–ब्रिटिश संगठन की रिपोर्ट में खुलासा
-आजादी से पहले 14.6 फीसदी थे
इस्लामाबाद । पाकिस्तान में हिंदुओं की आबादी अब सिर्फ 1.7 फीसदी रह गई है। ब्रिटिश हिंदू संगठन इनसाइट यूके की एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। 1941 में आज के पाकिस्तान में हिंदुओं की आबादी 14.6 फीसदी थी। रिपोर्ट में हिंदुओं की आबादी घटने की वजह हिंसा और धर्म परिवर्तन बताया गया। रिपोर्ट में कहा गया कि बंटवारे के समय और उसके बाद हजारों हिंदू परिवारों को अपना घर छोड़ना पड़ा। कई परिवारों की पुश्तैनी जमीन और खेत भी छिन गए। रिपोर्ट में धार्मिक स्वतंत्रता पर रोक और जबरन धर्म परिवर्तन के मामले भी उठाए गए हैं। संगठन ने ब्रिटिश सरकार से पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए कदम उठाने की मांग की है।
रिपोर्ट के मुताबिक, 1947 के बंटवारे के दौरान और उसके बाद हुई हिंसा के कारण हजारों हिंदू परिवार विस्थापित हुए। कई परिवारों ने अपनी पुश्तैनी जमीन और खेत खो दिए। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पाकिस्तान के एनिमी प्रॉपर्टी कानूनों के तहत इन संपत्तियों पर कब्जे से हिंदू समुदाय की आर्थिक स्थिति कमजोर हुई। पाकिस्तान में एनिमी प्रॉपर्टी यानी दुश्मन की संपत्ति उन मकानों, जमीनों या दूसरी संपत्तियों को कहा जाता है, जिन्हें सरकार ने भारत चले गए लोगों या दुश्मन देश के नागरिकों की संपत्ति मानकर अपने कब्जे में ले लिया है।
रिपोर्ट में पाकिस्तान के संविधान के अनुच्छेद 41 और 91 का जिक्र किया गया है। इनके तहत राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री का पद केवल मुस्लिम नागरिकों के लिए है। इन नियमों को बदलने के लिए 2019 में लाया गया सुधार विधेयक आगे नहीं बढ़ सका। संगठन ने यह भी कहा कि पाकिस्तान में पासपोर्ट बनवाते समय नागरिकों को अपना धर्म बताना पड़ता है। इस्लामाबाद में हिंदू मंदिर बनाने की योजना भी अब तक पूरी नहीं हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2020 में मंदिर निर्माण को मंजूरी मिलने के बाद इस्लामी संगठनों के विरोध के चलते काम रोक दिया गया था।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पाकिस्तान में हर साल करीब 1,000 या इससे ज्यादा हिंदू और ईसाई महिलाओं व लड़कियों का अपहरण होता है। आरोप है कि बाद में उनका जबरन धर्म परिवर्तन कराकर अपहरण करने वालों से शादी करा दी जाती है। इनमें कई नाबालिग गरीब परिवारों से होती हैं। उन्हें न्याय पाने में भी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
पाकिस्तान में बचे सिर्फ 1.7 फीसदी हिंदू
गंगासागर मेला क्षेत्र का दायरा बढ़ाएगी सरकार
कोलकाता । इस बार विश्व प्रसिद्ध गंगसागर मेले का दायरा और भी बड़ा होने जा रहा है। बढ़ती लोकप्रियता और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के अनुमान को देखते हुए राज्य सरकार ने मेले के क्षेत्रफल में लगभग छह लाख वर्ग फुट की बढ़ोतरी करने का फैसला किया है। नबान्न (राज्य सचिवालय) सूत्रों के अनुसार, अब तक यह मेला लगभग 12 लाख वर्ग फुट क्षेत्र में आयोजित होता था, लेकिन इस वर्ष इसका विस्तार कर इसे 18 लाख वर्ग फुट तक फैलाया जा रहा है।
मेला परिसर का दायरा बढ़ने से न केवल भीड़ को नियंत्रित करना आसान होगा, बल्कि श्रद्धालुओं की आवाजाही और उनके ठहरने के लिए अतिरिक्त ठिकाने, बस स्टैंड, हेलिपैड और नए यात्री निवास (रैन बसेरे) का भी निर्माण किया जा रहा है। इसके साथ ही, मुड़ीगंगा नदी पर प्रस्तावित पुल निर्माण कार्य में भी राज्य सरकार ने काफी प्रगति की है।
इस पवित्र तीर्थ को राष्ट्रीय मेले का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर राज्य सरकार ने एक बार फिर से आवाज बुलंद की है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने गंगसागर को रेल और सड़क संपर्क के दायरे में लाने के लिए पहले ही केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से अपील की है।
प्रशासनिक स्तर पर इस मेले को जल्द से जल्द राष्ट्रीय मान्यता दिलाने के लिए तेजी से प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य के लोक निर्माण मंत्री अजय पोद्दार ने इस संबंध में बताया, “केंद्र सरकार के साथ कई दौर की चर्चा हो चुकी है। हम आशान्वित हैं कि इसी साल हमें यह मान्यता मिल जाएगी।”
उल्लेखनीय है कि मुड़ीगंगा नदी पर पुल के निर्माण के साथ-साथ, गंगसागर मेले को देश के प्रमुख धार्मिक मेलों में से एक के रूप में स्थापित करने के लिए राज्य प्रशासन हर संभव प्रयास कर रहा है। इसी उद्देश्य से मेले में आधुनिक बुनियादी ढांचे और सुविधाओं का भी निरंतर विस्तार किया जा रहा है।
डिजिटल धोखाधड़ी में बैंक चूके तो करनी होगी नुकसान की भरपाई : सुप्रीम कोर्ट
नयी दिल्ली । डिजिटल गिरफ्तारी के बढ़ते मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने कहा कि डिजिटल धोखाधड़ी के पीड़ितों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए बैंकों को जवाबदेह बनाया जाना चाहिए। इस बीच, व्हाट्सएप ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उसने अब तक 9,400 संदिग्ध खातों को प्रतिबंधित किया है।
सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के केवाईसी संशोधन निर्देशों की जांच करने की बात कही है। ये निर्देश 31 दिसंबर तक लागू किए जाने हैं। न्यायालय ने यह भी साफ किया कि ग्राहकों के साथ धोखाधड़ी होने पर बैंकों का ग्राहकों के प्रति कर्तव्य है। उन्हें असामान्य लेनदेन के बारे में पड़ोसी पुलिस थानों को तुरंत सूचित करना चाहिए। यह कदम डिजिटल धोखाधड़ी से निपटने और पीड़ितों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए महत्वपूर्ण है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि बैंकों को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। धोखाधड़ी के मामलों में उनकी निष्क्रियता स्वीकार्य नहीं होगी। यह सुनिश्चित करना बैंकों की प्राथमिकता होनी चाहिए कि उनके ग्राहक सुरक्षित रहें। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि बैंकों द्वारा उचित सावधानी बरतने में विफलता के कारण किसी ग्राहक को डिजिटल धोखाधड़ी का सामना करना पड़ता है, तो वित्तीय संस्थानों को पीड़ित के नुकसान की पूरी भरपाई करनी होगी। मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने एक स्वतः संज्ञान याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि वित्तीय संस्थानों का यह प्राथमिक वैधानिक कर्तव्य है कि वे अपने ग्राहकों के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह काम करें। इस दौरान एमिकस क्यूरी, सीनियर एडवोकेट एनएस नप्पिनई ने कोर्ट को बताया कि लगातार कोशिशों के बावजूद स्कैम जारी हैं। उन्होंने हाल की एक घटना का जिक्र किया जिसमें एक महिला को 2.5 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। पीठ ने बैंकों के लिए अनिवार्य निवारक उपायों पर जोर देते हुए कहा कि खाताधारक के स्थापित ट्रांजैक्शन पैटर्न से विचलन करने वाले किसी भी अस्वाभाविक लेन-देन को तुरंत अस्थायी रूप से निलंबित किया जाना चाहिए। संदिग्ध गतिविधियों की स्वचालित रिपोर्टिंग और लेन-देन की प्रामाणिकता स्थापित करने के लिए भौतिक सत्यापन लागू किया जाए। ‘डिजिटल अरेस्ट’ के संदिग्ध शिकार बने ग्राहकों से जुड़े अस्वाभाविक लेन-देन के बारे में नजदीकी पुलिस स्टेशनों को तुरंत सचेत करना बैंकों की जिम्मेदारी होगी।
51वां रंग अड्डा में एक शाम अफसाना निगारों के साथ
कोलकाता । लिटिल थेस्पियन ने भारतीय भाषा परिषद के साथ 51वां रंग अड्डा: “एक शाम अफसाना निगारों के साथ” का आयोजन किया।, जिसमें हिंदी और उर्दू साहित्य जगत के दो प्रतिष्ठित कहानीकारों – श्रीमती कुसुम खेमानी और श्री फ़े. सीन. एजाज़- को एक साथ लाया गया। यह अड्डा 24 अक्टूबर 2026 को भारतीय भाषा परिषद के सभागार में आयोजित किया गया। यह एक ऐसी दोपहर थी जहाँ कहानियाँ लिखे हुए शब्दों से परे जाकर, प्रदर्शन के माध्यम से अभिव्यक्त हुईं और कलाकारों, समीक्षकों और दर्शकों के बीच एक सार्थक संवाद की शुरुआत हुई। पठन, चर्चा और नाट्य प्रस्तुतियों के माध्यम से, रंग अड्डा का उद्देश्य संवाद को प्रोत्साहित करना, साहित्यिक अभिव्यक्ति को बढ़ावा देना और साहित्य, प्रदर्शन और सामाजिक जीवन के बीच के संबंधों को तलाशना है। रंग अड्डा की शुरुआत लिटिल थेस्पियन की अध्यक्ष उमा झुनझुनवाला के स्वागत भाषण से हुई, जिसके बाद फ़े. सीन. एजाज़ का सम्मान किया गया और भारतीय भाषा परिषद के निदेशक डॉ. शंभुनाथ और भारतीय भाषा परिषद की बिमला पोद्दार ने संक्षिप्त भाषण दिए।यह रंग अड्डा दो सत्रों में आयोजित किया गया था, जिसमें पहले सत्र में कुसुम खेमानी की कहानी ‘घोंघा प्रसाद’ की नाट्य प्रस्तुति उमा झुनझुनवाला और गुंजन अजहर द्वारा की गई। इस कहानी का समीक्षात्मक विश्लेषण डॉ. रेशमी पांडा मुखर्जी (एसोसिएट प्रोफेसर, गोखले मेमोरियल गर्ल्स कॉलेज) और शब्बीर अहमद (उर्दू उपन्यासकार) द्वारा प्रस्तुत किया गया। यद्यपि कुसुम खेमानी स्वयं उपस्थित नहीं थीं, फिर भी उनकी उपस्थिति उनकी कहानी और मंच पर उसकी व्याख्या के माध्यम से गहराई से महसूस की गई। दूसरे सत्र में फ़े. सीन. एजाज़ की कहानी “हैवानों की ख़ुदकुशी पर एक बेज़ुबान संवाद” प्रस्तुत की गई, जिसका मंचन कविता कोठारी, हीना परवेज़, एनी दास, भावेश भगत, सत्यम पांडे, फिरोज़ हुसैन और मो. आसिफ़ अंसारी ने किया। इस कहानी का समीक्षात्मक विश्लेषण श्री कलीम हाज़िक (उर्दू कवि और समीक्षक) और डॉ. महमुदा ख़ानम (खिदिरपुर कॉलेज) ने किया। उन्होंने कहानियों, उनकी नाट्य व्याख्याओं और प्रदर्शन की बारीकियों पर अपने विचार साझा किए। धन्यवाद ज्ञापन उमा झुनझुनवाला और श्रीमती बिमला पोद्दार द्वारा दिया गया।
अब कोलकाता में भी पेस्ट्री ब्रांड ‘थियोब्रोमा’ की एंट्री
कोलकाता । मुंबई के मशहूर पेस्ट्री ब्रांड ‘थियोब्रोमा’ – जो अपनी खास ब्राउनी के लिए अलग पहचान रखती है, यह कंपनी शुक्रवार 30 अक्टूबर 2026 को कोलकाता में अपना पहला दो स्टोर खोलने जा रही है। यह स्टोर सॉल्टलेक और न्यू अलीपुर में स्थित हैं। इसकी घोषणा थियोब्रोमा के सीआओ ऋषि गौर ने की। स्टोर के उद्घाटन अवसर पर जानी मानी चर्चित अभिनेत्री सुौरसेनी मैत्रा भी मौजूद थीं। नए खुलने वाले दोनों स्टोर एक बेकरी के रूप में काम करेंगे, जहाँ बैठकर खाने (डाइन-इन), साथ ले जाने (टेकअवे) और डिलीवरी की सुविधा उपलब्ध होगी। यहाँ के मेन्यू में थियोब्रोमा के केक, पेस्ट्री, ब्राउनी, कुकीज, नमकीन स्नैक्स, सैंडविच और पेय पदार्थों की पूरी स्वादिष्ट रेंज मिलेगी, जिन्हें हर दिन ताजा बेक किया जाएगा। यहाँ की खास पेशकशों में ‘ओवरलोड’ और ‘मिलियनेयर’ ब्राउनी, डच ट्रफल और तिरामिसू शामिल हैं। इसके अलावा, त्योहारों के लिए खास गिफ्ट बॉक्स और हैम्पर भी स्टोर पर और डिलीवरी के जरिए उपलब्ध होंगे।
कोलकाता में मुंबई के इस प्रसिद्ध ब्रांड की लंबे समय से काफी ज्यादा मांग थी, जिसके चलते इसे यहाँ लॉन्च लिया गया। इस महीने की शुरुआत में सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें खुशियों के शहर कोलकाता शहर में थियोब्रोमा का साइनबोर्ड लगाये जाने के दृश्य सामने आए थे। इस मौके पर थियोब्रोमा के सीईओ ऋषि गौर ने कहा: कोलकाता के लोग काफी समय से थियोब्रोमा के यहाँ आने की मांग कर रहे थे, और हम यहाँ सिर्फ अपना बेहतरीन अनुभव ही लेकर आना चाहते थे।
जालान पुस्तकालय ने आयोजित की अंतर्विद्यालय प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता
कोलकाता । हिन्दी भाषा एवं व्याकरण के शास्त्रीय व व्यावहारिक स्वरूप के प्रति विद्यार्थियों में अनुराग सृजित करने के ध्येय से ‘अंतर्विद्यालय हिन्दी भाषा एवं व्याकरण ज्ञान प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता’ का आयोजन सेठ सूरजमल जालान पुस्तकालय के तत्वावधान में किया गया। इस आयोजन में कोलकाता महानगर के प्रतिष्ठित 7 विद्यालयों, सेठ सूरजमल जालान बालिका विद्यालय, आर्य कन्या महाविद्यालय, श्री दिगम्बर जैन बालिका विद्यालय, टांटिया हाई स्कूल, सावित्री पाठशाला, श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी विद्यालय एवं श्री बालकृष्ण बिट्ठलनाथ बालिका विद्यालय के विद्यार्थियों ने प्रतिभागिता की तथा हिंदी भाषा और व्याकरण पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दिए। दो वर्ग में आयोजित इस प्रतियोगिता के पहले वर्ग में सेठ सूरजमल जालान बालिका विद्यालय, श्री दिगम्बर जैन बालिका विद्यालय तथा सावित्री पाठशाला ने क्रमशः प्रथम, द्वितीय तथा तृतीय स्थान प्राप्त किया वहीं दूसरे वर्ग में सेठ सूरजमल जालान बालिका विद्यालय ने पुनः प्रथम, जैन श्वेताम्बर तेरापंथी विद्यालय ने द्वितीय एवं टांटिया हाई स्कूल ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
प्रतियोगिता में अजयेंद्रनाथ त्रिवेदी, डॉ. जयप्रकाश मिश्र, नीतू सिंह भदोरिया एवं दिव्या प्रसाद ने निर्णायक की भूमिका निभायी। निर्णायकों ने अपना वक्तव्य रखते हुए आयोजित प्रतियोगिता की प्रशंसा की और प्रतिभागी विद्यार्थियों के उत्साह की सराहना करते हुए उन्हें शुभकामनाएं दीं।
प्रतियोगिता की शुरूआत विवेक तिवारी द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुई। पुस्तकालय की मंत्री दुर्गा व्यास ने अतिथियों का स्वागत एवं प्रतिभागी विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया। आयोजन का कुशल संचालन डॉ कमल कुमार तथा प्रतियोगिता का संचालन (द्वय) शिखा झा एवं सृष्टि मिश्रा ने किया एवं पुस्तकाध्यक्ष श्रीमोहन तिवारी ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में राहुल उपाध्याय, माधव राय, लक्ष्मी जायसवाल एवं शनि की सराहनीय भूमिका रही।
बंगाल में जूनियर डॉक्टरों के लिए फेस बायोमीट्रिक अनिवार्य
– इन-आउट दोनों समय दर्ज होगी उपस्थिति
कोलकाता । सरकारी मेडिकल कालेजों में जूनियर डॉक्टरों की ड्यूटी बेचने और प्राक्सी ड्यूटी कराने के आरोपों के बाद राज्य का स्वास्थ्य विभाग सख्त हो गया है। अब मेडिकल कालेजों में इंटर्न, हाउस स्टाफ और पीजीटी डॉक्टरों की उपस्थिति दर्ज करने के लिए फेस आधारित बायोमीट्रिक व्यवस्था शुरू की जाएगी। इसके साथ ही डॉक्टरों की ड्यूटी पर नियमित निगरानी भी रखी जाएगी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे निर्धारित समय के अनुसार अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं या नहीं। स्वास्थ्य विभाग ने फिलहाल एसएसकेएम और एनआरएस मेडिकल कालेज में इस व्यवस्था को लागू करने का निर्णय लिया है। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से राज्य के अन्य सरकारी मेडिकल कालेजों में भी इसे लागू किया जाएगा। नई व्यवस्था के तहत जूनियर डॉक्टरों को ड्यूटी शुरू करने से पहले फेस बायोमीट्रिक के जरिए अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होगी। ड्यूटी समाप्त होने के बाद अस्पताल से निकलते समय भी बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज कराना अनिवार्य होगा। उपस्थिति की नियमित निगरानी संबंधित विभागों के प्रभारी करेंगे। इसके अलावा सभी इंटर्न, हाउस स्टाफ और पीजीटी डॉक्टरों को पहचान पत्र जारी किए जाएंगे। बायोमीट्रिक प्रणाली में नाम दर्ज कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से अधिसूचना जारी की जाएगी।
छुट्टी लेने की स्थिति में भी संबंधित डाक्टर को विभागाध्यक्ष को पहले से इसकी जानकारी देनी होगी। निर्धारित ड्यूटी रोस्टर का पालन, समय की पाबंदी और कार्यस्थल पर अनुशासन सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया है। दरअसल, सरकारी अस्पतालों में जूनियर डॉक्टरों की ड्यूटी बेचने का मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने यह कदम उठाया है। स्वास्थ्य मंत्री डा. शारद्वत मुखोपाध्याय के पास शिकायत पहुंची थी कि राज्य के कई सरकारी मेडिकल कालेजों में जूनियर डॉक्टरों की ड्यूटी की अदला-बदली के नाम पर कथित तौर पर पैसे का लेनदेन होता है। आरोप है कि इंटर्न डॉक्टरों के बीच ड्यूटी बदलने के लिए विशेष वाट्सएप ग्रुप भी संचालित किए जाते हैं। इन ग्रुपों में ड्यूटी के हिसाब से कथित तौर पर रेट तय किए जाते हैं। शिकायत के मुताबिक, कहीं एक घंटे की ड्यूटी के बदले 200 रुपये तो कहीं 250 रुपये तक लिए जाते हैं। स्वास्थ्य मंत्री ने कथित तौर पर बताया था कि पिछले तीन वर्षों से विभिन्न मेडिकल कालेजों में इस तरह की गतिविधियां चल रही हैं। प्राक्सी ड्यूटी की व्यवस्था पर रोक लगाने और अस्पतालों में डॉक्टरों की वास्तविक उपस्थिति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग ने अब फेस बायोमीट्रिक हाजिरी लागू करने का निर्णय लिया है।
राजनीतिक हिंसा पीड़ितों को मिलेगी सरकारी नौकरी
– नवान्न ने जारी की अधिसूचना
कोलकाता । पश्चिम बंगाल सरकार ने राजनीतिक हिंसा में मारे गए लोगों के परिवारों को सरकारी नौकरी देने की योजना पर आधिकारिक मुहर लगा दी है। नवान्न ने इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है। इसके तहत प्रत्येक पात्र परिवार के एक सदस्य को सरकारी विभागों में ग्रुप डी के पद पर नियुक्ति दी जाएगी। यह योजना 1 जनवरी 2001 से राजनीतिक हिंसा में मारे गए लोगों के मामलों पर लागू होगी। गृह एवं पर्वतीय कार्य विभाग की अधिसूचना के अनुसार, मृतक पर पूरी तरह निर्भर पत्नी, पति, बेटा, बेटी या कानूनी रूप से गोद लिया गया बच्चा आवेदन कर सकता है। अविवाहित मृतक के मामले में भाई या बहन भी पात्र होंगे, बशर्ते परिवार के सदस्य पूरी तरह मृतक पर निर्भर रहे हों। आवेदक भारतीय नागरिक और पश्चिम बंगाल का निवासी होना चाहिए। न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता आठवीं पास रखी गई है। एक जनवरी 2026 के अनुसार उम्र कम से कम 18 वर्ष होनी चाहिए। परिवार की मासिक आय 50 हजार रुपये से अधिक होने, परिवार के किसी सदस्य के नियमित सरकारी नौकरी में होने या आयकर देने की स्थिति में आवेदन पर विचार नहीं किया जाएगा। एक परिवार से केवल एक सदस्य को नौकरी मिलेगी। आवेदन संबंधित जिले के जिलाधिकारी के पास निर्धारित फॉर्म में जमा करना होगा। इसके साथ मृत्यु प्रमाणपत्र, एफआईआर, चार्जशीट और अन्य जरूरी दस्तावेज देने होंगे। प्रत्येक जिले में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में स्क्रीनिंग कमेटी गठित होगी, जिसे 90 दिनों के भीतर आवेदन की जांच कर अपनी सिफारिश गृह विभाग को भेजनी होगी। कमेटी के फैसले से असंतुष्ट आवेदक 30 दिनों के भीतर अपील कर सकेंगे।
उपनिवेशवाद से तौबा कर 200 साल बाद ब्रिटेन मांगेगा दुनिया से माफी
-मुआवजा देने से इनकार
लंदन। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम कॉमनवेल्थ समिट में शामिल होने से पहले ने ट्रांस-अटलांटिक दास व्यापार को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि वह इस ऐतिहासिक अन्याय के लिए खुले मन से माफी मांगने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार स्लेव ट्रेड में ब्रिटेन की ऐतिहासिक भूमिका के लिए माफी मांगने को तैयार है । हालांकि उन्होंने आर्थिक मुआवजे की संभावना को खारिज कर दिया है । बर्नहम ने शुक्रवार 30 अक्टूबर 2026 को द गार्डियन में एक आर्टिकल में लिखा कि वे स्लेव ट्रेड के लिए भारत समेत 56 देशों से माफी मांगने के लिए तैयार है । ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें उन लोगों के दर्द का एहसास है, जिन्होंने गुलामी और उससे जुड़ी क्रूरता को सहन किया। उन्होंने इस ऐतिहासिक त्रासदी पर दुख जताते हुए कहा कि अतीत में किए गए अत्याचारों के निशान आज भी पूरी तरह मिटे नहीं हैं। बर्नहैम के मुताबिक, मुआवजा बांटना इस समस्या का उचित समाधान नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि एक अन्याय के बदले दूसरे प्रकार का अन्याय करना सही नहीं होगा।
किंग चार्ल्स ने भी गुलामी के इतिहास का किया जिक्र
एंडी बर्नहैम का यह बयान ऐसे समय आया है, जब किंग चार्ल्स कैरेबियाई देशों के दौरे पर हैं। बहामास में अपने दौरे के दौरान उन्होंने गुलामी के इतिहास का उल्लेख किया और ब्रिटिश शासनकाल में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी। ब्रिटेन की ओर से इस मुद्दे पर अब तक औपचारिक माफी नहीं मांगी गई है। हालांकि, दास व्यापार के ऐतिहासिक प्रभाव और इसकी संवेदनशीलता को देखते हुए इस विषय पर चर्चा तेज हुई है। ब्रिटेन यह स्वीकार करता है कि ट्रांस-अटलांटिक दास व्यापार से देश को आर्थिक लाभ हुआ था। साथ ही, उसका यह भी कहना है कि बाद में इस व्यापार को समाप्त करने में ब्रिटेन ने भूमिका निभाई। वर्ष 1833 में ब्रिटिश संसद ने गुलामी को गैरकानूनी घोषित करने के लिए कानून पारित किया था। हालांकि, गुलामी को गैरकानूनी घोषित करने के बावजूद ब्रिटेन ने दूसरे देशों पर अपना औपनिवेशिक शासन जारी रखा और वहां के संसाधनों का दोहन करता रहा।
बंगाल में नए शिक्षकों के चुनाव लड़ने पर रोक
-शिक्षकों की भर्ती नीति में जुड़ी नयी नीति
कोलकाता। बंगाल की पहली भाजपा सरकार ने भी शिक्षकों की भर्ती नीति को लेकर एक बड़ा फैसला किया है। राज्य सरकार ने शिक्षकों की भर्ती नीति के लिए एक नई ‘शर्त’ जोड़ी गई है। नव नियुक्त शिक्षकों को अब सक्रिय राजनीति में शामिल होने या कोई चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं होगी। यह नीति न केवल सरकारी स्कूलों पर, बल्कि सरकार द्वारा प्रायोजित या सरकार से सहायता प्राप्त स्कूलों पर भी लागू होगी। आज आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में, ऐसे में इस सवाल का कि, उन शिक्षकों का क्या होगा जो पहले से ही राजनीति में शामिल हैं? मुख्यमंत्री ने इस पर भी स्पष्टीकरण दिया है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछली कैबिनेट बैठक में 45,000 पदों के सृजन के बाद, आज की बैठक में लगभग 1,200 और नए पदों के सृजन को मंजूरी दी गई है। इस तरह, पिछली कुछ कैबिनेट बैठकों के जरिए, मौजूदा सरकार ने लगभग 60,000 नौकरियों का रास्ता साफ कर दिया है।
सीएम ने कहा कि भारत के अन्य राज्यों में शिक्षक सीधे तौर पर राजनीति में शामिल नहीं होते हैं। पश्चिम बंगाल में अब तक कई शिक्षक सक्रिय रूप से राजनीति से जुड़े रहे हैं। मुख्यमंत्री ने घोषणा की है कि नए नियुक्त शिक्षकों को अब ऐसा करने का मौका नहीं मिलेगा। जो शिक्षक पहले से ही राजनीति में शामिल हैं उनके मौजूदा अधिकारों में कोई कटौती नहीं की जाएगी। हालांकि, अब से किसी भी नए नियुक्त शिक्षक को प्रत्यक्ष या चुनावी राजनीति में हिस्सा लेने की अनुमति नहीं होगी। उन्हें नगर पालिकाओं, निगमों, विधानसभा या लोकसभा के चुनाव लड़ने की इजाजत नहीं दी जाएगी। कैबिनेट की बैठक में नवनियुक्त शिक्षकों के लिए नई शर्तों पर फैसला लिया गया. मुख्यमंत्री ने कहा कि इस निर्णय को स्कूल सेवा आयोग (एसएससी) की भर्ती प्रक्रिया में शामिल किया गया है. उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार ने शिक्षा की गुणवत्ता बहाल करने के लिए यह बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बदलाव के बाद राज्य में कुल 60,000 नई नियुक्तियों को मंजूरी दी गई है।
सीएम ने उन्होंने स्पष्ट किया कि यह नियम उन लोगों पर लागू नहीं होगा जिन्हें पहले ही नौकरी मिल चुकी है और वे विभिन्न क्षेत्रों या राजनीतिक पदों पर कार्यरत हैं, जैसे कि पंचायत या नगर पालिकाओं के जन प्रतिनिधि के रूप में काम करने वाले लोग। चूंकि उनकी नियुक्ति के समय ऐसी कोई कानूनी शर्त या प्रावधान नहीं था, इसलिए पुराने कर्मचारियों को इस नियम के दायरे से बाहर रखा जाएगा। लेकिन यह शर्त भविष्य की सभी नियुक्तियों पर सख्ती से लागू होगी।




