Sunday, October 11, 2026
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घरेलू सहायिका का विजिटिंग कार्ड वायरल

पुणे : शहर के बावधान इलाके में रहने वाली एक हाउस मेड (घर में काम करने वाली महिला) का विजिटिंग कार्ड इन दिनों सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। जिससे उन्हें देश भर से लोग नौकरी का ऑफर दे रहे हैं। दरअसल, घरेलू सहायिका गीता काले की कुछ दिन पहले नौकरी छूट गई थी। वह काफी परेशान थी। परेशान देख उसकी परिचित और पेशे से एक निजी कंपनी में ब्रांडिंग और मॉर्केटिंग सीनियर मैनेजर धनश्री शिंदे ने उसका विजिटिंग कार्ड डिजाइन किया। कार्ड में गीता की पूरी प्रोफाइल है और लिखा है- ‘घर काम मौसी इन बावधान।’ इसमें उनके हर काम का जिक्र है। साथ में मेहनताना भी लिखा है। यह भी बताया गया है कि गीता का प्रोफाइल आधार कार्ड से वेरिफाइड है। गीता धनश्री के घर पर भी काम करती है। गीता और धनश्री की कहानी को दो दिन पहले अस्मिता जावड़ेकर ने फेसबुक पर शेयर किया, जो वायरल हो गई। उसने बताया कि 24 घंटे में स्मार्ट बिजनेस कार्ड डिजाइन किया गया और 100 कार्ड प्रिंट करवाए गए।

माइक्रोसॉफ्ट का फोर डे वीक कॉन्सेप्ट, 3 दिन छुट्टी से कर्मचारियों की उत्पादन क्षमता 40% बढ़ी

टोक्यो : भारत में सरकारी क्षेत्र के कर्मचारियों से अधिक काम लेने के लिए उनका ऑफिस टाइम बढ़ाकर 9 घंटे किए जाने की तैयारी है। दूसरी तरफ कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर क्षेत्र की दिग्गज कंपनी माइक्रोसॉफ्ट ने अपने कर्मचारियों की उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए इससे उलट काम किया। माइक्रोसॉफ्ट ने अपनी जापान यूनिट में अगस्त में कर्मचारियों से एक महीने तक हफ्ते में महज 4 दिन काम करवाया। इससे कर्मचारियों की उत्पादन क्षमता में आश्चर्यजनक रूप से उछाल आया और यह पिछले साल के मुकाबले 40% बढ़ गई। कंपनी ने 2300 कर्मचारियों को सप्ताह में शुक्रवार का अतिरिक्त अवकाश देते हुए तीन दिन की छुट्टी दी। इस तरह कर्मचारियों ने हफ्ते में 4 दिन ही काम किया। कंपनी के मुताबिक, इस प्रयोग के दौरान कर्मचारियों को अपनी बाकी छुट्टियों के साथ कोई समझौता नहीं करना पड़ा। यही नहीं, इतनी छुट्टियां मिलने से कर्मचारियों ने छुट्टियां भी कम लीं। माइक्रोसॉफ्ट ने नतीजों के बारे में बताया कि उत्पादकता में यह वृद्धि बैठकों के समय में कमी के चलते हुई।
कोई बैठक 30 मिनट से अधिक नहीं चली। कई बैठकें वर्चुअल हो गईं। ईमेल्स के जवाब जल्दी दिए गए। अन्य फैसलों को भी टालने के बजाय तत्काल लिया गया। इस दौरान बिजली की खपत 23.1% कम हुई और 58.7% कागज का कम इस्तेमाल हुआ। इससे कंपनी का खर्च कम हुआ।
विशेषज्ञ बोले- अतिरिक्त कर्मी भर्ती करने पड़ेंगे
एक महीने के अंत में जब कंपनी ने अपने कर्मचारियों से उनकी राय जानी तो 92.1% ने इसे बेहतरीन विचार बताया। कम्पनी के इस कदम पर विशेषज्ञों का कहना है कि यह उपाय हर कम्पनी पर लागू नहीं हो सकता। जिन कंपनियों में सातों दिन काम होता है, उन्हें अतिरिक्त कर्मचारी भर्ती करने पड़ेंगे।

माइक्रोसॉफ्ट फिर प्रयोग आजमाने की तैयारी में
उधर, माइक्रोसॉफ्ट इस प्रयोग को एक बार फिर आजमाने की तैयारी कर रही है। उसने कर्मचारियों से कहा है कि वह वर्क-लाइफ के बैलेंस को बनाए रखने के लिए नए मानक अपनाएं। बढ़िया विचार लेकर आएं। माइक्रोसॉफ्ट ने अन्य कंपनियों से भी इस पहल में शामिल होने की अपील की है।

छोटी कम्पनियों में सफल फॉर्मूला बड़ी कम्पनी में भी कारगर

अब तक हफ्ते में 4 दिन काम का उपाय छोटी कम्पनियां ही आजमाती रही हैं, लेकिन माइक्रोसॉफ्ट के प्रयोग ने साबित किया है कि यह फॉर्मूला बड़ी कंपनियों में भी लागू हो सकता है। न्यूजीलैंड की एक फर्म भी दो महीने आजमाकर इसे सफल बता चुकी है। वर्जिन एटलांटिक के संस्थापक रिचर्ड ब्रानसन ने इसे खुशी बढ़ाने वाला बताया है।

यमुना की 30 फीट गहराई में मिलीं कुषाण काल की ईंटें और मूर्तियां

घरौंडा (करनाल) : फरीदपुर गांव में खनन के दौरान 30 फीट की गहराई में मिली पौराणिक मूर्तियां आठवीं-नौवीं शताब्दी और 11वीं व 12वीं शताब्दी के मध्य रहे राजपूत काल के समय की हैं। वहीं खुदाई में मिली ईंटों को कुषाण काल का माना जा रहा है। पुरातत्वविदों का कहना है कि राजपूत काल में इस तरह की मूर्तियां बनाई जाती थी। अध्ययन में सामने आया है कि इस काल में बनी ईंटों के पीछे उंगलियों के निशान होते थे, जो खुदाई में मिली ईंटों पर भी हैं। इससे अनुमान लगाया जा रहा है कि ये ईंटें लगभग दो हजार साल पहले की हैं। दरअसल, फरीदपुर गांव के पास रेत की खदान में खुदाई के दौरान शिवलिंग व मूर्तियां निकली थीं। सूचना के बाद जाँच के लिए प्रशासन व पुरातत्व विभाग की टीम गांव में पहुंची। पुरातत्व विभाग हरियाणा के अधिकारी शुभम मलिक व बीडीपीओ प्रेम सिंह जांच दल के साथ रेत की खान में गए। अधिकारियों ने उस जगह का मुआयना किया, जहां पर खुदाई में शिवलिंग व स्तंभ मिले थे। पुरातत्व विभाग के दल ने खुदाई में मिलीं ईंटों का निरीक्षण किया। खदान के बाद पुरातत्व विभाग की टीम गांव के देवी मंदिर में पहुंचीं, जहां पर ग्रामीणों ने शिवलिंग व नंदी की मूर्तियों को स्थापित कर दिया था।
पुरातत्व अधिकारी शुभम मलिक ने बारीकी से पौराणिक धरोहरों की जाँच की। उन्होंने कहा कि यहां मिली प्राचीन कला कृतियों का ऐतिहासिक दृष्टि से बहुत अधिक महत्व है। शुभम मलिक ने कहा कि सभी कला कृतियों का विस्तृत अध्ययन होना है। ऐसे में इनकी सुरक्षा बेहद अहम है। मूर्तियों की कस्टडी को लेकर ग्रामीणों व अधिकारियों के बीच लंबी बातचीत हुई। ग्रामीण किसी भी सूरत में शिव स्वरूप को पुरातत्व विभाग को सौंपने को तैयार नहीं हैं।
लोगों की आस्था को देखते हुए प्रशासन के अधिकारियों ने बीच का रास्ता निकाला। प्राचीन कला मूर्तियों की सुरक्षा के मद्देनजर गांव में 14 सदस्यीय कमेटी बनाई गई है। यह मूर्तियां कमेटी की कस्टडी में रहेगी और इनके स्वरूप में किसी तरह का कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।

शिपिंग कॉर्पोरेशन में सरकार बेचेगी 63.75 फीसदी हिस्सेदारी

नयी दिल्ली : शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया में सरकार अपनी 63.75 हिस्सेदारी बेचने जा रही है। एयर इंडिया समेत कई कंपनियों और बैंकों में हिस्सेदारी घटाने के बाद अब इस सरकारी कंपनी में विनिवेश होगा। जहाजरानी मंत्रालय ने कहा है कि वो इस कंपनी में हिस्सेदारी घटाने को लेकर के किसी तरह का कोई विरोध नहीं करेगा।
2017 में किया था विरोध
मंत्रालय ने 2017 में कंपनी के विनिवेश करने को लेकर के काफी विरोध किया था। लेकिन अब मंत्रालय सचिवों के एक समूह द्वारा तैयार किए गए प्रस्ताव का किसी तरह से कोई विरोध नहीं किया जाएगा। इस प्रस्ताव को हाल ही में मंजूरी दी है। अब इस बारे में कैबिनेट जल्द फैसला लेगा।
सचिवों के समूह ने शिपिंग कॉर्पोरेशन के अलावा भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल), कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (कॉनकोर), नीपको और टीएचडीसी में सरकारी हिस्सेदारी बेचने का प्रस्ताव दिया है। वित्त मंत्रालय के अधीन डिपार्टमेंट ऑफ इंवेस्टमेंट एंड पब्लिक असेट मैनेजमेंट (दीपम) ने इन कंपनियों में हिस्सेदारी बेचने के लिए आवेदन मंगाए हैं।
इतनी है इन कंपनियों में सरकार की हिस्सेदारी
सरकार की शिपिंग कॉर्पोरेशन में 63.75 फीसदी, बीपीसीएल में 53.29 फीसदी, कॉनकॉर में 30 फीसदी, नीपको में 100 फीसदी और टीएचडीसी में सरकारी हिस्सेदारी 75 फीसदी है। माना जा रहा है कि दीपम पहली तीन कंपनियों को निजी कंपनियों को बेचना चाहती है जबकि नीपको और टीएचडीसी को अन्य पीएसयू को बेचना चाहती है। इनकी संभावित खरीदार एनटीपीसी हो सकती है।

टेक स्टार्टअप्स में 500 करोड़ रुपये का निवेश करेगी पेटीएम

नयी दिल्ली : डिजिटल पमेंट कंपनी पेटीएम टेक स्टार्टअप्स में 500 करोड़ रुपये का निवेश करेगी।  पेटीएम ने बताया कि डिजिटल ईकोसिस्टम में तकनीक को बढ़ावा देने वाले स्टार्टअप्स में निवेश की योजना है। इसके तहत रोजगार के मौके देने वाले इनोवेशन के लिए आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस आधारित तकनीक और बिग डेटा सॉल्यूशंस पर फोकस किया जाएगा। पेटीएम का कहना है कि वह आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस में दबादबा बनाना चाहती है। कंपनी के सीएफओ विकास गर्ग ने कहा- हम डिजिटल क्रांति का फायदा कोने-कोने तक पहुंचाने के देश के मिशन के लिए अच्छी तरह तैयार हैं। हमने ऐसे स्टार्टअप्स के साथ साझेदारी की है जिनमें डिजिटल ईकोसिस्टम को बढ़ाने की क्षमताएं हैं।

जयपुर / डिशवॉश टब के 5 रुपये ज्यादा लिए, रिलायंस पर 6 हजार हर्जाना

हर्जाना राशि में 3 हजार रुपए परिवादी और तीन हजार रुपए राजस्थान राज्य उपभोक्ता कल्याण कोष में जमा कराने का आदेश
अधिक वसूले गए 5 रुपए भी नौ प्रतिशत की वार्षिक ब्याज की दर से लौटाने होंगे
जयपुर : जिला उपभोक्ता मंच तृतीय ने डिश वॉश टब के 5 रुपए अधिक वसूलने वाले वीकेआई स्थित रिलायंस मार्केट पर 6 हजार रुपये का हर्जाना लगाया है। हर्जाना राशि में 3 हजार रुपये परिवादी और तीन हजार रुपए राजस्थान राज्य उपभोक्ता कल्याण कोष में जमा कराने का आदेश दिया है। अधिक वसूले गए 5 रुपये भी नौ प्रतिशत की वार्षिक ब्याज की दर से लौटाने होंगे। शास्त्री नगर निवासी वीरेंद्र सिंह ने 12 सितंबर, 2017 को वीकेआई रिलायंस मार्केट से घरेलू सामान खरीदा था। इसमें आधा किलो का एक डिश वॉश टब भी था। इसकी कीमत 45 रुपये अंकित थी और उस पर दो रुपये की छूट देकर 43 रु. बिल में जोड़ रखे थे। डिश वॉश टब पर एमआरपी 45 रुपये पर 7 रुपए छूट देना अंकित था। इस हिसाब से 38 रुपए लिए जाने थे, लेकिन वसूले गए 43 रुपये। रिलायंस ने जवाब में कहा कि परिवादी ने पूर्व में ही किसी अन्य बिल से सामान खरीदा है। वह बिल का दुरुपयोग कर रहा है। मंच के अध्यक्ष केदारलाल गुप्ता व सदस्य भावना भाटी ने फैसले में कहा कि डिशवॉश टब का अवलोकन करें तो उसपर 7 रुपये की छूट लिखा हुआ है। डिशवॉश पर अंकित बार कोड ही बिल पर अंकित है। जिससे यह साबित है कि इसी बिल से यह डिश वॉश खरीदा है और रिलायंस ने परिवादी से 5 रुपये की राशि अधिक वसूल की है। जो अनुचित व्यापार प्रथा है। मंच ने पांच रुपए लौटाने के साथ छह हजार रुपये का हर्जाना भी लगाया।

गोइन्का राजस्थानी साहित्य पुरस्कार वितरण समारोह सम्पन्न

जयपुर :  चूरू जिले के सम्मानित विधायक श्री राजेन्द्रसिंह जी राठौड़ की अध्यक्षता में “मातुश्री कमला गोइन्का राजस्थानी साहित्य पुरस्कार” वितरण समारोह जयपुर (राजस्थान) में भारतीय विद्या भवन के “महाराणा प्रताप सभागृह” में संपन्न हुआ। इस अवसर पर फाउण्डेशन के प्रबंध न्यासी श्री श्यामसुन्दर गोइन्का द्वारा कोटा राजस्थान के सुप्रसिद्ध साहित्यकार अंबिका दत्त को पुरस्कार स्वरूप एक लाख ग्यारह हजार एक सौ ग्यारह रुपये के साथ राजेन्द्रसिंह जी के हाथों शॉल, श्रीफल व स्मृतिचिन्ह भेंट कर पुरस्कृत किया गया। जयपुर की स्वनामधन्य साहित्यकार सावित्री चौधरी जी को भी “रानी लक्ष्मीकुमारी चूण्डावत महिला साहित्यकार पुरस्कार” के तहत पुरस्कार स्वरूप इकतीस हजार रुपये के संग समारोह अध्यक्ष के हाथों शॉल, श्रीफल व स्मृतिचिन्ह भेंट कर पुरस्कृत किया गया।
समारोह आयोजक श्री गोइन्का जी ने पुरस्कार व फाउण्डेशन के कार्यकलापों के बारे में जानकारी दी तथा आये हुए अतिथियों व साहित्यकारों का स्वागत किया। सम्मानित साहित्यकारों ने अपने सम्मान का आभार व्यक्त करते हुए कमला गोइन्का फाउण्डेशन को धन्यवाद दिया। समारोह अध्यक्ष श्री राजेन्द्रसिंह राठौड़ जी ने सम्मानमूर्ति साहित्यकारों का अभिनन्दन किया तथा गोइन्का जी को साहित्यिक गतिविधयों के लिए बधाई देते हुए हिन्दी, राजस्थानी, कन्नड़, तेलुगु, तमिल एवं मलयालम आदि साहित्य के प्रति किये जा रहे कार्यों की भरपूर सराहना की। समारोह के अंत में श्यामसुन्दर शर्मा ने समारोह की सफलता के लिए विशिष्ट अतिथियों के प्रित आभार प्रकट किया। कार्यक्रम का संचालन प्रो. उमेद गोठवाल ने सुचारू रूप से किया। इस अवसर पर जोधपुर से पधारे “माणक” पत्रिका के प्रबंध संपादक पदम मेहता जी, जयपुर के सुप्रसिद्ध कवि श्री केशरदेव मारवाड़ी, चूरू से पधारे वरिष्ठ साहित्यकार श्री दुलाराम सहारण के संग नन्दकिशोर मोजासिया, श्री अरूण अग्रवाल तथा फाउण्डेशन की सहन्यासी व समारोह आयोजन में कर्मठ भूमिका में रहने वाली श्रीमती ललिता गोइन्का सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

महिलाओं के सम्मान की रक्षा के लिए आगे बढ़ने वाले को कोई नहीं रोक सकता-मकराना

 अंतरराष्ट्रीय सम्मान समारोह में जुटी देश भर की वीरांगनाएं

हावड़ा : अंतरराष्ट्रीय क्षत्रिय वीरांगना फाउंडेशन के अंतरराष्ट्रीय सम्मान समारोह में देश विदेश से जुटे क्षत्रिय समाज के लोगों ने शिरकत की। यह शरत सदन में शनिवार की शाम को आयोजित था। यह छठवां अंतरराष्ट्रीय समारोह था। समारोह की मेजबानी वीरांगना की पश्चिम बंगाल इकाई ने प्रख्यात गायिका प्रतिभा सिंह के नेतृत्व में किया। स्वागत भाषण वीरांगना की अंतरराष्ट्रीय महासचिव भारती सिंह ने तथा संस्था का परिचय राष्ट्रीय महामंत्री डॉ.एमएस सिंह मानस ने दिया। इस अवसर पर उपस्थित साहित्यकार डॉ.कुसुम खेमानी ने कहा वीरांगनाओं को आशीर्वाद की जरूरत नहीं। वे प्रकृति व ईश्वर की ओर से मनुष्य जाति को मिला सबसे बड़ा आशीर्वाद हैं। मुख्य अतिथि श्री राजपूत करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना ने कहा कि जो नारी सम्मान की रक्षा के लिए आगे बढ़ता का है, उसके विकास को कोई रोक नहीं सकता। अखिल भारतीय क्षत्रिय समाज के महासचिव शंकर बख्श सिंह ने कहा कि क्षत्रियों ने जाति नहीं धर्म की बात शुरू से ही की है। और क्षत्रिय धर्म का एक ही अर्थ है-राष्ट्रसेवा। समारोह में उद्घाटनकर्ता अखिल भारतीय क्षत्रिय समाज के मुख्य संरक्षण जय प्रकाश सिंह, विशिष्ट अतिथि प्रहलाद सिंह खींची, विशिष्ट अतिथि राजपूत एसोसिएशन आफ नार्थ अमेरिका की प्रमुख रम्भा सिंह, विशिष्ट अतिथि फ़िल्मकार डॉ.सुदीप रंजन सरकार व अंतरराष्ट्रीय हिन्दी परिषद के राष्ट्रीय चेयरमैन हृदय नारायण मिश्रा थे। समारोह में नारी गौरव सम्मान-डॉ.कुसुम खेमानी-साहित्य, रीता झंवर-फ़िल्म निर्माण, मृणालिनी ठाकुर-सिनेमा में अभिनय-गुजरात, काकोली रायचौधुरी-समाजसेवा,भारती सिंह-व्यवसाय व समाजसेवा-जमशेदपुर, रेणु सिंह-समाजसेवा-जमशेदपुर, प्रतिभा सिंह-समाजसेवा को दिया गया। महर्षि विश्वामित्र शौर्य सम्मान-जय प्रकाश सिंह-समाजसेवा, महाराणा प्रताप शौर्य सम्मान-महिपाल सिंह मकराना-समाजसेवा, जयपुर, डॉ.एमएस सिंह मानस-समाजसेवा-जमशेदपुर, क्षत्रिय रत्न सम्मान-डॉ.सुधीर कुमार सिंह-चिकित्सा व समाजसेवा-वाराणसी, प्रहलाद सिंह खिंची-समाजसेवा-राजस्धान को प्रदान किया गया। दुर्गावती शौर्य सम्मान-रम्भा सिंह-व्यवसाय एवं समाजसेवा-अमेरिका, रानी पद्मिनी शौर्य सम्मान-सुलेखा सिंह-समाजसेवा-वाराणसी को मिला। नारी शक्ति सम्मान-निशा सिंह-समाजसेवा-पटना, राजश्री-मानवाधिकार-पटना, मनोरमा सिंह-समाजसेवा-पटना, इंदु सिंह-समाजसेवा-पटना, प्रभा सिंह-समाजसेवा-कोल्हान-झारखंड को दिया गया। समारोह में आकाश मिश्र के गायन ने लोगों का दिल जीत लिया।
समारोह को सफल बनाने में प्रतिमा सिंह, रीता सिंह, पूजा सिंह, सुमन सिंह, मीनू सिंह, पूनम सिंह, आशा सिंह, सुनीता सिंह, इंदु सिंह, किरण सिंह आदि वीरांगनाओं ने मुख्य भूमिका निभाई।

एचआईटीके के हल्ट प्राइज में युवाओं को मिले सामाजिक उद्यमी होने के गुर

कोलकाता :  हेरिटेज इन्स्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, कोलकाता  (एचआईटीके) में हाल ही में हल्ट प्राइज का आयोजन किया गया। हल्ट प्राइज सोशल ऑन्ट्रेप्रेनियरशिप यानी सामाजिक उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से बनाया गया मंच है जिसमें दुनिया भर से उद्यमी हिस्सा लेते हैं। इस आयोजन का आरम्भ बी. टेक के विद्यार्थियों द्वारा किये गये प्रेजेन्टेशन से हुआ। इस अवसर पर निर्णायक की भूमिका में अमर ग्रुप ऑफ कम्पनीज के सीईओ तथा एचआईटीके के पूर्व छात्र राहुल बसाक, स्टार्टअप विशेषज्ञ रवि रंजन, थिंक अगेन लैब के सीईओ अरिजीत हाजरा और अमर ग्रुप ऑफ कम्पनीज के सीओओ अमित दास शामिल थे। विद्यार्थियों ने विभिन्न प्रकार की परियोजनाएँ प्रदर्शित कीं। इनमें इस्तेमाल किये गये कपड़ों से पेपर बैग्स बनाना, ऑर्गेनिक कचरे से जैव ईंधन यानी बायो फ्यूल बनाना, प्लास्टिक से पेविंग ब्लॉक जैसी कई परियोजनाएँ शामिल थीं। निर्णायकों ने पेविंग प्लस को विजेता चुना गया और उसे हल्ट प्राइज एचआईटीके मिला। पेविंग प्लस बेकार प्लास्टिक के इस्तेमाल से बनाया गया है जो भारी दबाव झेल सकता है और घरों के निर्माण में इस्तेमाल हो सकता है। रियल इस्टेट के क्षेत्र में इसका उपयोग होगा। यह परियोजना एचआईटीके के बी. टेक के विद्यार्थियों, रंजन कुमार गुप्ता, अनुष्का नायक और उपमन्यु चटर्जी द्वारा प्रस्तुत की गयी है। द्वितीय पुरस्कार इकोस्मार्ट को मिला जिसने बेकार कागज से पेपर बैग बनाया और तीसरा पुरस्कार ऑर्गेनिक कचरे से जैव ईंधन बनाने वाले वेस्ट चार्जर की टीम को मिला। इन दोनों टीमों में एचआईटीके के बी.टेक के विद्यार्थी शामिल थे। हेरिटेज इन्स्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के सीईओ पी. के. अग्रवाल ने कहा कि संस्थान जीवन को बेहतर बनाने वाले आविष्कारों को प्रोत्साहित करता है।

यह कदम्ब का पेड़

सुभद्रा कुमारी चौहान

यह कदंब का पेड़ अगर माँ होता यमुना तीरे।
मैं भी उस पर बैठ कन्हैया बनता धीरे-धीरे।

ले देतीं यदि मुझे बांसुरी तुम दो पैसे वाली।
किसी तरह नीची हो जाती यह कदंब की डाली।

तुम्हें नहीं कुछ कहता पर मैं चुपके-चुपके आता।
उस नीची डाली से अम्मा ऊँचे पर चढ़ जाता।

वहीं बैठ फिर बड़े मजे से मैं बांसुरी बजाता।
अम्मा-अम्मा कह वंशी के स्वर में तुम्हे बुलाता।

बहुत बुलाने पर भी माँ जब नहीं उतर कर आता।
माँ, तब माँ का हृदय तुम्हारा बहुत विकल हो जाता।

तुम आँचल फैला कर अम्मां वहीं पेड़ के नीचे।
ईश्वर से कुछ विनती करतीं बैठी आँखें मीचे।

तुम्हें ध्यान में लगी देख मैं धीरे-धीरे आता।
और तुम्हारे फैले आँचल के नीचे छिप जाता।

तुम घबरा कर आँख खोलतीं, पर माँ खुश हो जाती।
जब अपने मुन्ना राजा को गोदी में ही पातीं।

इसी तरह कुछ खेला करते हम-तुम धीरे-धीरे।
यह कदंब का पेड़ अगर माँ होता यमुना तीरे।