Monday, April 27, 2026
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स्वाधीनता संग्राम में स्त्रियों ने निभाई थी सशक्त भूमिका, ये हैं संविधान को तराशने वाली महिलाएं

नयी दिल्ली : भारतीय स्वाधीनता संग्राम में स्त्रियों की सशक्त भूमिका थी, जिन्होंने पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आंदोलन में हिस्सा लिया। पहले उनकी भूमिका की सराहना भागीदार की जगह मददगार के रूप में होती थी कि मर्दों के जेल जाने पर उन्होंने परिवार को कैसे मजबूती के साथ संभाला या गुप्त गतिविधियों में भाग लेने वाले क्रांतिकारियों को किस प्रकार शरण दी और प्रेरणास्रोत के रूप में काम किया। परंतु बाद में उनके योगदान का पुनर्मूल्यांकन किया गया और स्वतंत्रता संघर्ष में उनकी सीधी सहभागिता को पहचाना गया। महात्मा गांधी ने सीता, दमयंती एवं द्रौपदी को स्त्रियों के आदर्श के रूप में देखा, जिनमें गृहस्थ तथा सार्वजनिक कार्यों का अद्भुत सम्मिश्रण था। उनका स्पष्ट मत था कि स्वराज्य की लड़ाई में स्त्रियों की महती भूमिका होगी। प्रारंभ में तो गाँधीजी ने उन्हें खादी, स्वदेशी तथा गरीबों की सेवा जैसे रचनात्मक कार्यों में लगाया, किंतु असहयोग आंदोलन ने भारतीय नारियों की मुक्ति का मार्ग खोल दिया। बड़ी संख्या में स्त्रियां आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने लगीं।
स्वाभाविक रूप से जब संविधान निर्माण के लिए संविधान सभा का गठन किया गया, तो 299 सदस्यों वाली सभा में 15 महिलाएं भी निर्वाचित हुईं। ये थीं- दक्ष्याणी वेलायुधन, अम्मू स्वामीनाथन, हंसा जीवराज मेहता, लीला राय, दुर्गाबाई देशमुख, बेगम एजाज रसूल, कमला चौधरी, सुचेता कृपालानी, मालती चौधरी, पूर्णिमा बनर्जी, सरोजिनी नायडु, राजकुमारी अमृत कौर, एनी मैस्केरीन, विजय लक्ष्मी पंडित तथा रेणुका राय। इन सब का जीवन बड़ा तपा-तपाया था, जिन्होंने स्वतंत्रता की लड़ाई में अहम भूमिका निभाई थी। इनकी पृष्ठभूमि अलग-अलग थी। एक ओर जहां विजयलक्ष्मी पंडित, राजकुमारी अमृतकौर जैसी अभिजात वर्ग की महिलाएं थीं, तो दूसरी ओर दक्ष्याणी जैसी दलित। संविधान सभा की प्रारंभिक बैठकों में अस्थायी अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद के सारगर्भित उद्बोधनों के बाद समा बांधा भारत कोकिला सरोजिनी नायडु ने।
राजेंद्र प्रसाद को बधाई देते हुए उन्होंने एक शेर पढ़ा, बुलबुल को गुल मुबारक, गुल को चमन मुबारक रंगीन ताबियां को रंगे सुखन मुबारक। उन्होंने बाबू सच्चिदानंद सिन्हा तथा बाबू राजेंद्र प्रसाद, दोनों के गुणों की चर्चा करते हुए कहा कि उनके बारे में लिखने के लिए सोने की कलम को मधु में डुबाकर लिखना होगा। बाद में महिला अधिकार से संबंधित कानूनों को बनाने में उन्होंने अहम योगदान दिया। संविधान की शुरुआत होती है ‘हम भारत के लोग’ से और उद्येश्यिका में ये शब्द एक महिला सदस्या पूर्णिमा बनर्जी के सुझाव पर डाले गए, ताकि यह स्पष्ट हो जाए कि संविधान का निर्माण भारत के लोगों ने किया है, विदेशी हुक्मरानों ने नहीं।

दक्ष्याणी वेलायुधन 34 वर्ष की उम्र में संविधान सभा की सबसे कम उम्र की सदस्या बनीं। वह पहली दलित महिला स्नातक थीं। कोचीन के पुलाया समुदाय से आनेवाली दक्ष्याणी ने अलग निर्वाचण क्षेत्र या आरक्षण का समर्थन नहीं किया। नवंबर 1948 में उनका जोरदार भाषण हुआ, जिसमें उन्होंने आशा व्यक्त की कि अछूत नाम का कोई समुदाय भविष्य में रहेगा ही नहीं। अम्मू स्वामीनाथन बचपन से ही एक क्रांतिकारी थीं। 24 नवंबर 1949 को संविधान सभा में उन्होंने कहा,
‘बाहरी लोग कहते रहे हैं कि भारत ने स्त्रियों को बराबर का हक नहीं दिया। अब हम कह सकते हैं कि जब भारतीयों ने अपना संविधान स्वयं बनाया है, तो उन्होंने महिलाओं को अन्य नागरिकों के साथ बराबरी का हक दिया है।’
हंसा जीवराज मेहता असहयोग एवं स्वदेशी आंदोलनों में सक्रिय रहीं। 1919 में वह पत्रकारिता की पढ़ाई करने इंग्लैंड गईं, जहां उनकी मुलाकात सरोजिनी नायडु से हुई, जो दोनों के बीच आजीवन दोस्ती में बदल गई। संविधान सभा में भारतीय महिलाओं की ओर से राष्ट्रीय ध्वज देश को सौंपने का उन्हें गौरव प्राप्त हुआ। हंसाबेन ने राजकुमारी अमृत कौर के साथ मिलकर समान नागरिक संहिता पर जोर दिया। उन्होंने आरक्षण एवं अलग निर्वाचन क्षेत्र का विरोध करते हुए कहा कि महिलाओं को विशेषाधिकार नहीं, बल्कि सामाजिक, राजनीतिक एवं आर्थिक न्याय चाहिए। दुर्गाबाई देशमुख ने 12 साल की उम्र से असहयोग आंदोलन में हिस्सा लिया।
संविधान सभा में उन्होंने पैतृक संपत्ति में स्त्रियों के हक का जोरदार समर्थन किया। बेगम एजाज रसूल एक इंकलाबी महिला थीं, जिन्होंने 1937 में पर्दा का परित्याग कर दिया और एक अनारक्षित सीट से उत्तर प्रदेश विधान परिषद के लिए चुनी गईं। वह संविधान सभा की अकेली मुस्लिम महिला सदस्या थीं। सुचेता कृपालानी ने 14 अगस्त को संविधान सभा में वंदे मातरम्, सारे जहां से अच्छा तथा जन-गण मन का गान किया। यह जवाहरलाल नेहरू के प्रसिद्ध ट्रिस्ट विद डेस्टिनी (नियति के साथ एक मुलाकात) भाषण के ठीक पहले हुआ। मालती नबकृष्ण चौधरी, जिन्हें गाँधी जी प्यार से तूफानी तथा रबींद्रनाथ ठाकुर मीनू कहते थे, लगातार रचनात्मक कामों में सक्रिय रहीं। पति नबकृष्ण चौधरी के साथ मिलकर वह शिक्षा के प्रचार-प्रसार में लगी रहीं।
विजयलक्ष्मी पंडित एक अग्रणी स्वतंत्रता सेनानी थीं, जो कई बार जेल गईं। संविधान सभा में उनका कार्यकाल बमुश्किल आठ महीने का रहा, क्योंकि देश के आजाद होते ही उन्हें सोवियत संघ में भारत की पहली राजदूत नियुक्त किया गया।
भारत सरकार की पहली कैबिनेट मंत्री राजकुमारी अमृत कई महत्वपूर्ण कामों के लिए याद की जाती हैं। संविधान की इन 15 महिला शिल्पियों में कई ऐसी हैं, जिन्हें आज की पीढ़ी नहीं जानती हैं। किंतु स्वाधीनता संग्राम तथा संविधान निर्माण में उनकी सशक्त भूमिका थी और उनका योगदान अविस्मरणीय है।

(साभार – अमर उजाला)

68 फीसदी महिलाएं खुद करती हैं अपने पैसे का प्रबंध: सर्वेक्षण

नयी दिल्ली : एक सर्वेक्षण के अनुसार 68 फीसदी महिलाएं या तो अपने पैसे का प्रबंधन खुद कर रही हैं या अपने परिवारों के वित्तीय निर्णय में बराबर की भागीदारी निभा रही हैं। ऑनलाइन वित्त सेवाएं उपलब्ध कराने वाली स्क्रिपबॉक्स के सर्वेक्षण के अनुसार, केवल 10 फीसदी महिलाएं ही वित्तीय निर्णय लेने की जिम्मेदारी अपने परिवार के किसी पुरुष सदस्य को सौंप देती हैं।
सर्वेक्षण में शामिल अधिकतर महिलाएं मासिक बचत के नियम को मानती हैं। केवल 30 फीसदी महिलाओं ने ही म्यूचुअल फंड जैसे वित्तीय विकल्पों में निवेश करने की बात कही।
600 से अधिक महिलाओं के बीच हुआ सर्वेक्षण
स्क्रिपबॉक्स ने देशभर में 600 से अधिक महिलाओं के बीच फरवरी 2020 में यह सर्वेक्षण किया। इसमें शामिल होने वाली महिलाओं में 70 फीसदी 30 वर्ष से कम आयु की, 24 फीसदी 30 वर्ष से अधिक आयु और बाकी 50 वर्ष की आयु से अधिक की थीं।
80 फीसदी महिलाएं करती हैं मासिक बचत में भरोसा
सर्वेक्षण के अनुसार, ’68 फीसदी महिलाओं ने स्वीकार किया कि वह अपने वित्तीय फैसले खुद लेती है या अपने परिवार के वित्तीय निर्णयों में बराबर की हिस्सेदारी रखती हैं। 47 फीसदी महिलाएं खुद को वित्तीय साक्षर बनाने के लिए डिजिटल माध्यमों पर भरोसा करती हैं। साथ ही ऑनलाइन माध्यम से निजी वित्त प्रबंधन का परामर्श लेती हैं और करीब 80 फीसदी महिलाएं मासिक बचत में भरोसा करती हैं। जबकि 20 फीसदी से अधिक महिलाएं अपनी मासिक आय का करीब आधा तक बचा लेती हैं।’

पूजा और विकास ने भारत को दिलाया मुक्केबाजी में दो ओलंपिक कोटा

नयी दिल्ली :  एशियाई चैंपियन पूजा रानी (75 किग्रा) और विकास कृष्ण (69 किग्रा) ने एशियाई ओलंपिक क्वालिफायर के सेमीफाइनल में पहुंचने के साथ ही न सिर्फ पदक पक्का किया बल्कि टोक्यो का टिकट भी कटा लिया। चौथी वरीय पूजा सबसे पहले रिंग में उतरीं उन्होंने थाईलैंड की 18 साल की पोर्निपा च्यूटी को एकतरफा मुकाबले 5-0 से पराजित किया। इसके साथ ही हरियाणा के भिवानी की यह 29 वर्षीय ओलंपिक के लिए क्वालिफाई करने वाली पहली भारतीय मुक्केबाज बनीं। पूजा का सामना अब मौजूदा विश्व और एशियाई चैंपियन चीन की लि कियान से होगा।

पीएम ने किन महिलाओं को सौंपा अपना ट्विटर अकाउंट, जानें उनके बारे में

नयी दिल्ली :  अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस के दिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ट्विटर अकाउंट पर सात ऐसी महिलाएं छायी रही, जिन्होंने अपने कामों से देश और दुनिया को प्रेरणा दी है। पीएम मोदी ने रविवार सुबह महिला दिवस के अवसर पर अपना सोशल मीडिया अकाउंट इन सात सम्मानित महिलाओं के हाथों सौंप दिया। इन महिलाओं ने ट्विटर पर लोगों के साथ अपने यादगार लम्हों को साझा किया और अपनी कहानी बताकर लोगों को प्रेरित किया। इन महिलाओं में स्नेहा मोहनदास, डॉ मालविका अय्यर, अरिफा, कल्पना रमेश, विजया पवार, कलावती देवी और मुंगेर की वीणा देवी शामिल हैं।
स्नेहा मोहनदार: भूखमरी मिटाने के लिए फूडबैंक इंडिया
स्नेहा मोहनदास ने अपनी माता से प्रेरणा लेकर भूखमरी मिटाने के लिए फूडबैंक इंडिया की पहल की। इसमें बड़े पैमाने पर भोजन बनाने, भोजन बनाने के अलग अलग तरीके और स्तनपान के बारे में जागरूकता अभियान चलाना शामिल है। उन्होंने ट्वीट किया, “आप खाने के बारे में सोचते होंगे लेकिन अब कुछ करने और गरीबों के भविष्य के बारे में कदम उठाना चाहिए। मैं स्नेहा मोहनदास हूं । अपनी माता से प्रेरणा लेकर मैंने फूडबैंक की शुरूआत की थी। मेरी माता बेघरों को खाना खिलाती थी।”
मालविका अय्यर: विस्फोट में खोए हाथ और एक पैर
डा मालविका अय्यर ने एक बम विस्फोट में अपने हाथ और एक पैर खो दिया। इससे विचलित हुए बिना उन्होंने पढ़ाई की और पीएचडी की उपाधि हासिल की। उन्होंने ट्वीट किया, “स्वीकार्यता सबसे बड़ा पुरस्कार है जो हम अपने आपको दे सकते हैं। हम अपने जीवन को नियंत्रित नहीं कर सकते लेकिन हम जीवन के प्रति अपने नजरिये को जरूर नियंत्रित कर सकते हैं। अंत में यही महत्वपूर्ण है कि हम चुनौतियों का सामना कैसे करते हैं। ”
आरिफा कश्मीर: शिल्प नर्मदा को दिया बढ़ावा
अरिफा कश्मीर के पारंपरिक शिल्प नर्मदा शिल्प को बढ़ावा देने का काम कर रही हैं। उनका कहना है कि महिलाओं का आत्मनिर्भर होना और दूसरी महिलाओं की मदद करना महत्वपूर्ण है। उन्होंने ट्वीट किया, “मैंने हमेशा से कश्मीर के पारंपरिक शिल्प को जिंदा रखने और बढावा देने का सपना देखा क्योंकि इससे स्थानीय महिलाओं की स्थिति मजबूती होती है। मैंने महिला कारीगरों की स्थितिदेखी है इसलिए मैंने नर्मदा शिल्प को जीवित रखने का काम किया।”
कल्पना रमेश: जल संरक्षण क्षेत्र में किया काम
कल्पना रमेश जल संरक्षण के टिकाऊ मॉडल विकसित करने के क्षेत्र में काम कर रही हैं। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा है, “यौद्धा बनों पर अलग किस्म के । जल यौद्धा बनों, क्या आपने कभी पानी की कमी के बारे में सोचा है। हममें से प्रत्येक व्यक्ति मिलकर आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संरक्षण कर सकते हैं।”
विजया पवार: हस्तशिल्प के संरक्षण की दिशा में काम किया
विजया पवार पिछले दो दशकों से बंजारा समुदाय के हस्तशिल्प के संरक्षण की दिशा में काम कर रही हैं। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा है,“आपने देश के विभिन्न हिस्सों के हस्तशिल्प के बारे में तो आपने सुना ही होगा। मैं ग्रामीण महाराष्ट्र के बंजारा समुदाय की हस्तशिल्प आपके सामने पेश कर रही हूं। मैं पिछले दो दशकों से इस पर काम कर रही हूं और इसमें हजारों और महिलाएं मेरा सहयोग कर रही हैं।” एक अन्य ट्वीट में उन्होंने लिखा, “गोरमाटी कला को बढ़ावा देने के लिए पंतप्रधान नरेंद्र मोदी जी ने न केवल हमें प्रोत्साहित किया बल्कि हमारी आर्थिक सहायता भी की। ये हमारे लिए गौरव की बात है। इस कला के संरक्षण के लिए मैं पूरी तरह से समर्पित हूं और महिला दिवस के अवसर पर गौरवान्वित महसूस कर रही हूं।”
कलावती देवी: हजारों शौचालय बनाने के लिए पैसे दान किए
कानपुर की कलावती देवी ने अपने क्षेत्र के लोगों को हजारों शौचालय बनाने के लिए पैसे दान करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने ट्वीट किया, “मैं जिस जगह पे रहती थी, वहां हर तरफ गंदगी ही गंदगी थी। लेकिन दृढ़ विश्वास था कि स्वच्छता के जरिए हम इस स्थिति को बदल सकते हैं। लोगों को समझाने का फैसला किया। शौचालय बनाने के लिए घूम-घूमकर एक-एक पैसा इकट्ठा किया। देश की बहन, बेटी और बहुओं को मेरा यही संदेश है कि समाज को आगे ले जाने के लिए ईमानदारी से किया गया प्रयास कभी निष्फल नहीं होता। इसलिए बाहर निकलिए। अगर कोई कड़वी भाषा बोलता है तो उसे बोलने दीजिए। अगर अपने लक्ष्य को पाना है तो पीछे मुड़कर नहीं देखा करते हैं।”
वीणा देवी: मशरूम की खेती करने की पहल की
मुंगेर की वीणा देवी ने मशरूम की खेती करने की पहल की और अन्य महिलाओं को भी इस काम में अपने साथ जोडकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया। उन्होंने ट्वीट किया, “जहां चाह वहां राह इच्छाशक्ति से सब कुछ हासिल किया जा सकता है। मेरी वास्तविक पहचान पलंग के नीचे एक किलो मशरूम की खेती से शुरू हुई थी, लेकिन इस खेती ने मुझे न केवल आत्मनिर्भर बनाया, बल्कि मेरे आत्मविश्वास को बढ़ाकर एक नया जीवन दिया। आज महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। अगर देश की नारी शक्ति ठान ले तो घर के अपने कमरे से ही अपनी यात्रा शुरू कर सकती है। इसी खेती की वजह से मुझे सम्मान मिला। मैं सरपंच बनी। मेरे लिए खुशी की बात है कि अपने जैसी कई महिलाओं को ट्रेनिंग देने का अवसर भी मिल रहा है। आज मुंगेर की महिलाएं पूरे देश के सामने एक मिसाल पेश कर रही हैं। घर में खेती से लेकर उपज को हाट में बेचने तक सारा जिम्मा खुद अपने कंधों पर उठाती हैं। इसलिए मैं देश की सभी महिलाओं से यही कहूंगी- बाहर निकलिए, खुद काम कीजिए और तब देखिए कितना अच्छा लगता है।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री के फेसबुक पेज पर 44,723,734 लाइक्स हैं जबकि ट्विटर पर उन्हें पांच करोड़ 30 लाख लोग फॉलो करते हैं। मोदी को इंस्टाग्राम पर तीन करोड़ 52 लाख लोग फॉलो करते हैं और यूट्यूब पर उनके चार करोड़ 51 लाख सब्सक्राइबर्स हैं।

होली पर छोड़े स्वाद की पिचकारी से जायकों के रंग

मटर गुझिया

मटर गुझिया

सामग्री :  1 कप  मैदा,  2 बड़े चम्मच तेल,  आवश्यकतानुसार पानी,  स्‍वादानुसार नमक,  – 1/2 चम्मच जीरा,  – चुटकीभर हींग, अदरक, लहसुन,  1बड़ा चम्मच हरी मिर्च का पेस्‍ट- 1 चम्मच धनिया  पाउडर, 1 चम्मच हल्दी पाउडर, 1/2 चम्मच गरम मसाला, 1/2 चम्मच ताजा नारियल,1/4 कप (कसा हुआ)  1 कप ताजी मटर, 1 कप चीनी, 1 चम्मच तेल तलने के लिए।
विधि : सबसे पहले एक बाउल में मैदा, नमक, ऑयल और थोड़ा-थोड़ा पानी डालकर हार्ड सा आटा गूथें। -इसके बाद तैयार आटे को 15-20 मिनट के लिए कपड़े से ढक कर अलग से रख दें। अब एक पैन में तेल को गर्म करें। इसके बाद इसमें जीरा भूनें और उसमें हींग, अदरक-लहसुन-मिर्चे का पेस्‍ट डालकर अच्छे से फ्राई करें। अब इसमें धनिया, हल्दी और गर्म मसाला डालें। -इसके बाद इसमें नारियल और मटर डालकर मिलाएं। सारे मिश्रण को अच्छी तरह मिलाने के बाद 3-5 मिनट तक ढक्कर स्टीम में पकाएं। -पकने के बाद इसमें थोड़ा सा पानी मिलाएं। मटर के नर्म  होने पर उसमें चीनी, नमक और नींबू का रस डालकर मसलें। मिश्रण को अलग रखें। अब पहले से ढके आटे की छोटी-छोटी लोइयां तैयार कर उसे गोल बेल लें। तैयार मटर की स्‍टफिंग को उसमें भरें और गुझिया का आकार  देते हुए उसे पानी की मदद से चिपका लें। एक कढ़ाई में तेल गर्म करके उसमें सारी गुझिया एक-एक कर गोल्डन ब्राउन होने तक तल लें।

 

रसमलाई


सामग्री : 250 ग्राम पनीर, 2 लीटर दूध, एक किलोग्राम चीनी, थोड़ा केसर , करीब 10 ग्राम पिस्ता बारीक कटा, 10 ग्राम बारीक कटा बादाम
विधि : पनीर को खूब अच्छी तरह आटे की तरह गूंथ लें। उसमें दो चम्मच मैदा मिला दें। फिर उसके छोटे-छोटे गोले बना कर अलग किसी बर्तन में रख लें। एक लीटर पानी में करीब 250 ग्राम चीनी मिल कर उसकी चाशनी बना ले। इसमें पनीर के गोले डाल दें और तेज आंच पर 5 से 7 मिनट तक पकने दें। दूध को आँच पर रख कर खौलाएं और खूब गाढ़ा होने दें। जब दूध गाढ़ा हो जाए तो उसे उतार लें और ठंडा होने दें। इसमें चाशनी में रखे पनीर के गोले डाल दें। अब आपकी रसमलाई तैयार है। इसे बादाम, पिस्ता और केसर से सजा कर मेहमानों को परोसें।

कोरोना का कहर, कोहराव और बचाव

शुभजिता फीचर डेस्क

पूरी दुनिया में कोराना का कहर है और इतनी मौतें हो चुकी हैं कि पूरी दुनिया में कोरोना का कोहराम मचा हुआ है। वायरस पहले चीन में फैला और अब इसकी चपेट में दुनिया का बड़ा हिस्सा है। न्यूयॉर्क तक में आपातकाल है…स्कूल बन्द हो चुके हैं..परीक्षाएँ टाली जा रही हैं….लोग भीड़ में जाने से बच रहे हैं।
कोरोनावायरस का असर सेहत पर तो हुआ ही है, बच्चों की पढ़ाई का भी नुकसान हो रहा है। इटली ने भी देशभर के स्कूलों में छुट्‌टी कर दी है। फ्रांस ने 120 स्कूल बंद किए हैं। यूनेस्को की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक दुनियाभर में 30 करोड़ बच्चे संक्रमण के डर से स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। इसके मुताबिक 14 देशों ने स्कूल पूरी तरह बंद कर दिए हैं। वहीं 9 देशों ने जरूरत के मुताबिक छुटि्टयां कर दी हैं। मुश्किल यहीं तक नहीं है…मुश्किल यह है कि लोग ठीक हो जाने के बाद फिर से संक्रमित हो रहे हैं। कोरोनावायरस के संक्रमण से ठीक होने के बाद भी लोग दोबारा से बीमार पड़ रहे हैं। वुहान के डॉक्टरों ने माना है कि कई मरीजों को दोबारा भर्ती करना पड़ा। दरअसल इन लोगों में वायरस के लक्षण फिर से दिखने लगे थे। वैज्ञानिकों के मुताबिक वायरस के एस टाइप के कारण संक्रमण तेजी से फैल रहा है। एस टाइप का कोरोनावायरस एल टाइप से ही पैदा हुआ है। वुहान में 7 जनवरी से पहले एल टाइप वायरस मौजूद था। बाद में यह एस टाइप में बदल गया, मामलों में अचानक तेजी आई।
ईरान की यात्रा करने वाले गाजियाबाद के एक व्यक्ति के कोरोना वायरस से संक्रमित होने के साथ देश में संक्रमण के मामलों की संख्या 30 हो गयी है। बढ़ते मामलों के बीच सरकार ने बृहस्पतिवार को राज्यों से जिला, प्रखंड और ग्राम स्तरों पर त्वरित कार्रवाई टीम बनाने को कहा है ।

कोरोना वायरस की तस्वीर

तेलंगाना को जरूर कुछ राहत मिली है क्योंकि राज्य के जिन दो लोगों के खून के नमूने पुणे स्थित राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (एनआईवी) भेजे गए थे उनकी जांच रिपोर्ट नकारात्मक आई है।
गत बुधवार तक 16 इतालवी पर्यटकों सहित 29 लोगों के कोराना वायरस से संक्रमित होने की पुष्टि हुई। इस सूची में पिछले महीने केरल में सामने आए तीन मामले भी शामिल हैं। स्वास्थ्य में सुधार के बाद इन तीनों लोगों को छुट्टी दे दी गयी।
वायरस का असर भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन पर भी पड़ा है ।कोरोनावायरस की दहशत के बीच देहरादून में मास्क और सेनेटाइजर की किल्लत होने लगी है। कुछ दुकानदार इनकी कालाबाजारी में जुटे हुए हैं। इसे देखते हुए लोग अब इनकी ऑनलाइन खरीदारी कर रहे हैं। ऑनलाइन खरीदारी पर पांच से 57 प्रतिशत की छूट भी मिल रही है।
फ्लिपकार्ट, एमेजन, स्नेपडील जैसी ई-कॉमर्स कंपनियां मास्क और सेनेटाइजर न सिर्फ एमआरपी (अधिकतम खुदरा मूल्य) रेट पर दे रही हैं बल्कि भारी छूट भी दे रही हैं। बेहतर मास्कों में शामिल एन-95 बाजार में उपलब्ध नहीं है। लेकिन, ऑनलाइन यह उपलब्ध है। होली का बाजार और होली मिलन समारोहों पर कोरोना का असर पड़ा है।
कोरोना वायरस ने ना सिर्फ चीन, ईरान, इटली में दहशत फैलाई है बल्कि पूरी दुनिया इस भयानक वायरस से घबराई हुई है। भारत में अब तक कोरोना वायरस के 34 मामले सामने आ चुके हैं। हालही में तीन नए मामले सामने आए हैं, जिनमें से दो केस लद्दाख और एक केस तमिलनाडु का बताया जा रहा है।कोरोना वायरस के कहर के बीच वैज्ञानिकों की कई टीमें पूरी दुनिया में इस नए वायरस पर रिसर्च करने में लगी है।
सामने आयी वायरस की तस्वीर
इस बीच चीन के वैज्ञानिकों की टीम को वायरस की असल संरचना की तस्वीर मिल गयी है। इस अपने आप में एक बड़ी कामयाबी माना जा रहा है। वैज्ञानिकों की एक टीम ने कोरोना वायरस की पहली तस्वीर जारी की है जिसमें उसका ‘असली रूप’ नजर आ रहा है। डेली मेल के मुताबिक वैज्ञानिकों ने वायरस को निष्क्रिय करने के बाद उसकी तस्वीर कैद की है। वैज्ञानिकों ने वायरस को इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप विश्लेषण तकनीक की मदद से ये कामयाबी हासिल की है। डेली मेल ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप विश्लेषण तकनीक के जरिए वायरस नमूने को सुरक्षित रखा गया है। यह अब तक का सबसे प्रामाणिक परिणाम है।

भारत सरकार द्वारा जारी निर्देश

भारतीय हवाई अड्डों पर भी बरती जा रही है सावधानी
कोरोना के असर को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे जनस्वास्थ्य आपातकाल माना है। इस समय 30 भारतीय हवाई अड्डों पर 6,49,452 यात्रियों की जाँच की जा चुकी है। थर्मल स्क्रीनिंग के बाद जिन यात्रियों में बुखार के आरम्भिक लक्षण दिखायी पड़े, उनकी जाँच की गयी। केन्द्रीय उड्डयन मंत्री हरदीप पुरी के मुताबिक रोजाना 70 हजार यात्री भारत आते हैं। एयर इंडिया वुहान से अब तक 654 यात्रियों को ला चुका है। एयर इंडिया जापान के योकोहोमा के क्रूज शिप डायमंड प्रिंसेज से सीओवीआईडी -19 से 124 लोगों को वापस ला चुका है और इसमें 5 विदेशी भी शामिल हैं। भारतीय वायु सेना ने वुहान से 112 लोगों का उद्धार किया जिसमें से 35 नागरिक म्यानमार, बांग्लादेश, मालदीव्स, चीन, दक्षिण अफ्रीका, अमेरिका व अन्य देशों के नागरिक शामिल हैं। केन्द्रीय उड्डयन मंत्रालय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के साथ काम कर रहा है। हवाई अड्डों पर विशेष नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की गयी है। सावधानी के लिए जागरुकता मूलक बोर्ड लगाये गये हैं। डीजीसीए द्वारा एयरलाइनों को निर्देश दिया गया है कि एन सी ओवी सैम्पल परीक्षण के लिए आईसीएमआर – एनआईवी पुने लैब में भेजे जायें।
सावधानी ही बचाव है
कोरोना से डर की बजाय आपको इंफेक्शन से बचने के लिए सावधानी रखने की आवश्यता है –
अपने हाथ बार-बार धोएं
अपने हाथों को साफ रखें।बार-बार धोने के लिए सैनेटाइजर और एंटी बैक्टीरियल साबुन का इस्तेमाल करें।इससे आपके हाथों में कीटाणुओं का नामो-निशान भी नहीं रहेगा।
बातचीत करते हुए दूरी रखें
यह बात कुछ अजीब लग सकती है लेकिन वायरस के खतरे को देखते हुए व्यावहारिक तौर पर इस  बात को ध्यान में रखना होगा।ऐसे में जिस व्यक्ति को खांसी या छींक आ रही हो, उससे कम से कम तीन फीट की दूरी रखें। इसका कारण यह है कि छींक या खांसते हुए मुंह से थूक निकलता है जिसमें कुछ वायरस हो सकते हैं।ऐसे में आपको पास रहने पर COVID-19 का खतरा हो सकता है।
अपनी आँखों, मुंह और नाक को छूने से बचें
हाथों को बार-बार आँख, मुंह, नाक पर न लगाएं।ऐसा करने से आपके हाथों से वायरस इन अंगों तक पहुंच सकते हैं।ऐसे में हाथ तो आप बार-बार धो सकते हैं लेकिन आंख, नाक, मुंह न धोने पर इनपर वायरस का खतरा बना रहेगा।
सांस लेते हुए साफ-सफाई रखें
आप जब भी खांसे या छींक मारें, अपने मुंह और नाक को टिश्यू से ढककर साफ करें और फिर इसे डस्टबिन में फेंक दें।

(इंटरनेट पर उपलब्ध विभिन्न खबरों व आलेखों पर आधारित)

अपनी चाल पे

निष्ठा बिंद्रा

लोग कहते है……
और कहते ही रहते है।
कभी गलतियां
कभी गलतफहमियां…..
कभी अफवाहें…..
कभी बिन माँगी सलाह।
काम है उनका कहना
पर अपनी धुन में चलना
कर्म है अपना…..
सुनती सबकी हूँ मैं
पर मानती अपनी हूँ मैं
हर ज़िम्मेमदारी याद है….
पर आपने हक से भी मुझे प्यार है.. .
जब तक न रुकूंगी….
किसी के रोके….
तब तक जीयूँगी…..
बिना किसी धोखे के…..
तो रहने दो मुझे अपने हाल पे…
खुश हूँ मैं जनाब अपनी चाल पे….

कोलकाता प्रेस क्लब में मीडिया व कानूनों को लेकर प्रशिक्षण कार्यशाला

कोलकाता : मीडिया में काम करते हुए पत्रकारों को कानूनी स्तर पर कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। कई बार मानहानि के मामले उनके खिलाफ होते हैं मगर कानूनी पक्ष नहीं जानने के कारण भी उनको परेशानी होती है। कई बार मीडिया ट्रायल और स्टिंग ऑपरेशन को लेकर जानकारी का अभाव रहता है कि इसकी वजह से भी समस्याएँ होती हैं। कई मुद्दों पर संवेदनशील रिपोर्टिंग भी करने की जरूरत है। पत्रकारों को इस बाबत प्रशिक्षित करने के लिए कोलकाता प्रेस क्लब द्वारा वेस्ट बंगाल नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ ज्यूरीडिकल साइंसेज (एनयूजेएस) के सेन्टर फॉर मीडिया एंड इन्टरटेनमेन्ट लॉज द्वारा संयुक्त रूप से प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गयी। इस तीन दिवसीय कार्यशाला में एनयूजेएस के सेन्टर फॉर मीडिया एंड इन्टरटेनमेन्ट लॉज के संयोजक डॉ. शमिक सेन ने पत्रकारों को मीडिया ट्रायल. मानहानि, सोशल मीडिया से सम्बन्धित खबरों के कानूनी पक्षों की जानकारी दी। पत्रकारों को सिविल तथा क्रिमिनल लॉ की जानकारी मिली। सभी प्रतिभागियों को वेस्ट बंगाल नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ ज्यूरीडिकल साइंसेज के वीसी प्रो. डॉ. निर्मल कान्ति चक्रवर्ती ने प्रमाणपत्र प्रदान किये। प्रेस क्लब कोलकाता के अध्यक्ष स्नेहाशीष सूर, सचिव किंशुक प्रामाणिक, संयुक्त सचिव निताई मालाकार ने आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी।

एथलीट मीट ऊर्जा 2020 में भवानीपुर कॉलेज के विद्यार्थियों का बेहतरीन प्रदर्शन

कोलकाता : एथलीट मीट 2020 में भवानीपुर कॉलेज के विद्यार्थियों ने गीतांजली स्टेडियम में स्पोर्ट्स के विभिन्न क्षेत्रों में बेहतरीन प्रदर्शन किए। डिस्कस थ्रो, शॉट अप, जैवलिन थ्रो और कई प्रकार के रेस आयोजित किए गए जिसमें बड़ी संख्या में कॉलेज के छात्र और छात्राओं ने हिस्सा लिया। एथलीट मीट ऊर्जा का उद्धाटन मशाल जला कर किया कॉलेज के अध्यक्ष चंपक लाल ए दोशी ने ।इस अवसर पर स्टेडियम का पूरा चक्कर लगाते हुए एनसीसी की कॉलेज टीम ने तिरंगे को सलामी दी। मैनेजमेंट के प्रमुख सदस्यों में रेणुका शाह, नलिनी पारेख आदि ने उद्घाटन समारोह में भागीदारी की। कॉलेज के डीन प्रो. दिलीप शाह ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि ऊर्जा प्रथम बार आयोजित की गई है जिसका उद्देश्य युवाओं को खेल के लिए उत्साहित करना। प्रो. मीनाक्षी चतुर्वेदी ने ऊर्जा के संचालन में सहभागिता की। प्रशिक्षक  भावेश और रूपेश ने स्पोर्ट्स की पूरी तरह से बागडोर संभाली। डॉ. दिव्येष शाह की देख रेख में विद्यार्थियों के सभी स्पोर्ट्स इवेंट्स विद्यार्थियों की टीम द्वारा संपन्न की गयी। 100, 200,400मीटर रेस, रिले रेस, रिवर्स वॉक, आदि रेसों के छात्र छात्राओं की टीमों ने प्रदर्शन किए। डिस्कस थ्रो में प्रथम अंकुश जाजोदिया और ज्योति गोराल रहे वहीं शॉट पुट में विवेक परमार और अक्षिता केडिया रहे। जेवलिन थ्रो में उत्कर्ष ओझा ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। सर्वश्रेष्ठ एथलीट छात्रों में राजाराम चौधरी और निमेष जायसवाल एवं छात्राओं में सपारिया चक्रवर्ती को बेस्ट एथलीट प्रदर्शन का खिताब दिया गया। शिक्षकों और गैर- शिक्षकों ने भी हिस्सा लिया। ऊर्जा के साथ साथ गीतांजली स्टेडियम में कॉर्निवाल का भी आयोजन किया गया जिसमें कॉलेज के विद्यार्थियों ने 27 स्टॉलों को लगाया गया जिसमें खाने पीने के सामानों के अलावा फिटनेस और योग आदि के स्टॉल देखे गए। पेट शो में विद्यार्थियों ने अपने-अपने डॉग शो किए। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में गायिका ऑन्ड्रिला और सौरभ गोस्वामी ने कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए।फोटोग्राफी में निशांत और सम्राट दास के प्रमुख स्थान रहे । डॉ वसुंधरा मिश्र ने इस कार्यक्रम की जानकारी दी ।