Thursday, June 25, 2026
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स्वास्थ्य व उन्नत जीवनशैली को लेकर ‘सोहम 2020’ सम्मेलन का आयोजन

कोलकाता : प्राचीन भारतीय परम्परा और आधुनिक चिकित्सकीय शोधों के समन्वय से एक स्वस्थ जीवनशैली को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से श्री सत्यानन्द महापीठ ने एक सम्मेलन किया। संस्था ने यह आयोजन वेस्ट बंगाल काउंसिल ऑफ योगा एंड नेचुरापैथी तथा पश्चिम बंग आयुर्वेद परिषद के सहयोग से किया। ‘सोहम 2020’ नामक इस दो दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन संघजननी सन्यासिनी श्री अर्चना पुरी माँ ने किया। इस मौके पर काउंसिल ऑफ योगा एंड नेचुरापैथी, वेस्ट बंगाल के अध्यक्ष डॉ. तुषार सील, पश्चिम बंग आयुर्वेद परिषद के अध्यक्ष डॉ. पी. के सिंह राय, पूर्व प्रशासनिक अधिकारी डॉ. अजीत सक्सेना, जेआईएस यूनिवर्सिटी के वीसी डॉ. बिमल चन्द्र मल उपस्थित थे। श्री सत्यानन्द महापीठ के अध्यक्ष स्वामी मृगानन्द ‘सोहम 2020’ भारतीय आध्यात्मिक बुद्धिमता और योग से युक्त जीवनशैली अपनाने की ओर पहला चरण है जिससे समग्र विकास हो, जीवन की गुणवत्ता बढ़ी जिससे आने वाली पीढ़ियाँ स्वस्थ तथा दीर्घायु जीवन जीएँ।

मंगलोर की कैस्टेलिनो ने जीता ‘लीवा मिस दीवा 2020’ खिताब

मुम्बई : मंगलोर की कैस्टेलिनो ने ‘लीवा मिस दीवा 2020’ खिताब जीत लिया है। पुणे की नेहा जायसवाल रनर अप रहीं और उन्होंने ‘लीवा मिस दीवा यूनिवर्स 2020’ का खिताब अपने नाम किया। जबलपुर की आवृत्ति चौधरी सेकेंड रनर अप रहीं और उनको ‘लीवा मिस दीवा सुपरनेशनल 2020’ का खिताब मिला। देश भर की 20 प्रतिभागियों ने इस सौन्दर्य प्रतियोगिता में भाग लिया। इस प्रतियोगिता में मेन्टर की जिम्मेदारी लारा दता ने उठायी जिन्होने 20 साल पहले मिस यूनिवर्स प्रतियोगिता जीती थी। अभिनेता अनिल कपूर ने उनको सम्मानित किया। इस सौन्दर्य प्रतियोगिता की ज्यूरी में पूर्व मिस यूनिवर्स लारा दत्ता, एन्टोनिया पॉरिसील्ड, आशा भट्ट, डिजाइनर शिवन भाटिया, नरेश कुकरेजा तथा निखिल मेहरा, अभिनेत्री यामी गौतम, आदित्य रॉय कपूर और अनिल कपूर शामिल थे।

पोषण एवं स्वस्थ जीवन शैली पर विशेषज्ञों के सुझाव

वीडियो सौजन्य – माई गवर्नमेंट इंडिया

सम्मानित हुईं फैशन डिजाइनर निशा एम. लोयलका

कोलकाता : महिला दिवस के उपलक्ष्य में लॉन्चर्ज इन्टरटेन्मेंट्ज द्वारा महिलाओं की उपलब्धियों को सम्मान देते हुए एक पुरस्कार समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर सम्मानित होने वाली 31 महिलाओं में मशहूर फैशन डिजाइनर निशा एम. लोयलका भी शामिल थीं। उनको द इन्सपायरिंग विमेन अचीवर्स अवार्ड प्रदान किया गया। गौरतलब है कि ब्रिटेन की प्रतिष्ठित पत्रिका वोग में उनका कलेक्शन फीचर किया गया। निशा कोलकाता की पहली डिजाइनर है जिसने लंदन फैशन वीक के फैशन स्काउट में अपनी प्रतिभा दिखायी। निशा को इस कलेक्शन की प्रेरणा ब्रिटेन में स्थित ऐसे सँग्रहालय से मिली जहाँ भारतीय कला और फैशन का खजाना है मगर उसे सामने नहीं आने दिया गया। भारत लौटकर निशा ने नयी शुरुआत की और हाल ही में अपना नया स्टोर थियेटर रोड में खोला है।

31 महिलाओं को मिला द इन्सपायरिंग विमेन अचीवर्स अवार्ड

कोलकाता : महिला दिवस के उपलक्ष्य में लॉन्चर्ज इन्टरटेन्मेंट्ज द्वारा महिलाओं की उपलब्धियों को सम्मान देते हुए एक पुरस्कार समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर प्रख्यात चित्रकार और बेस्ट फ्रेंड्ज सोसायटी के एडवायजरी बोर्ड के चेयरमैन वसीम कपूर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। इसके अतिरिक्त अभिनेत्री तथा बीएफएस फिलैन्थ्रॉफी क्लब की चेयर पर्सन पापिया अधिकारी, बीएफएस के अध्यक्ष राजीव लोढ़ा, यूएनडीपी इंडिया कम्यूनिकेशन हेड मोमिता दस्तीदार, अभिनेत्री मउबनी सरकार, सामाजिक उद्यमी चैताली दास और लॉन्चर्ज इन्टरटेन्मेंट्ज की निदेशक शगुफ्ता हनाफी मौजूद थीं। कार्यक्रम के माध्यम से बीएफएस के शिक्षा के माध्यम से सशक्तीकरण के उद्देश्य को प्रोत्साहित किया गया। इस पुरस्कार समारोह में 31 अलग – अलग क्षेत्रों की 31 महिलाओं को सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वाली महिलाओं में पहली महिला पुरोहित डॉ. रोहिणी धर्मपाल. ओडिशी नृत्यांगना डॉ. संचिता भट्टाचार्य, साउंड थेरेपिस्ट नीतू भूरा, मॉडल ग्रूमर चिरश्री सिंह राय समेत कई 31 महिलाएँ थीं।

छात्रों के जीवन में आज हिंदी का क्या स्थान है, इस पर चिंतन की आवश्यकता है : प्रो. संजय द्विवेदी

हिंदीभाषा डॉट कॉम के स्थापना दिवस पर लेखकों को किया गया सम्मानित

इंदौर : आज भारत सबसे अधिक युवाओं वाला देश है,लेकिन इन युवाओं का बहुत अधिक लाभ देश को नहीं हो रहा है। आज का युवा दिन पर दिन भाषायी रूप से कमजोर होता जा रहा है। विद्यार्थियों के जीवन में आज हिंदी का क्या स्थान है, इस विषय पर चिंतन की आवश्यकता है। यह विचार प्रख्यात लेखक व मीडिया गुरु प्रोफेसर संजय द्विवेदी ने व्यक्त किए। वे इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय में हिंदीभाषा डॉट कॉम की तरफ से आयोजित लेखकों के सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
उन्होंने कहा कि हिंदी भाषा का ज्ञान होना एक भारतीय की ताकत है। जिस व्यक्ति को जितनी अधिक भाषाओं का ज्ञान होता है, वह उतना ही अधिक महत्वपूर्ण व धनवान होता है। आज तकनीकी ने हमारे एकांत को भी कोलाहल से भर दिया है। इसके लिए हमें आत्ममंथन करने की आवश्यकता है। वहीं हिंदीभाषा डॉट कॉम के संस्थापक-सम्पादक अजय जैन ने हिंदीभाषा डॉट कॉम की अनवरत यात्रा,पोस्ट कार्ड अभियान, विद्यालयों एवं मंच पर स्पर्धा की जानकारी सबके साथ साझा की। इस अवसर पर विवि के प्रभारी कुलपति डॉ. आशुतोष मिश्रा , डॉ.सोनाली नरगुंदे , डॉ. अनुराधा शर्मा सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

हिन्दुस्तानी बेटियों का दर्द

किरण सिपानी (कोचर)

क्यों झलक जाता है
बेटियों का दर्द यूँ बार-बार?
सुरक्षित निगहबानियों में भी
क्यों चटक जाता है
उनका दामन बार-बार?

क्यों प्यार-मुहब्बत से दूर
रहने की कसमें उनको
खिलायी जाती हैं बार-बार?
क्यों सबरीमाला के प्रकरण
दोहराये जाते हैं बार-बार?

क्यों पवित्रता के नाम पर
अपमान की आग में उनको
जलाया जाता है बार-बार?
क्यों कुदरत की खूबसूरत सृष्टि को
अग्निपरीक्षाओं में छुपाना पड़ता है
चेहरा यूँ बार-बार?

क्यों”भुज”जैसी
शर्मसार घटनाओं में भी
दहाड़े-गरजे बिना हम
सिर झुका लेते हैं बार-बार?
क्यों हिन्दुस्तानी बेटियों का दर्द
मानवता को मुँह चिढ़ाता है बार-बार?

 

महिलाओं के आत्मसम्मान पर बात करने वाली फिल्म है थप्पड़

रेखा श्रीवास्तव

महिलाओं के आत्म-सम्मान की फिल्म है थप्पड़। पूरी फिल्म थप्पड़ के इर्द-गिर्द ही है। शुरू से ही यह थप्पड़ घरेलू सहायिका के माध्यम से दिखाया गया है। कभी-कभी वह इससे परेशान है, तो कभी-कभी हल्के से लेती है लेकिन उसके जिंदगी में थप्पड़ को लेकर दर्द बहुत है। कभी इसके विरोध में कदम उठाना चाहती है, लेकिन फिर अपने भविष्य, अपने परिवार के लिए चुप हो जाती है। हमारे समाज के पुरुष अपनी धुन में इतने रमे रहते हैं कि उसके साथ रहने वाली महिला को वह इंसान या बराबरी का दर्जा नहीं दे पाता है। इस फिल्म में अलग-अलग क्षेत्र की महिलाओं को एक साथ समेटकर दिखाया गया है। चाहें दूसरों के घर बर्तन-कपड़े धोकर जिंदगी जीने वाली हो, या अच्छी खासी वकील हो या बहुत अच्छी गृहिणी ही हो। सबको एक ही दौर से गुजरना पड़ता है। इस फिल्म में तापसी ने बहुत अच्छा अभिनय किया है। न ही ज्यादा भावुक दिखी है, न ही ज्यादा गुस्सा करती दिखी है। बड़े ही प्रेम से, प्यार से घर को ही अपनी दुनिया समझती है, और उसमें बहुत खुश रहती है। पर उसका पति बहुत महत्वाकांक्षी है। उसे लंदन जाना है। कामयाब होना है। उसमें कोई रुकावट आने से वह अपना आपा खो बैठता है और पत्नी को थप्पड़ लगा देता है। इसे वह गलती भी नहीं समझता, बल्कि दूसरे दिन सुबह उठने पर अपनी परेशानियों में ही उलझा रहता है। उसे यह एहसास ही नहीं होता कि वह पत्नी को तकलीफ पहुँचा चुका है। अमृता का किरदार निभा रही तापसी भी बिना शिकायत किये, चुपचाप अपना काम करती है और आखिर में निर्णय लेती है , ‘वह मुझे मार नहीं सकता इसलिए मैं उसके साथ नहीं रहूँगी।’ कोर्ट-कचहरी कर आखिरकार वह अपने निर्णय पर अटल रहती है। सबसे बड़ी बात है कि एक गृहिणी महिला के इस कदम पर कई महिलाओं के अंदर भी हिम्मत आ गयी और वह भी अपने स्वाभिमान, आत्मसम्मान के लिए कदम बढ़ाई। तापसी का केस लड़ रही महिला वकील जहाँ एक तरफ अपने पेशेवर सफलता से खुश है, वहीं दूसरी ओर घर में पति के सामने वह केवल एक औरत है। अपने जज्बात, अपनी इच्छा की बलि चढ़ते देखकर उसका दम घुटता है। इसी तरफ तापसी की माँ, सास, ननद को भी कहीं न कहीं अपनी इच्छाओं को दबाते दिखाया गया है। इस फिल्म के माध्यम से हर वर्ग, हर उम्र की महिलाओं की समस्या को दिखाया गया है। काबिले तारिफ है निर्देशक अनुभव सिन्हा जिन्होंने इस फिल्म को बनायाय़ अभिनय के मामले में तापसी पन्नू और उसके पति पवैल गुलाटी ने बहुत अच्छा अभिनय किया है। नाटकीयता बिल्कुल नहीं दिखी। तापसी के पिता का रोल निभा रहे कुमुद मिश्रा दर्शकों को बहुत पसंद आये। दीया मिर्जा, माया सराओ, रत्ना पाठक, तानवी आजमी, गीतिका विद्या, रामकपूर, मानव कौल मुख्य रूप से दिखे। सभी ने दर्शकों को पूरी तरह बांधे रखा। कहीं भी कोई भटकाव या बिखराव नहीं दिखा। घुटने टेक कर सारी जिम्मेदारियों को निभाने वाली महिलाओं के अंदर भी स्वाभिमान जागा है। इस फिल्म को देखने के बाद निश्चित रूप से महिलाएँ और सशक्त होंगी। 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके से पहले महिलाओं के लिए यह फिल्म एक अच्छा उपहार है। सबसे बड़ी बात है कि हमारे पुरुष समाज को इस फिल्म को जरूर देखना चाहिए और महिलाओं की ओर से भी सोचना चाहिए।

सामाजिक थ्रिलर ‘एवरी 68 मिनट्स ‘ की स्क्रीनिंग

कोलकाता : आनन्दिता सर्वाधिकारी द्वारा निर्देशित सामाजिक थ्रिलर ‘एवरी 68 मिनट्स ‘ का प्रदर्शन किया गया। फिल्म की परिकल्पना लाल भाटिया तथा इमरान जाकी की है और इसका निर्माण आदिल हुसैन के सहयोग से डेविड एंड गोलिथ फिल्म्स ने किया है। फिल्म में ऋचा शर्मा, आदिल हुसैन और टोटा रायचौधरी ने काम किया है। यह फिल्म भारतीय विवाह और उससे जुड़ी कुरीतियों के अन्धकारमय पक्ष को दिखाती है। फिल्म में दहेज और घरेलू हिंसा की समस्या को दिखाया गया है। संगीत विक्रम घोष का है और फिल्म छायांकन मानस गांगुली का है। सम्पादन अर्घ्यकमल मित्र ने किया है। फिल्म में भारत कौल, अरुप रतन राय, लावणी सरकार, चन्दन सेन और टिटास दत्ता ने भी काम किया है। फिल्म की स्क्रिनिंग महानगर के एक होटल में की गयी। फिल्म का उद्घाटन सिक्किम ग्लोबल सिनेमा फेस्टिवल 2020 में किया गया था। फिल्म के निर्माता लाल भाटिया और इमरान जाकी ने कहा कि फिल्मों के अतिरिक्त यह प्रोडक्शन हाउस वेब सीरिज भी बनायेगा। फिल्म की अभिनेत्री ऋचा शर्मा ने घरेलू हिंसा के प्रति जागरुक होने पर जोर दिया।

धमाके के साथ आया एसबीआई कार्ड्स का आईपीओ

एसबीआई कार्ड्स का आईपीओ सोमवार, 2 मार्च को खुला। कंपनी की योजना इसके जरिए 10,335 करोड़ रुपये जुटाने की है। यह देश की दूसरी सबसे बड़ी क्रेडिट कार्ड कंपनी है। 3 मार्च तक SBI कार्ड्स के IPO 56.5 फीसदी सब्सक्राइब हो गए हैं।

यह 2020 का पहला आईपीओ है। एक्सचेंज पर मौजूद आंकड़ों के मुताबिक, कपनी ने 10,000 शेयर जारी किए हैं। इनमें से 5.62 करोड़ रुपए के लिए बोली लग चुकी है। रिटेल इनवेस्टर्स के लिए 89.72 फीसदी शेयर हैं। खासतौर पर इस सेक्शन की बात करें तो यह 99.45 फीसदी सब्सक्राइब हो चुका है। SBI कार्ड्स, स्टेट बैंक की सब्सिडियरी है। बैंक अपने कर्मचारियों को फाइनल ऑफर प्राइस पर 75 रुपए का डिस्काउंट दे रहा है।

क्वालीफाइड इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व सेक्शन में सब्सक्रिप्शन सिर्फ 0.1 फीसदी है। वहीं, नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स कैटेगरी में 18.67 फीसदी सब्सक्रिप्शन हुआ है। अक्टूबर 2017 के बाद यह सबसे बड़ा IPO है। इसमें 500 करोड़ रुपये का फ्रेश इश्यू है। साथ ही 13.05 करोड़ शेयर SBI और कार्लाइल ग्रुप की CA रोवर होल्डिंग्स की है।

एसबीआई कार्ड्स के आईपीओ (IPO) का प्राइस बैंक 750-755 रुपए है। यह आईपीओ 2 मार्च को खुला है और 5 मार्च को बंद होगा। इश्यू की लिस्टिंग 16 मार्च को होने वाली है। एनालिस्ट्स को उम्मीद है कि इसकी लिस्टिंग प्रीमियम पर होगी। लेकिन बाजार का हाल देखकर लगता है कि इसकी मुश्किल बढ़ भी सकती है।