कोलकाता : महाराजा मनीन्द्रचन्द्र कॉलेज के हिन्दी विभाग द्वारा हाल ही में हिन्दी दिवस समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर नवजागरण विषय पर एक संगोष्ठी आयोजित की गयी जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व सांसद तथा कलकत्ता विश्वविद्यालय की हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. चन्द्रकला पाण्डेय उपस्थित थीं। संगोष्ठी में कलकत्ता विश्वविद्यालय के वनस्पति विभाग के प्रोफेसर डॉ. शान्तनु पाल, रवीन्द्र भारती विश्वविद्यालय के बांग्ला विभाग के प्रोफेसर सुरंजन दे, बांग्ला विभाग की अध्यापिका डॉ दीपानिता भट्टाचार्य, खिदिरपुर कॉलेज के हिन्दी विभाग की अध्यापिका महमूदा ख़नम ने विचार रखे। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन से हुई। स्वागत भाषण कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ मंटूराम सामंत ने दिया। स्नातक के सभी छात्र-छात्राओं द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम व काव्य आवृत्ति की गयी साथ ही सुमिता चट्टोराज की किताब नवजागरण का लोकार्पण चन्द्रकला पांडेय ने किया। हिन्दी में अच्छे अंक लाने के लिए राजेश सिंह, मुस्कान,तुलसी,रानी को विभाग की ओर से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ सुमिता चट्टोराज ने किया। धन्यवाद विभाग के अतिथि प्रवक्ता धर्मेंद्र दास ने दिया। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में विभाग के सभी विधार्थीयों का अवदान रहा विशेषकर राजेश सिंह, मुस्कान शर्मा,निशा शाह,सूरज शर्मा।
कविता और कहानी का अभिनयात्मक पाठ में दिखी युवाओं की प्रतिभा
कोलकाता : लिटिल थेस्पियन एवं भारतीय भाषा परिषद के संयुक्त आयोजन में कहानी और कविता का अभिनयात्मक पाठ किया गया। इसमें ममता कालिया की कहानी ‘ बोलने वाली औरत ‘ कहानी की प्रस्तुति सुमित गोस्वामी, आर्यान्का पवार और जूही कुमारी करण ने दी I ममता कालिया की ‘ लड़के ‘ कहानी का अभिनयात्मक पाठ सुमित गोस्वामी, तन्मय सिंह, इम्तियाज़ आलम और अर्जुन बोस ने किया I कहानीकार उदय प्रकाश की कहानी “ डिबिया ” की प्रस्तुति प्रियंका पवार, नाज़ आलम और सदानन्द रजक ने दी I कहानी नेलकटर (कहानीकार – उदय प्रकाश) की प्रस्तुति राहुल कुमार भट्टाचार्य, अन्नपूर्णा वर्मा और अरशद सादिक ने दी I कविता पाठ में प्रताप सहगल की कविताएँ के साथ अंधेरे में घटना (इम्तियाज़ आलम), अंधेरे का तर्क (अन्नपूर्णा वर्मा), अंधेरे से लड़ाई (तन्मय सिंह), अंधेरे के सामने (आर्यान्का पवार), अंधेरे में सूत्रधार (अर्जुन बोस), अंधेरे का अर्थ (नाज़ आलम), अंधेरे में देखना (राहुल कुमार भट्टाचार्य) कुछ समझा आपने (सुमित गोस्वामी) सुनो अखबार (एक): सदानन्द रजक, सुनो अखबार (दो): प्रियंका पवार, सुनो अखबार (चार): अरशद सादिक, सुनो अखबार (पांच): जूही कुमारी करण ने पाठ किया I
भारतीय भाषा परिषद एवं लिटिल थेस्पियन द्वारा कहानी और कविता के अभिनयात्मक दक्षता का त्रैमासिक सर्टिफिकेट कोर्स संचालित किया जाता है I जिसकी कक्षा प्रति शनिवार लिटिल थेस्पियन की निर्देशक श्रीमती उमा झुनझुनवाला की निगरानी में होती है| गत 8 सितम्बर 2019 को सातवाँ सत्र के प्रशिक्षार्थियों द्वारा कहानी और कविता की अंतिम प्रस्तुति दी गयी। इस अवसर पर लिटिल थेस्पियन की सह संस्थापक व निदेशक उमा झुनझुनवाला ने कहा कि सिर्फ कविता-कहानी सिखाना मेरा मकसद नहीं है I कहीं कुछ इंसान हमारे बीच में बचा रहे वह आग जलाने के लिए मैं यह कर रही हूं I हमारे अंदर इंसान भी जीता है और इतिहास भी जीता है I इस प्रस्तुति के निर्णायक श्री दिनेश वडेरा रंगमंच निर्देशक और रावेल पुष्प (रंगमंच समीक्षक) थो
बोझ : साइबा पदम की शॉर्ट फिल्म
साइबा पद्म मूलत: पत्रकार हैं। एंकर हैं और साथ ही शॉर्ट फिल्में भी बनाती हैं। आप भी देखिए उनकी ताजा पंजाबी फिल्म बोझ..
भवानीपुर कॉलेज में ” खय्याम के बहाने” गीत ग़ज़ल और कविताओं की धूम
कोलकाता : भवानीपुर एडूकेशन सोसायटी कॉलेज की आधुनिक लाइब्रेरी में विद्यार्थियों ने खय्याम के बहाने गीत ग़ज़ल और कविताएं पढ़ी। 19 अगस्त 2019 को बॉलीवुड के मशहूर पद्मभूषण से नवाजे संगीत रचनाकार खय्याम की याद में उनके गीतों और गजलों को गाकर विद्यार्थियों ने श्रद्धांजलि अर्पित की।”कभी-कभी मेरे दिल में ख्याल आता है”, ” इन आंखों की मस्ती के मस्ताने हजारों हैं” , “ऐ दिले नादान” , “दिल चीज क्या है आप मेरी जान लिजिए” ,” मैं पल दो पल का शायर हूँ” ,” फिर छिड़ी रात फूलों की” , “मीठी मीठी प्यारी-प्यारी” , “जिंदगी जब भी तेरी बज्म में लाती हैं हमें ये जमीं चाँद सी बेहतर नज़र आती है हमें “जैसे प्रसिद्ध गीतों की प्रस्तुति विद्यार्थियों और शिक्षक – शिक्षिकाओं द्वारा की गई।
मोहम्मद ज़हुर खय्याम ने 250 से अधिक लोकप्रिय गीतों, गजलों और नग़मो की संगीत रचना की। चार दशकों से बॉलीवुड फिल्मों में म्युजिक कम्पोजर रहे खय्याम ने अपने कॅरियर की शुरुआत 1948 में हीर – रांझा फिल्म में शर्मा नाम से संगीत देकर किया। पत्नी जगजीत कौर भी गायिका हैं।1953 फुटपाथ फिल्म से खय्याम नाम से प्रसिद्ध हुए और फिर उमराव जान, थोड़ी सी बेवफाई, रजिया सुल्तान, नूरी, बाजार जैसी लोकप्रिय फिल्मों के संगीत को लोकप्रियता मिली। सर्वश्रेष्ठ संगीतकार, राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, फिल्म फेयर लाइफ एचीवमेंट पुरस्कार और 2011 में पद्म भूषण आदि अनेक पुरस्कारों से सम्मानित खय्याम जी ने अपने जीवन के चालीस दशकों से अधिक समय फिल्मों के संगीत रचना में दिए। भवानीपुर कॉलेज की लाइब्रेरी में सौरभ गोस्वामी ने “वो सुबह कभी तो आएगी” से कार्यक्रम की शुरुआत की। आकाश, आनंद सागर सोनी, मोहम्मद तारीक, अनिमेष, रितेश राय, एमा माइती रेना फरहीन चयनिका, पॉलोमी, मेधा दे, ऐशानी घोष दस्तिदार, चिराग, हृद्दीमन दास, शिनजिनी भादुड़ी, ताबीश और अंजलि दूबे ने खय्याम के बहाने कार्यक्रम में विभिन्न लोकप्रिय गीत, कविता और गजल गाए। डॉ रेखा नारिवाल, डॉ वसुंधरा मिश्र और सौरभ गोस्वामी ने खय्याम के गीत गाए। डीन प्रो. दिलीप शाह और प्रो. मीनाक्षी चतुर्वेदी, डॉ. वसुंधरा मिश्र ने इस कार्यक्रम की परिकल्पना की। संयोजन श्याम, सम्राट और अंजलि ने किया। कार्यक्रम में साठ से अधिक विद्यार्थियों की उपस्थिति रही।इस अवसर पर प्रो दिलीप शाह ने पुस्तकालय का अधिक उपयोग करने वाले विद्यार्थी को प्रमाणपत्र हौसला बढ़ाया। यह जानकारी दी डॉ. वसुंधरा मिश्र द्वारा प्रेषित प्रेस विज्ञप्ति से मिली।
बंगीय हिन्दी परिषद में भारतेन्दु जयन्ती और हिन्दी दिवस का आयोजन
कोलकाता : बंगीय हिंदी परिषद् ने नवजागरण दिवस के रूप में भारतेन्दु जयन्ती और हिन्दी दिवस का आयोजन किया ।गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए हिन्दी के सुप्रसिद्ध विद्वान डॉ0 प्रियंकर पालीवाल ने कहा कि भारतेंदु का विजन बहुत व्यापक था।वे बंगला नवजागरणकर्मियों से बहुत गहराई से जुड़े थे। मुख्य अतिथि डॉ0 राजीव कुमार रावत ने कहा कि हिन्दी को हमें अपने स्वाभिमान की भाषा बनाना होगा और हमें अपने बच्चों को उसपर गर्व करना सिखाना होगा।मुख्य वक्ता डॉ0 रंजीत सिन्हा ने कहा कि 35 वर्ष की अल्पायु में भारतेन्दु ने हिन्दी को तमाम आधुनिक गद्य विधाओं से सम्पन्न किया। बंगीय हिन्दी परिषद् के संयुक्त सचिव डॉ0 कुमार संकल्प ने कहा कि भारतेन्दु ने हिन्दी को हर तरह से न केवल समृद्ध किया बल्कि उसे भारतवासियों के स्वाभिमान से भी जोड़ने का प्रयास किया।आज के नौजवानों को उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए कि कैसे उन्होंने अल्पायु में देश और देशभाषा को संवारा। गौरतलब है कि भारतेन्दु जयन्ती को नवजागरण दिवस के रूप में मनाने की परम्परा बंगीय हिन्दी परिषद् ने 2016 में शुरू की थी जो देश में एक नई पहल है। गोष्ठी में कलकत्ते के मैथिलीशरण गुप्त कहे जाने वाले योगेंद्र शुक्ल ‘सुमन’, प्रो0 ललित झा ,जीवन सिंह, नंदलाल रोशनी, काली प्रसाद जायसवाल,गजेंद्र नाहटा,मो0 चांद, रामनारायण झा,सुदेष्णा चक्रबर्ती,प्रियंका यादव, काजल सिंह, रजनी गुप्ता, दिव्या प्रसाद,भानु पांडेय,विकास अत्रि,अनूप यादव,अनिल उपाध्याय, श्रीमोहन तिवारी, डॉ0 कमल कुमार आदि ने अपनी कविताओं का पाठ किया।कवि रमाकांत सिन्हा ने अपनी कविता से सभा का धन्यवाद ज्ञापन किया।
चार किलो का था दुनिया का पहला डिजिटल कैमरा
फोटो खींचना हर किसी को पसंद है। फटोग्राफी का शौक रखने वाले लोग महंगे से महंगा कैमरा खरीदते हैं। बात चाहे सालों पहले की हो या अब की। कैमरे के प्रति लोगों का क्रेज हमेशा से ही बढ़ा है। पहले जहां ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीरें खींचने वाले कैमरे आते थे, वहीं अब बाजार में रंग-बिरंगी तस्वीरें खींचने वाले डिजिटल कैमरे आते हैं। कैमरे की मदद से ही हमारे जीवन के खास पल फोटो के रूप में कैद हो जाते हैं। आइए जानते हैं दुनिया का पहला डिजिटल कैमरा कब आया था और उसकी क्या खासियत थी।
फोटोग्राफी की दुनिया में क्रांति
सालों पहले जहां कैमरे में रील डाली जाती थी, वहीं अब डिजिटल कैमरों ने फोटोग्राफी की दुनिया में क्रांति ला दी है। साल 1975 में ईस्टममैन कोडक के स्टीवन सैसन नाम के एक इंजीनियर ने दुनिया का सबसे पहला डिजिटल कैमरा बनाने का प्रयास किया था। स्टीवन सैसन के इस कैमरे को पहले डिजिटल स्टैन स्नैपर के रूप में पहचाना जाता था।
ये थी खासियत
इस कैमरे में फेयरचाइल्ड सेमीकंडक्टर द्वारा विकसित तत्कालीन टेक्नोलॉजी वाले CCD इमेज सेंसर का प्रयोग किया गया था।
कैमरे का वजन करीब चार किलोग्राम था।
इस कैमरे मे ब्लैक एंड व्हाइट फोटो खींची जाती थी।
कैमरा का रिजॉल्युशन 0.01 मेगा पिक्सेल था।
दिसंबर 1975 में पहली डिजिटल तस्वीर को रिकॉर्ड करने में इस कैमरा को 23 सेकंड का समय लगा था।
1991 में शुरू हुई थी बिक्री
साल 1991 में ईस्टमैन कोडक कंपनी ने डिजिटल कैमरों की बिक्री शुरू की, जिसके बाद एपल कंप्यूटर और ईस्टमैन कोडक ने पहला कंज्यूमर मॉडल पेश किया। यह साल 1994 में पेश किया गया था। दोनों कंपनियों ने मिलकर एक ऐसा सॉफ्टवेयर पेश किया था, जिसके माध्यम से डिजिटल कैमरे से खींची गई तस्वीर कंप्यूटर में ट्रांसफर की जाने लगी।
जापानी वैज्ञानिकों को मिली डायनोसॉर की नयी प्रजाति
मुख्य बातें : 7.2 करोड़ साल पुरानी हड्डियों का हुआ विश्लेषण
तोक्यो : जापान के वैज्ञानिकों ने डायनोसॉर की एक नई प्रजाति की पहचान कर ली है। वैज्ञानिकों को इस प्रजाति के डायनोसॉर का जापान में सबसे बड़ा (26 फीट लंबा) कंकाल भी मिला है। वैज्ञानिकों की टीम करीब 7.2 करोड़ साल पुरानी अस्थियों का विश्लेषण करने के बाद इस नतीजे पर पहुंची है कि यह कंकाल एक नई प्रजाति के हैं।
होक्कोाइदो यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने इस प्रजाति को हाड्रोसुआरिड डायनोसॉर नाम दिया है। यह शाकाहारी जीव पृथ्वी पर क्रिटेशस दौर के अंतिम सालों में धरती पर पाया जाता था। सबसे पहले इस जीव की पूंछ का एक छोटा सा हिस्सा जब उत्तरी जापान में 2013 में मिला तो बाद में खुदाई की गई। इस खुदाई में डायनोसॉर का पूरा कंकाल निकल कर बाहर आया। वैज्ञानिक मान रहे हैं कि यह डायनोसॉर नौ साल की उम्र का एक वयस्क था और उसका वजन 4 टन से लेकर 5.3 टन तक हो सकता है। डायनोसॉर का वजन इस बात पर निर्भर करेगा कि वह दो पैरों से चलता था या फिर चार पैरों पर। इस नई खोज का पूरा ब्यौरा ‘साइंटिफिक रिपोर्ट्स’ नामक जर्नल में प्रकाशित हुआ है।
समुद्र किनारे रहना पसंद किया होगा
वैज्ञानिकों की टीम के प्रमुख योसित्सुगु कोबायाशी ने बताया कि कभी इस प्रजाति की एक अलग दुनिया जापान और पूर्वी एशिया में मौजूद थी। डायनोसॉर की यह प्रजाति संभवत: तटवर्ती इलाकों में रहती थी जो उस वक्त इसके लिए एक दुर्लभ आवास था। इसके जीवाश्म से उस वक्त के वातावरण के बारे में भी अच्छी जानकारी मिल सकती है। इस खोज से यह भी पता लगता है कि समुद्र के आसपास डायनोसॉर ने आवास बनाना पसंद किया था।
अगर आप पहन रहे हैं जीन्स…
डेनिम यानी जीन्स पहनना सबको पसन्द है। आज हर दूसरा युवा जीन्स पहनना पसन्द करता है और अपने अन्दाज से पहनता भी है। सवाल यह है कि आज पर जीन्स पहनते हैं तो क्या वाकई गम्भीर होकर खरीददारी करते हैं या रखरखाव करते हैं। मामला पैसे का है और सही तरीके से अगर चुनाव किया जाये, पहनने में सावधानी रखी जाये तो जीन्स आपकी सबसे फेवरेट हो सकती है फिर भले ही आप विद्यार्थी हों या प्रोफेशनल। देखा जाता है कि पुरुष जींस पहनते समय कई गलतियां करते हैं, ऐसे में आपके लिए जानना जरुरी है कहीं आप भी तो ये गलतियां नहीं करते।
एंकल जींस या क्रॉप जीस की लंबाई इतनी होनी चाहिए कि ये ठीक एंकल यानी एड़ियों पर खत्म हो जाए। न इससे ऊपर और न ही इससे नीचे। लेकिन अक्सर लड़कों की एंकल जींस उनकी एंकल को कवर करके नीचे तक आ रही होती है और कभी-कभी एंकल से ऊपर होती है। ऐसा करने से बचें।
जींस के साथ आप शर्ट और टी-शर्ट कुछ भी पहन सकते हैं। लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि अगर आपकी फिटनेस बहुत अच्छी नहीं है तो बेहतर होगा कि आप शर्ट पहनें। टी-शर्ट पहननी ही है तो लूज पहनें और टक-इन न करें।
कभी-कभी जींस के साथ पहने गए अनमैच फुटवियर आपके लुक को बिगाड़ सकते हैं। हमेशा ध्यान रखें जींस के साथ स्नीकर्स या स्पोर्टी शूज अच्छे लगते हैं। आप रंग के साथ एक्सपेरिमेंट कर सकते हैं लेकिन दूसरे फुटवियर मैच करने से पहले ध्यान रखें।
जींस में दो पैटर्न सबसे अधिक पसंद किए जाते हैं। ये हैं स्लिम फिट और स्किनी। स्लिम फिट जींस आपको अच्छी फिटिंग देती है लेकिन आपकी स्किन से चिपकी नहीं रहती है। जबकि स्किनी जींस काफी फिट होती है। अगर आपकी हाईट अधिक है या आप बहुत अधिक पतले हैं तो स्किनी जींस पहनने से बचें।
मिताली राज ने कहा टी20 क्रिकेट को अलविदा, टीम में आईं 15 साल की शेफाली
नयी दिल्ली : सीमित ओवरों के क्रिकेट में भारत की पूर्व कप्तान मिताली राज ने मंगलवार को टी20 क्रिकेट को अलविदा कह दिया ताकि 2021 में होने वाले 50 ओवरों के विश्व कप के लिये वनडे क्रिकेट पर फोकस कर सकें । छत्तीस बरस की मिताली ने 32 टी20 मैचों में टीम की कप्तानी की है जिसमें तीन महिला टी20 विश्व कप (2012, 2014 और 2016) शामिल हैं ।
मिताली ने कहा ,‘‘ 2006 से टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भारत का प्रतिनिधित्व करने के बाद अब मैं इस प्रारूप से संन्यास ले रही हूं ताकि 2021 वनडे विश्व कप पर ध्यान केंद्रित कर सकूं ।’’ मिताली ने टी20 क्रिकेट में 89 मैचों में 37.5 की औसत से भारत के लिये सर्वाधिक 2364 रन बनाये हैं । उनका सर्वोच्च स्कोर नाबाद 97 रन रहा । उन्होंने 1999 में इंग्लैंड के खिलाफ गुवाहाटी में टी20 क्रिकेट में पदार्पण किया था । मिताली टी20 क्रिकेट में 2000 रन बनाने वाली पहली भारतीय महिला क्रिकेटर थी । संन्यास की घोषणा के बाद मिताली अब 50 ओवर के प्ररूप पर ज्यादा ध्यान दे सकेंगी जिसका विश्व कप 2021 में खेला जाना है। उनकी कप्तानी में भारतीय टीम 2017 में खेले गये विश्व कप के फाइनल में पहुँची थी। उन्होंने बीसीसीआई द्वारा जारी विज्ञप्ति में कहा ,‘‘ देश के लिये विश्व कप जीतना मेरा सपना है और मैं अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना चाहती हूं । मैं बीसीसीआई को लगातार सहयोग के लिये धन्यवाद देती हूं और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ आगामी श्रृंखला के लिये भारतीय टी20 टीम को शुभकामना देती हूं।’’ ऐसी सम्भावना थी कि मिताली मार्च में इंग्लैंड के खिलाफ खेली गयी टी20 श्रंखला के दौरान संन्यास लेंगी। उन्होंने पिछले सप्ताह कहा था कि वह दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टी20 के लिए उपलब्ध है। मिताली ने हालांकि बाद में अपना मन बदल लिया। मिताली के भविष्य पर उसी समय से कयास लगाये जाने लगे थे जब पिछले साल टी20 विश्व कप के सेमीफाइनल मुकाबले में अंतिम 11 में उन्हें जगह नहीं मिली थी। उनके बाहर होने पर काफी विवाद हुआ था और मिताली ने कोच रमेश पवार पर उनके करियर को खत्म करने का आरोप लगाया था। यह भी माना जाता है कि टी20 टीम की कप्तान हरमनप्रीत सिंह से उनकी अनबन हो गयी। पवार को कोच पद से हटाये जाने के बाद डब्ल्यूवी रमन को टीम का मुख्य कोच नियुक्त किया गया जिसके बाद यह विवाद खत्म हुआ। बीसीसीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पीटीआई को बताया कि मिताली का फैसला सही और पहले से अपेक्षित था।
उन्होंने कहा, ‘‘मुझे नहीं पता कि उसने पिछले सप्ताह यह बयान क्यों दिया कि वह दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ श्रृंखला में खेलना चाहती थी। अगले साल की शुरुआत में होने वाले टी20 विश्व कप के लिए वह अंतिम 11 में चयन की दावेदार नहीं है ऐसे में यह जरूरी है कि युवाओं को पर्याप्त मौके दिये जाए।’’ मिताली ने 203 वनडे में 6720 रन बनाये हैं जिसमें सात शतक शामिल है। उन्होंने 10 टेस्ट में एक शतक समेत 663 रन बनाये हैं। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ आगामी घरेलू टी20 अंतरराष्ट्रीय श्रृंखला के लिये 15 वर्षीय शेफाली वर्मा ने भारतीय महिला टीम में जगह बनायी।
वायुसेना में शामिल हुए आठ अपाचे लड़ाकू हेलीकॉप्टर
पठानकोट : अमेरिका निर्मित आठ ‘अपाचे एएच-64ई’ लड़ाकू हेलीकॉप्टर भारतीय वायुसेना में शामिल किए गए। इससे वायुसेना की युद्धक क्षमता में वृ्द्धि होगी। अधिकारियों ने बताया कि पठानकोट वायुसेना स्टेशन पर आयोजित समारोह में औपचारिक रूप से इन आठ अपाचे हेलीकॉप्टर को भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया। इस समारोह में वायुसेना प्रमुख एयल चीफ मार्शल बीएस धनोआ बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। बोइंग ने समारोह में हेलीकॉप्टर की प्रतीकात्मक चाबी वायुसेना को सौंपी।‘अपाचे एएच-64ई’ दुनिया के सबसे उन्नत बहु-भूमिका वाले लड़ाकू हेलीकॉप्टर हैं और अमेरिकी सेना इनका इस्तेमाल करती है।
वायुसेना के एक वरिष्ठ अधिकारी न बताया, ‘‘ आठ अपाचे लड़ाकू हेलीकॉप्टर वायुसेना में शामिल होने जा रहे हैं, जो बल की लड़ाकू क्षमता को बढ़ाएंगे।’’ भारतीय वायुसेना ने 22 ‘अपाचे हेलीकॉप्टर’ के लिए अमेरिकी सरकार और बोइंग लिमिटेड के साथ सितम्बर 2015 में कई अरब डॉलर का अनुबंध किया था।




