Sunday, July 5, 2026
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दुर्गापूजा पर सेन्को गोल्ड एंड डायमंड्स लाया गॉसिप कलेक्शन

कोलकाता । अग्रणी अखिल भारतीय आभूषण खुदरा विक्रेता, सेंको गोल्ड एंड डायमंड्स ने अपने गॉसिप ब्रांड के तहत तेजी से आगे बढ़ने वाले, फैशनेबल और उत्सव संग्रह को बढ़ावा देने के लिए एक नया दुर्गा पूजा अभियान शुरू करने की घोषणा की। पहनने में आसान चांदी के आभूषणया प्रचार अभियान फिल्म दुर्गा पूजा के दौरान बंगालियों की घर वापसी की भावना और भावुक उत्साह को दर्शाता है, जो परंपरा और आधुनिकता के सही मिश्रण को उजागर करती है जो उत्सवों के साथ-साथ आभूषण डिजाइनों में भी दिखाई देती है।

अभियान फिल्म एक आधुनिक युवा महिला पर आधारित है जो एक अलग शहर में रहती है और काम करती है, लेकिन अपनी बंगाली जड़ों का जश्न मनाने के लिए दुर्गा पूजा के दौरान कोलकाता आती है, और अपने परिवार के सदस्यों के लिए एक यादगार उपहार के रूप में सेनको गोल्ड एंड डायमंड्स के गॉसिप आभूषण लाती है।

पृष्ठभूमि में संगीत जो क्लासिक रवीन्द्र संगीत का ताज़ा रूप है। सेनको गोल्ड एंड डायमंड्स की निदेशक और विपणन एवं डिजाइन प्रमुख श्रीमती जोइता सेन ने कहा, “दुर्गा पूजा सिर्फ एक त्योहार से कहीं अधिक है, यह एक ऐसा अवसर है जो पूरे भारत में बंगालियों को एकजुट करता है। दुर्गा पूजा की सुंदरता और भावना ऐसी है कि इसे परिवार और दोस्तों के साथ बिताने पर सबसे अच्छा आनंद मिलता है। हमारा गॉसिप अभियान और संग्रह उन सभी बेटियों और महिलाओं को समर्पित है, जो मां दुर्गा के पृथ्वी पर अवतरण के अवसर पर अपने परिवारों और प्रियजनों के साथ फिर से जुड़ेंगी।” बैंग ऑन कंटेंट के निदेशक और सिनेमैटोग्राफर पियाश घोष ने कहा कि एक कलाकार के रूप में, हमारे पसंदीदा त्योहार की भावना को दर्शाते हुए, कलात्मकता का जश्न मनाने वाले उत्पादों को प्रदर्शित करना खुशी की बात है!
उत्सव की भावना को बढ़ाने के लिए, सेंको गोल्ड एंड डायमंड्स ने अपने ग्राहकों के लिए निम्नलिखित पेशकश की है: – • 3 खरीदें 1 मुफ्त पाएं ऑफर – ग्राहक गॉसिप रेंज पर 3 खरीद सकते हैं और आभूषण का 1 टुकड़ा बिल्कुल मुफ्त (सबसे कम कीमत पर मुफ्त) पा सकते हैं।
• मेकिंग चार्ज में छूट – ग्राहक चांदी के आभूषणों पर मेकिंग चार्ज में 10% की छूट का लाभ उठा सकते हैं

शुभजिता दुर्गोत्सव 2023 – मध्य कोलकाता के दो आकर्षक पूजा मंडप

यंग बॉयज़ क्लब के 54वें वर्ष में ‘देवी दुर्गा- ब्रम्हांड की शक्ति’ है थीम
कोलकाता । इस वर्ष दुर्गापूजा में यंग बॉयज़ क्लब के सदस्यों ने हमेशा की तरह प्रासंगिक और सामाजिक मुद्दों को थीम बनाकर मंडप निर्माण की कोशिश की है । इस वर्ष 54वें वर्ष में कमेटी के सदस्य “देवी दुर्गा – ब्रह्मांड की शक्ति” थीम पर मंडप का निर्माण कर रहे हैं। यह पूजा मंडप मध्य कोलकाता में तारा चंद दत्ता स्ट्रीट में सेंट्रल एवेन्यू और रवीन्द्र सरणी को जोड़ने वाले मार्गे में स्थित है। यहां दुर्गोत्सव का आयोजन इलाके के लोगों के लिए एक बड़ा आकर्षण का केंद्र है । हिंदू पौराणिक कथाओं में देवी दुर्गा को सबसे शक्तिशाली देवी माना गया है। सामान्य तौर पर दुर्गा की शक्ति को उनके 10 हाथों में अलग-अलग हथियार से दर्शाया जाता है। देवी दुर्गा की दस भुजाएं इस बात का प्रतीक हैं कि वह अपने भक्तों की सभी दिशाओं – आठ कोनों, आकाश और पृथ्वी से रक्षा करती हैं। उनके हाथ में इन 10 ग्लोब विराजमान है, जो यह दर्शाता है कि देवी दुर्गा पूरे पृथ्वी पर कैसे इन 10 ग्लोबों के जरिये अपने भक्तों को सभी कठिनाइयों और समस्याओं से बचा रही हैं। “वसुधैव कुटुंबकम” एक संस्कृत वाक्यांश है, जो महाउपनिषद जैसे हिंदू ग्रंथों में पाया जाता है, जिसका अर्थ है “विश्व एक परिवार है”।
मुख्य आयोजक राकेश सिंह ने कहा कि इस साल, यंग बॉयज़ क्लब की ओर से मंडप निर्माण के जरिये देवी दुर्गा की दिव्य शक्ति के अवतार को भक्तों के सामने लाने की कोशिश कर रहा है। मंडप के बाहर 32 फुट की मां दुर्गा की प्रतिमा भक्तों के बीच वैश्विक शक्ति के स्रोत के प्रतीक के रूप में विराजमान रहेगी। पूरे विश्व की शक्ति को देवी के साथ जुड़ाव को दर्शाने के लिए इस भव्य उँची प्रतिमा के 10 हाथों में 10 ग्लोब को रखा गया है। जो पूरे पृथ्वी में विभिन्न पहलुओं के प्रतीक होंगे । यहां देवी के दर्शन को आनेवाले लोगों को पंडाल के अंदर झिनुक की मदद से अत्याधुनिक डिजाइन एवं वर्क का जटिल काम देखने को मिलेगा। मंडप के भीतर देवी की मूर्ति भी झिनुक से बनी होगी। पिछले चार महीनों से इस आकर्षक मंडप को भव्य रूप देने का काम चल रहा है। यंग बॉयज़ क्लब के युवा अध्यक्ष श्री विक्रांत सिंह ने कहा, यहां आनेवाले लोगों को भारत की चंद्र विजय के उपलक्ष्य में मंडप के बाहर एक अतिरिक्त आकर्षण, चंद्रयान-3 के एक आकर्षक मॉडल देखने को मिलेगा।

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मोहम्मद अली पार्क का पंडाल होगा केदाननाथ मंदिर की प्रतिकृति

कोलकाता । मध्य कोलकाता में मोहम्मद अली पार्क के यूथ एसोसिएशन की ओर से की जानेवाली सबसे पुरानी एवं लोकप्रिय दुर्गापूजा में दर्शनार्थी इस वर्ष उत्तराखंड में स्थित एक अकल्पनीय दार्शनिक स्थल केदारनाथ मंदिर में खुद को पायेंगे। यह तीर्थस्थल देश के सबसे प्रसिद्ध स्थानों में से एक माना गया है। इस वर्ष मोहम्मद अली पार्क के यूथ एसोसिएशन की दुर्गापूजा 55वें वर्ष में प्रवेश की है। कमेटी के सदस्यों का कहना है कि बाबा केदारनाथ के दर्शन के लिए उनके भक्त हमेशा उत्सुक रहते हैं। हालांकि, कुछ भाग्यशाली भक्तों को ही बाबा के दर तक पहुंचकर उनके दर्शन का सौभाग्य प्राप्त होता है। बाबा के दर्शन को लेकर भक्तों की इस उत्सुकता को देखते हुए पूजा आयोजन कमेटी के सदस्यों ने कोलकाता में ही बाबा केदारनाथ का भक्तों को दर्शन कराने की एक कोशिश की हैं। केदारनाथ मंदिर उत्तर भारत के पवित्र तीर्थस्थलों में से एक है। समुद्र तल से यह मंदिर 3584 मीटर की ऊंचाई पर मंदाकिनी नदी के तट पर स्थित है। केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के चार धामों और पंच केदारों में से एक है। यह भारत में भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक ज्योतिर्लिंग है।
सुरेंद्र कुमार शर्मा (महासचिव, मोहम्मद अली पार्क यूथ एसोसिएशन) ने कहा, दुर्गापूजा के पावन अवसर पर हम देवी दुर्गा के भव्य रूप के साथ यहां आनेवाले दर्शनार्थियों को बाबा केदारनाथ मंदिर में भी होने का अनुभव करायेंगे। कई लोगों को अबतक बाबा केदारनाथ मंदिर जाने का सौभाग्य नहीं प्राप्त हुआ है, वे इस पंडाल के माध्यम से बाबा केदारनाथ मंदिर की झलक देख बाबा तक अपनी पुकार पहुंचा सकते हैं। यहां आनेवाले भक्तों को इस मंडप में आकर शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक के भव्य दर्शन होंगे। पंडाल का बाहरी स्वरूप बिलकुल केदारनाथ मंदिर जैसा दिखेगा। इस साल मां की मूर्ति ‘शिव ही शक्ति हैं’ के आधार पर बनायी गयी है। देवी मां की भव्य मूर्ति को मिदनापुर के मशहूर शिल्पकार कुश बेरा बना रहे हैं। मंडप व इसके आसपास थीम के मुताबिक लाइटिंग की सजावट चंदननगर के कारीगरों द्वारा की गयी है।

विद्यासागर कॉलेज फॉर वीमेन पहुंचा लिटिल थेस्पियन का रंग अड्डा

कोलकाता । कोलकाता के विद्यासागर कॉलेज फॉर वीमेन तथा लिटिल थेस्पियन के सयुंक्त तत्वाधान से अठ्ठारवें रंग अड्डे का आयोजन किया गया है l यह आयोजन विद्यासागर कॉलेज फॉर वीमेन के सभागार में आयोजित किया गया । गत 10 अक्टूबर को आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में नाटक तथा रंगमंच के प्रति जागरूक करना है उनमें नाटक के प्रति लगाव पैदा हों सके l छात्र नाटक पढ़े ही नहीं बल्कि नाटक देखने की प्रवृत्ति भी उनमें जागे l एक अच्छा श्रोता ही एक अच्छा दर्शक भी होता है l लिटिल थेस्पियन की निदेशक उमा झुंझुनवाला की कल्पना और प्रयासों से ही छात्रों को नाटक से जोड़ना सहज हों पाया है l छात्र अभी तक केवल नाटक कहानी की भांति पढ़ते आये है इसीलिए उनके मन में नाटक के प्रति कोई विशेष लगाव दिखाई नहीं देती है l उनकी इसी मनोवृत्ति को दूर करने का प्रयास रंग अड्डे के माध्यम किया जा रहा है l विद्यासागर कॉलेज फॉर वीमेन इसकी तीसरी कड़ी है l इससे पहले लिटिल थेस्पियन ने आचार्य गिरीश चंद्र कॉलेज द्वारा आयोजित दो दिवसीय सेमिनार में रंगमंच की अवधारणा, हिन्दी रंगमंच और चुनौतियाँ विषय पर बोलने के लिए उमा झुंझुनवाला को आमंत्रित किया था। इसकी अगली कड़ी के रूप में महारानी कासीसवारी महाविद्यालय श्यामबाजार में राजेश जोशी के नाटक सपना मेरी यही सखी का अभिन्यात्मक पाठ किये था l यह एक ऐसी पहल है जिसके माध्यम से छात्रों को नाटक से जोड़ा जा सकता है तथा नाटक के प्रति उत्सुकता बढ़ाई जा सकती है जिसके लिए महाविद्यालय का सहयोग भी आवश्यक है उनके सहयोग के बिना यह मुमकिन नहीं है l यह रंग अड्डा माह में एक बार महाविद्यालय में आयोजित किया जायेगा l यह उन नाटककारों पर केंद्रित होता है जो उस माह में जन्म लिये है l इस रंग अड्डे के माध्यम से छात्रों में लिखने की प्रवृत्ति का विकास हों रहा है l छात्र अब आलेख तैयार कर रहे है l कॉलेज के हिंदी विभाग की प्रोफ़ेसर सूफिया यास्मीन और मधु मिश्रा ने लिटिल थेस्पियन के सदस्यों का स्वागत किया और इस कार्यक्रम का संचालन भी किया | आज के रंग अड्डे में विद्यासागर कॉलेज फॉर वीमेन की हिंदी विभाग की छात्रा सोनम कुमारी राय ने हबीब तनवीर तथा नेहा राय ने रामवृक्ष बेनीपुरी पर विवेचनात्मक आलेख प्रस्तुत किया l लिटिल थेस्पियन परिवार ने रामवृक्ष बेनीपुरी के नाटक रज़िया का अभिन्यात्मक पाठ निर्देशिका, कहानीकार, नाटककर, कवियित्री उमा झुंझुनवाला ने अपने कलाकारों सुधा गौड़, एनी दास राधा कुमारी ठाकुर के साथ किया तथा संगीत देने का कार्य पार्वती कुमारी शा ने संभाला l उमा जी ने घोषणा कि की लिटिल थेस्पियन रंगमंच पर आलेख लेखन प्रतियोगिता का आयोजन करेगा और चुनिंदा दस आलेखों को पुस्तक रूप में मुद्रित किया जायेगा l उन दस छात्रों को लिटिल थेस्पियंस के 13वें राष्ट्रीय नाट्य महोत्सव जश्न ए अज़हर 2024 में रंग संवाद में एक अलग सत्र दिया जाएगा जहां वे अपने आलेख का पाठ करेंगे |छात्र केवल नाटक ही नहीं देखेंगे बल्कि उससे जुड़ी अन्य बातों से भी अपना जुड़ाव महसूस कर पाएंगे l नाटक केवल अभिनय करना ही नहीं है बल्कि यह एक सामूहिक कार्य है यह वह करीब से समझ पाएंगे l अंत में विभाग के एच ओ डी डॉक्टर आसिफ आलम ने धन्यवाद ज्ञापन किया |
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युवाओं के लिए नाटक प्रतियोगिता आयोजित करेगा लिटिल थेस्पियन
लिटिल थेस्पियन ने युवा रंगकर्मियों के लिए एक नाटक प्रतियोगिता आयोजन करने का निर्णय लिया है, जिसमें उन्हें साथी कलाकारों के बीच मैत्रीपूर्ण प्रतिस्पर्धा के साथ-साथ अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने और अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर दिया जाएगा। यह प्रतियोगिता दिसंबर के आखिरी सप्ताह में आयोजित की जायेगी। हमारे युवाओं के बीच कला और संस्कृति का माहौल बनाने और रचनात्मकता और नवीनता की ओर उनकी नई भावना को प्रेरित करना लिटिल थेस्पियन का उद्देश्य है। श्रेष्ठ तीन समूहों को जनवरी में होने वाले जश्न ए अज़हर में भी प्रदर्शन का अवसर प्रदान किया जाएगा, इससे युवा रंगकर्मियों को विविध और उत्साही दर्शकों के सामने अपनी कला दिखाने का मौका मिलेगा। प्रतियोगिता में नाम रजिस्टर करवाने की अंतिम तिथि 31 अक्टूबर 2023 है। सभी नियम नीचे दिए गए पोस्टर में हैं।

भवानीपुर कॉलेज ने किया इंट्रा एम यू एन 2023 मॉडल परिचर्चा का आयोजन

कोलकाता । भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज ने दो समितियों, यूएनसीएसडब्ल्यू (महिलाओं की स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र आयोग), एआईपीपीएम (अखिल भारतीय राजनीतिक दलों की बैठक) के साथ, दो दिवसीय 23 और 24 सितंबर 2023 का एक इंट्रा एम यू एन सम्मेलन का आयोजन किया। आईपी ​​(इंटरनेशनल प्रेस) भी वहां था जो फोटोग्राफी और रिपोर्टिंग वर्टिकल का प्रतिनिधित्व करता था। इंट्रा एम यू एन 2023 का उद्घाटन समारोह डॉ.जीनल दरिया द्वारा आयोजित मानवाधिकारों पर एक सेमिनार के साथ शुरू जो वर्तमान में लंदन विश्वविद्यालय में एक संकाय हैं और एक मानवाधिकार के प्रति उत्साही हैं और बीईएससी एओएन के पायलट संस्करण के सलाहकार सदस्यों में से एक थीं। इस सेमिनार में सभी प्रतिनिधियों ने भाग लिया और मानवाधिकारों से संबंधित प्रासंगिक प्रश्न पूछे।
यूएनसीएसडब्ल्यू समिति की अध्यक्षता अमन सिन्हा और सोफिया परवीन ने की। एआईपीपीएम सम्मेलन का संचालन अंकित कुमार सिंह ने किया। पूजा डबराय प्रधान संपादक थीं और सग्निक घोष इंटरनेशनल प्रेस के फोटोग्राफी प्रमुख थे। इंट्रा एम यू एन 2023 में लगभग 100 उत्साही प्रतिनिधि विद्यार्थियों ने भाग लिया। कॉलेज परिसर के भीतर इस तरह के सम्मेलन को आयोजित करने का उद्देश्य कॉलेज के छात्रों को मॉडल यूनाइटेड नेशंस (एमयूएन) में भाग लेने के लिए बढ़ावा देना और प्रोत्साहित करना था। एमयूएन छात्रों को नेतृत्व कौशल, अनुसंधान, लेखन, सार्वजनिक बोलने और समस्या-समाधान कौशल विकसित करने में मदद करता है। प्रथम दिन 23 सितंबर 2023 को , यूएनसीएसडब्ल्यू के प्रतिनिधियों को यूएन फॉर रोप के बारे में जानकारी दी गई, जिसका दो दिनों तक पूरे सम्मेलन में पालन किया गया। पहले सत्र में, विभिन्न देशों का प्रतिनिधित्व करने वाले सभी प्रतिनिधियों ने एजेंडे में शामिल होने पर अपने रुख का प्रतिनिधित्व करते हुए अपने औपचारिक भाषण दिए। समिति। दूसरे सत्र में, प्रतिनिधियों ने स्वदेशी समूहों पर जोर देने के साथ राजनीतिक अस्थिरता की स्थितियों में महिलाओं के खिलाफ यौन हिंसा के मुद्दे पर विचार-विमर्श किया। मॉडरेट कॉकस के दौरान अपने भाषण में ऑस्ट्रिया, डेनमार्क, इज़राइल और चीन के प्रतिनिधियों ने अपने देश में स्वदेशी महिलाओं द्वारा सामना की जाने वाली विभिन्न प्रकार की यौन आधारित हिंसा और उनकी सरकार द्वारा उन्मूलन के लिए अपनाई गई नीतियों का उल्लेख किया। प्रत्येक भाषण के बाद पीओआई से पूछा गया और प्रतिनिधियों ने ईमानदारी से अपने देश और इसकी नीतियों का बचाव करते हुए उठाए गए सवालों का जवाब दिया। एआईपीपीएम सम्मेलन के पहले दिन ‘धार्मिक संघर्षों को कम करने के लिए यूसीसी (समान नागरिक संहिता) को लागू करने की उपयोगिता और व्यवहार्यता पर चर्चा और उसी के लिए एक योजना की रूपरेखा’ के एजेंडे के संबंध में शुरुआती वक्तव्य शुरू करने के लिए एक सर्वसम्मत प्रस्ताव पारित किया गया। सम्मेलन आम सहमति से शुरू हुआ जहां 13 सदस्यों ने यूसीसी का समर्थन किया और 5 सदस्य इसके खिलाफ थे। भाजपा और कांग्रेस दोनों नेताओं ने कई महत्वपूर्ण और ठोस मुद्दे उठाए थे और बार-बार चर्चा करते रहे कि भारत को यूसीसी की आवश्यकता क्यों है या नहीं। प्रतिनिधियों के अंतिम बयान ने आगे और पीछे के शॉट्स के लिए जगह खोल दी क्योंकि बीजेपी ने तर्क दिया कि विद्रोह इसलिए हुआ क्योंकि यूसीसी कार्यान्वयन का ध्यान रखा जाएगा, लेकिन यह निर्दिष्ट नहीं किया गया है कि यह कैसे किया जाएगा। कई तर्क-वितर्क के बाद, जहां हॉल में मर्यादा बनाए रखने के लिए मॉडरेटर को कई बार हस्तक्षेप करना पड़ा, पहले दिन का सत्र समाप्त हो गया और अगले ही दिन सत्र 3 में प्रश्नकाल शुरू करने का निर्णय लिया गया। सम्मेलन में हो रही चर्चा को कवर करने के लिए इंटरनेशनल प्रेस के पत्रकार और फोटोग्राफर मौजूद थे।
यूएनसीएसडब्ल्यू समिति में दूसरे दिन 24 सितंबर 2 बजकर 24 मिनट पर स्वदेशी समूहों पर विशेष जोर देने के साथ महिलाओं से संबंधित आर्थिक सशक्तिकरण, शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल और स्वच्छता को बढ़ावा देने पर चर्चा हुई। सभी प्रतिनिधियों ने अपने देश में इन क्षेत्रों से संबंधित विभिन्न मुद्दों के बारे में बात की। संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन, भारत और पाकिस्तान के प्रतिनिधियों के बीच तीखी बहस ने समिति में चर्चा के प्रवाह को सुविधाजनक बनाया। सभी प्रतिनिधियों ने भाषण में इन मुद्दों के संबंध में अपने देश के रुख पर जोर देने की कोशिश की और ऐसी नीतियां सुझाईं जो दुनिया भर में स्वदेशी महिलाओं के सामने आने वाली समस्याओं को हल करने में मदद कर सकती हैं। सत्र के अंत में सर्वसम्मति रिपोर्ट का मसौदा तैयार करने के लिए प्रतिनिधियों को 15 मिनट का एक अनियंत्रित कॉकस दिया गया था।
एआईपीपीएम सम्मेलन के दूसरे दिन, कांग्रेस ने गौरव गोगोई के साथ कश्मीर को आतंकवाद से बचाने की भाजपा की योजनाओं पर सवाल उठाते हुए सवालों का दौर शुरू किया। नितिन जी ने यह कहते हुए उत्तर दिया कि भाजपा के सत्ता में आने के बाद, कश्मीर में आतंकवादी घटनाओं में 68% की कमी आई है, जिसके कारण नितिन जी और गौरव गोगोई के बीच तीखी नोकझोंक हुई। कुल मिलाकर सम्मेलन किसी भी मुद्दे पर सहमति बनाने में विफल रहा।
प्रासंगिक बिंदु, क्योंकि प्रश्नकाल के दौरान कोई भी प्रतिनिधि एक-दूसरे पर निशाना साधने में असफल नहीं हुआ। ऑस्ट्रिया और डेनमार्क के प्रतिनिधियों को उच्च प्रशंसा, संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़राइल के प्रतिनिधियों को विशेष उल्लेख, चीन के प्रतिनिधि को सर्वश्रेष्ठ नवागंतुक पुरस्कार और दक्षिण अफ्रीका के प्रतिनिधियों को सम्मानजनक उल्लेख और ब्राज़ील. प्रतिनिधियों को एआईपीपीएम में पुरस्कारों से सम्मानित किया गया: सर्वश्रेष्ठ प्रतिनिधि का पुरस्कार अमित शाह को, गौरव गोगोई और नितिन गडकरी को उच्च प्रशंसा, बंदी संजय कुमार को विशेष उल्लेख और राहुल गांधी को सम्माननीय पुरस्कार दिया गया। रिपोर्टिंग के लिए सम्मानजनक उल्लेख जजीरा (वृंदा शर्मा) को, सर्वश्रेष्ठ नवागंतुक (रिपोर्टर) द गार्जियन (सप्तक घोष) को और सर्वश्रेष्ठ फोटोग्राफर का पुरस्कार पारस गुप्ता को मिला । इंट्रा एमयू एन 2023 ने छात्रों को नेतृत्व कौशल, अनुसंधान, लेखन, सार्वजनिक बोलने और समस्या-समाधान कौशल विकसित करने में मदद की पुरस्कृत किया गया । इसके अलावा, ऐसे समाधान लाने से जो अधिकांश प्रतिनिधियों को स्वीकार्य हों, बातचीत, संघर्ष समाधान और सहयोग के कौशल भी विकसित होते हैं।रिपोर्टिंग कासिस शॉ और फोटोग्राफी पारस गुप्ता, सुवम गुहा और अग्रग घोष ने की।कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने

राष्ट्र निर्माण मे महिलाओं की भूमिका और नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर परिचर्चा 

कोलकाता । भारत जैन महामंडल लेडिज विंग कोलकाता शाखा द्वारा सात अक्टूबर 2023 में विषय ‘नारीशक्ति वंदन अधिनियम के परिपेक्ष्य में राष्ट्र निर्माण मे महिलाओं की भूमिका’ पर भारतीय भाषा परिषद के छोटे सभागार में एक विशेष परिचर्चा का आयोजन किया गया। संस्थापक सलाहकार सरोज भंसाली और अंजू सेठिया ने कार्यक्रम की शुरुआत की। अध्यक्ष चंदा गोलछा ने सबका स्वागत किया। काफी महिलाओं ने अपने अपने विचार प्रकट किए। नवकार मंत्र कल्पना बाफना ममता पीचा, कविता सीमा बैद ,उषा बैद, जास्मिन, प्रमिला नाहर, निर्मला बागरेचा, सुनिता सेठिया, पल्लवी सेठिया, रेशम दुग्गड़ आदि ने विचार रखे। सरोज भंसाली ने आत्म साक्षात्कार पर गीत प्रस्तुति की। शब्दाक्षर की राष्ट्रीय मंत्री अनामिका सिंह ने महिलाओं की स्थिति पर अपने विचार व्यक्त किया। रचनाकार कवयित्री रीमा पांडे ने बेटियों पर गीत की प्रस्तुति दी । सुषमा छाजेड़ ने मुक्ता नैन का परिचय दिया।
आज के कार्यक्रम के मुख्य वक्ता बिड़ला स्कूल डायरेक्टर मुक्ता नैन, भवानीपुर कालेज प्रोफेसर डाक्टर वसुंधरा मिश्र, छपते छपते अखबार और ताजा टीवी डायरेक्टर वरिष्ठ पत्रकार श्री विश्वंभर नेवर रहे । मुक्त नैन ने स्त्री महिलाओं की समस्याओं और राजनीति में 33% की भागीदारी को सार्थक बताया। बंगाल में भी महिलाओं के लिए शौचालय और नर्सिग की व्यवस्था करने का विचार आरक्षण का ही परिणाम है। डॉक्टर वसुंधरा मिश्र ने अपने वक्तव्य में स्त्रियों की प्रतिभा पर विशेष ध्यान देने को कहा। आरक्षण अभी दूर है। जाति जनगणना के आधार पर अभी उसमें समय लगेगा। स्त्रियां शुरू से ही समाज की स्तंभ रही हैं। विशंभर नेवर ने अपने वक्तव्य द्वारा महिलाओं को संबोधित करते हुए 33 परसेंट की भागीदारी के साथ सरकार और राजनीति पर विशेष वक्तव्य दिया जो महिलाओं के लिए प्रेरणादायी रहा। महिलाओं को अंधविश्वास को छोड़ना होगा और अपने महिला संगठन को प्रमुख धारा में आना होगा। महिला आरक्षण सभी महिलाओं को आगे बढ़ने का अवसर देगी। राजनीति में महिला एक स्वस्थ वातावरण देने में सक्षम है। सुषमा छाजेड़ ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। भारत जैन महामंडल की अंजू सेठिया ने कार्यक्रम संचालन और धन्यवाद ज्ञापन दिया । कार्यक्रम के पश्चात चाय नाश्ते का सुंदर प्रबंध किया गया ।

भवानीपुर कॉलेज में जल से जीवन’ अभियान

कोलकाता । कहा गया है कि हज़ारों लोग प्रेम के बिना जीवित रह सकते हैं लेकिन पानी के बिना एक भी जीवित नहीं रह सकता। जल संरक्षण के इस उद्देश्य के साथ, भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज की एनएसएस इकाई हर साल पानी बचाने और उच्च लक्ष्य निर्धारित करने के लिए ‘जल से जीवन’ अभियान का एक नया अध्याय आयोजित करती है। इस वर्ष छात्र स्वयंसेवकों ने पेशेवर प्लंबरों के साथ पूरे कोलकाता में विभिन्न स्थानों के निवासियों का दौरा किया और लीक होने वाले नलों को रोकने के लिए मुफ्त सेवा की पेशकश की और स्वच्छ पानी को बचाने, भंडारण और उपभोग करने और डेंगू जैसी बीमारियों से सुरक्षित रहने के बारे में जानकारी दी । मलेरिया.शीतज्वर, विषमज्‍वर, जूड़ी आदि रोगों को रोकने के उपायों पर जोर दिया। इस अभियान में 5 टीमें थीं, जिनमें 2 स्वयंसेवकों के साथ-साथ एक प्लंबर भी शामिल था, जो उत्तर और दक्षिण कोलकाता दोनों के विभिन्न स्थानों पर गए और लगातार खराब मौसम की स्थिति के बावजूद 1117 घरों को कवर किया। छात्र निम्नलिखित क्षेत्रों में गए:पहले दिन (11.09.2023) – श्यामबाजार, महात्मा गांधी रोड, गिरीश पार्क, भवानीपुर, टॉलीगंज, कालीघाट – 170 आवासों का दौरा किया।
दूसरे दिन (12.09.2023) – बेलगछिया, दमदम, उल्टाडांगा, बेलेघाटा, हावड़ा – 240 आवासों का दौरा किया। तीसरे दिन (13.09.2023) – सियालदह, टॉप्सिया, जतिन दास पार्क, पार्क सर्कस, रवीन्द्र सरोवर – 360 आवासों का दौरा किया ।
चौथे दिन (27.09.2023) – रवीन्द्र सरोबार, रासबिहारी एवेन्यू, क्वेस्ट मॉल एरिया, लैंसडाउन एरिया, साउथ सिटी मॉल एरिया – 347 आवासों का दौरा किया । जल से जीवन परियोजना 2019 में 1000 घरों के लक्ष्य के साथ शुरू की गई थी और स्वयंसेवकों ने लक्ष्य का 40% हासिल किया और अगले सेट में शेष 600 घरों को हासिल करने का अनुमान लगाया। पिछले साल स्वयंसेवकों ने कुल 850 घरों का दौरा किया और इस साल गर्व से हमने अपने लक्ष्यों को पार कर लिया है और कुल 1117 घरों को कवर किया है।
इस पहल का उद्देश्य युवाओं में जिम्मेदारी की भावना पैदा करना और लोगों को पानी के महत्व और इसे बचाने के बारे में जागरूक करना है। सभी स्वयंसेवकों ने पिछले दिनों के अपने अनुभवों का आनंद लिया। प्रोफेसर दिलीप शाह, छात्र मामलों के डीन, प्रोफेसर मीनाक्षी चतुर्वेदी और कॉलेज के पूरे प्रबंधन को पूरे आयोजन में उनके अपार योगदान के कारण यह अभियान सक्रिय रूप से कार्यरत है। रिपोर्टिंग की कृपा सहल ने। इस कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।

भवानीपुर कॉलेज द्वारा आयोजित तीन दिवसीय इवेंट मैनेजमेंट कार्यशाला

कोलकाता । भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज ने इवेंट मैनेजमेंट कार्यशाला का आयोजन 1 अक्टूबर से 3 अक्टूबर 2023 तक जुबली हॉल में किया वैसे तो कॉलेज में वर्ष भर दो सौ से अधिक इवेंट्स का आयोजन किया जाता है लेकिन एक उद्योग के रूप में इवेंट मैनेजमेंट कार्यशाला का प्रथम बार स्नातक छात्रों के लिए इवेंट मैनेजमेंट उद्योग क्या है इस पर विचार रखे गए। तीन दिवसीय कार्यशाला में 6 सत्र शामिल थे, जिसमें प्रत्येक दिन 2 सत्र सुबह 10:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक और दोपहर 2.30 बजे से शाम 5 बजे तक आयोजित किए गए। कार्यशाला बहुत फायदेमंद साबित हुई क्योंकि इसने कॉलेज को इच्छुक स्वयंसेवक प्रदान किए, जो अब कॉलेज के विभिन्न कार्यक्रमों में स्वयंसेवक बनने के लिए अच्छी तरह से प्रशिक्षित होंगे। कार्यशाला के पहले दिन के पहले सत्र में, 300 से अधिक छात्र छात्राओं ने सुबह 9 बजे पंजीकरण करवाया और जुबली हॉल में प्रवेश करने के लिए एकत्र हुए। कार्यक्रम की शुरुआत गौरव बाजोरिया द्वारा छात्रों को इवेंट मैनेजमेंट की दुनिया से परिचित कराने के साथ हुई। पहले दिन के दूसरे भाग में दिन की शुरुआत 2.30 बजे हुई, जहां छात्रों को गौरव सर द्वारा 4 टीमों में बांटा गया और उन्हें विचार-विमर्श से लेकर उमंग महोत्सव तक का कार्यान्वयन किया गया। कार्यशाला के दूसरे दिन इसे प्रस्तुत करने का काम सौंपा गया था। 4 टीमों में टीम 1 (सेमेस्टर 5 के छात्र जो पिछले साल के उमंग में स्वयंसेवक थे), टीम 2 (सेमेस्टर 3 के छात्र जो पिछले साल के उमंग में स्वयंसेवक थे), टीम 3 (सेमेस्टर 1 के छात्र जो इस विचार में नए हैं) शामिल थे। उमंग के), और टीम 4 (सेमेस्टर 3 और 5 के छात्र जो स्वयंसेवक नहीं थे पिछले वर्ष के उमंग में)।दूसरे दिन पहली छमाही में, छात्र उमंग के लिए अपनी अवधारणा प्रस्तुत करने के लिए तैयार होकर कॉलेज में आए और उनका मूल्यांकन किया गया । तीसरे दिन, पहले सत्र में सम्मानित पैनलिस्टों के साथ एक इंटरैक्टिव सेमिनार आयोजित किया गया। काइल मुखर्जी (फ्रेंड्स ऑफ शिवा प्राइवेट लिमिटेड), विक्की तुलस्यान (मिराज नेटवर्क), निधि पोद्दार (एमराल्ड इवेंट्स), गौतम जैन (रियल रील प्राइवेट लिमिटेड), प्रेरणा खुल्लर (इवेंटज़िनस्पायर्ड) और सरनजीत सिंह (द सॉल्यूशनिस्ट) जिन्होंने इस कार्यक्रम का संचालन किया। अंततः कार्यशाला छात्रों से यह पूछे जाने के साथ समाप्त हुई कि वे भविष्य के आयोजनों में किन विभागों में शामिल होना चाहेंगे। 3 दिवसीय कार्यशाला ने टीम वर्क की मजबूत भावना पैदा करने में मदद की क्योंकि छात्रों ने एक साथ काम करना सीखा।रिपोर्टिंग की अनिकेत दासगुप्ता ने। इस कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।

शुभजिता हिन्दी दिवस विशेषांक

शुभजिता हिन्दी दिवस विशेषांक…युवाओं  की कलम से सजा…अन्य स्थायी स्तम्भ आपके समक्ष

ग्लोबल टीचर अवॉर्ड 2023 में बंगाल के दीप नारायण नायक नामांकित

बर्दवान /कोलकाता । पश्चिम बंगाल के प्राथमिक स्कूल के शिक्षक दीप नारायण नायक और आंध्र प्रदेश से अंग्रेजी के शिक्षक हरि कृष्ण पतचारू के नाम को ‘वैश्विक शिक्षक पुरस्कार 2023’ के लिए शीर्ष 50 लोगों की सूची में शामिल किये गए हैं। दीप नारायण नायक पश्चिम बंगाल एक सरकारी शिक्षक हैं। पश्चिम बर्दवान जिले के जामुड़िया गांव में तिलका माझी आदिबाशी फ्री प्राइमरी स्कूल में वह पढ़ाते हैं। उन्हें ‘रास्तार मास्टर’ के नाम से जाना जाता है। रास्तार मास्टर का मतलब है सड़कों का शिक्षक। इस 34 वर्षीय शिक्षक ने इलाके के बच्चों को शिक्षित करने के लिए कड़ी मेहनत की । कोरोना लॉकडाउन में जब दो साल तक बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हुई, ऑनलाइन लाइन क्लासेस लगीं तो यहां के बच्चों की पढ़ाई छूट गई। आदिवासी गांव में ऑनलाइन पढ़ाई के लिए बच्चों के पास मोबाइल नहीं था। आखिर दीप नारायण ने पहल की और महामारी लॉकडाउन के दौरान बच्चों को पढ़ाने के लिए गांव के घरों की दीवारों पर ब्लैकबोर्ड बना डाले । सड़कों को क्लासरूम में बदल दिया । देश भर के स्कूलों के बंद होने के बाद 45 दिनों बाद मई 2020 में नायक ने नीले आसमान के नीचे गांव के बच्चों को पढ़ाना शुरू किया। 6 बच्चों के साथ शुरू हुई क्लास में छात्र बढ़ते गए । अब पश्चिम बर्दवान 14 सड़क अध्ययन केंद्रों में 2,000 छात्र पढ़ रहे हैं। दीप नारायण ने बताया कि 2018 में राज्य सरकार ने उन्हें तिलका माजी आदिवासी फ्री प्राइमरी में शिक्षक नियुक्त किया था। तब से ही उन्होंने बच्चों को फ्री ट्यूशन देना शुरू कर दिया था। हालांकि, मार्च 2020 में स्कूलों के बंद होने के बाद, उन्होंने महसूस किया कि उनके अधिकांश छात्र डिजिटल उपकरणों का खर्च वहन नहीं कर सकते थे और इसलिए दिन गांव में घूमते हुए या मवेशियों को चराते हुए बिताते थे। उन्होंने बच्चों का भविष्य बचाने के लिए सड़क पर क्लासेस शुरू करने का फैसला लिया । दीप नारायण ने पेड़ों के नीचे और सड़क के कोनों पर अनौपचारिक कक्षाएं आयोजित करना शुरू कर दिया। जैसे-जैसे बच्चों की संख्या बढ़ती गई, उन्होंने गांव के घरों की मिट्टी की दीवारों को ब्लैकबोर्ड के रूप में उपयोग करने का फैसला किया और किताबें और मध्याह्न भोजन प्रदान करना शुरू कर दिया । उनकी पहल में उनकी पत्नी झूमा पात्रा ने भी साथ दिया। झूमा पश्चिम बर्धमान के रानीगंज गर्ल्स कॉलेज में बांग्ला की प्रोफेसर हैं। दीप की पहल में कुछ और लोग जुड़े और उनकी मदद के लिए हाथ बढ़ाया । दीप नारायण कहते हैं कि महामारी के दौरान भी उन्हें बिना काम किए सरकार से मासिक वेतन मिल रहा था लेकिन उन्हें बच्चों की फिक्र थी । मन बच्चों को लेकर अशांत था। जिन बच्चों को स्कूल में पढ़ाकर और ट्यूशन देकर उन्होंने शिक्षित किया, वह लॉकडाउन में सब भूल सकते थे। बच्चे पूरा दिन मवेशियों को चराते और गांव में घूमते फिरते थे। इसलिए उन्होंने बच्चों को सड़क पर ही पढ़ाने की ठानी। दीप नारायण नायक ने इस पहल को और विस्तारित किया और पश्चिम बर्धमान के 14 गांवों में अपने शिक्षण मॉडल को सफलतापूर्वक लागू करन रहे हैं। वह बांकुड़ा, पुरुलिया और मिदनापुर जिलों में भी इस तरह के केंद्र शुरू करने का विचार कर रहे हैं।

भारत की प्रथम मूक -बधिर अधिवक्ता बनीं सारा सनी, सीजेआई के समक्ष पेश किया मामला

नयी दिल्ली । पहली बार, एक श्रवण-बाधित वकील ने भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ के समक्ष अपने मामले पर बहस की, जिससे अधिक शारीरिक रूप से अक्षम वकीलों के लिए अपने मामलों की रक्षा करने का मार्ग प्रशस्त हो गया।सारा सनी ने शुक्रवार को एक भारतीय सांकेतिक भाषा दुभाषिया की मदद से अपना मामला पेश किया। वरिष्ठ वकील संचिता ऐन ने मुख्य न्यायाधीश चंद्रचूड़ से गुहार लगाई कि सारा को एक दुभाषिया के साथ अपने मामले पर बहस करने की अनुमति दी जाए। उन्होंने तुरंत अपनी सहमति दे दी । यह ऐतिहासिक क्षण नहीं आया होगा क्योंकि आभासी सुनवाई के प्रबंधन के लिए जिम्मेदार नियंत्रण कक्ष सारा और उसके दुभाषिया को समायोजित करने में झिझक रहा था। सीजेआई की मंजूरी के साथ, नियंत्रण कक्ष में सारा, जो बेंगलुरु में रहती हैं, और उनके दुभाषिया सौरव रॉयचौधरी भी वस्तुतः उपस्थित हुए।  जैसे ही सारा की बारी आई, उसका दुभाषिया आगे आया और उसके और दुनिया के बीच एक पुल के रूप में काम किया। इस प्रक्रिया में, उन्हें सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से प्रशंसा मिली, जिन्होंने कहा कि जिस गति से दुभाषिया सांकेतिक भाषा में अनुवाद कर रहा है वह अद्भुत है।  सारा के दृढ़ संकल्प ने और अधिक बाधाओं को तोड़ दिया है। सीजेआई ने, जब पिछले साल नवंबर में अपने पद की शपथ ली थी, तो कहा था, “शब्द नहीं, मेरा काम बोलेगा।” अपनी प्रतिबद्धता के अनुरूप, उन्होंने न्यायमूर्ति एसआर भट्ट की अध्यक्षता में “एक्सेसिबिलिटी पर एससी समिति” की स्थापना की। इस समिति का मिशन सुप्रीम कोर्ट परिसर और इसके संचालन की व्यापक पहुंच ऑडिट करना है। इसमें सुप्रीम कोर्ट आने वाले विकलांग व्यक्तियों तक पहुंचना, उनकी प्रतिक्रिया मांगना और उनके सामने आने वाली चुनौतियों की प्रकृति और सीमा का आकलन करना शामिल है। इस पहल का अंतिम लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि न्याय सभी के लिए सुलभ हो और भारत के सर्वोच्च न्यायालय के साथ बातचीत में दिव्यांग व्यक्तियों को जिन कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, उनकी गहरी समझ हासिल करना है।