Saturday, April 25, 2026
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मलयालम कवि अक्कीथम को 55वां ज्ञानपीठ पुरस्कार

नयी दिल्ली : मलयालम के प्रमुख कवि अक्कीथम को 55वें ज्ञानपीठ पुरस्कार के लिए चुना गया है । ज्ञानपीठ चयन बोर्ड ने इसकी घोषणा की । बोर्ड ने बयान जारी कर कहा, ‘‘ज्ञानपीठ चयन बोर्ड ने एक बैठक में आज 55 वें ज्ञानपीठ पुरस्कार 2019 के लिए मलयालम के प्रसिद्ध भारतीय कवि श्री अक्कीथम को चुना है।’’
अक्कीथम का नाम मलयालम कविता जगत में आदर के साथ लिया जाता है। उनका जन्म 1926 में हुआ था और पूरा नाम अक्कीथम अच्युतन नम्बूदिरी है और वह अक्कीथम के नाम से लोकप्रिय हैं । उन्होंने 55 पुस्तकें लिखी हैं जिनमें से 45 कविता संग्रह है । पद्म पुरस्कार से सम्मानित अक्कीथम को सहित्य अकादमी पुरस्कार, केरल साहित्य अकादमी पुरस्कार (दो बार) मातृभूमि पुरस्कार, वायलर पुरस्कार और कबीर सम्मान से भी नवाजा जा चुका है ।

‘आधार’ को सुरक्षित मानते हैं 90 प्रतिशत भारतीय: सर्वेक्षण

नयी दिल्ली : बायोमेट्रिक आधारित पहचान ‘ आधार ‘ को 90 प्रतिशत भारतीय लोग सुरक्षित मानते हैं। हालांकि , लोगों का मानना है कि आधार को अद्यतन (अपडेट) कराना सबसे मुश्किल काम है। सामाजिक मसलों पर परामर्श देने वाले गैर – सरकारी संगठन डालबर्ग की एक हालिया सर्वेक्षण रपट में यह बात कही गई है। संगठन की रपट ‘ स्टेट ऑफ आधार-2019 ‘ के सह – लेखक गौरव गुप्ता ने सोमवार को सर्वेक्षण के नतीजों को सामने रखते हुए कहा कि आधार को 90 प्रतिशत लोग सुरक्षित मानते हैं तथा 61 प्रतिशत लोगों का मानना है कि इसके कारण उन्हें मिलने वाला लाभ कोई अन्य नहीं उठा पाता है। सर्वेक्षण में शामिल 92 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे आधार से संतुष्ट हैं।
डालबर्ग ने यह सर्वेक्षण निवेश फर्म ओमिदयार नेटवर्क इंडिया के साथ मिलकर किया है।
रपट में कहा गया कि देश में 95 प्रतिशत व्यस्कों तथा 75 प्रतिशत बच्चों के पास आधार है। उन्होंने कहा कि अभी करीब 2.8 करोड़ व्यस्कों के पास आधार नहीं है । कुल 10.2 करोड़ लोगों के पास आधार नहीं होने का अनुमान है। असम और मेघालय में अधिकतर लोगों के पास आधार नहीं है। असम में यह आंकड़ा 90 प्रतिशत और मेघालय में 61 प्रतिशत है।
देश के 30 प्रतिशत ट्रांसजेंडर तथा 27 प्रतिशत आवासहीन लोगों के पास अभी तक आधार नहीं है। रपट के अनुसार , सर्वेक्षण में शामिल लोगों ने आधार को अपडेट कराना सबसे मुश्किल काम बताया है। आधार को अपडेट करने की कोशिश कराने वाले प्रत्येक पांच लोगों में एक को निराशा मिली है। आधार में दर्ज जानकारियों के बारे में महज चार प्रतिशत ही लोग हैं , जिन्होंने इसमें त्रुटि की बात स्वीकार की है।
गुप्ता ने कहा कि करीब 80 प्रतिशत लोगों का मानना है कि इसके कारण राशन और पेंशन जैसी सुविधाएं सरल हुई हैं . चालीस प्रतिशत लोगों ने कहा कि उन्हें आधार के कारण एक ही दिन में मोबाइल सिम कार्ड पाने की सहूलियत मिली है। करीब आठ प्रतिशत लोग ऐसे भी हैं , जिनके लिये आधार उनका पहला पहचान पत्र रहा है। सर्वेक्षण में शामिल करीब आधे लोगों ने माना कि उच्चतम न्यायालय के आदेश के बावजूद अधिकतर कंपनियां मोबाइल सिम के लिए, बैंक खाता खोलने के लिए और स्कूल में बच्चों के दाखिले के लिए केवल आधार को ही पहचान के तौर पर स्वीकार करते हैं।
आधार नहीं होने की वजह से 6 से 14 वर्ष की आयु के करीब 0.5 प्रतिशत बच्चों को स्कूल में दाखिला नहीं मिला है। पहचान के तौर पर आधार को हर जगह स्वीकार किए जाने को 72 प्रतिशत लोगों ने सुविधाजनक माना है। जबकि इनमें से करीब आधे लोगों ने बहुत सारी सेवाओं के साथ इसे जोड़ने पर चिंता भी व्यक्त की।
आधार के साथ कई नए फीचर जैसे कि एमआधार, क्यूआर कोड, वर्चुअल आधार और मास्क्ड आधार भी शुरू की गयी हैं। लेकिन 77 प्रतिशत लोगों ने इनमें से किसी का भी उपयोग नहीं किया है।

ताजमहल: 370 साल बाद राजस्थान के पत्थरों से चमकेगा चमेली फर्श

आगरा : दुनिया की सबसे खूबसूरत इमारतों में शुमार ताजमहल के चमेली फर्श के 400 जर्जर पत्थर बदल रहा है। स्मारक के तामीर होने के 370 साल बाद ये पत्थर बदले जाएंगे। इसके लिए राजस्थान के बंशीपहाड़पुर से लाल पत्थर और मकराना से मार्बल मंगाया गया है।
ताजमहल के मूर्त रूप लेने के बाद चमेली फर्श के पत्थर पहली बार बदले जाएंगे। 400 पत्थर पूरी तरह से जर्जर हो चुके हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने इन पत्थरों को चिह्नित कर बदले जाने के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। पत्थर भी मंगा लिए गए हैं। अब इनको तराशने का काम शुरू होगा।
स्मारक को पत्थरों की कटिंग से निकलने वाले कणों से बचाने के लिए इनको स्मारक के बाहरी क्षेत्र में तराशा जाएगा। ताकि स्मारक को नुकसान न पहुंचे। दरअसल, फर्श के पत्थरों को लगाने से पहले मशीनों के माध्यम से इनकी कटिंग की जाएगी। छैनी और हथौड़े से इनको तराशा जाएगा। इस दौरान पत्थर के काफी बारीक कण फर्श पर हवा के साथ बिखर जाते हैं।
पर्यटकों के पैरों से रगड़ने पर स्मारक के दूसरे पत्थरों को खराब कर सकते हैं। इसलिए लाल पत्थरों को तराशने का काम दशहरा घाट की तरफ स्थित कार्यशाला और मार्बल (सफेद पत्थर) को तराशने का काम गोशाला में होगा। बता दें कि ताजमहल का निर्माण वर्ष 1648 में पूरा हुआ था। तब से चमेली फर्श के पत्थर नहीं बदले गए हैं।
चमेशी फर्श पर जो पत्थर लगे हैं, उनमें फूल-पत्तियों की आकृति बनी हुई है। नये पत्थरों पर भी ऐसी ही आकृतियां उकेरी जाएंगी। ताकि पर्यटक इन बदले गए पत्थर और पहले से फर्श में लगे पत्थरों के बीच अंतर महसूस न कर पाएं।
चमेली फर्श में तांतपुर के लाल पत्थरों का प्रयोग हुआ है। इस बार संरक्षण कार्य के दौरान राजस्थान के बंशी पहाड़पुर से पत्थर मंगाया गया है। दोनों जगह के लाल पत्थरों में मामूली सा अंतर है। वर्तमान में जो पत्थर लगे हैं, उनमें सफेद स्पॉट ज्यादा हैं। नये लाल पत्थरों में कम होंगे।

अब कपड़े बनाने के लिए कोकाकोला करेगा प्लास्टिक का इस्तेमाल

अब अगली बार जब भी आप कोक की प्लास्टिक बोतल खरीदेंगे, तो आपको पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने की चिंता नहीं करनी होगी। जी हां क्योंकि 133 साल पुरानी सॉफ्ट ड्रिंक कंपनी कोका-कोला अब अपने ब्रांड के फैशनेबल कपड़े भी बना रही है, जो स्टाइलिश होने के साथ-साथ पर्यावरण को भी ध्यान में रखकर बनाए जा रहे हैं। कोका-कोला की वह बोतल आखिरकार आपके कपड़ों का हिस्सा बन जाएगी क्योंकि प्लास्टिक का उपयोग आपके कपड़े बनाने में किया जाएगा।
कोका-कोला ने फैशन ब्रांड डीजल के साथ मिलकर पुनर्नवीनीकरण प्लास्टिक की बोतलों से आंशिक रूप से बनाए गए कपड़ों के संग्रह का निर्माण किया है। इस संग्रह को (री) कलेक्शन का नाम दिया गया है, जिसमें प्लास्टिक की बोतलों से निकाली गई पुनर्नवीनीकरण पीईटी और पुनर्नवीनीकरण कॉटन से खूबसूरती से तैयार किए गए कपड़े शामिल हैं। इसमें डीजल के फ्रेश और आधुनिक डिजाइन के कैजुअल वियर शामिल हैं। संग्रह में 12 प्रमुख पीस ऐसे हैं जो किसी भी मौसम के लिए नहीं बनाए गए हैं, जिसे सीजनलेस कह सकते हैं। जिसमें लाल सिलाई डीटेलिंग के साथ यूनिसेक्स डेनिम जैकेट और कोका कोला लोगो, एक डेनिम वर्कवियर पैंट, कढ़ाई की गई महिलाओं की एक जोड़ी कोका कोला स्पेनसेरियन स्क्रिप्ट के साथ और काले जिप जर्सी ट्रैक सूट के साथ शामिल हैं।

‘रेड’ फिल्म की अम्मा पुष्पा जोशी का निधन, 85 की उम्र में की थी पहली फिल्म

मुम्बई : अजय देवगन की फिल्म ‘रेड’ में अम्मा का किरदार निभाने वाली पुष्पा जोशी का 85 साल की उम्र में निधन हो गया। जानकारी के मुताबिक पुष्पा जोशी पिछले हफ्ते घर में फिसल गयी थीं जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। फिसलने की वजह से उनके फ्रैक्चर भी हो गया था। ‘रेड’ फिल्म से ही पुष्षा जोशी ने बॉलीवुड में अपने कॅरियर की शुरुआत की थी। पुष्पा जोशी के निधन की खबर से सिनेमाजगत में सन्नाटा पसर गया है। निधन की खबर मिलते ही ‘रेड’ फिल्म के निर्देशक राज कुमार गुप्ता ने भी ट्वीट कर शोक व्यक्त किया। राज कुमार गुप्ता ने पुष्पा जोशी के साथ तस्वीर साझा करते हुए लिखा- ‘पुष्पा जोशी जी के निधन की खबर से बहुत दुखी हूं। ‘रेड’ फिल्म में आपका अभिनय देखकर मुझे बहुत अच्छा लगा था। आप सेट की शान थीं। दादी दी आप जहां भी होंगी वहां पर खुशियां बिखेर रही होंगी। हम आपको बहुत याद करेंगे। नम आंखों से श्रद्धांजलि।’ पुष्पा जोशी ने ‘रेड’ में सौरभ शुक्ला की मां का किरदार निभाया था जिसे न केवल दर्शकों बल्कि फिल्म समीक्षकों ने भी सराहा था। फिल्म में पुष्पा जोशी का किरदार भले ही कम था लेकिन वह अपनी छाप छोड़ने में कामयाब रही थीं। पुष्पा जोशी के डायलॉग से लेकर हाव भाव ऐसे थे जिससे आप अपनी नानी या फिर दादी से जोड़कर देख सकते हैं। यहां तक कि ‘रेड’ देखने के बाद काजोल ने अम्मा को अपने घर ले जाने की बात भी कही थी।एक इंटरव्यू के दौरान पुष्पा जोशी ने काजोल के घर जाने वाली बात पर सहमति भी जताई थी। फिल्म में अपने रोल के बारे में पुष्पा जोशी ने कहा था – ‘मेरी उम्र के भी फिल्मों में बहुत सारे रोल होते हैं। जिनमें कहानी के साथ -साथ किरदार भी दमदार हैं।’ पुष्पा जोशी ने भले ही 85 साल की उम्र में पहली बार फिल्म में नजर आई थीं लेकिन जबरदस्त अभिनय से वह रातोंरात ही सनसेशन बन गई थीं। पुष्पा जोशी थियेटर से जुड़ी थीं हालांकि ‘रेड’ से पहले शॉर्ट फिल्म ‘जायका’ में अभिनय किया था। पुष्पा जोशी का एक बेटा है जिसका नाम रवीन्द्र है। वहीं पोता आभास कई सारे रियलिटी शो का हिस्सा बन चुका है। जिसमें ‘वॉइस ऑफ इंडिया’ और ‘म्यूजिक का महामुकाबला’ शामिल हैं। पुष्पा जोशी मुख्य रूप से जबलपुर की रहने वाली हैं लेकिन बीते कुछ वक्त से मुंबई में परिवार के साथ रह रही थीं। पुष्पा जोशी आखिरी बार एक विज्ञापन में नजर आई थीं। इस विज्ञापन के बाद लोग उन्हें ‘स्वैग वाली दादी’ कहने लगे थे।

नहीं रहे कैंसर का इलाज करने वाले विश्व विख्यात डॉक्टर यशी ढोंडेन

मैक्लोडगंज : तिब्बतियन पद्धति से कैंसर का इलाज करने वाले पद्मश्री डॉ. येशी ढोंडेन की मंगलवार सुबह मैक्लोडगंज स्थित उनके आवास अशोका होटल में मौत हो गई। तिब्बतियन डॉक्टर ढोंडेन बौद्ध धर्मगुरु दलाईलामा के निजी चिकित्सक भी रह चुके है। उनकी मौत से जहां तिब्बती समुदाय गम में डूबा है, वहीं जिन कैंसर के मरीजों को उन्होंने नई जिंदगी दी, उनकी आंखें भी नम हैं।
डा. येशी की मृत्यु की खबर सुनते ही सुबह उनके निवास स्थान के बाहर सैकड़ों तिब्बती और स्थानीय लोग जमा हो गए। डॉ. ढोंडेन के पारिवारिक सदस्य लोबसांग त्सेरिंग ने बताया कि शुक्रवार सुबह उनका संस्कार मैक्लोडगंज में किया जाएगा। दो दिन तक उनकी देह की तिब्बतियन पद्धति के अनुसार पूजा होगी। डॉ. येशी कैंसर के अलावा ट्यूमर, एड्स, सुराइसिस, हेपेटाइटिस ल्यूकेमिया आदि गंभीर रोगों का भी इलाज करते थे। तिब्बती चिकित्सा पद्धति में बेहतरीन कार्य के लिए उन्हें 20 मार्च, 2018 को पद्मश्री अवार्ड से राष्ट्रपति ने सम्मानित किया था। निर्वासित तिब्बत सरकार के प्रधानमंत्री डॉ. लोबसंग सांग्ये ने डॉ. येशी ढोंडेन के निधन को अपूर्णीय क्षति बताया। तिब्बती चिकित्सा एवं ज्योतिष संस्थान ‘मेन ट्सी खंग’ धर्मशाला के महासचिव त्सेरिंग फुंत्सोक ने बताया कि तिब्बती चिकित्सा पद्धति को दुनिया भर में प्रचारित करने वाले बहुत बड़ा नाम चला गया।
डा. येशी के शिष्य रहे डॉक्टर केलसंग ढोंडेन, डॉक्टर नामग्याल कुसर, डॉक्टर पसांग ग्याल्मो खंगकर ने कहा कि गुरुजी ने अपना पूरा जीवन समाजसेवा में लगा दिया।

कर्म समागम- व्यक्ति विकास से राष्ट्र विकास का आयोजन

श्री श्री रविशंकर ने की कर्मयोग समागम की घोषणा
कोलकाता : आर्ट ऑफ लीविंग फाउंडेशन के व्यक्ति विकास केन्द्र, भारत ने कर्म समागम- व्यक्ति विकास से राष्ट्र विकास आयोजित किया। इस कार्यक्रम में 12 हजार से अधिक ग्रामीण प्रतिनिधियों, अतिथियों, व गैर सरकारी संगठनों ने भाग लिया। यह अपनी तरह का पहला कार्यक्रम है जिसमें बंगाल के विभिन्न जिलों से आए प्रतिनिधि एक साथ आए और बदलाव और सकारात्मक परिवर्तन की आभा देखी। इस पहल की परिकल्पना सामाजिक – आर्थिक, पर्यावरण और स्थायी रूपान्तरण को ध्यान में रखकर की गयी है जो सामुदायिक समिल्लन के माध्यम से होगी। इसके लिए स्वरोजगार को प्रोत्साहित करने के लिए सामुदायिक नेताओं को साथ लाकर आध्यात्मिक स्तर पर लोगों को सशक्त बनाया जाएगा। स्व विकास, सामुदायिक विकास के माध्यम से एक बेहतर भारत बनाने की दिशा में यह पहल आर्ट ऑफ लीविंग के प्रणेता श्री श्री रविशंकर के नेतृत्व में की गयी है। वे कहते हैं, व्यक्ति विकास से ग्राम विकास, ग्राम विकास से राष्ट्र विकास। मानवीय मूल्यों को समृद्ध करने और सामुदायिक एकता स्थापित करने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण है।

महाराष्ट्र टूरिज्म ने कोलकाता में किया रोड शो

कोलकाता : पर्यटन उद्योग में अपनी पकड़ मजबूत बनाने की रणनीति के तहत महाराष्ट्र टूरिज्म ने हाल ही में कोलकाता में रोड शो किया। महाराष्ट्र सरकार में पर्यटन निदेशालय के निदेशक दिलीप गवाडे ने महाराष्ट्र को गेटवे टू द हार्ट ऑफ इंडिया यानी भारत के हृदय का द्वार बताया तथा इस राज्य के आकर्षक पर्यटन स्थलों तथा योजनाओं की जानकारी दी। पयर्टन निदेशालय, औरंगाबाद के उप निदेशक श्रीमन्त हरकर इस रोड शो को मिलने वाली प्रतिक्रिया से उत्साहित दिखे। इस अवसर पर एसोसिएशन ऑफ टूरिज्म, वेस्ट बंगाल, बंगाल ट्रैवल एजेन्ट्स एसोसिएशन, एसोसिएशन ऑफ ईस्टर्न हिमालय ट्रैवल्स, एसोसिएशन ऑफ डोमेस्टिक टूर ऑपरेटर्स ऑफ इंडिया तथा इंडियन एसोसिएशन ऑफ टूर ऑपरेटर्स के वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित थे। राज्य में घरेलू पर्यटन को विकसित करने के उद्देश्य से आयोजित इस रोड शो में 100 ट्रैवल एंड टूर कम्पनियों ने भाग लिया। रोडशो के माध्यम से ग्राहकों तथा उद्योग जगत को उत्पादों और सेवाओं की जानकारी भी दी गयी। महाराष्ट्र टूरिज्म ने पर्यटकों की जरूरत को ध्यान में रखते हुए लचीले पैकेज तैयार किये हैं। महाराष्ट्र टूरिज्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन द्वारा तैयार इस पैकेज में उनके रिसॉर्ट के साथ दर्शनीय स्थलों की भी जानकारी दी गयी है। महाराष्ट्र टूरिज्म ने राज्य के वाइल्डलाइफ टूरिज्म, बीच टूरिज्म, हेरिटेज टूरिज्म तथा धार्मिक पर्यटन से जुड़ी जानकारियाँ तथा ऑफर प्रदर्शित किया।

फेसबुक के ‘वी द विमेन’ के तीसरे संस्करण में महिलाओं के मुद्दे पर चर्चा

बरखा दत्त बनीं ‘वी द विमेन’ की संचालक का मंच बना महत्वपूर्ण चर्चा का माध्यम
मुम्बई : फेसबुक के ‘वी द विमेन’ के तीसरे संस्करण में विभिन्न क्षेत्र की हस्तियों ने शिरकत की। मशहूर पत्रकार बरखा दत्त द्वारा संचालित इस शो की थीम ‘ओपेनिंग डोर’ था। इस स्टेज शो में टेनिस खिलाड़ी सानिया मिर्जा, फिल्म निर्देशक करण जौहर, अभिनेत्री कटरीना कैफ, फैशन डिजाइनर सन्दीप खोसला, कैंसर सर्वाइवर अभिनेत्री लीजा रे, सोनाली बेन्द्रे एवं ताहिरा कश्यप, अभिनेत्री आलिया भट्ट और उनकी बहन शाहीन भट्ट, शाइना एन सी ने विचार रखे। सानिया अपने सफर की यादों को साझा करते हुए कहा, ‘मुझे विद्रोही का टैग दे दिया गया मगर मैं नहीं थी और यह इसलिए था कि मैंने आवाज उठायी। मुझे लगता है कि हर क्षेत्र की तरह बॉलीवुड में भी समानता एक महत्वपूर्ण मुद्दा है।महिलाओं के लिए यह रोजमर्रा की लड़ाई है। अगर आप सुन्दर दिखती हैं तो लोग आपको गम्भीरता से नहीं लेते।’ थिएटर अभिनेत्री डॉली ठाकुर ने शिवसेना नेत्री प्रियंका चतुर्वेदी और शाइना एन से ‘राजनीति क्या अब भी पुरुषों की दुनिया है’, विषय पर चर्चा की। शाइना एन सी ने कहा कि अनुभवी राजनेताओं के लिए भी भारतीय राजनीति जटिल है और इस क्षेत्र में स्थापित होने की कोशिश कर रही महिलाओं को भी विशेषकर उनकी ही पार्टी से काफी विरोध झेलना पड़ता है। अधिवक्ता मृणालिनी देशमुख ने निर्भया की माँ आशा देवी तथा सीता प्रजापत से बलात्कार और उसके बाद के आतंक पर चर्चा की। सीता प्रजापत ने अपने साथ हुए दुष्कर्म की यातनाओं को साझा किया जबकि आशा देवी ने कहा कि रोने से कुछ नहीं होगा, न्याय पाने के लिए और भी कठिन लड़ाई लड़नी होगी। इस कार्यक्रम में हैदराबाद कांड की पीड़िता की बहन द्वारा भेजा गया वीडियो सन्देश भी दिखाया गया। निर्देशक करण जौहर ने उन 10 बातों की चर्चा की जिनको बॉलीवुड में पुरुषों को बदलने की जरूरत है। फेसबुक में भारत, दक्षिण एशिया और मध्य एशिया की नीतिगत कार्यक्रमों की प्रभारी शेली ठकराल ने डीआईजी नीतू भट्टाचार्य से बातचीत की। भट्टाचार्य ने सीआरपीएफ माँ की भावनाओं और बेटी के प्रति अपनी चिन्ता साझा की। बरखा दत्त भी कार्यक्रम को लेकर उत्साहित दिखीं। कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्र के लोगों को सम्मानित भी किया गया।

कोलकाता में डिजाइनिंग कॉलेज खोलने की तैयारी में एचआईटीके

कोलकाता : एचआईटीके कोलकाता में डिजाइनिंग कॉलेज खोलने की तैयारी में है। द हेरिटेज स्कूल ने नेशनल इन्स्टीट्यूट ऑफ डिजाइन, विजयवाड़ा तथा कोलकाता सेन्टर फॉर क्रिएटिविटी के सहयोग से इन्टरनेशनल डिजाइन फेस्टिवल ऑफ डिजाइन स्टोरीज आयोजित किया। इस मौके पर हेरिटेज ग्रुप ऑफ इन्स्टीट्यूटंस, कोलकाता के चेयरमैन एच. के. चौधरी ने कोलकाता में डिजाइनिंग संस्थान की आवश्यकता पर जोर दिया और बताया कि एचआईटीके कोलकाता में स्थापित होने जा रहे भावी डिजाइनिंग कॉलेज की जानकारी दी। द हेरिटेज स्कूल की प्रिंसिपल सीमा सप्रू ने विद्यार्थियों के लिए डिजाइनिंग को एक अच्छा कॅरियर बताया और कहा कि इसे केजी से बारहवीं कक्षा तक में भी पढ़ाया जा सकता है जिससे विद्यार्थी इससे परिचित हो सकें। कार्यक्रम में कोलकाता सेन्टर फॉर क्रिएटिविटी की उपाध्यक्ष रीना धवन, नेशनल इन्स्टीट्यूट ऑफ डिजाइन के निदेशक प्रो. शेखर मुखर्जी, हेरिटेज ग्रुप ऑफ इन्स्टीट्यूटंस, कोलकाता के सीईओ पी.के. अग्रवाल मौजूद थे।