Thursday, June 25, 2026
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जीत का पर्व है फाल्गुन एकादशी, वहीं प्रेम और आनंद का त्योहार है होली

होली फाल्गुन महीने का आखिरी दिन होता है। फाल्गुन महीने का सिर्फ धार्मिक महत्व ही नहीं है इसका मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक महत्व भी है। यह महीना हमें सीखाता है कि हमेशा सकारात्मक सोचें चाहे परिस्थितियां कैसी भी हो। इस मास के व्रत, त्योहारों में भी यही भाव छिपा है। इस महीने में आने वाले तीज-त्योहार सकारात्मक ऊर्जाओं और खुशियों से भरे होते हैं।
इस महीने से जुड़ी कुछ रोचक बातें
ऐसी मान्यता है कि इस माह की विजया एकादशी का महत्व भगवान राम से जुड़ा है। सीता हरण के बाद लंका पर विजय प्राप्त करने के लिए जाते समय जब समुद्र बाधा बना। तब श्रीराम ने विजया एकादशी का व्रत कर सागर पार करने में सफलता पाई और युद्ध में विजयी हुए। इसलिए इस दिन भगवान वासुदेव की पूजा की जाती है।
इस माह की अंतिम तिथि को मनाए जाने वाला होली उत्सव का अत्यंत धार्मिक, सामाजिक, आध्यात्मिक महत्व है। यह आनंद, प्रेम, सद्भावना का पर्व है। यह भावनाओं के स्तर पर एक दूसरे के रंग में रंग जाने का अवसर है।
लिंगपुराण में होलीका उत्सव को फल्गुनिका के नाम से जाना जाता है। जिसे बालकों की क्रीड़ाओं से पूर्ण और सुख समृद्धि देने वाला बताया गया है।
इसी प्रकार वराहपुराण में भी इस उत्सव को पटवास विलासीनी अर्थात् चूर्णयुक्त खेल और लोक कल्याण करने वाली बताया गया है।
फाल्गुन माह और इसके पर्व, उत्सव का सामूहिक संदेश यही है कि जीवन में कर्मठता और सही दिशा को चुनें। हम आशा और आकांक्षा पैदा करें। हमारे अंदर आगे बढऩे और ऊपर उठने की जो भावना है, उसे मरने न दें क्योंकि जो कर्म करता है भगवान उसी का साथ देते हैं।

(साभार – दैनिक भास्कर)

केरल / डिजिटल बुक और ई-लैंग्वेज लैब से अंग्रेजी  सीखेंगे विद्यार्थी

ऑडियो-वीडियो प्रारूप में होगी पाठ्यपुस्तक
बच्चों की इंग्लिश लर्निंग को और मजबूत करने के मकसद से केरल इंफ्रास्ट्रचर एंड टेक्नोलॉजी ऑफ एजुकेशन (केआईटीई) ने स्कूलों में हाई टेक लैब की शुरुआत की है। इंग्लिश सुधारने के लिए शुरू हुई इस मुहिम को ई3 (इंजॉय, एनहांस और एनरिच) नाम दिया गया है। इस बारे में बताते हुए राज्य के शिक्षा मंत्री सी.रवींद्रनाथ ने बताया कि इसके लिए सभी शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जायेगा।  इसके बाद इस सत्र ,से ही नयी प्रणाली को शुरू कर दिया जाएगा।
वहीं केआईटीई के सीईओ के अनवर सदत ने कहा कि इस परियोजना का मकसद विद्यार्थियों में अंग्रेजी भाषा की समझ को और विकसित करना हैं। इसके लिए केरल के स्कूलों में तकनीक का इस्तेमाल कर इसे मजेदार बनाने की कोशिश की जा रही है। इस प्रोजेक्ट के तहत बच्चों को समग्र ई-लाइब्रेरी और डिजिटल बुक जैसी सुविधाएं भी मिलेंगी। यह बुक ऑडियो और वीडियो दोनों प्रारूप के उपलब्ध रहेगी। इसके अलावा समग्र ई-लाइब्रेरी में करीब 200 डिजिटल मल्टीकलर स्टोरी बुक भी अपलोड की जा चुकी हैं।
साथ ही इसमें एक ई-लैंग्वेज लैब भी होगा जिसमें मौजूद लैंग्वेज लैब सॉफ्टवेयर बच्चों को इंग्लिश की ग्रामर,वोकेबुलरी,राइटिंग,स्पीकिंग,लिसनिंग, रीडिंग आदि विकसित करने का मौका देगी। इस प्रोजेक्ट के तहत बच्चों के लिए मल्टीमीडिया प्रोग्राम भी उपलब्ध होगा, जिसमें ब्रॉडकास्ट लेसन के जरिए वह बातचीत और कोर्स में प्रयुक्त अंग्रेजी के बारे में इंटरेक्टिव मोड में सीख सकेंगे। केआईटीई और एससीईआरटी मिलकर स्कूलों में शुरू किए जाने वाले इस प्रोजेक्ट की निगरानी भी करेंगे।

अंग्रेजी बोलती बुजुर्ग महिला का वीडियो वायरल 

नयी दिल्ली :  सोशल मीडिया पर सफेद शर्ट और लाल साड़ी पहने एक बुजुर्ग महिला का अंग्रेजी में महात्मा गांधी के बारे में बोलते हुए वीडिया वायरल हो रहा है। उनका नाम भागवनी देवी है। वीडियो में वह कह रही हैं, ‘‘महात्मा गांधी दुनिया में महातम इंसान थे। वह बहुत साधारण आदमी थे…साधारण खाना खाते थे। बकरी का दूध पीते थे। वह हिंदू और मुसलमान दोनों से प्यार करते थे और राष्ट्र के पिता हैं। उनकी समाधि राजघाट में है।’ वायरल वीडियो को आईपीएस अधिकारी अरुण बोथरा ने रविवार को शेयर किया। उन्होंने लिखा, ‘देखना दिलचस्प होगा कि शशि थरूर इन्हें 10 में कितने अंक देते हैं।’ बता दें, कॉग्रेस नेता शशि थरूर अपनी अंग्रेजी के लिए भारत में खासे चर्चित हैं। एक यूजर ने लिखा- आखिर में शशि थरूर के लिए प्रतियोगिता और कठिन होने वाली है।
वीडियो को 2.8 लाख लोग देख चुके
यह क्लिप तेजी से वायरल हो रही है। लोगों इस वीडियो को खूब लाइक कर रहे है। अब तक 2.8 लाख लोग देख चुके हैं। वीडियो को 15 हजार से ज्यादा लाइक्स और 3 हजार से ज्यादा रि-ट्वीट्स बार रि-ट्वीट किया गया हैं।

नवरात्र से नयी जगह पर होंगे रामलला के दर्शन, तैयार होगा राम मंदिर का ब्लूप्रिंट

अयोध्या : वासंतिक नवरात्र से रामलला के दर्शन नए स्थान पर होंगे। रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के निर्माण एव प्रशासनिक इकाई समिति के चेयरमैन नृपेन्द्र मिश्र ने रामलला के स्थान परिवर्तन को हरी झंडी दे दी है। इस नए स्थान पर रामलला की सुरक्षा व्यवस्था का नया ढांचा तैयार किया जा रहा है। वहीं, श्री राम जन्मभूमि परिसर में राम मंदिर निर्माण के लिए रामनवमी से पहले ब्लू प्रिंट तैयार किया जाएगा। इसके लिए तकनीकी विशेषज्ञों ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से 25 मार्च तक का समय मांगा है। तकनीकी विशेषज्ञों की ओर से 70 एकड़ के राम जन्मभूमि परिसर के लिए मास्टर प्लान भी तैयार किया जाएगा।
नृपेन्द्र मिश्र गत शनिवार को तकनीकी विशेषज्ञों के साथ रामजन्मभूमि पहुंचे। सबसे पहले उन्होंने विराजमान रामलला को उनके गृर्भगृह में जाकर नमन किया। इसके उपरांत रामलला के स्थान परिवर्तन के लिए प्रस्तावित नवीन स्थल का न्यासियों व अधिकारियों के साथ निरीक्षण किया। उन्होंने हनुमानगढ़ी के भी दर्शन किए।
प्रस्तावित स्थल पर उनके निरीक्षण के पूर्व ही स्थान को पूरी तरह साफ कर समतल बना दिया गया था। चूनाकारी से रामलला के अस्थाई मंदिर के स्थान को रेखांकित किया गया। दर्शनार्थियों की लेन व सड़क को भी रेखांकित किया गया। श्री मिश्र व उनके साथ तकनीकी विशेषज्ञों के पहुंचने पर रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव चंपत राय ने उन्हें पूरी भूमिका समझाई। इसके बाद मानस भवन में हुई बैठक में अधिकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था का खाका प्रस्तुत किया। इस खाके का अनुमोदन केन्द्रीय गृह मंत्रालय की ओर से किया जाना है। बैठक में प्रस्तावित स्थल पर रामलला के भोग-राग की व्यवस्था के लिए कोठार व भंडार को लेकर भी आवश्यक विमर्श किया गया।
रामजन्मभूमि के विस्तृत परिसर का भूभाग अलग-अलग टापुओं की तरह स्थित है। इसका एक सिरा त्रिदंडदेव संस्कृत महाविद्यालय पर है तो दूसरा गोकुल भवन। तीसरा क्षीरेश्वरनाथ महादेव मंदिर के आगे यूसुफ आरा मशीन है तो चौथा पुराना विश्वामित्र आश्रम। इन हिस्सों में निगरानी व सुरक्षा व्यवस्था की दृष्टि से बुलेटप्रूफ कार ले जाने के लिए पाथ-वे बनाया गया है। निर्माण कमेटी के चेयरमैन ने ट्रस्ट के महासचिव व तकनीकी विशेषज्ञों के साथ अधिकतम क्षेत्र का अवलोकन इसी पाथ-वे पर कार से चलकर किया। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने पूरी जमीन और उसकी चौहद्दी से पूरी टीम को अवगत कराया। निर्माण कमेटी के चेयरमैन व वरिष्ठ आईएएस अधिकारी नृपेन्द्र मिश्र व राम मंदिर मॉडल के मुख्य वास्तुकार चंद्रकांत भाई सोमपुरा के बीच मुलाकात मार्च में होनी है। इसकी पुष्टि ट्रस्ट के महासचिव श्री राय ने की है। भेंट की तिथि होली के बाद तय होगी। इस भेंट के दौरान तकनीकी विशेषज्ञों की टीम भी मौजूद रहेगी और उसके बाद यह टीम मुख्य वास्तुकार श्री सोमपुरा के साथ रामजन्मभूमि परिसर का निरीक्षण करेगी।

द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेता एथलेटिक्स कोच जोगिंदर सैनी का निधन

पटियाला : अनुभवी एथलेटिक्स कोच और द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेता जोगिंदर सिंह सैनी का रविवार को बढ़ती उम्र से संबंधित परेशानियों के कारण निधन हो गया। वह 90 बरस के थे। सैनी को भारत के कुछ प्रतिष्ठित ट्रैक एवं फील्ड खिलाड़ियों को निखारने का श्रेय जाता है। सैनी पिछले कुछ दिनों से बीमार थे। वह 1970 से 1990 के दशक के बीच कई वर्षों तक राष्ट्रीय एथलेटिक्स टीम के मुख्य कोच रहें।
एएफआई अध्यक्ष आदिले सुमारिवाला ने कहा, ”मुझे अपने साथी, अपने मुख्य कोच और मेंटर जेएस सैनी के निधन की खबर सुनकर बेहद दुख हुआ।” उन्होंने अपने संदेश में कहा, ”उन्हें एथलेटिक्स से प्यार था और अपने अंतिम दिन तक उन्होंने भारतीय एथलेटिक्स महासंघ को योगदान दिया। वह मेरे मित्र और मार्गदर्शक थे और अपनी सलाह से एएफआई अध्यक्ष की मेरी भूमिका में उन्होंने काफी मदद की।”जोगिंदर सैनी ने अपने युवा दिनों में बाधा दौड़ में हिस्सा लिया और एनआईएस तथा राष्ट्रीय शिविर में भारत के कुछ शीर्ष खिलाड़ियों को ट्रेनिंग दी। सैनी ने 1962 एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाले गुरबचन सिंह रंधावा को डेकाथलन से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने इसके अलावा दिग्गज मैराथन धावक शिवनाथ सिंह को भी ट्रेनिंग दी।

गोला के यतीश ने तोड़ा एक और विश्व रिकॉर्ड, 28 घंटे पढ़ी श्रीमद्भागवत पुराण

लखीमपुर-खीरी : पुराने विश्व रिकॉर्ड विजेता यतीश शुक्ला ने एक और विश्व कीर्तिमान बनाया है। उन्होंने बिना एक मिनट भी थमे लगातार 28 घंटे पांच मिनट तक लगातार पुराण पढ़कर कानपुर के अलाउद्दीन का रिकॉर्ड तोड़ दिया। गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड के इंडिया हेड आलोक कुमार ने उनको इस रिकॉर्ड का प्रमाणपत्र प्रदान किया। जुनूनी और धुन के पक्के यतीश शुक्ला के नाम कई विश्व रिकॉर्ड हैं। कानपुर में उन्होंने लगातार पढ़ाने का, गोला में किताबें बांचने का और लखीमपुर में भाषण देने का विश्व रिकॉर्ड बनाया था। इस बार उन्होंने नए रिकॉर्ड की धुन शुरू कर दी। इस बार का टारगेट बड़ा था।
इससे पहले यतीश ने जो भी विश्व रिकॉर्ड बनाए थे, उनमें हर घंटे में पांच मिनट का ब्रेक मिलता था। पर इस बार कहानी दूसरी थी। इस बार ब्रेक नहीं लेना था। यानी जिस समय से रिकॉर्ड की शुरुआत करती है और टाइम मशीन ऑन होनी है, एक मिनट भी उठना नहीं है। यह आसान नहीं था। यतीश ने शनिवार सुबह सात बजे से रिकॉर्ड की तैयारी की। यह संकल्प लिया कि वह बिना ब्रेक लिए पढ़ने का विश्व रिकॉर्ड बना लेंगे। यतीश ने श्रीमद्भागवत पुराण पढ़नी शुरू की। हिन्दी और संस्कृत में वह इसे बांच रहे थे। इस दौरान उन्होंने बिना रुके-थमे क्रम जारी रखा। कार्यक्रम के जज उन पर नजर बनाए हुए थे। रविवार सुबह एक बजे उन्होंने 28 घंटे पांच मिनट तक पुराण पढ़कर यतीश ने विश्व कीर्तिमान बना लिया।
कानपुर के नाम था रिकॉर्ड – यह विश्व रिकॉर्ड कानपुर के अलाउद्दीन के नाम था। अलाउद्दीन ने लगातार 27 घंटे तक पढ़कर यह विश्व रिकार्ड अगस्त 2019 में बनाया था। अलाउद्दीन ने इस रिकार्ड की जानकारी फेसबुक पर डालकर एक चैलेंज भी दिया था कि बिना ब्रेक के पढ़ना आसान नहीं है। उस रिकार्ड को यतीश ने तोड़ दिया।
यतीश के नाम दर्ज रिकार्ड

पहला रिकार्ड गोरखपुर में 148 घंटे पढ़ाने का बनाया था।
124 घंटे किताब पढ़ने का विश्व रिकॉर्ड उनके नाम है।
जुलाई 2019 में 106 घंटे तक भाषण देने का रिकॉर्ड कायम किया था।

25 साल बाद महिलाओं के लिए खुला पेशावर की सुनहरी मस्जिद का दरवाजा

अदा कर सकेंगी जुमे की नमाज
पेशावर : पेशावर के सुनहरी मस्जिद में महिलाएं 25 साल के अंतराल के बाद समूह में जुमे की नमाज अदा कर सकेंगी, क्योंकि खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में सफल सैन्य अभियानों की शुरुआत के बाद से कानून-व्यवस्था में काफी सुधार हुआ है। एक मीडिया रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई।
‘द एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ ने शनिवार (29 फरवरी) को रिपोर्ट में कहा कि 1990 के दशक के मध्य तक, महिलाएं पेशावर कैंटोन्मेंट में स्थित सुनहरी मस्जिद में समूह में जुमे की नमाज अदा करती थीं, लेकिन प्रांतीय राजधानी के आतंकवाद से बुरी तरह प्रभावित होने के बाद ऐसा होना बंद हो गया था।
मस्जिद के पास दर्जनों आतंकवादी हमले हुए, जिसके कारण लगभग 25 साल पहले महिलाओं के लिए मस्जिद के दरवाजे बंद कर दिए गए। साल 2016 में, सदर के भीड़ भरे बाजार में मस्जिद के पीछे ज्यादातर सरकारी कर्मचारियों को ले जा रही बस के शक्तिशाली बम की चपेट में आ जाने से 16 लोग मारे गए थे और दर्जनों घायल हो गए थे। अब, सुरक्षा स्थिति में पर्याप्त सुधार के साथ, अधिकारियों ने महिलाओं के लिए मस्जिद में नमाज अदा करने को फिर से शुरू करने का फैसला किया है और समूह में महिलाओं के नमाज करने को लेकर व्यवस्था को अंतिम रूप दिया गया है। अधिकारियों ने मस्जिद के बाहर एक बैनर भी लगा रखा है, जिसमें संदेश दिया गया है कि ‘सुनहरी मस्जिद में जुमे की नमाज अदा करने के लिए अब महिलाओं का स्वागत है।’

नहीं रहे मशहूर शायर कमर पीलीभीती

मशहूर शायर कमर पीलीभीती नहीं रहे। गत रविवार को देर रात में उन्होंने अपने आवास पर आखिरी सांस ली। वह 80 वर्ष के थे। शहर के मोहल्ला सरायखाम निवासी कमरुज्जमा खां कमर पीलीभीती पिछले कुछ समय से बीमार थे। वह अपने पीछे एक बेटा और तीन बेटियां छोड़ गए हैं। उनकी पत्नी वर्षों पहले दुनिया से चल बसी थी, बच्चों की परवरिश उन्होंने अकेले ही की।
शायरी की दुनिया के वह एक सशक्त हस्ताक्षर थे। जब वह माइक पर शायरी करते थे तो उनकी आवाज का जादू लोगों के सिर चढ़ कर बोलता था। उनके इस शेर को अक्सर उनके चाहने वाले गुनगुनाते मिलते हैं। ठोकरें खाता हूं, मैं गिर के संभल जाता हूं। यह मेरी मां की दुआओं का असर लगता है। उन्हें सोमवार को इशां की नमाज के बाद सुपुर्दे खाक किया गया।

बीबीएयू : फिल्म और थिएटर का कोर्स शुरू होगा

लखनऊ : फिल्म और थियेटर में अपना कॉरियर बनाने वाले युवाओं के लिए बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर केन्द्रीय विवि (बीबीएयू) पढ़ाई का अवसर उपलब्ध कराने जा रहा है।
इसके लिए पत्रकारिता विभाग एक कोर्स चलाएगा। विभाग ने कोर्स के लिए तैयारी कर ली है। यह कोर्स स्नातकोत्तर स्तर को होगा। विश्वविद्यालय के जर्नलिज्म एण्ड मॉस कम्युनिकेशन विभाग में अभी तक पत्रकारिता से सम्बन्धित कोर्स चलाए जा रहे हैं। इसमें स्नातकोत्तर कोर्स, एमफिल और पीएचडी शामिल हैं।
अब विभाग ने अन्य क्षेत्रों में भी रोजगारपरक कोर्स चलाने की योजना बनाई है। इसी कड़ी में फिल्म थियेटर से जुड़ा कोर्स शुरू होगा। विभागाध्यक्ष प्रो. गोबिन्द पांडे ने बताया कि अगले शैक्षिक सत्र से ‘मास्टर ऑफ आर्ट (फिल्म एण्ड थिएटर स्टडीज)’ के नाम से नया कोर्स शुरू किए जाएगा। प्रो. पांडे ने बताया कि लखनऊ में फिल्म और थियेटर से सम्बन्धित रोजगार की संभावनाए बढ़ रही हैं। यहां पर फिल्मों की शूटिंग चलती रहती है।
इसको ध्यान में रखते हुए इससे सम्बन्धित कोर्स चलाने जा रहे हैं। बोर्ड ऑफ पोस्ट ग्रेजुएट स्टडीज और स्कूल बोर्ड ने कोर्स पर मुहर लगा दी है।
पाठ्यक्रम का विवरण: नए कोर्स मास्टर ऑफ आर्ट (फिल्म एण्ड थिएटर स्टडीज) में दाखिला लेने की न्यूनतम योग्यता स्नातक है। किसी भी वर्ग में 50फीसदी अंक के साथ उत्तीर्ण होना जरूरी है। इसमें 30 सीटों का प्रावधान किया जाएगा। चार सेमेस्टर का कोर्स होगा। लगभग 20 हजार रुपए प्रति सेमेस्टर फीस होगी।

औषधि का खजाना है नीम

लगभग 4000 वर्षों से आयुर्वेद में नीम का औषधीय उपयोग किया जा रहा है और आयुर्वेद में इसे ‘सर्वरोग निवारिणी’ भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है- सभी तरह के रोगों का निवारण करने वाला। आयुर्वेद में ‘नीम’ बेमिसाल औषधि मानी जाती है, क्योंकि नीम से हर तरह के रोगों का इलाज संभव है।
नीम में एंटीबायोटिक तत्व भरपूर मात्रा में होता है, जो रोगों को दूर रखने का काम करता है। नीम स्वाद में कितना भी कड़वा हो लेकिन बीमारियों के लिए उतना ही लाभकारी होता है। नीम का पेड़ त्वचा संक्रमण, घाव और फंगल इंफेक्शन जैसी कई बीमारियों का इलाज है।
औषधियों का खजाना है नीम
नीम के पेड़ का हर एक भाग महत्वपूर्ण होता है नीम के फल, बीज और पत्ते, इन सभी से तेल निकाला जाता है और इसी तेल का उपयोग त्वचा से संबंधित बीमारियों और अन्य कई स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के उपचार के लिए किया जाता है। ज्यादातर नीम का इस्तेमाल त्वचा संबंधी बीमारियों के लिए किया जाता है जैसे- एक्जिमा और सोरायसिस जैसी बीमारियां इससे जल्दी ठीक हो सकती हैं, लेकिन एंटीबायोटिक गुणों के कारण नीम से हर तरह के रोगों का इलाज हो सकता है। आइए जानते हैं वह कौन से रोग हैं, जिनका इलाज नीम के उपयोग से संभव है –
रोज सेवन करें तो साफ होता है खून- नीम के सेवन से शरीर का रक्त साफ होता है और रक्त में शर्करा का स्तर भी संतुलित होता है। नियमित एक गिलास पानी में दो-तीन नीम के पत्ते और थोड़ा सा शहद मिलाकर सुबह खाली पेट पीने से हार्मोन का स्तर भी ठीक होता है।
हड्डियों व जोड़ों के दर्द के लिए लाभकारी- नीम में इंफ्लामेटरी तत्व पाया जाता है, जो दर्द को दूर करता है। नीम की पत्तियां और फूल जोड़ों के दर्द में लाभ पहुंचाते हैं। लगातार दो महीनों तक एक गिलास पानी में नीम के फूल और पत्ते उबालकर इसका पानी पीने से गठिया का रोग ठीक हो जाता है। इसके साथ ही नीम के तेल की मालिश से जोड़ों के दर्द में भी राहत मिलती है और यह तेल मांसपेशियों को भी मजबूत करता है।
मधुमेह के रोगियों के लिए रामबाण इलाज- एक अध्ययन में पाया गया है कि नीम में हाईपोग्लासेमिक गुण मौजूद होते हैं, जो रक्त में शक्कर के कणों को कम करते हैं। यदि मधुमेह के रोगी रोज सुबह एक नीम की पत्ती खाते हैं तो इससे रोगी की शुगर संतुलित होती है।
चेहरे में निखार लाता है नीम- नीम का टेस्ट करते ही भले ही लोगों का चेहरा बिगड़ जाता हो, लेकिन नीम चेहरे के लिए एक शानदार औषधि है। नीम फेस पैक, नीम का पानी, नीम शहद, नीम का साबुन और नीम का तेल आदि चेहरे पर निखार लाने के लिए काम में लाए जाते हैं।

चोट के निशान भी हो जाते हैं दूर- यदि चोट के किसी भी निशान पर नीम के पेस्ट का इस्तेमाल किया जाए तो किसी भी प्रकार के निशान कम जाते हैं। इसके लिए नीम के पेस्ट में थोड़ी सी हल्दी डालकर इस्तेमाल करें। इसके अलावा नीम के पत्ते में तुलसी, गुलाब जल के साथ पीसकर चेहरे पर लगाने से निखार आता है और त्वचा बेदाग हो जाती है। नीम में गर्भनिरोधक गुण होते हैं जो गर्भपात का कारण होता है। इसके उपयोग से किसी तरह का नकारात्मक असर नजर आए तो आयुर्वेदाचार्य से सम्पर्क करना चाहिए।

(साभार – लाइव हिन्दुस्तान)