Thursday, July 2, 2026
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बिजली महादेव : जहाँ शिवलिंग पर हर बारह साल में गिरती है बिजली

कुल्लू : भारत में कई अद्भुत मंदिर हैं। उन्हीं में से एक है हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में स्थित बिजली महादेव। कुल्लू का पूरा इतिहास बिजली महादेव से जुड़ा हुआ है। कुल्लू शहर में ब्यास और पार्वती नदी के संगम के पास एक ऊंचे पर्वत पर बिजली महादेव का प्राचीन मंदिर है। पूरी कुल्लू घाटी में ऐसी मान्यता है कि यह घाटी एक विशालकाय सांप के आकार की है। इस सांप का वध भगवान शिव ने किया था।

जिस स्थान पर मंदिर है वहां शिवलिंग पर हर बारह साल में बिजली गिरती है। बिजली गिरने से मंदिर का शिवलिंग खंडित हो जाता है। यहां के पुजारी खंडित शिवलिंग के टुकड़े एकत्रित कर मक्खन के साथ इसे जोड़ देते हैं। कुछ ही माह बाद शिवलिंग ठोस रूप में परिवर्तित हो जाता है। इस शिवलिंग पर हर बारह साल में बिजली क्यों गिरती है और इस जगह का नाम कुल्लू कैसे पड़ा इसके पीछे एक पौराणिक कथा है।
कुलान्त राक्षस ने लिया था अजगर का रूप – कुल्लू घाटी के लोग बताते हैं कि बहुत पहले यहां कुलान्त नामक दैत्य रहता था। दैत्य कुल्लू के पास की नागणधार से अजगर का रूप धारण कर मंडी की घोग्घरधार, लाहौल स्पीति सेमथाण गांव आ गया। दैत्य रूपी अजगर कुण्डली मार कर ब्यास नदी के प्रवाह को रोक कर इस जगह को पानी में डुबोना चाहता था। इसके पीछे उसका उद्देश्य यह था कि यहां रहने वाले सभी जीव-जंतु पानी में डूब कर मर जाएंगे। भगवान शिव कुलान्त की इस योजना से चिंतित हो गए थे। अजगर के कान में धीरे से बोले शिव बड़े जतन के बाद भगवान शिव ने उस राक्षस रूपी अजगर को अपने विश्वास में लिया। शिव ने उसके कान में कहा कि तुम्हारी पूंछ में आग लग गई है। इतना सुनते ही जैसे ही कुलान्त पीछे मुड़ा तभी शिव ने उसके सिर पर त्रिशूल से वार कर दिया। त्रिशूल के प्रहार से कुलान्त मारा गया। कुलान्त के मरते ही उसका शरीर एक विशाल पर्वत में बदल गया।
उसका शरीर धरती के जितने हिस्से में फैला हुआ था वह पूरा का पूरा क्षेत्र पर्वत में बदल गया। कुल्लू घाटी का बिजली महादेव से रोहतांग दर्रा और उधर मंडी के घोग्घरधार तक की घाटी कुलान्त के शरीर से निर्मित मानी जाती है। कुलान्त से ही कुलूत और इसके बाद कुल्लू नाम के पीछे यही किवदंती कही जाती है। शिव ने इंद्र से बिजली गिराने प्रार्थना की थी कुलान्त दैत्य के मरने के बाद शिव ने इंद्र से कहा कि वे बारह साल मेंएक बार इस जगह पर बिजली गिराया करें। हर बारहवें साल में यहां बिजली गिरती है। इस बिजली से शिवलिंग चकनाचूर हो जाता है। शिवलिंग के टुकड़े इकट्ठा करके स्थानीय पुजारी उन टुकड़ों को मक्खन से जोड़कर फिर से लिंग के तौर पर स्थापित कर देता है। कुछ समय बाद पिंडी अपने पुराने स्वरूप में आ जाती है। बिजली शिवलिंग पर ही क्यों गिरती है? बिजली शिवलिंग पर गिरने के बारे में कहा जाता है कि भगवान शिव नहीं चाहते चाहते थे कि जब बिजली गिरे तो जन धन को इससे नुकसान पहुंचे। भोलेनाथ लोगों को बचाने के लिए इस बिजली को अपने ऊपर ले लेते हैं। इसी वजह से भगवान शिव को यहां बिजली महादेव कहा जाता है। भादौ के महीने में यहां मेलासा लगा रहता है। कुल्लू शहर से बिजली महादेव की पहाड़ी लगभग सात किलोमीटर है। शिवरात्रि पर भी यहां भक्तों की भीड़ उमड़ती है। सर्दियों में होती है यहां भारी बर्फबारी यह जगह समुद्र स्तर 2450 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। सर्दी के मौसम में यहां भारी बर्फबारी होती है। इस पूरे क्षेत्र की तरह ही कुल्लू में भी महादेव प्रिय देवता हैं। कहीं वे सयाली महादेव के रूप में प्रतिष्ठित हैं तो कहीं ब्राणी महादेव के रूप में। कहीं वेजुवाणी महादेव हैं तो कहीं बिजली महादेव। बिजली महादेव का अपना ही महात्म्य व इतिहास है। ऐसा लगता है कि बिजली महादेव के इर्द-गिर्द समूचा कुल्लू का इतिहास घूमता है। हर मौसम में दूर-दूर से लोग बिजली महादेव के दर्शन करने आते हैं।

95 प्रतिशत तक पानी बचाने वाली नल की टोंटी बनाई, हर घर में रोजाना 35 लीटर की बचत होगी

चेन्नई : जलसंकट से जूझ रहे चेन्नई के वैल्लोर जिले में हाल ही में ट्रेन से 25 लाख लीटर पानी पहुँचाया गया। चेन्नई के ज्यादातर शहरों में जलस्तर काफी हद तक नीचे गिर चुका है। बारिश होने के बाद ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के इंजीनियरों ने ऐसी डिवाइस (नोजल) बनाई है, जो 95% तक पानी की बर्बादी को रोक सकती है। हर घर में रोजाना 35 लीटर पानी की बचत कर सकती है।
नल से एक मिनट में 600 मिली पानी निकलता है
नोजल को ऑटोमाइजेशन तकनीक से तैयार किया गया है। इस तकनीक के कारण नल से एक मिनट में 600 मिली पानी निकलता है, जबकि सामान्य नल से 1 मिनट में 12 लीटर पानी निकल जाता है। इससे 95% तक पानी बचा सकते हैं। इसे ऐसे समझिए- एक बार हाथ धोने पर औसतन 600 मिली पानी खर्च होता है। नई डिवाइस का इस्तेमाल किया जाए तो हाथ धोने पर 15-20 मिली पानी खर्च होगा।
स्टार्टअप के संस्थापक अरुण सुब्रमण्यन के मुताबिक, डिवाइस प्लंबर के बिना नल में महज 30 सेकंड में फिट की जा सकती है। नोजल पूरी तरह तांबे का बना है। यह मेटल पानी की क्वालिटी को सुधारने के साथ हार्ड वॉटर के लिए भी बेहतर है। डिवाइस पानी की एक बूंद को छोटी‌-छोटी बूंदों में तोड़ती है, ताकि नल से निकलने वाला पानी जल्द से जल्द अधिक हिस्से को कवर कर सके। इसकी शुरुआत भी थोड़ी अलग थी। अरुण के मुताबिक, मेरी पड़ोसी पर्यावरणविद नजीबा जबीर ने मुझसे कहा कि उन्हें किचन के लिए ऐसी डिवाइस की जरूरत है जो पानी बचा सके। इसके बाद हमने बनाने की तैयारी शुरू की। वैज्ञानिकों ने ऑटोमाइजेशन तकनीक को 1950 में विकसित किया था। इसके तहत पानी का दबाव जितना बढ़ेगा, उतनी बचत की जा सकेगी। यही डिवाइस का आधार है।
प्रोटोटाइप करने में लगे 6 महीने
इसका पहला प्रोटोटाइप तैयार करने में 6 महीने का समय लगा। इसकी टेस्टिंग पड़ोसियों से कराई गई लेकिन ज्यादा कामयाबी नहीं मिली। लोगों ने इसमें कई बदलाव करने का सुझाव दिया। कुछ महीनों की मेहनत के बाद इसे और बेहतर बनाया गया। इसे तैयार करने में इंस्टीट्यूट के स्टूडेंट और स्टार्टअप के काे-फाउंडर रोशन कार्तिक का भी अहम योगदान रहा। मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के प्रोफेसर ने डिवाइस देखने के बाद इसे लोगों तक पहुंचाने की सलाह दी। नजीबा जबीर की आर्थिक मदद से स्टार्टअप की शुरुआत हुई।

5 साल की हुई रिवॉल्वर ‘निर्भीक’, अब तक 2500 बिकीं

नयी दिल्ली : महिलाओं की आत्मरक्षा के लिए ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड कानपुर द्वारा साल 2014 में लॉन्च रिवॉल्वर निर्भीक के अब तक 2500 यूनिट को बेचा जा चुका है। इस रिवॉल्वर को चर्चित निर्भया कांड के बाद लॉन्च किया गया था। वजन में बहुत हल्की होने कारण इसे महिलाओं ने भी खूब पसंद किया।
इस रिवॉल्वर का वजन 500 ग्राम और टैक्स के बाद की कीमत 1 लाख 14 हजार रुपये है। बिना जीएसटी के इस रिवॉल्वर का मूल्य 1 लाख 20 हजार रुपये है। आकार में छोटी होने कारण इस रिवॉल्वर को महिलाएं अपने हैंड पर्स में रखकर भी ले जा सकती हैं। इसके अलावा इस रिवॉल्वर का रखरखाव भी कम है। यह 15 मीटर दूर स्थित अपने लक्ष्य को आसानी से भेद सकती है। जबकि फायर करने के दौरान इसका रिक्वॉयल यानी झटका देने की दर भी अन्य रिवॉल्वरों से कम है।
तकनीकी विशेषताएं
निर्भीक रिवॉल्वर
निर्भीक रिवॉल्वर – फोटो : सोशल मीडिया
कैलिबर 7.65 मिलीमीटर
वजन 0.525 किलोग्राम
कुल आकार 177.8 मिलीमीटर
बैरल की लंबाई 120.63 मिलीमीटर
मारक क्षमता 15 मीटर
साइट साइड ब्लेड
फीड रिवाल्विंग चेंबर (सिक्स राउंड)

अमेजन एलेक्सा भारतीयों से हिन्दी में करेगी बात

अमेजन के वॉयस कंट्रोल इनेबल डिवाइस में एलेक्सा अब हिन्दी में बात करेगी। कंपनी ने बताया कि उसके डेवलपर्स अब भारतीय ग्राहकों के लिए एलेक्सा स्किल किट तैयार कर रेह हैं, जिसमें वो ग्राहकों से हिन्दी में बात करेगी। अमेजन के मुताबिक भारत में सबसे अधिक बोली जाने वाली हिंदी भाषा में एलेक्सा यूजर्स के लिए दिलचस्प एक्सपीरियंस देने के लिए तैयार है।
कम्पनी भारत में हिन्दी भाषी ग्राहकों के लिए एलेक्सा के डिवाइस को विकसित करना चाहती है, जिसके लिए वह केवल एलेक्सा वॉयस सर्विस (एवीएस) डेवलपर्स से इसे जल्द बनाने का अनुरोध कर सकती है। एलेक्सा स्किल किट (एएसके) फ्री, सेल्फ सर्विस एपीआईएस और टूल का संग्रह है। वर्तमान में एलेक्सा 80 देशों में उपलब्ध है और 14 से ज्यादा अलग-अलग भाषाएं बोलती है। पिछले साल अमेजन ने ‘क्लियो’ नाम की नई स्किल कैटेगरी डेवलप की थी। इसके जरिए ग्राहक एलेक्सा को हिन्दी और अन्य भाषाएं सिखा सकते थे। एलेक्सा के भाषा मॉडल को सुधारना और इसे दूसरी भाषाओं में बातचीत सिखाना क्लियो का मकसद था। हिंदी के अलावा यूजर्स एलेक्सा के अंग्रेजी के बयानों का जवाब तमिल, मराठी, कन्नड़, बंगाली, तेलुगू, गुजराती और दूसरी अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में दे सकते थे।

शिवालय / केरल में वडकुनाथ के रुप में पूजे जाते हैं शिव, यहां है घी का शिवलिंग

केरल के त्रिशूर जिले में 1000 साल पुराना वडकुनाथन मंदिर स्थित है। इसे टेंकैलाशम और तमिल भाषा में ऋषभाचलम् भी कहते हैं। यह देवस्थल केरल के सबसे पुराने और उत्तम श्रेणी के मंदिरों में गिना जाता है। यह स्थान उत्कृष्ट कला और वास्तु कला के लिए प्रसिद्ध है, जो केरल की प्राचीन शैली को भली भांति दर्शाता है। वडकुनाथन का अर्थ उत्तर के नाथ है जो केदारनाथ हो सकता है।
प्राकृतिक सुंदरता से घिरा हुआ वडकुनाथन मंदिर
आध्यात्मिक और शांति पूर्ण परिवेश देता है। मान्यता है कि इसकी स्थापना भगवान परशुराम द्वारा की गई थी। यह भी कहा जाता है कि आदि शंकराचार्य के माता-पिता ने संतान प्राप्ति के लिए यहां अनुष्ठान किया था। मंदिर को संरक्षण के लिए यूनेस्को का उत्कृष्टता पुरस्कार मिल चुका है। मंदिर पुरानी परंपराओं तथा वास्तु शास्त्र की संरक्षण तकनीकों के ज्ञान को समेटे हुए है।
शिवलिंग की जगह नजर आता है घी का टीला
धार्मिक परंपरा के अनुसार शिवलिंग का घी से अभिषेक किया जाता है। पूरी तहर घी से ढंके होने के कारण शिवलिंग दिखाई नहीं देता। घी की एक मोटी परत हमेशा इस विशाल लिंग को ढंकी रहती है। यह एकमात्र मंदिर है जहां शिवलिंग दिखाई नहीं देता। भक्तों को यहां केवल 16 फीट ऊँचा घी का टीला ही नजर आता है। यह बर्फ से ढंके कैलाश पर्वत का प्रतिनिधित्व करता है। ऐसा माना जाता है कि यहां चढ़ाने वाले वाले घी में कोई गंध नहीं होती और यह गर्मियों के दौरान भी पिघलता नहीं है।
हाथियों को खिलाया जाता है खाना
मंदिर में हर साल आनापुरम महोत्सव आयोजित किया जाता है, जिसमें हाथियों को खाना खिलाया जाता है। इस महोत्सव की शुरुआत में सबसे छोटे हाथी को भोजन देकर हाथियों का भोज शुरू किया जाता है। यह प्राचीन मंदिर विशाल पत्थर की दीवारों से घिरा है। मंदिर परिसर के अंदर चार गोपूरम चार मुख्य दिशाओं में मौजूद हैं। यानी प्रवेश द्वार है। दक्षिण और उत्तर दिशा के गोपूरम प्रतिबंधित है वहीं पूर्व और पश्चिम दिशा वाले गोपूरम से मंदिर में प्रवेश मिलता है।

(साभार – दैनिक भास्कर)

जल संरक्षण : यूपी विधानसभा ने सभी को केवल आधा गिलास पानी देने को कहा

लखनऊ : उत्तर प्रदेश विधानसभा में जल संरक्षण को लेकर एक नई पहल शुरू की गई है। इसके तहत अब यहां सभी को आधा गिलास पानी दिया जाएगा। विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित के निर्देश पर प्रमुख सचिव (विधानसभा) प्रदीप दुबे ने विधानसभा और सचिवालय में इस व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से लागू करने की बात कही है। आदेश के मुताबिक- हमेशा पानी से पूरे भरे हुए गिलास के पानी का उपयोग नहीं हो पाता है। अत: शुरू में आधा गिलास पानी ही दिया जाए। जरूरत होने पर पुन: जल उपलब्ध कराया जाए। इससे जल संरक्षण में मदद मिलेगी। इससे पहले लखनऊ में ही किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज (केजेएमयू) में ऐसी पहल को शुरू किया गया था। विधानसभा के एक अधिकारी ने बताया- हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ में आमजन से जल संरक्षण की अपील की थी। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने आधा गिलास पानी देने का नियम बनाया है।
2030 तक विकराल होगा जल संकट
अधिकारी ने बताया, ”साल 2018 में नीति आयोग ने कहा था कि भारत ‘इतिहास के सबसे भयावह जल संकट’ से जूझ रहा है। 60 करोड़ लोगों को हर रोज पानी की किल्लत से जूझना पड़ रहा है। करीब 2 लाख लोग हर साल साफ पेयजल न मिलने से मर रहे हैं। देश के 75 फीसदी मकानों में पानी की सप्लाई नहीं है।” रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि 2030 तक पानी की किल्लत और विकराल हो जाएगी।

एयरटेल की पीछे छोड़ जियो बनी दूसरी बड़ी टेलीकॉम कम्पनी

मुम्बई : मुकेश अम्बानी की कम्पनी रिलायंस जियो ने ग्राहकों की संख्या के मामले में भारती एयरटेल को पीछे छोड़ दिया है। इस उपलब्धि के साथ वो देश की दूसरी सबसे बड़ी कम्पनी बन गयी है। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) के आंकड़ों के मुताबिक मई महीने में जियो के ग्राहकों की संख्या 32.29 करोड़ और बाजार हिस्सेदारी 27.80 फीसदी पहुंच गई है। अभी वोडाफोन-आइडिया पहले स्थान पर बरकार है।
ट्राई के नए आँकड़ों के मुताबिक वोडाफोन-आइडिया के 39.75 करोड़ ग्राहक हैं, वहीं इसकी बाजर में 33.36 फीसदी हिस्सेदारी है। इन आँकड़ों के साथ ये पहले स्थान पर बनी हुई है। बीते साल ही इन दोनों कम्पनियों का विलय हुआ है। दूसरी तरफ, जियो के ग्राहकों की संख्या 32.29 करोड़ पहुँच चुकी है जबकि सुनील मित्तल की भारती एयरटेल के 32.03 करोड़ ग्राहक और 27.58 फीसदी बाजार हिस्सेदारी है। इन आँकड़ों के साथ वो देश की तीसरी सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी है।
जियो ने मई में 81.80 लाख नए ग्राहक जोड़े हैं। इस दौरान वोडाफोन-आइडिया 56.97 लाख करोड़ और एयरटेल ने 15.08 लाख करोड़ ग्राहक कम हुए। वहीं, आर्थिक संकट का सामना कर रही भारत संचार निगल लिमिटेड (BSNL) ने मई के महीने में 2,125 नए वायरलेस सब्सक्राइबर्स जोड़े। वोडाफोन-आइडिया अप्रैल में भी पहले स्थान पर थीं, लेकिन इस दौरान एयरटेल दूसरे स्थान पर थी जबकि जियो तीसरे स्थान पर थी।

सीआरपीएफ की महिला सैनिकों के लिए बॉडी प्रोटेक्टर लॉन्च, 8000 जवानों को मिलेगा फायदा

नयी दिल्ली : देश में पहली बार महिला सैनिकों के लिए बॉडी प्रोटेक्टर लॉन्च किया गया है। इससे उन्हें कानून व्यवस्था बनाए रखने के दौरान सुरक्षा में मदद मिलेगी। सीआरपीएफ की महिला सैनिकों के लिए बनाए गए इस प्रोटेक्टर को शुक्रवार को सीआरपीएफ के डीजी राजीव राय भटनागर और डीआरडीओ में लाइफ साइंस के डीजी ने लॉन्च किया। इससे उनकी महिला बटालियन की करीब 8000 सैनिकों को फायदा मिलेगा। इसमें महिलाओं को पुरुष जवानों के समान ही पूरी शरीर की सुरक्षा को ध्यान में रखा गया है। फुल बॉडी आर्मर में शोल्डर पैड, आर्म गार्ड, फ्रंट और बैक शील्ड को भी शामिल किया गया है।
कुलश्रेष्ठ की अध्यक्षता बनी समिति ने दिखाई तेजी
महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा गृह मंत्रालय के राष्ट्रीय सम्मेलन में उठाया गया था। इसके बाद पुलिस और सशस्त्र बलों में महिलाओं की सुरक्षा समस्याओं के मुद्दे पर लोकसभा में चर्चा के बाद हरी झंडी दिखाई गई। इस प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए सीआरपीएफ के आईजी प्रोविजनिंग अनुपम कुलश्रेष्ठ की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई थी। इसके बाद सीआरपीएफ, डीआईपीएएस (डिफेंस इंस्टीट्यूट ऑफ फिजियोलॉजी एंड एलाइड साइंसेज) और डिफेंस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (डीआरडीओ) के आपसी सहयोग से बॉडी प्रोटेक्टर को डिजाइन किया। डीआईपीएएस के वैज्ञानिकों ने बॉडी गियर डिजाइन करने से पहले सीआरपीएफ की रैपिड एक्शन फोर्स की महिला जवानों का अध्ययन किया था। इसे बनाने में दो साल लगे। दिल्ली पुलिस ट्रेनिंग स्कूल के इंचार्ज सुमन नुलवा के मुताबिक, ‘‘पुलिस में अक्सर हम पुरुष प्रधान रहते हैं, लेकिन अब इस लिंग भेद समाप्त कर महिलाओं को भी विशेष जिम्मेदारियां दी जा रही हैं। ताकि, वे अपने कर्तव्यों को अधिक आसानी से निभा सकें।’’ निर्भया केस में विरोध प्रदर्शन को मैनेज करने वाली महिला आईपीएस ने मीडिया को बताया, ‘‘महिला पुलिस को लॉ एंड ऑर्डर को ठीक करने के दौरान ही समस्या आती है। इस दौरान हेलमेट महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हालांकि महिलाओं को अक्सर हेलमेट फिट नहीं होते, क्योंकि वे पुरुषों के अनुरूप मंगाए गए होते हैं। हेलमेट की मांग काफी लंबे समय से की जा रही थी।

 आईसीसी ‘हाल ऑफ फेम’ में शामिल हुए तेन्दुलकर, डोनाल्ड और कैथरीन

लंदन : भारत के स्टार बल्लेबाज सचिन तेन्दुलकर को दक्षिण अफ्रीका के महान तेज गेंदबाज एलेन डोनाल्ड के साथ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) के ‘ हाल ऑफ फेम ’ में शामिल किया गया। तेन्दुलकर आईसीसी ‘हाल ऑफ फेम’ में शामिल होने वाले छठे भारतीय खिलाड़ी बने। उनसे पहले सुनील गावस्कर, बिशन सिंह बेदी, कपिल देव, अनिल कुंबले और राहुल द्रविड़ ‘हाल ऑफ फेम’ में शामिल हुए थे।
तेन्दुलकर और डोनाल्ड के साथ इस साल ‘हाल ऑफ फेम’ में दो बार के विश्व कप विजेता ऑस्ट्रेलियाई महिला क्रिकेटर कैथरीन फिट्जपैट्रिक को भी शामिल किया गया है। तेन्दुलकर ने ‘हाल ऑफ फेम’ में शामिल करने के समारोह में कहा, ‘‘आईसीसी क्रिकेट ‘हाल ऑफ फेम’ में शामिल किया जाना सम्मान की बात है जो पीढ़ी दर पीढ़ी क्रिकेटरों के योगदान को संजोता है। इन सभी ने खेल के विकास और लोकप्रियता में योगदान दिया है और मैं खुश हूं कि मैंने भी इसमें अपना योगदान दिया। ’’
उन्होंने अपने परिवार और कोच को शुक्रिया कहा जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में करीब ढाई दशक के करीब की यात्रा में उनका सहयोग किया।
इस महान बल्लेबाज ने कहा, ‘‘इस मौके पर मैं उन सभी को शुक्रिया कहना चाहूंगा जो मेरे लंबे अंतरराष्ट्रीय करियर के दौरान मेरे साथ रहे। मेरे माता पिता, भाई अजीत और पत्नी अंजलि मेरे लिये ताकत के स्तंभ रहे हैं जबकि मैं भाग्यशाली रहा कि मुझे शुरू में मार्गदर्शन के लिये रमाकांत आचरेकर जैसा कोच और मेंटर मिला। ’’
क्रिकेट इतिहास के सबसे शानदार बल्लेबाज तेन्दुलकर को ‘हाल ऑफ फेम’ में शामिल होने की योग्यता हासिल करने के तुरंत बाद ही इसमें जगह मिल गयी जिसके लिये एक खिलाड़ी को अपना अंतिम अंतरराष्ट्रीय मैच कम से कम पांच साल पहले खेल लेना चाहिए। पूर्व दाएं हाथ के बल्लेबाज ने सर डोनाल्ड ब्रैडमैन के साथ क्रिकेट खेला है और टेस्ट और वनडे दोनों में सबसे ज्यादा रन जुटाने वाले खिलाड़ी बने हुए हैं। नवम्बर 2013 में संन्यास ले चुके 46 साल के तेन्दुलकर ने टेस्ट में 15,921 और वनडे में 18,426 रन बनाए हैं जो अब भी रिकार्ड बने हुए हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं अपने सभी कप्तानों, साथी खिलाड़ियों और बीसीसीआई, एमसीए प्रशासकों के इतने वर्षों से समर्थन का भी शुक्रिया करता हूं जिनकी वजह से मैं इतने लंबे समय तक खेल का लुत्फ उठा पाया। मैं आईसीसी को भी मेरे क्रिकेट करियर की सराहना करने के लिये शुक्रिया कहता हूं। ’’ डोनाल्ड खेल के बेहतरीन तेज गेंदबाजों में से एक हैं जिन्होंने 330 टेस्ट और 272 वनडे विकेट चटकाये हैं। इस 52 साल के क्रिकेटर ने 2003 में क्रिकेट को अलविदा कहा था। वहीं कैथरीन महिला क्रिकेट में दूसरी सर्वाधिक विकेट चटकाने वाली खिलाड़ी हैं जिन्होंने वनडे में 180 और टेस्ट में 80 विकेट चटकाये हैं। कोच के तौर पर उन्होंने आस्ट्रेलियाई महिला टीम को तीन विश्व कप खिताब दिलाये। आईसीसी के मुख्य कार्यकारी मनु स्वाहने ने इन तीनों खिलाड़ियों को ‘हाल ऑफ फेम’ में शामिल होने के लिये बधाई दी।

अन्तरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने की प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की तारीफ

नयी दिल्ली : अन्तरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी उज्ज्वला योजना की शुक्रवार को सराहना की। उसने कहा कि यह पर्यावरण को स्वच्छ बनाने तथा महिलाओं का स्वास्थ्य बेहतर करने की दिशा में उल्लेखनीय उपलब्धि है। आईईए के कार्यकारी निदेशक फातिह बिरोल ने यहां एक सम्मेलन में कहा, ‘‘वर्ष 2020 तक देशभर में एलपीजी उपलब्ध कराना बड़ी उपलब्धि है। यह ऊर्जा का मुद्दा नहीं है बल्कि यह एक आर्थिक मुद्दा है, सामाजिक मुद्दा है।’’
प्रधानमंत्री ने उत्तरप्रदेश के बलिया में एक मई 2016 को इस योजना की शुरुआत की थी। इसका लक्ष्य गरीब परिवारों को नि:शुल्क एलपीजी कनेक्शन मुहैया कराकर महिलाओं और बच्चों का स्वास्थ्य बेहतर बनाना है। अभी तक इस योजना के तहत करीब 7.40 करोड़ कनेक्शन दिये जा चुके हैं। योजना के तहत 2020 तक आठ करोड़ कनेक्शन देने का लक्ष्य है।
बिरोल ने कहा कि ग्रामीण परिवारों में रसोई में लकड़ी, उपले और दूसरे कृषि अपशिष्टों का इस्तेमाल किया जाने से सांस संबंधी बीमारियों का मुख्य कारण है। एलपीजी से स्वच्छ पर्यावरण मुहैया कराने में मदद मिल रही है। उन्होंने कहा, ‘‘उज्ज्वला महज ऊर्जा क्षेत्र की उपलब्धि नहीं है बल्कि यह सामाजिक और आर्थिक उपलब्धि भी है।’’ विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी पिछले साल इस योजना की तारीफ की थी। बिरोल ने कहा कि भारत ने पिछले साल सभी गांवों में बिजली पहुंचाने का लक्ष्य हासिल किया। जल्दी ही सभी घरों में बिजली पहुंच जाएगी। यह एक बड़ी उपलब्धि है।
उन्होंने कहा कि भारत ने 2022 तक सौर ऊर्जा एवं अन्य अक्षय ऊर्जा स्रोतों से 175 गीगावाट बिजली उत्पादन करने का लक्ष्य तय किया है। यदि यही रफ्तार रही तो लक्ष्य को संशोधित कर बढ़ाया जा सकता है। इसके साथ ही जैव ईंधन के इस्तेमाल पर अधिक जोर देना भी बहुत महत्वपूर्ण है। तेल एवं गैस का घरेलू उत्पादन बढ़ाने के साथ ही इन कदमों से देश को आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।