कोलकाता : द हेरिटेज कॉलेज में हाल ही में महिला दिवस मनाया गया। इस अवसर पर वाद – विवाद, नृत्य, आवृत्ति जैसी कई सांस्कृतिक प्रतियोगिताएँ आयोजित की गयीं। कार्यक्रम का उद्घाटन द हेरिटेज स्कूल की प्रिंसिपल सीमा सप्रू ने किया। इस अवसर पर द हेरिटेज अकादमी के प्रिंसिपल डॉ. गौर बनर्जी, मीडिया साइंस विभाग की डीन डॉ. मधुपा बख्शी, द हेरिटेज कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. पी.आर. भट्टाचार्य और रजिस्ट्रार डॉ. कविता शास्त्री उपस्थित थीं।
कोलकाता में मरीजों का आवागमन उन्नत बनाने आया पैट्स
कोलकाता : पिछले कुछ समय से कोलकाता से गुवाहाटी जाने वाले मरीजों की संख्या में वृद्धि हुई। बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए मरीजों का बेहतर परिवहन बहुत जरूरी है। कोलकाता के मरीजों को यह सुविधा पंचमुखी एयर एंड ट्रेन एम्बुलेंस सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड (पैट्स एयर एम्बुलेंस )से मिल सकती है। पैट्स एयर एम्बुलेंस के मुताबिक उसकी परिसेवा अन्तरराष्ट्रीय स्तर की है और एम्बुलेंस में आईसीयू उपकरण, अत्याधुनिक तकनीक और पेशेवर व्यक्ति और प्रशिक्षित कर्मी हैं। मेडिकल प्रोफेशनल इसे पसन्द करते हैं और ग्राउंड एयर एम्बुलेंस भी मुहैया करवायी जाती है। इसके कुछ उपकरणों में डेफिब्रिलेटर कार्डियक मॉनिटर, बड़े ऑक्सीजन टैंक, पोर्टेबल वेंटिलेटर, सीपीआर मशीन, इमरजेंसी इन्वर्टर भी कमर्शियल पेशेंट ट्रान्सफर के लिए उपलब्ध हैं। पंचमुखी एयर एंड ट्रेन एम्बुलेंस सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड (पैट्स एयर एम्बुलेंस ) के प्रबन्ध निदेशक डॉ. मुकेश कुमार के मुताबिक उनकी कम्पनी दिल्ली या किसी विशेष स्थान तक नहीं सिमटी। इस समय यह 8 राज्यों के 28 शहरों में सक्रिय है और अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी सेवायें दे रही है।
वीरांगना के होली मिलनोत्सव में सम्मानित की गयी विभिन्न कार्यक्षेत्र की महिलाएं
‘दहेज न लेंगे न देंगे’ की ली शपथ
कोलकाता/हावड़ा : अंतरराष्ट्रीय क्षत्रिय वीरांगना फ़ाउंडेशन, पश्चिम बंगाल की ओर से होली मिलनोत्सव और सम्मान समारोह 2020 का आयोजन किया गया। हावड़ा के बांधाघाट स्थित गोपाल भवन में आयोजित इस समारोह में वीरांगना सम्मान समारोह 2020 के तहत समाज के विभिन्न कार्यक्षेत्र से जुड़ी महिलाएं सम्मानित की गयीं। नारी गौरव सम्मान डॉ.राजश्री शुक्ला को नारी विभूति सम्मान रश्मि शर्मा, पारिजात चक्रवर्ती, प्रतिभा सिंह, प्रतिमा सिंह, पूजा सिंह, रीता सिंह, ममता सिंह, पूनम सिंह, सुमन सिंह, मीनू सिंह, सुनीता सिंह, इंदु सिंह, आशा सिंह, को दिया गया। उत्कृष्ट समाज सेवा सम्मान आशा सिंह, विमलेश सिंह, रीमा सिंह, शीला सिंह, कमलेश सिंह, महिमा सिंह तन्नो, गिरिजा दारोगा सिंह, गिरिजा दुर्गादत्त सिंह, सरोज सिंह, पूनम सिंह को दिया गया। नारी गरिमा सम्मान सुलेखा सिंह, जयश्री सिंह, शकुंतला साव, अनिता साव, विद्या सिंह, ललिता सिंह, संचिता सिंह, सुनीता सिंह, रीता सिंह, रेखा सिंह, मंजू सिंह को दिया गया। इस अवसर पर बिहार और पश्चिम बंगाल के सुपरिचित कलाकारों द्वारा रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुति किया, जिसमें इंद्रजीत ठाकुर गोलू के गीतों पर लोग झूमते नजर आये। कार्यक्रम का संचालन वीरांगना की प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह ने किया। कार्यक्रम में वीरांगनाओं ने दहेज के खिलाफ आवाज बुलंद की और ‘दहेज न लेने और न देने’ की शपथ ली। इस अवसर पर अखिल भारतीय क्षत्रिय समाज के महासचिव शंकर बख्श सिंह, संरक्षक कृष्णा सिंह, श्रीप्रकाश सिंह ने समाज में नारी शक्ति के सम्मान की आवश्यकता पर जोर दिया और वीरांगनाओं के काम को सराहा व दहेज के खिलाफ मुहिम को आगे बढ़ाने में हरसंभव मदद का आश्वासन दिया। प्रमुख अतिथियों में मेगा म्यूजिक फिल्म्स कंपनी के निदेशक शैलेन्द्र तिवारी, अंतरराष्ट्रीय स्तर के फिल्म निर्देशक डॉ.सुदीप रंजन सरकार, फिल्म निर्माता व समाजसेवी रीता झंवर, व्यवसाय जगत से जुड़ी समाजसेवी शोभा सिंह और मंजू सिंह, राजा बाबू सिंह, राजेश्वर सिंह, देवेन्द्र सिंह शामिल हैं।
मेडीबडी ने शुरू किया कोरोना के खिलाफ #CallKaroNa अभियान
नयी दिल्ली : नोवल कोरोना वायरस (COVID-19) ने दिसंबर 2019 से तहलका मचा रखा है, विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा इसे विश्व स्तर पर महामारी घोषित कर दिया गया है| स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की वेबसाइट ने अपनी वेबसाइट पर देशभर में कोरोना वायरस के 108 मामले घोषित किए हैं |
इस मुसीबत के समय में मेडीबडी, कैशलैस डिजिटल हैल्थ केयर प्लैटफॉर्म ने मुफ़्त ऑनलाइन डॉक्टर परामर्श की सेवाएँ उन लोगों को दी हैं जिनमें COVID-19 के लक्षण नज़र आ रहे हैं | यह सेवा 24 घंटे उपलब्ध रहेगी | इस नंबर 080 4719 3456 पर आप डॉक्टर से निःशुल्क बात कर सकते हैं | हर तरफ सिर्फ कोरोना को लेकर ही चर्चा हो रही है, लोगों को यह समझना ज़रूरी है की इस बिमारी से बचने के तरीकों को जानना कितना ज़रूरी है | इसलिए लोगों में चल रही अफवाहों और कोरोना से जुड़े मिथकों को दूर करने के लिए मेडीबडी ने एक #CallKaroNa अभियान शुरू किया है | इस अभियान का मकसद है लोगों को कोरोना वायरस के बारे में ठीक तरह से जागरूक करना और उसके बारे में सही जानकारी देना | मेडीबडी ने अपनी सेवाएँ कॉर्पोरेट्स जैसे की – टीसीएस, सीटीएस, विप्रो, एक्सेंचर, इंटेल, माइंडट्री, टेकमहिंद्रा, फ्लिपकार्ट, फोनपे, एल एंड टी-टेक्नोलोजी, एल्सटॉम, एचजीएस में बढ़ा दी हैं | इस कैशलैस डिजिटल हैल्थ केयर प्लैटफॉर्म ने दिसंबर से ही अपनी सेवाएँ अन्य देश जैसे चीन, हांगकांग, जापान, सिंगापुर में भी जारी की हैं |
आने वाले सप्ताह में मेडीबडी अन्य 20 कॉर्पोरेट्स को इस मुश्किल दौर में अपनी सेवाएँ उपलब्ध करवाएगा | साथ ही मेडीबडी ने कॉर्पोरेट्स को COVID 19 के लिए प्रिवेंटिव किट भी दी हैं | लोगों तक कोरोना वायरस से जुड़ी सही खबर पहुँचाने के लिए इमेल्स, सेमिनार, वेबिनार, पोस्टर आदि का आयोजन भी किया है |
इस पर प्रशांत झावेरी, मेडीबडी का कहना है, “इस समय घबराना नहीं है, बल्कि हमें तैयार और सतर्क रहना है और ऐसा करने के लिए ज़रूरत है सही जानकारी की, ताकि हम सब सही तरह से खुद को इस वायरस से दूर रख सकें | मेडीबडी अपनी ओर से लोगों की मदद करने की पूरी कोशिश करता रहेगा, ऐसे में ज़रूरत है कि देशभर में इस लड़ाई को लड़ने के लिए अन्य सभी लोग भी अपना पूरा योगदान दें|”
साथ ही मेडीबडी निदान से लेकर लोगों की देखभाल करने में भी मदद कर रहा है | और तो और मेडीबडी कॉर्पोरेट्स की सफाई में भी मदद कर रहा है, जहाँ के किसी कार्यकर्ता को Covid-19 ने अपनी चपेट में ले लिया है|
होरी खेलत हैं गिरधारी

–
होरी खेलत हैं गिरधारी।
मुरली चंग बजत डफ न्यारो।
संग जुबती ब्रजनारी।।
चंदन केसर छिड़कत मोहन
अपने हाथ बिहारी।
भरि भरि मूठ गुलाल लाल संग
स्यामा प्राण पियारी।
गावत चार धमार राग तहं
दै दै कल करतारी।।
फाग जु खेलत रसिक सांवरो
बाढ्यौ रस ब्रज भारी।
मीरा कूं प्रभु गिरधर मिलिया
मोहनलाल बिहारी।।
‘आर्थिक असमानता जेंडर असमानता का सबसे बड़ा कारण है’
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में नारीवाद के विविध परिप्रेक्ष्य पर विशेष व्याख्यान
कोलकाता : अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा के क्षेत्रीय केंद्र, कोलकाता में ‘नारीवाद : विविध परिप्रेक्ष्य’ विषय पर एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। सावित्रीबाई फूले सभा-कक्ष में संपन्न इस अकादमिक कार्यक्रम की मुख्य वक्ता थीं, भारतीय सामाजिक अनुसंधान परिषद, कोलकाता केंद्र में जेंडर स्टडीज़ की सहायक प्रोफेसर डॉ आशा सिंह। आरंभ में हिंदी विश्वविद्यालय कोलकाता केंद्र के प्रभारी डॉ सुनील कुमार ‘सुमन’ ने आमंत्रित वक्ता का चरखा प्रतीक-चिह्न देकर स्वागत किया। डॉ सुनील ने महिला दिवस के इतिहास और उसके महत्व पर प्रकाश डालते हुए विषय प्रवर्तन किया। उन्होंने कहा कि भारत में जब नारीवाद की बात होगी तो इसमें जाति, धर्म, वर्ग और नस्ल आधारित भेदभाव को भी ध्यान में रखना होगा।
डॉ. आशा सिंह ने अपनी बात रखते हुए कहा कि जेंडर समानता केवल मानसिक बदलाव से नहीं आ सकती, इसके लिए ठोस सामाजिक-आर्थिक पहल और परिवर्तनों की जरूरत है। आर्थिक असमानता जेंडर असमानता का सबसे बड़ा कारण है। इसके लिए संरचनामक बदलाव जरूरी है। राज्य की भूमिका इसमें महत्वपूर्ण है। यह केवल स्त्री-पुरुष संबंध या परिवार से जुड़ा मामला नहीं है। उन्होंने कहा कि ब्राह्मणवादी और नवउदारवादी ताकतों ने पितृसत्ता को इतना मजबूत बनाया है कि उसकी वजह से संरचनात्मक बदलाव नहीं हो पा रहे हैं और गैर-बराबरी की स्थितियाँ अभी भी बनी हुई हैं। डॉ आशा सिंह ने नारीवाद के सैद्धांतिक पक्षों पर विस्तार से बात करते हुए यह बताया कि भारत में नारीवाद, ज्ञान के एक अनुशासन के रूप में कैसे स्थापित हुआ, अलग-अलग विश्वविद्यालयों में जो स्त्री अध्ययन केंद्र खुले हैं, वहाँ शोध-अध्ययन के क्षेत्र में पिछले सालों में कितना और क्या-क्या काम हुआ है, अलग-अलग दशकों में महिलाओं से संबंधित मुद्दे क्या-क्या रहे हैं, जिन पर रिसर्च हुए हैं और किताबें लिखी गई हैं, कौन-कौन से प्रमुख महिला आंदोलन हुए हैं और उनकी परिणति ज्ञान के संसार में किस प्रकार हुई है तथा कानूनी रूप से वे कितने प्रभावी रहे हैं आदि तमाम पहलुओं पर गहराई से अपने बात रखी। उन्होंने स्त्री अध्ययन के राजनीतिक पक्ष को भी रेखांकित किया। महिलाओं के रोजगार के सवाल को डॉ सिंह ने बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि जन शिक्षा के अभाव और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की कमी से सिकुड़ते रोजगार के अवसर के चलते महिलाओं की स्थिति और बदतर होती जा रही है। सरकारी महिला कल्याण की योजनाओं का मंद पड़ना, योजनाओं का सही तरीके से लागू न होना और महिला कल्याण कार्यक्रमों का महज सरकारी इवेंट बनकर रह जाना, जेंडर समानता की राह में बाधक बनते रहे हैं। इस आयोजन में केंद्र के विद्यार्थी नैना प्रसाद, काजल शर्मा और विवेक साव ने अपनी सुंदर काव्य-प्रस्तुतियाँ दीं। अंत में केंद्र के अतिथि अध्यापक डॉ प्रेम बहादुर मांझी ने आभार-ज्ञापन किया।
प्रहलाद के गाँव फालैन में जलती है होलिका, मनती है होली
यहाँ 20-25 फीट चौड़ी जलती होली के बीच से चलकर निकलता है पंडा
आज सोमवार, 9 मार्च को फाल्गुन मास की पूर्णिमा है। इसी रात होलिका दहन होगा। मथुरा और वृंदावन का होली उत्सव दुनियाभर में प्रसिद्ध है, होली की हुड़दंग और बरसाना की लठमार होली के साथ ही फालैन गांव की होली भी बहुत खास होती है। मथुरा के पास ही स्थित फालैन को भक्त प्रहलाद का गांव माना जाता है। यहां आज भी एक पंडा (पुजारी) होलिका दहन पर जलती हुई होली के बीच से निकलता है, लेकिन उसे आग जलाती नहीं है। फालैन के पंडा परिवार द्वारा यहां सदियों से ये परंपरा निभाई जा रही है। इसे देखने के लिए दुनियाभर से लोग पहुंचते हैं। गांव में मेला लगता है। दर्शनार्थियों के स्वागत के लिए लोग अपने-अपने घरों की रंगाई-पुताई करा रहे हैं।
होलिका दहन के दौरान निभाई जाने वाली इस परंपरा के लिए पंडा परिवार का वो सदस्य जिसे जलती होली से निकलना होता है, वो एक महीने पहले से घर छोड़कर मंदिर में रहने लगता है। वहीं रहकर पूजा-पाठ, मंत्र जाप और उपवास करता है। इसके बाद ही होलिका दहन होता है। इस बार मोनू नामक पंडा जलती हुई होली के बीच में निकलेगा। हर साल होली पर जोखिम भरा ये काम मोनू पंडा के परिवार से कोई एक सदस्य करता है। ग्राम पंचायत फालैन के समाज सेवक प्रेमसुख कौशिक के अनुसार होली पर ये चमत्कार देखने के लिए देश-दुनिया से हजारों लोग फालैन गांव पहुंचते हैं। गांव में पंडा परिवार के 20-30 घर हैं। हर बार होली से पहले पंचायत में ये तय होता है कि इस साल जलती होली में से कौन निकलेगा।

8-10 फीट ऊँची और करीब 25 फीट चौड़ी होली जलाई जाती है
फालैन गांव के भागवत प्रवक्ता संत योगीराज महाराज ने बताया कि यहां होलिका दहन कार्यक्रम भव्य पैमाने पर आयोजित होता है। होलिका सजाने के लिए आसपास के 5-7 गांवों से लोग कंडे लेकर आते हैं। ऐसे में यहां हजारों कंडे एकट्ठा हो जाते हैं। सभी कंडों से करीब 25 फीट चौड़ी और 8-10 फीट ऊंची होलिका तैयार की जाती है। फाल्गुन पूर्णिमा पर गांव और आसपास के लोग होलिका पूजन करते हैं। रात में होलिका जलाई जाती है। इसके बाद शुभ मुहूर्त में पंडाजी जलती होली में से निकलते हैं। ये कारनामा कुछ ही देर का होता है। इस साल से पहले मोनू के पिताजी 10 बार जलती होली में से निकल चुके हैं। जलती होली से निकलने वाले पंडा का बाल भी नहीं जलता है। गांव के लोग सभी अतिथियों के खान-पान और रहने की व्यवस्था करते हैं।
ये प्रहलाद का गाँव है
यहाँ मान्यता प्रचलित है कि ये गांव दैत्यराज हिरण्यकश्यप का पुत्र प्रहलाद का है। पुराने समय में एक संत ने यहां तपस्या की थी। उस समय इस गांव के एक पंडा परिवार को स्वप्न आया कि एक पेड़ के नीचे मूर्ति दबी हुई है। इस सपने के बाद गांव के पंडा परिवार के सदस्यों ने संत के मार्गदर्शन में खुदाई की थी। इस खुदाई में भगवान नरसिंह और भक्त प्रहलाद की मूर्ति निकली। तब संत ने पंडा परिवार को ये आशीर्वाद दिया कि हर साल होली पर इस परिवार का जो भी सदस्य पूरी ईमानदारी और आस्था से भक्ति करेगा, उसे भक्त प्रहलाद की विशेष कृपा मिलेगी और वह जलती हुई होली से निकल सकेगा। ऐसा करने के बाद भी उसके शरीर पर आग की गर्मी का कोई असर नहीं होगा। यहां भक्त प्रहलाद का मंदिर है और यहीं एक कुंड भी है।
मुहूर्त के मुताबिक पंडा की बुआ प्रहलाद कुंड से एक लोटा पानी लेकर आती है और जलती होली में डाल देती है। इससे होलिका शांत हो जाती है। इसके बाद पंडा प्रहलाद कुंड में स्नान करता है और एक गमछा, माला लेकर भक्त प्रहलाद का ध्यान करते हुए जलती हुई होली से निकल जाता है। आग से निकलने के बाद भी पंडा के शरीर पर आग की गर्मी का कोई बुरा असर नहीं होता है।
(साभार – दैनिक भास्कर)
फूलों और प्राकृतिक रंगों से सराबोर होती है वृंदावन के प्रेम मंदिर की होली
होलिका दहन 9 मार्च आज हैऔर देशभर में कल 10 मार्च को रंग वाली होली खेली जाएगी। होली पर्व पूरी ब्रज भूमि में उल्लास के साथ और अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है। लेकिन उसमें वृंदावन की होली भी बहुत ही महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि ये वो जगह है जहां भगवान कृष्ण का बचपन बीता है। वैसे तो यहां हर जगह होली का विशेष रंग होता है लेकिन प्रेम मंदिर की होली खास रहती है।
54 एकड़ में बना है वृंदावन का 125 फीट ऊंचा प्रेम मंदिर
प्रेम मंदिर की मुख्य रचना संगमरमर के पत्थर से बनी हुई है। कृपालु जी महाराज ने इस मंदिर को बनाने की घोषणा साल 2001 में ही कर दी थी। इसे 11 सालों बाद लगभग 1000 मजदूरों ने सन 2012 में पूरा कर दिया था। 54 एकड़ क्षेत्रफल में बना यह प्रेम मंदिर 125 फीट ऊंचा, 122 फीट लंबा और 115 फीट चौड़ा है। ये तीर्थ अपने आप में ही बेजोड़ कला का नमूना है।
फूलों और रंगों से होता है राधा-कृष्ण का विशेष श्रृंगार
मंदिर पर होली के अवसर पर विशेष आयोजन किया जाता है। इस अवसर पर यहां राधा-कृष्ण का फूलों और रंगों से विशेष श्रृंगार होता है। इसके बाद फूलों और प्राकृतिक रंगों की बौछार की जाती है। इस होली के आयोजन में शामिल होने के लिए देश विदेश के लोग यहां आते हैं।
मंदिर में श्री गोवर्धन लीला, कालिया नाग दमन लीला, झूलन लीला सहित राधा-कृष्ण की मनोहर झांकियां उद्यानों के बीच सजाई गई हैं। मंदिर में कुल 94 स्तम्भ हैं जो राधा-कृष्ण की विभिन्न लीलाओं से सजाएं गए हैं। अधिकांश स्तम्भों पर गोपियों की मूर्तियां अंकित हैं।
पुरुषों की आर्थिक बराबरी करने में महिलाओं को लगेंगे 257 साल
72 देशों में औरतें नहीं खोल सकतीं बैंक खाता
वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की रिपोर्ट बताती है कि आज भी दुनियाभर में जेंडर इक्वालिटी यानी लैंगिक समानता 68.6% ही है। बीते 50 सालों में 85 देश ऐसे हैं जहां की राष्ट्रप्रमुख कभी महिला बन ही नहीं सकी। रिपोर्ट के मुताबिक, आर्थिक सहयोग के मामले में लैंगिक अंतर को खत्म करने में अभी भी 257 साल लग जाएंगे। 2020 ग्लोबल जेंडर गेप इंडेक्स में भारत 66 प्रतिशत के साथ रैंकिंग में 112 नंबर पर है। जबकि साउथ एशिया में देश बांग्लादेश, नेपाल, श्रीलंका के बाद चौथे नंबर पर है।
नेतृत्व
राजनीति के क्षेत्र में महिलाओं की हालत बदतर है। रिपोर्ट बताती है कि, 35 हजार 127 पॉलीटिकल सीट्स में से महिलाओं के पास महज 25% है। 153 में 45 देश ऐसे हैं जहां महिलाओं के पास उपलब्ध सीट्स का केवल 20% है। दो देश वनौटू और पपुआ न्यू गिनी में एक भी महिला राजनेता नहीं है। हमारे देश में ही लोकसभा में महिलाओं की संख्या 14% और राज्यसभा में 10% के आसपास ही है। रिपोर्ट के मुताबिक पॉलिटिक्स के मामले में हर साल 0.75% की दर से सुधार हो रहा है। अगर इसी दर से सुधार होता रहा तो लैंगिक भेद की खाई पाटने में 95 साल लग जाएंगे।
आर्थिक-अवसर
आर्थिक सहयोग और अवसरों के मामले में फिलहाल 42% का फर्क अब भी है। रिपोर्ट के मुताबिक 15 से 64 की उम्र वाले औसतन 78% पुरुष लेबर फोर्स में हैं। महिलाओं के मामले में यह आंकड़ा 55% है। दुनियाभर में महिलाओं के नेतृत्व में सिर्फ 18.2% कंपनियां ही चल रहीं हैं। भारत में कंपनियों के बोर्ड में 13.8% महिलाएं शामिल हैं। चीन में यह आंकड़ा 9.7 फीसदी है। रिपोर्ट बताती है कि, ऐसे कई देश हैं जहां महिलाओं को संपत्ति खरीदने या नई कंपनी शुरू करने के लिए क्रेडिट, भूमि और अन्य आर्थिक लाभों का फायदा नहीं मिल पाता है। उदाहरण के तौर पर 153 में से 72 देश ऐसे हैं जहां पर विशेष सामाजिक समूह की महिलाओं के पास बैंक अकाउंट खोलने का भी हक नहीं है। वहीं, 25 देशों में औरतों को विरासत की प्रॉपर्टी के संबंध में पूरे अधिकार नहीं है।
शिक्षा
रिपोर्ट के मुताबिक शिक्षा और पढ़ाई के मामले में 4% का फर्क अब भी है। 35 देशों में शिक्षा के मामले में 100% समानता आ चुकी है। दुनिया में 15-24 साल की उम्र के 90.4% लड़कियां और 92.9% लड़के साक्षर हैं। रिपोर्ट बताती है कि, मौजूदा स्थिति के बाद भी करीब 10% लड़के और लड़कियां शिक्षा के मामले में पिछड़ रहे हैं। रिपोर्ट बताती है कि अगर जरूरी संस्थागत और सांस्कृतिक बदलाव होते हैं तो भी इस लैंगिक भेद को खत्म करने में कम से कम 12 साल का समय लगेगा।
स्वास्थ्य
दुनिया ने स्वास्थ्य के मामले में 95.7 फीसदी महिलाओं और पुरुषों के बीच फर्क खत्म करने में सफलता हासिल कर ली है। 71 देशों ने जहां कम से कम 97 प्रतिशत गैप खत्म किया है, वहीं 42 देश भेद को पूरी तरह से खत्म करने के करीब हैं। भारत में हेल्थ और सर्वाइवल का आंकड़ा 94.4 प्रतिशत है।
सम्पत्ति
आर्थिक मोर्चे पर दुनियाभर में महिलाओं की स्थिति में सुधार हुआ है। 2010 में अरबपति महिलाओं की संख्या 91 थी, जो 2019 में बढ़कर 244 हो गई। इनमें अपने दम पर अमीर बनीं महिलाओं का ग्राफ भी तेजी से बढ़ा। फोर्ब्स की वर्ल्ड रिचेस्ट रैंकिंग के अनुसार भारत में सबसे अमीर महिला जिंदल ग्रुप की सावित्री जिंदल हैं। सावित्री ग्लोबल रैंकिंग में 290 नंबर पर हैं। दुनिया की सबसे अमीर महिला फ्रैंकोइस बैटनकोर्ट मेयर्स हैं।
शोषण
वर्ल्ड बैंक की 2019 की एक रिपोर्ट के मुताबिक दुनियाभर में 35% महिलाएं शारीरिक और यौन शोषण का शिकार हुईं हैं। 38% महिलाओं की हत्या उनके ही पार्टनर ने कर दी। एनसीआरबी के मुताबिक, 2018 के अंत तक देश की अदालतों में दुष्कर्म के 1 लाख 38 हजार 342 मामले पेंडिंग थे। इनमें से 17 हजार 313 मामलों का ही ट्रायल पूरा हो सका, जबकि सिर्फ 4 हजार 708 मामलों में ही सजा सुनाई गई। 2018 में सजा देने की दर यानी कन्विक्शन रेट सिर्फ 27.2% रहा जो 2017 की तुलना में 5% कम है। 2017 में कन्विक्शन रेट 32.2% था।
विश्व में विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं-पुरुषों के नौकरियों के आँकड़े
क्षेत्र पुरुष महिला
क्लाउड कम्प्यूटिंग 88% 12%
इंजीनियरिंग 85% 15%
डेटा और आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस 74% 26%
प्रोडक्ट डेवलपमेंट 65% 35%
सेल्स 63% 37%
मार्केटिंग 60% 40%
कंटेंट प्रोडक्शन 43% 57%
अन्य 61% 39%
भारत में महिलाओं की स्थिति
रिपोर्ट के मुताबिक स्टडी में शामिल किए गए 153 देशों में भारत एकमात्र देश है जहां, महिलाओं की स्थिति राजनीतिक से ज्यादा आर्थिक तौर पर खराब है। भारत में 82 प्रतिशत पुरुषों के मुकाबले केवल एक चौथाई महिलाएं लेबर मार्केट में सक्रिय हैं। महिलाओं की अनुमानित आय पुरुष की कमाई का महज पांचवा हिस्सा है। स्वास्थ्य और जीवन रक्षा में भारत की रैंक 150वीं है। प्रति 100 लड़कों पर 91 लड़कियां जन्म लेती हैं। भारत में 82 प्रतिशत पुरुषों के मुकाबले केवल दो-तिहाई महिलाएं पढ़ी-लिखीं हैं। राजनीति में महिलाओं का दखल बेहद कम है। संसद में जहां महिलाओं की 14.4% हिस्सेदारी है, वहीं कैबिनेट में यह आंकड़ा 23% है।
(साभार – दैनिक भास्कर)
बच्चों की मोबाइल की लत छुड़ाएगा 11 साल की बच्ची का स्टार्टअप
सूरत : गुजरात के सूरत की 11 साल की भाविका माहेश्वरी ने हम उम्र बच्चों को मोबाइल की लत से बचाने की मुहिम शुरू की है। इसके लिए मोबाइल एडिक्शन क्लीनिक नाम से स्टार्ट-अप शुरू किया है। इस मंच से भाविकाने 24 पेज की एक ड्राइंग बुक तैयार की है। यह ड्राइंग बच्चों को समझाते हैं कि कब कितना और कैसे मोबाइल उपयोग करना उचित है। भाविका ने अपने इस स्टार्ट-अप का वाणिज्य मंत्रालय में पंजीकरण भी करवाया है। भाविका ने बताया कि मैंने 12 स्कूलों में इस बाबत सेमिनार भी किए हैं। इस दौरान मुझे महसूस हुआ कि जागरूकता के लिए सेमिनार से अलग कुछ करने की जरूरत है। ड्राइंग बुक के जरिए मेरे हिसाब से यह संदेश ज्यादा सशक्त ढंग से पहुंचाया जा सकता है। यह किताब स्कूलों को भेजने की तैयारी है।




