Saturday, October 3, 2026
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एसबीआई ने दी बचत खाते में न्यूनतम बैलेंस रखने पर राहत, 75 फीसदी तक घटाया चार्ज

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने अपने 25 करोड़ से अधिक बचत खाताधारकों को राहत देते हुए न्यूनतम बैलेंस  न रखने पर लगने वाले चार्ज में 75 फीसदी की कटौती कर दी है। ये नई दरें 1 अप्रैल से लागू होंगी। एसबीआई ने कहा कि उसने यह फैसला तमाम हितधारकों की ओर से मिलने वाली प्रतिक्रियाओं के आधार पर लिया है।

एसबीआई सहित देश भर के अन्य बैंक अब खाते में पर्याप्त राशि न होने पर पेनाल्टी लगाने लगे हैं। अब मेट्रो शहरों में रहने वालों के लिए 3 हजार रुपये, छोटे शहरों के कस्टमर्स के लिए 2 हजार रुपये और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए यह एक हजार रुपये तय की गई थी।

1 अक्टूबर से तय की गई थी नई दरें
एसबीआई ने 1 अक्टूबर से अपनी मिनिमम ऐवरेज बैलेंस की दरें तय कर दी थी। हालांकि अन्य बैंकों में यह दर एक हजार रुपये से लेकर के 25 हजार के बीच में है। सरकारी बैंकों में जहां मिनिमम बैलेंस रखने की दर काफी कम है, वहीं प्राइवेट सेक्टर के बैंकों में यह काफी ज्यादा है।
मेट्रो और बड़े शहरों में लगेगा यह चार्ज
बैंक ने मेट्रो और बड़े शहरों के खाताधारकों पर लगने वाले चार्ज में भारी कटौती की है। अब अकाउंट में मिनिमम बैलेंस न रखने वाले ग्राहकों से बैंक 50 रुपये के बजाय 15 रुपये काटेगा। इसमें 18 फीसदी जीएसटी अतिरिक्त लगेगा। बैंक के इस कदम से करोड़ों ग्राहकों को लाभ मिलेगा, जो किसी वजह से खाते में मिनिमम बैलेंस नहीं रख पाते हैं।

छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में 10 रुपये
छोटे शहरों और गांव-कस्बों में रहने वाले लोगों को भी बैंक ने राहत दी है। जहां पहले दोनों जगह 40 रुपये बैंक काटता था, वहीं अब यह छोटे शहरों में 12 रुपये और गांव-कस्बों के लिए 10 रुपये कर दिया है।

 

चौथी बार जर्मनी की चांसलर बनीं मर्केल

जर्मनी की संसद ने चौथी बार एंजेला मर्केल को चांसलर पद के लिए चुन लिया है। यह देश में संभवत: उनका आखिरी कार्यकाल होगा। जर्मनी की संसद में 364 में से 315 सांसदों ने मर्केल के पक्ष में वोट देकर यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में करीब छह माह से चला आ रहा राजनीतिक गतिरोध खत्म कर दिया है। वोटिंग के दौरान 9 सांसद अनुपस्थित रहे।

संसद में यह संसदीय मतदान चुनाव के 171 दिनों बाद हुआ जिसमें 35 सांसदों ने मर्केल का समर्थन नहीं किया। चांसलर पद के लिए शपथ से पहले राष्ट्रपति फ्रैंक-वाल्टर द्वारा औपचारिक रूप से  क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक यूनियन (सीडीयू) की नेता मर्केल को नियुक्त करेंगे।

64 वर्षीय एंजेला मर्केल अब एक बदली हुई कैबिनेट की अध्यक्षता करेंगी। जर्मनी की कैबिनेट में नतीजे के बाद नाटकीय तौर पर बदलाव हुआ है, जिसमें कई नए चेहरों को अहम पद दिए गए। इनमें विदेश, वित्त और आंतरिक मंत्रालय जैसे विभाग शामिल हैं।

सीडीयू पार्टी के ट्विटर एकाउंट पर मर्केल ने लिखा कि मैं स्पष्ट नतीजों के लिए एसपीडी को मुबारकबाद देती हूं और जर्मनी के विकास के लिए और भी सहयोग की उम्मीद करती हूं।

नए गठबंधन के मसौदे में इस बात पर भी सहमति बनी है कि 2015 की तरह शरणार्थियों की भीड़ को जर्मनी में घुसने नहीं दिया जाएगा और नए शरणार्थियों की तादाद हर साल 180,000 से 220,000 के बीच में ही रखी जाएगी। मर्केल ने सार्वजनिक रूप से चार साल का कार्यकाल पूरा करने का लक्ष्य रखा है।

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गणगौर : जींस में आए गवर-ईसर

बीकानेर :  अब तक राजस्थानी वेशभूषा में नजर आने वाले गवर-ईसर (गणगौर व ईसर) का लुक बदल गया है। ये भी अब मॉर्डन लुक में नजर आ रहे हैं। गवर-ईसर ने जींस पहन ली है। नए लुक में गवर-ईसर ही नहीं भाइया (उनका पुत्र) भी आ गया है। गवर-ईसर ने जींस पहनने के अलावा बेल्ट भी लगाई है। इतना ही नहीं ये सामाजिक सरोकारों के संदेश भी दे रहे हैं।

मॉर्डन ड्रेस में आए गवर-ईसर अपने भाइये के साथ बेटी बचाने का संदेश भी दे रहे हैं। लकड़ी से बने ये गवर-ईसर इन दिनों शहर के लोगों की पसंद बने हुए हैं। ये गवर-ईसर तैयार किए हैं कलाकार राम भादाणी ने। लकड़ी के बने गवर-ईसर को राम गोल्डन आर्ट से तैयार करते हैं। गवर-ईसर और भाइये पर गोल्डन आर्ट के अलावा बेटी पढ़ाओ और बेटी बचाओ का संदेश भी लिखा है। वे बताते हैं 16 दिनों तक किए जाने वाले इस पूजन में गवर-ईसर पर सबकी नजर होती है। ऐसे में गवर-ईसर के माध्यम से बेटी पढ़ाओ-बेटी बचाओ का संदेश का संदेश देने का प्रयास कर रहा हूं। कुंंवारी कन्याएं और युवतियां धुलंडी के दिन से चैत्र शुक्ला तृतीया तक चलने वाले गणगौर पूजन करती है। शीतला अष्टमी से अगले सात दिन तक गणगौर पूजन सुबह और शाम दोनों समय किया जाता है। इसके बाद कन्याएं, युवतियां और महिलाएं गणगौर व ईसर को पानी पिलाने की रस्म के दौरान गीत गाए जाते हैं।

 

बिद्या देवी भंडारी दूसरी बार बनीं नेपाल की राष्ट्रपति

काठमांडू : नेपाल की पहली महिला राष्ट्रपति बिद्या देवी भंडारी मंगलवार को दूसरी बार राष्ट्रपति चुनी गईं। मौजूदा राष्ट्रपति भंडारी वाम दलों के गठबंधन की उम्मीदवार थीं।

56 वर्षीय बिद्या ने दो तिहाई से ज्यादा के प्रचंड बहुत से जीत दर्ज करते हुए नेपाली कांग्रेस की प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार कुमारी लक्ष्मी राय को शिकस्त दी। नेपाल के चुनाव आयोग के प्रवक्ता नवराज ढकाल ने बताया, भंडारी को 39,275 और एनसी की लक्ष्मी राय को 11,730 वोट मिले। भंडारी को सीपीएन-यूएमएल और सीपीएन (माओवादी केंद्र), संघीय समाजवादी फोरम नेपाल और अन्य छोटे दलों का समर्थन हासिल है। वह 2015 में नेपाल की पहली राष्ट्रपति बनी थीं।

इससे पहले 1994 और 1999 में संसदीय चुनाव भी जीत चुकी हैं। नेपाल की संघीय संसद के 339 सदस्य और प्रांतीय विधानसभा के 550 सदस्य इन चुनाव में मतदान करते हैं।

 

भारत में 6.25 लाख बच्चे रोजाना करते हैं धूम्रपान

नयी दिल्ली : भारत में 6.25 लाख से ज्यादा बच्चे रोजाना धूम्रपान करते हैं जो जन स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर चेतावनी है। एक वैश्विक अध्ययन में यह जानकारी सामने आई है। अध्ययन’ ग्लोबल टोबैको एटलस के मुताबिक तंबाकू के सेवन से देश में हर हफ्ते 17,887 जानें जाती हैं। हालांकि यह आंकड़े मध्यम मानव विकास सूचकांक( एचडीआई) वाले देशों में होने वाली औसत मौतों से कम है। अमेरिकन कैंसर सोसायटी और वाइटल स्ट्रैटजीज द्वारा तैयार रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत में धूम्रपान की आर्थिक लागत 18,18,691 मिलियन रुपये है।

इसमें स्वास्थ्य सेवा से जुड़ी प्रत्यक्ष लागत और असामयिक मौत व अस्वस्थता के कारण उत्पादकता नष्ट होने से जुड़ी अप्रत्यक्ष लागत शामिल है। रिपोर्ट में कहा गया कि हालांकि मध्य मानव विकास सूचकांक वाले देशों के मुकाबले भारत में कम बच्चे सिगरेट पीते हैं। देश में 4,29,500 से ज्यादा लड़के और 1,95,000 से ज्यादा लड़कियां हर दिन धूम्रपान करती हैं। साथ ही इसमें नीति निर्माताओं को कदम उठाने के लिए भी कहा गया।

पिछले हफ्ते प्रकाशित हुई इस रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2016 में भारत में 82.12 अरब सिगरेट का उत्पादन हुआ। इसमें बताया गया कि विश्व की छह प्रमुख तंबाकू कंपनियों का संयुक्त राजस्व 346 अरब डॉलर से ज्यादा था जो भारत की कुल राष्ट्रीय आय के 15 प्रतिशत हिस्से के बराबर है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह उद्योग एक ताकतवर बल है जिसे छोटे राष्ट्र- राज्यों की कार्रवाई का डर नहीं होता क्योंकि उनके पास अत्यधिक संसाधन और वैश्विक बाजार की ताकत है। बड़ी अर्थव्यवस्थाओं और राष्ट्रों के पास मौका है कि वह छोटे सहयोगियों की इस खतरे से निपटने में मदद करें।

 

इसरो की वैज्ञानिक ने रचा कीर्तिमान, 56 साल की उम्र में अंटार्कटिका में रही 403 दिन

नयी दिल्ली : 56 साल की उम्र में इसरो की एक महिला वैज्ञानिक ने कीर्तिमान रचा है। उन्होंने इस उम्र में अंटार्कटिका जैसे सबसे ठंडे प्रदेश में जहां तापमान -90 डिग्री पर चला जाता है वहां पूरे 403 दिन बिताए हैं। इस महिला का नाम है मंगला मणि जिन्होंने इससे पहले कभी बर्फबारी का लुत्फ नहीं उठाया था। मंगला 23 सदस्यों वाले एक जांच दल के साथ नवंबर 2016 में अंटार्कटिका स्थित भारत के रिसर्च स्टेशन भारती गई थीं। इस दल में वह अकेली महिला थीं। उन्हें नारी शक्ति का प्रत्यक्ष रूप कहा जा सकता है।

मणि जिन्होंने पिछले साल दिसंबर में अपने मिशन को पूरा करके वापस लौटी हैं। उन्होंने कहा- अंटार्कटिका मिशन बहुत बड़ी चुनौती थी। वहां की जलवायु काफी कठोर है। हम अपने रिसर्च स्टेशन से निकलते समय बहुत ज्यादा सतर्क रहते थे। हर किसी को पोलर कपड़े पहनने पड़ते थे। कई बार हमें गर्मी लेने के लिए वापस अपने स्टेशन आना पड़ता था। साल 2016-17 के दौरान मंगला अकेली भारतीय महिला वैज्ञानिक थीं जो स्टेशन पर गईं थीं। वहां पहले से मौजूद चीन और रूस के रिसर्च स्टेशन की टीम में भी कोई महिला शामिल नहीं थी।

मंगला ने बताया- मेरे टीम के सदस्य काफी सहयोगी थे। दोनों ही तरफ से काफी सामंजस्य बनाए गए थे। यहां तक कि मेरी टीम के सदस्यों ने अर्थ स्टेशन पर मेरा जन्मदिन तक मनाया। इस कठिन मिशन के लिए मंगला मणि और उनकी टीम को सबसे पहले मानसिक और शारीरिक तौर पर हफ्तों परखा गया था। उन्हें दिल्ली के एम्स में एक हफ्ते तक कई मेडिकल जांच से गुजरना पड़ा, जिसमें सर्दियों के दौरान रहने के लिए उनका मनोवैज्ञानिक परीक्षण भी शामिल था।

मेडिकल जांच के दो हफ्ते बाद उन्हें उत्तराखंड के ऑली और बद्रीनाथ में 9,000 और 10,000 फीट पर ले जाया गया। यहां अपनी टीम के साथ उन्हें भारी-भरकम बैग्स के साथ ट्रेक करना पड़ता था। जिससे उनकी शारीरिक क्षमताओं को परखा जाता था। मंगला मणि ने कहा- यह टेस्ट हमारे शरीर को अंटार्कटिका की भीषण सर्दी के लिए तैयार करने के लिए किए गए थे। इसके अलावा इस टेस्ट के दौरान हमारे दल में कठिन समय में टीम भावना के साथ काम करने की कला भी विकसित की गई।

 

पद्म पुरस्कार : मंत्री हो या राज्यपाल, किसी की सिफारिश नहीं चली

नयी दिल्ली : आठ राज्य सरकारों, सात राज्यपालों और14 केन्द्रीय मंत्रियों ने पद्म पुरस्कारों के लिए जिन लोगों के नाम की सिफारिश की थी उनमें से किसी को भी इस साल दियेजाने वाले पद्म पुरस्कारों की सूची में स्थान नहीं मिलाहै । पद्म पुरस्कार20 मार्च और दो अप्रैल को प्रदान किये जाएंगे।

गृह मंत्रालय के दस्तावेजों के मुताबिक साल2018 के पद्म पुरस्कारों के लिये राज्य सरकारों, राज्यपालों, मुख्यमंत्रियों, केन्द्रीय मंत्रियों, केन्द्रीय राज्य मंत्रियों, पद्म पुरस्कार से सम्मानित हस्तियों, अन्य व्यक्तियों तथा संगठनों की ओर से कुल35,595 लोगों के नाम की सिफारिश की गई थी। पुरस्कारों की घोषणा25 जनवरी को की गई थी।

जिन नामों की सिफारिश की गई उनमें से केवल 84 प्रमुख व्यक्तियों को इस प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान के लिये चुना गया। गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि अंतिम सूची में स्थान हासिल करने वाले अधिकांश व्यक्तियों का चयन दस सदस्यीय चयन समिति द्वारा किया गया। चयन समिति ने ऐसे‘‘ गुमनाम नायकों’’ को चुना जिन्होंने अपना सारा जीवन गरीब लोगों के लिये काम करने में बिता दिया अथवा वंचित समुदाय की पृष्ठभूमि से संबंधित होने के बावजूद उन्होंने अपने क्षेत्रों में उत्कृष्टता हासिल की।

चयन समिति ने हालांकि तमिलनाडु, हरियाणा, जम्मू कश्मीर, कर्नाटक, उत्तराखंड, बिहार, राजस्थान और दिल्ली की संस्तुतियों को अस्वीकार कर दिया। तमिलनाडु ने पद्म पुरस्कारों के लिये छह नामों की सिफारिश की थी, जबकि हरियाणा ने पांच नामों की, जम्मू कश्मीर ने नौ, कर्नाटक ने44, उत्तराखंड ने15, बिहार ने चार, राजस्थान ने चार और दिल्ली ने कुल सात नामों की सिफारिश की थी।

सात राज्यों के राज्यपालों में से पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केसरी नाथ त्रिपाठी ने11 संस्तुतियां, हरियाणा के कप्तान सिंह सोलंकी ने सात संस्तुतियां, जम्मू कश्मीर के राज्यपाल एन एन वोहरा ने चार संस्तुतियां, उत्तर प्रदेश के राम नाईक ने10 संस्तुतियां, गुजरात के ओ पी कोहली ने दो, केरल के पी सदाशिवम ने दो, पुडुचेरी की उपराज्यपाल किरण बेदी की एक संस्तुति को पद्म पुरस्कारों की सूची में स्थान नहीं मिला।

प्रेस ट्रस्ट की ओर से गृह मंत्रालय के दस्तावेजों की पड़ताल के मुताबिक इसी प्रकार सात केन्द्रीय मंत्रियों अरुण जेटली की एक संस्तुति, मेनका गांधी की ओर से चार संस्तुतियां, प्रकाश जावेडकर की छह, राम विलास पासवान की चार, सुरेश प्रभु की12, थावर चंद गहलोत के16 नामों की संस्तुतियों को भी इस साल के पद्म पुरस्कारों की सूची में समाहित नहीं किया गया।

केवल जनजातीय मामलों के मंत्री जुआल ओराम की कुल दस संस्तुतियों में से एक नाम की सिफारिश को चयन समिति ने पद्म पुरस्कार के लिये स्वीकार किया। इसी प्रकार चयन समिति ने आठ केन्द्रीय राज्य मंत्रियों अर्जुन राम मेघवाल( चार संस्तुतियां), अश्विनी कुमार चौबे( दो संस्तुति), सी आर चौधरी( तीन), गिरिराज सिंह( दो संस्तुति) , महेश शर्मा( आठ संस्तुतियां) , मुख्तार अब्बास नकवी( दो संस्तुतियां) और राम कृपाल यादव( चार संस्तुतियां) में से किसी नाम को इस साल के पुरस्कारों के लिये चयनित नहीं किया।

रिटायर होने के बाद सुधरती है पुरुषों की सेहत

पेरिस :  सेवानिवृत्ति को कुछ लोग जीवन में आए ठहराव के तौर पर देखते हैं, मगर एक शोध में रिटायरमेंट को पुरुषों की सेहत के लिए अच्छा बताया गया है। अध्ययन में यह भी कहा गया है कि इससे महिलाओं की सेहत पर कोई खास असर नहीं पड़ता है, क्योंकि वे यूं भी सेहतमंद तरीके से जीती हैं।

पेरिस-सोर्बोन यूनिवर्सिटी के अर्थशास्त्रियों का कहना है कि रिटायरमेंट के बाद महिलाओं की सेहत खास प्रभावित नहीं होती है। प्रोफेसर क्लॉडिया सेनिक ने कहा कि बहुत लोगों को लगता है कि रिटायरमेंट के बाद उनकी सेहत में गिरावट आ जाएगी।

आईजेडए इंस्टीट्यूट ऑफ लेबर इकोनॉमिक्स द्वारा प्रकाशित इस शोध में कहा गया है कि रिटायरमेंट के बाद संज्ञानात्म शक्ति में गिरावट आने लगती है। इसके अलावा किसी भी शख्स की भागदौड़ कम होने से उसे गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। प्रोफेसर सेनिक ने कहा कि जो रिटायरमेंट के बाद भी काम करते रहे, उनकी सेहत अपने हमउम्र लोगों से बेहतर थी।

इस अध्ययन के लिए 50 से 75 साल के महिलाओं और पुरुषों के आंकड़ों का 14 साल तक अध्ययन किया। हर वर्ष इन लोगों ने आठ पैमानों पर अपनी सेहत की जानकारी अध्ययनकर्ता टीम के साथ साझा की। शोधकर्ताओं का कहना था कि महिलाएं अपनी सेहत के संदर्भ में सही फैसले लेने में पुरुषों के मुकाबले अधिक समर्थ थीं।
 

घर से शुरू कीजिए अपना काम और कीजिए कमाई

आजकल नौकरी मिलना आसान नहीं है। डिग्रियाँ धरी की धरी रह रही हैं और जरूरतें बढ़ रही हैं। दरअसल, काम करना पैसे कमाने के लिए ही नहीं बल्कि अपनी पहचान और विश्वास को नया मुकाम देने के लिए भी जरूरी है। लड़कियों के मामले में अक्सर यह होता है कि शादी और बच्चों के बाद उनके लिए वक्त निकालना बहुत मुश्किल हो जाता है। आमतौर पर लड़कियों में शादी के पहले हुनर सीखने की चाहत होती है मगर आपका यही गुण और हुनर आपके काम आ सकता है। कोई जरूरी नहीं है कि काम करने के लिए आपको 10 से 5 की नौकरी ही करनी होगी। आप अपनी सुविधा के अनुसार ही अपना काम शुरू कर सकती हैं और कमा भी सकती हैं और इनको शुरू करने के लिए भारी – भरकम निवेश की भी जरूरत नहीं है –

ऑनलाइन बेचें घरेलू प्रोडक्ट-  अगर आप छोटे शहर में रह रही हैं जहाँ आवागमन की सुविधा नहीं है और आपको ऑनलाइन काम करना आता है तो आप रोजमर्रा की चीजें, फैशन ज्वेलरी से लेकर कॉस्मेटिक्स जैसी बड़ी वैरायटी रख सकती हैं। बाजार से थोड़ा सा किफायती रखेंगी तो बिक्री और बढ़ सकती है। आप त्योहारों को ध्यान में रखकर भी सामान रख सकती हैं। इसके साथ ही आस – पास की महिलाओं या कारीगरों के उत्पाद भी बेच सकती हैं। यदि आपके पास देसी या घर में बना उत्पाद है तो आप उसे ऑनलाइन बेचकर अच्छा पैसा कमा सकती हैं। उदाहरण के लिए नवरात्रि आ रही हैं तो ऐसे गाय के गोबर से बने उपले और मिट्टी के बर्तन ऑनलाइन बेच सकते हैं। इसके अलावा आप घर में बनकर तैयार होने वाली अन्य चीजें भी ऑनलाइन बेच सकते हैं।

ट्ययूशन करें – अगर आपको पढ़ना और पढ़ाना पसंद है तो आपके लिए पार्ट टाइम ट्यूशन देने का काम बढि़या हो सकता है। यह काम आप बिना एक रुपए की लागत के ही शुरू कर सकते हैं। कई युवा ऐसे होते हैं जो पढ़ाना चाहते हैं, प्रतिभाशाली हैं मगर काम नहीं मिलता। आप उनको साथ लेकर काम भी कर सकती हैं और उनकी आर्थिक सहायता भी कर सकती हैं। चाहें तो छोटे बच्चों को सम्भालने के लिए भी युवाओं की मदद ले सकती हैं।

टिफिन सेवा-  आजकल ज्यादातर नौकरी करने वाले लोगों को अच्छा खाना नहीं मिल पाता। सबको तलाश है कि उन्हें घर का बना खाना मिले जो शुद्ध हो और किफायती भी। ऐसे में यदि आप कुछ हजार रुपए इन्वेस्ट कर टिफिन सेवा शुरू कर सकती हैं तो आपके लिए यह बढि़या का हो सकता है। अपने नेटवर्क दायरे के हिसाब से आप में ज्यादा से ज्यादा कमाई कर सकते हैं। यह आप पर है अगर आप अपनी आस – पास की महिलाओं को इस काम में लगायें और डिलिवरी का दायित्व बेरोजगार युवाओं को दें।

टाइपिंग करें – स्कूल में बड़े प्रोजेक्ट मिलते हैं, कॉलेज में प्रोजेक्ट और नोट्स बनाने पड़ते हैं, थिसिस लिखनी पड़ती है और किताबें भी लिखनी पड़ती हैं मगर आज की व्यस्त जिन्दगी में फुरसत नहीं मिलती। यहाँ तक कि प्रोफेसरों को भी इसकी जरूरत पड़ती है। बस यही आपके लिए अवसर है। हिन्दी, अँग्रेजी या क्षेत्रीय भाषा का ज्ञान और टाइपिंग आती है तो आपके लिए यह कमाने का जरिया है। शुल्क प्रति पेज हो सकता है। अगर आपको एक्सेल आता है तो यह आपके लिए दोहरा फायदा होगा।

अनुवादक बनें – यदि आपको हिन्दी के अलावा किसी अन्य भाषा में भी अच्छी पकड़ है तो आप अनुवादक का काम तलाश सकते हैं। घर बैठे पार्ट टाइम अनुवाद करने का काम कर आप हजारों रुपए कमा सकते हैं। चाहें तो खुद की एक अनुवाद एजेंसी भी बना सकते हैं जिसमें अन्य साथियों को जोड़कर  अनुवाद करने का काम शुरू कर सकते हैं।

योग टीचर बनें- यदि आपको योग करना आता है तो आप सुबह-शाम की योग क्लासेस भी चला सकते हैं। अपने काम का ऑनलाइन प्रचार कर आप इसे और ज्यादा भी बढ़ा सकते हैं।

घूमें और लिखें – घूमने और लिखने का शौक है तो यह भी एक जरिया है कमाने का। आजकल जितनी तेजी से पत्रिकाएं और वेबसाइट्स आ रही हैं, लिखने वालों की माँग भी बढ़ रही है। आपका यह हुनर आपको अच्छी कमाई देगा।

विश्व बैंक रिपोर्ट: भारत का जीएसटी दुनिया में सबसे जटिल कर प्रणाली

नयी दिल्ली : विश्व बैंक का कहना है कि भारत की वस्तु और सेवा कर (जीएसटी) प्रणाली दुनिया की सबसे जटिल कर प्रणालियों में से एक है। इसमें न केवल सबसे उच्च कर दर शामिल है बल्कि इस प्रणाली में सबसे अधिक कर के स्लैब भी हैं। वर्ल्ड बैंक ने कहा है कि भारत उच्च मानक जीएसटी दर मामले में एशिया में पहले और चिली के बाद विश्व में दूसरे स्थान पर है।

वर्ल्ड बैंक ने अपनी रिपोर्ट में कहा, “भारतीय जीएसटी प्रणाली में कर की दर दुनिया में सबसे अधिक है। भारत में उच्चतम जीएसटी दर 28 प्रतिशत है। यह 115 देशों में दूसरी सबसे ऊंची दर है, जहां जीएसटी (वैट) प्रणाली लागू है।” भारतीय जीएसटी प्रणाली को जो चीज और जटिल बनाती है वह विभिन्न श्रेणियों की वस्तुओं और सेवाओं पर लागू होने वाली अलग-अलग जीएसटी दरों की संख्या है।

पाकिस्तान और घाना की श्रेणी में भारत
विश्व बैंक ने बुधवार को इंडिया डेवलपमेंट अपडेट की छमाही रिपोर्ट जारी की थी। इसमें विश्व बैंक ने भारत में लागू जीएसटी को पाकिस्तान और घाना की श्रेणी में रखा है। रिपोर्ट के अनुसार 115 देशों में भारत में टैक्स रेट दूसरा सबसे ऊंचा है। रिपोर्ट में शामिल देशों में भारत की तरह ही अप्रत्यक्ष कर प्रणाली लागू है। दुनिया के 49 देशों में जीएसटी के तहत एक और 28 देशों में दो स्लैब हैं। भारत समेत पांच देशों में इसके अंतर्गत पांच स्लैब बनाए गए हैं। भारत के अलावा इनमें इटली, लक्जम्बर्ग, पाकिस्तान और घाना जैसे देश शामिल हैं। भारत को छोड़कर चारों देशों की अर्थव्यवस्था चुनौतियों का सामना कर रही है।

टैक्स रेट कम करने की सलाह
विश्व बैंक ने अपनी रिपोर्ट में टैक्स रेट कम करने के साथ ही कानूनी प्रावधानों और प्रक्रियाओं को सरल बनाने की सलाह दी है। साथ ही विश्व बैंक ने टैक्स रिफंड की धीमी रफ्तार पर भी चिंता जताई है। इसमें इसका असर पूंजी की उपलब्धता पर पड़ने की बात कही गई है। रिपोर्ट में कर प्रणाली के प्रावधानों को अमल में लाने पर होने वाले खर्च को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। विश्व बैंक ने अंतरराष्ट्रीय अनुभवों के आधार पर भविष्य में स्थिति में सुधार आने की उम्मीद जताई है।

जीएसटी में पांच स्लैब
भारत सरकार द्वारा 1 जुलाई, 2017 को अमल में लाए गए जीएसटी के ढांचे में पांच स्लैब (0, 5, 12, 18 और 28 फीसदी) बनाए गए हैं। सभी वस्तुओं और सेवाओं को इसी दायरे में रखा गया है। सरकार ने कई वस्तुओं और सेवाओं को जीएसटी के दायरे से बाहर भी रखा है और कुछ पर काफी कम टैक्स लगाए गए हैं। जैसे सोने पर तीन फीसती तो कीमती पत्थरों पर 0.25 फीसदी की दर से कर लगाया गया है। वहीं, शराब, पेट्रोलियम उत्पाद, रीयल एस्टेट पर लगने वाला स्टाम्प ड्यूटी और बिजली बिल को जीएसटी के दायरे से बाहर रखा गया है।

सरकार का स्लैब घटाने का वादा
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 12 और 18 फीसदी वाले स्लैब को एक करने का वादा किया है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि कर अदा करने में सुधार और राजस्व में वृद्धि के बाद ही यह कदम उठाया जाएगा। पिछले साल नवंबर में जीएसटी काउंसिल की गुवाहाटी बैठक में 28 फीसदी के स्लैब को लेकर महत्वपूर्ण फैसला लिया गया था। पहले इसके दायरे में 228 वस्तुओं एवं सेवाओं को रखा गया था, जिसे 50 तक सीमित कर दिया गया।

रिपोर्ट में कर सुधार प्रस्तावित करने के शुरूआती दिनों की समस्याओं पर भी ध्यान दिया गया लेकिन यहां कहा गया है कि जीएसटी को लागू करने की प्रक्रिया की शुरुआत समझा जाना चाहिए अंत नहीं।

उन्होंने कहा, “उपभोक्ताओं की प्रतिक्रिया पर सक्रियता दिखाते हुए सरकार कायार्न्वयन चुनौतियों को लेकर बहुत सतर्कता बरत रही है और जीएसटी को अधिक सरल और कुशल बनाने के लिए कदम उठा रही है।”

विश्व बैंक के अनुसार, शुरुआत बाधाओं के बावजूद जीएसटी कर संबंधी अवरोधों से लेकर व्यापार अवरोधों पर दूरगामी प्रभाव डाल रहा है जो इसे लागू करने के प्राथमिक लक्ष्यों में से एक था।