Monday, July 13, 2026
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नवरात्रि में दिखें बस आप ही आप

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इस नवरात्रि को अपने स्टाइलिश अन्दाज से खास बनाना है तो सिर्फ परिधान  पर ध्यान देना काफी नहीं है। हालाँकि डाँडिया में लहँगा आपकी पहली पसन्द है मगर आप अपने परिधानों के साथ प्रयोग कर सकती हैं। एक मुक्कमल लुक के लिए हल्के जेवर और फ्लैट चप्पलें या फुटवेयर बेहतर हैं।

नवरात्रि में चटकीले रंगों के परिधान पहनकर आप दिखेंगी सबसे स्टाइलिश और अलग। लेमन, हरे रंग के अलग –अलग शेड्स, पिच, गाजरी और नीले रंग के शेड्स के साथ प्रयोग करें।

 

नवरात्रि सेलिब्रेशन में डांडिया नाइट जा रही हैं तो भारी और कीमती जेवर न पहनें। पहली बात तो ये इस उत्सव के हिसाब से भारी लगेंगे और साथ ही कई बार भीड़ की वजह से इनके खोने का डर भी लगा रहता है। बेहतर होगा कि इस मौके पर लहंगे के साथ फंकी, फैशनेबल और ऑक्सीडाइज्ड गहने पहनें।

 

इस मौके पर जितने आरामदायक कपड़े पहनेंगी, उतना ही आनन्द उठा सकेंगी। खादी, कॉटन, सिल्क और शिफॉन फैब्रिक वाले परिधान सबसे अच्छी पसन्द हैं जिनको आप लहंगे, साड़ी और चोली हर एक में इस्तेमाल कर सकती हैं।

वैसे तो डांडिया नाइट में आपको ज्यादातर महिलाएँ लहंगा-चोली में ही नज़र आएंगी लेकिन आप इस मौके पर अपने स्टाइल को बनाये रखने के लिए आजमाएँ करें कुछ इंडो-वेस्टर्न। धोती पैंट्स और सलवार के साथ क्रॉप-टॉप और केप पहन सकती हैं।

वैसे तो बाजार में आपको कई तरह के ट्रेंडी और स्टाइलिश गहने मिल जाएंगे तो आप ऐसे गहने चुनें जो दिखने में भारी लगती हों लेकिन पहनने में बहुत ही हल्की हो। माथापट्टी, ईयररिंग्स और नेकलेस में आपको ऐसी बहुत सारी वैराइटी मिल जाएगी।

वैसे तो लहंगे के हिसाब से ओपन हेयरस्टाइल बहुत ही खूबसूरत लगता है लेकिन अगर आप नवरात्रि में जमकर आनन्द उठाना चाहती हैं चोटी या जूड़ा करें। यह आपको पसीने से बचाए रखने के साथ ही अच्छे भी लगते हैं. इसके अलावा फ्रेंच और फिशटेल चोटी भी अच्छी लगेगी।

कुछ खास बातें –

झुमकी  – परंपरागत लुक के लिए झुमकी या चांदबाली से बेहतर कुछ भी नहीं। जींस-कुर्ती और चप्पल के साथ एक प्यारी सी बाली आपको एथनिक लुक देने के लिए काफी है। दोस्तों के साथ बाहर घुमने निकलने की तैयारी है तो भारी गहनों की जगह आप केवल बढ़िया सी इयरिंग पहन लें, आपको किसी और एक्सेसरीज़ की ज़रूरत नहीं पड़ेगी।


क्रॉप टॉप-लॉन्ग स्कर्ट – अगर आप ट्रेंडी और पारंपरिक परिधान के बीच का कोई लुक कैरी करना चाहती हैं तो प्रिंटेड या हेवी क्रॉप टॉप के साथ प्लेन लॉन्ग स्कर्ट पहनें। ख्याल रखें आपके टॉप या स्कर्ट में से कोई एक ही भड़कीला हो। अगर आपको अपना वज़न छुपाना है, तो प्लेन क्रॉप टॉप के साथ गहरे रंग की हेवी डिजाइन वाली स्ट्रेट-कट लॉन्ग स्कर्ट पहनें।

दुपट्टा/ बंधेज़ स्टोल – ऑफिस में ज्यादा भड़काऊ और चमकदार कपड़ों से परहेज़ करते हुए अगर परिधान को एथनिक टच देना हो तो आप प्लेन सलवार-कमीज़ के साथ हेवी वर्क वाला दुपट्टा लें या फिर जींस-टॉप के साथ बंधेज़ जयपुरी दुपट्टा भी पहन सकती हैं।

कोटी, जैकेट, श्रग  – अगर दुपट्टा पहनने का दिल न करे तो उसकी जगह आप अच्छी सी श्रग या हैंडलूम वर्क वाली कोटी पहन सकती हैं। खास बात ये कि इन चीज़ों को आप किसी भी मौके पर कैरी कर सकती हैं. इन्हें ‘मोनोटोनी ब्रेकर’ भी कहा जाता है क्योंकि ये बड़ी आसानी से आपके मोनोटोन या बोरिंग लुक को स्टाइलिश बना सकते हैं।


साड़ी – हर लड़की के वॉर्डरोब में कम से कम एक साड़ी तो होनी ही चाहिए। आजकल रॉ सिल्क और शिफॉन ट्रेंड में है। त्योहारों में गहरे रंग की साड़ी पहनें। अगर हेवी वर्क वाली साड़ी नहीं पसंद तो डिजाइनर ब्लाउज़ के साथ प्लेन साड़ी भी खूब चलेगी।

अनारकली कुर्ती/ट्यूनिक – वैसे तो लगभग हर महिला के पास अनारकली कट की कुर्ती होती है लेकिन अगर आप इस बार कुछ और पहनना चाहती हैं तो प्रिंटेड और ट्रेंडी कट्स वाली ट्यूनिक पहनें। इन्हें जींस या जेगिंग्स के साथ पहनें और हाई-हील्स या कोल्हापुरी चप्पल पहनें।

लहंगा – आप फ्यूज़न लहंगा पहनें. ऐसा भी नहीं है कि ये महंगे होते हैं। आप सामान लेकर खुद डिजाइन तैयार करें और अच्छे से दर्जी से सिलवा लें। कम पैसे में डिजाइनर लुक पा सकती हैं।

अँग्रेजी के साथ अन्य भारतीय भाषाओं में अनुवाद कीजिए एेप के साथ

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हाल के कुछ सालों में देखें तो इंटरनेट की दुनिया में हिन्दी का दबदबा बढ़ा है। इसी साल मई में आई एक रिपोर्ट के मुताबिक 88 प्रतिशत भारतीय अंग्रेजी के बजाय क्षेत्रीय भाषा वाले विज्ञापन पर क्लिक करते हैं। वहीं 39 प्रतिशत यूजर्स इंटरनेट का इस्तेमाल हिन्दी में करते हैं तो 5 ऐसे एंड्रॉयड ऐप के बारे में जानते हैं जो अंग्रेजी के साथ कई भाषाओं का हिन्दी में आसानी से अनुवाद कर सकते हैं।

Google Translate
अनुवाद की चर्चा हो तो गूगल ट्रांसलेशन का नाम सबसे पहले आता है। हाल ही में इस ऐप में ऑफलाइन अनुवाद का भी फीचर जोड़ा गया है। इस ऐप की मदद से अंग्रेजी सहित 103 भाषाओं की अनुवाद आप हिन्दी में कर सकते हैं। वहीं ऑफलाइन 59 भाषाओं का अनुवाद कर सकते हैं। इसके अलावा फोटो से 38 भाषाओं में ट्रांसलेशन का ऑप्शन मिलेगा।

Translate: text & voice translator
इस ऐप की मदद से आप आप हिन्दी सहित 100 अलग-अलग भाषाओं का अनुवाद कर सकते हैं। इसके अलावा फोन में मौजूद किसी दूसरे ऐप के टेक्स्ट को भी अनुवाद किया जा सकेगा। यदि आप किसी देश की यात्रा पर हैं तो यह ऐप काफी मददगार है। इसमें आप बोलकर भी अनुवाद कर सकते हैं या फिर आपका दोस्त अंग्रेजी में बोल रहा है तो आप ऐप वॉयस रिकॉग्निशन को ऑन करके हिन्दी में उसकी बातों को समझ सकते हैं।

Hindi English Translator
इस ऐप की मदद से आप अंग्रेजी से हिन्दी और हिन्दी से अंग्रेजी आसानी से सीख सकते हैं। इसके अलावा इस ऐप में कई भाषाओं से अनुवाद का भी ऑप्शन है। इसे आप गूगल प्ले-स्टोर से फ्री में डाउनलोड कर सकते हैं।

English to Hindi Translator
यह पूरी तरह से ऑफलाइन काम करता है। इसे आप फ्री में प्ले-स्टोर से डाउनलोड कर सकते हैं। इस ऐप में हिन्दी की-बोर्ड भी दिया गया है। इस ऐप में शब्दकोष भी दिया गया है।

English Hindi Dictionary
यह ऐप डिक्शनरी के साथ-साथ अनुवादक का भी काम करता है। इस ऐप में ऑफलाइन फीचर भी है। इसमें हिन्दी-अंग्रेजी सीखने के लिए गेम भी दिए गए हैं। इस ऐप को आप गूगल प्ले-स्टोर से फ्री में डाउनलोड कर सकते हैं।

असम में मुस्लिम बना रहे हैं सबसे ऊंची दुर्गा प्रतिमा, गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड में होगी दर्ज

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असम के गुवाहाटी में बांस से बनने वाली सौ फुट ऊंची दुर्गा की प्रतिमा दुनिया में अपने किस्म की सबसे ऊंची प्रतिमा के तौर पर गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज होगी। विष्णुपुर दुर्गा पूजा समिति के लिए कला निदेशक नुरुद्दीन अहमद की देखरेख में बीते एक अगस्त से ही 40 मजदूर दिन-रात इस पर काम कर रहे हैं।

इससे पहले वर्ष 2015 में कोलकाता में फाइबर से बनी 83 फुट की एक प्रतिमा ने ऊंचाई का रिकॉर्ड बनाया था। नुरुद्दीन कहते हैं कि उनसे अक्सर सवाल किया जाता है कि मुसलमान होने के बावजूद वे हिंदू देवताओं की ऐसी प्रतिमा क्यों बनाते हैं। लेकिन वर्ष 1975 से ही यह काम करने वाले अहमद कहते हैं कि कलाकार का कोई धर्म नहीं होता। मानवता की सेवा करना ही उसकी ड्यूटी है। उन्होंने कहा कि इस प्रतिमा को बनाने में पांच हजार बांसों का इस्तेमाल किया गया है।
इस परियोजना के सुपरवाइजर दीप अहमद बताते हैं कि पहले इस प्रतिमा की ऊंचाई 110 फुट रखने का विचार था। लेकिन इस बीच 17 सितंबर को आए एक भयावह तूफान की वजह से ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा। उसके बाद बचे-खुचे समय में दोबारा इसे तैयार करना एक बड़ी चुनौती थी।

लेकिन सबके सहयोग से यह काम लगभग 70 फीसदी पूरा हो चुका है। अहमद बताते हैं कि इस प्रतिमा की खास बात यह है कि सब कुछ बांस से ही बनाया गया है। इसमें किसी धातु या प्लास्टिक का इस्तेमाल नहीं किया गया है।

 

फेसबुक का नया फीचर, करेगा परेशान करने वालों की बोलती बंद

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फेसबुक एक ऐसे फीचर पर काम कर रहा है जिसकी मदद से आप अपने किसी ऐसे दोस्त को कुछ समय के लिए म्यूट कर सकेंगे जो आपको परेशान करते हैं या फिर जिनके पोस्ट आपको पसंद नहीं आते हैं।

एक अंग्रेजी वेबसाइट की रिपोर्ट के मुताबिक न्यूज फीड पर ज्यादा कंट्रोल देने के लिए फेसबुक यह कदम उठा रहा है। नए फीचर के बाद आप किसी दोस्त, पेज या ग्रुप के फीड को बिना अनफ्रेंड/अनफॉलो किए कुछ समय के लिए म्यूट कर सकेंगे। इस फीचर का नाम स्नूज दिया गया है। फीड को 30 दिन, 7 दिन या 24 घंटे के लिए म्यूट किया जा सकेगा।

ऐसे करना होगा म्यूट
अगर आप किसी पेज या दोस्त के पोस्ट को म्यूट करना चाहते हैं तो इसके लिए उसकी टाइमलाइन पर जाना होगा और फिर उसके नाम के दाहिनी ओर दिख रहे 3 डॉट्स पर क्लिक करना होगा। उसके बाद एक ड्रॉप डाउन मीनू खुलेगा जिसमें आपको स्नूज का विकल्प मिलेगा।

 

14 साल की लड़कियों में तेजी से बढ़ रहे हैं अवसाद के लक्षण

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व्यवहार की समस्याएं जैसे कि हिस्टीरिक होने का अभिनय करना, लड़ना और विद्रोही हो जाना, इन सब की शुरुआत बचपन में 5 वर्ष से ही शुरू हो जाती हैं। लेकिन फिर 14 वर्ष की आयु तक ये समस्याएं आजकल ज्यादा ही बढ़ती नजर आ रही हैं। बचपन और शुरुआती किशोरावस्था में लड़कियों की व्यवहार समस्याएं होने की तुलना में लड़कों की अधिक संभावना थी।

लिवरपूल यूनिवर्सिटी और लंदन कॉलेज यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने साल 2000 और 2001 में पैदा हुए दस हजार से भी ज्यादा बच्चों का परीक्षण किया है। इस स्टडी को नाम दिया गया मिलेनियम कोहॉर्ट स्टडी। इस स्टडी में पाया गया कि 3, 5, 7, 11 और 14 साल के उम्र के बच्चों में मानिसक स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें पनपने लगती हैं। उनके माता-पिताओं ने खासकर इस उम्र के बच्चों के बारे में समस्याएं बताईं। और जो बच्चे 14 साल की दहलीज पर पहुंच गए थे उन्होंने खुद ही डिप्रेशन से जुड़े लक्षणों के बारे में सवाल किए। 14 साल के तमाम किशोरों ने अपनी भावनात्मक दिक्कतें साझा कीं। इसमें जरूरी बात ये सामने आई कि इन बच्चों में से 24 फीसदी लड़कियां और 9 फीसदी लड़के डिप्रेशन के शिकार थे।

वहां के नेशनल चिल्ड्रेंस ब्यूरो में प्रकाशित अनुसंधान के अनुसार शोधकर्ताओं ने अवसादग्रस्त लक्षणों और परिवार की आय के बीच संबंधों की जांच भी की। आम तौर पर, बेहतर आयवर्ग वाले परिवारों के 14 वर्षीय बच्चों में गरीब घरों के उनके साथियों के मुकाबले अवसादग्रस्त लक्षणों के उच्च स्तर की संभावना नहीं थी। भावनात्मक समस्याओं की माता-पिता की रिपोर्ट बचपन में लड़कों और लड़कियों के लिए लगभग समान थी, जो 11 वर्ष की आयु में सात से 12 प्रतिशत की उम्र के 7 प्रतिशत बच्चों से बढ़ रही थी। लेकिन, 14 साल की उम्र में किशोरावस्था में पहुंचने पर, भावनात्मक समस्याएं लड़कियों में अधिक प्रचलित होकर बढ़ गई थीं।

किशोरावस्था आते ही बदलने लगता है व्यवहार– व्यवहार की समस्याएं जैसे कि हिस्टीरिक होने का अभिनय करना, लड़ना और विद्रोही हो जाना, इन सब की शुरुआत बचपन में 5 वर्ष से ही शुरू हो जाती हैं। लेकिन फिर 14 वर्ष की आयु तक ये समस्याएं आजकल ज्यादा ही बढ़ती नजर आ रही हैं। बचपन और शुरुआती किशोरावस्था में लड़कियों की व्यवहार समस्याएं होने की तुलना में लड़कों की अधिक संभावना थी। जैसा कि 14 वर्षीय बच्चों की ‘अपनी भावनात्मक समस्याओं की अपनी रिपोर्ट उनके माता-पिता के लिए अलग थी, इस शोध में युवाओं के विचारों को अपने मानसिक स्वास्थ्य पर विचार करने के महत्व पर प्रकाश डाला गया।

लिवरपूल इंस्टीट्यूट ऑफ साइकोलॉजी, हेल्थ एंड सोसाइटी विश्वविद्यालय से प्रमुख लेखक डॉ प्रविथा पाटाले के मुताबिक, हाल के वर्षों में बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर एक बढ़ती हुई नीतिगत ध्यान रखा जा रहा है। हालांकि इस पीढ़ी के लिए मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं की राष्ट्रीय स्तर के प्रतिनिधि अनुमानों की कमी हुई है। अन्य शोध में, हमने पिछली पीढ़ियों की तुलना में लड़कियों द्वारा आजकल बढ़ती मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का उल्लेख किया है और इस अध्ययन में अवसाद की चिंताजनक उच्च दर पर प्रकाश डाला गया है।

मिलेनियल समूह अध्ययन के निदेशक प्रोफेसर इम्ला फित्त्सिमन्स के मुताबिक, ये स्पष्ट निष्कर्ष इस बात का सबूत देते हैं कि लड़कियों के बीच मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं तेजी से बढ़ जाती हैं जब वे किशोरावस्था में प्रवेश करती हैं। और इस समृद्ध आंकड़ों के उपयोग के आगे शोध करने के लिए आवश्यक कारणों और परिणामों को समझने के लिए आवश्यक है। इस अध्ययन में आज ब्रिटेन में युवा किशोरों के बीच मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं की सीमा को दर्शाया गया है।

माता-पिता किशोर बच्चों पर दें विशेष ध्यान– ब्रिटेन के नेशनल चिल्ड्रेन्स ब्यूरो की चीफ एक्जीक्यूटिव, एना फेचटवंग के मुताबिक, हजारों बच्चों के इस अध्ययन से हमें ब्रिटेन में बच्चों के बीच मानसिक स्वास्थ्य की मात्रा के बारे में सबसे ज्यादा मजबूत सबूत मिलते हैं। 14 साल के एक चौथाई के साथ अवसाद के लक्षण दिखाते हुए लड़कियों, यह अब संदेह से परे है कि यह समस्या संकट बिंदु तक पहुंच रही है। चिंता यह है कि माता-पिता अपनी बेटियों की मानसिक स्वास्थ्य की जरूरतों को कमजोर कर सकते हैं। इसके विपरीत, माता-पिता अपने बेटों में लक्षणों को उठा रहे हैं, जो लड़कों ने खुद को रिपोर्ट नहीं किया है। यह महत्वपूर्ण है कि दोनों बच्चे और उनके माता-पिता अपनी आवाज को जल्दी पहचान की संभावना और विशेषज्ञ सहायता तक पहुंच के लिए अधिकतम करने के लिए सुन सकते हैं।

नए शोध में यह भी पता चलता है कि गरीब परिवारों के बच्चों में अवसाद के लक्षण आमतौर पर अधिक सामान्य होते हैं। हम जानते हैं कि वैक्यूम में मानसिक स्वास्थ्य मौजूद नहीं है और सरकार बच्चों की भलाई को बेहतर बनाने की अपनी योजनाओं को प्रकाशित करने के लिए तैयार करती है, इसे नुकसान के अन्य पहलुओं के साथ ओवरलैप को संबोधित करना चाहिए। इस विषय पर पूर्ण अध्ययन का ब्यौरा ‘नई शताब्दी के बच्चों के बीच मानसिक बीमार स्वास्थ्य’ पर पढ़ा जा सकता है।

माता वैष्णो देवी में दुर्गा भवन का होगा पुनर्निर्माण , भूकंपरोधी होगा नया भवन

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श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने भवन क्षेत्र में दुर्गा भवन का पुनर्निर्माण करवाने का फैसला किया है। नया भवन भूकंपरोधी तकनीक से तैयार किया जाएगा। इसमें अधिक से अधिक श्रद्धालुओं को निशुल्क ठहराने की व्यवस्था की जाएगी। यात्रियों के लिए लाकर, कंबल, शौचालय, स्नैक्स आदि  सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएंगी।

इस भवन को बेहतर आपात प्रबंधनों को ध्यान में रखकर तैयार किया जाएगा। बोर्ड ने सीईओ को ताराकोट मार्ग पर शेल्टर शेड, पत्थरों को रोकने के लिए निर्माण, भोजनालय, ब्यू प्वाइंट, चिकित्सा केंद्र, शौचालय ब्लाक, सफाई, सुरक्षा और अन्य सुविधाओं पर काम करने को कहा है।

सीईओ ने बताया कि गुलशन लंगर से 2.1 किमी. लिंक मार्ग का निर्माण किया जा रहा है। भवन से भैरों तक पैसेंजर रोपवे और सैर दाबड़ी से भवन तक मैटेरियल रोपवे प्रोजेक्टों की समीक्षा की गई।

मां-पिता की देखभाल नहीं की तो कटेगा वेतन असम में पास हुआ नया कानून

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असम विधानसभा ने माता-पिता की देखभाल सुनिश्चित करने के लिए एक अहम विधेयक को ध्वनिमत से मंजूरी दे दी। इसके अनुसार, अगर राज्य सरकार के कर्मचारी अपने अभिभावकों और दिव्यांग भाई-बहनों की देखभाल नहीं करेंगे तो उनके मासिक वेतन से 10 प्रतिशत राशि काट ली जाएगी।
देश में अपनी तरह के संभवत: इस पहले विधेयक में यह व्यवस्था है कि कर्मचारी के वेतन से काटी गई राशि उनके अभिभावकों या भाई-बहनों को देखभाल के लिए दी जाएगी। राज्य सरकार की ओर से कहा गया है कि जल्द ही विधायकों, सांसदों, असम में चलने वाले पीएसयू एवं निजी कंपनियों के लिए भी इसी तरह का बिल लाया जाएगा।

असम कर्मचारी अभिभावक जिम्मेदारी और जवाबदेही एवं निगरानी मानदंड विधेयक (प्रोनाम), 2017 में राज्य सरकार तथा अन्य संगठनों के कर्मियों के लिए माता-पिता तथा दिव्यांग भाई-बहनों की जवाबदेही का प्रावधान किया गया है। प्रोनाम विधेयक को सदन में रखते हुए राज्य सरकार में मंत्री हेमंत बिस्वा शर्मा ने कहा, ‘ऐसा देखा जा रहा था कि माता-पिता वृद्धाश्रम में जा रहे हैं क्योंकि बच्चे उनकी देखभाल नहीं करते हैं।
इसी की ध्यान में रखते हुए यह विधेयक लाया गया है। इसका उद्देश्य राज्य सरकार के कर्मियों की निजी जिंदगी में हस्तक्षेप करना नहीं है। बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि यदि माता-पिता या दिव्यांग भाई बहनों की उपेक्षा होती है तो वे ऐसे सरकारी कर्मी के विभाग में शिकायत दर्ज करा सकें।

बिस्वा शर्मा ने दावा किया कि बुजुर्गों से जुड़ा ऐसा विधेयक पास करने वाला असम देश का पहला राज्य है। असम सरकार ने बजट सत्र में इस तरह का विधेयक लाने का वादा किया था। सरकार का कहना था कि असम के कई वृद्धाश्रम से इस तरह की शिकायतें मिल रही हैं कि अच्छी नौकरी पाने वाले सरकारी कर्मचारियों ने भी माता-पिता को छोड़ दिया।

कम उम्र में शादी की तो नहीं मिलेगी सरकारी नौकरी
असम में शादी की वैध उम्र का उल्लंघन करने वाले लोग राज्य सरकार की नौकरी नहीं पा सकेंगे। राज्य विधानसभा में पेश की गई असम की जनसंख्या एवं महिला सशक्तिकरण नीति में यह बात कही गई है। इसमें कहा गया है कि पुरुष अथवा महिला, जो भी शादी की वैध उम्र सीमा का उल्लंघन करेगा, राज्य सरकार की नौकरी के लिए अपात्र हो जाएगा। इसके अलावा दो बच्चे वाले अभ्यर्थी ही सरकार नौकरी के योग्य होंगे। इसमें यह भी कहा गया है कि सरकारी कर्मियों को दो बच्चों वाले परिवार की नीति का कड़ाई से पालन करना होगा ताकि वे समाज के लिए रोल मॉडल बन सकें।

मां दुर्गा इसलिए करती हैं शेर की सवारी

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शेर की सवारी मां दुर्गा क्यों करती हैं? इस प्रश्न का उत्तर हममे से कई लोग तलाशते होंगे। लेकिन इस प्रश्न का उत्तर छिपा है एक पौराणिक कहानी में, यह कहानी काफी पुरानी है।

बात उस समय की है जब मां पार्वती, शिव को पति रूप में पाने के लिए तप कर रही थीं। उन्होंने कई वर्षों तक तप किया। तब भगवान शिव प्रसन्न हुए और उनका विवाह हुआ। लेकिन समस्या यह थी कि तप के कारण मां पार्वती का शरीर सांवला हो गया।

एक दिन की बात है। शिव ने पार्वती से उपहास में मां पार्वती का काली कहकर संबोधित किया। मां को यह बात ठीक नहीं लगी। और वह पुनः अपने गौर वर्ण को पाने के लिए एक वन में तपस्या के लिए चलीं गईं।

तप करते हुए कई समय बीत गया। एक बार की बात है। उसी जंगल में एक शेर रहता था। उसने माता को खाने के लिए उनके पास आया, लेकिन माता तप में लीन थीं। शेर ने सोचा जब वह तप से जागेंगी तब वह उनका भक्षण करेगा।

वह कई वर्षों तक वहीं बैठा रहा जहां मां पार्वती तप कर रहीं थीं। उनके तप से शिव प्रसन्न हुए और उन्होंने वरदान स्वरूप माता पार्वती को गौर वर्ण प्रदान किया। तब माता पार्वती की दृष्टि उस शेर पर गई, वह शेर काफी वर्षों से वहीं बैठा हुआ था।

माता पार्वती को उस शेर पर दया आ गई और उस शेर को अपनी सवारी के लिए चुना। इसके बाद माता पार्वती एक सरोवर में स्नान के लिए गईं, वहां जैसे ही उन्होंने स्नान किया तो वहां उनके शरीर से माता कौशिकी प्रकट हुईं। जिनका स्वरूप सांवला था।

तो इस तरह मां पार्वती जो की मां दुर्गा का रूप हैं। उन्हें शेर वाहन के रूप में मिला। और उनका सांवला रंग गौर वर्ण में तब्दील हो गया।

नवरात्रि की धूम मचानी हो तो आप दिखें खास

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नवरात्रि आ गयी है और डांडिया की तैयारी भी आपने शुरू कर दी है। कभी दोस्तों के साथ तो कभी अपनी पार्टनर के साथ आप त्योहार का आनन्द उठाने की पूरी तैयारी कर रहे हैं मगर लड़कियों के लिए जहाँ तमाम विकल्प हैं और परामर्श हैं, वहीं लड़कों को ध्यान में रखकर बहुत कम डिजाइनर सोचते हैं। ये डिजाइनर भी ऐसे हैं जिनका एक परिधान लेने में आपका 2 महीने का वेतन चला जाए और डांडिया के बाद दिवाली की तैयारी भी करनी है। ऐसे में अगर आप सोच रहे हैं कि ऐसा क्या किया जाए कि आप डांडिया के साथ पंडाल घूमने का आनन्द भी उठा सकें और दोस्तों के साथ जमकर मस्ती भी कर सकें तो इसके लिए डिजाइनर परिधान से ज्यादा स्मार्ट तरीकों की जरूरत है और अपराजिता आपकी बस जरा सी मदद कर रही है –

 

अगर आप प्रयोग करने से नहीं डरते तो डांडिया के परम्परागत परिधान आप डांडिया के दौरान पहन सकते हैं जो कि आप किसी स्थानीय डिजाइनर से बनवा सकते हैं। दुकानों पर भी यह उपलब्ध है।काला, नीला और भूरे रंग से ऊपर उठिए और कुछ ऐसे रंग पहनिए जिसे आप ‘लड़कियों का रंग’ समझकर नहीं पहनते।

दरअसल, दोस्तों प्रकृति ने कोई रंग कोई जेंडर देखकर नहीं बनाया, ये हमारी दिमागी खिचड़ी है जो हमें प्रयोग करने से रोकती है। आपने देखा होगा कि कई सेलिब्रिटी इसे पहनते हैं और वे फैशन सरताज बने रहते हैं।

अगर हम अपने व्यक्तित्व को ध्यान में रखकर कुछ पहने तो यह हमें एक बदला हुआ अंदाज देता है बल्कि हम खुश भी रहते हैं और त्योहार तो खुशी मनाने के लिए है। तो, इस बार डांडिया पर गुलाबी, पीले, बेबी पिंक, लाल, नारंगी, हरे और वॉयलेट जैसे रंगों से परहेज न रखें और जरा सा और प्रयोग करके फ्लोरसेंट रंग भी आप आजमा सकते हैं।

केडिया नहीं पहनना चाहते तो शेरवानी पहनने की जरूरत भी नहीं है। अपनी प्लेन टी शर्ट लीजिए और उस पर दुप्पटा या स्टोल लीजिए। शर्ट के साथ स्टोल अच्छा नहीं लगेगा। आप अपने डेनिम शर्ट के साथ या लंबे कुरते के साथ जींस और स्टोल ले सकते हैं।

अगर स्टोल लेने में उलझन है तो भारी कढ़ाई वाली लम्बी जैकेट या वेस्ट कोट नुमा जैकेट आपके लिए है। इस पर अगर इसमें गुजराती भरत काम हो, काँथा या ऐसी किसी कढ़ाई का काम हो तो यह आपके डांडिया लुक को परफेक्ट करेगा।

त्योहार यानि परम्परा और परम्परा यानि हैंडलूम। इस बार किसी मॉल की जगह खादी भंडार में जाइए या किसी हैंडलूम स्टोर में जाइए जहाँ आपको वाजिब कीमतों पर हर राज्य का हैंडलूम और कला मिलेगी।

इकत, कलमकारी,जयपुरी और बाटिक जैसे कई प्रिंट पुरुषों पर बेहद अच्छे लगते हैं, फिर भले ही आप उनकी शर्ट पहने, जैकेट पहनें या कुरता। आप एक साधारण सी शर्ट को प्रिंटेड जैकेट से खूबसूरत बना सकते हैं या फिर प्रिंटेड कुरते के साथ सफेद चूड़ीदार, डेनिम या पजामा पहन सकते हैं, पसन्द आपकी है और ये आपकी जेब पर भारी भी नहीं पड़ेंगे।

पंडाल घूमना है और अंजलि देनी है तो रंगीन धोती और पंजाबी पहनें। आजकल ऐसे कई ब्रांड हैं जो एथेनिक वेयर खासकर पुरुषों के लिए बना रहे हैं और स्थानीय बाजारों में ये उपलब्ध है। व्यवहारिक कपड़ों जैसे जींस, पजामे के साथ बंद गला सूट, नेहरू जैकेट पहने जा सकते हैं। वेलवेट के कपड़े से बना नेहरू जैकेट 5 साल से 18 साल तक के लड़कों पर करिश्माई व्यक्तित्व को उभारेगा।

शानदार सिल्‍क या कॉटन का कुर्ता और किनारीदार बेहतरीन फिनिश की धोती पहन कर जब आप किसी पारंपरिक उत्‍सव में शामिल होंगे तो यकीन जानिए आप ही आप नजर आयेंगे। रंग आप अपने मिजाज, माहौल और मौसम के हिसाब से डॉर्क, पेस्‍टल या लाइट चुन सकते हैं। कैजुअल वियर में कुछ पारम्परिक पहनना हो पठानी सूट भी एक अच्‍छा विकल्प है 

आभूषण सिर्फ लड़कियों के लिए नहीं हैं। आप अँगूठी, कड़ा, चेन, ब्रोज, जैसी एक्सेसरीज पहन सकते हैं और यह आपके परिधान के अनुसार ऑक्सीडाइज्ड या फिर सोने या हीरे की हो सकती है। हीरे खरीदने का बजट नहीं है तो सेमीप्रेशियस डायमंड, फाइबर या प्लेटिनम लुक वाले जेवर अच्छे लगेंगे।

बाल खिचड़ी न हों, दाढ़ी हो तो करीने से हो। बढ़िया परफ्यूम हो और एक बात आप साँवले हैं तो हल्के रंग पहनें क्योंकि काला, भूरा जैसे रंग आपका लुक बिगाड़ेंगे। पैरों में मोजरी या कोल्हापुरी चप्पल या सैंडिल पहनें।

 

ये है बालों में कंघी करने का सही तरीका

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हम सभी अपने बालों से बेहद प्‍यार करते हैं और इनकी सुंदरता को बढ़ाने के लिए कई अलग-अलग तरीकों का इस्‍तेमाल भी करते हैं। लेकिन प्रदूषण और रसायनों की वजह से बाल अपनी प्राकृतिक चमक खोने लगते हैं और उनका टेक्‍सचर भी बिगड़ जाता है। इस समस्‍या से छुटकारा पाने के लिए हम ना जाने कितने प्राकृतिक नुस्‍खे और दवाएं लेते हैं ताकि किसी ना किसी तरह हमारे बाल स्‍वस्‍थ बने रहें। बहुत प्रयास करने के बाद भी कई बार हम अपने बालों को झड़ने और खराब होने से बचाने में विफल हो जाते हैं और हमारे बाल लगातार गिरते रहते हैं और कभी-कभी बालों का झड़ना बहुत ज्‍यादा हो जाता है।

रसायनों और पर्यावरण के अलावा किसी बीमारी या हार्मोंस में बदलाव के कारण भी बालों पर बुरा असर पड़ता है। इसे नज़रअंदाज़ तो नहीं किया जा सकता लेकिन आप अपने बालों को अत्‍यधिक झड़ने से बचा जरूर सकते हैं।

आप ऐसी कई तकनीकों और नुस्‍खों के बारे में जानती होंगी तो बालों को खराब होने से बचाते हैं लेकिन तब भी आप अपने बालों को लेकर एक गलती कर जाते हैं। आपको शायद पता नहीं होगा लेकिन बालों को गलत तरीके से कंघी करने से भी उन्‍हें नुकसान पहुंचता है और वो झड़ने लगते हैं।

बालों को स्‍वस्‍थ बनाए रखने के लिए कंघी करना सबसे सामान्‍य चीज़ है लेकिन गलत तरीके से कंघी करने से बालों को नुकसान पहुंचता है। आज हम आपको बता रहे हैं कि किस तरह आप अपने बालों को गलत तरीके से कंघी करते हैं और आपको किस तरह से अपने बालों को कंघी करनी चाहिए ताकि आपके बाल और स्‍कैल्‍प दोनों ही सुरक्षित रहें।

कंघी करने की दिशा – सभी लोगों को कंघी करने की सही दिशा के बारे में पता नहीं होता है। सामान्‍य तौर पर हम सभी जड़ों से लेकर नीचे तक कंघी करते हैं लेकिन से गलत तरीका है। इससे बालों की जड़ें कमजोर होती हैं। कंघी हमेशा नीचे से शुरु कर जड़ों तक करें। धीरे-धीरे उलझे बालों को सुलझाते हुए नीचे से ऊपर जाएं।

हेयर प्रॉडक्‍ट्स लगाने के बाद ना करें कंघी –  अगर आपने कोई हेयर मास्‍क, पेस्‍ट, क्रीम या अन्‍य कोई हेयर प्रॉडक्‍ट लगाया है तो बालों को धोने से पहले और बाद में कंघी ना करें। इन प्रॉडक्‍्टस को लगाने के बाद कई लोग उलझे हुए बालों को सुलझाने लगते हैं लेकिन ये तरीका आपके बालों को नुकसान पहुंचा सकता है।

बालों को धोने के बाद कंघी ना करें –  बालों को धोने के बाद सारे बाल उलझ जाते हैं और आमतौर पर ऐसा सभी के साथ होता है। गीले बालों में कंघी कर उन्‍हें सुलझाना गलत है। ऐसा करने से बालों की जड़ें कमज़ोर होती हैं और जब बाल गीले होते हैं तो उनके आसानी से टूटने की संभावना भी बहुत ज्‍यादा होती है। बालों को सूखने दें और उसके बाद ही नीचे से लेकर ऊपर जड़ों तक कंघी करें। गीले बालों में कंघी करने की भूल कभी ना करें।

पीछे की तरफ से ना करें कंघी – बचपन से ही हमने अपनी माओं को पीछे की तरफ से कंघी करते हुए देखा होता है और हमें बताया जाता है कि पीछे की ओर से कंघी करने से बाल घने, मजबूत और स्‍वस्‍थ बनते हैं  लेकिन ये सिर्फ एक झूठ है और कुछ नहीं। पीछे की तरफ से कंघी करना आपके बालों को नुकसान पहुंचाती है और इससे बालों का झड़ना और गिरना बहुत ज्‍यादा बढ़ जाता है। सीमित समय तक ही बालों में कंघी करें और बार-बार बालों में कंघी के इस्‍तेमाल को अपनी आदत ना बनाएं। इससे बाल तो खराब होंगें ही साथ ही स्‍कैल्‍प पर भी बुरा असर पड़ता है।