Thursday, July 2, 2026
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लता मंगेशकर को 90वें जन्मदिन पर डॉटर ऑफ द नेशन का खिताब देगी केन्द्र सरकार

मुम्बई : भारतीय फिल्म संगीत में सात दशक के अभूतपूर्व योगदान के लिए स्वर कोकिला लता मंगेशकर को डॉटर ऑफ द नेशन का खिताब दिया जाएगा। केन्द्र सरकार 28 सितंबर को 90वें जन्मदिन पर उन्हें यह सम्मान देगी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस खास मौके के लिए गीतकार और कवि प्रसून जोशी ने खास गीत लिखा है। सूत्रों ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लता मंगेशकर के बड़े प्रशंसक हैं। वे भारत की सभी आवाजों का प्रतिनिधित्व करती हैं। उन्हें सम्मानित करना देश की बेटी को सम्मान देना है। उन्हें 90वें जन्मदिन पर खिताब देने का फैसला लिया गया है। मध्य प्रदेश के इन्दौर में जन्मी लता मंगेशकर ने गाने की शुरुआत 40 के दशक में कर दी थी। तब वो महज 13 साल की थीं। उन्होंने पहला गाना मराठी फिल्म ‘किती हसाल’ (1942) के लिए रिकॉर्ड किया था, जिसे फाइनल कट से पहले हटा दिया गया था। 1943 में आई मराठी फिल्म ‘गजाभाऊ’ में उन्होंने हिंदी सॉन्ग ‘माता एक सपूत की दुनिया बदल दे’ को आवाज दी। इसे उनका पहला सॉन्ग माना जाता है। तब से लगातार गाने गा रही हैं। लताजी को गायकी की दुनिया में अहम योगदान के लिए अब तक तीन नेशनल अवॉर्ड (फिल्म ‘परिचय’ के लिए 1972 में, ‘कोरा कागज़’ के लिए 1974 में और ‘लेकिन’ के लिए 1990 में) मिल चुके हैं। भारत सरकार ने उन्हें पद्म भूषण (1969), दादा साहब फाल्के (1989), पद्म विभूषण (1999) और भारत रत्न (2001) से भी सम्मानित किया था।

अब हिन्दी में कर सकेंगे फ्लिपकार्ट पर खरीददारी

नयी दिल्ली : ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट ने अपने प्लेटफॉर्म पर “हिन्दी” इंटरफेस उपलब्ध कराने की घोषणा की है। कल्याण कृष्णमूर्ति, सीईओ, फ्लिपकार्ट ग्रुप ने कहा, ‘भाषा एक सुविधा है न कि बाधा, हमारा मानना है कि देश में ई-कॉमर्स को अपनाने में मातृ भाषा की क्षमता अहम भूमिका निभाएगी।’
उद्योग से जुड़ा एक अध्ययन बताता है कि भारत में इंटरनेट का इस्तेमाल करने वाले 90 फीसदी नए यूजर्स मातृ भाषा का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में उन्हें सहज, आराम और निर्णय लेने में मदद करने के लिए मातृ भाषा में ई-कॉमर्स अनुभव उपलब्ध कराना जरूरी है। हिन्दी की क्षमता के साथ यूजर्स अपने मनचाहे उत्पादों की सभी सूचनाएं और सर्च हिन्दी में देख सकेंगे- यह ऐसी भाषा है जिसके यूजर्स की संख्या 2021 तक अंग्रेज़ी से आगे निकल जाएगी।
अध्ययन करने के बाद लिया फैसला
फ्लिपकार्ट ने यह समझने के लिए गहन अध्ययन किया कि किस तरह ग्राहकों को ऑनलाइन लाने और उनके ई-कॉमर्स को बेहतर बनाने के लिहाज़ से मातृ भाषा का अनुभव उपलब्ध कराने के लिए सर्वश्रेष्ठ भारतीय भाषाओं का लाभ उठाया जा सकता है। यूजर रिसर्च से ग्राहकों के व्यवहार के बारे में दिलचस्प जानकारियां सामने आईं जिनसे पता चलता है कि अगर भाषा का समाधान ठीक तरह से किया जाए तो यह एक बाधा नहीं बल्कि अवसर है। हालांकि ग्राहक आधारभूत अंग्रेज़ी में पढ़ना और लिखना जानते हैं, लेकिन मातृभाषा से उन्हें अलग तरह का आराम और सुविधा मिलती है जो उन्हें ऑनलाइन लाने के लिहाज़ से महत्वपूर्ण है।
इस रिसर्च से यह भी पता चला कि छोटे शहरों से आने वाले ग्राहकों के समूह डेबिट/क्रेडिट कार्ड, ईएमआई जैसे डिजिटल शब्दों को बेहतर समझते हैं जिससे उनके लिए ई-कॉमर्स का इस्तेमाल करना आसान होगा। रिसर्च से पता चला कि मातृभाषा में ई-कॉमर्स का इस्तेमाल करने से ग्राहकों को अधिक आत्मविश्वास मिलता है और निर्णय लेने में स्वतंत्रता का अहसास होता है।

 विवाह पर्यटन की शुरुआत करेगा मप्र राज्य पर्यटन विकास निगम

भोपाल : इंदौर, भोपाल, खजुराहो, ग्वालियर, उज्जैन सहित झीलों, महलों, मंदिरों और किले वाले शहरों का उपयोग मैरिज टूरिज्म के लिए किया जाएगा। इसकी शुरुआत मप्र राज्य पर्यटन विकास निगम करेगा। इसमें विश्व स्तर पर मैरिज पर्यटन से जुड़ी हस्तियों और बॉलीवुड के नामचीन लोगों का सहयोग लिया जाएगा। पर्यटन मंत्री सुरेंद्र सिंह बघेल ने हाल ही में कोलकाता में आयोजित इंटरनेशनल कम्यूनिटी ऑफ वेडिंग फ्रटनटि (आईसीडब्ल्यूएफ) के चौथे वार्षिक सम्मेलन में यह जानकारी दी। बघेल ने कहा कि प्रदेश के वर्तमान में अज्ञात या कम जाने जाने वाले किलों, महलों, मंदिरों और झीलों वाले स्थानों को विवाह पर्यटन यानी मैरिज टूरिज्म वाले स्थानों के रूप में प्रचार/ प्रसार की योजना बनाई जा रही है। इसमें इंटरनेशनल कम्यूनिटी ऑफ वेडिंग फ्रटनटि (आईसीडब्ल्यूएफ)अपनी मह्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। पर्यटन मंत्री ने इस दौरान आईसीडब्ल्यूएफ के साथ अनुबंध भी किया। मप्र पर्यटन निगम के जीएम जैमन मेथ्‍यू, ओएसडी विनोद अमर आदि मौजूद थे। साथ ही बॉलीवुड के सुप्रसिद्ध कला निदेशक नितिन देसाई से भी मंत्री बघेल ने प्रदेश में फिल्‍म पर्यटन को बढावा देने के लिए चर्चा की। वहीं, कार्यक्रम में मौजूद वेडिंग प्‍लानरों को खजुराहो और ओरछा के सौंदर्य और होटलों की सुविधाओं के बारे में बताते हुए मप्र आने का निमंत्रण भी दिया। विवाह पर्यटन में इस बार 10 फीसदी की बढ़ोत्तरी होने की उम्मीद जताई गई है। वर्तमान में विश्व स्तर पर 60 यूएस मिलियन डॉलर का मैरिज पर्यटन उद्योग पनप चुका है।

सामाजिक जागरुकता के लिए काम कर रहा दादी-नानियों का थिएटर समूह

अरलंस्कॉय (तुर्की) :  तुर्की के छोटे से कस्बे अरलंस्कॉय की 62 साल की दादी माँ इन दिनों पूरे देश में चर्चा हैं। इसकी वजह है- उनके द्वारा शुरू किया गया थियेटर ग्रुप। इस ग्रुप में सभी महिलाएं हैं। ग्रुप क्लाइमेट चेंज को लेकर जागरुकता लाने के लिए अलग-अलग जगह पर नाटक का मंचन करता है। इन दिनों ये महिलाएं अपने नए नाटक ‘मदर, द स्काय इज पीयर्स्ड की रिहर्सल में व्यस्त हैं। इस महिला थियेटर ग्रुप की प्रमुख उम्मिये कोकाक चाहती हैं कि दुनियाभर में लोग इस समस्या को समझें और गम्भीरता से लें। कोकाक के काम को अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचाना जाता है। 2013 में तुर्की की महिलाओं पर फिल्म के लिए न्यूयॉर्क फेस्टिवल में अवॉर्ड भी मिला था। कोकाक फुटबॉलर क्रिस्टिआनो रोनाल्डो के साथ एड कर चुका है।
नाटकों का मकसद धारणा बदलना है
कोकाक के मुताबिक, ‘‘क्लाइमेट चेंज सिर्फ उनके कस्बे की नहीं बल्कि पूरी दुनिया की समस्या है। मैं इस समस्या को लेकर जितनी जोर से आवाज उठा सकती हूं, उठाऊंगी। ये दुनिया हमारी भी है। इसे बेहतर देखभाल की जरुरत है। दरअसल, कोकाक इससे पहले भी नाटक लिखती रही हैं। उनके नाटकों का उद्देश्य धारणाओं को बदलना रहता है। इससे पहले उन्होंने गरीबी, अल्जाइमर रोग, घरेलू हिंसा जैसे मुद्दों पर नाटक लिखे हैं। तुर्की के टीवी ड्रामा पर इनकी खासी चर्चा हुई है।’’
महिलाओं की बात सुनी जानी चाहिए
कोकाक का अरलंस्कॉय आना शादी के बाद हुआ। वहां पर उन्होंने देखा कि महिलाएं घर और खेतों में बराबरी से काम करती हैं। उन्हें लगा कि यह ठीक नहीं हैं, इन महिलाओं की बात सुनी जानी चाहिए। वो काफी समय से इस पर काम कर थी। थियेटर ग्रुप इसी का नतीजा है। गांव में कोई हॉल या सेट तो था नहीं, इसलिए कोकाक ने घर के गार्डन में ही रिहर्सल शुरू करवा दीं। धीरे-धीरे इस ग्रुप की चर्चा पूरे तुर्की में फैल गई। अब लोग इन दादी-नानियों को स्थानीय स्तर पर नाटक मंचन के लिए बुलाने लगे हैं। सोशल मीडिया पर उनके वीडियो खूब शेयर हो रहे हैं।

(साभार – दैनिक भास्कर)

धोनी उचित विदाई के हकदार: कुम्बले

नयी दिल्ली : भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और कोच अनिल कुम्बले ने कहा कि इस बात का ‘पक्का यकीन’ नहीं है कि दिग्गज विकेटकीपर बल्लेबाज महेन्द्र सिंह धोनी मौजूदा टीम में जगह पाने के दावेदार है ऐसे में चयनकर्ताओं को उनके भविष्य को लेकर चर्चा करनी चाहिए। कुम्बले का मानना है कि क्रिकेट में शानदार योगदान के लिए धोनी उचित विदायी के हकदार है और इसके लिए चयनकर्ताओं को उनसे बात करना चाहिए। अन्तरराष्ट्रीय क्रिकेट में धोनी का भविष्य चर्चा का विषय है और चयनकर्ताओं ने इस बात के पर्याप्त संकेत दिये है कि वे आगे की सोच रहे है। कुम्बले ने धोनी के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में खेल जारी रखने के बारे में पूछे जाने पर क्रिकेटनेक्स्ट से कहा, ‘‘मुझे लगता है कि पंत ने निश्चित रूप से विकेट कीपर-बल्लेबाज के रूप में मजबूत दावा पेश किया है। खासकर टी 20 प्रारूप में उसने अच्छा प्रदर्शन किया है। ऐसे में धोनी से बातचीत करना जरूरी है। वह अच्छी विदायी का हकदार है और आपको उससे बात करनी चाहिए।’’ कुम्बले चाहते हैं कि चयनकर्ता अगले कुछ महीनों में भविष्य को लेकर स्थिति साफ करें। उन्होंने कहा, ‘‘ टीम की खातिर, चयनकर्ताओं को योजनाओं को लेकर चर्चा करना चाहिए क्योंकि यह महत्वपूर्ण है कि इसके बारे में सही से बताया जाए। अगर चयनकर्ताओं का मानना ​​है कि धोनी टी20 विश्व कप के योजना में फिट बैठते हैं, तो मुझे लगता है कि उन्हें हर मैच में खेलना चाहिए।’’ कुम्बले ने कहा, ‘‘ अगर ऐसा नहीं है तक चयनकर्ताओं को उनकी विदायी के बारे में चर्चा करना चाहिए। मुझे लगता है कि उन्हें अगले दो महीने में ऐसा करना चाहिए।’’

प्रख्यात विधिवेत्ता राम जेठमलानी का निधन

नयी दिल्ली : प्रख्यात विधिवेत्ता और पूर्व केन्द्रीय मंत्री राम जेठमलानी का 95 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने बेहद कठिन आपराधिक मामले लड़े और इंदिरा गांधी तथा राजीव गांधी हत्या मामले में अभियुक्तों का बचाव भी किया था। जेठमलानी ने नयी दिल्ली स्थित अपने आधिकारिक आवास पर सुबह 7.45 बजे अंतिम सांस ली। उनके बेटे महेश जेठमलानी ने पीटीआई से कहा कि पिछले कुछ महीने से उनकी तबियत ठीक नहीं थी। उनके बेटे ने बताया कि उनका जन्मदिन 14 सितम्बर था और अपने 96वें जन्मदिन से कुछ दिन पहले ही उनका निधन हो गया। जेठमलानी का अंतिम संस्कार रविवार शाम साढ़े चार बजे लोधी रोड श्मशान घाट पर होगा। पूर्व केंद्रीय मंत्री के परिवार में महेश के अलावा उनकी बेटी है जो अमेरिका में रहती है। उनकी एक अन्य बेटी रानी जेठमलानी का 2011 में निधन हो गया था जबकि एक अन्य बेटे जनक की भी पहले मृत्यु हो चुकी है। जेठमलानी पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के समय केंद्रीय कानून मंत्री और शहरी विकास मंत्री रहे थे और बाद में 2004 के लोकसभा चुनाव मे लखनऊ सीट से उन्हीं के खिलाफ चुनाव लड़े। वह 2010 में उच्चतम न्यायालय बार एसोसिएशन के अध्यक्ष भी रहे। जेठमलानी के निधन की खबर आने के तुरंत बाद श्रद्धांजलियों का तांता लग गया और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उनके निधन पर दुख जताया।

ई-वोटिंग के लिए मोबाइल एप पर काम कर रहा है सेबी

नयी दिल्ली : भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) सूचीबद्ध कंपनियों के खुदरा निवेशकों की ई-वोटिंग के लिए एक मोबाइल एप पर काम कर रहा है। इससे खुदरा निवेशक प्रबंधन प्रस्तावों में अधिक भागीदारी कर सकेंगे, विशेष रूप से कंपनी के कामकाज के संचालन से संबंधित प्रस्तावों में। नियामक ने कहा कि इसके अलावा खुदरा निवेशकों को पंजीकृत प्रॉक्सी एडवाइजरों की सिफारिशों को लेकर संबंधित लिंक भी उपलब्ध कराने की योजना बना रहा है ताकि ऐसे निवेशक सूचीबद्ध कंपनियों के प्रस्तावों पर सही जानकारी के आधार पर निर्णय ले सकें। सेबी ने कहा कि इन कदमों का मकसद सूचीबद्ध कंपनियों में कामकाज के संचालन को बेहतर करना है।
सेबी की 2018-19 की वार्षिक रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘ई-वोट डालने की प्रक्रिया को सुगम करने और खुदरा निवेशकों की भागीदारी बढ़ाने को ई-वोटिंग के लिए साझा मोबाइल एप पर काम कर रहा है।’’ सेबी ने कहा कि भारतीय निवेशकों को जल्द विदेशों में जारी प्रतिभूतियों को भारत में अपने डीमैट खातों में रखने की सुविधा मिलेगी।

मारुति सुजुकी ने किया इलेक्ट्रॉनिक्स, मुख्य कल पुर्जों को देश में ही बनाने का आह्वान

नयी दिल्ली : कार बनाने वाली देश की सबसे बड़ी कंपनी मारुति सुजुकी ने कल-पुर्जे बनाने वाली कंपनियों को वाहनों के इलेक्ट्रॉनिक्स तथा कुछ अन्य मुख्य कल-पुर्जे का देश में ही विनिर्माण शुरू करने का सुझाव दिया। मारुति सुजुकी ने कहा कि इससे इन कल-पुर्जों का आयात कम करने में मदद मिलेगी। इससे न सिर्फ मारुति को मदद मिलेगी बल्कि सरकार की मेक इन इंडिया मुहिम को भी समर्थन मिलेगा। कम्पनी के प्रबन्ध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी केनिचि आयुकावा ने यहां एक्मा के वार्षिक सम्मेलन में कहा, ‘‘मैं आपको (कल-पुर्जा उद्योग को) एक चुनौती और एक सुझाव देता हूं। कल-पुर्जों के हिसाब से मारुति सुजुकी के वाहन 90 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी होते हैं। लेकिन कुछ मुख्य कल-पुर्जे तथा इलेक्ट्रॉनिक्स का हमें अभी भी आयात करना पड़ता है। हम चाहते हैं कि ये सामान में भारत में निर्मित हों।’’
उन्होंने कहा कि यदि कोई कम्पनी गुणवत्ता तथा भरोसे के साथ देश में ही ये सामान बनाये तो इससे न सिर्फ मारुति सुजुकी को बल्कि पूरे घरेलू वाहन उद्योग को मदद मिलेगी। आयुकावा ने कहा कि भविष्य में सर्वश्रेष्ठ अवसरों को भुनाने का राज आंतरिक शोध एवं विकास क्षमता में निहित है। उन्होंने कहा, ‘‘यदि भारत को भविष्य की दुनिया में प्रतिस्पर्धी बनना है, तो मेरा सुझाव है कि आंतरिक शोध एवं विकास क्षमता को विकसित करने की शुरुआत करनी चाहिये, जो एक लंबी प्रक्रिया है तथा धीरे-धीरे परिणाम देती है। हमें धैर्य रखना होगा और प्रतिबद्ध रहना होगा।’’

‘मंदी’ की आशंका में सोना बना निवेशकों की पहली पसन्द

नयी दिल्ली : आर्थिक सुस्ती के बीच सोना नित नई ऊंचाई को छू रहा है और चांदी की चमक भी बढ़ रही है और विश्लेषकों का अनुमान है कि पीली धातु की चमक अभी कुछ और समय तक बनी रहेगी। इस समय जबकि देश दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं में नरमी या गिरावट का दौर चल रहा है, शेयर बाजार टूट रहे हैं और प्रॉपर्टी बाजार भी ‘ठंडा’ है, ऐसे में सोना उन गिनी चुनी परिसम्पत्तियों में है जो निवेशकों के लिए सुरक्षित और अकर्षक लग रही है। भारत में बहुमूल्य धातुओं में निवेश करने वाले निवेशक इस समय ‘चांदी’ काट रहे हैं। विश्लेषकों का अनुमान है कि कहना है कि सोने में तेजी अभी जारी रहेगी और दिवाली तक इसकी कीमत नया रिकॉर्ड बना सकती है। इस कैलेंडर वर्ष में सोने ने निवेशकों को 20 प्रतिशत से अधिक लाभ दे चका है जबकि 2018 में इसमें निवेश का प्रतिफल करीब 6 प्रतिशत था। गत 31 दिसंबर को दिल्ली में सोने का भाव 32,270 रुपये प्रति दस ग्राम था जो आज 39,000 पर चल रहा है। इस तरह वर्ष 2019 में सोना निवेशकों को अब तक 20 प्रतिशत से अधिक का प्रतिफल दे चुका है। इसी तरह चांदी भी 39,000 रुपये प्रति किलोग्राम से इस कैलेंडर साल में 50,000 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंच चुकी है। इस तरह बहुमूल्य धातुओं ने निवेशकों को उम्मीद से बेहतर रिटर्न दिया है। दिल्ली बुलियन एंड ज्वेलर्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष विमल गोयल ने ‘भाषा’ से कहा कि दुनिया भर में ‘मंदी’ की आशंका से सोने की कीमतों में उछाल आया है। गोयल कहते हैं कि घरेलू अर्थव्यवस्था में सुस्ती के अलावा अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध तथा वैश्विक स्तर पर अन्य घटनाक्रमों के चलते निवेशकों का सोने की तरफ झुकाव बढ़ा है। इसके अलावा डॉलर के मुकाबले रुपये में आ रही गिरावट से भी सोना मजबूत हो रहा है। गोयल कहते हैं कि निवेश के मामले में इस समय सोने से बेहतर कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने कहा कि दिवाली के समय सोना 42,000 रुपये तक और चांदी 52,000 रुपये तक पहुंच सकती है। अखिल भारतीय सर्राफा संघ के उपाध्यक्ष सुरेंद्र जैन का मानना है कि सोने की कीमतों को कमजोर होते रुपये से भी समर्थन मिल रहा है। हालांकि, घरेलू अर्थव्यवस्था में सुस्ती को लेकर उन्होंने कुछ नहीं कहा। जैने ने कहा कि इस समय रुपया ही नहीं, अन्य मुद्राएं भी डॉलर के मुकाबले कमजोर पड़ी हैं। इसका सीधा लाभ सोने को मिल रहा है। उल्लेखनीय है कि बजट के बाद भारतीय शेयर बाजार से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की ओर से रुपये पर दबाव बढ़ा है डालर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर 72 प्रति डालर से भी हल्की हो चुकी है। ऑल इंडिया जेम्स एंड ज्वेलर्स ट्रेडर्स फेडरेशन के पूर्व चेयरमैन बच्छराज बमावला का मानना है कि सोने में तेजी के पीछे घरेलू व अंतरराष्ट्रीय दोनों प्रकार के कारक है। अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध, वैश्विक नरमी और ब्रेक्जिट(ब्रिटेन के यूरोपीय संघ से निकलने के मसलों) की वजह से भी निवेशकों का झुकाव सोने की ओर से बढ़ा है।
बमावला का मानना कि इस साल के अंत तक सोना 41,500 रुपये प्रति दस ग्राम के स्तर को पार कर सकता है। उन्होंने कहा कि डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट सोने की कीमतों में तेजी की एक प्रमुख वजह है। हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने कहा कि इस समय सोना तेज है, लेकिन कीमतों में उछाल का नकारात्मक असर बिक्री पर पड़ सकता है जिससे सारी परिस्थितियां पलट सकती हैं। बमावला ने कहा कि यदि डॉलर के मुकाबले रुपया 72 रुपये प्रति डॉलर के स्तर पर रहता है तो सोना अन्तरराष्ट्रीय बाजार में 1,580 डॉलर प्रति औंस तक जा सकता है। हालांकि, इसके बाद इसमें नरमी की सम्भावना है।

1 रुपये में इडली बेचने वाली दादी अम्मा

चेन्नई : सुबह के 6 बजते ही सांभर की खुशबू के बीच घर के दरवाजे खुलते हैं और ग्राहक लाइन लगाकर बैठ जाते हैं। बरगद के पत्ते पर गरमागरम इडली साम्भर का आनंद लेते हैं वो भी सिर्फ एक रुपए में हैं। तमिलनाडु के वड़िवेलम्पलयम गाँव की इस दुकान को संभाल रही हैं कमलाथल। उम्र 80 साल है और एक इडली की कीमत है 1 रुपये। कमलाथल आज भी अपनी उम्र की दूसरी महिलाओं से फिट हैं और जीवन कालक्ष्य लोगों को सस्ता और भरपेट भोजन उपलब्ध कराना है। 80 साल की कमलाथल की सुबह सूरज उगने से पहले हो जाती है। नहाने के बाद बेटे के साथ फार्म की ओर चल देती हैं। यहां सब्जियां, नारियल, नमक और चटनी के लिए मसाले रखे हैं। काम की शुरुआत सब्जियों के काटने से होती है जिसका इस्तेमाल सांभर बनाने में किया जाता है। साम्भर चूल्हे पर चढ़ाने के बाद कमलाथल चटनी तैयार करती हैं। इटली बनाने के लिए सामग्री को एक दिन पहले ही तैयार करती हैं। सुबह 6 बजते ही ग्राहकों के लिए घर के दरवाजे खुलते हैं। छप्पर के नीचे ग्राहक बैठकर एक रुपये में इडली-सांभर और चटनी का स्वाद चखते हैं। यहां आने वाले ज्यादातर ग्राहक ऐसे हैं जो रोजाना आते हैं। कमलाथल इडली बनाने में परम्परागत बर्तनों का प्रयोग करती हैं। मसाला पीसने से लेकर नारियल की चटनी बनाने का काम पत्थर की सिल पर करती हैं। उनका कहना है कि मैं जॉइंट फैमिली से हूं और अधिक लोगों का खाना बनाना मेरे लिए मुश्किल काम नहीं है। इडली बनाने की तैयारी एक दिन पहले ही शुरु कर देती हूं। रोजाना पत्थर पर 16 किलो चावल और दाल पीसती हूं। यह पूरी तरह फूल जाए इसलिए इसे रातभर के लिए रखना पड़ता है। इडली बनाने में हर दिन नई सामग्री का प्रयोग करती हूं। कमलाथल कहती हैं, रोजाना दुकान पर आने वाले मजबूर भरपेट इडली खा सकें, यह मेरे लिए एक लक्ष्य की तरह है। इसलिए मैंने इडली का दाम 1 रुपए रखा है। इसलिए वे अपने पैसों की बचत करने के साथ पेट भी भर सकेंगे। दिनभर की दुकानदारी से मैं रोजाना 200 रुपए कमाती हूं। कई लोगों का कहना है मुझे इडली के दाम बढ़ाने चाहिए। लेकिन मेरे लिए लोगों का पेट भरना और जरूरतमंदों की मदद करना प्राथमिकता है। मैं भविष्य में कभी भी इसके दाम नहीं बढ़ाउंगी। तमिलनाडु में एक इडली 5 से 20 रुपये में मिलती है।

(साभार – दैनिक भास्कर)