Thursday, October 1, 2026
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धर्मांधता के विरुद्ध और मानवता के पक्ष में 23वां हिंदी मेला कल  26 दिसंबर से

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कोलकाता : 23वां हिंदी मेला नाट्य प्रतियोगिता के साथ 26 दिसंबर से राममोहन हाल, मानिकतला में शुरू हो रहा है। बाकी छह दिनों के सांस्कृतिक कार्यक्रम पास के फेडरेशन हाल में है। सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन द्वारा आयोजित यह मेला सात दिवसीय है। इस साल का फोकस धर्मांधता के विरुद्ध आवाज उठाने वाले महान साहित्यकारों राहुल सांकृत्यायन और शिवपूजन सहाय की 125वीं महा जयंती और कवि त्रिलोचन की जन्मशती पर है। इन पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन 31 दिसंबर को ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित कवि केदारनाथ सिंह करेंगे। गौरतलब है कि शिवपूजन सहाय कोलकाता से प्रकाशित ‘मतवाला’ और ‘मारवाड़ी सुधार’ पत्रिकाओं के संपादन से जुड़े हुए थे।

इस बार हिंदी युवा कवि उत्सव में पश्‍चिम बंगाल के विभिन्न जिलों से 50 से अधिक कवि भाग लेंगे, जिसकी अध्यक्षता मानिक बच्छावत करेंगे। 30 दिसंबर को युवा कवि उत्सव अहिंसा और मानवता को समर्पित है।  सात दिनों के हिंदी मेले में काव्य आवृत्ति (27 दिसंबर), चित्रांकन, हिन्दी ज्ञान प्रतियोगिता (28 दिसंबर), काव्य संगीत, लोकगीत, आशु भाषण (29 दिसम्बर), युवा कवि उत्सव, काव्य नृत्य (30 दिसंबर), राष्ट्रीय संगोष्ठी (31 दिसंबर) और संस्कति उत्सव समापन और पुरस्कार वितरण (1 जनवरी) का कार्यक्रम है। मिशन के संयुक्त सचिव डॉ. राजेश मिश्र और प्रो. संजय जायसवाल ने बताया कि हिंदी मेले में 70 से अधिक स्कूल, कॉलेज और विश्‍वविद्यालय के दो हजार से अधिक विद्यार्थी और युवा भाग लेंगे। इस वर्ष ‘युगल किशोर सुकुल पत्रकारिता सम्मान’ वरिष्ठ पत्रकार श्री राधाकृष्ण प्रसाद को दिया जाएगा।

 

अंधा युग आधुनिक युग के सांस्कृतिक पतन की कथा है

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कोलकाता : धर्मवीर भारती की कालजयी कृति ‘अंधा युग’ पर चर्चा करते हुए बताया गया कि यह बहुचर्चित काव्य-नाटक आणविक मिसाइलों की होड़, सांप्रदायिक हिंसा और सत्ता लोलुपता का अनावरण करता है। उसकी जितनी ऐतिहासिक महत्ता है उससे अधिक वर्तमान अर्थवत्ता है। ‘धर्मयुग’ के यशस्वी संपादक धर्मवीर भारती ने इसमें बढ़ती अनास्था और मूल्यहीनता के  दौर में मूल्य आधारित आचरण का पक्ष लिया है।

भारतीय भाषा परिषद के ‘कालजयी कृति विमर्श’ की पहली कड़ी के रूप में महाभारत पर आधारित इस काव्य-नाटक पर चर्चा करते हुए मुजफ्फरपुर विश्‍वविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. रेवती रमण ने कहा कि ‘अंधायुग’ आधुनिक युग का सत्ता विमर्श है जिसमें प्रहरियों का संवाद लोकतंत्र के लिए स्पेस बनाता है। इस नाटक में गांधारी ने कृष्ण को मृत्यु का शाप दिया और अश्‍वत्थामा, युयुत्सु, संजय जैसे चरित्रों ने उनकी प्रभुता पर संदेह व्यक्त किया है। फिर भी कृष्ण ने किस तरह दूसरों के पाप को अपने माथे ले लिया और उन्होंने विध्वंस के समानांतर सृजन में अपनी ज्योति का आश्‍वासन दिया यह नाटककार ने दिखाया है। जालान गर्ल्स कॉलेज के प्रो. विवेक सिंह ने कहा कि महाभारत में किसी को भी स्याह और सफेद की तरह देखा नहीं जा सकता। उत्तर बंग विश्‍वविद्यालय की हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. मनीषा झा ने कहा कि अंधायुग में यह संदेश है कि संस्कृति की रक्षा करके मनुष्य अपने भीतर मौजूद पशुता और विकृति से कैसे ऊपर उठे।

अध्यक्षीय वक्तव्य रखते हुए डॉ. शंभुनाथ ने कहा कि महाभारत में कौरव और पांडव दोनों ही न्याय और नैतिकता का पक्ष छोड़कर हिंसा का आश्रय लेते हैं। युधिष्ठिर के अर्धसत्य से ही विकृत मानसिकता वाले अश्‍वत्थामा का जन्म होता है। आज जब संपूर्ण राष्ट्र धृतराष्ट्र जैसा हो गया है, महाभारत के समय की तरह आज के समय को भी ‘पोस्ट ट्रुथ’ का समय कहा जा सकता है और हिंसा की जगह कृष्ण की वंशी की जरूरत महसूस हो सकती है।

अतिथियों का स्वागत करते हुए डॉ. कुसुम खेमानी ने युवाओं और विद्यार्थियों का आहवान किया और कहा कि परिषद द्वारा संचालित कौशल विकास केंद्र का लाभ उठाते हुए हिंदी भाषा ज्ञान और अभिव्यक्ति क्षमता का विकास करें। पीयूषकांत राय ने संगोष्ठी का संचालन करते हुए कहा कि उन कालजयी कृतियों पर चर्चा जरूरी है जिन्हें भुला दिया गया है। परिषद की मंत्री बिमला पोद्दार ने धन्यवाद दिया

 

रहस्यलोक में ले जाने वाली कलाकृतियों का जादू

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अपराजिता की ओर से

अभिज्ञात के नाम से प्रख्यात डॉ. हृदय नारायण सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं जो देश केे प्रतिष्ठित अखबारों और मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं। कवि और लेखक होने के साथ गीतकार और अभिनेता भी हैं। बतौर चित्रकार यह उनकी प्रतिभा का एक और शानदार रूप है…मीडिया की आपाधापी के बीच इतना कुछ कर लेना अपने -आप में करिश्मा है। हाल ही में इनके चित्रों की प्रदर्शनी लगी। प्रदर्शनी की कुछ तस्वीरें और जानकारी हम दे रहे हैं…। अभिज्ञात जी की सृजनात्मकता और भी प्रसारित हो…अपराजिता की शुभकामना है –

रहस्यलोक में ले जाने वाली कलाकृतियों का जादू

भोपाल की कलाकार सबा इफ़्तिखार और कोलकाता के डॉ.हृदय नारायण सिंह की पेंटिंग्स सिटी आर्ट फैक्ट्री के तत्वावधान में हाल ही में मिथ, होटल हिन्दुस्तान इंटरनेशनल, कोलकाता में प्रदर्शित हुई।  इसमें सबा की  इनिग्मा सिरीज की पेंटिंग्स शामिल थीं। कलाकृति शृंखला नाम के मुताबिक ही एक रहस्यलोक और गूढ़प्रश्नों के प्रति लोगों की उत्सुकता जगाता है। इन पेंटिंग के सम्बंध में सबा कहती हैं-पुराने और जर्जर दरवाज़ों के पीछे मेरे रिश्ते और कीमती यादें हैं।

 

इन दरवाज़ों को खोलकर तब तक कोई नहीं आ सकता जब तक मैं न चाहूं। हालांकि दरवाज़े, खिड़कियां और ताले बंद हुए हैं और जर्जर दिखायी देते हैं लेकिन फिर भी खूबसूरत हैं और मज़बूती से खड़े हैं। लोगों को वहम हो सकता है कि इनके पीछे बंदिशें हैं लेकिन उनके पीछे मेरी आज़ादी महफूज़ है।

फाइनआर्ट्स में बरकतुल्ला यूनिवर्सिंटी से फ़ाइनआर्ट्स में गोलमैलिस्ट सबा ने कई कलारूपों का फ्यूजन किया है। देश- विदेश की कई कलाप्रदर्शनियों में उनकी कृतियां प्रदर्शित हुई हैं।डॉ.हृदय नारायण सिंह की कैनवास पर एक्रेलिक से बनी कलाकृतियों में अमूर्त व मूर्तन का तादात्म्य प्रभावित करता है। सुर्ख गाढ़े वहल्के दोनों तरह के रंगों के प्रयोग में समान रूप से सिद्धहस्त हैं। उनकी कृतियों में दुःख के कई रूप दिखते हैं तो कोमल अनुभूतियां भी हैं।

डॉ. सिंह का अपनी कला के बारे में कहना है कैंसर से जूझती मां की ओर मृत्यु के बढ़ते अदृश्य कदमों की आहटों को सुननेऔर मौत की अमूर्त आकृतियों को देखने की कोशिश में एक ऐसे संसार को महसूस किया जो आसपास है पर अनुद्घाटित है। मां कीअस्वस्थता और उसके दुख से निजात के लिए उस ईश्वरीय सत्ता के आगे में नतमस्तक हुआ जिसे मेरी बौद्धिकता सदैव नकारतीरही थी। रहस्य, भय, विस्मय, अलौकिकता और जीवन से जुड़ी घटनाओं के पूर्व अमूर्त संकेत , कभी रंगों, कभी रोशनी, कभीछाया के तौर पर मेरी मनोभूमि में समा गये और वे अवचेतन में मेरी पेंटिंग्स व रंगों के चयन में अपनी अबूझ भूमिका निभाते लगतेहैं। मुझे लगता है कैनवास एक प्लेनचिट है जिसके आगे बैठते ही परिचित-अपरिचित रूपाकारों, रंग व रेखाएं, रोशनी व अधेरेअनायास चले आते हैं। पहले मेरी कला में बाहर की ही दुनिया थी अब बाहर और भीतर का संसार गड्डमड्ड है और वहीं मेरी कला मेंप्रकट होता है।

अमूर्तन के प्रति दिलचस्पी उस अदृश्य को देखने और खोजने का भी यत्न है जो ईश्वर की अदृश्य सत्ता से मेलखाता है। कुछेक राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय कला प्रदर्शनियों में भागीदारी। साहित्य सृजन से भी जुड़ा रहने के कारण एक कोमलता औरस्निग्ध भाव रंगों के चयन और स्पर्श में शामिल है।

आर्ट शो में शामिल द वूमेन, दे फैंसी, बॉडी विद दि सोल, नेचर एंड वूमेन, दसाफ्ट आदि कलाकृतियों में लोगों ने दिलचस्पी ली। डॉ.सिंह कलकत्ता विश्वविद्यालय से हिन्दी साहित्य में पीएच.डी हैं। कला कीऔपचारिक शिक्षा उन्होंने इंडियन आर्ट कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल तथा रियलिस्टिक आर्टिस्ट होरीलाल साहू से ली है।

 

रब ने बना दी अनुष्का और विराट की जोड़ी

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मुंबई : भारत के सबसे चर्चित प्रेमी जोड़े – हिंदी फिल्म अभिनेत्री अनुष्का शर्मा और भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली – ने अपनी शादी की योजनाओं को लेकर जारी रहस्य एवं मीडिया अटकलों को खत्म करते हुए 11 दिसम्बर को जीवन भर के लिए एक दूसरे का हाथ थाम लिया।

दोनों ने इटली के टस्कनी में अपने परिवार के लोगों और करीबी दोस्तों की मौजूदगी में एक निजी समारोह में शादी की।

अनुष्का और कोहली ने ट्विटर पर विवाह समारोह की तस्वीरें डालते हुए लिखा, ‘‘आज हमने हमेशा के लिए एक दूसरे के प्यार में बंधने का वादा किया। हमें आपसे यह खबर साझा करते हुए बहुत खुशी हो रही हैं।’’ अनुष्का ने इस मौके पर सब्यसाची द्वारा तैयार किया गया लहंगा पहना था और बेहद खूबसूरत लग रही थीं। वहीं विराट ने सब्यसाची द्वारा ही डिजाइन की गयी एक शेरवानी पहनी थी।

दोनों ने एक जैसे ट्वीट में कहा, ‘‘हमारे प्रशंसकों एवं शुभचिंतकों के परिवार के प्यार और समर्थन के साथ यह खूबसूरत दिन और भी खास हो जाएगा।’’ अनुष्का और विराट ने हिंदू रीति रिवाज से शादी की। दोनों 21 दिसंबर को नयी दिल्ली में एक प्रीतिभोज की मेजबानी करेंगे और इसके बाद 26 दिसंबर को फिल्म जगत के दोस्तों एवं क्रिकेट खिलाड़ियों के लिए मुंबई में एक और भोज देंगे।

अनुष्का और विराट के बीच चार साल से प्रेम संबंध चल रहे थे। दोनों मीडिया में शादी को लेकर जारी चर्चाओं के बावजूद विवाह की योजनाओं पर चुप थे।

अक्तूबर में एक अखबार ने अपनी खबर में कहा था कि यह जोड़ी इटली में शादी कर सकती है।
विराट को जब श्रीलंका के खिलाफ बाकी एकदिवसीय श्रृंखला के लिए विराम दिया गया तब यह अटकलें तेज हो गयीं।
अनुष्का और विराट दोनों 29 साल के हैं। दोनों पहली बार एक विज्ञापन फिल्म की शूटिंग के दौरान मिले थे। अभिनेत्री के प्रतिनिधि ने एक बयान में कहा कि दोनों इस महीने के आखिर में मुंबई के वर्ली स्थित अपने नये घर में चले जाएंगे।

भारत की पहली महिला आईएएस अधिकारी अन्ना राजम मल्होत्रा 

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अधिकांश भारतीयों ने भारत की पहली महिला आईपीएस अधिकारी किरण बेदी के बारे में जरूर सुन रखा है, लेकिन कुछ ही लोगों को भारत की पहली महिला आईएएस अधिकारी के बारे में पता है। ऐसे वक्त में जब ज्यादातर भारतीय महिलाएं शादी कर लेने को ही अपने युवा जीवन का उद्देश्य समझती थीं, उनमें से किसी ने भी सिविल सेवा में शामिल होने की कोशिश नहीं कीं, तब अन्ना राजम मल्होत्रा भारत कीपहली महिला आईएएस अधिकारी की राह पर बढ़ रही थीं। वह सचिवालय में पद प्राप्त करने वाली भी पहली महिला थीं। इस प्रेरक, दृढ़ और हठीली ईमानदार महिला की एक प्रेरणादायक कहानी है।

अन्ना को खूब परेशान किया गया, वो औरत थीं इसलिए उनकी काबिलियत पर हमेशा शक किया गया। यहां तक कि उनकी महिला सहकर्मी भी उनके निर्णय का मजाक उड़ाती थीं। लेकिन अन्ना ने किसी की एक न सुनी। वो बस अपने राह चलती रहीं। एक दिन उन्होंने इतिहास रच ही दिया। उन्होंने 1950 में सिविल सर्विसेस की परीक्षा पास की थी। उनकी प्रतिभा के बावजूद पैनल ने उन्हें फॉरेन सर्विसेज या फिर सेंट्रल सर्विसेज ज्वॉइन करने की सलाह दे डाली, सिर्फ इसलिए कि उनके हिसाब से ये क्षेत्र महिलाओं के लिए ज्यादा मुफीद थे। लेकिन अन्ना वहां भी नहीं झुकीं। उनके अपॉइंटमेंट पर उस वक्त प्रदेश के मुख्यमंत्री सी राजगोपालाचारी ने उन्हें डिस्ट्रिक्ट सब कलेक्टर बनाने की बजाय सीधे सचिवालय में नियुक्त कर दिया।

अन्ना केवल पढ़ाई में ही स्ट्रॉन्ग नहीं थीं बल्कि उन्होंने रायफल, पिस्टल शूटिंग, घुड़सवारी में भी फुल ट्रेन्ड थीं। वो चाहती थीं कि वो किसी भी तरह अपने पुरुष सहकर्मियों से कमतर न रहें। लैंगिक भेदभाव किस कदर हावी था, ये बताता है अन्ना को दिया गया एक एग्रीमेंट। जिसमें लिखा था कि अन्ना सर्विस के दौरान शादी नहीं कर सकतीं, अगर वो शादी करती हैं तो सर्विस टर्मिनेट हो जाएगी। ऐसा कोई नियम पुरुषों के लिए नहीं था, केवल महिलाओं के लिए ही ये बाधा बना दी गई थी। हालांकि कुछ सालों बाद ये नियम हटा लिया गया।

अन्ना के नेतृत्व में देश का पहला कम्प्यूटराइज्ड कंटेनर पोर्ट बनावाया गया था। ये पोर्ट मुंबई था और जवाहर लाल नेहरू बंदरगाह के नाम से जाना जाता है। 1982 में उन्होंने पंडित नेहरू को एशियाड सम्मेलन में असिस्ट भी किया था। वो इंदिरा गांधी के साथ फूड प्रोडक्शन पैटर्न को समझने के लिए आठ राज्यों की यात्रा पर भी गई थीं। बड़ी बात ये है कि उस वक्त उनका टखना टूटा हुआ था। एक बार क्या हुआ कि एक गांव में हाथियों का बड़ा आतंक फैल गया था। अन्ना पर दबाव था कि वो हाथियों तो मारने का आदेश दे दें। लेकिन अन्ना कैसे निरीह जानवरों की हत्या करवा सकती थीं। उनकी तो गलती केवल इतनी थी कि वो अपने घर में हुई दखलंदाजी से आजिज आकर बाहर बस्तियों में आ गए थे। अन्ना ने बड़ी ही सूझबूझ और अपने जीव व्यवहार के ज्ञान से उनको वापस जंगल भेज दिया था। उनके कारनामे से हर कोई हैरानी में था।

17 जुलाई, 1927 को उनका जन्म केरल के एक गांव में हुआ था। वह कालीकट में बड़ा हुईं और प्रोविडेंस महिला कॉलेज से अपनी मध्यवर्ती शिक्षा पूरी की। कालीकट के मालाबार ईसाई कॉलेज से स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद, अन्ना मद्रास चली गईं जहां उन्होंने मद्रास विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त की। अपने करियर के दौरान, अन्ना राजाम मल्होत्रा ने साबित कर दिया कि वो इस सफलता के लिए तरह से योग्य थीं। उन्होंने यह साबित कर दिया कि लैंगिक भेदभाव का एक समाज में कोई स्थान नहीं हैं। उनकी जीवनशैली दिखाती हैं कि महिलाओं को अवसरों की जरूरत नहीं है, संरक्षण नहीं। उन्होंने राजनीतिक शख्सियत बनने से इनकार कर दिया और भारत के कुछ सबसे शक्तिशाली नेताओं के सामने भी कभी नहीं झुकीं। उनका ये व्यवहार देश के तमाम नौकरशाहों के सामने एक उदाहरण रखता है।

(साभार – योर स्टोरी)

सरकार ने तीन तलाक को प्रतिबंधित करने के लिए विधेयक के मसौदे को मंजूरी दी

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नयी दिल्ली : सरकार ने उस प्रस्तावित कानून के मसौदे को मंजूरी प्रदान कर दी जिसके तहत एक बार में तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) को गैरकानूनी एवं अमान्य ठहराया जाएगा और ऐसे करने वाले पति को तीन साल जेल की सजा होगी।

एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि ‘मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण विधेयक’ पर केंद्रीय मंत्रिमंडल ने विचार किया और अपनी मंजूरी दी।
गृह मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाले अंतर-मंत्रालयी समूह ने विधेयक का मसौदा तैयार किया था। इस समूह में वित्त मंत्री अरूण जेटली, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद और कानून राज्य मंत्री पी पी चौधरी शामिल थे।
प्रस्तावित कानून सिर्फ एक बार में तीन तलाक के मामले में लागू होगा और इससे पीड़िता को अधिकार मिलेगा कि वह ‘उचित गुजारा भत्ते’ की मांग करते हुए मजिस्ट्रेट से संपर्क कर सके।
गौरतलब है कि बीते 22 अगस्त को उच्चतम न्यायालय ने एक बार में तीन तलाक को गैरकानूनी और असंवैधानिक करार दिया था।

नौकरी छोड़ किसान बनीं इंजीनियर, दुबई और इज़राइल में हैं सब्जियों के खरीददार

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खेती-किसानी भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ रही है। लेकिन हालिया कुछ सालों में किसानों की दुर्दशा, जड़ किसान नीतियों और कम सुविधाओं ने लोगों को किसानी से मोहभंग कर दिया है। उन्नत तकनीकें किसानों तक पहुंच नहीं पा रही हैं और वो परंपरागत तरीके से खेती करके पर्याप्त कमाई नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में 27 वर्षीय छत्तीसगढ़ लड़की वल्लरी चंद्राकर ने खेती करने के लिए अपनी अच्छी सैलरी वाली इंजीनियरिंग नौकरी छोड़ दी। वल्लरी कंप्यूटर साइंस के क्षेत्र में एमटेक करने के बाद ने दुर्गा कॉलेज में सहायक प्रोफेसर के रूप में नौकरी कर रही थीं। उन्होंने नौकरी छोड़कर 27 एकड़ जमीन पर खेती शुरू की। अब उनके खेत में उगाई गईं सब्जियां दुबई और इज़राइल जैसे अन्य देशों में निर्यात करने के लिए तैयार हैं।

वल्लरी, जो राज्य की राजधानी रायपुर में नौकरी छोड़कर अपने गांव के बागबाहरा जिले में लौट आई हैं, का मानना है कि खेती से ज्यादा कोई भी नौकरी महत्वपूर्ण नहीं हो सकती है। हालांकि खेती के लिए कड़ी मेहनत और समर्पण की आवश्यकता होती है लेकिव जो संतुष्टि किसी को खेती करने से मिलती है वह कहीं और नहीं मिल सकती है। वल्लरी का मानना है कि बाजार में नई तकनीक के साथ अब व्यवसाय पहले जितना मुश्किल नहीं है। वल्लरी की खेती-यात्रा 2016 में शुरू हुई। दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने कहा कि जब मैंने अपनी नौकरी छोड़ दी और खेती शुरू की तो कई ग्रामीणों ने मुझे एक शिक्षित मूर्ख कहा। मेरे परिवार में तीन पीढ़ियों में कोई भी खेती नहीं कर रहा था। मुझे शुरू में किसानों, बाजारों और विक्रेताओं से निपटने में कठिनाई का सामना करना पड़ा। हालांकि उनके पिता, जोकि मौसम विज्ञान केंद्र रायपुर में इंजीनियर हैं, का समर्थन वल्लरी के साथ रहा। उन्होंने एक फार्महाउस बनाने के लिए जमीन खरीदी थी। वल्लरी ने अवसर देखा और खेती के लिए उस भूमि का उपयोग करने का निर्णय लिया। वल्लरी के फार्म पर उगाई जा रही सब्जियां पूरे भारत के कई शहरों जैसे इंदौर, नागपुर, बेंगलुरु और दिल्ली में बेची जाती हैं। वल्लरी अपने खेत पर हरी मिर्च, करेला और खीरा जैसी सब्जियां उगाती हैं। उनकी उगाई सब्जियों की प्रसिद्धि विदेश तक पहुंच गई है। उन्हें इस समय दुबई और इजराइल से टमाटर और लौकी के लिए एक ऑर्डर मिला हुआ है। ये सब्जियां 60-75 दिनों में बेचने के लिए तैयार हो जाएंगी।

वल्लरी ने इंटरनेट से खेती की कई नई तकनीकें सीखीं। वो स्थानीय भाषा का इस्तेमाल करके ग्रामीणों के साथ प्रभावी ढंग से संवाद स्थापित करती हैं। वह जमीन पर काम कर रहे किसानों के लिए नई कृषि तकनीकों पर कार्यशालाएं भी आयोजित करवाती हैं। ग्राहक वल्लारी की सब्जियों के गुणों से खासे प्रभावित नजर आते हैं। वल्लरी के खेत से हो रहे उत्पादन के लिए बाजार का विस्तार लगातार हो रहा है। वह 5 बजे अपना काम पूरा करती हैं और फिर गांव में जाती हैं। वहां पर 40 लड़कियों को अंग्रेजी और कम्प्यूटर साइंस पढ़ाती हैं।

नासा ने खोजा आठ ग्रहों वाला सौरमंडल

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अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने महत्वपूर्ण खोज की है। एजेंसी ने पहली बार हमारे सौरमंडल की तरह ही आठ ग्रहों वाला नया सोलर सिस्टम ढूंढ़ने का दावा किया है। नासा ने गुरुवार को इसकी घोषणा करते हुए बताया कि केप्लर टेलीस्कोप की मदद से सुदूर अंतरिक्ष में आठ ग्रहों वाला नया सौरमंडल ढूंढ़ा गया है। अमेरिकी सामाचारपत्र इंडीपेंडेंट ने यह जानकारी दी है। अंतरिक्ष अनुसंधान की दिशा में यह महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। प्रारंभिक आकलन में यह मनुष्यों के रहने योग्य नहीं है।

नासा वैज्ञानिकों ने केप्लर टेलीस्कोप से भेजे गए आंकड़ों का विश्लेषण करने में गूगल की आर्टीफिशियल तकनीक की मदद लेने की बात कही है। केप्लर टेलीस्कोप सूर्य सरीखे स्टार और उसके सौरमंडल के बारे में पहले ही पता लगा चुका था। लेकिन, अब नए ग्रहों की मौजूदगी का पता चला है। ऐसे में नए सौरमंडल में कुल आठ ग्रह हो गए हैं। हमारे सौरमंडल को छोड़ कर अंतरिक्ष में आठ ग्रहों वाला यह पहला सोलर सिस्टम है। नासा ने बताया कि एआई की मदद से केप्लर द्वारा मुहैया डाटा का नए तरीके से विश्वलेषण संभव हो सका है। नए सौरमंडल में केप्लर-90आई सबसे छोटा ग्रह है। यह नया ग्रह पृथ्वी की तुलना में 30 प्रतिशत ज्यादा बड़ा है। टेक्सास यूनिवर्सिटी (ऑस्टिन) के एस्ट्रोनॉमर एंड्रयू वांडरबर्ग ने बताया कि नया ग्रह पृथ्वी से बड़ा जरूर है, लेकिन वहां कोई जाना नहीं चाहेगा। हालांकि, इसकी मदद से अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में और जानकारी जुटाने की उम्मीद जताई जा रही है।

केप्लर टेलीस्कोप को वर्ष 2009 में अंतरिक्ष में स्थापित किया गया था। तब से यह पृथ्वी स्थित नियंत्रण कक्ष को डाटा भेज रहा है। इसकी मदद से हमारे सौरमंडल के बाहर कई सोलर सिस्टम का पता लगाया जा चुका है। केप्लर टेलीस्कोप अब तक 4,034 ग्रह या उसके समान आकाशीय पिंडों का पता लगा चुका है। इनमें से 2,335 की बाहरी ग्रह के तौर पर पुष्टि की जा चुकी है। इनमें से 30 पृथ्वी के आकार के हैं।

 

जितेश सिंह देव बने मिस्टर इंडिया

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मुंबई : लखनऊ के जितेश सिंह देव ने आज पीटर इंग्लैंड मिस्टर इंडिया 2017 का खिताब अपने नाम किया। वह अब मिस्टर वर्ल्ड 2020 में देश का प्रतिनिधित्व करेंगे।
खिताब जीतने के बाद देव ने ‘कहा, ‘‘मैंने कुछ भी सोचा नहीं था लेकिन हां, मुझे खुद में यकीन था। विश्वास की ताकत आपको हमेशा प्रेरित करती है। जब मेरा नाम पुकारा गया तो मैं निशब्द हो गया…’’ देव ने कहा, ‘‘खिताब जीतने के साथ जिम्मेदारी बढ़ जाती है। (मिस्टर वर्ल्ड) प्रतियोगिता कठिन होने जा रही है। आज मैं इस पल का आनंद ले रहा हूं लेकिन कल से नयी यात्रा शुरू होगी और मुझे कड़ी मेहनत करनी है।’’ अभि खजूरिया पहले और पवन राव दूसरे रनर अप चुने गए।

घरों की हवा में गंदगी की वजह से सर्दियों में होती है एलर्जी, ऐसे बचें

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मौसम में बदलाव अक्सर सर्दी-जुकाम जैसी छोटी-मोटी बीमारियां लेकर आते हैं। सर्दियों में इनके साथ-साथ लोगों में एलर्जी की भी समस्या देखी गई है। ऐसे में सांस लेने में तकलीफ, शरीर में खुजली और त्वचा पर चकत्ते पड़ जाने की समस्या जन्म लेती है। विशेषज्ञों का कहना है कि सर्दी के मौसम में लोग ज्यादातर घरों में ही रहते हैं और ऐसे में धूल कणों, फफूंदी और सूक्ष्म जीवाणुओं की वजह से एलर्जी के शिकार हो जाते हैं। इससे दमा, खांसी, गले में घरघराहट जैसी समस्याओं का भी सामना करना पड़ता है। सर्दियों में एलर्जी से बचने के लिए हमें अपने घरों और आसपास की जगहों पर साफ सफाई रखनी चाहिए। इसके अलावा कुछ और भी उपाय हैं जिन्हें आजमाकर इस बीमारी से बचा जा सकता है।

  1. घरों में गंदगी की वजह से रोगाणुओं की संख्या बढ़ जाती है। ये रोगाणु ही एलर्जी का कारण होते हैं। एलर्जी हो जाने पर इसका कारण जानने के बाद ही इसका इलाज किया जा सकता है। इसके लिए एक विशेष प्रकार का टेस्ट होता है जिसे कॉम्प्रीहेन्सिव एलर्जी टेस्ट कहते हैं। इसमें आपके खून की जांच की जाती है।
  2. एलर्जी से बचने के लिए आपको अपने कमरे की हवा को उन्नत करने की जरूरत है। कमरों को साफ-सुथरा रखें और कालीन आदि की नियमित सफाई करें।
  3. त्वचा में एलर्जी से बचने के लिए नारियल के तेल में नींबू का रस मिलाकर त्वचा पर लगाएं और रात भर लगा रहने दें। सुबह नीम के पानी से इसे धो लें। यह एंटी-बैक्टीरियल नुस्खा है जिससे एलर्जी की संभावना खत्म हो जाती है।
  4. सर्दियों में घी का सेवन कम से कम करें। एक गिलास गाजर का जूस पीने से भी एलर्जी दूर होती है। इसके अलावा गाजर, चुकंदर और खीरा का मिक्स जूस पीने से भी एलर्जी नहीं होती।
  5. एलर्जी वाले फूड्स से दूर रहने के साथ-साथ गाड़ी चलाते समय रूमाल से मुंह और नाक ढंककर रखें तथा आंखों पर धूप वाला चश्मा लगाएं। हर दूसरे दिन चादर बदलते रहें या फिर उन्हें धूप दिखाते रहें।