Friday, October 16, 2026
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जब श्रीराम से मिले हनुमान

चित्रकार हैं – दिव्या अग्रवाल। दिव्या योग से स्नातक कर रही हैं और चित्रकला में दक्ष हैं।

 

शांत था गंगा का पानी

वसुन्धरा मिश्र

कलकल खल खल करती गंगा
आज शांति से बहती लगी
मन में हलचल मची
रोज मचलती लहरें बलखाती
नाव से अठखेलियाँ करती
पों पों की आवाज से लांच का चीरते हुए उस पार जाना
किनारे पर सर्कुलर ट्रेन का धड़ धड़ निकलना
हजारों की भीड़ की चिल्ल पों
गंगा आज चुपचाप लगी
गंगा सिर्फ़ धर्म की परिभाषा बनाई गई
जीवन की नैसर्गिक प्रकृति बन इंसानों की रक्षक बनी
किसी ने दरिया तो कहीं माँ बनी
सखी बन संस्कृति बनी
एक तट से दूसरे तट तक चुनरिया चढ़ न सकी
प्रेम और स्नेह में बंध न सकी
चांद की रोशनी में नहाई लहरों ने रास लीला रचाई
कभी लाल तो कभी सिंदूरी
बादलों के रंग में रंग जाती
विचित्रता से भरी शांत दिखी
बहुत खूबसूरत लगी खुश लगी
अंग अंग थिरकती लगी
बहुत वर्षों बाद लगा सूकून से भरी लगी
विश्राम मिला
भूल चुकी थी अपने अस्तित्व को
खो चुकी थी अपना प्रवाह
सूर्य की रोशनी में चांदी सी चिलकती
चांद की छिटकी किरणों में नहाई
अपने वक्षस्थल को निहारती
हिरनी सी चंचला लगी
नीले आसमान की छाया में श्वास लेती
हंस बत्तख और मछलियों की सहेली बनी
मचलती नवयौवना सी गंगा
आज शांति दूत लगी
इंसानों की बस्ती अब भाती नहीं
चिरना फाड़ना काटना नोचना फेंकना
कालिख पोतना मार काट से दूर
आज संवेदनशील और भावनाओं की देवी गंगा
अपनी दुनिया में  आज खुश है।

कोरोना युद्ध : कई स्तरों पर चरणबद्ध तरीके से आर्थिक गतिविधियाँ आरम्भ हों : एसोचेम

कोलकाता : एसोचेम कोरोना के कारण हुए लॉकडाउन के बाद ठप पड़ी आर्थिक गतिविधियों को चरणबद्ध तरीके से आऱम्भ करने के पक्ष में है। इस परिप्रेक्ष्य में एसोचेम जाँचपरक तरीका ले आया है जिसमें अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों की तुलना में आर्थिक गतिविधियाँ तथा निर्माण क्षेत्र चरणबद्ध तरीके से खोले जाने का प्रस्ताव है। इन गतिविधियों में कृषि, निर्यात, स्वचालित मशीनों द्वारा संचालित उद्योग और चयनित निर्माण भी शामिल है। इसे लेकर एसोचेम ने ‘इंडिया ओपेनिंग फॉर बिजनेस – सजेस्टेड कैलिबरेटेड अप्रोच एंड पोटेंशियल (सोप्स)’ रिपोर्ट जारी की है। सुरक्षा नियामको का ध्यान रखते हुए एसोचेम सोप्स में कोरोना खत्म होने तक सभी कर्मचारियों तथा अनुबंधित कर्मियों की मेडिकल जाँच बार – बार करवाने का प्रस्ताव है। एसोचेम के महासचिव दीपक सूद ने कहा, ‘हम केन्द्र एवं राज्य सरकारों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। चुनौतियों का सामना करते हुए अर्थव्यवस्था से सम्बन्धित अपने सुझाव और परामर्श देने के लिए हम प्रतिबद्ध हैं।’ पर्याप्त श्रमिकों की उपलब्धता वाले निर्माण स्थल, निर्यात केन्द्रित सरकारी कार्यालयों, ई -कॉमर्स और कृषि सम्बन्धित क्षेत्र प्रथम चरण में खोले जाने चाहिए। रावी की फसलों को देखते हुए खेतो पर मशीनरी के साथ श्रमिकों की जरूरत है। इस समय देश की खाद्य सुरक्षा एक महत्वपूर्ण मसला है। सम्भव है कि जीडीपी की दृष्टि से कृषि का इस समय उतना योगदान न हो मगर यह क्षेत्र आधे से अधिक आबादी की जीवन रेखा है। सूद ने कहा कि कृषि क्षेत्र को राष्ट्रीय संसाधन और प्रतिबद्धता की जरूरत है और यह अच्छी बात है कि कुछ राज्य ऐसा कर रहे हैं। इसके बाद आई टी, पेशेवर सेवाएँ, फूड रिटेलिंग तथा होटल खोले जा सकते हैं। इसके बाद परिवहन सेवा के अन्तर्गत बस तथा एयरलाइनों को संचालन की अनुमति मिले। बड़े स्तरों पर अन्तरराष्ट्रीय उड़ानों को अंतिम चरण में अनुमति दी जा सकती है।
कोविड -19 संक्रमित लोगों को कार्यस्थल तथा हर जगह से अलग रखा जाये। सोप्स अनिवार्य मेडिकल जाँच के अतिरिक्त सरकार द्वारा स्वीकृत सामाजिक दूरी के नियम का पालन घर से लेकर कार्यस्थल तक हो। तम्बाकू और गुटखे पर जैसे उत्पादों पर पूरी तरह प्रतिबन्ध हो। आपात मेडिकल सुविधा के लिए कार्यस्थल के आस – पास कोविड -19 केन्द्रित अस्पतालों का होना सुनिश्चित किया जाये। एसोचेम ने निर्माण क्षेत्र की चुनौतियों को भी पहचाना है और इसका मानना है कि खाद्य प्रसंस्करण (फूड प्रोसेसिंग), ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल, रक्षा आयुध निर्माण, और इलेक्ट्रॉनिक निर्माण को फिर से शुरू करने की जरूरत है क्योंकि चीन कोरोना से उबरने के बाद इन क्षेत्रों में कड़ी टक्कर दे सकता है। इसके अतिरिक्त इन क्षेत्रों में रोजगार सृजन की बहुलता भी है,इसलिए यह और भी जरूरी है।

कोरोना काल में सहायता के लिए आगे आई बेस्ट फ्रेंड्ज सोसायटी

कोलकाता : कोविड -19 यानी कोरोना वायरस के कारण लॉकडाउन में जरूरतमंद परिवारों की समस्या बढ़ गयी है। ऐसी स्थिति में बेस्ट फेंड्ज सोसायटी ने समाज के कमजोर तबके के लिए आगे कदम बढ़ाया है। बेस्ट फ्रेंड्ज सोसायटी और कोलकाता की पी आर व इवेन्ट कम्पनी लॉन्चर्ज ने संवेदनशील इलाकों के 5 हजार लोगों की मदद का बीड़ा उठाया है। यहाँ यह गौर करने वाली बात यह है कि बीएफएस की परियोजनाएँ सरकारी अनुदान प्राप्त नहीं हैं बल्कि यह समाज के विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिष्ठित कॉरपोरेट तथा लोगों द्वारा समर्थित है। इसके लिए यूनीकॉर्न रिक्रूटर्स, ‘द सिटिजन्स’ ऑनलाइन समाचार वेबपत्रिका, बांग्ला समाचार ‘सोंगति’, एस्पेरेगस हॉस्पिटैलिटी, निशा एम. लोयलका, डिजाइनर स्टोर ने सहयोग किया है। इसके अतिरिक्त पिछले कुछ सप्ताह से बेस्ट फ्रेंड्ज सोसायटी 786 से अधिक परिवारों को राशन, स्वच्छता उत्पाद वितरित किये हैं। इसके साथ ही ‘फोन ए फ्रेंड’ अभियान भी चलाया जा रहा है। इसके तहत लोगों को घर पर रहने के लिए प्रेरित किया जाता है। बीएफएस ने अब तक पश्चिम बंगाल के अतिरिक्त पुणे, नोएडा, हिमाचल, हरियाणा, तमिलनाडु, केरल, झारखंड में मदद की है। पश्चिम बंगाल में कोलकाता, मालदा, पुरुलिया, मोगराहाट, उलुबेड़िया, बाँकुड़ा जगहों पर बीएफएस ने सहायता की है।
अभियान की शुरुआत निचले तबके से की थी जिनमें दिहाड़ी मजदूर, कचरा चुनने वाले जैसे लोग शामिल थे मगर अब शिक्षकों, मीडियाकर्मी, सेवा कर्मी, पेशेवरों को भी सहायता पहुँचायी जा रही है। बेस्ट फ्रेंड्ज सोसायटी की सह संस्थापक शगुफ्ता हनाफी ने बताया कि मदद देते समय लोगों की तस्वीरें नहीं दिखायी जा रही हैं।
अगर आप इस अभियान और बेस्ट फ्रेंड्ज सोसायटी से जुड़ना चाहें तो आप भी भारत के किसी कोने से सम्पर्क कर सकते हैं –

9831362042
[email protected] 

क्या सभी तरह के व्यापार के लिए आवश्यक है डिजिटल मार्केटिंग ?

रास्ते आसान हो जाते हैं. जब कोई राह बताने वाला हो…और यह तभी होगा जब कोई ऐसा मंच अथवा माध्यम हो…जब परामर्श सही जगह पर और सही समय पर पहुँचे। शुभजिता का प्रयास हमेशा से ही ऐसी सकारात्मकता को आगे ले जाना रहा है तो हम कर रहे हैं एक नये स्तम्भ की शुरुआत विशेषज्ञ परामर्श..। इसके तहत अलग – अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों के परामर्श आपके लिए लाने का प्रयास रहेगा। शुभ सृजन सम्पर्क में पंजीकरण करवाने वाले विशेषज्ञों को आप तक पहुँचाया जायेगा और हमारा प्रयास इससे भी आगे होगा। तुरिया कम्युनिकेशन एलएलपी की सह संस्थापक, संध्या सुतोदिया  बता रही हैं इस बार डिजिटल मार्केटिंग में अवसर के बारे  में। अगर आपके पास कोई प्रश्न हों, अपने प्रश्न आप हमारे सोशल मीडिया पेज पर भी भेज सकते हैं या शुभजिता को टैग करके अपनी बात कह सकते हैं –

संध्या सुतोदिया

क्या आप अब भी डिजिटल मार्केटिंग से परहेज करते आ रहे हैं, क्या आप यह इसलिए कर रहे हैं क्योंकि आपको लगता है कि आपका व्यापार इसके लिए अभी तैयार नहीं है? तो एक बार फिर से सोच लीजिए! इसकी बहुत ज्यादा सम्भावना है कि आप के सम्भावित ग्राहक इंटरनेट पर आपके जैसे ही किसी व्यापार की खोज कर रहे होंगे, और यह भी हो सकता है कि वह आपके किसी प्रतियोगी को ढूंढ लें जिनकी डिजिटल उपस्थिति मजबूत हो। आज के इस डिजिटल युग में, यही तरीका है जिससे लोग अपना व्यापार बढ़ाते हैं। जब कोई ग्राहक आपके साथ व्यापार करना चाहता हैं, तो जो सबसे पहला कार्य जो वे करते हैं, वह है आपके और आपके व्यापार के बारे में ऑनलाइन जानकारी एकत्रित करना। उदाहरण स्वरूप:- जब हम कोई स्मार्टफोन, टैबलेट या अन्य उपकरण खरीदने जाते हैं तो उससे पहले ऑनलाइन उसकी समीक्षा अवश्य पढ़ते हैं। इसी तरह गूगल पर आपके व्यापार की सकारात्मक प्रतिपुष्टि और रेटिंग से आपको अपनी विश्वसनीयता बढ़ाने में और अपने प्रतियोगियों से आगे रहने में सहायता करता है।
जैसे की हम सभी को पता है मार्केटिंग हमेशा ही अपने लक्षित दर्शक से सही समय और सही जगह पर जुड़ना होता है। आज मार्केटर्स को उनसे उस जगह से जुड़ना होगा जहां उनके लक्षित दर्शक अधिक समय व्यतीत करते हैं, जो है इंटरनेट।
डिजिटल मार्केटिंग में प्रवेश करें- दूसरे शब्दों में, उस तरह की मार्केटिंग जो ऑनलाइन मौजूद है।
* डिजिटल मार्केटिंग क्या है?
डिजिटल मार्केटिंग में सभी तरह के मार्केटिंग प्रयासों को शामिल, जो इलेक्ट्रॉनिक डिजिटल माध्यम जैसे कि सर्च इंजन, सोशल मीडिया, ई-मेल और अन्य वेबसाइट के उपयोग से अपने अभी के ग्राहकों एवं भावी ग्राहकों से जुड़ते हैं। पारंपरिक मार्केटिंग( जैसे कि प्रिंट विज्ञापन, टेलिफोनिक मार्केटिंग और अन्य) या शारीरिक मार्केटिंग में कई बाधाएं होती हैं, डिजिटल मार्केटिंग में ब्रांड के लिए अनंत संभावनाएं हैं, जैसे कि ईमेल, वीडियो, सोशल मीडिया या वेबसाइट आधारित मार्केटिंग।
हालांकि क्या डिजिटल मार्केटिंग सभी तरह के व्यापार के लिए आवश्यक है? अगर हां, तो डिजिटल मार्केटिंग रणनीतियों के क्या फायदे हैं?
डिजिटल मार्केटिंग किसी भी उद्योग के किसी भी व्यापार के लिए आवश्यक है। व्यापार की बिक्री की परवाह किए बिना डिजिटल मार्केटिंग ऑनलाइन व्यक्तित्व निर्माण को शामिल करता है, जो बिक्री बढ़ाते हुए व्यापार की विश्वसनीयता बढ़ाता है।
* डिजिटल मार्केटिंग के फायदे:-
1) डिजिटल मार्केटिंग से व्यापार और मौजूदा एवं संभावित ग्राहकों के बीच सीधे संचार के रास्ते बनते हैं, जिससे वफादार ग्राहक आधार बनाने में सहायता मिलती है।
2) डिजिटल मार्केटिंग से ब्रांड की जागरूकता बढ़ती है; जिससे लक्षित दर्शक तक पहुंचने में सहायता मिलती है।
3) पारंपरिक मार्केटिंग की तुलना में डिजिटल मार्केटिंग अधिक खर्च प्रभावी है क्योंकि इससे बहुत पैसों की बचत होती है। यह अच्छी आर ओ आई ( रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट) भी प्रदान करती है।
4) डिजिटल मार्केटिंग से वास्तविक कालीन ग्राहक सेवाएं बनती है। जिससे ग्राहकों की ब्रांड तक पहुंच बढ़ जाएगी।
5) सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन (एस ई ओ) की सहायता से हम सभी यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि सही ग्राहक सही विषय वस्तु देख रहे हैं। जब कोई ग्राहक किसी ब्रांड से मिलते जुलते विषय वस्तु या टॉपिक वेब पर ढूंढता है, तो एस ई ओ संचालन करते हुए ग्राहक को ब्रांड तक पहुंचाता है।
6) यह ग्राहक के बर्ताव, ट्रेंड, खरीदारी की आदतें, खरीदारी के तरीके, आकर्षण और अन्य जानकारी को नापता और जांच भी करता है।

* यही है एकमात्र डिजिटल समाधान:-
डिजिटल मार्केटिंग अपने विभिन्न रूपों में, मॉडर्न व्यापार की पहुंच का एक हिस्सा है। तुरिया कम्युनिकेशन एलएलपी में हम आपकी तकनिकी जरूरतों, डिजिटल मार्केटिंग की आवश्यकताओं को समझते हैं और हम मार्केट की गतिविधियों को याद रखते हुए डिजिटल मीडिया की रणनीतियों की तैनाती करते हैं। कंटेंट लिखने से लेकर ए/ बी विज्ञापन टेस्ट चलाना, लीडिंग पेज वायरफ्रेम्स बनाना, कीवर्ड की खोज करना, डेटा की जांच करना, वेबसाइट की खोज और जांच, मुख्यता हासिल करना, सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन से गूगल विज्ञापन के शब्द- हम आपको सभी तरह के डिजिटल उपाय आपके सभी ब्रांडिंग जरूरतों के लिए प्रदान करते हैं।
तुरिया कम्युनिकेशन एलएलपी से जुड़ें, जो बाकी के मार्केट से अधिक संचार की दुनिया को जानता है, जिससे आप अपने व्यापार को बढ़ावा दे सकते हैं। अपने व्यापार को तुरिया की रचनात्मकता की मदद से ऑनलाइन विस्तार कीजिए।

लेखिका तुरिया कम्युनिकेशन एलएलपी की सह संस्थापक हैं

सम्पर्क- फोन: +91 89815-92855 / 8981592855
ई मेल : sandhya@ turiyacommunications.com
[email protected]

शुभजिता युवा प्रतिभा सम्मान – प्रतिभागी – प्रीति कुमारी साव

 

प्रीति कुमारी साव

शिक्षण संस्थान –  बर्दवान विश्वविद्यालय

प्रतियोगिता – कहानी

विषय – मलेरिया

 ले गया सब मलेरिया

किसी गाँव में एक श्याम नाम का एक गरीब किसान रहता था। वह अत्यन्त गरीब था। उसके परिवार में कुल पाँच सदस्य थे। श्याम उसकी पत्नी आशा और दो पुत्री और एक पुत्र था। बड़ी पुत्री सुमन, जो आठ वर्ष की थी और छोटी पुत्री गंगा जो छः वर्ष की थी और एक तीन वर्ष का पुत्र था जिसका नाम अमन था । परिवार के सभी सदस्यों की जिम्मेदारी श्याम पर थी। किसी प्रकार से खेती करके दो वक्त भोजन प्राप्त होता था उसके परिवार का गुजारा बड़ी मुश्किल से होता था। ग़रीबी के कारण श्याम के परिवार को कभी-कभी भूखे भी रहना पड़ता था। उसी गाँव में एक गजाधर नाम का एक जमींदार रहता था जो बहुत धनी था, परन्तु बहुत कपटी,छल करने वाला तथा किसानों का शोषण भी करता था। जमीन्दार गजाधर गाँव में गरीबी किसानों को अपने शोषण का शिकार बनाता था । वह गाँव के लोगों की मदद अपना स्वार्थ साधने हेतु करता था लोगों की मदद कर के उनको गुलाम बना देता था । श्याम बहुत गरीब था उसे भूखे पेट सोना मंजूर था परन्तु वह गजाधर जमींदार के आगे हाथ फैलाना नहीं चाहता था जमींदार केवल मौका ढूढ़ता था कि इसका शोषण कैसे किया जाए । एक दिन जब श्याम खेती कर रहा था तभी उसकी बड़ी पुत्री सुमन दौड़ती हुई श्याम किसान के पास आयी और कहने लगी कि “अमन की तबीयत बहुत खराब है।” यह सुनकर किसान अपना काम छोड़कर अपनी घर की ओर बढ़ा । घर जाकर देखा कि उसके पुत्र अमन का शरीर बुखार से जल रहा था किसान की पत्नी आशा चिन्ता के मारे रोने लगी । अमन को बुखार के साथ काफी पसीना आ रहा था ,कंपकंपी सी होने लगी ,सिर दर्द, शरीर में दर्द, जी मचल रहा था ,उल्टी भी हो रही थी ,एक छोटे से तीन वर्ष के बालक पर कष्ट का पहाड़ टूट पड़ा था । किसान और उसका पूरा परिवार चिन्ता में पड़ गया । किसान जल्द ही अमन को गाँव के एक वैघ के पास ले गया । वैघ ने कहा, यह कौई मामूली बुखार नहीं हैं । वैघ इस बिमारी का इलाज़ नहीं कर सकता था ,उसने कहाँ इसे जल्द ही पास के शहर के अस्पताल में ले जाना होगा । गाँव के अस्पताल में कोई व्यवस्था न थी ,शहर के अस्पताल में काफी खर्च होता था और किसान के पास इतने पैसे न थे कि वह अपने पुत्र को शहर के अस्पताल में इलाज करवायें । किसान के पुत्र अमन की हालत बहुत खराब हो रही थी । अंत में श्याम को कपटी जमींदार गजाधर के आगे घुटने टेकने पड़े ,कयोंकि कि गाँव में और कोई उसकी मदद नहीं कर सकता था ।
जमीन्दार ने मौके का लाभ उठाया । उसने कहा, ‘मैं तुम्हारी मदद के लिए तैयार हूँ मैं पैसा दे दूँगा किन्तु एक शर्त हैं कि तुम्हें…”3 सैकड़े के हिसाब से सूद देना होगा और एक महीने के अंदर मेरे पैसे लौटाने होंगे नहीं तो तुम्हें आजीवन मेरे यहाँ गुलामी करनी होगी” किसान के पास कोई दूसरा उपाय न था उसने शर्त मान ली । किसान अपने पुत्र को इलाज के लिए शहर के अस्पताल में ले गया वहाँ पता चला कि उसके पुत्र को मलेरिया हुआ हैं। किसान डॉक्टर से विनती करने लगा कि मेरा एक ही पुत्र हैं ,उसे जो बीमारी (मलेरिया) हैं उसे ठीक कर दीजिये । कुछ दिनों में किसान का पुत्र स्वस्थ होने लगा और धीरे-धीरे पूरी तरह स्वस्थ हो गया। किसान वापस गाँव आ गया किन्तु शर्त के अनुसार उसे एक महिने में सूद के साथ जमींदार से लिए हुए पैसे लौटाने थे । किसान बड़ी मुश्किल से खेती करके परिवार के लिए दो वक्त का भोजन जुटाता था ,अब उस पर कर्ज का भार आ गया। किसान एक महीने में पैसे जुटाने में समर्थ न हो सका ,अंत में किसान को आजीवन जमींदार गजाधर के यहाँ गुलामी करनी पड़ी ।।

हनुमान का जन्म स्थल है मध्य प्रदेश में स्थित टिहरका गाँव

शुभजिता में हमारा प्रयास मिथकों में बिखरे इतिहास को समेटना है। यह हैरत की बात है कि आधुनिक बुद्धिजीवी व इतिहासकार बड़ी आसानी से भारत के प्राचीन इतिहास को झुठलाने का प्रयास करते रहे हैं और आज स्थिति यह है कि हमारी नयी पीढ़ी अपनी ही जड़ों से कट गयी है। यह सत्य है कि हमारे प्राचीन ग्रन्थों में समय के साथ कवियों ने अपने समय के साथ बहुत सी चीजों को तोड़ा और मरोड़ा है। बहुत सी बातों से हमारी असहमति हो सकती है और स्वाभाविक है मगर इन अतिरंजनाओं के कारण अपने इतिहास को ही खारिज कर देना मूर्खता के अतिरिक्त कुछ और नहीं है। शुभजिता में हम सनसनीखेज और अन्धविश्वास को प्रोत्साहन नहीं देते मगर यह अवश्य है कि हमारे ग्रन्थों में जो प्रमाण पूरे भारतवर्ष में छिटके पड़े हैं, उनको विभिन्न माध्यमों और स्त्रोंतो की सहायता से सामने लाना प्रयास रहता है ताकि नयी पीढ़ी अपने इतिहास से अवगत हो सके। वो सब ले सके जो उत्तम था…औऱ वह सब छोड़ सके जो अधम था…और यह तभी होगा जब हम प्रामाणिकता के साथ अपने स्थलों को जानें, इतिहास को जानें…जो हमारा विश्वास भी हैं और हमारी अनुपम धरोहर भी। भारत एक आम देश नहीं…उसकी सीमाएँ विशाल हैं….यह देश देव भूमि है…औऱ इस देव भूमि के हर नागरिक को अपनी जड़ों से मिलना होगा…हम बस इसका माध्यम बन रहे हैं और वह भी विभिन्न स्त्रोंतों की सहायता से।

आज हनुमान जन्मोत्सव था और वह चिरंजीवी हैं इसलिए उनकी जयन्ती नहीं जन्मोत्सव ही होता है। इस कड़ी में आप जानिए हनुमान के जन्मस्थल के बारे में, जहाँ हनुमान ने जन्म लिया था। रामायण और राम, दोनों के लिए हनुमान का अपना महत्व है क्योंकि दोनों ही इनके उल्लेख के बगैर अधूरे हैं। हनुमानजी का जन्म स्थान कहां है। जहां हम दर्शन कर पुण्य की प्राप्ति कर सकते हैं। जी हां, हम आज बात कर रहे हैं, मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले में स्थित टिहरका गांव की। यहां की पौराणिक मान्यता और त्रेता युग के किस्सों में हनुमानजी के जन्म से जुड़ी बातें बताई जाती हैं। वहीं इस गांव में स्थित मंदिरों में पूजा करने के लिए भक्त सिर्फ इसलिए आते हैं कि यहां हनुमानजी ने जन्म लिया था।

दरअसल, टिहरका गांव में हनुमानजी का अतिप्राचीन मंदिर है, इस मंदिर के बारे में पौराणिक मान्यता है कि भगवान हनुमानजी ने इसी गांव में जन्म लिया था। इसी पावन पवित्र धरा पर चैत्र शुक्ल पक्ष दिन मंगलवार को मारुतिनंदन का जन्म हुआ। अंजनी माता अपने पति केशरी के साथ सुमेरु पर्वत पर निवास करती थीं। जब कई सालों तक माता अंजनी को संतान प्राप्त नहीं हुई तो मतंग ऋषि के कहने पर टिहरका गांव के पर्वत पर करीब 7 हजार सालों तक निर्जल तप किया, तबसे बिल्व की आकृति का पर्वत अडिग खड़ा है।

इसी पर्वत के नीचे भगवान महादेव का धाम भी है। यहां माता अंजनी तपस्या करके पूर्व दिशा में स्थित आकाश गंगा में स्नान करती थीं। वे दोनों कुंड इस गांव में आज भी मौजूद हैं, जिनका पानी कभी नहीं सूखता है। हनुमानजी के जन्म को लेकर इस गांव में एक और किवंदति है कि जिस यज्ञ से भगवान राम का जन्म हुआ था, उसी यज्ञ के प्रसाद से हनुमान जी का भी जन्म हुआ था। जब राजा दशरथ ने पुत्र प्राप्ति के लिये यज्ञ कराया तब यज्ञ के बाद ऋषि वशिष्ठ ने चारों रानियों को खीर का प्रसाद दिया था।

इसी दौरान कैकई के हाथ से प्रसाद का कुछ भाग छीनकर एक चील ले भागा। रास्ते में तूफान से उस चील के हाथ से प्रसाद गिर गया। उसी समय पवन देव ने पर्वत पर तपस्या कर रही अंजनी माता के हाथ पर वह प्रसाद डाल दिया, जैसे ही माता ने वह प्रसाद ग्रहण किया, हनुमानजी गर्भ में आ गए और इस तरह हनुमानजी ने टिहरका गांव में जन्म लिया।

टिहरका गांव के इस सिद्ध धाम में बाल हनुमान के साथ माता की पांच मूर्तियां विरजित हैं। कहते हैं कि हनुमानजी के जन्म के बाद शेष नाग दर्शन के लिए आए थे। यहां बाल हनुमान और शेष नाग की मूर्ति भी दर्शन देती है।

अवकाश वाली सभ्यता

रामधारी सिंह “दिनकर”

मैं रात के अँधेरे में
सितारों की ओर देखता हूँ
जिन की रोशनी भविष्य की ओर जाती है

अनागत से मुझे यह खबर आती है
की चाहे लाख बदल जाये
मगर भारत भारत रहेगा

जो ज्योति दुनिया में
बुझी जा रही है
वह भारत के दाहिने करतल पर जलेगी
यंत्रों से थकी हुयी धरती
उस रोशनी में चलेगी

साबरमती, पांडिचेरी, तिरुवन्न मलई
ओर दक्षिणेश्वर,
ये मानवता के आगामी
मूल्य पीठ होंगे
जब दुनिया झुलसने लगेगी,
शीतलता की धारा यहीं से जाएगी

रेगिस्तान में दौड़ती हुयी सन्ततियाँ
थकने वाली हैं
वे फिर पीपल की छाया में
लौट आएँगी

आदमी अत्यधिक सुखों के लोभ से ग्रस्त है
यही लोभ उसे मारेगा
मनुष्य और किसी से नहीं,
अपने आविष्कार से हारेगा

गाँधी कहते थे,
अवकाश बुरा है
आदमी को हर समय
किसी काम में लगाये रहो
जब अवकाश बढ़ता है ,
आदमी की आत्मा ऊंघने लगती है
उचित है कि ज्यादा समय
उसे करघे पर जगाये रहो

अवकाशवाली सभ्यता
अब आने ही वाली है
आदमी खायेगा , पियेगा
और मस्त रहेगा
अभाव उसे और किसी चीज़ का नहीं ,
केवल काम का होगा
वह सुख तो भोगेगा ,
मगर अवकाश से त्रस्त रहेगा
दुनिया घूमकर
इस निश्चय पर पहुंचेगी

कि सारा भार विज्ञान पर डालना बुरा है
आदमी को चाहिए कि वह
ख़ुद भी कुछ काम करे
हाँ, ये अच्छा है
कि काम से थका हुआ आदमी
आराम करे

कोविड -19 : सरकार से सहायता चाहता है खुदरा व्यवसाय क्षेत्र

नयी दिल्ली : कोरोना से हुए लॉकडाउन के कारण आर्थिक गतिविधियों पर काफी बुरा असर पड़ा है। खासकर खुदरा व्ववसाय क्षेत्र में गतिविधियाँ ठप होने से काफी परेशानी हो रही है। स्थिति को देखते हुए खुदरा व्यवसाय के संगठन रिटेलर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (आर ए आई) ने केन्द्र सरकार से सहायता माँगी है। केन्द्र सरकार द्वारा कोविड -19 के परिप्रेक्ष्य में उठाये गये कदमों का स्वागत करते हुए आर ए आई अपनी कठिनाइयाँ बताते हुए कुछ माँगें केन्द्र सरकार के समक्ष रखी हैं।
आर ए आई के अनुसार देश में इस समय छोटे – बड़े 15 मिलियन खुदरा व्यवसायी हैं और इससे 40 -50 मिलियन लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिल रहा है। भारत के उपभोक्ता खपत में खुदरा क्षेत्र का 40 प्रतिशत अंश है। लॉकडाउन के कारण खाद्य तथा आवश्यक वस्तुओं को छोड़कर देश भर में साड़ियाँ, कपड़े, इलेक्ट्रानिक्स, मोबाइल फोन, फर्नीचर, हार्डवेयक समेत कई क्षेत्रों की दुकानें बंद कर दी गयी हैं। किराने के अतिरिक्त फूड रिटेल को छोड़ दें तो इस क्षेत्र में 80 से 100 प्रतिशत की गिरावट आयी है। लॉकडाउन खत्म होने के बाद भी 6 से 9 महीने तक खपत में 25 -30 प्रतिशत की गिरावट की आशंका है। खुदरा क्षेत्र में 60 -70 प्रतिशत कीमतें तय रहती हैं और कम मार्जिन रखकर ही व्यवसायी को काम करना पड़ रहा है और इसमें कर्मचारियों को वेतन देने में बड़ा अंश चला जाता है। कार्यकारी पूँजी का बड़ा निवेश इस क्षेत्र में है और इसमें से अधिकतर पूँजी उधार के रूप में निवेश की गयी है। 90 प्रतिशत खुदरा व्यवसाय कर्मी दुकानों में हैं जो न्यूनतम मजदूरी पर काम कर रहे हैं। लॉकडाउन और खपत कम होने के कारण उनकी छंटनी होने की भी आशंका है। वितरक, निर्माता, कच्चा माल आपूर्ति करने वालों और पूरी वैल्यू चेन को ऑर्डर रद्द होने के कारण आय कम होने का अन्देशा है।
स्थिति को देखते हुए आर ए आई ने आरबीआई तथा बैंकिंग क्षेत्र के समक्ष कई माँगें रखी हैं।
उच्च इन्वेंट्री की स्थिति और माँग कम होने के कारण, जो लॉक-डाउन अवधि के बाद भी जारी रहेगा, उद्योग को जीवित रहने के लिए लंबे समय तक समर्थन की आवश्यकता होगी। बैंकों को 15 दिनों के लिए 2020 से 31 दिसंबर 2020 तक प्रभावी ऋणों, अल्पकालिक ऋणों, कॉर्पोरेट ऋणों, प्रतिभूतियों के ऋण, बांड, बंधक, ऋण, सामान्य प्रयोजन ऋणों की किश्तों और ब्याज के भुगतान के लिए 270 दिनों की समय सीमा का विस्तार करने के लिए अनिवार्य होना चाहिए ।
31 दिसंबर 2020 तक कैश क्रेडिट लाइन्स के सभी ब्याज भुगतान के लिए 270 दिनों का अधिस्थगन हो।
गैर-निधि स्रोतों जैसे बिल में छूट, ऋण पत्र को अधिस्थगन में शामिल किया जाना चाहिए
बैंकों को बिना राजस्व के कारण होने वाली कमी को पूरा करने के लिए अनिवार्य रूप से 25% अतिरिक्त कार्यशील पूंजी क्रेडिट लाइनें प्रदान करनी चाहिए। कंपनियों के लिए अपने वेतन और समय पर मजदूरी का भुगतान करना महत्वपूर्ण है।
अतिरिक्त कार्यशील पूंजी क्रेडिट लाइनों को 31 दिसंबर 2020 तक उपलब्ध कराया जाए। 1 जनवरी 2021 से 31 मार्च 2021 के बीच 3 किश्तों में अतिरिक्त कार्यशील पूंजी क्रेडिट लाइनों का भुगतान किया जाए।
आरबीआई को सेबी को क्यू आईपी ( QIP) के लिए शेयर मूल्य निर्धारण मानदंडों में ढील देने की सिफारिश करनी चाहिए और कंपनियों को पूंजी जुटाने में मदद करने के लिए तरजीही आवंटन करना चाहिए। अधिकारों के मुद्दे के लिए महत्वपूर्ण छूट भी आवश्यक है।
ब्याज सब्सिडी और डिफ़ॉल्ट राहत
खुदरा उद्योग के लिए सभी ऋणों पर ब्याज दरें 15 मार्च 2020 से 31 दिसंबर 2020 तक 400 आधार बिंदु तक सब्सिडी / कम की जाएंगी।
भारतीय रिज़र्व बैंक से अनुरोध है कि 31 मार्च 2021 तक एनपीए रिपोर्टिंग दिशानिर्देशों को शिथिल करें।
सांविधिक भुगतान / खातों में छूट
31 जुलाई 2020 तक देय भुगतानों के लिए आयकर, अग्रिम कर, जीएसटी, ईएसआईसी, पीएफ आदि जैसे सभी वैधानिक बकाया जमा करने के लिए 90 दिनों की अवधि बढ़ाएं।
वर्ष 2019-20 के वित्तीय खातों के लिए अनिवार्य रिपोर्टिंग / सांविधिक फाइलिंग दिनों को 60 दिनों से 31 जुलाई 2020 तक बढ़ाएं।
रोजगार सहायता: खुदरा व्यापार में कोई नौकरी के नुकसान को कम करने के लिए उद्योग को वित्तीय सहायता की आवश्यकता है। इसके लिए संगठन ने अनुरोध किया है कि लॉकडाउन हटाए जाने के बाद विस्तारित लॉकडाउन और रिकवरी अवधि के दौरान खुदरा विक्रेताओं को कर्मचारियों के रोजगार को जारी रखने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए नकद समर्थन के रूप में न्यूनतम मजदूरी के 50% पर 4 महीने (20 मार्च से 20 जून) की नौकरी सहायता सब्सिडी का अनुरोध करें।
संगठन को उम्मीद जतायी है कि भारत सरकार इस प्रतिनिधित्व में चिंताओं को पर्याप्त रूप से ध्यान में रखेगी ताकि कोरोना के प्रकोप के कारण संभावित प्रतिकूलताओं को दूर किया जा सके जिससे खुदरा उद्योग को अभूतपूर्व कठिनाई हो सकती है।

हेरिटेज ने कोरोना से लड़ने के लिए दिये 1 करोड़ रुपये

कोलकाता : हेरिटेज ग्रुप ऑफ इन्स्टीट्यूशन्स, कोलकाता (एचआईटीके) ने कोरोना से लड़ने के लिए 1 करोड़ रुपये का अनुदान दिया गया है। एचआईटीके द्वारा प्रदत्त जानकारी के अनुसार इनमें से 50 लाख रुपये पी एम केयर फंड में दिये गये हैं। इसके अतिरिक्त 50 लाख रुपये पश्चिम बंगाल आपदा राहत कोष यानी वेस्ट बंगाल स्टेट इमरजेंसी फंड में दिये गये। इसके लिए एचआईटीके के कर्मचारियों ने तीन दिन का वेतन दिया औऱ प्रबन्धन ने भी समान राशि दी।