उधमपुर :जम्मू-कश्मीर के ऊधमपुर जिले के गांव बट्टाल बालियां में जतिंदर बागरिया ने प्लास्टिक को रिसाइकिल करने की फैक्ट्री लगाई। यहां लगी मशीनें प्लास्टिक को रोड बनाने में इस्तेमाल होने वाले मटेरियल में बदल देती हैं। फैक्ट्री मालिक दिल्ली के जतिंदर ने कहा, हम केंद्र सरकार के स्वच्छ भारत अभियान से प्रेरित हैं और शहर को साफ रखना चाहते हैं। हम प्लास्टिक फ्री इंडिया कैम्पेन में भी योगदान दे रहे हैं। कुनाल प्लास्टिक इंडस्ट्रीज नाम की यह फैक्ट्री अभी 10 से 12 लोगों को रोजगार मुहैया करा रही है। हमारा लक्ष्य ऊधमपुर जिले को प्लास्टिक फ्री बनाकर क्लीन इंडिया और क्लीन सिटी को बढ़ावा देना है। उधमपुर के डिप्टी कमिश्नर पीयूष सिंह के मुताबिक, बट्टाल बालियां गांव में उद्योगपति ने प्लास्टिक क्रेशर मशीन लगाई है। इससे रिसाइकिल किए गए प्लास्टिक का इस्तेमाल रोड बनाने में किया जाएगा। यह एक बेहतर प्रयास है।
फैक्ट्री में काम करने वाली खुर्शिदा बेगम कहती हैं, हम यहां से अच्छा पैसा कमा कर खुश हैं। ऐसी और भी फैक्ट्रियां लगना चाहिए, ताकि उनके जैसी कई और महिलाओं को रोजगार मिले। फैक्ट्री वर्कर मोहम्मद रफीक कहते हैं, हम अपने शहर को साफ करते हैं और उसी से रुपया कमाते हैं। इस तरह मैं अपने परिवार और बच्चों के लिए शहर साफ करता हूं और इससे आमदनी भी हो जाती है।
सफाई से होगी कमाई, रिसाइकिल प्लास्टिक का इस्तेमाल सड़क बनाने में होगा
शेफाली बनीं अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अर्धशतक जड़ने वाली सबसे युवा भारतीय
तेंदुलकर का रिकार्ड तोड़ा
ग्रोस आइलेट : पंद्रह साल की शेफाली वर्मा अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अर्धशतक जड़ने वाली भारत की सबसे युवा खिलाड़ी बन गयी और उन्होंने सचिन तेंदुलकर का 30 साल पुराना रिकार्ड तोड़ दिया। शेफाली ने वेस्टइंडीज के खिलाफ पहले टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच में 49 गेंद में 73 रन की पारी खेली, जिससे भारतीय टीम ने शनिवार को यहां 84 रन से जीत हासिल की। अपना पांचवां टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेल रही शेफाली ने अपनी पारी के दौरान छह चौके और चार छक्के जमाये। शेफाली ने यह उपलब्धि 15 साल और 285 दिन की उम्र में हासिल की। इस तरह उन्होंने महान क्रिकेटर तेंदुलकर को पीछे छोड़ा, जिन्होंने अपना पहला टेस्ट अर्धशतक 16 साल और 214 दिन की उम्र में बनाया था। हरियाणा की इस युवा खिलाड़ी ने पिछले महीने सूरत में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ अपने कैरियर के दूसरे टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच में 46 रन की पारी खेली थी।
अब चेहरा पहचानने के बाद मिलेगी ट्रेन में एंट्री, रेलवे लेकर आ रहा है खास प्रणाली
नयी दिल्ली : भारतीय रेलवे अपने यात्रियों की सुरक्षा के लिए फेस रिकॉग्निशन टेक्नोलॉजी (Face Recognition Technology) का इस्तेमाल करने क तैयारी में है। वहीं, रेलवे इस एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) आधारित तकनीक से अपराधों पर लगाम लगाई जा सकेगी। रिपोर्ट के मुताबिक, रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स (RPF) इस तकनीक को क्रिमिनल ट्रेकिंग सिस्टम के डाटा बेस के साथ लिंक करेगी, जिससे अपराधियों को पहचानने में आसानी होगी। वहीं, इस सिस्टम से आरपीएफ को पूरे डाटा बेस का एक्सेस मिल जाएगा।
एफआरएस तकनीक करेगी काम
फेस रिकॉग्निशन टेक्नोलॉजी अपराधियों की तस्वीरों को उनके चेहरे से मैच करेगी, जिसके बाद आरपीएफ को उसके पूरे बैकग्राउंड की जानकारी मिलेगी। सूत्रों की मानें तो इस तकनीक के आने से रेलवे स्टेशन अधिक सुरक्षित हो जाएंगे। इस प्लान को आरपीएफ द्वारा 26/11 आतंकी हमले के बाद पहली बार पेश किया गया था। वहीं, फेस रिकॉग्निशन तकनीक को बड़े रेलवे स्टेशन्स में इस्तेमाल किया जाएगा।
बंगलुरु के रेलवे स्टेशन में होगा इस तकनीक का इस्तेमाल
रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स फेस रिकॉग्निशन तकनीक को सबसे पहले बंगलुरु रेलवे स्टेशन में इस्तेमाल करेगी। इसके बाद इसका दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई में उपयोग किया जाएगा। इस सिस्टम की खासियत की बात करें तो यह 10 साल पुरानी फोटो को भी पहचान सकेगा।
बंगलुरु एयरपोर्ट पर मौजूद है यह तकनीक
आपको बता दें कि इस समय बंगलुरु के अतंराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर फेस रिकॉग्निशन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल हो रहा है। इस सिस्टम को जुलाई में लॉन्च किया गया था।
भारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टी.एन. शेषन का निधन
चेन्नई : भारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टी.एन. शेषन का रविवार को चेन्नई में निधन हो गया। शेषन ने 1990 के दशक में देश में चुनाव सुधार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और बड़ी ही कठोरता से आदर्श आचार संहिता का पालन कराया था। वह 86 वर्ष के थे। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने ‘पीटीआई- भाषा’ को बताया कि पूर्व चुनाव आयुक्त का स्वास्थ्य पिछले कुछ वर्ष से ठीक नहीं था। दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया। अपनी स्पष्टवादिता के लिए प्रसिद्ध शेषन बढ़ती उम्र के कारण पिछले कुछ वर्ष से सिर्फ अपने आवास पर रह रहते थे। उनका बाहर आना-जाना लगभग ना के बराबर हो गया था। प्रधानमंत्री ने ट्वीट किया, ‘‘चुनावी सुधार की दिशा में उनके प्रयासों ने हमारे लोकतंत्र को और मजबूत तथा भागीदारीपूर्ण बनाया। उनके निधन से दुख हुआ। ओम शांति।’’ शेषन 12 दिसंबर, 1990 से लेकर 11 दिसंबर, 1996 तक देश के मुख्य चुनाव आयुक्त रहे और इस दौरान उन्होंने चुनाव सुधार की दिशा में काफी काम किया। शेषन ने अपने कार्यकाल में चुनाव में के दौरान बाहुबल और धन के महत्व को कम करने के लिए कठोर कदम उठाए। उनका जन्म केरल के पलक्कड़ जिले के तिरुनेल्लाई में हुआ था। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ट्वीट किया, ‘‘स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के पक्षधर टी.एन. शेषन के निधन की सूचना से शोक संतप्त हूं। लोकतंत्र में उनके महत्वपूर्ण योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा। मेरी संवेदनाएं उनके परिवार और प्रशंसकों के साथ हैं।’’ केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि शेषन ने भारत के चुनावी संस्थान को मजबूत बनाने में सुधारक की भूमिका निभायी है। शाह ने ट्वीट किया, ‘‘पूर्व मुख्य आयुक्त टी.एन. शेषन के निधन की सूचना से दुखी हूं। उन्होंने भारत की चुनावी संस्था के सुधार और उसे मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। देश उन्हें हमेशा लोकतंत्र के पथप्रदर्शक के रूप में याद रखेगा। मेरी प्रार्थना उनके परिवार के साथ है।’’
खाली कटोरे के साथ क्लासरूम में झांक रही थी बच्ची, स्कूल ने दिया दाखिला
हैदराबाद : भारत में 21.9 प्रतिशत लोग गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करते हैं, जिनकी मजदूरी 150 रुपये प्रति दिन से कम है. ऐसी स्थितियों में जहां कई लोगों के लिए दो वक्त का भोजन जुटा पाना एक चुनौती है, वहीं शिक्षा किसी सपने से कम नहीं है. इसी बीच एक ऐसी तस्वीर वायरल हुई, जो बहुत कुछ बयां करती नजर आ रही है। इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, इस तस्वीर को तेलुगू डेली ने छापा है, साथ में आकाली चूपु यानी ‘भूखी निगाहें’ लिखा है। देखा जा सकता है कि एक बच्ची खाली कटोरा लेकर क्लासरूम में झांक रही है. तस्वीर को गुड़िमालकापुर के देवल झाम सिंह गवर्नेमेंट हाई स्कूल में लिया था। तस्वीर वायरल होने के बाद अब स्कूल ने बच्ची को दाखिला दिया है। बच्ची का नाम दिव्या बताया जा रहा है. शुक्रवार को उसे स्कूल में दाखिला मिल गया. पहले बच्ची स्कूल की छात्रा नहीं थी. वो खाने के लिए रोज स्कूल आती थी। दिव्या के माता-पिता पास ही की झुग्गी में रहते हैं. उसके पिता कचरा उठाने का काम करते हैं, जबकि माँ सफाईकर्मी है। स्कूल में जो मिड-डे मील बचता था, वो खाने के लिए दिव्या आती थी। एनजीओ एमवी फाउंडेशन के राष्ट्रीय संयोजक वेंकट रेड्डी ने फेसबुक पर इस तस्वीर को शेयर किया। एमवी फाउंडेशन बालिकाओं के अधिकारों के लिए काम करती है। तस्वीर शेयर करते हुए उन्होंने लिखा, “एक बच्ची को देश में शिक्षा और भोजन नहीं मिलना शर्म की बात है। “सोशल मीडिया पर तस्वीर पोस्ट करने के बाद वो अपने वॉलिंटियर के साथ स्कूल पहुंचे और बच्ची का उसी स्कूल में एडमिशन कराया। इसी के साथ वो बच्ची के माता-पिता से भी मिले। जब दिव्या पहले दिन स्कूल पहुंची तो उन्होंने फोटो भी ली। उन्होंने बताया कि पहले दिन स्कूल जाकर दिव्या के चेहरे पर अलग ही मुस्कान थी।
पहली निजी ट्रेन तेजस एक्सप्रेस ने एक महीने में कमाए 3.70 करोड़ रुपये
नयी दिल्ली : देश की पहली निजी ट्रेन तेजस एक्सप्रेस (Tejas Express) ने अपने संचालन के बाद से अक्टूबर तक 70 लाख रुपये का मुनाफा कमाया है। इंडियन रेलवे केटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (आइआरसीटीसी) के मालिकाना हक वाली इस ट्रेन की शुरुआत पिछले महीने की पांच तरीख को हुई थी। यह आंकड़े पांच से 28 अक्टूबर तक के हैं। ट्रेन ने इसी अवधि में टिकट बिक्री के जरिये करीब 3.70 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाया है। देश में किसी ट्रेन द्वारा मुनाफा कमाना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि रेलवे लगातार घाटा दर्ज करता रहा है।लखनऊ और दिल्ली के बीच चलने वाली यह ट्रेन भारतीय रेलवे की उस योजना का हिस्सा है, जिसके तहत 50 विश्वस्तरीय रेलवे स्टेशन विकसित किए जाने हैं। इन पर निजी संचालकों द्वारा 150 निजी ट्रेन चलाए जाने की योजना है।
आइआरसीटीसी ने बताया कि इस अवधि में तेजस के परिचालन में करीब तीन करोड़ रुपये का खर्च आया है। यह ट्रेन सप्ताह में छह दिन चलती है। इस तरह से तेजस के संचालन में आइआरसीटीसी रोजाना करीब 14 लाख रुपये खर्च करती है, जबकि उसे यात्री किराए से 17.50 लाख रुपये की राजस्व मिलता है।गौरतलब है कि तेजस एक्सप्रेस देश में अपनी तरह की पहली निजी ट्रेन है। हालांकि इसकी संचालक आइआरसीटीसी भारतीय रेलवे की सहायक कंपनी है। तेजस के यात्रियों को कुछ विशेष सुविधाएं दी जा रही हैं। इनमें विशेष खाना, 25 लाख रुपये तक का मुफ्त बीमा और लेट होने पर क्षतिपूर्ति शामिल है।
वायु प्रदूषण से सेहत को कैसे रखा जाए सुरक्षित
धुंध रूपी इस वायु प्रदूषण को स्मॉग कहते हैं। वस्तुत स्मॉग शब्द का प्रयोग पहली बार सन् 1905 में इंगलैंड के एक वैज्ञानिक डॉ हेनरी ने किया था। इस समय दिल्ली-एनसीआर समेत देश के कई क्षेत्र अतीत की तुलना में कहीं ज्यादा वायु प्रदूषण से ग्रस्त हैं। हवा इतनी विषाक्त हो चुकी है कि अब उसने सेहत पर हमला करना शुरू कर दिया है। यह समस्या आज इतनी बढ़ गई है कि अनेक लोग सड़कों पर मास्क पहनकर निकल रहे है। स्मॉग रूपी इस वायु प्रदूषण से सेहत को कैसे सुरक्षित रखा जाए और किन उपायों से इस समस्या को नियंत्रित किया जाए? इस संदर्भ में कुछ विशेषज्ञ डॉक्टरों से बातचीत…
धुंध रूपी इस वायु प्रदूषण को स्मॉग कहते हैं। स्मॉग रासायनिक पदार्थों व कोहरे के मिश्रण से बनता है, जो फेफड़ों के अलावा शरीर के अन्य अंगों पर ख्रराब असर डालता है वस्तुत: स्मॉग शब्द का प्रयोग पहली बार सन् 1905 में इंगलैंड के एक वैज्ञानिक डॉ हेनरी ने किया था। यह शब्द स्मोक (धुआं) और फॉग (कोहरा), इन दो शब्दों से मिलकर बना है।
प्राकृतिक घटनाओं या मानवीय गतिविधियों के कारण वातावरण में घुल गए हानिकारक रसायन वायु को प्रदूषित करते हैं। ये वायु प्रदूषक यदि वातावरण में उत्सर्जित होते हैं तो प्राथमिक प्रदूषक कहलाते हैं और यदि अन्य प्रदूषकों के साथ प्रतिक्रिया करके हानि पहुंचाते है तो सेकंडरी प्रदूषक कहलाते हैं। इनके मुख्य निशाने पर बच्चे, वृद्ध, दिल व फेफड़े के मरीज, डायबिटीज वाले और बाहरी वातावरण में काम करने वाले लोग आते हैं। इन प्रदूषकों के विषैले प्रभाव के कारण जमीन की उर्वरक क्षमता कम हो जाती है। जन्म से होने वाले विकार, दमा, फेफड़े का कैंसर और सिर दर्द आदि होने का खतरा बढ़ जाता है।
प्रमुख वायु प्रदूषक – हाइड्रो कार्बन, सल्फर ऑक्साइड, पार्टिक्यूलेट सामग्री, नाइट्रोजन ऑक्साइड, कार्बन डाई ऑक्साइड, पार्टिक्यूलेट सामग्री
हजारों ठोस या तरल कण जो हवा में तैरते रहते हैं, जैसे धूल, मिट्टी और एसिड के कण। ये कण सेहत के लिए नुकसानदेह होते हैं।
कणों के विषैले अथवा कैंसर उत्पन्न करने वाले प्रभाव हो सकते हैं।
सूक्ष्म कण सीधे फेफड़ों तक पहुंच सकते है। नाइट्रोजन ऑक्साइड: इस प्रदूषक से सांस नली का मार्ग अवरुद्ध हो सकता है।
सल्फर ऑक्साइड: यह प्रदूषक तत्व गैसों के आदान-प्रदान के लिए फेफड़ों की क्षमता में कमी लाता है।
कार्बन ऑक्साइड: रक्त में मौजूद आयरन को कमकर सिरदर्द, थकान का कारण बन सकती है।
ओजोन परत का क्षीण होना: मानव निर्मित प्रदूषक वायुमंडल में ओजोन की परत को खराब करते हैं। सेकेंडरी प्रदूषकों से ओजोन परत क्षीण होती है। रासायनिक धुंध के कारक बाहरी प्रदूषण के अतिरिक्त घरेलू बॉयोमास र्ईंधन, सिगरेट, बीड़ी का धुआं आदि फेफड़े को नुकसान पहुचाते हैं। विश्व के 20 प्रदूषित शहरों में भारत के 10 शहर शामिल है। इनमें से चार उत्तर प्रदेश में है।
सरकार ये कदम उठाए – सरकार को वनीकरण की व्यापक योजना बनानी चाहिए। जिन वाहनों से धुआं ज्यादा निकलता है, उन पर प्रतिबंध लगना चाहिए। पराली (फसलों के अवशेष) जलाने पर प्रभावी नियंत्रण लगाना चाहिए। ऐसे हानिकारक पदार्थों पर रोक लगनी चाहिए, जो वातावरण को प्रदूषित करते हैं।
बॉयोमास ईंधन के प्रयोग में कमी लाने को बढ़ावा देना चाहिए। इस संदर्भ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई उज्ज्वला योजना एक सराहनीय कदम माना जा सकता है, जिससे घरेलू वायु प्रदूषण में कमी आने की संभावना है।
(साभार – दैनिक जागरण)
सामने आया नासा का पहला इलेक्ट्रिक विमान
लीथियम आयन बैटरी वाली 14 मोटरें लगी होंगी
एडवर्ड एयरफोर्स बेस कैलिफोर्निया : नासा का पहला ऑल इलेक्ट्रिक एयरप्लेन एक्स-57 मैक्सवेल शुक्रवार को सामने आया। इसे कैलिफोर्निया की एयरोनॉटिक्स लैब में बनाया गया है। इसमें इटली में निर्मित टेकनेम पी2006टी डबल इंजन प्रोपेलर लगे हैं। विमान का निर्माण 2015 से किया जा रहा था। विमान का फ्लाइंग टेस्ट अगले साल होगा। विमान में लीथियम आयन बैटरी वाली 14 मोटरें लगने के बाद इसे लोगों के लिए सार्वजनिक करने की मंजूरी मिल गई। शुक्रवार को विमान को एडवर्ड एयरफोर्स बेस कैलिफोर्निया में इसे सामने लाया गया। विमान में भी दूसरी फ्लाइट की तरह पैंतरेबाजी करने की क्षमता होगी। बीते दो दशकों में एजेंसी के लिए काम करते हुए मैक्सवेल का यह पहला विमान होगा, जिसमें इंसान उड़ सकेगा। हालांकि निजी कंपनियां पहले से ही इलेक्ट्रिक विमान और हवाई टैक्सियां बना चुकी हैं। नासा के एक्स-57 विमान को विकसित करने का मकसद बेहतर टेक्नोलॉजी उपलब्ध कराना और व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए सरकार से प्रमाणपत्र हासिल करना है।
तय मानकों पर हवाई जहाज को उड़ाना है
लॉस एंजिल्स से 160 किमी दूर एडवर्ड्स में नासा के आर्मस्ट्रॉन्ग फ्लाइट रिसर्च सेंटर के प्रोजेक्ट मैनेजर ब्रेंट कोबलिग ने कहा, ‘‘हम उन चीजों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, जो पूरे उद्योग की मदद कर सकते हैं, न कि केवल एक कंपनी की। अभी हमारा लक्ष्य 2020 के अंत में इस हवाई जहाज को उड़ाना है। विमान में उड़ने की क्षमता के साथ-साथ ऊर्जा संरक्षिण और ध्वनि के लिए भी मानक तय किए हैं।’’
दुनिया का इकलौता ऐसा पेंटर, जो सिलाई मशीन से बनाता है खूबसूरत तस्वीरें
पटियाला : आपने कई पेंटरों की तस्वीरें देखी होंगी, जो खूबसूरती के साथ-साथ अनोखी भी होती हैं। आज हम आपको एक ऐसे ही पेंटर से रू-ब-रू करवाने जा रहे हैं, जो दुनिया में सबसे अनोखे हैं। इस पेंटर को दुनिया का इकलौता ‘नीडल मैन’ कहा जाता है, जो सिलाई मशीन से ऐसी खूबसूरत तस्वीरें बनाते हैं, जिसे देखने के बाद आप भी उनके मुरीद हो जाएंगे। इनका नाम है अरुण बजाज, जो पंजाब के पटियाला के रहने वाले हैं। 35 वर्षीय अरुण ने गुरु नानक देव के 550वें प्रकाश पर्व से पहले सिलाई मशीन से उनकी एक खास तस्वीर बनाई है। वह दुनिया के इकलौते ऐसे कलाकार हैं, जो सिलाई मशीन से अनोखी पेंटिंग बनाते हैं। अरुण सिलाई मशीन के जरिए कई प्रसिद्ध हस्तियों की तस्वीरें बना चुके हैं, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल हैं। उन्होंने साल 2017 में पीएम मोदी से मुलाकात की थी और उन्हें सिलाई मशीन से बनाई गई उनकी तस्वीर भेंट की थी। अरुण ने भगवान कृष्ण की एक खूबसूरत तस्वीर बनाई थी, जिसके लिए उन्हें कई पुरस्कार भी मिल चुके हैं। इस तस्वीर को बनाने में उन्हें तीन साल का समय और 28 लाख 36 हजार मीटर धागा मिला था। यह दुनिया की पहली ऐसी तस्वीर थी, जिसे सिलाई मशीन से बनाया गया था और वो भी लाखों धागे से। जिंदगी की कहानी भी बड़ी ही कठिनाईयों से भरी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अरुण जब 12 साल के थे, तभी से सिलाई कर रहे हैं। उन्हें यह काम करते 23 साल बीत चुके हैं। उन्होंने बताया था कि उनके पिता एक दर्जी थे, लेकिन जब अरुण 16 साल के थे, तभी उनका देहांत हो गया था। इसके बाद से ही वो अपने पिता की दुकान संभाल रहे हैं। इसके लिए उन्हें अपने स्कूल की पढ़ाई तक छोड़नी पड़ी थी।अरुण के मुताबिक, वह एक प्रसिद्ध पेंटर बनना चाहते थे, लेकिन उनके पिता की अचानक मौत से उनका यह सपना टूट गया। हालांकि फिर भी उन्होंने अपने अंदर के हुनर को मरने नहीं दिया और आज वो अपने अनोखे हुनर से दुनिया को अपना दीवाना बना रहे हैं।
9 साल के बच्चे को डूडल बनाने से रोका, आर्ट टीचर की मदद से रेस्त्रां सजाने का काम मिला
आर्ट क्लास की ड्रॉइंग टीचर कैरी ने इंस्टाग्राम पर जो के डूडल शेयर किए
लंदन : ब्रिटेन के श्रेयसबरी में 9 साल का जो व्हेल स्कूल समय में वहां की मेज-दीवारों पर डूडल बनाता था। मना किए जाने पर वह चिड़चिड़ा जाता। इस पर उसके माता-पिता जो को आर्ट क्लासेस ले गए। यहां 6 हफ्तों के दौरान जो की ड्रॉइंग के सभी कायल हो गए। बच्चे की ड्रॉइंग टीचर कैरी ने इंस्टाग्राम पर उसके डूडल शेयर किए। इससे प्रभावित होकर श्रेयसबरी के रेस्त्रां मालिक ने जो को दीवारें सजाने की पेशकश की। अब जो के पिता ग्रेग उसे रोज स्कूल के बाद रेस्त्रां ले जाते हैं। यहां जो दीवारों पर ड्रॉइंग बनाता है। इन्हें पिता ने लिंकडिन पर अपलोड किया। जल्द ही जो की ड्रॉइंग को 15 लाख से अधिक लाइक्स और ढेरों कमेंट मिले। पिता का कहना है, ‘‘वह अपनी ड्रॉइंग के प्रति समर्पित है। डूडल बनाने से मना करने पर वह स्कूल में चिड़चिड़ा जाता था। इसके बाद उसकी मां और मैंने उसे आर्ट क्लास भेजने का फैसला किया था। अब देख कर अच्छा लगता है कि 9 साल की उम्र में जो का अपना खुद का बिजनेस शुरू हो गया।’’




