Saturday, April 25, 2026
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बहुओं पर हुए पहले सर्वे में खुलासा – बहुएँ नहीं तोड़ती संयुक्त परिवार

75 प्रतिशत बहुओं ने माना- झगड़े से परिवार का प्रेम नहीं घटता
आईआईटी गांधीनगर ने सभी धर्मों के 453 संयुक्त परिवार में बहुओं की भूमिका पर सर्वे किया
अहमदाबाद : देश में संयुक्त परिवार टूट रहे हैं और उसकी मुख्य वजह बहुएं हैं, ऐसी मान्यता पूरी तरह गलत है। आईआईटी गांधीनगर ने अहमदाबाद के 453 संयुक्त परिवारों पर किए गए सर्वे के बाद यह निष्कर्ष निकाला है। सर्वे में 75% बहुओं ने माना कि संयुक्त परिवार में झगड़े होते हैं, लेकिन इस कारण परिवार के सदस्यों का आपसी प्रेम कम नहीं होता। शोधकर्ता और आईआईटी गांधीनगर की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. तनिष्ठा सामंत ने कहा कि देश में वृद्धाश्रम की बढ़ती संख्या के कारण सर्वेक्षण की यह थीम चुनी गई। इसके लिए इंडियन काउंसिल ऑफ सोशल रिसर्च का भी सहयोग लिया गया। देश में इसके पहले बहुओं की भूमिका पर कोई आधिकारिक सर्वे नहीं हुआ है। इसमें 50% लोगों ने यह भी माना कि परिवार तो संयुक्त ही होना चाहिए।

50 प्रतिशत  ने माना- परिवार संयुक्त ही होना चाहिए

डॉ. सामंत ने कहा कि देश में 86% परिवार संयुक्त रूप से रहते हैं। इसके बावजूद वृद्धाश्रमों का प्रमाण अधिक है। मौजूदा समय के बच्चे भी मानते हैं कि आर्थिक संकट के समय परिवार के बड़े-बुजुर्ग ही मददगार साबित होते हैं। सर्वे में हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई और जैन धर्म के संयुक्त परिवार शामिल थे। इसमें तीन पीढ़ियों के संयुक्त परिवार में रह रहे 86% और 2 पीढ़ी के साथ रहने वाले 14% परिवार शामिल किए गए। सर्वे में बातचीत के लिए 40 साल से अधिक उम्र के लोगों को ही जवाब के लिए चुना गया था।

महज 32 प्रतिशत है बलात्कार दोषसिद्धि दर : एनसीआरबी

नयी दिल्ली : पूरे देश को हिलाकर रखने वाले निर्भया सामूहिक बलात्कार के सात साल बाद देश में बलात्कार के मामलों में दोषसिद्धि दर 32.2 प्रतिशत है। इस घटना के बाद यौन उत्पीड़न से निपटने के लिए कानूनों को सख्त बनाये जाने के बावजूद बलात्कार के मामलों में दोषसिद्धि दर कम है।

वर्ष 2017 के लिए उपलब्ध राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के अनुसार उस वर्ष बलात्कार के मामलों की कुल संख्या 1,46,201 थी, लेकिन उनमें से केवल 5,822 लोगों की दोषसिद्धि हुई। एनसीआरबी के आँकड़े बताते हैं कि 2017 में बलात्कार के मामलों में आरोप पत्र की दर घटकर 86.4 प्रतिशत रह गई जो 2013 में 95.4 प्रतिशत थी।

अलवर बलात्कार मामले में बचाव पक्ष की वकील शिल्पी जैन ने कहा कि बलात्कार मामलों की जांच करने वाले पुलिस के क्षेत्र-स्तरीय कर्मचारियों को अधिक कुशल बनाने की आवश्यकता है।

इस मामले में ओडिशा के पूर्व पुलिस महानिदेशक बी बी मोहंती के बेटे बिट्टी मोहंती ने एक विदेशी पर्यटक से बलात्कार किया था।

जैन ने कहा, ‘‘वे ज्यादातर अनुभवहीन हैं और ताकत उनके सिर पर चढ़ जाती है और ज्यादातर मामलों में वे बेहद भ्रष्ट हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘एक उप-निरीक्षक उच्चतम स्तर का अधिकारी होता है जो आरोप पत्र दायर करता है, इसलिए कोई भी तथ्यों की गुणवत्ता की कल्पना कर सकता है।’’

गौरतलब है कि दक्षिण दिल्ली में 23 वर्षीय एक छात्रा से वर्ष 2012 में 16 और 17 दिसम्बर की दरम्यानी रात में एक चलती बस में सामूहिक बलात्कार किया गया। सड़क पर फेंके जाने से पहले उस पर गंभीर रूप से हमला किया गया और 29 दिसम्बर को सिंगापुर के माउंट एलिजाबेथ अस्पताल में उसकी मौत हो गई थी।

निर्भया पर इस भयानक हमले के एक सप्ताह बाद यौन उत्पीड़न के मामलों से निपटने के लिए आपराधिक कानूनों की समीक्षा के लिए न्यायमूर्ति जेएस वर्मा समिति गठित की गई थी।

दुनिया की 100 सबसे ताकतवर महिलाओं में शामिल हैं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण : फोर्ब्स

न्यूयॉर्क : फोर्ब्स ने केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, एचसीएल कॉरपोरेशन की सीईओ और कार्यकारी निदेशक रोशनी नादर मल्होत्रा और बायोकॉन की संस्थापक किरन मजूमदार शॉ को दुनिया की सबसे ताकतवर 100 महिलाओं में रखा है। ‘दुनिया की 100 सबसे ताकतवर महिलाओं’ की 2019 की फोर्ब्स सूची में जर्मन चांस्लर एंजेला मर्केल पहले स्थान पर हैं। दूसरे स्थान पर हैं यूरोपीय सेन्ट्रल बैंक की प्रेसिडेंट क्रिस्टीन लेगार्द और तीसरे स्थान पर अमेरिकी संसद में निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की अध्यक्ष नैन्सी पेलोसी। इस सूची में बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना 29वें स्थान पर हैं।

फोर्ब्स का कहना है कि 2019 में दुनिया भर में महिलाओं से सक्रियता से आगे बढ़कर सरकार, उद्योगों, मीडिया और परमार्थ कार्यों में नेतृत्वकारी भूमिका संभाली।

सीतारमण फोर्ब्स की सूची में पहली बार शामिल हुई हैं और वह 34वें स्थान पर हैं। भारत की पहली वित्त मंत्री सीतारमण पहले रक्षा मंत्री भी चुकी हैं।

सीतारमण पहली महिला मंत्री हैं जो स्वतंत्र रूप से वित्त मंत्रालय का कार्यभार संभाल रही हैं। इससे पहले वित्त मंत्रालय का प्रभार तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के पास रह चुका है। मल्होत्रा सूची में 54वें स्थान पर हैं। एचसीएल कॉरपोरेशन की सीईओ होने के नाते वह 8.9 अरब डॉलर की कंपनी में सभी रणनीतिक फैसले लेने के लिए जिम्मेदार हैं। मल्होत्रा कंपनी की सीएसआर समिति की अध्यक्ष और शिव नादर फाउंडेशन की ट्रस्टी भी हैं। वहीं सूची में 65वें स्थान पर शामिल शॉ भारत की ऐसी सबसे अमीर महिला हैं जिन्होंने अपनी पूरी संपति स्वयं कमाई है।

भारत में 3,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त निवेश करेगी एमजी मोटर

कोलकाता : वाहन वि निर्माता कंपनी मोरिस गैरेज (एमजी) भारत में 3,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त निवेश करने की योजना बना रही है।मूल रूप से ब्रिटेन की इस कंपनी का स्वामित्व अब चीन की एसएआईसी के पास है। कम्पनी के एक अधिकारी ने कहा कि वे भारतमें 2,000 करोड़ रुपये का निवेश कर चुके हैं और कम्पनी का हलोल (गुजरात) कारखाना चालू हो गया है। एमजी मोटर इंडिया के मुख्य वाणिज्य अधिकारी गौरव गुप्ता ने बताया , ” हम भारतीय बाजार को लेकर प्रतिबद्ध हैं और इस साल जनवरी में हमने अपनी यात्रा शुरू की। देश के लिए हमारी योजना दीर्घकालिक है तथा हम 3,000 करोड़ रुपये का निवेश और करेंगे। “उन्होंने कहा कि कम्पनी अब तक करीब 13,000 एमजी हेक्टर की बिक्री कर चुकी है। गुप्ता ने कहा कि कम्पनी एक इलेक्ट्रिक स्पोर्ट यूटिलिटी व्हीकल पेश करेगी और जुलाई 2021 तक उसके पास कुल चार मॉडल होंगे। सभी वाहन एसयूवी श्रेणी के होंगे।

जमैका की टोनी एन सिंह बनीं विश्व सुंदरी, भारत की सुमन राव रहीं तीसरे स्थान पर

लंदन : इस साल विश्व सुंदरी (मिस वर्ल्ड) का ताज जमैका की टोनी एन सिंह के सिर सजा और भारत की सुमन राव यहां आयोजित सौंदर्य प्रतियोगिता में तीसरे स्थान पर रहीं। इस प्रतियोगिता में 23 वर्षीय सिंह को विजेता घोषित किया गया। चिकित्सक बनने की चाहत रखने वाली सिंह के पिता ब्रैडशॉ सिंह भारतीय कैरेबियाई हैं और उनकी मां जहरीन बैले अफ्रीकी-कैरेबियाई हैं।

प्रतियोगिता में फ्रांस की ओपेली मेजीनो दूसरे और भारत की राव तीसरे स्थान पर रहीं। राजस्थान की रहने वाली 20 वर्षीय राव सीए की छात्रा हैं। उन्हें इस साल जून में मिस इंडिया वर्ल्ड 2019 चुना गया था। एक्सेल लंदन में शनिवार को आयोजित इस कार्यक्रम की मेजबानी ब्रितानी टेलीविजन हस्ती पियर्स मोर्गन ने की।

सिंह ने खिताब जीतने के बाद इंस्टाग्राम पर लिखा, ‘‘मेरे मन में प्रेम और आभार है। मुझ पर भरोसा करने के लिए शुक्रिया। आपने मुझे स्वयं पर भरोसा करना सिखाया। मैं 69वीं विश्व सुंदरी का खिताब जीतकर सम्मानित महसूस कर रही हूं और मैं आपकी आभारी हूं।’’

मैट्रिमोनियल साइट शुरू करने वाला पहला अर्द्धसैनिक बल बना आईटीबीपी

नयी दिल्ली :  भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) ने अपने अविवाहित, विधवा/विधुर और तलाकशुदा जवान और कर्मियों के लिए जीवनसाथी खोजने में मदद पहुंचाने के लिए एक मैट्रोमोनियल पोर्टल शुरू किया है। किसी भी अर्द्धसैनिक बल में पहली बार ऐसा कदम उठाया गया है। अधिकारियों ने बताया कि पहाड़ी इलाकों में लड़ाई के लिए प्रशिक्षित इस बल पर मुख्य रूप से चीन से लगती वास्तविक नियंत्रण रेखा की रक्षा करने की जिम्मेदारी है। एक अफसर ने बताया कि आईटीबीपी में विभिन्न रैंकों में करीब 25000 अविवाहित पुरुष और 1000 महिलाएं हैं। बहुत सारे कर्मी सुदूर क्षेत्रों में तैनात रहते हैं। ऐसे में उनके और उनके परिवार के लिए उपयुक्त जीवनसाथी खोजना बड़ा मुश्किल काम हो जाता है। हम बस मदद करना चाहते हैं।

महानिदेशक के आदेश पर बना पोर्टल
अधिकारी ने बताया, बहुत सारे कर्मी इस संगठन के अंदर ही जीवनसाथी चाहते हैं, क्योंकि सरकारी नियम उस दंपती को एक ही स्थान पर तैनाती की सुविधा प्रदान करते हैं। फिर अगर दोनों आईटीबीपी से होंगे तो वे एक दूसरे के काम और उनकी जरूरतों को अच्छे से समझ पाएंगे। महानिदेशक एसएस देसवाल ने हाल ही में बल के आईटी डिपार्टमेंट को मैट्रिमोनियल पोर्टल विकसित करने के लिए कहा।

अब तक 150 कर्मियों ने पंजीकरण कराया

आईटीबीपी प्रवक्ता विवेक कुमार पांडेय ने बताया कि पोर्टल पर अब तक 150 जवान और कर्मचारी पंजीकरण दर्ज करा चुके हैं। धीरे-धीरे यह इनकी तादाद बढ़ेगी। गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया, 24 अक्टूबर 1962 को बल की स्थापना हुई। आईटीबीपी पर मुख्य रूप से चीन से लगती वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) और इंडो-तिब्बत सीमा की रक्षा करने की जिम्मेदारी है। इसमें 56 बटालियन सेवारत हैं। 4 स्पेशल बटालियन हैं। इसके 17 प्रशिक्षण केंद्र और 7 लॉजिस्टिक इस्टैब्लिशमेंट हैं। एक आंकड़े के मुताबिक, आईटीबीपी में करीब 90 हजार कर्मी हैं। उधर, केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में सीआरपीएफ, बीएसएफ, एसएसबी, आईटीबीपी, सीआईएसएफ,और एनएसजी और एनडीआरएफ आते हैं, जिनमें करीब 10 लाख कर्मी हैं।

अभिनेत्री गीता सिद्धार्थ का निधन

मुम्बई : जानीमानी अभिनेत्री गीता सिद्धार्थ का निधन हो गया है। गीता सिद्धार्थ ने ‘गर्म हवा’, ‘परिचय’, ‘शोले’ और ‘त्रिशूल’ जैसी फिल्मों में काम किया था। अभिनेत्री गीता सिद्धार्थ के निधन की पुष्टि सिने ऐंड टीवी आर्टिस्ट्स एसोसिएशन (सीआईएनटीएए) ने ट्विटर पर की. शनिवार सुबह उनका निधन हुआ। उनका निधन किस वजह से हुआ, उस बारे में फिलहाल जानकारी नहीं मिल पाई है। गीता सिद्धार्थ ने 1973 में आयी एम एस सतायू की फिल्म ‘गर्म हवा’ में भी अभिनय किया था। इस फिल्म को राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था। उन्होंने फिल्म में सलीम (बलराज साहनी) की पुत्री अमीना का किरदार निभाया था। गीता सिद्धार्थ ने गुलजार की फिल्म ‘परिचय’ में भी अभिनय किया था जिसमें जितेंद्र, जया भादुरी, प्राण और संजीव कुमार भी थे। उन्होंने ‘शोले’, ‘त्रिशूल’, ‘नूरी’, ‘अर्थ’ और ‘मंडी’ जैसी फिल्मों में भी काम किया. गीता का विवाह वृत्तचित्र निर्माता, टेलीविजन कार्यक्रम निर्माता एवं प्रस्तोता सिद्धार्थ काक से हुआ था जिन्हें 1990 के दशक में आये उनके टेलीविजन कार्यक्रम ‘सुरभि’ के लिए जाना जाता है। उनकी एक पुत्री है जिसका नाम अंतरा है, जो फिल्म निर्देशक एवं निर्माता हैं।

8 साल तक मां नहीं बन सकीं गीतांजलि, अब हैं फर्टीलिटी दोस्त

अब तक की है 50 हजार जोड़ों की मदद 
नयी दिल्ली : ओवेरियन कैंसर, मिसकैरेज और आईवीएफ फेल होने से दिल्ली की गीतांजलि बनर्जी ने आठ साल तक इनफर्टीलिटी का दर्द झेला। डॉक्टरोें ने यहां तक कह दिया था कि वह मां नहीं बन सकती हैं। पर उन्होंने हार नहीं मानी। फिर से आईवीएफ की कोशिश की, जो सफल रही। इसके बाद तय किया कि इनफर्टीलिटी से परेशान जोड़ों के लिए कुछ करेंगी। इसमें उनके कर्नल पति और परिवार ने हिम्मत दी। गीतांजलि ने दो साल तक रिसर्च कर 2015 में फर्टीलिटी दोस्त साइट बनाकर काउंसिलिंग शुरू की। अब तक वह देशभर के करीब 50 हजार जोड़ाें की काउंसिलिंग कर चुकी हैं। गीतांजलि बताती हैं कि लखनऊ के एक जोड़े ने उन्हें इनफर्टीलिटी की समस्या बताई थी। हमने उन्हें आईवीएफ सेंटर जाने को कहा। इस पर जोड़े ने कहा कि अगर मोहल्ले का कोई व्यक्ति सेंटर के आसपास देख लेगा तो परेशानी हो जाएगी। गीतांजलि कहती हैं कि आज भी इनफर्टीलिटी सामाजिक वर्जना है। कहीं लोग इसे छिपाते हैं तो कहीं ताने मिलते हैं।

काउंसलिंग ऑनलाइन

वह साइट, फेसबुक, ब्लॉग, वाॅट्सएप से जोड़ों की काउंसिलिंग करती हैं। आज दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद, चेन्नई, बैंगलुरू समेत अन्य शहरों में काउंसिलिंग सेंटर चल रहे हैं। इनमें इनफर्टीलिटी सपोर्ट, हैपीनेस, एडॉप्शन और प्री आईवीएफ प्रोग्राम चलाए जा रहे हैं। वेबसाइट बनाने से पहले फेसबुक में सीक्रेट ग्रुप बनाया। जल्द ही इससे 250 महिलाएं जुड़ गईं। इस काम में क्लीनिक से सहयोग मिलता है। कंपनियों के सीएसआर फंड से भी मदद मिलती है।

देशभर में 3.3 करोड़ जोड़े इनफर्टीलिटी से परेशान
मौजूदा समय में देशभर में 3.3 करोड़ जोड़े इनफर्टीलिटी का दर्द झेल रहे हैं। हर चार में से एक को किसी न किसी वजह से यह समस्या है। इनमें से तमाम जोड़े इनफर्टीलिटी की समस्या बताने से भी डरते हैं। दुनिया में इसका 29 हजार करोड़ रुपए का बाजार है।

84 साल के धावक बने सबसे उम्रदराज अंटार्कटिक मैराथनर

 – 20 डिग्री सेल्सियस पर होती है यह मैराथन

एडमोंटन : कनाडा के अल्बर्टा प्रांत की राजधानी एडमोंटन के रहने वाले 84 साल रॉय स्वेनिंगसेन अंटार्कटिक आइस मैराथन में भाग लेने सबसे बुजुर्ग धावक बन गए हैं। शुक्रवार को रॉय ने मैराथन की फिनिश लाइन पार पर यह उपलब्धि हासिल की। उन्होंने दौड़ को 11 घंटे, 41 मिनट और 58 सेकंड में पूरा किया। अंटार्कटिक आइस मैराथन के निदेशक रिचर्ड डोनोवन ने रॉय की तारीफ करते हुए कहा, ‘यह बहुत शानदार है, आने वाले एथलीट्स को आप हमेशा प्रेरित करते रहेंगे।’ रॉय ने सबसे पहले 1964 में कैलगेरी मैराथन में भाग लिया था। तब से अब तक वह 5 महाद्वीपों की 50 से अधिक मैराथन में दौड़ चुके हैं। उनकी सबसे तेज मैराथन फिनलैंड की राजधानी हेलसिंकी की थी, जो उन्होंने 2 मिनट 38 सेकंड में पूरी की। इस साल की अंटार्कटिक आइस मैराथन में 15 महिलाएं और 41 पुरुष प्रतिभागी शामिल हुए। सभी प्रतिभागियों को निजी विमान की मदद से मैराथन साइट पर लाया गया था।

अंटार्कटिक मैराथन में बोस्टन के विलियम हैफर्टी ने पहला स्थान हासिल किया। उन्होंने दौड़ को 3 घंटे, 34 मिनट और 12 सेकंड में पूरा किया। दूसरे नंबर पर चेक रिपब्लिक के लेंका फ्राइकोवा रहे। इन्होंने 4 घंटे, 40 मिनट और 38 सेकंड में फिनिश लाइन पार की। वहीं, महिला वर्ग में पहला स्थान कैम्ब्रिज की सुसान रेगन ने हासिल किया। 69 साल की रेगन ने 7 घंटे, 38 मिनट और 32 सेकंड में दौड़ पूरी की। रेगन बोस्टन मैराथन को 20 बार दौड़ चुकी हैं, उनका सबसे बेहतर प्रदर्शन 2008 में 58 साल की उम्र में रहा। दुनिया में अंटार्कटिका आइस मैराथन दक्षिणायन क्षेत्र की सबसे प्रमुख दौड़ है। यह पृथ्वी के 80°अक्षांश पर – 20 डिग्री सेल्सियस तापमान में होती है। मैराथन अंटार्कटिका महाद्वीप की सबसे ऊंची पर्वतमाला की एल्स्वर्थ की पहाड़ियां पर आयोजित की जाती है, यहां से दक्षिणी ध्रुव की दूरी कुछ ही मील रह जाती है। यह मैराथन दुनिया की दो प्रमुख आधिकारिक मैराथन में से एक है, जो दक्षिण ध्रुव के भूभाग अंटार्कटिक सर्किल में होती है। इस क्षेत्र में दूसरा बड़ा आयोजन फरवरी में होने वाला अंटार्कटिक अंतरराष्ट्रीय मैराथन है।

ईरान में बना 4 साल में 100 भाषाएं बोलने वाला रोबोट

तेहरान : ईरान के तेहरान विश्वविद्यालय ने एक ऐसा रोबोट बनाया है, जो 100 भाषाओं को बोल सकता है। इतना ही भाषाओं को समझकर यह अनुवाद कर सकता है। यह चेहरों को पहचान सकता है और फुटबॉल को किक लगा सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, विश्वविद्यालय के फैकल्टी ऑफ इंजीनियरिंग ने चार साल में इस रोबोट को तैयार किया है।
इसका नाम ‘सुरेना’ रखा गया है। यह चीजों को उठा सकता है। 100 अलग-अलग वस्तुओं को पहचान सकता है। इसे चेहरों को पहचाने में भी ‘महारत’ हासिल है। यह हाथ मिलाकर लोगों का अभिवादन भी कर सकता है।
सेल्फ बैलेंस्ड है
रोबोट सुरेना 170 सेंटीमीटर लंबा और 70 किलोग्राम वजनी है। एक घंटे में 700 मीटर चलने में सक्षम है। उबड़-खाबड़ जमीन पर यह आगे-पीछे और दाएं-बाएं मुड़कर संतुलन बनाए रख सकता है। इसके अलावा भी इसमें मनुष्यों के समान कई गुण हैं।