Sunday, April 26, 2026
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नगालैंड का ‘रुजाहो’ गाँव: यहां नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने बनाई थी पहली प्रशासनिक टीम

रुजाहो गांव, यहां नेताजी ने पहली बार गठित किया था प्रशासनिक ढांचा।

ब्रिटिश सैनिकों को बंदी बनाकर इसी गाँव में लाई थी फौज

तमल सान्याल ने बताते हैं- नगालैंड की पहाड़ी पर ‘रूजाहो’ गांव है, जो डिमापुर से 80 किमी और कोहिमा से 45 किमी की दूरी पर है। वहां से तत्कालीन बर्मा (अब म्यांमार) की दूरी करीब 200 किमी है। अप्रैल 1944 में बोस व उनकी आजाद हिंद फौज पहली बार इस गाँव में पहुंची थी। इस गांव में पहली बार आजाद हिंद सरकार प्रशानिक टीम का गठन किया गया था। टीम में पहली बार गाँव बूढ़ा (ग्राम प्रधान की तरह एक पद) सृजित किया गया था। उस वक्त पंचायत का प्रशासनिक ढांचा क्या था? इस पर अभी रिसर्च चल रहा है। साल 2017 में इंडियन काउंसिल ऑफ हिस्टोरिकल रिसर्च ने नेशनल सेमिनार भी किया था। नगालैंड और त्रिपुरा के गवर्नर भी उस सेमिनार में शामिल हुए थे। सान्याल बताते हैं – रूजाहो गांव करीब 15 किमी दूर जेसामी में ब्रिटिश सेना और आजाद हिंद फौज के बीच युद्ध हुआ था। फौज ने सैकड़ों ब्रिटिश सैनिकों को हराकर बंदी बना लिया था और उन्हें गांव ले आई थी। गांव के एक घर में नेताजी सुभाष चंद्र बोस अपनी फौज के साथ 9 दिनों तक रुके थे। वह कमरा आज भी वहां मौजूद है। कमरे में लकड़ी का एक तख्त था, जिस पर बोस पुआल बिछाकर सोते थे। चूल्हे पर खाना बनता था।

नेताजी ने बपोसूयुवी स्वोरो को पहला ग्राम प्रधान नियुक्त किया था, आज भी जीवित।

आज भी जीवित नेताजी द्वारा नियुक्त ग्राम प्रधान

सुभाष चंद्र बोस ने रूजाहो गांव में पहली बार गाँव बूढ़ा (ग्राम प्रधान) बपोसूयुवी स्वोरो को नियुक्त किया था, जो आज भी जीवित हैं। इनके मातहत 10 लोग और नियुक्त हुए थे। बपोसूयुवी की उम्र 100 साल से ज्यादा है। वे आजाद हिंद फौज और ग्रामीणों के लिए ट्रांसलेटर का भी काम किया करते थे। नौ दिन के प्रवास के बाद नेताजी सुभाष चंद्र बोस फौज की रणनीति बनाकर गांव से चले गए थे। इस दौरान ब्रिटिश बॉम्बर ने कुछ दूरी पर पहाड़ी पर बम गिराया था।

पहाड़ी से नीचे उतरकर महिलाओं ने पहुँचाया था पानी

नेताजी के जाने के बाद भी फौज गांव में थी। जून-जुलाई में भयंकर बारिश हुई। इस प्राकृतिक आपदा से आजाद हिंद फौज को काफी दिक्कत हुई। रुजाहो गांव में फौज के लिए रसद पहुंचना बंद हो गया था। लोग भूखे रहने लगे। ग्रामीण किसी तरह पहाड़ी से नीचे जाकर फौज के लिए पीठ पर पानी लाती थी। गोला बारूद, हथियार फौज को पहुँचना बंद हो गया था। जिसकी वजह से वहां से फौज को दूसरी जगह स्थानान्तरित होना पड़ा था।

ऐतिहासिक स्थली बन सकता है गाँव

तमल सान्याल ने बताया कि, अभी गांव में 826 घर हैं। 4000 के करीब आबादी है। एक प्राइमरी स्कूल और एक प्राइमरी अस्पताल है। मोबाइल का नेटवर्क गांव में नहीं है। पेयजल की समस्या है। महिलाओं को पानी के लिए पहाड़ी से नीचे उतरना पड़ता है। इससे करीब 8 किमी की दूरी पर चोजुबा एक जगह है, जहां ग्रामीणों को रोजमर्रा की चीजें मिल पाती हैं। गांव में ज्यादातर लोग किसान हैं। उन्होंने बताया कि, केंद्रीय मंत्री नितिन गड़करी और नगालैंड सरकार के कई लोगों से मिलकर गांव की स्थिति से अवगत कराया है। ऐतिहासिक स्थली के रूप में गांव को विकसित किया जा सकता है।

कौन हैं तमल सान्याल
तमल सान्याल ने 1990 से 2018 तक सीआरपीएफ में थे। उन्होंने बीएचयू से फिजिक्स से बीएससी की है और उसके बाद उन्होंने टूरिज्म का कोर्स भी किया। अब वो अपना जीवन नेताजी से जुड़े स्थानों को पहचान दिलवाने के लिए लगे हैं

( साभार –  तमल सान्याल से दैनिक भास्कर संवाददाता अमित मुखर्जी की बातचीत )

एचआईटीके में अन्तरराष्ट्रीय सेमिनार

कोलकाता : हेरिटेज इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी द्वारा प्रो. असिमा चटर्जी फाउंडेशन के साथ संयुक्त रूप से केमेस्ट्री फॉर ह्यूमन डेवलपमेंट यानी मानव विकास हेतु रसायनशास्त्र पर दो दिवसीय संगोष्ठी आयोजित की गयी। गत 9 से 11 जनवरी तक चलने वाली इस संगोष्ठी में दुनिया भर के 100 से अधिक वैज्ञानिक व विद्वान सम्मिलित हुए। संगोष्ठी में फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, अमेरिका, मिस्त्र, इजराइल, जापान, चीन, सिंगापुर, तुर्की, इटली, ताइवान, दक्षिण कोरिया के अतिरिक्त भारत के आईआईटी और एनआईटी के विद्वान शामिल हुए।

महाराष्ट्र पर्यटन निदेशालय़ ने मिलाया ताना जी : अनसंग हीरो से हाथ

कोलकाता : महाराष्ट्र पर्यटन निदेशालय़ ने ताना जी : अनसंग हीरो से हाथ मिलाया। ताना जी : अनसंग हीरो एक ऐतिहासिक फिल्म है जिसे ओम राउत ने निर्देशित किया है। अभिनेता अजय देवगन के बैनर एडीएफ तथा भूषण कुमार की टी सीरिज द्वारा निर्मित यह फिल्म गत 10 जनवरी को प्रदर्शित की गयी। राज्य में में वाणिज्यिक एवं प्रचारमूलक पर्यटन गतिविधियों के प्रसार के लिए महाराष्ट्र पर्यटन निदेशालय ने फिल्म से हाथ मिलाया। इस साझेदारी के तहत राज्य की अनदेखी खूबसूरती को सामने लाने तथा लोगों को आकर्षित करने के लिए काम किया जायेगा। इसके लिए एक टीवी विज्ञापन तैयार किया गया है। महाराष्ट्र सरकार के पयर्टन निदेशालय के निदेशक दिलीप गावडे ने कहा कि ऐतिहासिक इमारतों में इतिहास संरक्षित रहता है। महाराष्ट्र में सिंहगढ़, रायगढ़ जैसे कई किले हैं। इस विज्ञापन फिल्म के माध्यम से लोगों को जागरुक किया जा सकेगा और ताना जी : अनसंग हीरो फिल्म इसमें सहायक होगी।

आनन्द के लिए है विज्ञान, जुनून और सतत् प्रयास से ही मिलेगी सफलता : राज्यपाल

विज्ञान प्रदर्शनी में दिखा बच्चों और युवाओं के आविष्कारों का कमाल
कोलकाता : क्या आप ऐसे शौचालय की कल्पना कर सकते हैं जिसमें पानी खुद – ब -खुद आकर शौचालय साफ कर जाए या फिर ऐसा कूड़ेदान जो खुद ही खुल जाए और बंद हो जाए। क्या आपने बायो प्लास्टिक्स और प्लास्टिक्स से पेट्रोल बनने की कल्पना की है..अगर नहीं की तो पूर्वी भारत विज्ञान एवं अभियांत्रिकी प्रदर्शनी में आपको यह सब सच होता दिखेगा…कृषि से लेकर स्वास्थ्य और ट्रेन दुघर्टनाओं को रोकने की कोशिश और बच्चों को बचाने के लिए स्मार्ट रोबोट..ऐसे कई आविष्कारों को देखकर दांतों तले उंगली दबायी जा सकती है। हर साल की तरह बीआईटीएम में इस बार भी यह प्रदर्शनी आयोजित की गयी और यह 18 जनवरी तक चलेगी। विज्ञान और इंजीनियरिंग के नवीनतम आविष्कारों और युवाओं की प्रतिभा को सामने लाने के उद्देश्य से हर साल विज्ञान एवं अभियांत्रिकी प्रदर्शनी आयोजित होती है। बीआईटीएम में हर साल आयोजित होने वाली इस प्रदर्शनी का 46वाँ साल है। इस प्रदर्शनी का उद्घाटन करते हुए राज्यपाल जगदीप धनकड़ ने विज्ञान के क्षेत्र में भारत के योगदान का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि विज्ञान आनन्द के लिए होता है। विद्यार्थी जुनून और सतत् प्रयास से सफलता प्राप्त कर सकते हैं। ब्रिटिश डिप्टी हाई कमिश्नर निक लो भारत और ब्रिटेन की वैज्ञानिक साझेदारी की चर्चा की। नेशनल काउंसिल ऑफ साइंस म्यूजियम के निदेशक ए डी चौधरी ने प्रतिभागियों को शुभकामनाएँ दीं। सिस्टर निवेदिता यूनिवर्सिटी के वीसी प्रो. ध्रुवज्य़ोति चट्टोपाध्याय ने सत्र की अध्यक्षता करते हुए प्रकृति को सर्वश्रेष्ठ शिक्षक बताया और विद्याथिर्यों को सवाल पूछते रहने और जिज्ञासु बनने के लिए प्रेरित किया। बीआईटीएम के निदेशक वी. एस. रामचन्द्रन ने बताया कि प्रदर्शनी में इस बार 11 पूर्वी राज्यों के 153 शिक्षण संस्थानों के 387 विद्यार्थी और शिक्षक 160 मॉडल, परियोजनाओं के साथ भाग ले रहे हैं। विज्ञान प्रदर्शनी में असम, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, मिजोरम, मणिपुर, मेघालय. त्रिपुरा, बिहार, ओडिशा तथा पश्चिम बंगाल के प्रतिभागी हैं। दूसरी तरफ अभियांत्रिकी मेले में 45 प्रतिभागियों ने 15 मॉडल व परियोजाएँ पेश कीं। नन्हें वैज्ञानिकों से मुलाकात करनी हो तो आप यहाँ कर सकते हैं।

एक सिरा तुम थामो

राजकिशोर

वीडियो साभार – हिन्दी ज्ञान

तिल सकरात

सुनीता सिंह

अम्मा ने जब सुबह जगाया

खीच रजाई मैंने मुँह छुपाया

क्यों अम्मा! क्या कुछ है खास

बिटिया, आज है तिल सकरात

मैं उठकर आँगन में आई

शीतलहर थी गहरी छायी

चमक रहा था हर इक कोना

दहक रहा जल भरा भगोना

ओह! कुछ भूला सा याद आया

कल अम्मा ने था दही जमाया

चिवड़ा भी तो था कुटवाया

नही चलेगा कोई बहाना

सुबह सुबह था आज नहाना

चिवड़ा दही गुड़ चावल दाल

सजा हुआ था दान का थाल

शीघ्र नहा चौके में आए

औ’ ईश्वर को शीश नवाए

दान पात्र को हाथ लगाया

फिर संक्रांति का भोजन पाया

दही चिवड़ा मिठाई तिल

सबने खाए थे हिलमिल

गूँज रहा था चौक चौपाल

हर हर गंगे सीता राम

साँझ को जब बाबा घर आए

भीष्म भगीरथ का किस्सा लाए

चले पुनः सूरज उत्तरायन

बना आज दिन ऐसे पावन

जाग उठा अम्मा का चौका

खिचड़ी में लगा घी का छौंका

जीवन के कण कण में आज

नाच रहा एक शुद्ध प्रकाश

आज है पावन तिल सकरात

मकर संक्रांति पर भरें स्वाद में मिठास

 तिल-गुड़ रोल 
सामग्री : 2 कप तिल, एक कप खोवा (मावा), एक कप गुड़, 1 छोटा चम्मच इलायची पाउडर, पाव कप सूखे मेवे।
विधि : सर्वप्रथम तिल को एक कड़ाही में डालकर सुनहरा होने तक सेंक कर बारीक पीस लें। खोवा भी भून लें, गुड़ की एक तार की चाशनी बनाएं। काजू, पिस्ता, बादाम आदि ड्रायफ्रूट्स बारीक काट लें। अब तिल, खोवा व इलायची पाउडर को गुड़ की चाशनी में मिला लें। तैयार मिश्रण को चिकनाई लगे छोटे-छोटे सांचों या थाली में डालकर कटे हुए ड्रायफ्रूट भर कर मोड़ते हुए रोल का आकार दें। ठंडे होने पर अपनी मनपसंद आकार में काट लें और तिल-गुड़ के इस पावन पर्व का आनंद उठाएं।
तिल चॉकलेट लड्डू 
सामग्री :  250 ग्राम भुने हुए तिल, 250 ग्राम खोवा (मावा), आधा कप चॉकलेट चिप्स,  250 ग्राम चीनी।
विधि : सबसे पहले भुने हुए तिलों को मिक्सी में हल्का-सा पीस लें। फिर चीनी में थोड़ा पानी डालकर गाढ़ी चाशनी बनाएं फिर कद्दूकस करके खोवा व पिसा हुआ तिल उसमें मिला दें। इस मिश्रण को ठंडा होने दें फिर इसे लड्डू का आकार देकर ऊपर से कुछ चिप्स चिपका कर सजाएं और पेश करें।

देश में पिछले 10 साल में माफ हुआ 4.7 लाख करोड़ रुपये का कृषि कर्ज

मुम्बई : पिछले एक दशक में विभिन्न राज्यों ने कुल 4.7 लाख करोड़ रुपये के कृषि ऋण माफ किये हैं। यह उद्योग जगत से संबंधित गैर निष्पादित आस्तियों (एनपीए) का 82 प्रतिशत है। एक रिपोर्ट में इसकी जानकारी दी गयी है।
एसबीआई रिसर्च की एक रिपोर्ट के अनुसार, कृषि ऋण का एनपीए 2018-19 में बढ़कर 1.1 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया। यह कुल 8.79 लाख करोड़ रुपये के एनपीए का 12.4 प्रतिशत है। वित्त वर्ष 2015-16 में कुल एनपीए 5.66 लाख करोड़ रुपये था और इसमें कृषि ऋण की हिस्सेदारी 8.6 प्रतिशत यानी 48,800 करोड़ रुपये थी।
रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘वित्त वर्ष 2018-19 में कुल एनपीए में कृषि क्षेत्र का हिस्सा महज 1.1 लाख करोड़ रुपये यानी 12.4 प्रतिशत का ही है, लेकिन यदि हम पिछले दशक में 3.14 लाख करोड़ रुपये के माफ किये गये कृषि ऋण को जोड़ें तो खजाने पर इनका बोझ 4.2 लाख करोड़ रुपये हो जाता है। यदि महाराष्ट्र में 45-51 हजार करोड़ रुपये की हालिया ऋण माफी को जोड़ दें तो यह और बढ़कर 4.7 लाख करोड़ रुपये हो जाता है, जो उद्योग जगत के एनपीए का 82 प्रतिशत है।’’
वित्त वर्ष 2014-15 के बाद 10 बड़े राज्यों ने 3,00,240 करोड़ रुपये के कृषि ऋण माफ किये हैं। यदि मनमोहन सिंह की सरकार द्वारा वित्त वर्ष 2007-08 में की गयी ऋण माफी को जोड़ दें तो यह बढ़कर करीब चार लाख करोड़ रुपये हो जाता है। इसमें दो लाख करोड़ रुपये से अधिक के कृषि ऋण 2017 के बाद माफ किये गये।
आंध्र प्रदेश ने 2014-15 में 24 हजार करोड़ रुपये के कृषि ऋण को माफ किया। इसी दौरान तेलंगाना ने भी 17 हजार करोड़ रुपये के कृषि ऋण माफ करने की घोषणा की। तमिलनाडु ने 2016-17 में 5,280 करोड़ रुपये के कर्ज माफ किये। वित्त वर्ष 2017-18 में महाराष्ट्र ने 34,020 करोड़ रुपये, उत्तर प्रदेश ने 36,360 करोड़ रुपये, पंजाब ने 10 हजार करोड़ रुपये, कर्नाटक ने 18 हजार करोड़ रुपये के कृषि ऋण माफ किये। कर्नाटक ने इसके बाद 2018-19 में 44 हजार करोड़ रुपये की कर्जमाफी दी।
वित्त वर्ष 2018-19 में राजस्थान ने 18 हजार करोड़ रुपये, मध्य प्रदेश ने 36,500 करोड़ रुपये, छत्तीसगढ़ ने 6,100 करोड़ रुपये और महाराष्ट्र ने 45-51 हजार करोड़ रुपये की कर्जमाफी की।
हालांकि ये कर्जमाफियां धरातल के बजाय कागजों पर ही अधिक हुई हैं। इनमें से 60 प्रतिशत से अधिक कर्ज माफ नहीं किये जा सके हैं। सबसे खराब प्रदर्शन मध्य प्रदेश का रहा है। मध्य प्रदेश में महज 10 प्रतिशत कर्ज माफ किये गये हैं।

महिला टी20 विश्व कप के लिये बंगाल की ऋचा घोष भारतीय महिला टीम में नया चेहरा

मुम्बई : भारत ने 21 फरवरी से आस्ट्रेलिया में शुरू होने वाले आईसीसी महिला टी 20 विश्व कप के लिये रविवार को 15 सदस्यीय टीम घोषित की और हरमनप्रीत कौर की अगुवाई वाली टीम में बंगाल की बल्लेबाज ऋचा घोष एकमात्र नया चेहरा हैं। टीम में और किसी नये चेहरे को शामिल नहीं किया गया है। वहीं हरियाणा की 15 साल की छात्रा शेफाली वर्मा भी अपने पहले सत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कुछ अच्छे प्रदर्शन के बाद पहली वैश्विक प्रतियोगिता में भाग लेंगी।
रिचा को हाल ही में महिला चैलेंजर ट्राफी में उनके अच्छे प्रदर्शन का फायदा मिला, जिन्होंने 26 गेंद में चार चौके और एक छक्के से 36 रन बनाये थे। महिला चयन समिति की अध्यक्ष हेमलता काला ने कहा, ‘पिछले एक साल में हमने पांच से छह खिलाड़ियों को पदार्पण कराया है। इससे पहले एक ही टीम खेला करती थी लेकिन 2017 वनडे विश्व कप के बाद काफी नयी खिलाड़ी आयी हैं। हमें लगता है कि हमने पांच या छह नये खिलाड़ियों को तैयार किया है जो अब खेल रही हैं। ’उन्होंने कहा, ‘ऋचा घोष नयी खिलाड़ी हैं और यहां चयनकर्ताओं की भूमिका बढ़ जाती है। ’’

चयनकर्ताओं ने टी20 विश्व कप से पहले ऑस्ट्रेलिया में होने वाली त्रिकोणीय श्रृंखला के लिए भी 16 सदस्यीय टीम की घोषणा की, जिसमें नुजहत परवीन को 16 वें सदस्य के रूप में शामिल किया गया। यह टूर्नामेंट 31 जनवरी से शुरू हो रहा है जिसमें तीसरी टीम इंग्लैंड है। कप्तान हरमनप्रीत को लगता है कि बड़े टूर्नामेंट से पहले त्रिकोणीय श्रृंखला खेलना टीम के लिये फायदेमंद होगा।
उन्होंने कहा, ‘‘विश्व कप से पहले, यह श्रृंखला हमारे लिये बड़ी होने वाली है और हम अपने सर्वश्रेष्ठ संयोजन को उतारना चाहेंगे और इससे नयी खिलाड़ियों को भी मौका मिलेगा। ’’ उन्होंने कहा कि कोच डब्ल्यू वी रमन की मौजूदगी से टीम को काफी मदद मिली है। उन्होंने कहा, ‘‘वह काफी अनुभवी क्रिकेटर हैं और हमें कोचिंग दे रहे हैं। वह हमेशा हमारी मदद करते हैं कि दबाव भरे हालात में खुद को कैसे संयमित रखा जाये और एक दूसरे की सहायता कैसे की जाये। वह हमारे लिये बेहतरीन काम कर रहे हैं। उनके अनुभव से विश्व कप में मदद मिलेगी। ’’

विश्व टी 20 टीम : हरमनप्रीत कौर (कप्तान), स्मृति मंधाना, शेफाली वर्मा, जेमिमा रोड्रिग्ज, हरलीन देओल, दीप्ति शर्मा, वेदा कृष्णमूर्ति, रिचा घोष, तानिया भाटिया, पूनम यादव, राधा यादव, राजेश्वरी गायकवाड़, शिखा पांडे, पूजा वस्त्राकर और अरूधंति रेड्डी।

त्रिकोणीय श्रृंखला (16 सदस्यीय) टीम: हरमनप्रीत कौर (कप्तान), स्मृति मंधाना, शेफाली वर्मा, जेमिमा रोड्रिग्ज, हरलीन देओल, दीप्ति शर्मा, वेदा कृष्णमूर्ति, रिचा घोष, तानिया भाटिया, पूनम यादव, राधा यादव, राजेश्वरी गायकवाड़ शिखा पांडे, पूजा वस्त्राकर, अरुंधति रेड्डी, नुजहत परवीन।

वर्ल्ड गेम्स एथलीट ऑफ द ईयर’ के लिये नामांकित हुईं रानी रामपाल

नयी दिल्ली : हॉकी की संचालन संस्था एफआईएच ने भारतीय महिला हाकी टीम की कप्तान रानी रामपाल को ‘वर्ल्ड गेम्स एथलीट ऑफ द ईयर’ के लिये नामांकित किया। ह़ॉकी इंडिया ने बयान में कहा कि अंतरराष्ट्रीय महासंघों द्वारा इस पुरस्कार के लिये 25 खिलाड़ियों को नामांकित किया गया है और एफआईएच ने रानी के शानदार प्रदर्शन और उनकी अगुआई करने की काबिलियत को देखकर उनका नाम इस पुरस्कार के लिये शामिल किया।
हॉकी इंडिया के अध्यक्ष मोहम्मद मुश्ताक अहमद ने कहा, ‘‘हाकी इंडिया रानी के ‘वर्ल्ड गेम्स एथलीट ऑफ द ईयर 2019’ के लिये नामांकित किये जाने की खबर से बहुत खुश है। वह देश में कईयों के लिये प्रेरणास्रोत हैं। ’’
विजेता का फैसला ऑनलाइन वोटिंग में किया जायेगा जो 30 जनवरी को समाप्त होगी। रानी ने भारत के पहली बार लगातार ओलंपिक खेलों के लिये क्वालीफाई करने में काफी अहम भूमिका निभायी।