Saturday, April 25, 2026
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चीन के वैज्ञानिक अमेरिका छोड़कर लौटने लगे, ताकि देश को विज्ञान का पॉवरहाउस बना सकें

न्यूयॉर्क : चीन के वैज्ञानिक और अनुसंधानकर्ता देश को विज्ञान का पॉवरहाउस बनाने के लिए अमेरिका और दुनिया के अन्य देशों से लौटने लगे हैं। अमेरिका की ओहियो यूनिवर्सिटी के अध्ययनकर्ताओं के मुताबिक, 16,000 से ज्यादा प्रशिक्षित चीनी वैज्ञानिक देश लौट चुके हैं। 2017 में यह संख्या 4500 थी, जो 2010 की तुलना में दोगुनी रही। ऐसा इसलिए संभव हुआ है, क्योंकि चीन ने अपने वैज्ञानिकों के लिए अंतरराष्ट्रीय सहभागिता के लिए दरवाजे खोल दिए हैं। साथ ही भरोसा दिलाया है कि उन्हें सारी मूलभूत सुविधाएं दी जाएंगी, जो विदेशों में मिलती हैं। एशिया से अमेरिका जाने वाले वैज्ञानिकों और इंजीनियरों में सबसे बड़ी संख्या भारतीयों की है। अमेरिका के 29.60 लाख एशियाई वैज्ञानिकों-इंजीनियरों में 9.50 लाख भारतीय हैं।
‘चीन की प्रतिभाओं का लगातार इस तरह जाना चिंताजनक है’
ओहियो यूनिवर्सिटी के जॉन ग्लेन कॉलेज ऑफ पब्लिक अफेयर्स की एसोसिएट प्रोफेसर कैरोलिन वैगनर के मुताबिक, चीन की प्रतिभाओं का लगातार इस तरह जाना चिंताजनक है। हमें पलायन रोकने की हरसंभव कोशिश करनी होगी। अगर हम यह आकर्षण भी खो देते हैं, तो यह अमेरिकी वैज्ञानिक प्रणाली पर गंभीर असर डालेगी। चीन ने विज्ञान के कई क्षेत्रों में महारत हासिल कर ली है। खासकर आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और मैटेरियल साइंस में दुनियाभर में उसका कोई सानी नहीं है।’ ज्यादातर चीनी वैज्ञानिक यूरोप से लौटना चाहते हैं न कि अमेरिका से। चीन ने अपने वैज्ञानिकों को वापस बुलाने के लिए जो प्रोग्राम तैयार किया है, उसका अमेरिका में उच्च स्तर पर काम करने वाले वैज्ञानिकों पर ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ा है। अमेरिकी नेशनल साइंस फाउंडेशन के मुताबिक, 2016 में सबसे ज्यादा साइंस जरनल चीन के वैज्ञानिकों के प्रकाशित हुए।
चीन ने रिसर्च पर 10 गुना बजट बढ़ाया, फिर भी अमेरिका से कम
जानकारों का मानना है कि चीनी वैज्ञानिकों के लौटने के पीछे बजट बड़ा कारण हैं। चीन सरकार ने रिसर्च पर 10 गुना बजट बढ़ा दिया है। चीन ने रिसर्च पर 2019 में 3,75,000 करोड़ रुपए खर्च किए। हालांकि, अमेरिका की तुलना में यह रकम बहुत कम है।

खुदाई के दौरान मिली  सोने से भरी 1200 साल पुरानी गुल्लक 

येरूशलम : इजरायल के पुरातत्वविदों को खुदाई के दौरान 1200 साल पुरानी गुल्लक मिली है। इसमें सोने के साथ सिक्के मिले हैं। इजरायल एंटीक्विटीज अथॉरिटी (आईएए) ने बताया कि सिक्के प्रारंभिक इस्लामिक काल के हैं। ये यवन शहर में मिले हैं। इन्हें एक टूटी मिट्टी की जाली में जमा कर रखा गया था, जिसे उस जमाने का गुल्लक या पिगी बैंक मान सकते हैं। उत्खनन से एक विस्तृत औद्योगिक क्षेत्र का पता चला जो सदियों से सक्रिय था। पुरातत्वविदों का सुझाव है कि खजाना एक कुम्हार की निजी गुल्लक हो सकती है।

पहले जिस टीम ने बाहर निकाला, अब आईपीएल में उसी के खिलाड़ियों को गेंदबाजी सिखाएंगे सोढ़ी

मुम्बई : आईपीएल फ्रैंचाइजी राजस्थान रॉयल्स ने गुरुवार को न्यूजीलैंड के स्पिनर ईश सोढ़ी को 2020 सत्र के लिए अपना स्पिन सलाहकार नियुक्त किया। दिसंबर में हुई आईपीएल नीलामी से पहले ही फ्रैंचाइजी ने उन्हें रिलीज किया था। फ्रैंचाइजी के साथ इस नई भूमिका में 27 साल के सोढ़ी गेंदबाजी कोच साईराज बहुतुले और मुख्य परिचालन अधिकारी जेक लुश मैक्रम के साथ काम करेंगे। सोढ़ी ने आठ आईपीएल मैचों में राजस्थान रॉयल्स का प्रतिनिधित्व किया है और 6.69 के इकॉनामी रेट से 9 विकेट चटकाए हैं। उन्होंने बयान में कहा कि रॉयल्स के लिए दो सत्र खेलने के बाद फ्रेंचाइजी से जुड़े सभी लोगों के साथ मेरा तालमेल बढ़ गया है जो मेरे लिए काफी मददगार रहे हैं। इसलिए रॉयल्स प्रबंधन द्वारा इस मौके की पेशकश किए जाने के बाद मैंने दोबारा नहीं सोचा। सोढी ने न्यूजीलैंड के लिए 40 टी-20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में 47 विकेट चटकाए हैं। उन्होंने 17 टेस्ट और 31 वन-डे भी खेला हैं।

सभी अभिनेताओं को पीछे छोड़ अक्षय बने 2019 में बॉक्स ऑफिस के बादशाह

मुम्बई : अभिनेता अक्षय कुमार अपनी चार फिल्मों के साथ एक बार फिर बॉक्स ऑफिस के बादशाह बनकर उभरे हैं। अक्षय की फिल्मों ने साल 2019 में बॉक्स ऑफिस पर कुल 665.89 करोड़ रुपये की कमाई की है। पिछले साल अभिनेता की केसरी, मिशन मंगल, हाउसफुल 4 और गुड न्यूज जैसी फिल्मों से देश में कमाई के मामले में बाकी बॉलिवुड अभिनेताओं से काफी आगे निकल गए। अक्षय की फिल्मों ने इस साल बॉक्स ऑफिस पर कुल 665.89 करोड़ रुपये का कारोबार किया है।

अक्षय ने 2019 की शुरुआत धमाकेदार अंदाज में की थी। मार्च में रिलीज हुई उनकी फिल्म ‘केसरी’ ने लगभग 151.87 करोड़ की कमाई की थी। केसरी ’की सफलता के बाद अक्षय ने विद्या बालन और अन्य लोगों के साथ मिलकर दर्शकों के लिए एक स्पेस ड्रामा ‘मिशन मंगल’ लेकर। 100 करोड़ क्लब में मिशन मंगल ने भी आसानी से एंट्री मार ली थी और फिल्म ने कुल 192.66 करोड़ की कमाई की थी।

नया साल, नयी उमंग और नये जोश के साथ एक पहल आपके नाम

नया साल और एक नयी सुबह लेकर फिर आ गया है। गुजरा साल उथल -पुथल का रहा। इस समय भी हालात कुछ ऐसे हैं और खबरों के नाम पर भ्रम और हिंसा परोसी जा रही है, ऐसी स्थिति में सृजनात्मकता और रचनात्मकता की जरूरत बढ़ जाती है। हमारा मानना है कि समाज को अगर बदलना है तो हमें साहित्य की सहायता लेनी होगी। साहित्य को कला और संस्कृति के साथ आम जीवन से जोड़ते हुए ही समाज को नयी दिशा दी जा सकती है और यह भविष्य से जुड़े, इसके लिए युवाओं को साथ लाना होगा।
यही कारण है कि युवाओं की प्रतिभा और क्षमता को साथ लाने के लिए और उनकी उर्जा को एक सकारात्मक दिशा देने के उद्देश्य से शुभ सृजन नेटवर्क प्रस्तुत करता है शुभजिता युवा प्रतिभा सम्मान। यह प्रतियोगिता नहीं बल्कि एक अभियान है जमीनी स्तर पर शिक्षण संस्थानों और विद्यार्थियों की समस्या को समझने और उसके अनुरूप समाधानों की कोशिश का। यह एक वास्तविकता है कि संरचनागत व शैक्षणिक स्तर पर शिक्षण संस्थानों में एक बुनियादी अन्तर है। इस आधार पर शुभजिता युवा प्रतिभा सम्मान मूलतः दो वर्गों में विभाजित किया गया है – निजी तथा सरकारी शिक्षण संस्थान।
सरकारी शिक्षण संस्थानों में प्रविष्टि के तहत प्रतिभागी को अपने शिक्षण संस्थान के प्रकार की जानकारी देने होगी, अर्थात, निगम, केन्द्रीय, सरकारी व सरकारी अनुदान प्राप्त, ट्रस्ट संचालित शिक्षण संस्थान होने की स्थिति में उसका उल्लेख करना होगा। हम विद्यार्थियों के लिए सम्मान उनकी आवश्यकता के अनुसार ही तय करेंगे इसलिए यह जानकारी हमें विद्यार्थियों तथा शिक्षण संस्थानों की आवश्यकता को समझने में सहायता करेगी। कारण यह है कि निजी शिक्षण संस्थानों और सरकारी शिक्षण संस्थानों की आवश्यकताएँ एक जैसी नहीं हैं।
इसके लिए प्रतिभागी को अपनी सुविधा के अनुसार शुभजिता में अपनी प्रविष्टि विभिन्न प्रतियोगिताओं में भेजनी होगी। हर सप्ताह एक विजेता चुना जायेगा और । किसी एक विजेता की प्रविष्टि शुभजिता में प्रकाशित होगी या यू ट्यूब पर डाली जायेगी। रचना का मौलिक होना अनिवार्य है..ऐसा न होने पर आप प्रतियोगिता से बाहर हो सकते हैं।
वर्ष भर के सभी विजेताओं के बीच एक प्रतियोगिता होगी।
प्रतियोगिता जिन श्रेणियों में होगी – शिशु वर्ग, किशोर वर्ग, (माध्यमिक व उच्च माध्यमिक) तथा युवा वर्ग (कॉलेज तथा विश्वविद्यालय)
शिशु वर्ग – आवृत्ति, चित्रांकन, नृत्य,
किशोर वर्ग – आवृत्ति, चित्रांकन, नृत्य, साहित्य (कविता, कहानी), संगीत,अभिनय, पत्र या रिपोतार्ज लेखन
उच्च शिक्षा स्तर – साहित्य (कविता, कहानी, पुस्तक समीक्षा,आलेख), संगीत, चित्रांकन, नृत्य, अभिनय । शोध पत्र (साहित्येतर विषय….विज्ञान, इतिहास, कला, संगीत या कोई भी विषय)
अभिनय, नृत्य, संगीत, आवृत्ति का वीडियो भेजना होगा।

भोजन की बरबादी रोकने के लिए बनायी विशेष थालियां

सऊदी के लोग नयी थाली का इस्तेमाल कर साल भर में तीन हजार टन चावल बचा चुके हैं
रियाद : सऊदी अरब में बचा खाना फेंकने की आदत के विरोध के लिए लोग एकजुट हो रहे हैं। लोग ऐसी थाली और तरीका अपना रहे हैं, जिससे परोसा हुआ खाना ज्यादा दिखाई दे। दरअसल, सऊदी में ज्यादा खाना परोसना अच्छी मेहमान नवाजी और संस्कृति का हिस्सा माना जाता है। इसके लिए थाली में अधिक चावल रखा जाता है। लोग थाली के दोनों ओर से चावल खा लेते हैं, पर पूरा नहीं खा पाते, जो बाद में कूड़े में फेंक दिया जाता है। इसके विरोध में उद्यमी मशाल अल्काहरशी ने एक थाली बनाई। थाली में गोलाकार टीला जैसा है। इसमें चावल का टीला जैसा आकार नहीं बन पाता है। इससे पहले जो खाना बर्बाद हो रहा था, उसके लिए अब थाली में जगह ही नहीं है।
थाली से 30% खाने की बर्बादी कम हो रही
अल्काहरशी के मुताबिक, इस थाली से 30% खाने की बर्बादी कम हो रही है। सऊदी के कई रेस्तरां में ऐसी थाली का इस्तेमाल कर साल भर में सिर्फ तीन हजार टन चावल बचा चुके हैं। सऊदी में खाने की बर्बादी की दर विश्व में सबसे ज्यादा है। सरकार का अनुमान है, सऊदी अरब में प्रत्येक घर सालाना 260 किलो खाना बर्बाद करता हैं। जबकि इसकी तुलना में वैश्विक औसत 115 किलो का है।

हर साल प्लास्टिक की 120 करोड़ बोतलें रिसाइकिल कर मोटर पार्ट्स बना रही है फोर्ड

मिशीगन : विश्व की जानी-मानी मोटर कंपनी ‘फोर्ड’ अन्य तरह का प्लास्टिक इस्तेमाल करने के बजाय हर साल प्लास्टिक की फेंकी गई 120 करोड़ बोतलों को रिसाइकिल कर उसका प्लास्टिक अपने वाहनों में उपयोग कर रही है। कंपनी का कहना है कि कुछ हद तक ही सही, पर्यावरण को स्वच्छ करने का यह हमारा छोटा सा प्रयास है। फोर्ड मोटर कंपनी के डिजाइन इंजीनियर थॉमस स्वेडर का कहना है कि उनके सभी प्रकार के वाहनों में एक बड़ा भाग ‘अंडरबॉडी शील्ड’ का होता है। इसमें बहुत सारे प्लास्टिक की जरूरत होती है। यदि हम ठोस प्लास्टिक का इस्तेमाल करते हैं, तो वाहन का वजन बढ़ जाएगा। उन्होंने बताया कि उनकी कंपनी प्रति वर्ष लगभग 120 करोड़ बोतलें रिसाइकिल कर, ठोस प्लास्टिक की जगह इस्तेमाल करती है। वैसे, बोतलों वाला प्लास्टिक, ठोस प्लास्टिक से तीन गुना ज्यादा हल्का होता है और लंबे समय तक टिकाऊ भी।

पर्यावरण की सुरक्षा में अहम भूमिका
फोर्ड की सभी कारों, एसयूवी, एफ-सीरीज ट्रकों आदि में इस्तेमाल प्लास्टिक हम बोतलों से प्राप्त करते हैं। इस तरह प्लास्टिक की बोतलें खत्म कर हम पर्यावरण की सुरक्षा में भी अहम भूमिका निभा रहे हैं। यह प्लास्टिक इंजन अंडर शील्ड्स, फ्रंट और रियर व्हील आर्च लाइनर्स के निर्माण के लिए आदर्श है।

बोलतें प्रोसेस होकर शीट में बदलती हैं
कम्पनी के 2020 में आने वाले कुछ वाहनों में इस प्लास्टिक का उपयोग इस तरह किया जा रहा है, जिससे अंदर का वातावरण ठंडा, शांत बना रहे। वाहन की गति तेज हवा में प्रभावित न होने पाए, इसके लिए व्हील लाइनर्स पर भी काम कर रहे हैं। वैसे, पिछले एक दशक में दुनियाभर के मोटर वाहनों के अंदरूनी भागों में प्लास्टिक का उपयोग बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि प्लास्टिक की बोतलों को एक बड़े से रिसाइकलिंग पात्र में डालकर छोटे-छोटे टुकड़े कर दिए जाते हैं। फिर इन्हें पिघलाकर फाइबर में बदलते हैं। बोतल से प्राप्त फाइबर के तंतुओं को कुछ और प्रकार के फाइबर के साथ प्रोसेस कर कपड़े जैसा आकार दिया जाता है। इसके बाद एक शीट बनाई जाती है जो वाहनों के अलग-अलग भाग में इस्तेमाल की जाती है।

महाराष्ट्र- उत्तर प्रदेश में श्रीकृष्ण के साथ होती है रुक्मिणी की पूजा, द्वारिका में है अलग मंदिर

दुनियाभर में भगवान कृष्ण के कई मंदिर हैं। जहां उनकी पूजा देवी राधा या बड़े भाई बलराम के साथ होती हैं, लेकिन पत्नी के साथ भगवान श्रीकृष्ण के बहुत ही कम मंदिर हैं। इनमें देश के 2 ऐसे मंदिर हैं जहां भगवान श्रीकृष्ण की पूजा देवी रुक्मिणी के साथ की जाती है, वहीं गुजरात का एक ऐसा मंदिर है जहाँ देवी रुक्मिणी का अलग मंदिर है और उनकी पूजा भगवान श्रीकृष्ण के साथ नहीं की जाती है। पौष माह के कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि को रुक्मिणी अष्टमी के रूप में मनाया जाता है –

पंढरपुर
महाराष्ट्र में पुणे से लगभग 200 कि.मी की दूरी पर एक गाँव है, जहां श्रीकृष्ण को उनकी पत्नी रुक्मिणी के साथ पूजा जाता है। महाराष्ट्र के इस पंढरपुर नाम के गांव में विट्ठल रुक्मिणी मंदिर नाम का एक मंदिर है। जहां भगवान श्रीकृष्ण को पत्नी रुक्मिणी के साथ पूजा जाता है। इस मंदिर में काले रंग की सुंदर मूर्तियां हैं। विट्ठल रुक्मिणी मंदिर पूर्व दिशा में भीमा नदी के तट पर है। भीमा नदी को यहां पर चंद्रभागा के नाम से जाना जाता है। आषाढ़, कार्तिक, चैत्र और माघ महीनों के दौरान नदी के किनारे मेला लगता है। जिसमें भजन-कीर्तन करके भगवान विट्ठल को प्रसन्न किया जाता है। कई भक्त अपने घरों से मंदिर तक पैदल यात्रा भी करते हैं। जिसे दिंडी यात्रा कहा जाता है। मान्यता है कि इस यात्रा को आषाढ़ मास की एकादशी या कार्तिक माह की एकादशी को मंदिर में खत्म करने का महत्व है।

द्वारिका पुरी
द्वारिका पुरी में द्वारकाधीश मंदिर से 2 किलोमीटर दूर रुक्मिणी के मंदिर के रूप में मौजूद है। ये मंदिर एक अलग हिस्से में बना हुआ है। ये मंदिर 12 वीं सदी में बना है। यहां भगवान श्रीकृष्ण के साथ माता रुक्मिणी की पूजा नहीं की जाती है। इसके पीछे दुर्वासा ऋषि के शाप की कथा है। जिस वजह से श्रीकृष्ण और देवी रुक्मणी को 12 साल तक एक-दूसरे से अलग रहन पड़ा था। इतना ही नहीं इस वजह से द्वारकाधीश के मंदिर में भी रुक्मणी माता को स्थान नहीं मिला।

मथुरा
मथुरा के द्वारकाधीश मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण की पूजा पत्नी रुक्मिणी साथ की जाती है। माना जाता है इस मंदिर में मौजूद भगवान कृष्ण की मूर्ति लगभग 250 साल पहले ग्वालियर में खुदाई के दौरान सिंधिया शासन काल के कोषाध्यक्ष को मिली थी। माना जाता है भगवान कृष्ण ने कोषाध्यक्ष गोकुल दास जी के सपने में आकर आदेश दिया कि ब्रज भूमि में मेरी मूर्ति स्थापित कर मंदिर बनवाओ। इस मंदिर में मौजूद द्वारकाधीश मंदिर में कृष्ण के 8 स्वरूप की पूजा होती है। इसमें हर बार द्वारकाधीश जी के वस्त्र से लेकर पूजा पाठ और भोग सब कुछ अलग-अलग होता है। इस मंदिर में श्रीकृष्ण और रुक्मिणी जी की हर दिन 8 अलग-अलग झांकियां सजती हैं। इन झांकियों के 8 भाव होते हैं और 8 बार ही दर्शन के लिए मंदिर के पट खुलते हैं।

कोहरे में बीप देकर सावधान करेगा स्मार्ट हेलमेट

नशा किया तो बाइक का इंजन बंद कर देगा
ग्वालियर : अब घने कोहरे में दृश्यता कम होने पर दोपहिया वाहन चालकों को स्मार्ट हेलमेट अलर्ट रखेगा। हेलमेट के आगे लगे अल्ट्रा सॉनिक सेंसर 14 मीटर दूरी से ही बीप बजाकर वाहन चालक को अलर्ट कर देंगे कि सामने कोई वाहन है या कोई चीज आने वाली है। साथ ही हेलमेट के कांच पर लगी एलसीडी पर इसकी दूरी भी दिखाई देगी। महज एक हजार रुपए कीमत में यह हेलमेट आर्मी पब्लिक स्कूल के संकल्प सिंह भदौरिया ने बनाया है। यह मॉडल एमिटी यूनिवर्सिटी में शुरू हुई स्काई आर्ट में प्रदर्शित किया गया। इस आर्ट प्रदर्शनी में मैनपुरी से आए सुधीति ग्लोबल अकेडमी स्कूल के छात्र शाहबर अनवर और आर्यन ने स्मार्ट हेलमेट में पेश किया। इस हेलमेट को ब्रीथ एनालाइजर सिस्टम भी जोड़ा गया है। यह सिस्टम ड्रिंक करने वालों की सांसों से ही अल्कोहल को डिटेक्ट करेगा। तय मात्रा से अधिक शराब का सेवन कर गाड़ी चलाने पर हेलमेट बाइक का इंजन बंद कर देगा।

डोर-स्टेप सर्विस सहित वरिष्ठ नागरिकों को मिलती है कई सुविधाएं

वरिष्ठ नागरिकों को भी बैंकिंग सुविधाओं का पूरा लाभ मिल सके इसके लिए सीनियर सिटीजन को डोर-स्टेप सर्विस जैसी कई विशेष सुविधाएं दी जाती है हालांकि कई बार जानकारी की कमी के चलते वरिष्ठ नागरिक इस सुविधाओं का लाभ नहीं ले पाते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने वरिष्ठ नगारिकों और दिव्यांग जनों को कई अधिकार दिए गए हैं। आज हम आपको इन सेवाओं के बारे में बता रहे हैं।
ये हैं वे सुविधाएं
अलग से काउंटर
हर बैंक में वरिष्ठ नागरिकोंऔर दिव्यांग जनों के लिए अलग से विशेष काउंटर होने चाहिए। यदि किसी ब्रांच में ऐसा नहीं है तो वरिष्ठ नागरिक सीधे ब्रांच मैनेजर से मिलकर अपने लिए विशेष सुविधाओं की मांग कर सकते हैं। ये उनका हक है।

सीनियर सिटिजन एकाउंट
केवाईसी प्रावधानों को पूरा करने के साथ ही जन्मतिथि के आधार पर बैंक खाता अपने आप ‘सीनियर सिटिजन एकाउंट’ में बदल जाता है। इसके लिए अलग से कुछ करने की जरूरत नहीं। इस खाते पर वरिष्ठ नागरिकों को मिलने वाली सभी सुविधाएं मिलेंगी।

डोर स्टेप बैंकिग
70 साल से अधिक उम्र के नागरिकों के साथ ही गंभीर रूप से बीमार बैंक ग्राहकों को उनके घर तक ही बेसिक बैंकिंग सुविधाएं मुहैया कराएं। इस सुविधाओं में कैश का लेनदेन, डिमांड ड्राफ्ट, केवाईसी डॉक्युमेंट और लाइफ सर्टिफिकेट लेने जैसी कई सेवाएं शामिल हैं।
इसके अलावा वरिष्ठ नागरिकों को चेक बुक लेने के लिए ब्रांच आने की जरूरत नहीं है। अगर वो चाहे तो बैंक द्वारा चेक बुक घर ही पहुंचा जाएगी।