Friday, October 16, 2026
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250 किमी दूर पहुंचकर मरीजों का इलाज कर रही 8 महीने की गर्भवती नर्स

नयी दिल्ली : कोरोना संकट के बीच ड्यूटी निभा रहे नायकों की तारीफ हर जगह हो रही हैं। इनमें दो मांएं ऐसी भी हैं, जो शारीरिक चुनौतियों के बीच भी ड्यूटी पर डटी हुई हैं। विनोथिनी और नैना, दोनों कर्मयोद्धा हैं, मुश्किल हालात में भी अपने काम से सेवा करने में जुटी हैं। वहीं, इंदौर के तुकोगंज थाने के टीआई निर्मल श्रीवास भी ऐसा ही कुछ कर रहे हैं ड्यूटी और परिवार के प्रति जिम्मेदारी को निभाने के लिए।
तमिलनाडु में एक नर्स विनोथिनी, जो खुद आठ महीने की गर्भवती हैं, कोरोना रोगियों के इलाज में मदद करने के लिए तिरुचिरा से रामनाथपुरम की 250 किमी की दूरी तय कर पहुंच गईं। 25 साल की विनोथिनी त्रिची के एक निजी अस्पताल में नर्स हैं, लेकिन हालात देखते हुए प्रशासन ने उन्हें कोरोना रोगियों के इलाज में जुटी टीम में शामिल किया है। वो बताती हैं कि अफसरों को नहीं पता था कि मैं गर्भवती हूँ। जब उन्हें पता चला तो उन्होंने मेरा नाम हटा दिया। लेकिन मैं इस संकट की घड़ी में पीछे नहीं हटना चाहती थी। मैंने अधिकारियों से बात की, लेकिन वे नहीं माने। बाद में स्थानीय मंत्री के दखल से मुझे लॉकडाउन में निकलने के लिए विशेष पास दिया गया। इसके बाद मैं पति के साथ कार से प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पहुँचीं। अब सेंटर में मरीजों की देखभाल कर रही हूँ।

सिर्फ एक बार खाना खाने घर जाते हैं टीआई, बेटी दूर खड़ी बस देखती है

डिलीवरी करीब, फिर भी रोज 6 घंटे ड्यूटी पर रहती हैं सफाईकर्मी नैना
हीरे की नगरी सूरत इन दिनों लॉकडाउन है, लेकिन सफाई कर्मचारी नैना परमार 9 माह की गर्भवती होने के बावजूद रोज ड्यूटी पर पहुंच जाती हैं। वो भी तब, जब उनकी डिलीवरी कभी भी हो सकती है। वे अपनी 5 से 6 घंटे की ड्यूटी के दौरान लोगों से लॉकडाउन का पालन करने की अपील भी करती हैं। साथ ही यह भी बताना नहीं भूलती कि कोरोनावायरस को हराने के लिए यह कितना जरूरी है। नैना की पांच साल की एक बच्ची भी है। पति स्कूल वैन चलाते हैं, लेकिन इन दिनों घर पर ही हैं। नैना का कुल 6 लोगों का परिवार है, जिनकी जिम्मेदारी भी वे बखूबी निभा रही हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छता अभियान से प्रेरित होकर उन्होंने यह काम चुना था। वे कहती हैं- ‘मेरे लिए ड्यूटी सबसे पहले हैं। कोरोना तो अब आया है, लेकिन साफ-सफाई रखना भविष्य में भी कई बीमारियों से बचाता है इसलिए मुझे अपना काम करने की प्रेरणा मिलती है।’
इंदौर में तुकोगमज के टीआई निर्मल श्रीवास का घर थाने के पास ही है। लेकिन कोरोनावायरस की ड्यूटी के चलते रात में घर न जाकर होटल में रुकते हैं। पिछले 5 दिन से ऐसा ही कर रहे हैं। दिन में सिर्फ एक बार भोजन करने घर जाते हैं। इस दौरान भी परिवार से दूर बैठते हैं। शनिवार को जब वे भोजन करने घर पहुंचे, तब पत्नी ने ये मार्मिक पल कैमरे मे कैद किया। रात को पापा को अपने बिस्तर पर ना पाकर मासूम बेटी काफी देर तक सोती नही है।

आईआईटी मद्रास ने शुरू किया साइबर सिक्‍योर‍िटी कोर्स

  चेन्नई : इंडियन इंस्‍टीट्यूट ऑफ टेक्‍नोलॉजी (आईआईटी) मद्रास ने एक साइबर सिक्‍योर‍िटी कोर्स लॉन्‍च किया है। इंस्‍टीट्यूट के डिजिटल स्किल्‍स एकेडमी में शुरू हुए इस कोर्स का फायदा कानून विभाग, नेटवर्क एडमिनिस्‍ट्रेशन, प्राइवेट और पब्‍लिक सेक्‍टर के नेटवर्क सिक्‍योरिटी एक्‍सपर्ट, सिक्‍यूरिटी प्रोफेशनल के साथ ही आम जनता को भी मिलेगा। ‘सर्टिफाइड साइबर वॉरियर्स (सीसीडब्ल्यू) 3.0’ नामक यह कोर्स 120 घंटे का होगा, जिसके लिए वीकएंड में लाइव ऑनलाइन क्‍लासेज होंगी।”
सिक्‍योरिटी सेट-अप टूल की मिलेगी जानकारी
इस कोर्स का मकसद डेटा चोरी और संवेदनशील सूचनाओं को लीक होने से रोकना है। इसकी महत्‍ता के बारे में फोरेंसिक इंटेलिजेंस सर्विलांस और सिक्‍योरिटी टेक्‍नोलॉजी (एफआईएसएसटी) के चीफ मिशन इंटीग्रेटर और इनोवेटर सी मोहन राम ने कहा, “सीसीडब्‍ल्‍यू 3.0 कोर्स के तहत सिक्‍योरिटी सेट-अप टूल के बारे में जानकारी दी जाएगी। साथ ही किसी भी तरह के हमले को जल्‍दी कैसे ठीक किया जाए, इसके बारे में भी बताया जाएगा।
कोर्स के लिए 16 मार्च से ही रजिस्‍ट्रेशन प्रोसेस शुरू हो चुकी है। आईआईटी-एम और आईआईआईडीएम- कांचीपुरम की विशेषज्ञ फैक्‍लटी इस कोर्स को पढ़ाएंगी। वहीं, केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने बुधवार को इंडियन इंस्‍टीट्यूट ऑफ टेक्‍नोलॉजी के निदेशकों के साथ बैठक कर ऑनलाइन शिक्षण के लिए सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को प्रशिक्षित करने के लिए कहा है।

13 साल पहले जिन स्कूलों को नक्सलियों ने तोड़ा था, अब उन्हीं के हाथों दोबारा रखी जाएगी नींव

दंतेवाड़ा : पोटाली इलाके के आश्रम-स्कूलों को 13 साल पहले जिन नक्सलियों ने ध्वस्त किया था, अब उन्हीं के हाथों दोबारा इन आश्रमों की नींव रखी जाएगी और इन्हीं की सुरक्षा में काम भी होगा। ईंट पर इनके नाम और शिक्षा का संदेश देने वाले स्लोगन भी होंगे। इतना ही नहीं, जिस जगह आश्रम भवन तोड़ा था, नया भवन भी उसी जगह ही बनाया जाएगा। पुलिस ने इसके लिए खास रणनीति तैयार की है।
जिन पूर्व नक्सलियों के हाथों आश्रम भवन की नींव रखी जाएगी। उनमें क्षेत्र के पूर्व बड़े नक्सली लीडर संजय पोटाम उर्फ बदरू, किरण शामिल हैं। इनमें सबसे पुराना बदरू है। जिसने 2013 में सरेंडर किया था। वह इस इलाके का पहला नक्सली है जिसने आत्मसमर्पण किया है। अभी ये पुलिस की डीआरजी टीम में निरीक्षक है। दंतेवाड़ा के नक्सल ऑपरेशन में बदरू की सबसे बड़ी भूमिका है। एसपी डॉ. अभिषेक पल्लव ने बताया कि पोटाली में आश्रम बनाने के लिए टेंडर प्रक्रिया चल रही है। जिन्होंने स्कूल-आश्रम को तोड़ा था, उन्हीं सरेंडर नक्सलियों से नींव रखवाई जाएगी। टेंडर प्रक्रिया पूरी होते ही जल्द काम शुरू होगा।
सलवा जूड़ूम की शुरुआत के बाद नक्सलियों ने तोड़ा था आश्रम : सलवा जुड़ूम की शुरुआत के बाद नक्सलियों ने बस्तर के कई इलाकों में जमकर उत्पात मचाया था। इनमें से पोटाली का इलाका भी है। यहां के आश्रम-स्कूल, अस्पताल, बिजली खंभों को तोड़ दिया था। आश्रम टूटने के बाद पोटाली इलाके व अन्य जगहों के 800 से ज़्यादा बच्चों के सामने पढ़ाई का बड़ा संकट खड़ा हुआ। इन्हें दूसरे आश्रमों में शिफ्ट करना पड़ा था।
इस इलाके के युवाओं को जोड़ने और नक्सलियों को सरेंडर कराने की कवायद : पोटाली-बुरगुम इलाके के नए युवाओं को जोड़ने व नक्सलियों को सरेंडर कराने की भी कवायद साथ-साथ चल रही है, ताकि इस इलाके में तेज गति से विकास काम हों और नक्सलियों की जड़ें उखड़ जाएं। पुलिस के लिए गोपनीय सैनिक के रूप में काम कर रहे अभी 14-15 युवा व सरेंडर नक्सली इसी इलाके के हैं, जिनकी मदद ली जा रही है।
सुरक्षा की गारंटी मिली तो 8 ठेकेदारों ने दिखाई रुचि
दंतेवाड़ा के जो 11 आश्रम व स्कूल शिफ्टिंग में चल रहे हैं, उनमें ज्यादातर पोटाली इलाके के ही हैं। पोटाली में कैंप खुलते ही आश्रम बनाने की स्वीकृति मिली, टेंडर हुआ। दो बार टेंडर के बाद भी किसी ने जहमत नहीं उठाई। लेकिन एसपी ने जब सुरक्षा की गारंटी दी तो 8 ठेकेदारों ने टेंडर प्रक्रिया में भाग लिया। अब इसे जल्द ही शुरू कराने की तैयारी है। इस इलाके के ग्रामीण भी लगातार दोबारा आश्रम शुरू कराने की मांग लगातार कर रहे थे।

782 बच्चों के बनाए 10 वाट्सएप ग्रुप, इसी पर शिक्षक ले रहे ई-क्लास

दंतेवाड़ा : लॉकडाउन के बीच बच्चों से जुड़े रहने और उन्हें पढ़ाई से जोड़े रखने कुम्हाररास डीएवी स्कूल के प्राचार्य ने एक नया तरीका निकाला है। यहाँ के शिक्षकों ने कक्षा 3 से 12वीं तक के बच्चों के 10 अलग- अलग व्हाट्सएप ग्रुप तैयार किया है। इन ग्रुप में कक्षावार 782 बच्चों को जोड़ा है। इसके जरिये एक अप्रैल से बच्चों की पढ़ाई की शुरुआत भी कर दी गई है। इस तैयारी के लिए करीब हफ्तेभर का समय लग गया। हफ्तेभर में प्राचार्य असित बोस के साथ मिलकर शिक्षकों ने तैयारी की, बच्चों के परिजनों का मोबाइल नंबर जुगाड़ा और फिर कक्षावार ग्रुप तैयार किया। यह जिले का पहला स्कूल है, जहाँ के शिक्षकों ने डीएवी प्रखंड डीके सहायक क्षेत्रीय अधिकारी सुनील कुमार, प्रशांत कुमार के सुझाव पर लॉकडाउन के बीच भी बच्चों को पढ़ाई व खुद से जोड़े रखने ई क्लासेस का प्रयास कर रहे हैं। सभी ग्रुप्स में प्राचार्य असित बोस खुद जुड़े रहकर मॉनिटरिंग भी कर रहे हैं। इस पहल की परिजन भी तारीफ कर रहे हैं। अच्छी बात ये है कि बच्चों ने भी शिक्षकों के बनाए वीडियो लेसन देखकर पढ़ाई की शुरुआत भी कर दी है। गीदम की स्नेहा गणेश पिल्ले ने बताया कि बेटा 11 वी में पढ़ाई कर रहा है। लॉकडाउन के बाद बच्चों का पढ़ाई में मन नहीं लगता, स्कूल, कोचिंग सबसे दूर हैं। टीचर्स की इस पहल से बच्चे एक बार फिर पढ़ाई से जुड़ेंगे।
बच्चों की पढ़ाई के लिए विषय शिक्षक वीडियो पाठ तैयार कर रहे हैं। इस वीडियो को संबंधित कक्षा के क्लास टीचर के पास विषय शिक्षक व्हाट्सएप के ज़रिए भेज रहे हैं। इन वीडियो को क्लास टीचर बच्चों के व्हाट्सएप ग्रुप में शेयर कर रहे हैं। बच्चों से कहा जा रहा है कि वे इसे देखें। असाइनमेंट तैयार कर टीचर्स के पास वापस भेजें।
दंतेवाड़ा के 40,000 बच्चों को जनरल प्रमोशन
इधर प्रदेश सरकार ने पहली से 9वी व 11वी कक्षाओं के बच्चों को जनरल प्रमोशन दिए जाने की घोषणा की है। इस घोषणा के बाद दंतेवाड़ा जिले की स्कूलों में पढ़ने वाले 40000 बच्चों को फायदा मिला है। इनमें पहली से आठवीं तक 37000, 9वीं के 3322 और 11वीं के 2172 बच्चों को जनरल प्रमोशन मिलेगा।

प्राचार्य-शिक्षकों को इस तरह आया यह आइडिया
डीएवी स्कूल के प्राचार्य असित बोस ने बताया कि कोरोना के कारण बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए स्कूल की छुट्टी कर दी गई है। घर पर बच्चे समय यूं ही गंवा रहे हैं। लंबे वक्त तक पढ़ाई से दूर रहने के बाद समस्या आती है। बच्चे पढ़ाई से दूर न हों घर पर कम से कम एक घंटा ही ई क्लासेस के ज़रिए पढ़ लें, बच्चे पढ़ाई से जुड़ें रहें। इसलिए हमने यह शुरुआत की है और जब स्कूलें खुलें तो हम पढ़ाई में लक्ष्य से भी आगे निकल गए तो यह बड़ी उपलब्धि होगी।

ग्रुप में जो नहीं जुड़ पाए उनके लिए भी निकाला तरीका
10 व्हाट्सएप ग्रुप में 782बच्चों को जोड़ा गया है। लेकिन अभी कुछ ही बच्चे ऐसे हैं। जो जिले के दूरस्थ गाँवों में रहते हैं, जहां नेटवर्क की समस्या है। उनके लिए भी तरीका है कि आसपास के बच्चों की मदद से उन्हें भी यह दिखाया जाएगा।

विप्रो और अजीम प्रेमजी फाउंडेशन ने दिए कोरोनावायरस संकट से निपटने के लिए 1,125 करोड़ रुपये

नोएडा : विप्रो लिमिटेड, विप्रो एंटरप्राइजेज लिमिटेड और अजीम प्रेमजी फाउंडेशन ने संयुक्त रूप से कोरोनावायरस संकट से निपटने के लिए 1,125 करोड़ रुपये की प्रतिबद्धता जताई। कंपनी द्वारा जारी एक बयान में कहा गया कि इस राशि से चिकित्सा व सेवा के काम में अगली कतार में लगे लोगों को और समाज पर और खासतौर से सबसे कमजोर तबके के लोगों पर कोरोनावायरस के असर को दूर करने में मदद पहुँचाई जाएगी। कुल 1,125 करोड़ रुपये में से विप्रो लिमिटेड ने 100 करोड़ रुपये, विप्रो एंटरप्राइजेज लिमिटेड ने 25 करोड़ रुपये और अजीम प्रेमजी फाउंडेशन ने 1,000 करोड़ रुपये का योगदान किया है।
विप्रो के सीएसआर खर्च से अलग है यह राशि
बयान में कहा गया है कि यह राशि विप्रो की सालाना कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी (सीएसआर) गतिविधियों और अजीम प्रेमजी फाउंडेशन की फिलांथ्रोपिक गतिविधियों पर होने वाले खर्च से अलग है। इस राशि से निश्चित इलाके में वायरस से उपजी समस्या से जूझ रहे लोगों को सहायता पहुँचाई जाएगी और स्वास्थ्य क्षमता का विस्तार किया जाएगा, जिसमें कोरोवायरस महामारी की रोकथाम और इससे संक्रमित लोगों का इलाज भी शामिल है। अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के प्रवक्ता ने कहा कि आधुनिक वैश्विक समाज ने इस संकट का सामना नहीं किया है। हमें इस संकट से निपटने के लिए और विशेष रूप से वंचित लोगों पर इसके मानव प्रभाव को कम करने के लिए मिलकर काम करना चाहिए। फाउंडेशन की 1,600 सदस्यीय टीम देशभर में 350 मजबूत सिविल सोसाइटी साझेदारों के साथ मिलकर सरकारी संस्थानों के साथ समन्वय स्थापित करेगी ताकि लोगों को मदद मुहैया कराने के लिए धन का उपयोग किया जा सके। इस प्रयास में विप्रो की तकनीकी दक्षता, सोर्सिंग प्रणाली, इन्फ्रास्ट्रक्चर और वितरण रीच का पूरी तरह से उपयोग किया जाएगा।

कई कम्पनियां आर्थिक मदद करने के लिए आगे आईं

कोरोनावायरस का मुकाबला करने में सरकार को और आम लोगों को मदद पहुंचाने के लिए कई कंपनियां आगे आई हैं।
टाटा ट्र्रस्ट्स और टाटा समूह ने संयुक्त रूप से सर्वाधिक 1,500 करोड़ रुपए खर्च करने का वादा किया है।
रिलायंस इंडस्ट्रीज के मुखिया मुकेश अंबानी ने प्रधानमंत्री के कोविड-19 कोष में 500 करोड़ रुपये अतिरिक्त देने की प्रतिबद्धता जताई है। इससे पहले उन्होंने भारत के पहले कोरोनावायरस अस्तपताल, जरूरत मंदों को भोजन और आपात वाहनों के लिए ईंधन पर भी खर्च करने का वादा किया है।
इन्फोसिस फाउंडेशन ने 100 करोड़ रुपए की प्रतिबद्धता जताई है।
दक्षिण कोरिया की कंपनी सैमसंग और एलजी ने कहा है कि वे भारत में स्थानीय निकायों को मदद करेंगी, उन्हें बचाव कि और इन्फ्रारेड थर्मामीटर देंगी और अस्पतालों को उपभोक्ता टिकाऊ वस्तु देंगी।
पेटीएम, फोनपे, अमेजन पे व अन्य डिजिटल भुगतान कंपनियों ने भी उपयोगकर्ताओं से पीएम फंड में योगदान करने का अनुरोध किया है और कहा है कि आम उपयोगकर्ता की मदद के साथ वे भी फंड में कुछ योगदान करेंगी।
कई अन्य कंपनियों भी मदद में आगे आई हैं।

संक्रमण रोकने के लिए पहनें कपड़े का मास्क : सरकार

नयी दिल्ली : देश में कोरोनावायरस के मामलों में अचानक तेजी आई है। ऐसे में मास्क की माँग बहुत बढ़ गयी है। केंद्र सरकार ने लॉकडाउन के 11वें दिन शनिवार को एक एडवाइजरी जारी कर लोगों से कपड़े से घर में बनाए हुए फेस कवर (मास्क) पहनने को कहा। एजवाइजरी के मुताबिक, घर में बने मास्क पहनने से बड़े पैमाने पर लोगों को संक्रमण से बचाया जा सकेगा। घर से निकलते वक्त लोग कपड़े से घर में बने मास्क जरूर पहनें। कुछ देशों में इस तरह के मास्क इस्तेमाल से फायदा भी मिला है। देश में अभी तक कोरोनावायरस के संक्रमण के तीन हजार से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं। इससे पहले, अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सभी नागरिकों से गैर मेडिकल ग्रेड मास्क (घरेलू मास्क) इस्तेमाल करने को कहा था। अमेरिकी के सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) ने भी अपील की थी कि अमेरिकी लोग कपड़े या फैब्रिक से बने मास्क पहनें। इस तरह के मास्क को या तो ऑनलाइन खरीदा जा सकता है या फिर इन्हें घर पर ही बनाया जा सकता है। सामान्य लोगों को मेडिकल ग्रेड मास्क नहीं पहनना चाहिए, क्योंकि ये बेहद कम संख्या में हैं और लोगों की जान बचाने में जुटे मेडिकल स्टाफ के लिए इनकी उपलब्धता जरूरी है –

कोरोना के मरीज मेडिकल ग्रेड मास्क ही पहनें
एडवाइजरी में कहा गया है कि घर में बनाए गए मास्क स्वस्थ लोगों में संक्रमण को फैलने से रोकेंगे। ये मास्क हेल्थ वर्कर्स, कोरोना के मरीजों के संपर्क में आने वाले लोगों और खुद मरीजों के लिए नहीं है। इन लोगों को विशेष मेडिकल ग्रेड मास्क पहनने की जरूरत है। सरकार के प्रिंसिपल साइंटिफिक एडवाइजर की ओर से इस पर एक मैनुअल भी जारी किया गया है। इसमें कहा गया है कि देश में घनी आबादी वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को विशेष तौर पर मास्क पहनना चाहिए।

आम लोग मास्क को रोज धोकर ही पहनें
एडवाइजरी में बताया गया कि घर पर बनाया गया मास्क संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने पर निकलने वाली बूंदों (ड्रॉपलेट्स) को आप तक पहुंचने से रोकता है। इसे रोज धोकर ही इस्तेमाल में लाना चाहिए। साथ ही मास्क लगाए होने के बावजूद सोशल डिस्टेसिंग का पूरा ध्यान रखना चाहिए।

सूती कपड़े से मास्क बना सकते हैं, गरम पानी में धोना जरूरी
मैनुअल के अनुसार किसी भी सूती कपड़े का इस्तेमाल मास्क बनाने के लिए किया जा सकता है। इसके लिए जरूरी नहीं कपड़ा नया ही हो। यह किसी भी रंग का हो सकता है, लेकिन एक बात का ध्यान रखना होगा कि कपड़े को उबलते पानी में अच्छी तरह से 5 मिनट के लिए धोया जाए और पहनने से पहले अच्छी तरह से सुखाया जाए। मास्क बनाने में यह भी ध्यान देना चाहिए कि यह चेहरे पर अच्छी तरह से फिट बैठता हो और इसमें किनारों पर कोई गैप न हो।

किसी दूसरे का मास्क कभी इस्तेमाल न करें
फेस मास्क पहनने से पहले अच्छी तरह से हाथ धोएं। अगर फेस कवर गीला या नम हो जाता है तो तुरंत उसे बदल लें और कभी भी बिना धुले इसका इस्तेमाल न करें। अपना मास्क किसी को पहनने के लिए न दें। घर में सभी लोगों के लिए अलग मास्क होने चाहिए।

कोविड -19 : मुश्किल वक्त में इन्स्टाग्राम की मदद से आगे ले जाएँ व्यापार

रास्ते आसान हो जाते हैं. जब कोई राह बताने वाला हो…और यह तभी होगा जब कोई ऐसा मंच अथवा माध्यम हो…जब परामर्श सही जगह पर और सही समय पर पहुँचे। शुभजिता का प्रयास हमेशा से ही ऐसी सकारात्मकता को आगे ले जाना रहा है तो हम कर रहे हैं एक नये स्तम्भ की शुरुआत विशेषज्ञ परामर्श..। इसके तहत अलग – अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों के परामर्श आपके लिए लाने का प्रयास रहेगा। शुभ सृजन सम्पर्क में पंजीकरण करवाने वाले विशेषज्ञों को आप तक पहुँचाया जायेगा और हमारा प्रयास इससे भी आगे होगा। आज पहली कड़ी में तुरिया कम्युनिकेशन एलएलपी की सह संस्थापक, संध्या सुतोदिया आपके सामने हैं। अपने प्रश्न आप हमारे सोशल मीडिया पेज पर भी भेज सकते हैं।

सन्ध्या सुतौदिया

इंस्टाग्राम ने सिर्फ एक चित्र एवं वीडियो सहभाजन मंच के रूप में शुरुआत की थी। हालांकि, आज इंस्टाग्राम ने 600 मिलियन सक्रिय उपयोगकर्ताओं के रोज के आधार पर इंस्टाग्राम के सहारे पोस्ट करने, संवाद स्थापित करने और चित्त आकर्षित होने के वजह से इंस्टाग्राम असाधारण रूप से लोकप्रियता हासिल कर चुका है। इंस्टाग्राम एक सामान्य परंतु प्रभाव कारी मंच है और उपयोगकर्ताओं को संभावित उपभोक्ता बनाने की क्षमता रखता है। ऐसे वक्त में जब पूरा विश्व एक अद्वितीय संकट से घिरा हुआ है, इंस्टाग्राम अपने अपरिहार्य उपभोक्ताओं की मदद से सूचना प्रसार करने के साथ-साथ जनता की सलाह को आकार देने की भी क्षमता रखता है।
* सही जानकारी प्रदान करें:- विश्व संकट कोविड -19 ( COVID-19) की इस घड़ी में, सही और लगातार जानकारी प्रदान करने से लोगों में आपके ऑर्गेनाइजेशन यानी संस्थान के प्रति विश्वसनीयता बढ़ेगी। कर्मचारी, ग्राहक और हित धारकों के सोशल मीडिया मंचों पर शालिनी के वजह से अपरिहार्य है। इस माहौल में, अपने ऑफिशल यानी आधिकारिक इंस्टाग्राम हैंडल से लगातार स्टेटस अपडेट करते रहना चाहिए और अपने ऑर्गेनाइजेशन को बढ़ाते रहना चाहिए।
* चिंता जताए:- अभी ही समय है जब तक कंपनियों को अपने व्यापार की रुचियों से परे अपने कर्मचारी और अन्य हित धारकों की स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए। COVID-19 कि इस वक्त में कंपनियां अपनी ब्रांड की छवि बनाए रखने के लिए जानकारी दे कर छोटे वीडियोज पोस्ट कर सकती हैं।
* लगातार स्टोरीज़ पोस्ट करें:– इंस्टाग्राम स्टोरीज़ फॉलोअर्स को आकर्षित करने का और शिक्षित करने का एक अच्छा उपाय है। ऐसे वक्त में जब हम सभी निजी और पेशेवर दोनों तरह के कष्ट झेल रहे हैं तब ऑनलाइन समूह एक साथ मिलकर हम सब का सहयोग करने के लिए और एक सुरक्षित स्थल रूपी मंच प्रदान कर रहा है। ऐसे वक्त में स्टोरीज बना कर हम उन्हें शिक्षित करके उनसे जीवन भर का रिश्ता बना सकते हैं।
* हैश टैग का उपयोग करें:– अभी के सबसे अधिक चिंता के विषय कोविड -19 (COVID-19) से संबंधित सही जानकारी # का उपयोग करके आप अपने फॉलोअर्स को सही और अपडेटेड जानकारी तक पहुंचाने में सहायता कर सकते हैं।
* इंस्टाग्राम लाइव के जरिए साथ आएं:– कोरोना संकट के समय अपने फॉलोअर्स से जुड़े रहने के लिए इंस्टाग्राम लाइव एक दिलचस्प जरिया है। ब्रांड से जुड़े छोटे शिक्षण अपने फॉलोअर्स को प्रदान करने के लिए इंस्टाग्राम का उपयोग कर सकते हैं जिससे लॉक डाउन के इस समय में व्यस्त रहा जा सकता है।
तुरिया कम्युनिकेशन एलएलपी से जुड़े, जो बाकी के मार्केट से अधिक संचार की दुनिया को जानता है, जिससे आप अपने व्यापार को इंस्टाग्राम से बढ़ावा दे सकते हैं। अपने व्यापार का तुरिया की रचनात्मकता की मदद से ऑनलाइन विस्तार कीजिए।
लेखिका तुरिया कम्युनिकेशन एलएलपी की सह संस्थापक और सम्पर्क विशेषज्ञ हैं।
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कोरोना इफेक्ट : घर से ही वर्चुअल शिक्षण करने का निर्देश

कोलकाता : कोरोना के कारण हुए लॉ़कडाउन का असर शिक्षण संस्थानों पर भी पड़ा है। कई शिक्षण संस्थान तो घर से ही ऑनलाइन शिक्षण पर जोर दे रहे हैं और पढ़ाई शुरू भी कर दी है। अब सीआईएससीई भी इसी राह पर चल पड़ा है। इस बोर्ड ने एक विज्ञप्ति जारी कर सभी स्कूलों को ऑनलाइन व शिक्षण और वर्चुअल क्लासरूम शुरू करने को कहा है। जिन स्कूलों में अभी तक वर्चुअल क्लासरूम की व्यवस्था शुरू नहीं की गयी है, उनको भी इसे शुरू करने और अपना मॉड्यूल विकसित करने को कहा गया है। पढ़ाई लर्निंग ऐप, एमएचआरडी के शिक्षकों एवं विद्यार्थियों हेतु बने ‘स्वयं ई लर्निंग पोर्टल’ के अतिरिक्त जूम का उपयोग भी कर सकते हैं। शिक्षक अपने डेस्कटॉप या लैपटॉप के जरिए विद्यार्थियों से जुड़ सकेंगे। इसके अतिरिक्त सीआईएससीई की वेबसाइट पर उपलब्ध पुराने प्रश्न पत्र (आईएससी तथा आईसीएसई), नमूना प्रश्नपत्र, विद्यार्थी के प्रदर्शन से सम्बन्धित दस्तावेज, आठवीं तक कापाठ्यक्रम और विषय के अनुसार रिसोर्स मटेरियल का उपय़ोग किया जा सकता है। शिक्षक वर्कशीट, स्व आकलन टूल्स की मदद ले सकते हैं। प्रोजेक्ट पर भी जोर दिया गया है। यह जानकारी सीआईएससीई के चीफ एक्जिक्यूटिव तथा सचिव जेरी आराथन ने दी।

यह हिन्दी प्रदेश के अप्रवासियों और शिक्षित मुसलमानों के जागने का समय है

कोरोना को लेकर दो हिस्सों में बँटे लोग दिख रहे हैं। एक अत्याधिक सजग तो एक वह, जो इसे अपनी विचारधारा को पुख्ता बनाने का मौका मान रहे हैं। अत्याधिक सजग लोग खुद डर रहे हैं और दूसरे वर्ग के लोग बेशर्मी पर उतर आये हैं। अभी भी इनको जाति वाली राजनीति चाहिए। कुछ ऐसे हैं जो ईश्वर के होने पर सवाल उठा रहे हैं तो कुछ ऐसे हैं जो मंदिर और मस्जिद पर सवाल उठा रहे हैं। हालाँकि तबलीगी जमात की हरकतों के बाद इनके पास ऐसा करने की एक वजह मिल गयी है मगर इससे होगा क्या?
वहीं दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश और बिहार के मजदूरों का पलायन जारी है। ये गरीब अपने ही देश में बेगाने हैं और नर्क झेल रहे हैं। कहीं कुछ छिड़का जा रहा है तो कहीं कुछ..देश के कोने -कोने से खबरें आ रही हैं….वह चले जा रहे हैं…नंगे पैर….धूम में…ठीक उसी वक्त जब आप अपने मोबाइल पर स्टेटस डाल रहे होते हैं…उसी वक्त एक बच्चा चलते -चलते थककर बैठ जाता है…आप परिवार के साथ हैं…वह परिवार से दूर… पलायन का सिलसिला जारी है। इन लोगों को कहीं पुलिस से खाने को कुछ सामान मिल जाता है, तो कहीं आम नागरिकों मदद के लिए आगे आ जाते हैं। अपने बीवी-बच्चों और परिवारों के साथ अपने किराये के छोटे से कमरे को छोड़, घर की ओर पलायन करने वालों की यह भीड़ थोड़ी-थोड़ी देर में घटती-बढ़ती रहती है। कुछ गठरियां, कुछ पोटलियां और थोड़ा सा पानी लेकर लोग निकल पड़े हैं। इस आस में कि कहीं कोई बस या ट्रक मिल जाये। किसी के कॉन्ट्रेक्टर ने काम बंद कर दिया तो किसी को मकान मालिक ने निकाल दिया। किसी को दिहाड़ी के लिए कोई काम ही नहीं मिल रहा, तो कोई तीन दिन से भूखा है। कोरोना ने मानो इन लोगों की जिंदगियों पर ही ताला जड़ दिया है। कुछ तो भूख से मर भी जा रहे हैं…आखिर इस अन्यास का हिसाब कौन देगा…?
हमारी समझ में यह बिहार व झारखंड के अप्रवासियों और शिक्षित मुसलमानों के जागने का समय है। ये वक्त है जब वे अपनी जानकारी, ज्ञान और हुनर से अपने राज्य औऱ कौम के लोगों के साथ खड़े हो सकते हैं…इनकी तकदीर को अपने स्टार्ट अप से नयी दिशा दे सकते हैं। शिक्षा के जरिए जिन्दगी बदल सकते हैं। यह मौका ही नहीं आपकी जिम्मेदारी भी है।
इसी जिम्मेदारी के तहत शुभजिता में हमार माटी स्तम्भ हमने शुरु किया है। इसके बारे में आप इस स्तम्भ में पढ़ भी सकते हैं और सुझाव भी दे सकते हैं…शुभ रामनवमी…।

सीता ही नहीं, उनकी बहनें भी विशेष थीं

वाल्मीकि रामायण में सीता की एक बहन उर्मिला बताई है। मांडवी व श्रुतकीर्ति जनकजी के छोटे भाई कुशध्वज की बेटियां थी। मानस मैं सीता जनकजी की इकलौती बेटी बताई गई है। कुल मिलाकर सीताजी की तीन बहनें थीं। उनके भाई का नाम मंगलदेव है जो धरती माता के पुत्र हैं।
उर्मिला : वाल्मीकि रामायण के अनुसार, उर्मिला जनकनंदिनी सीता की छोटी बहन थीं और सीता के विवाह के समय ही दशरथ और सुमित्रा के पुत्र लक्ष्मण को ब्याही गई थीं। जब राम और सीता के साथ लक्ष्मण भी वनवास को जाने लगे तब पत्नी उर्मिला ने भी उनके साथ जाने की जिद की, परन्तु लक्ष्मण ने उन्हें यह कहकर मना कर दिया कि अयोध्या के राज्य को और माताओं को उनकी आवश्यकता है। उर्मिला के लिए यह बहुत कठिन समय था ऐसे में जबकि वह नववधू थी और उसके दांपत्य जीवन की तो अभी शुरुआत ही हुई थी।
लक्ष्मण के वनवास जाने के बाद उर्मिला के पिता अयोध्या आए और उर्मिला को मायके चलने का अनुरोध करने लगे, ताकि मां और सखियों के सान्निध्य में उर्मिला का पति वियोग का दुःख कुछ कम हो सके। परन्तु उर्मिला ने अपने मायके मिथिला जाने से इनकार करते हुए कहा कि पति की आज्ञा अनुसार पति के परिजनों के साथ रहना और दुख में उनका साथ न छोड़ना ही अब उसका धर्म है। यह उर्मिला का अखंड पतिव्रत धर्म था। मान्यता कर आधारित एक एक कथा पढ़ने को मिलती है। कथा यह है कि रावण के पुत्र मेघनाद को यह वरदान था कि जो व्यक्ति 14 वर्षों तक सोया न हो वही उसे हरा सकता है। हालांकि लक्ष्मण अपने भाई श्रीराम और भाभी सीता की सुरक्षा और सेवा में इत‍ने लगे रहे कि वे 14 वर्ष तक सो ही नहीं पाए। कथा अनुसार उनके बदले उर्मिला 14 वर्ष तक सोती रही। एक अन्य कथानुसार लक्ष्मण की विजय का मुख्य कारण उर्मिला का पतिव्रत था। लक्ष्मण के उर्मिला से अंगद और चन्द्रकेतु नाम के दो पुत्र तथा सोमदा नाम की एक पुत्री उत्पन्न हुई। अंगद ने अंगदीया पुरी तथा चन्द्रकेतु ने चन्द्रकांता पुरी की स्थापना की थी।
माण्डवी : मांडवी दशरथ पुत्र भरत की पत्नी थीं। मांडवी राजा जनक के छोटे भाई कुशध्वज की बेटी थी। वह एक साध्‍वी की तरह रहती थी। वचनासुर भारत अयोध्या में नहीं नंदीग्राम में रहते थे और मांडवी पति के प्रभु श्रीराम के समर्पण का सम्मान करती थीं और उनके हर कार्य में सहयोग करती थी। वह कुल की मर्यादा अनुसार आचरण करती थी। उनके दो बेटे थे- तक्ष और पुष्कल।
श्रुतकीर्ति : श्रुतकीर्ति राजा कुशध्वज की पुत्री थी, श्रुतकीर्ति का विवाह भगवान राम के अनुज शत्रुघ्न से हुआ था। इनके दो पुत्र हुए, शत्रुघति और सुबाहु। कुशध्वज मिथिला के राजा निमि के पुत्र और राजा जनक के छोटे भाई थे।