पायलट से लेकर क्रू मेंबर तक, एयर इंडिया ने 6 दशक बाद बदला लुक
74 फ़ीसदी भारतीयों को नहीं मिल रहा है पौष्टिक खाना
स्त्री के अपमान का परिणाम दिखाता द्रोपदी कूप और शिक्षा देता तमिलनाडु का थिमिथि उत्सव

हमारी परम्परा, हमारा इतिहास बार – बार बताता रहा है कि उत्पीड़क का अंत भीषण होता है…महाभारत इस बात का सबसे बड़ा प्रमाण है कि उत्पीड़न करने वाले का परिणाम सर्वनाश होता है और स्त्री पर अत्याचार करने वालों का अंत भयावह होता है। युग बीत जाते हैं, लोग चले जाते हैं मगर इतिहास साक्षी देता रहता है, ऐसा प्रमाण बै कुरूक्षेत्र की भूमि। कहा जाता है कि द्रोपदी के श्राप के कारण आज तक यह नगरी विकास का चेहरा देख नहीं सकी। यहाँ महाभारतकालीन अनेक प्रमाण भरे पड़े हैं । ज्योतिसर और ब्रह्मसरोवर के आसपास कई प्राचीन मंदिर हैं। इन्हीं में से एक है द्रौपदी कूप। यह प्राचीन मंदिर द्रौपदी की कहानी आज भी बताता है. इसी मंदिर के अंदर एक कुआं है, जिसे द्रौपदी कूप कहते हैं। बताया जाता है कि द्रौपदी रोजाना इसी कुएं के जल से स्नान करती थी. महाभारत युद्ध में भीम द्वारा दुशासन को मारने के बाद द्रौपदी ने अपने खुले केश दुशासन के खून से रंगे थे और प्रतिज्ञा पूरी की थी. इसके बाद द्रौपदी ने अपने खुले केशों को इसी कूप में आकर धोया था. यही कारण है कि यह स्थान वर्तमान में द्रौपदी कूप के नाम से जाना जाता है।
प्राचीन कुआं भी है – कुरुक्षेत्र में महाभारत काल का प्राचीन कुआं आज भी देखा जा सकता है. माना जाता है कि इसी स्थान पर महाभारत युद्ध में द्रोणाचार्य ने चक्रव्यूह की रचना की थी और कर्ण ने यहीं पर अभिमन्यु को धोखे से मारा था, जिससे वह वीरगति को प्राप्त हुआ था। इसके बाद भीम ने इस कुएं का निर्माण किया, जहां द्रौपदी ने स्नान कर अभिमन्यु की मृत्यु का बदला लेने की शपथ अर्जुन को दिलाई थी।
बर्बरीक का मंदिर – यहां महाभारत युद्ध में निर्णायक की भूमिका निभाने को आतुर रहे बर्बरीक का मंदिर भी है। बताया जाता है कि यह वही स्थान है, जो महाभारत काल से पहले का है. यहां पर भीम पुत्र घटोत्कच के पुत्र बर्बरीक की प्राचीन मूर्ति स्थापित है, जहां लोग पूजा करते हैं। मान्यता के अनुसार, बर्बरीक के पास ऐसी धनुर्विद्या थी, जिससे वह किसी भी सेना को अकेले ही जीत सकते थे. तब श्रीकृष्ण ने बर्बरीक को वचनों में बांध कर उसका सिर मांग लिया था, लेकिन बर्बरीक ने कहा कि वह तो महाभारत का युद्ध देखना चाहते थे। कथा के अनुसार, तब श्रीकृष्ण ने कहा कि तुम महाभारत का पूरा युद्ध जरूर देख सकोगे. तुमने मुझे सम्मान स्वरूप अपना शीश भेंट किया है, इसलिए कुरुक्षेत्र की पावन धरा पर कलयुग में तुम्हारी भी पूजा होगी। यही कारण है कि आज भी श्रद्धालु जब द्रौपदी कूप को देखने आते हैं तो बर्बरीक की पूजा जरूर करते हैं। मंदिर के पुजारी का कहना है कि बर्बरीक को ही आज खाटू श्याम के नाम से जाना जाता है।
कालजयी रचनाओं के प्रणेता कवि प्रदीप
60 लीटर से 36 लाख लीटर तक का सफर दूध ब्रांड पारस मिल्क
नयी दिल्ली । पारस दूध एक विख्यात दूध ब्रांड है। कंपनी हर दिन करीब 36 लाख लीटर दूध बेच देती है। इसकी शुरुआत मात्र 60 लीटर दूध प्रतिदिन की बिक्री से हुई थी और आज यह कंपनी 36 लाख लीटर दूध का उत्पादन रोजाना करती है। दिल्ली-एनसीआर में इसका सीधा मुकाबला अमूल के साथ है। इसके संस्थापक वेद राम नागर है, जिनका 2005 में निधन हो गया था । उन्होंने 27 साल की उम्र में एक आम दूध विक्रेता तौर पर काम शुरू किया था। तब वह 50-60 लीटर प्रतिदिन दूध बेचते थे। 1933 में जन्मे वेद राम नागर ने पहली कंपनी 1980 में स्थापित की. इसके बाद 1984 में उन्होंने दूध व उससे बने उत्पाद बनाने वाली कंपनी लगाई। 1896 में वी.आर.एस. फूड नाम से एक कंपनी स्थापित की गयी। पहला मिल्क प्लांट 1987 में गाजियाबाद के साहिबाबाद में स्थापित किया गया। इसके बाद कंपनी ने लगातार प्लांट लगाने शुरू किए। 1992 में गुलावठी में एक और बड़ा मिल्क प्लांट लगाया। 2004 में कंपनी दिल्ली-एनसीआर के बाहर निकल गई और ग्वालियर में मिल्क प्लांट लगाया।
2005 में बदला नाम
2005 में उनका देहांत हो गया. उनके निधन के बाद 2008 में उनकी कंपनी का नाम बदलकर वेदराम एंड संस प्राइवेट लिमिटेड कर दिया गया। इसका प्रमुख ब्रांड पारस है जिसे दिल्ली-एनसीआर में काफी ख्याति प्राप्त है। यह हर दिन आज कंपनी 36 लाख लीटर दूध बेचती है। इसके अलावा कंपनी अब डेयरी के अलावा भी कई व्यापार कर रही है। वेदराम नागर के बेटों ने बिजनेस का विस्तार किया। अब कंपनी हेल्थ केयर, रीयल एस्टेट, शिक्षा व दवा उत्पादन समेत कई क्षेत्रों में काम कर रही है। यूपी के बागपत से एक साधारण दूध विक्रेता के रूप में शुरू हुए वेदराम नागर का कारवां आज देश के कई इलाकों में लाखों से लोगों को शामिल कर चुका है। वेद राम चैरिटेबल ट्रस्ट के माध्यम से समाजसेवा के क्षेत्र में अनेक कार्य कर रहे हैं। कंपनी से हरियाणा, राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात और यूपी के 5400 गांव जुड़े हुए हैं। यहां के लाखों किसानों को पशुपालन व खेती से जुड़े सामान खरीदने के लिए भी कंपनी मदद करती है।
यूपी में किन्नरों को मिलेगी पेंशन, 12 हजार रुपये मिलेगा सालाना
लखनऊ । उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने बीते विधानसभा चुनावों के पहले किन्नर (ट्रांसजेंडर) समुदाय के जीवन को बेहतर बनाने की सुध लेना शुरू किया था। इसके तहत पहले तो ‘उप्र किन्नर कल्याण बोर्ड’ (ट्रांसजेंडर वेलफेयर बोर्ड ) का गठन कर सोनम किन्नर को बोर्ड का उपाध्यक्ष बनाया और अब प्रदेश में किन्नरों की दशा सुधारने के लिए किन्नरों को जीवन निर्वाह भत्ता देने की तैयारी की जा रही है। सरकार के अधिकारियों के अनुसार लोकसभा चुनावों के पहले योगी सरकार एक लाख से अधिक किन्नरों को 12 हजार रुपये सालाना पेंशन देने की तैयारी कर रही है। इस पेंशन का भुगतान वृद्धावस्था पेंशन की तरह ही तिमाही किस्तों के रुप मेन किन्नरों के आधार लिंक बैंक खातों में किया जाएगा। इसके लिए समाज कल्याण विभाग प्रदेश में किन्नरों का पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करवा रहा है।
समाज कल्याण विभाग के अफसरों के अनुसार, देश और प्रदेश में किन्नर समुदाय अपनी पहचान और सम्मान के लिए संघर्षरत है। समाज द्वारा हीन भावना से देखे जाने वाले किन्नर अपने अच्छे कामों से लोगों की अपने प्रति दकियानूसी सोच को धीरे-धीरे बदल रहे हैं। आज बहुत से किन्नरों को उनके लिंग के आधार पर नहीं बल्कि उनके काम के आधार पर जाना जाता है। सूबे की सरकार ने भी किन्नर समुदाय के जीवन को बेहतर करने की कई पहल ही है, जिसका लाभ किन्नर समुदाय को मिला रहा है। इसी क्रम में अब योगी सरकार ने प्रदेश में रह रहे 1.6 लाख किन्नरों के जीवन निर्वाह भत्ता देने का फैसला किया है। इन किन्नरों को पेंशन, यात्रा सुविधा के साथ अन्य सरकारी सुविधाओं का लाभ मुहैया कराने के लिए समाज कल्याण विभाग उन्हें चिह्नित कर विभागीय पोर्टल पर उनका रजिस्ट्रेशन करवा रहा है।
विभागीय पोर्टल पर अब तक प्रदेश में 1070 किन्नरों को रजिस्ट्रेशन कराया जा चुका है, इनमें सबसे ज्यादा 110 किन्नर गौतमबुद्धनगर के हैं और 64 किन्नर लखनऊ के हैं। जिन 1070 किन्नरों को रजिस्ट्रेशन हो गया है, इनमें 514 किन्नरों को विभाग की ओर से अधिकृत प्रमाण पत्र जारी किया जा चुका है। विभागीय अफसरों का कहना है कि सूबे में सभी 1.36 किन्नरों का रजिस्ट्रेशन होने बाद उनका आयुष्मान कार्ड भी बनवाया जाएगा, ताकि उन्हे अस्पतालों में फ्री इलाज कराने की सुविधा भी मिल सके।
सूबे के किन्नरों को पेंशन देने के पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने योगी आदित्यनाथ ने 9 जून, 2021 को उप्र किन्नर कल्याण बोर्ड का गठन किया था। सीएम योगी का यह फैसला न सिर्फ राजनीतिक दृष्टि से बल्कि, सामाजिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण था। बोर्ड के गठन के साथ ही सरकार ने समाजवादी पार्टी (सपा) छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हुई सोनम चिश्ती को तब उप्र किन्नर कल्याण बोर्ड का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया था। बोर्ड का उपाध्यक्ष बनने के बाद सोनम चिश्ती ने किन्नरों के जीवन निर्वाह भत्ता दिए जाने की मांग की थी और सीएम योगी से मिलकर उन्होंने किन्नरों को पेंशन के रूप में हर महीने एक हजार रुपये की आर्थिक मदद देने का आग्रह किया था।इसके अलावा उन्होंने किन्नरों का अस्पतालों में मुफ्त इलाज कराने तथा किन्नरों की पढ़ाई और उनके आवासों की भी व्यवस्था सरकार की ओर से कराए जाने की मांग की थी। सोनम किन्नर की मांगों में से किन्नरों को पेंशन मुहैया कराने पर कवायद अब शुरू होने वाली है।
उत्तर बंगाल के लिए अलग बनेगा स्कूल सेवा आयोग और जिला स्कूल बोर्ड
कोलकाता । मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उत्तर बंगाल की पहाड़ियों के लिए अलग स्कूल सेवा आयोग शुरू करने की घोषणा की। मुख्यमंत्री का शुक्रवार को कालिम्पोंग में सरकारी सेवा वितरण कार्यक्रम था। उस मंच से, ममता ने पहाड़ियों के लिए अलग से स्कूल सेवा आयोग शुरू करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इसके अलावा दार्जिलिंग, कालिम्पोंग के लिए अलग जिला स्कूल बोर्ड का गठन किया जायेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसके लिए शुक्रवार को एक तदर्थ समिति गठित की जायेगी।
ममता ने शुक्रवार को कहा, ””पहाड़ियों के लिए रीजनल स्कूल सर्विस कमीशन फॉर हिल्स का गठन किया जाएगा। वे ही दार्जिलिंग, कलिम्पोंग के 146 प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 590 रिक्त शिक्षण पदों पर नियुक्ति करेंगे।”” मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पहाड़ों से और भी घोषणाएं कीं।
एक अधिकारी ने बताया, “इसे विकेंद्रीकरण के दृष्टिकोण से देखना बेहतर है। राज्य सरकार ने भी यह निर्णय उसी दृष्टि से लिया है। ”
ममता ने कहा, “कुछ लोग हर पांच साल में एक बार सक्रिय होते हैं और पहाड़ को परेशान करने की कोशिश करते हैं।” उद्योगपति उथल-पुथल में निवेश क्यों करेंगे? मैं आपसे कह रही हूं, पहाड़ों को शांत रखें, मैं विकास के लिए जिम्मेदार हूं। उन्होंने यह भी कहा, ””मतदान के दौरान कई लोग आते हैं, बहुत लालच दिखाते हैं। खाते में 15 लाख देने का वादा किया लेकिन कुछ नहीं होता। हम जानते हैं कि अपनी बात कैसे रखनी है।” मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि पहाड़ों में सूचना प्रौद्योगिकी हब बनाया जायेगा। वहां 24 हजार करोड़ का निवेश किया जाएगा।
कोलकाता भारत का सबसे सुरक्षित शहर: एनसीआरबी रिपोर्ट
कोलकाता । राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि कोलकाता लगातार तीसरे साल भारत में सबसे सुरक्षित शहर बनकर उभरा है। महानगरों में प्रति लाख आबादी पर दर्ज संज्ञेय अपराध के सबसे कम मामले कोलकाता में आए। एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार, कोलकाता में 2022 में प्रति लाख लोगों पर संज्ञेय अपराध के 86.5 मामले दर्ज किए गए। इसके बाद पुणे (280.7) और हैदराबाद (299.2) का स्थान रहा।
संज्ञेय अपराध वे होते हैं जिनके लिए भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और एसएलएल (विशेष और स्थानीय कानून) की धाराओं के तहत मामले दर्ज किए जाते हैं। एनसीआरबी की रिपोर्ट के मुताबिक, कोलकाता में 2021 में प्रति लाख लोगों पर संज्ञेय अपराध के 103.4 मामले दर्ज किए गए थे, जो इस साल घटकर 86.5 हो गए। 2020 में यह आंकड़ा 129.5 था।
वर्ष 2021 में, पुणे और हैदराबाद में प्रति लाख जनसंख्या पर क्रमश 256.8 और 259.9 संज्ञेय अपराध दर्ज किए गए थे। बीस लाख से अधिक आबादी वाले 19 शहरों के बीच तुलना के बाद रैंकिंग जारी की गई।
रिपोर्ट में कहा गया है कि हालांकि, कोलकाता में महिलाओं के खिलाफ अपराधों में वृद्धि दर्ज की गई, क्योंकि 2021 में मामलों की संख्या 1,783 थी जो 2022 में बढ़कर 1,890 हो गई। कोलकाता में महिलाओं के खिलाफ अपराध दर प्रति लाख जनसंख्या पर 27.1 थी, जो कोयंबटूर की 12.9 और चेन्नई की 17.1 से अधिक थी।
इस साल, कोलकाता में हिंसक अपराधों में भी गिरावट देखी गई और हत्या के केवल 34 मामले दर्ज किए गए, जो पिछले साल के 45 मामलों से कम हैं। रिपोर्ट के अनुसार, कोलकाता में 2022 में बलात्कार के 11 मामले दर्ज किए गए, इतनी ही संख्या 2021 में दर्ज की गई। एनसीआरबी की ‘भारत में अपराध 2022’ रिपोर्ट 36 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों तथा केंद्रीय एजेंसियों से एकत्र किए गए आंकड़ों पर आधारित है।
जनरल रावत स्टेडियम’ के नाम से जाना जाएगा बारामूला का झेलम स्टेडियम
श्रीनगर । जम्मू-कश्मीर सरकार ने शुक्रवार को बारामूला में झेलम स्टेडियम जांबाजपोरा का नाम बदलकर दिवंगत पूर्व सीडीएस जनरल बिपिन रावत के नाम पर रखने की मंजूरी प्रदान की है।एक सरकारी आदेश के अनुसार, बारामूला के जांबाजपोरा स्थित झेलम स्टेडियम का नाम बदलकर जनरल बिपिन रावत स्टेडियम करने की मंजूरी प्रदान की जाती है।
देश के पहले सीडीएस जनरल रावत, उनकी पत्नी मधुलिका रावत और 11 अन्य लोगों को लेकर जा रही हेलीकॉप्टर आठ दिसंबर, 2021 को तमिलनाडु के कुन्नूर में दुर्घटनाग्रस्त हो गई जिससे उनकी मौत हो गई। कश्मीर में जनरल रावत का पिछला कार्यकाल बारामूला स्थित 19 इन्फैंट्री डिवीजन के जनरल ऑफिसर कमांडिंग का था। इस कार्यकाल के दौरान ही जनरल रावत बारामूला शहर में कई लोगों के चहेते बन गए थे। उन्होंने 2012 में 19 इन्फैंट्री डिवीजन की कमान संभाली थी। सरकारी आदेश में कहा गया कि युवा सेवा एवं खेल विभाग और बारामूला के उपायुक्त बदलाव के लिए अपने रिकॉर्ड में संशोधन सहित तत्काल आवश्यक कदम उठाएंगे।कश्मीर के संभागीय आयुक्त को सरकार ने यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि स्टेडियम के नामकरण के संबंध में उचित कार्यक्रम का आयोजन किया जाए।(
कलकत्ता हाईकोर्ट की किशोर लड़कियों पर टिप्पणी पर सुप्रीम कोर्ट को ऐतराज़
नयी दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने कुछ समय पहले कलकत्ता हाईकोर्ट की एक पीठ द्वारा किशोरवय की लड़कियों पर की गई एक टिप्पणी को बेहद निंदनीय बताते हुए कहा कि जजों से यह उम्मीद नहीं की जाती कि वे उनके आदेशों और निर्णयों के जरिये ‘उपदेश’ दें।
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को करते हुए 18 अक्टूबर के कलकत्ता हाईकोर्ट के उस फैसले, जिसमें कहा गया था कि हर किशोर लड़की को ‘यौन इच्छाओं को काबू में रखना चाहिए’ और ‘अपनी देह की शुचिता की रक्षा करनी चाहिए’ पर आंशिक रूप से रोक लगा दी। हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी तब की थी जब उसने एक नाबालिग के बलात्कार के दोषी ठहराए गए युवक को बरी किया था। लड़के ने बताया था कि वे उस लड़की के साथ रिश्ते में थे और यह सहमति से बनाया गया संबंध था. सुनवाई के दौरान जस्टिस चित्तरंजन दास और जस्टिस पार्थ सारथी सेन की पीठ ने कहा, ‘किशोर लड़कियों को दो मिनट के सुख के बजाय अपनी यौन इच्छाओं पर नियंत्रण रखना चाहिए। किशोर लड़कों को युवा लड़कियों और महिलाओं और उनकी गरिमा का सम्मान करना चाहिए।
कोर्ट के फैसले में कहा गया था कि ‘समाज की नजर में उसकी (किशोरी) इज़्ज़त नहीं होती जब वह मुश्किल से दो मिनट के यौन सुख के लिए तैयार हो जाती है.। हाईकोर्ट की राय को अस्वीकार करते हुए और फैसले में किशोरों के लिए ‘आदर्श व्यवहार’ से संबंधित हिस्से पर रोक लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस अभय एस. ओका और पंकज मित्तल की पीठ ने विवादित टिप्पणियों को ‘अत्यधिक निंदनीय और पूरी तरह से अनुचित’ कहा।
पीठ द्वारा स्वतः संज्ञान लेते हुए शुरू की गई कार्यवाही में कहा गया, ‘न्यायाधीशों से अपने व्यक्तिगत विचार जाहिर करने या उपदेश देने की उम्मीद नहीं की जाती है। उक्त टिप्पणियां पूरी तरह से संविधान के अनुच्छेद 21 (सम्मान के साथ जीने का अधिकार) के तहत किशोरों के अधिकार का उल्लंघन है.’ स्वप्रेरणा से (स्वयं की गति से) पहल की गई. पीठ ने अपने आदेश में यह भी दर्ज किया कि पश्चिम बंगाल सरकार के वकील ने इस पर निर्देश देने के लिए कुछ समय मांगा है कि क्या राज्य ने पहले ही हाईकोर्ट की विवादास्पद टिप्पणियों के खिलाफ अपील दायर कर दी है या वह ऐसा करने के बारे में सोच रही है।
इस मामले में सहायता के लिए अदालत द्वारा वरिष्ठ वकील माधवी दीवान को न्यायमित्र (एमिकस क्यूरी) नियुक्त किया गया था और वकील लिज़ मैथ्यू से दीवान की मदद का अनुरोध किया गया था। बताया गया है कि भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़ के कहने पर स्वत: संज्ञान कार्यवाही शुरू की गई थी । यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के तहत दर्ज एक मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट की एक खंडपीठ ने कहा था कि हर किशोरवय के लिए विपरीत लिंग का साथ तलाशना सामान्य है, पर बिना किसी वादे या समर्पण के यौन संबंध बनाना सामान्य नहीं है।
यौन इच्छाओं और रिश्तों के बारे में किशोर लड़कियों-लड़कों के लिए ‘कर्तव्यों’ की एक श्रृंखला बताते हुए हाईकोर्ट ने कहा था कि लड़कियों को अपनी ‘गरिमा’ और ‘सेल्फ वैल्यू’ को बचाना चाहिए और ‘समग्र विकास’ की कोशिश करनी चाहिए। किशोर लड़कों को लेकर अदालत का कहना था कि उन्हें ‘एक युवा लड़की या महिला के उपरोक्त कर्तव्यों की इज्जत करनी चाहिए और अपने मन को किसी महिला, उनकी सेल्फ वैल्यू, गरिमा, निजता और शारीरिक स्वायत्तता के अधिकार का सम्मान करने के लिए तैयार करना चाहिए।
उल्लेखनीय है कि इससे पहले मार्च 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसले के जरिये इस बारे में विस्तृत दिशानिर्देश जारी किए थे कि यौन उत्पीड़न से जुड़े मामलों को कैसे देखा जाना चाहिए। साथ ही शीर्ष अदालत ने जजों और वकीलों के बीच संवेदनशीलता पैदा करने की जरूरत पर भी जोर दिया था. देश की सभी अदालतों को निर्देश दिया गया था कि वे यौन अपराधों के मामलों का फैसला करते समय महिलाओं के कपड़े, व्यवहार, पिछले आचरण, नैतिकता या शुचिता पर टिप्पणी करने से बचें, या किसी तरह का कोई ‘समझौता फॉर्मूला’ न सुझाएं।
2021 का यह आदेश उस मामले के फैसले के समय आया था, जब उसने जुलाई 2020 में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा दिए गए एक आदेश को रद्द करने को कहा था। हाईकोर्ट ने छेड़छाड़ के एक मामले के आरोपी को जमानत की शर्त के रूप में उसे शिकायतकर्ता से राखी बंधवाने को कहा था. शीर्ष अदालत ने माना था कि इस आदेश का देश की संपूर्ण न्यायिक प्रणाली पर गलत प्रभाव पड़ा।




