यह आँकड़ों का दौर है और चर्चा का भी…चर्चा भी ऐसी कि सस्ती लोकप्रियता मिले या हिंसा और नफरत फैलायी जाए। ऐसा करना आज बहुत आसान हो गया है। सच तो यह है कि एक आम आदमी आज इस्तेमाल होने की चीज बनकर रह गया है और चाहे – अनचाहे फँतासियों में फँसकर अपनी आदतों का खुलासा और अपनी जानकारियों को उन कम्पनियों को सौंप रहा है जो इन जानकारियों को बेचकर पैसे बनायेंगी। यह बहुत खतरनाक है। परीक्षाओं को देख लीजिए, आज प्रश्नपत्र वायरल होने के जितने मामले आ रहे हैं…पहले नहीं थे या लीक होना बहुत बड़ी बात मानी जाती थी। यह सच है कि एक – दूसरे से जुड़ने के लिए सोशल मीडिया एक सकारात्मक माध्यम है मगर सवाल यह है कि क्या हमने खुद को इस योग्य बनाया कि हम इस माध्यम का उपयोग सही बातों और वजहों के लिए है। अगर घटनाओं की तह में जाया जाए तो पता चलेगा कि हमारे रिश्ते सोशल मीडिया पर जितने बनते नहीं हैं, उससे कहीं ज्यादा टूट रहे हैं और घृणा के साथ दहशत फैलाने के लिए भी फेसबुक और उससे भी ज्यादा व्हाट्सऐप का उपयोग हो रहा है। एक – दूसरे को नीचा दिखाना हमारी फितरत हो गयी है और ट्रोल करना हमारी आदत। सवाल यह है कि क्या हमारी खबरों का स्वाद इतना वाहियात है कि किसी भी अखबार को अपनी प्रमुख खबरों में गर्लफ्रेंड को किराये पर देने जैसी खबरें लगानी पड़े। व्हाट्सऐप और फेसबुक पर जो भी अधकचरा ज्ञान हमें मिलता है, उसकी पड़ताल करना हम जरूरी नहीं समझते और सीधे उसे शेयर करते हैं। शेयर होने वाली चीजों में बीबियों और बिहारियों पर बने चुटकुले होते हैं तो कभी धर्मान्धता को बढ़ावा देने वाले गर्व से कहो हिन्दू हैं टाइप जुमले। उम्मीद थी कि जिस प्रकार प्रगति होगी, हमारा दिमाग उतना विस्तार पायेगा…मगर हमारी पसन्द किसी के सेक्स संबंधों और राम – रहीम से आगे कभी नहीं बढ़ पायी। कहने को आप बाथटब दिखाने के लिए मीडिया को गालियाँ दे सकते हैं मगर उसे देखने वाले भी आप हैं तो आप खबरों से नैतिकता की उम्मीद कैसे करेंगे। सोशल मीडिया खबरों का एक बड़ा माध्यम बनता जा रहा है मगर खबरों की तह मे जाने के लिए ग्राउंड रिपोर्टिंग की जगह कोई नहीं ले सकता। जरूरी है कि किसी भी माध्यम अथवा समूह को हम इतनी छूट न दें कि वह हमारा इस्तेमाल करे। कई बार पुरानी चीजों को देखती हूँ तो लगता है कि वे लोग हमसे कहीं ज्यादा समझदार थे…जो विभाजन की विभिषका और दंगों के बीच भी कहीं न कहीं इंसानियत का कतरा बचा ले गये…क्या हम इतने गये – गुजरे हैं कि अपना विवेक खोकर धर्म और ऊँच – नीच की खाई में गिरकर अपनी इंसानियत खो दें, इतने नादान हैं कि हम खुद को इस्तेमाल होने दें। क्रैम्ब्रिज एनालिटिका का सहारा लेकर लगभग हर पार्टी ने यही किया है…और इसका सीधा असर हमारे लोकतंत्र पर पड़ा है…ये बहुत खतरनाक स्थिति है जिसका समाधान खोजना बहुत जरूरी है। सजग रहें और सोशल मीडिया की बुराईयों को छोड़ दें,वायरल और फेक न्यूज के जाल से बचें, ट्विटर पर ट्रोल करना छोड़ें, कम से कम खुद को इस्तेमाल न होने दें।
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की भारतीय सांख्यिकी सेवा परीक्षा / भारतीय आर्थिक सेवा परीक्षा जून में
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने भारतीय सांख्यिकी सेवा परीक्षा / भारतीय आर्थिक सेवा परीक्षा 2018 (Indian Economic Service Examination 2018 / Indian Statistical Service Examination 2018) का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। उम्मीदवार परीक्षा का नोटिफिकेशन UPSC की ऑफिशियल वेबसाइट upsconline.nic.in पर पढ़ सकते हैं। यह परीक्षा 29 जून 2018 से शुरू होगी।
इंडियन इकोनॉमिक सर्विस के तहत 14 पदों पर भर्ती होनी है। वहीं इंडियन स्टेटिस्टिकल सर्विस के तहत 32 पदों पर भर्तियां होंगी। आपको बता दें कि इस परीक्षा में बैठने के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि 16 अप्रैल 2018 है। सिर्फ 21 से 30 वर्ष के लोग ही इन पदों के लिए आवेदन कर सकते हैं। आयु सीमा में SC/ST उम्मीदवारों को 5 साल की रियायत मिलेगी।
वहीं OBC उम्मीदवारों को 3 वर्ष और जम्मू-कश्मीर के निवासियों को 5 वर्ष की रियायत मिलेगी। शैक्षणिक योग्यताओं के बारे में बताएं तो इंडियन इकोनॉमिक सर्विस के लिए आवेदक का इकोनॉमिक्स/ एप्लाइड इकोनॉमिक्स / बिजनेस इकोनॉमिक्स / इक्नोमेट्रिक्स में पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री धारक होना अनिवार्य है।
वहीं इंडियन स्टेटिस्टिकल सर्विस के लिए आवेदक का स्टेटिस्टिक्स (सांख्यिकी) / गणित सांख्यिकी / एप्लाइड स्टेटिस्टिक्स में बैचलर्स या मास्टर्स डिग्री धारक होना अनिवार्य है। आवेदन करने के लिए आपको 200 रुपये की एग्जामिनेशन फीस भी देनी होगी।
फीस आप एसबीआई की किसी भी ब्रांच में कैश के जरिए या नेट बैंकिंग, क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड के जरिए भर सकते हैं। महिला, SC/ST और दिव्यांग उम्मीदवारों को आवेदन शुल्क से छूट मिलेगी। ऐसे करें आवेदन-
UPSC की आधिकारिक वेबसाइट upsconline.nic.in पर जाकर लॉगइन करें।
होम पेज पर ONLINE APPLICATION FOR VARIOUS EXAMINATIONS OF UPSC लिंक पर क्लिक करें।
अब Indian Economic Service Examination, 2018 या Indian Statistical Service Examination 2018 जिसके लिए भी आपको आवेदन करना है उस पर क्लिक करें।
आवेदन करने के लिए भाग 1 और 2 ऑप्शन को सिलेक्ट करें।
सभी दिशा-निर्देश ध्यान से पढ़ें और रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को पूरी करें।
धर्म इजाजत नहीं देता, तो आयकर भी देने से इनकार कर देंगे ? : सुप्रीम कोर्ट
नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने आधार योजना के तहत निजी जानकारी नहीं देने की दलील पर संज्ञान लेते हुए कहा कि क्या धर्मनिरपेक्षता के नाम पर कोई व्यक्ति कानून का पालन करने से भी इनकार कर सकता है।
विशेष पहचान पत्र आधार की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने सवाल उठाया कि धार्मिक आजादी के अधिकार के नाम पर क्या कोई आयकर रिटर्न भरने जैसी वैधानिक अनिवार्यता से भी इनकार कर सकता है।
चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ में आधार की संवैधानिक वैधता और इससे जुड़े कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई चल रही है।
सुनवाई के दौरान एक मामला आया कि स्कूल में एक छात्र को दाखिला देने से इनकार कर दिया गया क्योंकि उसके पिता ने कहा कि उनका धर्म उन्हें बायोमेट्रिक विवरण देने की इजाजत नहीं देता। इस पर पीठ ने कहा, ‘धर्मनिरपेक्ष मामलों में क्या आप कह सकते हैं कि आप कोई कानून नहीं मानते। मसलन, क्या कोई व्यक्ति यह कह सकता है कि चूंकि उसकी अंतरात्मा इजाजत नहीं देता इसलिए वह आयकर नहीं दे सकता।’
आधार कार्ड के बारे में सबसे ज्यादा सर्च करते हैं भारतीय : सर्वे
नई दिल्ली : एनालिटिक्स कंपनी एलेक्सा के एक सर्वे में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। इस खुलासे में सामने आया है कि भारतीय पॉर्न वीडियो से ज्यादा आधार कार्ड के बारे में सर्च कर रहे हैं। आधार को बैंक और सिम से लिंक कराने के लिए भारतीय इंटरनेट पर सबसे ज्यादा UIDAI सर्च कर रहे हैं।
भारतीय इंटरनेट पर ज्यादा से ज्यादा आधार से जुड़े सवाल पूछते हैं जिस वजह से दुनिया भर में प्रसिद्ध पॉर्न वीडियो इंडस्ट्री भी पीछे छूटती जा रही है। सर्वे में सामने आया कि हालही के कुछ महीनों में भारतीयों ने पॉर्न से ज्यादा आधार को सर्च किया है।
एलेक्सा की रिपोर्ट से पता लगा है कि भारत की शीर्ष वेबसाइट्स में 14वें नंबर पर UIDAI है जबकि पॉर्न साइट XVIDEOS 15 वें नंबर पर है। लिस्ट में 13वें नंबर पर इंस्टाग्राम है। वहीं गूगल को टॉप 3 में जगह मिली है।
उपेक्षा का शिकार है शहनाई के जादूगर उस्ताद बिस्मिल्ला खान का सामान
वाराणसी : देश और दुनिया भर में शहनाई को मकबूलियत दिलाने वाले उस्ताद बिस्मिल्ला ख़ां का पद्मभूषण अवार्ड और उनसे जुड़े अन्य सामान यहां हड़हा सराय स्थित उनके घर में उपेक्षित पड़े हैं।
बिस्मिल्ला ख़ां के पोते नासिर ने बताया कि दादा को मिले पद्मभूषण अवार्ड की आज कोई कीमत नहीं है। देख-रेख के अभाव में उसका कुछ हिस्सा दीमक खा रही है। इसके अलावा उनके कमरे में आज भी उनका छाता, कुर्सी, टेलीफ़ोन, जूता, बर्तन और चारपाई है लेकिन वह सब भी उपेक्षा का शिकार है।
नासिर का कहना है कि परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी है कि सबका पेट भरना तक मुश्किल हो रहा है। ऐसे में उनके सामान को सहेजकर रखना परिवार के लिए मुश्किल हो रहा है।
उन्होंने बताया कि उनके दादा के गुजर जाने के बाद वहां एक संगीत अकादमी खोले जाने की बात हुई थी जिसमें दादा से जुड़ी यादों को सहेजने की बात थी लेकिन वह सिर्फ वादा ही रह गया है।
जयपुर मोम संग्रहालय में ‘रोबोट’ देगा जानकारी
जयपुर : जयपुर के नाहरगढ़ स्थित मोम संग्रहालय में आने वाले पर्यटकों के स्वागत और एक कुशल गाइड की भांति सभी सूचनाएं मुहैया कराने की जिम्मेदारी एक ‘रोबोट’ को सौंपी जा रही है। मोम संग्रहालय के संस्थापक निदेशक अनूप श्रीवास्तव का कहना है कि रोबोट गाइड निर्माण अपने अंतिम चरण में है और जल्दी ही यह संग्रहालय में आने वाले पर्यटकों के स्वागत में लग जाएगा।
उन्होंने कहा, ‘‘मोम संग्रहालय शुरू करते वक्त मैंने इसमें हमेशा कुछ नया जोड़ने का वादा किया था। उसी क्रम में मैं यह रोबोट गाइड ला रहा हूं।’’ उन्होंने कहा कि एक जमाने में पर्यटन उद्योग में प्रतिस्पर्धा नहीं थी लेकिन अब यहां भी काफी होड़ है। ‘‘मेरा यकीन पर्यटकों को हमेशा नयी चीजों से रूबरू कराने में है क्योंकि यदि आप कुछ नयी परिकल्पनाओं के साथ नहीं आएंगे तो पर्यटकों को लुभाना बहुत मुश्किल होगा।’’
श्रीवास्तव ने कहा कि मौजूदा दौर आधुनिकतम तकनीक का है। हर व्यक्ति हाइ टेक हो गया है। इसी कारण वह हर समय कुछ नया देखना चाहता है । मैने भी यही सोच कर स्मार्ट रोबोट बनाने की परिकल्पना की। रोबोट गाइड की डिजाइन और निर्माण का सिलसिला आरंभ हुआ। इसे पूरा करने में पूरा एक वर्ष लग गया। अब यह अपने अन्तिम चरण में है।
उन्होंने कहा कि पांच फुट दस इंच लंबा और 80 किलोग्राम वजन का यह रोबोट फिलहाल सिर्फ अंग्रेजी भाषा समझ सकेगा। बाद में इसमें हिन्दी समझने वाला सॉफ्टवेयर भी जोड़ा जाएगा।
रोबोट की कार्यप्रणाली को समझाते हुए कहा कि ‘ह्यूमनॉयड रोबोट’ अपना सिर घूमा सकता है। उसे दाएं-बाएं हिला सकता है। यहां तक कि वह अपनी ऊंगलियों और कंधों को भी हिला सकेगा।
श्रीवास्तव के अनुसार रोबोट में सुधार कर उसे तस्वीर और चेहरे पहचानने में भी सक्षम बनाया जाएगा। गौरतलब है कि यह रोबोट जयपुर मोम संग्रहालय में मशहूद खिलाड़ियों, वैज्ञानिकों, अंतरिक्ष यात्रियों, स्वतंत्रता सेनानियों, साहित्यकारों दिग्गज, राजपूताना शान के साथ नजर आयेगा।
बेहतरीन अभिनेता थे फारुख शेख – दीप्ति नवल
मुम्बई : बीते जमाने की अदाकारा दीप्ति नवल ने अपने सह- कलाकार फारुख शेख के70 वें जन्मदिन पर उन्हें याद किया और अभिनेता को एक‘ ज्ञानी’ इंसान और एक बेहतरीन कलाकार बताया। दीप्ति नवल और फारुख1980 के दशक में आईं‘ चश्मे बद्दूर’, ‘ किसी से न कहना’, ’ रंग बिरंगी’, साथ- साथ’ जैसी कई फिल्मों में एक साथ काम किया। अदाकारा ने फेसबुक पर फारुख की कुछ तस्वीरें साझा करते हुए लिखा, ‘‘ हमारे जमाने के बेहतरीन अभिनेता फारुख को प्रेम के साथ याद करते हुए… उन्हें कौन भूल सकता है।’’
उन्होंने लिखा, ‘‘ आज फारुख के जन्मदिन पर, मेरे पास कहने को बहुत कुछ है… लेकिन उनके साथ बिताए कुछ पलों को साझा करते हुए। क्या बेहतरीन इंसान, क्या ज्ञानी व्यक्ति और क्या कलाकार… ।’’ शेख की65 वर्ष की आयु में दुबई में दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई थी।
अवॉर्ड लेने से आईपीएस डी रूपा ने किया इंकार
बेंगलूरू : पुलिस महानिरीक्षक (होम गार्ड एंड सिविल डिफेन्स, बेंगलूरू) आईपीएस डी रूपा ने नम्मा बेंगलूरू अवॉर्ड को स्वीकार करने से मना कर दिया है क्योंकि इसके साथ बहुत बड़ा नकद पुरस्कार है। नम्मा बेंगलूरू फाउंडेशन जोकि बेंगलूरु बेस्ड एक गैर सरकारी संस्था है उसके अध्यक्ष को लिखे गए पत्र में रूपा ने कहा कि उनका विवेक उन्हें इस इनाम को स्वीकार करने की इजाजत नहीं देता है।
रूपा ने अपने पत्र में लिखा है कि हर सरकारी कर्मचारी से अपेक्षा की जाती है कि वह अर्ध-राजनीतिक और संघों से जिनका थोड़ा सा भी राजनीति से ताल्लुक है उनसे समान दूरी बनाए रखने के साथ ही उनके प्रति तटस्थ रहे। केवल तभी लोक सेवक लोगों की नजरों में अपनी स्पष्ट और निष्पक्ष छवि को बनाए रख सकता है। आगामी चुनावों के मद्देनजर यह अब और अधिक प्रासंगिक हो गया है। रूपा को इस साल की सरकारी आधिकारिक श्रेणी के लिए नामांकित किया गया था।
रूपा के साथ आठ सरकारी अधिकारियों को इस अवॉर्ड के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया था और विजेता के नाम की घोषणा बेंगलूरू के कार्यक्रम में होनी थी। बेंगलूरू अवॉर्ड्स- नम्मा बेंगलूरू अवॉर्ड्स फाउंडेशन द्वारा कई श्रेणियों में विभिन्न व्यक्तित्वों को दिया जाता है। यह फाउंडेशन बिजनेसमैन और भाजपा के राज्यसभा सांसद राजीव चंद्रशेखर द्वारा वित्त पोषित है। यह इस फाउंडेशन के पुरस्कारों का नौवां संस्करण है। पिछले साल रूपा उस समय सुर्खियों में आई थीं जब उन्होंने डीआईजी जेल रहते हुए बेंगलूरू में प्रभावशाली कैदियों को जेल के अंदर मिलने वाले वीआईपी ट्रीटमेंट का पर्दाफाश किया था।
ओबामा ने न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री को दिए पेरेंटिंग टिप्स, बनने वाली हैं मां
ऑकलैंड : न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री जेसिंदा आर्डर्न ने हाल ही में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा से मुलाकात की। इस दौरान ओबामा ने उन्हें पेरेंटिंग के कुछ टिप्स भी दिए। बता दें कि ऑर्डर्न इन दिनों गर्भवती हैं। जानकारी के मुताबिक, वह जून माह में एक शिशु को जन्म देने वाली हैं।
ओबामा से उनकी मुलाकात एक सरकारी हाउस में हुई। जहां उन्होंने ओबामा के साथ पेरेंटिंग यानी बच्चों के पालन-पोषण जैसे विषय पर चर्चा की। आर्डर्न ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, ‘मैंने उनसे बच्चों के पालन-पोषण से जुड़ी बातें पूछी और उनकी बताई हुई बातें मुझे हमेशा याद रहेंगी।’
डाटा लीक होने के लिए हम ही हैं जिम्मेदार
फेसबुक के करीब 5 करोड़ यूजर्स का डाटा लीक होने की रिपोर्ट सामने आने के बाद खलबली मची है। रिपोर्ट में कहा गया है कि साल 2016 में अमेरिका के राष्ट्रपति चुनावों में डोनाल्ड ट्रंप की मदद करने वाली कंपनी कैम्ब्रिज एनालिटिकल ने फेसबुक के पांच करोड़ से अधिक यूजर्स की निजी जानकारियां चुरा ली थीं। वहीं फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने भी इसकी पुष्टि करते हुए गलती स्वीकार की है। अब सवाल यह है कि डाटा लीक होने के लिए क्या केवल फेसबुक ही जिम्मेदार है? नहीं, इसमें आपकी और हमारी भी उतनी ही गलती है जितनी फेसबुक की है। आइए जानते हैं कैसे?
आपका जुड़वां कौन है? आप किस सेलिब्रिटी की तरह दिखते है? आपका कौन सा दोस्त आपकी जासूसी करता है? कौन सा दोस्त आपके लिए जान दे सकता है? कौन आपको चूमने का सपना देख रहा है? आपकी इच्छा कब होगी पूरी? यदि आप भी फेसबुक पर इस तरह के ऐप को ट्राई करते हैं और शेयर करते हैं तो आपको सावधान रहने की जरूरत है। क्योंकि ऐसा करके आप अपने डाटा को बिकने के लिए बाजार में भेज रहे हैं। आपके पर्सनल डाटा का इस्तेमाल मार्केटिंग और विज्ञापन के लिए हो रहा है और बार आपके लिए यह खतरा भी बन सकता है।
आपका बेशकीमती डाटा कई तरह से मार्केट में जाते हैं इनमें से प्रमुख तरीके ये दो हैं। पहला, जब आप किसी वेबसाइट पर अपने सोशल मीडिया अकाउंट से लॉगिन करते हैं और दूसरा जब आप मौज-मस्ती के लिए फेसबुक पर दूसरी साइट्स की मदद से चेक करते हैं कि आपकी शक्ल किस सेलिब्रिटी से मिलती है या फिर कौन-सा दोस्त आपसे सबसे ज्यादा नफरत करता है।
इस तरह आपका बेशकीमती डाटा मार्केट में पहुंचता है। अब सवाल है कि यदि आपने ऐसा किया है तो अब आगे क्या करना है ताकि आपका डाटा सुरक्षित रहे। तो चलिए सबसे फेसबुक पर चलते हैं। फेसबुक लॉगिन करें और सेटिंग्स में जाएं। उसके बाद बाएं तरफ दिख रहे मीनू बार में ऐप्प (Apps) पर क्लिक करें।
अब आपको उन सभी ऐप की लिस्ट दिख जाएगी जिनके पास आपका डाटा है। ऐप के नाम पर क्लिक करके आप इन्हें हटा सकते हैं। हालांकि आपका डाटा तो पहले से ही इन ऐप के पास स्टोर हो चुका है तो अब उस ऐप वाली कंपनी पर निर्भर करता है कि आपका वह कंपनी किसी के साथ शेयर करती है या नहीं।




