Saturday, July 11, 2026
खबर एवं विज्ञापन हेतु सम्पर्क करें - [email protected]
Home Blog Page 741

30 के बाद….रखिए सेहत के साथ आहार का ख्याल

उम्र बढ़ने के साथ जीवनशैली बदलती है मगर आहार कई बार नहीं बदलता। वैसे सच तो यह है कि 30 साल का होने के बाद ऐसा भोजन करना सही रहता है जो उम्र के असर को कम कर सके। इसके साथ व्यायाम तो जरूरी है ही मगर भाग – दौड़ भरी जिन्दगी में हम खुद को सबसे ज्यादा नजरअंदाज करते हैं और यही गलती आप भी करते हैं। हम भारतीयों की जिन्दगी में अच्छा भोजन बहुत जरूरी चीज होता है। कई बार ऐसे लोग भी दिखते हैं जो पहनावे को लेकर उतनी परवाह नहीं करते और खाना अपनी पसन्द का खाते हैं। अपनी पसन्द समझे तो….वही जिससे डॉक्टर तौबा करने की सलाह देते हैं और जीभ ऐसी चीजों को ही तलाशती है। हम आधा वजन तो दोस्ती और रिश्तेदारी बढ़ाने में बढ़ा लेते हैं, कुछ गम भुलाने में और कुछ स्टेटस बढ़ाने में। नहीं समझे…..हम समझाते हैं…..किसी दोस्त की बेटी की शादी में गये या फिर किसी रिश्तेदार की पार्टी में…..खाने का मन नहीं है मगर मनुहार करने पर हम उनको नहीं खुद को समझाते हैं….एक दिन में कुछ नहीं होता यार। बस 1 बरफी  की जगह 4 – 5 बरफी और ऊपर से राजभोग….दही भल्ले….और पता नहीं क्या – क्या खा लेते हैं। ऐसी तमाम चीजें, जिनमें वसा है और कोलेस्ट्राल भी। दोस्त से झगड़ा हुआ, किसी और का प्रोमोशन हुआ। पत्नी बात नहीं सुनती या गर्लफ्रेंड से ब्रेकअप हुआ या दोस्तों के साथ डिस्को गये या फिर ऑफिस की पार्टी….बस पैग पर पैग चढ़ाते गये….कभी गम भुलाने के नाम पर तो कभी बॉस को इम्प्रेस करने के लिए……स्टेटस तो शायद ही बढ़े मगर पीने की लत आपको पड़ चुकी होती है। जवान बेटे के साथ दोस्ती बढ़ाने के लिए शराब पीना जरूरी नहीं है मगर आप फ्रेंडली बनने के चक्कर में अल्ट्रा मॉडर्न बनकर अपने साथ उसकी जिन्दगी का बेड़ा गर्क कर बैठते हैं। इन सभी आदतों का रिश्ता आपकी सेहत और आपकी जिंदगी से है….मगर मान लीजिए कि एक बेहतर जिंदगी के लिए आपका फिट रहना और आपकी सेहत का सही रहना बेहद जरूरी है और यह आपको अपने लिए तो करना ही होगा, उनके लिए भी करना है जो आपसे बेहद प्यार करते हैं….आपके अपने…और वह सारे लोग…जिनके लिए आप ही दुनिया हैं…..सो दोस्तों…जिन्दगी इतनी बुरी भी नहीं है इसलिए खुद से प्यार करने में और ख्याल रखने में कोई बुराई नहीं है। उम्र बढने के साथ अपने आहार में परिवर्तन करने से पुरूषों का एक स्वस्थ जीवन जीने की दिशा में अच्छा कदम माना जाता है। आयु बढ़ने के साथ ही शरीर के मेटाबोलिज्म रेट के कम होने और पाचन तंत्र के कमजोर पड़ने के साथ ही शरीर में परिवर्तन होने लगता है जिसे विशेष देखभाल की जरूरत पड़ती है। तो देर किस बात की है…अपने आहार से जुड़ी इन आदतों पर ध्यान दीजिए और सेहत रहेगी तंदरुस्त……

प्रचुर मात्रा में हरी और रंगीन सब्जियों का सेवन

हरी सबिजयां  न सिर्फ बढते बच्चों के विकास के लिए जरूरी होता है बलकि व्यस्कों में भी पोषण, विटामिन्स और मिनरल्स के लेवल को बनाए रखने के लिए इनकी आवश्यकता पड़ती है। अपने भोजन मैन्यू में न सिर्फ हरी सब्जियों को स्थान दे बल्कि इसके अलावा और भी रंगीन सबिजयों को इसमें जगह दे और उनका अपने भोजन में भरपूर सेवन करे। इन सब्जियों में  एंटीऑक्सीडेंट प्रचूर मात्रा में पाए जाते है जो शरीर के अच्छे स्वास्थ्य के लिए बहुत जरूरी होते है। हरे रंगों वाली सब्जियां  हड्डियों के स्वास्थ्य औश्र बालों के विकास के लिए महत्वपूर्ण होते हैं।  अपने भोजन में साग, बंदा गोभी, सेम, फली आदि जैसी हरी सब्जियों के साथ प्रचूर मात्रा में गाजर, चुकंदर, तरबूजा और खरबुजा जैसे अन्य रंगीन फलों और सब्जियों का भी सेवन करनी चाहिए।

 ताजे फल

ताजे फल एंटीऑक्सीडेंट और फाइबर के सबसे अच्छे स्रोत माने जाते है, इसका सर्वाणिक लाभ लेने के लिए  इसे अपने ब्रेकफास्ट में इनका इस्तेमाल करना चाहिए।  सेब और नाशपाती जैसे फलों के छिलके भी विटामिन्स से भरे होते हैं इसलिए विटामिन्स और फाइबर लेने के लिए इन फलों का छिलका सहित प्रयोग करना चाहिए। सेब, नारंगी और टनस रंगीन फलों में शरीर को पोषण देने वाले बहुत से विटामिन्स  होते है।

साबुत अनाज

आहार में रिफाइंड तेल और प्रोसेस्ड खादय पदार्थों के सेवन से परहेज करे। भोजन में सफेद ब्रेड, प्रोसेस्ड सफेद चावल और मैदे की रोटी के बजाए ब्राउन ब्रेड , छिलका वाले कच्च चावल और चोकर सहित आटे की रोटी का प्रयोग करे। फाइबर युक्त आहार लेने से आंतों में हरकत तेज होता है, रक्त में कोलेस्टरोल  बढने के रिस्क को कम कर रक्त में सूगर की मात्रा  को भी नियंत्रित करता है। अगर आप अपने  आहार चार्ट और भोजन करने के आदतों में परिवर्तन करने जा रहे हैं तो इसे अचानक नहीं करे बलिक धीरे-धीरे करे। खान -पान की आदतों को अचानक बदलने और भोजन में अधिक मात्रा में फाइबर युक्त चीजे लेने से पेट खराब होने की आशंका बनी रहती है।

कम वसा वाले दूध से बने उत्पाद

हड्डियों को स्वस्थ्य और मजबूत रखने के लिए कैलसियम की आवश्यक्ता पड़ती है। उम्र बढने के साथ पुरूषों में ऑस्टियोपोरोसिस की समस्यस उतपन्न होने का खतरा बढ जाता है ।इसमें हडडिया कमजोर होकर आसानी से टूट जाती है और इसे जुड़ने में काफी समय लगता है। शरीर में कैल्सियम की मात्रा बनाए रखने के लिए अपने आहार में प्रचूर मात्रा में दूध, दही,पनीर और दूध से बने अन्य उत्पादों का सेवन करे। अगर आपको दूध में पाए जाने वाले लैक्टूज से किसी प्रकार की एलर्जी हो तो आप सोया मिल्क का प्रयोग कर सकते है।

 प्रोटीन युक्त आहार

मांस, मछली,अण्डा और सूखे मेवे प्रोटीन का समृद्ध स्रोत माने जाते है। शोध में पाया गया है कि मछली प्रोटीन का एक अच्छा स्रोत होने के साथ ही हृदय के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है। मछली में पाए जाने वाला ओमेगा -3 नामका प्रोटीन रक्त में कोलेस्टरोल की मात्रा बढने से रोकता है। डराई फ्रूट प्रोटीन के  एक अच्छे स्रोत होने के साथ-साथ विटामिन्स ई का भी बढिया स्रोत माना जाता है। जो लोग शाकाहारी होते हैं उनके  लिए सूखे मेवे सही हैं।

प्रोटीन का एक अच्छा विकल्प हो सकता है

सही वसा का सेवन   अच्छे स्वास्थ्य के लिए जीवन में माध्यम मार्ग अपनाना सबसे अच्छा सिद्धांत  माना जाता है। शरीर  को सही ढंग से काम करने के लिए में एक निधार्रित मात्रा में वसा की आवश्यकता होती है। इसलिए वसा के प्रयोग को बिलकुल बंद कर देना इससे सेवन से बचना भी स्वास्थ्य की दृष्टी से उचित नहीं है।  सुरक्षित वसा के रूप् में जैतून का तेल प्रयोग किया जा सकता है।

(साभार – ओनली माई हेल्थ)

13 फरवरी 2016 को अपराजिता का लोकार्पण

वरिष्ठ साहित्यकार कृष्ण बिहारी मिश्र को पद्मश्री सम्मान

कोलकाता ः  वरिष्ठ साहित्यकार कृष्ण बिहारी मिश्र को इस बार पद्मश्री सम्मान मिलने जा रहा है। गणतंत्र दिवस की पूर्वसंध्या को घोषित पद्मपुरस्कारों की घोषणा में इसकी जानकारी दी गयी। 1936 को उत्तर प्रदेश के बलिया में जन्मे कृष्ण बिहारी ने हिन्दी पत्रकारिता और बंगाल के योगदान पर गहन शोध किया है। उनको हिन्दी पत्रकारिता विषयक अनुशीलन पर कलकत्ता विश्वविद्यालय से डॉक्टरेट की उपाधि भी मिली है। हिन्दी के अग्रणी ललित निबन्धकारो में मिश्र जी का नाम आता है। उनको उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान का साहित्य भूषण सम्मान, कल्पतरु की उत्सव लीला नामक बहुचर्चित कृति पर मूर्तिदेवी पुरस्कार, आचार्य विद्यानिवास मिश्र सम्मान और डॉ. हेडगेवार सम्मान समेत कई अन्य सम्मान मिल चुके हैं।

अपराजिता की ओर से मिश्र जी को अभिनंदन…।

अरुण यह मधुमय देश हमारा

जयशंकर प्रसाद

अरुण यह मधुमय देश हमारा।
जहाँ पहुँच अनजान क्षितिज को मिलता एक सहारा।।

सरल तामरस गर्भ विभा पर, नाच रही तरुशिखा मनोहर।
छिटका जीवन हरियाली पर, मंगल कुंकुम सारा।।

लघु सुरधनु से पंख पसारे, शीतल मलय समीर सहारे।
उड़ते खग जिस ओर मुँह किए, समझ नीड़ निज प्यारा।।
बरसाती आँखों के बादल, बनते जहाँ भरे करुणा जल।
लहरें टकरातीं अनन्त की, पाकर जहाँ किनारा।।

हेम कुम्भ ले उषा सवेरे, भरती ढुलकाती सुख मेरे।
मंदिर ऊँघते रहते जब, जगकर रजनी भर तारा।।

गणतंत्र दिवस का आनन्द तिरंगे स्वाद के साथ

तिरंगा ढोकला

सामग्री  : 1 कप सूजी, 1 कप दही , 1 चम्मच अदरक पेस्ट, 2 चम्मच तेल, नमक स्वादानुसार, 1 चम्मच ईनो, आवश्यकतानुसार पानी, 1 कप पालक प्यूरी, छोटा चम्मच खाने वाला नारंगी रंग, 2-3 हरी मिर्च, 1/2 चम्मच लाल मिर्च पाउडर , 1 चम्मच सरसों के दाने, कुछ करी पत्ते, 2 चम्मच चीनी, 1 नींबू का रस

विधि : सबसे पहले सूजी, दही, नमक, अदरक का पेस्ट और पानी मिलाकर गाढ़ा घोल तैयार कर लें। इस घोल को आधे घंटे के लिए छोड़ दें। अब इस घोल को 3 अलग-अलग बाउल में डालें। पहले बाउल के घोल में पालक प्यूरी, हरा धनिया और बारीक कटी हरी मिर्च डालकर मिक्स कर लें। दूसरे बाउल में नारंगी रंग और लाल मिर्च डालकर मिक्स करें और तीसरे घोल को सफेद ही रहने दें।  अब ढोकला पैन को तेल से ग्रीज कर लें। पहला बैटर पैन में डालकर स्टीमर में पकाएं। जब ढोकला तैयार हो जाए तो इसे एक प्लेट में निकाल लें।  इसी तरह बाकी दोनों घोल को भी अलग-अलग बेक कर लें। इन्हें निकाल कर तिरंगे के रंग की तरह एक के ऊपर एक रखें। तड़के के लिए एक पैन में तेल डालें। जब वह गर्म हो जाएं, तो उसमें सरसों के दाने, कड़ी पत्ते और लंबे आकार में कटी हुई हरी मिर्च डालकर 1 मिनट तक भूनें। अब इसमें थोड़ा नमक, चीनी और नींबू का रस डालकर अच्छी तरह मिक्स करें। इसमें पानी डालकर एक उबाल आने दें। फिर गैस बंद कर दें। तैयार तड़के को ढोकले पर अच्छी तरह डालें और स्लाइस में काट लें। आपका तिरंगा ढोकला तैयार है।

तिरंगा सैंडविच


सामग्री  : एक पैकेट सैंडविच की ब्रेड, 250 ग्राम बेसन, 2 उबले हुए आलू,2 प्याज, 1/2 कप कटा हुआ धनिया, 2 कटी मिर्च, आधा चम्मच अजवाइन, आधा चम्मच हल्दी, आधा चम्मच  सौंफ, आधा चम्मच राई, आधा चम्मच लालमिर्च, आधा चम्मच जीरा,  1 कटोरी टमाटर सॉस ,नमक स्वादानुसार

चटनी के लिए : हरा धनिया, पुदीना, अदरक, हरी मिर्च, नींबू, नमक, शक्कर, भुना जीरा।

विधि : पहले बेसन में हरा धनिया, मिर्च, सौंफ, हल्दी, अजवाइन और नमक डालकर घोल बना लें। अब उबले आलू में बारीक प्याज, नमक, हरी मिर्च और जीरा मिलाकर गूंथ लें। अब हरी चटनी की सामग्री मिलाकर मिक्सी में पीस लें। एक प्लेट पर ब्रेड रखें। उस पर हरी चटनी लगाएं। उस पर दूसरी ब्रेड रखकर आलू का मिक्सचर फैलाएं।  उस पर तीसरी ब्रेड रखकर टमाटर सॉस लगाएं और चौथी ब्रेड से ढंक दें। अब आराम से इसे बेसन के घोल में लपेटें। गर्म तेल में डालें। ब्राउन होने तक तलें।  अब इसे चार भाग में सैंडविच की तरह काट लें। लाजवाब तिरंगा ब्रेड सैंडविच को चटनी के साथ सर्व करें।

69वां गणतंत्र दिवस : ‘महिला शक्ति’ ने भारत को किया गौरवान्वित

नयी दिल्ली : आज देश अपना 69वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। इस मौके पर भारत ने राजपथ पर अपनी सांस्कृतिक धरोहर एवं विविधताओं के साथ सैन्‍य और स्‍त्री शक्ति का ऐसा अद्भुत प्रदर्शन किया, जिसे देखकर हर भारतीय का सिर गर्व से ऊंचा उठ गया होगा। इस मौके पर भारतीय इतिहास में पहली बार आसियान के दस देशों के राष्ट्राध्यक्ष एक साथ मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए और इस वजह से पहली बार परेड की शुरुआत आसियान देशों के राष्ट्रीय ध्वजों के साथ हुई।

पीएम मोदी ने सभी आसियान राष्‍ट्राध्‍यक्षों का स्‍वागत किया और राष्‍ट्रपति कोविंद रामनाथ की मौजूदगी में राष्‍ट्रध्‍वज फहराने के साथ ही पूरा राजपथ जन गण मन से गूंज उठा। परेड में पहली बार बीएसएफ की 30 महिला जवानों ने पांच मोटरसाइकिलों पर सवार 30 महिला जवानों ने अपने हैरतअंगेज करतब से देश को गौरवान्वित होने का मौका दिया। भारत की स्‍त्री शक्ति का इससे बेमिसाल प्रदर्शन और नहीं हो सकता। महिला जवानों की मोटरसाइकिल पर कलाबाजियां देख समारोह में मौजूद राष्‍ट्रपति समेत सभी गणमान्‍य जनों के चेहरे प्रफुल्लित हो उठे। महिला शक्ति के बाद राजपथ पर सभी की नजरें आसमान पर टिक गईं। वायुसेना के कई लड़ाकू विमानों ने आसमान में अपनी ताकत दिखाई। इनमें सुखोई, MK 4, सुपर हरक्यूलिस, ग्लोबमास्टर, सुखोई, जगुआर शामिल रहे।

 

गणतंत्र दिवस में मुख्य अतिथि रहे ये 10 नेता, जानें आसियान देशों से भारत के संबंध

देश इस बार 69वां गणतंत्र दिवस मना रहा है और इस बार खास वजह यह है कि आसियान देशों के नेता बतौर मुख्य अतिथि जश्न का हिस्सा बने। 10 देशों के नेताओं के भारत आने से इंडियन-आसियान समिट को मजबूती मिलेगी। आसियान देशों से भारत के हैं ये संबंध…

ब्रुनई

ब्रुनेई के साथ भारत के 1984 में राजनयिक संबंध स्थापित हुए थे। 2016 में तत्कालीन उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ब्रुनेई यात्रा पर गए थे। इस दौरान दोनों देशों के बीच कई समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए। ब्रुनेई से भारत द्वारा जिन वस्तुओं का आयात किया जाता है, उनमें मुख्य रूप से हर साल लगभग 800 मिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य का कच्चा तेल है।

म्यांमार
मनमोहन सरकार के दौरान भारत-म्यांमार के बीच संबंध अधिक मजबूत हुए। भारत-म्यांमार-थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग योजना दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग के महत्वपूर्ण घटक के रूप में उभर सकती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल म्यांमार की यात्रा की थी। इस दौरान दोनों देशों के बीच कई समझौते हुए।

कंबोडिया
भारत-कंबोडिया के बीच संबंध प्राचीन हैं। दोनों देशों के बीच हाईड्रोग्राफ नेटवर्क स्टेशन स्थापित करने के लिए कामपोंग स्पियु में भूजल संसाधनों के अध्ययन पर समझौता जारी है। इसके अलावा कंबोडिया में सिएमरीप नदी बेसिन के लिए मास्टर प्लान बनाने पर भी समझौता हुआ था। भारत वहां राष्ट्रीय राजमार्गों की स्थिति सुधारने को नई दिल्ली में कार्यशाला का आयोजन करता रहा है।

इंडोनेशिया
2016 में दोनों देशों के संबंधों ने नया मोड़ लिया। मोदी के आमंत्रण पर 2016 में इंडोनेशिया के राष्ट्रपति नई दिल्ली पहुंचे। दोनों नेताओं ने भारत और इंडोनेशिया के प्रसिद्ध जनों के समहू (ईपीजी) के द्वारा दृष्टि दस्तावेज-2025 सौंपे जाने के कदम का स्वागत किया। दस्तावेज में 2025 और उससे आगे के लिए द्विपक्षीय संबंधों के भविष्य को लेकर रूपरेखा की सिफारिश की गई है। दोनों देशों के बीच अंतरिक्ष अन्वेषण समेत कई मुद्दों पर हस्ताक्षर हुए थे।

लाओस
दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध 1956 में स्थापित हुए थे। भारतीय सेना ने 2011, 2012 और 2013 में लाओस में यूएक्सओ व बारूदी सुरंग हटाने पर तीन प्रशिक्षण कैप्सूल का भी आयोजन किया था। दोनों देशों के बीच वैज्ञानिक, रक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सहयोग पर कई करार हैं। भारत लाओस को समय-समय पर आर्थिक मदद भी देता रहा है।

मलेशिया
पिछले साल मलेशिया के प्रधानमंत्री नजीब रज्जाक भारत पहुंचे थे। इस दौरान दोनों देशों के बीच सात समझौते हुए। इसमें रेलवे नेटवर्क, भारतीयों के लिए वीजा नियमों में छूट, भारतीय टूरिस्ट वीजा समेत कई प्रमुख मुद्दों पर समझौता हुआ। डिजिटल इंडिया और स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में मलयेशिया के सहयोग को भी कागजी रूप दिया गया था।

फिलीपींस
दोनों देशों के संबंध पिछले साल तब और मजबूत हुए जब बीते 36 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने फिलीपींस की यात्रा है। मोदी से पहले पहले 1981 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी आसियान शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने फिलीपींस गईं थीं। मोदी भी आसियान शिखर सम्मेलन और पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में भाग लेने फिलीपींस पहुंचे थे। पिछले साल ही जुलाई में इंटरनेशनल राइस इंस्टिट्यूट को अपना साउथ एशियन रिजनल सेंटर वाराणसी में लगाने को मंजूरी दी गई थी।

सिंगापुर
सिंगापुर काफी समय से हिंद महासागर में भारत की भूमिका बढ़ाने की जरूरत पर बल देता रहा है। 2005 में दोनों देशों के बीच व्यापक आर्थिक सहयोग समझौता हुआ था। इस समझौते के तहत करोड़ों डॉलर का व्यापार दोनों देशों के बीच हर साल हो रहा है। दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच दक्षिणी चीन सागर में पिछले साल समुद्री अभ्यास भी हुआ था। जिस पर चीन ने नाराजगी जताई थी।

थाईलैंड
भारत-म्यांमार-थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग योजना दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग के महत्वपूर्ण घटक के रूप में उभर सकता है। 2016 में दोनों देशों के बीच अर्थव्यवस्था, आतंकवाद से निबटने, साइबर सुरक्षा और मानव तस्करी से निबटने को सहयोग बढ़ाने का निर्णय लिया था। साथ ही रक्षा एवं समुद्री सुरक्षा क्षेत्र में नजदीकी संबंध कायम करने की हामी भरी थी।

वियतनाम
वियतनाम के प्रधानमंत्री गुयेन टैन डंग ने 2014 में भारत यात्रा की थी। वियतनाम भारत से आकाश मिसाइल खरीदने पर विचार कर रहा है। माना जा रहा है कि दोनों देशों के बीच यह सौदा जल्द हो सकता है। जिस पर चीन कई बार आपत्ति जता चुका है। इसके अलावा दोनों देशों के बीच दक्षिण चीन सागर में तेल निकालने को लेकर भी समझौते हो सकते हैं।

 

तीन रंगों की सदाबहार छटा मगर अन्दाज कुछ अलग

गणतंत्र दिवस हमारा गौरव है…हमारे लोकतंत्र की उपलब्धि का दिन है। ऐसे दिन पर तिरंगे को  न सिर्फ हम सम्मान देते हैं बल्कि हमारा मन झूम उठता है और हम रंग उठते हैं इन तीन रंगों में। खासकर आप साड़ी पहनने के मूड में नहीं हैं और गणतंत्र के जश्न को तीन रंग में ढालना हो तो हमारा पहनावा बड़ी भूमिका निभाता है तो आइए हम बताते हैं कि तीन रंगों से कैसे आप खुद को सजा सकती हैं और बना सकती हैं तीन रंगों से सजा माहौल –

केसरिया जादू  है कमाल का – अनारकली पहनिये और उसके साथ हल्के जेवर….। अब आप हल्के जेवर पहनती हैं या भारी, यह पूरी तरह आप पर निर्भर करता है। हमारी सलाह यह है कि अगर परिधान हल्के हों तो गहने थोड़े भारी चल सकते हैं। राजस्थान या गुजरात का कोई फैब्रिक पहन सकती हैं जो चटकीले केसरिया रंग या ऐसे ही शेड में हो। कोशिश करें कि ओवर न हो

 

श्वेत रंग की सादगी –  पहनावा हमारे व्यक्तित्व का आईना है और आपका व्यक्तित्व ऐसा है कि आपको ज्यादा तामझाम पसन्द नहीं है तो आपके लिए सिर्फ एक सफेद परिधान काफी है। आप चाहें तो बिलुकल सफेद एक गाउन पहनिये और चाहें तो उस पर तिरंगे के किसी भी रंग की जैकेट या दुप्पटा ले सकती हैं।

अशोक चक्र का नीलापन – डेनिम का नीलापन आपके मूड को ताजा रखेगा। खासकर छुट्टी के दिन भी दफ्तर जाना हो या दोस्तो के साथ निकलना है तो आपके फैशन का फंडा डेनिम कुरते के साथ फिट बैठ सकता है। इसे आप सफेद लोअर के साथ पहन सकती हैं।

शस्य श्यामला हरा –  तिरंगे के तीन रंगों में जो हरा रंग है….वह सदाबहार है..हरियाली और खुशहाली का प्रतीक है। आखिर भारत को कृषि प्रधान देश जो कहा जाता है…गाँवों की मिट्टी की खुशबू इस रंग में बसी है। आप हरे रंग की कोई एक्सेसरीज पहनें। इंडो – वेस्टर्न पहनें या परम्परागत तरीके से…यह हर रूप  में फबता है।

फिर क्या देर है….डूब जाइये….जश्न में…..।

 

 

गणतंत्र दिवस का इतिहास जानकर हर भारतीय को होगा गर्व

भारतीय हर साल 26 जनवरी 1950 को गणतंत्र दिवस मनाते हैं। संविधान को लागू करवाने में योगदान देने वाले और देश को लिए प्राण न्योछावर करने वाले महान पूर्वजों को याद कर श्रद्धांजलि देते हैं। लेकिन इसे हर बार मनाने की वजह जानते हैं आप? इसके पीछे हमारा गौरवशाली इतिहास तो है ही, लेकिन हम इसलिए ऐसा करते हैं ताकि हमारी नई पीढ़ी को पता चल सके कि विभिन्नताओं से भरे इतने बड़े देश एक धागे में हमारे राष्ट्रीय पर्व ही पिरोते हैं, और जिनसे हमारे अस्तिस्व और संस्कृति की पहचान जुड़ी है, उन्हें पारंपरिक तौर पर मनाते रहने से ही देश की खातिर कुछ भी कर गुजरने की जनभावना जाग्रत होती है, जिससे देश और मजबूत होता है। तो चलिए आपको बताते हैं भारत के गणतंत्र दिवस के इतिहास से जुड़े रोचक इतिहास के बारे में।

9 दिसंबर 1946 को संसद के संविधान सभागार में संविधान सभा उन दस्तावेजों को लेकर इकट्ठा हुई, जिनसे स्वतंत्र भारत सरकार की रीढ़ तय होनी थी। ढेरों उमीदों के साथ 292 सदस्यों में से 207 सदस्यों ने संसद के पहले सत्र में बहस शुरू की जो कि संविधान के समापन तक यानी तीन महीने तक चली।इससे पहले ब्रिटिश सरकार भारतीय नेताओं के लगातार आंदोलनों और हुकूमत के खिलाफ उठती जनभावनाओं से यह समझ चुकी थी कि भारत छोड़कर जाना ही होगा। आखिरकार ब्रिटिश सरकार ने शांति से सत्ता सौंपने में ही भलाई समझी और 1946 में एक कैबिनेट मिशन को भारतीय नेताओं से बात करने के लिए भेजा। दिशा निर्देशों के आधार पर प्रांतीय विधानसभा चुनाव कराए गए, जिससे 292 सदस्य चुने गए। इन सदस्यों को संविधान सभा का प्रतिनिधि बनना था। जो लोग चुने गए थे, उनमें सरदार वल्लभभाई पटेल, मौलाना अबुल कलाम आजाद, सरोजनी नायडू और पंडित जवाहर लाल नेहरू भी शामिल थे। इन लोगों के हाथ में बहुत बड़ा काम था। नेताओं ने संकल्प लिए, जिनके अंतर्गत क्षेत्रीय अखंडता, सामाजिक आर्थिक समानता, न्याय के कानून और अल्पसंख्यकों अधिकारों का ख्याल रखना था।

अगले 3 वर्षों में संविधान सभा के 165 दिनों 11 सत्र हुए। 9 दिसंबर 1949 को संविधान का ड्राफ्ट मंजूर हो गया। करीब एक महीने बाद 26 जनवरी 1950 को नए राष्ट्र को एक आधुनिक गणतंत्र बनाते हुए भारत का संविधान आधिकारिक रूप से लागू हो गया। संविधान के आधिकारिक प्रवर्तन के लिए चुनी जाने वाली तारीख भारतीय राष्ट्रवादियों की भावनाओं से जुड़ी थी। 31 दिसंबर 1931 को नेहरू ने लाहौर में पूर्ण स्वराज की मांग करते हुए जब तिरंगा लहराया था तो स्वतंत्रता की तारीख 26 जनवरी 1930 तय की गई थी। इसलिए जब संविधान लागू हुआ तो उसे ‘पूर्ण स्वराज दिवस’ माना गया।