Saturday, October 3, 2026
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जीएसटी आंकड़ों को साझा करने के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश की जरूरत: मुख्य आर्थिक सलाहकार

नयी दिल्ली : मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन ने सरकारी विभागों के साथ माल एवं सेवा कर( जीएसटी) के आंकड़ों को साझा करने के लिए स्पष्ट मसविदा तैयार किये जाने की वकालत की है। उन्होंने कहा कि यह राज्य की क्षमता को प्रतिबिंबित करता है और इससे सकल घरेलू उत्पाद: जीडीपी: के बेहतर तरीके से अनुमान लगाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि ई- वे बिल को लागू करने और इन्वॉयस के मिलाने से राजस्व संग्रह बढ़ाने में मदद मिलेगी।

जीएसटी नेटवर्क के स्थापना दिवस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सुब्रमण्यन ने कहा कि जीएसटी आंकड़ों से अर्थव्यवस्था, औपचारिक क्षेत्र रोजगार और निर्यात के बारे में बेहतर तरीके से जानकारी मिल सकेगी। इससे तत्काल आधार पर सांख्यिकी संकेतकों को भी सुधारा जा सकेगा।

जीएसटी नेटवर्क जीएसटी के आंकड़े जुटा रहा है। मुख्य आर्थिक सलाहकार ने कहा कि इससे आंकड़ों के बारे में अनुमान में वास्तव में बड़ा बदलाव होगा। मासिक आधार पर हम अर्थव्यवस्था के बारे में उच्च आवृत्ति वाले आंकड़े जुटा सकेंगे जो पहले नहीं किया जा सकता था।

उन्होंने कहा, ‘‘ इसका मतलब है कि जीएसटीएन और सरकार के अन्य विभागों को आंकड़ों को साझा करने के बारे में स्पष्ट नियम बनाने होंगे। किन परिस्थितियों में इन्हें साझा किया जा रहा है क्योंकि यह राज्य की क्षमता के बारे में भी होंगेजीएसटीएन नई अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था का आईटी आधार है। अभी तक1.05 करोड़ इकाइयों ने इस पोर्टल पर पंजीकरण कराया है।

उन्होंने बताया कि ज्यादातर देश आर्थिक वृद्धि के आंकड़ों की गणना मांग पक्ष के आधार पर करते हैं, जबकि भारत में उपभोग के आधार पर अनुमान लगाया जाता है। सुब्रमण्यन ने कहा कि जीएसटी आंकड़ों से जीडीपी की तिमाही वृद्धि दर के आंकड़े मांग के आधार पर निकाले जा सकेंगे। उन्होंने कहा कि ईमानदार अधिकारी जांच एजेंसियों के भय से कड़े फैसले लेने से हिचकिचाते हैं। ऐसे में जीएसटीएन सार्वजनिक निजी भागीदारी की व्यवस्था है जिसमें कड़े फैसले लिए जा सकते हैं।

सिर्फ 7 राज्य देश को देते हैं दो-तिहाई डॉक्टर्स

देश लगातार डॉक्टरों के कमी की समस्या से जूझ रहा है। वहीं सरकार इस समस्या से निपटने के लिए प्रयास कर रही है। आश्चर्य में डालने वाली बात यह है कि 29 राज्यों और सात केंद्रशासित प्रदेश वाले देश में सिर्फ 7 ऐसे राज्य हैं जो भारत के लिए दो-तिहाई डॉक्टर्स तैयार करते हैं। इसकी वजह यह है कि इन राज्यों में मेडिकल कॉलेजों की अधिक संख्या और अच्छी मेडिकल सुविधाएं उपलब्ध हैं।
इन आंकड़ों को देखते हुए संसदीय समिति ने यह सिफारिश की है कि जहां जनसंख्या के अनुपात में डॉक्टरों की संख्या बहुत कम है वहां नए मेडिकल कॉलेज खोले जाएं। बता दें कि हाल ही में संसदीय समिति ने सिफारिश की थी कि डॉक्टरों के लिए देश में काम करने का न्यूनतम समय निर्धारित किया जाना चाहिए।
समिति ने अपनी सिफारिश में यह भी कहा था कि डॉक्टरों को कम से कम एक साल ग्रामीण इलाके के लिए नियुक्त किया जाना चाहिए। इस अवधि के बाद ही डॉक्टरों को विदेश जाकर कार्य करने की अनुमति दी जानी चाहिए। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक देश में कुल 64, 200 मेडिकल कॉलेज हैं। जिसमें सरकारी मेडिकल कॉलेजों की तुलना में निजी मेडिकल कॉलेजों के पास ज्यादा सीटें हैं। देश में निजी मेडिकल कॉलेजों में 33,745 (52.6 फीसदी), जबकि सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 30,455 (47.4 फीसदी) सीटें हैं।

सुप्रीम कोर्ट की दो टूक, बिल्डरों से पैसा वसूलें बैंक, खरीददारों से नहीं

नयी दिल्ली : आम्रपाली समूह के खिलाफ फ्लैट खरीदारों की याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि फ्लैट खरीदारों का पैसा उनका अपना है और इसे कोई नहीं ले सकता। वहीं आम्रपाली बिल्डर और फ्लैट खरीदारों के बीच तमाम प्रोजेक्टों को लेकर हुई बैठक की रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में पेश की गई। न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष यह मसला उठाया गया कि बिल्डर ने बैंक से पैसे लिए थे लेकिन बैंक फ्लैट खरीदारों से पैसे मांग रहा है। इस पर पीठ ने बैंक से कहा, आपने बिल्डर को पैसे दिए हैं न कि खरीदारों को। पीठ ने साफ कहा कि आप फ्लैट खरीदारों से पैसे नहीं ले सकते।

वहीं आम्रपाली बिल्डर और फ्लैट खरीदारों के बीच तमाम प्रोजेक्टों को लेकर हुई बैठक की रिपोर्ट कोर्ट में पेश की गई। फ्लैट खरीदारों के वकील एमएल लाहौटी के मुताबिक, रिपोर्ट में कहा गया है कि आम्रपाली के 16 प्रोजेक्टों का निर्माण पूरा हो चुका है और दो महीने के भीतर फ्लैट का पोजेशन दिया जा सकता है। हालांकि कुछ खामियों की वजह से कंप्लीशन सर्टिफिकेट नहीं मिल सका है। जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने बिल्डर को 31 मार्च को फ्लैट खरीदार, नोएडा व ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के साथ बैठक करने के लिए कहा है। अगली सुनवाई 10 अप्रैल को होगी।

 

बीएसएनएल ने सिर्फ 118 रुपये में निकाला डेटा पैक, 28 दिन तक अनलिमिटेड कॉल और रोज 1 जीबी डाटा मिलेगा

बीएसएनएल ने सिर्फ 118 रुपये में डेटा पैक निकाला है। ग्राहकों को 28 दिन तक अनलिमिटेड कॉल और रोज 1 जीबी डाटा मिलेगा। बीएसएनएल बोर्ड के डायरेक्टर आर के मित्तल ने अपने बयान में कहा, ‘हम अपने ग्राहकों को सस्ते और अच्छे प्लान्स देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।’ अगर आप भी बीएसएनएल यूजर हैं और इस स्कीम का फायदा उठाना चाहते हैं तो कंपनी की वेबसाइट पर इसकी पूरी जानकारी उपलब्ध है। रिलायंस जियो के आने के बाद से ही टेलीकॉम मार्केट में ऑफर्स की बहार सी आ गई है। सस्ते प्लान और फ्री डाटा उपलब्ध कराते हुए जियो ने दो साल से भी कम के वक्त में अच्छी खासी पहुंच बना ली है और इसके ग्राहकों की संख्या भी काफी बढ़ गई है। जियो के आने के बाद अपने ग्राहकों को बनाए रखने के उद्देश्य से अन्य कंपनियों द्वारा भी सस्ते प्लान्स और ऑफर्स लाए गए। एयरटेल और वोडाफोन के बाद अब बीएएनएल भी ग्राहकों का ध्यान अपनी तरफ खींचने के लिए सस्ता प्लान लेकर आया है। कंपनी ने नई प्रीपेड स्कीम STV-118 लॉन्च की है। इस स्कीम के तहत यूजर्स को मात्र 118 रुपए में 28 दिनों तक के लिए रोजाना 3जी और 4जी 1जीबी डाटा मिलेगा। साथ ही 28 दिनों के लिए अनलिमिटेड कॉलिंग की सुविधा भी मिलेगी। हालांकि दिल्ली और मुंबई सर्किल के रोमिंग क्षेत्रों में अनलिमिटेड कॉलिंग की सुविधा नहीं दी गई है। इसके साथ ही बीएसएनएल मुफ्त रिंग बैक टोन की सुविधा भी दे रहा है, लेकिन अभी यह केवल तमिलनाडु सर्किल के लिए लॉन्च की गई है। बीएसएनएल बोर्ड के डायरेक्टर आर के मित्तल ने अपने बयान में कहा, ‘हम अपने ग्राहकों को सस्ते और अच्छे प्लान्स देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।’ अगर आप भी बीएसएनएल यूजर हैं और इस स्कीम का फायदा उठाना चाहते हैं तो कंपनी की वेबसाइट पर इसकी पूरी जानकारी उपलब्ध है। बीएसएनएल का 118 रुपए वाला यह प्लान रिलायंस जियो के 98 रुपए वाले प्लान के टक्कर का बताया जा रहा है। जियो के इस प्लान के तहत यूजर को अनलिमिटेड कॉलिंग, 300 एसएमएस और 2जीबी 4जी डेटा मिल रहा है। इस प्लान के साथ ही बीएसएनएल ने 379 रुपए का एक अन्य प्लान भी लॉन्च किया है। इस प्लान के तहत यूजर्स को अनलिमिटेड बीएसएनएल टू बीएसएनएल कॉलिंग मिल रही है साथ ही 4जीबी 4जी और 3जी डाटा प्रतिदिन मिल रहा है। जहां एक ओर बीएसएनएल अपने ग्राहकों को सस्ते ऑफर्स दे रहा है तो वहीं जियो ने भी प्राइम मेंबरशिप की समयसीमा बढ़ा दी है। जियो के सभी प्राइम मेंबर, जिन्होंने 31 मार्च 2018 तक के लिए एक्सक्लूसिव प्राइम मेंबरशिप ली थी, उन्हें बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के एक साल तक इसका लाभ मिलता रहेगा

हिंदू-मुसलमानों ने एक दूसरे को बांधी राखियां, बोले- दंगे हमारी संस्कृति नहीं

सद्भाव प्रकट करने के लिए रानीगंज और आसनसोल में विभ‍िन्‍न धर्मों के लोगों ने शुक्रवार (30 मार्च) को एक-दूसरे को राखियां बांधी। यहां पर रामनवमी शोभायात्रा के दौरान सांप्रदायिक हिंसा भड़क गई थी। एक अराजनैतिक संस्‍था, बांग्‍ला सांस्‍कृतिक मंच ने शुक्रवार को कोलकाता में अकादमी ऑफ फाइन ऑर्ट्स के बाहर एक कार्यक्रम आयोजित किया। यहां विभिन्‍न धर्मों से ताल्‍लुक रखने वाले लोगो धार्मिक आधार पर भेदभाव की निंदा करने को एकत्र हुए। आयोजनकर्ता मंच के अध्‍यक्ष समीरुल इस्‍लाम ने कहा, ”दो समुदायों के बीच ऐसी हिंसा देखना बंगाल की संस्‍कृति नहीं है। यह रबींद्रनाथ टैगोर और नजरुल इस्‍लाम की धरती है जिन्‍होंने हमें धार्मिक सद्भाव सिखाया है। इस कार्यक्रम के जरिए, हम लोगों को एक मजबूत संदेश देना चाहते हैं कि हम हिन्‍दू और मुसलमानों के बीच एकता के लिए खड़े हैं। यहां इन दो धर्मों के लोग एक-दूसरे को राखी बांधेंगे ताकि यह संदेश दूर तक और स्‍पष्‍ट रूप से जाए।”
यह संस्‍था ऐसे ही कार्यक्रम रानीगंज और आसनसोल में 14 अप्रैल को (बंगाली नववर्ष) पर आयोजित करेगी। मंच के महासचिव तन्‍मय घोष ने लोगों से राज्‍य में शांति बनाए रखने की अपील की। उन्‍होंने कहा, ”यह और हिंसा भड़काने का समय नहीं, सांप्रदायिक सद्भाव पैदा करने का वक्‍त है।”

साहित्य में श्रेष्ठ सृजनात्मकता के लिए अमर उजाला शब्द सम्मान

अमर उजाला इस साल से साहित्य अलंकरण अमर उजाला शब्द सम्मान की शुरुआत कर रहा है। इसके तहत, अमर उजाला फाउंडेशन सतत रचनात्मकता के लिए एक हिन्दी और एक अन्य भारतीय भाषा में पांच-पांच लाख रुपये के दो सर्वोच्च अलंकरण और वर्ष की श्रेष्ठ कृतियों के साथ भारतीय भाषाओं में परस्पर अनुवाद के लिए एक-एक लाख रुपये के सम्मान प्रदान करेगा। इस तरह, अमर उजाला फाउंडेशन ने कुल 15 लाख रुपये के सात शब्द साधना सम्मान स्थापित किए हैं।
अमर उजाला फाउंडेशन के प्रवक्ता ने बताया कि सतत रचनात्मकता के दो सर्वोच्च अलंकरण आकाशदीप हिन्दी और भारतीय भाषाओं में विशिष्ट अवदान के लिए पांच-पांच लाख नकद सम्मान राशि के साथ दिए जाएंगे। हिन्दी में किसी भी लेखक की पहली कृति के थाप पुरस्कार दिया जाएगा, जिसकी सम्मान राशि एक लाख रुपये है। छाप केअंतर्गत तीन विधाओं कविता, कथा और गैर-कथा के लिए एक-एक लाख रुपये के तीन सम्मान दिए जाएंगे। भारतीय भाषाओं में परस्पर अनुवाद के लिए एक विशिष्ट सम्मान भाषा बंधु भी प्रदान किया जाएगा। इसकी सम्मान राशि भी एक लाख रुपये है।
अमर उजाला शब्द सम्मान के लिए प्रस्ताव एवं अनुशंसा भेजने की अंतिम तिथि 10 मई है। प्रस्ताव पत्र नियम व शर्तों के साथ आधिकारिक साइट पर उपलब्ध है। प्रस्ताव-पत्र की फोटो प्रति भी उपयोग में ली जा सकती है। गौरतलब है कि अमर उजाला ने बीते साल से साहित्यकारों की जुगलबंदी की अनूठी शृंखला बैठक की शुरुआत की थी। बैठक में नामवर सिंह, विश्वनाथ त्रिपाठी, अशोक वाजपेयी, सुधीश पचौरी, मैत्रेयी पुष्पा, चित्रा मुद्गल, तस्लीमा नसरीन व नासिरा शर्मा जैसी शख्सियतें शिरकत कर चुकी हैं। शब्द सम्मान इसी की अगली कड़ी हैं।

चौथी बार बढ़ी, अब 30 जून हुई पैन-आधार जोड़ने की समय सीमा

नयी दिल्ली : सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्स (सीबीडीटी) ने मंगलवार को पैन से आधार लिंक कराने की समय सीमा 30 जून तक बढ़ा दी। टैक्स विभाग के इस नीति नियामक निकाय ने पहले इसकी समय सीमा 31 मार्च तक की थी। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने इस महीने की शुरुआत में हालिया आदेश में कहा था कि विभिन्न सेवाओं को आधार से लिंक करने की 31 मार्च तक की समय सीमा बढ़ाई जाए।
सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों वाली संवैधानिक पीठ ने बायोमेट्रिक योजना को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया था। सरकार ने आधार और पैन लिंक करने की यह सीमा चौथी बार बढ़ाई है।

इससे पहले इन दोनों डाटा बेस को जोड़ने की सीमा 31 जुलाई, 31 अगस्त, 31 दिसंबर 2017 और 31 मार्च 2018 थी।

विद्यासगर विश्वविद्यालय में कवि त्रिलोचन पर राष्ट्रीय संगोष्ठी

कोलकाता: विद्यासागर विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा प्रायोजित, ‘त्रिलोचन का साहित्य: सृजन और चिंतन’ विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी के पहले दिन कार्यक्रम का उद्घाटन कला एवं वाणिज्य विभाग के संकायाध्यक्ष प्रो. दामोदर मिश्र ने किया। बीज भाषण रखते हुए प्रो. अरुण कुमार (रांची विश्वविद्यालय) ने कहा कि त्रिलोचन श्रव्य काव्य परंपरा के कवि हैं और सहजता एवं जनपक्षधरता उनकी कविता का केंद्रीय विषय है। बतौर विशिष्ट अतिथि विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. जयंत किशोर नंदी ने कहा कि इस संगोष्ठी के द्वारा त्रिलोचन के साहित्य पर कई नए बिंदु उभरकर आयेंगे। स्वागत भाषण रखते हुए प्रो. दामोदर मिश्र ने कहा कि बहुआयामी व्यक्तित्व वाले त्रिलोचन अपने ढंग से निराले थे और आधुनिकता के प्रचलित सांचे को अस्वीकार करके हुए वे आधुनिक थे। डॉ. सुभाष गुप्ता(करीम सिटी कॉलेज) ने त्रिलोचन के साहित्य पर विस्तार से चर्चा करते हुए उन्हें जनपदीय कवि कहा। डॉ राजीव रावत ने कहा कि त्रिलोचन भारतीय काव्य परंपरा के प्रतिनिधि कवि हैं। इस अवसर पर डॉ. मंजुला शर्मा, डॉ. ऋषि कुमार, प्रो. मंटू कुमार, श्रावणी दास, पूजा पाठक, गुलनाज बेगम, प्रियंका मिश्रा, पुष्पा मल्ल, रूपल साव, पंकज सिंह, कीर्ति कुमारी, प्रभाती मुंगराज, मौसमी गोप, राहुल शर्मा, मिथिलेश, सुषमा सिंह, रीता जायसवाल आदि ने आलेख पाठ किया। इस अवसर पर विभाग के विद्यार्थियों ने त्रिलोचन की कविता पर कोलाज प्रस्तुत किया। सोनाली कुमारी, सोमा दे, बीना पाल, श्रद्धा कुमारी, रेशमी वर्मा, सोनाली सेठ, एम मेघा, सारदा महतो, श्रावणी आदि ने काव्य नृत्य प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का सफल संचालन संजय जायसवाल, डॉ. स्वाती वर्मा और मधु सिंह और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. पकंज साहा ने दिया।

बनारस की रामलीला का कोलकाता में अभिभूत करने वाला प्रदर्शन

कोलकाता : भारतीय भाषा परिषद में बनारस की संस्था ‘रूपवाणी’ ने बनारस की रामलीला को तुलसी के रामचरितमानस के संगीतात्मक गायन के साथ मूर्त कर दिया और दर्शक अभिभूत हो गए। पश्‍चिम बंगाल के राज्यपाल डॉ. केशरीनाथ त्रिपाठी ने कलाकारों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने उत्तर प्रदेश में पहले भी रामलीला देखी है लेकिन यह प्रदर्शन अद्वितीय है। रामलीला के अलावा संस्कृत नाटककार भास के नाटक ‘पंचरात्रम्’ की भी नृत्य नाट्य के रूप में प्रस्तुति हुई। दोनों के निर्देशक प्रसिद्ध कलाकार व्योमेश शुक्ल ने कहा कि यह रामलीला लोक परंपरा और आधुनिकता का सामंजस्य है। उन्होंने महाभारत पर आधारित ‘पंचरात्रम्’ के संदर्भ में कहा कि यह नाटक महाभारत युद्ध न हो और किसी भी युग में कोई युद्ध न हो इसके कारण की खोज है। नाटकों पर चर्चा सत्र में भारतीय भाषा परिषद के निदेशक डॉ.शंभुनाथ के अलावा कवि प्रियंकर पालीवाल और मृत्युंजय ने भाग लिया।
परिषद की अध्यक्ष डॉ.कुसुम खेमानी ने रूपवाणी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि परिषद का उद्देश्य भारतीय साहित्य की महान परंपरा को सामने लाना है। रूपवाणी के कलाकारों का अभिनंदन करते हुए उन्होंने कहा कि इन्होंने बिना किसी मानदेय के प्रस्तुति की है और उनके अभिनय ने कोलकाता वासियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। परिषद की मंत्री बिमला पोद्दार ने धन्यवाद दिया।

बच्चों को सशक्त बनाना हमारी जिम्मेदारी है

यूनिसेफ बदलाव के लिए कई सालों से काम कर रहा है। भारत में भी यह संस्था काफी सक्रिय है और जमीनी स्तर पर काम कर रही है मगर कोई भी बदलाव तब ही लाया जा सकता है, जब उसके लिए जमीन पर जाकर काम किया जाए। सामाजिक कार्यकर्ता बन जाना शायद आसान है मगर बने रहना उससे भी ज्यादा मुश्किल है क्योंकि बदलाव के लिए धीरज और कभी हार न मानने वाली जिद जरूरी है। यह बहुत कम लोगों में होता है। मोमिता दस्तीदार ऐसे ही लोगों में शामिल हैं जिन्होंने बदलाव का रास्ता चुना, जोखिम उठाए, चुनौतियों का सामना किया मगर इस तरह कि वो सबको साथ लेकर चलीं। दरअसल वास्तविक परिवर्तन होता भी यही है क्योंकि परिवर्तन का वास्तविक अर्थ सिर्फ तोड़ना नहीं बल्कि उसे सकारात्मक तरीके से रूपांतरित करना है। सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में काम करते हुए उनको 15 साल हो गये और पिछले कई सालों से वे यूनिसेफ से जुड़ी हैं और इस समय बंगाल में काम कर रही हैं। यूनिसेफ (पश्‍चिम बंगाल) की सम्पर्क विशेषज्ञ मोमिता दस्तीदार से हमने खुलकर बातचीत की, पेश हैं प्रमुख अंश –

मेरा परिवार मुझे लेकर काफी प्रोटेक्टिव रहा

पिछले 15 साल से काम कर रही हूँ मगर इसकी शुरुआत तब ही हो गयी थी जब मैं स्कूल में थी। मैं स्कूली दिनों में हेल्पेज इंडिया से बतौर को ऑर्डिनेटर जुड़ी थी। यह अनुभव मेरे लिए नजरिया बदलने वाला रहा क्योंकि मैं जिस परिवार से थी, वह मुझे लेकर बहुत ज्यादा प्रोटेक्टिव थे तो मेरे अनुभव भी तब तक सीमित थे मगर हेल्पेज इंडिया के लिए काम करते हुए मैंने बहुत समस्यायें देखीं और करीब से देखा। स्वेच्छा से सेवा कार्य यानि कुछ संस्थाओं के लिए वॉलेंटियर भी बनी और विशेष जरूरतमंद बच्चों और फुटपाथ पर रहने वाले बच्चों के लिए काम किया और सोशियोलॉजी लेकर पढ़ने का कारण भी यही था कि मैं दूसरों के लिए कुछ करना चाहती थी।

कई बार लगता है, कुछ नहीं किया, बहुत कुछ करना बाकी है

मैंने बहुत से संगठनों और संस्थाओं के साथ काम किया है और कई जगहों पर काम किया है। मीडिया और गैरसरकारी संगठनों से लेकर वर्ल्ड बैंक तक के लिए काम किया है। ओडिशा, राजस्थान, मेघालय, जम्मू कश्मीर में रहकर काम किया है और इससे मैं जमीनी समस्याओं को समझ सकती हूँ। चुनौती यह रही कि हर क्षेत्र की समस्या और स्थिति अलग – अलग रहती है। यूनिसेफ के लिए गुजरात, दिल्ली और गुजरात जैसे राज्यों में रहकर काम कर चुकी हूँ। यूनिसेफ में काम करते हुए हम कभी किसी चीज को अचानक नहीं तोड़ते बल्कि सीमित फ्रेमवर्क में रहकर बच्चों और लड़कियों को इतना जागरूक कर देते हैं कि वे खुद अपने लिए और दूसरों के लिए बात कर सके। हर सामाजिक परिवर्तन समय लेता है और इसके लिए धीरज की जरूरत पड़ती है। कई बार तो ऐसा लगता है कि अब तक कुछ नहीं कर सके। हमारा काम खत्म नही होता क्योंकि एक समस्या को खत्म करते हैं तो दूसरी समस्या पर ध्यान जाता है और फिर हम उसके लिए काम करने लगते हैं।

दादी माँ ने बहुत मदद की

दरअसल, जब तक मैं शौकिया करती थी तब तक कोई समस्या नहीं थी। मुश्किल तब हुई जब मैंने इसे अपना कार्यक्षेत्र बनाया। तब समझाना बहुत कठिन था मगर मेरी गम्भीरता देखकर मम्मी – पापा भी समझे और बाद में प्रोत्साहित भी करने लगे। हमारा सँयुक्त परिवार है और जब भी मैं किसी खतरनाक जगह पर जाती तो उनकी चिन्ता बढ़ जाती थी। मैं उनको साथ लेकर भी गयी और जब ट्राँसजेंडरों को लेकर काम किया तो उनको लेकर घर भी आ गयी। शुरू में थोड़ी हिचक थी घर में मगर बाद में सब ठीक हो गया और यह मानसिकता बदलने और समझाने में मेरी दादी माँ का बहुत सहयोग मुझे मिला। वैसे भी मैं सकारात्मक रहती हूँ और कई बार अपनी खूबियों और छोटी – छोटी उपलब्धियों के लिए भी खुद को शाबाशी देती हैं…इतना तो किया, अब आगे भी कर लेंगे।

मेरा काम लोगों को साथ लाना है

यूनिसेफ बंगाल में मुख्य रूप से स्वास्थ्य, पोषण, पेयजल, निकासी और बाल संरक्षण को लेकर विभिन्न संगठनों और संस्थाओं के साथ काम कर रहा है। मेरा काम लोगों को साथ लाना है। इस समय हम दक्षिण 24 परगना, मालदा, मुर्शिदाबाद, पुरुलिया में काम कर रहे हैं। कोलकाता में भी काफी योजनायें चल रही हैं और उत्तर बंगाल में उत्तर बंग विश्‍वविद्यालय के साथ चाय बागान में काम कर रहे हैं। हम यूथ रिपोर्टर तैयार करना चाहते हैं जो अपनी समस्यायें हमें बतायें और हम उनको सरकार तक पहुँचायेंगे। कोलकाता में जेयू के साथ इस तरह का प्रयोग काफी सफल भी रहा है। शीघ्र ही रेडलाइट इलाकों के बच्चों के साथ और काम करेंगे।

एक बच्चे की भी जिम्मेदारी हम उठा लें, तो बड़ी सफलता होगी

इन बच्चों को प्यार की जरूरत है। हममें से अगर सब एक – एक बच्चे की जिम्मेदारी भी उठा ले तो यह एक बड़ी सफलता होगी। बच्चों को सशक्त बनाना हमारी जिम्मेदारी है। मैं सौभाग्यशाली हूँ कि मैं दूसरों के लिए काम कर पा रही हूँ और यह मौका मुझे मिला है।