Monday, March 16, 2026
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सस्टेनेबल वेस्ट मैनेजमेंट में में हुल्लाडेक अग्रणी

कोलकाता । इको-सिस्टम पार्टनर के रूप में हुल्लाडेक ने नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एनआरएआई) के साथ मिलकर कोलकाता के द ललित ग्रेट ईस्टर्न होटल में आतिथ्य क्षेत्र के लिए “रिस्पॉन्सिबल ई-वेस्ट मैनेजमेंट सेक्टर” नामक एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का सफलतापूर्वक आयोजन किया। इस कार्यक्रम में प्रमुख होटलों, रेस्टोरेंट और कैफ़े के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने शहरी भारत में व्यवस्थित ई-वेस्ट डिस्पोजल की तत्काल आवश्यकता पर विचार-विमर्श किया गया। इसमें अहम चर्चा का विषय था कि, आतिथ्य क्षेत्र में बड़ी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक कचरा उत्पन्न होता है, जिसका अधिकांश भाग अनौपचारिक पुनर्चक्रण श्रृंखला में चला जाता है, इसलिए इस सत्र में औपचारिक पुनर्चक्रण, ई-वेस्ट मैनेजमेंट एक्ट 2022 के पालन और थोक उपभोक्ताओं के लिए अनुपालन जिम्मेदारियों के महत्व पर जोर दिया गया। यह पहल हुल्लाडेक के संस्थापक स्वर्गीय नंदन मल्ल के सपनों को साकार करती है, जिन्होंने भारत को एक ऐसे राष्ट्र के रूप में देखने की कल्पना की थी, जहाँ हर नागरिक अपने यहां के इलेक्ट्रॉनिक कचरों का ज़िम्मेदारी से निपटान करना जानते हैं। इस कार्यक्रम में एसईआरसी की प्रोपराइटर शकुंतला चंदा ने कहा, हमारा मानना है कि अगर हमारे आतिथ्य क्षेत्र के अग्रणी लोग आगे बढ़कर इसका नेतृत्व करें, तो हमारा प्यारा शहर कोलकाता यहां के पर्यावरण के प्रति ज़िम्मेदार अपशिष्ट निपटान के मामले में भारत में एक आदर्श शहर बन सकता है। इस मौके पर फेसेस के अध्यक्ष इमरान जकी ने कहा, यह पहल सिर्फ़ अपशिष्ट के बारे में नहीं है, बल्कि यह नागरिक चेतना के बारे में है। इस मामले में रेस्टोरेंट और होटल प्रभावशाली प्रभाव डालते हैं। अगर वे औपचारिक ई-वेस्ट रीसाइक्लिंग को अपनाते हैं, तो नागरिक भी उनका अनुसरण करेंगे। हुल्लाडेक में स्थिरता और वरिष्ठ नेतृत्व दल की सदस्य प्रियाशा सिंघानिया ने मुख्य भाषण दिया, जिन्होंने नीतिगत आवश्यकताओं को सरल बनाया और कुछ व्यावहारिक और कारगर कदम बताए जिन्हें होटल और रेस्टोरेंट तुरंत लागू कर सकते हैं।

परिवार मिलन की 44 वीं अन्तर्विद्यालय हिन्दी देशभक्ति गीत प्रतियोगिता

कोलकाता । राष्ट्रीय,सामाजिक,सांस्कृतिक एवं साहित्यिक चेतना जागरण केन्द्र परिवार मिलन द्वारा पारम्परिक रूप से आयोजित अन्तर्विद्यालय देशभक्ति हिन्दी गीत प्रतियोगिता को इस वर्ष एक नये कलेवर में आयोजित किया गया। विभिन्न क्षेत्रों में भारत की प्रगति व अब तक प्राप्त उपलब्धियों को उद्घोषित करने के साथ ही सन् 2047 स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष तक भारत की तरक्की की तस्वीर, लक्ष्य व उन्हें प्राप्ति के संकल्पों को कोलकाता महानगर की नौ प्रतिष्ठित विद्यालयों के विद्यार्थियों ने अपने गीतों में गूंजायमान किया। कार्यक्रम अध्यक्ष कर्नल डॉ. कुणाल भट्टाचार्य (से.नि.), प्रतियोगिता के निर्णायकगण ओमप्रकाश मिश्र, डॉ. वसुन्धरा मिश्र, कविता कोठारी तथा संस्था के पदाधिकारियों ने भारत माता के चित्र को पुष्पांजलि अर्पित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। तत्पश्चात संस्था के कलाकारों ने भारत वंदना का गायन किया। संस्था की पूर्व अध्यक्षा दुर्गा व्यास ने देश के संविधान को नमन करते हुए उद्देशिका का प्रतिज्ञा स्वरूप श्रोताओं से वाचन करवाया। संस्थाध्यक्ष ृअरुण चूड़ीवाल ने सभी का स्वागत करते हुए प्रतियोगिता के विषयों की विद्वतापूर्ण व्याख्या कर श्रोताओं का ज्ञानवर्धन किया। तत्पश्चात प्रतियोगियों ने अपनी प्रस्तुतियों से समस्त श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
बी.डी.एम. इन्टरनेशनल, द बी जी ई एस स्कूल तथा अग्रसेन बालिका शिक्षा सदन ने क्रमश: प्रथम, द्वितीय व तृतीय स्थान प्राप्त किया। प्रथम स्थान प्राप्त विद्यालय को नरेश गनेड़ीवाल चलत रजत स्मृति चिह्न भी प्रदान किया गया।अन्य सभी प्रतिभागी विद्यालय नोपानी हाई,राजस्थान विद्यामंदिर,श्री जैन विद्यालय,श्री जैन विद्यालय फार गर्ल्स,श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी विद्यालय एवं विद्या भारती गर्ल्स हाई स्कूल को प्रोत्साहन पुरस्कार व प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया। अंजू गुप्ता ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में राजेन्द्र कानूनगो, विनीता मनोत एवं संकल्प विद्यालय की शिक्षिकाओं एवं छात्र-छात्राओं का सक्रिय सहयोग रहा। राधाकिश झुनझुनवाला चैरिटी ट्रस्ट द्वारा प्रायोजित इस कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान से हुआ।

दुर्गापूजा कमेटियों से हिसाब नहीं मिला तो अनुदान नहीं मिलेगा : हाईकोर्ट

कोलकाता । कलकत्ता हाईकोर्ट ने बुधवार को साफ कर दिया है कि जो दुर्गा पूजा समितियां खर्च का पूरा ब्यौरा नहीं देंगी, उन्हें सरकारी अनुदान नहीं मिलेगा। बुधवार को न्यायमूर्ति सुजॉय पाल और न्यायमूर्ति स्मिता दास दे की खंडपीठ ने कहा कि केवल वही समितियां अनुदान पाने की पात्र होंगी, जिन्होंने निर्धारित समय सीमा के भीतर च्यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेटज् जमा किया है। राज्य सरकार ने अदालत को जानकारी दी कि कुल ४१ हजार ७९५ क्लबों में से केवल तीन क्लबों ने खर्च का हिसाब नहीं दिया है। ये तीनों क्लब सिलिगुड़ी के हैं। इस पर न्यायमूर्ति पाल ने टिप्पणी की कि संख्या इतनी कम है कि च्च्उसे देखने के लिए माइक्रोस्कोप लगाना पड़ेगा।ज्ज्
उल्लेखनीय है कि सोमवार की सुनवाई में अदालत ने राज्य से पूछा था कि कितनी पूजा समितियों को अनुदान दिया गया और कितनी समितियों ने खर्च का ब्यौरा नहीं दिया। साथ ही अदालत ने सवाल उठाया था कि जो समितियां हिसाब नहीं दे रही हैं, उन्हें राज्य सरकार क्यों अनुदान देती आ रही है। दरअसल, इस मुद्दे पर पहले एक जनहित याचिका दायर हुई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि सरकार जनता के पैसे का दुरुपयोग कर रही है। याचिकाकर्ता के वकील विकासरंजन भट्टाचार्य और शमीम अहमद ने दलील दी थी कि उचित स्थानों पर खर्च करने के बजाय जनता का पैसा पूजा समितियों में बांटा जा रहा है। हालांकि राज्य सरकार की ओर से कहा गया था कि यह राशि च्सेफ ड्राइव, सेव लाइफज् जैसी अभियानों और कोविड जैसी परिस्थितियों में जनहित के कार्यों पर खर्च की जाती है। हाईकोर्ट ने पहले ही निर्देश दिया था कि सरकारी अनुदान के उपयोग का पूरा विपवरण पूजा समितियों को देना अनिवार्य होगा। अब अदालत ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि बिना खर्च का हिसाब दिए किसी भी समिति को भविष्य में अनुदान नहीं मिलेगा।

कॉमनवेल्थ गेम्स में हावड़ा की कोयल ने जीते दो स्वर्ण

कोलकाता । पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हावड़ा निवासी वेटलिफ्टर कोयल बर को कॉमनवेल्थ चैम्पियनशिप में मिली ऐतिहासिक सफलता पर बधाई दी है। कोयल ने अहमदाबाद में आयोजित प्रतियोगिता में लगातार तीसरी बार विश्व रिकॉर्ड तोड़ते हुए दो स्वर्ण पदक अपने नाम किए। मुख्यमंत्री ने बुधवार को ट्वीट कर लिखा, च्च्हमारी बंगाल की बेटी, हावड़ा निवासी कोयल बर ने अहमदाबाद में आयोजित वेटलिफ्टिंग कॉमनवेल्थ चैम्पियनशिप में विश्व रिकॉर्ड की हैट्रिक करते हुए दो स्वर्ण पदक जीतकर बंगाल को गर्वान्वित किया है। मैं उन्हें अपनी हार्दिक शुभकामनाएं और स्नेह प्रेषित करती हूं। उनके अभिभावक और कोच को भी बधाई देती हूं। उन्होंने आगे कहा कि कोयल आने वाले समय में और भी बेहतर प्रदर्शन करेंगी तथा ओलंपिक खेलों में पदक जीतकर बंगाल का मान और ऊंचा करेंगी। ममता बनर्जी ने आश्वासन दिया कि राज्य सरकार उनकी हर जरूरत में उनके साथ खड़ी रहेगी।

अमेरिकी टैरिफ के बाद नये बाजार तलाशने में जुटा भारत

40 देशों में निर्यात बढ़ाने की कोशिश

नयी दिल्ली । अमेरिका की ओर से भारतीय निर्यात पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने के बाद, भारत ने 40 देशों में निर्यात बढ़ाने के लिए कोशिशों को तेज कर दिया है। इन देशों में यूके, स्पेन, फ्रांस, जर्मनी और इटली का नाम शामिल है। यह जानकारी एक वरिष्ठ अधिकारी की ओर से दी गई।
इन प्रयासों में ट्रेड फेयर, वायर-सेलर मीट्स और सेक्टर-विशेष प्रमोशन कैंपेन शामिल हैं। अन्य देशों में नीदरलैंड, पोलैंड, कनाडा, मैक्सिको, रूस, बेल्जियम, तुर्की, संयुक्त अरब अमीरात और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं। वरिष्ठ अधिकारी ने आगे बताया कि वाणिज्य मंत्रालय भारत के निर्यात में विविधता लाने और वैश्विक बाजारों में अपनी उपस्थिति को मजबूत करने के लिए नए सिरे से प्रयास के तहत इस सप्ताह निर्यातकों के साथ परामर्श की एक श्रृंखला आयोजित करने वाला है।
सूत्रों ने कहा कि इन बैठकों में कपड़ा, केमिकल और जेम्स एवं ज्वेलरी सहित प्रमुख क्षेत्रों के उद्योग प्रतिनिधि एक साथ आएंगे। इन बैठकों में चर्चाएं सीमित उत्पादों और बाजारों पर निर्भरता कम करने की रणनीतियों और नए भौगोलिक क्षेत्रों में प्रवेश के लिए एक रोडमैप तैयार करने पर केंद्रित रहने की उम्मीद है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब सरकार प्रस्तावित एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन पर काम तेज कर रही है, जिसका उद्देश्य निर्यातकों को लक्षित समर्थन और बाजार संबंधी जानकारी प्रदान करना है। वाणिज्य सचिव सुनील बर्थवाल ने इस महीने की शुरुआत में कहा था कि अमेरिका द्वारा घोषित शुल्कों में भारी वृद्धि के बाद, सरकार देश के निर्यात को अन्य देशों में विविधता लाने के प्रयास कर रही है। सरकार मुक्त व्यापार समझौतों को तेजी से लागू करने और यूरोपीय संघ, ब्रिटेन, ओमान, आसियान, न्यूजीलैंड, पेरू और चिली जैसे मौजूदा समझौतों की समीक्षा करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि एक्सपोर्ट प्रमोशन स्कीम के लिए विदेशों में मिशनों को संगठित करके शीर्ष 50 आयातक देशों पर अधिक ध्यान केंद्रित करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। आगे कहा कि विभिन्न एक्सपोर्ट प्रमोशन स्कीम्स पर भी प्रयास तेज किए जा रहे हैं। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने निर्यात केंद्रित उद्योगों की सहायता के लिए 25,000 करोड़ रुपए की योजानओं का प्रस्ताव तैयार किया है, जिसका मुख्य उद्देश्य छह वर्ष की अवधि के लिए एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन के तहत कपड़ा, रत्न एवं आभूषण और समुद्री उत्पादों जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों में छोटे निर्यातकों की फंडिंग करने में सहायता करना है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने पुष्टि की कि प्रस्ताव को मंजूरी के लिए वित्त मंत्रालय के पास भेज दिया गया है, जिसके बाद इसे कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा और फिर यह लागू होगा। इन योजनाओं को विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के नियमों के अनुरूप तैयार किया गया है और यह ट्रे़ड फाइनेंस और निर्यातकों के लिए बाजार पहुंच में सुधार पर ध्यान केंद्रित करेंगी।

स्टॉकहोम वर्ल्ड वॉटर वीक में बजा ‘नमामि गंगे’ का डंका

– सराहे गये नदी संरक्षण के प्रयास

नयी दिल्ली/लखनऊ। नदियां और जल संसाधन सतत विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं और इनका पुनर्जीवन राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन की सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है। नदी पुनर्जीवन और जल संरक्षण में राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन की अग्रणी पहलों ने इसे वैश्विक जल संवाद में एक प्रमुख आवाज बना दिया है। इस वर्ष स्टॉकहोम वर्ल्ड वॉटर वीक में इसकी भागीदारी भारत की बढ़ती भूमिका को उजागर करती है, जो जल संबंधी वैश्विक चुनौतियों के समाधान में अहम योगदान दे रही है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल वॉटर इंस्टीट्यूट (एसआईडब्ल्यूआई) ने वर्ष 1991 से आयोजित यह प्रतिष्ठित आयोजन अब वैश्विक नीति निर्धारकों, वैज्ञानिकों, उद्योग विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए सबसे प्रभावशाली मंच बन चुका है। गंगा के विस्तृत प्रवाह वाले प्रदेश के रूप में उत्तर प्रदेश नमामि गंगे कार्यक्रम का प्रमुख केंद्र रहा है। वाराणसी में रिवरफ्रंट विकास, कानपुर में सीवेज शोधन संयंत्रों की स्थापना तथा छोटे एवं मझाेले नगरों में सामुदायिक भागीदारी आधारित पहलें इस अभियान को सफलतापूर्वक आगे बढ़ा रही हैं। इस प्रतिष्ठित सम्मेलन का केंद्र बिंदु बना “नदी शहरों की पुनर्कल्पना: जलवायु-संवेदी और बेसिन-केंद्रित शहरी विकास”, जिसमें राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी), राष्ट्रीय शहरी कार्य संस्थान (एनआईयूए) और जर्मन विकास सहयोग (जीआईजेड) ने मिलकर नेतृत्व किया। इस सत्र में विशेषज्ञों ने जोर दिया कि जलवायु परिवर्तन और शहरीकरण की चुनौतियों के बीच, नदी-केंद्रित विकास ही शहरों को टिकाऊ और सुरक्षित बना सकता है। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के महानिदेशक राजीव कुमार मित्तल ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि नमामि गंगे मिशन ने भारत में नदियों के पुनरुद्धार के लिए एक ऐतिहासिक नीतिगत बदलाव की नींव रखी है। उन्होंने बताया कि इस मिशन के तहत अब तक 40 हजार करोड़ रुपये का भारी निवेश किया जा चुका है, जो गंगा और उसकी सहायक नदियों को उनके प्राचीन रूप में पुनः स्थापित करने की दिशा में तेज़ी से कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि नमामि गंगे मिशन एक जीवित उदाहरण है, जो यह साबित करता है कि जब आधुनिक तकनीक और नवाचार का संगम होता है, तो नदियों को पुनः जीवनदायिनी बनाने में सफलता प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने बताया कि मिशन के अंतर्गत की गई पहलें, जैसे हाइब्रिड एनीटी मॉडल आधारित एसटीपी, सोलर पावर्ड ट्रीटमेंट प्लांट और मृदा जैव प्रौद्योगिकी, वैश्विक मानकों को स्थापित करने में योगदान दे रही हैं। श्री मित्तल ने इस बात पर भी जोर दिया कि इस कार्यक्रम को एक विशाल जन आंदोलन में बदला गया है, जिसके सकारात्मक परिणाम अब सामने आ रहे हैं। वैश्विक सहयोगों की अहमियत को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि विश्व बैंक, जीआईजेड, सी-गंगा, नीदरलैंड्स और डेनमार्क का सहयोग नदी विज्ञान, जल सुरक्षा और प्रबंधन में उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। सम्मेलन में विशेषज्ञों ने यह स्पष्ट किया कि जलवायु परिवर्तन और शहरीकरण की समस्याओं का हल केवल नदी-बेसिनों के संरक्षण और प्रबंधन में ही छुपा है। इस संदर्भ में भारत की ‘नमामि गंगे’ पहल को आदर्श उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया गया, जिसे अन्य देशों के लिए अनुकरणीय माना गया। प्रदूषण नियंत्रण, जैविक खेती, आर्द्रभूमि संरक्षण और जलवायु-स्मार्ट शहरी विकास जैसे कदमों ने इस मिशन को वैश्विक स्तर पर प्रेरणा का स्रोत बना दिया है। विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि अब समय आ गया है जब शहरों को केवल उपभोक्ता के रूप में नहीं, बल्कि नदी-बेसिनों के सक्रिय संरक्षक के रूप में कार्य करना होगा। जलवायु परिवर्तन के दौर में नदियों का संरक्षण अनिवार्य बन चुका है और इसके लिए नदी-केंद्रित शहरी विकास को अपनाना होगा। सत्र के समापन में यह महत्वपूर्ण संदेश सामने आया, जब शहर मिलकर काम करेंगे और सीमा पार सोचेंगे, तो नदियों को बचाया जा सकता है और उन्हें समृद्ध भी किया जा सकता है। यही स्थिरता और समृद्धि का वास्तविक आधार होगा, जो भविष्य की पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा और पारिस्थितिक संतुलन सुनिश्चित करेगा।

गणेश चतुर्थी पर विशेष : अनूठा है राजस्थान का इश्किया गणेश मंदिर

राजस्थान की धरती पर जब भी बात कला, संस्कृति और मंदिरों की होती है तो यह प्रदेश अपनी ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहर के कारण विशेष महत्व रखता है। यहां कई मंदिर ऐसे हैं जिनकी मान्यताएं और परंपराएं उन्हें आम मंदिरों से अलग बनाती हैं। जोधपुर स्थित इश्किया गणेश मंदिर भी ऐसा ही एक अद्वितीय मंदिर है, जो प्रेम और आस्था का संगम माना जाता है। इस मंदिर का नाम जितना अनोखा है, उतनी ही दिलचस्प इसकी ऐतिहासिक और धार्मिक कहानियां भी हैं।
मंदिर का इतिहास और स्थापत्य – इश्किया गणेश मंदिर का इतिहास सदियों पुराना माना जाता है। कहा जाता है कि इसे मारवाड़ के पुराने राजाओं ने बनवाया था। यह मंदिर स्थानीय लोगों और राजघरानों के लिए विशेष धार्मिक स्थल रहा है। मंदिर में स्थित गणेशजी की मूर्ति को स्वयंभू माना जाता है, अर्थात यह मूर्ति स्वयं प्रकट हुई थी। इस मूर्ति में अद्भुत दिव्य शक्तियां होने का विश्वास किया जाता है।

क्यों पड़ा इश्किया गणेश नाम?
मंदिर का नाम “इश्किया गणेश” इसलिए पड़ा क्योंकि यहां प्रेमी युगल भगवान गणेश की पूजा करते हैं और अपने रिश्ते में सफलता की कामना करते हैं। “इश्किया” शब्द का अर्थ ही प्रेम से जुड़ा हुआ है। यही कारण है कि यह मंदिर प्रेम और आस्था दोनों का प्रतीक बन गया है।

मंदिर से जुड़े रोचक किस्से

प्रेमी युगलों की मनोकामना पूरी होती है – मान्यता है कि जो प्रेमी यहां गणेशजी की पूजा करते हैं, उनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और विवाह में आने वाली बाधाएं दूर हो जाती हैं।
दुष्ट आत्माओं से रक्षा – एक समय था जब इस क्षेत्र में दुष्ट आत्माओं का भय था। लोगों ने गणेशजी से प्रार्थना की और उन्हें सुरक्षा का आशीर्वाद मिला। तभी से मंदिर का महत्व और बढ़ गया।
चमत्कारिक मूर्ति – यहां की गणेश प्रतिमा को चमत्कारिक माना जाता है और भक्त विश्वास करते हैं कि यह प्रतिमा उनके जीवन की हर कठिनाई को दूर करती है।
परंपरा: शादी का कार्ड चढ़ाने की अनोखी रस्म –
इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता है शादी का कार्ड चढ़ाने की परंपरा। यहां नवविवाहित जोड़े और प्रेमी युगल अपने विवाह का कार्ड भगवान गणेश को अर्पित करते हैं। यह विश्वास है कि ऐसा करने से गणेशजी उनके रिश्ते को स्वीकार कर उन्हें आशीर्वाद देते हैं। यह परंपरा समय के साथ मजबूत होती चली गई और अब यह मंदिर हर प्रेमी के लिए आशा और विश्वास का केंद्र बन गया है।
धार्मिक मान्यताएं – यहां आकर भगवान गणेश की पूजा करने से विवाह में आ रही रुकावटें दूर हो जाती हैं। यही कारण है कि जोधपुर के लोग किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत इस मंदिर से करते हैं। उनका विश्वास है कि गणेशजी की कृपा से कार्य में कोई विघ्न नहीं आता।

(साभार – खास खबर)

झारखंड में खर्च हुआ बजट का 23 प्रतिशत हिस्सा : कैग

रांची । झारखंड विधानसभा में सोमवार को नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट पेश की गयी। रिपोर्ट में यह खुलाशा हुआ कि राज्य की हेमंत सोरेन सरकार के विभिन्न विभागों ने वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान बजट की 23.14 प्रतिशत खर्च ही नहीं किए।
विधानसभा में पेश सीएजी की रिपोर्ट में कहा गया है कि एक लाख 41 हजार 498.79 करोड़ रुपये के कुल प्रावधानों में से एक लाख आठ हजार 754.44 करोड़ रुपये विभागों द्वारा खर्च किए गए। वहीं, वर्ष 2022-23 के दौरान 57 मामलों में 13 हजार 499.10 करोड़ रुपये के पूरक प्रावधान (प्रत्येक मामले में 0.50 करोड़ रुपये से अधिक) अनावश्यक साबित हुआ, क्योंकि व्यय मूल प्रावधानों के स्तर तक भी नहीं आया था। रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य का समग्र ऋण-जीएसडीपी (सकल राज्य घरेलू उत्पाद) अनुपात जो 2019-20 में 30.42 प्रतिशत से बढ़कर 2020-21 में जीएसडीपी का 36.23 प्रतिशत हो गया था। यह 2021-22 से घटता रहा और 2023-24 में पांच साल के निचले स्तर 27.68 प्रतिशत पर पहुंच गया।
वर्ष 2023-24 में एक विनियोग (धन का आवंटन) के तहत 268.02 करोड़ का अतिरिक्त खर्च हुआ था। इसे नियमित करने की जरूरत थी। इसके अलावा, वित्त वर्ष 2001-02 से 2022-23 से संबंधित 3.778.41 करोड़ रुपये के अलावा अतिरिक्त संवितरण (किसी विशेष धन या निधि से पैसे का भुगतान करना) को अभी नियमित किया जाना है। रिपोर्ट के अनुसार गैर-प्रतिबद्ध व्यय के भीतर 2023-24 में सब्सिडी 4,831 करोड़ रुपये थी। यह कुल राजस्व व्यय का 6.30 प्रतिशत थी। वहीं 2023-24 के दौरान ऊर्जा पर सब्सिडी, कुल सब्सिडी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा (48 प्रतिशत) थी। सीएजी की रिपोर्ट में कहा गया है कि निर्धारित समय अवधि के भीतर सहायता अनुदान के विरुद्ध उपयोगिता प्रमाण पत्र जमा करने की आवश्यकता के बावजूद, 31 मार्च 2024 तक एक लाख 33 हजार 161.50 करोड़ रुपए के 47,367 उपयोगिता प्रमाण पत्र लंबित थे। इसी प्रकार से संक्षिप्त आकस्मिक (एसी) बिल के माध्यम से निकाले गए अग्रिम धन के विरुद्ध विस्तृत आकस्मिक (डीसी) बिल जमा करने की जरूरत के बावजूद, 31 मार्च 2024 तक चार हजार 891.72 करोड़ रुपए के 18,011 एसी बिल के विरुद्ध डीसी बिल लंबित थे। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि झारखंड में 32 एसपीएसई (तीन गैर-कार्यशील सरकारी कंपनियां) थीं। 31 अक्टूबर 2024 तक 30 एसपीएसई, जिनके 107 खाते बकाया थे। इन कंपनियों द्वारा वित्तीय विवरण प्रस्तुत करने के संबंध में निर्धारित समय-सीमा का पालन नहीं किया गया।

कलकत्ता हाईकोर्ट ने कसी पूजा कमेटियों की नकेल

-यूसी पर राज्य सरकार से मांगा जवाब

कोलकाता। कलकत्ता हाईकोर्ट ने सोमवार को पश्चिम बंगाल सरकार से उन दुर्गा पूजा समितियों के संबंध में स्थिति स्पष्ट करने को कहा है, जिन्होंने पिछले वर्ष अदालत के निर्देश के बावजूद खर्च (यूटिलाइजेशन) प्रमाणपत्र जमा नहीं किया। न्यायमूर्ति सुजॉय पाल और न्यायमूर्ति स्मिता दास डे की खंडपीठ ने सवाल किया कि क्या ऐसी समितियों को इस वर्ष भी नया अनुदान या मानदेय दिया जा रहा है? अदालत ने यह भी पूछा, च्च्कितनी समितियों ने खर्च प्रमाणपत्र जमा नहीं किया है? इसके बावजूद क्या उन्हें अनुदान मिल रहा है? राज्य के महाधिवक्ता किशोर दत्ता ने अदालत को बताया कि मार्च २०२३ में सरकार ने रिपोर्ट दी थी कि लगभग ५०० समितियों को अनुदान मिला था, जिनमें से ३६ समितियों ने खर्च प्रमाणपत्र दाखिल नहीं किया। उन्होंने कहा कि अगली सुनवाई में सरकार विस्तृत जवाब पेश करेगी। मामले की अगली सुनवाई बुधवार को होगी। यह याचिका सामाजिक कार्यकर्ता सौरव दत्ता द्वारा दायर जनहित याचिका से जुड़ी है। दत्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता बिकाश रंजन भट्टाचार्य और शमीम अहमद ने दलील दी कि करदाताओं के पैसों का दुरुपयोग किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों में उपयोग किए जाने वाले धन को सरकार पूजा समितियों को बांट रही है। हालांकि, राज्य सरकार ने इसका बचाव करते हुए कहा कि यह अनुदान च्जनकल्याणकारीज् है और सेफ ड्राइव, सेव लाइफ अभियान व कोविड-१९ प्रतिबंधों जैसी पहलों में इसका उपयोग किया गया था। गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस वर्ष राज्यभर की करीब ४० हजार पूजा समितियों को १.१ लाख रुपये का मानदेय देने की घोषणा की है। इसके लिए ४५० करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया गया है। पिछले साल समितियों को ८५ हजार रुपये दिए गए थे और ममता ने २०२५ में इसे एक लाख तक बढ़ाने का वादा किया था। लेकिन इस बार उन्होंने वादा से भी आगे बढ़ते हुए अतिरिक्त १० हजार रुपये जोड़ दिए। मुख्यमंत्री ने नेताजी इंडोर स्टेडियम में आयोजकों के साथ बैैठक के दौरान पूजा समितियों के लिए बिजली बिलों पर ८० प्रतिशत छूट देने की भी घोषणा की थी। उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने २०१८ में पूजा समितियों को १० हजार रुपये के अनुदान और २५ प्रतिशत बिजली बिल छूट के साथ इस पहल की शुरुआत की थी। इसके बाद यह राशि हर साल बढ़ती गई — २०१९ में २५ हजार रुपये, कोविड काल में ५० हजार रुपये, फिर २०२२ में ६० हजार, २०२३ में ७० हजार और २०२४ में ८५ हजार रुपये। अब २०२५ में यह बढ़कर १.१ लाख रुपये तक पहुंच गई है, जो अब तक का सबसे अधिक अनुदान है।

गर्भवती महिला को डॉक्टर के सहायक ने दिया गलत इंजेक्शन!

-स्वास्थ्य आयोग ने दिया इकबालपुर का नर्सिंग होम बंद करने का आदेश 
कोलकाता । कोलकाता के इकबालपुर स्थित एक नर्सिंग होम में एक गर्भवती महिला दर्द की शिकायत लेकर गई थी। कथित तौर पर, उस समय एक डॉक्टर के सहायक ने उसे आरएमओ गलत इंजेक्शन लगा दिया। आरोप है कि घर लौटने के बाद महिला के गर्भ में पल रहे बच्चे की मौत हो गई। इसके बाद महिला के परिवार की ओर से स्वास्थ्य आयोग में शिकायत दर्ज कराई गई। आयोग ने इस घटना में इकबालपुर नर्सिंग होम को बंद करने का आदेश दिया है। स्वास्थ्य निदेशक को मामले की जांच करने का भी आदेश दिया गया है। आयोग ने महिला को एक लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। हालाँकि, महिला मुआवजा लेने को तैयार नहीं थी। 6 अगस्त को अलका रॉय नाम की एक महिला ने स्वास्थ्य आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी। उसने आरोप लगाया कि गर्भावस्था के दौरान दर्द होने पर वह इकबालपुर नर्सिंग होम गई थी। तभी अविनाश कुमार नाम के एक व्यक्ति ने खुद को आरएमओ बताया। कथित तौर पर, उसने खुद को आरएमओ बताकर उसे एक पर्चा लिखा। उसने महिला को एक इंजेक्शन भी दिया। दर्द शुरू हो गया। महिला घर चली गई। उसके बाद उसका गर्भपात हो गया। शिकायतकर्ता ने बताया कि बाद में महिला को पता चला कि उसका इलाज करने वाला व्यक्ति असल में डॉक्टर नहीं था। इसके बाद स्वास्थ्य आयोग में शिकायत दर्ज कराई गई। नर्सिंग होम के मालिक ने बताया कि उस दिन महिला का इलाज करने वाला व्यक्ति डॉक्टर का सहायक था। डॉक्टर की मेज पर उसका लेटरहेड था। उसने उस पर दवा का पर्चा लिखा था। इसके बाद स्वास्थ्य आयोग ने नर्सिंग होम को बंद करने का आदेश दिया। आयोग ने स्वास्थ्य सेवा निदेशक को जाँच के आदेश दिए हैं। महिला को एक लाख रुपये का मुआवज़ा देने को भी कहा गया है। आयोग के अध्यक्ष, सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति असीम कुमार बनर्जी ने कहा, “मुझे यकीन नहीं है कि महिला को दिए गए इंजेक्शन की वजह से उसका गर्भपात हुआ था। स्वास्थ्य निदेशक इस मामले की जाँच करेंगे।” उन्होंने कहा कि महिला को ‘परेशान’ किया गया और उसका इलाज किसी ऐसे व्यक्ति ने किया जो डॉक्टर नहीं था, इसलिए उसे एक लाख रुपये का मुआवज़ा देने का आदेश दिया गया। हालाँकि, शिकायतकर्ता ने कहा कि उसने पैसों के लिए शिकायत नहीं की थी। महिला ने मुआवज़े की रकम नहीं ली। उन्होंने रामकृष्ण मिशन से वह पैसा देने को कहा। मुआवजे के साथ ही नर्सिंग होम को बंद करने का आदेश दिया गया है। आयोग की अध्यक्ष ने बताया कि आदेश के बाद नर्सिंग होम ने नए मरीजों को लेना बंद कर दिया है। इसके बाद अधिकारियों ने आयोग में समीक्षा याचिका के लिए आवेदन किया। नर्सिंग होम खोलने की अनुमति के लिए आवेदन करते हुए अधिकारियों ने कहा कि इसके बंद होने से कई लोगों की आय प्रभावित हुई है। अधिकारियों को डायलिसिस के मरीजों को वापस भेजने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। आयोग की अध्यक्ष ने कहा कि जब तक स्वास्थ्य निदेशक की रिपोर्ट नहीं मिल जाती, तब तक नर्सिंग होम खोलने की अनुमति नहीं दी जाएगी। आयोग 8 सितंबर को समीक्षा याचिका पर सुनवाई करेगा। तब तक नर्सिंग होम बंद रहेगा।