Monday, September 21, 2026
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डॉ. आनंद श्रीवास्तव की कविताएं

 

डॉ. आनंद श्रीवास्तव

ऋषि दुर्वासा का शाप

आक्रोश और आवेश से भरे हुए ऋषि दुर्वासा
अब शापित करना भूल गए क्या ?
या सूख गया कमण्डल का वह जल
जिसे हाथों में लेकर भस्म हो जाने की आज्ञा दी जाती थी ।
क्या सारे लोग अस्तित्व संकट से जूझते – जूझते संन्यास ले चुके?
या धरती का पाप न्यूटन के थर्ड लॉ ऑफ़ मोशन की तरह
प्रत्येक क्रिया के बराबर विपरीत दिशा में प्रतिक्रिया
करते – करते इतना कुटज बन गया है
जिसे ना उखाड़ा जा सकता है ना काटा जा सकता है ।।

सड़क 

सड़क चाहे जितनी भी लंबी हो ,
इंतज़ार में टिकी नज़रों को खुद पर भरोसा करना आना चाहिए ।
देख सकते हो तो देखो – हर मोड़,हर गली ,हर किनारों को ;
सड़क कभी ख़त्म नहीं होती ,
एक मंजिल से दूसरी मंजिल तक जाने की कड़ी जोड़ती है।
दुःख, चिंता, आंसू, ग्लानि , शिकायत की न कोई भाषा होती है ,न जाति,न धर्म ।
दूध, ख़ून और आँसुओं का जैसे कोई बंटवारा नहीं होता
वैसे ही सड़क की भी ना कोई जाति, कोई धर्म और कोई भाषा नहीं होती ।

सड़क सबको अपने साथ लेकर चलती है
क्योकि सबकी मंजिल तक पहुंचाना ही
उसके होने की सार्थकता है।
सड़क हमारे लिए भरोसा है , साहस है और शायद उम्मीद भी ।
जब भी थक जाता है मन,
सड़क के इस छोर से उस छोर तक चलना अच्छा लगता है,
सड़क पर मिलते हैं लोग- हर भेदभाव से परे ,
और उन लोगों में मिलती है जिजीविषा,
आस्था और जीवन के प्रति व्याकुलता ।

नज़र ढूंढती है सुकून के दो पल
और सड़क चलती ही रहती है,
जैसे किसी मंजिल की तलाश में चलते हैं हम बेपरवाह ….
जैसे मछली की तलाश में मछुआरे .
जैसे बिना किसी आशियाने के
खुली गगन के नीचे धरती के टुकड़ों पर
छाँव तलाशते हुए बंजारे ।

मत बाँटो हमें,
जीने दो अपनी जिंदगी अपनी मर्ज़ी और ख़ुशी से ।
हमें ना तुमसे शिकायत है और ना ही कोई उम्मीद ;
हमारी सार्थकता सड़क बने रहने में है।

और इंतज़ार में टिकी नज़रों को
ख़ुद पर भरोसा करना भी आ गया है।

…………………..

You are within me

You are far from me,
Yet somehow you are always close ..
I am alive because within me ,
You are the very feeling of being alive ..

The World is painted in a thousand colors
from the earth beneath my feet
to the endless blue of the sky,
from the tender green of the trees
to the magic of the rainbow.
And in every color I see,
there is a little part of you,
Beyond every color,every star ,and every dreams,
You are the closest to me
My own reflection, my soul’s most beautiful echo.

You are distant ,
Yet you live so close to my heart..
You are the sailor’s oar
as it searches for a shore,
in the thunder that tears through the silence,
in the wind ,passoinate rhythm of the rain ,
in the moon that watches over the night ,
and in every star that lights up the sky.

Form this world to whatever lies beyond,
Wherever life may take us,
You are with me .
You are beside me
You are within me .
You are far away,
Yet closer than anyone could ever be ,

And perhaps that is what makes you so special…
You are not merely a part of my life ,
You are the feeling that make my life beautiful…

 

बंगाल में बनेंगे चार नए रीजनल एयरपोर्ट

कोलकाता, नि.सं.। पश्चिम बंगाल में एयर कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए राज्य में चार और रीजनल एयरपोर्ट विकसित किए जाएंगे। इसके लिए अगले हफ्ते केंद्र सरकार, पश्चिम बंगाल सरकार और एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एएआई) के बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर होगा। यह एमओयू साइनिंग प्रोग्राम 23 सितंबर को राज्य सचिवालय नवान्न के मुख्य सभागार नबन्ना सभागार में आयोजित होगा। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी मौजूद रहेंगे। एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि कार्यक्रम की तैयारियां शुरू हो गई हैं। प्रस्तावित चार रीजनल एयरपोर्ट पुरुलिया जिले के छर्रा, दक्षिण दिनाजपुर के बालुरघाट, अलीपुरद्वार के हासीमारा और पश्चिम मिदनापुर के कलाईकुंडा में बनेंगे। इनमें हासीमारा और कलाईकुंडा भारतीय वायुसेना के महत्वपूर्ण बेस भी हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “राज्य सरकार इन प्रोजेक्ट्स के लिए जमीन, बिजली, पानी और अन्य सेवाएं उपलब्ध कराएगी। केंद्र सरकार एयरपोर्ट के बुनियादी ढांचे का विकास करेगी और एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया एयर ट्रैफिक की जिम्मेदारी संभालेगी।”
इस मौके पर केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू, पश्चिम बंगाल के परिवहन मंत्री अर्जुन सिंह, मुख्य सचिव मनोज कुमार अग्रवाल, केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय के सचिव, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के चेयरमैन और संबंधित जिलों के सांसद व विधायक भी मौजूद रहेंगे।
यह एमओयू केंद्र सरकार की संशोधित ‘उड़ान 6.0’ योजना के तहत साइन किया जाएगा। बता दें कि मॉडिफाइड उड़ान योजना भारत की रीजनल एयर कनेक्टिविटी स्कीम का अगला चरण है।
अधिकारी के अनुसार, इस एमओयू के साइन होने से पुरुलिया, दक्षिण दिनाजपुर, अलीपुरद्वार और पश्चिम मिदनापुर में हवाई संपर्क के बुनियादी ढांचे और रीजनल हवाई सेवाओं को मजबूती मिलेगी।
केंद्र की रीजनल कनेक्टिविटी स्कीम के तहत समझौते के अनुसार राज्य सरकार जरूरी जमीन, संपर्क सड़कें, बिजली आपूर्ति, पानी की आपूर्ति और बुनियादी सुरक्षा की जिम्मेदारी लेगी, जबकि केंद्र सरकार एयरपोर्ट का बुनियादी ढांचा तैयार करेगी।

 

बंगाल में दुर्गा पूजा से पहले 25 हजार करोड़ की परियोजनाओं का होगा शिलान्यास

कोलकाता, नि.सं. । पश्चिम बंगाल में बड़े औद्योगिक निवेश को लेकर चर्चा के बीच भाजपा की प्रदेश महासचिव लॉकेट चटर्जी ने बुधवार को अपने सोशल मीडिया हैंडल पर उद्योगपति और आरपी-संजिव गोयनका समूह के चेयरमैन संजीव गोयनका का एक वीडियो साझा किया है। गोयनका ने पश्चिम बंगाल में करीब 25 हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव का उल्लेख किया है। लॉकेट चटर्जी ने इसे बंगाल में निवेश और औद्योगिक विकास के संदर्भ में साझा करते हुए ‘पहले और अब’ की तुलना का राजनीतिक संदेश दिया है।
गोयनका ने बताया कि राज्य में वितरण कारोबार को मजबूत करने के लिए अब तक मुख्य रूप से वितरण नेटवर्क के आधुनिकीकरण, मीटरिंग व्यवस्था और अन्य कार्यों पर हर साल करीब 100 करोड़ रुपये का निवेश किया जाता रहा है। उनके मुताबिक, अब करीब 25 हजार करोड़ रुपये के बड़े निवेश का प्रस्ताव राज्य सरकार के समक्ष रखा गया है और इसे सरकार की मंजूरी भी मिल चुकी है।

गोयनका ने यह भी संकेत दिया है कि इस निवेश से जुड़ी परियोजना का शिलान्यास दुर्गापूजा से पहले किया जा सकता है। बंगाल में दुर्गा पूजा के पहले पांच हजार मेगावाट-घंटे क्षमता वाली बैटरी ऊर्जा भंडारण परियोजना का शिलान्यास होने जा रहा है। गोयनका समूह की ओर से इससे पहले ऊर्जा क्षेत्र में एक बड़ी बैटरी ऊर्जा भंडारण परियोजना की घोषणा की जा चुकी है। दिसंबर 2025 में संजीव गोयनका ने 5,000 मेगावाट-घंटे क्षमता वाली बैटरी ऊर्जा भंडारण परियोजना के लिए करीब 12 हजार करोड़ रुपये के निवेश की घोषणा की थी। गोयनका के अनुसार, परियोजना के पूरा होने के बाद कोलकाता की बिजली जरूरतों का कम से कम 50 प्रतिशत हिस्सा नवीकरणीय ऊर्जा से पूरा करने में मदद मिल सकती है। गोयनका समूह ने दिसंबर 2025 में ऊर्जा, शिक्षा और स्वास्थ्य सहित विभिन्न क्षेत्रों में कुल 15,800 करोड़ रुपये के प्रस्तावित पूंजीगत निवेश की जानकारी दी थी। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा 5,000 मेगावाट-घंटे की ऊर्जा भंडारण परियोजना का था, जिस पर करीब 12 हजार करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान बताया गया था। समूह की ओर से इस परियोजना के लिए जमीन को लेकर आवेदन किए जाने की जानकारी भी सामने आई थी।
समूह ने शिक्षा क्षेत्र में अपनी क्षमता बढ़ाने के लिए करीब 500 करोड़ रुपये तथा स्वास्थ्य क्षेत्र में विस्तार के लिए निवेश की योजना का उल्लेख किया था। प्रस्तावित निवेश में एक बड़े अस्पताल की योजना भी शामिल है।

देव शिल्पी विश्वकर्मा ने किए थे ऐसे अद्भुत निर्माण

अक्सर हम भगवान विश्वकर्मा के बारे में सुनते तो रहते हैं लेकिन बहुत ही कम लोग इनके विषय में जानते हैं। चलिए जानते हैं कि भगवान विश्वकर्मा ने किन-किन स्थानों का निर्माण किया, जिनके आधार पर उन्हें देव शिल्पी की उपाधि प्राप्त हुई –
विश्वकर्मा भगवान का परिचय
स्कंद पुराण के अंतर्गत विश्वकर्मा भगवान का परिचय “बृहस्पते भगिनी भुवना ब्रह्मवादिनी। प्रभासस्य तस्य भार्या बसूनामष्टमस्य च। विश्वकर्मा सुतस्तस्यशिल्पकर्ता प्रजापति” श्लोक के जरिए मिलता है।
श्लोक का अर्थ
इस श्लोक का अर्थ है महर्षि अंगिरा के ज्येष्ठ पुत्र बृहस्पति की बहन भुवना ब्रह्मविद्या की जानकार थीं। उनका विवाह आठवें वसु महर्षि प्रभास के साथ संपन्न हुआ था। विश्वकर्मा इन दोनों की ही संतान थे।
ब्रह्मा जी का पुत्र कहा गया है
कहीं-कहीं भगवान विश्वकर्मा को ब्रह्मा जी का पुत्र भी कहा गया है, जिन्हें देवताओं का शिल्पी के रूप में जाना जाता है। इसके अलावा विश्वकर्मा भगवान को सभी शिल्पकारों और रचनाकारों का भी इष्ट देव माना जाता है।
विश्वकर्मा भगवान को ब्रह्मांड का रचयिता भी माना जाता है, ऋग्वेद के अंतर्गत इन्हें सर्वश्रेष्ठ सत्य के तौर पर भी उल्लिखित किया गया है।
वाल्मीकि रामायण के अनुसार रावण की सोने की खूबसूरत लंका का निर्माण भगवान विश्वकर्मा ने ही किया था। पुराणों के अनुसार माल्यवान, माली और सुमाली नामक तीन राक्षस भगवान विश्वकर्मा के पास गए और उनसे अपने लिए भव्य महल और राज्य का निर्माण करने के लिए कहा।
धन कुबेर के लिए लंका बनाई जो रावण की हो गयी
जबकि कुछ स्थानों पर यह पढ़ने को मिलता है कि रावण के सौतेले भाई, धन कुबेर के कहने पर ही विश्वकर्मा ने सोने की लंका निर्माण किया था। इस लंका को बाद में धन कुबेर ने ही रावण को दे दिया था।
रामसेतु का निर्माण
जब रावण सीता का हरण कर अपने पुष्पक विमान पर बैठाकर उन्हें लंका से जाता है तब वहां तक पहुंचने के लिए भगवान राम की आज्ञा पाकर वानर सेना ने सागर पर पुल बांधा था।
नल
वाल्मीकि रामायण के अनुसार शिल्पकला में निपुण नल नामक वानर जो विश्वकर्मा का ही पुत्र था, ने रामसेतु का निर्माण किया था।
भगवान शिव के रथ का निर्माण
जिस रथ पर बैठकर महादेव ने विद्युन्माली, तारकाक्ष और कमलाक्ष का वध किया था, उस रथ का निर्माण करने वाले भगवान विश्वकर्मा ही थे। महादेव का यह रथ सोने का था जिसके दाहिने चक्र में सूर्य और बाएं चक्र में चंद्रमा विराजमान थे। इसके अलावा दाहिने पहिए में 12 और बाएं पहिए में 16 आरे थे।
द्वारका नगरी का निर्माण
श्रीकृष्ण की द्वारका नगरी का निर्माण करने वाले भी भगवान विश्वकर्मा ही थे। इस नगरी के आधार पर भगवान विश्वकर्मा ने अपनी वैज्ञानिक समझ की एक अद्भुत मिसाल पेश की थी। द्वारका नगरी की लंबाई और चौड़ाई, दोनों ही 48 कोस की थी। वास्तुशास्त्र के अनुसार इस नगरी में भवन, सड़के, गलियों और चौराहों का निर्माण किया गया था।
देवताओं के शिल्पकार
देवताओं के शिल्पकार विश्वकर्मा को समर्पित विश्वकर्मा दिवस भी मनाए जाने की परंपरा है। विश्वकर्मा पूजा पर सभी कारीगर अपने-अपने औजारों की पूजा करते हैं।

महानायक उत्तम कुमार के नाम पर न्यू टाउन में बनेगा फिल्म सेंटर

कोलकाता,  नि.सं.। बांग्ला सिनेमा के महानायक उत्तम कुमार की जन्म शताब्दी के अवसर पर राज्य सरकार ने फिल्म जगत से जुड़ी एक महत्वपूर्ण पहल की है। राज्य के सूचना एवं संस्कृति विभाग की ओर से न्यू टाउन में उत्तम कुमार फिल्म सेंटरका निर्माण किया जाएगा। करीब 25 करोड़ की लागत से बनने वाले इस फिल्म सेंटर की आधारशिला रखी जाएगी। शुक्रवार सुबह मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने महानायक उत्तम कुमार की जयंती शतवर्षिकी के उपलक्ष्य में आयोजित वाक का नेतृत्व किया। इससे पहले गुरुवार शाम नंदन परिसर में राज्य सरकार के सूचना एवं संस्कृति विभाग की पहल पर महानायक उत्तम कुमार की जन्म शताब्दी वर्ष समारोह की शुरुआत हुई। सरकार के अनुसार, प्रस्तावित उत्तम कुमार फिल्म सेंटर को तीन प्रमुख हिस्सों में विकसित किया जाएगा। पहले हिस्से में 700 से 750 सीटों की क्षमता वाले दो सिनेमा हॉल, एक पूर्वावलोकन थिएटर, भोजनालय और वाहन पार्किंग की सुविधा होगी। दूसरे हिस्से में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए करीब 1,000 दर्शकों की क्षमता वाला सभागार और खुले में रंगमंच बनाया जाएगा। फिल्म सेंटर का तीसरा हिस्सा आधुनिक फिल्म तकनीक पर केंद्रित होगा। यहां एनीमेशन, दृश्य प्रभाव, गेमिंग, कॉमिक्स, आभासी वास्तविकता और फिल्मों के निर्माण के बाद के तकनीकी कार्यों के लिए प्रयोगशालाएं और स्टूडियो विकसित किए जाएंगे। सरकार का कहना है कि यह सुविधा राज्य के मीडिया और मनोरंजन उद्योग के लिए महत्वपूर्ण सहायक केंद्र के रूप में काम करेगी। पश्चिम बंगाल सरकार के अनुसार, बंगाली फिल्मों में एनीमेशन और दृश्य प्रभावों की भूमिका आने वाले समय में और महत्वपूर्ण होने वाली है। पारिवारिक कहानियों के साथ अब साहसिक और काल्पनिक फिल्मों की लोकप्रियता भी बढ़ रही है। ऐसे में आधुनिक तकनीक के माध्यम से फिल्मों में जंगल, काल्पनिक जीव और प्राचीन शहरों जैसे दृश्यों को अधिक वास्तविक रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है।

 

भवानीपुर एजुकेशन सोसायटी कॉलेज में दिवसीय डिकोडिंग पाठ्यक्रम विषय पर कार्यशाला 

कोलकाता । भवानीपुर एजुकेशन सोसायटी कॉलेज के बी. कॉम सेमेस्टर सात और आठ के अध्ययन सम्बन्धी विविध विषयों पर शिक्षकों के लिए कार्यशाला का आयोजन किया गया। आई क्यू ए सी,सीसीएफ नेप 2020,भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज द्वारा संयुक्त संयोजन में हुई कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में यू जी बोर्ड आफ स्टडीज कलकत्ता विश्वविद्यालय के पूर्व चेयरपर्सन प्रोफेसर डॉ ध्रुब रंजन दंदापत , वर्तमान चेयर पर्सन प्राे शुभायन बासु , चेयर पर्सन प्राे जादव कृष्ण दास कॉमर्स विभाग , विभागाध्यक्ष प्राे डॉ राम प्रह्लाद चौधरी और कालेज के वाणिज्य विभाग के विभागाध्यक्षो ने दीप प्रज्ज्वलित किया और अपने वक्तव्य दिए। दो सत्रों के सभी अतिथियों का स्वागत किया गया। प्रो दिलीप शाह ने अपने स्वागत वक्तव्य में कहा कि आज मुंबई में भी कई विदेशी शिक्षण संस्थाएं आ गई हैं ,आज विश्व में बदलाव आ रहा है और विश्व डायनमिक है। आज टीचर भी उपलब्ध हैं।हम सभी सीख रहे हैं। भ्रमों का निवारण करने के लिए इस प्रकार की कार्यशालाएं होती रहें जिससे कई विद्वानों के विचारों का आदान-प्रदान होता रहता है। भवानीपुर कॉलेज सात और आठ सेमेस्टर के विषय में कार्यशाला करने में प्रथम है।बोर्ड आफ स्टडीज के चेयरपर्सन से हमें प्रामाणिक सुझाव मिलेगा कि शिक्षकोंं को अपने पाठ्यक्रम को किस प्रकार पूरा किया जाय साथ ही पेपर पैटर्न और शोध विषय पर कैसे ध्यान दिया जाए।आज पाठ्यक्रम कभी भी परिवर्तित हो सकता है।
-बोर्ड आफ स्टडीज -पूर्व चेयरपर्सन प्रोफेसर डॉ ध्रुव रंजन डंडापत टीचिंग लर्निंग प्रोसेस , रिसर्च इन्टर्नशिप क्या है पर अपने विचार व्यक्त किया और कहा कि अभी भी शिक्षा नीति 2020 के शोध विषय में पूरी तरह दिशा निर्देश नहीं दिए गए है फिर भी हमें विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम के अनुसार ही पढ़ाना पड़ेगा।
कॉलेज के संयुक्त संयोजन में 10.9.26 को 10.30बजे से हुआ। दूसरे सत्र में भी विद्वानों ने अपने विचार व्यक्त किए। भवानीपुर कॉलेज के कॉमर्स विभागाध्यक्ष डॉ पारमिता चक्रवर्ती, वाइस प्रिंसिपल डॉ सास्प चक्रवर्ती, डॉ जोयिता भादुड़ी, डॉ सायन राय,रेक्टर और डीन डॉ प्रो दिलीप शाह,वाइस प्रिंसिपल प्रो मीनाक्षी चतुर्वेदी और वाणिज्य विभाग के सभी शिक्षक शिक्षिकाओं की उपस्थिति रही। डॉ वसुंधरा मिश्र ने बताया कि कोलकाता के कई महाविद्यालयों के वाणिज्य विभाग से शिक्षक शिक्षिकाओं ने कार्यशाला में भाग लिया।

भवानीपुर एजुकेशन सोसायटी कॉलेज में एंटी ड्रग जागरूकता पर परिचर्चा

कोलकाता । भवानीपुर एजुकेशन सोसायटी कॉलेज में कोलकाता पुलिस द्वारा एंटी ड्रग जागरूकता पर परिचर्चा की गई। भालो बाशा ड्रग डीएडीक्शन सेंटर से सुभाषिश नाथ आए और उन्होंने अपने जीवन की मार्मिक कहानी सुनाई। अट्ठारह वर्षों तक सुभाषिश नाथ ने ड्रग्स एडिक्ट रहकर अपने जीवन को और अपने परिवार को बहुत ही दर्दनाक कष्ट दिए। ड्रग्स रहित होकर ही हम अपने जीवन को सुधार सकते हैं और साथ ही परिवार और देश के युवाओं को बचा सकते हैं। कोलकाता पुलिस के एसीस्टेंट कमिश्नर आफ पुलिस सौमित्र बासु ने विद्यार्थियों के साथ अपने विचारों को साझा किया और एक डाक्यूमेंट्री फिल्म दिखाई जिसमें ड्रग्स से कैसे युवा पीढ़ी की बरबादी होती है और अपने दृढ़ संकल्प के द्वारा अपने जीवन को कैसे संवारा जाता है इसका संदेश दिया। प्रो दिलीप शाह और प्रो मीनाक्षी चतुर्वेदी ने कोलकाता पुलिस को धन्यवाद दिया। यह कार्यक्रम 11सितंबर को सोसायटी हाल में हुआ। डॉ रेखा शांतिलाल, डॉ देविना गुप्ता, डॉ वसुंधरा मिश्र की उपस्थिति रही।इस परिचर्चा में विद्यार्थियों ने प्रश्न भी पूछे।

गोलेंद्र पटेेल की दो कविताएं

प्रेम-तीर्थ के पथ पर प्रेमचंद से प्रार्थना
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प्रिय धनपतराय!
अपनी पीढ़ी की सीढ़ी पर चढ़ता हुआ
मेरा कवि मुझसे कह रहा है कि
काश कि सभी को पता होता कि
विश्वास के आकाश में गजब का प्रकाश है
पर भयभीत भाषा में यथार्थ का विनाश है!

हे रव के रवि!
क्या कथा में चरित्र की छद्म छवि
उद्देश्य की ‘सौत’ है?

जब भी देखा
जर्जर वस्त्र में देह का दीपक अधिक देखा
फटे जूते में अनंत ‘समर-यात्रा’ का पथिक देखा
शायद पिता अजायबराय प्रसिद्ध पोस्टमैन थे
बाल्यकाल में ही दुनिया के लेखकों से परिचित
कलम का सच्चा सिपाही देखा

जब भी सुना मैंने
‘सूरा’ और ‘होरी’ की तबाही सुनी
‘गोबर’ और ‘धनिया’ की गवाही सुनी
‘बुधिया’ की चीख सुनी
मनुष्यता की मिट्टी में उगी ईख की सीख सुनी

और सुना
‘सोजेवतन’ में ‘बलिदान’ का गान
सार्थक स्वर का स्वाभिमान
‘अफसाना कुहन’, ‘कफ़न’ ,’सद्गति’, ‘सेवादसदन’, ‘निर्मला’
‘प्रेरणा’, ‘कायाकल्प’, ‘सवा सेर गेहूँ’, ‘प्रेम-पचीसी’,
‘ईदगाह’, ‘पंच-परमेश्वर’, ‘परीक्षा’ , ‘बालक’ , ‘नमक का दरोगा’, ‘प्रेमाश्रम’
‘बड़े घर की बेटी’, ‘दो बैलों की कथा’, ‘रंगभूमि’, ‘गोदान’, ‘गबन’ व ‘कर्बला’
‘आत्माराम’! इनमें भारतीय आत्मा की आवाज़ है
सारे संसार की स्याह संस्कृति का संपूर्ण समाज है

तुम्हारी स्वतंत्रता की चाहत में
एक अलग तरह का स्वराज है
‘सोफिया’ से लेकर ‘मालती’ तक, ‘विनय’ से लेकर ‘मेहता’ तक
सभी के बीच ‘गोविंदी’ के गुणों की चर्चा है
बहुत मिठी मिठाई मर्चा है
कुर्सी पर ‘जॉन’ की जगह ‘जयसिंह’ का परचा है
स्वच्छंद, निस्पृह और विचारशील व्यक्ति की दृष्टि
सृष्टि की सेवा में दृश्य धुनती है
और सुबह-शाम सागर में मोती चुनती है
जहाँ विचारोत्कर्ष है सौंदर्य का वास्तविक शृंगार

‘सर्वहारा वीर’ तो तुम नहीं थे
दिशाहारा तो तुम नहीं थे
राहहारा तो तुम नहीं थे
हे गद्य के तुलसी! हे कथा सम्राट! हे कहानीकार!
थे तुम ‘बलिदान-पथ’ के चिरंजीवी चिंतक
तुम्हारे सोच की सृजन में शामिल रहे
‘गोर्की’ और ‘लूशुन’ के विचार

हे दलित के दीपक! हे गाँव के गायक!
हे नर के नायक!
दोस्त-दुश्मन की पहचान थी तुम्हें खूब
बूढ़ी महाजनी सभ्यता और
मरजाद की बेड़ियों को काटने की कला
भला कौन नहीं सीखना चाहता है?
तुमने सिखाया क्रांति के पक्ष में खड़ा होना
तुमने सिखाया बुरे वक्त में बुद्धि से बड़ा होना

हे चेतना के चिराग!
तुमने लगाई शोषकों के महल में आग
तुमने गाया सदा रोशनी का राग
तुमने सीधी-साधी बात सीधी-साधी जनता को
सरल-सहज-सरस भाषा में समझाया

हे सत्य के साधक!
परिवर्तन के युद्ध के बुद्ध!
स्नेह, समता, न्याय से प्रतिबद्ध, साहित्य के सूर्य!
ज़िन्दगी की तान के तूर्य!
तुम्हारी कथा की धमनियों में धरती की धुन,
खेतों की ख़ुशबू, विविध फूलों के रंग, नदी की उमंग
और भोर का भक्त नक्त है, संवेदना सशक्त है
शहर का राजनीतिक रक्त है, वाया वक्त है

हे ‘शतरंज के खिलाड़ी’!
अँधेरे में मानवता की मणि!
गगन भी गाता है तुम्हारा गौरव गीत, हे मुंशी मीत!
लमही से आ रही है जय की लय
तुम्हारे शब्द दुख की दुपहरी में वृक्ष बन गए
और तुम्हारी प्रोक्ति ‘लाल फीता’ का बंधन तोड़ने की ‘प्रेम-प्रतिज्ञा’
तुमसे हर आदमी आदमी होने का हुनर हासिल करता है

हे ‘प्रेम सरोवर’ के अरुण कमल!
तुम स्वप्न, संघर्ष व साहस के स्रष्टा हो
तुम भविष्य द्रष्टा हो
तुमने बताया, ‘एक गिलास पानी’ का महत्व
__’नवजीवन’ का तत्व
चारों ओर दुविधा और दहशत का धुआँ है
‘गंगी’ के पति ‘जोखू’ के सामने मौत का कुआँ है
जी हाँ, जो एक ‘ठाकुर का कुआँ’ है

हे ऋषि-कथाकार प्रेमचंद!
कहानी के अद्वितीय छंद!
संकल्प के अभियान में तब्दील होना
असल में आगामी प्रलय की प्रयोगशाला में पुरखों को बोना है
हवा नहीं है अनुकूल
परिवेश है प्रतिकूल
मैं तुम को बो रहा हूँ कविता की क्यारी में किसान की तरह
तन-मन से बहुत जतन से, साधना के सपूत!

हे मानस के हंस!
‘नवनिधि’ के ‘मंगल सूत्र’!
नये ‘संग्राम’ में ‘प्रेम की वेदी’ पर चढ़ने की शक्ति दो मुझे!
मैं ‘कर्मभूमि’ में ‘पूस की रात’ का ‘हल्कू’ हूँ
‘प्रेम-प्रमोद’ की गोद में ले लो मुझे
आज ‘प्रेम-पंचमी’ है परसों नागपंचमी
‘प्रेम-तीर्थ’ के पथ पर
मुझ अबोध पाठक की यही प्रार्थना है रोज़
कि हर सुबह हर घर खिले ‘सप्तसुमन’ व ‘सप्त सरोज’!
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युद्ध और शांति
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मन के भीतर जल रहा, घृणा-द्वेष का दाह
बाहर हँसता आदमी, भीतर टूटी चाह
सीमाएँ बारूद हैं, सत्ता अंधी रीत
रोती धरती पूछती किसकी हुई है जीत?

बुद्ध लड़े थे मौन से, अपने ही अंधजाल
तभी जली जग के लिए, करुणा की मशाल
तर्क जहाँ अपमानित हो, नारा बने प्रमाण
अंधविश्व के शोर में, मरता वैज्ञानिक ज्ञान।

बच्चों की मुस्कान पर, बरसे जब अंगार
दुखी मानवता लगे, काँप उठे संसार
धर्म वही जिसमें बहे, प्रेम-दया की धार
करुणा-मैत्री से सजे, मानव का व्यवहार।

यदि लड़ना ही है मनुज, लड़ अपने ही दोष
बुद्धत्वों की जीत में, जग पाए संतोष
बारूदों से टूटते, मंदिर-मस्जिद-देश
करुणा के सम्मुख सदा, हार गया विद्वेष।

©गोलेन्द्र पटेल (पूर्व शिक्षार्थी, हिन्दी विभाग, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी।/युवा कवि-लेखक, साहित्यिक एवं सांस्कृतिक चिंतक)

संपर्क (डाक पता):- ग्राम-खजूरगाँव, पोस्ट-साहुपुरी, तहसील-मुगलसराय, जिला-चंदौली, उत्तर प्रदेश, भारत।
पिन कोड : 221009
व्हाट्सएप नं. : 8429249326
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हिंदी दिवस पर महाराजा मर्नीद्र चंद्र कॉलेज में अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी 

कोलकाता । महाराजा मर्नीद्र चंद्र कॉलेज, कोलकाता के हिंदी विभाग द्वारा एक अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह संगोष्ठी पश्चिम बंगाल राष्ट्रभाषा प्रचार समिति एवं आइक्यूएसी महाराजा मर्नीद्र चंद्र कॉलेज के सहयोग से संपन्न हुई। “ग्राम बंगाल की लोक संस्कृति और हिंदी लोक साहित्य की संवेदना एवं अभिव्यक्ति : भारतीय ज्ञान परंपरा विषय पर आयोजित संगोष्ठी में देश-विदेश के विद्वानों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ मंगलाचरण एवं वंदे मातरम् से हुआ। इस अवसर पर मंत्री  तापस रॉय, मंत्री पूर्णिमा चक्रवर्ती तथा विधायक रितेश तिवारी ने जल अर्पण कर कार्यक्रम का विधिवत उ‌द्घाटन किया। इस अवसर पर हिंदी विभाग के विद्यार्थियों ने ‘प्रयास’ वार्षिक दीवार पत्रिका और ‘हिंदी लोक साहित्य’ प्रदर्शनी लगाई। कलकत्ता विश्वविद्यालय की परीक्षाओं में प्रथम श्रेणी प्राप्त करने वाले मेधावी विद्यार्थियों को मेडल एवं प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। रितेश तिवारी, अध्यक्ष, गवर्निंग बॉडी, महाराजा मनींद्र चंद्र कॉलेज ने कहा कि महावि‌द्यालय में शैक्षणिक गतिविधियों के साथ भारतीय लोक संस्कृति और लोक साहित्य को जोड़ना विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। काॅलेज के प्राचार्य डॉ. गौतम कुमार घोष ने अपने वक्तव्य में हिंदी भाषा एवं साहित्य के सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि लोक साहित्य समाज की जीवंत सांस्कृतिक स्मृति है।
आइक्यूएसी की समन्वयक डॉ. झूमा भौमिक ने लोक साहित्य एवं लोक संस्कृति को समाज की सामूहिक चेतना और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण अंग बताया । शांबा दत्ता, शिक्षक सचिव ने हिंदी भाषा, लोक साहित्य और भारतीय सांस्कृतिक परंपरा के महत्व को रेखांकित किया।
संगोष्ठी में श्रीलंका के सबरागमुवा विश्वविद्यालय के डॉ. ब्रेसिल नगोडा भिताना, एवं प्रो. ची झिलोंग, स्कूल आफ इंटरनेशनल कम्युनिकेशन यूनिवर्सिटी ऑफ चीन ने ऑनलाइन माध्यम से सहभागिता की। दोनों वक्ताओं ने क्रमशः श्रीलंका और चीन की लोक साहित्यिक एवं लोक-सांस्कृतिक परंपराओं पर प्रकाश डालते हुए उनकी विशेषताओं तथा भारतीय लोक परंपराओं के साथ उनके संबंधों और तुलनात्मक पक्षों पर विचार व्यक्त किया। कलकत्ता विश्वविद्यालय के डॉ. शांतनु पाल ने भारतीय ज्ञान परंपरा और प्रकृति के बीच गहरे संबंध को रेखांकित किया। उन्होंने विशेष रूप से भारत की पारंपरिक औषधीय ज्ञान-परंपरा का उल्लेख किया। चटगांव विश्वविद्यालय, बांग्लादेश के  प्रदीप घोष ने बंगाल की लोक संस्कृति पर सारगर्भित वक्तव्य रखते हुए लोकजीवन, लोक अभिव्यक्ति और दृश्य माध्यमों के संबंध पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बंगाल की लोक परंपराओं, कथाओं और सांस्कृतिक स्मृतियों को साहित्य के साथ-साथ सिनेमा एवं अन्य कलामाध्यमों के द्वारा भी नई पीढ़ी तक पहुँचाया जा सकता है। महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा के डॉ. अनिर्बाण घोष ने अपने व्याख्यान में भाषा, संस्कृति और लोक परंपरा के अंतर्संबंधों पर प्रकाश डाला।
विद्यासागर विश्वविद्यालय के डॉ. संजय जायसवाल ने कहा भारतीय ज्ञान परंपरा की महत्वपूर्ण परंपराएं लोक साहित्य और लोक संस्कृति से निर्मित हुई हैं।लोक के बिना भारतीय ज्ञान परंपरा का मूल्यांकन संभव नहीं है। इस अवसर पर जयिता सेन बराट, क्षेत्रीय निदेशक, पश्चिम बंगाल राष्ट्रभाषा प्रचार समिति ने हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार तथा लोक साहित्य और लोक संस्कृति के संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया। हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. सुमिता चट्टोराज ने ग्राम बंगाल की लोक संस्कृति तथा हिंदी-बांग्ला लोक साहित्य की परस्पर संबद्धता पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर विभाग के विद्यार्थियों ने नृत्य, संगीत और नाटक का मंचन किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में नसीमा खातून, जसमीन खातून, विनीता शॉ, संध्या कुमारी, स्नेहा मौर्या, संजना शॉ, खुशी शॉ, प्रवीर महतो, आदित्य शॉ, आयुष प्रसाद, नंदिनी शर्मा, निशा यादव, पूर्णिमा कोहार, सलोनी सिंह, निशा मल्लिक आदि ने विशेष सहयोग दिया। कार्यक्रम का संयोजन और संचालन डॉ सुमिता चट्टोराज ने किया।

मेगा “स्वच्छ सागर, सुरक्षित सागर” अभियान

विद्यासागर विश्वविद्यालय की पहल 

-मंदारमनी और बोगुरन-जलपाई बीच पर हुई सफाई

पूर्व मेदिनीपुर ।  समुद्री पारिस्थिकी को बचाने और तटीय इलाकों में लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से, ‘कोस्टल ऑब्जर्वेटरी एंड आउटरीच सेंटर’ ने आज रविवार को एक बड़े “स्वच्छ सागर, सुरक्षित सागर जागरूकता और समुद्री तट की सफाई अभियान का संयुक्त रूप से आयोजन किया और उसे सफलतापूर्वक पूरा किया। इस सेंटर की स्थापना भारत सरकार के ‘इंडियन नेशनल सेंटर फॉर ओशन इंफॉर्मेशन सर्विसेज’ और विद्यासागर विश्वविद्यालय के ‘सेंटर फॉर एनवायर्नमेंटल स्टडीज’ की फंडिंग से दीघा में की गई थी।
यह कार्यक्रम पूर्वी मेदिनीपुर के दो अहम समुद्री तटों- मंदारमनी में दक्षिण पुरुषोत्तमपुर और बोगुरन-जलपाई तट पर एक साथ आयोजित किया गया। इसका आयोजन भारत सरकार के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तहत काम करने वाले आईएनओआईएस के औपचारिक समन्वय में किया गया।
इस अवसर पर विद्यासागर विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ. जयंत किशोर नंदी मुख्य संरक्षक के तौर पर मौजूद थे। रामनगर विधानसभा क्षेत्र के विधायक डॉ. चंद्रशेखर मंडल और मुगबेरिया गंगाधर महाविद्यालय के प्रिंसिपल डॉ. स्वपन कुमार मिश्रा ने मुख्य अतिथि के तौर पर कार्यक्रम में हिस्सा लिया और उत्साह बढ़ाया। पूरा कार्यक्रम सेंटर फॉर एनवायरनमेंटल स्टडीज़ के डायरेक्टर, कोस्टल ऑब्ज़र्वेटरी एंड आउटरीच सेंटर के कोऑर्डिनेटर और डॉ. जातिशंकर बंद्योपाध्याय के दूरदर्शी नेतृत्व में आयोजित किया गया। केंद्रीय स्तर से पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के संयुक्त सचिव श्री श्रीनिवास राव गांगी रेड्डी और वैज्ञानिक श्री ई. पट्टाभि राम राव मौजूद थे।
शिक्षा और शोध के क्षेत्र में बहुआयामी सहयोग के प्रमाण के तौर पर, ओशन जियोमैटिक्स विद एआई विभाग के डॉ. सौरव माइती और रिमोट सेंसिंग और जीआईएस विभाग के डॉ. निरूपम आचार्य और डॉ. अमृता कामिला ने इस अभियान में सक्रिय रूप से भाग लिया। भारत सरकार के INCOIS-MoES द्वारा स्वीकृत प्रोजेक्ट के तहत विश्विद्यालय के एक शोधार्थी सौम्यकांति पांडा, मुगबेरिया गंगाधर महाविद्यालय के फैकल्टी स्नेहाशीष मंडल और विद्यासागर विश्वविद्यालय के शोधार्थी अविक साहा ने इसके समग्र प्रबंधन और संचालन की जिम्मेदारी बखूबी निभाई।
पर्यावरण की सुरक्षा के लिए एकजुट होकर तीन सौ से ज़्यादा उत्साही लोगों- जिनमें अलग-अलग स्कूलों और कॉलेजों के छात्र, काजला जनकल्याण समिति के सदस्य, स्थानीय ग्रामीण और पारंपरिक मछुआरा समुदाय के लोग शामिल थे। इन्होंने समुद्र तट पर जमा कचरे को साफ़ करने और टिकाऊ तटीय जीवनशैली का संदेश फैलाने के लिए खुद से पहल की। अकादमिक शोध, सरकारी सहयोग और जन-भागीदारी का यह सफल संगम अगली पीढ़ी के लिए एक स्वस्थ, स्वच्छ और सुरक्षित समुद्री भविष्य बनाने के राष्ट्रीय संकल्प को और मजबूत करता है। कार्यक्रम में मौजूद सभी लोगों ने उम्मीद जताई कि दीघा में स्थित यह समुद्री और तटीय अनुसंधान केंद्र व्यापक रूप से विकसित होगा और पूर्वी भारत में एक अनोखे क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र के रूप में उभरेगा।