नयी दिल्ली । केंद्र सरकार ने ईथेनॉल मिश्रित पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क को पूरी तरह से हटा दिया है। यह शुल्क छूट पेट्रोल के ई22, ई25, ई27 और ई30 संस्करणों पर लागू होगी।
वित्त मंत्रालय ने इस संबंध में बुधवार को एक अधिसूचना में जानकारी दी है कि 22 फीसदी से लेकर 30 फीसदी तक ईथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी) से पूरी तरह मुक्त कर दिया गया है। अधिसूचना के मुताबिक 22, 25, 27 और 30 फीसदी ईथेनॉल मिश्रण वाले पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क ‘शून्य’ होगा। यह उत्पाद शुल्क छूट ग्राहकों को ईथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल की ओर प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से की गई है। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल एवं गैस विपणन कंपनियों के मई के दूसरे पखवाड़े में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगभग 7.50 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी के बाद सरकार ने यह कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने मार्च में पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क 10 रुपये प्रति लीटर घटाया था, जिससे उसने वार्षिक राजस्व में एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का घाटा उठाया था। सरकार ने यह कदम पश्चिम एशिया संकट के बीच वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से घरेलू उपभोक्ताओं को बचाने के उद्देश्य से लिया था।
केंद्र ने ईथेनॉल मिश्रित पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क घटाकर शून्य किया
बंगाल विधानसभा भी होगी पेपरलेस
-‘नेवा’ परियोजना से जुड़ेगा पूरा कामकाज
-नए विधायकों को दिया जाएगा विशेष प्रशिक्षण
कोलकाता । पश्चिम बंगाल विधानसभा का कामकाज आने वाले समय में पूरी तरह डिजिटल और पेपरलेस होने जा रहा है। विधानसभा अध्यक्ष रथीन्द्रनाथ बोस ने गुरुवार को बताया कि केंद्र सरकार की ‘राष्ट्रीय ई-विधान एप्लिकेशन’ (नेवा) परियोजना के अनुरूप राज्य विधानसभा में भी डिजिटल व्यवस्था लागू की जाएगी। इसके साथ ही नए विधायकों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला समेत अन्य राज्यों के विधानसभा अध्यक्ष भी हिस्सा लेंगे।
अध्यक्ष रथीन्द्रनाथ बोस ने कहा कि वर्तमान विधानसभा में लगभग 200 नए विधायक हैं। उन्हें संसदीय प्रक्रियाओं और डिजिटल प्रणाली की जानकारी देने के लिए बजट सत्र के बाद प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस प्रशिक्षण में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के अलावा उत्तर प्रदेश और राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष भी उपस्थित रहेंगे और विधायकों को मार्गदर्शन देंगे।
उन्होंने बताया कि विधानसभा में ई-विधान व्यवस्था लागू होने के बाद सदन की अधिकांश प्रक्रियाएं डिजिटल माध्यम से संचालित होंगी। इससे विधानसभा का कामकाज पूरी तरह पेपरलेस बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया जाएगा। डिजिटल व्यवस्था लागू होने से आम नागरिकों को भी विधानसभा की गतिविधियों, दस्तावेजों और सूचनाओं तक अधिक सहज पहुंच मिल सकेगी। अध्यक्ष के अनुसार, इस पहल का मुख्य उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को अधिक जवाबदेह बनाना है।
उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार लंबे समय से देश की संसद और सभी राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों की विधानसभाओं को ‘नेवा’ परियोजना से जोड़ने का प्रयास कर रही है। लगभग पांच वर्ष पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तत्कालीन तृणमूल कांग्रेस सरकार से भी इस परियोजना में शामिल होने का आग्रह किया था, लेकिन उस समय राज्य सरकार ने इसमें भागीदारी नहीं की थी।
राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली सरकार ने पदभार संभालने के कुछ ही समय बाद केंद्र सरकार के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर कर पश्चिम बंगाल को ‘नेवा’ परियोजना से जोड़ने का निर्णय लिया।
‘नेवा’ प्रणाली के माध्यम से सांसद और विधायक नोटिस जमा करने, प्रश्न प्रस्तुत करने, प्रस्ताव रखने तथा अन्य संसदीय कार्य डिजिटल तरीके से कर सकेंगे। इसके अलावा आम नागरिक भी इस मंच के जरिए विधानसभा की कार्यवाही पर नजर रख सकेंगे, सुझाव और टिप्पणियां दर्ज करा सकेंगे तथा सदन की कार्यवाही का सीधा प्रसारण देख सकेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस डिजिटल व्यवस्था के लागू होने से विधानसभा की कार्यप्रणाली निर्धारित नियम पुस्तिका के अनुरूप संचालित करने में अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होगी।
नौ शक्तियों का सायुज्य पर्व – नव दुर्गा नव रूप

डॉ वसुंधरा मिश्र की सद्यप्रकाशित कथा काव्य संग्रह ‘नव दुर्गा नव रूप ‘ पठनीय कविताओं का संग्रह है। भारतीय संस्कृति में मां दुर्गा को स्त्री शक्तियों के प्रतीक के रूप में देखा गया है। जहां स्त्री भी पूज्य है। नवरात्र में नौ दिनों की पूजा वस्तुत: नौ शक्तियों की पूजा है। डॉ वसुंधरा मिश्र ने नौ शक्तियों पर अपनी कविताओं के माध्यम से संदेश दिया है कि स्त्री भी अपनी प्रतिभा से अपनी शक्ति को उद्घाटित कर सकती है।
नवरात्र नव शक्तियों के सायुज्य का पर्व है जिसकी एक-एक तिथि में एक-एक शक्ति प्रतिष्ठित रहती है।दुर्गा प्रकृति का ही रूप है।एक साधारण स्त्री सिद्धिदात्री मां क्यों नहीं बन सकती?ये पुरुष और स्त्री ऊर्जाओं शिव शक्ति के संतुलन और सामंजस्य की प्रतीक है। डॉ वसुंधरा मिश्र की सिद्धिदात्री पर कविता ‘प्रकृति रूप स्त्री’ में ये पंक्तियां साधारण स्त्री बहुत ही उद्वेलित करती हैं -नव शक्तियों का सायुज्य है दुर्गा/प्रकृति से उत्पन्न प्रकृति को समर्पित ‘
अवतरित होती ऊर्जा और तेज के संचार को जीवन का लक्ष्य बनाना होगा ।’अंध विकासवाद के नाम पर प्रकृति को संरक्षित करना होगा ‘(पृष्ठ61नव दुर्गा नव रूप)जो इस काव्य संग्रह की विशिष्टता है।
स्त्री को अपनी शक्ति का विस्तार करना होगा सभी सिद्धियां प्राप्त करने के लिए त्याग, समर्पण और शक्ति को अपनाना होगा। स्त्री ही भारत के खोए हुए आदर्श और संस्कारों को पुनर्जीवित कर सकती है। वह सिद्धिदात्री बन सकती है। वह स्त्री है, देवी रूप है ,प्रकृति रूप है । मां महागौरी के संबंध में डॉक्टर वसुंधरा मिश्र कहती हैं कि लौकिक जगत में रहने वालों को अपनी’ सुरक्षा स्वयं करनी होगी, भले ही इसके लिए प्रशासन को बदलना हो, लड़ना होगा /समाज और संस्कृति की निरंतर छटाई करनी होगी/ कबीर ने कहा था साधु बनना है तो थोथा को उड़ाना होगा/ युगानुररूप कदम उठाने होंगे/ पहल स्त्री को ही करनी होगी, वह महागौरी है ‘ (पृष्ठ 58)।
प्रकृति की गोद में बड़े-बड़े खतरों को झेलती प्राणों की आहुति देवी को भी देनी पड़ी ,भले ही आज की स्त्री के हाथों में शंख चक्र गदा नहीं है लेकिन वास्तविक जीवन की बुद्धि और चेतना से हासिल कर सकती है। ‘शैलपुत्री कहलाती हो भीतर ही रहती हो ‘में कहती हैं –‘चट्टानों को पिघला देती हो/ राक्षसों को सबक सिखाती हो/ सृष्टि की रचना हो /तुम शैलपुत्री कहलाती हो/ भीतर ही रहती हो।’
यह काव्य संग्रह एक शोध युक्त कविताओं के माध्यम से मां दुर्गा के नौ शक्तियों को समझने में सहायक है। अध्यात्म एवं विज्ञान से जुड़ा यह काव्य संग्रह वर्तमान स्थितियों में स्त्री का नवदुर्गा के रूप में स्थापित कर प्रेरक संदेश देता है ।
नारी की शक्तियों को जागृत करना इस छोटी- सी पुस्तक की बड़ी उपलब्धि है।
जमीन पर उतरना होगा /दुष्कर्म करने वालों का अतिक्रमण कर/ मां कालरात्रि की पहचान बन/ घर-घर को रौशन करने का संकल्प लेना होगा ‘(पृष्ठ52)।’कात्यायनी की तरह बनना होगा’कविता में कवयित्री कहती है -‘हर उम्र में प्रशिक्षण लेना/दैत्यों को ठिकाने लगाना होगा/ समाज की पुनर्स्थापना के लिए ठोस कदम उठाना होगा/ धर्म की इस पुण्य धरती को स्वर्ग बनाना होगा।'(पृष्ठ 47) स्कंदमाता के लिए वह कहती हैं -कहते हैं ,देर है अंधेर नहीं है/ विश्वास और आस्था पर यह धरती टिकी हुई है ‘(पृष्ठ 43)।
कुष्मांडा के विषय में स्त्रियों को ललकारती हैं – ‘किस दुर्गा की बात करें /लौकिक -अलौकिक के भंवर जाल में/ स्त्री को बिठा दिया मंदिर में /सृष्टि का संचालक बन /पुरुष बना सत्ता शासक /स्वयं फंस गई स्त्री जाति /पूजा अर्चन के जंगल में/मनुष्यता के मूल मंत्र भूल/ आडंबर में हुई लीन ‘(पृष्ठ 37-38)चंद्रघंटा के विषय में कहती हैं- द्वंदों और संघर्षों को तोड़ने वाली /जीतने वाली स्त्री एक अच्छी मां भी है /सत्य रज तम को नियंत्रित करती /स्त्री दैवीय शक्तियों का पुंज है,वही चंद्रघंटा है (पृष्ठ 34)।
शुभ सृजन प्रकाशन द्वारा 2026 में प्रकाशित इस काव्य संग्रह का आईएसबीएन नंबर 978-81-968088-4-6 है।
अब मनमाने आकार में नहीं बिकेगा खाने का तेल
– सरकार ने तय किए 9 स्टैंडर्ड साइज
– कंपनियों को 3 महीने का समय
नयी दिल्ली । अगर आप घर के लिए सरसों, सोयाबीन, सूरजमुखी या अन्य खाद्य तेल खरीदते हैं तो यह खबर आपके लिए महत्वपूर्ण है। केंद्र सरकार ने खाने के तेल की पैकेजिंग को लेकर नया नियम लागू किया है। इसके तहत अब खाद्य तेल कंपनियों और आयातकों को अपने उत्पाद केवल तय मानक पैक साइज में ही बेचने होंगे। सरकार का कहना है कि इस कदम से ग्राहकों को अलग-अलग ब्रांडों के तेल की कीमतों की तुलना करने में आसानी होगी और बाजार में पारदर्शिता बढ़ेगी। नए नियम के मुताबिक खाद्य तेलों की पैकेजिंग केवल नौ मानक आकारों में की जा सकेगी। ये पैक साइज 200 मिलीलीटर से लेकर 20 लीटर तक होंगे। अभी बाजार में कई कंपनियां अलग-अलग और असामान्य आकार के पैक बेचती हैं, जिससे उपभोक्ताओं के लिए यह समझना मुश्किल हो जाता है कि कौन-सा ब्रांड वास्तव में सस्ता या बेहतर है। सरकार का मानना है कि एक समान पैक साइज होने से कीमतों की तुलना आसान होगी। यह नियम देश में बनने वाले और विदेश से आयात होने वाले सभी प्रमुख खाद्य तेलों पर लागू होगा। इनमें शामिल हैं – पाम ऑयल, सोयाबीन तेल, सूरजमुखी तेल,सरसों का तेल, मूंगफली का तेल । इसके अलावा अन्य प्रमुख खाद्य तेल भी इस नियम के दायरे में आएंगे।
कंपनियों को मिला तीन महीने का समय – सरकार ने खाद्य तेल कंपनियों और आयातकों को नए नियमों के अनुसार पैकेजिंग बदलने के लिए तीन महीने का समय दिया है। इस अवधि के भीतर सभी कंपनियों को अपने उत्पादों को निर्धारित पैक साइज में उपलब्ध कराना होगा।
पैकेट पर वजन की जानकारी भी देनी होगी – सरकार ने यह भी तय किया है कि जिन पैकेजों में तेल की मात्रा लीटर या मिलीलीटर में लिखी जाती है, उन पर उसके बराबर वजन की जानकारी भी देनी होगी। इससे ग्राहकों को यह समझने में और अधिक सुविधा होगी कि वे कितनी मात्रा का तेल खरीद रहे हैं और किस ब्रांड की कीमत बेहतर है।
छोटे पैक को मिली छूट – सरकार ने 200 मिलीलीटर से छोटे पैक और कुछ कम उपयोग वाले खाद्य तेलों को इस नियम से बाहर रखा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कम आय वाले उपभोक्ताओं के लिए सस्ते छोटे पैक बाजार में उपलब्ध बने रहें। उपभोक्ता मामले विभाग के अनुसार यह फैसला खाद्य तेल उद्योग से जुड़े संगठनों के साथ व्यापक चर्चा के बाद लिया गया है। सरकार का दावा है कि जिन संगठनों से बातचीत की गई, वे देश के लगभग 90 प्रतिशत खाद्य तेल कारोबार का प्रतिनिधित्व करते हैं। सरकार का मानना है कि यह कदम उपभोक्ताओं के हित में है और इससे बाजार में पारदर्शिता बढ़ेगी। साथ ही ग्राहकों को अलग-अलग ब्रांडों के बीच सही तुलना कर बेहतर विकल्प चुनने में मदद मिलेगी।
बंगाल में 1 लाख करोड़ रुपये की रेलवे परियोजनाएं लागू होंगी
कोलकाता, नि.स. । पश्चिम बंगाल में आने वाले समय में भारतीय रेलवे करीब 1 लाख करोड़ रुपये की रेलवे अवसंरचना परियोजनाओं को लागू करेगा। यह जानकारी मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शनिवार को राज्य सचिवालय नबान्न में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के साथ बैठक के बाद दी। मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद राज्य का प्रत्येक जिला बेहतर रेल नेटवर्क से जुड़ जाएगा। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार के दौरान राज्य और केंद्र के बीच टकराव की स्थिति बनी रहने के कारण कई रेलवे परियोजनाएं समय पर पूरी नहीं हो सकीं, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं और परियोजनाओं पर तेजी से काम किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि रेलवे बोर्ड और रेल मंत्रालय ने लंबित परियोजनाओं के संबंध में पिछली सरकार को कई बार पत्र भेजे थे, लेकिन उस पर कोई जवाब नहीं मिला। इसके बावजूद पिछले पांच वर्षों में पश्चिम बंगाल में मेट्रो और विभिन्न रेल परियोजनाओं के लिए 4,380 करोड़ रुपये आवंटित किए गए। वहीं, वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 14,205 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि अब राज्य में कुल 1 लाख करोड़ रुपये की रेलवे परियोजनाओं पर काम होगा।
उन्होंने बताया कि राज्य में आने वाले समय में 102 अमृत भारत रेलवे स्टेशन और 538 फ्लाईओवर एवं अंडरपास बनाए जाएंगे। जहां भी भूमि की आवश्यकता होगी, राज्य सरकार उसे उपलब्ध कराएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अभी पश्चिम बंगाल के कुछ इलाके रेल नेटवर्क से पर्याप्त रूप से नहीं जुड़े हैं, लेकिन अब करीमपुर, तेहट्टा, जलंगी, गोपीबल्लभपुर, नयाग्राम और हिली समेत राज्य के सभी क्षेत्रों को रेलवे मानचित्र से जोड़ा जाएगा। उत्तर बंगाल, दक्षिण बंगाल और जंगलमहल क्षेत्र में भी रेल संपर्क मजबूत किया जाएगा, जिससे आम लोगों को बड़ा लाभ मिलेगा।
इससे पहले शनिवार को रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि पश्चिम बंगाल में बुलेट ट्रेन सेवा भी शुरू की जाएगी। उन्होंने बताया कि यह बुलेट ट्रेन नई दिल्ली से लखनऊ, वाराणसी और पटना होते हुए उत्तर बंगाल के सिलीगुड़ी तक जाएगी और पूरा सफर महज छह घंटे में तय किया जा सकेगा।
रेल मंत्री ने यह भी घोषणा की कि अगले पांच वर्षों में पश्चिम बंगाल में 60 नई ट्रेन सेवाएं शुरू की जाएंगी, जिससे राज्य के रेल संपर्क और यातायात व्यवस्था को और मजबूती मिलेगी।
अंडमान में प्राकृतिक गैस का नया भंडार मिला
-केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने साझा की जानकारी
नयी दिल्ली । अंडमान द्वीप के गहरे समुद्र में प्राकृतिक गैस का एक बड़ा भंडार मिला है। भारत सरकार की नवरत्न कंपनी ऑयल इंडिया लिमिटेड ने प्राकृतिक गैस की मौजूदगी का पता लगाया है। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने आधिकारिक तौर पर इस महत्वपूर्ण खोज की जानकारी साझा की। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ‘अंडमान सागर में ऊर्जा संभावनाओं का विशाल समुद्र और मजबूत हुआ है। श्री विजयपुरम-3 में प्राकृतिक गैस की मौजूदगी की पुष्टि बेहद उत्साहजनक है। उल्लेखनीय है कि यह खोज ‘श्री विजयपुरम-3’ नामक खोजी कुएं में हुई है, जो अंडमान द्वीपसमूह के पूर्वी तट से लगभग 15 किलोमीटर दूर स्थित है। यह कुआं समुद्र में 355 मीटर गहराई वाले क्षेत्र में ड्रिल किया गया था। कंपनी ने 1900 मीटर से अधिक गहराई तक ईओसीन संरचना में ड्रिलिंग की, जहां शुरुआती परीक्षण के दौरान लगातार गैस फ्लेयरिंग देखी गई, जिससे प्राकृतिक गैस की मौजूदगी की पुष्टि हुई।
कोलकाता में जल मेट्रो सेवा शुरू
कोलकाता । पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने गुरुवार को राज्य में जल परिवहन व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए कोलकाता में जल मेट्रो सेवा शुरू करने की घोषणा की। सचिवालय में केंद्रीय जहाजरानी मंत्री सर्वानंद सोनोवाल के साथ हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद उन्होंने यह जानकारी दी। इस बैठक में राज्य और केंद्र के बीच जलमार्ग और बंदरगाह विकास से जुड़े कई अहम मुद्दों पर सहमति बनी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि कोलकाता में जल मेट्रो परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा, जिससे शहर के नदी मार्गों पर यातायात को अधिक सुविधाजनक और आधुनिक बनाया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि यह पहल राज्य में जल परिवहन के नए युग की शुरुआत करेगी और शहरी यातायात पर दबाव को भी कम करने में मदद करेगी। बैठक के दौरान यह भी निर्णय लिया गया कि राज्य में कुल 44 जेटियों का निर्माण किया जाएगा, जबकि राष्ट्रीय जलमार्ग के लिए 25 जेटियों का निर्माण अंतिम चरण में है। इसके अलावा बागबाजार, अहिरीटोला, शोभाबाजार, मल्लिकघाट, रामकृष्णघाट और बांधाघाट जैसे प्रमुख घाटों के सौंदर्यीकरण और मरम्मत का कार्य शुरू कर दिया गया है, जिसे दुर्गा पूजा से पहले पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री ने गंगासागर मेले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विकसित करने की योजना पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि कपिलमुनि आश्रम के आसपास के तटीय क्षेत्र का विकास किया जाएगा ताकि तीर्थयात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें और पर्यटन को भी बढ़ावा मिले।
इसके साथ ही कोलकाता बंदरगाह क्षेत्र में अवैध कब्जों और गैरकानूनी गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए हैं। राज्य सरकार का कहना है कि बंदरगाह क्षेत्र में अनुशासन और पारदर्शिता सुनिश्चित करना प्राथमिकता होगी।
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि ताजपुर में प्रस्तावित बंदरगाह परियोजना के लिए पर्याप्त भूमि उपलब्ध नहीं होने के कारण अब इसे दादनपात्रघाट में विकसित करने का निर्णय लिया गया है। यह स्थान ताजपुर से लगभग 10 किलोमीटर दूर है और यहां लगभग 1700 एकड़ भूमि उपलब्ध है, जिससे एक गहरे समुद्री बंदरगाह का निर्माण आसान होगा। राज्य सरकार का मानना है कि इन सभी परियोजनाओं से पश्चिम बंगाल में जल परिवहन, व्यापार और लॉजिस्टिक्स को नई दिशा मिलेगी तथा रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
दिग्गज गायिका सुमन कल्याणपुर का निधन
मुम्बई । अपनी आवाज का जादू बिखेरने वाली दिग्गज प्लेबैक सिंगर सुमन कल्याणपुर का गत 31 मई को निधन हो गया है। उन्होंने 89 साल की उम्र में मुंबई स्थित अपने घर पर अंतिम सांस ली। उन्होंने पहले सुमन हेमदी नाम से गाने गाए थे। हालांकि, शादी के बाद उन्होंने सुमन कल्याणपुर के नाम से अपनी पहचान बनाई और गीतों को अवाज दी। सुमन कल्याणपुर का जन्म 28 जनवरी 1937 अविभाजित भारत (अब बांग्लादेश) के भवानीपुर में हुआ था। शादी से पहले उन्होंने सुमन हेमदी नाम से कई गीत गाए। उन्होंने महान कवि जी. डी. माडगुलकर के गीत (गदिमा) से मराठी संगीत में अपनी शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने ‘निम्बोनिचा ज़दामागे’, ‘अरे संसार संसार’, ‘केतकिचा बानी तिथे नचला मोर’ और ‘रिमझिम झरती श्रवणधारा’ जैसे एक के बाद एक कई यादगार मराठी गीतों को अपनी आवाज दी। ये गाने आज भी महाराष्ट्र में काफी पॉपुलर हैं। सुमन कल्याणपुर ने न केवल मराठी में बल्कि हिंदी, गुजराती और बंगाली में भी हजारों गीत गाए। संगीत के क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें 2023 में देश के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कारों में से एक ‘पद्म भूषण’ से सम्मानित किया। बढ़ती उम्र के कारण वे कुछ समय से कला जगत से दूर थीं। उनके निधन की खबर फैलते ही पूरा फिल्म उद्योग और लाखों संगीत प्रेमी शोक में डूब गए।
देश के 10 सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में बंगाल के आठ शहर शामिल
कोलकाता । विश्व पर्यावरण दिवस की पूर्व संध्या पर पश्चिम बंगाल के लिए वायु प्रदूषण को लेकर एक गंभीर चेतावनी सामने आई है। गुरुवार दोपहर जारी रीयल-टाइम आंकड़ों के अनुसार देश के 10 सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में से आठ पश्चिम बंगाल के हैं। यह स्थिति राज्य में पर्यावरणीय चुनौतियों और वायु गुणवत्ता को लेकर बढ़ती चिंताओं को उजागर करती है।
स्विस वायु गुणवत्ता निगरानी संस्था आईक्यूएयर की रीयल-टाइम “मोस्ट पॉल्यूटेड सिटी रैंकिंग” के अनुसार पश्चिम बंगाल का कूचबिहार 176 वायु गुणवत्ता सूचकांक के साथ देश का सर्वाधिक प्रदूषित शहर दर्ज किया गया। सूची में दूसरे स्थान पर इस्लामपुर (172 वायु गुणवत्ता सूचकांक), चौथे स्थान पर उला (167), पांचवें स्थान पर रायगंज (166), छठे स्थान पर रिषड़ा(165), सातवें स्थान पर टिटागढ़ (165), आठवें स्थान पर मसिला (163), नौवें स्थान पर कांदी (159) और दसवें स्थान पर कटवा (158) शामिल हैं। सूची में तीसरे स्थान पर बिहार का किशनगंज (172) रहा।
वायु गुणवत्ता सूचकांक के मानकों के अनुसार 151 से 200 के बीच का स्तर “अस्वास्थ्यकर” श्रेणी में आता है। इस स्तर की हवा बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं तथा दमा और अन्य श्वसन संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए विशेष रूप से हानिकारक मानी जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार लंबे समय तक ऐसी हवा के संपर्क में रहने से स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ सकते हैं।
चिंता की बात यह है कि देश के सबसे प्रदूषित 10 शहरों में पश्चिम बंगाल के आठ शहरों का शामिल होना राज्य में पर्यावरणीय चुनौतियों की गंभीरता को दर्शाता है। उत्तर बंगाल से लेकर दक्षिण बंगाल तक कई शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर खराब श्रेणी में पहुंच गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण, वाहनों की संख्या में लगातार वृद्धि, निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल, औद्योगिक उत्सर्जन और पर्यावरणीय नियमों के प्रभावी अनुपालन की कमी के कारण वायु प्रदूषण की समस्या गंभीर होती जा रही है। पर्यावरणविदों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में यह समस्या और विकराल रूप ले सकती है।
विश्व पर्यावरण दिवस पर जहां सरकारें और विभिन्न सामाजिक संगठन पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने की तैयारी कर रहे हैं, वहीं पश्चिम बंगाल के शहरों की यह स्थिति कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल जागरूकता अभियान चलाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए प्रशासन, स्थानीय निकायों, उद्योगों और आम नागरिकों को मिलकर ठोस तथा दीर्घकालिक कदम उठाने होंगे।
पर्यावरण दिवस से ठीक पहले सामने आए ये आंकड़े इस बात की याद दिलाते हैं कि स्वच्छ हवा केवल पर्यावरण का ही नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य का भी सबसे बड़ा मुद्दा बन चुकी है। पश्चिम बंगाल के शहरों की यह स्थिति सरकार, प्रशासन और समाज सभी के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
साहित्यिकी की सदस्याओं ने साझा किए स्वरचित संस्मरण
कोलकाता । साहित्यिकी संस्था की सदस्याओं ने अपने-अपने संस्मरणों को साझा किए जो गागर में सागर की तरह सभी श्रोता सदस्याओं के भावों से जुड़े रहे।इस कार्यक्रम की अध्यक्षता कुसुम जैन और संचालन विद्या भंडारी द्वारा किया गया। 28 मई को शाम 4.15 से ऑनलाइन हुए इस कार्यक्रम में बारह से अधिक संख्या में सदस्याओं ने भाग लिया।मीतू कनोडिया, वाणी मुरारका, नीता उपाध्याय, उर्मिला प्रसाद, संगीता चौधरी, रंजना, उषा सराफ, सुधा भार्गव, उमा झुनझुनवाला मौसमी प्रसाद गीता दूबे आदि ने अपने जीवन यात्रा की स्मृतियों को एक सृजनात्मक रूप देते हुए बहुत ही रोचक ढंग से संस्मरणों को सुनाया। ऑनलाइन कार्यक्रम होने से बैंगलुरु, ऑस्ट्रेलिया, वर्धमान, कोलकाता, हावड़ा से भी साहित्यिकी की सदस्याएं जुड़ी। दूर रहकर भी उनकी उपस्थिति ने संस्था को गरिमा प्रदान की ।सुधा भार्गव ने बैंगलुरू से अपना संस्मरण सुनाया जिसमें स्ट्राबेरी फलों के देश कनाडा में उनके अनुभव और स्मृतियों के साथ उसके विषय में महत्वपूर्ण जानकारी भी दी। संगीता चौधरी ने उनके बेटे को रेलवे स्टेशन पर गिर कर फिर उसे जीवित पाकर खोने का कैसा अनुभव हुआ बताया जो आप बीती मार्मिक घटना थी। उमा झुनझुनवाला ने कविता के माध्यम से अपनी यादों को साझा किया जो उनके प्रिय पति के प्रति प्रेम की पराकाष्ठा थी। नीता उपाध्याय ने अपनी बचपन की शरारतों से कैसे अपने गुरु को खो दिया जिसका परिणाम पश्चात्ताप में बदल जाता है। वानी मुरारका ने अमरिका की यात्रा के दौरान अपनी मित्र सामाजिक कार्यकर्ती जेन के साथ भारत और विदेश के विवाह जैसी संस्था के सात वचनों पर बात करना क्या भारतीय पति पत्नी मित्रवत रहते हैं? जिसका जवाब अनुत्तरित ही रहता है। उषा श्राफ ने तीन सहेलियों के साथ वारिश में जिस युवा के घर में शरण ली उनमें से एक सहेली ने उससे पहली नजर में प्यार कर बैठी और फिर उसी से विवाह भी करती है। ऐसे ही बहुत से संस्मरणों को सुना गया। कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।




