Thursday, July 2, 2026
खबर एवं विज्ञापन हेतु सम्पर्क करें - [email protected]
Home Blog Page 595

हजारों साल से पूजे जाते रहे हैं अनादि गणेश

गणेश अनादि हैं। इतिहास में भी इसके साक्ष्य हैं। उनकी पूजा के प्रमाण आज से 5000 साल पहले से मिलने लगते हैं। वे अलग-अलग रूपों में विभिन्न संस्कृतियों में हैं। जापान में उन्हें कांगीतेन कहा जाता है। चीन, अफगानिस्तान, ईरान, और मैक्सिको की माया संस्कृति तक में उनकी मूर्तियां मिली हैं।

ईरान में 3200 साल पुरानी गणेश प्रतिमा मिली

माइथोलॉजी और सिम्बॉलिज्म के विशेषज्ञ लायर्ड स्क्रैन्टन की किताब ‘प्वाइंट ऑफ ओरिजनः गोओबलकी टिपे एंड स्पिरिचुयल मैट्रिक्स फॉर द वर्ल्ड कॉस्मोलॉजी’ के अनुसार ईसा पूर्व 3000 में गणेश पूजा का उल्लेख मिलने लगता है। सिंधु घाटी और हड़प्पा सभ्यता में भी गणेश प्रतिमा मिली थी। वहीं ईरान के लोरिस्तान में 1200 साल ईसा पूर्व की गणेश प्रतिमा मिली है।

अफगान में भी गणेशजी प्रतिमा स्थापित की गई थी

राबर्ट ब्राउन की किताब ‘गणेशः स्टडीज ऑफ एन एशियन गॉड’ के मुताबिक अफगानिस्तान के उत्तरी काबुल में गणेश की एक प्रतिमा चौथी सदी की मिली है। वहीं, पख्तिया प्रांत के गार्देज शहर में एक प्रतिमा 5वीं सदी की पाई गई। संगमरमर की इस मूर्ति पर दर्ज है- ‘ये मनमोहक प्रतिमा महाविनायक की है, जिसे शाही राजा खिंगाल ने स्थापित कराया था।’

चीन और जापान में गणेश पेंटिंग मिलीं

चीन के मोगाओ गुफा में भी गणेश की छठी शताब्दी की पेटिंग मिलती है। यह बौद्ध गुफा है। इसमें बौद्ध धर्म से संबंधित हजारों चित्र हैं। इस गुफा के 25 किमी के दायरे में 492 मंदिर हैं। माना जाता है कि बौद्ध धर्म ने ही यहां गणेश पूजा शुरू की। चीन से ही गणपति जापान भी पहुंचे। यही वजह है कि जापान में 1200 साल पुरानी गणेश प्रतिमा और चित्र मिले हैं।

गणेश के आठ अवतार

गणेश पुराण में गणेश के आठ अवतार बताए गए हैं। ये अवतार प्रतीकात्मक हैं, जिनमें वे मानव मन की मोह, ममता, क्रोध जैसी आठ कमियों पर विजय पाने की प्रेरणा देते हैं। इनमें गणेशजी के मूषक के अलावा शेर, माेर और शेषनाग सहित चार वाहन बताए गए हैं। यानी जमीन, आकाश और पानी तीनों में चलने वाले वाहन।

गणेशजी के वाहनों में चलने, उड़ने और तैरने वाले तीनों साधन

मूषक और शेर चलने वाले वाहन : पांच अवतारों में गणेशजी का वाहन मूषक है। गजाननावतार में वे लोभासुर, स्कंदावतार में मदासुर, महोदरावतार में मोहासुर, लंबोदरावतार में क्रोधासुर और धूम्रवर्णावतार में वे अभिमान असुर का वध करते हैं। वक्रतुंडावतार में वाहन शेर हैं। वे मत्सरासुर का वध करते हैं।

उड़ने वाला मयूर वाहन

विकटावतार में गणेशजी का वाहन मयूर पक्षी है। इस अवतार में वे कामासुर नाम के राक्षस का वध करते हैं।

तैरने वाला शेषनाग वाहन

गणपति के विघ्नराज अवतार में वाहन शेषनाग है। इस अवतार में गणपति ममतासुर राक्षस का वध करते हैं।

तमिल में गणेश पिल्लै हैं, तेलुगु में विनायाकुडू

तमिल में गणेशजी को विनायागार और पिल्लै भी कहा जाता है। तेलुगु में उनका नाम विनायाकुडू है। बरमा में उन्हें पाली महा विनायक, थाइलैंड में फरा फिकानेत कहते हैं। गणेशजी की पूजा बौद्ध धर्म में भी होती है। गणेश पुराण के अनुसार इंसान के शरीर का मूलाधार चक्र गणेश कहलाता है। शिव महापुराण के अनुसार गणेशजी का रंग हरा और लाल है।

(आलेख एवं तस्वीर कोलाज – साभार दैनिक भास्कर)

पूजो आशछेन : आया मौसम हैंडलूम साड़ियों का

खादी मीना बूटी हैंडलूम साड़ियाँ बेहद फैशनेबल और आरामदायक हैं। इन साड़ियों में मीना बूटी डिजाइन हैं और यह साड़ियाँ ब्लाउज पीस के साथ आती हैं। इनकी कीमत 980 रुपये है ।

 

लिनेन बेहद आरामदायक फैब्रिक है। साड़ी का जरी बॉर्डर प्यारा है और पल्लू के साथ पूरी साड़ी पर पर खूबसूरत बूटियों का काम है। ब्लाउज पीस उपलब्ध है। कीमत 1499 रुपये है
यह है लिनेन जरी बॉर्डर हैंडलूम साड़ी। ब्लाउज पीस उपलब्ध है। कीमत 1400 रुपये

 

यह खूबसूरत कलेक्शन शुभागता दे द्वारा उपलब्ध करवाया गया है.

 

 

 

 

नुक्कड़ नाटक के माध्यम से मिला स्वच्छ भारत का सन्देश

कोलकाता : पूर्वी क्षेत्र पाइपलाइन्स, कोलकाता में दिनांक 16-31 अगस्त , 2019 तक ‘स्वच्छता पखवाड़ा’ मनाया जा रहा है। इसी क्रम में, दिनांक हाल ही में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड द्वारा संस्कृति नाट्य मंच के तत्वावधान में ‘गाँव से शहर तक’ नुक्कड़ नाटक का मंचन किया गया। नाटक का मंचन कार्यालय परिसर के बाहर किया गया ताकि इंडियन ऑयल के कार्मिकों के साथ-साथ आम नागरिकों को भी स्वच्छता के प्रति जागरूप बनाया जा सके।  इस मौके पर उपस्थित जे. पी. सिन्हा, कार्यकारी निदेशक ने स्वच्छता के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि ऐसे आयोजनों का मुख्य उद्देश्य सामान्य जनता को स्वच्छता के बारे में जागृत करना है। विदेशों में लोग स्वच्छता के प्रति इतने सजग होते हैं कि एक छोटे से कागज के रैपर को भी पॉकेट में रख लेते हैं तथा उचित स्थान पर ही उसे फेंकते हैं। हमें भी स्वच्छता को गंभीर रूप से लेने की आवश्यकता है। हम आगे भी इस तरह के नाटक का आयोजन सार्वजनिक स्थलों जैसे पार्क, बाजार आदि पर कर सकते हैं जिससे विशाल जन समूह को इसका लाभ मिल सके। कार्यक्रम के दौरान कार्यकारी निदेशक महोदय के साथ-साथ  संजय कुमार वी, मुख्य महाप्रबंधक (प्रचालन) एवं पूर्वी क्षेत्र पाइपलाइन्स, कोलकाता के अन्य वरिष्ठ अधिकारीगण भी उपस्थित थें ।  ‘गांव से शहर तक’ नाटक के निर्देशक, श्री संजय कुमार जायसवाल सहित संस्कृति नाट्य मंच के सभी रंगकर्मियों को  स्मृति चिह्न प्रदान किया गया । कार्यक्रम का सफल संचालन नागेंद्र पंडित, सहायक हिन्दी अधिकारी ने किया ।

गोएयर लगातार 11 वीं बार बनीं सर्वाधिक विश्वसनीय एयरलाइन

नयी दिल्ली :  भारत की सबसे तेजी से बढ़ती एयरलाइन गोएयर ने एक बार फिर सबसे भरोसेमंद एयरलाइन के तौर पर उभर कर एक तरह का कीर्तिमान रच दिया है। जुलाई2019 में गोएयर ने शिड्यूल किए गए घरेलू कैरियर्स के बीच लगातार 11 वें महीने के लिए एक बार फिर उच्चतम ऑन-टाइम-परफॉर्मेंस (ओटीपी) हासिल किया है। डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (डीजीसीए) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार गोएयर ने 80.5% ओटीपी दर्ज की है, जो शिड्यूल की गई घरेलू एयरलाइनों के बीच सबसे अधिक है। गौर करने की बात यह है कि मानसून छा जाने तथा देश भर में मौसम की खराब परिस्थितियों के चलते जुलाई का महीना मुश्किलों भरा था।

हमारी डायनेमिक इंडस्ट्री में यात्रियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण पहलू होता है- किसी विशेष गंतव्य पर एकदम ठीक समय पर पहुंचने की आवश्यकता। विभिन्न शोध अध्ययनों से यह स्पष्ट हुआ है कि बेहतर ग्राहक संतुष्टि प्राप्त करना केवल विमान किराए और उड़ान की उपलब्धता पर ही निर्भर नहीं होता। किसी एयरलाइन का चयन करने के बारे में विचार करते समय समय के अनुसार होने वाले प्रदर्शन पर ज्यादा ध्यान देते हैं। किसी एयरलाइन में भरोसा कायम करने के लिए उड़ान का समय पर आगमन उनके मन में एक प्रमुख कारक होता है।

गोएयर का ओटीपी नेतृत्व एयरलाइन द्वारा सेवा प्रदान करने को लेकर बिना कोई समझौता किए ग्राहक अनुभव बेहतर बनाने पर लगातार ध्यान केंद्रित करने का परिणाम है। जुलाई 2019 महीने के दौरान गोएयर ने 13.26 लाख यात्रियों को उड़ान भरवाई, जिनमें से मामूली 0.46% बुकिंग्स रद्द हुईं और प्रति 20,000 यात्रियों में मात्र 1 शिकायत सामने आई।

समय के अनुसार प्रबन्धन संस्थानों को बदलने के पक्ष में हैं शिक्षाविद् व प्रबन्धन शिक्षक

मुख्य बातें –
बीआईएमएस, कोलकाता, इंडियन मैनेजमेंट स्कूल एसोसिएशन ने आयोजित किया एम्स का पूर्वी क्षेत्रीय सम्मेलन
वरिष्ठ शिक्षाविद तथा प्रबंधन शिक्षकों ने  की‘प्रबन्धन के नए आदर्शों’ पर चर्चा 

कोलकाता :  भारतीय विद्या भवन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट साइंस (बीआईएमएस) ने इंडियन मैनेजमेंट स्कूल एसोसिएशन के साथ संयुक्त तौर एम्स पूर्वी क्षेत्रीय सम्मेलन आयोजित किया। सम्मेलन का उद्देश्य भारत में प्रबन्धन शिक्षा के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर नेतृत्व करने वाले देश के रूप में स्थापित करने के लिए अप्रयुक्त सम्भावनाएँ तलाशना था, जो कि वैश्विक शिक्षा के लिए नवीन एवं सक्रिय योगदान के माध्यम से प्राप्त किया जा सके। सम्मेलन ने वरिष्ठ शिक्षाविदों तथा प्रबंधन शिक्षकों को एक साथ लाने का कार्य किया जिन्होंने अपने बहुमूल्य विचारों एवं अन्तर्दृष्टियों को साझा किया, ‘प्रबन्धन के नए आदर्शों’ विषय पर अपने विचार रखते हुए उन्होंने अपने क्षेत्रीय स्तर के कार्यानुभवों को बाँटा तथा महत्वपूर्ण कार्य प्रणालियों को भी रेखांकित किया। उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए प्रो. आर.सी. भट्टाचार्य (अध्यक्ष, एम्स, पश्चिम बंगाल खंड) जी ने प्रबंधन शिक्षा में आधुनिक अधिगम के तकनीकों तथा पाठ्यक्रमों की आवश्यकताओं पर बल दिया। उन्होंने कहा, “आधुनिक प्रबंधन शिक्षा में, हम लोग कई नवीन तकनीकों से अवगत हुए है जैसे आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, आईओटी आदि। और हमें इन विषयों को अपने में समाहित करना है, अन्यथा हमारे छात्र पीछे रह जाएँगे। साथ ही, अमेरिका के एएसीएसबी के एक अध्ययन के अनुसार, कई छात्र एस टी ई एम (विज्ञान, तकनीक, अभियांत्रिकी तथा गणित) को चुन रहे हैं, इसलिए आवयश्कता है कि हम गहराई में जा कर देखे और महसूस करें कि क्या ऐसे विषयों को हमारे पाठ्यक्रम में शामिल करने की आवयश्कता है।’’ सम्मेलन के विषय में बात करते हुए इन्होंने कहा, “ हमने सम्मेलन का विषय ‘प्रबंधन के नए आदर्श’ रखा, ताकि हम भारत तथा विश्व में हो रहे विभिन्न परिवर्तनों को देख सकें। अब आवश्यकता है कि हम पुनः अपने प्रबंधन की शिक्षा को देखे तथा सही रणनीति खोजें। मुझे यकीन है कि आज के विवेचना के पश्चात, हम कुछ नए विषयों एवं विचारों को समझेंगे, जिसे हमें अपने पाठ्यक्रम में शामिल करना चाहिए ताकि आज के वर्तमान संदर्भ में प्रबंधन शिक्षा को अधिक प्रासंगिक बनाया जा सकें। अपने सम्बोधन में, डॉ. सुजाता मंगाराज़ (निदेशक एवं डीन (शिक्षाविद) भवन्स सेन्टर फॉर कम्यूनिकेशन्स एंड मैनेजमेंट ने कहा, “ प्रबन्धन शिक्षा लगातार उत्कृष्टता के लक्ष्य की प्राप्ति तथा मूल्यों के वितरण के लिए परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। व्यापार अत्यधिक जटिल एवं प्रतिस्पर्द्धी हो गया है, काम करने का माहौल काफी बदल रहा है इसलिए बिजनेस स्कूल को नये तरीके खोजने होंगे जिससे नए परिप्रेक्ष्य में नेतृत्व करने वाले तथा भविष्य के प्रबंधको को वैश्विक व्यापार की चुनौतियों पर विजय हासिल करने के लिए तैयार किया जा सकें। अवधारणाएँ अब एक भिन्न रणभूमि पर पहुँच गई है, जो आलोचनात्मक वैचारिक योग्यता, डाटा एनालिटिक्स, डिजिटल अवरोधों , नवोन्मेष, रचनात्मकता, सामाजिक उद्दमिता आदि की माँग करता है। इस नए उभरते शिक्षा जगत में, हमें पुनः वर्तमान व्यापारिक शिक्षा के मॉडल को जाँच करना चाहिए तथा इस उद्योग के मानदंडो पर खरा न उतरने वाले अप्रचलित मानकों को बदल देना चाहिए। इसलिए इसी संदर्भ में विचार करते हुए, AIMS पूर्वी क्षेत्र ने प्रबंधन शिक्षा के नए आदर्श उद्योग का नया युग 4.0 विषय पर सम्मेलन रखना उपयुक्त समझा। ’’ सम्मेलन में दो पैनल चर्चा तथा पत्र प्रस्तुति का भी आयोजन किया गया। प्रथम पैनल चर्चा सत्र का विषय – ‘ नए युग में उद्योग 4.0 – बी-स्कूलों के लिए अनिवार्य ’ पर हुआ जिसमें देवार्घ देव ( क्षेत्रीय HR , डाबर इंडिया, लि. ), श्री नदीम काज़ीम (ग्रुप सीएचआरओ, ट्रैक्टर इंडिया लि.) तथा सीतानाथ मुखोपाध्याय (एमएसएमई विभाग) वक्ता के तौर पर शामिल हुए। दूसरे पैनल चर्चा के सत्र में, वक्ता के रूप में मनमीत सिंह (वरिष्ठ संयुक्त निदेशक, व्यावसायिक श्रेष्ठ, केलॉग्स इंडिया लि. ) तथा डॉ. चंद्रिमा बनर्जी ( निदेशक, यूनिग्रो सोल्यूशन्स प्राइवेट लि. ) साथ ही संचालक के रूप में प्रो. (डॉ.) शांतनु राय (निदेशक, एसएनयू) रहे, जिन्होंने ‘ स्पर्श बिंदु से विश्वास बिंदु ’ विषय पर चर्चा की।
सम्मेलन के समापन सत्र में डॉ. राजगोपाल धर चक्रवर्ती ( निदेशक , आईआईएसडब्ल्यूबीएम तथा संरक्षक, एम्स, पश्चिम बंगाल खंड ), डॉ. अजय पाठक (निदेशक,आईसीएफएआई , कोलकाता) , डॉ. नवीन दास ( निदेशक, एनएसएचएम, कोलकाता) एवं डॉ. तापस साहा (निदेशक, आईएमएस, कोलकाता तथा कोषाध्यक्ष एम्स, कोलकाता खंड ) उपस्थित थे। डॉ. आर.के. पात्र (प्राचार्य, बीआईएमएस, कार्यकारी सदस्य, पूर्वी क्षेत्र तथा संयोजक सचिव, एम्स) ने कहा, “ भारतीय विद्या भवन प्रबंधन संस्थान में, हम प्रयास करते हैं कि अन्तर्निहित क्षमताओं को विज्ञान एवं प्रबंधन जगत में बढ़ते हुए व्यवासायिक शिक्षा से मिलाकर तैयार करें। हमें बहुत प्रसन्नता है कि ऐसे सम्मेलन का आयोजन हमारे परिसर में हुआ है। हमें यकीन है कि सम्मेलन के विवेचना का जो निष्कर्ष निकाला है, वो हमारे छात्रों को उत्कृष्ट शैक्षणिक उपलब्धियों को प्राप्त करने के लिए प्रेरित करने के साथ-साथ हमारे शिक्षकों को भी प्रासंगिक प्रबंधन शिक्षा प्रदान करने में प्रबुद्ध करेगा। ’’
उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के तौर पर डॉ. सैकत मित्रा (उपकुलपति, मौलाना अबुल कलाम आजाद तकनीकी विश्वविद्यालय – एमएकेएयूटी ), प्रमुख अतिथि डॉ. ध्रुव ज्योति चट्टोपाध्याय (उपकुलपति, एमिटी विश्वविद्यालय, कोलकाता), विशिष्ट अतिथि डॉ. प्रीति रंजन माँझी (प्राचार्या, आरसीएम भुवनेश्वर तथा कार्यकारी बोर्ड सदस्य, पूर्वी क्षेत्र एम्स), डॉ. सुजाता मंगाराज (निदेशक एवं डीन (शिक्षाविद) भवन्स संचार एवं प्रबंधन केंद्र, भुवनेश्वर तथा क्षेत्रीय उपाध्यक्ष, एम्स पूर्वी क्षेत्र मौजूद रहे, वक्ता के तौर पर श्री सीतानाथ मुखोपाध्याय (एमएसएमई विभाग) साथ ही डॉ. आर.के. पात्र (प्राचार्य, बीआईएमएस, कार्यकारी सदस्य, पूर्वी क्षेत्र तथा संयोजक सचिव, एम्स) एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

(अनुवादक – नीरज सिंह)

बेखौफ बातें

बेखौफ बातें युवाओं की अपनी कहानी है। अन्धेरों के बीच रोशनी की तलाश है। लेखिका ने अपनीभावनाओं को इन कहानियों में पिरोया है। पुस्तक खरीदने के लिए सम्पर्क करें – 9163986473

मेघे ढाका तारा..सेपरेशन इज इशेंशियल

डॉ. विजया सिंह

काफी मुश्किलों के बाद और माँ की अतिशय (और कई बार अचम्भित कर देने वाली) साहसिकता के कारण ‘मेघे ढाका तारा‘(मेघाच्छादित नक्षत्र) देख ही आई. यह फिल्म बंगाल के प्रसिद्ध फिल्मकार और पटकथा लेखक रित्विक घटक के जीवन और कार्यों के साथ तत्कालीन परिस्थितियों (बंगाल के अकाल, प्रमुख आंदोलनों, स्वतंत्रता प्राप्ति( हस्तांतरण), असंतोष, कम्युनिष्ट पार्टी के दलीय मतभेद, फूट) को लेकर कलाकार के चेतन और अवचेतन के स्तर पर क्रिया प्रतिक्रिया और अंतःक्रिया की मोटी-महीन बुनाई करती चलती है. गौरतलब है कि रित्विक घटक ने स्वयं भी इस नाम से फिल्म बनाई है. कमलेश्वर मुखर्जी द्वारा निर्देशित यह फिल्म मुझे बेहतरीन लगी. शाश्वत चैटर्जी और अनन्या चैटर्जी ने नीलकंठ बागची और दुर्गा बागची के रूप में दो प्रेम करने वाले संवेदनशील लोगों की कहानी कही हैं जिनके बीच का अलगाव ही सत्य है, जरूरी है. तंगहाल दुर्गा कहती भी है -‘सेपरेशन इज इसेंशियल’.

क्या कलाकार, रचनाकार होना ही लगभग आत्महंता होना है? बार-बार लगता है कि ईमानदार रचनाकार ‘जो है’ और ‘होना चाहिए’ के द्वंद्व में सारे दाँव हारता जाता है. कहने की अपार कोशिशों के बाद उसे पता चलता है कि कोई उसे सुनना ही नहीं चाहता. हाथों से फिसलते जाते सारे तंतु दिमाग और दिल का संतुलन बिगाड़ने लगते हैं. इलेक्ट्रिक शॉक में बेदम होता नीलकंठ डॉक्टर से कहता है कि हजारों बोल्ट के विचार हमेशा उसके दिमाग में चहलकदमी करते हैं. इतने इलेक्ट्रिक शॉक से तो उसे केवल सुरसुरी होती है. ऐसी दुर्दांत चेतना के साथ क्या अकेले हो जाना संभव है…नहीं..बिल्कुल नहीं. लेकिन संयम और संतुलन के बिना तो स्व-विनाश को खुला आमंत्रण भी देना है. गरीबी जनित अभावों, महत्वाकांक्षा तथा मोहभंग के कारण स्वयं से ही उसका संबंध टूट जाता है. वह इतना अकेला हो गया है कि वह खुद भी अपने साथ नहीं और दुर्गा बच्चों के साथ बिल्कुल अकेली..

सामान्य से इतर गहन अनुभूति, पक्षधरता, सिद्धांत तथा मानव सत्य की बात करने वाला क्यों एक पल में समझौताहीन महामानव लगता है जो पागलखाने में पागलों के साथ ही एक नाटक का मंचन कर डालता है और दूसरे ही पल में एक ऐसा इंसान जिसे अपने काम की धुन में पत्नी, तीन बच्चों का कोई ख्याल नहीं रहता. चेतन-अवचेतन में दौड़ लगाते नीलकंठ के लिए असफलता का अवसाद ही सच है. वह जानता है कि पैसा नहीं काम ही बचा रह जाएगा अनवरत (तुम देखना), कि उसका विश्वास सभी में एक मनुष्य होने में है जो धोखेबाज नहीं, कायर नहीं. वहीं बहुत-बहुत प्यार करने वाली पत्नी जो उसकी बीमारी, बढ़ते अतिवाद, न छूटने वाले नशे और परिवार की जद्दोजहद में नौकरी करती है, पढ़ाई करती है. नौकरी व बच्चों के साथ दूर चली जाना चाहती है. वह समझ चुकी है कि नीलकंठ उससे अनजानी दूरियों तक छिटक गया है. उसकी परेशानियाँ वह जानता भले हो पर कर कुछ भी नहीं सकता. वह जब भी उसकी ओर देखती है या उसे सुनते हुए जबरन दूसरी ओर देखने लगती है तो लगता है मानो हताशा में उसके गालों के गड्ढे कहीं ज्यादा गहरे हो गए हैं. जिम्मेदारियों ने साड़ी को गंदला कर दिया है. उसका सच, उसका जीवन, उसकी चेतना नीलकंठ से इतनी भिन्न हो गई है कि शायद एक-दूसरे को समझना-समझाना-चाहना-बने रहना मुश्किल हो गया है. नीलकंठ को धैर्यहीन सृजन करना है, दुर्गा को बचे हुए को प्राणपण से बचाना है. मनुष्य व उसके सत्य का अर्थ उसके लिए जीवन के उलझे तारों को फिर से करीने से पिरोना है. बाकी शेष बचाना लेना है, संभालना है, संवारना है. वह स्त्री है, तीन बच्चों की माँ है. नीलकंठ को सामाजिक-बौद्धिक दुनिया के लिए प्रतिबद्ध होना है जबकि दुर्गा के लिए दुनिया तो उसके निज के संसार में आसन्न उपस्थित है. उसकी दुनिया में उसके भूखे बच्चे हैं, उनकी शिक्षा-दीक्षा की चिंता है, अदद नौकरी की जरूरत शामिल है. उसे भी अपनी सृष्टि की रक्षा करनी है, संजोना है. निश्चित रूप से उसकी और नीलकंठ की जद्दोजहद दो महत्वपूर्ण रचना संसारों के निर्माण से संबंद्ध है. भिन्न किंतु आवश्यक. साथ चलकर एक दूसरे की बची-खुची शक्ति को छीन लेना प्यार का, जीवन का अपमान ही तो है. ऐसे में अलगाव ही उसका एकमात्र बचाव है. निर्णय दुर्गा का है. वही यह फैसला कर सकती है, उसमें ही यह ताकत है और उसके लिए यह जरूरी भी है. नीलकंठ अपने ही तीव्र वेग में खोया निर्णय लेने की ताकत को खो चुका है. अतएव दुर्गा चुनती है और नीलकंठ स्वीकार करता है. सर्जक होने की कीमत दोनों चुकाते हैं.

(लेखिका रानी बिड़ला गर्ल्स कॉलेज में प्रवक्ता हैं)

उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक ने मनाया विश्व वरिष्ठ नागरिक दिवस

कोलकाता :  उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक ने अपने सभी ग्राहकों और मुख्य रूप से वरिष्ठ नागरिकों को विशेष लाभ एवं सेवाएं प्रदान करने के लिए जीवन की घटनाओं पर आधारित बैंकिंग सेवाओं का शुभारंभ करते हुए विश्व वरिष्ठ नागरिक दिवस मनाया। बैंक का उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों को संकट की घड़ी में बैंकिंग सहायता के माध्यम से उनकी मदद करना है, ताकि वे अच्छी एवं बुरी, दोनों परिस्थितियों में सुरक्षित महसूस करें।
जीवन की घटनाओं पर आधारित बैंकिंग सेवाओं के जरिए वरिष्ठ नागरिकों को कई ख़ास सुविधाएं दी गई हैं, जैसे कि बैंकिंग सेवाओं की घर पर उपलब्धता, जरूरत पड़ने पर विशेष सहायता, तथा शाखाओं में प्राथमिकता सेवाएँ।
वरिष्ठ नागरिकों को विभिन्न बैंकिंग सुविधाओं का लाभ उठाने में होने वाली कठिनाइयों को अच्छी तरह समझते हुए, उज्जीवन एसएफबी ने उनके जीवन को और मूल्यवान बनाने के लिए इन सुविधाओं को डिज़ाइन किया है, ताकि इन सुविधाओं को उनके दरवाजे तक बिना किसी परेशानी के उपलब्ध कराया जा सके। इन सुविधाओं को व्यक्ति के जीवन के सुखद पलों के साथ-साथ उसके जीवन में होने वाली अप्रत्याशित घटनाओं एवं दुखद परिस्थितियों का समय रहते सामना करने के लिए तैयार किया गया है। उज्जीवन एसएफबी की शाखाओं में समर्पित कर्मचारी वरिष्ठ नागरिकों का हाथ थामने और लेन-देन को पूरा करने में उनकी मदद करने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं।
इस मौके पर उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक के एमडी एवं सीईओ, श्री समित घोष ने कहा, “हम अपने ग्राहकों, ख़ासतौर पर वरिष्ठ नागरिकों के लिए जीवन की घटनाओं पर आधारित बैंकिंग सेवाओं की शुरुआत करते हुए बेहद प्रसन्नता का अनुभव कर रहे हैं। हमें यकीन है कि, इन सेवाओं के माध्यम से वे बेहद आसानी और सुविधा के साथ बैंकिंग को जारी रखने में सक्षम होंगे, जिससे बैंकिंग का अनुभव अधिक फायदेमंद बन जाएगा। इन सेवाओं को ग्राहकों के जीवन के हर चरण की उपलब्धियों को ध्यान में रखते हुए डिज़ाइन किया गया है।

प्रतिभा सिंह को दुबई में ग्लोबल समिट में मिला सुरश्री सम्मान

कोलकाता/दुबईः दुबई में बिहारी कनेक्ट लंदन की ओर से आयोजित ग्लोबल समिट 2019 में कोलकाता की प्रख्यात गायिका व अभिनेत्री प्रतिभा सिंह को सुरश्री सम्मान प्रदान किया गया। इस तीन दिवसीय समारोह में 20 देशों में रहने वाले उत्तर प्रदेश, बिहार व झारखंड के सैकड़ों प्रतिनिधियों ने भाग लिया। उसमें मुख्य अतिथि के तौर पर भारतीय जनता पार्टी के सांसद अर्जुन सिंह, भारत के कौंसुल जनरल विपुल, ग्रेट ब्रिटेन में बिहारी कनेक्ट के चैयरमैन उदेश्वर सिंह प्रमुख थे। सम्मानित होने वालों में संपूर्ण भोजपुरी विकास मंच के महामंत्री प्रदीप कुमार सिंह, गायक मोहन राठौड़ और देवी प्रमुख है।

यूएई ने प्रदान किया प्रधानमंत्री मोदी को सर्वोच्च नागरिक सम्मान

अबुधाबी : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भारत एवं संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बीच द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका के निभाने लिए शनिवार को इस देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ जायेद’ से सम्मानित किया गया। इससे पहले विश्व के कई नेता इस सम्मान से नवाजे जा चुके हैं, जिनमें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, महारानी एलिजाबेथ द्वितीय एवं चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग शामिल हैं। इस सम्मान के लिये मोदी ने यूएई सरकार का शुक्रिया अदा किया और इस सम्मान को 1.3 अरब भारतीयों के कौशल और क्षमताओं को समर्पित किया।
अबुधाबी में राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक कार्यक्रम में मोदी को अबु धाबी के इस सम्मान से नवाजा गया। इस पुरस्कार का नामकरण यूएई के संस्थापक शेख जायेद बिन सुल्तान अल नहयान के नाम पर किया गया है।बाद में मोदी ने ट्वीट किया, ‘‘कुछ समय पहले ‘ऑर्डर ऑफ जायेद’ से सम्मानित होने पर कृतज्ञ हूं। यह पुरस्कार एक व्यक्ति को नहीं बल्कि भारत की सांस्कृतिक परंपरा और 130 करोड़ भारतीयों को समर्पित है। इस सम्मान के लिये मैं यूएई सरकार का शुक्रिया अदा करता हूं।’’ मोदी की यूएई की यात्रा से पहले विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा था कि इस पुरस्कार का नामकरण यूएई के संस्थापक शेख जायेद बिन सुल्तान अल नहयान के नाम पर किया गया है। इसका विशेष महत्व है क्योंकि ‘‘शेख जायेद के जन्मशती वर्ष में प्रधानमंत्री मोदी को यह सम्मान दिया जाने वाला है।’’ इसमें कहा गया कि भारत और यूएई के बीच मजबूत, करीबी और बहुआयामी संबंध रहा है जो सांस्कृतिक, धार्मिक और आर्थिक सूत्रों भी जुड़ा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इससे पहले अगस्त 2015 में यूएई की यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच व्यापक सामरिक भागीदारी भी बढ़ी। यूएई ने अप्रैल में मोदी को देश के सर्वोच्च सम्मान से नवाजे जाने की घोषणा की थी। अबुधाबी के वली अहद शहजादा मोहम्मद बिन जायेद अल नहयान ने अप्रैल में एक ट्वीट कर बताया, ‘‘भारत के साथ हमारे ऐतिहासिक और व्यापक सामरिक संबंध रहे हैं, जिसमें मेरे अभिन्न मित्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है। उन्होंने इन संबंधों में और प्रगाढ़ता लाने का काम किया।’’ करीब 60 अरब अमेरिकी डॉलर के वार्षिक द्विपक्षीय कारोबार के साथ यूएई भारत का तीसरा बड़ा कारोबारी सहयोगी है। यह भारत के लिये तेल निर्यात करने वाला चौथा सबसे बड़ा निर्यातक देश है।