देश के सर्वोच्च सम्मान पद्म श्री से नवाजे गए फैशन डिजाइनर वेंडेल रॉड्रिक्स का गत बुधवार 12 फरवरी को गोवा स्थित उनके घर पर निधन हो गया। पूरी फैशन इंडस्ट्री संग फिल्म जगत में रॉड्रिक्स के निधन की खबर आने के बाद से शोक लहर छा गई है। 28 मई, 1960 को जन्मे रॉड्रिक्स फैशन इंडस्ट्री में एक कामयाब शख्सियत थे। फैशन की समझ रखने के साथ ही वह एक लेखक, पर्यावरणविद और समलैंगिक अधिकारों के समर्थक भी रहे।
वेंडेल रॉड्रिक्स का नाम उन चुनिंदा भारतीय डिजाइनर्स में से है, जिन्होंने भारतीय फैशन में मिनिमलिज्म की सोच को जोड़ा। रॉड्रिक्स के पहले कलेक्शन में 12 मॉडल्स ने रैम्प वॉक किया, जिनमें मेहर जेसिका जैसे नाम शामिल थे। मगर इनका पहला कलेक्शन पूरा नहीं हो पाया। दरअसल वेंडल के पास इतना फंड नहीं था कि वह अपनी मॉडल्स की ऑर्गेंजा ट्यूनिक्स के साथ पहनने के लिए जूतों की व्यवस्था कर पाते। IGEDO (दुनिया का सबसे बड़ा फैशन का मेला) में हिस्सा लेने वाले वेंडेल रॉड्रिक्स पहले भारतीय फैशन डिजाइनर थे। फैशन से फिल्मों तक अगर रॉड्रिक्स के फैशन करियर की बात करें तो सबसे पहले उन्होंने पेरिस से फैशन कोर्स करने के लिए फंड जोड़ना शुरू किया था। उन्होंने फैशन संग भारतीय फिल्मों में भी हाथ आजमाया, जैसे कि 2008 में बनी फिल्म फैशन में उन्होंने एक छोटा सा कैमियो रोल प्ले किया। इसी के साथ 2003 में आई फिल्म बूम में उन्होंने अदाकारी की थी।
रॉड्रिक्स का नाम इको फ्रेंडली फैशन के लिए भी याद किया जाएगा। इन्होंने अपने दौर में खादी के साथ खूब सारे प्रयोग किए। फ्रांस में पढ़ाई के दौरान उन्हें इस बात की अच्छी समझ आ चुकी थी कि अपने कपड़ों में अपने देश की झलक दिखनी चाहिए। इसी बात को दिमाग में रखते हुए उन्होंने गोवा की पारंपरिक कुनबी साड़ी को लेकर बहुत सारे प्रयोग किए। इसी के साथ 2017 में उन्होंने प्लस साइज महिलाओं के लिए कलेक्शन बनाया। इसके साथ ही, रॉड्रिक्स देश के उन पहले फैशन डिजाइनर्स में एक रहे जिन्होंने रिसोर्ट वियर तैयार किया।
फैशन डिजाइनर वेंडेल रॉड्रिक्स का निधन
बेटी ने दहेज में अपने वजन के बराबर किताबें मांगी, पिता ने 6 महीने में 2200 जुटाईं
राजकोट : ससुराल विदा करते वक्त आमतौर पर लोग अपनी लाड़ली बेटी को उपहार के तौर पर गहने, कपड़े, जवाहरात, वाहन और नकद पैसा देते हैं। लेकिन गुजरात के राजकोट में एक पिता ने गुरुवार को अपनी बेटी को शादी में 2200 किताबें देकर विदा किया।
दरअसल, नानमवा में रहने वाले शिक्षक हरदेव सिंह जाडेजा की बेटी किन्नरी बा को बचपन से ही किताबें पढ़ने का शौक है। उनके घर पर 500 किताबों की लाइब्रेरी है। जब उसकी शादी वडोदरा के इंजीनियर पूर्वजीत सिंह से हुई तो उसने पिता से कहा कि मेरी शादी में आप दहेज में मेरे वजन के बराबर किताबें दें तो मुझे अच्छा लगेगा। तब पिता हरदेव सिंह ने तय किया कि वे उसकी इच्छा पूरी करेंगे। पूर्वजीत सिंह कनाडा में रहते हैं।
6 महीने लगे किताबें एकत्रित करने में
हरदेव सिंह ने पहले पसंदीदा किताबों की सूची बनाई। फिर 6 महीने तक दिल्ली, काशी और बेंगलुरु समेत कई शहरों से किताबें एकत्रित की। इनमें महर्षि वेद व्यास से लेकर आधुनिक लेखकों की अंग्रेजी, हिंदी और गुजराती भाषा की किताबें शामिल हैं। कुरान, बाइबिल समेत 18 पुराण भी हैं। उन्होंने बताया कि बेटी के साथ इन किताबों को भी गाड़ी में भरकर विदा किया गया।
कामकाजी महिलाएं गर्भावस्था में ऐसे रखें अपनी सेहत का ख्याल
जर्नल ऑफ कम्यूनिटी मेडिसिन एंड पब्लिक हेल्थ (IJCMP) की रिपोर्ट के अनुसार विश्व में तकरीबन 5,29,000 महिलाओं की मौत गर्भावस्था के दौरान होती है जिनमें एक कारण हाई रिस्क प्रेग्नेंसी भी है। वहीं भारत में हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की दर 20-30% है। बात अगर कामकाजी महिलाओं की हो तो भागदौड़ के बीच उनके लिए अपनी सेहत का ख्याल रखना मुश्किल होता है। ऐसे में कुछ उपाय अपनाए जा सकते हैं।
जरूर करें नाश्ता
ऑफिस जाने की जल्दबाजी में अधिकांश कामकाजी महिलाएं नाश्ता नजरअन्दाज कर देती हैं। लेकिन गर्भावस्था के दौरान आपकी यह लापरवाही समस्या पैदा कर सकती है। नाश्ता दिन का सबसे महत्वपूर्ण भोजन माना जाता है। प्रेग्नेंसी के दौरान इसका महत्व और बढ़ जाता है। नाश्ता न करने से गर्भ में पल रहे शिशु पर भी बुरा असर पड़ता है। इसलिए सुबह का नाश्ता खाना न भूलें। ध्यान रखें कि नाश्ते में तरल पदार्थ जैसे जूस, शेक आदि लेने से बचें। इससे मतली आ सकती है।
खुद को रखें हाइड्रेट
गर्भावस्था के दौरान हर महिला को पर्याप्त पानी पीना जरूरी है और कामकाजी महिलाओं को खासतौर पर इस बात का ख्याल रखना चाहिए। गर्भावस्था में कम पानी पीना खतरनाक साबित हो सकता है। दरअसल गर्भावस्था के दौरान आपके शरीर में हो रहे बदलावों की जरूरतों को पूरा करने के लिए अधिक पानी पीने की आवश्यकता पड़ती है। यह आपको डिहाइड्रेशन से बचाता है।
न खाएं जंक फूड
ऑफिस में ज्यादा समय रहने के दौरान आपको भूख लगना स्वाभाविक है, ऐसे में ज्यादातर गर्भवती महिलाएं भूख लगने पर जंक और पैकेज्ड फूड या फिर अनहेल्दी चीजें खाने लगती हैं। ऐसे भोजन में कार्बोहाइड्रेट/वसा तो भरपूर होती ही है, लेकिन पोषक पदार्थों की कमी होती है। एक नए शोध में पाया गया है कि गर्भावस्था के दौरान चिप्स, नूडल्स और बर्गर जैसे जंक फूड का सेवन होने वाले बच्चे के लिए उसी तरह घातक हो सकता है, जैसा कि धूम्रपान। इसीलिए जंक फूड को नजरअंदाज करें।
ब्रेक है जरूरी
गर्भावस्था के दौरान ऑफिस की कुर्सी पर 8 से 9 घंटे न बैठें। ऐसा करने से आपके बॉडी पोश्चर और पीठ में दर्द की शिकायत बढ़ सकती है। इस परेशानी से बचने के लिए काम के बीच में ब्रेक जरूरी है। पानी पीने के लिए उठें या फिर कॉरिडोर में टहलें। इन दिनों आप ऐसा कोई काम न करें, जिसमें भागदौड़ ज्यादा हो। ऐसा करने से आपको कॉम्प्लीकेशंस भी हो सकते हैं। हमेशा धीमे-धीमे चलें और बार-बार सीढ़ी चढ़ने- उतरने से बचें।
रेडिएशन से बनाएं दूरी
कोशिश करें कि उन चीजों से दूर रहें, जिनसे रेडिएशन का खतरा ज्यादा बढ़ जाता है। सोते समय मोबाइल को खुद से दूर रखें। गोद में लैपटॉप लेकर काम न करें और ऑफिस में सर्वर रूम के आस-पास भी न जाएं। इसके अलावा ऑफिस में कुर्सी पर बैठकर काम करते समय पैरों को लटकाकर न रखें। अपनी टेबल के नीचे स्टूल या लेग सपोर्ट रखवा लें। जब भी कुर्सी पर बैठें तो पैरों को सपोर्ट के ऊपर ही रखें। इससे पैरों में सूजन और एड़ियों में दर्द नहीं होता है। इसके अलावा डॉक्टर से चेकअप करवाती रहें।
(साभार – दैनिक भास्कर)
युद्धपीड़ित अफगानिस्तान पहुँची पहली रोबोट वेटर, चेहरे पर ला रही मुस्कुराहट
काबुल : अफगानिस्तान की राजधानी काबुल के एक रेस्त्रां में इन दिनों एक रोबोट वेटर लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। यह अफगानिस्तान में पहली रोबोट वेटर है, जो इस युद्धग्रस्त देश में लोगों को खानपान परोसने के साथ-साथ उनके चेहरों पर मुस्कुराहट भी बिखेर रही है। “टीमिया’ नामक इस रोबोट की ऊंचाई पांच फीट है। यह अभी छोटे-छोटे काम करती है। यह अफगानिस्तान की दो मुख्य भाषाओं में से एक “दारी’ में बात करती है। यह “थैंक यू वेरी मच’, “हैप्पी बर्थडे’ जैसे कुछ वाक्य भी बोलती है।
रेस्त्रां के प्रबंधक मोहम्मद रफी शिरजाद ने कहा कि इसे जापान से लाए हैं। इसे इस तरह बनाया है जैसे किसी महिला ने हिजाब पहन रखा है। इसने पिछले महीने ही काम शुरू किया है, जिसके बाद से नए ग्राहक बढ़ गए हैं। यहां कई लोगों के लिए रोबोट देखना दिलचस्प बात है। कभी-कभी तो बच्चे रोबोट को खाना लाते देख खुशी से उछल पड़ते हैं।
रोबोट जापान और चीन में बढ़े, अफगानिस्तान में शुरुआत है
एक ओर जहां जापान और चीन में आम स्थानों पर रोबोट की तादाद बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर संकटग्रस्त अफगानिस्तान में यह नई बात है। अफगानिस्तान में दशकों तक चले युद्ध के चलते बुनियादी ढांचा तबाह हो गया है। ऐसे में यह रोबोट वेटर कुछ देर के लिए ही सही, लोगों के चेहरों पर मुस्कुराहट की वजह बन रही है।
हिन्दीभाषी महिला मलयाली साक्षरता परीक्षा में अव्वल, 100 में 100 अंक हासिल किए
कोल्लम : बिहार के एक गाँव से रोजगार के सिलसिले में केरल पहुंची 26 साल की महिला ने मलयालम भाषा की साक्षरता परीक्षा में शीर्ष स्थान हासिल किया है। हिन्दीभाषी महिला के मलयालम सीखने को एक मिसाल के रूप में देखा जा रहा है। बिहार के एक गाँव से रोजगार की तलाश में रोमिया कथुर 6 साल पहले पति सैफुल्लाह के साथ केरल गई थी।
रोमिया का परिवार दक्षिणी कोल्लम जिले के उमायानल्लूर में रहता था। 19 जनवरी को केरल राज्य साक्षरता मिशन ने प्रवासी श्रमिकों के लिए मलयालम भाषा की यह परीक्षा आयोजित की थी। इसमें तीन बच्चों की मां रोमिया भी शामिल हुई। परीक्षा में रोमिया ने 100 में 100 अंक हासिल किए। 19 जनवरी को आयोजित हुई साक्षरता परीक्षा योजना ‘चांगति (दोस्त)’ के दूसरे चरण में कुल 1998 प्रवासी मजदूरों ने भाग लिया था। ‘चांगति’ योजना का लक्ष्य प्रवासी मजदूरों को चार महीने के भीतर मलयालम भाषा सिखाना है।
साक्षरता मिशन के अधिकारियों के मुताबिक, योजना की शुरुआत 15 अगस्त 2017 को एर्नाकुलम जिले के पेरंबुवूर में हुई थी, जहां बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर हैं। ‘चांगति’ योजना के दो चरणों में करीब 3700 प्रवासियों ने परीक्षा उत्तीर्ण की है। मिशन की डायरेक्टर पीएस श्रीकला ने रोमिया के घर जाकर बधाई दी। काथुर ने बताया, चांगति योजना के लिए तैयार की गयी ‘हमारी मलयालम’नाम की किताब रोजमर्रा के कामों में भी मददगार है।
वरिष्ठ पत्रकार नंदू कुलकर्णी का निधन
मुम्बई : वरिष्ठ पत्रकार नंदू आर कुलकर्णी का दिल का दौरा पड़ने से यहां एक उपनगरीय अस्पताल में निधन हो गया। सूत्रों ने यह जानकारी दी। “द स्टेट्समैन” अख़बार के मुंबई ब्यूरो चीफ कुलकर्णी 70 साल के थे। सूत्रों के अनुसार कुलकर्णी अविवाहित थे और बोरीवली में अकेले रहते थे।
कुलकर्णी ने अपने करियर की शुरूआत 1976 में एक इंटर्न के तौर पर ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ से की थी। कुलकर्णी “द इंडियन एक्सप्रेस” में 16 साल तक रहे। वे 1992 में “द स्टेट्समैन” में ब्यूरो चीफ के तौर पर शामिल हुए थे।
सेटेलाइट फोन की मदद से हिमालय क्षेत्र में मिलेगी सैलानियों को त्वरित चिकित्सा सहायता सेवा
नयी दिल्ली : हिमालय क्षेत्र में सैलानियों, पर्वतारोहियों और तीर्थयात्रियों को तुरंत आपात चिकित्सा सुविधा पहुंचाने के लिये उपग्रह आधारित सेटेलाइट फोन सेवा की मदद ली जायेगी। सार्वजनिक क्षेत्र की दूरसंचार कंपनी बीएसएनएल ने हिमालय क्षेत्र में अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में आपात चिकित्सा सेवा मुहैया कराने वाली एजेंसी ‘सिक्स सिग्मा हाई अल्टीट्यूड मेडिकल सर्विस’ के चिकित्सा दलों को विशेष सेटेलाइट फोन मुहैया कराये हैं। इसकी मदद से पर्वतारोहियों, केदारनाथ सहित अन्य तीर्थस्थलों की यात्रा करने वालों और सैलानियों का मुसीबत के समय इन दुर्गम इलाकों में स्थित मेडिकल कैंप से तत्काल संपर्क स्थापित हो सकेगा।
संस्था के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डा. प्रदीप भारद्वाज ने बताया कि ऊंचे पहाड़ी इलाकों में स्वास्थ्य सेवा को उपग्रह आधारित अत्याधुनिक संचार सुविधा से जोड़ने के बाद अब और अधिक कारगर बनाया जा सकेगा। डा. भारद्वाज ने कहा कि अब चिकित्सा दल के सदस्यों के बीच बेहतर तालमेल कायम हो सकेगा, जिससे चिकित्सा सहायता यथाशीघ्र मुहैया करायी जा सकेगी।
उल्लेखनीय है कि इस सेवा को केदारनाथ, मद्महेश्वर धाम, तुंगनाथ धाम और हेमकुंड साहिब से जोड़ा गया है। अभी तक सेचार सेवा से केदारनाथ धाम को ही जोड़ा गया था। विभिन्न नागरिक सेवाओं को सेटेलाइट फोन से जोड़ने के पहले चरण में पुलिस, रेल, और आपदा प्रबंधन को शामिल किया गया था।
दोनों आंखों से देख नहीं सकती दिव्या, सामान्य एथलीट्स को हराकर जीता स्वर्ण
चंडीगढ़ : पीयू कैंपस के एनुअल स्पोर्ट्स फेस्ट में 500 से ज्यादा एथलीट्स ने हिस्सा लिया। पीयू ग्राउंड में जिस एथलीट की जीत ने सबसे ज्यादा तालियां बटोरी, वे थीं दिव्या। दिव्या दोनों आंखों से देख नहीं पाती, लेकिन रेस में उनका मुकाबला कोई नहीं कर पाया। 200 मीटर स्प्रिंट में उन्होंने अपने पार्टनर के साथ हिस्सा लिया और सामान्य एथलीट्स को पछाड़कर स्वर्ण पदक जीता। इसके बाद वे 100 मीटर में भी दौड़ीं और यहां भी रजत पदक जीता। एथलीट रमनदीप कौर ने 100 मीटर स्प्रिंट का स्वर्ण जीता। पंचकूला सेक्टर-20 की रहने वाली दिव्या इससे पहले इंस्टीट्यूट ऑफ ब्लाइंड-26 की स्टूडेंट रही हैं।
बीए-बीएड इंटिग्रेटेड कोर्स सेकंड ईयर की छात्रा दिव्या बचपन से नेत्रहीन नहीं थी। उन्हें सिर्फ रात को नहीं दिखता था। 9वीं क्लास तक की पढ़ाई उन्होंने सामान्य स्कूल से की। लेकिन 14 साल की उम्र में उन्हें दिन भी दिखाई देना बंद हो गया। निराश होने के बाद वे ब्लाइंड इंस्टीट्यूट में पढ़ने आईं। यहां कोच राकेश और आरती ने उन्हें मोटिवेट करते हुए स्पोर्ट्स में लाने का फैसला किया।
दिव्या कहती हैं कि यहां मैडम रेखा और अनुराधा ने उन्हें पढ़ने में निपुण बनाया। 12वीं में दिव्या ने 88.4 प्रतिशत अंक हासिल किए थे। स्पेशल एथलीट दिव्या ने कहा कि माँ अमरजीत कौर ने मेरा सबसे ज्यादा साथ दिया। जब मुझे दिखाई देना पूरी तरह से बंद हो गया तो उन्होंने ही मुझे संभाला। मैं हिम्मत हार गयी थी लेकिन मां को मुझ पर विश्वास था।
दिवाली के समय हुआ पैर में फ्रैक्चर, अब सीधा इवेंट में उतरी
दिव्या ने कहा कि दिवाली के समय मेरे बायें पैर में फ्रैक्चर हो गया था और डॉक्टर ने मुझे आराम करने को कहा। मैं चल भी नहीं सकती थी और कुछ दिन पहले ही मैं ठीक हुई। मुझे प्रतियोगिता में भाग नहीं लेना था लेकिन मुझसे रहा नहीं गया और मैंने भागने का फैसला किया। मुझे खुशी है कि बिना प्रैक्टिस के भी मैं यहाँ पर दो स्वर्ण पदक जीतने में कामयाब रही। मैंने ब्लाइंग नेशनल में भी 2016 में तीन स्वर्ण और दो रजत पदक जीते थे। वहीं 2014 में मुझे एक स्वर्ण मिला था। नेशनल पैरा ओलंपिक गेम्स में मैंने दो स्वर्ण और एक रजत पदक हासिल किया था।
दोस्तों ने करवाई प्रैक्टिस
पदक जीतने के बाद दिव्य एथलीट दिव्या ने कहा कि मेरे दोस्त नवीन और रोहित मुझे एथलेटिक्स की प्रैक्टिस कराते हैं। वे मेरे सहपाठी हैं। कॉलेज शुरू होने से पहले मेरी गेम को परफेक्ट करते हैं। हमारी प्रैक्टिस सुबह 6 बजे शुरू होती है और 8 बजे तक हम फिटनेस से लेकर गेम की प्रैक्टिस करते हैं। यहां भी वे दोनों मेरे साथ थे। रोहित ने मेरे साथ 200 मीटर में हिस्सा लिया जबकि नवीन 100 मीटर इवेंट में मेरे साथ दौड़ा। दिव्या ने कहा कि आगे भी प्रैक्टिस जारी रखूंगी और पैरालंपिक में पदक जीतने का सपना मुझे पूरा करना है।
(साभार – दैनिक भास्कर)
मिजोरम की 11 साल लड़की ने वीरता पुरस्कार की राशि उसी बच्ची को सौंपी, जिसे उसने बचाया था
गुवाहाटी : वीरता पुरस्कार से सम्मानित मिजोरम की 11 साल कैरोलिन मालस्वामटलुआंगी बहादुर ही नहीं सहृदय भी हैं। दिल्ली में वीरता पुरस्कार से मिली राशि का आधा हिस्सा उन्होंने 7 साल की उसी बच्ची को सौंप दिया, जिसे उन्होंने बचाया था। कैरोलिन ने बच्ची को 10 हजार रुपए, चांदी का हार और दिल्ली से लाए कपड़े दिए।
कैरोलिन की मां लालसांगझेली ने बताया कि जब उसे बच्ची की आर्थिक स्थिति के बारे में बताया गया तो वह द्रवित हो उठी और उसने उसकी मदद करने के लिए कहा। पिछले साल जून में जब कैरोलिन पूर्वी आइजोल के ज़ुंग्तुई इलाके में घर के पास सहेलियों के साथ खेल रही थी, तभी एक अनजान बच्ची भी खेलने लगी। बाद में पता चला कि उसे अपहृत किया गया था। इसके बाद वह खुद बच्ची की तलाश में जुट गई। यह बच्ची, जोनुनसांगिन फनाई (31) के घर पर थी। मौका भांप कर मालस्वामटलुआंगी ने बच्ची को अपनी पीठ पर लादा और अपने घर तक दौड़ते हुए ले आई थी। इसके बाद, कैरोलिन के माता-पिता ने पुलिस को सूचित किया और आरोपी महिला को गिरफ्तार कराया था।
तीसरी बार दिल्ली के मुख्यमंत्री बने अरविन्द केजरीवाल
नयी दिल्ली : दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी (आप) को पूर्ण बहुमत के साथ लगातार दूसरी बार मिली जीत के बाद दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल ने गत रविवार को आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविन्द केजरीवाल को मुख्यमंत्री और उनके मंत्रिमंडल के छह सदस्यों को मंत्री पद की शपथ दिलायी। दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में दोपहर 12 बजकर 15 मिनट पर केजरीवाल ने लगातार तीसरी बार दिल्ली के मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की। बैजल ने केजरीवाल के बाद पिछली सरकार में उपमुख्यमंत्री रहे मनीष सिसोदिया और अन्य मंत्रियों सत्येन्द्र जैन, गोपाल राय, कैलाश गहलोत, इमरान हुसैन एवं राजेन्द्र पाल गौतम को भी एक एक कर शपथ ग्रहण करवायी। उल्लेखनीय है कि दिल्ली विधानसभा चुनाव में आप ने शानदार जीत दर्ज कराते हुये विधानसभा की 70 में से 62 सीटों पर कब्जा जमाया है। गत सोमवार को विधानसभा चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद बुधवार को सातवीं विधानसभा के गठन की औपचारिकता पूरी की गयी। इसके साथ ही राष्ट्रपति के एक आदेश से केजरीवाल को मुख्यमंत्री एवं अन्य मंत्रियों की नियुक्ति की गयी।
केजरीवाल की अगुवाई वाली 2015 में गठित पिछली सरकार में सिसोदिया के पास उपमुख्यमंत्री पद के अलावा शिक्षा एवं वित्त विभाग का भी प्रभार था। वह 2013 में बनी पहली केजरीवाल सरकार में भी मंत्री थे। जबकि पहली सरकार में केजरीवाल ने अपने पास गृह, वित्त, ऊर्जा और सतर्कता विभाग अपने पास रखे थे।
बैजल ने सिसोदिया के बाद जैन को पद और गोपनीयता की शपथ दिलायी। पिछली दोनों सरकारों में जैन को स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गयी थी। पहली आप सरकार में वह उद्योग मंत्री भी थे।
उनके बाद गोपाल राय ने शपथ ग्रहण की। राय ने परंपरा से हटकर ‘आजादी के शहीदों’ के नाम पर शपथ ग्रहण की। पिछली सरकार में मंत्री रहे राय के पास परिवहन और मंडी मामलों सहित अन्य विभागों की जिम्मेदारी थी। बाद में उन्हें श्रम मंत्री का प्रभार सौंपते हुये केजरीवाल ने गहलोत को परिवहन मंत्रालय की जिम्मेदारी दी थी। पूर्वी दिल्ली की बाबरपुर सीट से लगातार दो बार विधायक बने राय 2013 के विधानसभा चुनाव में इस सीट से चुनाव हार गये थे।
पहली आप सरकार में राखी बिड़लान, सौरभ भारद्वाज, सोमनाथ भारती और गिरीश सोनी को भी मंत्री बनाया गया था लेकिन दूसरी सरकार में इन चारों को केजरीवाल मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली थी। पिछली विधानसभा में राखी बिड़लान विधानसभा उपाध्यक्ष थीं।
उल्लेखनीय है कि नवनियुक्त मंत्रिमंडल में केजरीवाल ने कोई फेरबदल किये बिना पिछली सरकार के सभी छह मंत्रियों को एक बार फिर जगह दी है। बैजल ने राय के बाद कैलाश गहलोत को शपथ दिलायी। नजफगढ़ विधानसभा क्षेत्र से दूसरी बार विधायक बने गहलोत पिछली सरकार में परिवहन एवं पर्यावरण विभाग के मंत्री थे।
इसके बाद इमरान हुसैन और सबसे अंत में राजेन्द्र पाल गौतम ने शपथ ग्रहण की। इमरान ने अल्लाह और गौतम ने बुद्ध के नाम पर शपथ ग्रहण की। उल्लेखनीय है कि शपथ के निर्धारित प्रारूप में ‘ईश्वर’ के नाम पर संविधान के प्रति सत्यनिष्ठा की शपथ लेने का प्रावधान है।
इमरान के पास पिछली सरकार में उपभोक्ता एवं खाद्य विभाग और गौतम के पास अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण विभाग सहित अन्य विभागों की जिम्मेदारी सौंपी गयी थी। जनप्रतिनिधित्व कानून के प्रावधानों के मुताबिक दिल्ली सरकार में मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों की अधिकतम संख्या सात हो सकती है।
यह तीसरा मौका है जब केजरीवाल मंत्रिमंडल ने रामलीला मैदान में शपथ ग्रहण की है। शपथ ग्रहण समारोह से पहले रविवार को सुबह केजरीवाल ने टि्वटर पर दिल्लीवासियों से ‘‘अपने बेटे’’ को आशीर्वाद देने के लिए शपथ ग्रहण समारोह में आने का अनुरोध किया था। इसके मद्देनजर सुबह दस बजे से ही रामलीला मैदान में आप समर्थकों का जुटना शुरु हो गया था। रामलीला मैदान में भारी भीड़ को देखते हुये सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।
आप ने केजरीवाल के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान उनके साथ मंच साझा करने के लिए विभिन्न वर्गों के उन 50 लोगों को भी आमंत्रित किया था जिन्होंने पिछले पांच साल में दिल्ली सरकार के कार्यों में विशेष सहयोग दिया। आईआईटी छात्र से लेकर दिल्ली मेट्रो की चालक सहित सभी 50 विशिष्ट आमंत्रित लोग शपथ ग्रहण के समय मंच पर मौजूद थे।
शपथ ग्रहण समारोह में केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी आमंत्रित किया था, हालांकि प्रधानमंत्री का रविवार को बनारस में पूर्व निर्धारित कार्यक्रम होने के कारण वह उपस्थित नहीं हो सके। उनके अलावा दिल्ली की सात लोकसभा सीटों के भाजपा सांसदों और आठ विधायकों को भी शपथ ग्रहण समारोह में आमंत्रित किया गया था, हालांकि इनमें से किसी सांसद की मौजूदगी नहीं देखी गयी।
विधानसभा चुनाव में भाजपा के आठ विधायक जीते हैं। इनमें से रोहिणी सीट से लगातार दूसरी बार जीते विजेन्द्र गुप्ता शपथ ग्रहण समारोह में उपस्थित रहे। गुप्ता पिछली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष थे।




