Thursday, June 25, 2026
खबर एवं विज्ञापन हेतु सम्पर्क करें - [email protected]
Home Blog Page 539

सुरक्षा / स्कूल में चिढ़ाए जाने से परेशान होकर 9 साल की छात्रा ने एंटी बुलिंग ऐप बनाया

शिलांग (मेघालय) : स्कूल में चिढ़ाए जाने और धमकियों से परेशान होकर 9 साल की छात्रा ने ‘एंटी बुलिंग मोबाइल एप्लिकेशन’ बनाई है। इसकी मदद से पीड़ित की पहचान उजागर किए बिना ऐसी घटनाओं की जानकारी सीधे अधिकारियों तक पहुंचाई जा सकेगी। कक्षा 4 में पढ़ने वाली मैदाईबाहुन मॉजा ने इसे बनाया है। छात्रा की इस कोशिश की राज्य सरकार ने भी सराहना की है।
मैदाईबाहुन मॉजा का कहना है कि वह जब नर्सरी से में थी, तभी से धमकियां मिल रही थीं। इससे मुझे प्रभावित किया। इससे परेशान होकर मैंने इस परेशानी का हल निकालने का फैसला किया। मैं नहीं चाहती थी कि कोई और बच्चा इस तरह की घटनाओं का सामना करे। उसने बताया कि स्टूडेट्स के एक समूह ने एक बार उसके खिलाफ गैंग बना लिया था। दूसरे स्टूडेंट्स से भी बात न करने को कहा। उनमें से एक ने मेरे पैरों पर मुहर लगा दी थी।
कैसे काम करता है यह ऐप
मॉजा ने बताया कि ऐप का इस्तेमाल करने वाले यूजर को धमकी देने वालों के नाम सहित घटनाओं का विवरण देना होगा। इसके अलावा, इससे संबंधित व्यक्तियों को भी संदेश भेज सकेंगे। इससे अधिकारियों को आवश्यक जानकारी मिलती है और वह आगे कार्रवाई करने का फैसला ले सकते हैं। मॉजा की मां दासुमलिन माजॉ ने बताया कि उसने पिछले साल सितंबर में एक ऐप-डेवलपमेंट कोर्स में दाखिला लिया था। इसके बाद कुछ महीनों में उसने ऐप डेवलप करना सीख लिया। विप्रो अप्लाइंग थॉट्स इन स्कूल्स और टीचर फाउंडेशन ने 2017 में एक सर्वे किया था, जिसमें खुलासा हुआ था कि भारत में 42 प्रतिशत बच्चों को स्कूलों में तंग किया जाता है।

बाइक / सोलापुर के युवा ने डिजाइन की नयी हार्ले; पेटेंट के लिए आवेदन किया

सोलापुर : हार्ले डेविडसन दुनियाभर में अपनी हैवीवेट स्टाइलिश बाइक के लिए मशहूर है। इस साल के अंत में यह अपनी एक नयी बाइक ब्रॉन्क्स बाजार में उतारने वाली है। खास बात ये है कि इसे सोलापुर में रहने वाले चेतन शेडजाले ने डिजाइन किया है। भास्कर से बात करते हुए चेतन बताते हैं कि कार मेरे लिए डिब्बे जैसी है, इसलिए मुझे बाइक डिजाइन करने का शौक है। मैंने डिजाइन से संबंधित 7 पेटेंट के लिए आवेदन किया है। जो इसी साल मेरे नाम हो जाएंगे।
फिलहाल चेतन इटली में हार्ले कंपनी में ही हैं। हार्ले की 975 सीसी और 1250 सीसी इंजन सेग्मेंट में यह पहली बाइक होगी। दुनियाभर में इस समय यह बाइक टॉप-10 में गिनी जा रही है। चेतन को बचपन से ही बाइक्स के प्रति विशेष लगाव रहा है। 2001 में उन्होंने आर्किटेक्चर की पढ़ाई पूरी की। लेकिन भारत में वाहनों को डिजाइन करने का प्रशिक्षण देने के लिए कोई संस्था नहीं थी।
इस वजह से उन्होंने इटली के मिलान में कार एंड ट्रांसपोर्टेशन डिजाइनिंग की पढ़ाई की। फिर फिएट से जुड़े। लेकिन चार पहिया वाहनों को डिजाइनिंग में उनकी रुचि कम ही थी, इसलिए 2010 में हार्ली डेविड्सन से जुड़े और तब से वहीं हैं। चेतन ब्रॉन्क्स से पहले हार्ले के स्ट्रीट प्रोजेक्ट पर भी काम किया है। इससे पहले उन्होंने 750 सीसी की स्ट्रीट रॉड को डिजाइन किया था।

औरंगाबाद का एथलीट दुबई आयरन मैन ट्रायथलॉन रेस पूरी करने वाला पहला दृष्टिहीन भारतीय बना

रेस को बिना आराम किए 8 घंटे में पूरा करना होता है
दुबई : महाराष्ट्र के औरंगाबाद के 38 साल के निकेत दलाल पहले ऐसे दृष्टिहीन भारतीय एथलीट बन गए हैं, जिन्होंने दुबई आयरन मैन ट्रायथलॉन पूरी की। इस रेस में 1.9 किमी तैराकी, 90 किमी की साइकिलिंग और 21.1 किमी की दौड़ लगानी होती है। निकेत दलाल ने 27 साल के अहराम शेख की मदद से इसे 7 घंटे 44 मिनट में बिना रेस्ट पूरा किया। दौड़ को बिना आराम किए 8 घंटे में पूरा करना होता है।
रेस के लिए दोनों एथलीट्स ने पुणे में एथलीट चैतन्या वेलहाल की अकादमी पॉवरपिक्स एथलीट लैब में चार महीने कड़ा अभ्यास किया था। इस तैयारी के दौरान उन्होंने अपनी स्किल्स को सुधारा और आपसी सामंजस बनाकर लक्ष्य को हासिल करने की तैयारी की। उन्होंने डिफरेंटली-एबल्ड एथलीट्स कैटेगरी में दूसरा स्थान हासिल किया। यह इनका पहला आयरन मैन ट्रायथलॉन प्रयास था।
100 प्रतिभागियों से था मुकाबला
कोच चैतन्या वेलहाल ने बताया, निकेत दलाल एक प्रोफेशनल स्पीच थैरेपिस्ट हैं, जबकि शेख ने पुणे से कम्प्यूटर साइंस में मास्टर डिग्री ली हुई है। दोनों एथलीट ने फील्ड में काफी काम किया है। रेस के पहले राउंड में खुले समुद्र में तैरना होता है। यहीं से चुनौती शुरू होती है। पहले राउंड में दोनों ने 100 प्रतिभागियों से मुकाबला करते हुए समय बचाया। दूसरे राउंड साइकिलिंग में शेख के अनुभव का लाभ मिला। पूरी प्रतियोगिता में दोनों का अनुभव काफी मजबूत रहा और आखिरकार समय के पहले फिनिश लाइन पार कर ली।

पश्चिम बंगाल में मिली सदियों पुरानी सुरंग

बर्दवान : पश्चिम बंगाल के पूर्वी वर्द्धमान जिले में एक मकान के निर्माण के दौरान जमीन की खुदाई करते समय सदियों पुरानी सुरंग मिली है।
जिला अधिकारियों ने बताया कि भटार ब्लॉक के महता गांव में शनिवार को जियारुल मलिक की जमीन पर मकान की नींव रखते समय सदियों पुरानी सुरंग का पता चला जिसके मुंह की ऊंचाई सात फुट और चौड़ाई चार फुट है।
इतिहासकार सरबजीत यश ने बताया कि यह सुरंग संभवत: 250-300 साल पुरानी है और इसके कुछ हिस्से जैन वास्तुकला से मेल खाते हैं।
उन्होंने बताया कि यह सुरंग किसी शाही परिवार की हो सकती है, जिसका निर्माण ब्रितानी शासन के दौरान किया गया होगा।
पुलिस के एक अधिकारी ने कहा, ‘‘ इलाके की घेराबंदी कर ली गई है और पुलिस की एक टुकड़ी को वहां तैनात किया गया है क्योंकि महता गांव में सुरंग को देखने के लिए जिले भर से लोग आए हैं।’’

उत्तर प्रदेश को मिली पहली पीएसी महिला बटालियन

गोरखपुर : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य की पहली पीएसी महिला बटालियन के परिसर की आधारशिला रखते हुए गत रविवार को सूबे में पीएसी की तीन महिला बटालियन के गठन का ऐलान किया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को पुलिस ट्रेनिंग स्कूल एवं प्रदेश की पहली पीएसी महिला बटालियन के परिसर की नींव रखी। इसके अलावा लखनऊ और बदायूं में भी पीएसी महिला बटालियन गठित की जाएगी।
उन्होंने कहा कि आज वह गोरखपुर बटालियन के परिसर का शिलान्यास कर रहे हैं। पीएसी की यह बटालियन महिला सशक्तिकरण की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है। इस बटालियन के जरिए प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा का एक बेहतर माहौल बनेगा।
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि पिछली सरकारों ने प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था के साथ खिलवाड़ किया था। वर्ष 2017 में जब भारतीय जनता पार्टी उत्तर प्रदेश में सत्ता में आई, तो उस समय उत्तर प्रदेश पुलिस में डेढ़ लाख पद खाली थे। पीएसी की 54 कंपनियां समाप्त कर दी गई थी। हमारी सरकार बनने के बाद इन भर्तियों को व्यवस्थित किया गया।
उन्होंने कहा पुलिस प्रशिक्षण क्षमता को 6 हजार से बढ़ाकर 12 हजार किया गया। उत्तर प्रदेश पुलिस के इतिहास में पहली बार पुलिस के रंगरूटों की ट्रेनिंग के लिए बीएसएफ, सीआरपीएफ, सीआईएसएफ, एसएसबी और अन्य राज्यों के ट्रेनिंग केंद्रों की सहायता ली गई। इसके जरिए हम समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से पूरी ईमानदारी के साथ अब तक 85 हजार भर्ती प्रक्रिया को पूर्ण कर चुके हैं। शेष भर्ती प्रक्रिया को हम बहुत जल्द पूरी कर लेंगे।
योगी ने कहा कि 2017 के पहले प्रदेश के सात जिलों में पुलिस लाइन नहीं थी। जैसे बिना संविधान के देश होता है, वैसे ही बिना पुलिस लाइन के पुलिस फोर्स की स्थिति भी उस जिले में होती है। हमारी सरकार उन सात जनपदों में पुलिस लाइन के लिए जमीन खरीने के साथ ही परिसर निर्माण के लिए धनराशि भी स्वीकृत कर चुकी है।
उन्होंने कहा कि कुछ जनपदों में पुलिस लाइन बनाए जाने का कार्य प्रारम्भ हो गया है, तो कुछ में बहुत जल्द शुरू हो जाएगा। हर पुलिस लाइन में 300 पुरुष और 50 से ज्यादा महिला कांस्टेबल के लिए अलग बैरक की व्यवस्था की गई है।

नौकरियों, पदोन्नतियों में आरक्षण देने के लिए राज्य सरकारें बाध्य नहीं है: उच्चतम न्यायालय

नयी दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि राज्य सरकारें नियुक्तियों में आरक्षण देने के लिए बाध्य नहीं है तथा पदोन्नति में आरक्षण का दावा करने का कोई मूल अधिकार नहीं है। न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता की पीठ ने कहा, ‘‘इस न्यायालय द्वारा निर्धारित कानून के मद्देनजर इसमें कोई शक नहीं है कि राज्य सरकारें आरक्षण देने के लिए बाध्य नहीं है। ऐसा कोई मूल अधिकार नहीं है जिसके तहत कोई व्यक्ति पदोन्नति में आरक्षण का दावा करे।’’ पीठ ने अपने फैसले में कहा, ‘‘न्यायालय राज्य सरकार को आरक्षण उपलब्ध कराने का निर्देश देने के लिए कोई परमादेश नहीं जारी कर सकता है।’’
उत्तराखंड सरकार के पांच सितम्बर 2012 के फैसले को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए शीर्ष न्यायालय ने यह टिप्पणी की।
गौरतलब है कि उत्तराखंड सरकार ने राज्य में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को आरक्षण उपलब्ध कराये बगैर सार्वजनिक सेवाओं में सभी पदों को भरे जाने का फैसला लिया गया था।
सरकार के फैसले को उत्तराखंड उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई थी, जिसने इसे खारिज कर दिया था। उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ अपीलों पर सुनवाई करते हुए शीर्ष न्यायालय ने कहा,‘‘यह निर्धारित कानून है कि राज्य सरकार को सार्वजनिक पदों पर नियुक्तियों के लिए आरक्षण उपलब्ध कराने के निर्देश नहीं दिये जा सकते है। इसी तरह सरकार पदोन्नति के मामलों में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षण देने के लिए बाध्य नहीं है।’’पीठ ने कहा, ‘‘हालांकि अगर वे (राज्य) अपने विशेष अधिकारों का इस्तेमाल करते है और पदोन्नति में आरक्षण देने का प्रावधान करते है तो सबसे पहले उसे इस तरह के आंकड़े इकट्ठा करने होंगे, जिससे यह स्पष्ट होता हो कि सार्वजनिक पदों पर किसी विशेष वर्ग का प्रतिनिधित्व कम है।’’
उत्तराखंड सरकार की सितम्बर 2012 की अधिसूचना को बरकरार रखते हुए शीर्ष न्यायालय ने कहा कि सरकार पदोन्नतियों में आरक्षण उपलब्ध कराने के लिए बाध्य नहीं है, इसलिए उच्च न्यायालय को राज्य के फैसले को अवैध नहीं घोषित करना चाहिए था।
आरक्षण के बारे में संवैधानिक प्रावधान का जिक्र करते हुए पीठ ने कहा, ‘‘यह राज्य सरकार को तय करना है कि सरकारी पदों पर नियुक्ति और पदोन्नति के मामले में आरक्षण की आवश्यकता है या नहीं।’’

सीनियर राष्ट्रीय भारोत्तोलन चैम्पियनशिप मीराबाई सर्वश्रेष्ठ महिला भारोत्तोलक

कोलकाता : सेना के चंद्रकांत माली ने शुक्रवार को यहां सीनियर राष्ट्रीय भारोत्तोलन चैम्पियनशिप के अंतिम दिन तीन रिकार्ड बनाये जबकि रेलवे ने दबदबा बरकरार रखते हुए पुरूष और महिला दोनों ट्राफियां अपने नाम कीं।
पूर्व विश्व चैम्पियन मीराबाई चानू को 865.796 ‘रोबी अंक’ के साथ ‘सर्वश्रेष्ठ सीनियर महिला भारोत्तोलक’ चुना गया। उन्होंने तीन रिकार्ड तोड़ते हुए महिला 49 किग्रा खिताब अपने नाम किया था। ‘रोबी अंक’ आईडब्ल्यूएफ का गणना करने का अधिकारिक प्रणाली है।
युवा ओलंपिक चैम्पियन जेरेमी लालरिनुंगा 658.962 ‘रोबी अंक’ के साथ ‘सर्वश्रेष्ठ सीनियर पुरूष भारोत्तोलक’ चुने गये। उन्होंने सेना के लिये क्लीन एवं जर्क के रिकार्ड से पुरूष 67 किग्रा में पहला स्थान हासिल किया था।
वहीं 32 साल के माली ने कुल 330 किग्रा का वजन उठाया और उन्होंने अंकित छोकर (रेलवे) के पिछले रिकार्ड से छह किग्रा का सुधार किया। वर्ष 2014 राष्ट्रमंडल खेलों में कांस्य पदक जीतने वाले माली ने स्नैच में 149 किग्रा का वजन उठाया और छोकर के रिकार्ड से एक किग्रा बेहतर किया। वहीं क्लीन एवं जर्क में वह शानदार रहे जिससे उन्होंने पहले ही प्रयास में पूर्व रिकार्ड में पांच किग्रा का सुधार करते हुए 181 किग्रा का वजन उठाया।
वहीं छोकर 316 किग्रा के कुल वजन से दूसरे स्थान पर रहे जबकि रेलवे के उनके साथी वी ए क्रिस्टोफर तीसरे स्थान पर रहे।लेकिन रेलवे ने दबदबा बनाते हुए दोनों पुरूष और महिला खिताब अपने नाम किये, जिसमें उसने क्रमश: 246 और 232 अंक जुटाये।सेना पुरूष वर्ग में 232 अंक से दूसरे स्थान पर रहा जबकि महाराष्ट्र ने महिला वर्ग में 202 अंक से दूसरा स्थान हासिल किया। पांच दिवसीय प्रतियोगिता में 41 राष्ट्रीय रिकार्ड बने जिसमें पुरूष और महिला वर्गों में 419 भारोत्तोलकों ने शीर्ष स्थान हासिल किये।

जाने माने क्रिकेट पत्रकार राजू भारतन का निधन 

मुम्बई : जाने माने क्रिकेट पत्रकार एवं फिल्म संगीत लेखक राजू भारतन का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। सूत्रों ने इस बात की पुष्टि की।
वह 86 वर्ष के थे और उनके परिवार में बेटी, दामाद एवं नाती-नातिन हैं। भारतन ने 42 साल तक ‘द इलस्ट्रेटेड वीकली ऑफ इंडिया’ के साथ काम किया। उन्होंने फिल्म्स डिविजन के लिए पहली पूर्ण लंबाई वाली क्रिकेट डॉक्यूमेंट्री ‘द विक्ट्री स्टोरी’ (1974) का भी निर्देशन किया। छह किताबों का लेखन कर चुके भारतन की पहली किताब ‘राइवल्स इन द सन : अ सर्वे ऑफ द 1952 टूर ऑफ इंग्लैंड’ (1952) थी, जिसके बाद उन्होंने ‘इंडियन क्रिकेट – द वाइटल फेज’ (1977) लिखी।
भारतन ने सुर साम्राज्ञी लता मंगेशकर, आशा भोसले और जाने माने संगीत निर्देशक नौशाद की जीवनी भी लिखी। भारतन के निधन पर शोक जताते हुए पूर्व भारतीय स्पीनर बिशन सिंह बेदी ने ट्वीट किया, ‘‘‘इलस्ट्रेटेड वीकली’ के राजू भारतन नहीं रहे। उन्होंने क्रिकेट और फिल्म दोनों पर समान ऊर्जा एवं प्रतिबद्धता के साथ रिपोर्टिंग की।’’

गरीब बच्चों को मेडिकल की तैयारी करवाता है ‘जिंदगी’ कार्यक्रम

भुवनेश्वर : गणितज्ञ आनंद कुमार के प्रसिद्ध ‘सुपर 30’ से प्रेरित एक ऐसी ही शानदार पहल की शुरुआत ओडिशा में भी हुई, लेकिन इसमें इंजीनियरिंग के बजाय मेडिकल की तैयारी करायी जाती है। ‘‘जिन्दगी’’ नाम की यह पहल आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों के सपनों को साकार करने का काम कर रही है, उनकी उड़ान को पंख दे रही है।
एक गैर-सरकारी संगठन द्वारा संचालित इस अद्भुत कार्यक्रम के तहत मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए होने वाली राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) की तैयारी कराने के लिए सब्जी विक्रेताओं, मछुआरों और गरीब किसानों जैसे समाज में हाशिये पर पड़े लोगों के बच्चों को चुना जाता है।
इस पहल को शुरू करने की कहानी के पीछे जो शख्स है, उनका नाम है- अजय बहादुर सिंह। उन्हें अपने परिवार की आर्थिक तंगी के कारण अपनी मेडिकल की पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी थी और परिवार का पेट भरने के लिए चाय और शर्बत बेचना पड़ा था। ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में वर्ष 2016 में शुरू किया गया जिंदगी कार्यक्रम वर्तमान में 19 मेधावी छात्रों को मेडिकल की तैयारी करवा रहा है, जो आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आये हुए हैं, जिनमें लड़के और लड़कियां दोनों शामिल हैं।
इस कार्यक्रम के तहत, एक राज्य स्तरीय परीक्षा के माध्यम से गरीब पृष्ठभूमि के चयनित प्रतिभाशाली छात्रों को डॉक्टर बनने में मदद करने के लिए शिक्षा दी जाती है, जिन्हें मुफ्त भोजन, आवास और अन्य तमाम सुविधाएं प्रदान की जाती है।
इसके चौदह छात्रों ने 2018 में नीट में सफलता पायी थी, जिनमें से 12 को ओडिशा के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में दाखिला मिला है, जिनकी उपलब्धियों के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने जुलाई में उन्हें सम्मानित किया था।
एक पीटीआई रिपोर्टर ने इस सप्ताह की शुरुआत में जिंदगी फाउंडेशन की कक्षा देखी, वहां का माहौल देखा, विद्यार्थियों के साथ बातचीत की, जिनमें से कुछ सब्जी विक्रेताओं, दिहाड़ी मजदूरों, मछुआरों और गरीब किसानों के बच्चे थे, जिन्होंने सपने में भी कभी डॉक्टर बनने के बारे में नहीं सोचा था, जिसका सबसे बड़ा कारण यह है कि मेडिकल की तैयारी में अमूमन काफी पैसे खर्च होते हैं और महंगी कोचिंग लेनी पड़ती है।
इन बच्चों में अंगुल जिले के एक गरीब किसान की बेटी क्षीरोदिनी साहू, कोरापुट के एक मजदूर की बेटी रेखा रानी बाग, भद्रक जिले के एक ट्रक ड्राइवर के बेटे स्मृति रंजन सेनापति, पानागढ़ के एक सब्जी विक्रेता के बेटे सत्यजीत साहू और पूर्वी मलकानगिरी के एक मछुआरे के बेटे मंजीत बाला हैं, जो अपने सपने को पंख देने में लगे हुए हैं। ये बच्चे दिन-रात कड़ी मेहनत कर अपनी बाधाओं को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।बाधा पैदा नहीं कर सकती।
उनके हौसलों की एक बानगी खुर्दा जिले के एक छोटे से किसान की बेटी शुभलक्ष्मी साहू के जज्बे में दिखती है, जिसका मानना है, ‘‘जब एक चाय बेचने वाला प्रधानमंत्री (नरेंद्र मोदी) बन सकता है तो हम डॉक्टर क्यों नहीं बन सकते?’’
उनके शिक्षक- मुकुल कुमार, मानस कुमार नायक और दुर्गा प्रसाद का कहना है कि इन बच्चों के लिए ‘‘करो या मरो’’ की स्थिति है, या तो मेडिकल परीक्षाओं को पास कर एक सुनहरे भविष्य की ओर कदम बढ़ाएं या अपने उसी अभावग्रस्त जीवन में लौट जाएं।
प्राणि विज्ञान के शिक्षक दुर्गा प्रसाद ने कहा, ‘‘इन सभी बच्चों में अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने की इच्छा बहुत तीव्र है।’’
जिंदगी कार्यक्रम के समन्वयक ज़ाहिद अख्तर ने कहा कि लड़कों और लड़कियों को संगठन द्वारा संचालित अलग-अलग छात्रावासों में रखा जाता है जहाँ उन्हें सादा लेकिन पौष्टिक भोजन मुफ्त में मिलता है।
जिंदगी फाउंडेशन के वरिष्ठ समन्वयक शिवेन सिंह चौधरी ने कहा कि इसका एक साल का कार्यक्रम होता है, जो जुलाई के पहले सप्ताह में प्रवेश की औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद शुरू होता है।
उन्होंने कहा कि इसमें आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों का ही चयन किया जाता है क्योंकि परियोजना का उद्देश्य दुनिया में गरीब परिवारों को आगे बढ़ाने में मदद करना है।
सुपर 30 के संस्थापक आनंद कुमार को अपना प्रेरणास्रोत मानने वाले जिंदगी फाउंडेशन के संस्थापक अजय बहादुर सिंह ने कहा कि वह यह सब गरीब बच्चों को उनके सपने पूरे करने में मदद करने के लिए कर रहे हैं । वह अपने सपने को इन बच्चों के जरिए पूरा करना चाहते हैं।
उन्होंने कहा कि संघर्ष के बावजूद शिक्षा क्षेत्र से जुड़े रहने की उनकी चाहत ने उन्हें यहां तक पहुंचाया है।

ऑस्कर: ब्रैड पिट, लॉरा डर्न को सर्वश्रेष्ठ सह-कलाकार का पुरस्कार

लॉस एंजिलिस : अभिनेता ब्रैड पिट ने ‘वन्स अपॉन ए टाइम इन हॉलीवुड’ में शानदार अदाकारी के दम पर अभिनय की श्रेणी में अपने करियर का पहला ऑस्कर जीता और लॉरा डर्न सर्वश्रेष्ठ सह अभिनेत्री चुनी गई।
92वें अकादमी पुरस्कार समारोह में अभिनेता को सर्वश्रेष्ठ सह-अभिनेता की श्रेणी में ऑस्कर मिला। इससे पहले बतौर निर्माता 2014 में उन्हें उनकी फिल्म ‘12 इयर्स ए स्लेव’ के लिए सर्वश्रेष्ठ फिल्म की श्रेणी में ऑस्कर मिला था। पिट ने पुरस्कार स्वीकार करते हुए कहा, ‘‘ मुझे क्लिफ बूथ (फिल्म में उनके किरदार का नाम) के स्वभाव से प्यार है। लोगों में अच्छाई को देखना, मुश्किलों को स्वीकार करना लेकिन सर्वश्रेष्ठ के लिए…’’
वहीं सर्वश्रेष्ठ सह-अभिनेत्री की श्रेणी में लॉरा डर्न ने बाजी मारी। उन्हें फिल्म ‘मैरिज स्टोरी’ में नोरा फैनशॉ का बेहतरीन किरदार निभाने के लिए यह पुरस्कार मिला है। संयोग से डर्न को उनके जन्मदिन के अवसर पर यह पुरस्कार मिला है और इसे स्वीकार करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘ यह मेरे जन्मदिन का अभी तक का सबसे बेहतरीन तोहफा है।’’
वहीं बोंग जून-हो को फिल्म ‘पैरासाइट’ के लिए सर्वश्रेष्ठ मौलिक पटकथा की श्रेणी में ऑस्कर मिला है। इसके अलावा फिल्म ‘टॉय स्टोरी 4’ को ‘एमिनेटिड फीचर फिल्म’ की श्रेणी में ऑस्कर मिला, एनिमेशन स्टूडियो ‘पिक्सार’ का इस श्रेणी में यह 10वां ऑस्कर है।