Thursday, July 2, 2026
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भवानीपुर कॉलेज में सड़क सुरक्षा अभियान 

कोलकाता : भवानीपुर एडुकेशन सोसायटी कॉलेज और कोलकाता पुलिस एचआर ग्रुप के सहयोग से कॉलेज के सभागार में हाल ही में सड़क सुरक्षा सेमिनार का आयोजन किया गया। एनजीओ ट्रैक्स से जुड़े ईरशाद अलि ने विद्यार्थियों को दुर्घटनाओं से बचने के लिए विभिन्न पक्षों को रखा। 150 से अधिक विद्यार्थियों ने सड़क सुरक्षा कार्यक्रम में हिस्सा लिया। विद्यार्थियों ने रोड पर कोलकाता पुलिस के विभिन्न नियमों को जाना। बाइक चलाने वालों के लिए हेलमेट पहनना अनिवार्य है और पीछे बैठने वाले सवार को भी हेलमेट पहनना जरूरी है। सड़क पर हर मोड़ पर ट्रेफिक पुलिस सभी बाइक चलाने वालों की जाँच-पड़ताल करती है।


भवानीपुर एडुकेशन सोसायटी कॉलेज में 100 से अधिक हेलमेट वितरण किए गए। प्रो दिलीप शाह ने वर्तमान समय में बाइक एक्सीडेंट बढ़ने के कारणों पर प्रकाश डाला। सिग्नल तोडना, लाइसेंस न दिखाना, शराब पीकर बाइक चलाना, रोड नियमों का उल्लंघन करना और लापरवाही से चलाना, बाइक चलाते समय मोबाइल का प्रयोग करना, गाने सुनना आदि विभिन्न नियमों को नहीं मानने से एक्सीडेंट होते हैं। दुर्घटनाएं न हो इसके लिए कॉलेज ने निशुल्क सौ से अधिक हेलमेट वितरित करके युवा पीढ़ी के छात्र और छात्राओं को सावधान रहने के लिए निर्देश दिए। एनसीसी के प्रमुख केडेट आदित्यराज ने कार्यक्रम का संयोजन किया और जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने।

विद्यालय की तत्परता से माता – पिता तक पहुँचा किशोर

कोलकाता : शिक्षण संस्थान में सिर्फ शिक्षा ही प्रदान नहीं की जाती बल्कि उनकी सजगता से कई सामाजिक काम भी हो जाया करते हैं। महानगर के कैलाश विद्यामंदिर नामक शिक्षण संस्थान की तत्परता ने 12 साल के किशोर को उसके माता – पिता से मिलवा दिया। विद्यालय के प्रधानाध्यापक विश्वजीत मित्र से प्राप्त जानकारी के अनुसार न्यू अलीपुर रेलवे स्टेशन पर एक 12 साल का किशोर असहाय अवस्था में पाया गया। इसे देखकर कैलाश विद्यामंदिर के आवासीय विभाग के कर्मी उसे अपने साथ ले आए। किशोर का नाम शकीर मण्डल है और पिता का नाम लियाकत मण्डल है। वह दक्षिण 24 परगना के दक्षिण दाना ग्राम का निवासी है और 2 सितम्बर की रात से वह गुमशुदा था। कैलाश विद्यामंदिर के प्रधानाध्यापक विश्वजीत मित्र और आवासीय विभाग के कर्मियों ने चेतला थाना तथा बारुईपुर थाने के सहयोग से किशोर को उसके अभिभावक तक पहुँचा दिया।

महानगर में अब उपलब्ध हैं ‘द पिंक लेन’ ब्रांड के चाँदी के जेवर

कोलकाता : शुद्ध चाँदी के जेवरों के निर्माण के लिए प्रसिद्ध ‘द पिंक लेन’ ब्रांड के आभूषण अब कोलकाता में भी उपलब्ध हो गये हैं। ब्रांड ने अपना पहला स्टोर सिटी सेन्टर 1 मॉल में खोला है। इस ब्रान्ड की खासियत कस्टमाइज्ड चार्म ब्रेसलेट के साथ ही बारीक व खूबसूरत काम वाले चाँदी के जेवर हैं। इस स्टोर का उद्घाटन सांसद व अभिनेत्री नुसरत जहाँ ने किया।

नुसरत जहाँ ने किया उद्घाटन

जेवरों के इस सँग्रह यानी कलेक्शन में अँगूठी, इयरिंग्स, ब्रेसलेट, चार्म ब्रेसलेट, चेन, एंकलेट के अतिरिक्त किड्स कलेक्शन तथा बटरफ्लाई कलेक्शन भी हैं। द पिंक लेन स्टोर में खासतौर पर असली चाँदी से बने चार्म ब्रेसलेट्स शामिल हैं। इस मौके पर नुसरत जहाँ ने कहा कि दुर्गा पूजा, दिवाली जैसे त्योहारों और शादियों के सीजन में लोगों को चाँदी के सामान और उपहार देने के लिए चयन के लिहाज से स्टोर खुलने का समय अच्छा है। द पिंक लेन की प्रबन्ध निदेशक उपासना सचदेव भी इस मौके पर मौजूद थीं।

‘खुद को विशेषज्ञ के रूप में स्थापित करें हिन्दी के विद्यार्थी’

◊ श्री शिक्षायतन कॉलेज में मनाया गया हिन्दी दिवस समारोह

कोलकाता : वरिष्ठ साहित्यकार मृत्युन्जय का मानना है कि आज हिन्दी को विशेषज्ञों की आवश्यकता है। श्री शिक्षायतन कॉलेज द्वारा आयोजित हिन्दी दिवस समारोह में वक्ता के रूप में उपस्थित मृत्युन्जय ने ‘भाषा का व्यवहार’ विषय पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि हिन्दी साहित्य के विद्यार्थियों को अपनी पर्यवेक्षण शक्ति मजबूत करनी चाहिए और खुद विशेषज्ञ के रूप में तैयार करना चाहिए। उनकी हर पँक्ति में उनका अनुभव बोलना चाहिए। इससे हिन्दी के क्षेत्र में एक बड़े अभाव की पूर्ति हो सकेगी। इस अवसर महाविद्यालय की ओर से रचनात्मक लेखन तथा आशु अभिनय प्रतियोगिता भी आयोजित की गयी। स्वागत भाषण श्री शिक्षायतन कॉलेज की प्राचार्या डॉ. अदिति दे ने किया। कार्यक्रम का उद्घाटन सचिव प्रदीप कुमार शर्मा ने किया। विषय प्रवर्तन हिन्दी विभागाध्यक्ष रचना पांडेय ने किया। प्रथम सत्र का संचालन डॉ. प्रीति सिंघी ने किया जबकि दूसरे सत्र का संचालन प्रो. सिन्धु मेहता ने किया। धन्यवाद ज्ञापन प्रो. अल्पना नायक ने किया। रचनात्मक लेखन के निर्णायक डॉ. अभिलाष कुमार गोंड थे जबकि आशु अभिनय के निर्णायक द्वय मृत्युन्जय तथा अनीता राय रहीं। रचनात्मक लेखन में जोगेश चन्द्र चौधरी कॉलेज की नीतू साव को प्रथम, बेथुन कॉलेज की ज्योति झा को द्वितीय और जयपुरिया कॉलेज की अनन्या पहाड़ी को तृतीय पुरस्कार मिला। आशु अभिनय में लेडी ब्रेबोर्न दल को प्रथम, अभिनय में बेथुन कॉलेज की वैदेही राय को प्रथम और श्रीशिक्षायतन कॉलेज की उर्वी जायसवाल को द्वितीय पुरस्कार मिला।

जीडीपी वृद्धि दर में गिरावट निवेश, माँग में उल्लेखनीय कमी के संकेतः फिक्की

नयी दिल्ली : उद्योग मंडल फिक्की ने शनिवार को कहा कि अप्रैल-जून तिमाही में देश की आर्थिक वृद्धि दर के लुढ़ककर 6 साल से अधिक समय के निचले स्तर पाँच प्रतिशत पर आ जाना निवेश एवं उपभोक्ता मांग में ‘उल्लेखनीय कमी’ को दिखाता है। जीडीपी वृद्धि की सुस्त रफ्तार पर ‘गम्भीर’ चिंता जाहिर करते हुए फिक्की के अध्यक्ष संदीप सोमानी ने कहा कि ‘जीडीपी वृद्धि दर के हालिया आँकड़े उम्मीद से कमतर हैं और उपभोग एवं निवेश माँग में काफी अधिक कमी को दिखाते हैं।’ फिक्की की ओर से जारी एक विज्ञप्ति के मुताबिक सोमानी ने उम्मीद जाहिर की है कि देश की अर्थव्यवस्था को सुस्ती के दौर से निकालने एवं उसे बेहतर स्थिति में ले जाने के लिए सरकार और केंद्रीय बैंक की ओर से उठाये जा रहे सिलसिलेवार फैसले कारगर साबित होंगे।सोमानी ने कहा, ‘बड़े स्तर पर बैंकों के विलय की योजना, एफडीआई नियमों को उदार बनाये जाने एवं प्रोत्साहन पैकेज जैसे फैसले काफी व्यापक हैं और अर्थव्यवस्था की मुख्य समस्याओं के निराकरण से जुड़े हैं।’ पीएचडी चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने कहा कि सरकार और आरबीआई की ओर से हाल में किये गए आर्थिक सुधारों से देश में मजबूत एवं लचीला आर्थिक माहौल बनेगा एवं आने वाली तिमाहियों में जीडीपी वृद्धि दर को मजबूती मिलेगी। पीएचडीसीसीआई के अध्यक्ष राजीव तलवार ने कहा, ‘सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के पुनर्पूंजीकरण, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों पर बढ़ाये गए अधिभार को वापस लेने, एमएसएमई को लंबित जीएसटी रिफंड के भुगतान जैसे बड़े आर्थिक सुधार प्रेरक हैं और इनसे देश में मजबूत, स्थिर एवं समावेशी वृद्धि का माहौल तैयार होगा।’ आवास विकास क्षेत्र की कंपनियों के शीर्ष संगठन नेशनल रीयल एस्टेट डेवलपमेंट कौंसिल (नारेडको) के अध्यक्ष डा निरंजन हीरानंदानी ने कहा कि बैंकों के विलय और सुदृढीकरण का यह निर्णय इस बात का सबूत है कि सरकार अर्थव्यवस्था में उत्साह जगाने को प्रतिबद्ध है। उन्होंने इस बात का उल्लेख किया कि ‘वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के इस कथन से उद्योग जगत का भरोसा बढ़ा है कि बैंकों को दी जा रही 70,000 करोड़ रुपये की पूंजी केवल कर्ज सुविधाएं बढ़ाने के लिए इस्तेमाल की जाएगी।’ उन्होंने कहा कि इससे रीयल एस्टेट सहित अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों को बल मिलेगा। वाहन विनिर्माताओं के मंच ‘सियाम’ के अध्यक्ष राजन वढेरा ने वित्त मंत्री सीतारमण द्वारा शुक्रवार को घोषित नए उपायों पर कहा कि ‘किसी भी अर्थव्यवस्था की वृद्धि के लिए एक मजबूत बैंकिंग क्षेत्र की जरूरत होती है। सरकारी क्षेत्र के बैंकों का विलय , वृद्धि में सहायता के लिए उनको नयी पूंजी देना और संचालन में सुधार , ये सभी निर्णय बैंकिंग क्षेत्र की मजबूती के लिए प्रगतिशील निर्णय हैं। इनसे भारतीय अर्थव्यवस्था को सही प्रोत्साहन मिलेगा।’ वढेरा ने कहा कि इससे अर्थव्यवस्था और उपभोक्ताओं का मनोबल मजबूत होगा और इसके परिणामस्वरूप वाहन बाजार को भी लाभ होगा।

लेफ्टिनेंट जनरल मनोज मुकुंद नारावने आर्मी स्टाफ के वाइस चीफ

नयी दिल्ली : लेफ्टिनेंट जनरल मनोज मुकुंद नारावने ने आर्मी स्टाफ के वाइस चीफ का पदभार ग्रहण किया। लेफ्टिनेंट जनरल नारावने भारतीय सेना की ईस्टर्न कमांड का नेतृत्व कर रहे थे। उन्होंने लेफ्टिनेंट जनरल देवराज अंबु का स्थान लिया। अंबु 31 अगस्त को रिटायर हो गए थे। सेना ने कहा कि लेफ्टिनेंट जनरल नारावने पूर्वोत्तर और जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियानों में सक्रिय रहे थे। वे श्रीलंका में ऑपरेशन पवन के दौरान भारतीय शांति सेना का भी हिस्सा रहे थे। लेफ्टिनेंट जनरल नारावने को जम्मू-कश्मीर में उल्लेखनीय कार्य के लिए ‘सेना मेडल’ से सम्मानित किया जा चुका है। उन्हें नगालैंड में असम राइफल्स में इंस्पेक्टर जनरल रहने के दौरान ‘विशिष्ट सेवा मेडल’ से सम्मानित किया जा चुका है। नारावाने ने कहा था- चीनी सेना 100 बार ग्रे जोन में गई तो हमने भी 200 बार ऐसा किया। इससे पहले, पिछले मंगलवार को लेफ्टिनेंट जनरल एमएम नारावने ने एलएसी पर चीनी सैनिकों की घुसपैठ के सवाल पर कहा था कि चीन ने डोकलाम को क्षेत्रीय दबंगई के तौर पर इस्तेमाल किया था। अगर वे 100 बार विवादित क्षेत्र (ग्रे जोन) में गए तो हमने भी 200 बार ऐसा किया। डोकलाम में भारतीय सैनिक चीन के सामने डटे रहे। इससे वक्त साफ संकेत मिला है कि भारतीय सेना पहले से मजबूत है।

5 राज्यों को मिले नये राज्यपाल, केरल के राज्यपाल बने आरिफ मोहम्मद खान

नयी दिल्ली : राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने रविवार को पांच राज्यों में नए राज्यपाल नियुक्त किए। शाहबानो के मुद्दे पर राजीव गाँधी कैबिनेट छोड़ने वाले आरिफ मोहम्मद खान को केरल का गवर्नर बनाया गया है। तमिलनाडु में भाजपा की प्रदेश अध्यक्ष डॉ. तमिलिसाई सुंदरराजन (58) को तेलंगाना की जिम्मेदारी दी गई, वे सबसे युवा मौजूदा राज्यपाल होंगी। इसके अलावा कलराज मिश्र को राजस्थान, भगत सिंह कोश्यारी को महाराष्ट्र, बंडारू दत्तात्रेय को हिमाचल प्रदेश भेजा गया है। कांग्रेस में रहे आरिफ मोहम्मद खान लंबे समय से सक्रिय राजनीति से दूर थे। उन्होंने वंदे मातरम् का उर्दू में अनुवाद भी किया था। केंद्र सरकार के तीन तलाक खत्म करने और अनुच्छेद 370 हटाने पर मोदी सरकार के फैसलों की तारीफ की थी। वे 1984 की राजीव गांधी सरकार में केंद्रीय मंत्री भी रहे। तब उन्होंने शाहबानो केस में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को संसद में कानून बनाकर पलटे जाने के विरोध में मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था। आरिफ मोहम्मद ने कहा, ‘‘मेरे लिए यह सेवा करने का एक मौका है। साथ ही देश के एक ऐसे हिस्से को जानने का शानदार अवसर है, जो देश की सीमा से लगा है। विविधताओं वाले इस देश में मेरा जन्म होना सौभाग्य है। इस देश को देवभूमि कहा जाता है।’’ वहीं, बंडारू दत्तात्रेय ने हिमाचल प्रदेश का राज्यपाल बनाए जाने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को धन्यवाद दिया। दत्तात्रेय ने कहा कि उन्होंने राज्यपाल के रूप में मुझे नई जिम्मेदारी दी है।
कल्याण सिंह की जगह कलराज मिश्र को नया गवर्नर नियुक्त किया गया है। केरल में गवर्नर पूर्व चीफ जस्टिस पी. सदाशिवम थे, जिनका हाल ही में कार्यकाल खत्म हुआ है। 17 जून 1942 को जन्मे भगत सिंह कोश्यारी उत्तराखंड में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं। वे 2001 से 2002 तक राज्य के मुख्यमंत्री भी रहे। 2002 से 2007 तक विपक्ष के नेता और 2008 से 2014 तक राज्यसभा के सदस्य रहे। कोश्यारी बतौर शिक्षक और पत्रकार भी काम कर चुके हैं। आपातकाल के दौरान उन्हें 1977 में जेल भी जाना पड़ा था।

11 महीने की बच्ची के फ्रैक्चर के इलाज के लिए उसकी गुड़िया के पैरों पर भी चढ़ाना पड़ा प्लास्टर

नयी दिल्ली : लोकनायक अस्पताल में 11 महीने की बच्ची के दोनों पैरों के फ्रैक्चर का इलाज करने के लिए डॉक्टरों को उसकी डॉल (गुड़िया) को भी भर्ती करना पड़ा। डॉक्टरों ने बच्ची की तरह गुड़िया के पैरों पर भी प्लास्टर चढ़ाया और ठीक उसे भी वैसे रखा है, जैसे बच्ची को रखा गया है। दरअसल, 11 महीने की जिक्रा मलिक दिल्ली गेट स्थित अपने घर पर 17 अगस्त को बिस्तर से गिर गयी थी। इससे उसके दोनों पैरों में फ्रैक्चर आ गया। माता-पिता जिक्रा को लेकर अस्पताल पहुँचे। डॉक्टरों ने बताया कि बच्ची की हड्डियों को जोड़ने के लिए दो हफ्ते तक पैरों को रॉड (गैलन ट्रैक्शन- दो साल तक के बच्चों की हडि्डयों को जोड़ने वाली मेथड) से जोड़कर ऊपर की ओर लटकाकर रखना होगा। माता-पिता ने इलाज के हामी भर दी। लेकिन जिक्रा उनसे अस्तपाल से बाहर जाने की जिद करने लगी और रोने लगी। ऐसे में इलाज करना मुश्किल हो रहा था। डॉक्टरों ने जिक्रा के माता-पिता से उसका पसंदीदा खिलौना लाने को कहा। इस पर बच्ची की माँ फरीन ने डॉक्टरों को बताया कि वह अपनी गुड़िया से दिन भर खेलती है।
गुड़िया के पैरों को लटकाकर जिक्रा का लगाया प्लास्टर
डॉक्टरों ने तय किया कि बच्ची को प्लास्टर लगाने से पहले उसकी गुड़िया का इलाज करना होगा। इससे उसके दिमाग का भय निकल जाएगा। ऐसा ही हुआ। डॉक्टरों से घर से जिक्रा की गुड़िया मँगाई और जिक्रा के बेड पर ही गैलन ट्रैक्शन की पॉजीशन में उसके पैरों को बांध दिया। गुड़िया को इलाज की स्थिति में देखने के बाद जिक्रा ने भी पैरों प्लास्टर चढ़वा लिया। अब स्थिति यह है कि डॉक्टरों को जब जिक्रा को दवाई देनी होती है, तो पहले परी को दवा देने का दिखावा करना होता है। इसके बाद जिक्रा दवा लेती है। लगभग दो सप्ताह होने के बाद अब बच्ची काफी ठीक हो रही है। बच्ची के साथ गुड़िया का इलाज करने के चलते जिक्रा पूरे अस्पताल में गुड़िया वाली बच्ची के नाम से चर्चित हो गयी है। जिक्रा की माँ फरीन ने मीडिया को बताया, जिक्रा हमेशा इधर-उधर चलती रहती थी। उसे पांच मिनट भी एक स्थान पर बिठाना मुश्किल था। अस्पताल के पहले दिन वह अस्पताल में लेटने को भी तैयार नही थी। लोकनायक अस्पताल में हड्‌डी रोग विशेषज्ञ प्रोफेसर डॉ अजय गुप्ता ने बताया, ‘‘11 महीने की बच्ची के पैरों में फ्रैक्चर था, वह इलाज कराने से इनकार कर रही थी। इसलिए उसकी माँ ने आइडिया दिया कि बच्ची के इलाज से पहले उसकी गुडिया का इलाज करने का दिखावा करना होगा। क्योंकि बच्ची सबसे ज्यादा अपनी गुड़िया परी के साथ खेलती है। यह आइडिया कारगर रहा और अब बच्ची आराम से इलाज करा रही है।’’

शिक्षक होने का मतलब पाठ्यक्रम समाप्त करना भर नहीं है

श्री शिक्षायतन कॉलेज से कलकत्ता विश्‍वविद्यालय के हिन्दी विभाग की प्रोफेसर और रजिस्ट्रार और उसके बाद सम्प्रति वेस्ट बंगाल यूनिवर्सिटी ऑफ टीचर्स ट्रेनिंग, एजुकेशन प्लानिंग एंड एडमिनिस्ट्रेशन की उपकुलपति प्रोफेसर सोमा बंद्योपाध्याय का सफर बहुत ही प्रेरक और उम्मीद जगाने वाला रहा है। हाल ही में टोरंटो, कनाडा से अतिशीघ्र प्रकाशित होने वाली पुस्तक भारती संस्थान की त्रैमासिक अन्तराष्ट्रीय शोध-पत्रिका ‘रिसर्च-ई-जर्नल’ एवं साहित्यिक पत्रिका ‘साहित्य सौरभ’ के सम्पादक मंडल में स्थान प्रदान किया गया। कवियत्री, कथाकार अनुवादक व सम्प्रति वेस्ट बंगाल यूनिवर्सिटी ऑफ टीचर्स ट्रेनिंग, एजुकेशन प्लानिंग एंड एडमिनिस्ट्रेशन की कुलपति प्रोफेसर सोमा बंद्योपाध्याय से अपराजिता ने खास बातचीत की, पेश हैं प्रमुख अंश –
प्र. स्त्री लेखन के बारे में क्या कहना चाहेंगी?
कोई भी लेखन, जिसका समाज पर एक सकारात्मक प्रभाव पड़े, अच्छा है, यही बात स्त्री लेखन पर भी लागू होती है। कई बार मैंने देखा है कि लोकप्रियता के लिए नकारात्मकता को विषय बनाया जाता है। नकारात्मकता से मुझे भी परहेज है। मेरा मानना है कि अगर आप गम्भीर समस्याओं को उठाते भी हैं तो उसे एक सकारात्मक दिशा देकर छोड़ें, स्त्री लेखिकाओं के अनुभव को लेकर भी यही कहना चाहूँगी।
प्र. आप एक अनुवादक भी हैं। आज के साहित्य में अनुवाद का महत्व क्या है?
मैं साहित्यिक अनुवाद की बात करूँ तो अपने निजी अनुभव के आधार पर कहूँ तो यह एक सामान्य धारणा है कि अनुवाद का मतलब कृति को एक भाषा से दूसरी भाषा में पढ़ना भर है। मेरी नजर में अनुवाद इससे कहीं ज्यादा है। साहित्यिक अनुवाद से दूसरी भाषाओं के साहित्य के साथ उनकी संस्कृति, साहित्य, परिवेश, भूगोल, इतिहास और नृतत्व की जानकारी मिलती है, उनका अध्ययन होता है और यह आपसी दूरी तय करने में भी सहायक है। भारत जैसे बहुभाषी देश में एकता, अखंडता को बनाए रखने वाला अस्त्र है अनुवाद। अनुवाद दो प्रदेशों के बीच की हर सीमा और अविश्‍वास को पार कर सकता है।
प्र. प्रशासनिक दायित्वों के बीच साहित्य कर्म कैसे निभाती हैं?
सारी चीजें इसलिए हो जाती हैं क्योंकि मेरा सोच सकारात्मक है और ऐसे ही सकारात्क लोग मुझे मिले हैं। परिवार से लेकर सहकर्मियों और शुभचिन्तकों का सहयोग हमेशा से मिलता रहा है तो सब हो जाता है।
प्र. शिक्षिका होने के नाते शिक्षा और छात्रों को लेकर क्या कहेंगी?
शिक्षक होने का मतलब पाठ्यक्रम समाप्त करना भर नहीं है बल्कि विद्यार्थियों को प्रेरित करना है, उनकी प्रतिभा को सामने लाना है। सार्थक शिक्षक वही है जो विद्यार्थियों को प्रेरित करे और उनकी प्रतिभा को सामने लाये।
प्र. पाठकों को क्या सन्देश देना चाहेंगी?
सकारात्मक सोच रखें, सब सकारात्मक होगा।

शिक्षा और भाषा को पेशेवर धार देनी होगी, यह बहुत जरूरी है

जीवन की अलग – अलग परिभाषाएँ हैं और हर परिभाषा का अपना सत्य है..मगर अन्तत: हर सत्य एक ही निष्कर्ष पर पहुँचता है..ज्ञान और खुशियों को जहाँ तक बाँटा जा सके, बाँटना चाहिए। ज्ञान तो शिक्षक बाँटते हैं मगर खुशियाँ बाँटना तो हमारे हाथ में है। आज शिक्षा के व्यवसायीकरण पर आपत्ति बहुत की जाती है मगर देखा जाए तो एक विषमता हमारे चारों ओर भरी पड़ी है। जहाँ तक हमारा प्रश्न है, हमारा मानना है कि शिक्षा के व्यवसायीकरण में बुराई नहीं बल्कि बुराई उसे धंधा बना देने में है। शिक्षक का महत्व और उसकी गरिमा का होना बहुत आवश्यक है मगर सोचने वाली बात यह है कि जब पेट भूखा होगा और घर में तंगी रहेगी तो शिक्षक भी मन से कैसे पढ़ाएगा। हम यही बात हिन्दी साहित्य के लिए भी कह सकते हैं और हमारे पूरे समाज में ठहराव का जो दौर है, जो काई जमी पड़ी है..उसका कोई कारण है तो वह यही है कि हमने साहित्य और शिक्षा के बाजारीकरण पर विरोध तो जताया पर उसे संरचनागत दृष्टि से सक्षम नहीं बना सके। आप भले ही बाजार के नाम से चिढ़ते हों मगर बाजार के बगैर दोनों का टिकना नामुमकिन है क्योंकि किताबें लिखने के लिए पढ़ाने के लिए श्रम की जरूरत पड़ती है, शोध की जरूरत पड़ती है. यह एक मेहनत वाला काम है। शिक्षक को तो फिर भी वेतन मिलता है, लेखक को वह भी नहीं मिलता। साहित्यिक सेवाओं के बाजार पर हमने कभी ध्यान ही नहीं दिया क्योंकि रुपये हम खर्च नहीं करना चाहते…नतीजा यह है कि गुणवत्ता सिरे से गायब हो रही है और लगातार मंच, हिन्दी और साहित्य, तीनों की गरिमा गिरती जा रही है। आपको सचमुच इन तीनों चीजों से लगाव है तो आपको मुफ्तखोरी छोड़नी होगी..खर्च कीजिए…पेशेवर बनिए…वैसे ही जैसे अँग्रेजी है, बांग्ला व अन्य भाषाएँ हैं…। हिन्दी व भारतीय भाषाओं को पेशेवर और धारधार युवा अन्दाज देने का नाम ही है शुभ सृजन..जिसकी विस्तृत जानकारी आपको वेबपत्रिका में ही मिल जाएगी..बहरहाल गणेश चतुर्थी, शिक्षक दिवस और हिन्दी दिवस की शुभकामनाएँ…रचते रहिए..।