Sunday, October 11, 2026
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अब्दुल जब्बार स्मृति शेषः भोपाल के लाखों गैस पीड़ितों का फ़रिश्ता चला गया

राजेश बादल
अब्दुल जब्बार अब नहीं हैं। दिल इस हकीक़त को मानने के लिए तैयार नहीं है। पैंतीस बरस से लाखों गैस पीड़ितों के लिए संसद से लेकर सड़क तक और सरकार से लेकर सुप्रीमकोर्ट तक अथक लड़ाई लड़ने वाले जब्बार इन दिनों अपने शरीर पर अनेक आक्रमणकारियों से लड़ाई लड़ रहे थे। सारी जवानी पीड़ित मानवता की खिदमत में होम करने वाले अब्दुल जब्बार गैस त्रासदी के सताए लोगों के लिए एक फ़रिश्ते से कम नहीं थे।
यूनियनकार्बाइड के इस घिनौने जुर्म के बाद पीड़ितों के लिए अनगिनत हितैषी और स्वयंसेवी संगठन सामने आए और अपनी दुकानें चमका कर चले गए। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय अवॉर्ड जीतकर चले गए। एक अब्दुल जब्बार था, जो मोर्चे पर डटा रहा। न हारा,न टूटा,न बिखरा। हत्यारी गैस ने उनके माता-पिता और भाई को छीन लिया था। उनके पचास फ़ीसदी फेफड़े खराब हो गए थे, लेकिन दिल के तूफ़ान कभी चेहरे पर नहीं आए। शायद ही कोई होगा जिसने मिलने पर उनके चेहरे पर मुस्कराहट न देखी हो। ज़िंदगी में अनेक झंझावात आए। कभी-कभी जब्बार भाई के चेहरे पर एक फ़ीकी उदासी दिखी, लेकिन अगले दिन से फिर वही जब्बार। लोगों की सेवा के लिए तैयार ।

पैंतीस बरस पहले मेरी मुलाक़ात जब्बार भाई से हुई थी। गैस त्रासदी के फौरन बाद। वह सत्ताईस साल के एक नौजवान सामजिक कार्यकर्ता और एक पत्रकार की मुलाक़ात थी। इसके बाद वे कब जब्बार भाई हो गए- याद नहीं। मुझसे साल डेढ़ साल बड़े थे, लेकिन बराबर जैसा ही मान दिया। कभी परेशान होते तो दिल के जख्म भी दिखाते और बाद में ख़ुद ही मरहम लगा लेते। यह सोचकर कि इनका कोई इलाज नहीं। दिल्ली प्रवास के कारण मुलाकातें कम हुईं ,लेकिन जब भी मिलते, उसी खूलूस के साथ। कभी संघर्ष में नया मोड़ आता या कोई नई सूचना आती तो उनका फ़ोन आता” राजेश भाई! कैमरा लेकर आ जाओ। मैं समझ जाता कि कोई बड़ी बात है। यूनियन कार्बाइड की उस हत्यारी मिथाइल आइसोसाईनेट गैस के असर से भोपाल के हज़ारों परिवारों की अनेक पीढ़ियां अब तक ज़हर का दंश झेल रही हैं। यह जब्बार का ही जज़्बा था कि भोपाल मेमोरियल अस्पताल की स्थापना कराई और लाखों पीड़ितों के लिए अत्याधुनिक चिकित्सा मुहैया कराई। गैस पीड़ित महिलाओं को रोज़गार दिलाने के लिए सिलाई सेंटर खोले और उनके घरों में चूल्हा जलवाया। बरसों तक ज़हरीली गैस के शिकार मरीज़ों के लिए मुआवजे की लड़ाई लड़ी।
यूनियन कार्बाइड के मुज़रिमों को अपराधी क़रार देने के लिए सर्वोच्च अदालत तक उनका संघर्ष बेमिसाल है। दुनिया भर के नियम क़ायदे-क़ानून उन्हें ज़बानी याद थे। मैंने करीब सत्रह-अठारह साल तक गैस त्रासदी पर लिखा। सारे घटनाक्रम कवर किए और टेलीविज़न के लिए रपटें बनाईं। जब भी कोई संशय होता,जब्बार भाई उनका निवारण करते। हम जब्बार पर भरोसा कर सकते थे,सरकार पर नहीं। जो आंकड़े उनके पास होते, वे किसी विभाग के पास नहीं होते। एक तरह से वे एन्साइक्लोपीडिया थे। पाँच बरस पहले राज्यसभा टीवी के लिए एक वृत्तचित्र बना रहा था तो उन्होंने तीस साल की फिल्म आंखों के सामने चला दी थी। दशकों से हर शनिवार भोपाल के यादगारे शाहजहानी पार्क में गैस पीड़ित इकट्ठे होते रहे हैं और हर सप्ताह के सुख दुःख बांटते रहे हैं। अब जब्बार भाई नहीं हैं तो पीड़ित एक तरह से अनाथ हो गए हैं। अपनी आंखों के सामने ऐसे लोगों को पद्म सम्मान मिलते देख रहा हूं कि ताज्जुब होता है। दुनिया की सबसे भीषण और भयावह त्रासदी का शिकार लोगों के लिए सारे विश्व भर में इकलौता संघर्ष न किसी राज्य सरकार को दिखाई दिया न केंद्र सरकार को।

जब्बार भाई ! आप हमारे दिल में हमेशा बसे रहेंगे।
(साभार – अमर उजाला)

महिलाओं को नजरअंदाज करने से वित्तीय क्षेत्र को हो रहा भारी नुकसान

नयी दिल्ली : वित्तीय क्षेत्र में महिलाओं को काफी कम जगह मिली है जिससे इस क्षेत्र को भारी नुकसान हो रहा है। अक्सर महिलाओं की जरूरतों के हिसाब से वित्तीय प्रोडक्ट पेश नहीं किया जाता है। उनकी जरूरतों को अनसुना करना वित्तीय सेक्टर के लिए घाटा साबित हुआ है। वित्तीय क्षेत्र को इससे एक साल में 700 अरब डॉलर का नुकसान हो रहा है।
ऐसा इसलिए क्योंकि ज्यादातर जेंडर न्यूट्रल नजर आने वाले प्रोडक्ट पुरुषों की जरूरत को ध्यान में रखकर बनाए जाते हैं। मैनेजमेंट कन्सल्टेंसी फर्म ऑलिवर वेमन (Oliver Wyman) ने इस संदर्भ में कहा है कि आमतौर पर महिलाओं की बातों को सुना नहीं जाता है या फिर उन्हें पहले से ही तय प्रोडक्ट बेचे जाते हैं। वहीं रिपोर्ट रिसर्चर जेसिका क्लेंपर (Jessica Clempner) ने भी कहा है कि वित्तीय सेक्टर में महिलाओं को ज्यादा जगह नहीं मिलती है। सबसे बड़ा समूह होने के बावजूद इसके पास फाइनेंस प्रोडक्ट की पहुंच सबसे कम है। जेसिका क्लेंपर का कहना है कि महिलाओं को सही प्रोडक्ट नहीं देने के चलते वित्तीय सेक्टर को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
इतना ही नहीं, कई बार ऐसा भी होता है कि जो प्रोडक्ट जेंडर न्यूट्रल नजर होते हैं, वे भी पुरुषों को ध्यान में रखकर बनाए जाते हैं। लेकिन ऐसे प्रोडक्ट महिलाओं की वित्तीय जीवन की जरूरतों को पूरा करने में असमर्थ होते हैं।
50 करोड़ डॉलर कमा सकते हैं बीमाकर्ता
इसके लिए ऑलिवर ने एक अनुमान भी लगाया है, जिसके अनुसार अगर बीमाकर्ता पुरुषों के रेट के बराबर ही महिलाओं को भी जीवन पॉलिसी बेचे तो ने नए प्रीमियम में 50 करोड़ डॉलर कमा सकते हैं। इसके अतिरिक्त ऑलिवर के अनुसार, महिलाएं शेयर और बॉन्ड के बजाय अपने असेट नकद में रखना पसंद करती हैं, जिससे वेल्थ मैनेजर्स को फीस के रूप में 25 अरब डॉलर का नुकसान होता है।

भारत के मुख्य न्यायाधीश का दफ्तर आरटीआई कानून के दायरे में आएगा : सुप्रीम कोर्ट

नयी दिल्ली : भारत के मुख्य न्यायाधीश का दफ्तर भी सूचना के अधिकार कानून (आरटीआई) के दायरे में आ गया है। सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसले में कहा कि मुख्य न्यायाधीश (सीजीआई) का दफ्तर सार्वजनिक कार्यालय है, इसलिए यह आरटीआई के दायरे में आएगा। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पाँच सदस्यीय संविधान पीठ ने दिल्ली हाई कोर्ट के 2010 के निर्णय को सही ठहराते हुए इसके खिलाफ हाई कोर्ट के सेक्रेटरी जनरल और शीर्ष अदालत के केंद्रीय सार्वजनिक सूचना अधिकारी की अपील खारिज कर दी। संविधान पीठ ने आगाह किया कि सूचना के अधिकार कानून का इस्तेमाल निगरानी रखने के हथियार के रूप में नहीं किया जा सकता है और पारदर्शिता के मुद्दे पर विचार करते समय न्यायपालिका की स्वतंत्रता को ध्यान में रखना चाहिए। यह निर्णय सुनाने वाली संविधान पीठ के बाकी सदस्यों में न्यायमूर्ति एन वी रमण, न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड़, न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूति संजीव खन्ना शामिल थे। संविधान पीठ ने कहा कि कॉलेजियम द्वारा न्यायाधीश पद पर नियुक्ति के लिए की गई सिफारिश में सिर्फ न्यायाधीशों के नामों की जानकारी दी जा सकती है लेकिन इसके कारणों की नहीं। प्रधान न्यायाधीश, न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना ने एक फैसला लिखा जबकि न्यायमूर्ति एन वी रमण और न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड़ ने अलग निर्णय लिखे। न्यायालय ने कहा कि निजता का अधिकार एक महत्वपूर्ण पहलू है और प्रधान न्यायाधीश के कार्यालय से जानकारी देने के बारे में निर्णय लेते समय इसमें और पारदर्शिता के बीच संतुलन कायम करना होगा। न्यायमूर्ति खन्ना ने कहा कि न्यायिक स्वतंत्रता और पारदर्शिता को साथ-साथ चलना है। न्यायमूर्ति रमण ने न्यायमूर्ति खन्ना से सहमति व्यक्त करते हुए कहा कि निजता के अधिकार और पारदर्शिता के अधिकार और न्यायपालिका की स्वतंत्रता के बीच संतुलन के फार्मूले को उल्लंघन से संरक्षण प्रदान करना चाहिए।
क्या कहा था दिल्ली हाईकोर्ट ने?
दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि सीजेआई का दफ्तर एक सार्वजनिक प्राधिकरण है और इसे सूचना के अधिकार कानून के अंतर्गत लाया जाना चाहिए। पीठ ने इस साल अप्रैल में इस याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया था। सीजेआई रंजन गोगोई ने पहले यह कहा था कि पारदर्शिता के नाम पर एक संस्था को नुकसान नहीं पहुंचाया जाना चाहिए। नवंबर 2007 में आरटीआई कार्यकर्ता सुभाष चंद्र अग्रवाल ने आरटीआई याचिका दाखिल कर सुप्रीम कोर्ट से जजों की संपत्ति के बारे में जानकारी मांगी थी जो उन्हें देने से इनकार कर दिया गया। अग्रवाल इसके बाद सीआईसी के पास पहुंचे और सीआईसी ने सुप्रीम कोर्ट से इस आधार पर सूचना देने को कहा कि सीजेआई का दफ्तर भी कानून के अंतर्गत आता है। इसके बाद जनवरी 2009 में सीआईसी के आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी गई हालांकि वहां भी सीजेआई के आदेश को कायम रखा गया।

रौला खलफ होंगी फाइनेंशियल टाइम्स की पहली महिला संपादक

फाइनेंशियल टाइम्स (एफटी) के 131 साल के इतिहास में पहली बार रौला खलफ इसको संपादित करने वाली पहली महिला बन जाएंगी। फाइनेंशियल टाइम्स के वर्तमान संपादक लियोनेल बार्बर जनवरी में अपना पद छोड़ देंगें। खलफ ने सल्मोन पिंक न्यूजपपेर में दो दशकों से अधिक समय के दौरान उप संपादक, विदेशी संपादक और मध्य पूर्व संपादक के रूप में कार्य किया है। हाल के वर्षों में उन्होंने ‘एफटी’ पर महिला पाठकों और पत्रकारों की संख्या बढ़ाने पर जोर देने की माँग की है।
उन्होंने कहा कि ‘दुनिया के सबसे बड़े समाचार संगठन ‘एफटी’ में संपादक के पद पर नियुक्त होना मेरे लिए एक महान सम्मान की बात है। मैं लियोनेल बार्बर की असाधारण उपलब्धियों को आगे बढ़ानेे के लिए उत्सुक हूं और वर्षों से उनकी सलाह के लिए आभारी हूं।’ लेबनान की खलफ, गार्जियन की कैथरीन विनर के साथ, ब्रिटेन में प्रमुख समाचार पत्रों को संपादित करने वाली कुछ महिलाओं में से एक हैं। साल 1995 में एफटी में शामिल होने से पहले, उन्होंने न्यूयॉर्क में फोर्ब्स पत्रिका में काम किया था।

भारतीय भाषा परिषद में युवाओं के लिए साहित्य संवाद

कोलकाता : साहित्य मानवीय संवेदना और मूल्यों का संरक्षण करता है । इससे विच्छिन्न होकर महानगर के लोग अपनी राष्ट्रीय संस्कृति की रक्षा नहीं कर सकते। खासकर हिन्दी भाषियों को साहित्य से प्रेम बढ़ाने की जरूरत है क्योंकि इसके बिना मातृभाषा की रक्षा नहीं की जा सकती। भारतीय भाषा परिषद और सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन द्वारा आयोजित साहित्य संवाद के वक्ताओं ने यह विचार व्यक्त किए। साहित्य संवाद की शुरुआत संगीतज्ञ रश्मि पांडे के काव्य संगीत से हुई । इसके बाद प्रियंकर पालीवाल, सेराज खान बातिश, रामकेश सिंह, मधु सिंह, राहुल गौड, सूर्य देव राय ने स्वरचित कविता पाठ किया। विश्वभारती की शोध छात्रा प्रोफेसर गुलनाज बेगम ने स्त्री जीवन के अधिकारों के संबंध में चित्रा मुदगल के उपन्यासों का हवाला देकर कहा कि, स्त्रियों की दशा समाज में अभी भी खराब है और उन्हें बराबरी का अधिकार मिलना चाहिए। खिदिरपुर कॉलेज की शिक्षिका प्रोफेसर इतु सिंह ने कहा कि आजादी के पहले के भारत को समझना हो तो प्रेमचंद का साहित्य पढ़ना होगा और आजादी के बाद के भारत की जानकारी हरिशंकर परसाई के व्यंग्य साहित्य से होती है ।आज समाज में व्यंग्य की भूमिका बढ़ गई है ।भारतीय भाषा परिषद की मंत्री विमला पोद्दार ने कहा कि साहित्य के विकास के लिए युवाओं को आगे आना होगा। सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन के संयुक्त महासचिव संजय जायसवाल ने कहा कि साहित्य संवाद युवा पीढ़ी के रचनाकारों तथा वरिष्ठ लेखकों के बीच संवाद का मंच है । भारतीय भाषा परिषद भाषाओं के बीच सेतु निर्माण के साथ नई पीढ़ी में साहित्यिक रुचि पैदा करना चाहता है।
अध्यक्षीय भाषण देते हुए सांस्कृतिक पुर्ननिर्माण मिशन के अध्यक्ष और भारतीय भाषा परिषद के निदेशक डॉक्टर शंभुनाथ ने कहा कि साहित्य जीवन जीने की एक कला है जो मनुष्य को रूढ़ियों और भेदभाव से मुक्त करती है और उच्च मानवीय भावनाओं की ओर ले जाती है । संस्था के महासचिव राजेश मिश्र ने कहा कि साहित्य संवाद का यह मंच नई पीढ़ी के रचनाकारों को सृजनात्मक संस्कार प्रदान करता है । धन्यवाद ज्ञापन करते हुए रामनिवास द्विवेदी ने कहा कि युवाओं की पीढ़ी ही साहित्य को समाज में बचाएगी और हिन्दी से प्रेम का विस्तार करेगी।

रक्तदान शिविर के माध्यम से छात्राओं ने दिया मानवता का सन्देश

कोलकाता : सुशीला बिड़ला गर्ल्स स्कूल की सामाजिक सेवा इकाई स्नेह कमेटी ने हाल ही में रक्तदान शिविर आयोजित किया। शिविर का उद्घाटन स्टेट इलेक्ट्रिसिटी डिपार्टमेंट के वरिष्ठ सलाहकार सी वी मुरलीधर ने किया। इस अवसर पर प्रोजेक्ट लाइफ फोर्स के संस्थापक सदस्य दानिश सेठ ने प्रेरक वक्तव्य दिया। कार्यक्रम में सुशीला बिड़ला गर्ल्स स्कूल की अध्यक्ष एस. बिड़ला भी उपस्थित रहीं। यह रक्तदान शिविर गैर सरकारी संगठन प्रोजेक्ट लाइफ फोर्स के साथ साझा तौर पर आयोजित किया गया था।

हर साल की तरह इस बार यह आयोजन एक विषय यानी थीम पर केन्द्रित था और वह थीम थी ‘कुरुक्षेत्र…द बैटल फॉर ब्लड’ मगर इस कुरुक्षेत्र का अन्दाज बहुत अलग था और कार्यक्रम स्थल की सजावट भी इस थीम को ध्यान में रखकर की गयी थी..यहाँ रक्तदान के माध्यम से जीवन बचाने का संकल्प था..जीवन देने की दृढ़ता थी। पहली बार रक्तदान करने वाले रक्तदाताओं को उत्साहित करने के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रम भी पेश किये गये। रक्तदान शिविर में 142 लोगों ने रक्तदान किया। यह थीम भी छात्राओं का ही विचार थी। शिविर को सफल बनाने में स्नेह कमेटी की सभी सदस्याओं तथा शिक्षिकाओं का योगदान रहा।

मृत्युंजय कुमार सिंह को साहित्य सेवी सम्मान

देवघर : देवघर में चल रहे 19वें पुस्तक मेला में इस बार मृत्युंजय कुमार सिंह महाविद्या संस्था की ओर से ‘साहित्य सेवी” सम्मान से नवाजे जायेंगे। मृत्युंजय जी पश्चिम बंगाल कैडर के आई.पी.एस. अधिकारी हैं। वे वर्तमान में कमांडेंट जनरल एवं पुलिस महानिदेशक (होमगॉर्ड), पश्चिम बंगाल के पद पर कार्यरत हैं। वे हिन्दी और भोजपुरी के लेखक, कवि, स्तंभकार, गीतकार और लोक गायक भी हैं। जवाहरलाल नेहरू भारतीय संस्कृति केन्द्र एवं संस्कृति मंत्रालय में भी उनका अहम योगदान रहा है। मृत्युंजय सिंह 23 जनवरी 2020 को पुस्तक मेला में उस दिन के विशेष सम्मानित अतिथि होंगे। साथ ही भारत की भाषा नीति और भारतीय संस्कृति पर परिचर्चा के मुख्य वक्ता होंगे। उनके लेखन, उपन्यास और कवि हृदय के प्रसंगों पर तो चर्चा होगी ही, साथ ही उनका विरल भोजपुरी गायन के रसास्वादन का भी अवसर मिलेगा। इसी दिन समारोहपूर्वक उन्हें “साहित्य सेवी” सम्मान से अलंकृत किया जायेगा

आधुनिक भारत के निर्माता पंडित जवाहर लाल नेहरू

पंडित जवाहरलाल नेहरू का जन्म 14 नवंबर 1889 इलाहाबाद के एक धनाढ्य परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम मोतीलाल नेहरू और माता का नाम स्वरूपरानी था। पिता पेशे से वकील थे। उनकी 3 पुत्रियां थीं और जवाहरलाल नेहरू उनके इकलौते पुत्र थे। वे स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री थे। बच्चों के प्यारे ‘चाचा नेहरू’ के रूप में पंडित जवाहरलाल नेहरू देश को प्रगति के पथ पर ले जाने वाले खास पथप्रदर्शक थे।

जवाहरलाल नेहरू को दुनिया के बेहतरीन स्कूलों और विश्वविद्यालयों में शिक्षा प्राप्त करने का मौका मिला था। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा हैरो और कॉलेज की शिक्षा ट्रिनिटी कॉलेज, लंदन से पूरी की थी। उन्होंने अपनी लॉ की डिग्री कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से पूरी की। हैरो और कैम्ब्रिज में पढ़ाई कर 1912 में नेहरूजी ने बार-एट-लॉ की उपाधि ग्रहण की और वे बार में बुलाए गए।

पंडित नेहरू शुरू से ही गांधीजी से प्रभावित रहे और 1912 में कांग्रेस से जुड़े। 1920 के प्रतापगढ़ के पहले किसान मोर्चे को संगठित करने का श्रेय उन्हीं को जाता है। 1928 में लखनऊ में साइमन कमीशन के विरोध में नेहरू घायल हुए और 1930 के नमक आंदोलन में गिरफ्तार हुए। उन्होंने 6 माह जेल काटी। 1935 में अलमोड़ा जेल में ‘आत्मकथा’ लिखी। उन्होंने कुल 9 बार जेल यात्राएं कीं। उन्होंने विश्वभ्रमण किया और वे अंतरराष्ट्रीय नायक के रूप में पहचाने गए। उन्होंने 6 बार कांग्रेस अध्यक्ष के पद (लाहौर 1929, लखनऊ 1936, फैजपुर 1937, दिल्ली 1951, हैदराबाद 1953 और कल्याणी 1954) को सुशोभित किया। 1942 के ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में नेहरूजी 9 अगस्त 1942 को बंबई में गिरफ्तार हुए और अहमदनगर जेल में रहे, जहां से 15 जून 1945 को रिहा किए गए।

नेहरू ने ‘पंचशील’ का सिद्धांत प्रतिपादित किया और 1954 में ‘भारतरत्न’ से अलंकृत हुए नेहरूजी ने तटस्थ राष्ट्रों को संगठित किया और उनका नेतृत्व किया। सन् 1947 में भारत को आजादी मिलने पर जब भावी प्रधानमंत्री के लिए कांग्रेस में मतदान हुआ तो सरदार वल्लभभाई पटेल और आचार्य कृपलानी को सर्वाधिक मत मिले थे, किंतु महात्मा गांधी के कहने पर दोनों ने अपना नाम वापस ले लिया और जवाहरलाल नेहरू को प्रधानमंत्री बनाया गया।

‘स्वाधीनता और स्वाधीनता की लड़ाई को चलाने के लिए की जाने वाली कार्रवाई का खास प्रस्ताव तो करीब-करीब एकमत से पास हो गया। …खास प्रस्ताव इत्तफाक से 31 दिसंबर की आधी रात के घंटे की चोट के साथ, जबकि पिछला साल गुजरकर उसकी जगह नया साल आ रहा था, मंजूर हुआ।’ -लाहौर अधिवेशन में स्वतंत्रता प्रस्ताव पारित होने के बारे में नेहरू की ‘मेरी कहानी’ से।

नेहरू के कार्यकाल में लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूत करना, राष्ट्र और संविधान के धर्मनिरपेक्ष चरित्र को स्थायी भाव प्रदान करना और योजनाओं के माध्यम से देश की अर्थव्यवस्था को सुचारु करना उनके मुख्य उद्देश्य रहे।

नेहरू पाकिस्तान और चीन के साथ भारत के संबंधों में सुधार नहीं कर पाए। उन्होंने चीन की तरफ मित्रता का हाथ भी बढ़ाया, लेकिन 1962 में चीन ने धोखे से आक्रमण कर दिया। चीन का आक्रमण जवाहरलाल नेहरू के लिए एक बड़ा झटका था और शायद इसी वजह से उनकी मौत भी हुई। जवाहरलाल नेहरू को 27 मई 1964 को दिल का दौरा पड़ा जिसमें उनकी मृत्यु हो गई।

पंडित नेहरू के निधन के बाद सर्वपल्ली डॉ. राधाकृष्णन ने कहा था- ‘जवाहरलाल नेहरू हमारी पीढ़ी के एक महानतम व्यक्ति थे। वे एक ऐसे अद्वितीय राजनीतिज्ञ थे जिनकी मानव-मुक्ति के प्रति सेवाएं चिरस्मरणीय रहेंगी। स्वाधीनता-संग्राम के योद्धा के रूप में वे यशस्वी थे और आधुनिक भारत के निर्माता थे।’

पंडित जवाहरलाल नेहरू 1947 में स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री बने। आजादी के पहले गठित अंतरिम सरकार और आजादी के बाद 1947 में भारत के प्रधानमंत्री बने और 27 मई 1964 को उनके निधन तक वे इस पद पर बने रहे।

नहीं रहीं बांग्ला साहित्यकार नवनीता देव सेन

कोलकाता : मशहूर साहित्यकार नवनीता देव सेन का निधन हो गया। वे कैंसर से पीड़ित थीं। वह 81 वर्ष की थीं। अपने पीछे वह दो बेटियों को छोड़ गई हैं। बेटी अंतरा लेखिका हैं, वहीं दूसरी बेटी नंदना एक्ट्रेस हैं। कैंसर की वजह से पिछले 10 दिनों से उनकी हालत बेहद खराब हो गई थी। नवनीता देव कविता, उपन्यास, लघु कथाओं के साथ ही कॉलम भी लिखती थीं। उनकी कई कविताएं और उपन्यास पाठकों के बीच खासे लोकप्रिय रहे। उनकी लेखनी की धार की वजह से उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार के साथ ही पद्मश्री सम्मान से भी नवाजा गया था। नवनीता ने ऑक्सफोर्स यूनिवर्सिटी और यूएस के कोलोरेडो कॉलेज में शिक्षक के तौर पर भी सेवाएं दी थीं। उन्होंने जादवपुर यूनिवर्सिटी में भी कई लेक्चर दिए।

पद्मश्री, साहित्य अकादेमी पुरस्कार से हुईं थी सम्मानित

बांग्ला भाषा की प्रसिद्ध साहित्यकार रहीं नवनीता देव सेन को ‘नटी नवनीता’ के लिए साल 1999 में साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। वहीं साल 2000 में उन्हें पद्मश्री से नवाजा गया था। इसके अलावा पूरे जीवन काल में उन्हें अपनी कविता, लघु कथाओं और साहित्य रचना की वजह से कई बार पुरस्कृत किया गया। इनके निधन की खबर सामने आने के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी शोक व्यक्त किया है। बनर्जी ने ट्वीट करते हुए लिखा कि ‘नवनीता देव सेन के निधन से दुखी हूं। उनकी कमी उनके चाहने वालों और उनके छात्रों को खलती रहेगी। मेरी उनके परिवार के सदस्यों और प्रशंसकों के प्रति संवेदनाएं हैं।’ नवनीता देव सेन का 1958 में अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन से विवाह हुआ था। जिन्हें बाद में नोबेल पुरस्कार से नवाजा गया था। हालांकि साल 1976 में दोनों में तलाक हो गया था।

90 रुपये में खरीदा वास, 300 साल पुराना निकला, 4.4 करोड़ रु. में बिका

लंदन : यूनाइटेड किंगडम के एक व्यक्ति ने 90 (एक पाउंड) रुपए में हार्टफोर्डशायर चैरिटी शॉप की नीलामी में एक चीनी वास (फूलदान) खरीदा। तब व्यक्ति को वास के महत्व के बारे में पता नहीं था। कुछ दिन बाद व्यक्ति ने इसे ईबे पर बेचने की कोशिश की। यहां से उसे कई ऑफर मिले। इससे व्यक्ति की जिज्ञासा बढ़ी और उसने इसकी नीलामी का फैसला किया। वास को चीन के एक व्यक्ति ने 3.48 करोड़ रुपये में खरीदा। सभी तरह के टैक्स जमा करने के बाद वास की कीमत करीब 4.4 करोड़ रुपये तक पहुंच गयी।
नीलामी में पता चला वास का महत्व
पीले रंग के वास का महत्व जानने के लिए इसे स्टैन्स्टेड माउंटफिटचेट, एसेक्स स्थित स्वोर्डस फाइन आर्ट के नीलामी घर लाया गया। जहां नीलामी के दौरान इससे जुड़ी जानकारी मिली। यह 18वीं सदी के एक चीनी सम्राट कियानलोंग ( शासनकाल-1735 से 1796) के लिए बनाया गया था। वास पर कियानलोंग राजवंश मुहर की मुहर भी लगाई जाती थी। कियानलोंग सम्राट किंग वंश का छठवां सम्राट था। उन्होंने अपने बेटे जियाक्विंग को सम्राट बनाने के लिए राज्य 1796 में त्याग दिया था। इसके तीन साल बाद 1799 में 87 साल की उम्र में उनकी मृत्यु हो गई। कियानलोंग के शासन काल में वास का निर्यात विदेशों को नहीं बेचा जा सकता था। वास पर राजवंश की प्रशंसा में कविता अंकित की जाती थी। इन पर दो अन्य तरह के निशान भी होते थे जो सम्राट कियानलॉन चेन हां का शाही निशान होता था। इसे वेइजिंग वेइयी पढ़ा जाता है।
तीन के भविष्य पर खर्च होगी रकम
स्वोर्डस में एशियन आर्ट डिपार्टमेंट की प्रमुख येक्सू ली ने कहा, विक्रेता चैरिटी शॉप के समय मौजूद था। उन्हें वास के महत्व के बारे में जानकारी नहीं थी, उन्हें इसका डिजाइन पसंद था। बिक्री से मिली रकम का इस्तेमाल वह अपनी तीन साल की बेटी के भविष्य पर खर्च करेगा।