वीडियो सौजन्य – मीडिया साइंस विभाग, द हेरिटेज अकादमी
ब्रेथवेट एंड कंपनी लिमिटेड में 73 वां स्वतंत्रता दिवस समारोह
कोलकाता : ब्रेथवेट एंड कंपनी लिमिटेड में भव्यपूर्ण तरीके से 73वाँ स्वतंत्रता दिवस मनाया गया । इस अवसर पर कम्पनी के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक यतीश कुमार ने कॉरपोरेट कार्यालय / क्लाइव वर्क्स और विक्टोरिया वर्क्स में राष्ट्रीय ध्वज फहराया। यतीश कुमार की धर्म पत्नी स्मिता गोयल ने भी इस अवसर पर उपस्थित होकर कर्मचारियों को मिठाइयाँ बाँटीउपस्थित सभी कर्मचारियों और यूनियन नेताओं को संबोधित करते हुए, अध्यक्ष और प्रबन्ध निदेशक ने स्वतंत्रता दिवस के महत्व को समझायाउन्होंनेकहा कि ब्रेथवेट, लोगों को एकजुट करने और सफलता प्राप्त करने का सबसे अच्छा उदाहरण है तथा स्वतंत्रता दिवस समारोह देश भरके लोगों को एकजुट करता है। एक जुट होकर कार्य करने से ही सब कुछ हासिल किया जा सकता है, सफलता कदम चूमती है। यतीश कुमार ने कहा कि ‘स्वतंत्रता दिवस’ के साथ ‘रक्षा बंधन’ का पावन त्योहार मनाना बेहद खुशी की बात है और ब्रेथवेट परिवार का हिस्सा होना वास्तव में जीवन का एक बहुत ही खास अनुभव हैI उन्होंने सभी कर्मचारियों को उनके समर्थन और समर्पण के लिए प्रोत्साहित किया और आशा व्यक्त की कि ब्रेथवेट भविष्य में आईपीओ इस्यु के साथ अग्रणी और सफल कंपनियों में से एक होगी। स्वतंत्रता दिवस के इस पावन अवसर पर कर्मचारियों के बच्चों द्वारा विक्टोरिया वर्क्स में रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन भी किया गया। एंगस वर्क्स में, श्री पी.के.सिन्हा, डीजीएम (फाउंड्री) ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया और कर्मचारियों को संबोधित किया।
क्योंकि आज रक्षाबन्धन और स्वाधीनता दिवस एक साथ है






रक्षाबन्धन और स्वतन्त्रता दिवस पर हो जाए कुछ तिरंगा

मलाई खाजा

हरियाली पनीर कोफ्ता

सामग्री : ग्रेवी के लिए – 3 कप बारीक कटा पालक, 2 चम्मच घी, 1 कप फेंटा हुआ दही, 1/2 चम्मच फेंटा हुआ दही, नमक स्वादानुसार
पेस्ट बनाने के लिए : 2 चम्मच कद्दूकस किया नारियल, 2 चम्मच बारीक कटा काजू, 2 चम्मच खसखस, 8 कलियां लहसुन, 3 बारीक कटी मिर्च, 1 टुकड़ा अदरक, 1 चक्रफूल, 1/2 कप पानी-
कोफ्ता के लिए : 1 कप कद्दूकस किया पनीर, 4 चम्मच मैदा, 1/4 कप बारीक कटी धनिया पत्ती, 2 बारीक कटी मिर्च, चुटकी भर खाने वाला सोडा, नमक स्वादानुसार, तेल आवश्यकतानुसार
विधि : पालक को अच्छी तरह से धो लें। कड़ाही में आधा कप पानी उबालें और उसमें पालक को मध्यम आंच पर एक से दो मिनट पकाएं। गैस ऑफ करें, पालक को गर्म पानी से निकालें, एक बार ठंडे पानी से धोएं और उसे ग्राइंडर में पीस लें। कड़ाही में घी गर्म करें और नारियल-खसखस वाला तैयार पेस्ट डालें। दो से तीन मिनट तक भूनें। कड़ाही में दही डालें, अच्छी तरह से मिलाएं और लगातार मिलाते हुए एक-दो मिनट पकाएं। अब कड़ाही में पालक का पेस्ट, चीनी और नमक डालकर अच्छी तरह से मिलाएं। एक-दो मिनट बाद गैस ऑफ कर दें। तेल के अलावा कोफ्ते की सभी सामग्री को एक बरतन में डालकर मिलाएं। मिश्रण को आठ हिस्सों में बांटें और कोफ्ता का आकार दें। कड़ाही में तेल गर्म करें और कोफ्ता को सुनहरा होने तक तल लें। अब सर्व करने से तुरंत पहले पालक वाली ग्रेवी को गर्म करें, उसमें कोफ्ता डालकर एक-दो मिनट तक पकाएं। तुरंत सर्व करें।
बनारसी पान, तिरंगा बर्फी बने हथियार, देश के लिए लड़ीं तवायफें
देश को आजाद कराने के लिए बनारस में युवा-बुजुर्ग सड़क पर लड़ रहे थे तो यहां की मिठाई, पान और तवायफें उनकी हौसला-अफजाई कर रही थीं। उस दौर में पहली बार बनारस में ही तिरंगा बर्फी बनी जो राष्ट्रीय ध्वज के रंग की थी। पूरी दुनिया में मशहूर बनारसी पान पर भी अंग्रेजों ने बैन लगाया था। तवायफों से तो अंग्रेजी हुकूमत हिल गई थी। बनारस के चौक इलाके के प्रमुख बाजार दालमंडी की गली में आजादी के आंदोलन के दौर में राजेश्वरी बाई, जद्दन बाई से लेकर रसूलन बाई तक के कोठे पर संगीत की महफिलें सजती थीं। इतिहास के जानकार डॉ. प्रवेश भारद्वाज की मानें तो महफिलों में अंग्रेजों को देश से निकालने की रणनीति तय होती थी। मशहूर अभिनेत्री नर्गिस की मां और संजय दत्त की नानी जद्दन बाई ने कोठे पर आए दिन अंग्रेजों के छापे से तंग आकर दालमंडी गली छोड़ दी थी। ठुमरी गायिका राजेश्वरी बाई तो हर महफिल में अंतिम बंदिश ‘भारत कभी न बन सकेला गुलाम…’, गाना नहीं भूलती रहीं। ‘फुलगेंदवा न मारो, मैका लगत जोबनवा में ….’, जैसे गीत से मशहूर रसूलन बाई ने तो आभूषण तभी पहने जब देश आजाद हो गया। तवायफ दुलारी बाई के ललकारने पर उसके सबसे खास नन्हकू ने कई अंग्रेजों के सिर धड़ से अलग कर दिए थे। कजरी गायिका सुंदरी के प्रेमी नागर को ब्रितानी सेना से मोर्चा लेने पर कालापानी की सजा हो गयी। ‘स्वर जीवनी’ कही जाने वाली सिद्धेश्वरी देवी भी महफिलों में देश भक्ति के गीत जरूर गाती रहीं।

बनारसी पान पर प्रतिबन्ध
मशहूर बनारसी पान पर भी अंग्रेजों ने बैन लगा दिया था। तवायफों के कोठे वाली गली दालमंडी के पास आजादी के आंदोलन के दौर में पान की दुकान चलाने वाले रामस्वरूप के वंशज पवन चौरसिया बताते हैं कि अंग्रेजों को शक था कि स्वतंत्रता आंदोलन में पान की भी कोई भूमिका है इसलिए पान बेचने से लेकर खाने तक पर पाबंदी लगा दी थी। बावजूद इसके चोरी-चोरी घर-घर पान पहुंचता था। बनारसी पान की सबसे बड़ी खासियत यह है कि मुंह में रखते ही घुल जाता है। इसमें लगाया जाने वाला कत्था, चूना और सुर्ती पानवाले घर में तैयार करते हैं।
बर्फी और लड्डू के रूप में तिरंगा घर-घर
बनारस की रंग बिरंगी मिठाइयों का कोई जवाब नहीं है। देश-विदेश में मशहूर ‘राम भंडार’ में पहली बार तिरंगे के रंग वाली तिरंगी बर्फी बनी तो अंग्रेजों के होश उड़ गए थे। तिरंगे पर रोक के दौर में लोग तिरंगी बर्फी हाथों में लिए घूमते रहे। इसके बाद बनारस से ही जवाहर लड्डू, गांधी गौरव, मदन मोहन, वल्लभ संदेश, नेहरू बर्फी के रूप में राष्ट्रीय मिठाइयों की श्रृंखला सामने आई। तिरंगी बर्फी और तिरंगे जवाहर लड्डू में आज की तरह रंग का उपयोग नहीं हुआ था। हरे रंग के लिए पिस्ता, सफेद के लिए बादाम और केसरिया के लिए केसर का प्रयोग कर तिरंगे का रूप दिया गया था।
(साभार – नवभारत टाइम्स)
जानिए स्वाधीनता दिवस की कुछ खास बातें
भारत इस बार 15 अगस्त को 73वां स्वतंत्रता दिवस मनाएगा। पीएम नरेंद्र मोदी दिल्ली के लाल किले पर राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे। बता दें कि 15 अगस्त 1947 को भारत एक स्वतंत्र राष्ट्र के तौर पर विकसित किया। इस दिन हर भारतीय स्वतंत्रता दिवस के जश्न से शहीदों को याद करके अपने को गौरवान्वित महसूस करता हैं –
आइए जानते हैं 15 अगस्त से जुड़ी कुछ रोचक बातें…
- भारत में हर साल लाल किले से देश का प्रधानमंत्री झंडा फहराते हैं पर 15 अगस्त 1947 को ऐसा नहीं हुआ था। एक शोध पत्र के मुताबिक पंडित नेहरू ने 16 अगस्त 1947 को लाल किले से झंडा फहराया था।
- जवाहर लाल नेहरू ने 14 अगस्त की मध्यरात्रि को वायसराय लॉज (मौजूदा राष्ट्रपति भवन) से ऐतिहासिक भाषण ‘ट्रिस्ट विद डेस्टनी दिया, तब नेहरू प्रधानमंत्री नहीं बने थे।
- भारत और पाकिस्तान की सीमाओं का निर्धारित 17 अगस्त को किया गया जो कि रेडक्लिफ लाइन के नाम से जाना जाता है।
- भारत आजाद हुआ तो देश का कोई राष्ट्रगान नहीं था। जन-गण-मन को राष्ट्रगान 1950 में बनाया गया हालांकि रवींद्रनाथ टैगोर इसे 1911 में ही लिख चुके थे।
- 15 अगस्त भारत के अलावा तीन अन्य देशों का भी स्वतंत्रता दिवस होता है।
- दक्षिण कोरिया जापान से 15 अगस्त, 1945 को आजाद हुआ। बहरीन को ब्रिटेन से 15 अगस्त, 1971 को आजादी मिली और फ्रांस ने कांगो को 15 अगस्त 1960 को स्वतंत्र घोषित किया।
- भारत को स्वतंत्रता दिलाने में महात्मा गांधी की भूमिका बेहद खास थी लेकिन जब पूरा देश 15 अगस्त 1947 को मिली आजादी का जश्न मना रहा तो वह इसके जश्न में शामिल नहीं हुए थे।
- महात्मा गांधी उस दिन बंगाल में हिंदुओं और मुसलमानों के बीच हो रही हिंसा को रोकने के लिए अनशन कर रहे थे।
- जब यह तय हुआ कि 15 अगस्त को देश आजाद होगा तो जवाहर लाल नेहरू और सरदार वल्लभ भाई पटेल ने गांधी जी को पत्र लिखकर इस बारे में सूचना देकर कहा आप राष्ट्रपिता है इसमें शामिल होकर अपना आशीर्वाद दें।
- गांधी ने इसको लेकन अपना जवाब दिया कि कलकत्ता में हिंदू-मुस्लिम एक-दूसरे की जान ले रहे है, मैं जश्न मनाने कैसे आ सकता हूं। मैं इन्हें रोकने के लिए अपनी जान दे दूंगा।
- (साभार – नवोदय टाइम्स)
यहाँ तिरंगा बनाती हैं महिलाएँ
15 अगस्त यानि की स्वतंत्रता दिवस पर हम अक्सर उन लोगों को याद करते है जिन्होंने देश को आजाद करवाने में मुख्य भूमिका अदा की है। हर जगह पर हमारे देश के गर्व यानि की हमारे तिरंगे को फहराया जाता है। वहीं हमारे देश की कुछ महिलाएं महीनों पहले ही इन झंड़ों को बनाना शुरु कर देती है। भारत में कर्नाटक खादी ग्रामोद्योग संयुक्त संघ (फेडरेशन) (KKGSS) खादी व विलेज इंडस्ट्रीज कमीशन ही कंपनी है जो कि तिरंगा झंडा बनाती है। इसमें खास बात यह है कि इस कम्पनी में पुरुषों से अधिक महिलाएं काम करती है, जो कि पूरे सम्मान के साथ यहां पर हर साल तिरंगे बनाती है। कम्पनी की शुरुआत 1957 में हुई थी। 1982 में इन्होंने खादी बनाना शुरु किया था। 2005-06 में इसे ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडडर्स की ओर से सर्टीफिकेशन मिला था जिसके बाद इन्होंने झंडा बनाना शुरु किया था। यहां से भारत ही नही विदेश में मौजूद इंडियन एम्बेसी के लिए झंडे भेजे जाते है। यहां पर ऑर्डर व कुरियर बुक करके भी झंडे खरीदे जा सकते हैं।
कर्नाटक के तुलसीगरी देश में स्थित भारत की एकमात्र तिरंगा बनाने वाली कंपनी में 400 के करीब महिलाएं काम करती हैं। कम्पनी की सुपरवाइजर अन्नपूर्णा कोटी के अनुसार महिलाओं में पुरुषों के मुकाबले धैर्य अधिक होता है। वहीं पुरुषों में धैर्य की कमी होने के कारण वह माप लेने में कमी करते है जिससे गलती हो जाती है। कम्पनी में कर्मचारी सारा साल ही झंडे बनाते है। इतना ही नही गणतंत्रता व स्वतंत्रता दिवस के लिए लाल किले पर फहराए जाने झंडे का ऑडर दो महीने पहले ही आ जाता है। कर्नाटका के तुलसीगरी देश में स्थित भारत की एकमात्र तिरंगा बनाने वाली कम्पनी में 400 के करीब महिलाएं काम करती हैं। कंपनी की सुपरवाइजर अन्नपूर्णा कोटी के अनुसार महिलाओं में पुरुषों के मुकाबले धैर्य अधिक होता है। वहीं पुरुषों में धैर्य की कमी होने के कारण वह माप लेने में कमी करते है जिससे गलती हो जाती है। कंपनी में कर्मचारी सारा साल ही झंडे बनाते है। इतना ही नही गणतंत्रता व स्वतंत्रता दिवस के लिए लाल किले पर फहराए जाने झंडे का ऑडर दो महीने पहले ही आ जाता है।
लाल किले पर फहराए जाने वाला तिरंगा 12*8 फीट का होता है, जिसकी कीमत लगभग 6500 रुपए होती है। इस तिरंगे को छह हिस्सों में बनाया जाता है। सबसे पहले कपड़े के लिए कताई कर उसकी बुनाई की जाती है। उसके बना इसे तीन रंगों में रंगा जाता है। इसके बाद इस पर अशोक चक्र की छपाई की जाती है। छपाई होने के बाद सिलाई व बंधाई का काम इसके बाद पूरा किया जाता है। इन झंडो को ध्वज संहिता व भारतीय मानक ब्यूरो के दिशानिर्देश अनुसार बनाया जाता है। इसमें गलती की बिल्कूल भी गुंजाइश नही होती है, अगर गलती हो जाए तो उसकी सजा हो सकती है। इतना ही इसमें इस्तेमाल किए जाने वाली कपड़ा जींस से भी मजबूत होता है।
कम्पनी से बाहर निकलने से पहले झंडे को कई बार जाँचा जाता है। हर सेक्शन में 18 बाल क्वालिटी चेक होता है। जिसमें रंग के शेड, कपड़े की लंबाई चौड़ाई, अशोक चक्र की छपाई, फ्लैग कोड ऑफ इंडिया 2002. साइज व धागे में किसी तरह का डिफेक्ट हर चीज को चेक किया जाता है। इसमें किसी तरह का डिफेक्ट निकलना अपराध माना जाता है।
(साभार – पंजाब केसरी)
स्मार्ट चूड़ी: मुसीबत में भेजेगी लाइव लोकेशन, छेड़ा तो लगेगा बिजली का झटका
हैदराबाद : महिलाओं की सुरक्षा को लेकर हमेशा से सवाल उठते रहे हैं और इन्हीं सवालों के कारण तरह के आविष्कार भी होते रहे हैं। अभी तक महिलाओं के लिए बाजार में ऐसे लॉकेट ही थे जिसमें लाइव लोकेशन शेयरिंग जैसे इमरजेंसी फीचर थे लेकिन अब ऐसी चूड़ियां भी बाजार में आ गईं हैं जो महिलाओं की सुरक्षा के लिए वरदान हैं।
हैदराबाद के हरीश नाम के युवक ने अपने दोस्त साईं तेजा के साथ मिलकर ऐसी ही चूड़ियां तैयार की हैं जिनमें लाइव लोकेशन शेयरिंग फीचर है। इसके अलावा इसमें बिजली के झटके भी हैं। साथ ही यदि कोई महिला या लड़की मुसीबत में है तो ये चूड़ियां पुलिस और रिश्तेदारों को मैसेज भी भेजती हैं। इन स्मार्ट चूड़ियों को सेल्फ सिक्योरिटी बैंगल (Self-Security Bangle for Women) को एक खास कोण पर हाथ को हिलाने पर इसके फीचर्स एक्टिव हो जाएंगे। इसके बाद जैसे ही कोई महिला का हाथ पकड़ेगा तो उसे बिजली के झटके लगेंगे और साथ ही चूड़ी परिजनों को लाइव लोकेशन के साथ अलर्ट भेजेगी। इन चूड़ियों को तैयार करने वाले हरीश ने बताया कि स्मार्ट चूड़ी का प्रोटोटाइप तैयार हो गया है और अब इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए सरकार की मदद की दरकार है। हरीश की उम्र महज 23 साल है।




