Saturday, October 3, 2026
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विश्वास का पर्व राजस्थान का गणगौर

अनुराधा अग्रवाल

कुंवारी लड़कियाँ अच्छे पति की कामना और विवाहिता अपने पति की लंबी उम्र और उनकी मंगल कामना के लिए पूजा करती हैं । गनगोर के गीत गाकर ईशर  और गोरा की पूजा होती है ।

तीज वाले दिन सभी लड़कियाँ सुबह-सुबह सुन्दर कपड़े और गहने पहन कर तैयार होती है ।गनगोर की मूर्तियों को भी सुन्दर कपड़ों  और गहनों से सजाया जाता है ।फिर फूल और दूब से पूजा की जाती है ।

पूजा के दौरान सब काजल , मेहंदी और रोली की सोलह –सोलह  बिंदी लगाती है ।फिर पीतल के कटोरे में हल्दी की गाँठ ,कोड़ी, छल्ला और सिक्का रखा जाता है ।उससे पूजा की विधि शुरू की जाती है ।

पूजा में गाये गये गीतों में पूजारिन   अपने -अपने परिवार के सदस्यों के नाम लेती हैं  । जितनी इच्छा उतने गीत गा सकते हैं और अंत में एक कहानी भी सुननी पड़ती है ।

 

गणगौर के दो गीत

पग दे पावड़िया, ईसरदास जी चढ़िया।
लैर बाई रोवां , देवो ना आसीस जी।
पग दे  पावड़िया , कानीराम चढ़िया।
लैर बाई रोवां , देवो ना आसीस जी।
गोर ईसरदास फूल गुलाब को ,
बहू गोरल ए फूलड़ांरी सेज,
गैरो फूल गुलाब को।
गोर कानीराम फूल गुलाब को ,
बहू लाडेल ए फूलड़ांरी सेज, गैरो फूल गुलाब को।

स्टीफन हॉकिंग : वैज्ञानिक जो ईश्वर को चुनौती दे गया

विज्ञान जगत का एक सितारा 14 मार्च 2018 को सितारों की दुनिया में विलीन हो गया। एक ऐसा सितारा, जिसने ना केवल विज्ञान के जटिल रहस्यों को समझने में दुनिया की मदद की। बल्कि दुनिया भर के शारीरिक अक्षमता से जूझने वाले लोगों के लिए भी मिसाल बनकर उनके अंदर जोश और आत्मविश्वास भरने का काम किया। जी हां, हम बात कर रहे हैं विश्वविख्यात भौतिकविद स्टीफन हॉकिंग की। जिनका कल 76 वर्ष की उम्र में कैंब्रिज में उनके निजी आवास पर निधन हो गया। उनका यूँ दुनिया छोड़ कर जाना समूचे विज्ञान जगत को अनाथ कर देने जैसा है। लेकिन इस ब्रम्हांड का निर्माण और ब्लैक होल जैसे तमाम विषयों पर उनके द्वारा दिए गए सिद्धांतों से वह हमारे बीच हमेशा जीवित रहेंगे। जानिए उनके बारे में कुछ खास बातें –

  1. आधुनिक विज्ञान के पिता कहे जाने वाले गैलीलियो गैलिली के जन्म के 300 साल बाद 8 जनवरी, 1942 ​को स्टीफन हॉकिंग का जन्म हुआ था। वो मानते थे कि विज्ञान ही उनका मुकद्दर है। स्टीफन हॉकिंग को अम्योट्रॉफिक लेटरल क्लेरोसिस (ALS) नाम की खतरनाक बीमारी थी और वो करीब 50 वर्षों तक व्हिलचेयर पर रहे। फन हॉकिंग चिकित्सा विशेषज्ञों के तमाम दावों को झुठलाते हुए उन्होंने अपनी जिंदगी के 76 साल बिताए। वो क्म्यूटर स्पीच सिंथेजाइजर के माध्यम से बोल पाते थे।
  2. 1974 में ही हॉकिंग ने दुनिया को अपनी सबसे महत्वपूर्ण खोज ब्लैक होल थ्योरी से दी थी। उन्होंने बताया था कि कैसे ब्लैक होल क्वांटम प्रभावों की वजह गर्मी फैलाते हैं। महज 32 वर्ष की उम्र में वह ब्रिटेन की प्रतिष्ठित रॉयल सोसाइटी के सबसे कम उम्र के सदस्य बने जबकि पांच साल बाद ही वह कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर बन गए। उनकी तुलना महान वैज्ञानिक आइंस्टीन से की जाती थी और  यह वही पद था जिस पर कभी महान वैज्ञानिक आईजैक न्यूटन भी नियुक्त थे।
  3. हॉकिंग ने अपने व्हील चेयर को इतना आधुनिक बनाया था और उसमें इतने  उपकरण लगाए थे जिसकी मदद से वह न केवल रोजमर्रा के काम करते थे बल्कि अपने शोध में भी जुटे रहते थे।  बीते बरसों में हॉकिंग ने अपने सॉफ्टवेयर को अपग्रेड करने के लिए भारतीय वैज्ञानिक और सॉफ्टवेयर इंजीनियर अरुण मेहता से भी संपर्क किया था।
  4. स्टीफन हॉकिंग ने 2016 में कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस रिसर्च सेंटर का उद्धघाटन करते हुए दुनिया को इस तकनीक के फायदे और नुकसान के बारे में चेतावनी दी थी।उन्होंने कहा था कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक गरीबी और बीमारियों के उन्मूलन में कारगर साबित होगी। लेकिन यह तकनीक शक्तिशाली स्वचालित हथियारों के रूप में बर्बादी भी लाएगी।
  5. स्टीफन हॉकिंग ने 2007 में विकलांगता के बावजूद विशेष रूप से तैयार किए गए विमान में बिना गुरुत्वाकर्षण वाले क्षेत्र में उड़ान भरी। वह 25-25 सेकेण्ड के कई चरणों में गुरुत्वहीन क्षेत्र में रहे। इसके बाद उन्होंने अंतरिक्ष में उड़ान भरने के अपने सपने के और नजदीक पहुंचने का दावा भी किया। वहीं उन्होंने स्वर्ग की परिकल्पना को सिरे से खारिज कर दिया था। उन्होंने स्वर्ग को सिर्फ डरने वालों की कहानी करार दिया था।
  6. उन्होंने कहा की उन्हें मौत से डर नहीं लगता बल्कि इससे जीवन का और अधिक आनंद लेने की प्रेरणा मिलती है हॉकिंग ने ये भी कहा है की हमारा दिमाग एक कम्पूटर की तरह है जब इसके पुर्जे खराब हो जाएंगे तो यह काम करना बंद कर देगा। खराब हो चुके कंप्यूटरों के लिए स्वर्ग और उसके बाद का जीवन नहीं है।  स्वर्ग केवल अंधेरे से डरने वालों के लिए बनाई गई कहानी है।  अपनी किताब द ग्रैंड डिजायन में प्रोफेसर हॉकिंग ने कहा है कि ब्रह्मांड खुद ही बना है।  यह बताने के लिए विज्ञान को किसी दैवीय शक्ति की जरूरत नहीं है।
  7. प्रोफेसर हॉकिंग ने यह कहकर भी सनसनी फैला दी थी कि 200 साल के भीतर धरती का विनाश हो जाएगा।  2010 में दिए अपने इस बयान में हॉकिंग ने कहा था कि बढ़ती आबादी, घटते संसाधन और परमाणु हथियारों के इस्तेमाल का खतरा लगातार धरती पर मंडरा रहा है। अगर इंसान को इससे बचना है तो अंतरिक्ष में आशियाना बनाना पड़ेगा। विपरीत परिस्थितियों में जिंदा रहने के सिद्धांत का हवाला देते हुए हॉकिंग ने कहा की पहले इंसान के अनुवांशिक कोड में लड़ने-जूझने की जबरदस्त शक्ति थी। 100 साल बाद यदि इंसान को अपना अस्तित्व बचाना है तो धरती को छोड़कर कोई दूसरा ठिकाना खोजना होगा।
  8. स्टीफन हॉकिंग ने सबसे पहले 1965 में अपनी प्रेमिका जेन विल्डे से शादी की। जिनसे उनके तीन बच्चे हैं। 25 सालों के बाद दोनों अलग हो गए और स्टीफन हॉकिंग ने अपनी देखभाल करने वाली नर्स ऐलेन मैसन से दोबारा शादी की। हालांकि, ऐलेन मैसन के साथ भी स्टीफन हॉकिंग का रिश्ता लंबा नहीं चल सका और दोनों अलग हो गए।
  9. स्टीफन हॉकिंग और जेन विल्डे की लव स्टोरी पर साल 2014 में फिल्म बनी ‘द थ्यौरी आॅफ एवरीथिंग’। इस फिल्म में ब्रिटिश एक्टर एडी रेडमेन ने स्टीफन हॉकिंग का किरदार निभाया, जिसके लिए उन्हें बेस्ट एक्टर का आॅस्कर भी मिला। स्टीफन हॉकिंग ने भी आॅस्कर जीतने पर जश्न मनाया और कहा, ‘जब वो फिल्म देख रहे थे तो उन्हें लगा कि वो खुद अभिनय कर रहे हैं।’
  10. स्टीफन हॉकिंग पर साल ‘2013’ में एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म बनी, जिसका नाम ‘हॉकिंग’ रखा गया। इस डॉक्यूमेंट्री फिल्म में स्टीफन हॉकिंग ने अपने जीवन के बारे में बात किया। उन्होंने कहा, ‘क्योंकि मेरे जीवन का हर दिन आखिरी दिन हो सकता है, मेरी यही इच्छा है कि मैं हर एक पल का उपयोग करूं।’

 

ए औरत

उमा झुनझुनवाला

ए औरत
सब कहते हैं
तू दुर्गा है
तू काली है
तू सरस्वती है
पार्वती और लक्ष्मी है तू
तब मान ले न
कि पूज्यनीय है तू
हर हाल में
सशरीर न सही
पत्थरों में ही सही
क्या फ़र्क पड़ता है
जो पैर छूते छूते
छू लेते हैं छाती
दबोच लेते हैं अंग अंग
लिंग-पूजन भी तो अनिवार्य है
जानती हो न
मूर्तियाँ कौन गढ़ता है
औरत का वजूद मर्द से ही है
फिर क्यों करना पड़े संघर्ष
सौंप दे ख़ुद को तू उसे सहर्ष
आदिकालीन है रीत
स्त्रियाँ बनाती आईं हैं भोजन
नाना प्रकार के स्वादों का
पुरुषों के लिए हर पहर
स्वाद पुरुषों के लिए ही बने हैं
युगों युगों पहले ही
लिख दिया गया था शास्त्रों में
डेढ़ बरस की हो शरारत
या हो सौ बरस की लाचारी
व्याकरण में स्त्रीलिंग ही कहलाएगी
लज्जित न हो तू
कि गर्भ में ही
कर दी जाती है हत्या
मगर कन्या-पूजन तो करते हैं न
घर की सुख समृद्धि के लिए
और सुनो
बलात्कार शरीर का होता है
मूर्ति का नहीं
दुर्गा, काली, सरस्वती, लक्ष्मी, पार्वती
इसीलिए सब पत्थरों में तराशी गईं
ए औरत
अपने दुखों को कठोर बना
और बन जा बुत
हमेशा के लिए तू
कि पत्थर प्रजनन नहीं करते
         *

संजय जायसवाल की दो कवितायें

संजय जायसवाल

बहुत थक गया ऐ दरख्त

इंतजार करते करते

अब तो सूरज भी छिपने लगा

तुमने तो कहा था

वे आएंगी

गीत गुनगुनाएंगी

क्यों नहीं आईं कोयल

क्यों नहीं आया कठफोड़वा

कम से कम गौरैया यह आ जाती

देखो निशा अपनी जादू बिखेरनी लगी अब

लौट रहे हैं निजाम के अब्बा भी बाजार से

दरख्त कुछ कहते क्यों नहीं

आंखें अब उतरना चाहती हैं

कब तक टंगी रहेंगी

तुम्हारे ऊपर

कान अब भी खड़े हैं सुनने को

दरख्त इतनी वीरानी क्यों

इतनी गहरी शून्यता

कब तक बोहते रहोगे उम्मीद को अपने जर्जर कंधों पर

सुनो तुम

नीड़ बना लो पहले

बिन ठौर कुछ नहीं टिकता

देखो दिन भी बीत गया

ठहर न सकी किरणें

सुनो मैं थक चुका हूं

गर वे आएं तो कहना

वह थका था और चुका था

समय के सागर में वह वृथा था।

 

2.

प्रेम रोज दबे पांव

आता है मेरी कविता में

शब्द हरसिंगार के फूल बन झरते हैं

शिशु बन किलकते हैं तुम्हारी गोद में

रोज दबे पांव आया प्रेम

निडर हो जाता है तुमको पा

भूल जाता है कि प्रेम बचाकर सबकी नजर

दाखिल हुआ है

प्रेम रोज नए नए सवालों के साथ आता है

और तुम उन सवालों की कुंजी बन जाती हो

प्रेम रोज आने से पहले

ले आता है थोड़ी हवा

थोड़ी धूप

थोड़ी सुगबुगाहट

और ले आता है मंदिर की घंटी की ध्वनि

जिसमें बजते हैं  खेत में जुताई कर रहे बैलों के खुर की धाप

चिड़ियों की चहचहाहट

भिखारियों की याचना

कितना कुछ प्रेम समेटे रहता है दाखिल होने से पहले

और सबसे आखिर में प्रेम

आशंका और उम्मीद के साथ दाखिल हो जाता है

इस तरह  रोज

दबे पांव प्रेम आता है मेरी कविता में

कविता लिखते हैं तो आपके लिए है सुनहरा मौका

कोलकाता/मुम्बई : कविता लिखने का शौक रखते हैं तो आपके लिए बोल पोएट्री लाया है सुनहरा मौका। अगर आपकी कविताओं में कुछ बात और रखते हैं तकनीक की जानकारी तो बोल पोएट्री आपकी रचनाओं को नया मंच देगा। श्रोताओं तक पहुँचेंगी आपकी कवितायें। ये कवितायें सोशल मीडिया के लिए हैं इसलिए आवृत्ति और प्रस्तुति पर विशेष ध्यान देना न भूलें। आप अपनी कवितायें 8286900027 नम्बर पर व्हाट्स ऐप कर सकते हैं। यह जानकारी बोल पोएट्री की ओर से धीरज पांडेय ने दी।

 

हावड़ा नवज्योति ने महिलाओं के लिए नि:शुल्क सेल्फ डिफेंस कोर्स की शुरुआत की

हावड़ा : बदलते समय में समाज ने भी मान लिया है कि नारी अबला नहीं सबला हैं। लगभग हर क्षेत्र में नारियों ने इसे साबित भी कर दिया। हालांकि समाज का एक हिस्सा इस विचार से सहमत नहीं। लिहाजा सुरक्षा के लिहाज से महिलाओं का स्वतंत्रता पूर्वक घर से निकलना आज भी सवालों के घेरे में हैं।

महिलाओं की शिक्षा व उत्थान में प्रयासरत समाजसेवी हावड़ा नवज्योति ने ऐसे सवालों के कई घेरों को तोडऩे का संकल्प लिया है। संस्था के सचिव प्रभात मिश्र ने आज अपनी बिटिया पीहू के दूसरे जन्मदिवस पर बतौर तोहफा उसे यही संकल्प देने का फैसला लिया है।

संस्था की ओर से शुक्रवार से महिलाओं को आत्मरक्षा के लिए तैयार करने को नि:शुल्क कराटे कोर्स की शुरुआत की गई। सीएम ममता बनर्जी के आदर्शों को जीवंत करने की इस योजना में राज्य के युवा व खेल राज्य मंत्री लक्ष्मीरतन शुक्ला, हावड़ा बोरो 2 की चेयरपर्सन मनजीत राफेल, वार्ड 12 के पार्षद गौतम चौधरी(दिलु दा) का विशेष सहयोग मिला।

प्रशासन के सहयोग से शैलेंद्र बोस रोड स्थित संस्था के कार्यालय के सामने बेजार पड़े पार्क का पुनरुद्धार किया गया। इसी पार्क में राष्ट्रीय स्तर के कराटे प्रशिक्षक महेश दास के नेतृत्व में कराटे की कक्षाओं का शुभारंभ हुआ। पार्क के पुनरुद्धार से स्थानीय लोग भी खुश हैं। इस अवसर पर संस्था के अध्यक्ष डॉ सिपाही सिंह, पूर्व अध्यापक बीएन पाडेंय, वार्ड 10 व 12 के यूथ प्रेसिडेंट व समाजसेवी सुभाष राफेल उपस्थित थे।

संस्था के सदस्य, राजू , संतोष विक्की, विश्वजीत, योगेश, धर्मेंद्र , जयंत, संजीत, अशोक, राजकुमार, गोरख, गोपाल, सोहन की मेहनत ने कार्यक्रम को सफल बनाया।

अभिनेता नरेंद्र झा का निधन

मुम्बई :  हैदर, रईस, काबिल और मोहेंजोदाड़ो जैसी फिल्मों में प्रमुख भूमिकाएं निभाने वाले अभिनेता नरेंद्र झा का निधन बुधवार सुबह दिल का दौरा पड़ने से हो गया. वह 55 साल के थे।

समाचार एजेंसी आईएएनएस के मुताबिक, वह महाराष्ट्र के नानेगांव स्थित अपने फार्म हाउस में थे जब उन्होंने सीने में दर्द की शिकायत की, जिसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया जहां सुबह तकरीबन चार बजे उनकी मौत हो गई। बिहार के मधुबनी ज़िले के कोइलख गांव में जन्मे नरेंद्र फिल्मों में महत्वपूर्ण सहयोगी भूमिकाएं निभाने के लिए जाने जाते थे।  झा ने टीवी पर अपने कॅरिअर की शुरुआत दूरदर्शन पर आने वाले धारावाहिक ‘शांति’, ‘इतिहास’ और ‘कैप्टन हाउस’ जैसे शो से की थी।

अभिनेता भले ही फिल्मों की दुनिया की तरफ रूख कर गए हों लेकिन उन्होने छोटे पर्दे पर भी अपना पांव जमाए हुए रखा। उन्होंने श्याम बेनेगल के ‘संविधान’ में काम करने के साथ ही ‘बेगूसराय’ और ‘छूना है आसमान’ जैसे धारावाहिकों में काम किया।

शाहरुख ख़ान की फिल्म रईस  में उन्होंने गैंगस्टर मूसा भाई का किरदार निभाया था। विशाल भारद्वाज के निर्देशन में बनी फिल्म हैदर  में उन्होंने श्रीनगर के डॉ. हिलाल मीर की भूमिका में नज़र आए थे. इस फिल्म में नरेंद्र अभिनेता शाहिद कपूर के किरदार के पिता बने हैं।

इसके अलावा हृतिक रोशन की थ्रिलर फिल्म काबिल  में उन्होंने इंस्पेक्टर का रोल निभाया था. साल 2016 में आई फिल्म फादर: टेल आफ लव उनकी आख़िरी फिल्म थी। सनी देओल की फिल्म घायल वंस अगेन में वह विलेन के किरदार में नज़र आए थे।

इसके अलावा फिल्म फोर्स 2, हमारी अधूरी कहानी, शोरगुल, फंटूश में भी वह काम कर चुके हैं।

फिल्मों के साथ वह छोटे पर्दे पर भी सक्रिय थे. साल 2015 में धारावाहिक तू कौन-मैं कौन में वह आख़िरी बार नज़र आए. इसके अलावा एक घर बनाऊंगा, सुपरकॉप्स वर्सेस सुपरविलेंस, रावण  जैसे धारावाहिकों में भी वह नज़र आ चुके हैं.

समाचार एजेंसी आईएएनएस के मुताबिक हाल ही में उन्होंने सलमान ख़ान की फिल्म रेस 3 साइन की थी. इसके अलावा वह बाहुबली फेम अभिनेता प्रभास की फिल्म ‘साहो’ में भी आने वाले थे. नरेंद्र झा ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड की पूर्व अध्यक्ष पंकजा ठाकुर से विवाह किया था.

अभिनेता की अचानक हुई इस मौत पर उनके साथ काम करने वाले और प्रशंसक अपनी संवेदनाएं प्रकट कर रहे हैं. रईस फिल्म का निर्देशन करने वाले राहुल ढोलकिया ने ट्विटर पर लिखा, ‘दुखद, मुसा भाई नहीं रहे? नरेंद्र झा की आत्मा को शांति मिले.’

अभिनेता सोनू सूद ने ट्वीट किया, ‘यह बहुत दुखद है. वह एक प्यारे इंसान थे. उनकी आत्मा को शांति मिले.’ निर्देशक हंसल मेहता ने भी ट्वीट करके दुख जताया. प्रोड्यूसर एकता कपूर ने भी अभिनेता की मौत पर दुख प्रकट किया है.

 

केवल 51 रुपये की ईएमआई पर खरीदें ब्रांडेड कपड़े

ऑनलाइन ई-कॉमर्स वेबसाइट मिन्त्रा ने एक शानदार ऑफर पेश किया है। मिन्त्रा के ऑफर के तहत ग्राहक महज 51 रुपये की ईएमआई भरकर ब्रांडेड कपड़े खरीद सकते हैं।

एक रिपोर्ट के अनुसार, ईएमआई पर कपड़े खरीदने के लिए ग्राहकों को क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करना होगा। हालांकि, मिन्त्रा पहले महंगे कपड़ों पर ही क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करने की सुविधा देता था लेकिन अब 1300 या फिर उससे कम की खरीद पर भी ग्राहक क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल कर सकेंगे।

फ्लिपकार्ट के स्वामित्व की कंपनी मिंत्रा ने एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, सिटी, भारतीय स्टेट बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, एचएसबीसी आदि से साझेदारी की है। ये बैंक यूजर्स से 13% और 15% तक का इंटरेस्ट ले रहे हैं। इसके साथ ही ग्राहक 3 से लेकर 24 माह की ईएमआई पर कपड़े खरीद सकेंगे।

 

गप्पें लगाने में महिलाओं से पीछे नहीं पुरुष

लंदन : अब गप्पें लगाने के आरोप से महिलाओं को छुटकारा मिल सकता है। इजरायली शोधकर्ताओं ने एक अध्ययन में कहा है कि गप्पें लगाने में पुरुष महिलाओं से पीछे नहीं होते हैं। ऑफिस में गॉसिप करने में पुरुष भी महिलाओं से कम नहीं होते हैं।

एरियल यूनिवर्सिटी में हुए शोध में विशेषज्ञों ने कहा कि ऑफिस में किसी के बारे में गैर-जरूरी निजी बातें मजे लेकर बताने में पुरुष भी पीछे नहीं होते हैं। इस निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए शोधकर्ताओं ने 2200 लोगों का साक्षात्कार लिया। शोधकर्ताओं ने देखा कि पुरुष महिलाओं की तुलना में अधिक गप्पबाज होते हैं।

महिलाएं सामान्य तौर पर किसी के बारे में बात करते समय अधिक सकारात्मक थीं। इनके विपरीत अपने प्रतिद्वंद्वी के लिए पुरुषों में नकारात्मकता का भाव अधिक था।

प्रमुख शोधकर्ता लिबी पर्व्स का कहना है कि कई बार पुरुषों की चर्चाओं में किसी के प्रति नकारात्मकता का भाव नहीं था। लिबी कहती हैं कि उनके अनुभव के मुताबिक उम्र बढ़ने के साथ-साथ महिलाएं स्कूल जाने वाली बच्ची की आयु से काफी आगे निकल आती हैं। यही वजह है कि वे इस तरह ही बहसों का हिस्सा नहीं बनना चाहती हैं।

एक अन्य शोध में पांच हजार लोगों के तथ्यों के अध्ययन के बाद देखा गया है कि पुरुष पूरे दिन में 76 मिनट का समय गप्पें लगाने में बरबाद करते हैं।

 

चिट फंड संशोधन विधेयक पेश, 36 साल पुराने कानून में बदलाव

नयी दिल्ली :   लोकसभा में चिट फंड (संशोधन) विधेयक, 2018 पेश किया गया जिसके माध्यम से 1982 के चिट फंड अधिनियम में संशोधन का प्रस्ताव किया गया। इसमें चिटों के लिए मैत्री फंड का भी उपयोग करने का प्रावधान है। निचले सदन में वित्त राज्य मंत्री शिवप्रताप शुक्ला ने विधेयक पेश किया। इस दौरान विभिन्न मुद्दों पर तेदेपा, वाईएसआर कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और अन्नाद्रमुक के सदस्यों के भारी हंगामे के बीच ही विधेयक पेश किया जो अपने अपने मुद्दों को लेकर आसन के समीप आकर नारेबाजी कर रहे थे।

विधेयक के उद्देश्यों में कहा गया है कि चिट कारोबार का विकास करने तथा निवेशकों के हितों की सुरक्षा के लिहाज से संस्थागत और विधिक ढांचे में सुधार की सलाहकार समूह की सिफारिशों और पंजीकृत चिट फंड क्षेत्र को सुदृढ़ बनाने तथा सरल और कारगर बनाने के लिए विधायी और प्रशासनिक प्रस्तावों को अंतिम रूप देने की वित्त (सोलहवीं लोकसभा) पर संसदीय स्थाई समिति की सिफारिशों को ध्यान में रखते हुए चिट फंड संशोधन विधेयक, 2018 पेश किया गया है जिसमें चिटों के लिए मैत्री फंड के उपयोग का भी प्रावधान है।

विधेयक में नई जोड़ी गई धारा में कहा गया है, ‘कोई भी व्यक्ति चिट कारोबार तब तक नहीं करेगा, जब तक कि वह अपने नाम के भाग के रूप में चिट, चिट फंड, चिट्टी, कुरी या मैत्री फंड शब्दों में से किसी शब्द का प्रयोग नहीं करता है और चिट कारोबार करने वाले व्यक्ति से भिन्न कोई भी व्यक्ति अपने नाम के भाग के रूप में ऐसे किसी शब्द का प्रयोग नहीं करेगा।    इसमें प्रधान के कमीशन की सीमा को पांच प्रतिशत से सात प्रतिशत करने का प्रावधान है।
चिट फंड अधिनियम, 1982 को चिट फंडों का विनियमन करने का उपबंध करने के लिए लागू किया गया था जो भारत में देशी कारोबार है और जिसने निम्न आय वाले परिवारों की वित्तीय आवश्यकताओं की परंपरागत रूप से पूर्ति की है।’