वाजा महिला इकाई, कोलकाता द्वारा युवाओं को लेकर वेबिनार

युवाओं के सपने और उम्मीदें था विषय

कोलकाता । राइटर्स एंड जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन महिला इकाई कोलकाता और नई पीढ़ी पत्रिका द्वारा समस्याओं के बीच युवाओं के सपने और उम्मीदें विषय पर वेबिनार का आयोजन किया गया। अॉन-लाइन पर हुए इस वेबिनार में डॉ रेखा नारिवाल शिक्षा विभागाध्यक्ष, भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज, कोलकाता, रागिनी शर्मा प्रसाद अधिवक्ता, योग प्रशिक्षक, लेखिका उदयपुर, डॉ दीपाली सिंघी प्रिंसिपल, जे.डी बिरला इंस्टीट्यूट, कोलकाता, डॉ निधी गर्ग मनोविश्लेषक, भुवनेश्वर, ओडिशा ने विशिष्ट वक्ता के रूप में अपना वक्तव्य दिया।
कार्यक्रम के अध्यक्ष छपते छपते हिंदी दैनिक कोलकाता और पश्चिम बंगाल के हिंदी चैनल ताजा टीवी के डायरेक्टर वरिष्ठ संपादक विश्वंभर नेवर रहे। संचालन किया डॉ वसुंधरा मिश्र ने
कार्यक्रम का आरंभ करते हुए राइटर्स एंड जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन इंडिया और नयी पीढ़ी के संस्थापक महासचिव शिवेन्द्र प्रकाश द्विवेदी ने संस्था के उद्देश्यों पर बात रखी। डॉ रेखा नारिवाल ने कहा कि आज भारत में 25 वर्ष के युवाओं की जनसंख्या लगभग 50 प्रतिशत है। महिला सशक्तिकरण और मानसिकता में बदलाव आया है। समाज में नाइट क्लब, ड्रग्स की ओर झुकाव अधिक हो रहा है। आज की समस्याओं में सशक्तीकरण, यौन संबंधों के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार व्यक्त करते हुए युवाओं को भावनात्मक पोषण देने का सुझाव भी दिया। डॉ दीपाली सिंघी ने मूल रूप से युवाओं की समस्याओं पर अपनी बात रखी। अभिभावकों, शिक्षक, और बच्चों तीनों को इस पर विचार करना चाहिए। आज बच्चों को बिना किसी प्रयास से ही सब कुछ सहज ही मिल जाता है। कोर्पोरेट परिवेश के स्वरूप पर प्रकाश डाला। रागिनी शर्मा प्रसाद ने बच्चों में पनपते हुए अपराधिक मामलों पर चर्चा की। सृजनात्मकता और सकारात्मक दृष्टि अपनाने के साथ साथ अपनी आंतरिक शक्ति को पहचानने की आवश्यकता है। डॉ निधी गर्ग ने बताया कि आज एक से पांच की संख्या में कोई न कोई युवा पीढ़ी मानसिक रोगी है जिसका परिणाम आत्महत्या, अकेलापन और खराब पारिवारिक वातावरण है। बच्चों पर 90प्रतिशत रिजल्ट लाने का दवाब है और वे तनाव तनावपूर्ण स्थिति में रहते हैं। संवाद खत्म हो गए हैं। प्रेम संबंध भी स्वस्थ नहीं हैं।
डॉ मंजूरानी गुप्ता ने प्रश्न पूछते हुए कहा कि शिक्षा में नैतिक शिक्षा को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए। डॉ सुषमा हंस ने उत्तर देते हुए बच्चों पर दवाब कम से कम देने की मांग की। उषा श्राफ, सुषमा त्रिपाठी, अंजू सेठिया, पूनम त्रिपाठी ने अपनी बात रखी। अध्यक्षीय वक्तव्य में विश्वंभर नेवर ने कहा कि विषय बहुत ही महत्वपूर्ण और समसामयिक है ।आज युवा भारत की गिनती में भारत आता है। यह विविधता का देश है। सरकार के पास युवाओं के लिए कोई योजना नहीं है। प्रशासन से इसकी मांग करना चाहिए जिससे युवाओं की प्रतिभा को सही दिशा मिले। आज लड़कियों का झुकाव भी केवल कोर्पोरेट में रुचि, सीए सीइओ बनने की ओर अधिक है। लड़कियों को अन्य विषय में भी शिक्षा लेनी चाहिए।
आज समाज के बदलते परिवेश में युवा पीढ़ी विभिन्न समस्याओं के बीच किस प्रकार अपने सपनों और उम्मीदों को लेकर चिंतित हैं और उन्हें किस प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है?, क्या वे अपने निर्णय स्वयं लेकर भी संतुष्ट नहीं हैं?,क्या माता पिता का दायित्व केवल आर्थिक मदद तक ही सीमित हो गया है?, क्या भारतीय मूल्यों और आदर्शों के अनुरूप युवाओं को सम्मान मिल रहा है?, युवाओं में अपराध और आत्महत्याओं के बढ़ने का क्या कारण है?, यौनाचार और बलात्कार और हत्या जैसे विषयों को मीडिया में यूट्यूब पर बार बार दिखाते रहते हैं, लुभावने शीर्षकों और मसालेदार चटपटे बयानों को घुमाते रहते हैं, जो ऊबाऊ हो जाते हैं। फिर उस खबर की अहमियत खोने लगती है सुनने वाली जनता दूसरी स्टोरी खोजने लगती है। विभिन्न समस्याओं के बीच युवाओं के सपने और उम्मीदें विषय पर संवाद होने की आवश्यकता को सभी वक्ताओं और सुधी श्रोताओं ने स्वागत किया। साहित्यिकी, अर्चना, भारत जैन महामंडल लेडिज विंग, शुभ सृजन आदि संस्थाओं की महत्वपूर्ण सदस्याओं की उपस्थिति रही। कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन शिवेंद्र प्रकाश द्विवेदी और डॉ वसुंधरा मिश्र ने संचालन किया ।

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