हम सभी को बाज़ार में खरीदारी करना बहुत पसंद होता है। इसलिए हम अक्सर ट्रेंडी डिज़ाइन वाले कपड़े पहनते हैं। लेकिन कई बार हम एक ही डिजाइन के कपड़े पहनकर थक जाते हैं। ऐसे में आप अपने सादे कपड़ों को फैंसी बनाने के लिए गोटा पट्टी का इस्तेमाल कर सकती हैं।
इसमें आपका लुक भी अच्छा लगेगा. इसके अलावा आपके कपड़ों का लुक भी बदल जाएगा। आइए हम आपको बताते हैं कि आप इसका इस्तेमाल कैसे कर सकते हैं.
सूट के गले पर प्रयोग करें -अगर आपको लगता है कि सूट की नेकलाइन प्लेन है तो आप इसे फैंसी बनाने के लिए इस पर गोटा पट्टी का इस्तेमाल कर सकती हैं। इसके लिए आपको एक पतली पट्टी लगानी होगी ताकि आप इसकी परत बना सकें। इसके बाद आप इससे चौकोर या बॉक्स डिजाइन बना सकते हैं। आप चाहें तो इसे सूट की स्लीव्स और बॉटम पर भी लगा सकती हैं। इसके साथ आपका सिंपल सूट अच्छा लगेगा।
सूट के किनारे पर गोटा पट्टी लगाएं – अगर आपको लगता है कि सूट में प्रिंट की कमी के कारण वह प्लेन दिखता है तो ऐसे में आप इसके किनारों पर गोटा का इस्तेमाल कर सकती हैं। इसके लिए एक पतली पट्टी का प्रयोग करें। ऐसा स्कार्फ खरीदें जो सूट के रंग से मेल खाता हो और फिर आप चाहें तो इसे दुपट्टे के ऊपर भी पहन सकती हैं। इससे आपका सूट भी अच्छा लगेगा. इसके अलावा आप चाहें तो छोटे-छोटे फूलों के डिजाइन बनाकर भी गर्दन पर लगा सकती हैं।
प्रिंटेड सूट पर गोटा पट्टी लगाएं – अगर आपका सूट प्रिंटेड है तो आप उसे फैंसी बनाने के लिए गोटा पट्टी का इस्तेमाल कर सकती हैं। इसके लिए आप इसे गर्दन और आस्तीन और नीचे के बॉर्डर पर लगा सकती हैं। इससे आपका सूट अच्छा दिखेगा। इसके लिए आप चाहें तो मोटे बकरे का इस्तेमाल कर सकते हैं. ऐसे पीस आपको बाजार में 20 से 40 रुपये में मिल जाएंगे ।
गोटा पट्टी से सजाएं साधारण सलवार कमीज
‘चिठ्ठी आई है, आई है चिठ्ठी आई’, गाने से मिली पंकज उधास को गायकी में पहचान
इस तरह संवारिए अपना छोटा सा घर
जरूरी नहीं है कि घर को सजाने के लिए बेहद महंगे शोपीस या अन्य महंगी चीजों का ही इस्तेमाल किया जाए। कई बार घर की सादगी ही उसकी असली खूबसूरती होती है। चूंकि घर आपका है तो उसमें अपनेपन का एहसास होना बहुत जरूरी है और एक घर तभी घर बनता है, जब आप उसे अपने हाथों से सजाते हैं। इसे अपने प्यार के रंगों से भरें. तो आज हम आपको घर को सजाने के कुछ बेहद आसान लेकिन बेहद उपयोगी टिप्स बता रहे हैं-
फर्नीचर को पुनर्व्यवस्थित करें – किसी भी घर में फर्नीचर एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। लेकिन हर बार फर्नीचर बदलना संभव नहीं है, लेकिन अगर आप अपने घर में बदलाव चाहते हैं तो इसे अपने घर की जगह के अनुसार पुनर्व्यवस्थित करें। हालाँकि, आप चाहें तो अपने फर्नीचर को ब्राइट पेंट करके नया लुक दे सकते हैं। यकीन मानिए यह छोटा सा बदलाव आपके घर का पूरा लुक बदल देगा।
एक केंद्र बिंदु बनाएं – कमरे में एक केंद्र बिंदु बनाने का प्रयास करें। जब आप किसी कमरे की एक दीवार को केंद्र बिंदु बनाते हैं, तो इसका फायदा यह होता है कि यह कमरे के पूरे स्वरूप को संतुलित करती है। साथ ही आपको कमरे में हर जगह सजावट पर पैसे खर्च करने की भी जरूरत नहीं है। इस प्रकार की सजावट जेब के अनुकूल होती है। हालाँकि, दीवार को केंद्र बिंदु बनाना आवश्यक नहीं है। आप कमरे में कोई बड़ा गमला रखकर या किसी अन्य तरीके से फोकल प्वाइंट बना सकते हैं।
पर्यावरण के अनुकूल बनें – अगर घर में हरियाली हो तो पूरा घर खूबसूरत दिखता है। पौधों की मदद से अपने घर को सजाने के कई फायदे हैं। ये सस्ते तो हैं ही, आपकी सेहत भी अच्छी रखते हैं. आप कई तरीकों से अपने घर में हरियाली ला सकते हैं। आप चाहें तो एक दीवार पर पौधे लगाकर उसे नया लुक दे सकते हैं या फिर अगर आपका घर छोटा है तो आप हैंगिंग प्लांटिंग की मदद भी ले सकते हैं। कोशिश करें कि घर में ऐसे पौधों को जगह दें जो किचन के साथ-साथ हवा को भी शुद्ध करने में आपकी मदद कर सकें।
दीवार को नया आकार दें – कमरे की दीवारें आपके पूरे कमरे की शान होती हैं। इसमें बदलाव करने से कमरे में जान आ जाती है। आप इसे कई तरीकों से नया लुक दे सकते हैं। चाहे आप दीवारों का रंग बदलना चाहें या फिर आजकल 3डी वॉल डिजाइन का चलन है जो कमरे को रियल लुक देता है।
छोटे परिवर्तन – अगर आप अपने घर में कुछ नया चाहते हैं तो छोटी-छोटी चीजों में बदलाव करें। जैसे आप कुशन कवर, टेबल रनर, बेडशीट, पर्दे आदि बदलते हैं। साथ ही घर के लिए ऐसे कुशन कवर, टेबल रनर, बेडशीट, पर्दे चुनें जो न सिर्फ घर में रंगत भरें बल्कि थोड़े अलग और फंकी भी हों।
महाशिवरात्रि पर विशेष : नंदी कैसे बने शिव जी का वाहन
नंदी को शिव जी का सबसे प्रिय गण माना जाता है । हिंदू धर्म में सभी देवी-देवताओं के वाहन हैं, नंदी को भोलेनाथ का वाहन माना जाता है। शिवालय में भोलेनाथ की मूर्ति के सामने बैल रूपी नंदी जरुर विराजित होते हैं, 8 मार्च 2024 को महाशिवरात्रि का पर्व है, चारों ओर शिवमय का वातावरण है ।ऐसे में आइए जानते हैं आखिर नंदी कैसे बने शिव के प्रिय वाहन –
कौन हैं नंदी – संस्कृत में ‘नन्दि’ का अर्थ प्रसन्नता या आनंद है। नंदी को शक्ति-संपन्नता और कर्मठता का प्रतीक माना जाता है। नंदी शिव जी के निवास स्थान कैलाश के द्वारपाल भी माने जाते हैं, और भोलेनाथ के वाहन भी. जिन्हें प्रतीकात्मक रूप से बैल के रूप में शिव मंदिर में प्रतिष्ठित किया जाता है । शैव पंरपरा में नंदी को नंदीनाथ संप्रदाय का मुख्य गुरु माना जाता है। प्राचीन काल में चार वेदों के साथ चार अन्य शास्त्र भी लिखे गए थे – धर्मशास्त्र, अर्थशास्त्र, कामशास्त्र और मोक्षशास्त्र. इसमें से कामशास्त्र के रचनाकार नंदी माने जाते हैं ।
नंदी कैसे बने शिव की सवारी – प्राचीन काल में ऋषि शिलाद ने शिव की कठोर तपस्या कर नंदी को पुत्र रूप में पाया था। शिलाद ऋषि ने नंदी को वेद-पुराण सभी का ज्ञान दिया। एक दिन शिलाद ऋषि के आश्रम में दो संत पधारे। नंदी ने पिता के कहने पर उनकी खूब सेवा की। जब वे ऋषिगण जाने लगे तो उन्होंने शिलाद ऋषि को तो लंबी उम्र का आशीर्वाद दिया, लेकिन नंदी के लिए एक शब्द भी नहीं बोला।

ऋषि शिलाद ने सन्यासियों से इसका कारण पूछा, तो उन्होंने बताया कि नंदी अल्पायु है। बेटे के लिए ऐसी बातें सुनकर पिता ऋषि शिलाद चिंतित हो गए। तब नंदी ने उन्हें समझाते हुए कहा कि पिताजी आपने मुझे शिव जी की कृपा से पाया है, तो वो ही मेरी रक्षा करेंगे। इसके बाद नंदी ने शंकर जी के निमित्त कठोर तप किया, नंदी की तपस्या से प्रसन्न हुए और उन्हें अपना वाहन बना लिया।
नंदी के कानों में क्यों कहते हैं कामना – धार्मिक मान्यता है कि भगवान शिव अक्सर तपस्या में लीन रहते हैं। ऐसे में नंदी भक्तों की मनोकामनाएं सुनते हैं और शिव जी तपस्या पूरी होने पर भक्तों की मनोकामनाएं उन्हें बताते हैं।
शिव के प्रति नंदी का असीम प्रेम – पौरणिक कथाओं के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान जो समुद्र से वस्तुएं निकलीं उसे लेकर देवता और असुरों में लड़ाई होने लगी। ऐसे में शिव जी ने समुद्र मंथन के दौरान निकले हलाहल विष को पीकर संसार की रक्षा की थी। इस दौरान विष की कुछ बूंदे जमीन पर गिर गई थीं जिसे नंदी ने अपनी पी लिया। नंदी का ये प्रेम और लगाव देख शिव जी ने नंदी को सबसे बड़े भक्त की उपाधि दी, साथ ही ये भी कहा कि लोग शिव जी की पूजा के साथ उनकी भी अराधना करेंगे ।
फ्रिज में ऐसे रखें सब्जियां, कई दिनों तक नहीं होंगी खराब
रोज रोज सब्जी मंडी जाकर सब्जी लाने का समय किसी के पास नहीं होता । ऐसे में बहुत से लोग हफ्ते भर की सब्जियां एक साथ ही लें आते हैं. अब सवाल ये उठता है कि इन सब्जियों को लंबे समय तक ताजा कैसे रखा जाए?
खरीदते वक्त सब्जी की ताजगी कैसे पहचानें? – सबसे खास बात ये है कि सब्जी ताजी हो। ताजी सब्जी की पहचान करने के लिए ये तरीके सही हो सकते हैं। सब्जी का रंग चमकीला यानी हरा-भरा होना चाहिए। सब्जी में कोई भी भाग सड़ा न हो या बदबू नहीं होनी चाहिए। सब्जी की पत्तियां या और किसी भागों में कोई भी कीड़े या बीमारियां नहीं होनी चाहिए। सब्जी का औसतन आकार एक समान होना चाहिए। अपने आकार से छोटे-बड़े सब्जी खाने में बेहतर स्वाद नहीं मिल सकता है। सब्जी मजबूत होनी चाहिए, ज्यादा गली सब्जी भी नुकसानदायक हो सकता है। सब्जी की त्वचा चिकनी और मुलायम होनी चाहिए।
वैसे तो सब्जियों को लंबे समय तक फ्रेश रखने के लिए फ्रिज का इस्तेमाल किया जाता है लेकिन कई बार फ्रिज में सब्जियां रखने के बावजूद भी कुछ सब्जियां खराब हो जाती हैं। इसका कारण सही से सब्जियों को स्टोर न करना होता है। सब्जियों को अलग अलग तरह से स्टोर करने की जरूरत पड़ती है। कुछ सब्जियां रूम टेंपरेचर में ही फ्रेश रखी जा सकती हैं तो कुछ फ्रिज में रखने से फ्रेश रहती हैं. ऐसे में आइए जानते हैं किस सब्जी को किस तरह स्टोर करके लंबे समय तक फ्रेश रखा जा सकता है.
पत्तेदार सब्जियों को ऐसे करें स्टोर – पत्तेदार सब्जियां जैसे पालक, धनिया को स्टोर करने के लिए इन सब्जियों को सीधा फ्रिज में न रखें। फ्रिज में इन सब्जियों को रखने से पहले इन्हें अच्छी तरह से धो लें और सुखा लें। इसके बाद इन सब्जियों को पेपर टॉवल में लपेटकर सील्ड पैक में रखें। इस तरह पैक करने के बाद सब्जियों को आप फ्रिज में रख सकते हैं ।
आलू, प्याज और बाकी सब्जियों को इस तरह करें स्टोर – आलू और प्याज जैसी सब्जियों को 1 से 2 हफ्ते तक बड़ी ही आसानी से स्टोर किया जा सकता है। आलू और प्याज को फ्रिज में स्टोर न करें. इन्हें थोड़ी ठंडी और डार्क जगह पर रखें । वहीं खीरे और टमाटर को पानी में डालकर फ्रिज में स्टोर करेंय़ इस तरह से स्टोर करने पर ये सब्जियां लंबे समय तक फ्रेश रहेगी। गाजर को धोकर और अच्छी तरह से सुखाकर ही फ्रिज में स्टोर करें ।
सब्जी का दाम आपके बजट के हिसाब से कैसे होने चाहिए?
सब्जी का मूल्य भी उचित होना चाहिए। ज्यादातर सब्जियों की कीमत बाजार में एक समान होती है, लेकिन कुछ सब्जियों की कीमत मौसम के आधार पर बदल भी सकती है।
खरीदी जा रही सब्जियों की मात्रा भी आपकी जरूरत के मुताबिक होनी चाहिए। ज्यादा सब्जियां खरीदने से वे खराब होने का खतरा बढ़ जाता है पर इसके फ्रिज में कैसे रखा जाए ये भी मायने रखता है।
अगर आप सब्जियों को घर ले जाने के लिए पैक करवा रहे हैं, तो ध्यान रखें कि पैकेजिंग अच्छी होनी चाहिए। सब्जियों को सुरक्षित और ताजा रखने के लिए पैकिंग में काफी जगह होनी चाहिए।
आप सब्जियां खरीदते वक्त,दुकानदार विश्वासयोग्य होना चाहिए। उसके पास अच्छी क्वालिटी वाली सब्जियां हों।
4 प्रतिशत बढ़ा केंद्रीय कर्मचारियों का डीए, 1 जनवरी 2024 से प्रभावी
नयी दिल्ली । केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को भारत सरकार ने महंगाई भत्ता बढ़ाते हुए राहत दी है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने गुरुवार को केंद्रीय कर्मचारियों व पेंशनधारियों के महंगाई भत्ता में 4 प्रतिशत की वृद्धि का ऐलान किया है। सरकार के इस फैसले से एक करोड़ से अधिक कर्मचारियों व पेंशनधारकों को फायदा पहुंचेगा। लोकसभा चुनाव के पहले केंद्र सरकार ने कर्मचारियों व पेंशनभोगियों को बड़ी राहत दी है।
1 जनवरी से प्रभावी होगा बढ़ा हुआ महंगाई भत्ता – केंद्रीय मंत्रिमंडल ने गुरुवार को केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ते और पेंशनभोगियों के लिए महंगाई राहत में बढ़ोत्तरी का फैसला किया। चार प्रतिशत बढ़ा हुआ डीए, 1 जनवरी 2024 से प्रभावी होगा।
केंद्र सरकार के फैसले की जानकारी देते हुए केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि सरकार के फैसले से 49.18 लाख कर्मचारियों और 67.95 लाख पेंशनभोगियों को फायदा होगा। उन्होंने कहा कि इस फैसले से सरकारी खजाने पर प्रति वर्ष 12,868.72 करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा। उन्होंने बताया कि पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट में यह फैसला लि
पेंशनभोगियों को महंगाई भत्ते (डीए) और महंगाई राहत (डीआर) की अतिरिक्त किस्त मूल्य वृद्धि की भरपाई के लिए मूल वेतन/पेंशन के 46 प्रतिशत की मौजूदा दर से 4 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। एक आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया है कि यह बढ़ोतरी स्वीकृत फॉर्मूले के तहत है। यह सातवें केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों पर आधारित है।
मातृभाषा दिवस पर आयोजित समारोहों की रही धूम



खरीदकर अन्य किसी व्यक्ति को उपहार में दे। कार्यक्रम के अंत में अकादेमी के सहायक संपादक क्षेत्रवासी नायक द्वारा औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय साहित्यकार और साहित्यप्रेमी उपस्थित थे।






