Thursday, July 9, 2026
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अल्पसंख्यक मंत्रालय 15 हजार युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की नि:शुल्क कोचिंग कराएगा

नयी दिल्ली : केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि उनका मंत्रालय वर्ष 2018 में अल्पसंख्यक समुदायों के 15 हजार से अधिक लड़के-लड़कियों को यूपीएससी और कई अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिये मदद मुहैया कराएगा। नकवी ने सिविल सेवा 2017 में अल्पसंख्यक मंत्रालय की फ्री-कोचिंग प्राप्त कर सफल अभ्यर्थीयों को आज सम्मानित किया।

इस मौके पर नकवी ने संवाददाताओं से कहा, ” अल्पसंख्यक मंत्रालय प्रतिभाओं के “प्रोत्साहन, प्रमोशन एवं प्रोग्रेस” के लिए बड़े पैमाने पर पुख्ता प्रयास कर रहा है ताकि कोई भी प्रतिभाशाली युवा सिविल सेवा, मेडिकल, इंजीनियरिंग, अन्य प्रशासनिक सेवाओं, बैंकिंग आदि परीक्षाओं में पास हो कर बेहतर नौकरी प्राप्त करने से वंचित ना रह सके।”

उन्होंने कहा, ‘अल्पसंख्यक मंत्रालय विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ मिल कर प्रतिभावान युवाओं को सिविल सेवा, मेडिकल, इंजीनियरिंग, अन्य प्रशासनिक सेवाओं, बैंकिंग आदि के लिए बड़े पैमाने पर फ्री-कोचिंग मुहैया करा रहा है। इस वर्ष भी देश भर से 15 हजार से ज्यादा युवाओं को फ्री-कोचिंग दी जाएगी।”

पूर्व सांसद, साहित्यकार और कवि बालकवि बैरागी का निधन

नीमच :  देश के ख्यातनाम साहित्यकार व कवि बालकवि बैरागी का  निधन हो गया। वे 87 वर्ष के थे। मूलत: मनासा क्षेत्र के बालकवि बैरागी साहित्‍य और कविता के सा‍थ राजनीति के क्षेत्र में भी सक्रिय रहे। वे राज्‍यसभा के सदस्‍य रहे।इस सरस्‍वती पुत्र को कई सम्‍माना से नवाजा गया था। श्री बैरागी का मनासा में भाटखेड़ी रोड पर कवि नगर पर निवास है। वहीं पर उन्‍होंने शाम 6 बजे अंतिम सांस ली।

श्री बैरागी की गिनती कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेताओं में होती थी। वे मध्‍यप्रदेश में अर्जुन सिंह सरकार में खाद्यमंत्री भी रहे। कवि बालकवि बैरागी काे मध्यप्रदेश सरकार के संस्कृति विभाग द्वारा कवि प्रदीप सम्मान भी प्रदान‍ किया गया।

साहित्‍य अौर राजनीति से जुड़े रहने के कारण उनकी कविताओं में साहित्य और राजनीति की झलक देखने को मिलती है। गीत, दरद दीवानी, दो टूक, भावी रक्षक देश के, आओ बच्चों गाओ बच्चों श्री बैरागी की प्रमुख रचनाएं हैं।

मृदुभाषी और मस्‍तमौला स्‍वभाव तथा सौम्‍य व्‍यक्तित्‍व के धनी बालकवि बैरागी ने अंतरराष्ट्रीय कवि के रूप में नीमच जिले को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया था।

बताया जाता है कि नीमच में एक कार्यक्रम में शामिल होकर वे अपने घर मनासा पहुंचे थे। वहां कुछ समय आराम करने के लिए अपने कमरे में गए। शाम करीब 5:00 बजे जब उन्हें चाय के लिए उठाया गया तो उनके निधन की खबर लगी।

वे अपने पीछे भरा पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनके निधन की खबर अंचल में फैलते हुए शोक की लहर दौड़ गई कई बड़ी राजनीतिक हस्तियां उनके निवास पर पहुंच रही हैं।

बैरागी का जन्म 10 फरवरी 1931 को मनासा विकासखंड के रामपुरा में हुआ था। वे 1945 से कांग्रेस में सक्रिय रहे। 1967 में उन्होंने विधानसभा चुनाव में प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा को शिकस्त दी थी। 1969 से 1972 तक पं. श्यामाचरण शुक्ल के मंत्रिमंडल में राज्यमंत्री रहे।

1980 में मनासा से दोबारा विधायक निर्वाचित हुए। अर्जुनसिंह की सरकार में भी वे मंत्री रहे। 1984 तक लोकसभा में रहे। 1995-96 में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी में संयुक्त सचिव रहे। 1998 में मप्र से राज्यसभा में गए। 29 जून 2004 तक वे निरंतर राज्यसभा सदस्य रहे।

2004 में उन्हें राजस्थान प्रदेश कांग्रेस के आंतरिक संगठनात्मक चुनावों के लिए उन्हंे चुनाव प्राधिकरण का अध्यक्ष बनाया गया। 2008 से 2011 तक मप्र कांग्रेस में उपाध्यक्ष रहे। मप्र कांग्रेस चुनाव समिति के अध्यक्ष भी रहे हैं। वर्तमान में वे केंद्रीय हिन्दी सलाहकार समिति के सदस्य थे।

शोक स्वरूप मनासा बंद रहेगा बालकवि बैरागी का अंतिम संस्कार 14 मई की दोपहर करीब 2 बजे मनासा में होगा। कवि नगर स्थित निज निवास से दोपहर 2 बजे अंतिम यात्रा निकलेगी। बैरागी के निधन पर शोक स्वरूप मनासा नगर सोमवार को बंद रहेगा।

मुक्तांगन-कविता कोश काव्य पाठ श्रृंखला का तीसरा अध्याय

नयी दिल्ली : मुक्तांगन-कविता कोश काव्य पाठ श्रृंखला का तीसरा अध्याय जो कवि सुमित्रा नंदन पंत को समर्पित था कई मायनों में एक यादगार कार्यक्रम रहा। जहाँ एक ओर प्रतिभागी कवियों ने अपनी और पंत जी की कुछ बेहतरीन कविताएं सुनायीं वहीं उपस्थित श्रोता भी अंत तक उनका हौसला बढ़ाने कुर्सियों पर जमे रहे।
वरिष्ठ लेखिका अर्चना वर्मा ने पंत के व्यक्तित्व और कृतित्व पर अपने सारगर्भित विचार रखे। मुक्तांगन की इस सीरीज द्वारा कई नयी प्रतिभाएं सामने आ रहीं हैं, कई नवोदित कवियों ने तो पहली बार मंच पर अपनी कविता प्रस्तुत की। मुक्तांगन का मंच उनकी प्रतिभा को सबके सामने लाने में सहायक हुआ। देश के कोने कोने से कविताएँ मेल द्वारा प्राप्त हो रहीं हैं। नव प्रतिभा प्रोत्साहन योजना के तहत इस बार के चयनित नाम रहे –  आलेख -सुषमा व्यास ‘राजनिधि’, कविता -प्रथम -विशेष चंद्र नमन, द्वितीय-कल्पना झा, तृतीय-किरण यादव। निर्णायक वरिष्ठ लेखिका अर्चना वर्मा रहीं। द्वितीय कड़ी के विजेताओं सुषमा कनुप्रिया, देवेंद्र, प्रांजल और आशुतोष को भी पुरस्कृत किया गया।

हिंदी साहित्य का संबंध सांस्कृतिक जागरण से है

कोलकाता : सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन द्वारा ‘साहित्य संवाद’ के तहत आयोजित सभा में भक्ति साहित्य और आधुनिक बोध पर चर्चा करते हुए कहा गया कि हिंदी साहित्य की परम्परा को अखंडता में देखने की जरूरत है। अंग्रेजी राज का मध्यकाल और आधुनिक काल का विभाजन अब स्वीकार नहीं किया जा सकता। हिंदी साहित्य आम लोगों के सांस्कृतिक जागरण का साहित्य है। शोधछात्रा पूजा गुप्ता ने शोध आलेख पाठ में कहा कि भक्ति काव्य का प्रभाव राष्ट्रीय स्वाधीनता पर था, लेकिन वर्तमान युग में नहीं है। गांधी पर नरसी मेहता और तुलसी का असर था। स्वाधीनता संग्रामी भक्त कवियों के भजन गाकर अंग्रेजी राज में लोगों को इकट्ठा करते थे। गुरुनानक और चैतन्य देव ने सामाजिक भेदभाव का विरोध कर राष्ट्रीय चेतना का मार्ग प्रशस्त कर रहे थे। पविंद कुमार ने हिंदी के विशिष्ट कथाकार काशीनाथ सिंह पर आलेख पाठ करते हुए कहा कि काशीनाथ सिंह की कृतियां जीवन को अर्थ देने और जनांदोलन की चेतना को व्यक्त करने के लिए सामने आईं। उनमें बनारस की संस्कृति अपनी समस्याओं के साथ उभरती है। उन्होंने युवाओं के बदलते मन को भी समझने का प्रयत्न किया है। कथाकार सेराज खान बातिश. ने कहा कि इस समय अपने विचारों में कमी आ गई है और अंधानुकरण बढ़ा है। कवि राज्यवर्द्धन ने कहा कि लेखन को अब वाचिक निपुणता से जोड़ना जरूरी है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए शंभुनाथ ने कहा कि साहित्य संवाद का यह मंच शोधार्थियों के चिंतन और लेखन को समृद्ध करने का अवसर प्रदान करता है। इस अवसर पर प्रकाश त्रिपाठी, राजेश साह, नवोनीता दास, जूही करन, सुषमा त्रिपाठी, पंकज सिंह, मिथिलेश साव, कालीप्रसाद जायसवाल ने कविता पाठ किया। कार्यक्रम का संचालन संजय जायसवाल और धन्यवाद ज्ञापन राजेश मिश्र ने दिया।

ग्लोबल वही हो सकता है जो संवेदनशील हो

कोलकाता  : पंजाबी विद्वान और आनंदपुर साहिब के ‘निशान-ए-खालसा’ से सम्मानित डॉ.जसपाल सिंह ने आज भारतीय भाषा परिषद द्वारा आयोजित कार्यक्रम में कहा कि ‘गुरुग्रंथ साहिब’ एक आध्यात्मिक संदेश होते हुए भी यह संदेश देते हैं कि कपड़े पर खून की एक बूंद भी छींटा हो तो वह गंदा हो जाता है, वर्तमान समय में हर तरफ इतना खून खराबा हो रहा है, हम आज की जिंदगी को सुंदर कैसे कह सकते हैं। उन्होंने आगे कहा कि ‘गुरु ग्रंथ साहिब’ बड़े संवेदनशील है और उनका संदेश ग्लोबल है। दरअसल ग्लोबल वही हो सकता है जो संवेदनशील हो। ‘गुरु ग्रंथ साहिब’ में 6 गुरुओं की वाणी के अलावा ऐसे 15 भक्तों के पद हैं जो विभिन्न धर्मों, जातियों और विभिन्न राज्यों के हैं। सिख धर्म एक उदारवादी धर्म है। इसमें ब्राह्मण रामानंद जिन्हें मंदिर से निकाल दिया गया था उन्हें गुरु ग्रंथ साहिब में उच्च स्थान मिला है। वहीं बंगाल के जयदेव हैं तो दलित रैदास भी हैं। यह धर्म सर्वसमावेशी और मानवतावादी है।
कार्यक्रम में सबसे पहले पूर्व कर्नल नरेंद्र सिंह ने रामानंद और शेख फरीद के पद गाकर सांप्रदायिक सौहार्द और प्रीति का संदेश दिया। डॉ.कसुम खेमानी ने पंजाबी विश्‍वविद्यालय के पूर्व-कुलपति डॉ.जसपाल सिंह का अभिनंदन करते हुए कहा कि ‘गुरुग्रंथ साहिब’ की सभा में न कोई बड़ा है और न छोटा है। सभी मनुष्य बराबर है।
परिषद के निदेशक डॉ.शंभुनाथ ने डॉ.जसपाल को शाल और स्मृति चिह्न देकर उनका सम्मान किया। मंत्री बिमला पोद्दार ने सभी पंजाबी विद्वानों डॉ.जसपाल सिंह, तंजीत सिंह, नरिन्दर सिंह, गुरुशरण सिंह एवं सुनीता अहलुवालिया पुष्प स्तवक देकर अभिनंदन एवं सम्मान किया। धन्यवाद ज्ञापन नंदलाल शाह ने दिया।
प्रेषक : सुशील कान्ति

माँ !मुझे अखरता है ,तेरा मेरे पास न होना

नीलम सिंह 

वर्षो बाद छलक अाई आँख मेरी
माँ !तेरी ममता याद करके /

मैने पोंछ लिया था आंसू ,
सोच कर कि ,
अब इसे नही बहना है /

आज याद आया मुझे
कि मैं आती जब दिन भर के बाद ,
तुम देखती मेरा मुरझाया मुँह ,
जान जाती तुम मेरी भूख ,
पीछे घुमती मेरे लेकर फ्लेट
करती मनुहार कुछ खाने को
कहती खा ले ,
दो केले ,एक सेव ,पी ले ग्लास भर दूध
व्रत है तेरा ,,
क्या पता कुछ खाया य़ा नही ,
रह गई यूँ ही सारा दिन /
जानती हूँ मैं ……..
तू है लापरवाह /

बार -बार मना करने पर भी ,
तुम नही मानती /

आज खलती है मुझे तेरी कमी ,
जब घूसते ही घर में ,
हर चेहरा नाराज दिखता है ,
हर लव शिकायत करती है ,
हर अाँख काम खोज़ता है /

बेमन उठती हूँ ,सारे छूटे काम निबटाती हूँ ,
करती हूँ याद तेरा ममता भरा स्पर्श ,
तेरी स्नेह से लिपटी बातें ,
तेरी गोद में सिर रखना ,
तेरे हाथों से साग भात खाना ,
गलती करने पर मेरी ढाल बनना /
माँ !मुझे अखरता है ,तेरा मेरे पास न होना /

माँ,न होती तो मैं न होती

आँखें खुली तो माँ को पाया ,
माँ के आँचल में झूला ,झूला।
माँ ने जब सहलाया मुझको,
तब मुझे चेतना आई।
माँ ने जब अँगुली पकडा़या,
तब,जाकर मुझे चलना आया।
पढ़ना-लिखना, हँसना -रोना,
सब मुझको माँ ने सिखलाया।
माँ,न होती तो मैं न होती
ये जीवन,ये संसार न होता।

बूढ़े मां-बाप को छोड़ने वाले बेटों को 6 महीने जेल भेजेगी सरकार

नई दिल्ली: पूरी दुनिया में आज (13 मई) को मदर्स डे मनाया जा रहा है. सोशल मीडिया पर लोग मां के प्रति अपनी भावनाएं और तस्वीरें शेयर कर रहे हैं। हालांकि बदलते दौर में मां-पिता की उपेक्षा की घटनाएं भी काफी बढ़ गई हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली मौजूदा केंद्र सरकार कानून में कुछ ऐसे बदलाव लाने की तैयारी में है, जिसके बाद कोई भी बेटा बुजुर्ग मां-बाप को अकेला छोड़ने से पहले हिचकेंगे। कानून में बदलाव कर प्रावधान किया जा रहा है कि अगर माता-पिता को छोड़ा या उनसे गलत व्‍यवहार किया तो अब छह महीने की जेल हो सकती है।

फिलहाल 3 महीने जेल का है प्रावधान
माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण व कल्याण अधिनियम 2007 के तहत आरोपी बेटों को तीन साल की सजा का प्रावधान है, जिसे बढ़ाकर छह महीने करने की तैयारी है। न्यूज एजेंसी PTI से बातचीत में एक वरिष्ठ अफसर ने बताया, ‘सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रलय ने संशोधन विधेयक का मसौदा भी तैयार कर लिया है। माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण और कल्याण बिल 2018 के मसौदे के तहत बच्चों की परिभाषा का दायरा भी बढ़ाने का प्रस्ताव किया गया है।

मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि बच्चों की परिभाषा में दत्तक या सौतेले बच्चों, दामाद और बहुओं, पोते – पोतियों, नाती-नातिनों और ऐसे नाबालिगों को भी शामिल करने की सिफारिश की गयी है जिनका प्रतिनिधित्व कानूनी अभिभावक करते हैं। मौजूदा कानून में सिर्फ सगे बच्चे और पोते – पोतियां शामिल हैं।

बच्चे देखभाल से करे इनकार तो कानून का सहारा लें मां-पिता
मंत्रालय ने माता – पिता और वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल और कल्याण कानून, 2018 का मसौदा तैयार किया है। कानूनी रूप मिलने के बाद यह 2007 के पुराने कानून की जगह लेगा।

कानून में मासिक देख – भाल भत्ता की 10,000 रुपये की अधिकतम सीमा को भी समाप्त कर दिया गया है। यदि बच्चे माता-पिता की देखभाल करने से इनकार कर देते हैं तो वह कानून का सहारा ले सकते हैं।

बातें जो हर माँ आपसे पूछती हैं

आज मदर्स डे है। हर मां ऐसी ही होती है, जो बच्चों के लिए अपनी ज़िंदगी उनके नाम कर देती है। जीवन में कोई भी उतार-चढ़ाव आए, लेकिन मां का प्यार कभी नहीं बदलता। हर परेशानी हर दिक्कत को पार कर मां-बच्चों का प्यार हमेशा एक-सा बना रहता हैं कुछ ऐसी बातें हैं जो हर माँ पूछती है या कहती है…कुछ ऐसी बातें –

खाना खाया या नहीं?
आप रात के 2 बजे भी घर क्यों ना पहुंचे, आपकी माँ आपसे हर बार ये जरूर पूछेंगी कि आपने खाना खाया या नहीं?

 मेरा बच्चा सबसे सुंदर
सच में! आपको खुद को भी पता है कि आप खूबसूरती के मामले में कैसे हैं लेकिन आपकी माँ के लिए आप हमेशा राजा बेटा या रानी बिटियां ही रहेगें, जो कि इस दुनिया का सबसे खूबसूरत बच्चा है।

ये क्या पहना है?
जब भी कुछ नए कपड़े ट्राय किया जाए तो हर माँ का सवाल होता है कि ये क्या पहना है? अगर आप भी नए स्टाइल्स अपनाना करना पसंद करते हैं तो ये सवाल आपकी मम्मी भी जरूर पूछती होंगी.

आज क्या खाओगे?
चाहे आप स्कूल में हो या ऑफिस में हर मां अपने बच्चों से ये जरूर पूछेंगी कि आज खाने में क्या बनाऊं? सिर्फ अभी ही नहीं अगर आप 50 साल के भी क्यों ना हो जाएं माँ का ये सवाल हर बार यही रहेगा.

24 घंटे फोन में क्यों घुसे रहते हो!
अब मम्मियों को कौन समझाए कि वॉट्सऐप, फेसबुक, इंस्टाग्राम, स्नैपचैट, ट्विटर जैसे ढेरो ऐप हैं जिन्हें अपडेट करना होता है. खैर, मम्मियों का ये सवाल कभी भी बंद नहीं हो सकता।

 तबीयत ठीक है?
ये बात तो सच है कि जितना ख्याल एक माँ रख सकती है उतना कोई भी नहीं कर सकता। अगर आप घर में थोड़ा थक कर भी पहुंचे तो आपकी मां आपसे जरूर पूछेंगी कि तबीयत ठीक है?

घर कब आ रहे हो?
आप चाहे अपनी मां से 400 किलोमीटर दूर कहीं दूसरे शहर में काम या पढ़ाई के लिये रहें या फिर सिर्फ 4 किलोमीटर दोस्तों के साथ निकलें, हर मां एक ही सवाल पूछती है कि घर कब आ रहे हो?

(साभार)

विरासत ए फैशन – सादगी और अभिजात्यता का संगम बाटिक

बाटिक का नाम सुनते ही दिमाग में शांतिनिकेतन की याद आ जाती है। बंगाल की यह अनमोल धरोहर है मगर यह सिर्फ बंगाल तक सीमित नहीं है। आइए इस धरोहर को जानते हैं…
बाटिक कला का जन्म कहाँ और कब हुआ इसके विषय में मतभेद है। इसके सबसे प्राचीन नमूने बारहवीं शताब्दी के हैं जो इन्डोनेशिया के द्वीप जावा में पाए गए हैं लेकिन यह नहीं कहा जा सकता कि जावा में ही इस कला का आविष्कार हुआ या यह भारतीय पर्यटकों द्वारा वहाँ लायी गयी। खुजराहो की गुफाओं के चित्रों में इसका आरम्भिक रूप बताया जाता है।

मध्यपूर्व, मिस्र, टर्की, चीन जापान और पश्चिम अफ्रीका में भी प्राचीन बाटिक के नमूने मिले हैं किन्तु ये भारतीय और इन्डोनेशियाई कलाकृतियों जैसे कलात्मक नहीं हैं। भारत अत्यंत प्राचीन काल से वस्त्रों पर छपाई और कलाकृतियों के लिये विश्व विख्यात रहा है। यहाँ पर यह कला में उस समय पराकाष्ठा पर थी जिस समय योरप और अन्य देशों में इसका प्रारंभ भी नहीं हुआ था।

मुगलों और अंग्रेज़ों के शासन काल में इस कला में गहरी गिरावट आई, किन्तु २०००वी सदी में इसका उस समय पुनरूद्धार हुआ जब कलकत्ता के प्रसिद्ध शांतिनिकेतन विश्वविद्यालय में इसे एक विषय के रूप में स्थान दिया गया। दक्षिण में मद्रास के निकट प्रसिद्ध शिल्पग्राम चोलमंडल में बाटिक को कलात्मक रूप में ढालने का काम किया गया। बंगाल और मद्रास दोनों के ही बाटिक लोकप्रिय और कला की दृष्टि से संपन्न हुए किन्तु इन दोनों की शैली में काफी अंतर है। बंगाल में अल्पना अाकृतियों का बाहुल्य है और मद्रास में अमूर्त कला को चटकीले रंगों से निखारा गया है।


बाटिक का सही उच्चारण बतीक है जिसका अर्थ है मोम से लिखना या चित्र बनाना। बाटिक की प्रक्रिया में पहले कपड़े पर चित्र बनाया जाता है। इसके बाद जिन स्थानों को बिना रंग के रखना होता है उस पर मोम लगा कर कपड़े को रंग में डुबो दिया जाता है जहाँ जहाँ मोम लगा होता है वहाँ रंग नहीं चढ़ता लेकिन मोम की टूटी हुई दरारों में रंग ज्यामिति के सुन्दर अमूर्त आकारों की दरारें बनाता है।

बाटिक का यही दरार सौन्दर्य इसे अन्य कलाओं से अलग करता है। बंगाल में कपड़ों के साथ चमड़े यानि लेदर बैग और चप्पलों पर भी आपको बाटिक का काम दिखेगा।आज भारत में बाटिक लगभग हर जगह लोकप्रिय और सुलभ है। इसके सीखने और सिखाने की सुविधाएँ लगभग हर नगर में हैं और इसकी लोकप्रियता बेमिसाल है। न केवल वस्त्रों बल्कि कलाकृतियों के रूप में भी इसका प्रयोग अत्यंत लोकप्रिय है।

भारत के साथ साथ श्रीलंका, मलेशिया, इंदोनेशिया और मलेशिया ने भी बाटिक की अपनी अलग अलग पद्धतियाँ विकसित की हैं। हर देश की पद्धति मे थोड़ी बहुत विंभिन्नता और अपने देश की संस्कृति का समन्वय है पर अगर आप ध्यान से देखें तो भारत का प्रभाव हर जगह नज़र आता है। कहीं रंगों में, कहीं शैली में तो कहीं विषय वस्तु में।
(साभार – अभिव्यक्ति)

कामकाजी हों या होममेकर, रहें तरोताजा हरदम

यह सही है कि काम और जिम्मेदारियों के बीच होने वाली भागदौड़ में अपना ख्याल ऱखना आसान नहीं है। आप कामकाजी हों या घर की कमान सम्भाल रही हों, खूबसूरत दिखना आपकी लक्जरी नहीं बल्कि अधिकार और जरूरत है। बहुत ज्यादा मेकअप भले ही अजीब लगे मगर फ्रेश दिखना आपका आत्मविश्वास बढ़ाता है इसलिए जरूरी है कि थोड़ा वक्त आप खुद के लिए भी निकालें। कुछ ऐसे तरीके यहाँ बताये जा रहे हैं जो आपको खूबसूरत ही नहीं बनाएंगे बल्कि तरोताजा होने का एहसास भी देंगे
बाल धोने के बाद सुखाने में वक्त ज्यादा लगता है और हड़बड़ी हो तो ड्रायर का रोजाना इस्तेमाल बालों की जड़ें कमजोर करता है। आप कॉटन टी-शर्ट का इस्तेमाल कर सकती हैं। कॉटन टी-शर्ट तौलिए की तुलना में बालों को जल्दी सुखाती हैं।
अगर आपकी आंखों की पलके हल्की हैं तो उन्हें घना दिखाने के लिए मस्कारा लगाने से पहले अपनी पलकों पर बेबी पाउडर लगाएं। इसके बाद मस्कारा के दो तीन कोट्स लगा दें।
अगर आपको बहुत पसीना आता है तो इस समस्‍या से निजात पाने के लिए सुबह तैयार होते समय आर्मपिट पर थोड़ा-सा बेकिंग सोडा छिड़क लें। ऐसा करने से पूरा दिन आप पसीने की दुर्गंध से दूर रहेंगे। परफ्यूम स्प्रे की जरूरत भी नहीं पड़ेगी।
धूप में रहने की वजह से अगर आपकी त्त्वचा पर भी लाल निशान या मुहांसे हो जाते हैं तो त्वचा पर बर्फ़ रगड़ें, तुरंत राहत मिलेगी। इसके अलावा आइस क्यूब त्वचा में कसावट लाने का भी काम करती हैं।
तरोताजा और साफ दिखने के लिए ऑफिस में एक से दो बार मुंह जरुर धोएं। इससे चेहरे पर आने वाला तेल हटेगा और चेहरा तरोताजा नजर आएगा।
लिपस्टिक को लम्‍बा टिकाए रखने के लिए दो कोट लिपस्ट‍िक का लगाए। पहला कोट लगाने के बाद उसे हल्का करना भी जरूरी है। इससे लिपस्टिक जम जाती है और इसके फैलने का डर भी नहीं रह जाता। अब आप चाहें तो अपनी इच्छानुसार हल्का या गाढ़ा, दूसरा कोट लगा सकती हैं। लिपस्टिक को लम्‍बी देर तक टिकाएं रखने के लिए लिप ब्लोटिंग करें। टिशू पेपर को होंठों के बीच कुछ देर तक दबाकर रखें। ऐसा करने से लिप्स पर मौजूद अतिरिक्त तेल निकल जाएगा। उसके बाद होंठों पर लिपस्टिक लगाएं।
घर हो या ऑफ़िस, देर तक कंप्यूटर पर काम करने की वजह से या फिर देर रात तक जागने की वजह से आपकी आँखें थकी हुई लग रही हैं तो आंखों के निचले हिस्से पर वाइट काजल लगाएं। इसके बाद ऊपरी पलकों पर ब्राउन काजल या लाइनर लगाएं।
ऑफिस में टफ शेड्यूल होने के वजह से आपके पास हाथ पांव की देखभाल के लिए समय नहीं बचता है तो आप रात को सोने से पहले अपने हाथों और पैरों में पेट्रोलयम जेली लगाए। इसके बाद पैरों में जुराबे पहन ले और हाथों को किसी कपड़े से ढक लें। इससे त्वचा में प्राकृतिक नमी बनी रहेगी।