का जौहर दुनिया भर में उनके छात्रों के साथ अन्य लोगों और इनके प्रशंसकों को प्रेरित और सशक्त बनाती रही है।

87 वर्षीय महिला का डुअल चैम्बर पेसमेकर का सफलतापूर्वक प्रत्यारोपण

कोलकाता । बी पी पोद्दार हॉस्पिटल में डॉ अमिताव दास एमबीबीएस, डीसीएच, डीएनबी (पीएड), डीआरएनबी (कार्डियोलॉजी), सलाहकार इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट हैं जो एएमआरआई मुकुंदपुर, बी पी पोद्दार अस्पताल, जिम्स, डैफोडिल अस्पताल से संलग्न हैं। 87 वर्षीय महिला शांति देवी तिवारी आवर्ती प्रीसिंकोपल एपिसोड से पीड़ित डुअल चेम्बर पेसमेकर का डॉ. अमिताव दास ने सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित किया। साथ ही टाइप 2 डीएम, सिस्टमिक हाइपरटेंशन, इंटरस्टीशियल लंग डिजीज, सीकेडी की पृष्ठभूमि के साथ फर्स्ट डिग्री एवी ब्लॉक और निमोनिया के साथ सिक साइनस सिंड्रोम का निदान किया गया। यह ऑपरेशन 27जून 2023 को संपन्न हुआ और रोगी को चिकित्सकीय रूप से स्थिर कर दिया गया और पेसमेकर सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित किया गया और अब रोगी को 29 जून को स्थिर स्थिति में छुट्टी मिल रही है।यह बी पी पोद्दार हॉस्पिटल में किया गया। जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।

भवन निर्माण योजनाओं की मंजूरी में लगने वाली अवधि घटाएगा नगर निगम

कोलकाता । मर्चेंट्स चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने परिचर्चा आयोजित की । परिचर्चा में मुख्य अतिथि के रूप में कोलकाता नगर निगम के म्यूनिसिपल कमिश्नर विनोद कुमार उपस्थित थे । परिचर्चा में ई गर्वनेंस, उद्यमिता और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट यानी ठोस अपशिष्ट को लेकर निगम के विजन और रणनीति पर चर्चा की गयी । परिचर्चा को सम्बोधित करते हुए म्यूनिसिपल कमिश्नर विनोद कुमार ने कहा कि निगम का लक्ष्य भवन योजनाओं को मंजूरी देने में लगने वाले समय को घटाकर 38 दिन करना है। केएमसी ने 2 साल पहले भवन निर्माण आवेदनों को मंजूरी देने के लिए सामान्य आवेदन पत्र पेश किया था। निगम ने हाल ही में नाइट पार्किंग लॉन्च की है जिसे डिजिटल तरीके से किया जा सकता है। केएमसी ने केएमसी भवनों में सौर इकाइयां स्थापित करने के लिए बिजली विभाग को 4 करोड़ रुपये दिए हैं।
शहर को पर्यावरण की दृष्टि से टिकाऊ बनाने के लिए, निगम के क्षेत्रों में और हुगली नदी के किनारे दक्षिणेश्वर और धापा क्षेत्र तक 1 करोड़ पौधे लगाया जाएगा। अधिक पार्किंग जोन की आवश्यकता के संबंध में, उन्होंने उद्योग से आगे आने और इस पहल में भागीदार बनने की अपील की। केएमसी शहरी विकास विभाग के साथ हस्तांतरणीय विकास अधिकारों पर काम कर रहा है। म्यूनिसिपल कमिश्नर ने केएमसी चैटबॉट सेवाओं के उपयोग पर जोर दिया ।

हेरिटेज वॉक का आयोजन
मर्चेंट्स चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने गत 25 जून को फोर्ट विलियम में एक हेरिटेज वॉक का आयोजन किया। एमसीसीआई के अध्यक्ष नमित बाजोरिया के नेतृत्व में हेरिटेज वॉक किले के छह द्वारों में से एक, स्वर्ण विजय द्वार से शुरू हुई। विलियम. प्रतिभागियों ने विजय स्मारक, युद्ध स्मारक, फोर्ट विलियम की खाई, कमांड संग्रहालय, शस्त्रागार, कमांड लाइब्रेरी, डलहौजी बैरक और नेताजी सेल का दौरा किया, जहां 1940 में कुछ दिनों के लिए नेताजी सुभाष चंद्र बोस को रखा गया था।

विनोद कुमार ने उद्योग जगत से सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के क्षेत्र को लेकर सुझाव माँगे । निगम शीघ्र ही धापा में अपशिष्ट उपचार के लिए 500 मीट्रिक टन प्रति दिन की क्षमता वाला केंद्रीकृत खाद संयंत्र (पीपीपी मॉडल) और धापा में 10000 वर्ग फुट भूमि पर 2 टीपीडी की क्षमता वाला प्लास्टिक प्रसंस्करण संयंत्र लगाएगी। एक अन्य परियोजना धापा में विरासती कचरे का जैव-खनन है, जिसमें विरासती कचरे की अनुमानित मात्रा: 40 लाख मीट्रिक टन है, जिसके मई 2024 तक पूरा होने की उम्मीद है।
उन्होंने ‘टॉक टू द मेयर’ केएमसी द्वारा की गई अनूठी पहल बताया । एमसीसीआई के अध्यक्ष नमित बाजोरिया ने कुशल, प्रभावी और न्यायसंगत नागरिक-उत्तरदायी सेवाओं का नेतृत्व करने में आयुक्त द्वारा किए गए विशाल कार्य की सराहना की। काउंसिल ऑन इंफ्रास्ट्रक्चर एंड रियल एस्टेट, एमसीसीआई के अध्यक्ष मुनीश झाझरिया ने रियल एस्टेट परियोजनाओं की मंजूरी योजनाओं की वैधता, पश्चिम बंगाल में एसईजेड की अनुपस्थिति जैसे कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर बात की । उन्होंने योजना की वैधता को मौजूदा 5 साल से बढ़ाकर 6 साल करने पर विचार करने का सुझाव दिया। उन्होंने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन में निजी कंपनियों के लिए अवसरों के बारे में जानकारी ली। अस्पताल का कचरा, प्लास्टिक रीसाइक्लिंग ये सभी प्रबंधन के साथ-साथ व्यवसाय के भी बड़े क्षेत्र हैं। उन्होंने कहा कि केएमसी के साथ समन्वय में निजी क्षेत्र इन कचरे के उपयोगी परिवर्तन में बहुत कुछ कर सकता है। सत्र का समापन एमसीसीआई के इंफ्रास्ट्रक्चर एंड रियल एस्टेट काउंसिल के सदस्य, श्री अमित सारदा द्वारा प्रस्तावित हार्दिक धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ।

 

एमसीसीआई में मनाया गया विश्व एमएसएमई दिवस

कोलकाता । मर्चेन्ट्स चेम्बर ऑफ कॉमर्स में हाल ही में विश्व एमएसएमई दिवस मनाया गया । इस अवसर एमसीसीआई द्वारा एक परिचर्चा आयोजित की गयी तथा 5 एमएसएमई सदस्य-इकाइयों को उनकी उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया गया । परिचर्चा में एमएसएमई को भविष्य के लिए तैयार करने पर चर्चा की गयी ।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में केन्द्रीय एमएसएमई मंत्रालय के के सहायक निदेशक (ग्रेड – 1) गौतम पोद्दार उपस्थित थे । इसके साथ ही राज्य के एमएसएमई एवं टेक्सटाइल विभाग के संयुक्त निदेशक (पी एंड एस) एवं एमसीसीआई की एमएसएमई हेल्प डेस्क के चीफ मेंटर राजकुमार मिद्या, सिडबी के सह महाप्रबन्धक चिरंजीत मंडल, एनएसआईसी लिमिटेड के मुख्य महाप्रबन्धक विपुल बाग, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के सीनियर मैनेजर (प्राइमरी मार्केट रिलेशनशिप) अभिक गुप्ता एवं इंडिया एक्जिम बैंक के सह महाप्रबन्धक अनिरुद्ध बरुआ भी उपस्थित थे ।
केन्द्रीय एमएसएमई मंत्रालय के के सहायक निदेशक (ग्रेड – 1) गौतम पोद्दार ने कहा कि एमएसएमई मंत्रालय ने उद्यमियों को प्रोत्साहित करने के लिए कई योजनाएं आरम्भ की हैं । इनमें से एमएसएमई चैम्पियन योजना उद्यमियों को उनकी उत्कृष्टता प्रमाणित करने का अवसर देती है। एमएसएमई में ब्रांडिंग पर जोर देना जरूरी है । इसके लिए सरकार योजनाओं के लाभार्थियों को 4.5 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता भी दे रही है । उन्होंने रक्षा क्षेत्र के उद्यमियों के लिए जेड प्रमाणीकरण की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि औद्योगिक मेलों में भाग लेने के लिए भी उद्यमियों को सहायता प्रदान की जा रही है ।
पोद्दार ने कहा कि भारत में एमएसएमई के तहत उद्यम पोर्टल पर फिलहाल 2 करोड़, 1 लाख, 337 हजार एमएसएमई पंजीकृत हैं । पश्तिम बंगाल पंजीकरण के मामले में दूसरे स्थान पर हैं । यहाँ 5 लाख 83 हजार 397 एमएसएमई पंजीकरण हैं ।
एमसीसीआई के अध्यक्ष नमित बाजोरिया ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि वर्तमान में, एमएसएमई क्षेत्र द्वारा निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका का जश्न मनाने और इसके बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा नामित विश्व एमएसएमई दिवस मनाया जा रहा है। सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) की दिशा में इस क्षेत्र का जबरदस्त योगदान।
इस अवसर पर सम्मानित होने वालों में हिंडकॉन केमिकल्स, निवेदन फूड्स एंड ब्रेवरेज एलएलपी, रौनक कॉयर्स, सुविधा कंसल्टेंट्स एवं पीडीएस इन्फोटेक लिमिटेड शामिल थे ।
एमसीसीआई के एमएसएमई परिषद के कोषाध्यक्ष और अध्यक्ष, संजीव कोठारी ने भी सत्र को सम्बोधित किया । धन्यवाद ज्ञापन एमसीसीआई की एमएसएमई काउंसिल के सह चेयरमैन अखिल सोंथलिया ने किया ।

नहीं रहीं जयपुरिया कॉलेज के हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. रेखा सिंह

कोलकाता । जयपुरिया कॉलेज के हिंदी विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. रेखा सिंह ने तकरीबन डेढ़ साल तक कैंसर का साहस के साथ मुकाबला करते हुए 25 जून 2023 को तकरीबन साढ़े तीन बजे अंतिम सांस ली।
1993 में कलकत्ता विश्वविद्यालय से हिंदी में स्नातकोत्तर की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद तकरीबन 26-27 सालों से जयपुरिया कॉलेज में अध्यापन कर रहीं थीं। छात्र जीवन से ही राजनीति में अत्यंत सक्रिय थीं और छात्र यूनियन की महासचिव के रूप कार्य किया था। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी की सक्रिय सदस्य के रूप में जोड़ासांकू से 2006 का एसेंबली चुनाव भी लड़ा था। दिवंगत रेखा सिंह एक लोकप्रिय शिक्षिका थीं और अपने विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा स्तंभ थीं। साहस, निर्भीकता और बेबाकी की जीवंत मिसाल रेखा सिंह का इस तरह असमय चले जाना शिक्षा जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। हजारों विद्यार्थियों के हृदय में प्रेरक और स्नेहिल शिक्षक के रूप में उनकी छाप हमेशा बनी रहेगी।
वह आजीवन वाम राजनीति की समर्थक रहीं और हर अन्याय के ख़िलाफ़ आवाज़ बुलंद करती हैं। कोलकाता का साहित्य – सांस्कृतिक जगत उन्हें खोकर शोक संतप्त है और अपनी हार्दिक संवेदना व्यक्त करता है।

संस्कृतिकर्मी-रंगकर्मी श्रीप्रकाश गुप्ता का आकस्मिक निधन

कोलकाता । कोलकाता के चर्चित संस्कृतिकर्मी-रंगकर्मी श्रीप्रकाश गुप्ता के आकस्मिक निधन से साहित्य जगत में शोक की लहर छा गई।17 जून की आधी रात को ह्रदयाघात के कारण उनकी मृत्यु हो गई।अगले दिन उनकी अंत्येष्टि संपन्न हुई जिसमें हजारों लोग शामिल थे ।हुगली कोन्नगर के निवासी श्रीप्रकाश गुप्ता का सृजनात्मक क्षेत्र कोलकाता तक फैला था।सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन के वरिष्ठ सदस्य होने के साथ वे प्रगति शोध संस्थान के संस्थापक थे ।वे कोलकाता और हावड़ा की कई संस्थाओं में सक्रिय थे।स्टडी मिशन के जरिए वे शिक्षा के क्षेत्र में काफी सक्रिय थे।रंगकर्मी श्रीप्रकाश शुक्ल ने 21 मई को ‘फौज के हवाले शहर’ में अपने आखिरी नाटक में शानदार अभिनय किया।उन्होंने दर्जनों नाटकों एवं कई फिल्मों में अभिनय किया है।उनकी नाटक पर तीन पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं।वे 8 जुलाई 2023 को भारतीय भाषा परिषद में ‘समकालीन हिंदी कथा साहित्य में किन्नर विमर्श’ विषय पर एक अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी एवं पुस्तक प्रकाशन की योजना की तैयारी में लगे थे।श्रीप्रकाश गुप्ता अपने पीछे मां,भाई सत्यप्रकाश पत्नी पुष्पा गुप्ता , पुत्री शालिनी एवं प्राची और पुत्र साहिल को छोड़ गए।प्रसिद्ध आलोचक शंभुनाथ ने उनकी मृत्यु को पारिवारिक क्षति के साथ एक बड़ी सामाजिक क्षति माना।उनके आकस्मिक निधन पर राज्यभर से सैकड़ों,विद्वानों,कलाकारों एवं लेखकों ने शोक प्रकट किया।

ये वक्त जा रहा है….सुरेंद्र प्रताप सिंह को याद करते हुए

सुधा अरोड़ा

वरिष्ठ साहित्यकार सुधा अरोड़ा का हिन्दी साहित्य जगत का महत्वपूर्ण चेहरा हैं । इनका जन्म 1946  विभाजन पूर्व लाहौर में हुआ । कहानी, आलेख, स्तंभ-लेखन, रेडियो, दूरदर्शन, टी.वी. धारावाहिक, फ़िल्म पटकथा लेखन  द्वारा अपनी सृजनात्मकता का परिचय देते हुए , वे सदैव अपने सामाजिक सरोकारों को लेकर मुखर रही हैं । स्त्री विमर्श को नया आयाम देते हुए महिलाओं से जुड़े प्रत्येक मुद्दे पर वे लिखती हैं और सामाजिक तथा महिला संगठनों  के मंच से उन मुद्दों को अपनी आवाज़ भी देती हैं ।

वरिष्ठ पत्रकार सुरेन्द्र प्रताप सिंह, हिन्दी पत्रकारिता को धार देने वाले सुरेन्द्र प्रताप सिंह, हिन्दी टीवी पत्रकारिता के प्रति युवाओं में आकर्षण लाने वाले सुरेन्द्र प्रताप सिंह.. पत्रकारिता का स्तम्भ हैं । उनको गये 26 साल हो गये । अपने चाहने वालों के एस. पी. आज भी हर पत्रकार के लिए आदर्श हैं…ये थी खबरें आज तक…ये पँक्तियाँ आज भी कानों में गूंजती हैं । आज 27 जून को पुण्यतिथि है और शुभजिता आभार व्यक्त करती है, वरिष्ठ कथाकार, साहित्यकार सुधा अरोड़ा जी का जिन्होंने यह महत्वपूर्ण आलेख हमें प्रकाशित करने का अवसर दिया… सुरेन्द्र प्रताप सिंह एवं सुधा अरोड़ा जी, दोनों ही कलकत्ता विश्वविद्यालय के विद्यार्थी रहे हैं और यह संस्मरण एक थाती है पत्रकारों के लिए भी, पत्रकारिता जगत में प्रवेश के इच्छुक युवाओं के लिए भी । एक बार फिर लेखिका का आभार व्यक्त करते हुए आज सुरेन्द्र प्रताप सिंह की पुण्यतिथि पर यह आलेख श्रद्धांजलि स्वरूप आपके लिए….

सुषमा त्रिपाठी कनुप्रिया

सम्पादक, शुभजिता

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जिंदगी के मकसद को लेकर कृष्णचन्दर ने अपने आप से सवाल पूछा था- ‘अपनी जिंदगी में तुमने क्या किया ? किसी दोस्त को नेक सलाह दी ? किसी से सच्चे दिल से प्यार किया? जहॉं अंधेरा था, वहां रोशनी की किरण ले गए ? जितनी देर तक जिए, इस जीने का मतलब क्या था…..?’ इन सारे सवालों का उत्तर जिस शख़्स ने जिंदगी की
आखिरी सांस तक एक सकारात्मक ’हां’ में दिया, वह शख़्स था सुरेंद्र प्रताप सिंह ।

सुरेंद्र प्रताप सिंह यानी एस पी सिंह ! इतनी कम उम्र की जिंदगी में उसके जीने का एक खास मकसद था। उस मकसद से दाएं-बाएं वह कभी नहीं चला। ’महानगर’ का स्तंभ ’आकलन’ हो या राजनेताओं से साक्षात्कार — अर्जुन के लक्ष्य की तरह वह मछली की आंख को ही निशाना बनाता रहा। वह जिसके न होने की खबर ’आज तक’ में आई सारी खबरों से ज्यादा दर्दनाक और भयावह खबर थी जिसे संजय पुगलिया ने भर्राए गले और सूनी आंखों से ’आज तक’ के करोड़ो दर्शकों तक पहुंचाया। इससे पहले तक कहीं यह उम्मीद बनी हुई थी कि अपने जीवट और इच्छा शक्ति के बूते पर वह यह लड़ाई भी जीत लेगा।

सुरेंद्र प्रताप को याद करते हुए कलकत्ता विश्वविद्यालय के मद्धिम सी रोशनी वाले अंधेरे गलियारे स्मृति में ताज़ा हो रहे हैं। अहिंदी भाषी प्रदेश का बेहद नामी हिंदी विभाग ! तीस (अब पचपन) साल पहले 1967 में जहां से मैंने एम.ए. किया ! मेरे अगले बैच 68 में शंभुनाथ और सुरेंद्र प्रताप थे। खादी के कुरते झोले, घिसी हुई पैंट के साथ हवाई चप्पल चटकाते हुए हिंदी विभाग के छात्र या तो छायावादी प्रेम कविताएं लिखते थे या राजनीति विभाग के मार्क्सवादी युवा नेता कमलेन्दु गांगुली के इर्द-गिर्द घूमते थे। सुरेंद्र प्रताप दूसरी श्रेणी में आते थे।
कलकत्ता वि.वि. के हिंदी विभाग की यह असाधारण खूबी थी कि वहां के छात्र बरसों बाद भी आपस में मिलते तो अंतरंगता की एक डोर जुड़ी हुई महसूस करते थे।

अच्छा लेखक -पत्रकार- कवि एक बहुत अच्छा और नेक इंसान भी हो, यह एक दुर्लभ कॉम्बीनेशन है। सुरेंद्र प्रताप एक सफल पत्रकार बने पर उसके साथ-साथ एक ईमानदार, साफ गो और संवेदनशील इंसान भी बने रहे। हालांकि उनकी ’लुक’ हमेशा एक अक्खड़ और फक्कड़ इंसान की थी जो अक्सर कम बोलता था पर साथ ही मुंहफट भी था और कई बार बड़ी चुभती हुई बात कहकर हर्ट भी कर देता था।

1983 या 84 की बात है — जब सुरेंद्र प्रताप अपने ‘रविवार‘ के सहयोगियों के बीच एस.पी. के नाम से जाने जाते थे। हमें बंबई से कलकत्ता गए साल भर भी नहीं हुआ था, एसपी ने कमलेश्वर की कथायात्रा को लेकर हुए एक विवाद पर ‘रविवार‘ की आमुख कथा के लिए बहुत सारी सामग्री जुटाई थी। उसे लेकर मैं जब एसपी से मिली तो बोले- ‘विश्वास नहीं होता, आप वही सुधा अरोड़ा हैं जो एम.ए. की कक्षा में बैठकर कहानियां लिखती थीं।‘ बात का व्यंग्य मेरी समझ में आ रहा था। मेरा लेखन कुछ सालों से बाधित था।
मैंने कहा – ‘घर में एक ही आदमी कहानियां लिख सकता है।‘
शिशिर गुप्ता (मोहनलाल गुप्त उर्फ भैयाजी बनारसी के छोटे पुत्र) ने मजाक किया- ‘कथाकार से शादी करने का यही हश्र होता है।’
एसपी ने ठहाका लगाया ‘इसीलिए मैंने शादी नहीं की।‘
मैंने अपनी पुरातनपंथी सोच के तहत कहा-‘आपको शादी कर लेनी चाहिए। होमफ्रंट अपने आप संभल जाएगा, आप सिर्फ ‘रविवार‘ संभालिए।‘
एसपी चश्मे के नीचे से झांकती शरारती आंखों से बोले – पर ‘घर’ चलाना तो पड़ेगा । शादी के बाद सारा स्ट्रगल धरा रह जाएगा। पत्रकार तो सारी जिंदगी स्ट्रगल करता है।‘

और सचमुच एसपी ने जिस समर्पित भाव से ‘रविवार‘ निकाला, उसने पत्रकारिता का रुख ही मोड़ दिया। उन दिनों ‘रेणु का भारत‘ से लेकर ‘रविवार‘ की अधिकांश आमुख कथाएं विस्फोटक होती थीं। एसपी ने राजनीति में लड़ाकू और खोजी पत्रकारिता का श्रीगणेश किया। हम लोगों को ‘रविवार‘ से अक्सर शिकायत रहती कि उसने अच्छा साहित्य छापने के बावजूद साहित्य को हाशिए पर डाल रखा है। लेकिन एसपी आश्वस्त थे कि हिंदी के पाठक की किस्सा-कहानी से ज्यादा दिलचस्पी राजनीति के गलियारों की सच्ची खबरों में है। ’रविवार‘ लोकप्रियता के चरम पर था तो एसपी ने उसे छोड़ा, फिर नभाटा से जुड़ गए, पर संघर्ष का रास्ता नहीं छोड़ा। न कभी समझौता किया, न दल बदला। राजनीति के गलियारे में घुसकर भी अपने लिए सुविधाएं नहीं जुटाई। शायद इसीलिए ‘आज तक‘ में उनकी सीधी-सादी, आम आदमी की भाषा ने करोड़ो हिंदी भाषियों को एक सूत्र में जोड़ दिया।

जिन दिनों जी टीवी की खबरों और दूरदर्शन के फिल्मी गीतों के कार्यक्रमों में संचालक हिंदी की जगह एक नई ‘हिंग्रेजी‘ या ‘हिंग्लिश‘ बड़ी शान से इस्तेमाल कर रहे थे और हिंदी वाले लुटे-पिटे अपनी भाषा के अपमान पर सामूहिक विलाप कर रहे थे, ‘आज तक‘ ने बोलचाल की हिंदी भाषा का नया मुहावरा गढ़ा।
एस पी के उस खास अंदाज के मुरीद बच्चे भी थे । ‘आज तक‘ की खबरें खत्म होने के साथ-साथ हमारे बेहद प्रिय वरिष्ठ रचनाकार डॉ धर्मवीर भारती के नाती अंशुमान को वह जाना- पहचाना जुमला अपनी तोतली जबान से दोहराते कई बार मैंने सुना – ‘ये थीं खबरें आज तक, इंतजार कीजिए कलतक।‘

मौत ने एसपी के संघर्ष पर, समर्पित भाव से, डूबकर काम करने के उसके तौर-तरीकों पर पूर्ण विराम लगा दिया। खबरों को ढूंढने -संवारने – सजाने प्रस्तुत करने के उनके जुनून ने उन्हें अपनी ओर झांकने का शायद मौका ही नहीं दिया।

राहुल देव ने कहा -‘शिखर पर पहुंचा हर आदमी अकेला होता है।‘ उसके आसपास भीड़ होती है पर उसके काम का तनाव, उसके व्यक्तिगत दुख को बांटने वाले कम होते जाते हैं।
हर बार किसी परिचित, नजदीकी मित्र की मौत मुझे नए सिरे से जिंदगी की अहमियत का क्रूर अहसास दिला जाती है कि वह, जो उसके पास नहीं रही लेकिन हमारे पास है, इससे पहले कि उस अदृश्य ताकत के पंजे हमें दबोचें, हम इस चार दिन की छोटी-सी जिंदगी में कुछ अर्थपूर्ण कर जाएं न कि जोड़-तोड़, दांव-पेंच, छल-प्रपंच, अपने
लिए सीढ़ियां बनाने और दूसरों की जड़ें काटने में इसे गंवा बैठें।

एसपी ने ठीक ही कहा था-‘जिंदगी तो अपनी रफ्तार से चलती ही रहती है।‘
चाहती हूं कि जिंदगी की तेज रफ्तार मौत के चिरंतन सत्य के न ढांपे और यह सबक देर तक हमारा साथ दे –

किसके लिए रुका है,
किसके लिए रुकेगा
करना है जो भी कर ले,
ये वक्त जा रहा है….. !!

(जनसत्ता : जुलाई 1997 को वामा स्तंभ में प्रकाशित)

वाजा महिला इकाई, कोलकाता द्वारा युवाओं को लेकर वेबिनार

युवाओं के सपने और उम्मीदें था विषय

कोलकाता । राइटर्स एंड जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन महिला इकाई कोलकाता और नई पीढ़ी पत्रिका द्वारा समस्याओं के बीच युवाओं के सपने और उम्मीदें विषय पर वेबिनार का आयोजन किया गया। अॉन-लाइन पर हुए इस वेबिनार में डॉ रेखा नारिवाल शिक्षा विभागाध्यक्ष, भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज, कोलकाता, रागिनी शर्मा प्रसाद अधिवक्ता, योग प्रशिक्षक, लेखिका उदयपुर, डॉ दीपाली सिंघी प्रिंसिपल, जे.डी बिरला इंस्टीट्यूट, कोलकाता, डॉ निधी गर्ग मनोविश्लेषक, भुवनेश्वर, ओडिशा ने विशिष्ट वक्ता के रूप में अपना वक्तव्य दिया।
कार्यक्रम के अध्यक्ष छपते छपते हिंदी दैनिक कोलकाता और पश्चिम बंगाल के हिंदी चैनल ताजा टीवी के डायरेक्टर वरिष्ठ संपादक विश्वंभर नेवर रहे। संचालन किया डॉ वसुंधरा मिश्र ने
कार्यक्रम का आरंभ करते हुए राइटर्स एंड जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन इंडिया और नयी पीढ़ी के संस्थापक महासचिव शिवेन्द्र प्रकाश द्विवेदी ने संस्था के उद्देश्यों पर बात रखी। डॉ रेखा नारिवाल ने कहा कि आज भारत में 25 वर्ष के युवाओं की जनसंख्या लगभग 50 प्रतिशत है। महिला सशक्तिकरण और मानसिकता में बदलाव आया है। समाज में नाइट क्लब, ड्रग्स की ओर झुकाव अधिक हो रहा है। आज की समस्याओं में सशक्तीकरण, यौन संबंधों के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार व्यक्त करते हुए युवाओं को भावनात्मक पोषण देने का सुझाव भी दिया। डॉ दीपाली सिंघी ने मूल रूप से युवाओं की समस्याओं पर अपनी बात रखी। अभिभावकों, शिक्षक, और बच्चों तीनों को इस पर विचार करना चाहिए। आज बच्चों को बिना किसी प्रयास से ही सब कुछ सहज ही मिल जाता है। कोर्पोरेट परिवेश के स्वरूप पर प्रकाश डाला। रागिनी शर्मा प्रसाद ने बच्चों में पनपते हुए अपराधिक मामलों पर चर्चा की। सृजनात्मकता और सकारात्मक दृष्टि अपनाने के साथ साथ अपनी आंतरिक शक्ति को पहचानने की आवश्यकता है। डॉ निधी गर्ग ने बताया कि आज एक से पांच की संख्या में कोई न कोई युवा पीढ़ी मानसिक रोगी है जिसका परिणाम आत्महत्या, अकेलापन और खराब पारिवारिक वातावरण है। बच्चों पर 90प्रतिशत रिजल्ट लाने का दवाब है और वे तनाव तनावपूर्ण स्थिति में रहते हैं। संवाद खत्म हो गए हैं। प्रेम संबंध भी स्वस्थ नहीं हैं।
डॉ मंजूरानी गुप्ता ने प्रश्न पूछते हुए कहा कि शिक्षा में नैतिक शिक्षा को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए। डॉ सुषमा हंस ने उत्तर देते हुए बच्चों पर दवाब कम से कम देने की मांग की। उषा श्राफ, सुषमा त्रिपाठी, अंजू सेठिया, पूनम त्रिपाठी ने अपनी बात रखी। अध्यक्षीय वक्तव्य में विश्वंभर नेवर ने कहा कि विषय बहुत ही महत्वपूर्ण और समसामयिक है ।आज युवा भारत की गिनती में भारत आता है। यह विविधता का देश है। सरकार के पास युवाओं के लिए कोई योजना नहीं है। प्रशासन से इसकी मांग करना चाहिए जिससे युवाओं की प्रतिभा को सही दिशा मिले। आज लड़कियों का झुकाव भी केवल कोर्पोरेट में रुचि, सीए सीइओ बनने की ओर अधिक है। लड़कियों को अन्य विषय में भी शिक्षा लेनी चाहिए।
आज समाज के बदलते परिवेश में युवा पीढ़ी विभिन्न समस्याओं के बीच किस प्रकार अपने सपनों और उम्मीदों को लेकर चिंतित हैं और उन्हें किस प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है?, क्या वे अपने निर्णय स्वयं लेकर भी संतुष्ट नहीं हैं?,क्या माता पिता का दायित्व केवल आर्थिक मदद तक ही सीमित हो गया है?, क्या भारतीय मूल्यों और आदर्शों के अनुरूप युवाओं को सम्मान मिल रहा है?, युवाओं में अपराध और आत्महत्याओं के बढ़ने का क्या कारण है?, यौनाचार और बलात्कार और हत्या जैसे विषयों को मीडिया में यूट्यूब पर बार बार दिखाते रहते हैं, लुभावने शीर्षकों और मसालेदार चटपटे बयानों को घुमाते रहते हैं, जो ऊबाऊ हो जाते हैं। फिर उस खबर की अहमियत खोने लगती है सुनने वाली जनता दूसरी स्टोरी खोजने लगती है। विभिन्न समस्याओं के बीच युवाओं के सपने और उम्मीदें विषय पर संवाद होने की आवश्यकता को सभी वक्ताओं और सुधी श्रोताओं ने स्वागत किया। साहित्यिकी, अर्चना, भारत जैन महामंडल लेडिज विंग, शुभ सृजन आदि संस्थाओं की महत्वपूर्ण सदस्याओं की उपस्थिति रही। कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन शिवेंद्र प्रकाश द्विवेदी और डॉ वसुंधरा मिश्र ने संचालन किया ।

भारतीय संस्कृति गुरु – शिष्य परंपरा पर आधारित दिव्य नृत्य संध्या 

कोलकाता । प्राचीन काल से ही भारतीय संस्कृति में गुरु-शिष्य परंपरा का महत्वपूर्ण स्थान रहा है। गत 15 जून को कोलकाता के दर्शकों ने ज्ञान मंच सभागार में नृत्य माध्यम से एक दिव्य आध्यात्मिक शाम का आयोजन हुआ।
आचार्य अनुसूया घोष बनर्जी ने अपनी शिष्या श्रीमती संचयिता मुंशी साहा के साथ “एकात्म-सर्वोच्च आनंद की ओर एक यात्रा” शीर्षक से युगल नृत्य प्रस्तुति दी जो आज के युग में एक मिसाल है । कार्यक्रम के आरंभ में आदि शंकराचार्य द्वारा रचित काशी काल भैरव अष्टकम पर आधारित नृत्य से हुआ , इसके पश्चात प्रसिद्ध मराठी अभंग “मन मंदिरा” में साधक और साधना की भूमिका को दर्शाया गया। अगले श्रृंखला का नृत्य वर्णम चारुकेसी राग पर आधारित रहा जो जीवात्मा की परमात्मा के साथ विसर्जन की निरंतर भूमिका का वर्णन करता है। गुरु और शिष्य दोनों ने ही मंच पर अपनी उत्कृष्ट कला का प्रदर्शन किया। इसके बाद त्यागराज कृति “नीदु चरणमुले” ने आचार्य अनुसूया घोष बनर्जी द्वारा आध्यात्मिक गहराई और दिव्यता के साथ सबरी की कहानी सुनाई। इस मनोहर संध्या की अंतिम प्रस्तुति पलानी थिलाना और टैगोर की “आनंद धारा” थी जो जीवन के शाश्वत प्रवाह को आगे बढ़ाती है।
इस नृत्य प्रस्तुति में श्री सुकुमार जी कुट्टी (गायन), मलय डे (मृदंगम), शाहरुख अहमद (तबला), विशाल जी (वायलिन), शेखर दा (बांसुरी), राजीव खान (नट्टुवंगम), देबज्योति (रवींद्र संगीत) ने संगीतमय सहयोग दिया। यह आयोजन नृत्यक्षेत्र एकेडमी ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स द्वारा नृत्यभाष एकेडमी ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट के सहयोग से किया गया था। कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।

आईसीएआई के बोर्ड ऑफ स्टडीज (ऑपरेशंस) द्वारा सीए छात्रों हेतु राष्ट्रीय सम्मेलन

कोलकाता । ईस्टर्न इंडिया रिजनल काउंसिल (ईआईआरसी) और ईस्टर्न इंडिया चार्टर्ड अकाउंटेंट्स स्टूडेंट्स एसोसिएशन (ईआईसीएएसए) द्वारा संयुक्त रूप से स्टूडेंट्स स्किल इनरिचमेंट बोर्ड, आईसीएआई के तत्वावधान में रिस्किल, रिसॉल्व और रिजॉइस ‘आरआरआर’ विषय पर सीए छात्रों के लिए कोलकाता के साइंस सिटी ऑडिटोरियम में 24 और 25 जून, को दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया।

इस क्षेत्र में लंबे समय से सफलता का मुकाम हासिल करनेवाले वक्ताओं ने अपने वक्तव्य में अपने अनुभवों को शेयर किया। जिसमें अफ्रीका और लद्दाख में विशेष सलाहकार मेड इन इंडिया फॉर द वर्ल्ड डॉ. दीपक वोहरा, बोट के सीएमओ सीए अमन गुप्ता, प्रेरक वक्ता जया किशोरी, विश्व के सबसे कम उम्र के हेडमास्टर बाबर अली, सबसे कम उम्र में सीए बनने वाली सीए नंदिनी अग्रवाल ने अपने अनुभवों को साझा किया ।

आईसीएआई के उपाध्यक्ष सीए रणजीत कुमार अग्रवाल, सीए (डॉ.) देबाशीष मित्रा (पूर्व अध्यक्ष, आईसीएआई), सीए सुशील कुमार गोयल (कार्यक्रम निदेशक और परिषद सदस्य, आईसीएआई), सीए मंगेश किनारे (स्किल इनरिचमेंट बोर्ड, आईसीएआई के अध्यक्ष, केंद्रीय परिषद सदस्य), सीए दयानिवास शर्मा, सीए विशाल दोशी, सीए चरणजोत सिंह नंदा, सीए अभय कुमार छाजेड़, सीए देबायन पात्रा (आईसीएआई के पूर्वी भारत क्षेत्रीय परिषद, ईआईआरसी के अध्यक्ष), सीए संजीब सांघी (ईआईआरसी के ईआईसीएएसए के वाइस चेयरमैन) के साथ क्षेत्रीय परिषद के पदाधिकारियों और सदस्यों की टीम इस मौके पर मौजूद थी।

इस तरह के सम्मेलन के आयोजन ने देश भर के चार्टर्ड अकाउंटेंसी पाठ्यक्रम के छात्रों को सीए छात्रों के रूप में उनके हित के लिए मिलने और उनके बारे में चर्चा करने का अवसर प्रदान किया। इस मौके पर देशभर से आये पेपर प्रस्तुतकर्ताओं ने अपने पेपर प्रस्तुत किये। विशिष्ट क्षेत्रों के प्रसिद्ध वक्ताओं को लेकर उनके अबतक के अनुभवों को छात्रों के बीच साझा करने के लिए विशेष सत्र का आयोजन किया गया था। इसमें वक्ताओं ने विविध पेशेवर और प्रेरक विषयों पर बातें कर यहां मौजूद छात्रों का मार्ग प्रशस्त किया।