Saturday, July 4, 2026
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सीबीएसई आयोजित करेगा ओपन-बुक एग्जाम, तैयार है प्रस्ताव

नयी दिल्ली ।  केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ओपन बुक परीक्षा पर विचार कर रहा है. सीबीएसई ने कक्षा 9वीं से 12वीं तक के लिए ओपन-बुक परीक्षा का प्रस्ताव रखा है, जो नवंबर में प्रायोगिक तौर पर शुरू किया जाएगा। ओपन-बुक परीक्षा में छात्रों को परीक्षा के दौरान अपने नोट्स, पाठ्यपुस्तकें या अन्य अध्ययन सामग्री ले जाने और उन्हें देखने की अनुमति होती है।
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार सीबीएसई पिछले साल जारी नए नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क सिफारिशों के अनुरूप कक्षा 9वीं से 12वीं तक के छात्रों के लिए ओपन बुक परीक्षा (ओबीई) पर विचार कर रहा है। सूत्रों के मुताबिक बोर्ड ने इस साल के अंत में कक्षा 9 और 10वीं के लिए अंग्रेजी, गणित. विज्ञान और कक्षा 11वीं और 12वीं के लिए अंग्रेजी, गणित और जीवविज्ञान के लिए कुछ स्कूलों में ओपन-बुक टेस्ट का एक पायलट रन प्रस्तावित किया है, ताकि इसमें लगने वाले समय का मूल्यांकन किया जा सके।
क्या है ओपन बुक परीक्षा – ओपन-बुक परीक्षा में छात्रों को परीक्षा के दौरान अपने नोट्स, पाठ्यपुस्तकें या अन्य अध्ययन सामग्री ले जाने और उन्हें देखने की अनुमति होती है। हालांकि ओबीई आवश्यक रूप से बंद-किताब वाली परीक्षाओं से आसान नहीं हैं। अक्सर वे अधिक चुनौतीपूर्ण होते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि एक ओपन-बुक टेस्ट किसी छात्र की याददाश्त का नहीं बल्कि किसी विषय की उसकी समझ और अवधारणाओं का विश्लेषण या लागू करने की क्षमता का आकलन करता है। यह केवल पाठ्यपुस्तक की सामग्री को उत्तर पुस्तिका पर लिखना नहीं है।
कब से आयोजित करने का है प्रस्ताव – रिपोर्ट के अनुसार पायलट रन इस साल नवंबर-दिसंबर में आयोजित करने का प्रस्ताव है और अनुभव के आधार पर बोर्ड यह तय करेगा कि कक्षा 9वीं से 12वीं के लिए उसके सभी स्कूलों में मूल्यांकन के इस रूप को अपनाया जाना चाहिए या नहीं। बोर्ड जून तक ओबीई पायलट के डिजाइन और विकास को पूरा करने की योजना बना रहा है और इसके लिए दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) से परामर्श करने का फैसला किया है।
पहले भी बनाई गई थी योजना – सीबीएसई ने पहले 2014-15 से 2016-17 तक तीन वर्षों के लिए कक्षा 9वीं और 11वीं की फाइनल परीक्षाओं के लिए ओपन टेस्ट आधारित मूल्यांकन या ओटीबीए प्रारूप का प्रयोग किया था, लेकिन हितधारकों से मिली नकारात्मक प्रतिक्रिया के कारण इसे लागू नहीं किया गया था ।

शुभजिता स्वदेशी – दुनिया की सबसे बड़ी दुग्ध उत्पादक सहकारिता संस्था अमूल

नयी दिल्ली । अमूल डेयरी गुजरात सहकारी दुग्ध विपणन महासंघ (जीसीएमएमएफ) का हिस्सा है। आज ये दुनिया की सबसे बड़ी दुग्ध संस्था है। इसके साथ आज सीधे तौर पर करीब 36 लाख से ज्यादा किसान जुड़े हुए हैं। इसमें गुजरात के 18 जिला दुग्ध संघ शामिल हैं। दूध का ब्रांड बन चुकी अमूल डेयरी 22 फरवरी को स्वर्ण जयंती मना रही है। अमूल को चलाने वाली गुजरात सहकारी दुग्ध विपणन महासंघ (जीसीएमएमएफ) की स्थापना साल 1973-74 में हुई थी। इस संस्था को बने हुए 50 साल पूरे हो गए हैं। इसकी स्थापना का विचार भी बड़े ही खराब हालात के दौरान आया था। साल 1946 से 1974 के बीच डेयरी सहकारी आंदोलन चला था। उस दौरान ये आंदोलन गुजरात के छह जिलों में चल रहा था। यह आंदोलन बिचौलियों से परेशान होकर शुरू हुआ था। यह वो दौर था जब बिचौलिए दूध की सारी मलाई खा रहे थे और किसानों को काफी कम पैसा मिलता था। आज किसान आंदोलन के दौर में अमूल की यह अनूठी कहानी एक मिसाल है। आईए जानते हैं अमूल की शुरुआत किस तरह से हुई थी। कैसे यह आंदोलन चला था।
बिचौलियों से थी परेशानी – एक समय तक दूग्ध उत्पादक अपना मिल्क बिचौलियों और व्यापारियों को बेचने पर मजबूर थे। इस दौरान दूग्ध उत्पादकों को काफी कम पैसा मिलता था। बिचौलिए उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा ले जाते थे। 1940 के दशक में गुजरात में व्यापारियों द्वारा दूध उत्पादक किसानों का खूब शोषण किया जाता था। उस वक़्त की मुख्य डेयरी पोलसन के एजेंटों द्वारा कम दामों में किसानों से दूध खरीदकर महंगे दामों में बेचा जा रहा था। ऐसे में एक सहकारी समिति स्थापित करने की जरूरत महसूस की गई, जिसमें दूग्ध उत्पादकों के ही प्रतिनिधि हों। इसके लिए लंबा आंदोलन चला था।
सरदार पटेल का विचार – इस समस्या से निजात दिलाने के लिए किसानों ने वहां के स्थानीय नेता त्रिभुवनदास पटेल से संपर्क साधा था। इसके बाद उन्होंने अपने लोगों के साथ सरदार वल्लभ भाई पटेल से मुलाकात की थी। सरदार पटेल ने समाधान करने के लिए मोरारजी देसाई को गुजरात भेजा था। उन्होंने हालात का जायजा लिया, फिर साल 1945 में बॉम्बे सरकार ने बॉम्बे मिल्क योजना शुरू की थी। साल 1949 में त्रिभुवन भाई पटेल ने डॉक्टर वर्गीज कुरियन से मुलाकात कर इस क्षेत्र में कार्य करने के लिए राजी किया था। दोनों ने सरकार की मदद से गुजरात के दो गांवों को सदस्य बनाकर डेयरी सहकारिता संघ की स्थापना की थी।ऐसे पड़ा अमूल नाम
वर्गीज कुरियन सहकारिता संघ को कोई आसान नाम देना चाहते थे, जो आसानी से जुबान पर आ जाए। इस दौरान कुछ कर्मचारियों ने इसका नाम संस्कृत शब्द अमूल्य सुझाया, जिसका मतलब अनमोल होता है। इसी को बाद में अमूल के नाम पर रखा गया। इसकी शुरुआत में कुछ किसानों द्वारा डेयरी में 247 लीटर दूध का उत्पादन किया जाता था। इसके लिए गांव में कई सहकारी समितियों का गठन किया गया था। 14 दिसंबर 1946 में त्रिभुवन दास पटेल के प्रयासों द्वारा अहमदाबाद से 100 किमी दूर आणंद शहर में खेड़ा जिला सहकारी समिति की स्थापना की गई थी।
लाखों किसानों का बदला जीवन – आनंद मिल्क यूनियन लिमिटेड (अमूल) एक डेयरी सहकारी संस्था है। यह गुजरात के आणंद में स्थित है। अमूल ब्रॉन्ड गुजरात को-ऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन लिमिटेड (जीसीएमएमएफ) के अधीन है। आज देशभर में अमूल की 144,500 डेयरी सहकारी समितियों में 15 मिलियन से ज्यादा दूग्ध उत्पादक अपना मिल्क पहुंचाते हें। इस दूध को 184 जिला सहकारी संघों में प्रोसेस किया जाता है। इसके बाद 22 राज्य मार्केटिंग संघों द्वारा इनकी मार्केटिंग की जाती है। यह दूध हर दिन लाखों लोगों तक पहुंचता है।

टीवी अभिनेता ऋतुराज सिंह का निधन

मुम्बई ।  टीवी अभिनेता ऋतुराज सिंह का गत 20 फरवरी को निधन हो गया है। उन्होंने टीवी शो ‘बनेगी अपनी बात’, ‘ज्योति’, ‘हिटलर दीदी’, ‘शपथ’, ‘वॉरियर हाई’, ‘आहट और अदालत’, ‘दीया और बाती’ हम जैसे कई भारतीय टीवी शो में अपनी अलग-अलग भूमिकाएं निभाई थीं। अभिनेता की मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई है।
ऋतुराज सिंह इन दिनों टीवी के लोकप्रिय शो ‘अनुपमा’ में नजर आ रहे थे। अभिनेता की अचानक निधन की खबर सुनकर टीवी इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई है। ऋतुराज ने कई और लोकप्रिय टीवी शोज में भी काम किया है, जिसमें ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ भी शामिल है। अभिनेता के निजी जीवन की बात करें तो ऋतुराज सिंह का पूरा नाम ऋतुराज सिंह चंद्रावत सिसोदिया था। उनका जन्म कोटा, राजस्थान में एक सिसोदिया राजपूत परिवार में हुआ था।

ऋतुराज सिंह ने अपनी स्कूली शिक्षा दिल्ली में पूरी की थी। साल 1993 में मुंबई चले आए और अभिनय को बतौर करियर के रूप में चुना। ऋतुराज अब तक कई हिंदी फिल्मों में अभिनय कर चुके थे, जिनमे एक खेल राजनीति, बद्रीनाथ की दुल्हनिया आदि फिल्में शामिल थीं। ऋतुराज सिंह ने 12 वर्षों तक बैरी जॉन के थिएटर एक्शन ग्रुप (TAG) के साथ दिल्ली में थिएटर में काम किया था और जी टीवी पर प्रसारित लोकप्रिय हिंदी टीवी गेम शो, तोल मोल के बोल में अभिनय किया था। एक्टर के दोस्त अमित बहल ने बताया, ‘हां, कार्डियक अरेस्ट के कारण उनका निधन हो गया। उन्हें कुछ समय से अग्नाशय के इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। घर लौटने के दौरान कार्डियक कॉम्प्लीकेशन्स हुईं और वह गुजर गए।’

महिलाओं को नौकरी से निकालने का आधार शादी नहीं : सुप्रीम कोर्ट

सैन्य नर्सिंग अधिकारी को दिया जाए 60 लाख मुआवजा
 नयी दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने शादी करने के बाद महिला नर्स को सेना की नौकरी से हटाने के मामले में अहम फैसला दिया है। शीर्ष अदालत ने मंगलवार को कहा कि शादी के आधार पर किसी महिला की सेवाएं खत्म करना लैंगिक भेदभाव है, ऐसे पूर्वाग्रह पर आधारित कोई भी कानून संवैधानिक तौर पर स्वीकार्य नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी करते हुए केंद्र को निर्देश दिया है कि वह मिलिट्री नर्स को 60 लाख की बकाया रकम का जल्द भुगतान करे।
आर्म्ड फोर्स ट्रिब्यूनल ने दिया था बहाली का आदेश – जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस दीपांकर दत्ता की बेंच ने सेलिना जॉन की याचिका पर यह आदेश दिया है। सेलिना सेना में बतौर मिलिट्री नर्स कार्यरत थीं। 1988 में उन्हें शादी के बाद नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया था। तब वह लेफ्टिनेंट के पद पर कार्यरत थीं। सेलिना ने 2012 में आर्म्ड फोर्स ट्रिब्यूनल में भी गुहार लगाई थी। तब ट्रिब्यूनल ने उनके पक्ष में फैसला सुनाते हुए बहाली के आदेश दिए थे। हालांकि, 2019 में केंद्र सरकार ने इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की।
1995 में वापस ले लिया गया था सेना का नियम – सुप्रीम कोर्ट बेंच ने कहा कि अब ट्रिब्यूनल के फैसले में किसी तरह के हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है। शादी के आधार पर मिलिट्री नर्सिंग सेवा से हटाने की इजाजत देने वाला नियम 1977 में पेश किया गया था, जो 1995 में वापस ले लिया गया था। यह नियम साफ तौर पर मनमाना था। लैंगिक आधार पर पूर्वाग्रह से युक्त कानून और नियम स्वीकार नहीं किए जा सकते हैं।
लैंगिक भेदभाव वाले नियम असंवैधानिक – अदालत ने आगे कहा- एक महिला की शादी होने के बाद उसकी नौकरी खत्म करना पूरी तरह से लैंगिक भेदभाव और असमानता का मामला है। ऐसे पितृ सत्तात्मक शासन को स्वीकार करना मानवीय गरिमा, भेदभाव रहित और निष्पक्ष व्यवहार के अधिकार को कमजोर करेगा। महिला कर्मचारियों की शादी और घरेलू जिम्मेदारी को अपात्रता का आधार बनाने वाले नियम असंवैधानिक हैं।
महिला नर्स को 60 लाख रु. का मिलेगा मुआवजा  – सुप्रीम कोर्ट ने महिला कर्मचारी की बहाली और बकाया वेतन से जुड़े ट्रिब्यूनल के फैसले में थोड़ा बदलाव किया है। बेंच ने मुआवजे के तौर पर 60 लाख रुपये के भुगतान का आदेश केंद्र सरकार को दिया है। कोर्ट ने कहा कि सेलिना जॉन ने थोड़े समय के लिए प्राइवेट संस्थान में बतौर नर्स काम किया था। अदालत के निर्देशों के अनुसार अब केंद्र को मुआवजे का भुगतान 8 हफ्ते में करना होगा।

फोन पे ने लॉन्च किया इंडस ऐप स्टोर

नयी दिल्ली । वालमार्ट की स्वामित्व वाली कंपनी फोनपे ने आज यानी 21 फरवरी को अपना एक ऐप स्टोर लॉन्च किया है. इस ऐप स्टोर का नाम इंडस ऐप स्टोर है, जिसकी चर्चाएं पिछले कुछ महीनों से हो रही थी। यह भारत में बनाया गया एक एंड्रॉयड ऐप स्टोर है, जो सीधा गूगल प्ले स्टोर को टक्कर दे सकता है। आपको बता दें कि बीते साल सितंबर 2023 में कंपनी ने अपने इस प्लेटफॉर्म पर कंपनियों को अपने-अपने ऐप्स पब्लिश करने के लिए कहा था। भारत के ज्यादा एंड्रॉयड यूज़र्स अपने फोन में किसी भी ऐप को डाउनलोड करने के लिए गूगल प्ले स्टोर का उपयोग करते हैं, लेकिन अब उनके पास एक अतिरिक्त विकल्प भी होगा। लोग अब इंडस ऐप स्टोर के जरिए भी एंड्रॉयड ऐप्स को डाउनलोड कर सकते हैं। आपको बता दें कि कंपनी ने इंडस ऐप स्टोर को लॉन्च करके भारत के ऐप मार्केट में एक बड़ा दांव खेला है, क्योंकि intelligence firm data.ai. के डेटा के मुताबिक भारत में रहने वाले लोगों ने 2023 में 1.19 ट्रिलियन घंटे मोबाइल ऐप्स पर खर्च किए हैं। 2021 में 954 बिलियन घंटे मोबाइल ऐप्स को यूज़ करने में खर्च किए थे। इससे पता चलता है कि भारतीय स्मार्टफोन यूज़र्स ऐप में कितना ज्यादा समया व्यतीत करते हैं और इसकी मात्रा कितनी तेजी से बढ़ती जा रही है। ऐसे में वालमार्ट द्वारा इस ऐप स्टोर को लॉन्च करना उनके लिए काफी फायदेमंद बिजनेस साबित हो सकता है ।
इंडस ऐप स्टोर की खासियत – इस ऐप के बारे में कंपनी ने लॉन्च के वक्त दावा किया है कि इसमें 45 अलग-अलग कैटीगरी में करीब 2 लाख से भी ज्यादा मोबाइल ऐप्स और गेम्स जोड़े जा चुके हैं। इस ऐप में यूज़र्स को हिंदी और इंग्लिश समेत कुल 12 भाषाओं का समर्थन मिलेगा, जिसमें भारत की कई क्षेत्रीय भाषाएं भी शामिल हैं। सितंबर में इंडस ऐप के बारे में पहली बार जानकारी देते हुए कंपनी ने बताया था कि इस स्टोर में पहले साल किसी भी डेवलपर्स के लिए अपने ऐप को रजिस्टर कराना बिल्कुल फ्री होगा। फोनपे के को-फाउंडर समीर निगम ने उस वक्त कहा था कि डेवलपर्स उनके प्लेटफॉर्म पर किसी भी पेमेंट गेटवे का इस्तेमाल कर सकते हैं। कंपनी का दावा है कि इंडस ऐप स्टर पर ईमेल और चैटबॉट के जरिए 24*7 कस्टमर केयर सपोर्ट की सुविधा उपलब्ध रहेगी।

नहीं रहे मशहूर रेडियो उद्घोषक अमीन सयानी, 91 साल की उम्र में निधन

मुम्बई ।  ‘नमस्कार भाइयों और बहनों, मैं आपका दोस्त अमीन सयानी बोल रहा हूं’ अब यह परिचय फिर कभी नहीं सुना जा सकेगा। अपनी जादुई आवाज और मस्त अंदाज से बरसों दुनिया के कई देशों के श्रोताओं के दिलों पर राज करने वाले सयानी का निधन हो गया है। 91 साल की उम्र में 21 फरवरी को उन्होंने अंतिम सांस ली। रेडियो की दुनिया में आवाज के जादूगर कहे जाने वाले दिग्गज के निधन की पुष्टि उनके बेटे रजिल सयानी ने की है।
बिनाका गीत माला से मिली पहचान – अमीन सयानी देश के ऐसे पहले रेडियो स्टार रहे हैं, जिनका बड़े-बड़े फिल्म स्टार भी सम्मान करते थे। एक जमाना था जब अपने ‘बिनाका गीत माला’ कार्यक्रम के माध्यम से आवाज के इस शहंशाह ने अपने नाम और काम की धूम मचा दी थी। हालांकि, पिछले कुछ बरसों से सयानी की तबियत सही नहीं थी। अमीन सयानी की मौत से उनके बेटे रजिल सायानी गहरे सदमे में हैं। उन्होंने बताया कि सयानी को मंगलवार रात को दिल का दौरा पड़ा था, जिसके बाद उन्हें तुरंत एचएन रिलायंस अस्पताल ले जाया गया। शाम करीब सात बजे उनका निधन हो गया।
महज 13 वर्ष की उम्र में लिखना शुरू कर दिया था – रेडियो सुनने का शौक रखने वालों के कानों में आज भी सयानी की आवाज में ‘नमस्कार बहनों और भाइयो, मैं आपका दोस्त अमीन सयानी बोल रहा हूं’ गूंजता है। कार्यक्रम ‘बिनाका गीतमाला’ ने उन्हें काफी लोकप्रियता दिलाई। उनका जन्म 21 दिसंबर, 1932 को मुंबई में हुआ था। उन्हें बचपन से ही लिखने का शौक था और महज 13 वर्ष की उम्र में उन्होंने अपनी मां की पाक्षिक पत्रिका ‘रहबर’ के लिए लिखना शुरू कर दिया था। यही वह उम्र थी जब वह अंग्रेजी भाषा में एक कुशल प्रस्तोता बन गए थे और उन्होंने आकाशवाणी मुंबई की अंग्रेजी सेवा में बच्चों के कार्यक्रमों में भाग लेना शुरू कर दिया था।
गुजराती लहजा होने के कारण नहीं हुआ चयन – हालांकि, जब सयानी ने ‘हिंदुस्तानी’ में प्रस्तुति देने के लिए ऑडिशन दिया तो उनकी आवाज में हल्का गुजराती लहजा होने के कारण उनका चयन नहीं किया गया। जब तत्कालीन सूचना एवं प्रसारण मंत्री बी वी केसकर ने आकाशवाणी से हिंदी गानों पर प्रतिबंध लगा दिया तो रेडियो सीलोन लोकप्रिय होने लगा। सयानी को दिसंबर 1952 में रेडियो सीलोन पर ‘बिनाका गीतमाला’ पेश करने का मौका मिला और फिर उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। यह शो 1952 से 1994 तक 42 वर्षों तक भारी लोकप्रियता हासिल करता रहा।

कोलकाता में छाया साहित्य आज तक 2024 का रंग

कोलकाता । कोलकाता में आजतक की ओर से साहित्य आज तक 2024 का आयोजन किया गया । एक साहित्यिक उत्सव जो अपनी विविध घटनाओं और प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों के साथ दर्शकों को आकर्षित करने में सफल रहा। भारत आज तक समूह द्वारा आयोजित इस उत्सव ने प्रसिद्ध लेखकों, कवियों, गायकों, और कलाकारों को साहित्य और संस्कृति की समृद्धता का जश्न मनाने के लिए एकत्रित किया। इस घटना को, स्वाभूमि द हेरिटेज में आयोजित किया गया, ने दो मंचों पर जीवंत प्रदर्शनों और समझदार चर्चाओं का एक विविध पंक्ति प्रस्तुत किया। “हल्ला बोल चौपाल” मंच पर अभिजीत भट्टाचार्य, बाबुल सुप्रियो, शत्रुघ्न सिन्हा, स्वानंद किरकिरे, और शैलेश लोढ़ा जैसे प्रसिद्ध व्यक्तित्वों की मौजूदगी थी, जिन्होंने अपनी प्रदर्शन करते समय और विचारों से दर्शकों को मोहित किया। इसके बीच, “दस्तक दरबार” मंच पर उपस्थित लोगों को विभिन्न साहित्यिक विषयों पर रोचक चर्चाओं का आनंद लेने को मिला, जिसमें हिंदी साहित्य पर सोशल मीडिया का प्रभाव, समय और साहित्य का संगम, अनुवाद का महत्व, और बंगाली साहित्य की सार्थकता शामिल थी। पल्लवी पुंडीर, सारदा बनर्जी, उमा झुनझुनवाला, इतु सिंह, जोया मित्रा, और जयंत घोषाल जैसे प्रमुख वक्ताओं ने मंच पर गरीबों को मिली, जिनसे मानवीय बातचीतों और प्रतिबिम्बों की शुरूआत हुई।
उत्सव में संगीतिक श्रद्धांजलियां भी शामिल थीं, जिसमें अरमान खान द्वारा उस्ताद राशिद खान को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए एक आकर्षक प्रदर्शन शामिल था, और समापन संगीत प्रदर्शन भी पापोन द्वारा प्रस्तुत किया गया। साहित्य आज तक 2024 की सफलता पर, आज तक समूह ने कहा, “हमें साहित्य आज तक 2024 में इतनी उत्साही भागीदारी और बिंदास रहने पर खुशी है। यह उत्सव साहित्य, संस्कृति, और रचनात्मकता का एक महोत्सव रहा है, और हम सभी प्रतिभागियों, उपस्थित लोगों, और साथीदारों का आभारी हैं जिन्होंने इसे एक यादगार घटना बनाया।”
पहले दिन राजस्थान के लोक गायक मामे खान ने शिरकत की. ‘केसरिया बालम… पधारो महारे देश’ सेशन में उन्होंने ‘पधारो म्हारे देश’ से लेकर ‘जद देखूं बन्ना री लाल पीली अंखिया’ तक पर शानदार प्रस्तुति दी। लेखक और त्रिपुरा के पूर्व राज्यपाल तथागत रॉय, लेखक आशुतोष और लेखक हिंडोल सेनगुप्ता शामिल हुए । उद्योग घराने, सामाजिक सरोकार’ सेशन में हर्षवर्धन नियोतिया और लेखक संदीप भुटोरिया ने भाषा और साहित्य पर बात की। लेखक संदीप भूतोड़िया ने कहा कि हिंदी के लेखकों को भी वही स्थान मिलना चाहिए, जो अंग्रेजी के लेखकों को मिलता है। पहले दिन कवि अनिल पुष्कर, आनंद गुप्ता और कवयित्री मुन्नी गुप्ता, पूनम सोनछात्रा ने शिरकत की। ‘क्योंकि कविता जरुरी है…’ सत्र में सभी ने अपनी-अपनी रचनाओं से अपनी बात रखी। पौराणिक कथाकार, लेखक और वक्ता देवदत्त पटनायक ने अपने अनुभव साझा किए. पटनायक ने पौराणिक कथा बनाम मिथ्या और उपन्यास बनाम आख्यान पर कई जरूरी बातें बताई। लेखक ने कहा कि जब आप ये जानते हो कि आपके बिना भी दुनिया चलेगी. आप रहें न रहें ये दुनिया चलती रहेगी।
दूसरे द‍िन मंच पर आमंत्रित थी 4 प्रत‍िष्ठ‍ित लेख‍िकाएं पल्लवी पुंडीर, शारदा बनर्जी इतु सिंह और उमा झुनझुनवाला. तीनों ने ‘सोशल मीडिया के दौर में हिंदी कहानी का संकट’ पर अपने व‍िचार रखे। साहित्य आजतक’ के कार्यक्रम में उस्ताद राशिद अली खान के बेटे अरमान ने कहा कि लोग मेरी और पापा की तुलना करने लगते हैं लेकिन राशिद खान अलग हैं, उनके जैसा कोई बन नहीं सकता है। प्रियंकर पालीवाल ने कहा कि चाहे जितना संकट और कठिनाइयां आएं साहित्य रहेगा, हम इसको बचाएंगे’। प्रो. अमरनाथ शर्मा ने कहा कि बिना पढ़े ठीक साहित्य नहीं रचा जा सकता है, अगर साहित्यकार दुनिया को समझेगा नहीं, तो क्या लिखेगा। आज का सबसे बड़ा संकट है कि हमारे अंदर की संवेदनाएं खत्म हो रही हैं। प्रो. सत्या उपाध्याय ने कहा कि अनुवाद के सेतु पर सवार होकर एक भाषा दूसरे तक पहुंचती है’। उन्होंने अनुवाद के महत्व पर प्रकाश डाला ।

गारूलिया मिल हाई स्कूल (एच.एस) में सरस्वती पूजा

कोलकाता ।133 साल पुराने गारूलिया मिल हाई स्कूल (एच.एस) में भव्य सरस्वती पूजा का आयोजन किया गया। कन्हैया भगत, इस्तेयाक अहमद,समरेश दत्ता, दामोदर पाठक, रेखा साव और कुलदीप कुमार की सक्रिय भूमिका ने इस आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सचिव और भार प्राप्त अधिकारी सचिंद्र सिंह के नेतृत्व में 900 से अधिक बच्चों को विशेष प्रसाद वितरित किया गया।

वसंत ऋतु के आगमन पर अर्चना संस्था ने किया स्वागत

कोलकाता । वसंत ऋतु के आगमन के साथ ही अर्चना संस्था के सदस्यों ने स्वरचित रचनाओं और गीत के साथ ही ज्ञान की देवी सरस्वती की आराधना की। ऋतुराज वसंत: बसंत और बहार, हैं दोनों ही धरती का श्रृंगार, जिन्दगी जटिल हो गई है।कवि बनेचंद मालू ने सुनाई। पीली पीली सरसों फूली-इंदू चांडक, जिनकी जिह्वा पर सदा सरस्वती का वास, उषा श्राफ ने मन की अमराई में कूके कोयल, प्रसन्न चोपड़ा ने महक रही है रात की रानी सुरभित सभी दिशाएं, मीठी सी खुशबू लेकर तुम जीवन में आए, शशि कंकानी ने जीवन से जब दुःखों का होगा अन्त,तभी सही मायने में आयेगा बसन्त।।, कल तक जो वृक्ष थे मुरझाए,करने लगे हैं नव श्रंगार,लो आ गयी बसन्त बहार।।, हिम्मत चौरडिया ने बसंत पर दो दोहे-सिमट अँधेरा अब गया, ऋतु बसंत मन भावनी, दो कुण्डलिया -बाला सुन्दर देखकर, गुंजन अलि अब कर रहे सुनाए। अहमदाबाद से भारती मेहता ने मन जिंदा है तो हर उम्र में होता है वसंत !* रूप, रंग, रस , गंध और स्वर, वसंत! क्या नही है तुम्हारे पास…?, सुशीला चनानी ने माँ शारदा की अर्चना में दो स्वरचित दोहे एक ॠतुराज बसन्त पर मनहरण छन्द, एक गीत “खोलो खोलो सखी मन के किंवाड बसन्त ॠतु आयी है “।सुनाए। मृदुला कोठारी ने वेद ऋचा जन्म दायिनी मंत्रों की झंकार प्राण प्रिय की रागिनी वंदन बारंबार…वाणी का हमें दान देकर दी अलौकिक भावना …, संगीता चौधरी ने राजस्थानी रचना धमाल राग फाग रमावां रै म्हारी मिरगानैणी फागण आयो रै गीत गाया। यह कार्यक्रम जूम पर हुआ ।विद्या भंडारी ने सभी को शुभकामनाएँ दी ।मृदुला कोठारी ने कार्यक्रम का संचालन और धन्यवाद किया सुशीला चनानी ने । कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।

भवानीपुर कॉलेज ने सरस्वती सम्मान समारोह 24 से सम्मानित किया

कोलकाता । भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज ने कॉलेज टर्फ पर सरस्वती पूजा-अर्चना की गई। विभिन्न सांस्कृतिक प्रदर्शन, सरस्वती सम्मान समारोह और महा प्रसाद द्वारा आयोजित सरस्वती की आराधना की गई। सरस्वती सम्मान समारोह 24 के अंतर्गत तैंतीस उन शिक्षक और शिक्षिकाओं को सम्मानित किया गया जिनके आलेख, पुस्तकें इस वर्ष प्रकाशित हुई हैं। इस अवसर पर प्रमुख रूप से विद्यार्थियों ने संस्कृत के श्लोकों और शंख प्रतियोगिता में भाग लिया। मैनेजमेंट के उपाध्यक्ष मिराज डी शाह ने सरस्वती पूजा वंदना की। साथ में सभी पदाधिकारियों और गणमान्य अतिथियों ने सभी विद्यार्थियों को शुभकामनाएँ दी। रेक्टर प्रो दिलीप शाह ने सभी शिक्षकों और विद्यार्थियों के महत्वपूर्ण योगदान पर आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।