कानपुर : साहित्यकार, कथाकार, नाटककार और उपन्यासकार पद्मश्री गिरिराज किशोर नहीं रहे। गत रविवार सुबह करीब 10 बजे कानपुर के सूटरगंज स्थित आवास पर अंतिम सांसे लीं। वह अपने पीछे पत्नी, दो बेटी और एक बेटे का भरापूरा परिवार छोड़ गए। उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में जन्मे गिरिराज किशोर उपन्यासकार, कथाकार, नाटककार के अलावा सशक्त आलोचक रहे। उपन्यास ढाईघर के लिए उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार दिया गया। पहला गिरमिटिया के लिए केके बिरला फाउंडेशन द्वारा व्यास सम्मान से नवाजा गया। 23 मार्च 2007 को साहित्य और शिक्षा के लिए तत्कालीन राष्ट्रपति स्व. डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने उन्हें देश के चौथे बड़े नागरिक सम्मान पद्म श्री से नवाजा।
वरिष्ठ साहित्यकार कृष्ण बलदेव वैद का निधन
नयी दिल्ली : वरिष्ठ साहित्यकार कृष्ण बलदेव वैद का निधन अमेरिका के न्यूयार्क में 92 साल की उम्र में हो गया है। 27 जुलाई, 1927 पंजाब के दिंगा में जन्मे वैद ने अंग्रेजी से स्नातकोत्तर और हार्वर्ड विश्वविद्यालय से पीएचडी की और अपनी लेखनी से कई पीढ़ियों को प्रभावित किया ।
कृष्ण बलदेव वैद की लेखनी में मनुष्य जीवन के नाटकीय सन्दर्भों की गहरी पहचान है। वैद को साहित्य अकादमी पुरस्कार से नवाजा गया। अपनी रचनाओं में उन्होंने सदा नए से नए और मौलिक-भाषाई प्रयोग किये हैं जो पाठक को ‘चमत्कृत’ करने के अलावा हिन्दी के आधुनिक-लेखन में एक खास शैली के मौलिक-आविष्कार की दृष्टि से विशेष अर्थपूर्ण हैं।
‘उसका बचपन’, ‘बिमल उर्फ़ जायें तो जायें कहां’, ‘तसरीन’, ‘दूसरा न कोई’, ‘दर्द ला दवा’, ‘गुज़रा हुआ ज़माना’, ‘काला कोलाज’, ‘नर नारी’, ‘माया लोक’, ‘एक नौकरानी की डायरी’ जैसे उपन्यासों से उन्होंने हिंदी साहित्य में अपनी एक अलग ही पहचान बनाई।
दक्षिण दिल्ली के ‘वसंत कुंज’ के निवासी वैद लम्बे अरसे से अमेरिका में अपनी दो विवाहित बेटियों के साथ रह रहे थे । उनकी लेखिका पत्नी चंपा वैद का कुछ बरस पहले ही निधन हुआ था |
कृष्ण बलदेव वैद अपने दो कालजयी उपन्यासों- ‘उसका बचपन’ और ‘विमल उर्फ़ जाएँ तो जाएँ’ कहाँ के लिए सर्वाधिक चर्चित हुए हैं। एक मुलाक़ात में उन्होंने कहा था- “साहित्य में डलनेस को बहुत महत्व दिया जाता है। भारी-भरकम और गंभीरता को महत्व दिया जाता है। आलम यह है कि भीगी-भीगी तान और भिंची-भिंची सी मुस्कान पसंद की जाती है। और यह भी कि हिन्दी में अब भी शिल्प को शक की निगाह से देखा जाता है।
उन्होंने कहा था, ‘‘बिमल उर्फ जाएँ तो जाएँ कहाँ’’ को अश्लील कहकर खारिज किया गया। मुझ पर विदेशी लेखकों की नकल का आरोप लगाया गया, लेकिन मैं अपनी अवहेलना या किसी बहसबाजी में नहीं पड़ा। अब मैं 82 का हो गया हूँ और बतौर लेखक मैं मानता हूँ कि मेरा कोई नुकसान नहीं कर सका। जैसा लिखना चाहता, वैसा लिखा। जैसे प्रयोग करना चाहे किए।”
क्वीन ऑफ कैबरे” आरती दास का निधन
कोलकाता :‘मिस शेफाली’ के नाम से मशहूर जानी मानी नृत्यांगना एवं अदाकारा आरती दास का दिल का दौरा पड़ने से गुरुवार को निधन हो गया। वह 76 वर्ष की थी। उनका निधन पश्चिम बंगाल में 24 परागना जिला के सोदपुर स्थित उनके घर पर हुआ।
‘क्वीन ऑफ कैबरे’ 60-70 के दशक में अपने नृत्य के लिए खासी मशहूर थी। उनकी भतीजी एल्वीन शेफाली ने कहा, ‘‘ उनके सीने में दर्द था और बेचैनी हो रही थी। डॉक्टरों ने बताया कि दिल का दौरा पड़ने के कारण उनका निधन हुआ।’’
सूत्रों ने बताया कि आरती को पिछले कुछ समय से किडनी से जुड़ी समस्याएं थी। मशहूर निर्दशक सत्यजीत रे के साथ उन्होंने उनकी ‘प्रतिद्वंदी’ और ‘सीमाबद्ध’ जैसी फिल्मों में काम किया था।
कोलकाता पुस्तक मेले में पुस्तक लोकार्पण तथा कविता पाठ
कोलकाता : आनंद प्रकाशन के स्टॉल पर कालीप्रसाद जायसवाल के काव्य संग्रह ‘तुम नहीं थे’, पंकज साहा के व्यंग्य संग्रह ‘हा ! बसंत ! ‘ और ‘जन्नत’ तथा राजू कुमार के कविता संग्रह ‘संवेदना के क्षण’ पर परिचर्चा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए आलोचक शंभुनाथ ने कहा कि पंकज साहा के व्यंग्य में हास्य और प्रहार का मिश्रण है ।कालीप्रसाद जायसवाल के काव्य संग्रह पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी कविताओं में जीवन के विविध आयामों का जिक्र है।
इस अवसर पर मुकुंद शर्मा, राजेश सिंह, दीपा ओझा, प्रीति साव, रूपेश कुमार यादव, पंकज सिंह, सूर्यदेव रॉय ‘सोनू’, राहुल गौड़, रूपल साव, मधु सिंह, सुमन शर्मा, आशा पांडेय, आनंद गुप्ता, पंकज साहा, सेराज खान बातिश, आशुतोष, मंजू श्रीवास्तव, शैलेश गुप्ता, अनिला राखेचा, ज्योति शोभा, अमरचंद जायसवाल, ऋतु तिवारी, महेश जायसवाल, मीता दास, रामनिवास द्विवेदी, मृत्युंजय, नीलम अग्रवाल और कालीप्रसाद जायसवाल ने काव्य पाठ किया। कार्यक्रम का सफल संचालन संजय जायसवाल और धन्यवाद ज्ञापन दिनेश त्रिपाठी ने किया।
बीएचएस में आयोजित हुई सरस्वती पूजा
कोलकाता : विद्या और ज्ञान की देवी सरस्वती की आराधना हाल ही में बिड़ला हाई स्कूल में आयोजित की गयी। गत 29 जनवरी को वसन्त पंचमी के दिन सभी वासन्ती परिधान में वसन्त का स्वागत कर रहे थे। सरस्वती पूजा समारोह में बिड़ला हाई स्कूल के महासचिव ब्रिगेडियर वी.एन. चतुर्वेदी, बीएचएस के सीनियर सेक्शन की प्रिंसिपल लवलीन सैगल तथा जूनिय़र सेक्शन की हेड मिस्ट्रेस फरीदा सिंह उपस्थित रहे। परम्परा और संस्कृति की भव्यता को दर्शाती सजावट समारोह की भव्यता बढ़ा रही थी। इस अवसर पर विद्यार्थियों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किये गये और अन्त में प्रसाद वितरण किया गया।
रपट – सोनालिका चाकी घोष
शुभजिता युवा प्रतिभा सम्मान – प्रतिभागी – सौरभ झा
शिक्षण संस्थान – खिदिरपुर कॉलेज
कविता – ईश्वर के घर लूट हुई
कवि – गोपाल प्रसाद व्यास
शुभजिता युवा प्रतिभा सम्मान – प्रतिभागी – प्रियंका सिंह
शिक्षण संस्थान – कलकत्ता विश्वविद्यालय
प्रतियोगिता – निबन्ध
विषय – हमारे तटरक्षक
हमारे तटरक्षक
विश्व में भारतवर्ष एकता का दर्पण है।भिन्न भिन्न जातियों, भाषाओं और संस्कृति के लोग एकता की जड़ों को कायम रखने में अपनी अहम भूमिका निभा रहे हैं। किसी देश के विकास में देश के नौसेना महत्वपूर्ण कड़ी है,उन के लिए परिचय की आवश्यकता नहीं। उन नौसेनाओं को “देश के रक्षक” या यूं कहें देश की आत्मा कहा जाता है,उन नौसेना में एक शक्ति ‘तटरक्षक’ है।जैसा कि उसके शाब्दिक अर्थ से पता लगता है ‘किनारों के रक्षक’ । कहीं न कहीं सभी देशों को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर जोड़ने का माध्यम समुद्र भी है जो प्राकृतिक वरदान है। पश्चिम में अरब सागर, पूर्व में बंगाल की खाड़ी एवं दक्षिण में हिंद महासागर लगी हुई है,इन्हीं समुद्री-पथो की सुरक्षा,गहरे समुद्र में लूट-पात , ऊर्जा सुरक्षा, आंतकवाद आदि से देश की रक्षा की तटरक्षक करते हैं। इसलिए समुद्र क्षेत्र से भारत की रक्षा के लिए तटरक्षक कानून सन्1978 में लागू किया गया, साथ ही साथ 18अगस्त 1978 में भारतीय तटरक्षक की स्थापना की गयी। जलीय क्षेत्र तथा विशिष्ट आर्थिक क्षेत्रों की निगरानी करने के साथ तटरक्षक का यह दायित्व रहता है कि वह बल के कार्यों में खोज तथा बचाव करने के अलावा अपने इलाके और व्यापार की रक्षा करें। तटरक्षक की की क्षमता रहती है कि वह मित्रता का साथ बढाकर और अंतरराष्ट्रीय सहयोग करके देश को सुरक्षित रखें, समुद्री वातावरण को प्रदूषण मुक्त बनाने साथ ही साथ राष्ट्रीय हितों का ध्यान रखें।

एक बात स्पष्ट हो जाती है कि सभी तटरक्षक देशभक्त होने के साथ-साथ देश के विकास के लिए कार्यरत भी है। तटरक्षक के कमान तटरक्षक महानिदेशक है। इनका मुख्यालय नयी दिल्ली में है। इनके पास सबसे महत्वपूर्ण शक्ति इनकी एकाग्रता है जिसके कारण आने वाले खतरों का सामना बलपूर्वक करते हैं। हमारे तटरक्षक के कर्त्तव्यों के अलावा कुछ बुनियादी कार्य भी है जैसे-१.प्राकृतिक और कृत्रिम दीपों और समुद्रों की रक्षा,२.भारत के समुद्री कानूनों को लागू करना,३.मछुआरों को सुरक्षा प्रदान करना और ४.युद्ध के समय नौसेना की सहायता।
यदि कहा जाए हमारे तटरक्षक औपचारिक और अनौपचारिक रूप से देश के स्तंभों में से एक स्तंभ है तो अनायास प्रतीत जान नहीं पड़ता क्योंकि वह कर्त्तव्यों का पालन करते हुए जनता जैसे व्यापारों मछुआरों और क्षेत्रिय इलाकों की जिम्मेदारी उन्ही के कंधों पर है।
अगर तटरक्षक बलों की उद्देश्यों की बात करें,तो देश में आने वाले आंतकवाद,जो समुद्री मार्ग के जरिए भारत को अपना निशाना बनाते हैं उनके लक्ष्यों को असफल करना साथ ही साथ समुद्र तट के मार्गों को सुरक्षित रखते हुए देश की उन्नति में अपना सहयोग देना यह उनका सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण लक्ष्य या उद्देश्य कहा जा सकता है। वह इस लक्ष्य के पूर्ति के लिए अपने प्राणों का बलिदान भी करने में संकोच नहीं करते, साथ वहअपने घर परिवार से दूर रहकर देश की सुरक्षा,स्वाभिमान,और अपने कर्त्तव्यों का पालन करने के लिए कभी पीछे नहीं हटते।
एक बात में कहा जाए तो हमारे तटरक्षक बल देश का अभिमान है। जिसके सहारे हम आप अपने घरों में खुशियां मनाते हैं और सुरक्षित भी है, ऐसे देश के वीरों के लिए दिल में सम्मान हो और भारतवर्ष के निवासी होने के नाते अपने अपने कर्त्तव्यों का पालन करें। हमारे तटरक्षक के सम्मान के लिए कुछ पंक्तियां..
“इसके कर्मी है देश रक्षक
निभाते हैं अपना कर्त्तव्य
इन्हें ना चाहिए कोई तख्ताज
केवल देश करे इनका सम्मान
प्रेम और बलिदान है
इनकी रग- रग में
इसलिए ये कहलाते हैं
देशभक्त”।।।।।।।
रियल गर्लफ्रेंड’ उपन्पयास की खरीद पर आकर्षक ऑफर
यह उपन्यास युवाओं को केन्द्र में रखकर लिखा गया है जो सोशल मीडिया की चकाचौंध में भ्रमित युवती की कहानी है जो आगे चलकर अपने मनोचिकित्सक की सहायता से प्रेम के वास्तविक रूप को समझती है और उसे अपना प्रेम भी मिलता है। इसके साथ ही मानसिक अवसाद जैसी समस्या और मनोचिकित्सा को लेकर जो हिचक है, उपन्यास में इस पर भी बात की गयी है। उपन्यास पैरोकार पब्लिकेशन्स ने प्रकाशित किया है और इसकी कीमत 250 रुपये है। रियल गर्लफ्रेंड का प्रचार सहयोगी शुभ सृजन नेटवर्क है।’ पुस्तक अमेजन पर भी शीघ्र उपलब्ध होगी। आप लेखक से 98316 74489 नम्बर पर सम्पर्क कर सकते हैं।
संलग्न चित्र – लोकार्पण तथा पुस्तक का आवरण चित्र
उपन्यासकार के बारे में –
अनवर हुसैन दैनिक जागरण (कोलकाता) में काम कर चुके हैं, वरिष्ठ पत्रकार हैं।इससे पहले उन्होंने कई प्रतिष्ठित अखबारों में भी इन्होंने सेवाएँ दी हैं तथा कई पत्र – पत्रिकाओं में इनकी रचनाएँ प्रकाशित होती रही हैं। इन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से फिल्म एंड टेलिविजन तथा सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलिविजन इंस्टीट्यूट से स्क्रिप्ट राइटिंग (पटकथा लेखन) का शॉर्ट टर्म फाउंडेशन कोर्स किय़ा है। ‘रियल गर्लफ्रेंड’ उनका पहला उपन्यास है। वह कहते हैं, ‘अच्छे लेखकों की कमी है । लेखक अच्छा लिखेगा तो पाठक उसे खोज कर पढ़ेंगे। मेरे पहले उपन्यास को पढ़ने के लिए आम पाठकों में जिस तरह उत्सुकता पैदा हुई है उससे मुझे भी आगे और बेहतर लिखने की प्रेरणा मिली है। एक लेखक के तौर पर आम पाठकों की उम्मीदों पर खरा उतरने का मेरा प्रयास जारी रहेगा। अभी तो यात्रा शुरू हुई है ।’
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स्वास्तिक अपार्टमेंट
पीरतला, आगरपाड़ा
कोलकाता 700109
मोब, 8902233369
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तथा
शुभ सृजन नेटवर्क
सुषमा त्रिपाठी कनुप्रिया – 9163986473
आभासी दुनिया की चकाचौंध में सच्चे प्रेम को परिभाषित करता है उपन्यास ‘रियल गर्लफ्रेंड’
कोलकाता : अन्तरराष्ट्रीय कोलकाता पुस्तक मेले में 7 फरवरी 2020 को पत्रकार अनवर हुसैन के पहले उपन्यास ‘रियल गर्लफ्रेंड’ का लोकार्पण वाणी प्रकाशन के स्टॉल – 414 पर किया गया। इस अवसर पर एक परिचर्चा भी आयोजित की गयी जिसमें वक्ताओं ने सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के बीच युवाओं और उपन्यास में उनके चित्रण पर अपनी बात रखी। उपन्यास पैरोकार पब्लिकेशन द्वारा प्रकाशित किया गया है और इसका लोकार्पण पैरोकार पब्लिकेशन की ओर से रोयजादा खातून ने किया। इस अवसर पर पुस्तक पर विचार रखते हुए श्रीश चन्द्र कॉलेज के प्रोफेसर डॉ. कार्तिक चौधरी ने कहा कि जीवन में गतिशील होना जरूरी है लेकिन गतिशीलता ही जीवन हो, ऐसा जरूरी नहीं। कभी -कभी ठहराव सकारात्मकता को भी व्यक्त करता है। यह सकारात्मक सोच ही अनवर हुसैन के उपन्यास ‘रियल गर्लफ्रेंड’ में है। उपन्यास समाज शास्त्रीय अध्ययन के भी करीब है। लेखक ने आज के समय के असन्तोष, निराशा, खीज को प्रेम के माध्यम से व्यक्त करने का प्रयास किया है। इस अवसर पर उपस्थित वरिष्ठ साहित्यकार कपिल आर्य तथा वरिष्ठ पत्रकार रामाशीष ने भी उपन्यासकार अनवर हुसैन को शुभकामनाएँ दीं और उम्मीद जतायी कि उपन्यास अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचेगा। । लेखकीय वक्तव्य रखते हुए अनवर हुसैन ने कहा. ‘स्मार्ट फोन और डिजिटल के दौर में जहां एक क्लिक में रिश्ते बनते और बिगड़ते हैं वहां प्रेम भी इससे अछूता नहीं है । ऐसे नाजुक क्षण में सच्चे प्रेम के अस्तित्व को बनाए रखने के लिए मेरा उपन्यास नयी पीढ़ी खासकर युवक युवतियों को जीवन का नया संदेश देता है और प्रेम की चाह में भटकने वालों को सही मार्ग भी दिखाता है । आज के दौर में हर व्यक्ति किसी न किसी मानसिक समस्या से परेशान है। ऐसी स्थिति में युवक- युवतियां अवसादग्रस्त होकर पथ से भटक जाते हैं और उनका जीवन अंततः अंधकारमय हो जाता है। उपन्यास में ऐसी स्थिति से निजात पाने के लिए पात्रों खासकर नायक नायिका के आंतरिक अंतर्द्वद्व के परिप्रेक्ष्य में सलाह भी दी गयी है। पार्वती शॉ ने उपन्यास के कुछ अंश पढ़े। उपन्यास के बारे में पूर्व टीवी पत्रकार सादिया अजीम, पूजा गौतम, महात्मा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा में क्षेत्रीय केंद्र कोलकाता के प्रभारी डॉ. सुनील कुमार, विद्यासागर कॉलेज के सहायक प्रोफेसर डॉ. मोहम्मद आसिफ आलम और अन्य विशिष्ट लोगों ने ने भी अपने विचार रखे। धन्यवाद ज्ञापन वाणी प्रकाशन की ओर से चन्दन चौधरी ने दिया।
प्रो. सोमा बंद्योपाध्याय को अम्बेडर ग्रेट विजडम जेम अवार्ड
कोलकाता : प्रो. सोमा बंद्योपाध्याय को इस वर्ष का अम्बेडर ग्रेट विजडम जेम अवार्ड प्रदान किया गया है। इसके साथ ही उनको सुसम वर्ल्ड पीस अवार्ड से भी नवाज़ा गया है। प्रो. सोमा बंद्योपाध्याय वेस्ट बंगाल यूनिवर्सिटी ऑफ टीचर्स ट्रेनिंग, एजूकेशन ऐंड ऐडमिनिस्ट्रेशन के साथ संस्कृत विश्वविद्यालय की भी वाइस चांसलर हैं।

उन्होंने कई राष्ट्रीय और अन्तरराष्ट्रीय सम्मेलनों, संगोष्ठियों और कार्यशालाओं में सक्रिय रूप से वक्तव्य एवं आलेख-पाठ किया है। प्रो. बंद्योपाध्याय को ‘साहित्य अकादेमी का अनुवाद पुरस्कार’ (2013), ‘प्रयाग साहित्य सम्मेलन सम्मान’ (2013), मीरा स्मृति संस्थान द्वारा सम्मानित (2014), सन्मार्ग द्वारा ‘अपराजिता सम्मान’ (शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए) (2016) समेत कई पुरस्कार प्रदान किये जा चुके हैं।




