Saturday, April 25, 2026
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बच्चों में जीतने की ललक पैदा करना जरूरी है : लक्ष्मी रतन शुक्ला

कोलकाता : शिक्षा बेहद आवश्यक है और वह किताबों से आगे जाकर निजी अनुभवों से मिलती है। राज्य के युवा एवं क्रीड़ा राज्य मंत्री तथा पूर्व क्रिकेटर लक्ष्मी रतन शुक्ला 7वें ओसवाल बुक्स राउंड टेबल का उद्घाटन करते हुए यह बात कही। अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि समर्पण और संघर्ष से परिवर्तन लाया जा सकता है और बच्चों में जीतने की ललक उत्पन्न करना हमारा काम है और यह करने का सही समय स्कूल के दौरान ही है। उन्होंने कहा कि हम सब परिवर्तन की बात करते हैं मगर सही मायनों में बदलाव तभी होगा जब हम खुद आगे बढ़ेंगे। नवोन्मेषी शिक्षण को लेकर आयोजित यह परिचर्चा स्कूली शिक्षा पर केन्द्रित थी। परिचर्चा को सम्बोधित करते हुए पूर्व सांसद व पत्रकार चन्दन मित्रा ने पाठ्यक्रम में पर्यावरण जागरुकता को शामिल करने पर विशेष जोर दिया और कहा कि बच्चों को इस योग्य बनाने की जरूरत है कि चुनौतियों का सामना करना सीख सकें। राज्य के स्कूल शिक्षा आयुक्त डॉ. सौमित्र मोहन ने कहा गुणवत्ता की समस्या सरकारी स्कूलों में ही नहीं बल्कि निजी शिक्षण संस्थानों में भी है। देश के विभिन्न क्षेत्रों के 95 प्रतिशत सफल लोग सरकारी स्कूलों से ही निकले हैं। समस्या यह है कि सरकारी और निजी स्कूलों की संरचना में अन्तर है। बंगाल में शिक्षा के क्षेत्र में काफी काम किया जा रहा है। इस समय राज्य में 5 लाख शिक्षक और 64 हजार स्कूल हैं। स्कूली शिक्षा को आनन्ददायक बनाने की जरूरत है और इस प्रक्रिया में बच्चों को शामिल करना जरूरी है।
इस मौके पर ओसवाल बुक्स के मार्केटिंग निदेशक प्रशान्त जैन ने कहा कि बंगाल में बच्चे काफी प्रतिभाशाली हैं। शिक्षण प्रणाली में थोड़ा सा बदलाव लाकर परिवर्तन किया जा सकता है। इसके लिए बहुआयामी अनुशासनात्मक दृष्टिकोण, प्रतिभा की पहचान, कक्षा में योजनाबद्ध पाठ, विद्यार्थी केन्द्रित पाठ्य पुस्तकें सहायक साबित हो सकती हैं।
ओसवाल बुक्स राउंडटेबल का यह सातवाँ संस्करण था। इस मौके पर फोरम फॉर इंडियन जर्नलिस्ट्स ऑन एजुकेशन, एन्वायरन्मेंट, हेल्थ एंड एग्रीकल्चर (फिजिहा) के अक्ष्यक्ष डॉ. नवनीत आनन्द तथा ओसवाल बुक्स की एडिटोरियल डायरेक्टर स्वाति जैन ने भी विचार रखे। इस अवसर कई शिक्षकों को सम्मानित भी किया गया।

रिलायंस निप्पन लाइफ के पास पर्याप्त पूँजी है : आशीष वोहरा

कम्पनी ने उतारा नया टर्म इन्श्योरेंस प्लान
कोलकाता : रिलायंस निप्पन लाइफ इन्श्योरेंस (आरएनएलसी) के पास पर्याप्त पूँजी है और इसे नये सिरे से पूँजी उगाहने की जरूरत नहीं है। रिलायंस कैपिटल लिमिटेड तथा जापान की निप्पन लाइफ की साझा पेशकश के बाद कम्पनी अपनी शाखाओं की संख्या 727 से बढ़ाकर आसानी से 977 कर सकताी है। आरएनएलसी के एक्जिक्यूटिव डायरेक्टर तथा चीफ एक्जिक्यूटिव ऑफिसर आशीष वोहरा ने यह बात कही। एक सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि रिलायंस कैपिटल (51 प्रतिशत ) और निप्पन लाइफ (49 प्रतिशत) का इक्विटी बेस है इसलिए कुछ सालों तक नये सिरे से पूँजी उगाहने की जरूरत नहीं है। वोहरा के मुताबिक रिलायंस कैपिटल का वर्तमान पूँजी आधार 2 हजार करोड़ रुपये है। कम्पनी को 75 नयी शाखाएँ खोलने की मंजूरी मिल गयी है। वर्तमान वित्त वर्ष में रिलायंस निप्पन लाइफ 1 हजार करोड़ रुपये का फर्स्ट प्रीमियम इन्कम और 3500 करोड़ रुपये रिनुअल की उम्मीद कर रही है। पिछले साल कम्पनी ने फर्स्ट प्रीमियन इन्कम से 900 करोड़ रुपये उगाहे थे और रिनुअल 3200 करोड़ रुपये का कमाया। कम्पनी ने नया टर्म इन्श्योरेंस प्लान उतारा है जो हर आयु वर्ग को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। आरएनएलसी के ईडी तथा सीईओ आशीष वोहरा के अनुसार देश में प्रोटेक्शन गैप लगभग 70 -80 प्रतिशत है और बीमा सुरक्षा प्राप्त आबादी में, बीमा कवरेज सिर्फ 8 प्रतिशत ही है। इस नये प्रोटेक्शन प्लान में 4 कवर प्लान हैं। इनमें युवाओं के लिए लेवल कवर प्लान है तो इन्क्रिजिंग कवर प्लान, लेवल कवर प्लस प्लान औऱ ह्लोल ऑफ लाइफ कवर प्लान शामिल हैं। कम्पनी में फिलहाल 12 हजार कर्मचारी हैं।

मनाया गया संविधान दिवस

कोलकाता : महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा के क्षेत्रीय केंद्र, कोलकाता में ‘संविधान दिवस’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत में केंद्र के प्रभारी डॉ. सुनील कुमार ‘सुमन’ ने वहाँ उपस्थित शिक्षकों, विद्यार्थियों और कर्मचारियों को संविधान की प्रस्तावना पढ़कर शपथ दिलाई। इसके बाद केंद्र की विजिटिंग फैकेल्टी प्रो. चंद्रकला पांडेय ने कहा कि संविधान देश की रक्षा की बुनियाद है। सरकारें आती हैं और जाती हैं, लेकिन उनकी प्रतिबद्धता होती है कि वे देश के संविधान की रक्षा का प्रण लें। यह देश के हर नागरिक की भी ज़िम्मेदारी होती है कि यहाँ संविधान की मर्यादा को ध्यान में रखते हुए ही काम किए जाएँ। केंद्र के सहायक संपादक राकेश श्रीमाल ने कहा कि देश के संविधान को पाठ्यक्रम में अनिवार्य रूप से पढ़ाया जाना चाहिए, ताकि विद्यार्थियों को आरंभ से इसकी जानकारी हो सके। केंद्र प्रभारी डॉ. सुनील कुमार ‘सुमन’ ने इस अवसर पर बोलते हुए कहा कि आज यदि हमारा देश दुनिया का एक बड़ा लोकतांत्रिक देश है तो इसका कारण यह संविधान ही है। यह संविधान देश के करोड़ों शोषित-पीड़ित नागरिकों की मुक्ति का दस्तावेज़ है। यह सभी को समान अवसर व अधिकार प्रदान करता है। किसी के साथ जाति, धर्म, लिंग, क्षेत्र, संप्रदाय आदि के नाम पर कोई भेदभाव नहीं करता। संविधान को देश के हर नागरिक के लिए पढ़ना जरूरी है, ताकि वह इसके महत्व को जान-समझ सके और इसकी गरिमा को बरकरार रखना अपना नैतिक दायित्व समझे। इस कार्यक्रम का संचालन जनसंचार विभाग के अतिथि अध्यापक डॉ. ललित कुमार ने किया। इस आयोजन में डॉ. आलोक कुमार सिंह, काजल शर्मा, अमित कुमार साह, सुखेन शिकारी तथा रीता बैद्य की सहभागिता प्रमुखता से रही।

47.85 प्रतिशत की वृद्धि से बढ़ा माइक्रोफाइनेंस क्षेत्र

 एमएफआईएन माइक्रोमीटर रिपोर्ट में खुलासा

माइक्रोफाइनांस उद्योग रु. 9. 79 करोड़ ऋण खाते हैं अनुमानित रु. 5.46 करोड़ उधारकर्ताओ की मदद करता हैं

नयी दिल्ली :   माइक्रोफाइनांस क्षेत्र के क्षेत्र में वृद्धि दर्ज की गयी है और लोग समय पर ऋण राशि का भुगतान भी कर रहे हैं।   माइक्रोफाइनांस इन्स्टीट्यूशन नेटवर्क (एमएफआईएन) द्वारा जारी एक रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। एफएफआईएन ने जुलाई-सितंबर 2019 के लिए अपने माइक्रोमीटर की रिपोर्ट का 31वाँ अंक जारी किया हैं। यह आरबीआई प्रमाणित एक स्व-नियामक संगठन होने के साथ भारत का माइक्रोफाइनांस उद्योग संघ भी है।

एमएफआईएन माइक्रोमीटर द्वारा  30 सितंबर, 2019 को जारी किये गये आँकड़ों की मानें तो, माइक्रोफाइनांस की पहुँच स्वस्थ गति से राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ रही हैं, और देश भर में समय पर अपना बकाया भुगतान करनेवाले छोटे कर्जदारों की संख्या भी बढ़ती दिखाई दे रही हैं। यह इस तथ्य का समर्थन करता हैं कि माइक्रोफाइनांस ऋण को छोटे उधारकर्ता अनियंत्रित रूपों से मिलने वाले माइक्रोफाइनांस ऋण की तुलना में अधिक बड़ी आर्थिक सुविधा, विनियमित और संगठित रूप की वित्तीय सहायता के रूप में देख रहे हैं।
मार्च 2017 से शुरू होने वाले पिछले 2.5 वर्षों में, जिसने विमुद्रीकरण अवधि के अंत को भी चिह्नित किया हैं, अनुमानित 1.83 करोड़ उधारकर्ताओं को जोड़ा गया हैं, जो प्रति वर्ष औसतन 0.73 करोड़ (16.87% का सीएजीआर) हैं । 30 सितंबर, 2019 के आकड़ो के अनुसार, माइक्रोफाइनांस उद्योग 9.79 करोड़ ऋण खातों के माध्यम से 5.46 करोड़ उधारकर्ताओं की सेवा कर रहा हैं ।
एमएफआईएन के सीईओ हर्ष श्रीवास्तव ने कहा, “यह खुशी की बात हैं कि पिछले तीस महीनों में 18.3 मिलियन अतिरिक्त महिलाओं ने माइक्रोफाइनांस ऋण लिया हैं। यह वृद्धि इस बात का संकेत है की छोटे उधारकर्ताओं ने आरबीआई विनियमित सभी माइक्रोफाइनांस संस्थानों में फिर एक बार विश्वास दिखाया हैं। माइक्रोफाइनांस में पुनर्भुगतान के मजबूत ट्रैक रिकॉर्ड को देख यह बात और भी स्पष्ट होती हैं ।
30 सितंबर, 2019 के लिए माइक्रोमीटर की रिपोर्ट का मुख्य आकर्षण हैं Q2 वित्त वर्ष 2018-19 की तुलना में  वित्त वर्ष 2019- 20 में माइक्रोफाइनांस उद्योग में कुल 47.85% की वृद्धि हुई, जो की कुल लोन पोर्टफोलियो (जीएलपी) के साथ 30 सितंबर 2019 तक रु. 2,01,724 करोड़ हैं । माइक्रोमीटर के अनुसार, माइक्रोफाइनांस ऋण खातों की कुल संख्या वित्त वर्ष 2019-20 में (30 सितंबर 2019 को) 9.79 करोड़ थी, जबकि वर्ष 2018-19 में 7.43 करोड़ थी।
बैंक माइक्रो-क्रेडिट में कुल ऋण के साथ पोर्टफोलियो रु. 80,570 करोड़ का सबसे बड़ा हिस्सा रखते हैं, जो की कुल माइक्रो-क्रेडिट का 40% हैं । गैर-बैंकिंग वित्तीय कम्पनी-माइक्रो फाइनांस इंस्टीट्यूशंस (एनबीएफसी-एमएफआई) रु. 62,960 करोड़ की बकाया राशि के साथ माइक्रो-क्रेडिट का दूसरा सबसे बड़ा प्रदाता है, जो कुल उद्योग पोर्टफोलियो का 31% लेखांकन हिस्सा हैं । माइक्रोफाइनांस की दुनिया में में लघु वित्त बैंक (एसएफबी) के पास कुल ऋण राशि रु 34,829 करोड़ हैं, जो की 17% हिस्सा हैं, एनबीएफसी कुल ऋण रु. 21,381 के साथ 11% और अन्य एमएफआई 1% की हिस्सेदारी रखते हैं। पोर्टफोलियो के क्षेत्रीय वितरण (जीएलपी) में, पूर्व और उत्तर पूर्व की 40% , दक्षिण की 28%, उत्तर की 10%, पश्चिम की 14% की हिस्सेदारी है और केंद्र का 7% का योगदान है। शीर्ष 10 राज्य (वर्ल्ड डेटा पर आधारित) जीएलपी के संदर्भ में 82.7% हैं। तमिलनाडु, सबसे बड़ा राज्य हैं और बाद में पश्चिम बंगाल और बिहार आते हैं ।
एमएफआईएन के 56 एनबीएफसी-एमएफआई सदस्यों के संबंध देखा जाए तो , इन सदस्यों का कुल ऋण पोर्टफोलियो (जीएलपी) 30 सितंबर 2019 तक रु. 63,869 करोड़ रुपये था । यह 30 सितंबर 2018 की तुलना में 46% की YoY वृद्धि का प्रतिनिधित्व करता है जो की 30 जून 2019 की तुलना में 13% हैं । 0.68 करोड़ खातों के माध्यम से वित्त वर्ष 2019 -20 में रु. 18,694 करोड़ ऋण राशि वितरित की गयी थी । पिछले वर्ष की तुलना में 30 सितंबर 2019 तक कुल ऋण खाते 34% की वृद्धि के साथ रु 3.50 करोड़ थे।

एनबीएफसी एमएफआई के माइक्रोफाइनांस पोर्टफोलियो की गुणवत्ता बेहतर होने के कारण 30 सितंबर 2019 को 1.12% की तुलना में  1.09% के रूप में मामूली सुधार किया है। इसका मतलब यह हैं देश भर में बढ़ती मात्रा में माइक्रोफाइनांस ऋणों को समय पर चुकाया जा रहा हैं। समग्र ऋण पोर्टफोलियो का केवल 0.42% 90 दिनों तक बकाया रहता हैं, यानी जहां 90 दिनों के लिए कोई भुगतान नहीं किया गया हैं ।
30 सितंबर, 2019 को 85 एनबीएफसी-एमएफआई की बैलेंस शीट पोर्टफोलियो रु. 62,960 करोड़ पर थी जो 35 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 601 जिलों में फैली हुई हैं, पिछले वित्तीय वर्ष में लगभग 17% से बढ़ा। इन 54 एनबीएफसी-एमएफआई सदस्यों में एमएफआईएन के सदस्यों को कुल Q2 FY 19-20 के दौरान रु.9,443 करोड़, Q2 FY 18-19 में 55% की वृद्धि। 30 सितंबर 2019 तक, एनबीएफसी-एमएफआई के पास कुल संपत्ति रु. 61,855 करोड़ हैं ।
पिछले 12 महीनों के दौरान, 3 एनबीएफसी-एमएफआई छोटे से मध्यम श्रेणी में गए और 5 मध्यम से बड़ी श्रेणी में गये हैं। इसके अतिरिक्त, लगभग 9 नए सदस्य एमएफएफसी के सदस्य के रूप में एनबीएफसी -एमएफआई क्लस्टर का हिस्सा बन गए हैं।

“प्रतिभा प्रबंधन और कॅरियर प्रगति” पर प्रबन्धन विकास कार्यक्रम

कोलकाता : ब्रेथवेट एंड कम्पनी लिमिटेड के अधिकारियों के लिए “प्रतिभा प्रबन्धन और कॅरियर प्रगति” पर प्रबंधन विकास कार्यक्रम, 18 से 22 नवंबर 2019 के दौरान मौलाना अबुल कलाम आजाद प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पश्चिम बंगाल के स्कूल ऑफ मैनेजमेंट साइंसेज द्वारा आयोजित किया गया।
कार्यक्रम का उद्घाटन गत 18 नवम्बर को प्रो.(डॉ.) इंद्रनील मुखर्जी, (निदेशक), स्कूल ऑफ मैनेजमेंट साइंसेस, मौ.अ.क.आ.प्रौ. विश्वविद्यालय, प्रो. सुब्रत कुमार राय एवं मौ.अ.क.आ.प्रौ. विश्वविद्यालय के अन्य संकाय सदस्यों की उपस्थिति में सलीम जी पुरुषोत्तमन, निदेशक (उत्पादन) द्वारा किया गया | कार्यक्रम के दौरान हुए विचार- विमर्श में सभी विषयों और स्तरों के अधिकारियों ने उत्साह पूर्वक भाग लिया । उन्होंने कॉरपोरेट आवश्यकताओं के लिए प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं को सीखा, जो उन्हें कॅरियर की प्रगति के लिए सक्षम करेगा।
22 नवम्बर को कार्यक्रम के समापन समारोह में, प्रो. एस के राय ने सतत और संरचित सीखने की आवश्यकता पर जोर दिया। इंद्रनील मुखर्जी ने उद्योग-अकादमिया सिनर्जी की आवश्यकता पर जोर दिया। सलीम पुरुषोत्तमन, निदेशक (उत्पादन) और निदेशक (वित्त) ने कहा कि कर्मचारियों को बहुत अच्छा सीखना चाहिए और बदलते बिजनेस मॉडल के अनुकूल होना चाहिए, ताकि उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए प्रबंधकीय कौशल का विकास हो। उन्होंने कहा कि प्रबन्धकीय प्रभावशीलता और उत्कृष्टता 3 कारकों पर आधारित हैं- प्रभावी संचार, उच्च मनोबल और उत्पादकता। धन्यवाद के आदान-प्रदान के साथ मैनेजमेंट डेवलपमेंट कार्यक्रम संपन्न हुआ ।

4 सुन्दरियाँ बनीं लीवा मिस दीवा 2020 की कोलकाता फाइनलिस्ट

कोलकाता : लीवा मिस दीवा 2020 के कोलकाता ऑडिशन हाल में आयोजित हुआ। मिस दीवा 2020 की कोलकाता फाइनलिस्ट हैं – मेघना मुखर्जी, मेघना बोस, रश्मि माधुरी एम के. अक्षिता सिंह। इस सौन्दर्य प्रतियोगिता की मेंटर अभिनेत्री व पूर्व मिस यूनिवर्स लारा दत्ता के नेतृत्व में ‘ब्यूटी विद ब्रेन’ की तलाश आरम्भ हुई। इस प्रतियोगिता के लिए 80 प्रविष्टियों को चयनित किया गया। निर्णायकों में पूर्वी भारत के प्रख्यात फैशन फोटोग्राफर कौस्तभ सैकिया और टॉलीवुड अभिनेत्री दिति साहा शामिल हैं। इस मौके पर अभिनेत्री लारा दत्ता ने लीवा मिस दीवा 2020 को लेकर उत्साह जताया और उम्मीद जाहिर की कि हर साल की तरह इस प्रतियोगिता के माध्यम से नयी प्रतिभाएँ सामने आएँगी। कोलकाता के अतिरिक्त लखनऊ, हैदराबाद, इन्दौर, चेन्नई, पुणे, बंगलुरू, जयपुर, चंडीगढ़ और दिल्ली की प्रतियोगी मुम्बई रवाना होंगी।

बच्चों को बचपन में ही दें उनके कमरे की जिम्मेदारी

बच्चे जब छोटे होते हैं तो माता-पिता ही उनके सारे काम करते हैं। उनके खिलौने जगह पर रखना, बिस्तर लगाना, किताबें उठाना, कमरे को साफ करना और न जाने क्या-क्या। बच्चों के सारे काम माता-पिता के जरिए करने की आदत उन्हें लापरवाह और गैर जिम्मेदार बनाती है। फिर बाद में व्यवस्था सिखाना मुश्किल होता है। यही वजह होती है कि वे जीवन में भी अस्त-व्यस्त रहते हैं। इस आदत में बदलाव के लिए पहला कदम आपको उठाना होगा। मेघा मैरी बता रही हैं कि कैसे आप बच्चों को व्यवस्थित रहना सिखा सकते हैं। इस सलीके को सिखाने के लिए रोचक तरीका अपनाएं-
छुटपन से शुरूआत
यह सोच गलत है कि बच्चा बड़ा होकर सब खुद-ब-खुद सीख जाता है। आदत आपको ही डालनी होगी। बच्चा छोटा है तो खेलने के बाद उसे खिलौने जगह पर रखने और कचरे को डस्टबिन में डालने के लिए तो कह ही सकते हैं। काम बेशक छोटे हैं पर काम करने की आदत यहीं से पड़ेगी।
अभी देर नहीं हुई
अंग्रेजी में कहावत है ‘इट्स नेवर टू लेट टू स्टार्ट।’ इसका अर्थ है कि शुरूआत के लिए अभी देर नहीं हुई है। अगर आपके बच्चे बड़े हो गए हैं तो उन्हें कहें कि वे अपने कमरे को अपने हिसाब से रख सकते हैं बशर्ते कमरा साफ रहना चाहिए। इसके लिए शुरुआत में उन्हें सिखाएं कि कैसे चीजों को व्यवस्थित रखना है। यानी शुरूआत में साफ कमरा सजाकर आप देंगे और उन्हें बता देंगे कि भले जमावट वे अपने मुताबिक कर लें लेकिन सफाई रहना जरूरी है।
बच्चों के मुताबिक सामान चुनें
कमरा बच्चों का है तो सामान भी उनकी पसंद और उनके हिसाब का होना चाहिए। पर्देसे लेकर तकिए और बेड भी रंगीन और खूबसूरत होना चाहिए, ताकि बच्चों को पसंद आए।
यदि फर्नीचर आदि बच्चों के हिसाब का नहीं है तो उसे उनके अनुकूल बना सकते हैं। ऐसे में फर्नीचर को अलग-अलग रंगों से पेंट कर सकते हैं, इसमें बच्चों की मदद लें। बच्चों द्वारा बनाए गए क्राफ्ट आदि को उनके कमरे में सजा सकते हैं। सामान ऐसा हो, जिसे बच्चे खुद सम्भाल व साफ कर सकें।
बिस्तर बनाना
फौजियों को सबसे पहले बिस्तर ठीक करना सिखाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि उठते ही अपना बिस्तर ठीक करना एक सुव्यवस्थित दिन की ओर पहला कदम बढ़ाने जैसा होता है। और तो और बिखरा हुआ बिस्तर पूरे कमरे की शोभा बिगाड़ देता है। बच्चों से बिस्तर ठीक करने की आदत डलवाएं लेकिन उन्हें ये न लगे कि ये उनसे ज़बरदस्ती कराया जा रहा है। शुरुआत में उनसे ये एक प्रतियोगिता की तरह करवाएं। चादर को कैसे ठीक करना है, तकिए और कम्फर्टर को कैसे रखना है, कितने दिन में चादर को बदलना है आदि।
सामान पहुँच में हो
कई बार सामान इतना ऊपर या ऐसी जगह रख दिया जाता है जहां बच्चे पहुँच नहीं पाते। जो भी बच्चों के काम का सामान है वो उनकी पहुँच में होना चाहिए। खिलौने रखने के लिए डलिया या अलमारी जो भी हो वो पहुँच में हो। ऐसा न होने पर खिलौनों का बिखरना स्वाभाविक होगा। साथ ही ड्रॉइंग बुक, स्केच पेन, पेंसिल आदि भी सामने ही रखें, ताकि जरूरत के वक्त बिना सामान बिखेरे वे इन्हें ले सकें। किताबों के लिए रैक नहीं हो तो उन्हें खूबसूरती से साधारण अलमारी में सजा दें, लेकिन ये भी बच्चों की पहुंच में ही हों।
अतिरिक्त को हटाएं
कमरा साफ होने के बाद जो सामान लगता है कि काम का नहीं है उसे हटा दें या किसी जरूरतमंद को दे दें। हो सके तो बच्चों से ये कार्य कराएं। इससे वे दूसरों के लिए भी सोचेंगे और उनके प्रति संवेदनशील बनेंगे।
आखिरी चरण
बच्चे जब अपना कमरा अपने मुताबिक सेट कर लें तो कमरे की कुछ तस्वीर खींच लें। इन तस्वीरों को उनकी स्टडी टेबल के पास, दरवाजे पर और बिस्तर के पास लगा सकते हैं, ताकि बिखरा कमरा देखकर वे समझ सकें कि किस चीज को किस जगह रखना है।

आंगनवाड़ी के लिये स्मार्टफोन, उपकरण खरीद में और स्मार्ट बनें राज्य: नीति आयोग

नयी दिल्ली : नीति आयोग के अधिकारिेयों ने राष्ट्रीय पोषण अभियान के तहत आंगनवाड़ियों के लिए स्मार्ट फोन और बच्चों की वृद्धि की माप के उपकरणों की खरीद की प्रगति में कमियां पाई हैं और राज्य सरकारों से यह काम अधिक मुस्तैदी से करने को कहा है।
आयोग ने कहा कि इन उपकरणों की खरीद की प्रगति अपेक्षित दर से नहीं हुई है। अब तक विभिन्न आंगनवाड़ी केंद्रों के लिए 6.28 लाख स्मार्टफोन और 6.37 लाख वृद्धि-मापक उपकरण खरीदे गए हैं।
‘पोषण की चुनौती पर राष्ट्रीय परिषद’ की बैठक के विवरण की एक प्रति के अनुसार नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने बैठक में कहा कि पांच राज्यों ने तो अभी स्मार्टफोन की खरीद ही नहीं की है। इसी तरह 14 राज्यों ने आवश्यक वृद्धिमापी उपकरण की भी खरीद नहीं की है। कुमार ने पिछले महीने हुई बैठक में कहा, ‘‘ जब तक हम यह (उपकरणों की व्यवस्था) नहीं करेंगे, तब तक आंगड़वाड़ी केंद्र हमें वे आंकड़े उपलब्ध नहीं करा पाएंगे, जिनकी हमें जरूरत है। इसी तरह वे वृद्धिमापी उपकरण के बिना ऐसे बच्चों की पहचान भी नहीं कर पाएंगे जो भीषण कुपोषण का शिकार हैं।’’
राष्ट्रीय पोषण अभियान के तहत निगरानी और जांच की कारगर व्यवस्था बनाने के लिए स्मार्टफोन और टैबलेट खरीदे जा रहे हैं। इस पोषण अभियान का मकसद कम कद, खून की कमी और जन्म के वक्त कम वजन के स्तर को कम करना है। इसका लक्ष्य अल्पवृद्धि की समस्या के शिकार बच्चों के अनुपात में कमी ला कर इसे 2022 तक 25 फीसदी करना है। यह अनुपात इस समय 38.4 प्रतिशत है।
स्मार्टफोन और टैबलेट में ‘एकीकृत बाल विकास सेवा-सामान्य एप’ है, जो प्रत्येक गांव की कुपोषण प्रोफाइल का खाका तैयार करता है। कुमार ने कहा कि स्मार्टफोन और वृद्धि मापक उपकरण खरीदने की दर ‘ठीक नहीं’ है और राज्यों को इस मामले में तेजी दिखाने की जरूरत है। इस बैठक में महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के सचिव रबिंद्र पंवार, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय, भारतीय कृषि अनुसंसाधन परिषद,भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद, और राष्ट्रीय पोषण संस्थान के अधिकारियों ने हिस्सा लिया था।

नाबार्ड के पास वित्त वर्ष के शेष महीनों में 35,000 करोड़ रुपये जुटाने की गुंजाइश

नयी दिल्ली : राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के पास चालू वित्त वर्ष के शेष बचे महीनों के दौरान बाजार से 35,000 करोड़ रुपये जुटाने की गुंजाइश है। इससे बैंक अपनी कारोबारी योजनाओं को आगे बढ़ा सकेगा और सरकार की विभिन्न कृषि एवं ग्रामीण विकास योजनाओं में सहयोग दे सकेगा।
नाबार्ड के चेयरमैन हर्ष कुमार भनवाला ने पीटीआई भाषा से कहा, ‘‘अभी तक हमने 20,000 करोड़ रुपये जुटाए हैं। शेष 35,000 करोड़ रुपये मांग और जरूरत के हिसाब से जुटाए जाएंगे।’’ उन्होंने कहा कि इसमें सरकार की विभिन्न प्रमुख योजाओं के लिए अतिरिक्त बजटीय संसाधन (ईबीआर) कर्ज शामिल है।
नाबार्ड सामान्य तौर पर दीर्घावधि के 10 से 15 साल की अवधि के बांड के जरिये कोष जुटाता है। पिछले वित्त वर्ष में नाबार्ड ने गैर परिवर्तनीय डिबेंचरों से 56,069 करोड़ रुपये जुटाए थे। इनमें से 33,169 करोड़ रुपये सरकारी योजनाओं के लिए शेष संगठन अपनी वित्तपोषण जरूरतों के लिए जुटाए गए थे। नाबार्ड द्वारा वित्तपोषित कुछ सरकारी योजनाओं में….स्वच्छ भारत मिशन, प्रधानमंत्री आवास योजना और प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना शामिल हैं।
वित्त वर्ष 2018-19 में नाबार्ड का ऋण पोर्टफोलियो 22 प्रतिशत बढ़कर 4.32 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया। मार्च, 2019 के दौरान बैंक के प्रबंधन के तहत परिसंपतियां एक साल पहले की तुलना में 20 प्रतिशत बढ़कर 4.87 लाख करोड़ रुपये पर पहुँच गयी।

फवाद मिर्जा ने रचा इतिहास, 20 साल में पहली बार भारत ने घुड़सवारी में हासिल किया ओलंपिक

कोटा : एशियाई खेलों में देश को 36 साल बाद घुड़सवारी में व्यक्तिगत पदक दिलाने वाले फवाद मिर्जा ने एक और उपलब्धि हासिल कर ली। फवाद ने क्वालिफायर में अपने ग्रुप जी में शीर्ष पर रहते हुए टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालिफाई कर लिया। उन्होंने 20 साल बाद देश को ओलंपिक कोटा दिलाया।
फवाद इस महीने यूरोपीय चरण खत्म होने के बाद दक्षिण पूर्व एशिया, ओसियाना ग्रुप जी की व्यक्तिगत स्पर्धा में शीर्ष रैंकिंग के घुड़सवार हैं। इस मामले में हालांकि आधिकारिक घोषणा अंतरराष्ट्रीय घुड़सवारी महासंघ (एफईआई) अगले साल 20 फरवरी को करेगा।
इससे पहले सिर्फ इम्तियाज अनीस (सिडनी, 2000) और दिवंगत विंग कमांडर आईजे लांबा (अटलांटा, 1996) ने ही ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया है। अगस्त में अर्जुन पुरस्कार पाने वाले 27 वर्षीय फवाद ने छह क्वालिफाइंग स्पर्धा से कुल 64 अंक बनाए। उन्होंने अपने पहले घोड़े फर्नहिल फेसटाइम से 34 और दूसरे घोड़े टचिंगवुड से 30 अंक बनाए। फवाद ने जकार्ता एशियाई खेलों में व्यक्तिगत और टीम स्पर्धा में रजत पदक जीते थे।
फवाद मिर्जा ने कहा, ‘मुझे कोटा मिलने की उम्मीद थी है लेकिन चीन और थाईलैंड की टीमों के क्वालिफाई करने का इंतजार करना पड़ा। दोनों टीमों ने पिछले हफ्ते इटली में क्वालिफाई कर लिया। अगर इन देशों ने टीमों के तौर पर क्वालिफाई नहीं किया होता तो वे व्यक्तिगत स्थान लेते और मुझे कोटा हासिल नहीं होता। मैं कोटा हासिल कर काफी खुश हूं लेकिन मुझे अभी काफी मेहनत करने की जरूरत है। यह कई पायदानों में से एक है। अब हमें सर्वश्रेष्ठ तैयारी करनी होगी ताकि प्रतियोगिता में जाते समय मेरा फॉर्म अच्छा रहे।’