Saturday, April 25, 2026
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दुनिया की सबसे युवा प्रधानमंत्री बनीं फिनलैंड की सना मारिन

एक समय मोबाइल बनाने वाली कंपनी नोकिया के कारण पूरे विश्व में अलग पहचाने जाने वाला फिनलैंड इन दिनों सुर्खियों में है। इस बार वजह यहां की प्रधानमंत्री सना मारिन हैं। 34 साल की सना मारिन फिनलैंड की ही नहीं पूरी दुनिया की सबसे युवा प्रधानमंत्री बन गई हैं। उन्होंने  गत 10 दिसंबर को पीएम पद की शपथ ली। फिनलैंड में गठबंधन की नई सरकार बनी है। इसमें 5 दल शामिल हैं। कमाल की बात है कि सभी दलों का नेतृत्व महिलाएं कर रही हैं। सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी (एसडीपी) की सना मारिन को गठबन्धन का नेता चुनकर देश के पीएम पद के लिए उन्हें चुना गया। इससे पहले वह देश की परिवहन मंत्री भी रह चुकी हैं। मारिन का जन्म साल 1985 में फिनलैंड के हेल्सिन्की शहर में हुआ। साल 2015 में वह पहली बार संसद में चुनकर आईं और फिर मई 2019 में वह फिर से संसद में दोबारा आईं जहां उन्हें परिवहन और प्रसारण मंत्रालय दिया गया। सना से पहले देश की कमान निवर्तमान पीएम एंटी रिन्ने के हाथ में थी। पूर्व प्रधानमंत्री एंटी रिन्ने के इस्तीफे के बाद अब सना मारिन को देश का नेतृत्व के लिए चुना गया है। बीबीसी में छपी एक खबर के मुताबिक, सना मारिन एक रैनबो फैमिली (हिप्पी समूह का एक प्रकार) में पली-बढ़ीं। सना अपनी मां और अपने पार्टनर के साथ किराए के एक मकान रहती थीं। सना देश की तीसरी महिला प्रधानमंत्री बनेंगी। दुनिया की सबसे युवा पीएम बनने के लिए उन्होंने यूक्रेन के पीएम ओलेक्सी होंचेरूक (35 साल में पीएम) और न्यूजीलैंड की जेसिंडा अर्डर्न (39 साल की उम्र में पीएम) को पीछे छोड़ा। अपनी जीत के लिए उन्हें विश्व के नामी नेताओं ने बधाई दी है। हिलेरी का ट्वीट, शपथ लेने के बाद सना ने अपने पहले ट्वीट में लिखा, ‘अगले 4 सालों में फिनलैंड खत्म नहीं होगा बल्कि यह और अधिक समृद्ध बन सकता है। इसी के लिए हम काम कर रहे हैं। मैं एक ऐसे समाज का निर्माण करना चाहती हूं जहां हर बच्चा कुछ भी कर सकता है और हर शख्स अपने जीवन को आत्मसम्मान के साथ जी सकता है।’ देश की नई सरकार में 5 महिलाएं प्रमुख भूमिकाओं में नजर आएंगी। इनमें से 4 की उम्र 35 साल से कम है। इनमें सना मारिन (34) प्रधानमंत्री, ली एंडरसन (32) शिक्षा मंत्री, कात्रि कलमुनी (32) वित्त और आर्थिक मंत्री, एना हेनरिक्सन (55) जस्टिस मिनिस्टर और मारिया ओहिसालो (34) इंटिरियर मिनिस्टर का कार्यभार संभालेंगी। सभी महिलाएं अपने-अपने दलों का नेतृत्व करती हैं और सबने मिलकर देश में गठबंधन वाली नई सरकार का गठन किया है।

अपनी समस्याओं को लेकर पहली बार सामने आए केवी के शिक्षक

कोलकाता : आमतौर पर केन्द्रीय विद्यालयों के शिक्षक अपनी समस्याओं को लेकर मुखर नहीं होते मगर सम्भवतः इतिहास में पहली बार ये शिक्षक अपनी समस्याओं को लेकर सामने आये। काला बैज लगाकर विरोध जताया और अपनी माँगें रखीं। शिक्षक मॉडिफाइड एश्योर्ड कॅरियर प्रोग्रेसन स्कीम (एमएसीपीएस), केन्द्रीय कर्मचारी स्वास्थ्य योजना का लाभ देने, राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त विजेताओं का सेवा विस्तार करने के अतिरिक्त नयी पेंशन नीति -2004 को वापस लेने की भी माँग कर रहे हैं। एआईकेवीटीए के सचिव द्वारिका प्रसाद ने इन शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों से होने वाले गलत व्यवहार तथा केन्द्रीय सरकार के रवैये पर असन्तोष जताया। उन्होंने कहा कि शिक्षक -छात्र का अनुपात शिक्षा के अधिनियम के अनुसार ही होना चाहिए। एआईकेवीटीए (मुख्यालय) के संयोजक सचिव रविकान्त भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

कलम की अनकही कहानी” अनसंग हीरो ऑफ फाउन्टेन पेन” का लोकार्पण

कोलकाता : भवानीपुर एडुकेशन सोसायटी कॉलेज के सोसायटी हॉल में फाउन्टेन कलम के इतिहास पर शोध पुस्तक “राधिका नाथ साहा आनसंग हीरो ऑफ इंडियन पेन” के लेखक डॉ शोभन राय ने इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ा है । प्रो. दिलीप शाह ने पुस्तक का लोकार्पण करते हुए कहा कि कलम से हमारी और दुनिया की विभिन्न भावनाएँ और विचार जुड़े हैं। हमारे पूर्वजों की लेखनी मोर पंख, बांस की पतली टहनी आदि से बनाई गई लेकिन समय के साथ आज कलम यूज एंड थ्रो तक आकर सहज हो गया है। तकनीकी विकास के साथ ही विभिन्न आविष्कार हुए। इस अनकही और अनजानी कहानी को विद्यार्थियों को जानना चाहिए। इस अवसर पर पश्चिम बंगाल के पूर्व गृह सचिव आईएएस अधिकारी प्रसाद रंजन राय ने कहा कि उनके समय फाउन्टेन कलम से ही लिखा जाता था लेकिन अब कभी कभी विशेष रूप से कुछ लिखने का कार्य होता है तो लिखता हूँ। प्रचलन में नहीं होने के कारण फाउन्टेन कलम इतिहास का विषय हो गया है, डॉ शोभन राय बधाई के पात्र हैं।
भारतीय इतिहास के भुला दिये गये नायकों शुमार फाउन्टेन कलम की पहली इंडस्ट्रीज की स्थापना करने में राधिका नाथ साहा (1870-1933) का महत्वपूर्ण योगदान रहा यह बात डॉ शोभन राय ने अपने वक्तव्य में लोकार्पण के पश्चात कही। अपने शोध कार्य के दौरान किस प्रकार बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में वैज्ञानिक डॉ. राय को फाउन्टेन कलम के इतिहास पर अचानक पुस्तक और राधिका नाथ साहा के पौत्र से मिलने का संजोग हुआ और वहीं से प्रेरित होकर उन्होंने इस शोधकार्य को करने का निश्चय किया। राधिका नाथ साहा की पुस्तक “रोमांस ऑफ पेन” में उनके द्वारा किए गए अमेरिकन, जर्मनी आदि देशों से पेटेंट का सच भी सामने आया। 1910 में फाउन्टेन कलम की अनकही कहानी सामने आई जिसका श्रेय राधिका नाथ साहा को जाता है, जिसके प्रमाणपत्र हैं। कलम पर आर. एन. साहा अंकित एक कलम उन्होंने महात्मा गांधी और उनके सचिव महादेव जी को भी दिए थे आदि बातों का खुलासा पुस्तक में दिया गया है। पेन की निब में भी समय-समय पर परिवर्तन होता गया, कभी स्टाइलों और पारंपरिक नीब में भी बदलाव आ गया। पहले के लक्खी पेन और विभिन्न पारंपरिक पेन के विषय में डॉ शोभन राय ने अपने स्लाइड और चित्रों के जरिए पावर प्रेजेन्टेशन दिया। दर्शना, मारिया खान, रिद्धि सराफ ( श्री शिक्षायतन कॉलेज) आदि छात्राओं ने इस कार्यक्रम में सक्रिय रूप से हिस्सा लिया। वरिष्ठ पत्रकार श्री सुब्रत गांगुली ने कहा कि उनके पास सात हजार फाउन्टेन पेन एकत्रित किए हैं जिनकी प्रदर्शनी एक कार्यक्रम में की गई थी। लोकार्पण के इस अवसर पर डॉ. वसुंधरा मिश्र ने “कलम तुम विवेक और ज्ञान की मशाल हो” कविता पाठ किया। प्रो. मीनाक्षी चतुर्वेदी, डॉ वसुंधरा मिश्र, आईएएस अधिकारी प्रसाद रंजन राय, सुब्रत गांगुली, देवष्मिता चटर्जी और बीए बीकॉम के विद्यार्थियों की उपस्थिति रही ।

हिन्दी मेला के पहले दौर का उद्धाटन सम्पन्न

कोलकाता : सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन द्वारा आयोजित होने वाले हिंदी मेला का यह रजत जयंती वर्ष है। आज 25वें हिन्दी मेले के पहले दौर का उद्धाटन भारतीय भाषा परिषद में विभिन्न शिक्षण संस्थानों से आये विद्यार्थियों के बीच काव्य नृत्य के प्रदर्शनों से हुआ। इस अवसर पर हिन्दी मेला के संयुक्त महासचिव प्रो. संजय जायसवाल ने कहा कि हिन्दी मेला ने कोलकाता में नई पीढ़ी के बीच साहित्य के लोकप्रियकरण का एक अभियान शुरू किया था। इसके 25 साल के सफर में बांग्ला के साहित्यकार सुभाष मुखोपाध्याय, महाश्वेता देवी और तसलीमा नसरीन से लेकर हिन्दी के साहित्यकार नामवर सिंह, केदारनाथ सिंह आदि कई महत्वपूर्ण साहित्यकार भाग ले चुके हैं। इस बार मेले में कोलकाता एवं नजदीक के जिलों के 80 से अधिक शिक्षण संस्थान भाग ले रहे हैं। यूको बैंक के वरिष्ठ हिंदी अधिकारी अमल दास ने सहयोग का हाथ बढ़ाते हुए कहा कि हिंदी मेला कोलकाता की एक विशिष्ट पहचान है जिसमें सैकड़ों विद्यार्थी और युवा भाग लेते हैं। सौ से अधिक विद्यार्थियों ने कवियों की कविताओं की आवृत्ति की तथा राजस्थानी, मैथिली, भोजपुरी आदि लोकगीतों पर अपनी प्रस्तुति दी। निर्णायक मंडली में चंद्रिमा मंडल, पापिया पांडेय, सुषमा त्रिपाठी, इतु सिंह, देवजानी, राजेश मिश्र, उत्तम ठाकुर, मधु सिंह शामिल थीं। आज के कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रो. शंभुनाथ कहा कि हिंदी मेला कला और साहित्य को जोड़ने का अभियान है। इस बार हिन्दी मेला मानवता के सामने उपस्थित अभूतपूर्व संकट के दौर में विध्वंस की जगह राष्ट्रीय पुनर्निर्माण का संकेत बनकर आयोजित हो रहा है। कार्यक्रम का सफल संचालन पंकज सिंह ने किया। अंत में रामनिवास द्विवेदी ने धन्यवाद देते हुए कहा कि 26 दिसंबर से शुरू होने वाला दूसरे दौर का हिन्दी मेला इस बार कई अनोखे कार्यक्रम के साथ शुरू होने जा रहा है

लिटरेरिया में सम्मानित हुए वरिष्ठ रंगकर्मी उषा गांगुली और डॉ. स्कन्द शुक्ला

संवाद एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ लिटरेरिया 2019 संपन्न

कोलकाता : नीलांबर संस्था के वार्षिकोत्सव लिटरेरिया 2019 का पहला दिन आज सफलतापूर्वक आरंभ हुआ ।इस कार्यक्रम का मूल उद्देश्य साहित्य को सामान्य जनता से जोड़ना है। कार्यक्रम की शुरुआत से पहले हाल में दिवंगत हुए साहित्यकारों को श्रद्धांजलि देकर उन्हें याद करते हुए हुई। कार्यक्रम की शुरुआत सुपरिचित सितारवादक विदिशा बनर्जी के सितारवादन के साथ हुआ।उनके साथ तबला पर डॉ शमीन्द्र नाथ सन्याल थे। नीलांबर के अध्यक्ष यतीश कुमार के स्वागत भाषण के बाद सचिव ऋतेश पांडेय का प्रतिवेदन और संस्था के संरक्षक एवं पुलिस महानिदेशक मृत्युंजय कुमार सिंह ने अपनी बात रखी।उद्घाटन सत्र का संचालन नीलू पांडेय ने किया।

लिटरेरिया के उद्घाटन समारोह में वरिष्ठ इतिहासकार सुधीर चन्द्र, नीलांबर कोलकाता के संरक्षक मृत्युन्जय कुमार सिंह, संस्था के अध्यक्ष यतीश कुमार, सचिव ऋतेश पांडेय

इस बार के आयोजन का थीम ‘मिथ,फैन्टेसी और यथार्थ’ है। जिसे केंद्र में रखकर वक्ताओं ने अपनी बात रखी। पहले सत्र में इतिहासविद एवं गांधीवादी सुधीर चंद्र ने अध्यक्षता करते हुए इतिहास ,मिथक और राजनीति’ विषय पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि स्मृतियाँ मनोस्थिति और परिस्थिति के अनुसार परिवर्तित होती रहती है। जो महाभारत में है – वो दुनिया में है, जो महाभारत में नहीं है – वो दुनिया में नहीं है । ‘नई सदी में स्मृति और कल्पना के प्रश्न’ विषय पर अपनी बात रखते हुए अशोक कुमार पाण्डेय ने कहा कि साहित्य उन स्मृतियों को संजोए रखता है , जो राजनीति भुला देना चाहती है । प्रकाश उदय ने ‘लोक साहित्य में मिथक’ से हमें अवगत कराते हुए कहा कि संवाद संभव है,सबसे और सबका- यह लोक साहित्य की मिथकीय चेतना का अनिवार्य हिस्सा है।और उसके लिए बेहद जरूरी है कि यह बराबरी के स्तर पर हो। श्रुति कुमुद ने ‘फैन्टेसी का देशकाल’ विषय पर अपनी बात रखते हुए यह बताया कि मिथक में रचनाकार अवास्तविक की सहायता से वास्तविक पर टिप्पणी करना चाहता है । सत्र का संचालन विनय मिश्रा ने किया। दूसरे सत्र में डॉ शंभुनाथ ने अध्यक्षता करते हुए ‘मिथकों की दुनिया और आधुनिक मन’ विषय पर कहा कि आज का समय मिथकों से घिरा हुआ है।आज राजनीति और बाजार अपने मिथक निर्मित कर रहे हैं।झूठ के कपड़े में सच की कथा है मिथक। मनोचिकित्सक एवं कवि डॉ विनय कुमार ने मिथकों के मनोविज्ञान पर विस्तार से बात करते हुए कहा कि ‌मिथक हमें अनुभव देते हैं कि हम मनुष्य जीवित हैं।

मिथक और स्त्री को लेकर संवाद सत्र में अनीता भारती, मनीषा कुलश्रेष्ठ, गीताश्री तथा संचालक रश्मि भारद्वाज

सारे मिथक अवचेतन से आते हैं।आशीष त्रिपाठी ने ‘मिथक की आधुनिकता: सांस्कृतिक विउपनिवेशन और सामाजिक प्रतिरोध’ विषय पर अपनी बात रखते हुए कहा कि मिथक एक तरह की कल्पना है जो इतिहास से अलग है। मिथकों पर समय के आवरण होते हैं।  मिथकों को इतिहास बना देने की साज़िश से सतर्क रहने की जरूरत है। प्रियंकर पालीवाल ने ‘मिथकों का राजनीतिकरण’ विषय पर अपनी बात रखी और कहा कि मिथक प्रागैतिहासिक मनुष्य का सामूहिक स्वप्न है जिसमें अलौकिकता के साथ लोकानुभूति अभिव्यक्त होती है। उन्होंने भारत माता के गतिमान मिथक के माध्यम से मिथकों के राजनैतिक उपयोग पर प्रकाश डाला।अच्युतानन्द मिश्र ने ‘आभासी यथार्थ और नई सदी की कविता’ विषय पर अपनी बात रखते हुए कहा कि क्लासिक रचना या स्थापित कला में क्रम भंग, कविता में नया करने के लिए जरूरी है।कला आज सूचना क्रांति से परिचालित है – इसलिए कला के साथ कलाकार का सरोकार कम हुआ है। सत्र का संचालन इतु सिंह ने किया। इसके बाद साहित्य,समाज और मनोविज्ञान से जुड़े मुद्दों पर बातचीत करते हुए डॉ स्कंद शुक्ल और डॉ विनय कुमार ने विषय से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। सत्र का संचालन ऋतु तिवारी ने किया । धन्यवाद ज्ञापन लोकनाथ तिवारी ने किया।
कविता पाठ एवं संवाद के साथ संपन्न हुआ दूसरा दिन
नीलांबर द्वारा आयोजित लिटरेरिया के दूसरे दिन सर्वप्रथम विमलचंद्र पांडेय के निर्देशन में बनी फिल्म ‘होली फिश’ का प्रदर्शन किया गया। कार्यक्रम की शुरूआत नौ वर्षीय अनिर्बान राय के बांसुरी वादन से हुई। जिसके साथ तबले पर तुहीन कर्मकार थे। इस दिन के पहले संवाद सत्र के वक्ताओं में से मृत्युंजय कुमार सिंह ने कहा कि एक मात्र कलाकार ही है जो आगत के सटीक संकेत देता है। रूढ़ियों से उठे बिना ना स्त्री सशक्त हो पाएगी न समाज बदल पाएगा।चन्दन पाण्डेय का कहना था कि आजादी यथार्थ था तो विभाजन सत्य।भारत यथार्थ है तो कश्मीर हकीकत है।गीता दूबे ने अपनी बात रखते हुए कहा कि कला में जो सत्य है, वह अनुमान पर आधारित होता है।इस सत्र का संचालन निशांत ने किया।इस दिन के कविता पर्व में ज्ञानेन्द्रपति,केशव तिवारी,अनिता भारती,अरुण देव,अनिल अनलहातु,आशीष त्रिपाठी, विश्वासी एक्का,यशोधरा राय चौधुरी(बांग्ला),प्रकाश उदय(भोजपुरी) और अमिताभ रंजन कानू (असमिया),डॉ विनय कुमार, अशोक कुमार पाण्डेय,अमिताभ बच्चन,विनोद विट्ठल, शैलजा पाठक,अच्युतानन्द मिश्र, श्रुति कुशवाहा,श्वेता राय,सुघोष मिश्र,अविनाश दास(मैथिली), दासू वैद्य(मराठी) ने अपनी कविताओं का पाठ किया। कविता पर्व का संचालन आनंद गुप्ता और स्मिता गोयल ने किया ।


इस दिन के दूसरे संवाद सत्र में ‘स्त्री का मिथक और मिथक की स्त्री ‘ विषय पर गीताश्री ने अपनी बात रखते हुए कहा कि स्त्री को लेकर जो भी मिथक हैं,उसने स्त्रियों की बहुत ही कमजोर छवि पेश की है।उसका सबल पक्ष कम उजागर हुआ है। मनीषा कुलश्रेष्ठ ने कहा कि मेरे गृहराज्य में मीरा के पद आदिवासी स्त्रियां और जोगनें ही गाती हैं।मीरा नाम आज भी अच्छे घरों में नहीं रखा जाता है।मीरा भक्तिन तो स्वीकार है, लेकिन प्रेम से पड़ी कवयित्री के रूप में नहीं।यही है मिथक की स्त्री और स्त्री के लिए वर्तमान समाज का मिथक।अनिता भारती ने कहा कि मिथकों ने स्त्री की झूठी छवि गढ़ी है। यहां के लोगों ने भी ‘मिथक’ को पूज कर स्त्री की संपूर्ण अवहेलना की है।’होलिका’ को जलाकर पर्व सम्पन्न करना मिथकों का सबसे क्रूर रूप है।इस सत्र का संचालन करती हुई रश्मि भारद्वाज ने कहा कि मिथक किसी देश की संस्कृति में गहरे रचे बसे होने के साथ आईडेंटिटी कन्सट्रक्शन में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के नाम रहा तीसरा दिन
लिटरेरिया 2019 का तीसरा और आखिरी दिन आज विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से संपन्न हुआ। आज सर्वप्रथम नीलांबर द्वारा तैयार की गई दो फिल्में ‘गोष्ठी’ और ‘जमीन अपनी तो थी’ का प्रदर्शन किया गया।फिल्मों पर बातचीत के लिए मौजूद थे सुपरिचित फिल्म निर्देशक अविनाश दास, कथाकार चंदन पांडेय एवं इन फिल्मों के निर्देशक ऋतेश पांडेय। अविनाश दास ने कहा कि कहानी लिखना अलग बात है पर उसका फिल्मांकन करना अलग बात है।फिल्म में उसे दुबारा लिखी जाती है। चंदन पांडेय ने कहानी की रचना प्रक्रिया पर अपनी बात रखी।ऋतेश पांडेय ने इन फिल्मों से जुड़े अनुभव साझा किए। इस दिन के प्रथम संवाद सत्र में ‘कविता के उपादान : मिथ,फैंटेसी और यथार्थ’ विषय पर बातचीत में ज्ञानेंद्रपति ने कहा कि भारतीय संदर्भ में फंतासी और मिथक को समझने के लिए मुक्तिबोध आदर्श रूप में हैं।प्रियंकर पालीवाल ने कहा कि आज मिथ और इतिहास का अंतर ही मिटा दिया गया है।मिथ को सही परिप्रेक्ष्य में समझना होगा। अरुण देव ने कहा कि कविता में मिथक और फैंटेसी अनिवार्य उपादान है।नीलकमल ने कहा कि मिथ एक ठोस चीज नहीं है, डायनामिक चीज है।मिथ जरूरी नहीं कि धर्म से आए जबकि नये-नये मिथ बनाए जा रहे हैं। विमलेश त्रिपाठी ने सत्र का संचालन किया। इसके बाद ‘गाँधी : मिथ, यूटोपिया और यथार्थ’ विषय पर आयोजित संवाद सत्र में प्रेमपाल शर्मा, पराग मांदले, अल्पना नायक और रश्मि भारद्वाज ने हिस्सा लिया। प्रेमपाल शर्मा ने कहा कि गांधी सबसे ज्यादा रियलिस्टिक है।हमें अपने जीवन में गांधी का अनुकरण करना चाहिए।पराग मांडले ने कहा कि गाँधी देश में एकमात्र ऐसे व्यक्ति हैं जिसके पक्ष- विपक्ष में सबसे ज्यादा बातें कही गई हैं एवं जिन पर सबसे ज्यादा किताबें हैं। रश्मि भारद्वाज ने कहा कि पोस्ट ट्रुथ के इस युग में जब सच भावनाओं और प्रोपगैंडा के बीच कहीं गुम हो गया है, पत्रकारिता निष्पक्ष नहीं रह गयी है और राजनीति पर धर्म का रंग चढ़ चुका है, गांधी और उनके विचार एक मिथक की तरह ही प्रतीत होते हैं।


आज का समापन सत्र विद्या मंदिर में आयोजित हुआ जिसमें सबसे पहले मृत्युंजय कुमार सिंह ने अपने मधुर गीतों से दर्शकों का मन मोह लिया। इनके अलावा आस्था मांडले और ममता शर्मा ने गीतों की शानदार प्रस्तुति की।मौसूमी दे एवं दल द्वारा महादेवी वर्मा के गीतों पर नृत्य की प्रस्तुति की गई। नीलांबर की टीम द्वारा विनोद कुमार शुक्ल की कविताओं पर आधारित ‘रंग विनोद’ एवं मुक्तिबोध की कविताओं पर आधारित ‘फैंटेसी’ शीर्षक से कविता कोलाज की प्रस्तुति की गई जिसमें हिस्सा लेने वाले कलाकारों में शामिल थे पूनम सिंह, स्मिता गोयल, ममता पांडेय, दीपक ठाकुर,नीलू पांडेय, निधि पांडेय, विशाल पांडेय, सिमरन शमीम एवं अदिति दूबे। तत्पश्चात मौसूमी दे एवं दल द्वारा महादेवी वर्मा के गीतों पर नृत्य की प्रस्तुति की गई। देवप्रिया मुखर्जी द्वारा निराला की कविता ‘एक बार बस नाच तू श्यामा’ पर काव्य नृत्य प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर निनाद सम्मान’ डॉ स्कंद शुक्ल को एवं ‘रवि दवे सम्मान’ उषा गांगुली को पद्म श्री रीता गांगुली के हाथों से प्रदान किया गया ।अंत में असीमा भट्ट द्वारा निर्देशित एवं अभिनीत नाटक ‘द्रौपदी’ का मंचन हुआ।जिसे दर्शकों ने काफी सराहा।पूरे सत्र का संचालन ममता पांडेय एवं लोकनाथ तिवारी ने किया।

बच्चों के साथ हिंसा को लेकर जागरुकता जरूरी : डॉ. शशि पांजा

भारत में यूनिसेफ इंडिया की 70वीं वर्षगाँठ

राज्य के साथ छेड़ी बच्चों के खिलाफ हिंसा के खात्मे की मुहिम
कोलकाता : यूनिसेफ इंडिया ने भारत में अपने 70 साल पूरे कर लिये हैं। गत 11 दिसम्बर को कोलकाता के निक्को पार्क में यूनिसेफ दिवस मनाया गया। इस अवसर पर राज्य की महिला विकास एवं बाल कल्याण मंत्री डॉ. शशि पांजा ने ध्वजारोहण किया। यूनिसेफ ने पश्चिम बंगाल सरकार बच्चों के साथ होने वाली हिंसा के खिलाफ मुहिम छेड़ने के लिए हाथ मिलाया है। इस अवसर पर डॉ. शशि पांजा ने कहा, हम अभिभावकों, समुदायों और बच्चों को ऐसी घटनाओं की शिकायत दर्ज करवाने को प्रोत्साहित कर रहे हैं। इसके साथ ही प्रशासनिक स्तर पर भी दोषियों के खिलाफ तुरन्त कार्रवाई करने को कहा जा रहा है।

रखें इन बातों का ध्यान
– अभिभावक बच्चों से बात करें और संवाद बनाये रखें।
– बच्चों को न कहना सिखायें।
– किसी प्रकार की समस्या होने पर चाइल्डलाइन नम्बर 1098 पर डायल करें और चाइल्ड वेलफेयर पुलिस अधिकारी अथवा नजदीकी पुलिस स्टेशन से सम्पर्क करें।
– अगर आप अपने पड़ोस, समुदाय या सड़क पर बच्चों के साथ होने वाली इस तरह की घटना देखते या सुनते हैं तो आवाज उठाइए, हस्तक्षेप करिये।
– बच्चों के साथ खड़े हों जिससे वे खुद को अकेला न समझें।

हमें ‘बचाव’ शब्द का महत्व समझना होगा।’ यूनिसेफ के प्रमुख (बंगाल) मोहम्मद मोहियुद्दीन ने कहा कि यूनिसेफ बंगाल सरकार, पुलिस, न्यायपालिका, समुदायों और बच्चों के साथ जागरुकता लाने के लिए काफ कर रहा है, साथ ही बच्चों के अनुकूल पुलिस स्टेशन तथा अदालतें भी बनायी जा रही हैं। स्कूल के साथ स्कूल जाने वाले रास्ते में भी बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए राज्य की ओर से विद्यालय सुरक्षा कार्यक्रम चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यूनिसेफ और राज्य सरकार अकेले यह काम नहीं कर सकते, सभी को आगे बढ़कर आवाज उठानी होगी। इस अवसर पर उपस्थित सभी बच्चो ने निक्को पार्क में झूलों का आनन्द उठाया। निक्को पार्क एंड रिसॉर्ट लिमिटेड के प्रेसिडेंट राजेश रायसिंघानी भी इस अवसर पर उपस्थित थे। यह जानकारी यूनिसेफ की सम्पर्क विशेषज्ञ (बंगाल) मौमिता दस्तीदार ने दी।

बेस्ट फ्रेंड्ज सोसायटी ने करवाया नेत्रहीन युगल का विवाह

कोलकाता : बेस्ट फ्रेंड्ज सोसायटी नामक गैर सरकारी संगठन हाल ही में दो नेत्रहीन जोड़ों का विवाह करवाया। अंजलि और संजीव नामक इस नेत्रहीन युगल ने सामान्य जोड़ों की तरह एक खुशहाल वैवाहिक जीवन जीने का सपना देखा था मगर दोनों ही इस दुनिया को अपनी आँखों से नहीं देख सकते। बेस्ट फ्रेंड्ज ने इस विवाह में सहयोग दिया। हाल ही में बेस्ट फ्रेंड्ज के माध्यम से अंजलि और संजीव ने अपने अनुभव साझा किये। दोनों घाटपुकुर स्थित प्रेमश्री होम में रहते हैं। संजीव एक शिक्षक हैं जबकि अंजलि को गाने का शौक है। बेस्ट फ्रेंड्ज सोसायटी के अध्यक्ष राजीव लोढ़ा ने बताया कि उनकी संस्था ‘कन्यादान’ नामक परियोजना 8 साल पहले उन्होंने सलाहकार समिति के सदस्य रजत लोढ़ा के साथ की थी। तब से संस्था यह आयोजन करवाती आ रही है जिनमें अब तक 20 ऐसे विवाहों में सहयोग कर चुकी है। इस परियोजना का उद्देश्य बेटियों के विवाह में जरूरतमंद परिवारों की मदद करना है जिससे वे दहेज और धनाभाव में होने वाली दुर्घटनाओं को कम कर सकें। युगल का विवाह 15 दिसम्बर को होना है। इस मौके पर युगल को 35 हजार रुपये का चेक भी प्रदान किया गया। इस अवसर पर अभिनेत्री पापिया अधिकारी, रंगकर्मी सुचेतना दे, लॉन्चर्ज किंग क्वीन 2019 के विजेता मैनाक मण्डल, साथी सत्पथी और अजन्ता पांडा भी युगल को आशीर्वाद देने के लिए उपस्थित थे।

आज राजनीति और बाजार अपने मिथक निर्मित कर रहे हैं : डॉ. शम्भुनाथ

लिटरेरिया 2019 का पहला दिन सपन्न

कोलकाता : नीलांबर संस्था के वार्षिकोत्सव लिटरेरिया 2019 का पहला दिन आज सफलतापूर्वक आरंभ हुआ ।इस कार्यक्रम का मूल उद्देश्य साहित्य को सामान्य जनता से जोड़ना है। कार्यक्रम की शुरुआत से पहले हाल में दिवंगत हुए साहित्यकारों को श्रद्धांजलि देकर उन्हें याद करते हुए हुई। कार्यक्रम की शुरुआत सुपरिचित सितारवादक विदिशा बनर्जी के सितारवादन के साथ हुआ।उनके साथ तबला पर डॉ शमीन्द्र नाथ सन्याल थे। नीलांबर के अध्यक्ष यतीश कुमार के स्वागत भाषण के बाद सचिव ऋतेश पांडेय का प्रतिवेदन और संस्था के संरक्षक एवं पुलिस महानिदेशक मृत्युंजय कुमार सिंह ने अपनी बात रखी।उद्घाटन सत्र का संचालन नीलू पांडेय ने किया।
इस बार के आयोजन का थीम ‘मिथ,फैन्टेसी और यथार्थ’ है। जिसे केंद्र में रखकर वक्ताओं ने अपनी बात रखी। पहले सत्र में इतिहासविद एवं गांधीवादी सुधीर चंद्र ने अध्यक्षता करते हुए इतिहास ,मिथक और राजनीति’ विषय पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि स्मृतियाँ मनोस्थिति और परिस्थिति के अनुसार परिवर्तित होती रहती है। जो महाभारत में है – वो दुनिया में है, जो महाभारत में नहीं है – वो दुनिया में नहीं है । ‘नई सदी में स्मृति और कल्पना के प्रश्न’ विषय पर अपनी बात रखते हुए अशोक कुमार पाण्डेय ने कहा कि साहित्य उन स्मृतियों को संजोए रखती है , जो राजनीति भूला देना चाहता है । प्रकाश उदय ने ‘लोक साहित्य में मिथक’ से हमें अवगत कराते हुए कहा कि संवाद संभव है,सबसे और सबका- यह लोक साहित्य की मिथकीय चेतना का अनिवार्य हिस्सा है।और उसके लिए बेहद जरूरी है कि यह बराबरी के स्तर पर हो। श्रुति कुमुद ने ‘फैन्टेसी का देशकाल’ विषय पर अपनी बात रखते हुए यह बताया कि मिथक में रचनाकार अवास्तविक की सहायता से वास्तविक पर टिप्पणी करना चाहता है । सत्र का संचालन विनय मिश्रा ने किया। दूसरे सत्र में डॉ शंभुनाथ ने अध्यक्षता करते हुए ‘मिथकों की दुनिया और आधुनिक मन’ विषय पर कहा कि आज का समय मिथकों से घिरा हुआ है। आज राजनीति और बाजार अपने मिथक निर्मित कर रहे हैं।झूठ के कपड़े में सच की कथा है मिथक। मनोचिकित्सक एवं कवि डॉ विनय कुमार ने मिथकों के मनोविज्ञान पर विस्तार से बात करते हुए कहा कि ‌मिथक हमें अनुभव देते हैं कि हम मनुष्य जीवित हैं।सारे मिथक अवचेतन से आते हैं।आशीष त्रिपाठी ने ‘मिथक की आधुनिकता: सांस्कृतिक विउपनिवेशन और सामाजिक प्रतिरोध’ विषय पर अपनी बात रखते हुए कहा कि मिथक एक तरह की कल्पना है जो इतिहास से अलग है। मिथकों पर समय के आवरण होते हैं। मिथकों को इतिहास बना देने की साज़िश से सतर्क रहने की जरूरत है। प्रियंकर पालीवाल ने ‘मिथकों का राजनीतिकरण’ विषय पर अपनी बात रखी और कहा कि मिथक प्रागैतिहासिक मनुष्य का सामूहिक स्वप्न है जिसमें अलौकिकता के साथ लोकानुभूति अभिव्यक्त होती है। उन्होंने भारत माता के गतिमान मिथक के माध्यम से मिथकों के राजनैतिक उपयोग पर प्रकाश डाला।अच्युतानन्द मिश्र ने ‘आभासी यथार्थ और नई सदी की कविता’ विषय पर अपनी बात रखते हुए कहा कि क्लासिक रचना या स्थापित कला में क्रम भंग, कविता में नया करने के लिए जरूरी है।कला आज सूचना क्रांति से परिचालित है – इसलिए कला के साथ कलाकार का सरोकार कम हुआ है। सत्र का संचालन इतु सिंह ने किया। इसके बाद साहित्य,समाज और मनोविज्ञान से जुड़े मुद्दों पर बातचीत करते हुए डॉ स्कंद शुक्ल और डॉ विनय कुमार ने विषय से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। सत्र का संचालन ऋतु तिवारी ने किया । धन्यवाद ज्ञापन लोकनाथ तिवारी ने किया।

दक्षिण अफ्रीका की जोजिबिनी टूंजी बनीं मिस यूनिवर्स 2019

दक्षिण अफ्रीका की जोजिबिनी टूंजी ने साल 2019 का मिस यूनिवर्स खिताब जीत लिया है। अमेरिका के जॉर्जिया अटलांटा में हुई इस प्रतियोगिता में दुनिया भर से 90 लड़कियों ने हिस्सा लिया था। भारत की तरफ से वर्तिका सिंह ने भी प्रतियोगिता में हिस्सा लिया लेकिन वह शीर्ष दस में जगह नहीं बना पाईं। 26 साल की जोजिबिनी लैंगिक भेदभाव के खिलाफ सक्रिय तौर पर खड़ी होने वाली एक्टिविस्ट के तौर पर भी जाना जाती हैं। वह सोशल मीडिया पर लिंग संबंधी रूढ़ियों के खिलाफ कैंपेन भी चला चुकी हैं।

जोजिबिनी टूंजी का कहना है- मैं एक ऐसी दुनिया में पैदा हुई जहां मेरी तरह की महिलाओं, जिनकी त्वचा और बाल मेरी तरह हैं, उन्हें सुंदर नहीं समझा जाता । मैं चाहती हूं अब इस भेदभाव को बंद हो जाना चाहिए। बच्चों को मेरी तरफ देखना चाहिए। मेरे चेहरे को देखना चाहिए। उनको मेरे चेहरे में अपना चेहरा नजर आएगा। जोजिबिनी ने प्रतियोगिता से पहले कहा था कि अगर आप अपनी सुंदरता को अपने जिंदगी का मिशन नहीं बना सकते तो आप सिर्फ खाली गहना हैं।
जोजिबिनी के साथ 20 सुंदरियां सेमीफाइल तक पहुंची थीं। शीर्ष दस में कोलंबिया, फ्रांस, आइसलैंड, इंडोनेशिया, मैक्सिको, पेरू, पुएर्टो रीको, साउथ अफ्रीका, थाईलैंड और अमेरिका की सुंदिरयों जगह बनाई। प्रतियोगिता की शुरुआत में प्रतियोगियों ने अपने देश का प्रतिनिधित्व करते हुए पारंपरिक पहनावे में वॉक किया। भारत की वर्तिका सिंह लाल रंग के लहंगे में दिखीं। कॉस्ट्यूम राउंड के बाद वर्तिका सिंह की टॉप-20 सेमीफाइनलिस्ट में वाइल्ड कार्ड एंट्री हुई। हालांकि इसके बाद वो शीर्ष दस में जगह नहीं बना पाई।

प्रतियोगिता के दौरान जब वर्तिका से पूछा गया कि वह किस अभिनेता के साथ काम करना चाहेंगी तो उन्होंने लियोनार्डो डीकैप्रियो का नाम लिया। कॉस्ट्यूम राउंड के बाद वर्तिका सिंह ने कहा कि एक सपना होना कितना जरूरी है। भारत के छोटे शहरों में लड़कियों को सपने देखने का हक नहीं है।मैंने सपना देखा और उस पर विश्वास किया। जब स्विमसूट राउंड से पहले शो की होस्ट ने शीर्ष दस कंटेस्टेंट के नामों की घोषणा की तो इसमें वर्तिका सिंह नहीं थी।

एक भारतीय जिसने नासा और इसरो को पीछे छोड़ दिया

नयी दिल्ली : भारत के शौकिया अंतरिक्ष वैज्ञानिक षनमुगा सुब्रमण्यम ने चेन्नई स्थित अपनी ‘प्रयोगशाला’ में बैठकर चंद्रयान-2 के लैंडर विक्रम के अवशेषों को खोजने में नासा और इसरो दोनों को पीछे छोड़ दिया। उन्होंने अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी के चंद्रमा की परिक्रमा लगाने वाले अंतरिक्ष यान द्वारा भेजे चित्रों की मदद से यह खोज की। नासा ने विक्रम लैंडर के चंद्रमा की सतह से टकराने वाली जगह के चित्र जारी करते हुए माना कि इस जगह का पता लगाने में सुब्रमण्यम की खास भूमिका रही है। सुब्रमण्यम मैकेनिकल इंजीनियर और ऐप डेवलपर हैं. उन्होंने एक ट्वीट में लिखा, नासा ने चंद्रमा की सतह पर चंद्रयान-2 के विक्रम लैंडर की तलाश का श्रेय मुझे दिया है। उन्होंने बहुत कम साधनों की मदद से यह कारनामा कर दिखाया. मंदिरों के शहर मदुरै के इस निवासी ने कहा कि विक्रम के गिरने की जगह का पता लगाने के लिए उन्होंने दो लैपटॉप का इस्तेमाल किया। इसकी मदद से उन्होंने उपग्रह द्वारा भेजी गयी पहले और बाद की तस्वीरों का मिलान किया। वह हर दिन एक शीर्ष आईटी फर्म में काम करने के बाद लौटने पर रात 10 बजे से दो बजे तक और फिर ऑफिस जाने से पहले सुबह आठ बजे से 10 बजे तक आँकड़ों का विश्लेषण करते। उन्होंने करीब दो महीने तक इस तरह आँकड़ों का विश्लेषण किया।
उन्होंने बताया कि नासा को ई-मेल भेजने से पहले उन्हें पूरा भरोसा था कि उन्होंने पूरा विश्लेषण कर लिया है। यह पूछने पर कि उन्हें यह विश्लेषण करने के लिए किसने प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि वह स्कूली शिक्षा पूरी होने के बाद से ही इसरो के उपग्रह प्रक्षेपण को बेहद ध्यान से देख रहे हैं. सुब्रमण्यम ने बताया, इन प्रक्षेपणों को देखने से मुझमे और अधिक तलाश करने की दिलचस्पी पैदा हुई। उन्होंने बताया, अपने कार्यालय (लेनोक्स इंडिया टेक्नालॉजी सेंटर) के समय के अलावा मैं इस बात पर नजर रखता था कि नासा और कैलिफोर्निया स्थित स्पेसेक्स क्या कर रहे हैं. इस दिलचस्पी के चलते ही उन्हें चंद्रमा से संबंधित उपग्रह डेटा पर काम करने की प्रेरणा मिली। उन्होंने कहा कि मैकेनिकल इंजीनियरिंग का संबंध रॉकेट साइंस से है और इससे रॉकेट साइंस को समझने में मदद मिली। सुब्रमण्यम को उनके परिजन और दोस्त शान कहकर बुलाते हैं। उन्होंने कहा कि जैसे ही उन्होंने दुर्घटना स्थल की पहचान की और मेल भेजा, उन्हें नासा से जवाब आने की पूरी उम्मीद थी। उन्होंने बताया, मैंने सोचा कि वे स्वयं पुष्टि करने के बाद जवाब देंगे और मंगलवार को सुबह करीब तीन बजे मुझे उनकी तरफ से एक ई-मेल मिला। उन्होंने बताया कि उनके परिवार का कोई भी व्यक्ति अंतरिक्ष विज्ञान से नहीं जुड़ा है। उन्होंने बताया, मुझे इसरो के पूर्व शीर्ष वैज्ञानिक एम अन्नादुरै ने एक तारीफ भरा संदेश भेजा। साथ ही उनके कार्यालय ने भी उनकी उपलब्धि की प्रशंसा की है। यह पूछने पर कि क्या वह अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में जाना चाहेंगे, उन्होंने कहा कि कहा कि वह अपने काम के बाद अपने इस शौक को जारी रखना चाहेंगे।