कोलकाता : पावर एक्सचेंज इंडिया लिमिटेड (पीएक्सआईएल) ने हाल ही में अपना ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म ‘प्रत्यय’ लॉन्च किया। ग्राहकों को एक्सचेंज पर ट्रेडिंग की सन्तुष्टि इस तकनीक सक्षम प्लेटफॉर्म का मुख्य उद्देश्य है। ‘प्रत्यय’ में यूजर एंड पर ऑटो अपडेट, वेब ब्राउजर एप्लिकेशन, रिपोर्ट एक्सपोर्ट करने तथा स्मार्ट यूआई जैसी सुविधाएँ हैं। यह प्रतिभागियों के पीसी पर उनके द्वारा संचालित अपडेट को हटाने में मदद करता है। अपग्रेड उपलब्ध होते ही ग्राहक को संशोधित सुविधाओं और कार्यक्षमताओं का पता लगना आरम्भ हो जाता है। ‘प्रत्यय’ में क्लियरिंग और सेटलमेंट के साथ जोखिम प्रबन्धन के मॉड्यूल्स भी उपलब्ध हैं जिससे भुगतान सुरक्षा और ट्रेड मार्जिन, आर्डर, लेनदेन, निकासी और सेटलमेंट की स्थिति के आधार पर लागू होते हैं। यह प्रतिभागियों को ट्रेड के लिए दक्षतापूर्ण तरीके से पूँजी लगाने की क्षमता प्रदान करता है। पावर एक्सचेंज इंडिया लिमिटेड (पीएक्सआईएल) के प्रबन्ध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रभाजीत कुमार ने कहा कि प्रत्यय इस क्षेत्र के सभी हितधारकों के साथ मिलकर साझा प्रयास से बनाया गया है और गहन परामर्श प्रक्रिया का मूर्त रूप है। पावर एक्सचेंज इंडिया लिमिटेड (पीएक्सआईएल) को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया लिमिटेड (एनएसई) तथा नेशनल कमोडिटी एंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज (एनसीडीईएक्स) द्वारा प्रवर्तित किया गया है।
कला और संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए 15 हस्तियों को पंथी सम्मान
कोलकाता : भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) में आयोजित एक समारोह में कला और संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाली 15 हस्तियों को ‘पंथी सम्मान 2020’ प्रदान किया गया। आईसीसीआर-कोलकाता के निदेशक गौतम दे को सामाजिक सांस्कृतिक गतिविधियों, डॉ.सुदीप रंजन सरकार को वैश्विक सिनेमा, डॉ.अभिज्ञात को साहित्य व पत्रकारिता, काकोली सरकार रायचौधुरी को सामाजिक सांस्कृतिक गतिविधियों, रीता झंवर को सामाजिक सांस्कृतिक गतिविधियों, रत्नोत्तमा सेनगुप्ता को फ़िल्म मीडिया, हसैन हैदर खान को संगीत, संजीब सरकार को संगीत, एमएफ हुसैन को संगीत, रिजुरेखा चक्रवर्ती को साहित्य, पारिजात चक्रवर्ती को सिनेमा में अभिनय, अमलेश दासगुप्ता को फिल्म, स्नेहा चक्रवर्ती को लाइफ स्टाइल, गुलशना शेख को लाइफ स्टाइल, जॉन ई. जम्मिटपेस को संगीत के लिए सम्मानित किया गया। इस सम्मान का आयोजन पंथी आर्टहाउस की ओर से किया गया था। विविधता में एकता कार्यक्रम की थीम थी जिस पर सम्मानित व्यक्तियों व वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किये। कार्यक्रम का संचालन पंथी आर्टहाउस की संस्थापक सोमाली ए विद्यार्थी ने किया।
कहानी का समकाल एवं मुक्तांचल 24 विषय पर संगोष्ठी
कोलकाता : विद्यार्थी मंच एवं मुक्तांचल की ओर से ‘कहानी का समकाल एवं मुक्तांचल 24 ‘ विषय पर केंद्रित विचार संवाद का आयोजन हावड़ा के बासंती लाल सभागार में सम्पन्न हुआ । इस अवसर कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कथाकार विमल वर्मा ने कहा कि कहानी का जन्म संघर्ष और अन्तर्विरोध से होता है और संवेदना कहानी की आत्मा है । स्वागत भाषण देते हुए प्रो मीरा सिन्हा ने कहा कि मुक्तांचल का यह अंक निरंतरता का परिणाम है ।हम नए रचनाकारों को सृजनात्मक संवाद और लेखन का पर्याप्त अवसर देने का प्रयास करते हैं ।डॉ शंभुनाथ ने कहा कि कहानी जीवन में यथार्थ का चित्र नहीं है लेकिन उससे मिलता जुलता जरूर है ।कहानियाँ सच कहने के लिए झूठ रचने की कला है ।इस अंक की संपादिका प्रो शुभ्रा उपाध्याय ने कहा कि कहानी के भीतर कथाकार के जीवन के कई स्तरों का पाठ होता है ।कहानी के बनने की प्रक्रिया में दृष्टि और जीवन का मिश्रण होता है ।कथाकार सिद्धेश ने कहा कि कहानी जीवन के अनकहे को कहने का एक लोकप्रिय माध्यम है।प्रो मनीषा झा ने कहा कि समकालीन कहानी को हमारे समय के बदलावों को गम्भीरता से ग्रहण करने और व्यक्त करने का सशक्त माध्यम है ।डॉ रीता सिन्हा ने कहा कि आज की कहानियाँ हमारे समय के यथार्थ को दर्ज करती हैं ।सुबोध कुमार श्रीवास्तव ने इस अंक में संकलित सभी कहानियों का विश्लेषण करते हुए कहा कि आज का कहानीकार यथार्थ के जटिलताओं को अनावृत्त करता है। डॉ विमलेश्वर द्विवेदी ने कहा कि हमें समकालीन कहानी का एक प्रमुख सूत्र नई कहानी की परंपरा से जोड़कर देखना चाहिए ।प्रो गीता दूबे ने कहा कि मुक्तांचल के इस अंक वसुधा के कहानी विशेषांक से जोड़कर देखा और कहा कि समकालीन कहानी के केंद्र में सामाजिक विमर्श की आहट है।इस अवसर पर एक काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया ।इसमें वसुंधरा मिश्र, प्रदीप धानुक, रमारमाकांत सिन्हा, अनीशा साबरी,जीवन सिंह, कालिका प्रसाद उपाध्याय, राज्यवर्द्धन, सेराज खान बातिश, कालीप्रसाद जायसवाल ने अपनी कविताओं का पाठ किया ।इस अवसर पर उपस्थित थे मृत्युंजय, महेश जायसवाल, विनीता लाल, विनोद यादव, सुशील पांडे, परमजीत पंडित, सोनू संगम, शिवप्रकाश दास और गुड़िया राय ।धन्यवाद ज्ञापन देते हुए डॉ इतु सिंह ने कहा कि समकालीन कहानी नए विमर्शों को प्रतिरोध और सामाजिक सम्बद्धता से जोड़ने का काम करता है।
‘सहृदयता और प्रतिबद्धता के प्रतिमान थे खगेंद्र ठाकुर’
कोलकाता : हिंदी के प्रसिद्घ साहित्यकार खगेंद्र ठाकुर की स्मृति में गत रविवार,19 जनवरी,2020 को भारतीय भाषा परिषद में एक शोकसभा का आयोजन किया गया ।गत 13 जनवरी को पटना में उनका निधन हो गया था ।
उनकी स्मृति में कोलकाता की साहित्यिक संस्था भारतीय भाषा परिषद, अपनी भाषा, साहित्यिकी,जनवादी लेखक संघ, नीलांबर, कला साहित्य मंच, हिंदी कारवाँ,हिंदी ज्ञान और सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन की ओर से शोकसभा का आयोजन किया गया ।कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए श्रीनिवास शर्मा ने कहा कि खगेंद्र ठाकुर प्रगतिशील लेखक संघ के समर्पित कार्यकर्ता थे।वे प्रलेस में भीष्म साहनी के बाद नामवर सिंह, कमला प्रसाद के साथ मिलकर संगठन की परंपरा को मजबूती प्रदान किये। भारतीय भाषा परिषद के निदेशक प्रो शंभुनाथ ने कहा कि खगेंद्र ठाकुर सहृदयता और प्रतिबद्धता के मिसाल थे ।उन्होंने अपने लेखन में प्रतिरोध और लोकतांत्रिक मूल्यों को तरजीह दिया है ।साहित्यकार मृत्युंजय ने कहा कि वे लेखकों के लिए बेंचमार्क थे । वे अत्यंत सहज भाषा में लिखते थे। प्रो आशुतोष ने कहा कि खगेंद्र ठाकुर सभी विचारधाराओं का सम्मान करते हुए प्रतिक्रियावादी मूल्यों का विरोध करते थे ।अनुवादक #विनोद यादव ने कहा कि व्यवहार में वे जितने सहज नज़र आते थे मंच पर उतने ही प्रखर विद्वान के रूप में प्रभावित करते थे।#रंगकर्मी महेश जायसवाल ने कहा कि अक्सर हिंदी मेला में बोलते हुए सुना और देखा ।वे जितने संगठन के लिए समर्पित थे ,उतने ही लेखन के प्रति भी थे।#कथाकार सेराज खान बातिश ने कहा कि उनमें रामचंद्र शुक्ल जैसी वैचारिक समझ थी।#प्रो रामआह्लाद चौधरी ने कहा कि खगेंद्र ठाकुर सहज व्यक्तित्व के असाधारण संगठनकर्ता थे। संस्कृतिकर्मी रितेश पांडे ने कहा कि उनके लेखन और जीवन में कोई भेद नहीं था ।पत्रकार सुषमा त्रिपाठी न कहा कि उन्हें देखकर ऐसा लगता था कि जैसे वे हमारे अभिभावक हो।पंकज सिंह ने कहा कि अपना व्यक्तित्व गंवई और नागर के बीच का था ।डॉ राजेश मिश्र ने कहा कि खगेंद्र ठाकुर की सबसे अच्छी बात यह थी कि वे बहुत सहज और आत्मीय थे।मन बरबस उनकी ओर खींचा चला जाता है ।प्रो मधु सिंह ने कहा कि भारतीय भाषा परिषद में पिछले साल आयोजित साहित्य पत्रिका सम्मेलन उनसे मिलने का सौभाग्य मिला था । उम्रदराज़ होने पर भी वे सक्रिय थे।साहित्यप्रेमी रतन ने कहा कि खगेंद्र ठाकुर की आलोचनात्मक दृष्टि गम्भीर और प्रभावी है ।प्रो राहुल गौड़ ने कहा कि उनका व्यक्तित्व केदारनाथ सिंह की तरह आकर्षक और अनुकरणीय है ।रजनी गुप्ता ने कहा कि खगेंद्र ठाकुर का रचना संसार अर्थपूर्ण है ।कार्यक्रम का सफल संचालन करते हुए कवि #राज्यवर्द्धन ने कहा कि खगेंद्र ठाकुर के साथ कई अवसरों पर काम करने का अनुभव है ।वे प्रखर मार्क्सवादी आलोचक ही नहीं वरन कवि,व्यंगकार और सम्पादक भी थे ।उन्होंने चार दशक से ज्यादा समय तक प्रगतिशील लेखक संघ के विभन्न पदों पर रहते हुए कार्यभारको संभाला और संगठन को मजबूती प्रदान किये। फासिज्म के बढ़ते दौर में उनका जाना प्रगतिशील आंदोलन की बहुत बड़ी क्षति है।
जब बच्चों ने बनाया सिनेमा को अपनी बात कहने का माध्यम
मालदा में आयोजित हुआ तीसरा बाल फिल्मोत्सव
मालदा : सिनेमा अपनी बात कहने का सशक्त माध्यम है और जब इसकी कमान बच्चों के हाथ में हो तो यह और भी खास हो जाता है। हाल ही में इसी वजह से तीसरी बार आयोजित होने वाला मालदा बाल फिल्मोत्सव ऐसा ही माध्यम बना। तलाश, यूनिसेफ और सिने सेन्ट्रल कलकत्ता द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित इस फिल्मोत्सव की खासियत ही यही थी कि यह बच्चों के लिए और बच्चों के द्वारा ही बनाया गया था। इस फिल्मोत्सव में बच्चों द्वारा निर्मित 7 फिल्में दिखायी गयीं जिसका फिल्मांकन उन्होंने अपने गाँवों में ही किया था। तलाश की एक्जिक्यूटिव डायरेक्टर आयशा सिन्हा सिनेमा को बच्चों के विकास और उनकी अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम बताते हुए कहती हैं कि अपनी फिल्म की पटकथा, विषय -वस्तु, कलाकारों के चयन से लेकर प्री – प्रोडक्शन, पोस्ट प्रोडक्शन, शूटिंग तक, इन सबकी जिम्मेदारी इन विभागों के अनुसार बनाये गये अलग – अलग समूहों में शामिल 25 बच्चों के समूह ने की। इसकी तैयारी पिछले डेढ़ साल से की जा रही थी। इस अभियान का उद्देश्य बच्चों को डिजिटल क्षेत्र में सशक्त और आत्मनिर्भर बनाना है। जाहिर है कि स्मार्ट फोन की चकाचौंध से दूर इन बच्चों के लिए यह एक चुनौती थी। कुछ बच्चे ऐसे भी थे जिन्होंने कैमरा कभी हाथ में नहीं लिया था। इन बच्चों के मेंटर थे फिल्मकार देवाशीष सेन शर्मा। उन्होंने बताया कि बच्चों ने न सिर्फ चुनौती पूरी की बल्कि अब वे सिनेमा को अपनी बात कहने के साथ बदलाव लाने का माध्यम भी बना चुके हैं।
तलाश में यूथ एडवोकेट असीम अकरम की फिल्म ‘एक अ पुरुषेर गल्प’ इस फिल्मोत्सव में दिखायी गयी और असीम इस अवसर को अपने लिए बेहद सिखाने वाला अनुभव मानता है। यहाँ खास बात यह है कि बच्चों ने खुद ही विषय – वस्तु का चुनाव किया है। वहीं एक अन्य यूथ एडवोकेट दीपा अग्रवाल ने कहा कि सिनेमा के जरिए खुद बच्चों के अनुभव दिखाये गये हैं जो वंचित बच्चों के साथ अभिभावक ने भी देखे। तलाश यूनिसेफ और जिला प्रशासन के सहयोग से वर्ष 2012 से ही काम कर रहा है। जिले में 5 तरह के संसाधन भी विकसित किये गये हैं, मसलन – व्यक्तिगत सुरक्षा और वेल बिंग ट्रेनर यानी भलाई, लीगल लिट्रेसी (कानूनी साक्षरता) लीडर्स, क्रिएटिव एंड कम्यूनिकेशन लीडर्स (रचनात्मक तथा सम्पर्क) जैसे समूह। समूचे मालदा में इस समय 865 कम्यूनिटी लीडर्स सक्रिय हैं। पिछले कई दशक से यूनिसेफ इस फिल्मोत्सव को सहयोग दे रहा है। यूनिसेफ की सम्पर्क विशेषज्ञ (पश्चिम बंगाल) मौमिता दस्तीदार ने बताया कि यह बाल फिल्मोत्सव पूरी तरह बच्चों द्वारा ही आयोजित किया जाता है। इस साल बच्चों ने अपनी बनायी इन लघु फिल्मों में उनके और उनके दोस्तों के साथ होने वाली हिंसा को भी मुद्दा बनाया है।
बाल फिल्मोत्सव में दिखायी जाने वाली बच्चों की लघु फिल्में
एक अपुरुषेर गल्प – एक किशोर की कहानी जो समाज की परम्परागत पुरुष छवि से अलग है और अन्त में वह अपने अस्तित्व की तलाश करता है।
को -लिंग – (लिंग समानता की बात करती फिल्म)
स्वप्न देखो बोले – एक किशोरी के सपने की कहानी
बाल्य विभाह – बाल विवाह की समस्या को दर्शाती फिल्म
बिपन्यो परिवेश – स्वस्थ वातावरण की आवश्यकता पर जोर देती फिल्म
सनाई – एक किशोर की कम उम्र में विवाह की समस्या पर बात करती फिल्म
सत्पात्रो – एक अच्छे लड़के को लेकर सामाजिक मापदंडों को फिल्म में दिखाया गया है और उसकी चुनौतियों पर बात भी की गयी है।
एचआईटीके में बायो प्रोसेस इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी 2020
कोलकाता : हेरिटेज इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एचआईटीके) में हाल ही में बायो प्रोसेस इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी 2020 नामक दो दिवसीय अन्तरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया। यह सम्मेलन एचआईटीके केमिकल इंजीनियरिंग तथा बायो टेक्नोलॉजी विभाग द्वारा आयोजित किया गया था। 20 से 22 जनवरी तक चलने वाले इस सम्मेलन का उद्घाटन मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित आईआईएसईआर के निदेशक डॉ. सौरभ पाल ने प्रधान अतिथि नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर के डॉ. टॉन्ग ये वाह के साथ किया। डॉ. सौरभ पाल ने कहा कि पहले केमिकल तकनीक के क्षेत्र में कोलकाता का स्थान था मगर धीरे – धीरे यह स्थिति नहीं रही। इस सम्मेलन से शोधार्थियों और वैज्ञानिकों की रुचि इस ओर लाने में मदद मिलेगी। सम्मेलन में आईआईटी गुवाहाटी के प्रो. प्रणव गोस्वामी ने भी विचार रखे।
‘अतिरिक्त स्टोरेज अवधि के लिए किराया बढ़ाने पर हो विचार’
कोलकाता : वेस्ट बंगाल कोल्ड स्टोरेज एसोसिएशन की 55वीं वार्षिक साधारण सभा हाल ही में आयोजित हुई। इस सभा में राज्य के 90 प्रतिशत कोल्ड स्टोरेज इस संगठन के सदस्य हैं। सभा में मुख्य अतिथि राज्य के कृषि विपणन मंत्री तपन दासगुप्ता उपस्थित थे। इसके साथ ही मुख्यमंत्री की मुख्य कृषि सलाहकार आत्मिका भारती भी मौजूद थीं। इस अवसर पर वेस्ट बंगाल कोल्ड स्टोरेज एसोसिएशन के अध्यक्ष तरुण कान्ति घोष कोल्ड स्टेरोजों के महत्व को दर्शाया और कहा कि अतिरिक्त स्टोरेज अवधि के लिए अतिरिक्त किराया बढ़ाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि स्थानीय तौर पर विकसित उन्नत किस्म के बीजों की भी व्यवस्था और निर्यात योग्य उच्च गुणवत्ता वाले आलुओं की खेती के लिए राज्य सरकार को समर्थन के साथ सहयोग भी देना चाहिए। इसके पूर्व उन्होंने कहा कि देर से बीजारोपण और बारिश के कार 2 से 3 प्रतिशत की कमी खेती में होने के बावजूद आलू का उत्पादन लक्ष्य लगभग 105 लाख टन रखा गया जो कि पिछले साल की तुलना में 10 प्रतिशत अधिक था। बंगाल में 65 लाख टन की खपत के बाद शेष उत्पादन का विपणन राज्य के बाहर होना चाहिए। उन्होंने कृषकों को गुणवत्ता पर काम करने और पैकेजिंग के लिए न्यूनतम 55 ग्राम वाले लेयेनो बैग के इस्तेमाल का सुझाव दिया।
उद्योगपति एच. के. चौधरी को लाइफ टाइम अचीवमेंट सम्मान
कोलकाता : विक्रम इंडिया तथा हेरिटेज ग्रुप ऑफ इन्स्टीट्यूशंस के चेयरमैन एच.के. चौधरा को उद्योग के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए लाइफटाइम अचीवमेंट सम्मान दिया गया। उनको यह सम्मान हाल ही में आयोजित सबसे पूर्वी भारत के बड़े उद्यम सम्मेलन टाईकॉन 2020 में प्रदान किया गया। एच. के. चौधरी एक शिक्षाविद भी हैं। विक्रम इंडिया ने सौर उर्जा के साथ चाय प्रसंस्करण मशीनों के निर्माण में भी सक्रिय है। हेरिटेज ग्रुप ऑफ इन्स्टीट्यूशंस के अतिरिक्त वे हरियाणा के बहाल के बीआरसीएम समूह के भी चेयरमैन हैं।
नेताजी के महाभिनिष्क्रमण का साक्षी गोमो झारखंड का गोमो स्टेशन
झारखंड के धनबाद जिला के तोपचांची प्रखंड में अवस्थित गोमो रेलवे स्टेशन, जिसे आज हम नेताजी सुभाष चंद्र बोस जंक्शन के नाम से जानते हैं, का देश के आजादी के लिए लड़ी गयी लड़ाई में खास जगह है। 18 जनवरी, 1941 को कालका मेल से पेशावर जाने के लिए नेताजी छद्म वेश में इसी रेलवे स्टेशन से रवाना हुए थे. कहा जाता है कि अंग्रेजों के लिए नेताजी सुभाष इसी स्टेशन से गुम हुए थे, इसीलिए इसे गोमो कहा जाने लगा।
नेताजी की महानिष्क्रमण यात्रा
ऐतिहासिक दस्तावेज बताते हैं कि जब नेताजी सुभाषचंद्र बोस को अंग्रेजों ने गिरफ्तार कर नजरबंद कर लिया था तो नेताजी ने भेष बदल कर भागने की योजना बनाई। उनकी इस रणनीति में उनके मित्र सत्यव्रत बनर्जी साथ थे। सत्यव्रत बनर्जी ने इसे महाभिनिष्क्रमण यात्रा का नाम दिया था। मामले की पृष्ठभूमि में जायें, तो दो जुलाई 1940 को हॉलवेल मूवमेंट में संलिप्तता की वजह से नेताजी को भारतीय रक्षा कानून की धारा 129 के तहत कलकत्ता (अब कोलकाता) में गिरफ्तार किया गया था। प्रेसीडेंसी जेल में उन्होंने आमरण अनशन किया, जिससे उनकी तबीयत बिगड़ गयी। गिरते स्वास्थ्य को देखते हुए अंग्रेजी हुकूमत ने उन्हें पांच दिसंबर 1940 को इस शर्त पर रिहा किया कि तबीयत ठीक होते ही उन्हें पुन: गिरफ्तार किया जा सकता है। यहां से रिहा होने के बाद एल्गिन रोड स्थित अपने आवास चले गये।
ब्रिटिश हुकूमत के उड़ गये होश
नेताजी के केस की सुनवाई 27 जनवरी 1941 को होनी थी, लेकिन तब ब्रिटिश हुकूमत के होश उड़ गये, जब उन्हें 26 जनवरी को यह पता चला कि नेताजी तो कोलकाता में हैं ही नहीं। उन्हें खोज निकालने के लिए सिपाहियों को अलर्ट मैसेज भिजवाया गया, लेकिन नेताजी ने तब तक अपने करीबी नजदीकी के सहयोग से महाभिनिष्क्रमण की तैयारी शुरू कर दी थी।
बेबी ऑस्टिन से पहुंचे गोमो
योजना के तहत नेताजी 16-17 जनवरी की रात लगभग एक बजे हूलिया बदलकर, कार में सवार होकर अपनी यात्रा पर कलकत्ता से निकल गये। इस योजना के अनुसार, नेताजी अपनी बेबी ऑस्टिन कार संख्या बी एल ए 7169 से गोमो पहुंँचे थे. जहां वह एक पठान के छद्म वेश में यहाँ पहुँचे थे. 18 जनवरी 1941 को पुराना कंबल ओढ़ कर नेताजी धनबाद के गोमो स्टेशन से हावड़ा-पेशावर मेल (वर्तमान में हावड़ा- कालका मेल) पर सवार हुए और इसके बाद वे गुमनामी में खो गये। इस बात की जानकारी शैलेश डे की किताब ‘आमी सुभाष बोलछी’ (मैैं सुभाष बोल रहा हूं) में मिलती है.
झरिया का भागा भी बना गवाह
बताया जाता है कि इससे पहले वे धनबाद झरिया के भागा पहुंचे थे. अंग्रेज सिपाही जब उनको खोजते हुए पहुँचे, तो नेताजी अंग्रेजों की आंखों में धूल झोंककर यहाँ से निकल चुके थे. यही वजह है कि यहाँ का नाम भागा पड़ा और धनबाद के गोमो से नेताजी हावड़ा-पेशावर मेल पकड़कर चले गये। वहीं, गोमो के बाद वे गुम हो गये थे, इसलिए अंग्रेजों ने वहां का नाम गोमो रख दिया।
धनबाद शहर से रहा गहरा नाता
आपको बताते चलें कि धनबाद शहर से नेताजी का गहरा नाता रहा था. वहां उनके भतीजे शिशिर बोस केमिकल इंजीनियर थे। नेताजी धनबाद आते-जाते थे और देश की पहली रजिस्टर्ड ट्रेड यूनियन की शुरुआत उन्होंने वहीं की थी, जिसके वह अध्यक्ष थे. उन्होंने वहां मजदूरों के हक की लड़ाई लड़ी।
स्मृतियां हैं शेष
वर्ष 2009 में आज ही के दिन झारखंड के धनबाद जिले में स्थित इस ऐतिहासिक रेलवे स्टेशन का नाम नेताजी सुभाष चंद्र बोस की स्मृति से जोड़कर नेताजी सुभाष चंद्र बोस जंक्शन किया गया था। हालांकि, आम बोलचाल में आज भी इसे गोमो ही कहते हैं. गोमो रेलवे स्टेशन के प्लेटफाॅर्म संख्या – 1 और 2 के बीच नेताजी की प्रतिमा स्थापित है।
इसलिए भी खास है गोमो
कोयलांचल में बसे होने के बावजूद यहां का वातावरण प्राय: धूल मुक्त एवं प्रदूषण रहित है. छोटी-बड़ी पहाड़ियों से घिरा, यह क्षेत्र एक छोटा हिल स्टेशन-सा जान पड़ता है. गोमो, पूर्व मध्य रेलवे के धनबाद मंडल में ग्रैंड कार्ड रेल लाइन पर स्थित एक व्यस्त और बड़ा रेलवे जंक्शन है. यहां से हावड़ा, दिल्ली, आद्रा के अलावा पुरी, रांची, जमशेदपुर, बरकाकाना आदि जगहों को जोड़ने वाली रेलवे लाइनें गुजरती हैं।
(साभार – प्रभात खबर)
नेताजी के प्रेरक विचार दिखाते हैं सही मार्ग
‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा’ बचपन से हम नेताजी सुभाष चंद्र बोस का यह जुनून और देश के लिए कुछ कर गुजरने का नारा सुनते हुए आ रहे हैं। नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 को हुआ था और इस साल देश उनकी 123वीं जयंती मनाने जा रहा है। नेताजी ने 1919 में भारत छोड़ आंदोलन में हिस्सा लिया। उस दौर में भी भारतीय सिविल सेवा में चयन होने के बावजूद उन्होंने 1921 में इस्तीफा दे दिया और देश की आजादी के लिए आंदोलनों में जुट गए। उनके कई ऐसे विचार है, जिन्हें अपनाकर जीवन के प्रति हमारा नजरिया सकारात्मक होने के साथ हम ऊर्जा से भर जाएंगे-
ऐसे सिपाही जो अपने देश के प्रति हमेशा वफादार रहते हैं और देश के लिए बलिदान देने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं, उन्हें कभी हराया नहीं जा सकता है।
-एक सच्चे सिपाही को मिलिट्री और आध्यात्मिकता दोनों की ट्रेनिंग लेनी चाहिए।
-संघर्ष किसी भी व्यक्ति को मनुष्य बनाता है। संघर्ष से ही आत्मविश्वास की प्राप्ति होती है।
-मैंने अपने अनुभवों से सीखा है, जब भी जीवन भटकता हैं, कोई न कोई किरण उबार लेती है और जीवन से दूर भटकने नहीं देती।
-माँ का प्यार स्वार्थ रहित और होता सबसे गहरा होता है। इसको किसी भी प्रकार नापा नहीं जा सकता।
-यदि आपको अस्थायी रूप से झुकना पड़े, फिर भी वीरों की भांति ही झुकना।
-हमारा कार्य केवल कर्म करना हैं। कर्म ही हमारा कर्तव्य है। फल देने वाला स्वामी ऊपर वाला है।
-एक व्यक्ति एक विचार के लिए मर सकता है, लेकिन वह विचार उसकी मृत्यु के बाद, एक हजार जीवन में खुद को अवतार लेगा।
-अपनी ताकत पर भरोसा करो। उधार की ताकत तुम्हारे लिए घातक है।
-सफलता हमेशा असफलता के स्तम्भ पर खड़ी होती है।




