Saturday, July 4, 2026
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अब चार्नॉक लोहिया अस्पताल बनेगा बड़ाबाजार का लोहिया अस्पताल

कोलकाता । चार्नॉक अस्पताल शहर के उत्तरी भाग में रहनेवाले लोगों के लिए एक प्रेरक शक्ति है, जो एक दशक से ज्यादा समय से लोगों की सेवा प्रदान करने के बाद हजारों लोगों का विश्वास अर्जित करने वाला एकमात्र अस्पताल है। अब  मध्य कोलकाता ने रहनेवाले लोगों की सेवा के लिए अस्पताल की तरफ से इस अस्पताल की एक शाखा खोल कर वहां परिचालन शुरू करने का फैसला लिया गया है। बड़ाबाजार में स्थित लोहिया अस्पताल, जो एक राजसी विरासत की संरचना पर बनी है, जिसका उपयोग कभी लोहिया मातृ सेवा सदन नाम से एक माँ एवं शिशु अस्पताल के रूप में किया जाता था , अब यह इमारत अप्रयुक्त पड़ी है। चार्नॉक अस्पताल इस संपत्ति को पट्टे पर ले रहा है, और इसे एक सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में परिवर्तित कर रहा है। जिसे मध्य कोलकाता के घनी आबादी वाले इलाकों में रहनेवाले लोगों की सेवा के लिए चार्नॉक लोहिया अस्पताल का नाम दिया जाएगा।
4 बीघे भूमि में फैला चार्नॉक लोहिया अस्पताल जो पहले के ‘लोहिया मातृसदन’ को 4-6 ओटी, एक कैथलैब और एक सीटीवीएस/न्यूरो ओटी के साथ 200 बिस्तरों वाले सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में तब्दील किया जाएगा। इसमें 90 से अधिक वार्ड बेड, 20 केबिन, 10 बेड वाली इमरजेंसी, 70 बेड वाली आईसीयू और 10 बेड वाली डायलिसिस यूनिट बनाने की योजना है। जीडी बिड़ला इस परिसर के संस्थापक सदस्यों में से एक थे। गिरीश पार्क मेट्रो स्टेशन के 500 मीटर के मध्य में स्थित, यह व्यापक पार्किंग सुविधा और सभी तरफ से पहुंच के साथ निमताला घाट स्ट्रीट, जोड़ासांको और विवेकानंद रोड से पैदल चलने योग्य दूरी पर स्थित है।
चार्नॉक अस्पताल का तत्काल लक्ष्य ‘रोगी पहले’ इस आदर्श वाक्य के साथ समाज में सभी वर्ग के लोगों की स्वास्थ्य की देखभाल की जरूरतों को पूरा करने के लिए पूरे पश्चिम बंगाल की परिधि में फैले 100-200 बिस्तरों वाले सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों के साथ विस्तार करना है। दशकों से बड़ाबाजार को कोलकाता के ‘बिजनेस हब’ के रूप में जाना जाता है। यहां रहनेवाले स्थानीय निवासियों की निजी स्वास्थ्य देखभाल की आवश्यकता में व्यापक अंतर है क्योंकि आसपास के 5 किमी के क्षेत्र में कोई सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल नहीं है। मरीजों को गंभीर स्वास्थ्य सेवा होने पर बेहतर इलाज के लिए कोलकाता के अन्य अस्पतालों या साल्टलेक, उल्टाडांगा या फिर बीटी रोड में जाना पड़ता है, जिसमें काफी समय लग जाता है। कुछ मामलों में यह घातक साबित हो सकता है। चार्नॉक लोहिया अस्पताल में 160 करोड़ का निवेश किया जायेगा।
 ‘बंगाल का मतलब व्यवसाय’ है, इस तथ्य के अनुरूप इस अस्पताल के होने पर 900 से ज्यादा रोजगार सृजन के साथ अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। हमारे राज्य में ऐसी कई संपत्तियां खाली, बेकार और अप्रयुक्त पड़ी हैं। चार्नॉक अस्पताल इन मौजूदा परिसरों को दीर्घकालिक पट्टे पर लेने और पूरे बंगाल में सुपर स्पेशलिटी अस्पतालों में परिवर्तित करने के लिए तैयार है, इस प्रकार बढ़ती स्वास्थ्य देखभाल से जुड़ी आवश्यकताओं को पूरा किया जा सकेगा।
अभी कोलकाता हवाई अड्डे के पास चार्नॉक अस्पताल 300 बिस्तरों वाला एक सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल है, जिसमें हृदय विज्ञान, तंत्रिका विज्ञान, गैस्ट्रो विज्ञान, गुर्दे के विज्ञान, पल्मोनरी और अंग प्रत्यारोपण जैसी सेवाएं उपलब्ध हैं। वहां 100 आईसीयू बेड, मॉड्यूलर ओटी, विश्व स्तरीय जर्मन और अमेरिकी चिकित्सा उपकरण, पूर्णकालिक सलाहकार और सुंदर माहौल सहित कला बुनियादी ढांचा उपलब्ध है। चार्नॉक अस्पताल पीपीपी मॉडल में ईएसआई श्रीरामपुर और ईएसआई बैंडेल में 2 आईसीयू इकाइयां चला रहा है। यह अस्पताल पश्चिम बंगाल के विभिन्न स्थानों में राज्य सरकार के साथ पीपीपी मॉडल के साथ सुपर स्पेशलिटी अस्पताल खोलकर लोगों की सेवा के लिए तत्पर है।

“19वीं सदी का औपनिवेशिक भारत: नवजागरण और जाति प्रश्न” पुस्तक पर परिचर्चा

 साहित्यिकी द्वारा किया गया आयोजन
कोलकाता ।  “साहित्यिकी”की फ़रवरी महीने की  मासिक गोष्ठी में डॉ रूपा गुप्ता की शोधपरक पुस्तक ‘19वीं सदी का औपनिवेशिक भारत: नवजागरण और जाति प्रश्न ’ पर आयोजित परिचर्चा में पुस्तक पर अपनी बात रखते हुए लेखिका ने कहा कि हालाँकि 19वीं सदी आधुनिक मूल्यबोध के विकास की सदी रही, लेकिन संस्कृतिकरण के नाम पर जातिप्रथा को मज़बूत करने की राजनीति में मनुष्यता बोध के पीछे छूट जाने से आधुनिकता खंडित हुई। जाति समाज को बाँटती ही नहीं है, प्रेमविहीन भी बनाती है और प्रेमविहीन समाज कुंठित समाज होता है।डॉ. रूपा ने बताया कि उक्त पुस्तक उनके 11 वर्ष की कठिन साधना का प्रतिफल है जिसमें उन्होंने हिंदी नवजागरण को भारतीय नवजागरण से जोड़ने तथा जाति के बदलते स्वरूप को  तथ्यों की रोशनी में आज के संदर्भ से जोड़ने का चुनौतीपूर्ण प्रयास किया है।
डॉ. पूनम दीक्षित ने डॉ. रूपा गुप्ता की कृति को प्रासंगिक बताया और कहा कि शोधार्थी एवं प्रतियोगी परीक्षाओं के छात्रों को इस पुस्तक से  बहुत मदद मिलेगी और पुस्तक के कलेवर पर अपने विचार रखते हुए उन्होंने कहा कि यह हमें सोचने, जानने और समझने के लिए झकझोरती है। उन्होंने यह भी कहा कि इस पुस्तक के चुनिंदा विषयों पर  कार्यशाला, विमर्श रखे जा सकते हैं। यह सत्यान्वेषण की दृष्टि देती हैं।
विख्यात साहित्यकार डॉ.  तनुजा मजूमदार ने डॉ. रूपा गुप्ता की कृति  के विस्तृत फलक पर बात करते हुए कहा कि यह पुस्तक अंतर्विषयक  साहित्य का उत्कृष्ट नमूना है जिसमें इतिहास,समाजशास्त्र, धर्मशास्त्र एवं अनेक प्राचीन पुस्तकों तथा ग्रंथों की  सम्यक चर्चा हुई है। उन्होंने बताया कि इस  पुस्तक के शीर्षक में  चार आयाम  हैं-19 वीं सदी, औपनिवेशिक भारत, नवजागरण एवं जातीय प्रश्न। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक साम्राज्यवाद, उपनिवेशवाद, वाणिज्यवाद,   तथा बाज़ारवाद की कड़ियों को जोड़ती है तथा उनका सटीक विश्लेषण करती है। उन्होंने यह भी कहा कि रचनाकार ने वृहद अनुसंधान के पश्चात अपने हर तथ्य को प्रमाणित करने के लिए आंकड़े दिए हैं जो कि औपनिवेशिक भारत को समझने के लिए बहुत आवश्यक है और जिसे समझाने में वे सर्वथा सफल हुई हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षा  डॉ. राजश्री शुक्ला ने महत्वपूर्ण, गंभीर परिचर्चा की केंद्र डॉ रूपा गुप्ता को उनकी इस अमूल्य रचना के लिये साधुवाद किया। सदस्य वक्ता डॉ.पूनम दीक्षित एवं  अतिथि वक्ता प्रोफ़ेसर तनुजा मजूमदार  को उनके विद्वतापूर्ण, सारगर्भित तथा विस्तृत विवेचन के लिए आभार प्रकट किया।
आरंभ में साहित्यिकी की सचिव डॉ. मंजुरानी गुप्ता ने साहित्यिकी का संक्षिप्त परिचय देते हुए उपस्थित सुधीजनों का स्वागत किया। कार्यक्रम में विशिष्ट रूप से उपस्थित प्रो. शंभुनाथ साव, प्रो. हितेंद्र पटेल, राज मिठौलिया, प्रेम कपूर, प्रदीप  जीवराजका, सुनीता गुप्ता, साहित्यिकी की अध्यक्ष विद्या भंडारी एवं सदस्याओं और अच्छी ख़ासी संख्या में उपस्थित शोधार्थियों, छात्र-छात्राओं को कार्यक्रम की संचालिका रेवा जाजोदिया ने हार्दिक धन्यवाद दिया। रिपोर्ट प्रस्तुति कविता कोठारी की रही।  कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।

स्मार्ट सॉल्यूशंस ग्रीन वर्कप्लेस कॉर्पोरेट एक्सीलेंस अवार्ड्स 2023-24 

मेकट्रोन्स द्वारा किया गया अनावरण
कोलकाता । मेकट्रॉन स्मार्ट सॉल्यूशंस ने गर्व से ग्रीन वर्कप्लेस कॉर्पोरेट एक्सीलेंस अवार्ड्स 2023-24 का अनावरण किया, जिसका उद्देश्य पर्यावरणीय स्थिरता के संदर्भ में संगठनों को सम्मानित करना है। 2023-24 सम्मेलन श्रृंखला, “ग्रीन वर्कप्लेस कॉन्फ्रेंस और उत्कृष्टता पुरस्कार”, स्थिरता, प्रौद्योगिकी और वैश्विक रुझानों के प्रति मेक्ट्रोनज़ स्मार्ट सॉल्यूशंस के समर्पण के प्रमाण के रूप में खड़ी है। जनवरी से दिसंबर 2023 तक चलने वाली यह श्रृंखला मेक्ट्रोनिक्स स्मार्ट सॉल्यूशंस के स्थायी सम्मेलन और पुरस्कारों का प्रमुख संस्करण बन जाएगी, जो बुनियादी ढांचे के रखरखाव, परियोजनाओं, प्रशासन, प्रबंधन और अवधारणा में बदलाव सहित क्षेत्रों में कम से कम 250 कॉर्पोरेट नवाचारों को प्रतिबिंबित करेगी।
मेकट्रॉन्स स्मार्ट सॉल्यूशन के निदेशक शाहीना अख़्तार उत्सव के बारे में कहा कि “2023 में कार्यक्षेत्र में महामारी का प्रभाव और आगे के भविष्य में सेतुबंधन का संकेत देता है। हमारी कॉन्फ़्रेंस सीरीज टेक्सास में अनुसंधान, तकनीकी नवाचार और हरित कार्यक्षेत्र के भूमिका निर्माता वैश्विक प्रवृत्तियों पर चर्चा के लिए मंच देगा। सीकेसी फ्रेगरेंस के निदेशक श्रीमान ऋषभ सी कोठारी ने कहा कि यह आयोजन अपने-अपने क्षेत्रों में स्थिरता और नवाचार के लिए प्रतिबद्ध संगठनों से भागीदारी को आमंत्रित करते हैं। संलग्न साझेदारी दस्तावेज़ इच्छुक पार्टियों के लिए सहयोगात्मक अवसरों की रूपरेखा प्रस्तुत करता है । जैसे-जैसे मेकट्रॉन का स्मार्ट सॉल्यूशंस एक हरित, अधिक लागत प्रभावी भविष्य की ओर बढ़ रहा है, ग्रीन वर्कप्लेस कॉरपोरेट एक्सीलेंस अवार्ड 2023-24 प्रमुख आशा के रूप में खड़ा है, जो आशावाद को प्रेरित करता है, वैश्विक व्यापार प्रक्रियाओं में पर्यावरण जागरूकता को आगे बढ़ाता है और एक उज्जवल भविष्य का मार्ग प्रशस्त करता है।

भाषिक समन्वय के लिए अनुवाद की भूमिका महत्वपूर्ण : प्रो. चन्द्रकला पांडेय

कोलकाता । कलकत्ता विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग एवं केंद्रीय हिंदी संस्थान (शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार) आगरा के संयुक्त तत्वावधान में ‘सामासिक संस्कृति के संवाहक : हिंदी भाषा और साहित्य’ विषयक दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन 27 और 28 फरवरी को विश्वविद्यालय से संबद्ध राजाबाजार साइंस कॉलेज प्रांगण के मेघनाद साहा और एन.आर. सेन सभागार में किया गया। इस संगोष्ठी का सफल संयोजन डॉ. राम प्रवेश रजक ने किया। उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि प्रो. सुनील बाबूराव कुलकर्णी (निदेशक, केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा) ने कहा कि साहित्य का दायित्व समाज का प्रतिबिंबन करना होता है। संगोष्ठी की महत्ता यह है कि इससे वाचन, श्रवण, लेखन आदि जैसे 12 कौशलों का विकास होता है। कलकत्ता विवि की पूर्व प्रो. चंद्रकला पांडेय भारत को विविध संस्कृतियों का देश मानती हैं तथा भाषिक समन्वय के लिए अनुवाद को महत्वपूर्ण मानती हैं। पूर्व प्रो. शंभुनाथ ने हिंदी को भारतीय भाषाओं का आंगन कहकर उसके महत्व को रेखांकित किया। प्रो. राजश्री शुक्ला ने कहा कि विश्वग्राम के युग में भी सामासिक संस्कृति का प्रतिनिधि भूमि केवल विश्वगुरु भारत ही हो सकता है। हिंदी भवन, विश्वभारती के पूर्व प्रो. रामेश्वर मिश्र ने कहा कि हिंदी में सामासिक संस्कृति की प्रतिनिधि भाषा बनने के सभी गुण मौजूद हैं। त्रिभुवन विश्वविद्यालय, नेपाल से डॉ. श्वेता दीप्ति ने कहा कि सामासिक संस्कृति के कारण ही भारत भूमि नेपाल की धरती से अलग नहीं महसूस होती है ।  कार्यक्रम में कुल 9 तकनीकी सत्र, 8 समानांतर सत्र तथा शोध-पत्र वाचन हेतु 9 ऑनलाइन सत्र की अध्यक्षता प्रो. वशिष्ठ अनूप (बी.एच.यू.), प्रो. महेश एस. (कालीकट विवि), प्रो. शकुंतला मिश्र (विश्वभारती), प्रो. अरुण होता, डॉ. कमलेश पांडेय, डॉ. सत्या उपाध्याय, डॉ. शुभ्रा उपाध्याय, प्रो. एस. आर. जयश्री (केरल विवि), प्रो. विवेक शुक्ल (डेनमार्क), प्रो. शिवकुमार सिंह (पुर्तगाल), डॉ. मणिकांठन सी. सी. (कन्नूर विवि), प्रो. संजय मदार, प्रो. विजय कुमार साव, डॉ. गीता दुबे, डॉ. राजीव कुमार रावत (खड़गपुर प्रौद्योगिकी संस्थान), डॉ. संजय जायसवाल, डॉ. मनीषा त्रिपाठी, डॉ. कमल कुमार, ने किया। सम्मानित मुख्य एवं विशिष्ट वक्तागण में प्रो. अमरनाथ, प्रो. तनुजा मजूमदार, प्रो. हितेंद्र कुमार मिश्र (शिलांग), प्रो. विवेक मणि त्रिपाठी (चीन), बिहार से डॉ. सुशांत कुमार, डॉ. प्रफुल्ल कुमार, डॉ. प्रवीण कुमार (म. प्र.), डॉ. मुकेश कुमार मिरोठा (नई दिल्ली), डॉ. विनोद कुमार, डॉ. दिनेश कुमार साहू (सिक्किम) आदि ने अपना सारगर्भित वक्तव्य प्रस्तुत किया। 60 प्रतिभागियों ने प्रत्यक्ष और लगभग 200 ने आभासी माध्यम से शोध-पत्र का वाचन किया। लगभग 30 विश्वविद्यालयों से प्राध्यापकों और शोधार्थियोँ ने प्रपत्र वाचन किया। वक्ताओं तथा प्रपत्र वाचकों के वक्तव्य का सार यह है कि भारतीय संस्कृति मनुष्य को श्रेष्ठ बनाने में सहायता करती है। वह मनुष्य के विकास में सहयोगिनी बनकर उसे ऊंचाई के शिखर पर ले जाती है। संस्कृति की सामासिकता ही हमें विश्वबंधुत्व के धरातल पर ले जाती है। हिंदी साहित्य अनेक संभावनाओं से भरा है। इसमें 8वीं शती से अब तक विविध संस्कृतियों और भाषाओं का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। हिंदी भाषा एक व्यापक संस्कृति की वाहिका है। दूसरे दिन के अंतिम सत्र में छात्राओं द्वारा सांस्कृतिक नृत्य की प्रस्तुति की गई। कार्यक्रम का आरंभ एम.ए. की प्रीति, निकिता, अलका द्वारा सरस्वती वंदना एवं आनंद, जुलियेटरोनी के दीप-प्रज्वलन गीत से हुआ। कार्यक्रम का कुशल संचालन डॉ. रामप्रवेश रजक (विभागाध्यक्ष), डॉ. इतु सिंह, डॉ. ममता त्रिवेदी, डॉ. रेशमी पांडा मुखर्जी, प्रीतम रजक, दीक्षा गुप्ता, अर्चना सिंह, परमजीत पंडित, प्रियंका सिंह, शुभांगी उपाध्याय ने किया। देश-विदेश के विभिन्न शिक्षा प्रतिष्ठानों के प्राध्यापकों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों, साहित्यकारों आदि की गरिमामयी उपस्थिति रही। इस संगोष्ठी में लगभग 20 विश्वविद्यालयों के प्राध्यापकों ने अपनी उपस्थिति दर्ज की। कार्यक्रम को सफल बनाने में विश्वविद्यालय परिवार तथा केंद्रीय हिंदी संस्थान परिवार एवं महानगर के अन्यान्य कॉलेजों, विश्वविद्यालयों की महती भूमिका रही। इस कार्यक्रम के संयोजक डॉ. राम प्रवेश रजक ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए संगोष्ठी को संपन्न किया।
 (साभार – सपना खरवार  एवं दीक्षा गुप्ता )

डॉ. एस.आनंद को मिला ‘भोलानाथ गहमरी स्मृति सम्मान ‘

वाराणसी । विश्व भोजपुरी सम्मेलन के बैनर तले अन्तर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर जीवन दीप शिक्षण समूह के प्रेक्षागृह में एक भव्य समारोह आयोजित किया गया। शहर के अतिरिक्त बिहार, बलिया, छत्तीसगढ़, दिल्ली तथा अन्य कई प्रदेशों के प्रतिभागियों ने इसमें शिरकत की तथा भोजपुरी को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की पुरजोर मांग की। विश्व भोजपुरी सम्मेलन के राष्ट्रीय महासचिव डॉ अशोक सिंह ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के वाराणसी आगमन पर उन्हें एक ज्ञापन देने की बात कही तथा भोजपुरी के प्रचार प्रसार की अनेक योजनाओं पर प्रकाश डाला। विश्व भोजपुरी सम्मेलन के उत्तर प्रदेश इकाई के उपाध्यक्ष ओम धीरज तथा सचिव चंद्रकांत सिंह के अतिरिक्त भोजपुरी के प्रोफेसर जयकांत सिंह, पाखी पत्रिका के संपादक अशोक द्विवेदी, गुरुशरण सिंह एवं कई विशिष्ट वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किए। दूसरे क्रम में सम्मान समारोह आयोजित किया गया जिसमें कुछ प्रमुख हस्तियों को भोजपुरी भाषा के प्रचार-प्रसार में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए विभिन्न स्मृति सम्मान प्रदान किए गये। डॉ, एस.आनंद को भोजपुरी के स्वनामधन्य कवि भोलेनाथ गहमरी स्मृति सम्मान से नवाजा गया। यह सम्मान प्रो. जयकांत सिंह, ममता सिंह व अशोक द्विवेदी के कर कमलों से दिया गया। सम्मान मिलने के बाद एस.आनंद ने संस्था के पदाधिकारियों को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा – गहमरी जी से मेरी दो पीढ़ियों का संबंध रहा तथा मुझे इलाहाबाद में एक साल तक उनके साथ रहने का सौभाग्य भी मिला था। आज उनके नाम का सम्मान पाकर मैं बहुत खुश हूं।

प्रख्यात कानूनविद फली एस. नरीमन का 95 वर्ष की उम्र में निधन

नयी दिल्ली ।  भारत के जाने-माने कानूनविद और सुप्रीम कोर्ट के अनुभवी वरिष्ठ वकील फली एस नरीमन का बुधवार को 95 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने दिल्ली में आखिरी सांस ली। नरीमन का वकील के तौर पर 70 साल से ज्यादा का अनुभव रहा।नवंबर 1950 में फली एस नरीमन बॉम्बे हाईकोर्ट में वकील के तौर पर रजिस्टर हुए। उन्हें 1961 में वरिष्ठ वकील का दर्जा दिया गया था। बॉम्बे हाईकोर्ट के बाद नरीमन ने 1972 से भारत की सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस शुरू की। वे मई 1972 में भारत के एडिशनल सॉलिसिटर जनरल नियुक्त हुए थे। नरीमन को जनवरी 1991 को पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। वहीं 2007 में उन्हें पद्म भूषण दिया गया। वरिष्ठ वकील के साथ वे 1991 से 2010 तक बार एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष भी रहे। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उनका कद काफी ऊंचा रहा। नरीमन 1989 से 2005 तक इंटरनेशनल चैंबर ऑफ कॉमर्स की अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता कोर्ट के उपाध्यक्ष भी रहे। वे 1995 से 1997 तक जेनेवा के कानूनविदों के अंतरराष्ट्रीय आयोग की एग्जीक्यूटिव कमेटी के अध्यक्ष भी रहे।

 

जल्द आ रहा है यू ट्यूब जैसा देसी वीडियो पोर्टल

नयी दिल्ली ।सूचना और प्रसारण मंत्रालय (एमआईबी) जल्द चार सरकारी ऑनलाइन पोर्टल लॉन्च करने वाली है। ऑनलाइन पोर्टल को अगले हफ्ते तक लॉन्च किया जा सकता है। इन पोर्टल में वीडियो पोर्टल भी शामिल है, जो यूट्यूब जैसे वीडियो अपलोड और देखने में मदद करेगा। इसके अलावा सरकार न्यू पेपर और मैगजीन के पंजीकरण के लिए एक नई वेबसाइट और सभी सरकारी विज्ञापनों के लिए एक केंद्रीकृत वेबसाइट भी लॉन्च करेगी।

कब लॉन्च होंगे पोर्टल? एचटी की रिपोर्ट के अनुसार, सभी चार पोर्टल लाइव होने के लिए तैयार हैं और सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर द्वारा औपचारिक लॉन्च का इंतजार कर रहे हैं।
नवीगेट (एनएवीआई गेट)  –  नेशनल वीडियो गेटवे ऑफ भारत, जिसे संक्षिप्त रूप से NaViGate भारत कहा जा रहा है को भी जल्द लॉन्च किया जाएगा। यह यूट्यूब के जैसा ही प्लेटफार्म होगा, जहां विभिन्न केंद्र सरकार के मंत्रालयों और विभागों द्वारा तैयार किए गए सभी वीडियो पोस्ट किए जाएंगे। और कोई भी यूजर्स इन वीडियो को देख सकेगा। इसमें वर्तमान में विभिन्न मंत्रालयों से संबंधित लगभग 2,500 वीडियो हैं।
प्रेस सेवा पोर्टल – इसके अलावा एक प्रेस सेवा पोर्टल भी लॉन्च किया जाएगा। बता दें कि अधिसूचित प्रेस और आवधिक पंजीकरण अधिनियम, 2023 के तहत मसौदा नियमों में प्रेस सेवा पोर्टल बनाने का प्रस्ताव दिया था। पंजीकरण प्रमाणपत्र के लिए सभी आवेदनों को मसौदा नियमों के तहत प्रेस सेवा पोर्टल पर जमा करना होगा।
आरएनआई और पीएसपी की नई वेबसाइट – इसके अलावा दो अन्य आरएनआई और पीएसपी की नई वेबसाइट भी लॉन्च होंगी। पीएसपी की अन्य विशेषताएं, जैसे एप्लिकेशन की प्रोसेसिंग, अप्रैल में दूसरे चरण के दौरान लॉन्च होने की उम्मीद है। नए अधिनियम के तहत नई आरएनआई वेबसाइट का नाम बदलकर पीआरजी की वेबसाइट कर दिया जाएगा।

उज्जैन में 1 मार्च से शुरु होगी दुनिया की पहली वैदिक घड़ी

भोपाल । चंद्रग्रहण या सूर्यग्रहण कब पड़ेगा? सूर्योदय-सूर्यास्त का समय कया है? अच्छा मुहूर्त कब है? ऐसी ही कई सटीक जानकारी के लिए वैदिक घड़ी से मिल सकेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक मार्च को इस घड़ी का वर्चुअली लोकार्पण करेंगे। यह दुनिया की पहली ऐसी डिजिटल वॉच होगी, जो इंडियन स्टैंडर्ड टाइम (आईएसटी) और ग्रीनविच मीन टाइम (जीएमटी) तो बताएगी ही, पंचांग और 30 मुहूर्त की भी जानकारी देगी । उज्जैन में जीवाजी वैधशाला के पास जंतर-मंतर पर 85 फीट ऊंचा टावर बनाया गया है. इस पर 10×12 की वैदिक घड़ी लगाई जाएगी ।  विक्रम शोध पीठ के निदेशक श्रीराम तिवारी ने बताया कि यह घड़ी दुनिया की पहली घड़ी होगी, जिसमें भारतीय काल गणना को दर्शाया जाएगा । गौरतलब है कि उज्जैन को काल गणना (टाइम कैलकुलेशन) का केंद्र माना जाता रहा है. उज्जैन से कर्क रेखा (ट्रॉपिक ऑफ कैंसर) गुजरी है । सीएम डॉ. मोहन यादव उज्जैन को टाइम कैलकुलेशन का सेंटर बनाना चाहते हैं। उन्होंने 22 दिसंबर 2023 को विधानसभा सत्र के दौरान कहा था, ‘प्रदेश सरकार प्राइम मेरिडियन को इंग्लैंड के ग्रीनविच से उज्जैन तक ट्रांसफर करने के लिए काम करेगी। इसके लिए उज्जैन की वैधशाला में रिसर्च करेंगे । ‘ विशेषज्ञों का कहना है कि 300 साल पहले तक उज्जैन से ही दुनियाभर का स्टैंडर्ड टाइम निर्धारित किया जाता था । देश की पहली वैधशाला (वर्तमान में जीवाजी वैधशाला) राजा जयसिंह द्वितीय ने सन् 1729 में उज्जैन में बनवाई थी। यहां समय देखने के लिए ‘धूप घड़ी’बनाई गयी । इससे उज्जैन समेत देश भर के शहरों के समय का आकलन किया जा सकता है।
वैदिक घड़ी से यह जानकारी मिलेगी – वैदिक घड़ी इंटरनेट और ग्लोबल पॉजिशिनिंग सिस्टम (GPS) से जुड़ी होगी।  इसमें आईएसटी, जीएमटी के साथ भारतीय काल गणना विक्रम संवत् की जानकारी मिलेगी । सूर्योदय से सूर्यास्त के साथ ग्रह, योग, भद्रा, चंद्र स्थिति, नक्षत्र, चौघड़िया, सूर्यग्रहण, चंद्रग्रहण की जानकारी देगा. अभिजीत मुहूर्त, ब्रह्म मुहूर्त, अमृत काल और मौसम से जुड़ी सभी जानकारी मिल सकेगी ।  घड़ी में हर घंटे बाद बैकग्राउंड में नई तस्वीर दिखेगी । द्वादश ज्योतिर्लिंग मंदिर, नवग्रह, राशि चक्र के साथ दूसरे धार्मिक स्थल भी दिखाई देंगे । देश-दुनिया के खूबसूरत सूर्यास्त, सूर्य ग्रहण के नजारे भी दिखेंगे।
मोबाइल एप के जरिए हर पल के मुहूर्त आदि जान सकेंगे – वैदिक घड़ी से जुड़ा मोबाइल ऐप भी लॉन्च होगा। इसे आरोह श्रीवास्तव डिजाइन कर रहे हैं। उनका कहना है कि इसका नाम ‘विक्रमादित्य वैदिक घड़ी’ होगा। वैदिक घड़ी के सभी फीचर इस एप में रहेंगे। उज्जैन में लगने वाली घड़ी में जो बदलाव होंगे, वो एप में भी नजर आएंगे। आप इसे मैन्युअल भी ऑपरेट कर सकेंगे।

चलने वाली हैं 50 अमृत भारत ट्रेनें; रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव का ऐलान

नयी दिल्ली । एक बार फिर रेलवे यात्रियों के लिए एक नई खुशखबरी लेकर आया है। जी हां! एक नहीं, दो नहीं, 10 नहीं बल्कि पूरे 50 अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनों की सौगात रेलवे जल्द देने वाला है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि सरकार ने 50 नई अमृत भारत ट्रेनों को मंजूरी दी है। दरभंगा-अयोध्या-आनंद विहार टर्मिनल अमृत भारत एक्सप्रेस और मालदा टाउन-सर एम विश्वेश्वरैया टर्मिनस (बेंगलुरु) के बीच चलने वाली दो अमृत भारत ट्रेनों के सफलता के बाद रेलवे इस ट्रेन को अलग-अलग रूटों पर चलाने का प्लान जल्द ही तैयार करने वाला है।
50 अमृत भारत ट्रेनें जल्द होंगी लॉन्च – केंद्रीय रेल मंत्री ने एक्स पर लिखा और घोषणा की कि 30 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हरी झंडी दिखाई गई पहली दो ट्रेनों के लिए प्राप्त सकारात्मक प्रतिक्रिया के आधार पर 50 नई अमृत भारत ट्रेनों को मंजूरी दी गई है। बता दें इस ट्रेन की शुरुआत के बाद यात्रियों ने इसे हाथों-हाथ लिया। ट्रेन की खूबसूरती के साथ-साथ इसमें लगाए गए अत्याधुनिक उपकरण और अन्य डिवाइस यात्रियों के सफर को सुखद बना देते हैं। अमृत ​​भारत एक्सप्रेस सुपरफास्ट पैसेंजर ट्रेन लिंके हॉफमैन बुश (एलएचबी) तकनीक वाली है। यह नॉन-एसी कोच वाली पुश-पुल ट्रेन है। अमृत ​​भारत एक्सप्रेस ट्रेनों में रेल यात्रियों के लिए आकर्षक डिजाइन वाली सीटें, बेहतर सामान रैक, उपयुक्त मोबाइल होल्डर के साथ मोबाइल चार्जिंग प्वाइंट, एलईडी लाइट, सीसीटीवी, सार्वजनिक सूचना प्रणाली जैसी बेहतर सुविधाएं हैं।

नमक की वजह से तनख्वाह का नाम पड़ा है सैलरी

किसी भी नौकरीपेशा इंसान के जीवन में सैलरी का सबसे अहम रोल होता है। हर महीने के अंत में लोगों को अपनी सैलरी का इंतजार रहता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये सैलरी शब्द कहां से आया है ? आज हम आपको बताएंगे कि तनख्वाह के नाम पर नमक मिलने से से शुरू हुआ सैलरी तक कैसे पहुंचा। जानें इसके पीछे की पूरी कहानी –
सैलरी के रुप में मिलता था नमक – बता दें कि प्राचीन रोम में पहले पैसे की जगह नमक का इस्तेमाल किया जाता था । उस वक्त जो सैनिक रोमन साम्राज्य के लिए काम करते थे, उन्हें काम के बदले मेहनताना के रूप में नमक ही दिया जाता था। माना जाता है कि ‘नमक का कर्ज’ जैसी कहावतों की शुरुआत यहां से हुई थी ।
कैसे आया सैलरी का नाम – इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक रोमन इतिहासकार प्लीनी द एल्डर अपनी किताब नैचुरल हिस्ट्री में लिखते हैं कि रोम में पहले सैनिकों का मेहनताना नमक के रुप में दिया जाता था। इससे ही सैलरी शब्द बना है. कहा जाता है कि Salt से ही Salary शब्द आया है। कई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि Soldier शब्द लैटिन में ‘sal dare’ से बना है, जिसका अर्थ भी नमक देने से ही है. रोमन में नमक को सैलेरियम कहते हैं, इसी से सैलरी शब्द बना है।
जब वेतन के तौर पर मिला नमक – फ्रांस के इतिहासकारों का मानना है कि पहली बार सैलरी 10,000 ईसा पूर्व से 6,000 ईसा पूर्व के बीच दी गई थी। प्राचीन रोम में लोगों को काम के बदले पैसे या मुद्रा के बदले नमक दिया जाता था । तब रोमन साम्राज्य के सैनिकों को ड्यूटी के बदले पगार के तौर पर एक मुट्ठी नमक दिया जाता था। उस वक्त नमक का व्यापार भी किया जाता था । इससे पहले वेतन के बारे में बहुत जानकारी नहीं मिलती है ।
नमक मिलना वफादारी – हिब्रू किताब एजारा में 550 और 450 ईसा पूर्व का जिक्र है जिसमें लिखा गया है कि अगर आप किसी व्यक्ति से नमक लेते हैं, तो ये पगार देने के बराबर है। उस वक्त नमक की बहुत अहमियत होती थी। किसी जमाने में नमक पर उसी का हक होता था, जिसका राज होता था। इस किताब में एक मशहूर फारसी राजा आर्टाजर्क्सीस प्रथम का जिक्र है, जिनके नौकर अपनी वफादारी के बारे में बताते हुए कहते हैं कि हमें राजा से नमक मिलता है. इसलिए वे उनके प्रति समर्पित और वफादार हैं।