कोलकाता : भारतीय सोशल मीडिया माध्यम शेयर चैट का कहना है कि गत 5 अप्रैल को #9 बजे 9 मिनट# अभियान ने सारे देश को एक कर दिया। शनिवार 6 बजे से ही लोग इस अभियान से जुड़ते चले गये और 1 लाख लोगों ने #9 बजे 9 मिनट# के बाद 1 लाख पोस्ट किये। इनको 100 मिलियन यानी 10 करोड़ लोगों ने देखा, 5 मिलियन यानी 50 लाख लोग शामिल हुए। व्हाट्सऐप पर 10 मिलियन यानी 1 करोड़ लोगों ने इसे शेयर किया।
हिन्दी इस दौरान शीर्ष भाषा बनी जिसमें 25 हजार यूजीसी पोस्ट हुए जिसे 30 मिलियन (3 करोड़), लोगों ने देखा और 5 लाख व्हाट्सऐप शेयर किये। इससे बाद तेलगू में 22 हजार पोस्ट हुए जिसे 32 मिलियन (3.2 करोड़) व्यू और 7 लाख व्हाट्सऐप शेयर हुए। तमिल, पंजाबी, गुजराती, कन्नड़, मलयालम, मराठी, बांग्ला जैसी भाषाओं में भी उत्साहवर्द्धक प्रतिक्रिया दिखी। गौरतलब है कि शेयर चैट के 60 मिलियन (6 करोड़) उपयोगकर्ता हैं औऱ यह हिन्दी, पंजाबी, मराठी, कन्नड़, तमिल, तेलगू, मलयालम, गुजराती, बांग्ला समेत 15 भाषाओं में उपलब्ध है।
#9 बजे 9 मिनट# अभियान ने देश को एक किया : शेयर चैट
कोविड -19 : लॉकडाउन को लेकर एसोचेम ने दिए आर्थिक गतिविधि सम्बन्धित सुझाव
कोलकाता : कोविड -19 के कारण हुए लॉकडाउन के परिप्रेक्ष्य में ऐसोचेम कई सुझाव लेकर आया है और इस व्यापार संगठन ने व्यवसाय व उद्योग जगत के चयनित क्षेत्रों को संचालन सम्बन्धी अनुमति देने की सलाह दी है। इन क्षेत्रों में खुदरा क्षेत्र, आवश्यक उत्पादन, बड़े निर्माण सख्त सामाजिक दूरी व बचाव के नियमों का पालन करते हुए इनके संचालन की सलाह दी गयी है। एसोचेम के महासचिव दीपक सूद ने कहा कि बड़े एवं छोटे व्यवसाय अंशधारकों से परामर्श के बाद पाया गया है कि केन्द्र व राज्य सरकारों द्वारा किये गये लॉकडाउन को पूरा समर्थन मिला है। फिर भी, इस वजह से अर्थव्यवस्था औऱ व्यवसाय थम से गये हैं और युद्धस्तर पर किये गये कार्यों के कारण भारत अब तक मुकाबला करने में सक्षम रहा है मगर अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने के लिए तैयार रहना होगा।
एसोचेम ने इसे देखते हुए बिजनेस कन्टीन्यूटी रिपोर्ट भी जारी की है। चेम्बर के परामर्श प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अवधारणा के साथ नीति आयोग के तकनीकी परामर्श को ध्यान में रखकर तैयार किये गये हैं। चेम्बर का मानना है कि समूची वैल्यू चेन को प्रतिबद्धता और संसाधनों की जरूरत है। पूरे विश्व में अपनी उपस्थिति बना चुके फर्मास्यूटिकल उद्योग को एपीआई का अन्तराल भरना होगा जिससे वह स्व सक्षम हो सके। चेम्बर का परामर्श है कि प्रवासी श्रमिकों को उनकी दक्षता और क्षमता के अनुसार कार्य चुनने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए जिससे लॉकडाउन के बाद व्यावसायिक गतिविधियाँ आरम्भ हों, तो व्य़वसाय फिर से आरम्भ करने में सुविधा हो। सूद ने संक्रमित इलाकों में लॉकडाउन जारी रखने तथा रैपिड टेस्टिंग का सुझाव दिया है जिससे कोरोना संक्रमण को नियंत्रित किया जा सके।
एसोचेम द्वारा दिये गये सुझाव
सभी राज्यों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसी भी अनदेखी परिस्थिति से निपटने के लिए उनके क्वारिनटाअइन सेन्टर और मेडिकल सुविधाओं के साथ तैयार रहें।
अत्याधिक कोरोना संक्रमित स्थिति सुधरने तक लॉकडाउन ही रहें। समय – समय पर रैपिड टेस्ट से प्रगति निरीक्षण हो।
सरकार द्वारा कर्मियों को बचाव के सभी उपकरण व संसाधन मुहैया करवाने होंगे। सभी कर्मियों और सेवा प्रदाताओं के साथ परिवहन माध्यम की सुविधा हो।
कॉरपोरेट कार्यालयों, पेशेवर सेवाओं को ‘वर्क फ्रॉम होम’ की सुविधा हो और जरूरत पड़ने पर ही कर्मचारी कार्य़ालय से काम करें।
लॉकडाउन के बाद आर्थिक गतिविधियों की शुरुआत अनिवार्य सेवाओं का समर्थन करने वाले उद्योगों को खोलने से हो। इससे प्रवासी मजदूरों को गाँव जाने से रोका जा सकेगा और व्यवसाय को स्थायीत्व मिलेगा।
कारखानों में रहने वाले और इन्फ्रा डेवलेपमेंट साइट्स में काम करने वाले श्रमिकों को काम करने की अनुमति मिलनी चाहिए जिससे दूसरे इलाकों में उनकी आवाजाही रोकी जा सके।
एसएमई को यथासम्भव अनिवार्य़ श्रम संसाधनों के साथ काम करने की अनुमति मिलनी चाहिए और इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए।
अचानक बढ़ने वाली माँग को ध्यान में रखते हुए लॉकडाउन के बाद प्रवासी श्रमिकों को उनकी दक्षता के अनुसार कार्य करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
छोटे व्यवसायियों तथा किराने की दुकानों को शुरू करना चाहिए और इसके लिए सामाजिक दूरी के नियमों का पालन होना चाहिए।
सामाजिक स्तर पर स्कूल और शिक्षण संस्थान बंद रहें और ऑनलाइन पढ़ाई पर ध्यान दिया जाए तथा परीक्षा लेने की भी व्यवस्था हो।
अन्तरराज्यीय स्तर पर वस्तुओं को ले आने – जाने की सुविधा मिले मगर लोगों की आवाजाही पर नियंत्रण हो जब तक कि कोरोना के मामले घटने न लगें।
बड़े समूहों में तब्दील होने वाली तमाम गतिविधियों को स्थिति सुधरने पर ही अनुमति मिले।
अन्तरराष्ट्रीय उड़ानों को कुछ और समय के लिए स्थगित रखा जाये क्योंकि भारत इस समय जोखिम नहीं ले सकता।
कोरोना से निपटने के लिए आवश्यक दवाओं, चिकित्सकीय उपकरणों और सेफ्टी गियर की बढ़ती माँग को देखते हुए इस क्षेत्र में सक्षम बनना भारत के लिए आवश्यक है। जहाँ भारत ने स्वयं को वैश्विक आपूर्तिकर्ता के रूप में स्थापित किया है। कच्चे माल की कमी को देखते हुए उसकी पूर्ति का अन्तराल भरा जाना चाहिए। इसके लिए कई स्तरों पर शोध को प्रोत्साहन देने की जरूरत है।
शुभजिता युवा प्रतिभा सम्मान : प्रतिभागी : प्रीति साव
शिक्षण संस्थान – खुदीराम बोस सेन्ट्रल कॉलेज
प्रतियोगिता – विषय आधारित लेखन
विधा – कविता
गुरू नानक की किशोरावस्था…

पढ़ा बहुत कुछ
गुरू नानक के बारे में,
पर लिखूँ क्या?
अब वही लिखती हूँ,
जो मैंने पढ़कर समझा है।
जन्म हुआ रावी तट पर
गुरू नानक का
और अपनी निष्ठा के बल पर
बन गए एक महान संत ।
कहते हैं गुरू नानक
हो कोई भी क्षेत्र
भौतिक अथवा आध्यात्मिक
उन्नति के लिए
सब में निष्ठा के साथ
आवश्यकता हैं ,
लगन और एकाग्रता का भी ।
किशोरावस्था में ही लग गए
गुरू नानक ने
अपनी जीवन पूर्ति के लिए,
किशोरावस्था में खेल भी
खेला करते थे,
लेकिन खेलते थे
वे सभी से अलग,
जहाँ खेलते थे सभी लड़के
गुल्ली-डंडा, बल्ला, कबड्डी,
वहाँ वह खेलते थे
भगवान की पूजा।
करते थे उपासना
और बाँटते थे प्रसाद।
होता था उन्हें बहुत दुःख
जब पड़ जाता था
उनके खेल में विघ्न,
तब वह न कहते कुछ भी किसी को
तथापि गम्भीर होते
हो जाते थे मौन
पूछते कारण जब उनके पिता
उत्तर न देते वो कुछ भी,
वैद्य बुलाकर पूछताछ करवाया
असर न हुआ कुछ भी
गुरू नानक पर ।
कुछ क्षण में खूब-ब-खूब
कहने लगे गुरू नानक,
अब मेरा उपचार वही करेंगे
जिनकी वज़ह से हुई
मेरी यह हालत,
समझ गए गुरू नानक के पिता
उनकी भावनाओं को ।
आरम्भ हुआ गुरू नानक का
पाठशाला जाना ,
पढ़ाना शुरू किया ,
उनके अध्यापक ने उन्हें
“अ” शब्द ।
कहने लगे गुरू नानक ने
अध्यापक को होता हैं
“अ” शब्द रूप भगवान का,
समझाने लगे गुरू नानक को
अध्यापक
बिन पढ़े विद्या ? तुम बनोगें
कैसे ज्ञानी…
गुरू नानक कहने लगे
अध्यापक को
आप दें मुझे ऐसी शिक्षा
जहाँ मिले मुझे
परमात्मा का ज्ञान और दर्शन ।
पुनः समझाने लगें
अध्यापक
बिन पढ़े खा-कमा की जरूरत
कैसे सिखोगें ,
गुरू नानक का कहना हैं
इसकी आवश्यकता क्यों हैं,
मुझे पढ़नी है केवल वह विद्या
जहाँ मिले मुझे
परमात्मा के मूल तत्व।
पढ़ कर बन गए
गुरू नानक एक महान संत,
पढ़ कर बन गए
गुरू नानक एक महान संत ।।
भवानीपुर कॉलेज, प्रोजेक्ट लाइफ फोर्स और असीम बोस की पहल पर रक्तदान शिविर
कोलकाता : कभी किसी की रगों में दौड़ कर देखो अच्छा लगता है। कोविड 19 के इस कठिन दौर से गुजर रहे रोगियों और लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रोजेक्ट लाइफ फोर्स एनजीओ द्वारा रक्तदान शिविर का आयोजन सराहनीय पहल है। इस शिविर में भवानीपुर कॉलेज और कॉन्सीलर असीम बोस की सहभागिता रही। विगत छह वर्षों से प्रोजेक्ट लाइफ फोर्स लगभग 350 कैंपों का आयोजन कर चुका है। इसके ट्रस्टी धानीश सेठ ने बताया कि वर्तमान समय में कोविड के कारण अस्पतालों में खून की भारी माँग है। संक्रमण के डर से और लॉकडाउन के कारण अभी तो शिविरों का आयोजन भी संभव नहीं है। भवानीपुर कॉलेज ने जो स्थान दिया है, उसको केएमसी के स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा सेनेटाइज करवा कर मात्र चार बेड ही लगाए गए जो संक्रमण को ध्यान में रखते हुए किया गया। चार दिन के इस शिविर में रक्तदान लेने का निरीक्षण वरिष्ठ डॉक्टरों और टेक्निशियनों की उपस्थिति में हुआ। स्थान पर हाथ धोने के लिए सेनेटाइजर की व्यवस्था थी वहीं पीपल्स ब्लड बैंक ने रक्त एकत्रीकरण का कार्य किया। प्रत्येक रक्त दानी व्यक्ति को आधे घंटे की अवधि पर अलग अलग खून देने के लिए बुलाया गया जिससे भीड़ की भी आशंका नहीं रही । सुरक्षा के सभी एहतियात रखे गए। चार दिनों तक होने वाले इस रक्त शिविर में 30 लोगों ने रक्तदान किया जिन्हें प्रमाणपत्र और नाश्ता भी प्रदान किया गया। भवानीपुर कॉलेज के उपाध्यक्ष मिराज डी शाह और कॉन्सीलर असीम बोस की सहभागिता से रक्तदान का लाभ पश्चिम बंगाल के अस्पतालों में भर्ती कोविड रोगियों के लिए लाभकर है। डॉ. वसुंधरा मिश्र ने इस कार्यक्रम की जानकारी दी ।
कहीं मानवता शर्मसार तो नहीं?

कोविद – 19 की गतिशीलता एक ऐसे योद्धा की चाल है जो दिखाई नहीं दे रही और अपना काम तमाम करती जा रही है। प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, मंत्री, सरकार सभी अपनी बेबसी पर हैरान हैं। यह वायरस पूरी दुनिया के 190 से अधिक देशों को आक्रांत कर चुका है। जहाँ जहाँ गया वहाँ वहाँ उसने अपना संपर्क बनाया और लोगों को गुणात्मक संख्या में लपेटने लगा। कुछ खास लोगों तक गया फिर वहाँ से दूसरों तक चेन बनाता चला गया। जहाँ से शुरू हुआ वहाँ तो सामान्य जीवन भी शुरू हो गया। लोगों में संदेह उत्पन्न होना स्वाभाविक है। चीन के प्रमुख शहरों में कोरोना वायरस का न फैलना कहीं कोई साजिश के तहत तो नहीं है। मानवता को अपनी मुट्ठी में रखने के स्वप्न को पूरा करने के लिए कहीं विश्व को ठगा तो नहीं जा रहा है। लोगों का मनुष्यता पर से ही विश्वास न उठता जा रहा है। यह वायरस कहीं मानव संवेदना और संस्कृति पर प्रहार तो नहीं है? सत्ता हथियाने का दम वही देश भर सकता है जिसके पास ताकत और अर्थतंत्र मजबूत हो।प्रतिस्पर्द्धा में वही शक्ति विजयी होती है जो मानवता की सेवा में अपने को लगाती है क्योंकि मानवीय संवेदनाओं से ही सत्ता विजयी होती है अन्यथा उसका भी विनाश होता हैऔर उसकी जगह फिर कोई दूसरा नायक जन्म लेता है। दुनिया के इतिहास में ऐसे अनेक पृष्ठ हैं जहाँ मानवता को कुचलकर अपना झंडा फहराया गया है। आधुनिक युग ने हमें जो दिया, उत्तर आधुनिकता हमसे छीन रही है। यह संकेत संकटों का है। हमारी संवेदना को खतरा है। मनुष्यता के नाम पर संवेदना का गला घोटा जा रहा है। मेरी पंक्तियां याद आ रही हैं – – संवेदनाओं को धागों में पिरोने के बीच /न जाने टूट जाती हैं कितनी ही कड़ियाँ /मैंने उसे पुचकारा /कोमल स्पर्श को फेरा /उसने हल्की- सी ली करवट /और फिर वह गया बदल – – – उसकी कुर्बानी को /भुनाने लगी रिश्तों में / मेरा शौक बढ़ता चला गया/ और मैं /अपने तानों – बानों को लगी इच्छानुसार मरोड़ने /खेलने लगी तंतुओं की नरमाई से (हर दिन नया(काव्य संग्रह) , ताने-बाने, पृष्ठ 28-29)
अभी तो जीने की आशा है।विश्व के बड़े-बड़े देश कोरोना वायरस से जूझ रहे हैं। कितने ही डॉक्टर और नर्स भी उसकी चपेट में आ गए हैं। हजारों की संख्या में लोग मर रहे हैं। इस भयावह स्थिति में हम घर में ही रहें तो अधिक सुरक्षित रह सकते हैं। कोरोना वायरस से बचने की रामबाण औषधि घर में रहना है। मानवता को बचाना है तो भीतर ही रहें।
कोवड-19: कोल इंडिया की इकाइयों ने लगाए राज्यों में अपने अस्पतालों में 1,509 विशेष बेड
नयी दिल्ली : सार्वजनिक क्षेत्र की कोल इंडिया लि. की अनुषंगी इकाइयों ने कोविड-19 संकट से निपटने के लिए आठ राज्यों में अपने अस्पतालों में विशेष रूप से 1,509 बिस्तरों (बेड) का इंतजाम किया है। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।
कोयले से संपन्न ये आठ राज्य राज्य हैं…झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओड़िशा, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और असम।
इन 1,509 बिस्तरों में से सबसे अधिक 664 महानदी कोलफील्ड्स ने ओड़िशा के भुवनेश्वर, अंगुल, झारसुगुड़ा, संबलपुर और सुंदरगढ़ में अपने अस्पतालों में स्थापित किए हैं। इसके अलावा नार्दर्न कोलफील्ड्स लि.ने मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में 200 विशेष बेड का इंतजाम किया है। भारत कोकिंग कोल लि. ने 100, सेंट्रल कोलफील्ड्स ने 180, ईस्टर्न कोलफील्ड्स ने 144, साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स ने 132, वेस्टर्न कोलफील्ड्स ने 75 और नार्थ ईस्टर्न कोलफील्ड्स ने 14 विशेष बेड का प्रबंध किया है।
पेटा ने नवीन पटनायक को दिया पुरस्कार
भुवनेश्वर : ओड़िशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक को पशु अधिकार संस्था पेटा इंडिया ने कोरोना वायरस महामारी को लेकर चल रहे लॉकडाउन के दौरान राज्य में सामुदायिक पशुओं को खिलाने के लिए धन आवंटित करने के लिए एक पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने पाँच नगर निगमों और सभी 48 नगर पालिकाओं में आवारा पशुओं को खिलाने के लिए 54 लाख रुपये मंजूर किया है। लॉकडाउन के दौरान पशुओं को भोजन मिलने में मुश्किलें हो रही हैं।
उनके प्रयासों का सम्मान करते हुए, पीपुल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स (पेटा) इंडिया ने पटनायक के लिए ‘हीरो टू एनिमल्स अवार्ड’ की घोषणा की। पुरस्कार स्वरूप उन्हें एक प्रमाण पत्र और प्रशस्ति पत्र दिया गया।
पटनायक ने पेटा इंडिया को इस सम्मान के लिए धन्यवाद दिया और सभी से इन कठिन समय में परोपकारी बनने और आसपास के जीव-जन्तुओं का ख्याल रखने की अपील की।
भारतीय वैज्ञानिकों को मिली कामयाबी, जाँच के लिए बनाई पेपर-स्ट्रिप किट
कोरोना वायरस के फैलते संक्रमण से निपटने के लिए भारतीयों वैज्ञानिकों ने त्वरित जांच के लिए नई किट विकसित करने में सफलता पाई है। वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) से जुड़े जिनोमिकी और समवेत जीव विज्ञान संस्थान (आईजीआईबी) के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित यह पेपर-स्ट्रिप आधारित परीक्षण किट है। इसकी मदद से कम समय में संक्रमण का पता लगाया जा सकता है।
आईजीआईबी के वैज्ञानिक डॉ. सौविक मैती और डॉ. देबज्योति चक्रवर्ती की अगुवाई वाली टीम द्वारा विकसित यह किट एक घंटे से कम समय में कोरोना वायरस (एसएआरएस-सीओवी-2) के वायरल आरएनए का पता लगा सकती है। खास बात यह है कि फिलहाल परीक्षण विधियों के मुकाबले पेपर-स्ट्रिप किट काफी सस्ती है।
एक बार इसके विकसित होने और व्यापक प्रयोग से कोरोना जांच से निपटने में मदद मिल सकती है। चक्रवर्ती ने बताया, संक्रमित व्यक्ति में कोरोना के जीनोमिक अनुक्रम की पहचान के लिए पेपर-किट में जीन-संपादन की अत्याधुनिक तकनीक क्रिस्पर-कैस-9 का उपयोग है।
वैधता परीक्षण पूरा होने के बाद इसका उपयोग जाँच के लिए किया जा सकेगा। इसके उपयोग से परीक्षण की लागत करीब 500 रुपये आती है। वैज्ञानिक इस टूल पर दो साल से काम कर रहे हैं। जनवरी के अंत में, चीन में कोरोना का प्रकोप बढ़ा तो कोविड-19 का पता लगाने में इसका प्रयोग किया।
सीएसआईआर के महानिदेशक डॉ शेखर सी मांडे के अनुसार किट के विकास से जुड़े प्राथमिक परिणाम उत्साहजनक हैं। प्राथमिक नतीजे सीमित नमूनों पर हैं। इसका परीक्षण बड़े पैमाने पर हो रहा है। दूसरे देशों से मंगाए नमूनों पर भी परीक्षण हो रहा है। नियामक निकायों से अनुमति मिलने के बाद किट का उपयोग परीक्षण के लिए किया जा सकता है।
कोरोनावायरस से निपटने के लिए आदित्य बिड़ला ग्रुप खर्च करेगा 500 करोड़
मुम्बई : कोरोनावायरस से निपटने के लिए आदित्य बिड़ला ग्रुप 500 करोड़ रुपये खर्च करेगा। समूह द्वारा दी गयी जानकारी के अनुसार 400 करोड़ प्रधानमंत्री राहत कोष में दिए जाएंगे। महामारी से राहत के उपायों के लिए फिक्की-आदित्य बिड़ला सीएसआर सेंटर को 50 करोड़ पहले ही दिए जा चुके हैं। इसके अलावा 50 करोड़ रुपए 10 लाख एन-95 मास्क की आपूर्ति, 2.80 लाख पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट और वेंटीलेटर्स के लिए जारी किए गए हैं। ग्रुप ने कहा है कि कपड़ा मंत्रालय की मदद से ट्रिपल लेयर वाले 10 लाख सर्जिकल मास्क और एक लाख किट का प्रोडक्शन किया जा रहा है।
गुजरात में बना सस्ता स्वदेशी वेंटिलेटर, डीआरडीओ ने बनाया पर्सनल सैनिटाइजेशन चैंबर और फेस मास्क
कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए विशेषज्ञों ने कम से कम 50 हजार अतिरिक्त वेंटिलेटर की जरूरत बताई है। अभी देशभर में केवल 40 हजार वेंटिलेटर हैं।
विदेश से आने वाले वेंटिलेटर की कीमत 6 लाख रु. होती है जबकि स्वदेशी वेंटिलेटर 1 लाख रु. में होगा तैयार
नयी दिल्ली : कोरोनावायरस के खिलाफ छिड़ी इस जंग में देश का हर शख्स अपना योगदान दे रहा है। सामाजिक संस्थानों से जुड़े लोग गरीबों की मदद कर रहे हैं। शैक्षणिक, शोध संस्थानों और निजी संस्थानों से जुड़े वैज्ञानिक इलाज को लेकर तमाम तकनीक तैयार कर रहे हैं। शनिवार को देश के वैज्ञानिकों ने तीन नए इनोवेटिव प्रोडक्ट तैयार करने में कामयाबी हासिल की। एक तरफ जहां गुजरात के वैज्ञानिकों ने बेहद सस्ता वेंटिलेटर बनाया तो दूसरी ओर पुणे के वैज्ञानिकों ने कोरोना का सैंपल लेने वाला स्वाब डेवलप किया। डीआरडीओ के वैज्ञानिकों ने सर्जिकल सूट और फेस मास्क के बाद अब सेल्फ सैनिटाइजेशन चैंबर तैयार किया है। खास बात यह है कि तीनों उत्पाद कोरोना के खिलाफ इस लड़ाई में देश की काफी मदद कर सकते हैं।
पुणे की सेंटर फॉर मटेरियल्स फॉर इलेक्ट्रॉनिक्स टेक्नोलॉजी (सीमेट) के वैज्ञानिकों ने कम लागत वाला स्वदेशी पॉलिमर स्वाब तैयार करने में कामयाबी हासिल की है। केंद्र के डॉ. मिलिंद कुलकर्णी के मुताबिक, स्वाब का उपयोग कोरोनावायरस परीक्षण के लिए एकत्रित किए जाने वाले नमूनों को रखने में काम आता है। अभी इसे इटली, अमेरिका और जर्मनी से मंगाया जाता है। डॉ. मिलिंद ने बताया कि चूंकि, पूरी दुनिया इस समय कोरोना संकट से जूझ रही है। खासतौर पर इटली, अमेरिका और जर्मनी में इस वक्त कोरोना के सबसे ज्यादा मामले हैं। वहीं, भारत में भी संक्रमण के मामले काफी बढ़ चुके हैं। इसलिए आने वाले दिनों में स्वाब की कमी हो सकती है। मुसीबत की इस घड़ी में यह स्वदेशी स्वाब देश के काफी काम आ सकता है। डॉ. मिलिंद के अनुसार, अभी स्वदेशी स्वाब का प्रोटोटाइप तैयार हुआ है। अब इसके क्लिनिकल ट्रायल की तैयारी की जा रही है। इसकी जिम्मेदारी यूरोलॉजिस्ट डॉ. केएन श्रीधर को दी गयी है। डॉ. मिलिंद के अनुसार, आने वाले दिनों में लाखों स्वाब की जरूरत पड़ेगी। उनकी मशीन एक मिनट में 1 हजार से 2 हजार स्वाब तैयार करने में सक्षम है।

10 दिनों में गुजरात सरकार को मिल जाएंगे 1 हजार वेंटिलेटर
गुजरात के राजकोट की ज्योति सीएनसी कंपनी ने स्वदेशी वेंटिलेटर तैयार करने में कामयाबी हासिल की है। इसे धामन-1 नाम दिया गया है। इसके सभी हिस्से स्वदेशी हैं। कंपनी का दावा है कि इसकी कीमत महज 1 लाख रुपये है जबकि विदेश से आने वाला 1 वेंटिलेटर कम से कम 6.50 लाख रुपये का मिलता है। मुख्यमंत्री विजय रुपाणी ने शनिवार को गांधीनगर में धामन -1 को लॉन्च किया। रुपाणी ने बताया कि अगले 10 दिनों में कंपनी गुजरात सरकार को 1000 एयर-1 वेंटिलेटर देगी। कंपनी के पराक्रम सिंह जडेजा ने बताया, ”इसे डॉ. राजेंद्र सिंह परमार की टीम ने महज 10 दिनों में तैयार किया है। डॉ. परमार ने 5 साल तक अमेरिका में काम किया है। इस वेंटिलेटर को बनाने में 150 विशेषज्ञ इंजीनियरों की टीम जुटी थी। इसका परीक्षण अहमदाबाद के असरवा सिविल अस्पताल में भर्ती कोरोना मरीज पर किया गया। वेंटिलेटर पांच घंटे से अधिक समय तक रोगी पर अच्छा काम कर रहा है।”
डीआरडीओ ने बनाया सैनिटाइजेशन चैंबर और फेस प्रोटेक्शन मास्क
कोरोनावायरस से निपटने के लिए तैयार डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेसन (डीआरडीओ) ने एक फुल बॉडी डिसइन्फेक्शन चैंबर बनाया है। इसे सैनिटाइजेशन चैंबर भी कहा जा रहा है। साथ ही फेस प्रोटेक्शन मास्क भी बनाया है, जिसे हॉस्पिटल में सप्लाई भी किया जा रहा है। दिल्ली के अहमदनगर में डीआरडीओ की लेबोरेटरी ‘व्हीकल रिसर्च एंड डेवलपमेंट इस्टैबिलसमेंट’ने इस सैनिटाइजेशन चैंबर को डिजाइन किया है। डीआरडीओ ने कहा कि यह एक पोर्टेबल सिस्टम है। इस चैंबर में व्यक्ति को एक बार में पूरी तरह से सैनिटाइज किया जाएगा। इसमें एक पैडल के माध्यम से खुद को सैनिटाइज किया जाता है। चैंबर में पंप के माध्यम से हाइपो सोडियम क्लोराइड की तेज फुहार डाली जाती है। यह स्प्रे 25 सेकंड तक चलता है। इस चैंबर में व्यक्ति को अपनी आंखे बंद रखनी होती हैं। इस चैंबर में 700 लीटर का टैंक है। एक बार में करीब 650 लोगों को सैनिटाइज किया जा सकता है।




