नयी दिल्ली। मदर्स डे अब सिर्फ भावनाओं का त्योहार नहीं रहा, बल्कि यह भारत और दुनिया भर में तेजी से बढ़ता हुआ बड़ा बिजनेस इवेंट बन चुका है। हर साल इस एक दिन पर ऑनलाइन शॉपिंग, गिफ्टिंग, ज्वेलरी, केक और रेस्टोरेंट बुकिंग पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं। मार्केट रिसर्च रिपोर्ट्स के मुताबिक, मदर्स डे के दौरान ई कॉमर्स कंपनियों की बिक्री कई गुना तक बढ़ जाती है। खास बात यह है कि अब लोग सिर्फ ऑफलाइन नहीं बल्कि मोबाइल ऐप और क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए मिनटों में गिफ्ट भेज रहे हैं। यही वजह है कि मदर्स डे अब भारत के सबसे बड़े ऑनलाइन शॉपिंग मौकों में शामिल होता जा रहा है।
नेशनल रिटेल फेडरेशन यानी एनआरएफ और प्रोस्पर इनसाइट्स एंड एनालिटिक्स की रिपोर्ट के अनुसार, 2024-25 के दौरान मदर्स डे पर दुनिया भर में कुल खर्च 33।5 बिलियन डॉलर से 35।7 बिलियन डॉलर के बीच रहा। यानी भारतीय रुपये में देखें तो यह रकम करीब 2।8 लाख करोड़ रुपये से भी ज्यादा बैठती है। एनआरएफ के मुताबिक एक व्यक्ति औसतन 254 डॉलर यानी करीब 21 हजार रुपये तक खर्च करता है। नेशनल रिटेल फेडरेशन के अनुसार, 2026 के अनुमानों और सर्वे के अनुसार, मदर्स डे पर उपभोक्ता खर्च रिकॉर्ड 38 अरब डॉलर (लगभग ₹3,100 अरब से अधिक) तक पहुंचने की उम्मीद है। इस खर्च में गिफ्ट, फूल, ज्वेलरी, रेस्टोरेंट डिनर और ऑनलाइन ऑर्डर शामिल हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि सोशल मीडिया और डिजिटल पेमेंट्स ने इस मौके को और ज्यादा कमर्शियल बना दिया है।
भारत में भी मदर्स डे का बाजार तेजी से बड़ा हो रहा है। रेडसीर स्ट्रेटजी कंसल्टेंट्स की रिपोर्ट के अनुसार भारत का ओकेजन बेस्ड गिफ्टिंग मार्केट 5 बिलियन डॉलर का आंकड़ा पार कर चुका है और इसमें मदर्स डे की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है। वहीं भारत की बड़ी गिफ्टिंग कंपनी फर्न्स एन पेटल्स यानी एफएनपी की गिफ्टिंग इंडेक्स रिपोर्ट बताती है कि मदर्स डे के दौरान ऑर्डर वॉल्यूम सामान्य दिनों की तुलना में 300 से 500 प्रतिशत तक बढ़ जाता है। यानी एक ही दिन में लाखों लोग ऑनलाइन फूल, केक और पर्सनलाइज्ड गिफ्ट खरीदते हैं। खास बात यह है कि छोटे शहरों से भी ऑनलाइन ऑर्डर तेजी से बढ़ रहे हैं, जिससे ई कॉमर्स कंपनियों की कमाई में बड़ा उछाल देखने को मिलता है।
क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म भी अब मदर्स डे के बड़े प्लेयर्स बन चुके हैं। Blinkit और Zepto जैसी कंपनियों के सीईओ ने पिछले साल सोशल मीडिया पर बताया था कि मदर्स डे के दौरान हर मिनट सैकड़ों बुके और केक डिलीवर किए गए। Blinkit के आंकड़ों के अनुसार यह डिमांड कई बार वैलेंटाइन डे के रिकॉर्ड के करीब पहुंच जाती है। लोग अब आखिरी समय पर भी मोबाइल ऐप खोलकर कुछ मिनटों में गिफ्ट ऑर्डर कर देते हैं। यही वजह है कि क्विक डिलीवरी कंपनियों की बिक्री अचानक कई गुना तक बढ़ जाती है। खासकर मेट्रो शहरों में रात तक ऑर्डर की भारी भीड़ देखने को मिलती है। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि आने वाले वर्षों में यह बाजार और तेजी से बढ़ेगा।
एडोब एनालिटिक्स की रिपोर्ट के मुताबिक, मदर्स डे से पहले ई कॉमर्स ट्रैफिक में 15 से 20 प्रतिशत तक उछाल देखने को मिलता है। सबसे खास बात यह है कि कुल ऑनलाइन खरीदारी में करीब 55 प्रतिशत हिस्सा मोबाइल कॉमर्स का होता है। यानी लोग लैपटॉप की बजाय सीधे स्मार्टफोन से शॉपिंग करना पसंद कर रहे हैं। वहीं मास्टरकार्ड स्पेंडिंग पल्स रिपोर्ट के अनुसार पिछले पांच सालों में ज्वेलरी पर खर्च में 15 प्रतिशत की सीएजीआर ग्रोथ दर्ज हुई है जबकि रेस्टोरेंट बुकिंग में करीब 30 प्रतिशत का उछाल आया है। विज्ञापन कंपनियों ग्रुपएम और डेंट्सू इंडिया के मुताबिक कई ब्रांड अपने पूरे महीने के मार्केटिंग बजट का 20 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ मदर्स डे वाले हफ्ते में खर्च कर देते हैं।
मदर्स डे पर 33।5 बिलियन डॉलर से 35।7 बिलियन डॉलर का कारोबार
13 वर्षों तक सत्ता का केंद्र रहे नवान्न से राइटर्स में स्थानांतरित होगा सचिवालय
कोलकाता। कोलकाता का “नवान्न” अर्थात नई उपज। यह नाम पश्चिम बंगाल की उस 14 मंजिला इमारत का है, जो पिछले 13 वर्षों से राज्य की सत्ता का प्रमुख केंद्र रही है। यहीं से मुख्यमंत्री, मंत्री, मुख्य सचिव, गृह सचिव समेत राज्य सरकार के तमाम शीर्ष अधिकारी और विभाग कामकाज संचालित करते रहे। अब राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद नई सरकार ने फैसला किया है कि प्रशासनिक कामकाज फिर से ऐतिहासिक राइटर्स बिल्डिंग से ही संचालित होगा। नवान्न का निर्माण मूल रूप से वस्त्र उद्योग और गारमेंट सेक्टर के विकास के उद्देश्य से किया गया था। वर्ष 2011 तक शासन करने वाली वाम मोर्चा सरकार ने इसके निर्माण की जिम्मेदारी एचआरबीसी (हुगली रिवर ब्रिज कमिश्नर्स) को सौंपी थी। करीब 75 करोड़ रुपये की लागत से बनी इस 14 मंजिला इमारत में गारमेंट उद्योग से जुड़े उद्यमियों और विभिन्न प्रतिनिधि संस्थाओं को स्थान दिया जाना था। साथ ही यहां वस्त्र उत्पादन में गुणवत्ता और शोध कार्यों को बढ़ावा देने की भी योजना थी। लेकिन वर्ष 2011 में ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस सरकार बनने के बाद शुरुआत में नई सरकार ने राइटर्स बिल्डिंग से ही कामकाज जारी रखा, लेकिन वर्ष 2013 तक राइटर्स बिल्डिंग में बड़े पैमाने पर मरम्मत और पुनर्निर्माण की आवश्यकता महसूस की गई। इसके बाद सरकार ने वैकल्पिक सचिवालय की तलाश शुरू की और उसकी नजर नवान्न भवन पर पड़ी। सरकार को तत्काल एक नए सचिवालय की जरूरत थी। लोक निर्माण विभाग को भवन को सचिवालय के अनुरूप तैयार करने का आदेश दिया गया। विभाग ने रिकॉर्ड डेढ़ महीने के भीतर नवान्न को आधुनिक राज्य सचिवालय में बदल दिया। 5 अक्टूबर 2013 को इसका औपचारिक उद्घाटन हुआ और इसके बाद राज्य सरकार का पूरा प्रशासनिक कामकाज यहीं से संचालित होने लगा। कोलकाता और हावड़ा के बीच गंगा नदी पर बने देश के प्रमुख केबल-स्टे पुल विद्यासागर सेतु के सर्विस लेन के पास स्थित नवान्न भवन जल्द ही राज्य की सत्ता का नया पावर सेंटर बन गया। भवन की सबसे ऊपरी यानी 14वीं मंजिल पर मुख्यमंत्री का कार्यालय बनाया गया, जबकि 13वीं मंजिल पर मुख्य सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारी बैठते थे। बाद में यहां बड़े सरकारी कार्यक्रमों और बैठकों के लिए “नवान्न सभागार” नामक कन्वेंशन सेंटर का भी निर्माण किया गया। करीब 13 वर्षों तक पश्चिम बंगाल की राजनीति और प्रशासन का केंद्र रहने के बाद अब नवान्न की भूमिका बदलने जा रही है, क्योंकि नई सरकार ने प्रशासन को फिर से राइटर्स बिल्डिंग में स्थानांतरित करने का निर्णय लिया है।
पीएम मोदी ने छुुए डाॅ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सहयोगी माखनलाल सरकार के पैर
कोलकाता। पश्चिम बंगाल में पहली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान कोलकाता के ब्रिगेड मैदान में एक भावुक और ऐतिहासिक दृश्य देखने को मिला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंच पर मौजूद 97 वर्षीय वरिष्ठ भाजपा कार्यकर्ता माखन लाल सरकार के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लिया। इस दृश्य ने समारोह में मौजूद लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। माखनलाल सरकार भारतीय जनसंघ के संस्थापक डाॅ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के करीबी सहयोगियों में रहे हैं। भाजपा नेताओं के अनुसार कश्मीर आंदोलन के दौरान श्यामा प्रसाद मुखर्जी के ऐतिहासिक दौरे में भी माखनलाल सरकार उनके साथ थे। उस समय कश्मीर में तिरंगा फहराने के अभियान के बाद श्यामा प्रसाद मुखर्जी को गिरफ्तार किया गया था और जेल में उनकी रहस्यमयी मौत हो गई थी। बताया जाता है कि उस दौरान माखनलाल सरकार भी उनके साथ जेल में बंद थे। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष व लाेकसभा सांसद शमिक भट्टाचार्य ने मंच से माखनलाल सरकार का परिचय देते हुए कहा कि 1952 के कश्मीर आंदोलन में उन्हें गिरफ्तार किया गया था और वे श्यामा प्रसाद मुखर्जी के अंतिम दिनों के करीबी साथी रहे। माखनलाल सरकार ने उत्तर बंगाल में पार्टी संगठन खड़ा करने में अहम भूमिका निभाई थी। 1980 में भाजपा गठन के बाद उन्हें पश्चिम दिनाजपुर, जलपाईगुड़ी और दार्जिलिंग क्षेत्रों की संगठनात्मक जिम्मेदारी दी गई थी। कम समय में उन्होंने हजारों नए सदस्य जोड़कर उत्तर बंगाल में भाजपा का मजबूत आधार तैयार किया। बाद में वे सिलीगुड़ी संगठनात्मक जिले के पहले भाजपा अध्यक्ष भी बने और लगातार सात वर्षों तक इस पद पर रहे।
समारोह के दौरान शमिक भट्टाचार्य ने माखनलाल सरकार के जीवन की एक और घटना का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि कांग्रेस शासनकाल में देशभक्ति गीत गाने पर दिल्ली पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। अदालत में जब उनसे माफी मांगने को कहा गया तो उन्होंने इनकार कर दिया और अदालत में ही दोबारा वही गीत गाकर सुनाया। इसके बाद न्यायाधीश ने उन्हें सम्मान के साथ घर लौटने के लिए प्रथम श्रेणी का टिकट और 100 रुपये देने का आदेश दिया था।
भाजपा नेताओं का कहना है कि पश्चिम बंगाल में पहली भाजपा सरकार का गठन भारतीय जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सपने को पूरा करने जैसा है। ऐसे में शपथ ग्रहण समारोह में उनके पुराने सहयोगी माखनलाल सरकार को सम्मानित कर भाजपा ने अपने संगठनात्मक इतिहास और पुराने संघर्षों को याद किया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा माखनलाल सरकार के पैर छूना केवल एक वरिष्ठ कार्यकर्ता का सम्मान नहीं था, बल्कि बंगाल में भाजपा के शुरुआती संघर्ष और संगठन निर्माण की विरासत को नमन करने का संदेश भी था।
बंगाल में शुभेंदु अधिकारी संग पांच मंत्रियों ने ली शपथ
कोलकाता। कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में शनिवार को पश्चिम बंगाल की पहली भाजपा सरकार का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित हुआ। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सहित भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) शासित राज्यों के मुख्यमंत्री और वरिष्ठ नेता आयाेजित समारोह में मौजूद रहे। भाजपा विधायक दल के नेता चुने जाने के बाद शुभेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। उनके साथ पांच मंत्रियों ने भी शपथ ग्रहण किया। नई भाजपा सरकार की पहली मंत्रिपरिषद में उत्तर बंगाल और दक्षिण बंगाल दोनों क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व दिया गया है। मंत्रिमंडल में आदिवासी, मतुआ और राजबंशी समाज के नेताओं को भी जगह मिली है। शुभेंदु अधिकारी के साथ जिन नेताओं ने मंत्री पद की शपथ ली उनमें दिलीप घोष, अग्निमित्रा पाल, अशोक कीर्तनिया, निशीथ प्रमाणिक और खुदीराम टुडू शामिल हैं। हालांकि, अभी विभागों का बंटवारा नहीं किया गया है।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी भवानीपुर और नंदीग्राम सीट से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं। दिलीप घोष ने खड़गपुर सदर, अग्निमित्रा पाल ने आसनसोल दक्षिण, अशोक कीर्तनिया ने बनगांव उत्तर, क्षुदिराम टुडू ने रानीबांध और निशीथ प्रमाणिक ने माथाभांगा सीट से जीत दर्ज की है। हालांकि, अभी पूरी मंत्रिमंडल का गठन नहीं हुआ है। उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही शुभेंदु अपने मंत्रिमंडल का विस्तार करेंगे।
उल्लेखनीय है कि, चार मई को घोषित विधानसभा चुनाव नतीजों में भाजपा ने 207 सीटें जीतकर ऐतिहासिक बहुमत हासिल किया था। चुनाव परिणाम आने के बाद से ही मुख्यमंत्री पद के लिए शुभेंदु अधिकारी का नाम सबसे आगे माना जा रहा था। शुक्रवार को भाजपा विधायक दल की बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आधिकारिक रूप से उनके नाम की घोषणा की।
अमित शाह ने कहा कि विधायक दल की बैठक में मुख्यमंत्री पद के लिए आए सभी प्रस्तावों में केवल शुभेंदु अधिकारी का ही नाम था और किसी अन्य नाम का प्रस्ताव नहीं आया। इसके बाद उन्हें सर्वसम्मति से पश्चिम बंगाल का मुख्यमंत्री घोषित किया गया।
माध्यमिक में 86.83 प्रतिशत उत्तीर्ण, उत्तर दिनाजपुर का अभिरूप टॉपर
कोलकाता । पश्चिम बंगाल माध्यमिक परीक्षा 2026 का परिणाम शुक्रवार को पश्चिम बंगाल माध्यमिक शिक्षा परिषद् द्वारा जारी कर दिया गया। इस वर्ष छात्रों की सफलता का प्रतिशत 86.83 फीसदी दर्ज किया गया है।
इस वर्ष उत्तर दिनाजपुर जिले के छात्र अभिरूप भद्र ने 700 में 698 अंक हासिल कर पूरे राज्य में पहला स्थान प्राप्त किया। उन्होंने 99.71 प्रतिशत अंक प्राप्त कर राज्य में टॉप किया। माध्यमिक परीक्षा की मेरिट सूची में इस बार कुल 131 छात्र-छात्राओं ने टॉप 10 में जगह बनाई है। राज्य के टॉप रैंकर्स में अभिरूप भद्र 698 अंकों के साथ पहले स्थान पर रहे। अरित्र दास ने 697 अंक हासिल कर दूसरा स्थान प्राप्त किया। सौम्य पाल 696 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर रहे। इशानी चक्रवर्ती को 695 अंक मिले, जबकि सुप्रतिक मन्ना ने 694 अंक हासिल किए। मोहम्मद सलीम को 693 अंक प्राप्त हुए। अन्वेषा सेन ने 692 अंक हासिल किए। ऋत्विक घोष 691 अंक के साथ आगे रहे, जबकि शुभदीप कर ने 690 अंक प्राप्त किए। वहीं आसनसोल के रामकृष्ण मिशन स्कूल आसनसोल के छात्र अभिषेक दास ने 688 अंक हासिल कर राज्य की टॉप टेन सूची में संयुक्त रूप से दसवां स्थान प्राप्त किया। अभिषेक दास ने गणित, लाइफ साइंस और बंगाली विषय में 100 में 100 अंक हासिल किए हैं। वहीं फिजिकल साइंस और भूगोल में 99-99, इतिहास में 98 तथा अंग्रेजी में 92 अंक प्राप्त हुए। उनकी इस उपलब्धि के बाद स्कूल परिसर में खुशी और उत्साह का माहौल देखने को मिला। शिक्षकों और सहपाठियों ने मिठाई खिलाकर उन्हें बधाई दी। रिजल्ट जारी होने के बाद छात्र आधिकारिक वेबसाइट माध्यमिक शिक्षा परिषद के ऑफिसियल वेबसाइट तथा रिजल्ट पोर्टल पर अपना रिजल्ट देख सकते हैं। बोर्ड की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार नियमित, कंटिन्यूइंग और कंपार्टमेंट श्रेणी मिलाकर कुल 9,59,753 परीक्षार्थियों ने परीक्षा दी थी। परीक्षा राज्यभर के 2600 से अधिक केंद्रों पर आयोजित की गई थी।
विद्यासागर विश्वविद्यालय में कार्यशाला एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम
मिदनापुर। विद्यासागर विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग की ओर से ‘हिंदी में रोजगार की संभावनाएं’ विषय पर कार्यशाला एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर चतुर्थ सेमेस्टर के विद्यार्थियों के लिए विदाई समारोह का भी आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत टी. दिव्यांशी और प्रीति सिंह द्वारा सरस्वती वंदना के साथ हुई। स्वागत भाषण देते हुए विभागाध्यक्ष डॉ. प्रमोद कुमार प्रसाद ने कहा कि विश्वविद्यालय केवल सर्टिफिकेट प्रदाता मात्र नहीं होता है बल्कि यह हमारे व्यक्तित्व को गढ़ता भी है। हिंदी में रोजगार की अपार संभावनाएं हैं बशर्तें उसके लिए हम अपनी पात्रता अर्जित करें। विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. संजय जायसवाल ने कहा कि हिंदी पढ़ने वाले विद्यार्थियों के समक्ष असंख्य संभावनाएं हैं। हमें अपनी भाषा ,विषय का ज्ञान और तकनीकी रूप से दक्षता अर्जित करने की जरूरत है।
हिंदी पढ़ने वाले शिक्षक, अनुवादक, राजभाषा अधिकारी, हिंदी सहायक, टाइपिस्ट, दुभाषिए, फ्रीलांसर, रिपोर्टर, एंकर, कंटेंट लेखक आदि में अपना कैरियर बना सकते हैं। विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. श्रीकांत द्विवेदी ने कहा कि आज आनंद के साथ दुख का भी क्षण है लेकिन यह एक ऐसा समय भी है जब आप अपने अंदर झाँक कर इसकी तलाश करें कि आपको क्या करना है और आप कैसे उसे हासिल कर सकते हैं। विभाग की शोधार्थी उष्मिता गौड़ ने कहा कि आज आपके लिए एक बड़ा दिन है। आपको यह सुनिश्चित करना है कि यह डिग्री आपके लिए महज एक डिग्री तक सीमित न रहे बल्कि इसके सहारे आप अपनी मंजिल प्राप्त करें। रूपेश कुमार यादव, सुषमा कुमारी, रिया श्रीवास्तव ने विचार रखे । इस अवसर पर अर्जुन सार्की ने गीत और निसार अहमद, अंजली शर्मा ,रूथ कर ने काव्य पाठ किया। इस अवसर पर प्रियांशु ठाकुर,रंभा कुमारी, प्रिया मिश्रा,काजल ठाकुर ने विशेष सहयोग दिया।कार्यक्रम का सफल संचालन सुषमा कुमारी,शबाना खातून और प्रिंशु ठाकुर ने किया।
डॉ. वसुंधरा मिश्र के कथा काव्यसंग्रह ‘नव दुर्गा नव रूप’ का लोकार्पण
-भारतीय भाषा परिषद में जैन महिला मंडल ने किया आयोजन
कोलकाता । भारतीय भाषा परिषद के सभाकक्ष में लेखिका डॉ वसुंधरा मिश्र की कथा काव्यसंग्रह ‘नव दुर्गा नव रूप’ काव्य पुस्तक का लोकार्पण किया गया। यह कार्यक्रम जैन महिला मंडल की संस्थापक सदस्य अंजू सेठिया और अध्यक्ष चंदा गोलछा द्वारा आयोजिकिया गया। गत 2 मई 2026 को लोकार्पण समारोह में प्रमुख अतिथि प्रो सोमा बंद्योपाध्याय, पूर्व कुलपति बाबा साहेब अंबेडकर विश्वविद्यालय,वरिष्ठ पत्रकार और प्रधान संपादक विश्वंभर नेवर ताजा टीवी छपते-छपते समाचार, राजस्थान ब्राह्मण संघ की अध्यक्ष और पूर्व प्रधानाचार्या दुर्गा व्यास, भवानीपुर एडुकेशन सोसाइटी कॉलेज की प्रातःकालीन सत्र की वाइस प्रिंसिपल प्रो मीनाक्षी चतुर्वेदी, भवानीपुर एडुकेशन सोसाइटी कॉलेज के रेक्टर और डीन प्रो दिलीप शाह, भारतीय भाषा परिषद के निदेशक डॉ शंभुनाथ की उपस्थिति में लेखिका डॉ वसुंधरा मिश्र द्वारा लिखित ‘नव दुर्गा नव रूप’ काव्य कथा संग्रह का लोकार्पण संपन्न हुआ।
इस अवसर पर डॉ सोमा बंदोपाध्याय , पूर्व कुलपति बाबा अंबेडकर विश्वविद्यालय ने कहा कि दुर्गा का उच्चारण करते ही आपको अनुभव होगा एक शक्ति का संचार होता है और वही शक्ति स्त्री को आगे बढ़ने में सहायता करती है।स्त्री शक्ति की तुलना हमेशा पृथ्वी और प्रकृति से की जाती है क्योंकि उसमे सहन शक्ति अपरंपार है।
जब तक महिला आर्थिक रूप से सशक्त नहीं होती तब तक उसकी बात नही सुनी जाती । डॉ सोमा बंद्योपाध्याय ने कहा कि ये कविताएं शोधपूर्ण कार्य है और आधुनिक संदर्भ में महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं।उन्होंने पुस्तक की एक कविता की पंक्तियों की आवृत्ति की। विश्वंभर नेवर ने स्त्री की भूमिका पर प्रकाश डाला और अपनी शक्तियों को शिक्षा और ज्ञान द्वारा आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया । माँ दुर्गा की मूर्ति को कई तरह से सजाया जाता है। हमें अत्याचार का प्रतिकार करना चाहिए ।अप्प दीपो भव को मानना चाहिए।
डॉ शंभूनाथ ने पृथ्वी के विकास के फलस्वरूप होने वाले अवतारों के द्वारा पूर्ण मनुष्य के निर्माण प्रक्रिया बात रखी ।
दुर्गा व्यास ने वसुंधरा मिश्र की रचनाधर्मिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ‘एक नहीं दो दो मात्रा नर से भारी नारी।’
छोटी सी पुस्तक किंतु प्रेरणादाई इस पुस्तक को सभी को पढ़ना चाहिए। इसमें वसुंधरा मिश्र ने दुर्गा के मंत्र, कथा और आधुनिक स्त्री को अपनी शक्तियों को बढ़ाने का संदेश दिया है। उन्होंने पुस्तक की कविताओं से कई पंक्तियाँ उद्धृत की।
प्रो दिलीप शाह ने वर्तमान संदर्भ में स्त्री पुरुष में न बांटकर गुणों के आधार पर देखना चाहिए। व्यक्ति को उसके गुणों द्वारा देखना चाहिए । ज्ञान की उपासना होनी चाहिए। महिलाएं कुछ करना चाहती है उनकी इच्छा का सम्मान करे।
प्रो मीनाक्षी चतुर्वेदी ने काव्य संग्रह के प्रकाशन पर शुभकामनाएं देते हुए कहा कि स्त्रियों का अधिकार सदैव रहा उन्हें धुरी कहा जाता था। फिर आज ऐसा क्या ? ऐसे में वसुंधरा मिश्र जी की ये पुस्तक एक रोशनी की तरफ ले जाती हैं ।
डॉ वसुंधरा मिश्र ने सभी लोगों का आभार व्यक्त किया और कहा कि माँ दुर्गा समाज की ही बेटी, स्त्री और मातृशक्तियां हैं। नौ देवियों के गुणों को अपने जीवन का अंग बनाना माँ दुर्गा के प्रति सच्ची भक्ति है। मेरी लिखी ‘मैं रहस्यमयी’ कविता मेरे लिए प्रेरणादायी कविता थी। बंगाल शक्ति स्थल है जहांँ से स्त्रियां साहित्यिक और सांस्कृतिक ऊर्जा प्राप्त करती हैं।
शुभ सृजन प्रकाशन की महिला प्रकाशक सुषमा त्रिपाठी कोलकाता द्वारा ‘नव दुर्गा नव रूप’ को छपाने का उद्योग लेना मेरे लिए प्रसन्नता की बात थी। उत्सव मूर्ति डॉ वसुंधरा मिश्र ने ‘मैं ही रहस्यमयी स्थूल सूक्ष्म सब मुझमें व्याप्त’ का पाठ करते हुए मां दुर्गा को शब्दांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम का शुभारंभ नमोकार मंत्र से हुआ जिसमें सरोज भंसाली और जैन महिला मंडल की सदस्याओं द्वारा किया गया। प्रो डॉ देविना गुप्ता ने माँ दुर्गा की स्तुति ‘अयि गिरिनन्दिनि’ से किया। पूर्व शिक्षिका शिक्षायतन और कवयित्री कविता कोठारी ने अध्यात्म और जीवन दर्शन से युक्त एक मधुर गीत गाया । पूनम त्रिपाठी खिदिरपुर स्कूल की शिक्षिका और छत्तीसगढ़ के अखबार की कॉलम संपादक और कई पुरस्कारों से सम्मानित ने शुभकामनाएं देते हुए डॉ वसुंधरा मिश्र को नवीन कदम न्यूज़ नेटवर्क छत्तीसगढ़ से भेजे हुए नारी शक्ति सम्मान 2026 के लिए प्रदत्त शॉल और मोमेंटो, सर्टिफिकेट, कलम प्रदान किया।
इस अवसर पर कोलकाता के प्रमुख हिंदी जगत के साहित्यकार कवि कवयित्री लेखक लेखिकाओं पत्रकारों की उपस्थिति रही। इस अवसर पर ट्रासजेंडर महिला और स्त्री सशक्तिकरण के लिए कई साहित्यकारों और कवयित्री महिलाओं को सम्मानित किया गया। अंजू सेठिया ने संचालन किया और सभी अतिथियों का स्वागत किया ।कार्यक्रम की सूत्रधार एवं संचालक अंजू सेठिया ने भारत जैन महिला मंडल द्वारा नारी शक्ति अवार्ड कुसुम किला, श्रुति धर को मिला।
गणमान्य लोगों में पवन जी पाटोदिया, सुरेश चौधरी, गोविंद इन्दौरिया, कयुर मजमूदार , अमित मुधडा, किशन जी किला ,बाबूलाल जी दुगड ,ताराचंद पटोदिया ,उषा जैन,अमृता चतुर्वेदी, मीनाक्षी श्रीवास्तव, सुशील जी आदि अनेक गणमान्य लोगों की उपस्थिति रही। भारत जैन महामंडल से अध्यक्ष चंदा गोलछा संस्थापक, सरोज भंसाली, उपाध्यक्ष नेहा रामपुरिया ,सुमित्रा सेठिया, सुप्यार पुगलिया, सुनीता कुडलिया, सुमन चौरडीया आदि उपस्थित रही।
नवान्न में गूंजे ‘जय श्रीराम’ के नारे, बदला बंगाल का माहौल
कोलकाता । पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद राज्य की राजनीति के साथ-साथ प्रशासनिक गलियारों में भी बदलाव साफ नजर आने लगा है। भाजपा को 200 से अधिक सीटों के साथ मिली बड़ी जीत के बाद अब राज्य सचिवालय नवान्न के अंदर भी माहौल बदलता दिख रहा है। मंगलवार को नवान्न परिसर के भीतर कुछ सरकारी कर्मचारियों को ‘जय श्रीराम’ और ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाते देखा गया। इतना ही नहीं, कर्मचारियों के एक वर्ग ने एक-दूसरे को अबीर लगाकर जीत का जश्न भी मनाया। इस दौरान महिला और पुरुष कर्मचारी दोनों ही उत्साह के साथ इस जश्न में शामिल नजर आए। कर्मचारियों का कहना है कि पहले वे डर और दबाव के माहौल में काम करते थे, लेकिन अब उन्हें राहत महसूस हो रही है। उनका मानना है कि सत्ता परिवर्तन के बाद उन्हें एक नया माहौल मिला है, जिसमें वे खुलकर अपनी भावनाएं व्यक्त कर पा रहे हैं। कई कर्मचारियों ने यह भी कहा कि नई सरकार से उन्हें काफी उम्मीदें हैं, खासकर महंगाई भत्ता यानी डीए को लेकर।
बताया जा रहा है कि सोमवार को जैसे ही चुनाव परिणाम स्पष्ट हुए, वैसे ही सचिवालय नवान्न के बाहर भाजपा समर्थकों ने जुटकर ‘जय श्रीराम’ के नारे लगाए और पार्टी के झंडे लहराए। वहां भी अबीर खेलकर जीत का जश्न मनाया गया। अब वही माहौल नवान्न के अंदर भी देखने को मिल रहा है।
चुनाव परिणामों की बात करें तो भाजपा ने करीब 206 सीटें हासिल कर स्पष्ट बहुमत के साथ सरकार बनाने का रास्ता साफ कर लिया है। इस बड़े राजनीतिक बदलाव का असर अब प्रशासनिक स्तर पर भी दिखने लगा है। वहीं नवान्न जैसे अहम प्रशासनिक केंद्र के भीतर भी माहौल में बदलाव की तस्वीर सामने आ रही है, जो आने वाले समय में और बड़े बदलावों का संकेत दे रही है।
आसनसोल में पंद्रह वर्षों बाद खुले दुर्गा मंदिर के कपाट
आसनसोल। मंगलवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के परिणामों के बाद आसनसोल शहर के बस्तिन बाजार क्षेत्र में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक क्षण देखने को मिला, जब श्री-श्री दुर्गामाता चैरिटेबल ट्रस्ट के प्राचीन मंदिर के कपाट लगभग पंद्रह वर्षों के लंबे अंतराल के बाद स्थायी रूप से श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। वर्षों से बंद पड़े इस मंदिर के पुनः खुलने से पूरे इलाके में उत्सव, उल्लास और गहरी धार्मिक भावना का वातावरण बन गया है।
स्थानीय निवासियों के अनुसार, यह मंदिर लंबे समय से विभिन्न प्रशासनिक और कानूनी कारणों के चलते आम भक्तों के लिए बंद था। केवल दुर्गा पूजा, लक्ष्मी पूजा या अन्य विशेष अवसरों पर ही सीमित समय के लिए मंदिर के द्वार खोले जाते थे, जिससे श्रद्धालुओं को नियमित दर्शन का अवसर नहीं मिल पाता था। इस कारण क्षेत्र के लोगों में निराशा और असंतोष की भावना भी व्याप्त थी।
मंगलवार सुबह जैसे ही मंदिर के कपाट खोले गए, वैसे ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर में एकत्रित होने लगे। लोग इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बनने के लिए सुबह से ही कतारों में खड़े दिखाई दिए। मंदिर परिसर को पहले पूरी तरह से साफ-सुथरा किया गया और उसके बाद विधिवत पूजा-अर्चना की शुरुआत हुई। शंखनाद, घंटियों की गूंज और ‘जय माता दी’ के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।
भक्तों ने पूरे श्रद्धा भाव से मां दुर्गा की आराधना की और इस अवसर को अपनी आस्था की विजय के रूप में देखा। कई श्रद्धालुओं ने भावुक होकर बताया कि वर्षों बाद उन्हें बिना किसी बाधा के मंदिर में प्रवेश कर माता के दर्शन करने का अवसर मिला है, जो उनके लिए अत्यंत सुखद और यादगार अनुभव है। इस मंदिर के पुनः खुलने को केवल धार्मिक घटना ही नहीं, बल्कि एक सामाजिक और सांस्कृतिक बदलाव के रूप में भी देखा जा रहा है। स्थानीय लोगों का मानना है कि मंदिर के नियमित रूप से खुलने से क्षेत्र में धार्मिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और लोगों के बीच एक सकारात्मक वातावरण का निर्माण होगा। मंदिर प्रबंधन समिति के सदस्यों ने बताया कि अब मंदिर वर्ष के सभी 365 दिनों तक श्रद्धालुओं के लिए खुला रहेगा और नियमित रूप से पूजा-पाठ एवं अन्य धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाएंगे। इसके लिए आवश्यक व्यवस्थाएं भी की जा रही हैं, ताकि आने वाले समय में भक्तों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। मंगलवार को मंदिर परिसर में उमड़ी भीड़ को देखते हुए प्रशासन की ओर से भी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। स्थानीय पुलिस बल को तैनात किया गया, ताकि श्रद्धालुओं की भीड़ को व्यवस्थित ढंग से नियंत्रित किया जा सके और किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।
इस ऐतिहासिक पहल ने आसनसोल के बस्तिन बाजार क्षेत्र को एक नई पहचान दी है। लंबे समय से प्रतीक्षित इस निर्णय ने न केवल लोगों की धार्मिक भावनाओं को संतुष्ट किया है, बल्कि क्षेत्र में एक नई ऊर्जा और सकारात्मकता का संचार भी किया है। कुल मिलाकर, मंगलवार का दिन आसनसोल के लिए एक यादगार अध्याय के रूप में दर्ज हो गया है, जहां आस्था, उम्मीद और सामूहिक प्रयास ने एक लंबे इंतजार को समाप्त कर दिया। अब यह मंदिर न केवल पूजा-अर्चना का केंद्र बनेगा, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक समृद्धि का प्रतीक भी बनकर उभरेगा।
भगवा सुनामी में तृणमूल के 35 में से 22 मंत्री हारे
कोलकाता । पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में तृणमूल कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। राज्य की सत्ताधारी सरकार के कई बड़े चेहरे इस चुनाव में हार गए, जिसे गहरी एंटी-इंकंबेंसी का संकेत माना जा रहा है। आंकड़ों के अनुसार, चुनाव लड़ने वाले 35 मंत्रियों में से 22 मंत्री अपनी सीट नहीं बचा पाए। इनमें खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी शामिल हैं, जो अपनी ही सीट भवानीपुर (159) से हार गईं। यानी करीब 63 प्रतिशत मंत्री चुनाव हार गए, जो साफ तौर पर राज्य की जनता द्वारा सरकार के नेतृत्व को खारिज करने का संकेत देता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मतदाताओं ने केवल उम्मीदवारों को नहीं, बल्कि टीएमसी के पूरे नेतृत्व और उसकी कार्यशैली को नकार दिया है। हारने वाले मंत्रियों में कई अहम विभागों को संभालने वाले नेता शामिल हैं। इनमें महिला एवं बाल विकास, उद्योग, आवास, बिजली, शिक्षा, परिवहन और पिछड़ा वर्ग कल्याण जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों के मंत्री भी अपनी सीटें नहीं बचा सके। इसे टीएमसी सरकार के शासन मॉडल के खिलाफ जनता की व्यापक नाराजगी के रूप में देखा जा रहा है।
हारने वाले प्रमुख मंत्रियों में ममता बनर्जी (भवानीपुर), अरूप बिस्वास (टॉलीगंज), ब्रत्य बसु (दमदम), चंद्रिमा भट्टाचार्य (दमदम उत्तर), शशि पांजा (श्यामपुकुर), सुजीत बोस (बिधाननगर), इंद्रनील सेन (चंदननगर), बेचेराम मन्ना (सिंगुर), स्वपन देबनाथ (पुर्बस्थली दक्षिण), बुलु चिक बड़ाइक (माल), प्रदीप कुमार मजूमदार (दुर्गापुर पूर्व), बिरबाहा हांसदा (बिनपुर), मानस रंजन भुइयां (साबंग), मलय घटक (आसनसोल उत्तर), सिद्दीकुल्लाह चौधरी (मोंटेश्वर), उदयन गुहा (दिनहाटा), संध्यारानी टुडू (मानबाजार), बंकिम चंद्र हाजरा (सागर), उज्जल बिस्वास (कृष्णानगर दक्षिण), स्नेहासिस चक्रवर्ती (जंगीपाड़ा), श्रीकांत महतो (सल्बोनी) और सत्यजीत बर्मन (हेम्ताबाद) शामिल हैं।
कुछ सीटों पर हार का अंतर भी काफी बड़ा रहा। उद्योग मंत्री शशि पांजा श्यामपुकुर सीट से भाजपा की पूर्णिमा चक्रवर्ती से 14,600 से ज्यादा वोटों से हार गईं। पूर्व मंत्री निर्मल माझी गोगहाट सीट से भाजपा के प्रशांत डिगर से 49,500 से ज्यादा वोटों से पराजित हुए। उदयन गुहा दिनहाटा सीट पर भाजपा के अजय रे से 17,400 से ज्यादा वोटों से हार गए।
इसी तरह, सिद्दीकुल्लाह चौधरी मंतेश्वर सीट पर भाजपा के सैकत पांजा से 14,700 से ज्यादा वोटों से हारे, जबकि प्रदीप मजूमदार दुर्गापुर पूर्व सीट पर भाजपा के चंद्र शेखर बनर्जी से 30,900 से ज्यादा वोटों से पराजित हुए। वहीं, चंद्रिमा भट्टाचार्य को दमदम उत्तर सीट पर भाजपा के सौरव सिकदार से 26,400 से ज्यादा वोटों से हार का सामना करना पड़ा।




