Saturday, April 25, 2026
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अलग दिखना है तो आजमाइए नियॉन रंग

अगर आप पुरुषों के फैशन की बात की जाये तो आपके वार्डरोब में कुछ रंग ऐसे हैं जो आप पसन्द करते हैं और कुछ रंग ऐसे हैं जिनको खरीदना तो दूर आप हाथ लगाना भी पसन्द नहीं करते होंगे। काला, नीला, धूसर, कत्थई, भूरा, नेवी ब्लू रंग लगभग हर पुरुष की वार्डरोब में नजर आ सकता है मगर बात जब चटकीले रंगों की होती है तो आप कतरा कर निकल जाते हैं और नियॉन…ये तो आप शायद समझ रहे होंगे कि आपके लिए नहीं हैं मगर अलग दिखना हो तो कुछ प्रयोग किये जा सकते हैं। दरअसल, फैशन कोई भी हो, दिक्कत तब होती है जब वह जरूरत से ज्यादा हो मगर आप प्रयोग में जरा सी सावधानी बरते तो शानदार भी दिख सकते हैं और नियॉन रंगों के साथ प्रयोग करने हों तो यह बात लागू होती है –

कलर ब्लॉकिंग पर ध्यान
एक नियॉन पीस को दूसरे के साथ पेयर कर आप अपने बोल्ड लुक का परिचय दे सकते हैं। आप नियॉन कलर्ड डेनिम्स और कॉलर्ड शर्ट्स के साथ भी मजेदार कॉम्बिनेशन्स बना सकते हैं। अगर आप दोस्तों के साथ ब्रंच के लिए बाहर जाने का सोच रहे हैं तो नियॉन ब्लू टी शर्ट के साथ इसे पहनें। इसके साथ इटेलियन ब्लैक लेदर बेल्ट अच्छा लगता है। अगर रंगों के मामले में आपका सेंस अच्छा नहीं है तो कलर ब्लॉकिंग ना करें और सुरक्षित रंग ही पहनें मतलब जिसे पहनकर आपको अजीब न लगे।


कंट्रास्ट से होगा कमाल
नियॉन ब्लू या ब्लैक केसाथ कंट्रास्ट बॉटम चुनें। नियॉन ब्लू शर्ट को डेनिम जींस केसाथ टीमअप करें। इन शेड केअलावा नियॉन पिंक का कॉम्बिनेशन भी कमाल लगता है। एक नियॉन ग्रीन स्लीवलेस ड्रेस को हल्के ब्लैक ब्लेजर या बाइकर जैकेट के साथ पहना जा सकता है। हालांकि इस तरह केलुक मेंकम से कम ऐसेसरीज का इस्तेमाल करें तो अच्छा है।
न्यूट्रल के साथ पहनें
नियॉन कलर पहनने का बेसिक नियम है इसे न्यूट्रल कलर के साथ पेयर करना। अपने पूरे आउटफिट के लिए एक नियॉन पीस चुनना ही काफी होगा जिससे आपके आउटफिट का फोकस भी बना रहेऔर आप ज्यादा भड़काउ भी ना लगें। आप चाहें तो पिंक और ब्लू केकलर में शानदार नियॉन शर्ट्स चुनें और इन्हेंन्यूट्रल डेनिम के साथ पेयर करें। आप ब्राइट शर्ट को व्हाइट जींस केसाथ पेयर करें और साथ ही अपने लुक को और कमाल बनाने के लिए एक हल्की कॉटन की स्लीवलेस जैकेट पहनें।
एसेसरीज में ट्राय करें
अपने लुक को ग्लैमरस बनाने के लिए नियॉन बेल्ट्स, बैग्स, और शूज बेस्ट ऑप्शन है। इस मौसम में हैड या कैप के नियॉन शेड भी आपको डिफरेंट लुक देंगे।

दुनिया में प्रवासी भारतीयों की आबादी 1.75 करोड़, मैक्सिको दूसरे और चीन तीसरे स्थान पर

संयुक्त राष्ट्र :  दुनिया में सबसे ज्यादा प्रवासी, भारतीय मूल के लोग हैं। इनकी संख्या 1.75 करोड़ है। द इंटरनेशनल आर्गेनाइजेशन फॉर माइग्रेशन (आईओएम) ने अपनी ग्लोबल माइग्रेशन रिपोर्ट 2020 में यह दावा किया है। यह रिपोर्ट 2018 के आंकड़ों के आधार पर बनाई गई है। इसके मुताबिक दूसरे स्थान पर मैक्सिको (1.18 करोड़) और तीसरे पर चीन (1.07 करोड़) है। भारतीय 2015 में भी सबसे आगे थे।
तीन साल में भारतीय प्रवासियों की संख्या में 0.1% बढ़ोतरी हुई है। इन लोगों ने अपने देश को एक साल में 5.5 लाख करोड़ रुपए भेजे हैं। यह 2015 की तुलना में 70 हजार करोड़ रुपए ज्यादा है, जबकि दुनियाभर के प्रवासियों ने अपने देशों में 49 लाख करोड़ रुपए भेजे।
दुनिया में प्रवासियों की संख्या करीब 27 करोड़
दुनिया में प्रवासियों की संख्या करीब 27 करोड़ है। प्रवासियों का सबसे बड़ा देश अमेरिका है। यहां करीब 5.1 करोड़ प्रवासी हैं। यह आंकड़ा दुनिया की आबादी का 3.5% है। इसका मतलब यह है कि अमूमन किसी भी देश में 96.5 % लोग स्थानीय या मूल निवासी ही हैं। प्रवासियों में से आधे से अधिक यानी 14.1 करोड़ यूरोप और उत्तर अमेरिका महाद्वीप में रहते हैं। प्रवासियों में 52 % पुरुष हैं। करीब दो तिहाई यानी 16.4 करोड़ प्रवासियों को रोजगार की तलाश है।
ग्रीन कार्ड पाने के लिए कतार में दूसरे नंबर पर भारतीय
भारत के करीब 2.27 लाख लोगों को अमेरिका में वैध स्थायी निवास की अनुमति का इंतजार है। ये लोग परिवार प्रायोजित ग्रीन कार्ड पाने के लिए कतार में हैं। इस सूची में मैक्सिको के सबसे ज्यादा 15 लाख लोग हैं। इसके बाद भारत और फिर 1.80 लाख के साथ चीन का नंबर है। ये वे लोग हैं, जिनके परिवार का कोई सदस्य अमेरिकी नागरिक है। अब ये भी वहां बसना चाहते हैं।

सुनामी से तबाह जंगलों की लकड़ी से बना 5 मंजिला स्टेडियम, बैठेंगे 60 हजार दर्शक 

टोक्यो ओलिंपिक-2020 का स्टेडियम बनकर तैयार, इसमें 87% लकड़ी का इस्तेमाल हुआ है
47 प्रांतों के जंगलों की 2 हजार घन मीटर देवदार की लकड़ी इस्तेमाल हुई, 10 हजार करोड़ रुपये लागत आई
स्टेडियम में दर्शकों को गर्मी से बचाने 185 बड़े पंखे और 8 स्थानों पर कूलिंग नोजल भी लगाए गए हैं
टोक्यो : जापान में अगले साल होने वाले टोक्यो ओलिंपिक का मुख्य स्टेडियम बनकर तैयार हो गया है। इसमें 87% लकड़ी का इस्तेमाल हुआ है। यानी 2000 घन मीटर देवदार की लकड़ी इस्तेमाल की गई है। यह लकड़ी जापान के उन 47 प्रांत के जंगलों से लाई गई, जो 2011 में आई सुनामी से तबाह हो गए थे।
इसका मकसद है- दर्शक प्रकृति से जुड़े रहें और उन्हें गर्मी न लगे। इसके लिए यहां 185 बड़े पंखे और 8 स्थानों पर कूलिंग नोजल भी लगाए गए हैं। 5 मंजिला मुख्य स्टेडियम करीब 10 हजार करोड़ रु. की लागत से तैयार हुआ है। यहां 60 हजार दर्शक बैठ सकेंगे।
एक जनवरी को खेला जाएगा पहला टूर्नामेंट
यहां पहला टूर्नामेंट अगले साल 1 जनवरी को एंपरोर फुटबॉल कप का फाइनल खेला जाएगा। टोक्यो ओलंपिक 24 जुलाई से 9 अगस्त तक होगा। इसके अलावा 25 अगस्त से 6 सितंबर तक पैरालिंपिक होंगे। स्टेडियम का डिजाइन जापान के आर्किटेक्ट केंगो कुमा ने तैयार किया है।
ई-वेस्ट से बने 5000 मेडल दिए जाएंगे
ओलिंपिक के 60% वेन्यू रियूज्ड और रिसाइकल चीजों से बन रहे हैं। स्टेडियम की सभी लाइटें सोलर एनर्जी से चलेंगी। ओलिंपिक में ई-वेस्ट से बने 5000 मेडल दिए जाएंगे। ई-वेस्ट के लिए लोगों ने 80 हजार यूज्ड मोबाइल फोन, स्मार्टफोन और टैबलेट दिए। वहीं पहली बार ड्राइवरलेस टैक्सी का इस्तेमाल होगा।

37 हजार करोड़ रुपये के घाटे में हैं ओला, जोमैटो जैसी 8 भारतीय कम्पनियां

नयी दिल्ली/मुम्बई : अगर आप जोमैटो से खाना मंगवाते हैं, ऑफिस के लिए ओला कैब करते हैं, भुगतान पेटीएम से किया है, मेक माय ट्रिप पर छुटि्टयां प्लान कर रहे हैं, होटल ओयो पर सर्च कर रहे हैं, फिल्म देखने के लिए बुक माई शो से टिकट करवा रहे हैं, बिग बास्केट से किराना ऑर्डर कर रहे हैं और साथ ही ऑनलाइन शॉपिंग के लिए कपड़े फ्लिपकार्ट से खरीद रहे हैं, तो इस तरह आपने दिनभर में 8 ऑनलाइन कम्पनियों की सेवाएं लीं।
चौंकाने वाली बात यह है कि तेजी से बढ़ रही इन 8 ऑनलाइन कम्पनियों का सामूहिक कुल घाटा अभी 36 हजार 761 करोड़ रुपए से अधिक है। दिलचस्प यह है कि ये कंपनियां देश में करीब 20-40 फीसदी की वार्षिक दर से अपना कारोबार और ब्रैंड वैल्यू भी बढ़ा रही हैं। वर्ष दर वर्ष ये कंपनियां जहां ग्राहक संख्या और राजस्व बढ़ा रही हैं, नया निवेश भी हासिल करती जा रही हैं।
कम्पनियों का घाटा भी बढ़ रहा
इसे इस उदाहरण से समझ सकते हैं। ऑनलाइन खाना मुहैया कराने वाली जोमैटो का वर्ष 2014-15 में राजस्व 36.12 करोड़ था। इसी वर्ष कम्पनी का घाटा 37.17 करोड़ रुपये रहा। पांच साल में कम्पनी का राजस्व यूं तो करीब 37 गुना बढ़कर 1,350 करोड़ से अधिक हो गया, लेकिन घाटा 570 करोड़ रुपये से अधिक रहा। विशेषज्ञों के मुताबिक कम से कम अगले पांच साल तक देश में ऑनलाइन कम्पनियों का कारोबार घाटे में ही चलता रहेगा। पीडब्ल्यूसी के पार्टनर एंड लीडर डील स्ट्रैटजी संकल्प भट्‌टाचार्य ने कहा कि ऑनलाइन कंपनियों के प्लेटफॉर्म्स पर आक्रामक रूप से डिस्काउंट चलता है साथ ही डिलीवरी, वेयर हाउिसंग और कारोबार का विस्तार करने पर लगातार निवेश भी हो रहा है। भट्‌टाचार्य कहते हैं कि लेकिन अभी ये कम्पनियां फायदा नहीं बना पा रही हैं। कम्पनियों की कोशिश ग्राहकों के व्यवहार में बदलाव लाकर उसे अपने ब्रांड से जोड़े रखने की है। अलीबाबा, सॉफ्ट बैंक, टाइगर ग्लोबल समेत सात आठ पुराने निवेशक देश में कम्पनियों में निवेश कर रहे हैं और वे पैसा लगाते रहेंगे। ऐसी कंपनियों को फायदे में आने में अभी करीब चार से पांच साल और लगेंगे, इस बीच ग्राहकों को फायदा होता रहेगा।
फिर कंपनियां लगातार बढ़ते घाटे के बावजूद कारोबार को क्यों बढ़ा रही हैं? यह पूछने पर ई-कॉमर्स कंपनियों को सलाह देने वाली कम्पनी टैक्नोपैक कंसल्टिंग के सीनियर वाइस प्रेसीडेंट अंकुर बिसेन कहते हैं कि ऑनलाइन बाजार को लगा कि ढांचागत ऑफलाइन की कमी को पूरा करने में वे सक्षम हैं। इसलिए ओयो, पेटीएम जैसी कम्पनियों ने एक नई शुरुआत देश में की। ऑनलाइन कंपनियों ने पहली बार देश में वस्तुओं की नयी कीमत तय (प्राइस डिस्कवरी) की। कंपनियों ने भारी डिस्काउंट देकर ग्राहकों को आकर्षित किया। ग्राहक तक पहुँचने के लिए कम्पनियों को पैसा चाहिए और यह कमी वेंचर इन्वेस्टमेंट फंड से पूरी हुई। इसमें बड़ा हिस्सा विदेशी कंपनियों का रहा है। यह कॉन्सेप्ट अमेरिका, यूरोप, चीन होते हुए भारत में आया है। एक स्थिति के बाद कंपनियों के लिए घाटा और लागत मायने नहीं रखती। एक तय धारणा या उम्मीद के आधार पर देश में कारोबार हो रहा है। अलीबाबा, एयर बीएनबी और अमेजन जैसी कंपनियों ने अमेरिका में ऐसे ही कंपनियों को फायदे में चलाकर दिखाया है। बिसेन कहते हैं कि वैसे कम से कम पांच साल तो कम्पनियां घाटे में ही रहेंगी। इस दौरान इस क्षेत्र में कई कम्पनिनयों के विलय-अधिग्रहण भी होंगे।
वहीं मेक माई ट्रिप के प्रवक्ता ने कहा कि बाजार में जहां भी इंटरनेट की पहुँच है, हम वहां अवसर देख रहे हैं। हम लगतार अपने घाटे को घटा रहे हैं और लाभ की ओर बढ़ रहे हैं। भारी डिस्काउंट के बावजूद निवेशक क्यों कंपिनयों में पैसा लगाते हैं? यह पूछने पर एक विशेषज्ञ ने कहा कि ऑनलाइन कम्पनियों में पैसा लगाने वाले निवेशक ही कहते हैं कि पहले ग्राहक लाओ, आधार तैयार करो जिससे मार्केट शेयर बढ़े। इसीलिए 800 की चीज 600 रुपये में मिलती है। कंपनियों और निवेशकों की कोशिश है कि ग्राहक उन्हीं के प्लेटफार्म का उपयोग करें। एक समय बाद ऐसी कम्पनियां या तो अपनी कंपनी को बेच देती हैं या फिर वे कुछ समय के बाद फायदे में ही आ जाती हैं। भारत में भी ऐसा सम्भव है।
कम्पनियों के बीच प्रतिस्पर्द्धा एवं बाजार का विश्लेषण करने वाली कम्पनी कालागाटो के चीफ बिजनेस ऑफिसर अमन कुमार कहते हैं कि ऑनलाइन कम्पनियों की माँग इसलिए है, क्योंकि वो डिस्काउंट देते हैं। प्रतिस्पर्द्धा के कारण भी कम्पनियों को डिस्काउंट देना पड़ता है। हालांकि ग्राहकों को फायदा ही है, क्योंकि अब वर्षभर ऑनलाइन सेल चलती रहती है। घाटे के बावजूद कम्पनियों की मार्केट वैल्यू कैसे बढ़ती जा रही है, यह पूछने पर भट्‌टाचार्य कहते हैं कि सामान्य तौर पर कंपनियों के वैल्यूशन से अलग इन कम्पनियों का वैल्यूएशन होता है। 20 साल पहले डिस्काउंट कैश जनरेशन के आधार पर कम्पनी की वैल्यू तय होती थी लेकिन अब ग्रास मर्केन्डाइस कीमत मल्टीपल आधार पर तय हो रही है। जितनी अच्छी कम्पनी की स्थिति होगी, उतने गुना ही वैल्यू ज्यादा होगी। जैसे अभी कम्पनी का टर्नओवर 100 रुपये है और मार्जिन 10 रुपये है, तो कम्पनी की वैल्यू निकालने के लिए 10 रुपए का 15 गुना यानी 150 रुपए कम्पनी की वैल्यू तय होगी। कहीं-कहीं रेवेन्यू के आधार पर भी कंपनियों की कीमत का निर्धारण हो रहा है, यह दो से छह गुना तक है। जो निवेशक इन कंपनियों में पहले निवेश कर चुके हैं वे ही अभी ज्यादा पैसा लगा रहे हैं और नए निवेशक अभी कम आ रहे हैं।
सबसे बड़े घाटे में ओयो; 4 साल में 1367 गुना घाटा
वर्ष 2013-14 में जहां ओयो का महज 84 लाख रु. का कुल घाटा हुआ था। वर्ष 2017-18 में इसका कुल घाटा बढ़कर करीब 1367 गुना यानी 1148.22 करोड़ हो गया। ओयो भारत, नेपाल, मलेशिया, चीन, इंडोनेशिया, यूएई में 800 शहरों में है। वहीं 23 हजार से अधिक होटलों से अनुबंध है।
इनमें सबसे बेहतर फ्लिपकार्ट; 4 साल में 3 गुना बढ़ा राजस्व
फ्लिपकार्ट इंडिया प्रा. लि. और फ्लिपकार्ट इंटरनेट प्रा. लि. का संयुक्त राजस्व वर्ष 2014-15 में 10,309.24 करोड़ रुपए था। वर्ष 2018-19 में यह बढ़कर 35,734.9 करोड़ रुपये हो गया। इस दौरान फ्लिपकार्ट इंटरनेट ने वर्ष 2018-19 में प्रमोशन पर 1141 करोड़ रुपए खर्च किए।
जो घाटे में, पर उधार नहीं  ओला; राजस्व  36, घाटा 193 गुना बढ़ा
15 लाख कैब (ड्राइवर पार्टनर) वाली कंपनी ओला द्वारा दी जानकारी के मुताबिक कंपनी पर कोई उधारी नहीं है। जबकि कंपनी का राजस्व वर्ष 2013-14 में महज 51.05 करोड़ रु. था जो वर्ष 2017-18 में बढ़कर 1860.61 करोड़ रुपए हो गया। यानी 36 गुना से अधिक बढ़ोतरी।
मेक माय ट्रिप; 11 गुना से अधिक बढ़ा घाटा
कम्पनी की उधारी महज चार वर्ष (2013-14 से 2017-18) के दौरान करीब 98 लाख रुपये से बढ़कर करीब 2.75 करोड़ रुपये हो गयी है। कम्पनी का कुल घाटा इस दौरान करीब 11 गुना से अधिक बढ़ गया है।
पेटीएम; पहले फायदा अब घाटे में कम्पनी
अपनी स्थापना से लेकर वित्त वर्ष 2013-14 तक पेटीएम कुल करीब 150 करोड़ रुपये के फायदे में चल रही थी। लेकिन वर्ष 2017-18 तक आते-आते कम्पनी को कुल करीब 4,102 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ।
जोमैटो;कम्पनी के पास 3208 करोड़ रिजर्व में
वर्तमान में 24 देशों के 10 हजार से अधिक शहरों में मौजूदगी। प्रति माह 10 करोड़ लोगों को खाने का ऑर्डर पहुँचाने वाली कंपनी जोमैटो के पास कुल रिजर्व वित्त वर्ष 2018-19 तक 3,208 करोड़ रुपये के थे।
बुक माय शो; घाटा 4 करोड़ से बढ़कर 140 करोड़ रुपये हुआ
कम्पनी को वर्ष 2013-14 में जहां 4.03 करोड़ रुपए का घाटा हुआ था वहीं वर्ष 2017-18 के दौरान 140.26 करोड़ रुपए रहा। कम्पनी के मुताबिक 1.5 करोड़ टिकट कम्पनी के प्लेटफार्म से हर माह बुक होते हैं।
बिग बास्केट; प्रमोशन पर खर्च किए पाँच करोड़ रुपये से अधिक
वर्ष 2017-18 के दौरान 5.55 करोड़ प्रमोशन (प्रचार-प्रसार) पर खर्च किए। वहीं कम्पनी का राजस्व वर्ष 2017-18 के दौरान करीब 1410 करोड़ रु. रहा। वर्ष 2013-14 में 2.35 करोड़ रुपए का घाटा हुआ, वर्ष 2017-18 में 179.23 करोड़ हो गया।

(साभार – दैनिक भास्कर)

ई-फार्मेसी दवा स्टोर नहीं कर सकेंगी, अब दुकानदार ग्राहक के घर दवा पहुँचाएंगे

नयी दिल्ली : दवा की ऑनलाइन बिक्री वाले ई-फार्मेसी प्लेटफॉर्म अब अपने पास दवा स्टोर नहीं कर सकेंगे। खुदरा या थोक विक्रेताओं से हाथ मिलाके ही यह ग्राहकों तक दवा पहुँचा सकेंगे। इसके लिए स्वास्थ्य मंत्रालय ने ई-फार्मेसी नियमों में बदलाव किया है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म अब सिर्फ दवा का ऑर्डर बुक कर सकेंगे। दवा की डिलीवरी खुदरा या थोक विक्रेता के जरिए ही करनी पड़ेगी।
ई-फार्मेसी को ग्राहकों द्वारा दिया गया प्रिस्किप्शन भी सुरक्षित रखना होगा। डॉक्टर के बताए अनुसार ही दवा देनी हाेगी। एंटीबॉयोटिक्स के मामले में इसका विशेष ख्याल रखना होगा। स्पष्ट निर्देश है कि प्रिस्क्रिप्शन के बिना एंटीबॉयोटिक्स दवा का ऑर्डर बुक नहीं किया जाएगा।
पहली बार दवा सीधे घर पहुँचेगी
सरकार पहली बार दवा दुकानदारों को भी सीधे ग्राहक के घर जाकर दवा पहुँचाने का अधिकार दे रही है। अभी तक इसे गैर कानूनी माना जाता था। देश में अभी ई-फार्मेसी के करीब 50 प्लेटफॉर्म चल रहे हैं, जबकि दवा की करीब आठ लाख खुदरा दुकानें रजिस्टर्ड हैं। सभी पक्षों से बात करने के बाद स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह निर्णय लिया है।

अकेले खाना खाने का नया चलन, सोलो डाइनर्स के लिए जगह बना रहे रेस्त्रां मालिक

लगभग हर शहर के रेस्त्रां में बड़े समूहों के लिए बड़ी मेजें रखी जाती हैं। लेकिन कई रेस्त्रां सोलो डाइनर्स के लिए भी जगह बना रहे हैं। सोलो ट्रैवलिंग के साथ ही सोलो डाइनिंग ट्रेंड की शुरुआत भी हुई है। हालांकि सोलो डाइनिंग वे लोग भी करते हैं जो शहर में अकेले हैं, नए आए हैं। कुछ लोगों को अकेले बैठकर खाने का विचार डराता भी है। अकेले खाना खाते वक्त किन बातों का ख्याल रखना जरूरी है बता रही हैं वर्षा एम…
अपनी रिसर्च पूरी करें
आप किस रेस्त्रां में खाना खाएंगे इसकी प्लानिंग पहले से ही कर लें। यदि इस मानसिकता के साथ घूमेंगे कि जो रेस्त्रां अच्छा दिखेगा वहीं बैठ जाएंगे, तो समय ज्यादा लगेगा और थकान भी ज्यादा होगी। रेस्त्रां तलाशकर रखने से राहत मिलेगी।
शुरुआत कम से करें
अकेले खाने की शुरुआत ब्रेकफास्ट और चाय-कॉफी के साथ की जा सकती है। ब्रेकफास्ट टाइम पर आपको कई लोग अकेले मिल जाते हैं। ऐसे में आप अकेले खाने की पहली रिहर्सल कर सकते हैं। जब आसपास कई लोग अकेले बैठकर खा रहे होते हैं तो आप भी सहज महसूस करते हैं। आपका आत्मविश्वास बढ़ जाता है।
टाइमिंग का ध्यान रखें
आपको पता है कि रेस्त्रां में आपको अकेले ही खाना है तो ऐसे में पीक टाइम से पहले ही वहाँ पहुँच जाएं। भीड़ कम होने से आप आराम से बैठकर लंच या डिनर ले सकेंगे और तनाव से भी बचेंगे।
मेन्यू पहले से तय हो
रेस्त्रां में बैठने के बाद मेन्यू कार्ड लेकर अकेले बैठेंगे तो हो सकता है आप संकोच में पैनिक ऑर्डर कर दें। इससे बचने के लिए बेहतर होगा कि मेन्यू पहले तय करके ही रेस्त्रां में आएं।
ऐसे हों कपड़े
सभी की वॉर्डरोब कुछ कपड़े ऐसे होते हैं जो आपका आत्मविश्वास बढ़ाते हैं और आरामदायक भी होते हैं। सोलो डाइनिंग के लिए यही कपड़े पहनकर जाएं। प्रयोग करने के लिए कोई दूसरा वक्त चुनें।
कंफर्ट फूड लें
अकेले डाइन करने आएं तो ऐसे में वही मेन्यू ऑर्डर करें जिसे खाने में आप सहज रहते हैं। मेन्यू के साथ प्रयोग ना करें। सोलो डाइनिंग के लिए पिज्जा और बर्गर सबसे सुरक्षित हैं।
सोलो डाइनिंग के विकल्प
फूड टुअर
नए शहर में हैं तो फूड टुअर ट्राय कर सकते हैं। जब आप अकेले खाते हैं तो जो ऑर्डर किया है वो पसंद ना आने पर भी अकेले खाना पड़ता है। लेकिन फू़ड टुअर जॉइन कर लेते हैं तो आपको एक गाइड मिलता है जो खाने की सर्वश्रेष्ठ जगह लेकर जाता है। वहां आप अन्य ट्रेवलर्स से भी मिलते हैं। फूड टुअर में आप कई रेस्त्रां देख पाते हैं। दुनियाभर में फूड टुअर्स मिल जाते हैं। आप अपनी मनपसंद जगह चुन सकते हैं।
ग्रुप डाइनिंग
बहुत सी वेबसाइट्स भी ग्रुप डाइनिंग विकल्प देती हैं। लोकल लोग अपने घरों में खाना बनाते हैं और ट्रेवलर्स और अन्य लोकल्स को घर का खाना परोसते हैं। नई जगह पर किसी के घर में लोकल खाना खाने से बेहतर क्या हो सकता है।
कुकिंग क्लास
दिन में होने वाली गतिविधियों में कुकिंग क्लास तेजी से चलन में आ चुकी है। कई बार भारी लंच खाने के बाद आपको डिनर लेने का मन नहीं होता है। ऐसे में लोकल कुकिंग क्लास जाकर नई डिशेस सीख सकते हैं।
अन्य ट्रेवलर्स के साथ खाएं
अब होस्टल में प्राइवेट रूम लेकर रहने का चलन बढ़ रहा है। ऐसे में आप चाहें तो कुछ समय स्थानीय लोगों के बीच बात करते हुए बिता सकते हैं। एक साथ बैठकर खाना खाएंगे तो हो सकता है आपको नए दोस्त मिल जाएं। होस्टल में कई बार पिज्जा और बार्बेक्यू नाइट भी होती है।
काउचसर्फिंग कर सकते हैं
ट्रेवलर्स और स्थानीय लोगों के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है जहां आप एक दूसरे की संस्कृति से वाकिफ हो सकते हैं। अक्सर होस्ट अपने ही घर पर ट्रेवलर्स के लिए रात काटने को फ्री काउच का इंतजाम कर देते हैं। किसी से मिलने से पहले आप उनके प्रोफाइल और रिव्यू भी चेक कर सकते हैं।
मीट अप
सोशलाइजिंग वेबसाइट्स अलग-अलग इवेंट्स का आयोजन करती हैं। सिनेमा नाइट से लेकर डिनर तक। इनमें से किसी भी इवेंट में शामिल होकर आप स्थानीय लोगों से मिल सकते हैं।

(साभार – दैनिक भास्कर)

अब तोड़े नकद लेन-देन से जुड़े ये नियम, तो घर आएगी नोटिस

नयी दिल्ली : वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कुछ दिन पहले नकद में लेन-देन (Cash Transaction Rules in India) से जुड़े कई सख्त नियमों के बारे में बताया है। उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि सरकार देश में डिजिटल इकोनॉमी को बढ़ावा देने के लिए लगातार कदम उठा रही है। उन्होंने बताया कि 1 नवंबर से 50 करोड़ रुपये से ज्यादा के टर्नओवर वाले कारोबारियों के लिए इलेक्ट्रॉनिक मोड से भुगतान करना जरूरी हो गया है. इसीलिए आज हम आपको कैश में पैसों के लेन-देन से जुड़े सभी नियमों की जानकारी दे रहे है. आपको बता दें कि घर में कैश रखने की लिमिट तय नहीं है. लेकिन घर में रखे कैश का सोर्स बताना जरूरी होता है। आइए जानें नकद में लेन-देन से जुड़े ऐसे ही 11 नियमों के बारे में…
वित्त मंत्री ने संसद को बताया कि आयकर विभाग बेहिसाबी नकद लेनदेन तथा अघोषित नकद जायदाद (होल्डिंग्स) के विरूद्ध जरूरी कार्रवाई करता है। सरकार ने हाल में कई सख्त कदम उठाए है.
(1)नकद कैश में लेन-देन करने से अब क्या होगा- अगर अब कोई आपको ऋण की रकम बैंक सीधे अकाउंट में ही भेजता है तो यह सीमा 20 हजार रुपये है। वहीं, 20,000 रुपये से ज्यादा नकद ऋण लिया तो 100 फीसदी पेनाल्टी देनी होगी। नकद में अनुदान दे रहे हैं तो सिर्फ 2000 रुपये तक दें. 2000 रुपये से ज्यादा नकद दान दिया तो 80G में छूट नहीं मिलेगी। आयकर में 80G के तहत दान पर छूट मिलती है।
(2) नकद घर में रखने की लिमिट क्या है-टैक्स एक्सपर्ट्स बताते हैं कि घर में नकद रखने को लेकर अभी तक कोई सीमा तय नहीं की गयी है। हालांकि, घर में रखे नकद का सोर्स बताना अब जरूरी है। अगर कोई इसकी जानकारी नहीं दे पाता है तो ऐसे में उसे 137% तक पेनाल्टी देनी पड़ती है।
(3) बैंक से नकद निकालने और जमा करने के नियम क्या हैं- टैक्स एक्सपर्ट गौरी चड्ढा बताती हैं है कि बैंक में सेविंग खाते को लेकर कुछ नियम तय किए गए हैं। एक बार में 2 लाख रुपये या उससे ज्यादा जमा किया या सेविंग अकाउंट में 50,000 रुपए से ज्यादा कैश जमा कर रहे हैं तो ऐसे में आपको पैन कार्ड नंबर देना जरूरी है। कैश में पे-ऑर्डर या डिमांड ड्राफ्ट भी बनवा रहे हैं तो पे ऑर्डर-DD के मामले में भी पैन नंबर देना होगा।

इस्लामाबाद के संग्रहालय में लगाई गई भगवान बुद्ध की दुर्लभ मूर्ति

इस्लामाबाद : इस्लामाबाद के संग्रहालय में भगवान बुद्ध के सिर की एक दुर्लभ मूर्ति लगाई गई है। सालों से वह उसके भंडार गृह में पड़ी थी। ‘डॉन’ की खबर के अनुसार तीसरी और चौथी शताब्दी ई. की यह मूर्ति पाकिस्तान में पहले इतालवी पुरातात्विक मिशन ने खोजी थी।
यह 60 के दशक में खुदाई में मिली थी और आखिरी बार इसे 1997 में संग्राहलय में लगाया गया था। इस्लामाबाद संग्रहालय के निदेशक डॉक्टर अब्दुल गफूर लोन ने कहा, ‘‘स्वात के पत्थर से बनी भगवान बुद्ध की यह मूर्ति अत्यधिक दुर्लभ है। स्वात घाटी मुख्य रूप से पत्थर की मूर्तियों के लिए मशहूर है।’’
उन्होंने बताया कि तक्षशिला और अफगानिस्तान में अक्सर भगवान बुद्ध की मूर्तियां पाई जाती हैं।

स्मार्ट सिटी की दौड़ में पिछड़े पूर्वोत्तर के राज्य, मध्य प्रदेश सबसे आगे

नयी दिल्ली : देश के सौ शहरों को अत्याधुनिक नागरिक सुविधाओं से लैस करने के लिये शुरु की गयी सरकार की महत्वाकांक्षी ‘स्मार्ट सिटी परियोजना’ में पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर के राज्य फिसड्डी साबित हो रहे हैं, वहीं मध्य प्रदेश इस मामले में अन्य राज्यों से काफी आगे है।
शहरी जीवन को आसान बनाने (ईज ऑफ लिविंग) के लिये आवासन एवं शहरी विकास मंत्रालय द्वारा जून 2015 में शुरु की गयी इस परियोजना की प्रगति की राज्यवार समीक्षा के मुताबिक पिछले पांच सालों में स्मार्ट सिटी मिशन के तहत केन्द्र की ओर से जारी राशि में से राज्य अभी आधी राशि का ही इस्तेमाल कर पाये हैं।
मंत्रालय द्वारा संसद में पेश आंकड़ों के मुताबिक पिछले पांच साल में सभी राज्यों के 100 शहरों को स्मार्ट सिटी बनाने के लिये अब तक 18614.10 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता राशि जारी की गयी। राज्य इसमें से 9497.09 करोड़ रुपये (51 प्रतिशत) का इस्तेमाल कर पाये हैं। इसके अनुसार स्मार्ट सिटी के तहत इन शहरों में चल रही विभिन्न परियोजनाओं की पूर्वोत्तर राज्यों में न सिर्फ गति बहुत धीमी है बल्कि तमाम शहर केन्द्रीय राशि का पैसा भी खर्च करने में सुस्त हैं। हालांकि उत्तर प्रदेश और और पश्चिम बंगाल के कुछ शहरों को केन्द्र द्वारा पांच साल में महज दो करोड़ रुपये ही जारी किये जाने के कारण इन शहरों में परियोजनायें सुस्त हैं।
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद, मेरठ और रामपुर, पश्चिम बंगाल के बिधाननगर, दुर्गापुर और हल्दिया, महाराष्ट्र में ग्रेटर मुंबई और अमरावती तथा तमिलनाडु के डिंडीगुल को पांच साल में महज दो करोड़ रुपये ही केन्द्रीय राशि मिली है।
मंत्रालय के एक अधिकारी ने इन शहरों से परियोजनाओं के प्रस्ताव नहीं मिलने को कम राशि जारी होने की मुख्य वजह बताया है।
परियोजना की प्रगति रिपोर्ट के मुताबिक इस साल 15 नवंबर तक परियोजना में चयनित 100 शहरों की ओर से 2.05 लाख करोड़ रुपये की लागत वाले कुल 5151 परियोजनाओं के प्रस्ताव केन्द्र को मिले। इनमें से 1.49 लाख करोड़ रुपये की लागत वाली 4178 परियोजनाओं के लिये निविदायें जारी की गयीं, 1.05 लाख करोड़ रुपये की लागत वाली 3376 परियोजनाओं का काम जारी है और 23170 करोड़ रुपये की लागत से 1296 परियोजनायें पूरी कर ली गयी हैं।
परियोजना की राज्यवार समीक्षा के मुताबिक अरुणाचल प्रदेश के दो शहरों में एक भी परियोजना अब तक पूरी नहीं हो पायी है, जबकि असम के गुवाहटी में अब तक सिर्फ पांच परियोजनाओं पर काम शुरु हो पाया, इनमें से दो ही पूरी हो पायी।
मणिपुर और मेघालय का रिपोर्ट कार्ड भी शून्य है और सिक्किम में सिर्फ एक परियोजना पूरी हुयी। इस मामले में सिर्फ त्रिपुरा, नगालैंड और मिजोरम में लगभग आधी परियोजनायें पूरी हो पायीं हैं।
जम्मू कश्मीर के दोनों शहरों जम्मू और श्रीनगर की 20 स्वीकृत परियोजनाओं में से एक भी पूरी नहीं हो सकी और पश्चिम बंगाल के न्यू टाउन कोलकाता में 56 में से महज 1.1 करोड़ रुपये की लागत वाली चार परियोजनायें पूरी हो सकी।
स्मार्ट सिटी की दौड़ में मध्य प्रदेश, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश और गुजरात सबसे आगे हैं। मध्य प्रदेश ने लगभग 300 स्वीकृत परियोजनाओं में से 5275 करोड़ रुपये की लागत वाली 265 परियोजनायें पूरी कर ली हैं।
परियोजना में शामिल राज्य के सात शहरों में इंदौर, 154 परियोजनायें पूरी कर देश के सौ शहरों में सबसे आगे है। वहीं कर्नाटक में 193, उत्तर प्रदेश में 136 और गुजरात में 131 परियोजनायें पूरी हो गयी हैं।

आर्थिक आँकड़ों, वाहन-बिक्री, वैश्विक संकेतों से तय होगी शेयर बाजार की चाल

नयी दिल्ली : स्थानीय शेयर बाजार की चाल इस सप्ताह विनिर्माण तथा सेवा क्षेत्र की वृद्धि संबंधी पीएमआई सर्वे रपट, रिजर्व बैंक के नीतिगत निर्णयों, वाहनों की बिक्री के आंकड़ों तथा हांगकांग को लेकर चीन और अमेरिका के संबंधों में उतार-चढ़ाव से प्रभावित होगी। विश्लेषकों ने यह राय प्रकट की है। जियोजीत फाइनेंशियल सर्विसेज के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा, ‘‘इस सप्ताह बाजार की चाल नवंबर महीने में वाहनों की बिक्री के आंकड़ों तथा रिजर्व बैंक की नीतिगत बैठक से तय होगी।’’ नायर के अनुसार बाजार में उत्साह का अभाव दिख सकता है।
सैमको सिक्योरिटीज एंड स्टॉकनोट के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी जिमीत मोदी ने कहा कि रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति नीतिगत दरों पर निर्णय लेने के लिये इस सप्ताह बैठक करेगी। इस सप्ताह विनिर्माण तथा सेवा क्षेत्र के खरीद प्रबंध सूचकांक (पीएमआई) आंकड़े भी आने वाले हैं। शेयर बाजारों पर इनका भी असर देखने को मिल सकता है। सितंबर तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर गिरकर 4.5 प्रतिशत आ जाने की प्रतिक्रिया सोमवार को शेयर बाजार में देखने को मिल सकती है। जीडीपी के आंकड़े शुक्रवार को बाजार बंद हो जाने के बाद जारी हुए थे।
रेलिगेयर ब्रोकिंग लिमिटेड के उपाध्यक्ष (शोध) अजीत मिश्रा ने कहा, ‘‘सोमवार को शुरुआती कारोबार में बाजार जीडीपी आंकड़ों पर प्रतिक्रिया देगा। हांगकांग को लेकर अमेरिका और चीन के बीच जारी विवाद से वैश्विक बाजारों में उथल-पुथल रह सकती है।’’
येस सिक्योरिटीज के शोध प्रमुख (संस्थागत इक्विटी) अमर अंबानी ने कहा कि सितंबर तिमाही के जीडीपी आंकड़े हमारे अनुमान के अनुसार ही रहे हैं। सोमवार को भले ही इसका असर शेयर बाजारों में देखने को मिले लेकिन मध्यम अवधि में बाजार की दिशा पर इसका असर नहीं होगा।
ट्रेडिंगबेल्स के सह-संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमित गुप्ता ने कहा, ‘‘इस सप्ताह रिजर्व बैंक की नीतिगत बैठक है। इसके अलावा वाहनों की बिक्री तथा वैश्विक संकेत बाजार को प्रभावित करेंगे।’’ पिछले सप्ताह सेंसेक्स में 434.40 अंक यानी 1.07 प्रतिशत की तेजी रही।