नयी दिल्ली। भारतीय निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने बड़ी कार्रवाई की है। आयोग ने चुनावी प्रणाली को स्वच्छ और पारदर्शी बनाने के अपने अभियान को और तेज करते हुए 18 सितंबर को 474 पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों (आरयूपीपी) को अपनी सूची से हटा दिया। साथ ही 359 आरयूपीपी पर कार्रवाई शुरू की। आयोग की यह कार्रवाई जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29ए के तहत की गई, जिसमें प्रावधान है कि यदि कोई राजनीतिक दल लगातार छह वर्षों तक किसी भी चुनाव में भाग नहीं लेता, तो उसे पंजीकृत दलों की सूची से हटाया जा सकता है। इस कदम के साथ, पिछले दो महीनों में कुल 808 आरयूपीपी को सूची से हटाया जा चुका है, जिसमें 9 अगस्त को हटाए गए 334 आरयूपीपी शामिल हैं। आयोग ने 2019 से एक राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू किया है, जिसका उद्देश्य उन आरयूपीपी की पहचान करना और हटाना है जो निर्धारित शर्तों को पूरा करने में विफल रहे हैं। इस अभियान का मकसद निष्क्रिय या अनुपालक दलों को हटाकर चुनावी प्रक्रिया को साफ-सुथरा बनाना है। पंजीकृत दलों को प्रतीक चिन्ह, कर छूट जैसे विशेषाधिकार प्राप्त होते हैं, लेकिन इनके लिए नियमों का पालन अनिवार्य है। दूसरे चरण में, ईसीआई ने 359 अन्य आरयूपीपी की पहचान की है, जो पिछले तीन वित्तीय वर्षों में अपने वार्षिक लेखापरीक्षित खाते जमा करने में विफल रहे हैं या जिन्होंने चुनाव लड़ा, लेकिन आवश्यक चुनाव व्यय रिपोर्ट दाखिल नहीं की। ये दल देश के 23 विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से हैं। इन दलों को हटाने से पहले, निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए, संबंधित राज्यों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए हैं। इन नोटिसों के जवाब में दलों को सुनवाई का अवसर दिया जाएगा, और अंतिम निर्णय मुख्य कार्यकारी अधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर लिया जाएगा। ईसीआई का यह कदम न केवल चुनाव प्रणाली को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करता है कि केवल सक्रिय और नियमों का पालन करने वाले दल ही पंजीकृत रहें। यह अभियान भविष्य में भी जारी रहेगा ताकि चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता और पारदर्शिता बनी रहे। दूसरे चरण में हटाए गए आरयूपीपी की सर्वाधिक संख्या 121 उत्तर प्रदेश से है। वहीं, तीसरे चरण के अंतर्गत की जा रही कार्रवाई में भी सर्वाधिक 127 संख्या उत्तर प्रदेश से ही है।
गायक ज़ुबीन गर्ग का सिंगापुर में दुर्घटना में निधन
गुवाहाटी । असम के मशहूर गायक जुबीन गर्ग (52) का सिंगापुर में एक दर्दनाक स्कूबा डाइविंग हादसे में निधन हो गया। जुबीन को समुद्र से निकालकर पुलिस ने नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया, लेकिन डॉक्टरों की लाख कोशिशों के बावजूद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। प्रसिद्ध असमिया गायक, अभिनेता और संगीत जगत के दिग्गज ज़ुबीन गर्ग, जिन्हें फिल्म गैंगस्टर के हिट गाने “या अली” के लिए राष्ट्रीय स्तर पर जाना जाता है, का सिंगापुर में स्कूबा डाइविंग के दौरान हुए एक हादसे में दुखद निधन हो गया। जानकारी के अनुसार, सिंगापुर पुलिस ने उन्हें समुद्र से बचाया और पास के एक अस्पताल में भर्ती कराया। गहन चिकित्सा देखभाल के बावजूद, डॉक्टर उन्हें बचा नहीं पाए। ज़ुबीन नॉर्थ ईस्ट फेस्टिवल में शामिल होने सिंगापुर गए थे, जहां आज उन्हें परफॉर्म करना था। उनके आकस्मिक निधन से प्रशंसक और पूरा असमिया समुदाय स्तब्ध है और भारतीय संगीत जगत में एक गहरा शून्य पैदा हो गया है। असम, पूर्वोत्तर और अन्य जगहों से श्रद्धांजलि और संवेदनाएं आ रही हैं। इस क्षेत्र के सबसे प्रिय कलाकारों में से एक के निधन से पूरे राज्य में शोक की लहर दौड़ गयी है। उल्लेखनीय है कि जुबीन गर्ग का जन्म 18 नवंबर 1972 को असम के जोरहाट में हुआ था। उनका बचपन से ही संगीत से लगाव था। असमिया और बंगाली संगीत जगत में उन्हें एक सुपरस्टार सिंगर और म्यूजिक कंपोजर माना जाता है। उन्होंने 30 से ज्यादा भाषाओं में गाने गाए। बॉलीवुड में भी जुबीन गर्ग ने अपनी खास जगह बनाई। साल 2006 की फिल्म ‘गैंगस्टर’ का गाना ‘या अली’ उनके करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। इसके अलावा उन्होंने ‘दिल तू ही बता’ (कृष 3), ‘जाने क्या चाहे मन बावरा’ (प्यार के साइड इफेक्ट्स) और कई अन्य हिट गाने गाए।
भवानीपुर कॉलेज ने किया आगोमनी पूर्व शारदीय आह्वानृ
कोलकाता । भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज के बांग्ला विभाग द्वारा जुबली हॉल में आई क्यू ए सी अनुमोदित पूर्व-शारदीय सांस्कृतिक कार्यक्रम “अगोमोनी” का आयोजन किया गया ।
इस कार्यक्रम का उद्घाटन डॉ संदीप दान और डॉ शुभव्रत गांगुली ने दीप प्रज्वलित कर किया । प्रो देबजानी गांगुली ने स्वागत भाषण देते हुए आगोमनी के महत्व पर पाठ किया ।विभागाध्यक्ष डॉ मिलि समद्दार ने पूरे कार्यक्रम का संचालन किया । उत्तीय चट्टोपाध्याय, शिल्पा दास,अबन्तिका, संपा सिन्हा बासु, चित्रांगदा देब, रेखा नारिवाल, स्वर्नाली मुखर्जी, देविना गुप्ता, सोमनाथ चट्टोपाध्याय, तनीमा, सुस्मिता, वसुंधरा मिश्र आदि संकायों ने कार्यक्रम में भाग लिया। डाॅ वसुंधरा मिश्र ने बताया कि 13 सितंबर को हुए इस कार्यक्रम में संकायों, अकादमिक सदस्यों, छात्रों और प्रतिष्ठित गायकों ने मां दुर्गा के घर आने का स्वागत करने के लिए गीत, नृत्य, पाठ, श्रुति नाटक आदि की विभिन्न प्रस्तुतियां दी । रेक्टर और डीन प्रो दिलीप शाह और प्रो मीनाक्षी चतुर्वेदी की उपस्थिति रही।
सेंट पॉल्स कैथेड्रल मिशन कॉलेज में मनाया गया हिन्दी दिवस
कोलकाता। आई.क्यू.ए.सी. एवं सेंट पॉल्स कैथेड्रल मिशन कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हिन्दी दिवस समारोह के सुअवसर पर कॉलेज के टीचर-इन-चार्ज डॉ. सुद्दीप्त मिद्दे ने प्रार्थना से कार्यक्रम का शुभारम्भ किया और कहा कि ‘बगैर भाषा के व्यक्ति और समाज का उत्थान संभव नहीं है। हिन्दी भाषा वैश्विक भाषा बनने की राह पर है और भारत के विकास में हिन्दी भाषा की महत्त्वपूर्ण भूमिका है।’ अपने स्वागत वक्तव्य में हिन्दी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. कमलेश कुमार पाण्डेय ने कहा कि हिन्दी हमारी जातीय भाषा है वह अस्मिता, पहचान की भाषा है, संपर्क की भाषा है। भूमंडलीकरण के दौर में जब दुनिया से भाषाएँ और उपभाषाएँ लुप्त हो रही है या लुप्त होने की कगार पर है ठीक इसी समय हिन्दी संचार की भाषा के रूप में जनमाध्यम में मजबूती के साथ प्रयुक्त हो रही है। अंग्रेजी के बाद हिन्दी ही संपर्क भाषा के रूप में तेजी से विकसित हो रही है। फिजी, मारीशस जैसे देश में हिन्दी राजभाषा के पद पर सुशोभित है और संसार के विभिन्न भागों में हिन्दी भाषा में विपुल साहित्य रचा जा रहा है। इस अवसर पर काव्य-आवृत्ति, कविता पोस्टर, आशु भाषण, वाद-विवाद और सृजनात्मक लेखन प्रतियोगिता आयोजित की गई। सभी विजेताओं क्रमशः रोहित मिश्रा, निकिता शर्मा, पलक सिंह, सुमन गोंड, सोनू महतो, अमरनाथ राय, साक्षी कुमारी, अंशु आदि को पुरस्कृत किया गया। कार्यक्रम का संचालन किया प्रो. आरती यादव ने और धन्यवाद ज्ञापन किया प्रो. परमजीत कुमार पंडित ने।
प्रो. चंद्रकला पांडेय की स्मृति में सीयू के हिन्दी विभाग द्वारा श्रद्धांजलि
कोलकाता । दो बार की राज्यसभा सांसद और कलकत्ता विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग की पहली महिला आचार्य प्रोफ़ेसर चंद्रकला पांडेय की स्मृति में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन कलकत्ता विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में शुक्रवार, 19 सितम्बर 2025 किया गया ।कार्यक्रम में कोलकाता के अनेक विद्यालयों , महाविद्यालयों के प्राध्यापक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे । कलकत्ता विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग के प्राध्यापकों के साथ अन्य विभागों से भी प्राध्यापक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे । अपने सहकर्मियों एवं विद्यार्थियों में अत्यंत लोकप्रिय प्रो चंद्रा पांडेय के विषय में उपस्थित सभी ने अपनी स्मृतियाँ साझा कीं ।कोलकाता के कई महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में अध्यापन कार्य से जुड़े हुए प्रोफेसर पांडेय के विद्यार्थी श्रद्धांजलि निवेदित करने हेतु कलकत्ता विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग में एकत्र हुए। वे माकपा की समर्पित कार्यकर्ता थीं तथा आजीवन जनता से व्यापक सरोकार रहा था । संसद के कार्यकाल के दौरान उन्होंने जनता के हित में कई बिल राज्यसभा में पास करवाए । विश्वविद्यालय के लिए अपनी सांसद निधि से एक लिफ्ट की व्यवस्था करवाई । पूरा शिक्षाजगत उनके निधन से आहत है। उन्होंने साहित्य जगत में अपनी लेखनी से महत्वपूर्ण कार्य किए। चंद्रा पांडेय के नाम से मशहूर डॉ. चंद्रकला पांडेय के व्यक्तित्व के अनेक रूपों को याद किया गया ।कइयों के लिए वे कवयित्री रहीं तो कुछ के लिए अनुवादक। कुछ के लिए वे संपादक ,तो कुछ के लिए आलोचक। बंगाल से लेकर पूर्वोत्तर तक फैली एक बहुत बड़ी आबादी के लिए वे ‘मैम’ तथा आत्मीयों के लिए ‘चंद्रा दी’ हैं।
श्रद्धांजलि सभा के आरंभ में उनकी तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर उपस्थित सभी ने अपने मनोद्गार को प्रकट करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की । इस अवसर पर प्रो. शम्भुनाथ, डॉ.सुषमा हंस, डॉ वसुमति डागा, डॉ सुनन्दा राय चौधरी, प्रो बिजय कुमार साव,डॉ मोहम्मद शकील, प्रो. राम प्रह्लाद चौधरी, डॉ. इंदिरा चक्रवर्ती, डॉ. गीता दूबे, डॉ. संजय जायसवाल (प्राचार्य), मृत्युंजय श्रीवास्तव, डॉ. इतु सिंह, डॉ. संजय जायसवाल. सवाल, डॉ. कुलदीप कौर, डॉ. सुमिता चट्टोराज, डॉ. अल्पना नायक, प्रो. प्रीति सिंघी , डॉ. ललित झा, डॉ आदित्य गिरि, डॉ. दीक्षा गुप्ता , छात्र -छात्राएं एवं शोधार्थी बहुसंख्या में उपस्थित थे। सभी ने चंद्रा मैम के साथ अपनी स्मृतियों को साझा करते हुए उनकी आत्मा की शान्ति के लिए प्रार्थना की । डॉ. चंद्रकला पांडेय जी ने एक शानदार जीवन जिया और सदैव सक्रिय रहीं ।कार्यक्रम का संचालन डॉ. राम प्रवेश रजक जी ने किया । विभागाध्यक्ष प्रो राजश्री शुक्ला ने शांतिपाठ के साथ सभा समाप्ति की घोषणा की ।
नहीं रहीं प्रो. चंद्रकला पांडेय
कोलकाता । पूर्व राज्यसभा सदस्य प्रो. चंद्रकला पांडेय का निधन हो गया है। वे कलकत्ता विश्वविद्यालय (सीयू) में हिंदी विभाग की पहली महिला प्रोफेसर तथा माकपा की समर्पित कार्यकर्ता थीं। दो सत्रों के लिए वे राज्यसभा की सांसद रहीं। उनकी उम्र 83 वर्ष थी। वृद्धावस्था जनित समस्याओं के साथ वे टीबी से पीड़ित थीं। बुधवार को दोपहर दो बजकर चालीस मिनट पर आरजी कर अस्पताल के टीबी वार्ड में उन्होंने अंतिम सांस ली। उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले में जन्मी साम्या, दिल्ली से प्रकाशित होने वाली त्रैमासिक पत्रिका की 1993 से संयुक्त सम्पादक रहीं। उन्होंने कई पुस्तकें लिखीं। वे अपने पीछे भरा-पूरा परिवार छोड़ गयी हैं। उनके निधन से कोलकाता के साहित्यिक और शैक्षणिक जगत में शोक की लहर है।
पाकिस्तान की फर्जी फुटबाल टीम को जापान से निर्वासित
-मानव तस्करी का आरोप
टोक्यो । मानव तस्करी के प्रयास में फुटबॉल टीम के रूप में जापान आए पाकिस्तानी नागरिकों के एक समूह को वहां से निर्वासित कर दिया गया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जापान पहुंचे 22 पाकिस्तानी नागरिकों ने सियालकोट की एक फुटबॉल टीम के खिलाड़ी होने का दावा किया था, लेकिन जांच के बाद उनके पास नकली दस्तावेज़ पाए गए। जापानी अधिकारियों ने हवाई अड्डे पर इस समूह को रोका और उनके प्रमाण-पत्रों की जांच के बाद उन्हें वापस भेज दिया। जापान की संघीय जांच एजेंसी (एफआईए) ने इस मामले में मुख्य संदिग्ध की पहचान मलिक वकास के रूप में की, जिसे बाद में पाकिस्तान में गुजरांवाला से गिरफ्तार किया गया। वकास ने कथित तौर पर ‘गोल्डन फुटबॉल ट्रायल’ नामक एक क्लब पंजीकृत कराया था और लोगों को फुटबॉलर की तरह व्यवहार करने की सीख भी दी थी। उसने प्रत्येक सदस्य से उनकी यात्रा की सुविधा के लिए चालीस से पैंतालीस करोड़ रूपये लिए थे।एफआईए के एक अधिकारी ने बताया कि समूह ने बोविस्टा फुटबॉल क्लब के निमंत्रण पर पाकिस्तान फुटबॉल महासंघ के जाली पंजीकरण पत्रों और विदेश मंत्रालय के फर्जी अनापत्ति प्रमाण पत्र का इस्तेमाल कर जापान के लिए 15 दिनों का यात्रा वीजा हासिल किया, लेकिन इनमें से कोई भी यात्री योजना के अनुसार पाकिस्तान नहीं लौटा।
एफआईए ने पुष्टि की कि वकास से जुड़ी यह पहली घटना नहीं थी। इसी साल 15 जून को ऐसे ही एक अन्य मामले में 22 सदस्यीय एक फर्जी फुटबॉल टीम को भी जापानी अधिकारियों ने निर्वासित कर दिया था जिसके बाद औपचारिक जांच और गिरफ्तारियां हुईं। एफआईए के गुजरांवाला निदेशक, मुहम्मद बिन अशरफ ने कहा कि इन मामलों में अभी आगे की जांच जारी है।
ईवीएम में पहली बार होंगी प्रत्याशियों की रंगीन तस्वीरें
– बिहार चुनाव में होगा पहला प्रयोग
नयी दिल्ली । भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने ईवीएम मतपत्रों के डिजाइन और मुद्रण के लिए आचार संहिता, 1961 के नियम 49बी के तहत मौजूदा दिशानिर्देशों में संशोधन किया है, ताकि उनकी स्पष्टता और पठनीयता बढ़ाई जा सके।
यह पहल पिछले 6 महीनों में ईसीआई द्वारा मतदाताओं के लिए चुनाव प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित और बेहतर बनाने के लिए उठाए गए 28 उपायों के अनुरूप है।
अब से, ईवीएम मतपत्र पर उम्मीदवारों की तस्वीरें रंगीन स्थान में मुद्रित की जाएंगी। बेहतर दृश्यता के लिए, उम्मीदवार का चेहरा फोटो स्थान के तीन-चौथाई हिस्से को घेरेगा। अंतर्राष्ट्रीय अंक प्रारूप में क्रम संख्या मुद्रित किए जाएंगे। अंकों की एकरूपता सुनिश्चित करने के लिए फ़ॉन्ट का आकार 30 और स्पष्टता के लिए बोल्ड में होगा।
एकरूपता सुनिश्चित करने के लिए, उम्मीदवारों/नोटा के नाम भी उसी फ़ॉन्ट प्रकार और फ़ॉन्ट आकार में मुद्रित किए जाएंगे ताकि वे आसानी से पढ़े जा सकें। ईवीएम मतपत्र 70 जीएसएम पेपर पर मुद्रित किए जाएंगे। विधानसभा चुनावों के लिए, पिंक-टिंटेड पेपर का उपयोग किया जाएगा, जो विशेष आरजीबी के होंगे। उन्नत ईवीएम मतपत्रों का उपयोग बिहार से शुरू होने वाले आगामी चुनावों में किया जाएगा।
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पराली जलाने वालों पर दंडात्मक कार्रवाई क्यों नहीं : सुप्रीम कोर्ट
नयी दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर में पराली जलाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से कहा कि इस मामले में पराली जलाने वालों के खिलाफ दंडात्मक प्रावधान क्यों नहीं की जा रही है। सरकार कार्रवाई से कतरा क्यों रही है? कुछ लोगों को जेल भेजने से सही संदेश जाएगा। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस बीआर गवई ने कहा कि हम किसानों का सम्मान करते हैं, क्योंकि वे हमें खाना देते हैं, लेकिन किसी को भी पर्यावरण को दूषित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि आप किसानों के लिए कुछ दंडात्मक प्रावधानों के बारे में क्यों नहीं सोचते? अगर कुछ लोग जेल में हैं, तो इससे सही संदेश जाएगा। अगर पर्यावरण की रक्षा करने का आपका सच्चा इरादा है, तो फिर आप कार्रवाई करने से क्यों डर रहे हैं? अदालत ने सरकार से कहा कि देश में किसानों का एक विशेष स्थान है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वे इसका फायदा उठाएं। सरकार इस पर फैसला ले, नहीं तो अदालत आदेश जारी करेगी। गलती करने वाले अधिकारियों की तो बात छोड़िए, क्योंकि हर किसान पर नजर रखना अधिकारियों के लिए मुश्किल है। मुख्य न्यायाधीश ने कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट से पूछा, “आप पराली जलाने वाले किसानों के लिए दंडात्मक प्रावधान लाने पर विचार क्यों नहीं करते हैं?” यह बातें सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली एनसीआई से संबंधित राज्यों में राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में खाली पदों को नहीं भरे जाने पर अवमानना नोटिस पर सुनवाई के दौरान कहीं।
दिल्ली के पड़ोसी राज्यों पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और हरियाणा में हर साल अक्टूबर और नवंबर में पराली जलाने की घटनाएं सामने आती हैं। पराली जलाने की वजह से दिल्ली एनसीआर की हवा जहरीली हो जाती है। इन राज्यों के किसान पराली को खेतों से हटाने के बजाय जला देते हैं। पराली जलाने की घटनाएं हर साल सामने आती रहती हैं।
मदर डेयरी ने दूध, पनीर और घी के दाम घटाये
नयी दिल्ली । मदर डेयरी माल एवं सेवा कर (जीएसटी) में 100 फीसदी कटौती का लाभ उपभोक्ताओं को देगी। इसीलिए अब अपने उत्पादों की कीमतों में 2 रुपये से लेकर 30 रुपये तक की कटौती करने का ऐलान किया है। ये नई कीमतें 22 सितंबर से लागू होंगी। मदर डेयरी ने मंगलवार को रोजमर्रा की जरूरतों वाले उत्पादों जैसे टोन्ड मिल्क, पनीर, बटर, घी, पनीर और प्रीमियम गाय के घी की कीमतों में कटौती का ऐलान किया है। कीमतों में कटौती के बाद एक लीटर टोंड यूएचटी टेट्रा पैक दूध की कीमत 77 रुपये प्रति लीटर से घटकर 75 रुपये हो जाएगी, जबकि 450 एमएल वाला पैक अब 33 रुपये के बजाय 32 रुपये में मिलेगा। फ्लेवर्ड मिल्कशेक के 180 एमएल पैक की कीमत भी 30 रुपये से घटकर 28 रुपये हो जाएगी। मदर डेयरी ने पनीर के दामों में भी कटौती की है। अब 200 ग्राम वाला पनीर 95 रुपये की जगह 92 रुपये में और 400 ग्राम वाला पनीर का पैकेट 180 रुपये की जगह 174 रुपये में मिलेगा। इसी तरह मलाई पनीर का 200 ग्राम पैक भी 100 रुपये से घटकर 97 रुपये में बिकेगा। इसी तरह घी और मक्खन के दामों में भी राहत दी गई है। अब 500 ग्राम वाला मक्खन 305 रुपये के बजाय 285 रुपये में और 1 लीटर घी का कार्टन पैक 675 रुपये की बजाय 645 रुपये में मिलेगा। मदर डेयरी के प्रबंध निदेशक मनीष बंडलिश ने कहा कि जीएसटी दरों में कटौती उपभोक्ताओं के लिए सीधी राहत है। उन्होंने कहा कि हम सरकार के जीएसटी के लाभ को बिना किसी देरी के ग्राहकों तक पहुंचा रहे हैं। इससे पैक्ड फूड्स की खपत बढ़ेगी, किसानों की आमदनी में सुधार होगा और पूरी सप्लाई चेन को मजबूती मिलेगी।




