वुहान : चीन में लोगों को कोरोनावायरस के कहर की वजह से काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। बाजार, ऑफिस और ट्रांसपोर्ट बंद हैं। लोग घर में कैद हैं। यहीं से काम कर रहे हैं। ऐसा ही नजारा हुबेई प्रांत के सुदूर गांव में देखने को मिला। यहां एक महिला ने अपनी बेटी की ऑनलाइन क्लासेस के लिए घर से बाहर एंटी-कोरोनावायरस टेंट बनाया है। दरअसल, उसके घर के अंदर इंटरनेट नेटवर्क ठीक से नहीं मिलता है। इसलिए उसने घर के बाहर टेंट लगाकर अस्थाई क्लास रूम बना दिया। अब उसकी बेटी बी मेनगी रोज यहां बैठकर बिना किसी रुकावट के ऑनलाइन क्लास ज्वाइन करती है।
चीन के कई प्रांतों में स्कूल और कॉलेज की छुट्टियां घोषित कर दी हैं। स्कूल बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई करा रहे हैं, ताकि उन्हें वायरस के संक्रमण से बचाया जा सके। वायरस के कारण स्कूलों में छुटि्टयां घोषित कर दी गयी हैं। लेकिन बच्चों की पढ़ाई का नुकसान न हो, इसलिए शिक्षक ट्यूटोरियल बनाकर मोबाइल एप और लाइव स्ट्रीमिंग के जरिए कक्षाएं ले रहे हैं।
कोरोनावायरस से बचने के लिए लोग कुछ अलग तरीके भी अपना रहे हैं। सिचुआं प्रांत के शहर लुजोहू में एक महिला इस वायरस से बचने के लिए एक बड़ा सा जिराफ कॉस्ट्यूम पहनकर घूम रही है। पिछले दिनों एक हॉस्पिटल में यह महिला जिराफ कॉस्ट्यूम पहनकर पहुँची, जहाँ किसी ने इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाल दिया। महिला की पहचान सिर्फ नाम से हुई है। उसने बताया कि मैं अपने पिता से मिलने अस्पताल पहुँची थी। उसने कहा कि लोग मेरे बारे में क्या सोचते हैं। इससे फर्क नहीं पड़ता है।
मरने वालों की तादाद 2236 पहुँची
समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक, चीन में गुरुवार को कोरोनावायरस के 411 नए मामले सामने आए। वहीं, मरने वालों की तादाद 2236 हो गई है। अभी तक 75400 से ज्यादा मामलों की पुष्टि हुई है।
महिला ने एंटी-कोरोनावायरस टेंट बनाया ताकि बेटी घर के बाहर ऑनलाइन पढ़ाई कर सके
महिलाओं के लिए वॉशरूम-ऑन-व्हील्स शुरू, महिलाएँ करती हैं देखरेख
स्तनपान के अलावा डायपर, नैपकिन खरीदने की भी सुविधा
पुणे : पुणे में वॉशरूम-ऑन-व्हील्स’ सुविधा इन दिनों चर्चा में। कोई भी महिला पांच रुपये के शुल्क में वॉशरूम और स्तनपान के लिए इसका इस्तेमाल कर सकती है। इसके अलावा, यहां से कोई भी महिला सैनेटरी नेपकिन और डायपर खरीद सकती है।
उद्यमी उल्का सादलकर और राजीव खेर ने इसे शुरू किया है। 12 बसों को शौचालय में बदला गया है। इनका दावा है कि हर रोज औसतन 200 से ज्यादा महिलाएं इनका इस्तेमाल करती हैं। बिजली के लिए इन बसों की छत पर सोलर पैनल भी लगाए गए हैं।
देश के अलग-अलग शहरों में 1000 से ज्यादा शौचालय बनाएंगे
सादलकर ने बताया हमें लगता है कि महिलाओं को स्वच्छ और सुरक्षित शौचालय मिलना चाहिए और यह उनका मूलभूत अधिकार है। इसलिए हमारी कोशिश है कि अगले पांच साल में हम देश के अलग-अलग शहरों में 1000 से ज्यादा ऐसे शौचालय बनाएं। इनका कहना है कि महिलाओं ने भी इस काम की सराहना की है।
शौचालय का इस्तेमाल करने वाली 18 साल की सुवर्णा डोंगरे कहती हैं कि ऐसी सेवा सभी जगह होनी चाहिए। ये शौचालय बहुत ही आरामदायक और सुरक्षित हैं। इन शौचालयों में काम करने वाली 40 साल की मनीषा अधव कहती हैं कि महिलाओं के लिए काम करने के लिए मुझे अच्छा लगता है। वह बताती हैं कि आसपास सार्वजनिक शौचालय नहीं होने की वजह से यहाँ महिलाएं दूर-दूर से आती हैं।
रखरखाव नहीं होता सार्वजनिक शौचालयों का
केंद्र सरकार के स्वच्छ भारत अभियान के तहत देश भर में लाखों शौचालय बनाए गए हैं। लेकिन पानी और बिजली की कमी की वजह से ये इस्तेमाल नहीं होती हैं। राज्य सरकारें भी इनका रखरखाव नहीं कर पाती हैं।
प्रज्ञान ओझा ने लिया संन्यास , सचिन तेंदुलकर के आखिरी टेस्ट में 10 विकेट लिए थे
नयी दिल्ली : टीम इंडिया के पूर्व बाएं हाथ के स्पिनर प्रज्ञान ओझा ने क्रिकेट से संन्यास ले लिया। ओझा ने गत शुक्रवार को ट्विटर पर इसका ऐलान किया। 2013 में वेस्ट इंडीज के खिलाफ मुंबई में ओझा ने आखिरी टेस्ट खेला था। यह सचिन तेंदुलकर का भी आखिरी टेस्ट मैच था। इस मैच में ओझा ने दोनों पारियों में पांच-पांच विकेट लिए थे। 33 साल के ओझा फिलहाल कमेंट्री और क्रिकेट से जुड़ी गतिविधियों में व्यस्त हैं।
प्रज्ञान ने 2009 में टेस्ट डेब्यू किया। कुल 24 टेस्ट, 18 वनडे और 6 टी-20 खेले। उन्हें भारत के सबसे बेहतरीन बाएं हाथ के स्पिनर्स में से एक माना जाता है।
हरभजन की कमी पूरी की
ओझा 2009 में उस वक्त टीम इंडिया का हिस्सा बने जब हरभजन सिंह धार खो रहे थे। ओझा ने रविचंद्रन अश्विन के साथ टीम इंडिया के स्पिन अटैक को नई दिशा दी। 2012 में भारत इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज 2-1 से हारा था। उस सीरीज में भी ओझा ने 20 विकेट लिए थे। हालांकि, इसके अगले साल यानी 2013 में रविंद्र जडेजा ऑलराउंडर के तौर पर टीम इंडिया में आए और ओझा बाहर हो गए। इसके बाद वो कभी टेस्ट टीम का हिस्सा नहीं बने।
कॅरियर रिकॉर्ड
ओझा ने 24 टेस्ट में 113, 18 वनडे में 21 और 6 टी-20 में 10 विकेट लिए। प्रथम श्रेणी क्रिकेट में उनके नाम कुल 424 विकेट दर्ज हैं। इसके लिए उन्होंने 108 मैच खेले। 2018 में उन्होंने अपना अंतिम फर्स्ट क्लास मैच बिहार के लिए उत्तराखंड के खिलाफ खेला। आईपीएल में वो डेक्कन चार्जर्स और मुंबई इंडियंस के लिए खेले। हालांकि, 2015 से वो आईपीएल की किसी टीम का हिस्सा नहीं हैं। आईपीएल में उन्होंने कुल 92 मैच खेले और 89 विकेट हासिल किए।
सचिन और अपने आखिरी टेस्ट को यादगार बनाया
यह संयोग ही है कि प्रज्ञान और सचिन तेंदुलकर ने एक साथ अंतिम टेस्ट खेला। सचिन तो पहले ही संन्यास का ऐलान कर चुके थे। लेकिन, ओझा इसके बाद कभी टीम इंडिया के लिए टेस्ट नहीं खेला। 2013 में वेस्टइंडीज के खिलाफ वानखेड़े स्टेडियम में खेले गए इस मैच में प्रज्ञान ‘मैन ऑफ द मैच’ रहे थे। उन्होंने दोनों पारियों मे 5-5 विकेट लिए थे।
35 बेडरूम वाला बर्फ का होटल शुरू, यहाँ पर्यटक माइनस 5 डिग्री में रहेंगे
आइस होटल में एक रात रुकने का किराया 17 हजार से 1 लाख रुपये के बीच है
पांच महीने बाद होटल नदी में बदल जाएगा, 31 साल से बनाया जा रहा है
स्टाकहोम : स्वीडन का चर्चित आइस होटल एक बार फिर पर्यटकों के लिए बनकर तैयार हो गया है। हर साल इसे सर्दियों में बनाया जाता है। 5 महीने बाद यह पिघल जाता है। 1989 में से यह परंपरा चली आ रही है। यह होटल का 31वां साल है। यह आर्कटिक सर्कल से करीब 200 किमी दूर टॉर्न नदी के तट पर बना है। इसे बनाने के लिए टॉर्न नदी से 2500 टन बर्फ जमा की जाती है। अक्टूबर से इसका निर्माण शुरू हो जाता है। इसे बनाने के लिए दुनियाभर से कलाकार आते हैं।
इस बार यहाँ पर 35 बेडरूम यानी शयन कक्ष बनाए गए हैं। इन्हें बर्फ के नक्काशीदार पर्दे और हिरन की प्रतिकृतियों से सजाया गया है। साथ ही एक सभागार भी है। यहाँ बर्फ से बनी 6 बेंच रखी गयी हैं। रूम के अंदर तापमान माइनस 5 डिग्री के आसपास रहता है। हर साल 50 हजार से ज्यादा पर्यटक इस होटल में रुकने के लिए आते हैं। मई तक बर्फ पिघलना शुरू हो जाती है। इसके बाद होटल बंद कर दिया जाता है।
पूरी तरह इको फ्रेंडली होटल
यह होटल पर्यावरण अनुकूल है। यहां पर रखे गए सभी उपकरण सौर ऊर्जा से चलते हैं। इस होटल में आइस बार भी है। यहां पर गिलास भी बर्फ से ही बनाए गए हैं। इसके अलावा फीचर लाइटिंग की व्यवस्था है। इससे लुक बदलता रहता है। साउंड इफेक्ट से जंगल जैसा अहसास होता है।
होटल के बाहर का नजारा भी खूबसूरत होता है। इंटीरियर दुनिया के चर्चित पर्यटन स्थलों से प्रेरित रहता है। होटल के अंदर आइस सेरेमनी हॉल और बच्चों के लिए क्रिएटिव जोन भी बनाया गया है।
वैज्ञानिकों ने घोंघे की एक नई प्रजाति खोजी, नाम दिया ग्रेटा थनबर्ग
बंदर सेरी बेगावन : ब्रुनेई में वैज्ञानिकों ने घोंघे की एक नई प्रजाति की खोज की है। तापमान के प्रति संवेदनशील इस प्रजाति का नाम पर्यावरण एक्टिविस्ट ग्रेटा थनबर्ग के नाम पर क्रास्पेडोट्रोपिस ग्रेटाथनबर्ग रखा गया है। ग्रेटा जलवायु परिवर्तन को लेकर दुनियाभर में जागरुकता फैलाने का काम कर रही हैं। यह सम्मान इन्हीं प्रयासों को देखते दिया गया है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि ग्रेटा थनबर्ग के नाम पर इसका नामकरण करने के पीछे हमारा उद्देश्य यह बताना है कि थनबर्ग की पीढ़ी को उन समस्याओं का समाधान भी ढूंढना होगा, जिन्हें उन्होंने पैदा नहीं किया। यह घेंघा दो मिमी लंबा और एक मिमी चौड़ा है।
शोध 10 दिन चला
बायोडायवर्सिटी डाटा जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में बताया गया है कि घोंघों की यह प्रजाति केनोगैस्ट्रोपॉड्स समूह से संबंधित है। जमीन पर रहने वाली इस प्रजाति पर सूखा, तापमान में अत्यधिक उतार-चढ़ाव और जंगलों की कटाई का असर होता है। नीदरलैंड्स के नैचुरलिस बायोडायवर्सिटी सेंटर के मेनो शिल्थुईजेन सहित अन्य वैज्ञानिकों ने बताया कि नई प्रजाति के घोंघे ब्रूनेई के कुआला बेलालॉन्ग फील्ड स्टबडीज सेंटर के करीब पाए गए।
वैज्ञानिकों ने बताया कि नई प्रजाति की खोज के लिए सारा काम ऐसी जगह पर किया गया, जहां केवल बुनियादी सुविधाएं ही मौजूद थीं। इंटरनेट तक उपलब्ध नहीं था। यह शोध 10 दिन तक चला।
इंडियन बैंक के एटीएम से 1 मार्च से नहीं मिलेंगे 2000 के नोट
नयी दिल्ली : इंडियन बैंक के एटीएम से एक मार्च से 2000 रु. के नोट नहीं मिलेंगे। इंडियन बैंक के मुताबिक उसके एटीएम में 2000 के नोट रखने वाले कैसेट्स को डिसएबल कर दिया जाएगा। बैंक ने कहा कि ग्राहकों को 2000 रु. के नोट रिटेल आउटलेट्स व अन्य जगहों पर बदलने यानी एक्सचेंज कराने में परेशानी होती है। बैंक के अनुसार जिन ग्राहकों को 2000 रुपये का नोट चाहिए, वे शाखाओं में जाकर इनकी निकासी कर सकते हैं। बैंक अब 2000 के नोट के बदले एटीएम में 200 के नोट डालेगा। इलाहाबाद बैंक के एटीएम के बारे में पूछे जाने पर अधिकारी ने कहा कि विलय के बाद उनके एटीएम के बारे में फैसला किया जाएगा।
अन्य बैंकों के एटीएम में मिलते रहेंगे 2,000 के नोट
अन्य बैंकों के एटीएम में 2,000 के नोट मिलते रहेंगे। फाइनेंशियल सॉफ्टवेयर एंड सिस्टम्स के प्रेसिडेंट वी बालासुब्रमण्यन ने कहा कि हमारे ग्राहक निजी बैंकों की ओर से 2,000 के नोट की लोडिंग बंद करने का कोई निर्देश नहीं है। कंपनी देश में कई बैंकों के एटीएम नेटवर्क को प्रबंधित करती है।
इस वित्त वर्ष नहीं छपा 2000 रु. का एक भी नोट
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने 2,000 रुपये के नोटों की छपाई बंद कर दी है। रिजर्व बैंक ने एक आरटीआई के जवाब में खुलासा किया है। आरबीआई ने इस वित्त वर्ष (2019-20) में एक भी 2,000 रुपये का नोट नहीं छापा है। बता दें कि नवंबर 2016 में नोट बंदी के बाद 2000 रुपये के नोट चलन में आए थे। आरबीआई ने आरटीआई का जवाब देते हुए कहा कि 2016-17 के वित्त वर्ष के दौरान 2,000 रुपए के 3,542.991 मिलियन नोट छापे गए थे। अगले साल यह 111.507 मिलियन नोट तक कम हो गया। 2018-19 में बैंक ने 46.690 मिलियन नोट छापे।
वित्तीय सुरक्षा / किराए पर दे रहे हैं प्रॉपर्टी तो करा लें लैंडलॉर्ड इंश्योरेंस
इसमें किराएदार द्वारा किए नुकसान भी होते हैं कवर
अगर आपने अपनी प्रॉपर्टी यानि कि मकान या दुकान किराए पर दे रखी है तो आपको लैंडलॉर्ड इंश्योरेंस पॉलिसी देनी चाहिए। यह एक खास तरह की होम इंश्योरेंस पॉलिसी है, जो अपना मकान किराए पर देने वालों के वित्तीय घाटे को कवर करती है। इस पॉलिसी में आगजनी, चोरी और जानबूझ कर पहुंचाए गए नुकसान शामिल हैं। हम आपको इस पॉलिसी के बारे में बता रहे हैं। लैंडलॉर्ड इंश्योरेंस पॉलिसी से जुड़ी खास बातें…
क्या है लैंडलॉर्ड इंश्योरेंस पॉलिसी?
कई बार हम अपनी प्रॉपर्टी का आय के लिए किराए पर दे देते हैं जो कई बार आपके लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। ऐसी स्थिति से बचाने का काम लैंडलॉर्ड इंश्योरेंस पॉलिसी करती है। इसमें बिल्डिंग के स्ट्रक्चर के क्षतिग्रस्त होने, घर में आग, चोरी, तूफान, तोड़फोड़ या किराएदार द्वारा किए गए नुकसान को शामिल किया जाता है। यदि पूरी तरह नुकसान हो जाता है तो आपकी लैंडलॉर्ड इंश्योरेंस पॉलिसी आपकी पूरी प्रॉपर्टी के रिप्लेसमेंट कॉस्ट को कवर करती है।
लॉस ऑफ इनकम कवर: यदि आपकी रेंटल यानि किराये की प्रॉपर्टी आग या तूफान की वजह से रहने लायक नहीं रह गई है तो लैंडलॉर्ड इंश्योरेंस में लॉस ऑफ इनकम भी कवर है। यानी कि आपको बीमा कंपनी किराए के बराबर बीमा कवर का भुगतान करेगी।
लायबिलिटी इंश्योरेंस: अगर किराए पर दिए गए मकान में किसी तरह की दुर्घटना होने पर तीसरे व्यक्ति (किराएदार या अन्य) को नुकसान पहुंचाता है। उससे जुड़े खर्च, मुकदमा आदि का कवर भी इस पॉलिसी के तहत उपलब्ध है। इसे लायबिलिटी इंश्योरेंस कवर का जाता है। यदि आप मकान मालिक के रूप में किराएदार या अन्य के नुकसान के लिए ज़िम्मेदार पाए जाते हैं, तो लैंडलॉर्ड बीमा पॉलिसी आपको कवर करेगी। उदाहरण के लिए, यदि आप अपने मकान में एक पाइप ठीक करा रहे हैं और यह किराएदार के मूल्यवान दस्तावेजों को नष्ट कर देता है, तो किरायेदार आपके खिलाफ मुकद्मा दायर कर सकता है। ऐसे मामलों में, लैंडलॉर्ड इंश्योरेंस आपके खर्च को कवर करेगा।
एड-ऑन कवरेज: लैंडलॉर्ड इंश्योरेंस लेते वक्त आप कुछ अतिरिक्त कवरेज को शामिल कर सहे हैं। जैसे कि नेचुरल डिजास्टर इंश्योरेंस, इम्प्लॉयर लॉयबिलिटी इंश्योरेंस, रेंट गारंटी और लैंड कंटेंट इंश्योरेंस को शामिल कर हैं। यह ऐड-ऑन कवर आपकी जरूरत के मुताबई कई अन्य सुधिाएं भी उपलब्ध कराती है।
लैंडलॉर्ड इंश्योरेंस के फायदे – प्राकृतिक आपदाओं, दुर्घटनाओं और अन्य लॉयबिलिटी आदि से होने वाले वित्तीय नुकसान के खिलाफ आपको वित्तीय सुरक्षा देती है। यह किराए के नुकसान के लिए क्षतिपूर्ति करती है।
आपकी प्रॉपर्टी की मरम्मत और रिप्लेसमेंट भी कवर किया जाता है। आपका किराएदार आपकी संपत्ति को नुकसान पहुंचाता है, तो आप लैंडलॉर्ड इंश्योरेंस का दावा कर सकते हैं।
किस आधार पर तय होता है प्रीमियम
प्रीमियम प्रॉपर्टी के आकार, प्रॉपर्टी की उम्र, प्रॉपर्टी की भौगोलिक स्थित और आपने सेफ्टी अरेजमेंट पर निर्भर करता है। अगर आप लैंडलॉर्ड इंश्योरेंस लेना चाहते हैं तो ज्यादातर बीमा कंपनियां यह पॉलिसी देती हैं।
(साभार – दैनिक भास्कर)
कबीर, गोरख, रैदास को सुरों के जरिये लोकप्रिय बनाते युवा
वाराणसी : इतिहास और साहित्य को आम जनता तक पहुँचाने का रास्ता कला से होकर गुजरता है। जब ये काम युवा करें तो उम्मीद और बढ़ जाती है। संगीत के माध्यम से यही काम कुछ युवा कर रहे हैं और अपना बैंड बनाकर वे कबीर, गोरख औऱ रैदास जैसे कवियों को लोकप्रिय बनाने में जुटे हैं। मशहूर नृत्यांगना वाराणसी की प्रशस्ति तिवारी से जानिए उनके इस सुरीले सफर के बारे में –
शुरुआत – शुरुआत पिछले साल हुई, बैण्ड के दो शुरुआती सदस्य कबीर के भोजपुरी गीतों पर काम कर रहे थे, उसी समय बुद्ध से कबीर तक संस्था के एक कार्यक्रम में कबीर संगीत गाने को मंच मिला, तबसे लगातार यह बैण्ड पूरे तरीके से इस कबीर, गोरख, रैदास के गीत व सूफी गीतों को गा रहा है।
बैण्ड में मुख्य रूप से चार सदस्य हैं- ऋषभ पाण्डेयऔर आदर्श आदी, (मुख्य गायक), जगदम्बा राज जायसवाल (गिटारिस्ट) और आदित्य राजन (कीबोर्ड)।
मुश्किलें- अपने उद्देश्य में किसी तरह की मुश्किलें नहीं हैं, जो भी थोड़ी मुश्किलें हैं वो व्यक्तिगत रूप से हैं, बैण्ड का हर सदस्य या तो अध्ययनरत है या अपने किसी व्यवसाय में है, ऐसे में अभ्यास के लिए पर्याप्त समय दे पाने में थोड़ी कठिनाई होती है।
उपलब्धि– सबसे बड़ी उपलब्धि दर्शकों और श्रोताओं की स्वीकार्यता है, युवा जहाँ भी अपनी प्रस्तुतियां देते हैं वहां उपस्थित सारे लोग आनन्द लेकर उनके गीतों को सुनते हैं, और ज्यादातर कबीर, गोरख के विचारों और सूफ़ियत को समझ पाते हैं, तो मनोरंजन के साथ हमारा उद्देश्य भी उन तक आसानी से पहुँच जाता है।
लक्ष्य- बुद्ध से कबीर तक बैण्ड का लक्ष्य समाज में संगीत के माध्यम से सामाजिक सौहार्द और प्रेम की भावना का प्रसार करना है, हमारे गीतों में शांति, एकता और मोहब्बत का भाव निहित होता है, ऐसे में उन भावों को गीत संगीत के रूप में किसी के सामने रखने पर वे आसानी से स्वीकृत हो जाते हैं, और यही इस बैण्ड का प्राथमिक लक्ष्य है।
बुद्ध से कबीर तक…यात्रा व संगोष्ठी का आयोजन
वाराणसी से प्रशस्ति तिवारी की रपट
वाराणसी : बुद्ध और कबीर पूर्वांचल के ऐसे प्रतीक रहे हैं जिन्होंने पूरी दुनियां में शांति, प्रेम, सद्भाव और भाईचारे की बातें सिखाई। उसी पूर्वांचल की धरती से साझी संस्कृति और सामाजिक सौहार्द की एक यात्रा पिछले तीन सालों से देश के अलग अलग भागों में होती आ रही है। बुद्ध से कबीर तक ट्रस्ट देश की महान विरासत को संजोकर उन्हें लोगों के बीच पहुँचाने का कार्य कर रहा है। ट्रस्ट की इस साल की पहली यात्रा उत्तर प्रदेश के गोरखपुर क्षेत्र में आयोजित की गई। जिसमें पाँच दिनों तक यह यात्रा, गोरखपुर, कुशीनगर संत कबीर नगर और मगहर में निकाली गयी, जिसमें मुख्य रूप से तमाम शिक्षण संस्थानों व विभिन्न संस्थाओं ने बढ़-चढ़ कर भाग लिया। ट्रस्ट के संरक्षक डॉ विनोद मल्ल, एडीजीपी गुजरात ने इस यात्रा के उद्देश्य को बताते हुए बुद्ध, कबीर और देश के अन्य विचारकों के मार्फ़त वर्तमान परिस्थिति में देश में एकता, प्रेम, शांति और सहिष्णुता को बनाए रखने की बातें लोगों तक पंहुचाई। संस्था और यात्रा के संयोजक शैलेन्द्र कबीर ने बताया कि आज के समय में लोगों के बीच वैमनष्य और द्वेष का अंकुरण तेजी से होता जा रहा है, ऐसे में हमारा कर्तव्य बनता है कि उन्हें अपने देश के गौरवशाली इतिहास से परिचित कराकर बुद्ध, कबीर, विवेकानंद और गांधी जैसे महापुरुषों के विचारों का खासकर युवाओं में प्रत्यारोपण किया जाय और यही कार्य बुद्ध से कबीर तक संस्था अपने यात्राओं और कार्यक्रमों के माध्यम से कर रही है। ट्रस्टी देवयानी इस यात्रा के समापन कार्यक्रम के बारे में बताया कि पाँच दिनों तक चलने वाली इस यात्रा का भव्य समापन समारोह गत 22 फरवरी को दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के दीक्षा भवन में किया गया जहां पर “संत आंदोलन की सामाजिक प्रासंगिकता: बुद्ध कबीर और नाथ सम्प्रदाय का योगदान” विषय पर एक सेमिनार हुआ जिसके मुख्य वक्ता रचनाकार और लोककर्मी सुभाष चंद्र कुशवाहा थे। इस दौरान बनारस से आईं प्रसिद्ध कत्थक नृत्यांगना प्रशस्ति तिवारी के कबीर पर आधारित नृत्य प्रस्तुति ‘बंदगी’ ने उपस्थित दर्शकों को भावविभोर कर दिया। बुद्ध से कबीर तक बैण्ड के कबीर, गोरख के गीत और सूफी गायन ने लोगों का मन मोह लिया। वर्ष भर चलने वाली बुद्ध से कबीर तक ट्रस्ट के कार्यक्रमों और यात्राओं का सिलसिला ऐसे ही जारी रहेगा।
पिंकाथॉन में 5 अप्रैल को मिलिन्द सोमेन के साथ दौड़ेगा कोलकाता
भारत की सबसे बड़ी महिला दौड़ में अलग अलग वर्ग में भाग लेंगी 5000 से अधिक महिलाएं
कोलकाता : महिलाओं में स्वास्थ्य और स्तन कैंसर के प्रति जागरुकता लाने के उद्देश्य से आयोजित होने वाले पिंकथॉन का चौथा संस्करण कोलकाता में होगा। 5 अप्रैल को रेंजर क्लब में आयोजित होने वाली इस महिला दौड़ को लेकर पिंकथॉन के संस्थापक व सुपर मॉडल सह अभिनेता मिलिन्द सोमेन महानगर पहुँचे। कलर्स द्वारा प्रायोजित चौथे बजाज इलेक्ट्रिकल्स पिंकाथॉन के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया आरम्भ हो चुकी है। कलर्स पिंकाथॉन के चार शुंभकर – वोलिनी 10 किलोमीटर के लिए एसिड सर्वाइवर रिंकू दास, 21 किलोमीटर दौड़ के लिए बेबी वेअरिंग मदर हर्षा बंथिया, वीवॉशप्लस 3 किलोमीटर दौड़ के लिए ७७ वर्षीय महिला लिली खान, और 5 किलोमीटर के दौड़ के लिए मंद-दृष्टि पीडिता दीपाली सिंह तथा कैंसर सर्वाइवर सोनिया महाजन ने अपने अनुभव साझा किये। पिंकथॉन कोलकाता के संस्थापक, पिंकथॉन कोलकाता के संस्थापक मिलिंद सोमन ने कहा, “जब मैंने 2011 में महिलाओं के लिए एक रनिंग इवेंट बनाने की सोची, तो यह केवल इसलिए हुआ क्योंकि एक धावक के तौर पर को मैंने बहुत कम महिलाओं के लिए खास इवेंट्स होते हुए देखा और सोचा की अगर विशेष रूप से उनके लिए एक रन रहा होता तो यह अलग होता। 54 वें पिंकथॉन के साथ, जो अब भारत की सबसे बड़ी महिला दौड़ है। सोमन ने आगे कहा कि “अधिक घटनाओं और अनुभवों को प्रेरित करने और संलग्न करने के लिए जोड़ा गया है, जैसे पिंकथॉन के 100 दिन और पिंकथॉन 100k रन, भारत की सबसे बड़ी महिला अल्ट्रा मैराथन। इस वर्ष दुनिया भर के कई देशों में 176 स्थानों और 25,000 लोगों ने भाग लिया, इस वर्ष दूसरी बार पिंकथॉन दिवस मनाया गया। ‘द स्पिरिट ऑफ़ पिन्काथन’ , जो शहरों के बीच 150 किमी की दौड़ है, सिर्फ आत्म-विश्वास के बारे में है, और पिंकथॉन में कुछ वर्षों के बाद, सैकड़ों महिलाओं ने इसके लिए प्रशिक्षण लेना शुरू कर दिया है।
आप भी सुनिए क्या कहती हैं ये जुझारू महिलाएँ
मुख्य दिन के आधार के तौर पर टीम कई अद्वितीय आयोजन भी आयोजित कर रही है जैसे कि कैंसर सरवाइवर्स के लिए कैंसर शेरो ट्रेक, ५ किलोमीटर की रीक्लेम द नाईट रन, बेबी वेअरिंग वाक् और श्रवण बाधित लड़कियों के लिए जुम्बा । ये आयोजन इन प्रेरक लोगों के सम्मान के लिए समर्पित है। प्रत्येक प्रतिभागी महिला हेल्थकेयर सहभागी अपोलो फाउंडेशन से एक स्वास्थ्य परीक्षण का चयन कर सकती हैं या अगर प्रतिभागी महिला की उम्र 45 वर्ष से अधिक है तो वे एक मेमोग्राम भी निशुल्क करवा सकती हैं। पिछले आठ वर्षों में सभी शहरों को मिलाकर लगभग २७५,००० महिलायें इस दौड़ में भाग ले चुकीं हैं। इस अवसर पर अपोलो ग्लेनैगल्स हॉस्पिटल के डॉ. तनवीर शाहिद भी मौजूद थे। बजाज इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अनुज पोद्दार ने कहा कि पिंकाथॉन एक उत्कृष्ट मंच है।’’अलग अलग वर्ग के लिए आयोजित इस दौड़ के लिए ऑनलाइन पंजीकरण, www.pinkathon.in/kolkata पर शुरू हो चुका है और इसमें वीवॉशप्लस 3 किलोमीटर, 5 किलोमीटर, वोलिनी 10 किलोमीटर और 21 किलोमीटर दौड़ में हिस्सा लेने के लिए अपना नाम दर्ज करवाया जा सकता है। इस संबंध में [email protected]. पर ईमेल भी किया जा सकता है।




