Sunday, April 26, 2026
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जब मनाना हो गणतन्त्र दिवस का जश्न

26 जनवरी 2020 में देश 71वां गणतंत्र दिवस मनाने जा रहा है। अगर आप भी इस गणतंत्र दिवस के मौके पर देशभक्ति के रंग में डूब जाना चाहते हैं तो मार्केट में आपके लिए कई विकल्प मौजूद हैं। खाने से लेकर कपड़ों तक में आपको देशभक्ति के रंग देखने को मिल सकते हैं। इसमें तिरंगा सलाद से लेकर फेस पर तिरंगे वाला टैटू आपकी मदद करेगा। आइए जानते हैं इस गणतंत्र दिवस को आप कैसे खास बना सकते हैं…

तिरंगा डिजाइन कुर्ते
तिरंगा कलेक्शन में सूट्स, कुर्ता और कुर्तीज, केसरिया, सफेद और हरे हैं। यह बेसिक कुर्ता आपको ट्राई रंग के साथ कूल लुक भी देगा। इस ट्राई लुक में वनपीस ड्रेस से लेकर परम्परागत कपड़े कई वैराइटी बाजार में उपलब्ध हैं।

तिरंगा आहार
बेकरी उत्पादों से लेकर प्रॉपर फूड तक तिरंगे के रंग में रंगी खाने की तमाम चीजें दुकानों में मिल जाएंगी। आप तिरंगा पराठा, तिरंगा इडली, तिरंगा सैंडविच, तिरंगा पुलाव या तिरंगा केक जैसे कई व्यंजन घर पर भी बना सकती हैं।
थ्री डी आई मेकअप
बात अगर मेकअप की करें तो इस गणतंत्र दिवस बटरफ्लाई, फ्लावर, बर्ड्स काफी ट्रेंड में हैं। जिन्हें खूबसूरत बनाने के लिए कलर, क्रिस्टल, स्पार्कल और ग्लिटर का यूज किया जा रहा है। आंखों को ट्राई लुक देने के लिए इनर आई को सिल्वर आईशैडो से कवर कर लें। इसके बाद ऊपर ऑरेंज आईशैडो और नीचे ग्रीन काजल पेसिंल लगाएं। आंखों के साइड में लाइट ब्लू विंग आपको अट्रैक्टिव दिखाएगा। यही नहीं, तिरंगे के तीनों रंग शैडो के तौर पर भी इस्तेमाल किए जा सकते हैं।

चलता-फिरता हीटर है ‘कांगड़ी’, पहाड़ों से निकलकर विदेशों तक जमा रही धाक

श्रीनगर : सर्दी हो और कश्मीर की पारंपरिक कांगड़ी का जिक्र न हो, ऐसा कैसे हो सकता है। भले ही बाहर बर्फ गिर रही हो और तापमान शून्य से नीचे माइनस में चला जाए, कांगड़ी का एहसास ही आपको गर्माहट ला देगा। आधुनिक इलेक्ट्रानिक उपकरणों के इस दौर में भी कांगड़ी का क्रेज कम नहीं हुआ है। खुद को गर्म रखने से लेकर ड्राइंग रूम में सजाने तक कांगड़ी का इस्तेमाल हो रहा है। कश्मीर की हस्तशिल्प की पहचान कांगड़ी अब पहाड़ों से निकलकर जम्मू, हिमाचल प्रदेश, मैदानी इलाकों और विदेशों में भी धाक जमा रही है।
बांडीपोरा की कांगड़ी की बात ही कुछ और
वैसे तो पूरे कश्मीर में कई जगह कांगड़ी बनाई और बेची जाती है, लेकिन बांडीपोरा और चार-ए-शरीफ की कांगड़ी की बात ही कुछ ओर है। कश्मीर के लोगों के अलावा देश-विदेश से कश्मीर घूमने आने वाले पर्यटकों को कांगड़ी खूब लुभा रही है।
जीवनरक्षक है पर कुछ नुकसान भी
कश्मीर के पहाड़ी क्षेत्रों में भारी बर्फबारी के समय कई-कई दिन तक बिजली नहीं होती, तब खुद को गर्म रखने के लिए कांगड़ी ही सहारा है। भीषण सर्दी में यह जीवनरक्षक से कम नहीं। हालांकि चिकित्सकों का कहना है कि बंद कमरे में ज्यादा कांगड़ी सेंकना हानिकारक भी हो सकता है। इससे सांस की दिक्कत और चर्मरोग भी हो सकता है।
पोशक्विन कांगर से बनी जाती है
एक कांगड़ी तैयार करने में काफी मेहनत लगती है। पहले कुम्हार मिट्टी से कटोरानुमा बर्तन बनाता है। इसके बाद पोशक्विन कांगर और लिनक्विन कांगर नामक पौधे की टहनी (बांस नुमा तिनके) से हाथ से कांगड़ी बुनी जाती है। इसके बाद मिट्टी का बर्तन कांगड़ी में इस तरह फिट किया जाता है कि वह हिले नहीं। इसके बाद कांगड़ी को ऊपर से मोतियों से सजाया जाता है। वजन में भी यह काफी हल्की होती है।
200 से 2000 रुपये तक है कीमत
कांगड़ी की कीमत उसकी गुणवत्ता पर निर्भर करती है। अच्छी लकड़ी (पोशक्विन कांगर) की टहनियों से बनी कांगड़ी दो हजार तक मिलती है। वैसे बाजार में 200-400 रुपये की कांगड़ी भी उपलब्ध है।
कांगडी सेंकना महारत से कम नहीं
कांगड़ी में कोयले को जलाकर डाला जाता है। धुंए वाले कोयले को छांट कर बाहर निकाल दिया जाता है। इसे कश्मीर के लोग फिरन (कश्मीरी परिधान) के अंदर हाथ में पकड़कर चलते-फिरते भी सेंकते हैं। इससे हाथ और छाती गर्म रहती है। खुद को जलने से बचाते हुए कांगड़ी सेंकना भी महारत का काम है। गर्म कांगड़ी तीन से चार घंटे आराम से चलती है।
माँ शादी में बेटी को और नयी बहू सास को देती है यह उपहार
कांगड़ी कश्मीर की परंपरा से भी जुड़ी है। शादी के समय मां अपनी बेटी को विदा करते समय कांगड़ी देती है। नयी बहू अपनी सास को भी कांगड़ी तोहफे में देती है, जिसे बड़े चाव से घर में सजाकर रखा जाता है। इतना ही नहीं, घर में आने वाले मेहमान का स्वागत गर्म कांगड़ी देकर किया जाता है। कश्मीर में सीजन की पहली बर्फबारी को ‘शीन मुबारक’ कहा जाता है। शीन मुबारक बोलकर भी कांगड़ी तोहफे में दी जाती है। कश्मीर में कांगड़ी पर कई लोकगीत भी प्रचलित हैं।
(साभार – दैनिक जागरण)

राष्ट्रपति ने 49 बच्चों को बाल शक्ति पुरस्कार प्रदान किया

नयी दिल्ली : राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने बुधवार को यहां राष्ट्रपति भवन में एक समारोह में बाल शक्ति पुरस्कार 2020 प्रदान किया। ईशान शर्मा, ओंकार सिंह, गौरी मिश्रा समेत 49 बच्चों को यह पुरस्कार प्रदान किया गया।
ईशान शर्मा ने एक रूसी पर्यटक को दो लुटेरों से बचाया था, जबकि ओंकार सिंह के पास सबसे कम उम्र का मौलिक लेखक होने का विश्व रिकॉर्ड है और गौरी मिश्रा भारत की सबसे युवा पियानोवादक है। ये सभी बच्चे 5 से 18 साल के हैं।
बाल शक्ति पुरस्कार नवाचार, समाज सेवा, शैक्षिक, खेल, कला व संस्कृति और बहादुरी के क्षेत्र में बच्चों को दिया जाता है। इसके तहत एक पदक, एक लाख रुपये का नकद पुरस्कार, एक प्रमाण पत्र और एक प्रशस्ति पत्र दिया जाता है।
49 पुरस्कार विजेताओं में 12 वर्षीय दर्श मलानी भी शामिल हैं, जिन्होंने दुनिया भर में 50 से अधिक जादू शो किए हैं और 11 वर्षीय मनोज कुमार लोहार को ‘‘तबला वादन’’ में महारत हासिल करने के लिए सम्मानित किया गया है।

मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन से पहले इसरो, महिला रोबोट ‘‘व्योममित्र’’ को अंतरिक्ष की सैर कराएगी

बेंगलुरु : भारत दिसंबर 2021 में अंतरिक्ष में अपने पहले मानव मिशन की योजना पर काम कर रहा है। इससे पहले भारतीय अतंरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) प्रायोगिक रूप से भेजे जाने वाले मानव रहित गगनयान में महिला रोबोट ‘‘ व्योममित्र’’ को भेजेगा। इस रोबोट का नाम संस्कृत के दो शब्दों ‘ व्योम’ (अंतरिक्ष) और मित्र (दोस्त) को मिलाकर ‘व्योममित्र’ दिया गया है। कार्यक्रम में मौजूदा लोग उस समय आश्चर्यचकित रह गए जब व्योममित्र ने अपना परिचय दिया।
रोबोट ने कहा, ‘‘सभी को नमस्कार। मैं व्योममित्र हूं और मुझे अर्ध मानव रोबोट के नमूने के रूप में पहले मानवरहित गगनयान मिशन के लिए बनाया गया है।’मिशन में अपनी भूमिका के बारे में व्योममित्र ने कहा, ‘‘ मैं पूरे यान के मापदंडों पर निगरानी रखूंगी, आपको सचेत करूंगी और जीवनरक्षक प्रणाली का काम देखूंगी। मैं स्विच पैनल के संचालन सहित विभिन्न काम कर सकती हूं…।’’
रोबोट ने बताया कि वह अंतरिक्ष यात्रियों की अंतरिक्ष में साथी होगी और उनसे बात करेगी। व्योममित्र ने बताया कि वह अंतरिक्ष यात्रियों की पहचान करने सहित उनके सवालों का जवाब देगी।
इसरो प्रमुख के सिवन ने पत्रकारों को बताया कि ह्यूमनॉयड (मानव की तरह रोबोट)अंतरिक्ष में इंसानों की तरह काम करेगी और जीवन प्रणाली के संचालन पर नजर रखेगी।

मशहूर लोकगायिका सुनंदा पटनायक का निधन

भुवनेश्वर : उड़िया संगीत की दुनिया में अपनी विशेष पहचान बनाने वाली मशहूर लोकगायिका सुनंदा पटनायक का गत रविवार का निधन हो गया। वह 85 वर्ष की थी।
पारिवारिक सूत्रों ने बताया कि वह लंबे समय से बीमार चल रही थीं। सूत्रों के अनुसार “गुगुमा” के नाम से लोकप्रिय, पटनायक का कोलकाता के एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा था, जहां रविवार सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली।
दिग्गज उड़िया कवि बैकुंठनाथ पटनायक की बेटी सुनंदा का जन्म सात नवंबर, 1934 को हुआ था और उन्होंने 14 साल की उम्र में 1948 में कटक के ऑल इंडिया रेडियो से गायन में अपने करियर की शुरुआत की थी।
ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक और केंद्रीय पेट्रोलियम और इस्पात मंत्री धर्मेंद्र प्रधान सहित कई प्रमुख हस्तियों ने दिग्गज गायिका के निधन पर शोक व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने अपना जीवन संगीत के लिए समर्पित कर दिया था और उनके योगदान ने उन्हें अमर बना दिया है।

जेईई एडवांस्ड इस बार 17 मई को, मॉक टेस्ट पेपर जारी

नयी दिल्ली : ज्वॉइंट एंट्रेंस एग्जाम (जेईई) एडवांस्ड इस बार 17 मई को दो पालियों में सुबह 9 से 12 और दोपहर 2:30 से 5:30 बजे तक होगा। इसके पेपर-1 और पेपर-2 के मॉक टेस्ट जेईई एडवांस्ड की वेबसाइट पर जारी कर दिए गए हैं। इस एग्जाम के जरिए देश की 23 आईआईटी की 12,463 सीटों पर एडमिशन मिलेगा। इस साल यह परीक्षा आईआईटी दिल्ली करा रही है। जेईई एडवांस्ड एग्जाम का पैटर्न एवं मार्किंग स्कीम पहले से निर्धारित नहीं होता है। हर साल पेपर पैटर्न और मार्किंग स्कीम में बदलाव किया जाता रहा है। इस बार एडवांस्ड में ये हैं बदलाव –
बदल सकेंगे विकल्प
मॉक टेस्ट में फिजिक्स, केमेस्ट्री और मैथ्स के तीन-तीन सेक्शन रखे गए हैं। परीक्षार्थी उत्तर पर टिक करने के बाद इसे चाहें तो बाद में बदल भी सकते हैं।
180 मिनट में खुद ही सबमिट हो जाएगा पेपर
जेईई एडवांस्ड की परीक्षा 180 मिनट की होती है। ऑनलाइन परीक्षा में यह व्यवस्था है कि, समय पूरा होने पर खुद ही पेपर सबमिट हो जाएगा। मॉक टेस्ट में भी यही व्यवस्था है।
कम्प्यूटर खराब होने पर रुक जाएगी स्टॉप वॉच
अगर किसी कारण से कम्प्यूटर हैंग हो जाता है तो उसका स्टॉप वॉच अपने आप रुक जाएगी। सिस्टम चालू होने पर वह दोबारा चालू होगा। तकनीकी अड़चनों के कारण कई बार स्टूडेंट्स एग्जाम हॉल में कम समय मिलने की शिकायत करते हैं, वैसी कोई भी समस्या स्टूडेंट्स को नहीं झेलनी पड़ेगी।

सीआरपीएफ जवानों ने गर्भवती को जंगल में 6 किमी चलकर पहुँचाया अस्पताल

बीजापुर : छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित घने जंगल में गर्भवती के लिए सीआरपीएफ जवान देवदूत साबित हुए। प्रसव पीड़ा से तड़प रही महिला को जवानों ने चारपाई पर लेटाया और कांधे पर उठाकर 6 किलोमीटर चलकर एंबुलेंस तक पहुंचाया। अस्पताल पहुंचने पर महिला ने बच्चे को जन्म दिया। दोनों स्वस्थ हैं। बीजापुर जिले के पडेडा गांव के जंगल में सीआरपीएफ टीम रोजाना की तरह पेट्रोलिंग पर थी। गांव के लोगों ने कमांडर अविनाश राय को बूंदी नाम की महिला के बीमार होने की जानकारी दी। बिना समय गंवाए वह महिला के घर पहुंचे तो उसकी हालत काफी खराब थी। वह प्रसव पीड़ा से तड़प रही थी। जंगली इलाका और सड़कें न होने के कारण इस इलाके में वाहन की कोई व्यवस्था नहीं रहती है। आसपास भी इलाज के प्रबंध नहीं हैं। ऐसे में जवानों ने खुद ही महिला की मदद करने का फैसला लिया। उन्होंने चारपाई पर महिला को लेटाया और सड़क की तरफ चल दिए, जो गांव से करीब 6 किलोमीटर दूर थी। जंगल का ऊबड़-खाबड़ रास्ता तय कर जवानों ने महिला को एंबुलेंस तक पहुंचाया। इसके बाद महिला को जिला अस्पताल में भर्ती कराया जा सका।

परीक्षा में पारदर्शिता हेतु सीबीएसई हुआ सख्त, जियो टैग से करेगा मॉनिटरिंग

नयी दिल्ली : सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंड्ररी एजुकेशन(सीबीएसई) परीक्षा में पारदर्शिता लाने के लिए अब जियो टैग की मदद लेगा। प्रायोगिक परीक्षा के निरीक्षण के लिए इस बार सख्ती दिखाते हुए बोर्ड मॉनिटरिंग के लिए जियो टैग का इस्तेमाल करेगा। इसके चलते बोर्ड ने सभी स्कूलों को निर्देश दिए कि परीक्षक को प्रायोगिक परीक्षा केंद्र पहुंचते ही बोर्ड को जियो टैग के साथ एक फोटो भेजनी होगी।
जियो टैग का इस्तेमाल किसी जगह की सही स्थिति पता करने के लिए किया है। जिसकी मदद से अब सीबीएसई को परीक्षा केंद्र की सही लोकेशन का पता चल जाएगा। परीक्षा के दौरान परीक्षक को तीन बार फोटो भेजनी होगी,जिसमें परीक्षक और निरीक्षक उपस्थिति भी दिखाई देनी चाहिए। यहीं नहीं परीक्षा खत्म होने पर बोर्ड को प्रायोगिक परीक्षा के नंबर भी भेजने होंगे। साथ ही प्रायोगिक परीक्षा की सभी प्रक्रियाएं एक ही दिन में पूरी करनी होंगी। परीक्षा खत्म होने के अगले दिन के लिए कोई बिंदु नहीं छोड़ा जाएगा।
परीक्षार्थियों के सामने खुलेंगे प्रश्नपत्र
सीबीएसई ने 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा में पारदर्शिता के लिए कई अहम बदलाव किए है। इसके तहत अब परीक्षा के दौरान प्रश्नपत्र के बंडल परीक्षार्थियों के सामने ही खोले जाएंगे। इसके बारे में सभी परीक्षा केंद्रों को जानकारी दे दी गई है। बोर्ड की मानें तो बैंक से प्रश्नपत्र लेने केंद्र अधीक्षक खुद जाएंगे। प्रश्नपत्र केंद्र तक पहुंचने और परीक्षार्थियों के सामने खोलने के दौरान उसकी मोबाइल से ट्रैकिंग होगी। केंद्र अधीक्षक के मोबाइल से प्रश्नपत्र कहां तक पहुंचा, इसकी ट्रैकिंग सीबीएसई द्वारा की जाएगी।
1 फरवरी से शुरू होगी टेली काउंसलिंग
1 फरवरी से सीबीएसई टेली काउंसलिंग शुरू करेगा, जिसमें स्टूडेंट्स सुबह 8 बजे से लेकर रात 10 बजे तक कॉस कर सकेंगे। सीबीएसई साल में दो फेज में काउंसलिंग करता है। पहले फेज की काउंसलिंग फरवरी से अप्रैल यानी बोर्ड परीक्षा से पहले होती है। इसके बाद दूसरे फेज की काउंसलिंग बोर्ड परीक्षा के बाद यानी मई और जून में की जाती है।
बोर्ड कर चुका एडमिड कार्ड जारी
इससे पहले सीबीएसई ने 10वीं और 12वीं की होने वाली परीक्षाओं के लिए एडमिड कार्ड जारी कर दिए है। ये कार्ड स्कूल से जारी किए जाएंगे। इस संबंध में सीबीएसई की ओर से सभी स्कूलों को निर्देश दिए जा चुके है। जारी किए गए एडमिड कार्ड को सिर्फ स्कूलों की यूजर आईडी और पासवर्ड से ही डाउनलोड किया जा सकेगा।

प्राकृतिक एंटी एजेंट से भरपूर टमाटर के इस्तेमाल से दूर होंगे डार्क सर्कल

आँखों के नीचे काले घेरे एक आम समस्या है। बढ़ते तनाव और अधिक देर तक टी.वी. स्क्रीन के आगे बैठे रहने से यह समस्या बढ़ती जा रही है। अगर आप भी आंखों के नीचे काले घेरे यानि डार्क सर्कल्स से परेशान हैं तो टमाटर आपके लिए काफी फायदेमंद हो सकता है। प्राकृतिक एंटी एजेंट से भरपूर टमाटर काले घेरों की समस्या से आपको बहुत जल्द राहत दिलाता है। आप टमाटर को तीन तरीकों से आंखों पर अप्लाय कर सकते हैं। आइए जानते हैं आंखों के लिए टमाटर इस्तेमाल करने के तरीके –
टमाटर और एलोवेरा
1 चम्मच टमाटर के रस में 2 टीस्पून एलोवेरा मिलाकर आंखों की मसाज करें। मसाज करने के बाद ऐलोवेरा को आंखों के नीचे 15 मिनट के लिए लगाकर छोड़ दें। ऐसा हफ्ते में 2 से 3 बार जरूर करें। कुछ ही दिनों में काले घेरों की समस्या खत्म हो जाएगी।
ये भी जानें- टमाटर में पाया जाने वाला बीटा- कैरोटीन और लाइकोपिन त्वचा को नुकसान से बचाने में मदद करता है, साथ ही त्वचा को ग्लोइंग और स्मूद भी बनाने में सहायक होता है।
टमाटर और नींबू
नींबू और टमाटर दोनों ही साइट्रिक एसिड से भरपूर फल हैं। ऐसे में दोनों का रस बराबर मात्रा में मिलाकर आंखों के नीचे लगाने से डार्क सर्कल्स से आपको राहत मिल सकती है।
ये भी जानें- टमाटर में प्राकृतिक ब्लीचिंग और व्हाइटनिंग गुण होते हैं, जो त्वचा की चमक बनाए रख सकते हैं। टमाटर विटामिन सी से भरपूर होता है। इसमें एस्ट्रिंजेंट गुण होते हैं, जो त्वचा के प्राकृतिक रंग को साफ करते हैं। इससे कुछ ही दिनों में डार्क सर्कल कम हो जाते हैं।
टमाटर और आलू
आलू का रस आपके लिए एंटी-एजिंग का काम करता है। आलू का रस निकालकर उसमें टमाटर का रस एक जैसा मिलाएं और आंखों के नीचे 15-20 मिनट के लिए लगाकर छोड़ दें। इस उपाय का इस्तेमाल एक दिन छोड़कर कर सकते हैं।
ये भी जानें- टमाटर में मौजूद फाइटोकेमिकल्स त्वचा की मृत कोशिकाओं को हटाता है। टमाटर और आलू डार्क सर्कल दूर करने के अलावा फेयरनेस बढ़ाने में भी सहायक होते हैं। टमाटर में मौजूद लाइकोपिन त्वचा को पराबैंगनी किरणों से बचाने में मदद कर सकता है।

प्लास्टिक कचरे को रीसाइकिल कर बनाया लकड़ी का विकल्प 

इससे बिल्डिंग ब्लॉक बन रहे हैं
टोरंटो : कनाडा की एक दूरदर्शी कंपनी ने शहरों के प्लास्टिक कचरे को रीसाइकिल करके लकड़ी का विकल्प तैयार किया है। नोवा स्कॉटिया प्रांत के हालीफैक्स में जमा होने वाले कुल प्लास्टिक कचरे के 80 फीसदी को अब एक ही कंपनी द्वारा रीसाइकिल किया जा रहा है। इस काम में लगी गुडवुड प्लास्टिक कंपनी प्लास्टिक कचरे से बिल्डिंग ब्लॉक बना रही है। प्लास्टिक से बने इन ब्लॉक को ड्रिल करने के साथ ही उनमें कील भी लगाई जा सकती है। इन्हें चिपकाया जा सकता है और वह सब कुछ किया जा सकता है, जो लकड़ी से होता है। हालीफैक्स में निकलने वाले बाकी 20 फीसदी प्लास्टिक कचरे को अन्य रीसाइकिल बाजारों में भेजा जाता है। कम्पनी के इस प्रयास से हॉलीफैक्स के प्रांतीय विधायक बहुत ही खुश है और वे इसे दोहरी सफलता मान रहे हैं। क्योंकि, इससे प्लास्टिक कचरा तो निपट ही रहा है साथ ही लकड़ी का विकल्प मिलने से पेड़ों की कटाई पर भी रोक लग सकेगी। हॉलीफैक्स के सॉलिड वेस्ट डिवीजन मैनेजर एंड्रयू फिलोपॉलुस ने कहा कि उन्हें इस बात की खुशी है कि एक स्थानीय कंपनी ही उनका 80 फीसदी प्लास्टिक कचरा खपा रही है।
कम्पनी ने दिसम्बर में ही गुडवुड ने नाम रखा
गुडवुड ने दिसम्बर में ही अपना यह नाम रखा है। उसी समय उसने सोबे ग्रॉसरी स्टोर के साथ मिलकर एक ऐसा पार्किंग एरिया तैयार किया था, जो पूरी तरह से प्लास्टिक के कचरे से बना हुआ था। गुडवुड के पास आने वाला अधिकतर कचरा प्लास्टिक की थैलियों के रूप में आता है। इसके अलावा के प्लास्टिक के जार व पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक को भी कंपनी रीसाइकिल करती है।
रीसाइकिल प्लास्टिक कुछ भी बना सकते हैं: माइक चैसी
गुडवुड के उपाध्यक्ष माइक चैसी बताते हैं कि उनके बनाए प्रोडक्ट से आप पिकनिक टेबल से लेकर पार्क की बेंच तक कुछ भी बना सकते हैं। उन्होंने कहा कि वह कोशिश करेंगे कि उनके बिजनेस मॉडल को अन्य क्षेत्रों में भी लागू किया जाए। हम अपनी विशेषज्ञता को अन्य लोगों को बताना चाहते हैं, क्योंकि प्लास्टिक के इस्तेमाल को पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता। जरूरत ऐसे तरीके तलाशने की है, जिससे यह प्लास्टिक ही संसाधन बन जाए।