Sunday, July 5, 2026
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यौन शोषण के शिकार बच्चों को है न्याय का इंतजार

फास्ट ट्रैक स्पेशल अदालतों में 2.43 लाख मामले लंबित
नयी दिल्ली । केंद्र सरकार की तमाम नीतियों, प्रयासों और वित्तीय प्रतिबद्धताओं के बावजूद पॉक्सो के मामलों की सुनवाई के लिए बनाई गई विशेष त्वरित अदालतों में 31 जनवरी, 2023 तक देश में 2 लाख 43 हजार 237 मामले लंबित थे। अगर लंबित मामलों की इस संख्या में एक भी नया मामला नहीं जोड़ा जाए तो भी इन सारे मामलों के निपटारे में कम से कम नौ साल का समय लगेगा। अरुणाचल प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में पॉक्सो के लंबित मामलों के निपटारे में 25 से ज्यादा साल तक का समय लग सकता है। साथ ही 2022 में पॉक्सो के सिर्फ तीन फीसदी मामलों में सजा सुनाई गई। ये चौंकाने वाले तथ्य इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन फंड (आईसीपीएफ) की ओर से जारी शोधपत्र ‘जस्टिस अवेट्स : ऐन एनालिसिस ऑफ द एफिकेसी ऑफ जस्टिस डेलिवरी मैकेनिज्म्स इन केसेज ऑफ चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज’ से उजागर हुए हैं।
यौन शोषण के शिकार बच्चों के लिए न्याय सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा 2019 में एक ऐतिहासिक कदम के जरिए फास्ट ट्रैक स्पेशल अदालतों के गठन और हर साल इसके लिए करोड़ों की राशि देने के बावजूद इस शोधपत्र के निष्कर्षों से देश के न्यायिक तंत्र की क्षमता और दक्षता पर सवालिया निशान उठ खड़े होते हैं। शोधपत्र के अनुसार मौजूदा हालात में जनवरी, 2023 तक के पॉक्सो के लंबित मामलों के निपटारे में अरुणाचल प्रदेश को 30 साल लग जाएंगे जबकि दिल्ली को 27, पश्चिम बंगाल को 25, मेघालय को 21, बिहार को 26 और उत्तर प्रदेश को 22 साल लगेंगे। फास्ट ट्रैक स्पेशल अदालतों जैसी विशेषीकृत अदालतों की स्थापना का प्राथमिक उद्देश्य यौन उत्पीड़न के मामलों और खास तौर से यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम से मुड़े मामलों का त्वरित गति से निपटारा करना था। इनका गठन 2019 में किया गया और भारत सरकार ने हाल ही में केंद्र प्रायोजित योजना के रूप में इसे 2026 तक जारी रखने के लिए 1900 करोड़ रुपये की बजटीय राशि के आवंटन को मंजूरी दी है। इन फास्ट ट्रैक स्पेशल अदालतों के गठन के बाद माना गया कि वे इस तरह के मामलों का साल भर के भीतर निपटारा कर लेंगी लेकिन इन अदालतों में आए कुल 2 लाख 68 हजार 38 मुकदमों में से महज 8 हजार 909 मुकदमों में ही अपराधियों को सजा सुनाई जा सकी है। अध्ययन से यह उजागर हुआ है कि प्रत्येक फास्ट ट्रैक स्पेशल अदालत ने साल भर में औसतन सिर्फ 28 मामलों का निपटारा किया। इसका अर्थ यह है कि एक मुकदमे के निपटारे पर नौ लाख रुपये का खर्च आया। शोधपत्र के अनुसार, “प्रत्येक विशेष अदालत से हर तिमाही 41-42 और साल में कम से कम 165 मामलों के निपटारे की उम्मीद की जा रही थी लेकिन आंकड़ों से लगता है कि गठन के तीन साल बाद भी ये विशेष अदालतें अपने तय लक्ष्य को हासिल करने में विफल रही हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का हवाला देते हुए शोधपत्र आगे कहता है कि बाल विवाह बच्चों के साथ दुष्कर्म है। उधर, वर्ष 2011 की जनगणना के आंकड़े बताते हैं कि देश में रोजाना 4,442 नाबालिग लड़कियों की शादी करवा दी जाती है। इसका मतलब यह है कि देश में हर मिनट तीन बच्चियों को बाल विवाह के नर्क में झोंक दिया जाता है जबकि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की हालिया रिपोर्ट कहती है कि देश में बाल विवाह के रोजाना सिर्फ तीन मामले दर्ज होते हैं। आईसीपीएफ के संस्थापक भुवन ऋभु ने बाल विवाह को रोकने के लिए देश में मजबूत नीतियों, कड़े कानूनों और पर्याप्त वित्तीय प्रतिबद्धताओं के बावजूद सजा की मामूली दरों को गंभीर चिंता का विषय करार दिया। भुवन ऋभु ने कहा, “कानून की भावना को हर बच्चे के लिए न्याय में रूपांतरित होने की जरूरत है। अगर बच्चों के यौन शोषण के आरोपितों में महज तीन प्रतिशत को ही सजा मिल पाती है तो ऐसे में कहा जा सकता है कि कानूनी निरोधक उपाय नाकाम हैं। अगर पीड़ित बच्चों को बचाना है तो सबसे जरूरी चीज यह है कि बच्चों और उनके परिवारों की सुरक्षा की जाए, उनके पुनर्वास और क्षतिपूर्ति के इंतजाम किए जाएं और पूरा न्यायिक तंत्र निचली अदालतों से लेकर हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट जैसी ऊपरी अदालतों तक मुकदमे का समयबद्ध निपटारा सुनिश्चित करे।”
यौन शोषण के पीड़ित बच्चों को एक समयबद्ध और बच्चों के प्रति मैत्रीपूर्ण तरीके से न्याय दिलाना सुनिश्चित करने और लंबित मामलों के निपटारे के लिए आईसीपीएफ ने कई अहम सिफारिशें की हैं। यह रिपोर्ट विधि एवं कानून मंत्रालय, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय एवं राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो से मिले आंकड़ों पर आधारित है।

संतुलित आहार लीजिए. दिल का ख्याल रखिए 

ऐसी धारणा है कि हृदय रोग हानिकारक खानों के अधिक सेवन से होता है लेकिन, वास्तव में यूरोपियन हार्ट जर्नल के जुलाई 2023 अंक में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार इसके लिए सुरक्षात्मक खाद्य पदार्थों का अंडरन्यूट्रिशन अधिक जिम्मेदार है। अध्ययन के निष्कर्षों से पता चलता है कि विशिष्ट प्रकार के सुरक्षात्मक भोजन जैसे फल, सब्जियां, साबुत अनाज, नट्स, फलियां, पूर्ण वसा वाले डेयरी उत्पाद और मछली के कम सेवन से दिल के दौरे का खतरा बढ़ जाता है। हैप्पीएस्ट हेल्थ के अनुसार मणिपाल अस्पताल, मिलर्स रोड, बेंगलुरु के कार्डियोलॉजी सलाहकार डॉ. सुनील द्विवेदी कहते हैं कि आजकल का आहार असंतुलित और कैलोरी में उच्च है। इसमें प्रोसेस्ड भोजन शामिल होता है जिसमें विटामिन और खनिज सहित सूक्ष्म पोषक तत्व कम होते हैं. इसके बजाय, एक संतुलित आहार की आवश्यकता होती है, जिसमें उचित हिस्सों में प्रोटीन और फैट के साथ सीमित कार्बोहाइड्रेट शामिल हो । वह इस बात पर जोर देते हैं कि कैलोरी सेवन को सीमित करने और मेटाबॉलिज्म को बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है। यह हमें मधुमेह, उच्च कोलेस्ट्रॉल और उच्च रक्तचाप से बचाता है। एसजीएचएस अस्पताल, सोहना, मोहाली के कार्डियोलॉजी विभाग के निदेशक और प्रमुख डॉ. हरप्रीत सिंह गिल्होत्रा ​​का भी मानना ​​है कि हमें कैलोरी की मात्रा और कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने के लिए फाइबर की आवश्यकता होती है।
सेब -सेब को हृदय रोग के खतरे को कम करने वाला माना जाता है। आहार विशेषज्ञों का का कहना है कि सेब साल्यबल फाइबर से भरपूर होते हैं जो शरीर में बहुत सारे खराब फैट को कम करने में मदद करते हैं।
अनार – अनार में विटामिन सी होता है और इसे एंटीऑक्सीडेंट माना जाता है। इस प्रकार, यह ऑक्सीडेटिव तनाव से लड़ने में मदद करता है जो मधुमेह और हृदय जटिलताओं सहित कई पुरानी स्थितियों से संबंधित है।
बादाम – कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को कम करने और प्लेटलेट फ़ंक्शन में सुधार करने के लिए नियमित रूप से बादाम जैसे नट्स का सेवन करना चाहिए।
पपीता – पपीता एक हृदय स्वस्थ फल है जो एंटीऑक्सिडेंट, विटामिन और खनिजों से भरपूर है, जो इसे हृदय के लिए फायदेमंद बनाता है। इसमें फाइबर प्रचुर मात्रा में होता है, जो कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करता है, जिससे वजन बढ़ने पर नियंत्रण रहता है. इतना ही नहीं, पपीते में विटामिन सी और बीटा-कैरोटीन होता है। अखरोट – अखरोट में उच्च मात्रा में ओमेगा-3 फैटी एसिड (अल्फा-लिनोलेनिक एसिड) होता है, जिसे हृदय स्वास्थ्य पर लाभकारी प्रभाव माना जाता है। वे एलडीएल-कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करते हैं, जो हृदय संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं का प्राथमिक कारण है> इसके अलावा, वे रक्त के थक्कों को नियंत्रित करने में मदद करते हैं ।
(डेली हंट के माध्यम से )

बंगाल का एक गांव जहां जलेबी की कीमत है 700 रुपये

हलवाइयों ने की जीआई टैग की मांग
बांकुड़ा । भारत अपनी सभ्यता,संसकृति और ऐतिहासिक धरोहरों के लियें तो प्रसिद्ध हैं इसके साथ यहाँ का लजीज खाना भी विश्व प्रसिद्ध हैं । खाने मे भारतीय मिठाइयों का कोई जवाब नहीं है फिर चाहें वो बंगाल का रसगुल्ला ,फरुखाबाद की इमरती हो या मथुरा के पेड़े । स्वाद ऐसा की जुबान भूल ना पाएं ।आज हम एक ऐसी ही मिठाई की बात करेंगे जो किसी भी समय खाई जा सकतीं हैं । इसे लोग दूध के साथ और दही के साथ खाना ज्यादा पसंद करतें हैं जी हां हम बात कर रहें हैं रस भरी जलेबी की।शायद ही कुछ लोग होंगे जिन्हें जलेबी ना पसंद हो ।
अक्सर जब हमें जलेबी खाने का मन होता है तो हम किसी पास की हलवाई की दुकान से या नुक्कड़ पर लगे जलेबी के ठेले से खरीद कर खा लेते हैं । लेकिन आज हम बात करेंगे पश्चिम बंगाल में बांकुड़ा जिले के केंजाकुड़ा गांव की सबसे बड़ी जलेबी के बारें में जिसकी कीमत 300 रुपये से 700 रुपये के बीच हैं ।
पश्चिम बंगाल में बांकुड़ा जिले के एक गाँव जिसका नाम केंजाकुड़ा गांव हैं यहां भादों के महीने मे विश्वकर्मा पूजा और भादू पूजा के अवसर पर विशालकाय जलेबी बनाने की परंपरा हैं । कुटीर उद्योगों से समृद्ध बांकुड़ा का यह औद्योगिक गांव जहां कांसा-पीतल और बुनाई का काम होता है ।बधू पूजा के अवसर पर यह केंजाकुड़ा जलेबी बंगाली परंपरा से बनाई जाती है। इस जंबो आकार की जलेबी के एक टुकड़े की कीमत 300 से 700 रुपये के बीच है।इस बड़ी सी जलेबी का वजन 2 से 4 किलो के लगभग होता हैं । मिठाई की दुकानों में बड़ी जलेबी कौन बना सकता है और इस विशाल जलेबी को किसने खरीदा, इसकी एक अघोषित और मैत्रीपूर्ण प्रतियोगिता होने लगती है। इस जलेबी को खाने और देखने के लियें दूर-दूर से लोग आते हैं ।
एक परंपरा के अनुसार पंचकोट राज नीलमणि सिंहदेव की तीसरी पुत्री भद्रावती की असामयिक मृत्यु हो गई थी। बाद में पंचकोट शाही परिवार ने ग्रेटर बंगाल में भादु पूजा शुरू की। तभी से द्वारकेश्वर नदी के तट पर स्थित बांकुरा के प्राचीन शहर केंजाकुरा में भादु पूजा लंबे समय से की जाती रही है। हर वर्ष भाद्रपद के 27 तारीख से लेकर अश्विन की पांच तारीख तक यहां जलेबी का यह मेला लगता है । कौन कितनी बडी जलेबी बनाता है और कौन इसे खरीदता है सबके लिए चर्चा का विषय रहता है । विश्वकर्मा पूजा के दिन तो लाइन लगा कर लोग इसे खरीदते हैं । इस जलेबी को अपने रिश्तेदारों के यहां भी भेजते हैं । यहां के दुकानदारों का कहना है कि अब तो इस जलेबी को विदेशों मे भी भेजा जा रहा है और वहां के लोग इसे खूब पसंद कर रहें हैं ।
व्यापारी कर रहें हैं जीआई टैग की मांग – पश्चिम बंगाल की इस जलेबी की प्रसिद्धि और डिमांड देखते हुए दुकानदारों और व्यापारियों ने जीआई टैग की मान्यता देने की मांग की है। यहां के हलवाइयों का दावा है कि यह विशाल जलेबी यहां के अलावा पूरे भारत में और कहीं भी नहीं बनाई जाती है और न ही दुनिया के किसी भी अन्य देश में।

मैक्स हेल्थकेयर ने 940 करोड़ में खरीदा लखनऊ का सहारा हॉस्पिटल

लखनऊ । मैक्स हेल्थकेयर ने टियर-I/II शहरों में अपना व‍िस्‍तार करने के ल‍िए लखनऊ में 550 बेड वाले सहारा अस्पताल को खरीद ल‍िया है। मैक्स और सहारा हॉस्पिटल की डील करीब 940 करोड़ रुपये (लगभग 113 मिलियन डॉलर) में हुई है। यह सौदा मैक्स की सहायक कंपनी क्रॉसले रेमेडीज के जर‍िये क‍िया गया। मैक्स हेल्थकेयर की तरफ से बताया गया क‍ि उसने स्टारलिट मेडिकल सेंटर प्राइवेट लिमिटेड की 100 प्रतिशत हिस्सेदारी के अधिग्रहण का करार क‍िया है। स्टारलिट के पास सहारा अस्पताल का मालिकाना हक है.
250 बिस्तरों की ऑपरेशन बेड क्षमता – मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, वैशाली और मैक्स मेडिकल सेंटर, नोएडा को क्रॉसले रेमेडीज की तरफ से संचालित क‍िया जाता हैय़ मैक्स हेल्थकेयर की तरफ से जुलाई 2015 में पुष्पांजलि क्रॉसले हॉस्पिटल, वैशाली को टेकओवर क‍िया गया था। सहारा अस्पताल की फ‍िलहाल ऑपरेशन बेड कैप‍िस‍िटी करीब 250 बिस्तरों की है जिसमें व‍ित्‍त वर्ष 2024 का रेवेन्‍यू रन रेट 200 करोड़ रुपये है। मैक्स हेल्थकेयर इंस्टीट्यूट के सीएमडी सोई ने कहा, ‘हम इस अधिग्रहण को लेकर काफी उत्साहित हैं। यह टियर I/II शहरों में प्रवेश करने की हमारी रणनीति के अनुरूप है. इन शहरों के पास विकसित हेल्‍थ केयर सर्व‍िस इकोस‍िस्‍टम है।
मैक्स हेल्थकेयर इंस्टीट्यूट लिमिटेड 940 करोड़ रुपये में लखनऊ के सहारा अस्पताल का न‍ियंत्रण अपने हाथ में लेगा। इस अधिग्रहण के जर‍िये मैक्स हेल्थकेयर लखनऊ में प्रवेश कर रहा है, यह यूपी का सबसे तेजी से बढ़ते शहरों में से एक है। मैक्स हेल्थकेयर की तरफ दी गई जानकारी में कहा गया क‍ि अस्पताल 17 मंजिला इमारत में है। यहां पर गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, न्यूरो, सर्जरी, कार्डियोलॉजी, पल्मोनोलॉजी और डायग्नोस्टिक्स विभाग हैं। इसमें एक नर्सिंग कॉलेज भी है. फ‍िलहाल अस्पताल हर साल करीब दो लाख मरीजों को सेवा मुहैया कराता है। यह न्यूरोसाइंस के लिए प्रख्यात उपचार केन्द्र है।

69 महीनों में आईटी मंत्रालय ने ब्लॉक किए भारत के लिए खतरा बने 36,838 यूआरएल

नयी दिल्ली । आईटी मंत्रालय ने जनवरी 2018 से अक्टूबर 2023 के बीच 69A के तहत 36,838 यूआरएल (यूनिफॉर्म रिसोर्स लोकेटर) को ब्लॉक किया है। केंद्रीय राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने  गत शुक्रवार (8 दिसंबर) को पार्लियामेंट में सीपीआई(एम) के सांसद जॉन ब्रिटास के सवाल के बाद यह लिखित जानकारी दी। इन 69 महीनों में सबसे ज्यादा एक्स (पहले ट्विटर) के यूआरएल ब्लॉक किए गए।
साल 2020 में सबसे ज्यादा यूआरएल हुए ब्लॉक
मंत्रालय ने जानकारी दी कि साल 2018 में 2799 यूआरएल ब्लॉक किए गए. वहीं इस साल अक्टूबर तक 7502 यूआरएल और सबसे ज्यादा 2020 में 9849 यूआरएल ब्लॉक किए गए।
आईटी सेक्शन की धारा 69ए के तहत आईटी सचिव की सिफारिश पर किसी मध्यस्थ एजेंसी को छह कारणों से ब्लॉक करने के आदेश जारी किए जा सकते हैं। भारत की संप्रभुता और अखंडता पर खतरा, भारत की रक्षा से संबंधित, राज्य की सुरक्षा, विदेशों से मित्रता, किसी संज्ञेय अपराध को लिए उकसावे को रोकने के लिए, ऐसी स्थितियों में यूआरएल ब्लॉक किया जाता है।
कब-कब किया गया यूआरएल ब्लॉक – आईटी मंत्रालय ने बताया कि साल 2021 में 6118 यूआरएल ब्लॉक किए गए थे। जून 2022 में एक आरटीआई के जवाब में आईटी मंत्रालय ने कहा था कि उस समय 6096 यूआरएल ब्लॉक किए गए थे। मंत्रालय की ओर से कहा गया कि साल 2022 में कुल 6935 यूआरएल ब्लॉक किए गए. जबकि 2 अगसत 2023 को मंत्रालय ने कहा था कि साल 2022 में 6,775 यूआरएल ब्लॉक किए गए थे।
बिना किसी न्यायिक मामले के किए गए ब्लॉक – इससे पहले मार्च 2020 में। आईटी मंत्रालय ने लोकसभा को बताया था कि 2019 में 3,635 यूआरएल ब्लॉक किए गए थे. छह महीने बाद, यह संख्या बदल कर 3,655 हो गई। मंत्रालय की ओर से ब्लॉक किए गए यूआरएल में कोई ऐसा डेटा नहीं था जिसके लिए कोर्ट ने आदेश जारी किया हो, जैसे कि कॉपीराइट या मानहानि।

भवानीपुर अंतर कॉलेज नृत्य चैम्पियनशिप 2023 संपन्न

कोलकाता । भवानीपुर डांस चैंपियनशिप’ 2023 या बीडीसी नामक सबसे बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया। कोलकाता में सबसे बड़ी और एकमात्र अंतर-कॉलेज नृत्य प्रतियोगिता होने के नाते, बीडीसी ने इस वर्ष अपने 8वें संस्करण की मेजबानी की और प्रतियोगिता की थीम को ‘कार्निवल ऑफ क्यूरियोसिटीज़’ कहा गया।इस वर्ष भवानीपुर नृत्य चैम्पियनशिप में सात कार्यक्रम थे, जिनमें से प्रत्येक को सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन लाने के लिए डिज़ाइन किया गया था। उद्घाटन समारोह कॉलेज के जुबली सभागार में सुबह 10 बजे से शुरू हुआ। इसमें एनेक्ट कलेक्टिव का प्रदर्शन हुआ, जिसमें फ्लेम्स का हिस्सा होने का क्या मतलब है, इसका एक मजेदार अभिनय दिखाया गया। इस एक्ट ने लोगों के चेहरों पर खुशी और हंसी ला दी।
उद्घाटन समारोह का समापन फ्लेम्स द्वारा नृत्य की शक्ति पर बनाई गई एक लघु फिल्म के साथ हुआ, जिससे चैंपियनशिप के उद्घाटन कार्यक्रम की शुरुआत हुई।अलग अलग नृत्य हुए जिसके विषय भी अलग अलग रखे गए। बॉलीवुड डुओ/ट्रायो: इसकी थीम ‘समय यात्रा’ है – इसी खास थीम को ध्यान में रखते हुए पांच कॉलेजों ने इस आयोजन में हिस्सा लिया।विजेता स्थान टीएचके जैन कॉलेज ने हासिल किया, जबकि प्रथम रनर-अप स्थान भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज (मुख्य टीम) ने हासिल किया, और टेक्नो इंडिया ने दूसरा रनर-अप स्थान हासिल किया।
बॉलीवुड समूह नृत्य: बॉलीवुड समूह नृत्य का विषय “रहस्यमय फुसफुसाहट” था। प्रत्येक महाविद्यालय से पाँच टीमों ने भाग लिया; प्रत्येक कॉलेज ने 5+3 मिनट से कम समय में थीम को अपने अनूठे तरीके और शैली में दर्शाया। इसमें भवानीपुर कॉलेज विजेता रहा। सेंट जेवियर्स कॉलेज ने प्रथम रनर-अप स्थान प्राप्त किया और शिवनाथ शास्त्री कॉलेज ने द्वितीय रनर-अप स्थान प्राप्त किया। विशिष्ट प्रस्तुति के लिए बीईएससी की हंसिका चांडक को स्थान प्रदान किया गया। समूह लोक नृत्य का विषय ‘लोकगीत’ था और इसमें भाग लेने वाली 9 टीमों को पारंपरिक पोशाक और सहायक उपकरण पहनाए गए थे जो उस संस्कृति का सबसे अच्छा प्रतिनिधित्व करेंगे जो वे चित्रित कर रहे थे। टीमों को 4+1 मिनट से कम समय में प्रस्तुति करने के लिए कहा गया था। इस श्रेणी में प्रॉप्स का उपयोग स्पष्ट था क्योंकि इसमें डांडिया स्टिक और अन्य प्रकार के प्रॉप्स थे जो नृत्य की दिनचर्या को बढ़ाते थे। इस आयोजन के निर्णायक श्री धर्मेश बिमानी और डॉ.शेली पॉल थे। विजयी टीम भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज (ओटीएसई टीम), प्रथम रनर-अप का स्थान भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज (मुख्य टीम) ने हासिल किया, जबकि दूसरा रनर-अप स्थान सेठ आनंदराम जयपुरिया कॉलेज ने हासिल किया।
पश्चिमी समूह नृत्य में “अव्यवस्था” विषय रखा गया था और भाग लेने वाली 5 टीमों द्वारा किया गया। प्रदर्शन इसी तरह की अराजकता की भावना से भरा हुआ था। प्रत्येक टीम को प्रदर्शन के लिए 5+3 मिनट का समय मिला। इस कार्यक्रम के निर्णायक संचारी चक्रवर्ती और रीशव धानुक रहे । सभी टीमों ने एक ही प्रस्तुति में अलग-अलग कहानियाँ सुनाकर अपने समय का सदुपयोग किया। अंत में, भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज (वेस्टर्न मेन टीम) ने विजेता पुरस्कार जीता, जबकि जादवपुर विश्वविद्यालय ने प्रथम रनर-अप स्थान हासिल किया और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट (IIHM) को दूसरा रनर-अप स्थान दिया गया। सर्वश्रेष्ठ कलाकार का पुरस्कार बीईएससी (वेस्टर्न मेन टीम) के आशुतोष सिंह को दिया गया था।
ईस्टर्न ग्रुप डांस: “कार्निवल ऑफ शैडोज़” थीम के तहत इस श्रेणी में 8 कॉलेजों ने भाग लिया। 6+1 मिनट के साथ, टीमों ने बाल शोषण और महिला सशक्तिकरण जैसे विषयों को सबसे विस्मयकारी तरीके से चित्रित किया। इस श्रेणी में बहुत सारे प्रॉप्स भी थे जिनमें पर्दे शामिल थे जिनका उपयोग छाया की भावना पैदा करने के लिए किया जाता था। कार्यक्रम की निर्णायक रीना जाना और देबमित्रा सेनगुप्ता थीं। अंत में, भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज (पूर्वी मुख्य टीम) विजेता रही, शिवनाथ शास्त्री कॉलेज प्रथम उपविजेता और सेठ आनंदराम जयपुरिया कॉलेज द्वितीय उपविजेता रहा।
स्ट्रीट बैटल दो घंटे तक चला जिसमें एक बड़ी भीड़ एक घेरे में इकट्ठा हुई और इसके भीतर कलाकारों के लिए केंद्र मंच था। हिप हॉप संगीत और पॉप संस्कृति का उपयोग अधिक था क्योंकि थीम ही ‘डाउनटाउन डांस ऑफ’ थी। कार्यक्रम का प्रारूप 1vs1 फेसऑफ़ था। संगीत और राउंड का निर्णय शुभम सिंह उर्फ ​​एंडलेस, रीशव धानुक और सैकत दास (डीजे)द्वारा किया गया । नर्तकों ने अपने प्रतिद्वंद्वी पर बढ़त हासिल करने के लिए पॉपिंग और लॉकिंग जैसी नृत्य की पश्चिमी तकनीकों का इस्तेमाल किया। इस आयोजन में दस महाविद्यालयों ने भाग लिया। अंत में, इवेंट के विजेता बंगाल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के पॉल थे और प्रथम रनर-अप इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट (आईआईएचएम) के ऋषभ थे।
सभी विजेताओं को कॉलेज प्रबंधन की ओर से नलिनी पारेख द्वारा उनके संबंधित पुरस्कार दिए गए। सभी घटनाओं के निर्णायकों में प्रो बी.कॉम (मॉर्निंग) की समन्वयक मीनाक्षी चतुर्वेदी, ब्लैक टाइगर इवेंट्स से गौरव बाजोरिया, डीन कार्यालय से प्रो दिव्या उद्देशी और प्रो समीक्षा खंडूरी रहे । समापन के बाद स्वयंसेवकों और प्रतिभागियों को बीडीसी 2023 की सफलता और नृत्य के प्रति जुनून का जश्न मनाने के लिए जुबली हॉल में बजाए गए संगीत पर नृत्य करने के लिए एक खुला मंच दिया गया। रिपोर्टर टीम में – पूजा डबराई और अनिकेत दासगुप्ता और फोटोग्राफर पारस गुप्ता, प्रियांशु चटर्जी, निश्चय आलोकित लाकड़ा, अंकित माझी, अग्रग घोष रहे। डॉ वसुंधरा मिश्र ने इस कार्यक्रम की जानकारी दी ।

 

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भवानीपुर कॉलेज की एन एस एस ने मनाया विश्व एड्स दिवस
एलिजाबेथ टेलर ने कहा कि यह बहुत ही बुरा है कि लोग ‘एड्स’ से मर रहे हैं लेकिन किसी को भी अज्ञानता से नहीं मरना चाहिए। इस उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज की एनएसएस इकाई ने 1 दिसंबर, 2023 को विश्व एड्स दिवस के अवसर पर रवीन्द्र सदन मेट्रो स्टेशन गेट नंबर पर एड्स जागरूकता कार्ड और लाल रिबन के वितरण के माध्यम से ‘रेड रिबन अभियान’ का आयोजन किया। एस्प्लेनेड मेट्रोस्टेशन गेट नंबर एक पर अभियान सुबह 9:00 बजे शुरू हुआ और दोनों टीमें अपने-अपने स्थानों पर गईं और विभिन्न आयु वर्ग के लोगों को कार्ड वितरित किए।
अभियान का उद्देश्य मृतकों को श्रद्धांजलि देना, एचआईवी/एड्स से जूझ रहे लोगों को सहायता प्रदान करना और आज कलंक को मिटाने के हमारे दृढ़ संकल्प को दोहराना है क्योंकि एचआईवी/एड्स के खिलाफ लड़ाई में भेदभाव और कलंक का कोई स्थान नहीं है। यह करुणा, समझ और समर्थन दिखाने का समय है।
कुल 18 विद्यार्थियों ने 500 कार्ड और एड्स का लोगो लाल रिबन वितरित किये। सभी ने इसे अच्छी तरह से नहीं लिया, लेकिन कुछ ऐसे भी थे जिन्होंने वास्तव में इस पहल की सराहना की और यहां तक ​​कि छात्र स्वयंसेवकों के साथ अपना दृष्टिकोण भी साझा किया। कार्ड वितरित करते समय टीम में से एक ने ‘इश्क फाउंडेशन’ के स्वयंसेवकों से भी मुलाकात की जो इसके लिए जागरूकता फैला रहे थे। स्वयंसेवकों ने दिन भर के अपने अनुभवों का आनंद लिया। रेक्टर और डीन प्रोफेसर दिलीप शाह, रेक्टर और छात्र मामलों के डीन, बीकॉम (मॉर्निंग) की समन्वयक मीनाक्षी चतुर्वेदी और कॉलेज के पूरे प्रबंधन को पूरे आयोजन में उनके अपार समर्थन के लिए धन्यवाद। कृपा सहल ने रिपोर्ट की और जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।

भवानीपुर कॉलेज में गणित के जादू पर विशेष सत्र

कोलकाता ।  अल्बर्ट आइंस्टीन ने कहा कि शुद्ध गणित तार्किक विचारों की कविता है।भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज ने गत 25 नवंबर को  देबदीप चक्रवर्ती के साथ मैथ्स मैजिक पर एक मजेदार सत्र  इंटरैक्टिव सत्र का आयोजन किया।  सोफिया परवीन ने वक्ता  देबदीप चक्रवर्ती का परिचय दिया। तकनीकी कौशल और प्रबंधकीय कौशल के जानकार  इंजीनियरिंग में स्नातक और प्रतिष्ठित बी-स्कूल, टीएपीएमआई से एमबीए में 99.8 प्रतिशत से  शिक्षा प्राप्त की । प्रो. पिंकी साहा सरदार ने अतिथि वक्ता का अभिनंदन  और प्रो. मीनाक्षी  चतुर्वेदी, समन्वयक बी.कॉम (मॉर्निंग) ने गर्मजोशी भरे वक्तव्य से स्वागत किया। चक्रवर्ती ने बताया कि वर्तमान में वे आईएमएस कोलकाता में मुख्य संरक्षक के रूप में कार्यरत हैं।अपने वक्तव्य में कहा कि उनकी प्रतिबद्धता प्रतिभा का पोषण करने और अकादमिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देने की है। उनका अटूट समर्पण और विशेषज्ञता उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में एक अमूल्य संपत्ति बनाती है। उन्होंने कई छात्रों को प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण करने में मदद की है और उन्हें जादुई गणित के गुर सिखाए हैं। सत्र में लगभग 100 उत्साही छात्र भाग ले रहे थे। उन्होंने वैदिक गणित की विभिन्न युक्तियों को प्रदर्शित करते हुए एक पावरप्वाइंट प्रस्तुति प्रस्तुत की। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को गणितीय समस्याओं को हल करने के लिए दिलचस्प और आसान तकनीक सिखाना और उन्हें विभिन्न प्रवेश परीक्षाओं में बैठने के लिए तैयार करना था।  चक्रवर्ती ने छात्रों से पूछा कि किसी भी क्षेत्र में जीवित रहने के लिए वे कौन से दो विषयों को आवश्यक और महत्वपूर्ण मानते हैं। छात्रों ने कोरस में गणित और अंग्रेजी के लिए जोर से बात की जो सही उत्तर था। उन्होंने छात्रों को समझाया कि कर गणना और ऋण गणना, धन प्रबंधन और व्यय प्रबंधन के लिए गणित आवश्यक है। चक्रवर्ती द्वारा दिखाए गए पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन से छात्रों को वैदिक गणित के गुर सिखने में मदद मिली। उन्होंने आधार विधि सिखाई, जो हमें बड़ी गुणन समस्याओं को कुछ ही सेकंड में हल करने में मदद करती है। उन्होंने परिचारकों को एक रैखिक विधि सिखाकर भी प्रबुद्ध किया और उस विधि का उपयोग करके कुछ गणितीय समस्याओं को हल किया। सत्र के अंत में एक प्रश्नोत्तरी आयोजित की गई जिसमें 1 से 5 अंकों के प्रश्न शामिल थे। सभी प्रश्न तीस सेकेंड के निर्धारित समय में हल करने थे। यह  मनोरंजक था कि छात्र सक्रिय रूप से भाग ले रहे थे और समस्या समाधान में संलग्न होते हैं और मज़ेदार तरीके से गणित सीखने का आनंद लेते हैं। सभी समस्याओं और उत्तरों पर छात्रों और चक्रवर्ती द्वारा चर्चा की गई। इस सत्र ने छात्रों पर यह प्रभाव डाला कि गणित कठिन नहीं है, यह दिलचस्प है। हमें बस सबसे कठिन समस्याओं को हल करने के सरल तरीके जानने की जरूरत है। कुल मिलाकर यह कॉलेज के छात्रों के लिए मज़ेदार और सीखने का एक समृद्ध अनुभव था।रिपोर्ट कासिस शॉ और फोटोग्राफी पपन दास ने किया। कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।

भवानीपुर कॉलेज में मानवाधिकार पर दो दिवसीय कार्यशाला

कोलकाता । शांति केवल वहीं रह सकती है जहां मानवाधिकारों का सम्मान किया जाता है, जहां लोगों को खाना खिलाया जाता है, और जहां व्यक्ति और राष्ट्र स्वतंत्र हैं। यह बात 14वें दलाई लामा द्वारा कही गई है। इन्हीं को मद्देनजर रखते हुए भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज ने मानवाधिकार शिक्षा पर एक कार्यशाला का आयोजन किया। यह 29 नवंबर, 2023 और 30 नवंबर, 2023 को सुबह 10:00 बजे से कॉलेज परिसर के सोसाइटी हॉल में  शालीन दास द्वारा आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला थी।  शालीन दास भारत के यूथ फॉर ह्यूमन राइट्स इंटरनेशनल वाशिंगटन डीसी की ब्रांड एंबेसडर हैं। पेशे से वह कॉलेजों में अतिथि व्याख्याता, महत्वाकांक्षी एयरलाइन केबिन क्रू के लिए शिष्टाचार प्रशिक्षक और पुरुषों के अधिकार में विशेषज्ञ हैं। उन्होंने 2 दिसंबर 2023 को यूएसए से मानवाधिकार में डॉक्टरेट की डिग्री प्राप्त कर ली।
कार्यक्रम की शुरुआत शपथ के साथ हुई जहां शालीन दास के साथ छात्रों ने अपने साथियों के प्रति विनम्र और सम्मानजनक होने की शपथ ली। इसके बाद दास ने बीईएससी में पहली बार मानवाधिकार कार्यशाला को संभव बनाने के लिए बीईएससी के रेक्टर और छात्र मामलों के डीन प्रोफेसर दिलीप शाह को धन्यवाद दिया। प्रो शाह ने अपने ज्ञान की बातें साझा करते हुए कहा कि हमें हमेशा अपनी भावना ऊंची रखनी चाहिए और सीखते रहना चाहिए।  उन्होंने  शालीन दास का अभिनंदन किया। सुश्री दास द्वारा छात्रों को मानवाधिकारों के बारे में जानकारी देने के साथ कार्यक्रम जारी रखा । उनके अनुसार, हम शैक्षणिक संस्थानों में विभिन्न विषयों का अध्ययन करते हैं, लेकिन मानवाधिकार का नहीं, इसलिए अब समय आ गया है कि हमें मानवाधिकारों के बारे में सीखना चाहिए, जागरूकता फैलानी चाहिए और दुनिया को एक बेहतर जगह बनाना चाहिए। सुश्री दास ने अपने व्याख्यान की शुरुआत छात्रों को मानवाधिकार की कहानी पर एक वीडियो क्लिप दिखाकर की। वीडियो में एक सवाल उठाया गया है जिसमें कहा गया है, “अगर लोगों को भोजन और आश्रय का अधिकार है, तो हर दिन 16,000 बच्चे भूख से क्यों मर रहे हैं – हर पांच सेकंड में एक?” उन्होंने हमें यूथ फॉर ह्यूमन राइट्स इंटरनेशनल क्लब के बारे में बताया जो 190 देशों में मौजूद है, जिसका एकमात्र उद्देश्य आज के युवाओं को उनके अधिकारों के बारे में शिक्षित करना है। मैडम ने विद्यार्थियों को पुस्तिकाएँ वितरित कीं। पुस्तिकाओं का नाम “मानव अधिकार क्या हैं”  था, जिसमें मानव अधिकारों की सार्वभौम घोषणा (यूडीएचआर) के तहत सभी 30 अधिकारों की व्याख्या की गई है । पहले दिन दास ने मानवाधिकारों की आवश्यकता को समझाया और यूडीएचआर के तहत पहले 13 मानवाधिकारों पर चर्चा की। उनके अनुसार, मानवाधिकार हमें बेहतर इंसान बनने के लिए संशोधित करता है और उन्होंने कहा कि मानवाधिकार को समझना मानवता को समझना है। सत्र इंटरैक्टिव बन गया क्योंकि उन्होंने छात्रों से मानवाधिकारों पर अपने विचार साझा करने के लिए कहा। पहला दिन सकारात्मक नोट पर समाप्त हुआ। दूसरा दिन भी जानकारीपूर्ण और इंटरैक्टिव था। दिन की शुरुआत शपथ के साथ हुई, जिसके बाद सुश्री दास ने कुछ वीडियो क्लिप की मदद से यूडीएचआर के तहत शेष अधिकारों के बारे में बताया। इसके बाद विभिन्न अधिकारों पर चर्चा हुई, जहां छात्रों को समूहों में विभाजित किया गया और प्रत्येक समूह को पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन की मदद से बोलने के लिए अलग-अलग अधिकार दिए गए। अंत में, एक पेंटिंग खंड था जहां प्रत्येक टीम ने एक पेड़ को चित्रित किया, और पेड़ की प्रत्येक शाखा ने एक अधिकार का प्रदर्शन किया। शानदार चर्चाओं, समूह प्रस्तुतियों और टीम प्रयासों के साथ, दो दिवसीय ज्ञान से भरपूर था और सभी के लिए मानवाधिकार के नोट पर मनोरंजन के साथ समाप्त हुआ।रिपोर्ट की मौबानी मैती और फोटोग्राफी  आलोकित लाकड़ा ने की। कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।

भवानीपुर कॉलेज द्वारा द बिग फैट इंडियन वेडिंग 2023 समारोह संपन्न 

कोलकाता । द बिग फैट इंडियन वेडिंग बीएसईएम, भवानीपुर स्कूल ऑफ इवेंट मैनेजमेंट द्वारा 20 नवंबर 2023 को कॉलेज में आयोजित अपनी तरह का एक अनूठा कार्यक्रम था।  बीएसईएम की डीन सुश्री प्रेरणा खुल्लर द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम ने चारों ओर जीवंत रंग बिखेर दिए। लगभग 150 उपस्थित लोगों के मंत्रमुग्ध होने के साथ, यह कार्यक्रम भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज के कॉन्सेप्ट हॉल में आयोजित किया गया था जिसे फूलों, रोशनी और सजावट से भरे शादी के घर की तरह खूबसूरती से सजाया गया था।  सुबह 11:00 बजे से उद्घाटन समारोह के साथ आरंभ यह दो घंटे का कार्यक्रम नृत्य, मनोरंजन, गाने और शिक्षा से भरपूर था। संगीत समूह क्रिसेंडो द्वारा मंत्रमुग्ध कर देने वाली प्रस्तुति के साथ शुरुआत हुई, इसके बाद शादी का माहौल तैयार करने के लिए राजदी एंड ग्रुप द्वारा एक नृत्य प्रस्तुति दी गई। यह एक भारतीय शादी की संगीत रात की याद दिला रहा था।  रेक्टर डीन, प्रो. दिलीप शाह ने  स्वागत भाषण दिया। इसके बाद, बीएसईएम की डीन  प्रेरणा खुल्लर ने इस अवसर पर उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों का अभिनंदन किया। इसके बाद विवाह योजना व्यवसाय में प्रसिद्ध इवेंट मैनेजमेंट बिरादरी के नामों को मंच पर बुलाया गया, जिसकी शुरुआत मुख्य वक्ता  वेडिंगसूत्र के मालिक श्री पार्थिप थग्यराजन के साथ हुई , जहां से सभी के लिए विवाह खरीदारी का एक स्थान है,  डॉली जैन, सेलिब्रिटी पेशेवर साड़ी ड्रेपर ,  सूरज जुनेजा, संस्थापक फ्री फ्लो वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड,  कुमार शोभम, जीएम हयात रीजेंसी, संदीप व्यास, भवानीपुर के पूर्व छात्र और एक कलाकार, गायन और मनोरंजन के लिए , सौरभ रूंगटा, पुरस्कार विजेता डेस्टिनेशन वेडिंग फोटोग्राफर ,  पूनम खंडेलवाल, संस्थापक, डिज़ाइन और पार्टनर और एंथोनी डेसूज़ा, द फ्लोरल बकेट के मालिक और  बंटी सिन्हा, प्रोडक्शन की रीढ़, री गियर टेक्निकल्स। कॉलेज से हमारे साथ प्रबंधन के सदस्य, उत्सव पारेख,  मिराज डी शाह, उपाध्यक्ष और प्रोफेसर दिलीप शाह थे। अभिनंदन समारोह के बाद दीप प्रज्ज्वलन समारोह हुआ और मंच पर सम्मानित अतिथि श्री पार्थिप थग्यराजन ने  वेडिंगसूत्र के संस्थापक के रूप में इवेंट मैनेजमेंट और वेडिंग प्लानिंग व्यवसाय पर अपनी महत्वपूर्ण जानकारी दी। इसके बाद मंच को उपस्थित लोगों के लिए प्रश्नोत्तरी दौर के लिए खोल दिया गया, जिससे यह भारतीय विवाह समारोहों की जानकारी के बारे में जानने के लिए एक इंटरैक्टिव सेमिनार बन गया। अंत में, उपस्थित लोगों को ‘बिग फैट इंडियन वेडिंग’ में होने वाली खूबसूरत व्यवस्थाओं की स्क्रीनिंग देखने को मिली। कार्यक्रम बीएसईएम के पहले बैच के लिए धन्यवाद प्रस्ताव और तालियों के साथ समाप्त हुआ। कार्यक्रम का समापन कॉन्सेप्ट हॉल में गणमान्य व्यक्तियों के लिए दोपहर के भोजन के साथ हुआ।रिपोर्टर सृष्टि झुनझुनवाला और फ़ोटोग्राफ़र साग्निक घोष रहे। कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।

घटीं फैंटम वी गोल्ड की कीमतें, बाजार में आया स्पार्क गो 2024

कोलकाता । वैश्विक प्रीमियम स्मार्टफोन ब्रांड टेक्नो ने फैंटम वी फोल्ड के लिए ₹69,999 की विशेष उत्सव कीमत की घोषणा की है। इसकी मूल कीमत ₹88,888 थी। यह घोषणा कोलकाता के प्रमुख टेक रिटेलर, द प्राइम मोबाइल एंड गैजेट स्टोर में एक कार्यक्रम में प्रसिद्ध अभिनेता जिशु सेनगुप्ता की उपस्थिति में की गयी। मेड इन इंडिया फोल्डेबल फोन, फैंटम वी फोल्ड ने अपनी अभूतपूर्व कीमत के साथ फोल्डेबल स्मार्टफोन सेगमेंट में 100 के से कम कीमत वाला पहला फोल्डेबल फोन है। ग्राहकों की अधूरी जरूरतों को पूरा करने के लिए ध्यानपूर्वक तैयार किए गए डिवाइस में एयरोस्पेस-ग्रेड ड्रॉप-आकार का हिंज (काज) है, जो बिना सिलवटों के एक सहज फोल्डिंग अनुभव सुनिश्चित करता है। इसमें 7.65 इंच का 2के एलटीपीओ अमोलेड फोल्डेबल डिस्प्ले है – जो फोल्डेबल फोन में सबसे बड़ा है, जो ग्राहकों की सहज मल्टीटास्किंग और बढ़ी हुई उत्पादकता की इच्छाओं को पूरा करता है। स्मार्टफोन 5-लेंस अल्ट्रा एचडी कैमरा सिस्टम प्रदान करता है, जो गहन दृश्य अनुभव और असाधारण छवि गुणवत्ता का वादा करता है। यह डिवाइस सर्वोत्तम प्रदर्शन के लिए अत्याधुनिक मीडियाटेक 9000+ 5जी प्रोसेसर द्वारा संचालित है। टेक्नो मोबाइल इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, अरिजीत तालपात्रा ने कहा कि हमने फैंटम वी फोल्ड की विशेष कीमत की घोषणा की है । स्पार्क गो 2024 की कीमत आकर्षक रूप से ₹6,699 से शुरू है। इस उच्च मूल्य वाले एंट्री-लेवल स्मार्टफोन को भी इवेंट में लॉन्च किया गया। ‘भारत का अपना स्पार्क’ की शुरूआत का उद्देश्य एस्पिरेशनल भारत के लिए बजट स्मार्टफोन सेगमेंट में टेक्नो की स्थिति को और मजबूत करना है। टेक्नो स्पार्क गो 2024 असाधारण विशेषताओं के साथ खड़ा है, जिसमें सहज स्क्रॉलिंग के लिए डायनामिक पोर्ट के साथ सेगमेंट-पहला 90हर्ट्ज़ डॉट-इन डिस्प्ले, एक इंटरैक्टिव उपयोगकर्ता अनुभव और एक सहज और प्रीमियम उपयोगकर्ता अनुभव के लिए एक साइड फिंगरप्रिंट सेंसर शामिल है। एक और सफलता सेगमेंट का पहला डीटीएस डुअल स्टीरियो स्पीकर है, जो समृद्ध ऑडियो अनुभव के लिए 400% तक तेज ध्वनि प्रदान करता है। किफायतीपन को ध्यान में रखते हुए डिज़ाइन किया गया स्पार्क गो 2024 उन ग्राहकों की जरूरतों को पूरा करता है जो भारी कीमत के बिना प्रीमियम स्मार्टफोन सुविधाओं की इच्छा रखते हैं। स्पार्क गो 2024, 7 दिसंबर 2023 से नजदीकी खुदरा दुकानों और अमेज़ॅन पर उपलब्ध हो गया है।