फास्ट ट्रैक स्पेशल अदालतों में 2.43 लाख मामले लंबित
नयी दिल्ली । केंद्र सरकार की तमाम नीतियों, प्रयासों और वित्तीय प्रतिबद्धताओं के बावजूद पॉक्सो के मामलों की सुनवाई के लिए बनाई गई विशेष त्वरित अदालतों में 31 जनवरी, 2023 तक देश में 2 लाख 43 हजार 237 मामले लंबित थे। अगर लंबित मामलों की इस संख्या में एक भी नया मामला नहीं जोड़ा जाए तो भी इन सारे मामलों के निपटारे में कम से कम नौ साल का समय लगेगा। अरुणाचल प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में पॉक्सो के लंबित मामलों के निपटारे में 25 से ज्यादा साल तक का समय लग सकता है। साथ ही 2022 में पॉक्सो के सिर्फ तीन फीसदी मामलों में सजा सुनाई गई। ये चौंकाने वाले तथ्य इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन फंड (आईसीपीएफ) की ओर से जारी शोधपत्र ‘जस्टिस अवेट्स : ऐन एनालिसिस ऑफ द एफिकेसी ऑफ जस्टिस डेलिवरी मैकेनिज्म्स इन केसेज ऑफ चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज’ से उजागर हुए हैं।
यौन शोषण के शिकार बच्चों के लिए न्याय सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा 2019 में एक ऐतिहासिक कदम के जरिए फास्ट ट्रैक स्पेशल अदालतों के गठन और हर साल इसके लिए करोड़ों की राशि देने के बावजूद इस शोधपत्र के निष्कर्षों से देश के न्यायिक तंत्र की क्षमता और दक्षता पर सवालिया निशान उठ खड़े होते हैं। शोधपत्र के अनुसार मौजूदा हालात में जनवरी, 2023 तक के पॉक्सो के लंबित मामलों के निपटारे में अरुणाचल प्रदेश को 30 साल लग जाएंगे जबकि दिल्ली को 27, पश्चिम बंगाल को 25, मेघालय को 21, बिहार को 26 और उत्तर प्रदेश को 22 साल लगेंगे। फास्ट ट्रैक स्पेशल अदालतों जैसी विशेषीकृत अदालतों की स्थापना का प्राथमिक उद्देश्य यौन उत्पीड़न के मामलों और खास तौर से यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम से मुड़े मामलों का त्वरित गति से निपटारा करना था। इनका गठन 2019 में किया गया और भारत सरकार ने हाल ही में केंद्र प्रायोजित योजना के रूप में इसे 2026 तक जारी रखने के लिए 1900 करोड़ रुपये की बजटीय राशि के आवंटन को मंजूरी दी है। इन फास्ट ट्रैक स्पेशल अदालतों के गठन के बाद माना गया कि वे इस तरह के मामलों का साल भर के भीतर निपटारा कर लेंगी लेकिन इन अदालतों में आए कुल 2 लाख 68 हजार 38 मुकदमों में से महज 8 हजार 909 मुकदमों में ही अपराधियों को सजा सुनाई जा सकी है। अध्ययन से यह उजागर हुआ है कि प्रत्येक फास्ट ट्रैक स्पेशल अदालत ने साल भर में औसतन सिर्फ 28 मामलों का निपटारा किया। इसका अर्थ यह है कि एक मुकदमे के निपटारे पर नौ लाख रुपये का खर्च आया। शोधपत्र के अनुसार, “प्रत्येक विशेष अदालत से हर तिमाही 41-42 और साल में कम से कम 165 मामलों के निपटारे की उम्मीद की जा रही थी लेकिन आंकड़ों से लगता है कि गठन के तीन साल बाद भी ये विशेष अदालतें अपने तय लक्ष्य को हासिल करने में विफल रही हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का हवाला देते हुए शोधपत्र आगे कहता है कि बाल विवाह बच्चों के साथ दुष्कर्म है। उधर, वर्ष 2011 की जनगणना के आंकड़े बताते हैं कि देश में रोजाना 4,442 नाबालिग लड़कियों की शादी करवा दी जाती है। इसका मतलब यह है कि देश में हर मिनट तीन बच्चियों को बाल विवाह के नर्क में झोंक दिया जाता है जबकि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की हालिया रिपोर्ट कहती है कि देश में बाल विवाह के रोजाना सिर्फ तीन मामले दर्ज होते हैं। आईसीपीएफ के संस्थापक भुवन ऋभु ने बाल विवाह को रोकने के लिए देश में मजबूत नीतियों, कड़े कानूनों और पर्याप्त वित्तीय प्रतिबद्धताओं के बावजूद सजा की मामूली दरों को गंभीर चिंता का विषय करार दिया। भुवन ऋभु ने कहा, “कानून की भावना को हर बच्चे के लिए न्याय में रूपांतरित होने की जरूरत है। अगर बच्चों के यौन शोषण के आरोपितों में महज तीन प्रतिशत को ही सजा मिल पाती है तो ऐसे में कहा जा सकता है कि कानूनी निरोधक उपाय नाकाम हैं। अगर पीड़ित बच्चों को बचाना है तो सबसे जरूरी चीज यह है कि बच्चों और उनके परिवारों की सुरक्षा की जाए, उनके पुनर्वास और क्षतिपूर्ति के इंतजाम किए जाएं और पूरा न्यायिक तंत्र निचली अदालतों से लेकर हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट जैसी ऊपरी अदालतों तक मुकदमे का समयबद्ध निपटारा सुनिश्चित करे।”
यौन शोषण के पीड़ित बच्चों को एक समयबद्ध और बच्चों के प्रति मैत्रीपूर्ण तरीके से न्याय दिलाना सुनिश्चित करने और लंबित मामलों के निपटारे के लिए आईसीपीएफ ने कई अहम सिफारिशें की हैं। यह रिपोर्ट विधि एवं कानून मंत्रालय, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय एवं राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो से मिले आंकड़ों पर आधारित है।
यौन शोषण के शिकार बच्चों को है न्याय का इंतजार
संतुलित आहार लीजिए. दिल का ख्याल रखिए
बंगाल का एक गांव जहां जलेबी की कीमत है 700 रुपये
हलवाइयों ने की जीआई टैग की मांग
बांकुड़ा । भारत अपनी सभ्यता,संसकृति और ऐतिहासिक धरोहरों के लियें तो प्रसिद्ध हैं इसके साथ यहाँ का लजीज खाना भी विश्व प्रसिद्ध हैं । खाने मे भारतीय मिठाइयों का कोई जवाब नहीं है फिर चाहें वो बंगाल का रसगुल्ला ,फरुखाबाद की इमरती हो या मथुरा के पेड़े । स्वाद ऐसा की जुबान भूल ना पाएं ।आज हम एक ऐसी ही मिठाई की बात करेंगे जो किसी भी समय खाई जा सकतीं हैं । इसे लोग दूध के साथ और दही के साथ खाना ज्यादा पसंद करतें हैं जी हां हम बात कर रहें हैं रस भरी जलेबी की।शायद ही कुछ लोग होंगे जिन्हें जलेबी ना पसंद हो ।
अक्सर जब हमें जलेबी खाने का मन होता है तो हम किसी पास की हलवाई की दुकान से या नुक्कड़ पर लगे जलेबी के ठेले से खरीद कर खा लेते हैं । लेकिन आज हम बात करेंगे पश्चिम बंगाल में बांकुड़ा जिले के केंजाकुड़ा गांव की सबसे बड़ी जलेबी के बारें में जिसकी कीमत 300 रुपये से 700 रुपये के बीच हैं ।
पश्चिम बंगाल में बांकुड़ा जिले के एक गाँव जिसका नाम केंजाकुड़ा गांव हैं यहां भादों के महीने मे विश्वकर्मा पूजा और भादू पूजा के अवसर पर विशालकाय जलेबी बनाने की परंपरा हैं । कुटीर उद्योगों से समृद्ध बांकुड़ा का यह औद्योगिक गांव जहां कांसा-पीतल और बुनाई का काम होता है ।बधू पूजा के अवसर पर यह केंजाकुड़ा जलेबी बंगाली परंपरा से बनाई जाती है। इस जंबो आकार की जलेबी के एक टुकड़े की कीमत 300 से 700 रुपये के बीच है।इस बड़ी सी जलेबी का वजन 2 से 4 किलो के लगभग होता हैं । मिठाई की दुकानों में बड़ी जलेबी कौन बना सकता है और इस विशाल जलेबी को किसने खरीदा, इसकी एक अघोषित और मैत्रीपूर्ण प्रतियोगिता होने लगती है। इस जलेबी को खाने और देखने के लियें दूर-दूर से लोग आते हैं ।
एक परंपरा के अनुसार पंचकोट राज नीलमणि सिंहदेव की तीसरी पुत्री भद्रावती की असामयिक मृत्यु हो गई थी। बाद में पंचकोट शाही परिवार ने ग्रेटर बंगाल में भादु पूजा शुरू की। तभी से द्वारकेश्वर नदी के तट पर स्थित बांकुरा के प्राचीन शहर केंजाकुरा में भादु पूजा लंबे समय से की जाती रही है। हर वर्ष भाद्रपद के 27 तारीख से लेकर अश्विन की पांच तारीख तक यहां जलेबी का यह मेला लगता है । कौन कितनी बडी जलेबी बनाता है और कौन इसे खरीदता है सबके लिए चर्चा का विषय रहता है । विश्वकर्मा पूजा के दिन तो लाइन लगा कर लोग इसे खरीदते हैं । इस जलेबी को अपने रिश्तेदारों के यहां भी भेजते हैं । यहां के दुकानदारों का कहना है कि अब तो इस जलेबी को विदेशों मे भी भेजा जा रहा है और वहां के लोग इसे खूब पसंद कर रहें हैं ।
व्यापारी कर रहें हैं जीआई टैग की मांग – पश्चिम बंगाल की इस जलेबी की प्रसिद्धि और डिमांड देखते हुए दुकानदारों और व्यापारियों ने जीआई टैग की मान्यता देने की मांग की है। यहां के हलवाइयों का दावा है कि यह विशाल जलेबी यहां के अलावा पूरे भारत में और कहीं भी नहीं बनाई जाती है और न ही दुनिया के किसी भी अन्य देश में।
मैक्स हेल्थकेयर ने 940 करोड़ में खरीदा लखनऊ का सहारा हॉस्पिटल
लखनऊ । मैक्स हेल्थकेयर ने टियर-I/II शहरों में अपना विस्तार करने के लिए लखनऊ में 550 बेड वाले सहारा अस्पताल को खरीद लिया है। मैक्स और सहारा हॉस्पिटल की डील करीब 940 करोड़ रुपये (लगभग 113 मिलियन डॉलर) में हुई है। यह सौदा मैक्स की सहायक कंपनी क्रॉसले रेमेडीज के जरिये किया गया। मैक्स हेल्थकेयर की तरफ से बताया गया कि उसने स्टारलिट मेडिकल सेंटर प्राइवेट लिमिटेड की 100 प्रतिशत हिस्सेदारी के अधिग्रहण का करार किया है। स्टारलिट के पास सहारा अस्पताल का मालिकाना हक है.
250 बिस्तरों की ऑपरेशन बेड क्षमता – मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, वैशाली और मैक्स मेडिकल सेंटर, नोएडा को क्रॉसले रेमेडीज की तरफ से संचालित किया जाता हैय़ मैक्स हेल्थकेयर की तरफ से जुलाई 2015 में पुष्पांजलि क्रॉसले हॉस्पिटल, वैशाली को टेकओवर किया गया था। सहारा अस्पताल की फिलहाल ऑपरेशन बेड कैपिसिटी करीब 250 बिस्तरों की है जिसमें वित्त वर्ष 2024 का रेवेन्यू रन रेट 200 करोड़ रुपये है। मैक्स हेल्थकेयर इंस्टीट्यूट के सीएमडी सोई ने कहा, ‘हम इस अधिग्रहण को लेकर काफी उत्साहित हैं। यह टियर I/II शहरों में प्रवेश करने की हमारी रणनीति के अनुरूप है. इन शहरों के पास विकसित हेल्थ केयर सर्विस इकोसिस्टम है।
मैक्स हेल्थकेयर इंस्टीट्यूट लिमिटेड 940 करोड़ रुपये में लखनऊ के सहारा अस्पताल का नियंत्रण अपने हाथ में लेगा। इस अधिग्रहण के जरिये मैक्स हेल्थकेयर लखनऊ में प्रवेश कर रहा है, यह यूपी का सबसे तेजी से बढ़ते शहरों में से एक है। मैक्स हेल्थकेयर की तरफ दी गई जानकारी में कहा गया कि अस्पताल 17 मंजिला इमारत में है। यहां पर गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, न्यूरो, सर्जरी, कार्डियोलॉजी, पल्मोनोलॉजी और डायग्नोस्टिक्स विभाग हैं। इसमें एक नर्सिंग कॉलेज भी है. फिलहाल अस्पताल हर साल करीब दो लाख मरीजों को सेवा मुहैया कराता है। यह न्यूरोसाइंस के लिए प्रख्यात उपचार केन्द्र है।
69 महीनों में आईटी मंत्रालय ने ब्लॉक किए भारत के लिए खतरा बने 36,838 यूआरएल
भवानीपुर अंतर कॉलेज नृत्य चैम्पियनशिप 2023 संपन्न
कोलकाता । भवानीपुर डांस चैंपियनशिप’ 2023 या बीडीसी नामक सबसे बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया। कोलकाता में सबसे बड़ी और एकमात्र अंतर-कॉलेज नृत्य प्रतियोगिता होने के नाते, बीडीसी ने इस वर्ष अपने 8वें संस्करण की मेजबानी की और प्रतियोगिता की थीम को ‘कार्निवल ऑफ क्यूरियोसिटीज़’ कहा गया।इस वर्ष भवानीपुर नृत्य चैम्पियनशिप में सात कार्यक्रम थे, जिनमें से प्रत्येक को सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन लाने के लिए डिज़ाइन किया गया था। उद्घाटन समारोह कॉलेज के जुबली सभागार में सुबह 10 बजे से शुरू हुआ। इसमें एनेक्ट कलेक्टिव का प्रदर्शन हुआ, जिसमें फ्लेम्स का हिस्सा होने का क्या मतलब है, इसका एक मजेदार अभिनय दिखाया गया। इस एक्ट ने लोगों के चेहरों पर खुशी और हंसी ला दी।
उद्घाटन समारोह का समापन फ्लेम्स द्वारा नृत्य की शक्ति पर बनाई गई एक लघु फिल्म के साथ हुआ, जिससे चैंपियनशिप के उद्घाटन कार्यक्रम की शुरुआत हुई।अलग अलग नृत्य हुए जिसके विषय भी अलग अलग रखे गए। बॉलीवुड डुओ/ट्रायो: इसकी थीम ‘समय यात्रा’ है – इसी खास थीम को ध्यान में रखते हुए पांच कॉलेजों ने इस आयोजन में हिस्सा लिया।विजेता स्थान टीएचके जैन कॉलेज ने हासिल किया, जबकि प्रथम रनर-अप स्थान भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज (मुख्य टीम) ने हासिल किया, और टेक्नो इंडिया ने दूसरा रनर-अप स्थान हासिल किया।
बॉलीवुड समूह नृत्य: बॉलीवुड समूह नृत्य का विषय “रहस्यमय फुसफुसाहट” था। प्रत्येक महाविद्यालय से पाँच टीमों ने भाग लिया; प्रत्येक कॉलेज ने 5+3 मिनट से कम समय में थीम को अपने अनूठे तरीके और शैली में दर्शाया। इसमें भवानीपुर कॉलेज विजेता रहा। सेंट जेवियर्स कॉलेज ने प्रथम रनर-अप स्थान प्राप्त किया और शिवनाथ शास्त्री कॉलेज ने द्वितीय रनर-अप स्थान प्राप्त किया। विशिष्ट प्रस्तुति के लिए बीईएससी की हंसिका चांडक को स्थान प्रदान किया गया। समूह लोक नृत्य का विषय ‘लोकगीत’ था और इसमें भाग लेने वाली 9 टीमों को पारंपरिक पोशाक और सहायक उपकरण पहनाए गए थे जो उस संस्कृति का सबसे अच्छा प्रतिनिधित्व करेंगे जो वे चित्रित कर रहे थे। टीमों को 4+1 मिनट से कम समय में प्रस्तुति करने के लिए कहा गया था। इस श्रेणी में प्रॉप्स का उपयोग स्पष्ट था क्योंकि इसमें डांडिया स्टिक और अन्य प्रकार के प्रॉप्स थे जो नृत्य की दिनचर्या को बढ़ाते थे। इस आयोजन के निर्णायक श्री धर्मेश बिमानी और डॉ.शेली पॉल थे। विजयी टीम भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज (ओटीएसई टीम), प्रथम रनर-अप का स्थान भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज (मुख्य टीम) ने हासिल किया, जबकि दूसरा रनर-अप स्थान सेठ आनंदराम जयपुरिया कॉलेज ने हासिल किया।
पश्चिमी समूह नृत्य में “अव्यवस्था” विषय रखा गया था और भाग लेने वाली 5 टीमों द्वारा किया गया। प्रदर्शन इसी तरह की अराजकता की भावना से भरा हुआ था। प्रत्येक टीम को प्रदर्शन के लिए 5+3 मिनट का समय मिला। इस कार्यक्रम के निर्णायक संचारी चक्रवर्ती और रीशव धानुक रहे । सभी टीमों ने एक ही प्रस्तुति में अलग-अलग कहानियाँ सुनाकर अपने समय का सदुपयोग किया। अंत में, भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज (वेस्टर्न मेन टीम) ने विजेता पुरस्कार जीता, जबकि जादवपुर विश्वविद्यालय ने प्रथम रनर-अप स्थान हासिल किया और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट (IIHM) को दूसरा रनर-अप स्थान दिया गया। सर्वश्रेष्ठ कलाकार का पुरस्कार बीईएससी (वेस्टर्न मेन टीम) के आशुतोष सिंह को दिया गया था।
ईस्टर्न ग्रुप डांस: “कार्निवल ऑफ शैडोज़” थीम के तहत इस श्रेणी में 8 कॉलेजों ने भाग लिया। 6+1 मिनट के साथ, टीमों ने बाल शोषण और महिला सशक्तिकरण जैसे विषयों को सबसे विस्मयकारी तरीके से चित्रित किया। इस श्रेणी में बहुत सारे प्रॉप्स भी थे जिनमें पर्दे शामिल थे जिनका उपयोग छाया की भावना पैदा करने के लिए किया जाता था। कार्यक्रम की निर्णायक रीना जाना और देबमित्रा सेनगुप्ता थीं। अंत में, भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज (पूर्वी मुख्य टीम) विजेता रही, शिवनाथ शास्त्री कॉलेज प्रथम उपविजेता और सेठ आनंदराम जयपुरिया कॉलेज द्वितीय उपविजेता रहा।
स्ट्रीट बैटल दो घंटे तक चला जिसमें एक बड़ी भीड़ एक घेरे में इकट्ठा हुई और इसके भीतर कलाकारों के लिए केंद्र मंच था। हिप हॉप संगीत और पॉप संस्कृति का उपयोग अधिक था क्योंकि थीम ही ‘डाउनटाउन डांस ऑफ’ थी। कार्यक्रम का प्रारूप 1vs1 फेसऑफ़ था। संगीत और राउंड का निर्णय शुभम सिंह उर्फ एंडलेस, रीशव धानुक और सैकत दास (डीजे)द्वारा किया गया । नर्तकों ने अपने प्रतिद्वंद्वी पर बढ़त हासिल करने के लिए पॉपिंग और लॉकिंग जैसी नृत्य की पश्चिमी तकनीकों का इस्तेमाल किया। इस आयोजन में दस महाविद्यालयों ने भाग लिया। अंत में, इवेंट के विजेता बंगाल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के पॉल थे और प्रथम रनर-अप इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट (आईआईएचएम) के ऋषभ थे।
सभी विजेताओं को कॉलेज प्रबंधन की ओर से नलिनी पारेख द्वारा उनके संबंधित पुरस्कार दिए गए। सभी घटनाओं के निर्णायकों में प्रो बी.कॉम (मॉर्निंग) की समन्वयक मीनाक्षी चतुर्वेदी, ब्लैक टाइगर इवेंट्स से गौरव बाजोरिया, डीन कार्यालय से प्रो दिव्या उद्देशी और प्रो समीक्षा खंडूरी रहे । समापन के बाद स्वयंसेवकों और प्रतिभागियों को बीडीसी 2023 की सफलता और नृत्य के प्रति जुनून का जश्न मनाने के लिए जुबली हॉल में बजाए गए संगीत पर नृत्य करने के लिए एक खुला मंच दिया गया। रिपोर्टर टीम में – पूजा डबराई और अनिकेत दासगुप्ता और फोटोग्राफर पारस गुप्ता, प्रियांशु चटर्जी, निश्चय आलोकित लाकड़ा, अंकित माझी, अग्रग घोष रहे। डॉ वसुंधरा मिश्र ने इस कार्यक्रम की जानकारी दी ।
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भवानीपुर कॉलेज की एन एस एस ने मनाया विश्व एड्स दिवस
एलिजाबेथ टेलर ने कहा कि यह बहुत ही बुरा है कि लोग ‘एड्स’ से मर रहे हैं लेकिन किसी को भी अज्ञानता से नहीं मरना चाहिए। इस उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज की एनएसएस इकाई ने 1 दिसंबर, 2023 को विश्व एड्स दिवस के अवसर पर रवीन्द्र सदन मेट्रो स्टेशन गेट नंबर पर एड्स जागरूकता कार्ड और लाल रिबन के वितरण के माध्यम से ‘रेड रिबन अभियान’ का आयोजन किया। एस्प्लेनेड मेट्रोस्टेशन गेट नंबर एक पर अभियान सुबह 9:00 बजे शुरू हुआ और दोनों टीमें अपने-अपने स्थानों पर गईं और विभिन्न आयु वर्ग के लोगों को कार्ड वितरित किए।
अभियान का उद्देश्य मृतकों को श्रद्धांजलि देना, एचआईवी/एड्स से जूझ रहे लोगों को सहायता प्रदान करना और आज कलंक को मिटाने के हमारे दृढ़ संकल्प को दोहराना है क्योंकि एचआईवी/एड्स के खिलाफ लड़ाई में भेदभाव और कलंक का कोई स्थान नहीं है। यह करुणा, समझ और समर्थन दिखाने का समय है।
कुल 18 विद्यार्थियों ने 500 कार्ड और एड्स का लोगो लाल रिबन वितरित किये। सभी ने इसे अच्छी तरह से नहीं लिया, लेकिन कुछ ऐसे भी थे जिन्होंने वास्तव में इस पहल की सराहना की और यहां तक कि छात्र स्वयंसेवकों के साथ अपना दृष्टिकोण भी साझा किया। कार्ड वितरित करते समय टीम में से एक ने ‘इश्क फाउंडेशन’ के स्वयंसेवकों से भी मुलाकात की जो इसके लिए जागरूकता फैला रहे थे। स्वयंसेवकों ने दिन भर के अपने अनुभवों का आनंद लिया। रेक्टर और डीन प्रोफेसर दिलीप शाह, रेक्टर और छात्र मामलों के डीन, बीकॉम (मॉर्निंग) की समन्वयक मीनाक्षी चतुर्वेदी और कॉलेज के पूरे प्रबंधन को पूरे आयोजन में उनके अपार समर्थन के लिए धन्यवाद। कृपा सहल ने रिपोर्ट की और जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।




