Saturday, June 27, 2026
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गर्मी में चेहरे पर लाएं प्राकृतिक चमक

गर्मियों के मौसम में तेज धूप उमस और पसीने के कारण चेहरे पर एक्स्ट्रा ऑयल आना एक आम समस्या बन जाती है। इस वजह से न सिर्फ चेहरा चिपचिपा दिखता है, बल्कि पिंपल्स और बंद पोर्स की परेशानी भी बढ़ जाती है। अगर आप भी इस सीजन में अपनी त्वचा को बिल्कुल फ्रेश ऑयल-फ्री और चमकदार बनाए रखना चाहते हैं तो अपनी रूटीन में ये आसान और असरदार टिप्स शामिल कर सकते हैं।
बार-बार चेहरा धोने से त्वचा का प्राकृतिक तेल खत्म हो जाता है जिससे त्वचा का संतुलन बिगड़ता है और चेहरा और ज्यादा ऑयल बनाने लगता है। इसलिए पूरे दिन में सिर्फ दो बार ही किसी अच्छे फेस वॉश से अपना चेहरा साफ करें ताकि त्वचा को नुकसान न पहुंचे। गर्मियों के मौसम में भारी क्रीम की जगह जेल-बेस्ड प्रोडक्ट्स या जेल मॉइस्चराइजर का इस्तेमाल करें। ये प्रोडक्ट्स त्वचा के पोर्स को बंद किए बिना चिपचिपाहट को दूर रखते हैं और चेहरे को बिल्कुल लाइटवेट व फ्रेश लुक देते हैं।

तेज धूप से त्वचा को बचाने और एक्स्ट्रा ऑयल प्रोडक्शन को कंट्रोल करने के लिए सनस्क्रीन लगाना कभी न भूलें। हमेशा एसपीएफ 30 या उससे अधिक मात्रा वाली मैट फिनिश या जेल-बेस्ड सनस्क्रीन का ही चुनाव करें। दिन के समय चेहरे पर आने वाले एक्स्ट्रा ऑयल और पसीने को बार-बार छूने या धोने के बजाय ब्लॉटिंग पेपर का इस्तेमाल करें। ब्लॉटिंग पेपर आपके मेकअप या स्किनकेयर को खराब किए बिना चेहरे के अतिरिक्त तेल को आसानी से सोख लेता है।
अपनी डेली स्किन केयर रूटीन में नियासिनमाइड सीरम को जरूर शामिल करें। नियासिनमाइड त्वचा के सीबम को नियंत्रित करने में मदद करता है जिससे चेहरे के पोर्स छोटे नजर आते हैं और त्वचा की ऑयली चमक कम होती है। बाहरी देखभाल के साथ-साथ खान-पान पर ध्यान देना भी बहुत जरूरी है।
गर्मियों में ज्यादा तला-भुना मसालेदार और हाई-शुगर वाले भोजन से परहेज करें क्योंकि ये शरीर में ऑयल बढ़ाते हैं। इसकी जगह अपने आहार में मौसमी फल हरी सब्जियां और पर्याप्त पानी शामिल करें ताकि त्वचा अंदर से ग्लो करे।सप्ताह में कम से कम एक या दो बार चेहरे पर मुल्तानी मिट्टी या चंदन के पाउडर का फेस पैक लगाएं। ये प्राकृतिक चीजें त्वचा से अतिरिक्त तेल को सोखने और चेहरे को ठंडक पहुंचाने में बेहद मददगार साबित होती हैं।

गर्मी में भूलकर भी न पहनें ये तीन रंग

मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल चुका है और सूरज की तपिश लोगों को बेहाल कर रही है। ऐसे में खुद को ठंडा रखने के लिए लोग खानपान से लेकर दिनचर्या तक में कई बदलाव करते हैं। लेकिन अक्सर हम एक बेहद जरूरी चीज को नजरअंदाज कर देते हैं और वह है हमारे कपड़ों का रंग। क्या आप जानते हैं कि आपके वॉर्डरोब में सजे कुछ कपड़े इस चिलचिलाती धूप में आपकी सेहत के सबसे बड़े दुश्मन बन सकते हैं विज्ञान के अनुसार कुछ रंग ऐसे होते हैं जो गर्मी को दूर भगाने के बजाय उसे अपने अंदर सोख लेते हैं। आइए जानते हैं कि इस मौसम में आपको किन रंगों से दूरी बनानी चाहिए और कैसे आप सही कपड़ों का चुनाव कर इस गर्मी में भी खुद को कूल रख सकते हैं।
​ये तीन रंग हैं आपके शरीर के दुश्मन
​विज्ञान के अनुसार ‌कपड़े का मटीरियल जितना अहम है उतना ही उसका रंग भी मायने रखता है। गहरे रंग सूरज की रोशनी और उसकी थर्मल एनर्जी को सबसे ज्यादा सोखते हैं।
​पहला नाम काले रंग का है। काला रंग करीब 95 प्रतिशत से ज्यादा लाइट को सोखकर उसे सीधे हीट यानी गर्मी में बदल देता है।
​दूसरा और तीसरा नाम नेवी ब्लू और डार्क रेड या मैरून का है। ये तीनों रंग तपती धूप में थर्मल मैग्नेट यानी गर्मी को खींचने वाले चुंबकीय रंगों की तरह काम करते हैं। अगर आप इन्हें पहनकर धूप में निकलते हैं तो ये शरीर के तापमान को खतरनाक स्तर तक बढ़ा देते हैं।
सेहत को कैसे बीमार बनाते हैं ये कपड़े
​गहरे रंग के कपड़े पहनने का नुकसान सिर्फ ज्यादा पसीना आने तक सीमित नहीं है। जब कपड़ों की वजह से शरीर की गर्मी बाहर नहीं निकल पाती तो बॉडी का इंटरनल थर्मास्टेट बिगड़ जाता है।
​इसकी वजह से हीटस्ट्रोक यानी लू लगना अचानक चक्कर आना और डिहाइड्रेशन जैसी गंभीर दिक्कतें हो सकती हैं। इसके अलावा गहरे रंग के कपड़े पसीने को स्किन पर ही लॉक कर देते हैं। हवा न लगने के कारण वहां बैक्टीरिया पनपने लगते हैं जिससे घमौरियां त्वचा में एलर्जी और गंभीर स्किन इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है।
​गर्मियों में कूल और सेफ रहने का सही तरीका
​अगर आप इस भीषण गर्मी में खुद को फ्रेश और सुरक्षित रखना चाहते हैं तो तुरंत अपने वॉर्डरोब में बदलाव करें।
​सफेद पीला और लाइट पेस्टल कलर्स जैसे स्काई ब्लू लाइट पिंक या मिंट ग्रीन कपड़ों को प्राथमिकता दें। सफेद और हल्के रंग सूरज की किरणों को रिफ्लेक्ट यानी वापस परावर्तित कर देते हैं जिससे गर्मी आपके शरीर तक नहीं पहुंचती।
​कपड़े के फैब्रिक की बात करें तो हमेशा 100 प्रतिशत कॉटन या लिनन ही चुनें। ये फैब्रिक बहुत हल्के होते हैं त्वचा को खुलकर सांस लेने का मौका देते हैं और पसीने को तुरंत सोख लेते हैं।

बंगाल सरकार ने दो दिनों की ईद की छुट्टी खत्म की

– 28 मई को रहेगा एक दिन का अवकाश

कोलकाता । पश्चिम बंगाल सरकार ने ईद-उल-जोहा (बकरीद) की सरकारी छुट्टी की तारीख में बदलाव किया है। नवान्न की ओर से शुक्रवार को जारी अधिसूचना में कहा गया है कि अब 28 मई को बकरीद के अवसर पर सरकारी अवकाश रहेगा। राज्य के वित्त विभाग की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, 27 नवंबर 2025 को जारी पहले के आदेश में 26 मई 2026 को बकरीद की पूर्व संध्या और 27 मई 2026 को ईद-उल-जोहा के लिए छुट्टी घोषित की गई थी। हालांकि, अब प्राप्त ताजा जानकारी के आधार पर बकरीद 28 मई, गुरुवार को मनाई जाएगी। इसी कारण छुट्टी की तारीख बदली गई है।
नई अधिसूचना के मुताबिक, पहले घोषित 26 और 27 मई की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं। इन दोनों दिनों में राज्य सरकार के सभी कार्यालय, संस्थान और सरकार पोषित प्रतिष्ठान सामान्य रूप से खुले रहेंगे। सरकारी अवकाश अब केवल 28 मई को रहेगा।
राज्य सरकार के अवकाश कैलेंडर के अनुसार, इसके बाद 26 जून को मुहर्रम, 16 जुलाई को रथयात्रा, 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस, 26 अगस्त को फतेह-दोआज़-दहम और 28 अगस्त को रक्षाबंधन के अवसर पर छुट्टी निर्धारित है। सितंबर महीने से दुर्गापूजा के त्योहारों का दौर शुरू होगा। इसी महीने जन्माष्टमी और विश्वकर्मा पूजा भी मनाई जाएगी। अक्टूबर में गांधी जयंती, महालया और दुर्गापूजा के अवसर पर लगातार अवकाश रहेंगे।

आयुष्मान भारत से 6 करोड़ लोगों को मिलेगा लाभ

 सर्वाइकल कैंसर रोधी टीका लगाने का अभियान 30 मई से

कोलकाता। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने राज्य के स्वास्थ्य क्षेत्र में व्यापक सुधारों और नई योजनाओं की घोषणा करते हुए कहा कि स्वास्थ्य साथी योजना से जुड़े लगभग छह करोड़ लोगों को अब केंद्र सरकार की आयुष्मान भारत योजना से जोड़ा जाएगा। उन्होंने इसे राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था में “युगांतकारी परिवर्तन” करार दिया और कहा कि इससे लाखों परिवारों को बेहतर और सस्ती स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी।
शनिवार को मुख्यमंत्री ने केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ वर्चुअल बैठक की। इसके बाद नवान्न में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल और प्रधान सलाहकार सुब्रत गुप्ता की मौजूदगी में उन्होंने स्वास्थ्य क्षेत्र को लेकर सरकार की नई कार्ययोजना की विस्तृत जानकारी दी। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पूर्ववर्ती राज्य सरकार पर केंद्र सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं का विरोध करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक कारणों और समन्वय की कमी के चलते राज्य के करोड़ों लोग केंद्र की महत्वपूर्ण स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ नहीं उठा सके। उन्होंने कहा कि नई सरकार के गठन के बाद केंद्र की विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं की समीक्षा की गई और अब राज्य में व्यापक स्तर पर बदलाव लागू किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार आयुष्मान भारत योजना के लिए नामांकन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और जुलाई महीने से कार्ड वितरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य साथी योजना के तहत पहले से पंजीकृत छह करोड़ से अधिक कार्डधारकों को सीधे आयुष्मान भारत योजना से जोड़ा जाएगा। इसके अलावा वे लोग, जो अब तक स्वास्थ्य साथी योजना से बाहर थे, उन्हें भी नई आवेदन प्रक्रिया के जरिए स्वास्थ्य बीमा का लाभ दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने बताया कि जून के पहले सप्ताह में दिल्ली में आयुष्मान आरोग्य मंदिर से संबंधित महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। इस अवसर पर केंद्र और राज्य सरकार के मंत्री तथा वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहेंगे। उन्होंने कहा कि इस नई व्यवस्था का लाभ केवल पश्चिम बंगाल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देश के अन्य राज्यों में रहने वाले लगभग एक करोड़ बंगालवासी भी इससे लाभान्वित होंगे। इससे राज्य से बाहर रहने वाले लोगों को भी इलाज में आर्थिक सहायता और बेहतर स्वास्थ्य सुरक्षा मिल सकेगी। मुख्यमंत्री शुभेन्दु अधिकारी ने राज्य में सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम के लिए बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियान शुरू करने की घोषणा भी की। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार की यह योजना फरवरी में देशभर में लागू की गई थी, लेकिन पश्चिम बंगाल में इसे अब तक शुरू नहीं किया जा सका था। अब राज्य में 14 से 15 वर्ष आयु वर्ग की बालिकाओं को सर्वाइकल कैंसर रोधी टीका लगाने का अभियान 30 मई से शुरू होगा। इसका शुभारंभ बिधाननगर सब-डिविजनल अस्पताल से किया जाएगा, जहां वे स्वयं मौजूद रहेंगे। उन्होंने बताया कि इसी दिन राज्य में “टीबी मुक्त भारत” कार्यशाला की भी शुरुआत होगी, जिसके माध्यम से तपेदिक उन्मूलन अभियान को और तेज किया जाएगा।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि राज्य में 400 से अधिक प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र खोले जाएंगे। इन केंद्रों के माध्यम से आम लोगों को कम कीमत पर दवाइयां उपलब्ध कराई जाएंगी। उन्होंने कहा कि गंभीर बीमारियों में इस्तेमाल होने वाली महंगी दवाओं पर 80 प्रतिशत तक की छूट मिलेगी। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि बाजार में 2000 रुपये की दवा जन औषधि केंद्रों में लगभग 200 रुपये तक में उपलब्ध हो सकेगी। सरकार का मानना है कि इससे आर्थिक रूप से कमजोर और मध्यम वर्गीय परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रत्येक जिले में मेडिकल कॉलेज स्थापित करने की दिशा में भी काम कर रही है। वर्तमान में अलीपुरद्वार, कलिम्पोंग, आसनसोल और दक्षिण दिनाजपुर प्रशासनिक जिलों में मेडिकल कॉलेज नहीं हैं। इन जिलों के लिए आवश्यक भूमि और प्रस्ताव जल्द ही केंद्र सरकार को भेजे जाएंगे। साथ ही उत्तर बंगाल में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) स्थापित करने की दिशा में भी पहल की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने राज्य में पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर को लेकर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि कुछ जिलों में बाल मृत्यु दर अपेक्षाकृत अधिक है, जिसे कम करने के लिए विशेष स्वास्थ्य योजनाओं और निगरानी की आवश्यकता है। उन्होंने विशेष रूप से कोलकाता, मुर्शिदाबाद, पूर्व बर्धमान, बीरभूम और मालदा जिलों की स्थिति पर चिंता जताई और अधिकारियों को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने बताया कि चालू वित्त वर्ष में केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल के लिए 2103 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है, जिसमें से एक चौथाई धनराशि राज्य को हस्तांतरित भी कर दी गई है। उन्होंने कहा कि इस राशि का उपयोग स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत बनाने, चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार करने और आम लोगों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में किया जाएगा।

जालान पुस्तकालय में डॉ अम्बर का व्याख्यान

कोलकाता। सेठ सूरजमल जालान पुस्तकालय के तत्वावधान में हिंदी काव्य मंचों के रोचक प्रसंग विषयक अंतरंग गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस गोष्ठी में मंच संचालक के रूप में अपनी पचास वर्षीय यात्रा के अनुभवों को साझा किया । उन्होंने मंचों के गिरते स्तर के लिए भवानी भाई के परामर्श को याद किया – ‘सहो, और बेहतर बात करने के लिए रहो’। इसी क्रम में समाज निर्माण हेतु बालकवि बैरागी की सूर्य को संबोधित कविता का उल्लेख करते हुए उन्होंने आह्वान किया ‘संग्राम यह घनघोर है, कुछ मैं लड़ूं कुछ तुम लड़ो’।
विशिष्ट अतिथि प्रख्यात कथावाचक पं० श्रीकांत शर्मा ‘ बालव्यास ‘ ने  कहा कि हमेशा मनुष्य के आचरण की पूजा की जाती है चरण की नहीं। जब मनुष्य अपने आचरण से बड़ा होता है तभी वह पूजनीय होता है।
गोष्ठी का शुभारंभ विवेक तिवारी द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुआ। स्वागत वक्तव्य पुस्तकालय की मंत्री दुर्गा व्यास तथा धन्यवाद ज्ञापन पुस्तकालय अध्यक्ष भरत कुमार जालान ने किया।
गोष्ठी का प्रारम्भ करते हुए डॉ प्रेमशंकर त्रिपाठी ने कहा कि अम्बर जी ने मंच संचालक के रूप में हिन्दी काव्य मंचों को गरिमा और महिमा प्रदान की है। उनके मंचीय अनुशासन को सर्वत्र सराहना प्राप्त हुई है।
इस गोष्ठी में वंशीधर शर्मा, अरुण प्रकाश मल्लावत, नंदकुमार लड्ढा, डॉ सत्या उपाध्याय, प्रो. राजश्री शुक्ला के साथ कोलकाता के साहित्यकार, पत्रकार एवं शिक्षक बड़ी संख्या में उपस्थित थे। कार्यक्रम को सफल बनाने में पुस्तकाध्यक्ष श्रीमोहन तिवारी, भगीरथ सारस्वत, राहुल उपाध्याय, सत्यम शुक्ला, राहुल दास एवं शनि की सक्रिय भूमिका रही।

छठवाँ वाको इंडिया वेस्ट बंगाल स्टेट किकबॉक्सिंग चैंपियनशिप संपन्न 

कोलकाता । भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज से किक बॉक्सिंग चैम्पियन शिप में चार खिलाडिय़ों ने प्रतिभागियों के रूप में भाग लिया। निखिल कुमार दुवेदी, बी.कॉम (ऑनर्स), तृतीय वर्ष/यूआईडी: 0101231608, तंज़ील अशरफबी.कॉम (ऑनर्स), द्वितीय वर्षयूआईडी: 0101241845, फ़राज़ रहमान क़य्यूमी, बी.एससी अर्थशास्त्र, द्वितीय वर्ष, यूआईडी: 0704240004, तृषा चूड़ीवाल बीएससी अर्थशास्त्र/यूआईडी: 0704240045 प्रमुखता से रहे। किक बॉक्सिंग में 1) त्रिशा चुरीवाला (बी.एससी अर्थशास्त्र)प्वाइंट फाइट – स्वर्ण पदक*हल्का संपर्क – *रजत पदक*2) निखिल कुमार दुवेदी (बी.कॉम ऑनर्स)पूर्ण संपर्क लड़ाई – *रजत पदक*3) तंजील अशरफ (बी.कॉम ऑनर्स)हल्का संपर्क – *रजत पदक
किक लाइट – कांस्य पदक*4) फ़राज़ रहमान क़य्यूमी (बी.एससी अर्थशास्त्र)किक लाइट – *रजत पदक । हल्का संपर्क – *कांस्य पदक*प्राप्त किया जो कॉलेज के लिए गौरव की बात है ।यह टूर्नामेंट 8 से 10 मई 2026बीएसएफ कैंपस, कदमतला, सिलीगुड़ी, पश्चिम बंगाल में प्रातः 8:00 बजे से रात्रि 9:00 बजे तक हुआ ।वरिष्ठ वर्ग प्रतिभागियों की कुल संख्या400थी। छात्रों की पूरी यात्रा के लिए बस टिकट, भोजन व्यवस्था और अन्य आवश्यक वाहन भत्ते प्रदान करने के लिए जीतू सर की अनुमति और समर्थन से मिला।
किक बॉक्सिंग और शतरंज बॉक्सिंग स्पर्धाओं के आधिकारिक कोच आशुतोष कुमार झा भी हार्दिक धन्यवाद के पात्र हैं। उनके समर्पण, अथक परिश्रम, उचित मार्गदर्शन और निरंतर प्रेरणा से टूर्नामेंट में हमारे खिलाड़ियों के उत्कृष्ट प्रदर्शन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विशेषज्ञ कोच आशुतोष झा के मार्गदर्शन के तहत, टीम ने उल्लेखनीय सफलता हासिल की और कॉलेज को गौरव दिलाया।
खेल एवं खेल विभाग के प्रमुख रूपेश गांधी ने सभी प्रतिभागियों को बधाई दी ।भवानीपुर कॉलेज के विद्यार्थियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन और राज्य स्तरीय चैंपियनशिप में नाम रोशन किया। इसकी जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।

भवानीपुर कॉलेज में रवींद्र जयंती का आयोजन

कोलकाता । भवानीपुर एजुकेशन सोसायटी कालेज में रवींद्र जयंती समारोह जुबली हॉल में संपन्न हुआ। डॉ सम्पा सिन्हा बासु ने कार्यक्रम के शुरुआत में सभी प्रमुख अतिथियों को मंच पर आमंत्रित किया । कार्यक्रम का शुभारंभ कॉलेज के रेक्टर और डीन प्रोफेसर दिलीप शाह ने की-बोर्ड बजाते हुए आनंद लोके मंगला लोके गीत द्वारा आह्वान किया जिसमें सौरभ गोस्वामी ने भी भाग लिया ।उसके पश्चात् सोनाक्षी कर ने एकल गीत की प्रस्तुति दी। मैत्रयो दत्ता बीबीए के विद्यार्थी ने माउथ ऑर्गन से गीत की धुन बजाई। फर्स्ट ईयर बीबीए के विद्यार्थियों द्वारा नृत्य मेलोडी ,फ्लेम्स ईस्टर्न के द्वारा चंडालिका डांस ड्रामा , श्रीमती आत्रेइ दास , अन्वेशा राय, डॉ साम्यो बसु, श्रीमती स्वर्णाली दे, डॉ वसुंधरा मिश्र,प्रो प्रोमिता मुखर्जी,प्रो मौमिता सिन्हा,प्रो शंख आचार्य, श्रीमती इप्सिता चटर्जी की बेटी ने इस कार्यक्रम में रवींद्र जयंती पर विभिन्न प्रस्तुतियां दी।तनुश्री शंकर पर डांस एकादमी , कम्प्यूटर साइंस के विद्यार्थियों ने आदि द्वारा प्रस्तुतियां दी गई।
गीतांजलि के कुछ महत्वपूर्ण अंशों का कविता पाठ , डॉक्टर सौम्या बसु ने के साथ समूह गीत, मिसेज स्वर्णाली दे का एकल नृत्य ,विद्यार्थियों द्वारा म्यूजिक के साथ गीत प्रस्तुतियां ,डॉक्टर वसुंधरा मिश्रा ने बांग्ला से हिंदी में गीतवितान की अनुवादित कविताएं , प्रोफेसर पारमिता मुखर्जी द्वारा एकल , कंप्यूटर साइंस के विद्यार्थियों ने समूह द्वारा नृत्य,मौमिता सिंह ने नजरुल द्वारा लिखी रवींद्र पर रचना सुनाई।और अंग्रेजी विभाग के शिक्षकों द्वारा टैगोर के जीवन और कार्य के ऊपर करते हुए संवाद की प्रस्तुति दी वही प्रोफेसर शंख आचार्य एवं  इप्सिता चटर्जी की बेटी द्वारा एकल गीत प्रस्तुत किया गया। प्रो चंपा श्रीनिवासन ने रवींद्रनाथ टैगोर से संबंधित प्रश्नोत्तरी सत्र भी किया। इस अवसर पर बांग्ला फिल्म ‘प्रत्यावर्तन’ के प्रोमोशन के लिए उसके डायरेक्टर और पूरी टीम उपस्थित रही। फिल्म की प्रासंगिकता पर विचार रखा गया और ट्रेलर भी दिखाया गया। इस फिल्म में नवनिर्वाचित विधायक रूपा गांगुली का महत्वपूर्ण अभिनय भी है। प्रोफेसर मीनाक्षी चतुर्वेदी ने धन्यवाद ज्ञापन किया। कार्यक्रम के अंत में सभी लोगों ने राष्ट्रगीत गाया। इस अवसर पर सभी विद्यार्थियों शिक्षकों स्वादिष्ट रात्रि भोजन लिया । नौ मई 2026 को रवींद्र जयंती का आयोजन और संयोजक प्रो मीनाक्षी चतुर्वेदी और डीन आफिस द्वारा किया गया।जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।

नीट-यूजी पुनर्परीक्षा : फर्जी टेलीग्राम चैनलों पर होगी सख्त कार्रवाई

नयी दिल्ली । केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा-स्नातक (नीट-यूजी) पुनर्परीक्षा की निष्पक्ष और सुरक्षित व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए बुधवार को केंद्रीय सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में परीक्षा के दौरान कड़ी सतर्कता और चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्था पर जोर दिया गया। बैठक में शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के महानिदेशक ने भी हिस्सा लिया। बैठक में परीक्षा की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की गई तथा संभावित कमजोरियों की पहचान कर समय रहते निवारक और सुधारात्मक कदम उठाने पर चर्चा हुई। इसके समानांतर शिक्षा मंत्री ने मेटा, गूगल और टेलीग्राम जैसे प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के प्रतिनिधियों के साथ भी बैठक की। बैठक में प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ी गलत सूचनाओं के बढ़ते प्रसार, विशेष रूप से टेलीग्राम चैनलों और गुमनाम ऑनलाइन समूहों के माध्यम से फैलाए जा रहे भ्रामक दावों पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई। अधिकारियों ने बताया कि बड़ी परीक्षाओं से पहले कई टेलीग्राम चैनल अत्यधिक सक्रिय हो जाते हैं और फर्जी पेपर लीक, क्लिकबेट सामग्री तथा अपुष्ट सूचनाएं फैलाकर छात्रों और अभिभावकों में भय, तनाव और भ्रम पैदा करते हैं। कई संदिग्ध लिंक लोगों को ऑटोमेटेड बॉट्स और फर्जी समूहों तक पहुंचाते हैं, जिनका उद्देश्य गलत सूचना को तेजी से फैलाना होता है। खुफिया एजेंसियों से मिली जानकारी के अनुसार कई संदिग्ध चैनल सीमित संख्या के फोन नंबरों के जरिए संचालित किए जा रहे हैं, जिससे संगठित गतिविधियों की आशंका जताई गई है। मामले को गंभीरता से लेते हुए शिक्षा मंत्री ने ऐसे नेटवर्क के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने परीक्षा से पहले फर्जी सूचना, दुष्प्रचार और अफवाह फैलाने वाले चैनलों की सक्रिय पहचान कर उन्हें ब्लॉक और हटाने के लिए अभियान चलाने को कहा। प्रधान ने कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को शिक्षा मंत्रालय, एनटीए और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ मिलकर तेजी से कार्रवाई करनी होगी, ताकि परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बनी रहे और छात्रों को भ्रामक सूचनाओं से बचाया जा सके। उन्होंने दोहराया कि छात्रों को गुमराह करने वाली बातों से बचाना और परीक्षा प्रक्रिया पर जनता का भरोसा बनाए रखना सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। उल्लेखनीय है कि एनटीए देश में मेडिकल कोर्स में दाखिले के लिए नीट-यूजी आयोजित करती है। इस वर्ष 3 मई को नीट-यूजी की परीक्षा आयोजित की गई थी। परीक्षा में कथित अनियमितताओं और जांच एजेंसियों से मिले इनपुट के आधार पर एनटीए ने परीक्षा को रद्द करते हुए 21 जून को दोबारा परीक्षा कराने का फैसला किया है। यह ऑफलाइन परीक्षा होगी, जिसमें 22 लाख से अधिक छात्रों के बैठने की उम्मीद है। इस दौरान छात्रों को 15 मिनट का अतिरिक्त समय भी दिया जाएगा। सरकार ने पूरे मामले की व्यापक जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी है।

बढ़ेगी कोलकाता के सरकारी अस्पतालों की सुरक्षा, गाइडलाइन जारी

कोलकाता । कोलकाता के सरकारी अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कोलकाता पुलिस मुख्यालय लालबाजार पुलिस हेडक्वार्टर ने एक विस्तृत निर्देशिका जारी की है। इसमें अस्पतालों में तैनात पुलिसकर्मियों के लिए कई विशेष निर्देश दिए गए हैं, ताकि अस्पताल परिसर में कानून-व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था बेहतर ढंग से बनाए रखी जा सके। जारी निर्देशिका के अनुसार, अस्पतालों में मरीजों, डॉक्टरों, स्वास्थ्यकर्मियों और अस्पताल की संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करना पुलिसकर्मियों की प्राथमिक जिम्मेदारी होगी। साथ ही अस्पताल परिसर में किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या कानून-व्यवस्था की समस्या न हो, इसके लिए लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। करीब दो वर्ष पहले कोलकाता के आर.जी. कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में एक महिला डॉक्टर के साथ दुष्कर्म और हत्या की घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था। इसके बाद से अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर लगातार सवाल उठते रहे। उस समय जूनियर और सीनियर डॉक्टरों के एक वर्ग ने अस्पतालों की सुरक्षा और बुनियादी ढांचे को लेकर आंदोलन भी किया था। अब राज्य में सरकार बनने के बाद भाजपा अस्पतालों की सुरक्षा और आधारभूत ढांचे को मजबूत करने की बात कह रही है। हाल ही में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने एसएसकेएम हॉस्पिटल का दौरा कर स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ बैठक की थी। इसके बाद कोलकाता के पुलिस आयुक्त अजय नंदा ने विभिन्न थानों के साथ अस्पतालों की सुरक्षा स्थिति को लेकर चर्चा की थी। उसके बाद यह नई निर्देशिका जारी की गई है।

निर्देशों में कहा गया है कि अस्पतालों के मुख्य प्रवेश द्वार पर कड़ी जांच व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। अस्पताल परिसर में आने वाले मरीजों, उनके परिजनों और वाहनों की आवाजाही को व्यवस्थित ढंग से नियंत्रित करना होगा। यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया है कि अस्पताल परिसर में कोई दलाल प्रवेश न कर सके। अस्पतालों में निजी सुरक्षा एजेंसियों की भी तैनाती रहती है। ऐसे में सभी सुरक्षा कर्मियों के लिए स्पष्ट ड्यूटी रोस्टर बनाने और उसी के अनुसार ड्यूटी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है। हर दिन ड्यूटी शुरू होने से पहले सुरक्षा कर्मियों को आवश्यक निर्देश देने और ड्यूटी समाप्त होने के बाद रिपोर्ट लेने की व्यवस्था भी करने को कहा गया है। निर्देशिका में यह भी कहा गया है कि ओपीडी और आपातकालीन विभाग में अक्सर मरीजों और परिजनों की भीड़ रहती है। ऐसे में भीड़ नियंत्रण के लिए उपयुक्त कदम उठाने होंगे और अस्पताल परिसर में अनुशासन बनाए रखना होगा। इसके अलावा आग लगने या प्राकृतिक आपदा जैसी किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। अस्पताल परिसर में हेल्पलाइन नंबर स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करने और किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में तुरंत नियंत्रण कक्ष या स्थानीय थाने से संपर्क करने को कहा गया है। निर्देशिका में अस्पतालों में सीसीटीवी निगरानी बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है। साथ ही यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि सभी सीसीटीवी कैमरे सही तरीके से काम कर रहे हों और अस्पताल के महत्वपूर्ण स्थान कैमरों की निगरानी में हों। अस्पतालों में तैनात निजी सुरक्षा कर्मियों और एंबुलेंस से जुड़ी जानकारी का केंद्रीकृत डाटा तैयार करने के निर्देश भी दिए गए हैं। रात के समय अस्पतालों की सुरक्षा और अधिक मजबूत करने के लिए नियमित गश्त और पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करने की भी बात निर्देशिका में कही गई है।

बंगाल में बीएसएफ को 100 एकड़ भूमि हस्तांतरण प्रक्रिया शुरू

कोलकाता । पश्चिम बंगाल सरकार ने भारत–बांग्लादेश सीमा पर सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने के उद्देश्य से लगभग 100 एकड़ भूमि सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को हस्तांतरित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, यह कदम सीमा पर बाड़बंदी और अन्य बुनियादी ढांचे के विकास को गति देने के लिए उठाया गया है। सूत्रों के अनुसार, हस्तांतरित की जा रही भूमि में से 43 एकड़ से अधिक क्षेत्र पांच जिलों में सीमा बाड़बंदी कार्य के लिए चिह्नित किया गया है, जबकि लगभग 56 एकड़ सरकारी भूमि का उपयोग बीएसएफ के बॉर्डर आउटपोस्ट के निर्माण के लिए किया जाएगा। ये चौकियां अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगभग 200 मीटर की दूरी पर स्थापित की जाएंगी।इसके अलावा सिलीगुड़ी के संवेदनशील “चिकन नेक” क्षेत्र के पास लगभग छह एकड़ भूमि भी बीएसएफ को दिए जाने पर विचार किया जा रहा है, जहां सुरक्षा के लिहाज से एक प्रस्तावित मुख्यालय स्थापित करने की योजना है।अधिकारियों ने बताया कि यह भूमि हस्तांतरण प्रक्रिया राज्य सरकार के कैबिनेट निर्णय के बाद आगे बढ़ाई जा रही है। इसके साथ ही एक वरिष्ठ बीएसएफ अधिकारी के कोलकाता में मुख्यमंत्री के साथ बैठक में शामिल होने की संभावना है। प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, मुर्शिदाबाद, मालदा, कूचबिहार, उत्तर 24 परगना और नदिया जैसे कई जिलों में भूमि अधिग्रहण पहले ही पूरा हो चुका है। नौ सीमावर्ती जिलों में शेष कार्यों के लिए अतिरिक्त अनुमति भी दी गई है।सूत्रों ने बताया कि अकेले मुर्शिदाबाद में 24 एकड़ से अधिक भूमि चिह्नित की गई है, जबकि मालदा में लगभग 10 एकड़ भूमि उपलब्ध कराई गई है। कूचबिहार और उत्तर 24 परगना में भी छोटे भूखंडों की पहचान की गई है। दक्षिण दिनाजपुर में लगभग 9.8 एकड़ भूमि पहले ही जिला स्तर पर बीएसएफ को सौंप दी गई थी। इस पहल का उद्देश्य पश्चिम बंगाल में भारत–बांग्लादेश सीमा के लगभग 456 किलोमीटर क्षेत्र में लंबित बाड़बंदी कार्य को पूरा करना है, जो भूमि अधिग्रहण से जुड़ी चुनौतियों के कारण लंबे समय से अटका हुआ था। अधिकारियों ने कहा कि अधिग्रहित भूमि के लिए भूमि मालिकों को सरकारी मानक से चार गुना तक मुआवजा दिया जाएगा। भुगतान राज्य प्रशासन के माध्यम से किया जाएगा। स्थानीय प्रशासनिक इकाइयों ने कई सीमावर्ती ब्लॉकों में भूमि मालिकों के साथ परामर्श प्रक्रिया भी शुरू कर दी है, जिसमें मुर्शिदाबाद जैसे क्षेत्रों में सीमा से सटे गांवों में प्रारंभिक बैठकें शामिल हैं।