Sunday, April 26, 2026
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शुभजिता युवा प्रतिभा सम्मान – प्रतिभागी – पलक सिंह

प्रतियोगिता – चित्रांकन, विषय – महाशिवरात्रि, कक्षा – 9, शिक्षण संस्थान -संत अतुलानंद कान्वेंट स्कूल

निशा एम. लोयलका का नया स्टोर अब शहर में

* 1500 वर्ग फीट में फैला है नया स्टोर
* लन्दन और न्यूयॉर्क फैशन वीक में भाग ले चुकी हैं निशा
कोलकाता : प्रख्यात फैशन डिजाइनर निशा सिंह का नया स्टोर शेक्सपीयर सरणी में खुल गया है। लन्दन फैशन वीक और न्यूयार्क में धूम मचाने के बाद डिजाइनर निशा एम. लोयलका कोलकाता के फैशन को नया रंग दे रही हैं। लन्दन से लौटकर इन्होंने इन्होंने लेक टेम्पल रोड में अपना स्टोर खोला था मगर बढ़ती लोकप्रियता और ग्राहकों की माँग को देखते हुए निशा ने कोलकाता के दिल में यानी थियेटर रोड में नया स्टोर खोलने का फैसला किया। स्टोर का उद्घाटन के मौके पर मशहूर अभिनेत्री मऊबनी सरकार पहुँचीं।  निशा के अनुसार उनकी माँ ने हर कदम पर उनका साथ दिया और वह हमेशा उनकी मदद करती हैं इसलिए अपनी माँ मुदित लोयलका से प्रेरित होकर निशा ने अपने सिग्नेचर लेबल का नाम निशा सिंह की जगह निशा एम. लोयलका किया। यहाँ एम. मुदित के लिए है जो उनकी माँ का नाम है।
अपनी बेटी की सफलता से उत्साहित मुदित लोयलका ने कहा कि निशा बेहद परिश्रमी है। वह अपनी कम्पनी डोवॉएलर प्राइवेट लिमिटेड का विस्तार कर रही है और वह उनकी मदद कर रही हैं। निशा के अनुसार वह युवाओं के साथ काम करने को उत्सुक हैं। उनके साथ सिलाई, कढ़ाई से लेकर विभिन्न कार्यों में लड़कियाँ जुड़ी हैं और उनकी कोशिश है कि महिलाओं को आगे ले जाने के लिएऔर काम करें। इस मौके पर कई हस्तियाँ भी इस युवा डिजाइनर को बधाई देने पहुँचीं। निशा के साथ उनकी बिजनेस पार्टनर निरोशिनी गजेन्द्रन भी उपस्थित थीं जो मूलतः श्रीलंका से ही हैं।
निशा ने स्टोर के बारे में बताया कि इस स्टोर में पुरुषों और महिलाओं के लिए डिजाइनर परिधान उपलब्ध होंगे। इन कपड़ों में पेस्टल शेड्स का प्रयोग किया जाता है और हाथ से कढ़ाई यानी हैंड इम्ब्रायडरी, पेंटिंग, स्क्रीन प्रिंटिंग का प्रयोग किया गया है। उनके कपड़े हर उम्र के व्यक्ति को ध्यान में रखकर बनाये गये हैं। परिधान और उनके डिजाइन में हर बार कुछ नया करना उनको पसन्द है।
श्रीलंका का जेएलएन फैशन निशा एम. लोयलका का साझीदार हैं। निशा की बिजनेस पार्टनर निरोशिनी गजेन्द्रन का कहना है कि निशा के कपड़े काफी अलग हैं। उनके डिजाइनों में ताजगी है और एक खास तरह की शालीनता भी है जो उनको काफी अच्छी लगी। खास बात यह है कि निरोशिनी कानून की छात्रा रह चुकी हैं और निशा के साथ काम करने के लिए वे श्रीलंका से भारत आयी हैं। यहाँ एक बात अलग है कि हर तरह के परिधान अलग खानों में हैं…मतलब ब्राइडल कलेक्शन के कपड़े एक तरफ हैं तो पुरुषों के परिधान दूसरी तरफ हैं।  शेक्सपीयर सरणी, एम्बैसी बिल्डिंग के भूतल में स्थित निशा एम. लोयलका का नया स्टोर 1500 से अधिक वर्ग फीट क्षेत्र में फैला है। स्टोर की अर्न्तसज्जा यानी इंटीरियर में सफेद, सुनहरे और नीले रंग का इस्तेमाल खूबसूरती से किया गया है। स्टोर का इंटीरियर अनुराग पेरिवाल और नीमा दत्ता ने किया है। अनुराग के मुताबिक निशा के कपड़ों में भव्यता और सादगी का खूबसूरत संगम हैं। वे स्टाइल देती हैं मगर वे भड़कीले नहीं होते। इसी बात का ध्यान रखकर स्टोर का इटीरियर तैयार किया गया है।

दुनिया की सबसे बड़ी प्रयोगशाला में है भगवान शिव नटराज की प्रतिमा

आज देशभर में महाशिवरात्रि के मौके पर भगवान शिव की आराधना की जा रही है। शिव को सृष्टि का रचयिता माना गया है। हिंदू पुराणों में भगवान शिव की आराधना तो की जाती है। वहीं सात समंदर पार एक देश ऐसा भी है जहां पर शिव के तांडव स्‍वरूप यानी नटराज की मूर्ति लगी हुई है। नटराज की यह मूर्ति कहीं और नहीं बल्कि स्विट्जरलैंड के जिनेवा स्थित यूरोपियन ऑर्गनाइजेशन फॉर न्‍यूक्लियर रिसर्च जिसे सर्न के नाम से जानते हैं, वहां पर स्‍थापित है। शिव को ऊर्जा का स्‍त्रोत माना गया है और दुनिया की सबसे बड़ी फिजिक्‍स लैब में स्‍थापित नटराज भी इस बात का परिभाषित करते हैं।

18 जून 2004 को हुई थी स्‍थापना – सर्न कैंपस में लगी इस मूर्ति को आस्था और विज्ञान का मेल माना जाता है। सर्न परिसर में लगी भगवान नटराज की यह मूर्ति दो मीटर ऊंची है। साल 2004 में भारत सरकार ने फीजिक्स लैब सर्न को तोहफे में ये मूर्ति दी थी। 18 जून 2004 को इस मूर्ति का अनावरण किया गया। एक लैबोरेट्री में भगवान की मूर्ति पर भी वैज्ञानिकों के पास अपने तर्क हैं। इस मूर्ति के नीचे एक पट्टी लगी है और इस पर मशहूर भौतिक विज्ञानी फ्रिटजॉफ कैप्रा की कुछ लाइनें लिखी हैं। कैप्रा ने भगवान शिव की अवधारणा की व्याख्या करते हुए लिखा है-‘हजारों साल पहले भारतीय कलाकारों ने नाचते हुए शिव के चित्र बनाए। कांसे के बने डांसिंग शिवा की सीरीज में मूर्तियां हैं। हमारे समय में हम फीजिक्स की एडवांस्ड टेक्नोलॉजी की मदद से कॉस्मिक डांस को चित्रित करते हैं। कॉस्मिक डांस का रूपक पौराणिक कथाओं से मेल खाता है। यह धार्मिक कलाकारी और मॉर्डन फिजिक्स का मिश्रण है।’


ब्रह्मांड के अस्तित्‍व को बताते नटराज – कैप्रा ने वो द ताओ ऑफ फिजिक्स में शिव की अवधारणा के साथ विज्ञान के मेल को लेकर लिखा है, ‘शिव का नाचता हुआ रूप ब्रह्मांड के अस्तित्व को रेखांकित करता है। शिव हमें याद दिलाते हैं कि दुनिया में कुछ भी मौलिक नहीं है। सबकुछ भ्रम सरीखा और लगातार बदलने वाला है।मॉर्डन फिजिक्स भी इस बात की याद दिलाता है कि सभी सजीव प्राणियों में निर्माण और अंत, जन्म और मरण की प्रक्रिया लगातार चलती रहती है। ये इन-ऑर्गेनिक मैटर्स पर भी लागू होता है।’ कैप्रा ने आगे लिखा है, ‘क्वॉन्टम फिल्ड थ्योरी के मुताबिक किसी भी पदार्थ का अस्तित्व ही निर्माण और अंत के नृत्य पर आधारित है। मॉर्डन फीजिक्स इस बात को सामने लाता है कि सभी सब-एटॉमिक पार्टिकल ना सिर्फ ऊर्जा नृत्‍य करते हैं, बल्कि ये एनर्जी डांस ही निर्माण और संहार को संचालित करता है। मॉर्डन फिजिक्स के लिए शिव का डांस सबएटॉमिक मैटर का डांस है। ये सभी तरह के अस्तित्व की कुदरती अवधारणा है।’


वैज्ञानिक भगवान शिव से लेते हैं प्रेरणा – कहते हैं कि दुनिया की सबसे बड़ी इस फिजिक्‍स लैब में भगवान शिव की मूर्ति वैज्ञानिकों को प्रेरित करती है। एक बार इस लैब में काम करने वाले रिसर्चर ने भी इस तरह की बात कही थी कि किस तरह से भगवान शिव की मूर्ति उन्‍हें प्रेरित करती है। उन्‍होंने बताया था कि दिन के उजाले में जब सर्न जीवन के साथ ताल से ताल मिलाता है तो शिव इसके साथ खेलते हुए दिखते हैं। शिव याद दिलाते हैं कि ब्रह्मांड में लगातार चीजें बदल रही हैं और कोई भी चीज स्थिर नहीं है। वहीं, रात के अंधेरे में जब हम इस पर गहराई से विचार करते हैं तो शिव हमारे काम से उजागर हुई चीजों की परछाइयों से रूबरू करवाते हैं।
शिव की मूर्ति पर जताई गई थी आपत्ति –  कुछ लोगों ने हालांकि लैब में शिव की मूर्ति लगाने पर आपत्ति भी दर्ज करवाई थी। ईसाई धर्म के अनुयायियों ने सर्न से पूछा था कि उन्होंने अपने इंस्टीट्यूट में हिंदू देवता की मूर्ति क्यों लगा रखी है। ये सवाल उस समय और ज्यादा उठने लगे जब साल 2013 में प्रयोगशाला में हीग्स बॉसन की खोज हुई थी, जिसे गॉड पार्टिकल का नाम दिया गया था। हालांकि सर्न ने इन सवालों के जवाब भी दिए थे। सर्न की तरफ से कहा गया था कि भारत इस लैब का एक ऑब्जर्वर देश है। यह सर्न की बहु-संस्कृतिवाद को सामने लाता है। दुनिया की सबसे मशहूर फीजिक्स लैब सर्न कई देशों के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसमें भारत का सहयोग भी शामिल है।

सामूहिक समृध्दि से ही होगा सतत आर्थिक विकास : डॉ. सुमन मुखर्जी 

फ्रेंच विद्यार्थियों को संबोधित किया
कोलकाता : भवानीपुर एडूकेशन सोसायटी कॉलेज के डायरेक्टर जनरल, मैनेजमेंट सलाहकार और कार्पोरेट प्रशिक्षक डॉ. सुमन मुखर्जी ने ग्रीन और सस्टेनेबिलिटी मार्केटिंग विषय पर 45 फ्रेंच विद्यार्थियों के एक समूह को संबोधित किया । पेरिस के फ्रेंच बिजनेस स्कूल ईएससीपी – ईसीओएल (ईकोल सुपिरियर दि कॉमर्स द पेरिस) से अध्ययन यात्रा पर आए स्नातकोत्तर के पैंतालीस विद्यार्थियों को वैश्विक स्तर पर हो रही मार्केटिंग से संबंधित सामाजिक पर्यावरण और हरित मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। इकोले सुपिरियर दि कॉमर्स द पेरिस के मार्केटिंग और ब्रेडिंग प्रो. बेनोइट हेलब्रुन ने बताया कि वैश्विक स्तर पर किस प्रकार मार्केटिंग बिजनस के लिए विश्व के विभिन्न स्थानों की यात्रा आवश्यक है तभी युवाओं को हम विभिन्न परिस्थितियों को समझा सकते हैं।
46 वर्षों के शैक्षणिक अनुभवों से युक्त डॉ सुमन मुखर्जी ने अपने प्रारंभिक वक्तव्य में कहा कि हिंदू प्रकृति सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और धार्मिक संबंध से अधिक जुड़ी हुई है। प्रकृति को बचाने के लिए अपनी मूल जड़ों की ओर लौटने से ही प्रकृति को संरक्षित किया जा सकता है। आधुनिक बिजनेस मार्केटिंग की कला को विकसित करने के लिए परंपरागत मार्केटिंग की समस्याओं को नजरअंदाज कर उसको सुलझाने के विषय में सोचना होगा। उपभोक्ता की पारंपरिक सामाजिक और पर्यावरणीय मानसिकता को समझते हुए बाजार की स्थिति को सुदृढ़ करना होगा। समाज के जो तबका अपनी सेवाएं प्रदान कर रहे हैं उनको उचित मूल्य देना होगा इसके लिए बाजार में लचीलापन आवश्यक है तभी पूंजी बढ़ेगी ।”दि टेक्स्ट बुक ऑफ इकोनॉमी डेवलपमेंट” पुस्तक के लेखक डॉ. मुखर्जी ने “दि मदर टेरेसा इंटरनेशनल अवार्ड” द्वारा सम्मानित और 2014 में शिक्षा में सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार प्राप्त किया है। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि समाज के पूर्ण विकास के लिए वैयक्तिक स्तर पर नहीं बल्कि सामूहिक स्तर पर समृद्धि होने से गरीबी जैसे मुद्दों से छुटकारा प्राप्त किया जा सकता है। भारतीय परिप्रेक्ष्य में डॉ. सुमन ने फ्रेंच विद्यार्थियों को निष्कर्ष रूप से आर्थिक विकास के लिए चार ” पी” प्रोडक्ट, प्राइस, प्रोमोशन और प्लेस की उपयोगिता बताई और वैश्विक स्तर पर विकास के नए आयामों जैसे एक्सेप्टेबिलिटी, एफोर्डेबिलिटी, एक्सेसबिलिटी और एवरनेस इन चार “ए” को पुनर्निर्मित करना होगा। फ्रांस ही नहीं विश्व के विभिन्न देशों और भारतीय मार्केटिंग और पर्यावरणीय परिप्रेक्ष्य को दोनों देशों के समाज की संस्कृति के सभी पहलुओं पर तुलनात्मक अध्ययन के द्वारा ही समझना होगा। फ्रेंच विद्यार्थियों के समूह की मेजबानी डॉ सुमन मुखर्जी ने की। कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने।

नेताजी नगर सांध्य कॉलेज में तीसरा पुस्तक मेला संपन्न

कोलकाता : नेताजी नगर सांध्य कॉलेज में सांस्कृतिक उप-समिति एवं आईक्यूएसी द्वारा 17-18 फ़रवरी को दो दिवसीय तीसरे पुस्तक मेले का आयोजन किया गया। पुस्तक मेले का उद्घाटन नेताजी नगर कॉलेज के प्रभारी डॉ. विश्वजीत भद्रा ने किया। उन्होंने कहा कि तकनीकी के इस युग में कॉलेज और विद्यालय के विद्यार्थियों में पुस्तक पढ़ने की और संस्कृति को विकसित करने के लिए हर कॉलेज और शिक्षा प्रतिष्ठानों में पुस्तक मेले का आयोजन जरूर होना चाहिए। जिससे छात्रों में पुस्तकों के प्रति दिलचस्पी पैदा हो। पुस्तक मेले में छात्र-छात्राओं के साथ शिक्षकों एवं लेखकों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और पुस्तकें खरीदी। पुस्तकों की बिक्री इस मेले में पिछले मेलों से काफी अधिक रही। शिक्षक एवं छात्रों ने पुस्तक मेले के आयोजन को सार्थक एवं उपयोगी बताया। पुस्तक मेला में ‘देज पब्लिसेर्स’ जैसे जाने-माने लगभग 10 प्रकाशकों ने स्टॉल लगाया। इस मौके पर प्रधान अतिथि के रूप में कोलकाता नगर निगम, बोरो 10 के चेयरमैन तपन दासगुप्ता, कॉलेज के सभापति संदीपन मजूमदार ,आईक्यूएसी संयोजक प्रो. पिनाकी रंजन दे, बंगला विभाग के प्रमुख डॉ. अग्निमित्र घोष, जनसंचार विभाग के प्रमुख प्रो. शाश्वत बंदोपाध्याय, प्रो. अनुसूया कर , प्रो. भजन चन्द्र बर्मन , प्रो. सद्दाम होसैन, प्रो. सुकन्या सेनगुप्ता, कॉलेज लाइब्रेरियन दीपक कुमार सहित सभी प्राध्यापक और विद्यार्थी उपस्थित थे।

कोलकाता में खुला ईएसडीएस का पहला कायार्लय

कोलकाता : ईएसडीएस सॉफ्टवेयर सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड ने विधाननगर में अपना कार्यालय खोला है। यह कम्पनी की पूर्व में विस्तार नीति का अंग है और बिलियन डॉलर कम्पनी बनने की दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है। इस कार्यालय का उद्धाटन अभिनेत्री राइमा सेन ने ईएसडीएस सॉफ्टवेयर सॉल्यूशन के संस्थापक तथा सीईओ पीयूष सोमानी के साथ किया। राइमा सेन ने कहा कि ईएसडीएस का पूर्वी क्षेत्र में विस्तार रोजगार सृजन की दिशा में सहायक होगा और पश्चिम बंगाल आने वाले दिनों में तकनीक के क्षेत्र में नेतृत्व करेगा। कम्पनी के संस्थापक व सीईओ पीयूष सोमानी ने कहा कि कम्पनी का उद्देश्य अत्याधुनिक तकनीक पर है। क्लाउड और डेटा सेंटर के क्षेत्र में कम्पनी का ध्यान है और इसी वजह से कम्पनी ने विश्व का पहला पेटेंटकृत वर्टीकली ऑटोस्कैलेबल क्लाउड सॉल्यूशन ईएसडीएम ई नाइट क्लाउड दिया है। 100 से अधिक उद्योगों, 320 से अधिक बैंकों तथा एनबीएफसीएस, 123 एसएपी हाना ग्राहक हैं। इसके अतिरिक्त 100 से अधिक सरकारी और सार्वजनिक उद्यमों में भी कम्पनी का कारोबार है।

नीलम सिंह की दो कविताएँ

नीलम सिंह

ये अखबार के पन्ने

ये अखबार के पन्ने भी बड़े अजीब होते हैं ,
आते हैं रोज बकायदा किसी अजनबी की तरह ,
और नजरों से होते हुए जेहन में बस जाते हैं ,
देश ,विदेश ,नगर ,गाँव ,कसबे की खबरों से भरे ,
ये अखबार के पन्ने भी बड़े अजीब होते हैं I

कभी रंगीन पन्नों पर तारीफों से लदा नेता ,
तो ,कभी आलोचना का पात्र वही नेता ,
हुक्मरानो को अंगुली पर नचाती कभी ,
तो ,खुद अंगुली पर नाचती कभी ,
ये अखबार के पन्ने भी बड़े अजीब होते हैं l

कभी पन्ने दर पन्ने भरे होते है
साक्षरता अभियानों से ,
रोजगार से भरे फरमानों से ,
अनाज से भरे गोदामों से ,
तो ,कभी इसके उलट ,
निरक्षरता ,बेरोजगारी एवं कुपोषित बच्चों की तस्वीरों सेl
ये अखबार के पन्ने भी बड़े अजीब होते हैं l

कभी दुर्गा ,काली ,लक्ष्मी के पंडालों में
कर जोड़े ,दया की भीख माँगते लोगों की लम्बी कतार
से भरे ये अखबार के रंगीन पन्ने ,
नौ कन्या देवी स्वरूपा के पाँव पखारते ,
पूजन करते लोग ,
तो कभी इसके उलट …
भ्रुण हत्या ,तो कभी ….
इन्हीं नौ मे से किसी के चिथडों की तस्वीरों से भरी ….
ये अखबार के पन्ने भी बड़े अजीब होते हैं ……

 

2

अहसास

सहेजा था जिसको मैने बडे़ यत्न से,
नाजों से पाला था,
उड़ने को बेचैन वह,
जैसे सारा आकाश उसी का है।
हाँ ,ये सारा आकाश उसी का है।

तू उड़ ,मेरी चिरई ये नील गगन तेरा ही है
अपने नन्हे पंख पसार
उड़ ,तू उड़,सामर्थ्य जहाँ तक तेरा है,
ख्वाबों को अपने पहचान दे,
जीवन को नया आयाम दे,

पर,देख तटस्थ रहना,
इस नील गगन में….
लार टपकाते……
बाज भी हैं
घूरते हैं ये
तलाशते है मौका
झपट्टा मारते हैं
कभी रात के अँधेरे में
तो, कभी दिन के उजाले में

कुछ जाने,कुछ अनजाने चेहरे,
कुछ शराफत का मुखौटा लगाए चेहरे,
कुछ जाल बिछाए दाना डाले,
कुछ सब्ज साज दिखाए।

तू फँसना ना इस दिवा स्वप्न में
लक्ष्य से भटकना ना
परों में नई उर्जा भरना
ये सारा आकाश तुम्हारा है…..
ये सारा आकाश तुम्हारा है।

परिधान जो सुकून दें और बनायें…स्टाइलिश भी

फागुन का मौसम आ गया है…हवा में फाल्गुन की महक है….और अब होली का त्योहार भी सामने है….और साथ ही महिलाओं का महीना..चौंक गये..अरे…हम शायरी नहीं कर रहे..बल्कि सोच रहे हैं…इस पूरे मौसम को खूबसूरत और मनभावन बनाने के लिए हम क्या कर सकते हैं…ये सोच रहे हैं….अच्छा ये बताइए कि आपने क्या कभी सोचा है कि फैशन भी एक तरीका हो सकता है…खुशियाँ जाहिर करने का। दरअसल, बात जब खुशियों और अच्छे पलों की होती है..तो हम अक्सर यह सोच लेते हैं कि खुद को अलग और दिखाने के लिए हमें हमेशा भड़कीले रंग पहनने की जरूरत है…और कई बार मूड नहीं होने पर भी हम इसे पहनते हैं मगर लुक अगर आधुनिक होने के साथ थोड़ी शालीनता और गम्भीरता भी दे…ऐसे परिधान जो आपको खूबसूरती ही नहीं बल्कि सुकून भी दें…महानगर में शेक्सपीयर सरणी में खुला निशा एम. लोयलका का नया फैशन स्टोर ऐसी ही ताजगी देता है जहाँ हमें ऐसे ही परिधान देखने को मिले। 1500 वर्गफीट में फैले इस स्टोर का इंटीरियर भी काफी अलग है…और सबसे अच्छे बात यह कि यहाँ लड़के भी आकर निराश नहीं होंगे। बहरहाल…लड़कों के स्टाइल पर बात फिर कभी मगर अभी जब महिला दिवस आने वाला है तो लाजिमी है कि हम लड़कियों के   वेस्टर्न स्टाइल और परम्परागत भारतीय हस्तशिल्प व कढ़ाई का बेजोड़ मेल निशा के कपड़ों में है..स्टोर का उद्घाटन मशहूर टॉलीवुड अभिनेत्री मऊबनी सरकार ने किया…बहरहाल हम लाये हैं निशा के खजाने से कुछ खूबसूरत परिधान जो आपको बनायेंगे…फैशनिस्ता….

 

 

अब इस गाउन को लीजिए..कॉटन है…और गर्मियों की शाम के लिए एकदम सही…रफल्स इसे और भी खूबसूरत बना रहे हैं
गहरे रंग पसन्द हैं तो यह मव गाउन देखिए…इसमें कारदाना का काम है और इसका जैकेट स्टाइल इसे खूबसूरत बना रहा है मतलब शाम की पार्टी हो और भारी – भरकम न पहनना हो..तो यह आपके लिए सही है।
भारतीय फैशन हो और अनारकली न हो…ऐसा तो हो ही नहीं सकताा..यह क्रीम अनारकली जैकेट के साथ उपलब्ध है…दुप्पटा लेने का मन न हो..तो ये आपकी मदद करेगी.. आप दफ्तर की पार्टी से लेकर घर की किसी पार्टी में भी पहन सकती हैं

 

ब्राइडल वेयर हो या फिर कोई और अवसर…यह बेज लहंगा और उस पर की गयी कढ़ाई व बेलबूटे बेहद प्यारे लग रहे हैं…बेज के साथ गुलाबी दुप्पटा है…लहंगे पर कढ़ाई है और बॉर्डर हरा है..आप इसके साथ सिर्फ एक लुक अगर मिनिमल रखें तब भी सबसे अलग दिखेंगी…और पार्टी हो तो मेल खाते जेवर भी फबेंगे। इस पर मोतियों और स्टोन्स का काम है
बेज टॉप और हरा रंग के संयोजन को दर्शाता यह लहंगा बेहद खिल रहा है…इस परिधान की खासियत है इसकी बाँह जो आपको एक महारानी होने का अहसास करवायेगी। इस पर सुनहरी जरी और मोतियों का काम है जो इसकी खूबसूरती बढ़ा रहा है।
यह इंडो वेस्टर्न लहंगा है…और इसके साथ है ऑरगेंजा दुप्पटा..इसमें सुनहरे कारदाना का काम किया गया है। फ्यूजन पसन्द है और रंगों से खेलना पसन्द है तो यह आपके लिए ही है।

सभी परिधान निशा एम. लोयलका के 4, शेक्सपीयर सरणी स्थित स्टोर से। कीमत 10 हजार रुपये से शुरू

 

क्योंकि यह परीक्षाओं का मौसम है

परीक्षाओं का मौसम आ गया है। सीबीएसई और माध्यमिक की परीक्षाएँ आरम्भ हो चुकी हैं। बोर्ड परीक्षाओं का दबाव इतना होता है कि कुछ सूझता ही नहीं है मगर याद रखना होगा..कि अच्छा प्रदर्शन तभी होगा जब आपका दिमाग शांत हो , आप एकाग्र हों और योजनाबद्ध तरीके से पढ़ें..तो परीक्षाओं के लिए सभी परीक्षार्थियों को शुभकामनाएँ और ये रहे कुछ तरीके जो आपकी मदद करेंगे –

सही टाइम टेबल – पढ़ाई का सबसे अच्छा तरीका है कि टाइम टेबल बनाएं, और यह पहले ही तय कर लें कि आपको कब, क्या और कितना पढ़ना है। चाहें तो हर आधे या एक घंटे में 10 से 15 मिनट का ब्रेक लें। इससे दोबारा जब पढ़ाई करने बैठेंगे तो बेहतर तरीके से पढ़ पाएंगे। एक ही बार में ज्यादा से ज्यादा पढ़ने की कोशिश न करें। पहले कठिन विषयों का अध्ययन कर लें उसके बाद आसान चीजों को पढ़ें। धीरे-धीरे पढ़ाई के घंटों को बढ़ाएं लेकिन बीच में ब्रेक जरूरी लें। अगर टाइम टेबल के हिसाब से पढ़ाई होगी तो सभी विषयों पर बराबर ध्यान दे पाएंगे।

पर्याप्त नींद – अक्सर परीक्षा और पढ़ाई के दबाव के चलते बच्चे पर्याप्त नींद नहीं लेते, वे देर रात तक तो पढ़ाई करते ही हैं, सुबह भी पढ़ाई के लिए जल्दी उठ जाते हैं जिससे पर्याप्त नींद नहीं हो पाती। जिससे दिमाग सुस्त और उसकी कार्यक्षमता कम हो जाती है। दिमाग तभी ठीक से काम करेगा जब उसे पर्याप्त आराम मिलेगा।

खान-पान – ज्यादातर बच्चे पढ़ाई के दौरान खाने-पीने पर बिल्कुल ध्यान नहीं देते, लेकिन इस समय उन्हें पोषण की आवश्यकता अधिक होती है। बच्चों को हरी सब्जियां, ड्रायफ्रूट्स, जूस, दूध आदि लेना चाहिए और एक ही बार में ज्यादा खाने के बजाए थोड़ा-थोड़ा खाएं। ज्यादा मिर्च मसाले, तली हुई चीजों और फास्ट फूड से दूर रहें।

शारीरिक व्यायाम – चाहे सुबह की सैर हो, योगा या फिर घर में ही कोई व्यायाम करना हो। मानसिक स्वास्थ्य के लिए शरीर को चुस्त-दुरूस्थ रखना भी बेहद जरूरी है। इससे दिमाग को ऑक्सीजन सही मात्रा में पहुंचती है, रक्तसंचार बेहतर होता है और वह तेजी से काम करता है।

मनोरंजन – सिर्फ पढ़ाई करते रहने से दिमाग बोझिल हो सकता है। उसे रिफ्रेश करने के लिए मनोरंजन भी बेहद जरूरी है। चाहें तो घर पर ही कुछ फनी करें या फिर कुछ देर दोस्तों के साथ जाकर खेलकर या अन्य कार्य करके मूड को रिफ्रेश करें।

अभिभावकों के लिए़

 बच्चों को संभालने से पहले आपको खुद को यह समझाना होगा, कि बच्चों पर अच्छे नंबर लाने का दबाव बनाने की अपेक्षा उन्हें यह विश्वास दिलाएं कि वे अपना सबसे अच्छा प्रदर्शन करें, लेकिन अगर नंबर अपेक्षा के अनुरूप नहीं भी आते, तो अपना मनोबल न तोड़ें, अगली बार और बेहतर प्रयास करें।
 बच्चों को प्रश्नों के उत्तर याद करने की आसान विधियां बताएं, उन्हें बताएं कि वे प्रश्नपत्र को किस तरह से समयसीमा में पूर्ण कर सकते हैं। प्रश्नों को हल करने में उनकी मदद करें, इस तैयारी में आप भी सहभागी बनें ताकि उन्हें यह महसूस हो, कि आप उनकी कठिनाईयों को समझ पा रहे हैं।
बच्चों को बताएं कि आप जानते हैं कि आपका बच्चा होशियार है, लेकिन परीक्षा के समय कई बार वे उन प्रश्नों को करने से चूक जाते हैं जिन के उत्तर उन्हें अच्छी तरह से आते थे। यह सामान्य है, इसके लिए बच्चों पर दबाव न बनाएं।
बच्चों को पूरे समय सिर्फ पढ़ाई के लिए ही न कहें, बल्कि परीक्षा के समय इस तनाव से बाहर निकालने के लिए कुछ वक्त का ब्रेक भी दें। उन्हें कमरे में ही चाय नाश्ता या खाना देने की बजाए परिवार के साथ खाना खिलाएं और हंसी मजाक कर माहौल को हल्का फुल्का बनाए रखें।
बच्चों की सेहत का ध्यान इस समय विशेष तौर पर रखें। खाने में सेहतमंद चीजें ही दें और इस समय उन्हें पर्याप्त नींद की भी जरूरत होगी, जिससे दिमाग सही तरीके से काम करे और वे आत्मविश्वासी रहें।

(वेब दुनिया से साभार)

 

दुल्हन ने मेहर में 80 किताबें मांगीं, 96 मिलीं

कोल्लम : केरल में एक दुल्हन ने निकाह में 80 किताबें माँगकर लोगों का दिल जीत लिया। सोशल मीडिया पर लोग इस पहल की तारीफ कर रहे हैं। दरअसल, पिछले साल 29 दिसंबर को कोल्लम जिले के नीलामेल में अजना नाजिम की शादी 26 साल के सिविल इंजीनियर इजाज हाकिम से हुई थी। शर्त के मुताबिक, हाकिम ने 96 किताबें भेंट कीं। इनमें भारतीय संविधान के अलावा गीता, बाइबल और कुरान जैसे पवित्र ग्रंथ भी शामिल हैं।
हाकिम ने अजना का ख्याल इससे ज्यादा रखा। शादी के बाद बेडरूम में एक बुकशेल्फ भी तैयार कराया, जिसमें सभी किताबें रखी गईं। दोनों ने अक्टूबर महीने में सगाई की थी, तभी मेहर की रस्म में किताबें भेंट करने की बात तय हुई थी। बीएड की छात्रा अजना ने अपनी सूची में खालिद हुसैनी, हारुकी मुराकामी और मिशेल ओबामा की जीवनी जैसी किताबें को शामिल किया था। दुल्हन द्वारा की जाने वाली मांग मेहर कहलाती है
मेहर मुस्लिम समुदाय में शादी के समय दुल्हन द्वारा की जाने वाली मांग होती है, जिसे दूल्हे को हर कीमत पर पूरा करना ही होता है। इसके बाद निकाह कबूल कराया जाता है। यदि मेहर की रस्म पूरी नहीं की जाती तो काजी निकाह नहीं कराते हैं। आमतौर पर मेहर के रूप में की जाने वाली मांग दोनों परिवारों के आर्थिक स्तर पर निर्भर करती है। मेहर के रूप में दुल्हन, रुपए, अपार्टमेंट, कार और गहने आदि भी मांग सकती है।
केरल में पहले भी 50 किताबें मेहर में मांगीं गयीं
केरल में मुलिस्म समुदाय की शादी में मेहर के रूप में किताबें मांगने का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले 2016 में हुई शादी के दौरान 50 किताबें मांगीं गई थीं। यह मांग हैदराबाद यूनिवर्सिटी से राजनीति विज्ञान में ग्रेजुएट साहला नीचील ने की थी। वह मलप्पुरम के समुदाय को दिखाना चाहती थीं कि संबंध जोड़ने वाले दोनों परिवार सोने के बिना भी शादी कर सकते हैं। उसके मंगेतर ने बेंगलुरु के विभिन्न स्टोर्स जैसे ब्लॉसम, गैंगरेम्स और बुकवर्म से पुस्तकों को खरीदा था।