Thursday, April 23, 2026
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कबाड़ में न जाएं, इसलिए 25 साल पुराने ट्रेन के 2 डिब्बों में बनाया दफ्तर

नयी दिल्ली: दिल्ली के चाणक्यपुरी स्थित रेलवे के अधिकारियों ने रेलवे के पुराने कोच को दफ्तर में तब्दील कर दिया है। इसे 25 साल पुराने दो कोचों को मिलाकर बनाया गया है। इसका इंटीरियर अंदर से बेहद खूबसूरत है। अब यह नेशनल रेल म्यूजियम का नया दफ्तर है। म्यूजियम का पूरा प्रशासनिक विभाग यहीं बैठकर काम करता है। म्यूजियम के डायरेक्टर भी इसी दफ्तर में बैठते हैं। इसमें डायरेक्टर ऑफिस के साथ विजिटर रूम भी है।
म्यूजियम के डायरेक्टर अमित सोराष्ट्री बताते हैं कि पुराने दफ्तर के कमरे छोटे थे। पूरा स्टाफ अलग बैठकर काम करता था। अब सब इस बड़े कोच में एक साथ बैठकर काम कर पाते हैं। कोचों को कन्वर्ट करने का मकसद- डिब्बों को कबाड़ से बचाना और दोबारा इस्तेमाल में लाना है। सोराष्ट्री ने बताया कि यह प्लान रेलवे बोर्ड के पूर्व चेयरमैन अश्विनी लोहानी का था। रेल के ये दो डिब्बे 25 साल की सर्विस के बाद यहां खुले में पड़े थे। यह ऑफिस खूबसूरत दिखने के साथ-साथ किफायती भी है। इसमें ईंट से बने दफ्तर को तैयार करने से कम लागत लगी है।

सोनिया गाँधी फिर बनीं कांग्रेस अध्यक्ष

नयी दिल्ली : कांग्रेस की सबसे लंबे समय तक अध्यक्ष रह चुकी सोनिया गांधी को पार्टी को संकट की स्थिति से निकालने के लिए एक बार फिर से इसकी बागडोर सौंपी गई है।
राहुल गांधी के लिए कांग्रेस का शीर्ष पद स्वेच्छा से छोड़ने के महज 20 महीने बाद सोनिया गांधी (72) को कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) ने शनिवार को पार्टी का अंतरिम अध्यक्ष नियुक्त किया। दरअसल, हालिया लोकसभा चुनावों में पार्टी को मिली करारी शिकस्त के बाद राहुल ने 25 मई को कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था।
सीडब्ल्यूसी के लिए सोनिया स्वभाविक पसंद थी, जो पहले भी संकट की घड़ी में पार्टी की खेवनहार रह चुकी हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक इस घटनाक्रम ने एक बार से यह जाहिर कर दिया है कि कांग्रेस नेतृत्व के लिए किस कदर नेहरू-गांधी परिवार पर निर्भर है।
कांग्रेस अध्यक्ष पद पर 19 साल तक रहीं सोनिया की उन फैसलों को लेकर सराहना की जाती है, जिसने पार्टी को लगातार दो आम चुनावों में और कई राज्य विधानसभा चुनावों में जीत दिलाई। वह 1998 से 2017 तक पार्टी की अध्यक्ष रही थीं। वर्ष 2004 में उन्होंने पार्टी के चुनाव प्रचार का नेतृत्व किया और उसे जीत दिलाई। उन्होंने प्रधानमंत्री बनने से इनकार करते हुए इस पद पर मनमोहन सिंह को नामित करने का फैसला किया। उनके इस कदम को कई लोग एक राजनीतिक ‘मास्टरस्ट्रोक’ के तौर पर देखा गया।
सूत्रों ने बताया कि 134 साल पुरानी का नेतृत्व संभालने के सीडब्ल्यूसी के सर्वसम्मति वाले अनुरोध को स्वीकार करने का फैसला कर सोनिया ने साहस का परिचय दिया है क्योंकि वह लगातार अपने खराब स्वास्थ्य का सामना कर रही हैं। उन्होंने अपनी राजनीतिक पारी में संप्रग के रूप में गठबंधन का सफल प्रयोग किया।
वर्ष 2004 के लोकसभा चुनावों में भाजपा को सत्ता से बेदखल करने के लिये चुनाव पूर्व गठबंधन बनाना उनकी सबसे बड़ी सफलताओं में से एक थी। वहीं, जब 2009 में केंद्र में अपने दूसरे कार्यकाल की शुरूआत में संप्रग लड़खड़ा रहा था, तब सोनिया ने गठबंधन की नाव पार लगाई। हालांकि, तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के समानांतर कैबिनेट चलाने को लेकर उनकी अक्सर ही आलोचना की जाती है।
अब, एक बार फिर से पार्टी के खेवनहार के तौर पर ऐसे समय में उनकी वापसी हुई है, जब इस साल के आखिर में हरियाणा,झारखंड और महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव होना है।
पार्टी नेताओं को उम्मीद है कि उनका नेतृत्व पार्टी कार्यकर्ताओं में नयी जान फूंकेगा। यह भी महसूस किया जा रहा कि सोनिया की वापसी बंटे हुए विपक्ष को भाजपा का मुकाबला करने के लिए एकजुट होने की एक वजह देगी। यह ठीक उसी तरह से है जब 1998 की शुरूआत में सोनिया के पार्टी की बागडोर संभालने के बाद से चीजें बदलनी शुरू हुई थीं।
वह 1997 में पार्टी की प्राथमिक सदस्य बनी थी और 1998 में इसकी अध्यक्ष बनीं। वह 1999 से लगातार लोकसभा सदस्य हैं।

डिवीज़ लैब के मुरली को मिला 58.80 करोड़ रुपये का मेहनताना

हैदराबाद : डिवीज़ लैबोरेटरीज के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक मुरली के. डिवी को 2018-19 में वेतन और कमिशन समेत कुल 58.80 करोड़ रुपये का पारिश्रमिक दिया गया। यह भारतीय दवा कम्पनियों में किसी भी कार्यकारी को मिला सर्वाधिक मेहनताना है। कम्पनी की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार मुरली के पारिश्रमिक में पिछले साल की तुलना में 46.30 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। कम्पनी ने इस वित्त वर्ष में कार्यकारी निदेशक एन.वी.रमण को 30 करोड़ रुपये और मुरली डिवी के बेटे तथा पूर्णकालिक निदेशक किरण एस. डिवी को 20 करोड़ रुपये मेहनताने के रूप में मिले। मुरली डिवी को कमिशन के रूप में 57.61 करोड़ रुपये मिले। वित्त वर्ष 2017- 18 के दौरान मुरली डिवी को 40.20 करोड़ रुपये का पारिश्रमिक प्राप्त हुआ जिसमें कि 39 करोड़ रुपये कमीशन के तौर पर मिले। कंपनी के कर्मचारियों को इस दौरान मेहनताना में औसतन 3.96 प्रतिशत की वृद्धि मिली। कंपनी को 2018-19 में कर भुगतान के बाद 1,333 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ और 5,036 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ।

उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने के विधेयक को राष्ट्रपति की मंजूरी

नयी दिल्ली : राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने प्रधान न्यायाधीश के अलावा उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या 30 से बढाकर 33 किए जाने संबंधी एक विधेयक पर दस्तखत कर दिया है। उच्चतम न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक को इसी सप्ताह संसद की मंजूरी मिली थी। फिलहाल, शीर्ष न्यायालय में प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) समेत कुल 31 पद हैं। कानून लागू होने के बाद सीजेआई को छोड़कर 33 पद होंगे। शीर्ष न्यायालय में मामलों की बढती संख्या के मद्देनजर न्यायाधीश के पदों की संख्या में इजाफे के लिए विधेयक लाया गया था। फिलहाल, उच्चतम न्यायालय में करीब 60 हजार मामले लंबित हैं।
यह फैसला ऐसे वक्त हुआ है, जब कुछ दिन पहले देश के प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर शीर्ष न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने के लिए पत्र लिखा था। विधि मंत्रालय ने 11 जुलाई को राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में कहा था कि शीर्ष अदालत में 59,331 मामले लंबित हैं । प्रधान न्यायाधीश ने कहा था कि न्यायाधीशों की अपर्याप्त संख्या के कारण कानून के सवालों से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों पर फैसले के लिए जरूरत के मुताबिक संविधान पीठ नहीं गठित हो पा रही।

अयोध्या मामला: जयपुर राजघराने ने किया दावा, कहा- हम भगवान राम के वंशज

जयपुर : सांसद दीया कुमारी ने दावा किया कि उनका परिवार भगवान राम के बेटे कुश का वंशज है। पत्रावली के माध्यम से पेश किए सबूत, कहा जल्द निकले अयोध्या मामले का समाधान। जयपुर की पूर्व रानी पद्मिनी देवी ने भी अपने परिवार को भगवान राम का वंशज बताया था। शीर्ष अदालत में अयोध्या मामले की सुनवाई चल रही है। नौ अगस्त को सुनवाई के दौरान अदालत ने रामलला के वकील से पूछा कि क्या भगवान राम का कोई वंशज अयोध्या या दुनिया में कही हैं? इस पर वकील का कहना था कि हमें इस बात की जानकारी नहीं है।
इस बात की लेकर जयपुर की राजकुमारी और राजसमंद की सांसद दीया कुमारी ने दावा किया कि उनका परिवार भगवान राम के बेटे कुश का वंशज है। उन्होंने एक ट्वीट में कहा कि हां भगवान राम के वंशज पूरी दुनिया में है। हमारा परिवार भी उनके पुत्र कुश का वंशज है। इससे पहले एक समाचार चैनल को दिए साक्षात्कार में जयपुर की पूर्व रानी पद्मिनी देवी ने भी अपने परिवार को भगवान राम का वंशज बताया था। उन्होंने कहा कि उनका परिवार भगवान राम के पुत्र कुश के परिवार से संबद्ध है। उन्होंने कहा कि जयपुर के पूर्व राजा और उनके पति भवानी सिंह कुश की 309वीं पीढ़ी के थे। पूर्व राजकुमारी द्वारा इस बात का सबूत भी पेश किया। उन्होंने एक पत्रावली दिखाई, जिसमें भगवान राम के वंश के सभी पूर्वजों का नाम क्रम से लिखा हुआ है। इसी पत्रावली में 289वें वंशज के रूप में सवाई जयसिंह और 307वें वंशज के रूप में महाराजा भवानी सिंह का नाम लिखा हुआ है। जयपुर राजघराने की पूर्व राजमाता पद्मिनी देवी ने कहा कि राम मंदिर पर जल्द समाधान हो। चूंकि अदालत ने पूछा है कि भगवान राम के वंशज कहां हैं? इसलिए हम सामने आए हैं कि हां! हम उनके वंशज हैं। दस्तावेज सिटी पैलेस के पोथीखाने में हैं। हम नहीं चाहते कि वंश का मुद्दा बाधा पैदा करे। राम सबकी आस्था के प्रतीक हैं।

सिंगल पुरुष सैनिकों को भी मिलेगी बच्चे की देखभाल की छुट्टी

नयी दिल्ली : सरकार ने अपने एक अहम फैसले में अकेले जीवन बिता रहे पुरुष सैनिकों को भी बच्चे की देखभाल के लिए मिलने वाली छुट्टी चाइल्ड केयर लीव (सीसीएल) देने को मंजूरी दे दी है। साथ ही रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने महिला अधिकारियों के मामले में सीसीएल प्रावधानों में भी कुछ छूट प्रदान कर दी है। वर्तमान में सीसीएल केवल रक्षा बलों में महिला अधिकारियों को ही प्रदान किया जाता है। यह फैसला कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) के एक आदेश के अनुरूप है। यह जानकारी रक्षा मंत्रालय ने दी।
हाल में डीओपीटी ने प्रावधानों में कुछ संशोधन किए थे, ताकि असैन्य कर्मचारियों को सीसीएल दिया जा सके। इसके तहत महिला कर्मचारियों को दिया जाने वाला सीसीएल सरकारी पुरुष कर्मचारियों को भी दिया जाएगा। रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि सीसीएल लेने के लिए पहले 40 प्रतिशत विकलांगता वाले बच्चे के मामले में 22 साल की आयु सीमा को भी हटा दिया गया है। साथ ही एक बार में सीसीएल लेने की न्यूनतम अवधि को 15 दिन के बजाय कम करके पांच दिन कर दिया गया है। ऐसे ही लाभ रक्षा कर्मियों को प्रदान करने के एक प्रस्ताव को रक्षा मंत्री ने मंजूरी प्रदान दे दी है। इससे सिंगल (किसी भी कारण से जीवन साथी के बिना जीवन बसर करने वाले) पुरुष सैन्य कर्मी सीसीएल का लाभ उठा सकेंगे। सिंगल पुरुष सैन्य कर्मी और रक्षा बलों की महिला अधिकारी भी 40 प्रतिशत विकलांगता वाले बच्चे के मामले में सीसीएल की सुविधा का लाभ उठा सकेंगे और इसके लिए बच्चे की आयु की कोई सीमा नहीं होगी।

बीसीसीआई ने आखिरकार ‘नाडा’ के दायरे में आना किया मंजूर

नयी दिल्ली : दुनिया की सबसे अमीर क्रिकेट संस्था भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) ने आखिरकार राष्ट्रीय डोपिंगरोधी संस्था (नाडा) के दायरे में आना मंजूर कर लिया, मगर इसके पूरी तरह से प्रभावी होने को लेकर आशंकाएं भी जाहिर की जा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में क्रिकेट को धर्म और खिलाड़ियों को भगवान माना जाता है, ऐसे में क्या नाडा क्रिकेट खिलाड़ियों पर अपने पूरे नियमों को लागू कर पाएगा? राष्ट्रीय जूनियर हॉकी टीम के पूर्व फिजिकल ट्रेनर और स्पोर्ट्स मेडिसिन विशेषज्ञ डॉक्टर सरनजीत सिंह ने अपने खिलाड़ियों के डोप परीक्षण नाडा से कराने के बीसीसीआई के फैसले के पूरी तरह लागू होने पर संदेह जाहिर करते हुए बताया कि भारत में क्रिकेट को पूजा जाता है और खिलाड़ियों को भगवान की तरह माना जाता है तो क्या ये ‘भगवान’ उन सारे नियमों को मानने के लिए तैयार होंगे? क्या वे विश्व डोपिंगरोधी एजेंसी (वाडा) के वर्ष 2004 में बनाए गए ‘ठहरने के स्थान संबंधी नियम’ को पूरी तरह से मानेंगे जिसके तहत उनको हर 1 घंटे पर खुद से जुड़ी सूचनाएं नाडा को देनी पड़ेंगी?
उन्होंने कहा कि अगर क्रिकेटर इन तमाम चीजों के लिए तैयार होते हैं और नाडा पूरी ईमानदारी से काम करती है तो मेरा मानना है कि पृथ्वी शॉ का मामला महज इत्तफाक नहीं है। पंजाब रणजी टीम के भी शारीरिक प्रशिक्षक रह चुके सिंह ने कहा कि जहां तक बीसीसीआई की बात है तो उसे नाडा से डोप परीक्षण करवाने पर रजामंदी देने में इतना वक्त क्यों लगा, यह बहुत बड़ा सवाल है। दूसरी बात यह कि क्या नाडा बीसीसीआई जैसी ताकतवर खेल संस्था के मामले में सभी नियमों को पूरी तरह से लागू कर पाएगी। कई ऐसी ताकतवर खेल संस्थाएं हैं, जो वाडा के सभी नियमों को पूरी तरह नहीं मानती हैं जिनकी वजह से उनके खिलाड़ी बहुत आसानी से डोप परीक्षण में बच जाते हैं। इस सवाल पर कि क्या नाडा इतनी सक्षम है कि वह हर तरह के ड्रग के सेवन के मामलों को पकड़ सके? सिंह ने कहा कि ऐसा नहीं है, क्योंकि डोपिंग के मामलों को समय से पकड़ने में नाडा और वाडा अक्सर नाकाम रही हैं। यही वजह है कि वर्ष 2012 के ओलंपिक खेलों में प्रतिबंधित दवाएं लेने वाले एथलीट अब पकड़े जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि वर्ष 1960 के दशक में जब डोपिंग पर प्रतिबंध लगाया गया था, उस वक्त महज 5 या 6 कंपाउंड हुआ करते थे। इस साल जनवरी में वाडा ने प्रतिबंधित दवाओं की जो सूची जारी की है उसमें करीब 350 कंपाउंड हैं। उन सभी को पूरी तरह से जांचने का खर्च प्रति खिलाड़ी करीब 500 डॉलर होता है। सवाल यह है कि क्या नाडा हर खिलाड़ी के टेस्ट पर 500 डॉलर खर्च कर सकेगी? भारतीय खेल प्राधिकरण के सलाहकार रह चुके सिंह ने यह भी कहा कि नाडा के पास ऐसी तकनीक भी पूरी तरह से नहीं है, जो हर ड्रग को पकड़ सके। तमाम नई तकनीक हैं जिनकी कीमत अरबों रुपए में है, जो नाडा के पास उपलब्ध नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि डोपिंग में पकड़े गए खिलाड़ियों के मुकाबले बहुत बड़ा प्रतिशत ऐसे खिलाड़ियों का है, जो ड्रग्स लेने के बावजूद बड़ी आसानी से बच निकले हैं। स्पोर्ट्स मेडिसिन विशेषज्ञ पीएसएम चंद्रन का भी कहना है कि नाडा को क्रिकेट खिलाड़ियों के डोप टेस्ट को लेकर उच्चस्तरीय पेशेवर रुख अपनाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि विराट कोहली, रोहित शर्मा, जसप्रीत बुमराह और शिखर धवन समेत प्रख्यात खिलाड़ियों के नमूने लेने में एजेंसी को काफी सावधानी बरतनी होगी। मालूम हो कि बरसों तक परहेज करने के बाद आखिरकार बीसीसीआई ने शुक्रवार को नाडा के दायरे में आने पर रजामंदी दे दी। खेल सचिव राधेश्याम जुलानिया ने कहा कि नाडा अब सभी क्रिकेटरों का डोप परीक्षण करेगी।
इससे पहले तक बीसीसीआई नाडा के दायरे में आने से यह कहते हुए इनकार करता रहा था कि वह कोई राष्ट्रीय खेल महासंघ नहीं बल्कि स्वायत्त इकाई है और वह सरकार से धन नहीं लेती है।

मेरी बिन्दिया रे….

अगर आपके चेहरे पर बिंदी नहीं जमती और आप ये सोचती हैं कि बिंदी हर किसी पर नहीं फबती, तो आप गलत सोच रही हैं। बहुत हद तक संभह है कि आपने चेहरे के अनुसार सही बिंदी का चयन नहीं किया हो। चलिए, हम आपको बताते हैं कि कौन से शेप के चेहरे पर कौन सी तरह की बिंदी सुंदर लगेगी –
तिकोने आकार के चेहरे के लिए – जिन लोगों का माथा चौड़ा और चिन यानी ठुड्डी नुकीली होती है, उनका फेस ट्राएंगल शेप कहलाता है। इस तरह के चेहरे पर आमतौर पर किसी भी आकार की बिंदी सुंदर लगती है।
चौकोर चेहरे के लिए – जब माथा, गालों की हड्डियां और जबड़े की चौड़ाई सब एक बराबर हो, तो ऐसे चेहरे को रेक्टेंगल शेप कहते हैं। ऐसे चेहरे पर गोल व वी शेप वाली बिंदी बहुत अच्छी लगती है। चौकोर चेहरे पर ज्योमेट्रिकल डिज़ाइ की बिंदी नहीं फबती है।
दिल के आकार के चेहरे के लिए – जिन लोगों का माथा चौड़ा, उभरे हुए गाल और नुकीली चिन हो, ऐसे चेहरे में हार्ट शेप बनता है। इस चेहरे पर छोटी बिंदी खूबसूरती में चार चांद लगा देती है वहीं बड़ी बिंदी लगाने से बचें।
अंडाकार चेहरे के लिए – जिन लोगों का माथा ठुड्डी एक ही अनुपात में हो और गाल उभरे हुए हो, वे अंडाकार चेहरे वाले होते है। इन पर भी हर तरह की बिंदी जंचती है लेकिन लंबी बिंदी ज्यादा खूबसूरत लगाती है।
गोल चेहरे के लिए – जिनके चेहरे का आकार गोल हो तो उन्हें भी लंबी बिंदी लगना चाहिए। इस चेहरे पर बहुत बड़ी बिंदी न लगायें।

विरासत-ए-खालसा बना एशिया का सबसे अधिक देखा जाने वाला म्यूजियम

चंडीगढ़/ आनन्दपुर साहिब : पंजाब सरकार द्वारा आनंदपुर साहिब में बनाया गया दुनिया का म्यूजियम ‘विरासत-ए-खालसा’ अब भारत ही नहीं एशिया में सबसे अधिक देखा जाने वाला म्यूजियम बन गया है। इसका नाम ‘एशिया बुक ऑफ रिकार्ड’ में भी दर्ज हो गया है। पर्यटन एवं सांस्कृतिक मामलों के मंत्री चरनजीत सिंह चन्नी ने रिकॉर्ड दर्ज होने की पुष्टि की है। पूरे एशिया में विरासत-ए-खालसा अब तक का अकेला म्यूजियम है, जहां एक दिन में सबसे अधिक सैलानी आए हैं। इस 20 मार्च इस म्यूजियम को 20569 सैलानियों ने देखा। मंत्री चन्नी ने बताया कि वास्तव में इस साल यह विरासत-ए-खालसा का बनाया गया तीसरा रिकॉर्ड है। इससे पहले ‘लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड’ फरवरी 2019 एडिशन’ और ‘इंडिया बुक ऑफ रिकार्ड-2020 एडिशन’ दर्ज किया जा चुका है।
7.5 साल में 1 करोड़ से अधिक सैलानी आए
चन्नी ने कहा, पंजाब और सिखों के गौरवमयी और अतुल्य इतिहास और संस्कृति की यादगार के तौर पर ‘विरासत-ए-खालसा को बनाया गया है। इसके दर्शनों के लिए आने वालों की संख्या पिछले 7.5 सालों में 1 करोड़ को पार कर चुकी है। यह पंजाब के लिए गौरव की बात है।

त्रेतायुग में स्वयं श्रीराम ने की थी रामेश्वरम् ज्योतिर्लिंग की स्थापना

शिवजी के 12 ज्योतिर्लिंग में से एक है तमिलनाड़ू के रामनाथपुरम् में स्थित रामेश्वरम् ज्योतिर्लिंग। रामेश्वरम् मंदिर की कथा श्रीराम से जुड़ी हुई है। मान्यता है कि इस शिवलिंग की स्थापना त्रेतायुग में स्वयं श्रीराम ने की थी। जानिए रामेश्वरम् ज्योतिर्लिंग से जुड़ी खास बातें…
रामायण के अनुसार त्रेता युग में श्रीराम ने धर्म की स्थापना के लिए अवतार लिया था। उस समय रावण की वजह से सृष्टि में अधर्म फैल रहा था। रावण एक ब्राह्मण था। इस वजह से रावण का वध करने पर श्रीराम पर ब्रह्म हत्या का पाप लगा था। ऋषियों ने श्रीराम को ब्रह्म हत्या के पाप का प्रायश्चित करने के लिए कहा। ऋषियों ने श्रीराम से कहा कि वे शिवलिंग स्थापित करके अभिषेक करें। इसके बाद वहां सीता द्वारा बनाया गया बालू का शिवलिंग स्थापित किया गया और श्रीराम ने उसकी पूजा की। इसी वजह से ज्योतिर्लिंग का नाम रामेश्वरम् पड़ा। यहां की गयी पूजा से शिवजी के साथ ही श्रीराम भी प्रसन्न होते हैं।
वर्तमान रामेश्वरम् मंदिर का निर्माण करीब 350 साल पहले किया गया था। यहां की शिल्पकला बहुत ही सुंदर है। मंदिर पूर्व से पश्चिम तक लगभग 1000 फीट और उत्तर से दक्षिण में लगभग 650 फीट क्षेत्र में फैला हुआ है। यहां के मुख्य द्वार पर लगभग सौ फीट ऊंचा एक गोपुरम् है। रामेश्वरम् मंदिर परिसर में धनुषकोटि, चक्रतीर्थ, शिव तीर्थ, अगस्त्य तीर्थ, गंगा तीर्थ, यमुना तीर्थ जैसे कुल 24 तीर्थ हैं। इन सभी तीर्थों के दर्शन करने के बाद ही रामेश्वरम् ज्योतिर्लिंग पर जल चढ़ाने का महत्व है। शिवलिंग पर सिर्फ गंगाजल चढ़ाने की परंपरा है। इसके लिए हरिद्वार से जल लाया जाता है।
हवाई मार्ग से रामेश्वरम् पहुंचने के लिए मदुरई एयरपोर्ट पहुंचना पड़ता है। मदुरई से 170 किमी दूर रामेश्वरम् स्थित है। यहां से सड़क मार्ग से मंदिर तक पहुंच सकते हैं। रामेश्वरम् से करीब 3 किमी दूर रेल्वे स्टेशन है। यहां देशभर के सभी बड़े शहरों से ट्रेनें पहुंचती हैं। सड़क मार्ग से भी ये तीर्थ सभी बड़े शहरों से जुड़ा हुआ है।
(साभार – दैनिक भास्कर)