Thursday, April 23, 2026
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विकी और आयुष्मान बने सर्वश्रेष्ठ अभिनेता, सुरेखा सीकरी सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री

मुम्बई : 66वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की घोषणा हाल ही में की गयी। श्रीराम राघवन निर्देशित ‘अंधाधुन’ को सर्वश्रेष्ठ हिंदी फिल्म का पुरस्कार मिला। विकी कौशल को ‘उरी’ और आयुष्मान खुराना को ‘अंधाधुन’ के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का अवॉर्ड दिया गया। तेलुगु एक्ट्रेस कीर्ति सुरेश को फिल्म ‘महानटी’ के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का अवॉर्ड मिला।
राष्ट्रीय सिनेमा पुरस्कारों की जूरी के चेयरमैन राहुल रवैल ने पुरस्कारों की घोषणा की। इस दौरान सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर मौजूद थे। इन पुरस्कारों का ऐलान दो महीने पहले किया जाना था। लेकिन, लोकसभा चुनावों के चलते अब इनकी घोषणा की गई।

राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की पूरी सूची
सर्वश्रेष्ठ अभिनेता – विकी कौशल, आयुष्मान खुराना
सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता – स्वानंद किरकिरे, चुंबक
सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री – कीर्ति सुरेश (तेलुगु)
सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री सुरेखा सीकरी, बधाई हो
सर्वश्रेष्ठ निर्देशक आदित्य धर, उरी द सर्जिकल स्ट्राइक
सर्वश्रेष्ठ बाल कलाकार – पीवी रोहित, समित सिंह, ताला अर्चलरेशु श्रीनिवास पोकाले
सर्वश्रेष्ठ बाल फिल्म सरकारी हीरिया प्राथमिक शाले कसरगोदू (कन्नड़)
सर्वश्रेष्ठ गीतकार – मंजुथा, (नाथीचरमी)
सर्वश्रेष्ठ मेकअप आर्टिस्ट रंजीत
सर्वश्रेष्ठ खेल फिल्म स्वीमिंग थ्रू डार्कनेस
सर्वश्रेष्ठ पारिवारिक मूल्यों वाली फिल्म – चलो जीते हैं
सर्वश्रेष्ठ शॉर्ट फिल्म कसाब
सर्वश्रेष्ठ खोजी फिल्म अमोली
सर्वश्रेष्ठ शैक्षणिक फिल्म सर्लभ विरला
सामाजिक विषय सर्वश्रेष्ठ बनी सर्वश्रेष्ठ फिल्म – ताला ते कुंजी
सर्वश्रेष्ठ पर्यावरण फिल्म द वर्ल्ड मोस्ट फेमस टाइगर
विशेष रूप से उल्लेखनीय पुरस्कार – महान हुतात्मा डायरेक्टर सागर पुराणिक
सर्वश्रेष्ठ संगीत – ज्योति, केदार दिवेकर
सर्वश्रेष्ठ सम्पादन सनराइज, हेमंती सरकार
सर्वश्रेष्ठ ऑडियोग्राफी चिल्ड्रन ऑफ सॉइल, बिश्वदीप चैटर्जी
सर्वश्रेष्ठ फिल्म समीक्षक ब्लेस जॉनी और अनंत विजय
सर्वश्रेष्ठ राजस्थानी फिल्म टर्टल
सर्वश्रेष्ठ पंचांग फिल्म इन द लैंड ऑफ पॉइजनस वीमन
सर्वश्रेष्ठ गारो फिल्म अन्ना
सर्वश्रेष्ठ मराठी फिल्म भोंगा
सर्वश्रेष्ठ तमिल फिल्म बरम
सर्वश्रेष्ठ उर्दू फिल्म हामिद
सर्वश्रेष्ठ बंगाली फिल्म एक जे छिलो राजा
सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशक – संजय लीला भंसाली (पद्मावत)
सर्वश्रेष्ठ बैकग्राउंड अवॉर्ड उरी द सर्जिकल स्ट्राइक
सर्वश्रेष्ठ फिल्म मैत्री राज्य -उत्तराखंड
सर्वश्रेष्ठ एक्शन फिल्म – केजीएफ

हाशिम अमला ने लिया क्रिकेट से संन्यास

दक्षिण अफ्रीका के प्रमुख बल्लेबाजों में से एक हाशिम अमला ने गुरुवार (8 अगस्त) को अन्तरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया। अब वे सिर्फ घरेलू क्रिकेट खेलेंगे। इस बात की घोषणा उन्होंने एक स्टेटमेंट जारी करते हुए की। 31 मार्च 1983 को जन्म अमला ने अपने 15 साल के क्रिकेट करियर में 349 मैच (तीनों फॉर्मेट) खेले और कुल 18,672 रन बनाए। इस दौरान उन्होंने 55 शतक और 88 अर्द्धशतक भी जमाए। अमला जून 2014 से जनवरी 2016 तक दक्षिण अफ्रीकी टीम के कप्तान भी रहे। अचानक उनके संन्यास ले लेने की वजह से दुनियाभर के उनके फैन्स को झटका लगा और उन्होंने इसे क्रिकेट के लिए बड़ा नुकसान बताया। फैन्स ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए अमला को महान बल्लेबाज बताया और आगे के जीवन के लिए उन्हें शुभकामनाएं दीं। अमला ने अपने वनडे कॅरियर में 181 मैचों में 49.46 के औसत से 8113 रन बनाए। फिलहाल सबसे ज्यादा वनडे रन बनाने के मामले में वे दुनिया में पांचवें नंबर पर थे। एक तरफ विराट वनडे में सचिन के रिकॉर्ड तोड़ रहे थे और दूसरी तरफ अमला, विराट के रिकॉर्ड तोड़ रहे थे। इस अफ्रीकी बल्लेबाज के नाम वनडे में सबसे तेज 2 हजार, 3 हजार, 4 हजार, 5 हजार, 6 हजार, 7 हजार रन पूरे करने का रिकॉर्ड है। अमला दुनिया के उन 5 खिलाड़ियों में भी शामिल हैं, जिन्होंने वनडे और टेस्ट दोनों में 25 या उससे ज्यादा शतक जमाए हैं। 36 साल के अमला ने साल 2004 में भारत के खिलाफ टेस्ट डेब्यू, साल 2008 में बांग्लादेश के खिलाफ वनडे डेब्यू और साल 2009 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टी20 डेब्यू किया था। अमला ने 124 टेस्ट में 9282 रन, 181 वनडे में 8113 रन और 44 टी20 में 1277 रन बनाए। टेस्ट में उनका बेस्ट 311* था जबकि वनडे में सबसे बड़ी पारी 159 रन थी। वे द. अफ्रीका की ओर से टेस्ट क्रिकेट में तिहरा शतक लगाने वाले इकलौते बल्लेबाज भी हैं। हाशिम अमला के नाम पर दक्षिण अफ्रीका की ओर से किसी भी विकेट के लिए सबसे बड़ी पार्टनरशिप करने का रिकॉर्ड भी है। अक्टूबर 2017 में उन्होंने क्विंटन डिकॉक के साथ मिलकर बांग्लादेश के खिलाफ हुए वनडे में 282* रन जोड़े थे।

 कोलकाता में जल्द शुरू होगी भारत का पहला अंडर वॉटर मेट्रो

कोलकाता : रेल मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि देश के पहले अंडर वॉटर मेट्रो की शुरुआत जल्द की जाएगी। गोयल ने ट्वीट किया, ‘‘भारत की पहली अंडर वॉटर ट्रेन जल्द ही कोलकाता में हुगली नदी के नीचे चलाई जाएगी। यह ट्रेन उत्कृष्ट इंजीनियरिंग का उदाहरण है, जो देश में निरंतर हो रही रेलवे की प्रगति का प्रतीक है। इसके बनने से कोलकाता के लोगों को सुविधा और देश को गर्व का अनुभव होगा।’ भारत की पहली अंडर वॉटर ट्रेन शीघ्र ही कोलकाता में हुगली नदी के नीचे चलना आरंभ होगी। उत्कृष्ट इंजीनियरिंग का उदाहरण यह ट्रेन देश में निरंतर हो रही रेलवे की प्रगति का प्रतीक है। इसके बनने से कोलकाता निवासियों को सुविधा, और देश को गर्व का अनुभव होगा। गोयल ने एक वीडियो पोस्ट किया जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी हैं। वे मेट्रो सुरंगों के निर्माण में बेहतर इंजीनियरिंग के बारे में बात करते दिखे हैं। भारतीय रेलवे द्वारा जारी वीडियो में दो सुरंगों में पानी के रिसाव को रोकने के लिए सुरक्षा की दृष्टी से चार आवरण के बारे में बात की गई है। ट्रेन कोलकाता मेट्रो लाइन 2 का हिस्सा होगी। इसे ईस्ट-वेस्ट मेट्रो के नाम से भी जाना जाता है। 16 किमी के मेट्रो लाइन को दो फेज में शुरू किया जाएगा। पहले चरण में साल्ट लेक सेक्टर-5 को साल्ट लेक स्टेडियम स्टेशन से जोड़ा जाएगा। पहला फेज पांच किलोमीटर तक फैला होगा। मेट्रो सेवा इसी महीने शुरू होगी। इस लाइन को साल्ट लेक सेक्टर-5 स्टेशन से हावड़ा मैदान तक जोड़ा जाएगा। मेट्रो की सुरंग को अप्रैल 2017 से बनाया जा रहा है। सुरंग 520 मीटर लंबी और 30 मीटर गहरी हैं। इस प्रोजेक्ट के चीफ इंजीनियर परशुराम सिंह ने 2017 में कहा था कि कोलकाता में सबसे पहले मेट्रो सेवा शुरू हुई थी। अब, अंडर वॉटर मेट्रो चलाने वाला भी पहला शहर बनेगा। अभी कोलकाता में केवल एक मेट्रो लाइन है, जिसे नॉर्थ-साउथ मेट्रो के नाम से जाना जाता है।

ऑनर किलिंग के खिलाफ कानून लाने वाला पहला राज्य बना राजस्थान

जयपुर : शायद यह ऑनर किलिंग का पहला मामला था। तब से लेकर अब तक करीब चार साै साल गुजर जाने के बाद भी प्यार करना गुनाह माना जाता रहा। अब राजस्थान देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है, जहां प्यार करना गुनाह नहीं है, बल्कि ऐसे प्रेमी युगलों की सुरक्षा पुलिस करेगी। विधानसभा में ऑनर किलिंग बिल-2019 पारित हुआ है। यह कानून लागू करने वाला राजस्थान प्रदेश में पहला राज्य है। यह कानून बनते ही राजस्थान पुलिस ने इसके प्रचार के लिए भी फिल्म मुगल ए आजम का ही सीन लिया है, जिसे अपने ट्वीटर पर पोस्ट कर लिखा है कि अब मुगल ए आजम का जमाना गया। अब प्यार करना कोई गुनाह नहीं है। अगर प्यार करने वालों को कोई शारीरिक नुकसान पहुंचाता है तो उसे आजीवन कारावास तक हो सकता है। इसके अलावा 5 लाख रुपए तक का जुर्माना भी लग सकता है। आखिरी पंक्ति में दिल का चिह्न लगाकर लिखा है…क्योंकि प्यार करना कोई गुनाह नहीं है।
ऑनर किलिंग बिल के तहत यदि दो वयस्क सहमति से अंतरजातीय विवाह करें और परिजन किसी एक या दोनों की हत्या कर दें तो यह ऑनर किलिंग माना जाएगा। अंतर सामुदायिक, अंतरधार्मिक, समुदाय में शादी पर भी ये नियम लागू होंगे।

महाराजा श्रीषचन्द्र कॉलेज में मनायी गयी प्रेमचंद जयन्ती

कोलकाता : महाराजा श्रीषचन्द्र कॉलेज में प्रेमचंद जयंती समारोह का आयोजन किया गया, जिसका प्रमुख विषय: “प्रेमचंद और आज का समय”। कार्यक्रम का उद्घघाटन भाषण कॉलेज के प्राचार्य डॉ० श्यामल कुमार चक्रवर्ती ने दिया जिसमें उन्होंने प्रेमचंद के लेखनी जीवन के संघर्षों को बताया अपने बीज भाषण में डॉ. कार्तिक चौधरी ने प्रेमचंद आज के समय की जरूरत है। प्रेमचंद ने किसान, दलित, साम्प्रदायिकता, राष्ट्रवाद पर जो नज़रिया दिया है, वह आज के समय से आसानी से जुड़ जाता है और साथ ही प्रेमचंद की कहानियों पर चर्चा करते हुए कहा कि प्रेमचंद ने अपने कहानियों में जिन मजदूर पात्र को रखा है वह हमारे आस पास के ही लोग है। पूस की रात में जहाँ हल्कू खेती छोड़ने की बात करता है उसका दूसरा पड़ाव ही कफन कहानी का मजदूर पात्र घीसू माधव है। वह कामचोर हो ही नही सकते बल्कि व्यवस्था ने उन्हें ऐसा बना दिया है। कॉलेज की अंग्रेजी विभागाध्यक्ष प्रो० देबजानी लाहिरी ने प्रेमचंद की ‘कफन’ कहानी को वर्तमान जीवन से जोड़ा।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि आचार्य जगदीश चंद्र बोस कॉलेज के हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. अभिलाष कुमार गोंड ने अपना व्यक्तव्य रखते हुए कहा प्रेमचंद के कहानी, उपन्यासों के पात्र आज भी समाज में मौजूद है और प्रेमचंद के साहित्य को नयी दृष्टि से देखने की जरूरत है। समापन सत्र में कॉलेज के हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ० विजय रवानी ने प्रेमचंद के आधुनिक युग पर प्रभाव को बताया व धन्यवाद ज्ञापन प्रो० प्रतिमा शुक्ला ने किया। कार्यक्रम का संचालन विक्रम साव और पूजा सिंह ने किया। कार्यक्रम में ‘सवा सेर गेंहू’ कहानी पर नाटक, संगीत, नृत्य और भाषण की प्रस्तुति की गई। इस कार्यक्रम में कॉलेज के अलावा विभाग के सुशील, आशीष, विनय, उत्तम, उज़्मा, प्रीति, निधि, माधुरी, पूजा, मंजुला आदि छात्र छात्राओं ने हिस्सा लिया।

स्वतन्त्रता

सिम्पी मिश्रा

स्वार्थ से परमार्थ तक,

विरोध से बलिदान तक !

भारतीयता का मान धरो,

अपनी स्वतंत्रता का उचित सम्मान करो!!

बढ़ो आगे, महज भारतीयता की,

कागजी पहचान से…

देश का सम्मान करो , सच्चे जी-जान से !

सहेजो अपनी स्वतन्त्रता को,

आन-बान और शान से!!

व्यर्थ न लाओ बीच में,

साम्प्रदायिक अभिमान को !

बढ़ाओ आपसी सौहार्दता ,

एक-दूजे के मान सम्मान से !!

संकीर्णता से मुक्त हो,

विचारों से उन्मुक्त बनो!

कर्म से महान बनो,

धर्म से समान रहो !!

अपनी जाति, राष्ट्र का,

दिल से “तुम” सम्मान करो !

स्वतन्त्र हो , स्वतंत्र रहो…..

“स्वतन्त्रता” का मान रखो !!

                

                                

यूपी के हर सरकारी स्कूल में बनेगा किचन गार्डन

लखनऊ : उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे मिड डे मील के लिए फल-सब्जियां उगाएंगे और खाएंगे। मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआरडी) ने उत्तर प्रदेश के सभी सरकारी स्कूलों को नोटिस जारी करके यह निर्देश दिया है। मंत्रालय ने इस योजना का नाम ‘किचन गार्डन’ रखा है। इसमें आठवीं कक्षा तक के छात्र हिस्सा लेंगे।
शिक्षा विभाग के एक अधिकारी ने कहा- जब बच्चे अपने हाथ से सब्जी और फल पैदा करने के लिए मेहनत करेंगे तो सब्जी और फल का स्वाद अलग होगा। क्योंकि यह उनकी मेहनत का फल है तो वे इससे जुड़ पाएंगे। इस योजना का उद्देश्य मिड डे मील के पोषक मूल्य को बढ़ावा देना है। साथ ही पौधे, सब्जियों और फलों को उगाकर कृषि में बच्चों को प्रोत्साहित करना है।
मंत्रालय के निर्देशों के मुताबिक, जिन स्कूलों के पास पौधे उगाने के लिए पर्याप्त जमीन नहीं है। वह छत पर बगीचे का निर्माण कर सकते हैं और उपज की खेती के लिए गमले, कंटेनर, बैग और अन्य तकनीक इस्तेमाल कर सकते हैं। बच्चों द्वारा रसोई बनाने में स्कूल के कर्मचारी और शिक्षक उनकी मदद करेंगे।

करीब 600 साल पुराना है सुब्रमण्या घाटी मंदिर, यहां होती है नाग देवता की पूजा

हिन्दू धर्म में सर्पों की पूजा का विशेष महत्व है। नाग पंचमी के अवसर पर देशभर के मंदिरों में नाग देवता की पूजा की जाती है। बेंग्लुरू शहर से 60 किमी की दूरी पर डोड्डाबल्लापुरा तालुका के पास नाग देवता का विशेष मंदिर है, जिसे घाटी सुब्रमण्या मंदिर के नाम से जाना जाता है। धर्मग्रंथों के अनुसार भगवान कार्तिकेय सभी नागों के स्वामी माने गए हैं। दक्षिण भारत में भगवान कार्तिकेय को सुब्रमण्या नाम से भी जाना जाता है। सुब्रमण्या घाटी मंदिर में भगवान सुब्रमण्या की सात मुख वाले सर्प के रूप में पूजा होती है। इस मंदिर में दोष निवारण पूजा जैसे सर्प दोष और नाग प्रतिष्ठापन आदि भी किया जाता है।
भगवान नरसिम्हा हुए थे प्रकट
पौराणिक कथाओं के अनुसार इस स्थान पर भगवान सुब्रमण्या ने सर्प के रूप में तपस्या की थी। इस दौरान उन्हें एक नाग परिवार के बारे में पता चला जिसे भगवान विष्णु का वाहन गरुड़ परेशान कर रहा था। इसलिए भगवान सुब्रमण्या ने भगवान विष्णु का ही अवतार माने जानेवाले भगवान नरसिम्हा की तपस्या की और उनसेप्रार्थना करी कि वह गरुड़ को ऐसा करने से रोक लें। अंतत: यहां पर भगवान विष्णु अपने नरसिम्हा रूप में प्रकट हुए थे और भगवान सुब्रमण्या की बात मान ली थी। यही वजह है कि इस स्थान पर भगवान सुब्रमण्या और नरसिम्हा दोनों की पूजा की जाती है।
सात मुख वाली मूर्ति है स्थापित
मंदिर के मुख्य परिसर में ही भगवान नरसिम्हा और भगवान सुब्रमण्या की सात मुख वाली मूर्ति स्थापित है। यहां पर भगवान कार्तिकेय पूर्व की ओर व भगवान नरसिम्हा ने पश्चिम की ओर मुख किया है। इसलिए परिसर के ऊपर एक दर्पण लगाया गया है जिसमें भक्त दोनों देवताओं के एकसाथ दर्शन कर सकतेहैं। ऐसा माना जाता है कि यह मूर्ति स्वयंभू है और इसी स्थान प्रकट हुई थी।
श्रद्धालु स्थापित करते हैं सर्प
मान्यता है कि इस मंदिर में यदि निसंतान दंपति नाग देवता की मूर्ति स्थापित करतेहैं तो उन्हें संतान की प्राप्ति होती है। इसके लिए मंदिर में नाग प्रतिष्ठापन के लिए जगह तय है। इस जगह श्रद्धालुओं द्वारा स्थापित सर्पों की अनेक मूर्तियां रखी हुई हैं। मंदिर में स्थित सर्प की मूर्ति पर श्रद्धालु दूध अर्पित करते हैं। मान्यता है कि यह मंदिर 600 वर्ष से ज्यादा पुराना है। वास्तविक मंदिर को संदूर के शासक घोरपड़े ने बनवाया था। कहा जाता है कि बाद में इस मंदिर को अन्य राजाओं द्वारा विकसित किया गया। ये तीर्थस्थल द्रविड़ शैली में बना है। इस मंदिर में नाग पंचमी और नरसिम्हा जयंती का त्योहार विशेष उल्लास के साथ मनाया जाता है। इसके साथ ही यहां पर वार्षिक उत्सव के रूप में पुष्य शुद्ध षष्ठी भी मनाई जाती है जिस पर मंदिर परिसर में मेला भी लगता है।

(साभार – दैनिक भास्कर)

दिव्यांग बेटे को ओवरसीज स्कॉलरशिप दिलाने के लिए 11 महीने लड़ी माँ

भोपाल : कोलार की सांईनाथ कॉलोनी में रहने वाले हर्ष वजीरानी भारत सरकार की ओवरसीज स्कॉलरशिप के लिए चयनित हुए हैं। वे मध्यप्रदेश में दिव्यांग श्रेणी के इकलौते व्यक्ति हैं। हर्ष कहते हैं कि चयन जरूर हो गया, लेकिन डेढ़ करोड़ रुपये की स्कॉलरशिप के लिए इतने ही रुपयों की साल्वेंसी माँगी गयी । सारे नाते-रिश्तेदारों ने हमसे किनारा कर लिया था। हमारे लिए डेढ़ करोड़ रुपए की साल्वेंसी जुटाना पहाड़ जैसा काम था। मां ने हार नहीं मानीं। केंद्रीय मंत्री थावरचंद गहलोत और विभाग के अफसरों से मिलीं। नियम बदला और तय हुआ कि 50 हजार रुपए की एफडी से काम चल जाएगा। हर्ष एयरो स्पेस इंजीनियरिंग के लिए ऑस्ट्रेलिया की सिडनी यूनिवर्सिटी जा रहा हैं। यूनिवर्सिटी ने मुझे दस लाख रुपये की अतिरिक्त स्कॉलरशिप दी है और शिक्षण के लिए भी मौका दिया है। मैं सेटेलाइट बस डिजाइन पर काम करना चाहता हूं। माँ दीपिका की जिद थी, हर हाल में हर्ष का सपना पूरा हो। वह बताती हैं, बड़े बेटे को ब्रेन ट्यूमर हो गया था। अपने गहने बेचकर उसका इलाज हिंदुजा में कराया, लेकिन वह बच नहीं सका। पति और बहू तो पहले ही चल बसे थे। बस छोटा बेटा हर्ष ही है अब मेरे जीने की वजह। हर्ष बचपन से ही आर्थो और न्यूरो की बीमारी से परेशान है। उसके 5 बड़े ऑपरेशन कराए। ओवरसीज स्कॉलरशिप के लिए चयनित तो हो गया, लेकिन डेढ़ करोड़ की साल्वेंसी जुटाना संभव नहीं था। डॉ. प्रकाश वर्मा और एचवी जोशी ने इसमें मदद भी की। फिर, मैंने दिल्ली पहुंचकर मंत्री थावरचंद गेहलोत के दफ्तर में बात की। धीरे-धीरे रास्ता निकलता गया । भोपाल आई तो दिग्विजय सिंह, नरेश ज्ञानचंदानी ने गेहलोत जी से समन्वय किया। साल्वेंसी को एसडीएम और तहसीलदार से अटेस्टेट कराने में मुश्किलें भी हुईं। मैं बीते 11 महीने से हर दिन इस सिलसिले में किसी न किसी से मिलती रही हूँ। बेटा हर्ष हमेशा दूसरों के लिए सोचता है। दिल्ली में रहकर उसने नौकरी से जो पैसे बचाए थे, उसे नारायण सेवा संस्थान और सैनिक कल्याण कोष में दान कर दिया था। हर्ष कहते हैं कि मैं 2010 में ट्रिपल आईटी ग्वालियर से पासआउट हूँ। 2013 में कॉमनवेल्थ स्कॉलरशिप के लिए चयनित हुआ था, लेकिन उस वक्त दुर्भाग्य ही हावी रहा। पिताजी नरेंद्र वजीरानी मेरे कॅरियर की चिंता में बीमार हुए और चल बसे। फिर भाई-भाभी भी नहीं रहे। मैं सिलेक्ट हो गया हूँ लेकिन मेरी चिंता मां के लिए है। मैं आस्ट्रेलिया चला जाऊंगा तो मां अकेले कैसे रहेगी?

कृत्रिम खेत में लगाई बाजरे की बालियां, ताकि पक्षी भूखे न रहें

जूनागढ़ : तस्वीर गुजरात के जूनागढ़ की है। यहां एक किसान ने कृत्रिम खेत में बाजरे की बालियां लगा दी हैं। ताकि बारिश के कारण पक्षी भूखे न रहें। ऐसे में रोजाना 2000 से ज्यादा तोते और अन्य पक्षी दाना चुगने के लिए खेत में पहुंच रहे हैं। केशोद इलाके का यह खेत धनसुखभाई डोबरिया का है। उन्होंने बताया कि बारिश में पक्षियों को खाने की समस्या रहती है। इसलिए यह खेत बनाया है। इसका नाम ‘अन्न क्षेत्र’ रखा है।