Tuesday, March 24, 2026
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3 दिन में 517 किमी दौड़े मिलिंद सोमन, रचा इतिहास

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फिटनेस के मामले में कोई बॉलीवुड स्टार मिलिंद सोमन को टक्कर नहीं दे सकता। पॉपुलर टीवी शो ‘कैप्टन व्योम’ से फेमस होने वाले 51 साल के मिलिंद ने अल्ट्रामैन का खिताब जीत लिया है। हाल ही में उन्होंने फ्लोरिडा की अल्ट्रामैराथन पूरी की।

यह दुनिया की सबसे मुश्किल मैराथन होती है। ये 517 किमी लंबी थी। इसमें पहले दिन 10 किलोमीटर तक तैरना और 148 किमी तक साइकलिंग करनी होती है। दूसरे दिन 276 किलोमीटर तक साइकिल चलानी पड़ती है। तीसरे दिन 84 किमी तक दौड़ लगानी होती है।

इस मैराथन में सोमन के साथ चार भारतीय भी शामिल थे। जिन्होंने तीन दिन में 500 किमी की दूरी तय की थी। सोमन ने अपने फेसबुक अकाउंट पर मैराथन की तस्वीरें शेयर करते हुए जीत की खुशी जाहिर की है।

इस मैराथन में सोमन के साथ चार भारतीय भी शामिल थे। जिन्होंने तीन दिन में 500 किमी की दूरी तय की थी। सोमन ने अपने फेसबुक अकाउंट पर मैराथन की तस्वीरें शेयर करते हुए जीत की खुशी जाहिर की है।

यह एक ट्राइथेलॉन प्रतियोगिता होती है जिसमें 3.8 किलोमीटर तक तैरना, 180.2 किलोमीटर साइकल चलाना और 42.2 किलोमीटर तक बिना रुके दौड़ना होता है। फिलहाल मिलिंद ने भारतीय सिनेमा से दूरी बनाई हुई है।

 

द बंगाल फैशन एक्सपो में दिखी कॉटन की खूबसूरती

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कॉटन हम सबको पसन्द है। गर्मियों के लिए तो यह शानदार फैब्रिक है मगर कॉटन अब हर मौसम में पहना जा सकता है।

हाल ही में टेक्सटाइल उद्योग को एक नए कलेवर में पेश करते हुए एक अनोखा फैशन एक्सपो महानगर में आयोजित हुआ जहाँ पर 7 डिजाइनरों ने कॉटन को अलग अन्दाज में पेश किया।

मौका था द अपोलो ग्लेनगल्स द्वारा बीसीसीआई के सहयोग से आयोजित द बंगाल फैशन एक्सपो। जिन 7 डिजाइनरों के कलेक्शन्स से यह एक्सपो शानदार बना, उनमें शामलू दजेडा, शरबरी दत्ता, नंदिता राजा, अग्निमित्रा पाल, शायंतन सरकार, प्रणय वैद्य, अभिषेक राय।

फैशन शो में कोरियोग्राफी पिंकी केनवर्दी, मेकअप अभिजीत चन्दा का था। यह फैशन एक्सपो अपोलो हॉस्पिटल्स की प्रेसिडेंट तथा सीईओ (पूर्वी क्षेत्र) डॉ. रूपाली बसु की परिकल्पना है जो खुद एक मशहूर साड़ी डिजाइनर हैं।

बीसीसीआई के प्रेसिडेंट सुतनू घोष ने उम्मीद जाहिर की कि टेक्सटाइल उद्योग को नया अंदाज देने में मददगार साबित होगा।

इस एक्सपो को सफल बनाने में आदि मोहिनी मोहन कांजीलाल की स्वर्णाली कांजीलाल, सेंचुरी प्लाई के संजय अग्रवाल, केया सेठ एक्सक्लूसिव्स की केया सेठ, मीनू साड़ी की अनिता अग्रवाल समेत कई अन्य लोगों का योगदान रहा।

शिवरात्रि पर बनाएं ये स्वादिष्ट व्यंजन

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मखाने की खीर मेवे और मावे के साथ

सामग्री: 1 लीटर फुल क्रीम दूध, 50 ग्राम मखाने, 2 टेबल स्पून घी, आधा कप चीनी, 4 छोटी इलायची, 50 ग्राम कटे हुए बादाम , 30 ग्राम मेवे, 50 ग्राम खोया।

विधि: सबसे पहले एक पैन में घी डालकर गर्म करें। जब घी गरम हो जाए तब उसमें मखाने को हल्‍का भूरा होने तक भून लें। फिर एक दूसरे गहरे पैन में मखाना और दूध डालकर घीमी आंच पर चढा दे। एक उबाल आने पर आंच को धीमा कर दें और चलाते हुए पकाएं। जबतक दूध गाढा न हो जाए उसे धीमी आंच पर पकाती रहें। जब अच्‍छी तरह से पक जाए तब चीनी, पिसी इलायची, खोया और मेवे डालकर अच्‍छी तरह से चलाएं। 10-15 मिनट तक पकाने के बाद आंच से उतार लें। ठंडा कर के बादाम से सजा कर सर्व करें।

साबूदाना बड़ा

 

सामग्री- साबूदाना – 1 कप, उबले आलू – 4, मूंगफली के दाने – आधा कप, हरी मिर्च – 2 बारीक कटी हुई, अदरक पेस्‍ट, हरा धनियां बारीक कटा हुआ, नमक – स्वादानुसार, तेल – तलने के लिये।

विधि – 2 घंटे तक साबुदाना को भिगो दीजिए। फिर एक तरफ मूंगफली के दाने जो कि भुने हुये हों, उनको दरादरा पीस लीजिये। आलू को बारीक तोड़ लीजिये। भीगे हुए साबूदाने से पानी अच्‍छी तरह से निकाल लें और उसमें, मुंगफली के दाने, आलू, हरी मिर्च, अदरक, हरा धनियां और नमक अच्छी तरह मिला लीजिये। साबूदाना बड़ा बनाने के लिये मिश्रण तैयार है। अब कढ़ाई में तेल डाल कर गरम कीजिये। और उसमें हाथों से बनाया गया बड़ा गरम तेल में डालिये धीरे धीरे 3-4 बड़े बनाकर कढ़ाई में डालिये और साबूदाना बड़ों को पलट पलट कर सुनहरा होने तक तल लीजिये। तले साबूदाने बड़े, नैपकिन वाले प्लेट में निकाल लें। अब आपके साबूदाना बड़े तैयार हैं। गरमा गरम साबूदाना बड़े, हरे धनिये की चटनी के साथ परोसिये और खाइये।

भगवान शिव ने लिए ये अवतार

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शिवपुराण में भगवान शिव के अनेक अवतारों का वर्णन मिलता है, लेकिन बहुत ही कम लोग इन अवतारों के बारे में जानते हैं। आज हम हम आपको बता रहे हैं भगवान शिव के अवतारों के बारे में-

 शरभ अवतारभगवान शंकर का पहला अवतार है शरभ। इस अवतार में भगवान शंकर का स्वरूप आधा मृग (हिरण) तथा शेष शरभ पक्षी (पुराणों में बताया गया आठ पैरों वाला प्राणी, जो शेर से भी शक्तिशाली था) का था। इस अवतार में भगवान शंकर ने नृसिंह भगवान की क्रोधाग्नि को शांत किया था। लिंगपुराण में शिव के शरभावतार की कथा है, उसके अनुसार-

हिरण्यकश्यप का वध करने के लिए भगवान विष्णु ने नृसिंहावतार लिया था। हिरण्यकश्यप के वध के पश्चात भी जब भगवान नृसिंह का क्रोध शांत नहीं हुआ तो देवता शिवजी के पास पहुंचे। तब भगवान शिव ने शरभावतार लिया और वे इसी रूप में भगवान नृसिंह के पास पहुंचे तथा उनकी स्तुति की, लेकिन नृसिंह का क्रोध शांत नहीं हुआ। यह देख शरभ रूपी भगवान शिव अपनी पूंछ में नृसिंह को लपेटकर ले उड़े। तब कहीं जाकर भगवान नृसिंह की क्रोधाग्नि शांत हुई। उन्होंने शरभावतार से क्षमा याचना कर अति विनम्र भाव से उनकी स्तुति की।

 पिप्पलाद अवतारमानव जीवन में भगवान शिव के पिप्पलाद अवतार का बड़ा महत्व है। शनि पीड़ा का निवारण पिप्पलाद की कृपा से ही संभव हो सका। कथा है कि पिप्पलाद मुनि ने देवताओं से पूछा- क्या कारण है कि मेरे पिता दधीचि जन्म से पूर्व ही मुझे छोड़कर चले गए? देवताओं ने बताया कि शनि ग्रह की दृष्टि के कारण ही ऐसा कुयोग बना। पिप्पलाद यह सुनकर बड़े क्रोधित हुए। उन्होंने शनि को नक्षत्र मंडल से गिरने का श्राप दे दिया।

श्राप के प्रभाव से शनि उसी समय आकाश से गिरने लगे। देवताओं की प्रार्थना पर पिप्पलाद ने शनि को इस बात पर क्षमा किया कि शनि जन्म से लेकर 16 साल तक की आयु तक किसी को कष्ट नहीं देंगे। तभी से पिप्पलाद का स्मरण करने मात्र से शनि की पीड़ा दूर हो जाती है। शिवपुराण के अनुसार, स्वयं ब्रह्मा ने ही शिव के इस अवतार का नामकरण किया था।

नंदी अवतारभगवान शंकर सभी जीवों का प्रतिनिधित्व करते हैं। भगवान शंकर का नंदीश्वर अवतार भी इसी बात का अनुसरण करते हुए सभी जीवों से प्रेम का संदेश देता है। नंदी (बैल) कर्म का प्रतीक है, जिसका अर्थ है कर्म ही जीवन का मूल मंत्र है। इस अवतार की कथा इस प्रकार है-

शिलाद मुनि ब्रह्मचारी थे। वंश समाप्त होता देख उनके पितरों ने शिलाद से संतान उत्पन्न करने को कहा। शिलाद ने अयोनिज और मृत्युहीन संतान की कामना से भगवान शिव की तपस्या की। तब भगवान शंकर ने स्वयं शिलाद के यहां पुत्र रूप में जन्म लेने का वरदान दिया। कुछ समय बाद भूमि जोतते समय शिलाद को भूमि से उत्पन्न एक बालक मिला। शिलाद ने उसका नाम नंदी रखा। भगवान शंकर ने नंदी को अपना गणाध्यक्ष बनाया। इस तरह नंदी नंदीश्वर हो गए। मरुतों की पुत्री सुयशा के साथ नंदी का विवाह हुआ।

 भैरव अवतारशिवपुराण में भैरव को परमात्मा शंकर का पूर्ण रूप बताया गया है। एक बार भगवान शंकर की माया से प्रभावित होकर ब्रह्मा व विष्णु स्वयं को श्रेष्ठ मानने लगे। तभी वहां तेजपुंज के मध्य एक पुरुषाकृति दिखलाई पड़ी। उन्हें देखकर ब्रह्माजी ने कहा- चंद्रशेखर तुम मेरे पुत्र हो। अत: मेरी शरण में आओ। ब्रह्मा की ऐसी बात सुनकर भगवान शंकर को क्रोध आ गया।

उन्होंने उस पुरुषाकृति से कहा- काल की भांति शोभित होने के कारण आप साक्षात कालराज हैं। भीषण होने से भैरव हैं। भगवान शंकर से इन वरों को प्राप्त कर कालभैरव ने अपनी अंगुली के नाखून से ब्रह्मा के पांचवे सिर को काट दिया। ब्रह्मा का पांचवां सिर काटने के कारण भैरव ब्रह्महत्या के पाप से दोषी हो गए। काशी में भैरव को ब्रह्महत्या के पाप से मुक्ति मिली।

अश्वत्थामामहाभारत के अनुसार, पांडवों के गुरु द्रोणाचार्य के पुत्र अश्वत्थामा काल, क्रोध, यम व भगवान शंकर के अंशावतार थे। आचार्य द्रोण ने भगवान शंकर को पुत्र रूप में पाने की लिए घोर तपस्या की और भगवान शिव ने उन्हें वरदान दिया कि वे उनके पुत्र के रूप में अवतीर्ण होंगे। समय आने पर सवन्तिक रुद्र ने अपने अंश से द्रोण के बलशाली पुत्र अश्वत्थामा के रूप में अवतार लिया। ऐसी मान्यता है कि अश्वत्थामा अमर हैं तथा वह आज भी धरती पर ही निवास करते हैं। इस विषय में एक श्लोक प्रचलित है-

अश्वत्थामा बलिव्र्यासो हनूमांश्च विभीषण:।

कृप: परशुरामश्च सप्तएतै चिरजीविन:॥

सप्तैतान् संस्मरेन्नित्यं मार्कण्डेयमथाष्टमम्।

जीवेद्वर्षशतं सोपि सर्वव्याधिविवर्जित।।
अर्थात- अश्वत्थामा, राजा बलि, व्यासजी, हनुमानजी, विभीषण, कृपाचार्य, परशुराम व ऋषि मार्कण्डेय ये आठों अमर हैं। शिवमहापुराण (शतरुद्रसंहिता-37) के अनुसार अश्वत्थामा आज भी जीवित हैं और वे गंगा के किनारे निवास करते हैं किंतु उनका निवास कहां हैं, यह नहीं बताया गया है।

वीरभद्र अवतारभगवान शिव का विवाह ब्रह्मा के पुत्र दक्ष की पुत्री सती से हुआ था। एक बार दक्ष ने एक विशाल यज्ञ का आयोजन किया, लेकिन उन्होंने शिव व सती को निमंत्रित नहीं किया। भगवान शिव के मना करने के बाद भी सती इस यज्ञ में आईं और जब उन्होंने यज्ञ में अपने पति शिव का अपमान होते देखा तो यज्ञवेदी में कूदकर उन्होंने अपनी देह का त्याग कर दिया।

जब भगवान शिव को यह मालूम हुआ तो उन्होंने अपने सिर से एक जटा उखाड़ी और उसे क्रोध में आकर पर्वत के ऊपर पटक दिया। उस जटा से महाभंयकर वीरभद्र प्रगट हुए। शास्त्रों में भी इसका उल्लेख है-

क्रुद्ध: सुदष्टपुट: स धूर्जटिर्जटां तडिद्वह्लिसटोग्ररोचिषम्।

उत्कृत्य रुद्र: सहसोत्थितो हसन् गम्भीरनादो विससर्ज तां भुवि॥

ततोऽतिकायस्तनुवा स्पृशन्दिवं। श्रीमद् भागवत –4/5/1

शिव के इस अवतार ने दक्ष के यज्ञ का विध्वंस कर दिया और दक्ष का सिर काटकर उसे मृत्युदंड दिया। बाद में देवताओं के अनुरोध करने पर भगवान शिव ने दक्ष के सिर पर बकरे का मुंह लगाकर उसे पुन: जीवित कर दिया।

गृहपति अवतारभगवान शंकर का सातवां अवतार है गृहपति। इसकी कथा इस प्रकार है- नर्मदा के तट पर धर्मपुर नाम का एक नगर था। वहां विश्वानर नाम के एक मुनि तथा उनकी पत्नी शुचिष्मती रहती थीं। शुचिष्मती ने बहुत समय तक नि:संतान रहने पर एक दिन अपने पति से शिव के समान पुत्र प्राप्ति की इच्छा की। पत्नी की अभिलाषा पूरी करने के लिए मुनि विश्वनार काशी आ गए। यहां उन्होंने घोर तप द्वारा भगवान शिव के वीरेश लिंग की आराधना की।

एक दिन मुनि को वीरेश लिंग के मध्य एक बालक दिखाई दिया। मुनि ने बालरूपधारी शिव की पूजा की। उनकी पूजा से प्रसन्न होकर भगवान शंकर ने शुचिष्मति के गर्भ से अवतार लेने का वरदान दिया। कालांतर में शुचिष्मति गर्भवती हुई और भगवान शंकर शुचिष्मती के गर्भ से पुत्र रूप में प्रकट हुए। कहते हैं, पितामह ब्रह्मा ने ही उस बालक का नाम गृहपति रखा था।

ऋषि दुर्वासाभगवान शंकर के विभिन्न अवतारों में ऋषि दुर्वासा का अवतार भी प्रमुख है। धर्म ग्रंथों के अनुसार, सती अनुसूइया के पति महर्षि अत्रि ने ब्रह्मा के निर्देशानुसार पत्नी सहित ऋक्षकुल पर्वत पर पुत्र कामना से घोर तप किया। उनके तप से प्रसन्न होकर ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों उनके आश्रम पर आए। उन्होंने कहा- हमारे अंश से तुम्हारे तीन पुत्र होंगे, जो त्रिलोकी में विख्यात तथा माता-पिता का यश बढ़ाने वाले होंगे।

समय आने पर ब्रह्माजी के अंश से चंद्रमा उत्पन्न हुए। विष्णु के अंश से श्रेष्ठ संन्यास पद्धति को प्रचलित करने वाले दत्तात्रेय उत्पन्न हुए और रुद्र के अंश से मुनिवर दुर्वासा ने जन्म लिया। शास्त्रों में इसका उल्लेख है-

अत्रे: पत्न्यनसूया त्रीञ्जज्ञे सुयशस: सुतान्।

दत्तं दुर्वाससं सोममात्मेशब्रह्मïसम्भवान्॥

श्रीमद्भागवत- 4/1/15

अर्थ- अत्रि की पत्नी अनुसूइया से दत्तात्रेय, दुर्वासा और चंद्रमा नाम के तीन परम यशस्वी पुत्र हुए। ये क्रमश: भगवान विष्णु, शंकर और ब्रह्मा के अंश से उत्पन्न हुए थे।

हनुमानभगवान शिव का हनुमान अवतार सभी अवतारों में श्रेष्ठ माना गया है। इस अवतार में भगवान शंकर ने एक वानर का रूप धरा था। शिवपुराण के अनुसार, देवताओं और दानवों को अमृत बांटते हुए विष्णुजी के मोहिनी रूप को देखकर लीलावश शिवजी ने कामातुर होकर अपना वीर्यपात कर दिया। सप्तऋषियों ने उस वीर्य को कुछ पत्तों में संग्रहित कर लिया। समय आने पर सप्तऋषियों ने भगवान शिव के वीर्य को वानरराज केसरी की पत्नी अंजनी के कान के माध्यम से गर्भ में स्थापित कर दिया, जिससे अत्यंत तेजस्वी एवं प्रबल पराक्रमी श्री हनुमानजी उत्पन्न हुए।

हनुमानजी को भगवान विष्णु के अवतार श्रीराम का परम सेवक माना जाता है। वाल्मीकि रामायण के एक प्रसंग में श्रीराम ने यह भी कहा है कि यदि हनुमान न होते वे सीता को रावण की कैद से मुक्त न करा पाते। हनुमानजी भी अमर हैं, उन्हें अमरता का वरदान माता सीता ने दिया था।

वृषभ अवतारभगवान शंकर ने विशेष परिस्थितियों में वृषभ अवतार लिया था। इस अवतार में भगवान शंकर ने विष्णु पुत्रों का संहार किया था। धर्म ग्रंथों के अनुसार, जब भगवान विष्णु दैत्यों को मारने पाताल लोक गए तो उन्हें वहां बहुत-सी चंद्रमुखी स्त्रियां दिखाई पड़ी।

विष्णु ने उनके साथ रमण करके बहुत से पुत्र उत्पन्न किए। विष्णु के इन पुत्रों ने पाताल से पृथ्वी तक बड़ा उपद्रव किया। उनसे घबराकर ब्रह्माजी ऋषि मुनियों को लेकर शिवजी के पास गए और रक्षा के लिए प्रार्थना करने लगे। तब भगवान शंकर ने वृषभ रूप धारण कर विष्णु पुत्रों का संहार किया।

यतिनाथ अवतारभगवान शंकर ने यतिनाथ अवतार लेकर अतिथि के महत्व का प्रतिपादन किया था। उन्होंने इस अवतार में अतिथि बनकर भील दंपत्ति की परीक्षा ली थी, जिसके कारण भील दंपत्ति को अपने प्राण गंवाने पड़े। धर्म ग्रंथों के अनुसार, अर्बुदाचल पर्वत के समीप शिवभक्त आहुक-आहुका भील दंपत्ति रहते थे। एक बार भगवान शंकर यतिनाथ के वेष में उनके घर आए। उन्होंने भील दंपत्ति के घर रात बिताने की इच्छा प्रकट की। आहुका ने अपने पति को गृहस्थ की मर्यादा का स्मरण कराते हुए स्वयं धनुष बाण लेकर बाहर रात बिताने और यति को घर में विश्राम करने देने का प्रस्ताव रखा।

इस तरह आहुक धनुष-बाण लेकर बाहर चला गया। सुबह आहुका और यति ने देखा कि वन्य प्राणियों ने आहुक को मार डाला है। इस पर यतिनाथ बहुत दु:खी हुए। तब आहुका ने उन्हें शांत करते हुए कहा कि आप शोक न करें। अतिथि सेवा में प्राण विसर्जन धर्म है और उसका पालन कर हम धन्य हुए हैं। जब आहुका अपने पति की चिताग्नि में जलने लगी तो शिवजी ने उसे दर्शन देकर अगले जन्म में पुन: अपने पति से मिलने का वरदान दिया।

कृष्णदर्शन अवतारभगवान शिव ने इस अवतार में यज्ञ आदि धार्मिक कार्यों के महत्व को बताया है। इस प्रकार यह अवतार पूर्णत: धर्म का प्रतीक है। धर्म ग्रंथों के अनुसार, इक्ष्वाकु वंशीय श्राद्ध देव की नवमी पीढ़ी में राजा नभग का जन्म हुआ। विद्या-अध्ययन को गुरुकुल गए नभग जब बहुत दिनों तक न लौटे तो उनके भाइयों ने राज्य का विभाजन आपस में कर लिया। नभग को जब यह पता चला तो वह अपने पिता के पास गए। पिता ने नभग से कहा कि वह यज्ञ परायण ब्राह्मणों के मोह को दूर करते हुए उनके यज्ञ को सम्पन्न करके, उनके धन को प्राप्त करे।

तब नभग ने यज्ञभूमि में पहुंचकर वैश्य देव सूक्त के स्पष्ट उच्चारण द्वारा यज्ञ संपन्न कराया। अंगारिक ब्राह्मण यज्ञ का अवशिष्ट धन नभग को देकर स्वर्ग को चले गए। उसी समय शिवजी कृष्ण दर्शन रूप में प्रकट होकर बोले कि यज्ञ के अवशिष्ट धन पर तो उनका अधिकार है। विवाद होने पर कृष्ण दर्शन रूपधारी शिवजी ने उसे अपने पिता से ही निर्णय कराने को कहा। नभग के पूछने पर श्राद्ध देव ने कहा-वह पुरुष शंकर भगवान हैं। यज्ञ में अवशिष्ट वस्तु उन्हीं की है। पिता की बातों को मानकर नभग ने शिवजी की स्तुति की।

अवधूत अवतारभगवान शंकर ने अवधूत अवतार लेकर इंद्र के अंहकार को चूर किया था। धर्म ग्रंथों के अनुसार, एक समय बृहस्पति और अन्य देवताओं को साथ लेकर इंद्र शंकरजी के दर्शनों के लिए कैलाश पर्वत पर गए। इंद्र की परीक्षा लेने के लिए शंकरजी ने अवधूत रूप धारण कर उनका मार्ग रोक लिया। इंद्र ने उस पुरुष से अवज्ञापूर्वक बार-बार उसका परिचय पूछा तो भी वह मौन रहा।

क्रोधित होकर इंद्र ने जैसे ही अवधूत पर प्रहार करने के लिए वज्र छोड़ना चाहा, वैसे ही उनका हाथ जड़ हो गया। यह देखकर बृहस्पति ने शिवजी को पहचान कर अवधूत की बहुविधि स्तुति की, जिससे प्रसन्न होकर शिवजी ने इंद्र को क्षमा कर दिया।

भिक्षुवर्य अवतारभगवान शंकर देवों के देव हैं। संसार में जन्म लेने वाले हर प्राणी के जीवन के रक्षक भी हैं। भगवान शंकर का भिक्षुवर्य अवतार यही संदेश देता है। धर्म ग्रंथों के अनुसार, विदर्भ नरेश सत्यरथ को शत्रुओं ने मार डाला। उसकी गर्भवती पत्नी ने शत्रुओं से छिपकर अपने प्राण बचाए। समय आने पर उसने एक पुत्र को जन्म दिया। रानी जब जल पीने के लिए सरोवर गई तो उसे घड़ियाल ने अपना आहार बना लिया। तब वह बालक भूख-प्यास से तड़पने लगा। इतने में ही शिवजी की प्रेरणा से एक भिखारिन वहां पहुंची। शिवजी ने भिक्षुक का रूप धर उस भिखारिन को बालक का परिचय दिया और उसके पालन-पोषण का निर्देश दिया तथा यह भी कहा कि यह बालक विदर्भ नरेश सत्यरथ का पुत्र है। यह सब कह कर भिक्षुक रूप धारी शिव ने उस भिखारिन को अपना वास्तविक रूप दिखाया। शिव के आदेश अनुसार भिखारिन ने उस बालक का पालन-पोषण किया। बड़ा होकर उस बालक ने शिवजी की कृपा से अपने दुश्मनों को हराकर पुन: अपना राज्य प्राप्त किया।

किरात अवतारकिरात अवतार में भगवान शंकर ने पांडु पुत्र अर्जुन की वीरता की परीक्षा ली थी। महाभारत के अनुसार, कौरवों ने छल-कपट से पांडवों का राज्य हड़प लिया, जिसके कारण उन्हें वनवास पर जाना पड़ा। वनवास के दौरान जब अर्जुन भगवान शंकर को प्रसन्न करने के लिए तपस्या कर रहे थे, तभी दुर्योधन द्वारा भेजा हुआ मूड नामक दैत्य अर्जुन को मारने के लिए शूकर (सुअर) का रूप धारण कर वहां पहुंचा। अर्जुन ने शूकर पर अपने बाण से प्रहार किया, उसी समय भगवान शंकर ने भी किरात वेष धारण कर उसी शूकर पर बाण चलाया। शिव की माया के कारण अर्जुन उन्हें पहचान न पाए और शूकर का वध उसके बाण से हुआ है, यह कहने लगे। इस पर दोनों में विवाद हो गया। अर्जुन ने किरात वेषधारी शिव से युद्ध किया। अर्जुन की वीरता देख भगवान शिव प्रसन्न हो गए और अपने वास्तविक स्वरूप में आकर अपना पाशुपात अस्त्र प्रदान किया।

सुनटनर्तक अवतारपार्वती के पिता हिमाचल से उनकी पुत्री का हाथ मांगने के लिए शिवजी ने सुनटनर्तक वेष धारण किया था। हाथ में डमरू लेकर शिवजी नट के रूप में हिमाचल के घर पहुंचे और नृत्य करने लगे। नटराज शिवजी ने इतना सुंदर और मनोहर नृत्य किया कि सभी प्रसन्न हो गए। जब हिमाचल ने नटराज को भिक्षा मांगने को कहा तो नटराज शिव ने भिक्षा में पार्वती को मांग लिया। इस पर हिमाचलराज अति क्रोधित हुए। कुछ देर बाद नटराज वेषधारी शिवजी पार्वती को अपना रूप दिखाकर स्वयं चले गए। उनके जाने पर मैना और हिमाचल को दिव्य ज्ञान हुआ और उन्होंने पार्वती को शिवजी को देने का निश्चय किया।

ब्रह्मचारी अवतारदक्ष के यज्ञ में प्राण त्यागने के बाद जब सती ने हिमालय के घर जन्म लिया तो शिवजी को पति रूप में पाने के लिए घोर तप किया। पार्वती की परीक्षा लेने के लिए शिवजी ब्रह्मचारी का वेष धारण कर उनके पास पहुंचे। पार्वती ने ब्रह्मचारी को देख उनकी विधिवत पूजा की।

जब ब्रह्मचारी ने पार्वती से उसके तप का उद्देश्य पूछा और जानने पर शिव की निंदा करने लगे तथा उन्हें श्मशानवासी व कापालिक भी कहा। यह सुन पार्वती को बहुत क्रोध हुआ। पार्वती की भक्ति व प्रेम को देखकर शिव ने उन्हें अपना वास्तविक स्वरूप दिखाया। यह देख पार्वती अति प्रसन्न हुईं।

अर्धनारीश्वर अवतार  – भगवान शंकर का यह अवतार हमें बताता है कि समाज, परिवार व सृष्टि के संचालन में पुरुष की भूमिका जितनी महत्वपूर्ण है, उतनी ही स्त्री की भी है। अर्धनारीश्वर अवतार लेकर भगवान ने यह संदेश दिया है कि समाज तथा परिवार में महिलाओं को भी पुरुषों के समान ही आदर व प्रतिष्ठा मिले।

शिवपुराण के अनुसार, सृष्टि में प्रजा की वृद्धि न होने पर ब्रह्मा चिंतित हो उठे। तभी आकाशवाणी हुई- ब्रह्म! मैथुनी सृष्टि उत्पन्न कीजिए। यह सुनकर ब्रह्माजी ने मैथुनी सृष्टि उत्पन्न करने का संकल्प किया। परंतु तब तक शिव से नारियों का कुल उत्पन्न नहीं हुआ था। तब ब्रह्मा ने शक्ति के साथ शिव को संतुष्ट करने के लिए तपस्या की । ब्रह्मा की तपस्या से परमात्मा शिव संतुष्ट हो ‘अर्धनारीश्वर का रूप धारण कर उनके समीप गए और अपने शरीर में स्थित देवी शिवा/शक्ति के अंश को पृथक कर दिया। इसी के बाद सृष्टि का विस्तार हुआ।

आइए सुनते हैं शिव स्तुति

 

 

 

भाषा का गांव बनाम भाषा का शहर उर्फ भोजपुरी और हिंदी

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प्रो. संजय जायसवाल

गांव को शहर बनाया जा रहा है

बगीचे की जगह लॉन बन रहा है

मां को धकिया कर बाहर किया जा रहा है

ना नहीं है बोझ हमारी मातृभाषा

आज भी बांग्लादेश की सड़कों पर

बची है

गोलियों की धांय धांय

और अपनी मां की भाषा के साथ

वह आर्तनाद भी

कितना कुछ बचा लिया है उन्होंने

धार्मिक उन्माद के खिलाफ

भाषाई साम्राज्यवाद के विरुद्ध

आज भी जारी इस जंग में

शामिल हैं हजारों बोलियां और भाषाएं

क्योंकि  हर कोई जीना चाहता है

अपनी भाषा में

सांस लेना चाहता है

बहुत कुछ कहना चाहता है

हमें भाषा के गांव को

उसकी आत्मा के साथ जीने

देना होगा

बचाना होगा उसे

भाषा के शहर से

आपने कहीं सुना हैं

गांव ने शहर को कमजोर किया

बल्कि गांव ने शहर को बसाया ही

उसने दी है शहर को जिंदगी

खुद के हिस्से को काट कर

भाषा के गांव को बचाने के लिए

बांग्लादेश की सड़कों पर

जो खून के छींटे हैं

याद रखना

मिटे नहीं  हैं

आज भी दुनिया भर में

भाषा के गांव को

उजाड़ने की कोशिश जारी है

सावधान

हमें भाषा के गांव को बचाना होगा

सच तभी भाषा का शहर जिंदा बचेगा

(कवि विद्यासागर विश्वविद्यालय में हिन्दी के असिस्टेंट प्रोफेसर तथा सांस्कृतिक पुनर्निमाण मिशन के महासचिव हैं)

स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर ‘लेजन्डरी अवार्ड’ से सम्मानित

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स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर को ‘ब्रांड लॉरिअट’ की ओर से ‘लेजन्डरी अवार्ड’ से सम्मानित किया गया है। ब्रांड लॉरिअट अवार्ड विश्व स्तरीय उपलब्धि हासिल करने वाले व्यक्तियों और कंपनियों को दिया जाता है।

लता मंगेशकर :87: ने सोशल मीडिया ट्विटर पर पुरस्कारों की तस्वीरों के साथ लिखा, ‘‘मुझे ‘लेजन्डरी अवार्ड-2017’ से सम्मानित करने के लिए ब्रांड लॉरिअट का हार्दिक धन्यवाद।’’ उल्लेखनीय है कि भारतीय सिनेमा में योगदान के लिए 2012 में शाहरख खान को ब्रांड लॉरिअट लेजेन्डरी अवार्ड से नवाजा गया था।

इससे पहले दक्षिण अफ्रीका के पूर्व राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला, नोबल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस, भारतीय कारोबारी रतन टाटा, एप्पल के दिवंगत सह.संस्थापक स्टीव जॉब्स, फेसबुक के मुख्य कार्यकारी मार्क जुकरबर्ग और फार्मूला-वन विजेता माइकल शूमाकर को ब्रांड लॉरिअट लेजेन्डरी अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है।

 

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश अल्तमस कबीर का निधन

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सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश अल्तमस कबीर का रविवार की सुबह लंबी बीमारी के चलते निधन हो गया। उन्होंने 68 वर्ष की उम्र में कोलकाता में आखिरी सांस ली। अल्तमस कबीर सुप्रीम कोर्ट के 39वें मुख्य न्याधीश थे।

29 सिंतबर 2012 से 19 जुलाई 2013 तक कबीर ने मुख्य न्यायाधीश के तौर पर कार्य करते रहे। कबीर के बाद पी सतशिवम देश के अगले मुख्य न्यायाधीश बने। अल्तमस कबीर ने कलकत्ता विश्वविद्यालय से परास्नातक और एलएलबी की डिग्री ली और 1 अगस्त 1973 को वह पहली बार कांउसलिंग के सदस्य बने।  6 अगस्त 1990 में कलकत्ता हाईकोर्ट में वो जज बन गए।

हालांकि अल्तमस कबीर का कार्यकाल विवादों में भी रहा। गुजरात हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने उनपर आरोप लगाया कि कबीर ने उच्चतम न्यायालय में उनके प्रमोशन को रोक दिया। इस आरोप के बाद उनका कार्यकाल विवादों में आ गया

 

सात साल की बच्ची ने गूगल बॉस से मांगी जॉब, पिचाई ने यूं दिया सुंदर जवाब

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इंग्लैंड निवासी एक सात साल की बच्ची ने गूगल के बॉस सुंदर पिचाई को उस समय उलझन में डाल दिया जब मासूम ने खत लिखकर उनसे गूगल में नौकरी करने की मांग कर दी।

हालांकि बच्ची और उसका परिवार उस समय हैरत में पड़ गया जब गूगल के मुखिया ने खत लिखकर मासूम के पत्र का जवाब दिया। खत में पिचाई ने बच्ची का उत्साहवर्धन करते हुए कुछ खास लेख लिखे।

एनडीटीवी की खबर के अनुसार यूके निवासी 7 साल की क्लो ब्रिजवाटर ने गूगल बॉस सुंदर पिचाई को हाथों से लिखकर एक खत भेजा था। जिसमें उनसे गूगल में जॉब देने की मांग की गई ‌थी। असल में क्लो ने अपने पिता एंडी ब्रिजवाटर से पूछा था कि दुनिया में काम करने के लिए सबसे अच्छी नौकरी कौन सी है।


इस पर उसके पिता ने बताया कि गूगल में नौकरी करना सबसे ज्यादा आरामदायक और अच्छा माना जाता है। पिता ने उसे बताया कि गूगल अपनी शानदार सैलरी और काम करवाने के तरीकों को लेकर दुनियाभर में मशहूर है।

इसके अलावा बच्ची ने गूगल के बारे में सुन रखा था कि वहां काम करने वाले एंप्लाई को बीन बैग, आरामदायक कुर्सियां और अन्य सुविधाएं दी जाती हैं। इससे मासूम के दिल में गूगल में जॉब करने की इच्छा और बढ़ गई।

क्लो ने अपने पिता से जिद करते हुए कहा कि उसे गूगल में जॉब करनी है। उसके पिता ने उसे प्रोत्साहित करते हुए इस संबंध में एक जॉब एप्लीकेशन लिखने को कहा। इस पर बच्ची ने वैसे किया और हाथों से गूगल बॉस को खत लिखा। जिसमें उन्होंने गूगल में काम करने के अलावा अपनी तमाम ख्वाहिशें लिखीं।
बच्ची ने बताया कि उसे कंप्यूटर, रोबोट और टैबलेट आदि पसंद है, वह एक अच्छी स्टूडेंट भी है। खत में मासूम ने गूगल में काम करने के अलावा एक चॉकलेट फैक्ट्री में जॉब करने और एक अंतराराष्ट्रीय स्तर की तैराक बनने की इच्छा भी जताई।

उसने यह भी बताया कि इससे पहले उसने एकमात्र खत फादर क्रिसमस को लिखा था। वहीं बच्ची का खत गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई के पास पहुंचा तो उन्होंने मासूम को उसी के अंदाज में जवाब दिया।
जवाब में लिखे खत में उन्होंने उसे समझाते हुए कहा, तुम्हारे इस खत के लिए धन्यवाद! मैं प्रसन्न हूं कि तुम्हे कंप्यूटर, रोबोट पसंद हैं। मुझे उम्‍मीद है तुम इसी तरह टेक्नोलॉजी के बारे में सीखने की अपनी इच्छा को जारी रखोगी।

पिचाई ने आगे लिखा मुझे लगता है कि अगर तुम मेहनत करोगी और अपने सपनों का पीछा करोगी तो तुम वो सब कुछ कर पाओगी जो तुम चाहती हो। जहां तक गूगल में काम करने की बात है तो स्कूलिंग पूरी करने के बाद मैं तुम्हारी इस जॉब एप्लीकेशन को देखने के लिए तत्पर रहूंगा। तुम्हें और तुम्हारे परिवार को शुभकामनाएं। वहीं पिचाई का खत मिलते ही उसके पिता एंडी ब्रिजवाटर ने उसे लिंक्डइन पर शेयर किया।

 

संसदीय समिति ने उच्च न्यायालयों में हिन्दी, क्षेत्रीय भाषाओं के उपयोग की वकालत की

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उच्च न्यायालयों में हिन्दी और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं के उपयोग की वकालत करते हुए संसद की एक समिति ने कहा है कि संविधान में इस संबंध में केंद्र को पर्याप्त अधिकार दिये गए हैं और इसके लिए न्यायपालिका के सम्पर्क की जरूरत नहीं है।

अभी देश में उच्चतम न्यायालय और 24 उच्च न्यायालयों में अंग्रेजी में कार्यवाही होती है और आदेश भी अंग्रेजी में दिये जाते हैं।
केंद्र सरकार को कलकता, मद्रास, गुजरात, छत्तीसगढ़ और कर्नाटक उच्च न्यायालयों में बंगाली, तमिल, गुजराती, हिन्दी और कन्नड़ के उपयोग के संबंध में प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं।
हालांकि इन सभी प्रस्तावों को 11 अक्तूबर 2012 को उच्चतम न्यायालय की पूर्ण पीठ ने खारिज कर दिया था।
विधि एवं कार्मिक विभाग पर संसद की स्थायी समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि अंग्रेजी के अलावा अन्य अनुसूचित भाषा के उच्च न्यायालयों में उपयोग की अनुमति दी जा सकती है, अगर इस बारे में संबंधित राज्य सरकार मांग करती हैं।
संविधान के अनुच्छेद 348 का उल्लेख करते हुए समिति ने कहा कि न्यायपालिका के साथ विचार विमर्श की प्रक्रिया जरूरी नहीं है क्योंकि उच्च न्यायालयों में अनुसूचित भाषा के उपयोग के बारे में संवैधानिक प्रावधान में पूरी तरह से स्पष्ट हैं ।
समिति ने सरकार से इस बारे में जुलाई 2016 के मसौदा कैबिनेट नोट पर जल्द कोई निर्णय करने को कहा है जिसमें कहा गया है कि या तो 1965 में मंजूर कैबिनेट के विचार पर पुनर्विचार किया जाए या उसे जारी रखा जाए ।
21 मई 1965 को केंद्रीय मंत्रिमंडल में एक विचार को मंजूर किया गया था जिसके बाद किसी उच्च नयायालय में भाषा में बदलाव के बारे में न्यायपालिका से विचार विमर्श किया जाता है।

वायु प्रदूषण से भारत, चीन में होती हैं 52 प्रतिशत असमय मौतें: अध्ययन

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भारत और चीन दुनिया की सबसे तेजी से उभरती हुई अर्थव्यवस्थाएं हैं लेकिन दुनिया भर में वायु प्रदूषण के कारण होने वाली असमय मौतों में से आधी इन दोनों देशों में होती हैं। एक हालिया रिपोर्ट में इस बात का दावा किया गया है। ‘स्टेट ऑफ ग्लोबल एयर 2017’ की रिपोर्ट में इस बात का जिक्र किया गया है कि सूक्ष्म कणों के कारण होने वाली मौतों के मामले में भारत लगभग चीन के करीब पहुंच चुका है। इसमें साथ ही कहा गया है कि भारत समेत दस सबसे अधिक जनसंख्या वाले देशों, यूरोपीय संघ और बांग्लादेश में पीएम 2.5 का स्तर सर्वाधिक है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया भर में ओजोन के कारण होने वाली मौतों में करीब 60 फीसदी का इजाफा हुआ है लेकिन भारत में यह आंकड़ा 67 फीसदी तक चला गया है। ‘स्टेट ऑफ ग्लोबल एयर 2017’ इस मुद्दे से जुड़ी इस साल की पहली वाषिर्क रिपोर्ट है। वाशिंगटन विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ मेट्रिक्स एंड इवैलुएशन :आईएचएमई: और ब्रिटिश कोलंबिया विश्वविद्यालय के सहयोग से हेल्थ एफेक्ट इंस्टीट्यूट ने यह रिपोर्ट तैयार की है। इस रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘वर्ष 2015 में पीएम 2.5 के कारण 42 लाख लोगों की मौत हुई और इसके कारण हुई मौतों में से करीब 52 फीसदी मौतें भारत और चीन में हुई।’’