कॉटन और नोवोवन के ये मास्क सैनिटाइज करके बनाए जा रहे हैं
ग्वालियर : कोरोनावायरस से बचाव के लिए जरूरी मास्क और सैनिटाइजर की किल्लत से निपटने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके चलते प्रशासन की पहल पर मास्क बनाने का जिम्मा गांव की महिलाओं ने संभाल लिया है। जिले में आठ महिला समूहों की सदस्यों ने मास्क बनाना शुरू कर दिया है। ये मास्क यहां फूलबाग स्थित हाट बाजार में सरकार द्वारा तय रेट 10 रुपए प्रति नग की दर से उपलब्ध कराए जा रहे हैं। जबकि, बाजार में इन्हें 25 रुपए तक बेचा जा रहा है।
उचित मूल्य पर सैनिटाइजर उपलब्ध कराने के लिए डिस्टलरीज से बातचीत हुई है। सैनिटाइजर के लिए अंतिम निर्णय होने पर 10 से ज्यादा सार्वजनिक स्थान तलाशे जाएंगे। यहीं से सैनिटाइजर की बिक्री प्रारंभ होगी।
46 महिलाओं ने अब तक 900 से ज्यादा मास्क बनाए
कोरोनावायरस के कारण मास्क की माँग अचानक बढ़ गई है। स्टैंडर्ड माने जाने वाले एन-95 मास्क तो अब बाजार से गायब हैं। इसी कारण जिला पंचायत सीईओ शिवम वर्मा के निर्देश पर 8 समूहों की 46 महिलाएं अभी तक 900 से ज्यादा मास्क बना चुकी हैं। कॉटन व नोवोवन के ये मास्क सैनिटाइज करके बनाए जा रहे हैं। इनकी सप्लाई सीएमएचओ कार्यालय व अन्य स्वास्थ्य संस्थान में की जा चुकी है। प्रशासन ने कुछ और महिलाओं को इस काम में जोड़कर उन्हें लगभग दो लाख मास्क बनाने का जिम्मा सौंपा है। उल्लेखनीय है कि मप्र राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत जिले में 2375 समूह गठित हैं। इनसे जुड़ीं 862 महिलाएं सिलाई का काम करती हैं।
सैनिटाइजर बिक्री के लिए शहर में काउंटर बनेंगे
प्रशासन ने रायरू स्थित शराब फैक्टरी से सैनिटाइजर तैयार कर उसकी पैकिंग करने को कहा है। रायरू डिस्टलरी रक्षा अनुसंधान एवं विकास स्थापना(डीआरडीई) ग्वालियर को शुरू में 20 हजार लीटर स्प्रिट सप्लाई करेगी। रायसेन स्थित सोम डिस्टलरी में भी सैनिटाइजर बनाने के लिए प्लांट लगाया जा रहा है। चूंकि बाजार में सैनिटाइजर की कमी है। इसी कारण कम कीमत पर सेनिटाइजर की व्यवस्था प्रशासन कर रहा है। एडीएम किशोर कन्याल ने कहा कि क्वालिटी कंट्रोल की जिम्मेदारी सक्षम विभाग को सौंपी जाएगी। एक लीटर सैनिटाइजर की बोतल 100 रुपए में मुहैया कराने की प्लानिंग है। बातचीत पूरी होने पर शहर में इसकी बिक्री के लिए कुछ काउंटर तय कर देंगे।
गाँव की महिलाओं ने सम्भाला मास्क बनाने का जिम्मा, कीमत 10 रु. सेनिटाइजर 100 रुपये में मिलेगा
वॉट्सऐप ला रहा नया फीचर,बताएगा सन्देश सही है या फर्जी
कोरोनावायरस (Covid-19) तेजी से दुनियाभर में फैल रहा है। वायरस की चपेट में 195 देश आ चुके हैं और अबतक 16 हजार से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं। भारत में इस महामारी को रोकने के लिए कई राज्यों में कर्फ्यू लगा दिया गया है। ऐसे में लोग घर पर बैठे-बैठे कोरोना और अन्य मामलों से जुड़ी जानकारियों को ऑनलाइन शेयर कर रहे हैं इनमें से कुछ को सही है तो कुछ फेक। इन्हें शेयर करने का सबसे बड़ा सोर्स है वॉट्सऐप जिसपर इस समय धड़ल्लें से कोरोनावायरस से जुड़ें सन्देश शेयर किए जा रहे हैं जबकि इस समय लोगों को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। ऐसे में अफवाहों को वायरल होने से रोकने के लिए वॉट्सऐप भी लगातार कोशिशें कर रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी एक ऐसे फीचर पर काम कर रही है जिससे यूजर के पास आए मैसेज की सत्यता की पुष्टि की जा सकेगी। इससे यह पता लगाया जा सकेगा मैसेज सही है या अफवाह मात्र है। उम्मीद की जा रही है कि इससे फेक मैसेज पर काफी हद तक लगाम लगाई जा सकेगी। कंपनी ने भी यह कंफर्म किया है कि इस फीचर की टेस्टिंग कर रही है।
कैसे काम करेगा ये फीचर
मुंबई मिरर की एक रिपोर्ट के मुताबिक, वॉट्सऐप का नया फीचर मैग्नीफाइंग ग्लास की तरह होगा। यह मैग्नीफाइंन ग्लास का आइकन यूजर के पास आए मैसेज की ठीक बगल में दिखाई देगा। ये फीचर मैसेज के कंटेंट को वेब ब्राउजर पर सर्च करेगा।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस मैग्नीफाइंग ग्लास आइकन पर क्लिक करते ही एक पॉप सामने आएगा जो यूजर से पूछेगा कि क्या आप इस मैसेज को वेब पर सर्च करना चाहते हैं। परमिशन मिलने पर यह मैजेस गूगल सर्च में पेस्ट हो जाएगा।
यह ठीक वैसा है जैसे हम किसी मैसेज को कॉपी कर वेब ब्राउजर पर पेस्ट करके सर्च करते हैं लेकिन यह फीचर इसी काम के लिए शार्टकट के तौर पर काम करेगा।
रिपोर्ट के मुताबिक, यह फीचर बीटा टेस्टर के लिए रोल आउट होना शुरू हो चुका है और जल्द ही इसे वर्जन के लिए भी जारी कर दिया जाएगा।
पहली बार चैत्र नवरात्रि में जम्मू से मदुरै तक माता मंदिरों में भक्तों पर रोक, विदेशों के 13 शक्तिपीठ भी बंद
भारत के साथ श्रीलंका, बांग्लादेश और नेपाल सहित सभी शक्तिपीठ वाले देशों में कोरोना का असर
आज बुधवार से चैत्र नवरात्र और हिंदु नववर्ष शुरू हो रहे हैं। इतिहास में संभवतः पहला ही मौका होगा जब देश में जम्मू के वैष्णोदेवी से मदुरै के मीनाक्षी मंदिर तक सारे माता मंदिर नवरात्र में भक्तों के लिए बंद रहेंगे। मंदिरों में नवरात्र की सारी विधियां और पूजन तो होंगे लेकिन उनका दर्शन करने वाले नहीं होंगे। कोरोना वायरस के चलते देश के सारे मंदिर इस समय आम लोगों के लिए बंद हैं, सिर्फ पंडे-पुजारियों को ही मंदिरों में प्रवेश मिल रहा है। ऐसे में चैत्र नवरात्र पर ना तो बाहरी लोग दर्शन कर सकेंगे, ना मंदिर के किसी आयोजन में हिस्सा ले सकेंगे। ज्यादातर मंदिरों ने भक्तों के लिए यू-ट्यूब चैनल्स और मंदिर की वेबसाइट्स पर लाइव स्ट्रिमिंग की व्यवस्था की है। वहीं, तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम् ट्रस्ट ने भी अपना 9 दिनी राम जन्म और विवाह उत्सव को रद्द कर दिया है। देशभर में राम नवमी के उत्सवों पर भी भारी असर पड़ने वाला है।
भारत में नवरात्रि एक बड़ा उत्सव है। चैत्र नवरात्रि इसलिए भी खास है क्योंकि ये हिंदु नववर्ष का पहला दिन है। इस दिन ही विक्रम संवत के नए संवत्सर की शुरुआत होती है। 25 मार्च को हिंदु संवत्सर 2077 शुरू होगा। इसके साथ ही नवरात्रि के आखिरी दिन नवमी तिथि को भगवान राम का जन्मोत्सव मनाया जाता है। चैत्र मास के शुक्लपक्ष की नवमी को राम जन्म और पूर्णिमा पर हनुमान जन्मोत्सव मनाया जाता है। भारत में देवी के 51 शक्तिपीठों में से 38 भारत में है, 6 बांग्लादेश, 3 नेपाल, 2 पाकिस्तान, 1 तिब्बत और एक श्रीलंका में मौजूद है। इस बार पहली बार ऐसा हो रहा है, जब लगभग सभी 51 शक्तिपीठ वाले देश एक सी समस्या से ग्रसित हैं, और लगभग किसी भी मंदिर में भक्तों के लिए इस नवरात्रि में प्रवेश की अनुमति नहीं है।
हिमाचल के तीनों माता मंदिर बंद
हिमाचल प्रदेश के तीनों माता मंदिर ज्वाला देवी, बृजेश्वरी माता मंदिर और कांगड़ा का चामुंडा माता मंदिर में 31 मार्च तक दर्शनार्थियों का प्रवेश बंद रहेगा। यहां नवरात्रि की सारी पूजाएं और विधियां परंपरा के मुताबिक ही होंगी। मंदिर कोरोना वायरस अटैक के चलते 17 मार्च से बंद हैं। यहां प्रशासन ने दर्शन के लिए दो तरह की व्यवस्थाएं की हैं। मंदिरों की यू-ट्यूब चैनल्स और ऑफिशियल वेबसाइट्स पर लाइव स्ट्रिमिंग के जरिए दर्शन कराए जाएंगे।
कामाख्या मंदिर, असम अगले आदेश तक बंद
गुवाहाटी के नीलांचल पर्वत पर स्थित तंत्र पीठ कामाख्या मंदिर देश के उन चंद मंदिरों में से एक है, जहां कभी भक्तों की संख्या में कमी नहीं आती। नवरात्रि में तो यहां ज्योतिष और तंत्र साधना करने वालों का मेल लगता है। मंदिर के लिए नवरात्र ही सबसे बड़ा उत्सव है। लेकिन, 18 मार्च को मंदिर अगले आदेश तक आम लोगों के लिए बंद कर दिया गया है। मंदिर के जुड़े लोगों का कहना है कि इतिहास में संभवतः पहली ही बार ऐसा हुआ है, जब चैत्र नवरात्रि के दौरान मंदिर में लोगों का प्रवेश नहीं हो पाएगा। मंदिर की वेबसाइट माता कामाख्या ओआरजी पर दर्शन कर पाएंगे।
तिरुपति ट्रस्ट का राम नवमी ब्रह्मोत्सव में निरस्त
तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम् ट्रस्ट के ही आंध्र प्रदेश के वोंतिमित्ता में स्थिति कोदंड रामास्वामी मंदिर में रामनवमी से शुरू होने वाले ब्रह्मोत्सव को निरस्त कर दिया है। नौ दिन के इस ब्रह्मोत्सव की शुरुआत 2 अप्रैल से रामजन्मोत्सव के साथ होनी थी। 7 अप्रैल को यहां सीताराम कल्याणम् (सीता-राम विवाह) का आयोजन भी होना था, जिसमें बड़ी संख्या में भक्त एकत्रित होते हैं। ये सीताराम विवाह का आयोजन मंदिर में ही होगा, लेकिन इसमें आम लोगों को आने की अनुमति नहीं होगी। मंदिर के पुजारी और अधिकारी ही इसे आयोजित करेंगे।
अंबाजी मंदिर, गुजरात 31 तक दर्शन बंद
गुजरात के शक्तिपीठ अंबाजी में भी 31 मार्च तक आम लोगों को प्रवेश नहीं दिया जा रहा है। गुजरात के पांचों प्रमुख तीर्थ सोमनाथ, द्वारिका, अंबाजी, डाकोरजी और पावागढ़ में पिछले हफ्ते ही आम लोगों का प्रवेश रोक दिया गया था। यहां भी नवरात्रि के सारे पूजन-अनुष्ठान तय रूप में ही होंगे लेकिन दर्शन यू-ट्यूब और भक्ति चैनल्स के जरिए किए जा सकेंगे।
हरसिद्धि मंदिर उज्जैन भी अगले आदेश तक बंद
उज्जैन के शक्तिपीठ हरसिद्धि में भी आम लोगों के लिए दर्शन व्यवस्था स्थगित रहेगी। मंदिर में हर साल चैत्र और शारदीय नवरात्र में बड़ी संख्या में लोग आते हैं। दर्शन करने वालों के साथ ही अलग-अलग तरह की साधनाएं करने वाले भक्त भी आते हैं। यहां मंदिर में पूरे दिन अलग-अलग तरह की पूजा-अनुष्ठान होते हैं, जो कोरोना के बावजूद भी होंगे। मंदिर के फेसबुक पेज और यू-ट्यूब पर मंदिर के दर्शन किए जा सकते हैं।
(साभार – दैनिक भास्कर)
भारत में सदियों से है क्वारैंटाइन, दुनिया के कई देश भी अपनाते रहे हैं
नवजात-मां को अलग रखने जैसी कई प्रथाएं, भगवान जगन्नाथ भी 14 दिन अलग रहते हैं
कोरोना के कहर से दुनियाभर में 10 हजार से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं। सबसे ज्यादा इटली में हुईं। ऐसे में दुनिया क्वारैंटाइन यानी कुछ समय के लिए अलग-थलग रहने का तरीका अपना रही है। यह शब्द इटली के क्वारंटा जिओनी से जन्मा है, जिसका अर्थ है 40 दिन का। 600 साल पहले प्लेग से बचने के लिए इटली ने इसे शुरू किया। खास बात यह है कि भारत में यह तरीका सदियों से चला आ रहा है। इनमें नवजात और मां को 10 दिन अलग रखना, किसी की मृत्यु के बाद दूर रहने जैसी कई प्रथाएं हैं। ये क्वारैंटाइन के ही रूप हैं।
भारत: पुरी में भगवान जगन्नाथ हर साल 14 दिन अलग रहते हैं। मान्यता है कि ज्येष्ठ पूर्णिमा से अमावस्या तक वे बीमार पड़ते हैं। इस दौरान उन्हें जड़ी-बूटियों का पानी दिया जाता है।
पेड़-पौधों के लिए भी क्वरैंटाइन नीति
भारत में तो पेड़-पौधों तक के लिए क्वारैंटाइन पॉलिसी बनाई गई है। इस पॉलिसी का उद्देश्य पर्याप्त नीतिगत और वैधानिक उपायों के जरिए महत्वपूर्ण पेड़-पौधों और ऐसे उत्पादों को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों और बीमारियों को रोकना है। इस नीति को प्लांट प्रोटेक्शन, क्वारैंटाइन एंड स्टोरेज डायरेक्टोरेट की देखरेख में लागू किया जाता है। यह विभाग कृषि मंत्रालय के तहत काम करता है।
फ्रांस: फ्रांस में क्वारैंटाइन को कॉर्डन संस्कार कहते हैं। इसमें किसी समुदाय, क्षेत्र या देश में आवाजाही पर प्रतिबंध होता है, ताकि संक्रमण रुक सके। 1523 में माल्टा में प्लेग फैलने के बाद कॉर्डन सैनिटेयर शुरू किया था।
बाइबिल: सातवीं सदी या शायद पहले लिखी लेविटस की बाइबिल की किताब में संक्रमण से बचने के लिए अलग रहने का उल्लेख है। इसकी प्रक्रिया मोजेक कानून के तहत बताई गई है।
बौद्ध धर्म: 8वीं सदी में बोधायन और गौतम सूत्र में नवजात-माता और मृत व्यक्ति के रिश्तेदारों को संक्रमण से बचने के लिए कम से कम 10 दिन अलग रहने की बात कही गई है।
इस्लामिक वर्ल्डः 706 ईस्वी में उमय्यद खलीफा अल वालिद प्रथम ने दमिश्क में कुष्ठ रोग पीड़ित लोगों को अलग रखा। 1431 में ज्यादातर देशों ने इन पर अनिवार्य क्वारैंटाइन लागू किया।
(साभार – दैनिक भास्कर)
3 महीने तक किसी भी एटीएम से पैसे निकालने पर चार्ज नहीं, खातों में मिनिमम बैलेंस भी जरूरी नहीं
नयी दिल्ली : देश कोरोनावायरस के संक्रमण से संघर्ष कर रहा है। इस बीच, सरकार ने आम आदमी, कारोबारियों और संकट में घिरे उद्योगों के लिए कई राहतभरी घोषणाएं कीं। वित्त मंत्रालय के अधिकारियों के साथ वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मौजूदा हालात पर प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने कहा कि उद्योगों के लिए राहत पैकेज का ऐलान जल्द किया जाएगा। निर्मला ने कहा- अगले तीन महीने तक किसी भी एटीएम से पैसे निकालने पर कोई चार्ज नहीं देना होगा। बैंक खातों में मिनिमम बैलेंस रखने की शर्त को भी खत्म कर दिया गया है। वित्त मंत्री ने कहा कि इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने और पैन-आधार लिंक करने की तारीख भी 30 जून तक बढ़ा दी गई है।
आम आदमी के लिए सरकार की तरफ से राहत के 4 कदम
3 महीने तक किसी भी एटीएम से पैसे निकालने पर चार्ज नहीं लगेगा
खातों में मिनिमम बैलेंस रखना भी जरूरी नहीं
आईटीआर रिटर्न फाइल करने की तारीख भी 30 जून तक बढ़ाई गई
पैन-आधार लिंक करने की तारीख भी 30 जून तक बढ़ाई गई
उद्योगों को राहत के लिए सरकार का ऐलान
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जीएसटी, सीमा एवं उत्पाद शुल्क, दिवालिया कानून, बैंकिंग, फिशरी आदि से संबंधित कई प्रकार की घोषणाएं की। अधिकतर मामलों में आखिरी तारीख 30 जून तक बढ़ा दी गई है। 2018-19 के लिए देरी से इनकम टैक्स रिर्टन भरने की अंतिम तारीख 31 मार्च से बढ़कर 30 जून कर दी गई है। इस पर लगने वाले ब्याज 12 से घटाकर 9 प्रतिशत कर दिया गया है। टीडीएस को देर से जमा करने पर ब्याज की दर 18% से घटाकर 9% की गई है। टीडीएस में देरी से पेमेंट करने पर लगने वाले ब्याज को 18% से घटाकर 9% कर दिया गया है। वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए इनकम टैक्स फाइल करने के लिए आखिरी तरीख 30 जून तक बढ़ाई गई।
विवाद से विश्वास स्कीम और आधार-पैन लिंक की तारीख भी बढ़ाकर 30 जून की गई। 5 करोड़ रुपए से कम टर्नओवर वाली कंपनियों को लेट जीएसटी फाइलिंग पर कोई ब्याज, पेनाल्टी और लेट फीस नहीं लगेगी। मार्च-अप्रैल-मई में फाइलिंग की तारीख 30 जून तक बढ़ाई गई। आयातकों और निर्यातकों को भी राहत, कस्टम क्लियरेंस अब 30 जून तक जरूरी सेवाओं में शामिल। 24 घंटे काम करेगी। इस वर्ष कंपनियों के डायरेक्टरों को 182 दिन देश में रहने की अनिवार्यता से राहत दी गई।
एक करोड़ से कम का कारोबार करने वाली कंपनियों के खिलाफ दिवाली प्रक्रिया नहीं शुरू की जाएगी।
संक्रमण के चलते मंदी की ओर अर्थव्यवस्था
कोरोनावायरस फैलने से पहले ही देश की अर्थव्यवस्था सुस्ती में जा चुकी थी, लेकिन कोरोनावायरस फैलने से अब इसके मंदी की ओर जाने की आशंका जाहिर की जा रही है। इसके अलावा कई राज्यों में कर्फ्यू और करीब-करीब पूरे देश में लॉकडाउन जैसे हालात ने औद्यौगिक गतिविधियों को ठप कर दिया है।
शंख, घंटी, थाली व ताली बजाने से वातावरण में होता है कंपन, इससे कीटाणु खत्म होते हैं
घंटी, थाली व ताली बजाने की धार्मिक मान्यता के साथ साथ वैज्ञानिक असर भी जुड़ा हुआ है। धार्मिक नजरिये देखा जाए तो मंदिरों में घंटी लगी होती है। यह घंटी ऐसी जगह पर लगाई जाती है कि मंदिर में आने-जाने वाला हर व्यक्ति इसका इस्तेमाल कर सके। वहीं घर में अच्छी पहल या शुरुआत होने के अवसर पर थाली और ताली बजाई जाती है। इससे सकारात्मक माहौल बनता है। वहीं जीत के लिए भी उत्साह बढ़ाने के लिए ताली बजाई जाती है।
जानकारों का कहना है कि जब घंटी बजाई जाती है तो वातावरण में कंपन पैदा होता है, जो वायुमंडल में काफी दूर तक जाता है। इस कंपन का फायदा यह है कि इसके क्षेत्र में आने वाले सभी कीटाणु व विषाणु आदि नष्ट हो जाते हैं, जिससे आसपास का वातावरण शुद्ध हो जाता है। कोरोना से सतर्क रहने के संकेत के लिए घंटी, अब अच्छी शुरुआत के लिए थाली व कोरोना पर जीत के लिए ताली बजाएं।
ताली बजाने का धार्मिक महत्व
श्रीमद्भागवत के अनुसार कीर्तन में ताली की प्रथा भक्त प्रह्लाद ने शुरू की थी क्योंकि, जब वे भगवान का भजन करते थे तो जोर-जोर से नाम संकीर्तन भी करते थे तथा साथ-साथ ताली भी बजाते थे। इसके बाद अन्य लोग भी उनकी तरह करने लगे। सामान्यत: हम किसी भी मंदिर में आरती के समय सभी को ताली बजाते देखते हैं और हम भी ताली बजाना शुरू कर देते हैं। ऐसा करने से हमारे शरीर को कई लाभ प्राप्त होते हैं।
काशी के पं. गणेश मिश्रा ने बताया कि संगीत रत्नाकर ग्रंथ के अनुसार त शब्द शिव के तांडव नृत्य और ल शब्द पार्वती का लास्य स्वरूप है। इनसे मिलकर ही ताली बनी है। इसलिए शिव और शक्ति के मिलाप पर सृजन और सकारात्मक ऊर्जा निकलती है।
सकारात्मक ऊर्जा को प्रबल करने के लिए बजाएं घंटी-थाली-ताली
राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ तिरुपति के ज्योतिषाचार्य डॉ. कृष्णकुमार भार्गव के अनुसार घंटी, थाली व ताली सकारात्मक उर्जा को प्रबल करने के लिए व जागरूक करने के लिए बजाई जाती है। वहीं हिंदू धर्म में बच्चों के जन्म पर थाली बजाई जाती है। हथेलियों में सभी ग्रह होते है, ताली बजाकर सभी ग्रहों की सकारात्मकता ली जाती है। वहीं देवालयों में घंटी इसलिए बजाई जाती है कि ताकि प्रत्येक मनुष्य के जीवन में सकारात्मकता फैले।
शंख बजाने के फायदे
डॉ. भार्गव के अनुसार धर्म शास्त्रों में बताया गया है कि समुद्र मंथन से 14 रत्नों की प्राप्ति हुई थी, उनमें से एक शंख भी था। माना जाता है कि शंख से घर में सुख-समृद्धि आती है। सांस संबंधी और फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों में शंख बजाना बेहद फायदेमंद होता है। क्योंकि शंख बजाने से फेफड़ों की एक्सरसाइज होती है, लेकिन आसपास के क्षेत्र में उत्साह और ऊर्जा बन जाती है। जो किसी भी नेगेटिव एनर्जी या वायरसनुमा दुश्मन से लड़ने के लिए हमारे अंदर चेतना जागृत करती है।
ताली बजाने से 29 एक्यूप्रेशर पॉइंट्स पर पड़ता है दबाव
हमारे शरीर के 29 एक्यूप्रेशर पॉइंटस हमारे हाथों में होते है। प्रेशर पॉइंट को दबाने से संबंधित अंग तक रक्त और ऑक्सीजन का संचार अच्छे से होने लगता है। एक्यूप्रेशर के अनुसार इन सभी दबाव बिंदु को सही तरीके से दबाने का सबसे सहज तरीका है ताली। हथेली पर दबाव तभी अच्छा बनता है जब ताली बजाते हुए हाथ लाल हो जाए, शरीर से पसीना आने लगे। इससे आंतरिक अंगों में ऊर्जा भर जाती है और सभी अंग सही ढंग से कार्य करने लग जाते है।
(साभार – दैनिक भास्कर)
ठीक हुए मरीज की एंटीबॉडीज से बनी दवा TAK 888 बचाव में कारगर होगी, वायरस भी खत्म करेगी
टाकेडा पहले भी इम्युनिटी को बढ़ाने वाली दवा बना चुकी है, जिसका नाम इंटरवेनस इम्युनोग्लोबिन है
नयी दिल्ली : दुनियाभर में कोरोना वायरस की वैक्सीन बनाने कोशिश जारी है। अमेरिका में वैक्सीन का ट्रायल शुरू हो चुका है, लेकिन जापानी कंपनी टाकेडा फार्मा की तैयारी थोड़ी अलग है। कंपनी कोरोना से रिकवर हुए मरीजों के ब्लड प्लाज्मा से एंटीबॉडीज लेकर दवा बना रही है। टाकेडा का दावा है यह दवा कोरोना के मरीजों के लिए काफी कारगर साबित होगी। तर्क है कि रिकवर मरीजों से निकली एंटीबॉडीज नए कोरोना मरीजों में पहुंचेगी और उनके इम्यून सिस्टम में तेजी से सुधार करेगी और मरीज रिकवर होगा।
ऐसे मरीज जो हाल ही में बीमारी से ठीक हुए हैं उनके शरीर में मौजूद इम्यून सिस्टम ऐसे एंटीबॉडीज बनाते हंै जो ताउम्र रहते हैं। ये एंटीबॉडीज ब्लड प्लाज्मा में मौजूद रहते हैं। इसे दवा में तब्दील करने के लिए ब्लड से प्लाज्मा को अलग किया जाता है और बाद में इनसे एंटीबॉडीज निकाली जाती हैं। ये एंटीबॉडीज नए मरीज के शरीर में खास थैरेपी की मदद से इंजेक्ट की जाती हैं इसे प्लाज्मा डेराइव्ड थैरेपी कहते हैं।
यह एक कारगर तरीका
यह मरीज के शरीर को तब तक रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ाता है जब तक उसका शरीर खुद ये तैयार करने के लायक न बन जाए। डब्ल्यूएचओ के इमरजेंसी प्रोग्राम हेड माइक रियान के मुताबिक, ‘‘कोरोना वायरस से इलाज का बेहतर तरीका है। यह मरीजों को सही समय पर दिया जाना चाहिए ताकि शरीर की रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ सके। लेकिन ऐसा करते समय सावधानी बरतना बेहद जरूरी है क्योंकि यह थैरेपी हर बार सफल नहीं होती।’’
कितनी दवा तैयार की जाएगी
जापानी दवा कंपनी टाकेडा पहले भी इम्युनिटी को बढ़ाने वाली दवा बना चुकी है, जिसका नाम इंटरवेनस इम्युनोग्लोबिन है। इसका इस्तेमाल इम्यून डिसऑर्डर का इलाज करने में किया जाता है। इसे तैयार करने में स्वस्थ लोगों की एंटीबॉडीज का इस्तेमाल किया गया है। कंपनी का दावा है कि यह सुरक्षित और कारगर है, साथ ही इससे वायरस फैलने का खतरा नहीं है।
चीन में तैयारी शुरू
फरवरी में चीन के शंघाई में डॉक्टरों की टीम ने कोरोना वायरस से नए मरीजों को चिन्हित किया गया है। मेयो क्लीनिक के संक्रमण रोग विशेषज्ञ ग्रेग पोलैंड के मुताबिक, चीन में इसकी शुरुआत की जानकारी मिली है लेकिन अब तक कोई रिसर्च जर्नल में प्रकाशित नहीं हुई है। लेकिन उनकी कोशिश जारी है।
पटियाला के अगेता गांव ने खुद को किया क्वारंटाइन
मोदी के ऐलान से पहले ही कर दिया था लॉक डाउन
नाभा : कोरोना के खिलाफ जंग छेड़ने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरे देश में 21 दिन के लॉक डाउन का ऐलान किया है। लेकिन, पंजाब के पटियाला जिले के अगेता गांव के लोगों ने खुद को 21 दिन के लिए क्वारंटाइन करने का निर्णय जनता कर्फ्यू के दौरान ही ले लिया था। गांव के एक किसान नेता और महिला प्रधान ने इसके लिए गांव को तैयार किया और यह भी यकीन दिलाया कि उन्हें कोई परेशानी नहीं आने देंगे।
गांव में 750 लोग रहते हैं
नाभा में स्थित पंजाब की सबसे हाई सिक्युरिटी जेल की तरफ से जाते रास्ते पर अगेता गांव पड़ता है, इसमें सिर्फ 750 लोग रहते हैं। इस गांव में दो रिटायर्ड फौजी, तीन हालिया भर्ती जवान और एक सरकारी शिक्षक हैं। गांव के लोग भी ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं हैं, सिर्फ 10 प्रतिशत ही यहां शिक्षित हैं। इस गांव को तीन सड़कें (वाया अगेती, कलामाजरा और मेहस से होकर निकलने वाली) नाभा से जोड़ती हैं।
इन्होंने बनाई आम सहमति
किसान यूनियन ब्लॉक प्रधान हरविंदर सिंह अगेता, गांव की महिला सरपंच हरप्रीत कौर, गांव निवासी बहादर सिंह, हरजीत सिंह नंबरदार, सतगुर सिंह, बिंदर सिंह, परगट सिंह, दलजीत सिंह, बलजिंदर सिंह और बलवंत सिंह के मुताबिक पूरे गांव की आम सहमति के बाद सभी ने अपने आप को गांव में लॉक करने का फैसला किया है। ग्रामीणों की मानें तो इन्होंने जनता कर्फ्यू में ही अपने गांव को बचाने की ठान ली थी। तय किया गया कि न कोई गांव से बाहर जाएगा और न ही कोई गांव के अंदर घुसने दिया जाएगा।
गाँव को सील और सैनिटाइज किया
सबसे पहले बाजार से छिड़काव को दवाओं से भरी केन लाई गई और पूरी तरह खुद की बैरिकेड्स लगाकर हालात बदलने की शुरुआत की। गांव की हर गली, मंदिर, गुरुद्वारा चौक-चौराहे व तमाम रास्तों पर संक्रमण से बचाव को दवा का छिड़काव इंजन पंप से किया। यह हालात ठीक होने तक रोज किया जाया करेगा।
हर जरूरत गांव में होगी पूरी, निकलना भी पड़े तो पहले एंट्री करें
अगर किसी भी इमरजेंसी में कोई गांव से जाएगा तो जाने और वापसी के वक्त सैनिटाइजेशन प्रक्रिया से गुजरना होगा, जाने से पहले से और वापसी की रजिस्टर में एंट्री करनी होगी। तीन पब्लिक नाकों पर ग्रामीण शिफ्ट के हिसाब से पहरा देंगे। इन सभी के अलग शिफ्ट में काम कर रहे सेवादार लंगर मुहैया कराएंगे। गांव के बाहर मजदूरी को जाने वाले परिवारों के मवेशियों के लिए हरा चारा जरूरतमंद परिवारों को खाना और दवाएं गांव में ही मुहैया कराई जाएंगी। गांव के किसी भी परिवार को कोई भी जरूरी सामान, नकदी या दूसरी सेवा चाहिए तो वह भी गांव की सीमा के अंदर ही मुहैया कराई जाएगी।
निर्भया के चारों दोषियों को तिहाड़ जेल में दी गयी फाँसी
नयी दिल्ली : दिल्ली में 16 दिसंबर 2012 को एक महिला के साथ हुए सामूहिक बलात्कार एवं हत्या के मामले के चारों दोषियों को शुक्रवार की सुबह साढ़े पांच बजे फांसी दे दी गई। इसके साथ ही देश को झकझोर देने वाले, यौन उत्पीड़न के इस भयानक अध्याय का अंत हो गया।
मुकेश सिंह (32), पवन गुप्ता (25), विनय शर्मा (26) और अक्षय कुमार सिंह (31) को गत 20 मार्च को सुबह साढ़े पांच बजे फांसी के फंदे पर लटकाया गया।
इस मामले की 23 वर्षीय पीड़िता को ‘‘निर्भया’’ नाम दिया गया था जो फिजियोथैरेपी की छात्रा थी। तिहाड़ जेल के महानिदेशक संदीप गोयल ने कहा, ‘‘डॉक्टरों ने शवों की जांच की और चारों को मृत घोषित कर दिया।’’
जेल अधिकारियों ने बताया कि चारों दोषियों के शव करीब आधे घंटे तक फंदे पर झूलते रहे जो जेल नियमावली के अनुसार फांसी के बाद की अनिवार्य प्रक्रिया है।
दक्षिण एशिया के सबसे बड़े जेल परिसर तिहाड़ जेल में पहली बार चार दोषियों को एक साथ फांसी दी गई। इस जेल में 16,000 से अधिक कैदी हैं।
चारों दोषियों ने फांसी से बचने के लिए अपने सभी कानूनी विकल्पों का पूरा इस्तेमाल किया और बृहस्पतिवार की रात तक इस मामले की सुनवाई चली।
सामूहिक बलात्कार एवं हत्या के इस मामले के इन दोषियों को फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद तीन बार सजा की तामील के लिए तारीखें तय हुईं लेकिन फांसी टलती गई। अंतत: आज सुबह चारों दोषियों को फांसी दे दी गई।
आखिरी पैंतरा चलते हुए एक दोषी ने दिल्ली उच्च न्यायालय और फांसी से कुछ घंटे पहले उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
फांसी से कुछ घंटों पहले पवन कुमार गुप्ता ने राष्ट्रपति द्वारा दूसरी दया याचिका खारिज किए जाने को चुनौती देते हुए उच्चतम न्यायालय का रुख किया।
अभूतपूर्व रूप से देर रात ढाई बजे सुनवाई शुरू हुई और एक घंटे तक चली। उच्चतम न्यायालय की एक पीठ ने उसकी याचिका खारिज करते हुए फांसी का रास्ता साफ कर दिया।
न्यायालय ने गुप्ता और अक्षय सिंह को फांसी से पहले अपने परिवार के सदस्यों से मुलाकात करने की अनुमति देने पर भी कोई आदेश देने से इनकार कर दिया।
सात साल लंबी कानूनी लड़ाई के बाद अपनी बेटी को आखिरकार न्याय मिलने से राहत महसूस कर रहे निर्भया के माता-पिता ने कहा कि वे ‘‘भारत की बेटियों के लिए अपनी लड़ाई’’ जारी रखेंगे।
निर्भया की मां आशा देवी ने फांसी के बाद पत्रकारों से कहा, ‘‘हमें आखिरकार न्याय मिला। हम भारत की बेटियों के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। न्याय में देरी हुई लेकिन न्याय मिला।’’
उन्होंने कहा कि दोषियों की फांसी के बाद अब महिलाएं निश्चित तौर पर सुरक्षित महसूस करेंगी।
उन्होंने कहा कि पूरा देश जाग रहा था और न्याय का इंतजार कर रहा था। तिहाड़ जेल के बाहर शुक्रवार तड़के ही सैकड़ों लोग इकट्ठा हो गए। उनके हाथों में राष्ट्रध्वज था और वे ‘अमर रहो निर्भया’ और ‘भारत माता की जय’ के नारे लगा रहे थे। जैसे ही फांसी हुई तो उनमें खुशी की लहर दौड़ पड़ी।
उनमें से कुछ ने फांसी के बाद मिठाइयां बांटी। जेल के बाहर एकत्रित लोगों में सामाजिक कार्यकर्ता योगिता भयाना भी थीं। उन्होंने एक पोस्टर ले रखा था जिस पर लिखा था ‘निर्भया को न्याय मिला। अन्य बेटियों को अब भी इंतजार है।’
उन्होंने कहा, ‘‘आखिरकार न्याय मिला। यह कानून व्यवस्था की जीत है।’’
द्वारका में महिलाओं के कल्याण के लिए सतचित फाउंडेशन नामक एक एनजीओ चलाने वाली अर्चना कुमारी ने कहा ‘‘मैंने निर्भया के अभिभावकों का दर्द देखा है। उम्मीद है कि दोषियों को फांसी से बलात्कार और यौन उत्पीड़न की घटनाओं पर लगाम लगेगी।’’
पश्चिमी दिल्ली की निवासी सना ने कहा, ‘‘हमारे समाज में इस फांसी के बाद कुछ नहीं बदलेगा लेकिन हम खुश हैं कि चारों दोषियों को फांसी दी गई और निर्भया को न्याय मिला।’’
चलती बस में निर्भया के साथ छह व्यक्तियों ने सामूहिक बलात्कार करने के बाद उसे बुरी तरह पीटा, घायल कर दिया और सर्दी की रात में चलती बस से नीचे सड़क पर फेंक दिया था। 16 दिसंबर 2012 को हुई इस घटना ने पूरे देश की आत्मा को झकझोर दिया था और निर्भया के लिए न्याय की मांग करते हुए लोग सड़कों पर उतर आए थे।
करीब एक पखवाड़े तक जिंदगी के लिए जूझने के बाद अंतत: सिंगापुर के अस्पताल में निर्भया ने दम तोड़ दिया था।
इस मामले में मुकेश सिंह, पवन गुप्ता, विनय शर्मा और अक्षय कुमार सिंह सहित छह व्यक्ति आरोपी बनाए गए। इनमें से एक नाबालिग था।
मामले के एक आरोपी राम सिंह ने सुनवाई शुरू होने के बाद तिहाड़ जेल में कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी। नाबालिग को सुनवाई के बाद दोषी ठहराया गया और उसे सुधार गृह भेज दिया गया। तीन साल तक सुधाार गृह में रहने के बाद उसे 2015 में रिहा कर दिया गया।
इस मामले में लंबी कानूनी लड़ाई चली और यह निचली अदालतों से होकर उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय तथा राष्ट्रपति के पास पहुंचा।
अदालत ने इस आधार पर तीन बार मौत का वारंट रोका कि दोषियों ने अपने सभी कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल नहीं किया था और एक के बाद एक ने राष्ट्रपति के पास दया याचिका भेजी। पांच मार्च को एक निचली अदालत ने मौत का नया वारंट जारी किया जिसमें फांसी की अंतिम तारीख 20 मार्च को सुबह साढ़े पांच बजे तय की गई।
घरेलू उड़ानों के निलंबित रहने के दौरान नहीं कटेगी छुट्टी, वेतन : इंडिगो
मुम्बई : इंडिगो ने अपने कर्मचारियों को घरेलू उड़ानों के निलंबित रहने की अवधि में वेतन और छुट्टी नहीं कटने का भरोसा दिया है। कोरोना वायरस के बढ़ते खतरे को देखते हुए सरकार ने देश में घरेलू उड़ानों को मंगलवार मध्यरात्रि से 31 मार्च तक के लिए निलंबित कर दिया है।
इंडिगो के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रंजय दत्ता ने कर्मचारियों को भेजे एक ई-मेल में कहा कि कंपनी के पास अप्रैल के लिए पहले से ‘ठीकठाक’ अग्रिम बुकिंग है। इंडिगो कम क्षमता के साथ ही फिर से उड़ान भरने के लिए तैयार है।
उन्होंने कहा, ‘‘ऐसे में जिन कर्मचारियों को इस अस्थायी निलंबन की अवधि में काम नहीं करना पड़ रहा है। हम उनके वेतन में कोई कटौती नहीं करेंगे और ना ही उनकी छुट्टियां काटेंगे।’’ पीटीआई-भाषा ने यह ई-मेल देखा है।
दत्ता ने कहा कि पिछले कुछ दिन विमानन कंपनी के लिए काफी चुनौती भरे रहे हैं और ‘‘निश्चित तौर पर आने वाले कुछ हफ्तों में हमारी आय, हमारी लागत से कम रहेगी। ऐसे में हमें अपनी नकदी और पाई-पाई बचाने के प्रयास करने होंगे।’’
उन्होंने कहा यह भी कहा कि इस अस्थायी निलंबन की अवधि के दौरान कर्मचारियों का वेतन इत्यादि देने के लिए कंपनी अपनी बचत पूंजी का इस्तेमाल करेगी।




