Saturday, October 17, 2026
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मजदूर

-सिम्पी मिश्रा

मजदूरों के देश में देखो

कैसे मजदूर ही बेबस हुए जाते हैं

दो रोटी की आस में देखो कैसे

बीच सड़क मर जाते हैं।

इनकी पीड़ाओं को क्यों कोई ताके…?

इनकी त्रासदी की झांकियों को भी

भला क्यों कोई झांके..

क्यों इनका कोई सोचे कुछ भी

इनकी समस्याएं भी कब रही नई..!

इनकी तो नियति यही है!

ठोकर- दुश्चिन्ता तो इनकी चिर संगिनी है।

खटना, थकना, हारना , गिरना..

निरंतर करते रहना मजदूरी बेहिसाब

तो आज फिर भला इनकी पीड़ा

इनकी मार्मिक करुण पुकार

क्यों बने देश के लिए कुछ खास..?

इनको भला कब, किसने

दिया यह सच्चा विश्वास कि

हां, करेंगे इस दफा इनके लिये भी कुछ खास!

मजदूर हैं ये

हां कि मजदूर हैं ये

इसलिए आज भी मजबूर हैं ये..!

ये गर पटरी पर सोते- सोते मर भी जाये

तो प्रश्न यही बस उठता है

भला मजदूरों के देश में भी  कोई मजदूर

कभी थक कर सो सकता है???

ये तो मजदूर हैं भाई!

भला कोई मजदूर कभी रो सकता है??

मजदूरों के देश में भी

कोई मजदूर भला कब रो सकता है!

सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन द्वारा वेबकाव्यपाठ का आयोजन

कोलकाता : कोलकाता की साहित्यिक और सांस्कृतिक संस्था सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन की ओर से वेबकाव्य-पाठ का आयोजन किया गया ।इस अवसर पर कई कवियों ने वर्तमान समय के संकट पर रचित कविताओं का पाठ किया ।लॉकडाउन के बीच यह आयोजन मन को मन से जोड़ने का माध्यम बना ।इस अवसर पर बेंगलुरू से प्रो इतु सिंह, उड़ीसा से मुकेश मंडल, बिहार से डॉ अवधेश सिंह के अलावा मृत्युंजय, मंजू श्रीवास्तव, डॉ अनीता राय, डॉ राजेश मिश्र, निखिता पांडेय, राजेश सिंह, रूपेश यादव, सूर्यदेव राय, विशाल साव, राहुल गौड़, मधु सिंह नागेंद्र पंडित, रेणु सिन्हा, पूजा सिंह आदि ने अपनी रचनाओं की प्रस्तुति दी ।कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए आआलोचक शंभुनाथ ने कहा कि कोरोना जैसी वैश्विक महामारी से लड़ने के लिए हमें मनुष्यता, आपसी सौहार्द ,धैर्य और सृजनात्मकता को हथियार बनाना होगा ।इस तरह के आयोजन हमें आशा और उम्मीद से भरते हैं ।इस अवसर पर प्रो शंभुनाथ ने अपनी एक कविता का पाठ भी किया ।कार्यक्रम की वेब मेजबानी संजय जायसवाल और धन्यवाद ज्ञापन विनोद यादव ने किया ।

कोरोना महामारी को रोकने में युनाइटेड नेशन कितना सफल?

 भवानीपुर कॉलेज के विद्यार्थियों द्वारा वादविवाद क्रासफायर 2020

कोलकाता : वैश्विक स्तर पर क्रियान्वयन की दृष्टि से युनाइटेड नेशन अपने उद्देश्यों में कहाँ तक सफल रहा और कहाँ तक असफल रहा – इन दोनों पक्षों पर वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन भवानीपुर एडूकेशन सोसायटी कॉलेज के विद्यार्थियों ने ऑन-लाइन किया। लॉक डाउन में घर में बैठ कर इस प्रकार की वैश्विक स्तर की बहस ने विद्यार्थियों में सृजनात्मक चिंतन को बढ़ावा दिया और सभी को युवाओं के विचारों से अवगत होने का अवसर मिला। इस वाद विवाद में हाउस में निश्चित किया गया कि युनाइटेड नेशन अपने उद्देश्यों में असफल रहा। ऑनलाइन इस कार्यक्रम में देव बनर्जी( बीबीए), अनुश्री संयाल (बीएससी अर्थ शास्त्र) , संयम झा (बीए पॉलिटिकल साइंस) , समाद्रितो पॉल,(बी.कॉम ऑनर्स) , जीताश्री पॉल( बीएससी कम्प्यूटर साइंस) , आशीष रंजन(बीएससी पूर्व छात्र) ने सक्रिय रूप से भाग लिया। वाद विवाद के दोनों पक्षों ने अपने अपने महत्वपूर्ण तथ्यों के आधार पर पक्ष और विपक्ष में अपनी बातें रखीं।
इस कार्यक्रम की मध्यस्थता की अंतर्राष्ट्रीय विषयों के विशेषज्ञ प्रणव मुखर्जी ने। जूम मोड पर हुए इस क्रॉसफायर 2020 में हुए वाद विवाद में यही निष्कर्ष निकला कि वैश्विक स्तर पर फैली महामारी कोरोना से लड़ने में युनाइटेड नेशन चार्टर अपने उद्देश्यों में असफल रहा। युनाइटेड नेशनल सिक्युरिटी कौंसिल की टेबल में किए गए अपने वीटो अधिकारों का चीन ने दुरुपयोग किया। क्रिमियाई श्रेणी में आने वाला रूस ने न्यायसंगत और धर्म युद्ध को माना। सभी विद्यार्थी प्रतिभागियों ने अपने विचारों को साझा किया। अपने वक्तव्य में मुखर्जी ने वर्तमान समय में अर्थव्यवस्था में आने वाली गिरावट और वैश्विक स्तर पर आई महामारी के कारण होने वाली समस्याओं से संबंधित महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की। और यह भी कहा कि युनाइटेड नेशन ने उन स्थानों पर हस्तक्षेप नहीं किया न ही बैठकें या अधिवेशन भी। कोविद 19 की भयावह महामारी के समय यूनाइटेड नेशन शांति देने का काम कर रहा है जो शरणार्थियों के स्वास्थ्य से संबंधित है।
विद्यार्थी दर्शकों ने भी काफी संख्या में इस बहस में शामिल होकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। कहा कि कोविद 19 को रोकने में डब्ल्यू एच ओ भी उस तत्परता से सहयोग नहीं कर सका जबकि चीन के वुहान में फैले कोरोना वायरस की खबर उसे लग चुकी थी। कार्यक्रम के अंत में परनब मुखर्जी ने अंतर्राष्ट्रीय वैश्विक संबध पर चर्चा की। इस सेमिनार में प्रथम स्थान पर अनुश्री संयाल, द्वितीय स्थान पर देव बनर्जी और तृतीय स्थान पर जीताश्री पॉल रहे। इस कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने।

गाँव का मजदूर

  • बब्बन

बचपन की किलकारी,
माता पिता के गोद में गुजारी।
पढ़ने-खेलने की उम्र मे,
उसपर आ गई भूख की जिम्मेदारी।

गाँव की पगडंडियों पर जवानी पाकर,
बूढ़े होते माँ बाप के हालात पर तरस खाकर,
चूल्हा बुझने से बचाने के लिए,
दो जून की रोटी कमाने के लिए,
एक नौजवान सारे सपने तोड़कर,
जन्म स्थान की गलियों से मुंह मोड़कर,
पढ़कर बड़ा बनने के ख्वाब को देकर कुर्बानी,
लेकर ताकतवर शरीर व चढ़ती जवानी।
जा पहुँचता है चकाचौंध शहर में,
अमृत लेबल लगी बोतल के जहर में।

वह नंगा रहकर फुटपाथ पर सोता है,
प्रतिपल अपने हसरतों का जनाजा ढ़ोता है।
हाड़तोड़ मिहनत से ऊँची बिल्डिंग बनाता है।
चौबीस ईंटें सर पर रखकर, आठवीं मंजिल पर चढ़ाता हैं।
आधी खुराक खाकर, आधी परिवार के लिए बचाता है।
वह आँसू पीता है, गम खाता है।
अपने बच्चों को सपने में बुलाता है,
उनकी किलकारी सुनता है, लोरी गाता है।

मालिक इसकी पूरी मजदूरी नहीं चुकाता है।
काम पूरा होने पर, हिसाब करना बताता है।
लेकिन जब काम पूरा हो जाता है,
तो माफिया ठेकेदार शेष मजदूरी हड़पकर,
धमकी देकर फरार हो जाता है।

फिर अपनी किस्मत को कोसकर,
सिसकारी भरकर, मन मसोसकर,
अपनी क्षुधा मिटाने को,
ढ़ूढ़ता है फिर नये ठिकाने को।

वहाँ भी ऐसे ही चलता है,
मुकद्दर का कालचक्र,
मजदूर की जवानी ढ़ल जाती है,
पेट धँस जाता है, पीठ हो जाती है वक्र।
वह फिर असाध्य रोगों का,
असमय शिकार हो जाता है।
खाली हाथ अपने गाँव लौट कर,
अपनी मिट्टी में निसार हो जाता है।

फिर अगली पीढ़ी के लिए यही
व्यवस्था जारी है।
जवानी पूँजीपतियों की गुलामी के लिए,
करती अनवरत तैयारी है।

यह उत्तर भारत के
हर गांव की कहानी है।
मायूस बचपन, असहाय बुढ़ापा,
और शोषित जवानी है।

विषय – हिन्दी, पाठ – मेरे संग की औरतें

लेखिका – मृदला गर्ग

कक्षा – 9 

पाठ्य पुस्तक – (कृतिका भाग – 1)

शिक्षिका – सीमा साव

एशियन इंटरनेशनल स्कूल

फेड कप हर्ट अवार्ड जीतने वाली पहली भारतीय बनीं सानिया

तेलंगाना को दी पुरस्कार की राशि

नयी दिल्ली :  भारत की स्टार टेनिस खिलाड़ी सानिया मिर्जा को सोमवार को फेड कप हर्ट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। वे यह अवार्ड जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी हैं। 6 बार की ग्रैंड स्लैम विजेता सानिया ने ईनाम के तौर पर मिले 2 हजार डॉलर (करीब 1.50 लाख रुपये) तेलंगाना मुख्यमंत्री राहत कोष में दान दे दिए हैं।

सानिया को इंडोनेशिया की प्रिस्का मेडेलिन नयुग्रोहो के साथ एशिया-ओसिनिया जोन से नामित किया गया था। 1 से 8 मई तक चली ऑनलाइन वोटिंग में सानिया ने बाजी मारते हुए अवार्ड जीत लिया। वोट करने के लिए सानिया ने फैन्स को धन्यवाद भी दिया।

‘यह अवार्ड मेरे लिए सम्मान की बात’
सानिया ने कहा, ‘‘फेड कप हर्ट अवार्ड जीतना मेरे लिए सम्मान की बात है। मैं यह अवार्ड देश और अपने प्रशंसकों को समर्पित करती हूं। साथ ही जिन लोगों ने मुझे वोट दिया, उनका शुक्रिया। उम्मीद है कि मैं अपने देश को भविष्य में भी गौरवान्वित करती रहूंगी। कोरोनावायरस के इस मुश्किल समय में, मुझे जो इनामी राशि मिली है मैं उसे तेलंगाना मुख्यमंत्री राहत कोष में देना चाहती हूं।’’

भारत को फेड कप के प्लेऑफ में पहुंचाया था
सानिया ने मां बनने के दो साल बाद जनवरी में कोर्ट में वापसी की थी। उन्होंने होबार्ट इंटरनेशनल टेनिस टूर्नामेंट का डबल्स खिताब जीता था। पूर्व डबल्स की नंबर-1 सानिया 2016 के बाद पहली बार इस साल के लिए फेड कप टीम में शामिल हुईं। उन्होंने अंकिता रैना से साथ मिलकर बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए भारत को फेड कप के प्लेऑफ में पहुंचाया था।

सानिया ने 6 ग्रैंडस्लैम जीते
सानिया ने पाकिस्तानी क्रिकेटर शोएब मालिक से शादी की थी। उन्होंने पिछले साल अक्टूबर में बेटे को जन्म दिया था। सानिया ने 6 ग्रैंडस्लैम जीते हैं। वे जनवरी में होने वाले साल के पहले ग्रैंडस्लैम टूर्नामेंट ऑस्ट्रेलियन ओपन में अमेरिका के राजीव राम के साथ मिक्स्ड डबल्स में खेलने वाली थीं, लेकिन चोट के कारण टूर्नामेंट से बाहर हो गईं।

अगले साल 17 फरवरी से 7 मार्च तक होगा फीफा अंडर-17 महिला वर्ल्ड कप

भारत में पहली बार होगा

नयी दिल्ली :  फुटबॉल इंटरनेशनल फेडरेशन एसोसिएशन (फीफा) ने भारत में पहली बार होने वाले अंडर-17 महिला फुटबॉल वर्ल्ड कप की नई तारीखें तय कर दी हैं। यह टूर्नामेंट अगले साल 17 फरवरी से 7 मार्च के बीच खेला जाएगा। यह इवेंट इसी साल 2 से 21 नवंबर के बीच होना था, लेकिन पिछले ही महीने कोरोनावायरस के कारण इसे अनिश्चितकाल के लिए टाल दिया था।

महिला वर्ल्ड कप में भारत समेत 16 टीमें शामिल होंगी। मेजबान होने के कारण भारतीय टीम को क्वालिफाई करने की जरूरत नहीं पड़ी। टीम को सीधी एंट्री मिली। यह टूर्नामेंट देश में 5 जगह कोलकाता, गुवाहाटी, भुवनेश्वर, अहमदाबाद और नवी मुंबई में खेला जाना है। फाइनल नवी मुंबई में खेला जाएगा।

टूर्नामेंट के किसी भी उम्र संबंधी नियम को नहीं बदला
फीफा के मुताबिक, ‘‘इस टूर्नामेंट के जो नियम और मापदंड बनाए गए थे, वे नहीं बदले गए। इसके तहत 1 जनवरी 2003 या उसके बाद और 31 दिसंबर 2005 या उससे पहले जन्मे खिलाड़ियों को टूर्नामेंट में शामिल होने की छूट दी गई है। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के कारण बनी परिस्थितियों और फीफा कॉन्फेडरेशन कोविड-19 वर्किंग ग्रुप की सिफारिशों के बाद नई तारीखों का फैसला लिया गया है।’’

नेशनल टेबल-टेनिस चैम्पियन मनमीत सिंह का निधन

18 की उम्र में वर्ल्ड नंबर-13 खिलाड़ी बने थे

मॉनट्रियाल :  टेबल-टेनिस चैम्पियन मनमीत सिंह वालिया का 58 साल की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने कनाडा के मॉनट्रियाल में अंतिम सांस ली। मनमीत 2 साल से एमियोट्रोफिक लेटरल स्क्लेरोसिस (एएलएस) बीमारी से पीड़ित थे। इस बीमारी से मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं।

मनमीत टेबल टेनिस से संन्यास लेने के बाद कनाडा में ही बस गए थे। उनके परिवार में पत्नी और दो बेटियां हैं। मनमीत ने अपना इलाज कोयंबटूर में भी करवाया था।

1989 में नेशनल चैम्पियन बने थे मनमीत
मनमीत ने 80 के दशक में बेहतरीन प्रदर्शन किया था। 1989 में वे नेशनल चैम्पियन बने। मनमीत ने तब हैदराबाद के एस श्रीराम को फाइनल में हराया था। 18 साल की उम्र में मनमीत वर्ल्ड रैकिंग में 13वें नंबर पर पहुंच गए थे।

1980 में पहली बार एशियाई चैम्पियनशिप में खेले
उन्होंने 1980 में 8 बार के राष्ट्रीय चैम्पियन कमलेश मेहता के साथ एशियाई चैम्पियनशिप में अपना पहला अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट खेला। इस टीम में उनके अलावा बी अरुण कुमार, मंजीत सिंह दुआ और वी चंद्रशेखर शामिल थे। टीम पांचवें स्थान पर रही थी।

15 साल बाद रिंग में लौटेंगे हैवीवेट बॉक्सर माइक टायसन

पैसा जुटाकर गरीबों के लिए घर बनवाएंगे

बॉक्सिंग की दुनिया में 80 के दशक में राज करने वाले हैवीवेट बॉक्सर माइक टायसन 15 साल बाद रिंग में वापसी करने वाले हैं। वे चैरिटी के लिए कुछ प्रदर्शनी मैचों में उतरेंगे। टायसन ने सोमवार को इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा, ‘मैं वापसी कर रहा हूं।’

वीडियो मे टायसन पंच मारते हुए नजर आ रहे है। उनके पावर, स्टेमिना और स्पीड को देखकर ऐसा लग रहा है कि वे आज भी डब्ल्यूबीए, डब्ल्यूबीसी और आईबीएफ का खिताब जीतने के लिए प्रैक्टिस कर रहे हैं।

2005 में टायसन ने आखिरी मैच खेला था
उन्होंने एक लाइव चैट के दौरान भी वापसी की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि वे चैरिटी के लिए पैसा जमा करना चाहते हैं। टायसन इस पैसे से बेघर लोगों की घर बनाने में सहायता करना चाहते हैं। चैरिटी मैच के लिए टायसन लगातार प्रैक्टिस कर रहे हैं। टायसन ने अपना आखिरी मुकाबला 2005 में केविन मैकब्राइड के खिलाफ खेला था। उन्हें हार के साथ अपना 20 साल का करियर समाप्त करना पड़ा था।

टायसन के नाम सबसे युवा चैम्पियन का रिकॉर्ड
टायसन 50 में से 44 मैच जीत चुके हैं। उन्हें ऑल टाइम ग्रेट बॉक्सर के नाम से भी जाना जाता है। टायसन ने 1986 में 20 साल की उम्र में ट्रेवर बेबरिक का रिकॉर्ड तोड़ दुनिया का सबसे युवा हैवीवेट चैम्पियन होने का रिकॉर्ड दर्ज कराया था। जो आज भी कायम है।