Friday, October 16, 2026
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मार्केटिंग संचार में रचनात्मकता का महत्व

सन्ध्या सुतौदिया
रास्ते आसान हो जाते हैं. जब कोई राह बताने वाला हो…और यह तभी होगा जब कोई ऐसा मंच अथवा माध्यम हो…जब परामर्श सही जगह पर और सही समय पर पहुँचे। शुभजिता का प्रयास हमेशा से ही ऐसी सकारात्मकता को आगे ले जाना रहा है तो हम कर रहे हैं एक नये स्तम्भ की शुरुआत विशेषज्ञ परामर्श..। इसके तहत अलग – अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों के परामर्श आपके लिए लाने का प्रयास रहेगा। शुभ सृजन सम्पर्क में पंजीकरण करवाने वाले विशेषज्ञों को आप तक पहुँचाया जायेगा और हमारा प्रयास इससे भी आगे होगा। तुरिया कम्युनिकेशन एलएलपी की सह संस्थापक, संध्या सुतोदिया  बता रही हैं इस बार डिजिटल मार्केटिंग में अवसर के बारे  में। अगर आपके पास कोई प्रश्न हों, अपने प्रश्न आप हमारे सोशल मीडिया पेज पर भी भेज सकते हैं या शुभजिता को टैग करके अपनी बात कह सकते हैं –
आज की दुनिया में, दस लाख से भी अधिक ब्रांड बाजार में है, जो ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए एक-दूसरे को कड़ी टक्कर दे रहे हैं। एक ही माध्यम से कई ब्रांड अपनी बात रखते हैं। ये ब्रांड समान संचार व सम्पर्क माध्यमों का भारी या थोड़े बदलाव के साथ उपयोग कर रहे हैं। तो सवाल यह है कि वह कौन सी चीज है जिससे एक  ब्रांड एक दूसरे से अलग नजर आता है? तो जवाब है रचनात्मकता। मार्केटिंग में प्रभावशाली बनने और दिखने के लिए यह आवश्यक है कि आपका लक्ष्य जो बाजार है. उसमें आप एक अलग सोच के साथ उतरें। लक्षित मार्केट में अलग सोच के साथ, परम्परागत नये और अलग तरीके से काम करें। रचनात्मकता को व्यापार में सफलता का एक उपकरण माना जाता है।
मार्केटिंग में, अनोखे विचारों के उत्पादन और निष्पादन किए जाते हैं, जो रचनात्मकता से निर्दिष्टसंदेश का संचार करते हैं। यह अलग होने की गुंजाइश पैदा करता है और साथ ही ग्राहकों को भेजे गए अनेक संचार विषय वस्तुओं के माध्यम से हमें अलग बनाता है।
ग्राहकों के कम अंतराल में आकर्षण खो देने के कारण, आकर्षित और रचनात्मक विषय वस्तु ही छाप छोड़ पाती है। बदले में, परिणाम स्वरूप यह लगातार दिलचस्प और वांछित परिणाम पाने के रास्ते खोल देगी।
मार्केटिंग संचार में तीन तरह की मुख्य रचनात्मकता शामिल होती है और वह है –
वीडियो
वीडियो मार्केटिंग लगातार शक्तिशाली डिजिटल विषय वस्तु रणनीति से प्रमुखता हासिल कर रही है। दर्शकों का आकर्षण बढ़ाने के साथसाथ, यह रूपांतरण और राजस्व को अधिक प्रमुखता देता है। वीडियो की विषय वस्तु तीव्र आकर्षण उत्पन्न करने के साथ ही के द्वारा भेजे गए संदेश के साथ भी संबंध रखता है। यही कारण है की ब्रांड का झुकाव वीडियो मार्केटिंग की तरफ होता है क्योंकि यह दर्शक आकर्षण बनाने में और बढ़ाने में बहुत ही शक्तिशाली उपकरण के रूप में काम करती है।
 तस्वीरें
वीडियो के साथ, तस्वीरों के जरिए भी ब्रांड अपनी सोच को व्यक्त कर सकते हैं या नवपरिवर्तित और अद्वितीय रूप से प्रवाहन करने का मौका देता है। सही ग्राफिक्स और पारंपरिक तस्वीरों से एक झटके में दर्शकों की आंखों को आकर्षित कर उनकी दिलचस्पी बढ़ाई जा सकती है, जिससे आप अपने ब्रांड को उसके प्रतियोगियों से भिन्न दर्शा सकते हैं।
ब्लॉग्स
चाहे बात व्यापार अपडेट की हो, कम्पनी स्टोरीज, जानकारी प्रदान करने वाली सामग्री, इंडस्ट्री से जुड़े समाचार या युक्तियां, ब्लॉग के माध्यम से आप दर्शकों से जुड़ सकते हैं। सर्च इंजन और साइट दर्शक अच्छी विषय वस्तु पसंद करते हैं। ब्लॉगिंग की सहायता से आप अपने दर्शकों को लगातार अपडेट रखें, जिससे आपको अपने व्यापार से संबंधित कीवर्ड को पद स्थित करने का मौका मिलेगा।
रचनात्मक विचार कैसे उत्पन्न करें? 
किसी भी कम्पनी के लिए कई रचनात्मक विचारों का मंथन करके सभी कर्मचारीयों को विचारधारा में सम्मलित करना सबसे प्रभावी तरीका है। अधिकतर कम्पनियां सिर्फ अपने रचनात्मक विभागों पर भरोसा करती है। हालांकि अन्य विभागों के भी कर्मचारी अपनी अद्वितीय अंतर्दृष्टि से रचनात्मक विचार दे सकते हैं। इसके साथ ही रचनात्मक कार्य में सभी कर्मचारी के सम्मिलित होने से कम्पनी को कई अन्य और प्रभावी विचार मिलेंगे।
तुरिया कम्युनिकेशन एलएलपी
तुरिया कम्युनिकेशन एलएलपी  में हम सर्वोत्तम संचार वह भी सबसे अधिक रचनात्मक तरीके से प्रदान करने में विश्वास रखते हैं। किसी भी संचार रणनीति को तैयार करने से पहले हम यह सुनिश्चित करते हैं कि हमारा पूरा दल हमारी बुद्धि शील बैठक सत्र में हिस्सा ले, जिसमें अन्य विभाग के मुख्य लोग भी मौजूद होते हैंक्योंकि हम अपने ऑर्गेनाइजेशन में खुले द्वार की नीति का पालन करते हैं, हम हर दल से नए विचारों का स्वागत करते हैं, क्योंकि एक अकाउंट मैनेजर के पास भी आने वाले अभियानों के बारे में मूल्यवान रचनात्मक अंतर्दृष्टि हो सकती है।
इससे यह तो साफ है कि हमारे मार्केटिंग संचार की रणनीति का एक ही सारांश है:- रचनात्मकता।
इसलिए तुरिया कम्युनिकेशन एल एल पी में हम सभी चीजों के लिए प्रतिबद्ध हैं जिससे हम सर्वोत्तमबनाते हैं इसलिए अगर हम नहीं तो फिर कौन? तुरिया कम्युनिकेशन एलएलपी से जुड़े, जो बाकी के मार्केट से अधिक संचार की दुनिया को जानता है, जिससे आप अपने व्यापार को बढ़ावा दे सकते हैं। अपने व्यापार को तुरिया की रचनात्मकता की मदद से ऑनलाइन विस्तार कीजिए।
लेखिका तुरिया कम्युनिकेशन एलएलपी की सह संस्थापक हैं
सम्पर्क- फोन: +91 89815-92855 / 8981592855
ई मेल : sandhya@ turiyacommunications.com
[email protected]

कोरोना को लेकर शब्द पहेली

कोलकाता : कोरोना के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए शुभज्योति राय नामक युवक ने एक शब्द पहेली तैयार की है। बांग्ला में शब्द पहेली को शब्द छक कहते हैं जिसे हम आपके लिए दे रहे हैं…। इसका हिन्दी अनुवाद शुभस्वप्ना मुखोपाध्याय ने किया है जो एक छात्रा हैं। आप भी हल करें –

हिन्दी अनुवाद 

एक किनारे से दूसरे किनारे तक

3.यह एक रसायनिक पदार्थ है, जो कोरोना वायरस के किटाणुओं मारने में काम आता है।
7. अस्पताल में यह एक विशेष रोगी कक्ष है जिसमें कोरोना संक्रमित रोगियों को रखा जा रहा है।
9. मुम्बई के इस अस्पताल में कोरोना संक्रमित रोगी की मृत्यु हुई है।
11. कोरोना में भयंकर रूप से संक्रमित पहला देश ।
13 . कोरोना से बचने के लिए इसे इस्तेमाल करने की सलाह दी जा रही है।
16 . इस तरल पदार्थ को पीने से कोरोना से बच सकते हैं ।

ऊपर से नीचे तक

1. यह कोरोना जाँचने का विशेष प्रकार का थर्मोमीटर ।
2. हाथ साफ रखने के लिए यह काफी महत्वपूर्ण पदार्थ है ।
4. यहीं से कोरोना का आगमन हुआ ।
5. कोरोना से संबंधित लमवार्डि की नर्स का विडिओ जो सोशल नेटवर्क पर वाइरल हुआ ।
6. संक्रमण क़ रोककने के लिए कोलकाता हाईकोर्ट में ‘थर्मल’ के साथ स्वास्थ की परीक्षा शुरू किया गया है ।
8. कोरोना से बचने के लिए इसे भी बन्द रखने का सिध्दांत लिया गया है ।
9. इसे लेकर विश्व आतंक फैला हुआ है ।
10. कोरोना की चिकित्सा के लिए रोगी को पहले यहाँ लाया जाता है ।
11. कोरोना संक्रमण का पहला उपसर्ग ।
12. इनका परामर्श हम सब लेना चाहिए ।
16. कोरोना से बचने के लिए मुँह का आवरण ।

डॉक्स ऐप ने जारी किया कोरोना वायरस रिस्क स्कैन टूल

कोलकाता : डिजिटल स्वास्थ्य परिसेवा ऐप डॉक्स ऐप ने कोरोना वायरस रिस्क ऐसेस्मेंट टूल जारी किया है। यह लोगों को संक्रमण की सम्भावना का आकलन करने में सहायता प्रदान करेगा। यह नया टूल कुछ इंटर ऐक्टिव प्रश्नों पर आधारित है जो व्यक्ति के लक्षणों के अनुसार एक रिस्क स्कोर उत्पन्न करता है, अनिश्चयता हटाता है और बड़े पैमाने पर भय कम करता है। जागरूकता फैलाने की दृष्टि से भी यह काफी सहायक सिद्ध होगा और सामाजिक दूरी तथा सुरक्षा में भी मदद करेगा। डॉक्स ऐप के सह संस्थापक तथा सीईओ सतीश कानन ने इस ऐप को उपयोग करने में आसान और अगले कदम का फैसला लेने में सहायक बताया है।

आरबीआई द्वारा दी गयी राहत आर्थिक स्थिरता लायेगी : एसोचेम

कोलकाता : रिजर्व बैंक के गर्वनर की घोषणाओं के साथ ही यह धारणा टूट गयी कि अधिकारियों ने केवल जीवन बचाने पर ध्यान दिया जीविका पर नहीं। यह घोषणा असाधारण परिस्थितियों में प्रवाह को बढ़ाने और आर्थिक स्थिरता लाने वाला है। एसोचेम और एन नरेडको के अध्यक्ष डॉ. निरंजन हीरानंदिनी से यह बात कही।
“नियामक मानदंडों के दृष्टिकोण से आर्थिक पुनरुद्धार के लिए किये गये उपायों के तहत व्यवस्था में पर्याप्त लिक्विडिटी यानी तरलता बनाए रखने, बैंक ऋण प्रवाह को सुविधाजनक बनाने और वित्तीय तनाव कम करने का प्रयास किया गया है। डॉ. निरंजन हीरानंदानी ने कहा कि ये पूरी तरह से स्वागत योग्य है, यह देखते हुए कि आर्थिक गतिविधियां बंद होने की स्थिति में हैं।
रियल इस्टेट के लिए की गयी घोषणा के अनुसार एन बी एफ सी द्वारा रियल इस्टेट कम्पनियों कों समान लाभ मिलेंगे औऱ शेड्यूल्ड कर्मशियल बैंक सकारात्मक थे। आरबीआई ने पहले परिसंपत्ति वर्गीकरण में गिरावट के बिना एक साल के लिए विस्तार की अनुमति दी थी। यह राहत अब एनबीएफसी के लिए भी मिली है। एनबीएफसी द्वारा वाणिज्यिक अचल संपत्ति के लिए ऋणों को समान राहत मिलेगी। यह कदम एनबीएफसी और रियल एस्टेट को सकारात्मक रूप से प्रभावित करेगा, ” उन्होंने रिवर्स रेपो रेट को 4 प्रतिशत से घटाकर 3.75 प्रतिशत करने का भी स्वागत किया।

जीएचसीएल लिमिटेड लगातार चौथी बार बना सर्वश्रेष्ठ कार्यस्थल

कोलकाता : जी एच सी एल ने लगातार चौथी बार भारत के सर्वश्रेष्ठ कार्यस्थलों की सूची में जगह बना ली है। ग्रेट प्लेस टू वर्क इन्स्टीट्यूट द्वारा किये गये एक अध्ययन में यह बात सामने आयी है। कम्पनी के अनुसार यह मान्यता जी एच सी एल द्वारा विश्वास भरा वातावरण बनाने, आदर, निष्पक्ष मुआवजे, प्रशिक्षण और विविधता की स्वीकृति है। संस्थान के रूप में जी एच सी एल ने अपनी स्थिति मजबूत की है और अपने कर्मचारियों को उनकी प्राथमिकताओं पर ध्यान केन्द्रित करने को कहता है जिससे वे किसी भी खलल के बगैर रणनीतिक और नवीन सोच की दिशा में आगे बढ़ सकें। जीएच सीएल के प्रबन्ध निदेशक आर एस, जालान ने कम्पनी को एक परिवार बताते हुए कहा कि कम्पनी काम और जिन्दगी के बीच सन्तुलन पर जोर देती है जिससे कर्मचारी का व्यक्तिगत विकास हो सके और इस उपलब्धि पर हमें गर्व है। ग्रेट प्लेस टू वर्क इन्स्टीट्यूट ने यह अध्ययन कर्मचारियों से बातचीत, कार्य प्रणाली और संस्थान द्वारा प्रदत्त कई अन्य तथ्यों के आधार पर किया है।

कोरोना आपदा से प्रभावित लोगों के लिए बीएफएस की हेल्प लाइन

कोलकाता : कोरोना आपदा से प्रभावित लोगों की मदद कर रहे गैर सरकारी संगठन बेस्ट फ्रेंड्ज सोसायटी बेरोजगारों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को काफी मदद पहुँचायी है। अब तक टीम ने 1200 से अधिक लोगों को भोजन, किराने का सामान, दवाएँ और अन्य जरूरी चीजें उनके दरवाजे तक दी हैं। बीएफएस फूड पैकेट्स भी वितरित कर रहा है जिसमें चावल, आटा, दाल, तेल, चीनी, चाय, नमक और बेबी फूड शामिल हैं । ये पैकेट कचरा चुनने वालों, बस्तियों के निवासियों, दिहाड़ी मजदूरों को वितरित किये जा रहे हैं। बीएफएस की सह संस्थापक शगुफ्ता हनाफी से प्राप्त जानकारी के मुताबिक संगठन ने अनाथालयों तथा वृद्धाश्रमों के 300 जरूरतमंद लोगों हैंड वॉश, हैंड सैनेटाइजर और बैक्टेरिया निरोधी साबुन भी दिये। संस्था कोलकाता में कुछ रसोईयों को भी सहयोग दे रही है और रोज 4 हजार लोगों ताजा खाना खिला चुकी है। बीएफएस ने अब तक दिल्ली, केरल, तमिलनाडु, हरियाणा, हिमाचल, पुणे, मुम्बई, झारखंड, बिहार और पूरे पश्चिम बंगाल में सहायता पहुँचा चुकी है। बीएफएस सेवामूलक कार्य से जुड़ा रहा है जो कई स्तरों पर वॉलेन्टियरों, संगठनों, शेल्टर और होम्स के साथ काम करता रहा है जिसका मुख्य क्षेत्र जरूरतमंदों तक शिक्षा और स्वास्थ्य सम्बन्धी सुविधायें पहुँचाना है। पी आर की प्रमुख शगुफ्ता हनाफी को इस क्षेत्र में 17 साल का अनुभव है और उनको एक केन्द्रित टीम से सहायता मिलती है।
बीएफएस की हेल्प लाइन 9831362042 है और ई मेल [email protected] है।

प्रधानमंत्री मोदी ने तीन मई तक लॉकडाउन बढ़ाने का किया ऐलान

 नयी दिल्ली : नरेन्द्र मोदी ने कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिये लागू देशव्यापी लॉकडाउन को 3 मई तक बढ़ाने की मंगलवार को घोषणा की, साथ ही प्रस्ताव किया कि जो क्षेत्र हॉटस्पाट में नहीं होंगे और जिनके हॉटस्पाट में बदलने की आशंका भी कम होगी, वहां 20 अप्रैल से कुछ छूट दी जा सकती है । प्रधानमंत्री ने करीब 25 मिनट के राष्ट्र के नाम संबोधन में कहा कि दूसरे चरण में लॉकडाउन का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जायेगा और बुधवार को इस संबंध में विस्तृत दिशानिर्देश जारी किए जाएंगे ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यह नये क्षेत्रों में न फैले ।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे लोग जो रोज की कमाई से अपनी जरूरतें पूरी करते हैं, ऐसे लोगों और किसानों के जीवन में आई मुश्किलों को कम करना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है। प्रधानमंत्री ने कहा कि अगर सिर्फ आर्थिक दृष्टि से देखें तो अभी ये मंहगा जरूर लगता है लेकिन भारतवासियों की जिंदगी के आगे, इसकी कोई तुलना नहीं हो सकती।
उन्होंने कहा कि भारत कई विकसित देशों की तुलना में महामारी के फैलाव को रोकने में सफल रहा है । भारत ने समग्र एवं समन्वित उपाय एवं पहल नहीं की होतीं… तेजी से फैसले नहीं लिये होते, तो आज भारत की स्थिति कुछ और होती । लेकिन बीते दिनों के अनुभवों से ये साफ है कि हमने जो रास्ता चुना है, वो सही है ।
मोदी ने कहा कि राज्यों एवं विशेषज्ञों से चर्चा और वैश्विक स्थिति को ध्यान में रखते हुए भारत में लॉकडाउन को अब 3 मई तक और बढ़ाने का फैसला किया गया है। गौरतलब है कि कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए लागू 21 दिन के लॉकडाउन का वर्तमान चरण आज (14अप्रैल) समाप्त हो रहा है ।
स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, देश में कोरोना वायरस के संक्रमण के अब तक 10,363 मामले सामने आए हैं और इसके कारण अब तक 339 लोगों की मौत हो चुकी है । कम से कम आठ राज्यों तमिलनाडु, पंजाब, ओडिशा, महाराष्ट्र, अरूणाचल प्रदेश, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल और कर्नाटक ने पहले ही लॉकडाउन को 30 अप्रैल तक बढ़ा दिया है ।
केंद्र सरकार के सूत्रों ने संकेत दिया कि लॉकडाउन को 3 मई तक इसलिये बढ़ाया गया क्योंकि 1 मई को सार्वजनिक अवकाश है और 2 एवं 3 मई को सप्ताहांत है ।कुछ वर्गो की ओर से आर्थिक गतिविधियों की अनुमति दिये जाने की मांग के बीच मोदी ने कहा कि लॉकडाउन का कठोरता से पालन किया जायेगा और कुछ जरूरी गतिविधियों की अनुमति देने से पहले उस क्षेत्र का मूल्यांकन किया जायेगा ।

उन्होंने कहा, ‘‘ अगले एक सप्ताह में कोरोना के खिलाफ लड़ाई में कठोरता और ज्यादा बढ़ाई जाएगी। 20 अप्रैल तक हर कस्बे, हर थाने, हर जिले, हर राज्य को परखा जाएगा कि वहां लॉकडाउन का कितना पालन हो रहा है, उस क्षेत्र ने कोरोना से खुद को कितना बचाया है।’’ प्रधानमंत्री ने कहा कि जो क्षेत्र इस अग्नि परीक्षा में सफल होंगे, जो हॉटस्पाट : अधिक खराब हालात वाले क्षेत्र : में नहीं होंगे, और जिनके हॉटस्पाट में बदलने की आशंका भी कम होगी, वहां पर 20 अप्रैल से कुछ जरूरी गतिविधियों की अनुमति दी जा सकती है ।

उन्होंने कहा कि अगर लॉकडाउन की नियमों को तोड़ा गया और कोरोना वायरस के फैलने का खतरा हुआ तब तत्काल ही छूट वापस ले ली जायेगी । उन्होंने कहा कि भारत कई विकसित देशों की तुलना में महामारी के फैलाव को रोकने में बेहतर स्थिति में है ।

बहरहाल, भाजपा अध्यक्ष जे पी नड्डा ने लोगों से सरकार के निर्णय का पालन करने की अपील की, वहीं कांग्रेस ने मोदी के संबोधन की आलोचना करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने लोगों को बताया कि वह उनसे क्या उम्मीद करते हैं, लेकिन यह नहीं बताया कि सरकार लोगों के लिए क्या कर रही है और इसमें वित्तीय पैकेज या अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिये ठोस कदम का उल्लेख नहीं है ।

कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने सवाल किया कि कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई का देश का खाका कहां है । जबकि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने ट्वीट किया कि गरीबों को लॉकडाउन की अवधि में अकेला छोड़ दिया गया है ।

उन्होंने आरोप लगाया, ‘गरीबों को 40 दिनों (21+19) के लिए अपने हाल पर छोड़ दिया गया है। पैसा है, खाद्य सामग्री है, लेकिन सरकार इन्हें जारी नहीं कर रही।’ प्रधानमंत्री मोदी की घोषणा के बाद नागर विमानन मंत्रालय ने भी ऐलान किया कि 3 मई तक अंतरराष्ट्रीय और घरेलू यात्री उड़ानें स्थगित रहेंगी । पहले यह 25 मार्च से 14 अप्रैल तक स्थगित थी ।

भारतीय रेलवे ने भी 3 मई तक यात्री सेवा निलंबित रखने की घोषणा की जबकि माल एवं पार्सल सेवा जारी रहेंगी ताकि देश के विभिन्न हिस्सों में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके । रेलवे ने यह भी कहा कि रेलवे स्टेशनों और रेलवे स्टेशन परिसर के बाहर सभी रेल काउंटरों पर रेल यात्रा टिकट की बुकिंग 3 मई तक बंद रहेगी ।

उल्लेखनीय है कि टेलीविजन पर राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में प्रधानमंत्री अपने चेहरे पर ‘गमछा’ लपेट कर आए थे और संबोधन शुरू करने पर उन्होंने इसे हटा लिया । उन्होंने अपने ट्विटर हैंडल पर इस संबंध में एक चित्र भी जारी किया ।

मोदी ने कहा, ‘‘ 3 मई तक हम सभी को, हर देशवासी को लॉकडाउन में ही रहना होगा। इस दौरान हमें अनुशासन का उसी तरह पालन करना है, जैसे हम करते आ रहे हैं ।

उन्होंने कहा कि हमें अधिक संवेदनशील स्थानों : हॉटस्पॉट: को लेकर बहुत ज्यादा सतर्कता बरतनी होगी। जिन स्थानों के हॉटस्पॉट में बदलने की आशंका है, उन पर भी हमें कड़ी नजर रखनी होगी। नए हॉटस्पॉट का बनना, हमारे लिए और चुनौती खड़ी करेगा।

उन्होंने लॉकडाउन के दौरान लोगों के संकल्प, बलिदान की भी सराहना की ।

प्रधानमंत्री ने कहा कि कोरोना वैश्विक महामारी के खिलाफ भारत की लड़ाई, बहुत मजबूती के साथ आगे बढ़ रही है । लोगों की तपस्या, त्याग की वजह से भारत अब तक, कोरोना से होने वाले नुकसान को काफी हद तक टालने में सफल रहा है ।

उन्होंने कहा, ‘‘ लॉकडाउन के इस समय में देश के लोग जिस तरह नियमों का पालन कर रहे हैं, जितने संयम से अपने घरों में रहकर त्योहार मना रहे हैं, वो बहुत प्रशंसनीय है ।’’ आज पूरे विश्व में कोरोना वैश्विक महामारी की जो स्थिति है, उसे देखते हुए अन्य देशों के मुकाबले, भारत ने कैसे अपने यहां संक्रमण को रोकने के प्रयास किए, उसके सभी साक्षी रहे हैं ।

मोदी ने कहा कि जब हमारे यहां कोरोना के सिर्फ 550 केस थे, तभी भारत ने 21 दिन के संपूर्ण लॉकडाउन का एक बड़ा कदम उठा लिया था। भारत ने समस्या बढ़ने का इंतजार नहीं किया, बल्कि जैसे ही समस्या दिखी, उसे तेजी से फैसले लेकर उसी समय रोकने का प्रयास किया ।

उन्होंने कहा कि वैश्विक स्थिति से स्पष्ट होता है कि प्रति 10 हजार मरीजों के लिये 1500 से 1600 बेड की जरूरत होती है और हमने एक लाख से अधिक बिस्तरों की व्यवस्था की है और कोरोना वायरस के उपचार के लिये 600 समर्पित अस्पताल तैयार किये हैं ।

लोगों खासतौर पर गरीबों को पेश आने वाली परेशानियों को स्वीकार करते हुए मोदी ने कहा कि उन्हें भोजन, एक स्थान से दूसरे स्थान पर आने जाने, परिवार के लोगों से दूर रहने सहित उनकी परेशानियों का आभास है लेकिन एक अनुशासित सिपाही की तरह उन्हें अपने कर्तव्य का पालन करना है ।

बाबा साहब भीमराव अंबेडकर का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि हम भारत के लोगों की तरफ से अपनी सामूहिक शक्ति का प्रदर्शन संकल्प के साथ करें, यही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि है ।

मोदी ने लोगों से 7 विषयों पर सहयोग भी मांगा जिसमें बुजुर्गो का ध्यान रखने, गरीबों के प्रति संवेदनशील नजरिया अपनाना, सामाजिक दूर बनाना आदि शामिल है।

पिछले महीने सरकार ने 1.7 लाख करोड़ रूपये के पैकेज की घोषणा की थी जिसका मकसद लॉकडाउन से प्रभावित तबके को राहत देना और वायरस प्रभावित लोगों की देखरेख करने वालों सहित स्वास्थ्य कर्मियों को बीमा कवर प्रदान करना है।

कोरोना से लड़ने में काम आ रही है 100 साल पुरानी उपेक्षित दवा

नयी दिल्ली: एक बात तो सभी वैज्ञानिक जानते हैं कि कोरोना वायरस की कोई भी नयी दवा साल भर से पहले आना मुमकिन नहीं. लेकिन इस बीच एक उम्मीद की किरण नजर आई है। वैज्ञानिक अब 100 साल पहले तैयार किए गए टीके में जिंदगी देख रहे हैं। ताजा शोध में सामने आया है कि कोरोना वायरस से लड़ने में टीबी की सबसे पुरानी दवा कारगर साबित हो रही है।

बीसीजी की दवा में दिख रही उम्मीद
पिछले चार महीनों से कोरोना वायरस के विभिन्न इलाजों के शोध में वैज्ञानिकों ने पाया है कि बीसीजी (BCG) का टीका काफी प्रभावशाली है। ऐसे देश जहां अभी भी टीबी रोग से बचाव के लिए बीसीजी का टीका लगाया जाता है, वहाँ कोरोना वायरस का संक्रमण अन्य देशों के मुकाबले कम फैला है। वैज्ञानिकों का कहना है कि कोरोना वायरस संक्रमित मरीजों पर इस टीके से फायदा कम नजर आ रहा है. लेकिन एक अच्छी बात ये है कि जिनकों टीबी के बचाव के लिए बीसीजी के टीके लगे हैं उनमें कोरोना वायरस अटैक करने में कामयाब नहीं हो पा रहा है।

भारत भी कर रहा इसकी जांच
पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया (PHFI) के प्रमुख डॉ. के. श्रीनाथ रेड्डी ने ज़ी न्यूज डिजिटल से बातचीत में कहा कि बीसीजी का टीका देश में हर बच्चे को लगाया जाता है. इससे टीबी को दूर भगाने में मदद मिलती है. हाल ही में कोरोना वायरस पर बीसीजी टीके के असर पर भारतीय वैज्ञानिक भी नजर बनाए हुए हैं. कोरोना संक्रमण के बचाव में इस टीके पर सटीक शोध के बाद ही कुछ ठोस कहना मुमकिन होगा। उल्लेखनीय है कि भारत में राष्ट्रीय टीकाकरण के तहत सभी बच्चों को अनिवार्य रूप से बीसीजी के टीके लगाए जाते हैं।  बच्चों को टीबी से बचाने के लिए ही ये टीके टीकाकरण में शामिल हैं। अमेरिका, इटली, इंग्लैंड और फ्रांस समते पूरे यूरोप में कोरोना वायरस का संक्रमण बहुत अधिक है. इन देशों ने कई दशक पहले ही बीसीजी के टीके लगाना बंद कर दिया था. अब यही टीका वैज्ञानिकों के शोध का केंद्र बना हुआ है।

लॉकडाउन के बाद ऑटो इंडस्ट्री को सस्ते उत्पाद और मेक इन इंडिया पर देना होगा जोर

मुम्बई : देश की ऑटो इंडस्ट्री को कोविड-19 के बाद कारोबार में स्थिरता के लिए सस्ते प्रोडक्ट, लोकलाइजेशन और ऑटोमेशन पर जोर देना होगा। नॉमुरा रिसर्च इंस्टीट्यूट कंसल्टिंग एंड सॉल्यूशंस इंडिया की मंगलवार को जारी रिपोर्ट में यह बात कही गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि लॉकडाउन खत्म होने के बाद ऑटो इंडस्ट्री को मजदूरों के प्लांट में ही रुकने, स्वास्थ्य सुविधाएं और सुरक्षा बढ़ाने के साथ ही डिजिटाइजेशन में निवेश करने जैसे कदम उठाने की जरूरत होगी।
आने वाले दिनों कोविड-19 का आर्थिक असर बढ़ेगा
रिपोर्ट में ऑटो इंडस्ट्री के लिए राहत पैकेज की सिफारिश भी की गई है क्योंकि, इस सेक्टर का इंडस्ट्रियल जीडीपी में 50% योगदान होता है। प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर सबसे ज्यादा रोजगार देने वाली इंडस्ट्री भी यही है। कोविड-19 से पहले भी करीब डेढ़ साल से ऑटो इंडस्ट्री में स्लोडाउन चल रहा था। रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाओं पर कोविड-19 का असर साफ दिख रहा है, आने वाले महीनों में इसका असर और बढ़ेगा।
भारतीय ऑटो पार्ट्स मेकर के पास चीन का विकल्प बनने का मौका
नॉमुरा की रिसर्च के मुताबिक मौजूदा संकट देश के ऑटो पार्ट्स मेकर के लिए एक मौका भी है। वे ग्लोबल वैल्यू चेन में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर चीन का विकल्प बन सकते हैं। इसके लिए तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाना जरूरी है। रिपोर्ट में यह सलाह भी दी गई है कि दुनियाभर में आर्थिक संकट को देखते हुए देश की मजबूत कंपनियां दूसरे देशों की फर्मों और तकनीक को खरीद सकती हैं। इससे दूसरे देशों का विकल्प बनने के लिए उनकी स्थिति मजबूत होगी और मेक इन इंडिया को भी बढ़ावा मिलेगा।
मार्च में यात्री वाहनों की बिक्री 51% घटी
कोविड-19 के असर और लॉकडाउन की वजह से मार्च में यात्री वाहनों की घरेलू बिक्री में 51% कमी आई। पिछले महीने 1 लाख 43 हजार 14 वाहन बिके। पिछले साल मार्च में यह आंकड़ा 2 लाख 91 हजार 861 यूनिट था। कमर्शियल वाहनों की बिक्री 88.95% घटकर 13 हजार 27 यूनिट रह गई, मार्च 2019 में 1 लाख 9 हजार 22 वाहन बिके थे। सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबिल मैन्युफैक्चरर्स (एसआईएएम) ने सोमवार को मार्च के आंकड़े जारी किए थे।

लॉकडाउन के अनचाहे तनाव से बच्चों को बचाने के साथ ही सक्रिय रखने में भी मददगार होंगे ये तरीके

जिस तरह हम लॉकडाउन संभालने के लिए तैयार नहीं थे। इसी तरह हमारे बच्चे भी तैयार नहीं थे, जहाँ उन्हें बंद स्कूल, बाहर खेलने न जा पाने, कोई रियल-लाइफ दोस्ती न होने का सामना करना पड़ रहा है। बतौर पैरेंट्स बच्चों को इस अनचाहे तनाव से उबरने और सामान्य जीवन जीने के लिए गाइड करना मुश्किल काम हो गया है। खासतौर पर तब, जब बच्चे मिडिल या प्राइमरी स्कूल में पढ़ते हों। यही वह उम्र है, जब हम उन्हें जिंदगी के लिए तैयार करते हैं। तो सवाल यह उठता है कि हम बतौर पैरेंट्स इस स्थिति में उनकी मदद कैसे कर सकते हैं। विशेषज्ञों ने कुछ सिंपल टिप्स दिए हैं, जिससे बच्चे एक्टिव रह सकते हैं।
डिवाइस से दूरी – हमारी ही तरह बच्चे भी तनाव महसूस कर रहे होंगे और अपने डिजिटल गैजेट्स में व्यस्त होंगे। वे पहले की तुलना में ज्यादा ऑनलाइन होंगे। अभी की स्थिति में बहुत-सी चीजें ऐसी हैं जो आम दिनों की तुलना में अनियंत्रित हैं, लेकिन फिर भी कुछ बातें अब भी नियंत्रण में रखी जा सकती हैं। हम यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि बच्चों की नींद अच्छी हो। इसके लिए बेडरूम्स में कोई डिवाइस या गैजेट नहीं होना चाहिए। इसके अलावा हमें बच्चों को अच्छा खाने और एक्सरसाइज करने के लिए भी प्रोत्साहित करना चाहिए।
बच्चों से बात – हमें बच्चों की भावनाओं का सम्मान कर उन्हें स्वीकार करना चाहिए। हो सकता है कि कुछ मामलों में यह सही न हो, लेकिन आमतौर पर हम माता-पिता बच्चों की भावनाएं नहीं समझते हैं। उन्हें सोशल मीडिया का इस्तेमाल न करने और लोगों से व्यक्तिगत रूप से बात करने के फायदों के बारे में बताएं।
इंडोर गेम्स – मानसिक और शारीरिक रूप से फिट रहने के लिए बच्चों को ऑनलाइन गेम्स खेलने या नेटफ्लिक्स, अमेजन प्राइम आदि पर पसंदीदा सीरीज देखने के बजाय कुछ इंडोर गेम्स खेलने के लिए प्रोस्ताहित करें। जैसे चेस, कैरम, लूडो आदि।
अच्छे शौक – बच्चों की अच्छे शौक पैदा करने में मदद करें। जैसे पढ़ना, बागबानी और कुकिंग। अच्छी किताबें और उपन्यास पढ़ने से उन्हें अच्छा ज्ञान पाने में मदद मिलेगी और वे बेहतर इंसान बन पाएंगे। हालांकि बाकी शौक भी पढ़ने जितने ही जरूरी हैं। यह उनकी रुचि पर निर्भर करता है। शौक जो भी हो, पैरेंट को उसे विकसित करने में मदद करनी चाहिए।
अनुशासित दिनचर्या – हमें बच्चों की अनुशासित और लक्ष्य आधारित जीवन अपनाने में मदद करनी चाहिए। बच्चों को अच्छी सेहत, ज्ञान और सामाजिक जिम्मेदारियों के महत्व के बारे में पता होना चाहिए। और यह सब तभी हासिल किया जा सकता है, जब वे अनुशासन में हों और उनका ध्यान केंद्रित हो।
मनोवैज्ञानिक तैयारी – कोविड-19 बीमारी की वजह से हुए इस लॉकडाउन के बाद कई बच्चे जो 15 साल से कम उम्र के हैं, वे अब तनाव में हैं क्योंकि उनकी रोजाना की आदतों और रुटीन में बहुत कुछ बदल गया है। इस मुश्किल परिस्थिति में बतौर पैरेंट्स हमें बच्चे की सायकोलॉजी पर काम करना होगा और भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए उसे सकारात्मक दिशा देनी होगी।
हमें उन्हें यह समझाना होगा कि इस तरह की समस्याएं भविष्य में भी आ सकती हैं और उन्हें इनका सकारात्मक रवैये के साथ सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए। पैरेंट्स के लिए बच्चों को यह बताना अब आवश्यक हो गया है कि वे मन पर गैरजरूरी बोझ या तनाव न लें क्योंकि इससे उनकी नींद, खाने की आदतों पर असर हो सकता है और कई गंभीर बीमारियों की भी आशंका है। इस परिस्थिति में हमें उनके साथ बात करने के लिए और खेलने के लिए ज्यादा से ज्यादा वक्त देना होगा।
(साभार – दैनिक भास्कर)