‘साहित्यिकी’ संस्था की मासिक गोष्ठी आयोजित

 कोलकाता :  महानगर की ‘साहित्यिकी’ संस्था के तत्वावधान में शुक्रवार, दिनांक २१ दिसंबर २०१८ को मासिक संगोष्ठी के अंतर्गत ‘साहित्यिकी पत्रिका’ के २८वें संस्करण ‘बदलते पर्यावरण में’ पर केन्द्रित परिचर्चा आयोजित की गई थी. मंजूरानी गुप्ता ने स्वागत भाषण में संस्था का परिचय व कार्यक्रमों की जानकारी दी. साथ ही संस्था की बड़ी पहचान के रूप में महिलाओं की एकमात्र हस्तलिखित पत्रिका की विशेषताओं से भी परिचित कराया I वरिष्ठ आलोचक, साहित्यकार तथा छपते-छपते के दीपावली अंक के संपादक कार्यक्रम के मुख्य वक्ता श्रीनिवास शर्मा जी ने पर्यावरण सम्बन्धी अपने विचारों से उपस्थित जनों को अवगत कराया. उन्होंने कहा कि ‘प्रदूषण और पर्यावरण-सुरक्षा’ जैसे ज्वलंत विषय का चुनाव करना और रचनाओं के रूप में सदस्य महिलाओं की भारी हिस्सेदारी इस बात का प्रमाण है कि यह चिंता किसी जाति, वर्ग या समुदाय विशेष की नहीं है. मनुष्य और प्रकृति के बीच आज एक द्वंद्व सा चल रहा है. तेज़ी से बढ़ती आबादी और उसकी ज़रूरतों को पूरी करने की समस्या इतनी विकट है कि विकास और पर्यावरण के बीच असंतुलन बढ़ता ही जा रहा है. संतुलन को बनाये रखने में प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका महत्त्वपूर्ण है. इसी क्रम उन्होंने उन महिलाओं को भी पर्यावरण सुरक्षा सम्बन्धी अभियान का हिस्सा बनाने की आवश्यकता पर बल दिया जो शिक्षा और विकास के साधनों से वंचित रह गईं हैं.. श्रीनिवास जी ने बदलते समय और परिस्थितियों के अनुकूल पत्रिका को प्रिंट रूप में प्रकाशित करने सुझाव भी संस्था के समक्ष रखा. सुषमा हंस ने संपादन के दौरान होने वाले अपने अनुभवों को साझा किया और कहा कि दृष्टि बदलने से दृश्य बदल जाते हैं अतएव पर्यावरण-सुरक्षा के सम्बन्ध में लोगों के दृष्टिकोण में पहले बदलाव आना चाहिए. पूनम पाठक ने धार्मिक उत्सवों, अनुष्ठानों और पर्वों के बढ़ते व्यवसायीकरण को ‘आस्था पर प्रदूषण का प्रहार’ कह चिंता व्यक्त की तथा इसको रोकने में महिलाओं की जागरूकता और सार्थक प्रयासों की आवश्यकता को रेखांकित किया. वाणी बाजोरिया ने सरकार द्वारा किये गए प्रयासों के ठोस कार्यान्वयन और कड़े नियमों व् दंड के प्रावधान की आवश्यकता पर बल दिया. अध्यक्षीय भाषण में कुसुम जैन ने वैज्ञानिक सोच व तकनीकि की सहायता से पर्यावरण सम्बन्धी आन्दोलन को आगे बढ़ाने की पेशकश करते हुए साहित्य के माध्यम से समाज के प्रति महिलाओं के उत्तरदायित्त्व को भी महत्त्वपूर्ण माना. गीता दुबे ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए समाज के प्रति संस्था के समर्पित योगदान का उल्लेख किया. संगोष्ठी में संस्था की अनेक सदस्याओं के अतिरिक्त अन्य गणमान्य जन भी उपस्थित थे I कार्यक्रम का सफल सञ्चालन मंजूरानी गुप्ता ने किया था.

रिपोर्ट, पूनम पाठक और वाणी बाजोरिया के सौजन्य से.

 

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