कोलकाता : आईआईटी खड़गपुर के शोधार्थियों को थार रेगिस्तान के निकट करीम शाही में तीन हजार साल पुरानी पाषाण युग की बस्ती तथा विगरकोट में प्राचीन से मध्यकाल की बस्तियों के पुरातात्विक साक्ष्य मिले हैं।
आईआईटी खड़गपुर ने बृहस्पतिवार को एक बयान जारी कर कहा कि करीम शाही क्षेत्र में मिले पुरातात्विक साक्ष्य प्रारंभिक पाषाण युग से प्रारंभिक ऐतिहासिक काल (3100-2300 वर्ष पूर्व) के बीच मानव निवास की ओर इशारा करते हैं। वहीं विगरकोट में मिले साक्ष्य ऐतिहासिक काल से मध्य काल (1500-900 वर्ष पूर्व) के बीच मानव निवास होने की ओर इशारा करते हैं। यह शोध एल्सेवियर जर्नल आर्कियोलॉजिकल रिसर्च इन एशिया में ऑनलाइन प्रकाशित हुआ था। 5200-3300 साल पुरानी सिंधु घाटी सभ्यता के समाप्त होने के बाद 3000-2500 साल पहले पाषाण युग सभ्यता अस्तित्व में आई थी।
शोधदल में शामिल एक सदस्य ने कहा कि तीन साल तक चली इस खोज में दल को थार रेगिस्तान के करीम शाही क्षेत्र में पाषाण युग की सभ्यता के साक्ष्य मिले हैं।
इस शोध की अगुवाई करने वाले आईआईटी खड़गपुर के प्रोफेसर अनिंद्य सरकार ने कहा, ‘क्षेत्र से मिले जीवाश्म खोल और तलछट का अध्ययन सक्रिय नदी तंत्र और कुछ वर्षा होने की ओर इशारा करता है जिसने संभवत: प्रारंभिक पाषाण युग से मध्यकाल तक मानव आबादी को बचा कर रखा।’
आईआईटी खड़गपुर के शोधकर्ताओं को गुजरात में मिले पाषाण युग के साक्ष्य
10 करोड़ वर्ष पूर्व नाग के पूर्वजों के थे पैर और चीकबोन: अध्ययन
हालिया किए गए एक अध्ययन के अनुसार लगभग 10 अरब वर्ष पूर्व नाग के पूर्वजों में पैर और चीकबोन (गाल की हड्डी) पाए जाते थे। अब उनके आधुनिक वंशजों में ये दोनों पूरी तरह से गायब हो गए हैं।
यह अध्ययन एक प्राचीन रियर-लिम्ड सरीसृप नजश रोनगिरिना के जीवाश्मों की जांच करने के बाद सामने आया है। अध्ययन से पता चला है कि सांपों ने अपने विकास के पहले सात करोड़ वर्षों के दौरान पैरों और फिर गाल की हड्डियों से काम लेना बंद कर दिया।
कनाडा के अल्बर्टा विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने कहा कि लगभग 10 करोड़ वर्ष पुराने जीवाश्म सांप दक्षिण अमेरिका के एक क्षेत्र में पाए गए थे। इस अध्ययन को साइंस एडवांसेज नाम के जर्नल में प्रकाशित किया गया है।
प्रकृति ही देगी प्लास्टिक का हल, भारत में हर साल 1.4 करोड़ टन होती है इस्तेमाल
‘आदमी भी क्या अनोखा जीव है, उलझनें अपनी बनाकर आप ही फंसता है, फिर बेचैन हो जागता है और ना ही सोता है।’ आज जब पूरे विश्व में प्लास्टिक के प्रबंधन को लेकर मंथन चरम पर है तो रामधारी सिंह दिनकर जी की ये पंक्तियां बरबस याद आती हैं । वैसे तो कुछ समय पहले से विश्व के अनेक देश सिंगल यूज़ प्लास्टिक का उपयोग बंद करने की दिशा में ठोस कदम उठा चुके हैं और आने वाले कुछ सालों के अंदर केवल बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक का ही उपयोग करने का लक्ष्य बना चुके हैं।
भारत इस लिस्ट में सबसे नया सदस्य है। जैसा कि लोगों को अंदेशा था, उसके विपरीत अभी भारत सरकार ने सिंगल यूज़ प्लास्टिक को कानूनी रूप से बैन नहीं किया है केवल लोगों से स्वेच्छा से इसका उपयोग बंद करने की अपील की है। अच्छी बात यह है कि लोग जागरूक हो भी रहे हैं और एक दूसरे को कर भी रहे हैं।
गर दुनिया भर के देशों द्वारा सिंगल यूज़ प्लास्टिक बैन के पैटर्न को देखें तो हमें यह पता चलता है कि हर देश ने एक बार में नहीं बल्कि विभिन्न चरणों में अपने इस लक्ष्य सिंगल यूज प्लास्टिक पर बैन लगाकर हासिल किया है। दरअसल, इसके अनेक पक्ष और पहलू हैं। जैसे आज प्लास्टिक एक ऐसी वस्तु बन चुकी है जो हमारी दिनचर्या का ही हिस्सा बन गई है, तो सबसे पहले तो सरकार को लोगों के सामने उसका ऐसा विकल्प प्रस्तुत करना होगा जो उससे बेहतर हो जिसमें थोड़ा वक्त लगेगा।
इसके अलावा आज देश की अर्थव्यवस्था भी कुछ कुछ धीमी गति से चल रही है। ऐसे समय में जब सरकार देश की अर्थव्यवस्था को गति पहुंचाने के विभिन्न उपाय आजमा रही हो तो वह सिंगल यूज़ प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाकर एक नया आर्थिक संकट नहीं खड़ा करना चाहेगी। लेकिन उसे सिंगल यूज़ प्लास्टिक के उपयोग को हतोत्साहित करने के लिए कुछ ठोस औऱ बुनियादी कदम तो उठाने ही होंगे क्योंकि आज की स्थिति में भारत में हर साल 1.4 करोड़ टन प्लास्टिक का इस्तेमाल होता है।
इतना बड़ा उद्योग होते हुए भी इस सेक्टर में प्लास्टिक से पैदा होने वाले कूड़े के प्रबंधन की कोई संगठित प्रणाली नहीं है। लेकिन भारत अकेला ऐसा देश नहीं है जो प्लास्टिक के अप्रबंधन के कारण पर्यावरण प्रदूषण की समस्या से जूझ रहा हो । विश्व का हर देश इस समस्या से ग्रस्त है। यही कारण है कि विभिन्न देशों की सरकारें इस चुनौती का सामना करने के लिए नए- नए रचनात्मक तरीके खोजने में लगी हैं।
जैसे इंडोनेशिया की सरकार ने एक नीति लागू की थी कि उपयोग की गई प्लास्टिक की बोतलें जमा करने पर मुफ्त बस यात्रा की सुविधा दी जाएगी। जबकि यूनाइटेड किंगडम ने एक पॉलिसी तैयार की है जो 2022 से लागू होगी। इसके अंतर्गत प्लास्टिक का उत्पादन करने वाले उद्योगों में रीसायकल किए पैकेज मटेरियल के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए प्लास्टिक के उत्पादन अथवा आयात पर प्लास्टिक पैकेज टैक्स लगाया जाएगा।
भारत के लिए भी इस विषय पर दुनिया के सामने नए विचार नए इनोवेशन नए आईडिया रखने का यह एक बेहतरीन समय है। सम्पूर्ण विश्व जो आज प्लास्टिक प्रदूषण से जूझ रहा है उसके सामने नए प्राकृतिक विकल्पों से इस समस्या के समाधान का नेतृत्व करने का सुनहरा अवसर भी है और इतिहास भी।
अच्छी खबर यह है कि आज अगर प्लास्टिक एक समस्या है तो इस समस्या का समाधान भी है।
अच्छी खबर यह है कि आज अगर प्लास्टिक एक समस्या है तो इस समस्या का समाधान भी है।
क्योंकि इंडिया बनने से पहले जब यह देश भारत था, तो पेड़ के पत्तों के दोने, पत्तल, मिट्टी के कुल्लड़, केले के पत्ते जैसी कटलरी, कागज़ के लिफाफे औऱ कपड़े के थैले, जैसी प्राकृतिक चीज़ों का इस्तेमाल करता था जो स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों के लिहाज से सुरक्षित थीं। और आज के वैज्ञानिक युग में भी प्लास्टिक के सैकड़ों विकल्प हैं। यदि हम निष्पक्ष रूप से देखें तो भारत दूसरे देशों से कच्चे तेल को खरीद कर स्वयं अपने पर्यावरण को प्लास्टिक कचरे में तब्दील कर रहा है लेकिन अब समय आ गया है कि वो नए विकल्पों की खोज का नेतृत्व करके समूचे विश्व को दिशा दिखाए।
अच्छी खबर यह है कि आज अगर प्लास्टिक एक समस्या है तो इस समस्या का समाधान भी है। मशरूम जो खाने में प्रोटीन का बेहतरीन स्रोत माने जाते हैं वो नवीन खोजों के अनुसार प्लास्टिक का एक बेहतर विकल्प बनने के लिए तैयार हैं। पेड़ों से निकल कर जो फफूंद उगती है वैज्ञानिक उसके रेशों से एक ऐसा मटेरियल बनाने में सफल हो गए हैं जो प्लास्टिक की जगह ले सकता है।
सबसे अच्छी बात यह है कि इन्हें किसी भी कृषि उत्पाद के कचरे पर उगाया जा सकता है, ये प्राकृतिक पॉलीमर होते हैं जो मजबूत से मजबूत गोंद से भी ज्यादा मजबूती से चिपकाने और जोड़ने के काम आते हैं। इसके अलावा, जो चट्टानें प्रकृति में बड़ी मात्रा में पाई जाती हैं वैज्ञानिक अब उनसे ऊन बनाने की तैयारी कर रहे हैं। दरअसल, ज्वालामुखी विस्फोट से लावा निकलकर जब ठंडा हुआ तो यह चट्टानें बनीं। अब इन चट्टानों को स्लैग से मिलाकर स्टोन वूल तैयार किया जा रहा है। इसकी खास बात यह होती है कि इसमें आग नहीं लगती और खराब मौसम में भी यह ऊन खराब नहीं होती।
सम्भव है आने वाले समय में यह प्लास्टिक के विकल्प के रूप में उपयोग की जाने लगे।इसी प्रकार दूध की मदद से वैज्ञानिकों ने एक पतली परत वाली प्रोटीन फिल्म तैयार की है जो अधिक तापमान में भी इस्तेमाल की जा सकती है और इसे रीसायकल करना भी आसान है। इसी क्रम में भुट्टे के डंठल, घास,नारियल, सी वीडस आदि पर भी काम करके प्लास्टिक का प्राकृतिक विकल्प खोजने के प्रयास दुनिया भर में किए जा रहे हैं। लेकिन जब तक हमारे सामने प्लास्टिक का विकल्प नहीं आता, इस पृथ्वी के एक जिम्मेदार वासी के नाते, इस सृष्टि का अंश होने के नाते, सभी जीवों में श्रेष्ठ मनुष्य के रूप में जन्म लेने के कारण अन्य जीवों के प्रति अपने दायित्वों की खातिर कुछ छोटे- छोटे कदम हम भी उठा सकते हैं। जब हम बाहर जाते समय अपना मोबाइल लेना नहीं भूलते तो एक कपड़े का थैला ले जाना भी याद रख सकते हैं।
(साभार – अमर उजाला)
शादी करने का इरादा है तो जिम्मेदारी उठानी भी जरूरी है
शादी बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। होता यह है कि लड़कियों को तो बचपन से ही तैयार किया जाता है कि उनको ससुराल जाना है मगर लड़कों को लेकर इस तरह से किसी प्रकार की तैयारी नहीं होती। नतीजा यह होता है कि वे शादी के बन्धन से जुड़ी जिम्मेदारियों को नहीं समझते और इससे खड़ी होती है परेशानी। कई बार इस वजह से रिश्ते टूट भी जाते हैं मगर आज के लड़के बहुत समझदार भी हैं और संवेदनशील भी, इसलिए वे घर की जिम्मेदारियों को निभाने में भी कोई कोताही नहीं बरतते और आज महिलाओं के आगे बढ़ने में उनकी बड़ी भूमिका है। तो आप भी बंधने जा रहे हैं विवाह के बन्धन में तो अपनी तैयारी कुछ ऐसी रखिए कि आपकी पार्टनर कहें….बस तुम्हारी ही तो जरूरत थी –
खाना बनाना सीख लें
शादी से पहले खाना बनाना जरूर सीख लें। इसके दो फायदे हैं। पहला आपकी होने वाली पत्नी इस आदत से बेहद प्रभावित होगी। दूसरा कि अगर आपकी पत्नी कहीं चली जाए तो आपको खाने के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा। आप भी वक्त-वक्त पर खुद से खाना बनाकर अपनी पत्नी को खुश रख सकते हैं। यह आपके वैवाहिक जीवन का एक अच्छा मंत्र साबित होगा।
वित्तीय स्थिति
शादी से पहले वित्तीय स्थिति को सुधार लें। क्योंकि शादी के बाद आप एक से दो हो जाते हैं। इसलिए वित्तिय स्थिति मजबूत होनी चाहिए। इसके अलावा आपके पास पैसों से संबधित बैक-अप प्लान भी होने चाहिए। अगर आप वित्तिय स्थिति को नहीं सुधारंगे तो यह आपके वैवाहिक जीवन में मुश्किल खड़ी कर सकता है।
खर्च कम करना सीखें
शादी से पहले ही आपको पैसों के मामले में व्यवस्थित होना पड़ेगा। भले ही आप पैसा खर्च करने से पहले नहीं सोचते होंगे लेकिन शादी के बाद आपको सोच-समझ कर पैसा खर्च करना पड़ेगा ऐसा इसलिए क्योंकि शादी के बाद जिम्मेदारी बढ़ जाती हैं और खर्चो में भी इजाफा हो जाता है। इसके अलावा पैसे बचाने की कला भी सीख लें क्योंकि यह आदत आपके भविष्य को सुरक्षित बना सकती है।
(साभार)
जस्टिस भानुमति सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम में शामिल
13 साल बाद कोई महिला बनी सदस्य
नयी दिल्ली : जस्टिस आर भानुमति सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सदस्य होंगी। वह पूर्व सीजेआई रंजन गोगोई की जगह लेंगी। सुप्रीम कोर्ट के पांच सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश इसके सदस्य होते हैं। जस्टिस गोगोई के सेवानिवृत्त होने के बाद जगह खाली थी। 13 साल बाद कोई महिला जज कॉलेजियम का हिस्सा बनी है। उनसे पहले जस्टिस रूमा पाल 2006 में रिटायर होने तक कॉलेजियम की हिस्सा रहीं थी। कॉलेजियम अलग-अलग हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति के लिए नामों की सिफारिश करता है। अब कॉलेजियम में सीजेआई एसए बोबडे, जस्टिस एनवी रमना, जस्टिस अरुण मिश्रा, जस्टिस आरएफ नरीमन और जस्टिस भानुमति होंगी। जस्टिस भानुमति 13 अगस्त, 2014 को सुप्रीम कोर्ट में जज बनीं थीं।
डांसिंग मूव्स से ट्रैफिक कंट्रोल करती है एमबीए की छात्रा, वीडियो वायरल
इंदौर : एमबीए छात्रा शुभी जैन ट्रैफिक कंट्रोल के अपने अलग अंदाज के कारण इन दिनों चर्चा में हैं। शुभी डांस के साथ ट्रैफिक कंट्रोल करती हैं। उनके मूव्स के लोग कायल हैं। शुभी इंदौर पुलिस के साथ बतौर वॉलंटियर की तरह काम कर रही हैं। 23 साल की शुभी जैन पुणे के सिम्बायोसिस कॉलेज की छात्रा हैं और इंदौर में ट्रैफिक सुधार के लिए इंटर्नशिप पर आई हैं। रेड सिग्नल पर वाहन चालकों के रुकते ही वह उनके पास पहुंच जाती हैं। वह बड़े ही प्यार से लोगों को यातायात नियम बताती हैं। टू-व्हीलर पर हेलमेट पहनकर चलने वालों को सैल्यूट करती हैं, जिन्होंने हेलमेट नहीं पहना हुआ होता है, उनसे हाथ जोड़कर निवेदन करती हैं। कार चालकों से भी सीट बेल्ट लगाने का आग्रह करती हैं। सोशल मीडिया पर शुभी जैन का वीडियो वायरल होने के बाद एडीजी वरुण कपूर ने उन्हें सम्मानित किया। शुभी ने बताया कि वह यातायात जागरूकता अभियान से जुड़कर न सिर्फ लोगों को जागरूक कर रहीं हैं, बल्कि अपने साथी व परिवार के लोगों को भी इसी तरह ट्रैफिक रूल्स का पालन करने के लिए जागरूक करती हैं।
जापान के सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री पद पर रहनेवाले व्यक्ति बने शिंजो आबे
तोक्यो : जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे देश में अब तक सबसे ज्यादा लंबे समय तक इस पद पर बने रहने वाले व्यक्ति बन गए हैं लेकिन सेना को मजबूत करने के लिए संविधान में संशोधन का उनका महत्वाकांक्षी ल्क्ष्य अब तक पूरा नहीं हुआ है। आबे का इस पद पर बने हुए 2,887 से अधिक दिन हो गए हैं। इससे पहले लंबे समय तक इस पद पर पूर्व प्रधानमंत्री तारा कतसूरा रह चुके हैं। वह 1901 से 1913 के बीच इस पद पर तीन बार प्रधानमंत्री बने थे। आबे का यह कार्यकाल कम से कम 2021 से पहले तक को नहीं ही खत्म होने जा रहा है और उसके बाद भी उनका कोई उत्तराधिकारी स्पष्ट रूप से नजर भी नहीं आ रहा। अब भी उनके कई काम अधूरे हैं, इस साल की शुरुआत में उनके मंत्रिमंडल में बदलाव हुआ था और उन्होंने उम्मीद जताई थी कि ‘‘वह नए देश के निर्माण की चुनौती पर काम करेंगे।’’ वह कई बार द्वितीय विश्व युद्ध के बाद तैयार हुए जापान के संविधान में संशोधन की बात भी कह चुके हैं लेकिन ऐसा हो नहीं पाया है।
कलाकारों के योगदान को पहचाने सरकार: ऋषि कपूर
मुम्बई : दिग्गज अभिनेता ऋषि कपूर का कहना है कि देश में कलाकारों और सिनेमा की भूमिका को पहचानना महत्वपूर्ण है क्योंकि इन दोनों ने भी देश के सांस्कृतिक और आर्थिक विकास में बड़ा योगदान दिया है। कपूर (67) के अगले साल सिनेमा में 50 वर्ष पूरे हो जाएंगे। अभिनेता से जब पूछा गया कि क्या वह अपने करियर को मुकम्मल मानते हैं तो उन्होंने पीटीआई भाषा से कहा, “ऐसा कुछ लोगों का कहना है। मैं नहीं कहता। लेकिन मुझे आप लोगों के यह कहने का इंतजार रहेगा कि यह आदमी 50 साल से काम कर रहा है। लेकिन कोई ऐसा (योगदान के बारे में बात) नहीं करता। सरकार ने भी नहीं किया। यह बड़े दुख की बात है। सरकारें बदल गईं, लेकिन यह निराशा अब भी बाकी है।” कपूर ने कहा, “मैं मनोरंजन कर के बारे में बता सकता हूं कि हम कितना योगदान देते हैं। अगर सिनेमा नहीं होता, तो राष्ट्रीय खजाने में पैसे का एक बड़ा हिस्सा नहीं होता। मैं यह कहते कहते थक गया हूं… देश में कलाकारों और सिनेमा की भूमिका को स्वीकार किया जाना चाहिये, लेकिन वह कान बंद किये हुए बैठे हैं, मैं क्या कर सकता हूं।” ऋषि की अगली फिल्म “द बॉडी” आने वाली है, जिसमें इमरान हाशमी और सोभिता धुलिपाला भी अभिनय करते नजर आएंगे। फिल्म 13 दिसंबर को रिलीज होनी है।
लियोनार्डो डिकैप्रियो ने दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण पर जताई चिंता
लॉस एंजिलिस : हॉलीवुड स्टार लियोनार्डो डिकैप्रियो ने इंस्टाग्राम में एक एक पोस्ट के माध्यम से भारत की राजधानी में वायु प्रदूषण के बढ़ते स्तर पर चिंता जताई है। पर्यावरण को लेकर मुखर 45 वर्षीय अभिनेता ने दिल्ली में प्रदूषण के खिलाफ इंडिया गेट पर प्रदर्शन कर रहे लोगों की तस्वीरें साझा करते हुए सोमवार को इंस्टाग्राम पर इस संबंध में चिंता जाहिर की।
तस्वीरें साझा करते हुए उन्होंने लिखा, ‘‘नयी दिल्ली में इंडिया गेट पर 1,500 से अधिक नागरिक इकट्ठे हुए और शहर में प्रदूषण के खतरनाक स्तर के खिलाफ तत्काल कदम उठाने की माँग की।’’ उन्होंने कहा, ‘‘विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, भारत में हर साल वायु प्रदूषण में लगभग 15 लाख लोगों की जान जाती है। इन आंकड़ों के अनुसार भारत में वायु प्रदूषण लोगों की मृत्यु के पांच बड़े कारकों में से एक है।’’ पोस्ट के अनुसार प्रदर्शन में हर आयु वर्ग के लोग शामिल हुए।उन्होंने लिखा, ‘‘ तमाम वादों के बावजूद वायु अब भी असुरक्षित है और वायु प्रदूषण के सुरक्षित स्तर तक पहुंचने तक कार्यकर्ता दबाव बनाना जारी रखेंगे।’’ डिकैप्रियो पहले भी भारत संबंधी पर्यावरण के मुद्दों पर चिंता जाहिर कर चुके हैं।उन्होंने जून में तमिलनाडु में जल संकट और दिल्ली के गाजीपुर में 65 मीटर ऊंचे कूड़े के ढेर से संबंधित भी पोस्ट किए थे।
छोटे छोटे विचारों ने महिलाओं को बनाया सफल उद्यमी
नयी दिल्ली : रुचि गुप्ता को अचार बनाने का बहुत शौक था और पास पड़ोस तथा रिश्तेदारों के बीच उसके हाथ के बने अचार की बहुत माँग रहती थी । रुचि को इससे थोड़ी बहुत आमदनी भी हो जाती थी लेकिन उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उनका यह शौक उन्हें एक सफल महिला उद्यमी बना देगा।‘घर जैसा अचार’ बनाने वाली उनकी कम्पनी ‘डिवाइन बाइट्स एंड पिकल्स’ आज एक छोटे उद्योग का रूप ले चुकी है और रुचि गुप्ता ने अपनी इस कंपनी में अधिकतर कामों के लिए महिलाओं को ही रोजगार दिया हुआ है। वह अपने अध्यापन के पेशे को छोड़कर इस क्षेत्र में आयी थीं लेकिन उन्हें आज अपने फैसले पर कोई पछतावा नहीं बल्कि खुशी है।
रुचि के महिला उद्यमी बनने की कहानी किसी सपने के सच होने जैसी है। उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र और खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग में फल एवं सब्जी प्रसंस्करण एवं संरक्षण कोर्स में दाखिला लेकर बिना एसिड और खतरनाक रसायनों के फल सब्जियों के संरक्षण की विधि सीखी।
यहीं से रूचि के सपनों के साकार होने की शुरूआत हुई । सूक्ष्म, छोटे और मध्यम उद्यम मंत्रालय द्वारा आयोजित एक मेले में उनकी मुलाकात वालमार्ट इंडिया के अधिकारियों से हुयी और उसके बाद उन्होंने पीछे मुड़ कर नहीं देखा। बाद में वह वालमार्ट के ‘‘वीमेन एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट प्रोग्राम’’ (डब्ल्यूईडीपी) से जुड़ गयीं । डब्ल्यूईडीपी कार्यक्रम के बारे में रूचि कहती हैं, ‘‘ कारोबारी सहयोगियों और संरक्षकों के साथ काम करने से मेरे अंदर एक नया विश्वास पैदा हुआ । जहां पहले मैं अपने समुदाय के लोगों को अपना बनाया आचार बेचती थी वहीं अब मेरे उत्पाद प्रगति मैदान के ट्रेड फेयर तक जा पहुंचे । ’’ रुचि इस समय फ्लिपकार्ट को अपना बनाया अचार बेच रही हैं । एक सवाल के जवाब में वह कहती हैं, ‘‘बाजार में महिला उद्यमियों के लिए काफी संभावनाएं हैं।’’
ऐसी ही कहानी प्रियंका मेहता की है। अपने छोटे घर में सामान को सहेज कर रखने की जद्दोजहद के चलते उन्हें अचानक एक दिन आइडिया आया कि क्यों न होम स्टोरेज उत्पाद बाजार में उतारे जाएं । एक छोटा सा विचार आज एक बड़ी कम्पनी का रूप ले चुका है और उन्होंने अपने ब्रांड का नाम ‘होम स्ट्रैप’’ रखा है। इंदौर शहर के समीप झलारिया गांव में उनकी वर्कशॉप है जहां काम करने वाली अधिकतर महिलाएं आर्थिक रूप से कमजोर तबके की हैं।
प्रियंका मेहता के कारोबार के विस्तार का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अगले वित्त वर्ष के लिए उन्होंने करीब 12 करोड़ रूपये के कुल कारोबार का लक्ष्य पेश किया है। वह अपनी सफलता के सफर में डब्ल्यूईडीपी कार्यक्रम को बहुत बड़े सहायक के तौर पर देखती हैं जिसके चलते उनके सपनों को उड़ान मिली और साथ ही उन्हें मिला एक अनोखा आत्मविश्वास । वह उद्योग जगत को महिलाओं के लिए संभावनाओं से भरपूर देखती हैं।
लेकिन ऐसी ही एक उद्यमी बबीता कहती हैं कि महिला उद्यमियों के लिए चुनौतियां भी कम नहीं हैं । अभी भी लोगों की मानसिकता है कि महिला उद्यमी वित्तीय मामलों, मार्केटिंग, आदि विषयों को संभालने में परिपक्व नहीं है। ‘निर्मल डिजाइंस प्राइवेट लिमिटेड’ की डायरेक्टर बबीता गुप्ता डब्ल्यूईडीपी के तहत प्रशिक्षण हासिल करने के बाद अब अपने उत्पाद मिन्तरा जैसी प्रमुख कंपनियों के साथ ही विभिन्न ई कामर्स कंपनियों को सप्लाई कर रही हैं और वह अपने ब्रांड को ग्लोबल स्वरूप देना चाहती हैं। वह प्लास्टिक फ्री पैकेजिंग उपलब्ध करा रही हैं जिसका बाजार काफी उभरता हुआ और संभावनाओं से भरपूर है।
वालमार्ट इंडिया के अध्यक्ष और सीईओ : मुख्य कार्यकारी अधिकारी : क्रिश अय्यर ने ‘भाषा’ को बताया कि डब्ल्यूईडीपी कार्यक्रम इस प्रकार डिजाइन किया गया है कि महिला उद्यमियों को बाजार से जुड़े विभिन्न पहलुओं का प्रशिक्षण देकर उन्हें अपने कारोबार को मजबूती से खड़ा करने में मदद की जा सके ताकि वे अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकें ।अय्यर कहते हैं, ‘‘ वालमार्ट महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध है और डब्ल्यूईडीपी कार्यक्रम सही मायने में हमारी इस प्रतिबद्धता को दिखाता है । ’’ डब्ल्यूईडीपी कार्यक्रम के तहत तीन बैच में 150 महिला उद्यमियों को प्रशिक्षित किया गया ।




