Thursday, July 9, 2026
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रित्विक घटक की पत्नी सुरमा घटक नहीं रहीं

कोलकाता ;महान फिल्मकार रित्विक घटक की पत्नी सुरमा घटक का लंबी बीमारी के बाद यहां के एक अस्पताल में निधन हो गया। उनके परिवार ने यह जानकारी दी। वह 91 साल की थीं और पिछले कुछ सालों से वृद्धावस्था से जुड़ी बीमारियां से जूझ रही थीं।

उन्हें दस दिन पहले सरकारी एम आर बांगड़ अस्पताल में भर्ती कराया गया था और वह कुछ दिनों से सघन चिकित्सा कक्ष में थीं।

परिवार के अनुसार उन्होंने अस्पताल में रात करीब साढ़े बारह बजे अंतिम सांस ली। उनके परिवार में बेटा रितबान है। उनकी दो बेटियां पहले ही गुजर चुकी हैं। सुरमा के निधन पर शोक प्रकट करते हुए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ट्वीट किया , ‘‘ महान फिल्मकार रित्विक घटक की पत्नी सुरमा घटक के निधन पर गहरा दुख हुआ। शोक संतप्त परिवार और दोस्तों के प्रति मेरी संवेदनाएं हैं। ’’

मौटे तौर पर रित्विक घटक के जीवन पर आधारित फिल्म बनाने वाले निर्देशक कमलेश्वर मुखोपाध्याय ने कहा , ‘‘ सुरमा घटक का जीवन संघर्षों वाला जीवन था। उनके बंगाली संस्मरण , जो पहले प्रकाशित हुए थे , फिल्मी छात्रों को 60 और 70 के दशक के दौर ( जब घटक ने फिल्में बनायीं ) को जानने में काफी मददगार साबित होंगे। ’’

सुरमा अपने फिल्मकार पति रित्विक घटक के लिए समर्थन की मजबूत स्तंभ थी। ‘ मेघे ढाका तारा ’, ‘ सुबर्णरेखा ’ और ‘ अजांत्रिक ’ रित्विक की कुछ क्लासिकल फिल्में हैं। सुरमा के अंतिम संस्कार में उनके परिवार के सदस्य तथा कमलेश्वर मुखोपाध्याय समेत कुछ दोस्त मौजूद थे।

ट्रेन में अब महिलाओं की सुरक्षा के लिये लगेगा ‘पैनिक बटन’

लखनऊ : ट्रेनों में महिलाओं के साथ छेड़खानी और अन्य परेशानियों के तुरंत समाधान के लिए रेल मंत्रालय नया कदम उठाने जा रहा है । अब ट्रेन के हर डिब्बे में एक ‘पैनिक बटन’ लगाया जायेगा जिसे संकट के समय में दबाने पर डिब्बे में ही उन्हें तत्काल मदद मुहैया कराई जायेगी ।

इसके अलावा, जिन ट्रेनों में महिलाओं के लिये विशेष कोच होते हैं उन्हें ट्रेन के अन्य डिब्बों के रंग से अलग रंग में पेंट करवाया जाएगा तथा उन्हें ट्रेन के बीच में लगाया जायेगा ।

गौरतलब है कि रेल मंत्रालय वर्ष 2018 को ‘वुमेन एंड चाइल्ड सेफ्टी वर्ष’ के रूप में मना रहा है । पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी संजय यादव ने ‘भाषा’ को बताया कि ट्रेनों में महिलाओं के साथ छेड़खानी तथा अन्य तरह की परेशानियां अक्सर होती हैं । इसे देखते हुए रेलवे प्रशासन उनकी सुरक्षा के कदम उठा रहा है ताकि ट्रेनों में वे सुरक्षित सफर कर सकें। इसी कड़ी में पूर्वोत्तर रेलवे ट्रेनों में पैनिक बटन लगाने की योजना पर कार्य कर रहा है।

उन्होंने बताया कि यह पैनिक बटन दबाते ही ट्रेन के गार्ड को तुरंत पता चल जायेगा कि ट्रेन के किस डिब्बे में महिला परेशानी में है। गार्ड ट्रेन में मौजूद, एस्कॉर्ट करने वाले जवान और टीटीई को वाकी टाकी के जरिये सूचित करेगा। जवान तुरंत सभी डिब्बों में जाकर पता करेंगे और आवश्यक कार्रवाई करेंगे ।

सीपीआरओ यादव ने बताया कि चूंकि वर्ष 2018 को भारतीय रेल ‘वुमेन एंड चाइल्ड सेफ्टी वर्ष’ के रूप में मना रही है इसलिये इस वर्ष महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिये रेलवे की कई नयी योजनाओं पर काम हो रहा है । महिला यात्रियों की सुरक्षा की दृष्टि से आपात स्थिति में रनिंग स्टॉफ को चौकस करने के लिए पैनिक बटन प्रणाली शुरू करने की कवायद चल रही है ।

यादव ने बताया कि आपात स्थिति में महिला यात्री अलार्म चेन के पास लगे बटन को दबा सकती है। इसमें गार्ड के अलावा कोच के बाहर उपलब्ध फ्लैशर इकाइयों पर ऑडियो विजुअल संकेत भी मिलेगा। ट्रेन को एस्कॉर्ट करने वाली टीम भी तत्काल सतर्क हो जायेगी। संकेत के आधार पर टीम पीड़ित यात्री के पास तुरंत पहुंच जायेगी ।

उन्होंने बताया कि अभी तक ट्रेन में सफर करने वाली महिलाओं को आपात स्थिति में हेल्पलाइन नंबर या एसएमएस का सहारा लेना पड़ता है या फिर चेन खींचनी पड़ती है। फिर पीड़ित तक पहुंचने में रनिंग स्टाफ को बहुत समय लग जाता है। ऐसे में अपराधी भागने में कामयाब हो जाते हैं लेकिन अब नई सुरक्षा प्रणाली से ऐसा नहीं होगा।

यादव कहते है कि रेल मंत्रालय की योजना महिलाओ के अलग कोच का रंग ट्रेन के अन्य डिब्बों से अलग रंग में पेंट करवाने की है । इससे अलग से पता चल जाएगा कि यह डिब्बे महिलाओं के हैं और इन डिब्बों को ट्रेन के बीचों बीच रखा जायेगा। ऐसे में किसी प्लेटफार्म पर ट्रेन रूकने पर आपात स्थिति में जरूरतमंद महिला तक तत्काल पहुंचा जा सकेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि पैनिक बटन वाली योजना इसी साल चालू हो जाएगी।

बालिग महिला पति के साथ रह सकती है : अदालत

नयी दिल्ली : दिल्ली उच्च न्यायालय ने बालिग होने के मात्र चार दिन बाद विवाह करने वाली एक महिला को अपने पति के साथ रहने की इजाजत दे दी है और उसके अभिभावकों के इस आरोप को खारिज कर दिया कि वह नाबालिग है और उसे जबर्दस्ती उनसे दूर ले जाया गया।

अदालत ने कहा कि चूंकि उसने अपनी पसंद के व्यक्ति से विवाह किया है और उसके साथ खुशी से रह रही है इसलिए उसके लिए निर्देश जारी करने की कोई जरूरत नहीं है। अदालत ने कहा कि अपने परिवार की इच्छा के विपरीत विवाह करने वाली महिला चूंकि 18 वर्ष की है इसलिए वह यह निर्णय करने के लिए स्वतंत्र है कि वह किससे विवाह करना चाहती है।

उसके अभिभावकों ने जहां दावा किया कि वह नाबालिग है और व्यक्ति उसे जबर्दस्ती ले गया , युवती ने कहा कि उसने बालिग होने के चार दिन बाद अपनी मर्जी से विवाह किया और वह अपने अभिभावकों के पास वापस नहीं लौटना चाहती।

युवती ने यह भी कहा कि उसे , उसके पति और उसके ससुराल वालों को सुरक्षा मुहैया करायी जाए क्योंकि उसे अपने अभिभावकों से खतरा है। न्यायमूर्ति एस मुरलीधर और न्यायमूर्ति आई एस मेहता की एक पीठ ने दिल्ली पुलिस से कहा कि वह आकलन करे और उन्हें जैसी और जब सुरक्षा की जरूरत हो मुहैया कराये।

युवती की मां ने एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी और मांग की थी कि उसकी पुत्री को अदालत के समक्ष पेश किया जाए। युवती की मां ने आरोप लगाया था कि व्यक्ति उसे जबर्दस्ती ले गया है। यद्यपि पुलिस ने सूचित किया कि 2000 में जन्मी युवती 10 मार्च को बालिग हो गई और उसने 14 मार्च को विवाह कर लिया। उसने अपने अभिभावकों को 26 मार्च को जानकारी दी। स्कूल रिकार्ड के अनुसार वह 10 मार्च को 18 वर्ष की हो गई।

बिहार की मधुमिता शर्मा को गूगल ने दिया एक करोड़ आठ लाख का पैकेज

कभी-कभी माता-पिता की बात न मानना भी बड़े काम का रहता है। इसके पीछे माता-पिता की मंशा खराब नहीं होती बल्कि जमाने के रंग-ढंग देखते हुए अभिभावक अपनी संतान की भलाई के लिए कुछ ऐसी हिदायतें दे देते हैं, जिसकी अनसुनी कर जीवन में कोई ऐसी सफलता हाथ लग जाती है, जिस पर यकीन करना मुश्किल हो जाता है। जब बच्चे कोई ऐसी सफलता हासिल कर लेते हैं, तो फिर माता-पिता भी उनकी खुशी के जश्न में शामिल हो जाते हैं। ऐसा ही हुआ है पटना (बिहार) के खगौल क्षेत्र की रहने वाली गूगल गर्ल मधुमिता शर्मा के साथ। पच्चीस वर्षीय मधुमिता को गूगल ने एक करोड़ रुपए से अधिक के सालाना पैकेज पर नौकरी दी है।

मधुमिता ने गूगल के स्विट्ज़रलैंड स्थित ऑफिस में टेक्निकल सोल्युशन इंजीनियर की नौकरी ज्वॉइन भी कर ली है। इसके लिए उनको सात बार इंटरव्यू फेस करना पड़ा। ये इंटरव्यू अलग-अलग देशों से ऑनलाइन लिए गए। स्विट्जरलैंड से तीन इंटरव्यू हुए तो सिंगापुर से एक और सिडनी से दो। इसके अलावा एक इंटरव्यू बेंगलुरु में लिया गया। इसके लिए लगभग सात महीने तक उन्हें कठिन तैयारी करनी पड़ी। गूगल ज्वॉइन करने से पहले मधुमिता को अमेज़ॉन, माइक्रोसॉफ़्ट, मर्सिडीज़ जैसी कंपनियों से भी ऑफ़र मिले थे। अभी वह बेंगलुरु की एपीजी कंपनी में काम कर रही थीं।

इससे पहले बिहार के ही वात्सल्य सिंह को माइक्रोसॉफ़्ट में एक करोड़ 20 लाख रुपए सालाना का जॉब मिला था। उस समय वात्सल्य आईआईटी खड़गपुर में पढ़ रहे थे। मधुमिता कहती हैं कि गूगल में दुनिया भर के बड़े-बड़े इंजीनिरिंग कॉलेज, यूनिवर्सिटी से निकले छात्र ही सेलेक्ट होते हैं। उनका चुना जाना सुखद है। गौरतलब है कि गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, एप्‍पल आदि कुछ ऐसी बड़ी कंपनियां हैं जिनमें काम करने का हर इंजीनियर का सपना रहता है। मौका मिल जाए तो शायद कोई इन्‍हें छोड़ने का सपने में भी नहीं सोच सकता है।

एक वक्त में मधुमिता के पिता सुरेंद्र शर्मा उन्हें इंजीनियरिंग की शिक्षा नहीं दिलाना चाहते थे। उनका कहना था कि इंजीनियरिंग सेक्टर अब लड़कियों के लिए ठीक नहीं रह गया है। फिर उन्होंने देखा कि लड़कियां भी बड़ी संख्या में इस फील्ड में आ रही हैं। इसके बाद उन्होंने बेटी से कहा कि जाओ, तुम्हारी इच्छा है तो इंजीनियरिंग में ही एडमिशन ले लो। उसके बाद मधुमिता शर्मा ने जयपुर के आर्या कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग एंड टेक्नॉलॉजी के 2010-2014 के बैच में कंप्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग के लिए एडमिशन ले लिया।

मधुमिता बताती हैं कि जयपुर का आर्या कॉलेज ऑफ इंजीनिरिंग को प्रसिद्ध कॉलेज संस्थान नहीं है, इसके बावजूद उन्हें गूगल में काम करने का अवसर मिला है। इससे पहले बारहवीं तक उन्होंने अपने गृह नगर पटना के वाल्मी स्थित डीएवी कॉलेज से पढ़ाई-लिखाई की थी। मैथ और फ़िजिक्स उनके सबसे पसंदीदा सब्जेक्ट रहे हैं। उनको बारहवीं में करीब 86 फीसदी अंक मिले थे। छात्र जीवन में वह डिबेट कंपीटीशंस में भी बढ़-चढ़ कर भाग लेती रही हैं। सुरेंद्र शर्मा सोनपुर (बिहार) में रेलवे सुरक्षा बल में सहायक सुरक्षा आयुक्त हैं। मधुमिता अपने तीन भाई-बहनों में मंझली हैं। बहन रश्मि इंदौर (म.प्र.) के अरविंदो मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही है। छोटे भाई हिमांशु शेखर बेंगलुरु के आरवी कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग से मैकनिकल इंजीनियरिंग कर रहे हैं।

मधुमिता गूगल में इतने बड़े पैकेज पर नौकरी पाने के पीछे अपने माता-पिता और पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम को अपना प्रेरणास्रोत मानती हैं। वैसे यह कामयाबी हासिल करने में मधुमिता की महेनत और लगन मुख्य बात रही है। मधुमिता बताती हैं कि बचपन से ही गूगल से जुड़ना उनका एक बड़ा सपना रहा है। वह जब कभी अपने इस तरह के भविष्य पर दोस्तों, सहेलियों के बीच कोई बात कहतीं तो उन्हें हल्के में लिया जाता था। उनकी सोच हमेशा सकारात्मक रही है, जिसका फल अब उन्हें मिल चुका है। अपने परिवार की वह पहली ऐसी शख्स हैं, जिन्हें विदेश में जॉब करने का अवसर मिला है।

वह इसी साल फरवरी में पहली बार अमरीका गई थीं। उनके पिता सुरेंद्र शर्मा भी कहते हैं कि बेटी का विदेश में इतना अच्छा जॉब करने जाना उनके घर-परिवार के लिए फक्र की बात है। पूर्व राष्ट्रपति ऐपीजे अब्दुल कलाम उसके सबसे बड़े प्रेरणा स्रोत रहे हैं। वह हमेशा उनकी किताबें और बायोग्राफी पढ़ती रहती है। जब वह दिल्ली से फ्लाइट पकड़ने के लिए स्विट्जरलैंड को रवाना हुईं, इससे पहले पटना एयरपोर्ट पर उस वक्त उनके घर-परिवार के लोग भी मौजूद रहे।

कहता है ‘मदर्स हैपिनेस इंडेक्स’ –  शहरों में 70 फीसदी मांएं हैं खुश नहीं 

नयी दिल्ली : रोजमर्रा के कामों और परेशानियों में हम इतना उलझ जाते हैं कि हम अपनी मां को भूल जाते हैं। लेकिन वह फिर भी हमारे लिए, हमारी खुशियों के लिए लगातार संघर्ष करती है। हमें लगता है कि हमारी मां खुश हैं लेकिन अगर आंकड़ों की मानें तो ऐसा बिल्कुल नहीं है।
मॉम्सप्रेस (महिलाओं के लिए यूजर जेनेरेटिड वेबसाइट) ने एक सर्वे किया है। जिसमें करीब 1200 माओं (कामकाजी और घरेलू) को शामिल किया गया था। इस ‘मॉम्स हैपिनेस सर्वे’ में दिल्ली, मुंबई, बंगलूरु और कोलकाता की महिलाएं शामिल थीं। रिपोर्ट में बताया गया है कि शहरों में रहनेवाली 70 फीसदी मां ऐसी हैं जो खुश नहीं हैं। इसका कारण उन्हें मिलने वाली कम प्रशंसा और अवास्तविक अकांक्षाएं हैं। यानि उन्हें उनके किए गए काम और संघर्ष के लिए छोटी सी प्रशंसा तक नहीं मिल पाती है।

वहीं कामकाजी महिलाओं को भी इसमें शामिल किया गया था। जांच में पता चला कि उनकी खुशी उनके नियोक्ताओं से उन्हें मिलने वाले सहयोग पर निर्भर करती है। इसके अलावा उनकी खुशी उनके परिवार के सुख और कार्यस्थल पर उनकी उपयोगिता पर भी निर्भर करती है। मॉम्सप्रेस के सीईओ विशाल गुप्ता का कहना है कि सभी माओं को घर के साथ-साथ कार्यस्थल पर भी प्रशंसा मिलनी चाहिए।
ये हैं मां की नाखुशी की वजह

– 73 फीसदी माताएं सोचती हैं कि वे अच्छी मां नहीं हैं।

– जरूरत से ज्यादा चिंता करना।

– खुद की खुशियों के लिए कोई प्रयास ना करना।

– परिवार की इच्छाएं पूरी करने के लिए खुद की इच्छाएं भूल जाना।

इन पांच बातों पर करती हैं सबसे ज्यादा चिंता

घर की छोटी से लेकर बड़ी हर परेशानी की सबसे ज्यादा चिंता मां को ही रहती है। आंकड़ों से पता चलता है कि मां घर में बनने वाले खाने, बच्चों की परीक्षाएं, अनुशासन, अतिरिक्त पाठ्यक्रम गतिविधियों को लेकर भी चिंतित रहती हैं।
ये बातें रिपोर्ट में आई सामने

– 57 फीसदी माताएं बच्चे के जन्म के बाद काम पर जाना मुश्किल समझती हैं।

– 41 फीसदी माताएं कार्यस्थल पर मिलने वाले सहयोग से खुश हैं।

– 70 फीसदी माताएं महीने के आखिर में पति के साथ वित्तीय मामलों पर विचार विमर्श करती हैं।

– 91 फीसदी माताएं ऐसी हैं जिनके खुद के स्वतंत्र बैंक अकाउंट हैं।

– 76 फीसदी मां कहती हैं कि वह बिना किसी की आज्ञा के अपनी निजी आवश्यकताओं पर खर्च करती हैं।

– 27 फीसदी नाखुश माताओं को बीते एक साल में एक बार भी प्रशंसा नहीं मिली।

– 90 फीसदी माताओं को 3 महीने पहले ही प्रशंसा मिली थी।

– व्हाट्सएप और फेसबुक पर तकरीबन रोज 2 घंटे व्यतीत करती हैं।

मातृसत्ता का अभिनव प्रतीक है कामाख्या मंदिर

असम के गुवाहाटी में सुंदर नीलाचल पहाड़ियों के शीर्ष पर, आपको सबसे पुराने शक्ति पीठों में से एक, तांत्रिक देवी को समर्पित प्राचीन कामाख्या मंदिर मिलेगा। यह मंदिर माँ कामाख्या को समर्पित 108 शक्ति पीठों में से एक है। यदि आप यहाँ मुख्य मंदिर परिसर में चारों तरफ देखेंगे तो आपको 10 छोटे छोटे मंदिर दिखाई देंगे जो देवी माँ काली के 10 रूपों को समर्पित हैं –जो नाम निम्न हैं, माँ काली, देवी धूमावती, बगलामुखी, तारा, मातंगी, भैरवी, कमला, छिन्नमस्ता, भुवनेश्वरी और त्रिपुरा सुन्दरी।

पुराण कथा का वृतांन्त

देवी कामाख्या की उत्पत्ति

कामाख्या शब्द की उत्पत्ति संस्कृत शब्द ‘काम’ से हुई है, जिसका अर्थ है प्रेम या प्रेम इच्छा। प्रेम के देवता कामदेव का एक अभिशाप के कारण का पुरूषत्व भंग हो गया था। उन्होंने मां शक्ति की योनि और गर्भ की उपासना की जिसके फलस्वरूप वह शाप से मुक्त हुए। उन्होंने अपनी शक्ति को पुन: प्राप्त कर लिया और ‘कामाख्या’ देवी के मंदिर की स्थापना की तभी से वहाँ पर उनकी पूजा की जाने लगी। कुछ ऐतिहासिक अध्ययनों से  यह भी पता चला है कि कामख्या मंदिर एक ऐसा स्थान है जहां भगवान शिव और देवी सती के बीच प्रेम की शुरूआत हुई थी।

 

मंदिर में अपूर्ण सीढ़ियां:

नरका नाम के एक असुर या दानव को देवी कामख्या से प्रेम हो गया था। उसने उनसे विवाह करने की इच्छा प्रकट की। देवी कामाख्या को नरका में कोई रुचि नहीं थी, उन्होंने उससे एक शर्त रखी कि वह मंदिर में नीलाचल पहाड़ी के नीचे से एक रात में ही सीढ़ियों का निर्माण करे। यदि उसने सीढ़ी का निर्माण कर लिया तो वह निश्चित रूप से उससे विवाह करेंगी। नरका ने इस शर्त को स्वीकार कर लिया और एक रात में ही सीढ़ी का निर्माण करने के लिए सभी तरह से कोशिश करने लगा। बस जब वह सीढ़ियों के निर्माण का कार्य पूरा ही होने वाला ही था यह देखकर माँ कामख्या परेशान हो गई और उस असुर को रोकने के लिए एक चाल चली। उन्होंने एक मुर्गे को वश में करके उसकी आवाज निकाली, ताकि उस दैत्य को रात्रि के समाप्त होने का अनुभव हो। नरका को ऐसा लगा कि वह सुबह होने से पहले सीढ़ीयाँ बनाने के कार्य को पूरा नहीं कर सकता और उसने आधी बनी हुई सीढ़ीयां ही छोड़ दी। इसी कारण आज भी, सीढ़ी अधूरी हैं और इन्हें मेखेलौजा पथ के नाम से जाना जाता है। अधिकांश तीर्थ यात्री मंदिर तक पहुंचने के लिए इन सीढ़ियों का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन कारों और बसों द्वारा मंदिर तक पहुंँचने के लिए एकपतला और मोड़दार रास्ता भी है।

देवी शक्ति की कोई भी मूर्ति नहीः

यह एक ऐसा मंदिर है जहाँ आपको माँ शक्ति की भी कोई मूर्ति नहीं मिलेगी। यहाँ पर मंदिर में गुफा के एक कोने में देवी की योनि की गढ़ी हुई छवि आपको दिखाई देगी और यही पूजा के मुख्य स्त्रोत के रूप में पायी जाती है।

प्राकृतिक अस्तित्व

यह बहुत ही अद्भुत है कि आज भी, प्राकृतिक तरीके से योनि नम रहती है सोते से निकलने वाला पानी योनी के आकार के तख्ते के माध्यम से बहता है।

देवी का रक्तस्त्राव

कामाख्या मंदिर भी खून बह रही देवी या मासिक धर्म वाली देवी के रूप में प्रसिद्ध है। ऐसा कहा जाता है कि जून या आषाढ़ के महीने में, देवी का रक्तस्राव या मासिक धर्म होता है। योनि या गर्भगृह से बहने वाला सामान्य पानी का रंग भी लाल हो जाता है।

मुख्य मंदिर

यह पवित्र स्थान या योनि स्थापना मंदिर के बीच एक कक्ष में स्थित है। तीर्थ यात्री गर्भ गृह में जाने के लिए एक संकीर्ण गली से धीरे-धीरे होकर जाते हैं। गली में कुछ सीढ़ियों चढ़ने के बाद, आप एक बहुत ही छोटे आकार का तालाब पाएंगे जहां वास्तविक झरने का पानी बहता है। तीर्थयात्री तालाब के किनारे बैठकर अपनी उपासना को प्रस्तुत करते हैं। वहाँ पर आप प्रतीकात्मक योनि अंग को देख सकते है जोकि एक लाल कपड़े से ढकी रहती है।

महान अंबुबाची मेला

महान अंबुबाची मेला, जिसे प्रजनन समारोह के रूप में भी जाना जाता है, यह मेला कामख्या मंदिर में पांच दिनों के लिए जून के महीने में होता है। इस समय के दौरान, मंदिर तीन दिनों के लिए बंद रहता है और यह माना जाता है, इस समय देवी मासिक धर्म चल रहा होता है। वास्तव में, देश के विभिन्न भागों से भक्त पहले दिन से ही मंदिर परिसर में कामाख्या देवी की प्रशंसा वाले महिमा गीत गाना शुरू कर देते हैं। वे तीन दिन और रात प्रतीक्षा करते हैं और जब चौथे दिन मंदिर का द्वार खुलता है, तो हजारों भक्त अपनी प्रार्थनाओं को प्रस्तुत करने के लिए अंदर आते हैं और फिर पवित्र जल को कामाख्या देवी के भक्तों में वितरित किया जाता है।

कोई वैज्ञानिक सबूत नहीं

आज तक, कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला है कि वास्तव में पानी लाल क्यों हो जाता है। लेकिन मासिक धर्म एक महिला को जन्म देने वाली (संतान उत्पन्न करने वाली शक्ति) का प्रतीक है। इसलिए जो कुछ भी कारण है कामख्या मंदिर हर महिला के भीतर इस ‘शक्ति’ या साधना को मनाता हैं।

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घर बैठे मिलेगा डीजल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने शुरू की सर्विस

नयी दिल्ली :    इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के बाद अब सरकारी स्वामित्व वाली तेल कंपनी हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटिड (HPMC) ने भी मुंबई में डीजल की होम डिलिवरी सर्विस शुरू कर दी है। कंपनी अब इस सेवा का और भी शहरों में विस्तार करने की योजना बना रही है। डीजल की होम डिलिवरी के लिए कुछ दिनों पहले बेंगलुरु बेस्ड एक स्टार्टअप ने भी सर्विस शुरू की थी, लेकिन सुरक्षा कारणों से बाद में अथॉरिटी की ओर से उसे तेल देने पर प्रतिबंध लगा दिया था।

हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने एक बयान जारी कर कहा कि ‘एचपी फ्यूल कनेक्ट’ सर्विस अपने चुनिंदा ग्राहकों को डीजल मुहैया कराएगी। उन ग्राहकों के पास जरूरी मशीनरी और सुरक्षा के बंदोबस्त होने जरूरी हैं। हाल ही में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने भी पुणे में ऐसी ही सर्विस शुरू की थी। होम डिलिवरी के लिए ग्राहकों के पास फ्यूल डिस्पेंसर होना जरूरी है। यह तेल एक मध्यम आकार के टैंकनुमा ट्रक द्वारा डिलिवर किया जाएगा।

तेल और प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पिछले साल इस सर्विस के बारे में सूचना दी थी और अब इंडियन ऑयल के बाद हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने इसे शुरू भी कर दिया है। जून 2017 में बेंगलुरु बेस्ड स्टार्टअप एएनबी फ्यूल्स ने ऐसे ही पेट्रोल और डीजल को माईपेट्रोलपंप ब्रैंड के तहत होम डिलिवर करने की सर्विस शुरू की थी। लेकिन पेट्रोलियम तथा एक्सप्लोसिव सुरक्षा संगठन (PESO) ने एक सर्कुलर जारी कर तेल कंपनियों को एएनबी को तेल सप्लाई करने पर रोक लगाने के आदेश दिए थे। PESO का कहना था कि ऐसा करना सुरक्षा के लिहाज से सही नहीं है।

HPCL ने कहा कि शुरू में उसके टार्गेट पर कमर्शियल शॉप, शॉपिंग मॉल्स और स्कूल जैसे संस्थान हैं, जहां बिजली के लिए जेनरेटर चलाने की जरूरत होती है। बयान में कहा गया, ‘इस सुविधा से उन लोगों को लाभ होगा जो पेट्रोल पंप पर तेल लाने के लिए जाते थे। इससे समय के साथ साथ तेल को लाने में लगने वाली अतिरिक्त लागत में कमी आएगी। इससे तेल भी बर्बाद होने से बचेगा और किसी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ेगा।’ हालांकि PESO ने इन तेल कंपनियों को भी सिर्फ प्रायोगिक तौर पर ही इस सर्विस को शुरू करने की अनुमति दी है।

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में अभी 61,983 पेट्रोल पंप हैं, जिनमें से 90 फीसदी पंप सरकारी कंपनियों के हैं। बाकी रिलायंस और एस्सार जैसी प्राइवेट कंपनियां भी पेट्रोल पंप चलाती हैं। भारत में 2016-17 में डीजल की खपत 76 मिलियन टन थी वहीं पेट्रोल की खपत 23.8 मिलियन टन थी। एक्सपर्ट्स का मानना है कि तेल की होम डिलिवरी से तेल की कालाबाजारी पर भी अंकुश लगेगा और ग्राहकों को शुद्ध तेल मिल सकेगा।

उच्च न्यायालय दो महीने में सभी अदालतों में यौन उत्पीड़न निरोधक समितियां गठित करें: उच्चतम न्यायालय

नयी दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने  सभी उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों और कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीशों से कहा कि वे 2013 के कानून के अनुरूप दो महीने के भीतर सभी अदालतों में यौन उत्पीड़न निरोधक समितियां गठित करें। शीर्ष अदालत ने दिल्ली उच्च न्यायालय की कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल से अनुरोध किया कि वह उच्च न्यायालय के साथ ही राजधानी की सभी जिला अदालतों में एक सप्ताह के भीतर ये समितियां गठित करें।

प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा , न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने तीस हजारी अदालत की महिला वकील और बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों से कहा कि वे अपने विवाद मिलजुल कर सुलझायें। न्यायालय ने निर्देश दिया कि दोनों ही पक्षों के वकीलों को एक दूसरे के खिलाफ दर्ज करायी गयी प्राथमिकियों के सिलसिले में गिरफ्तार नहीं किया जाये।

पीठ ने दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा को दोनों पक्षों के वकीलों की शिकायतों की जांच का निर्देश दिया है।

पीठ ने इन दोनों प्राथमिकियों से जुड़े मुकदमे की सुनवाई पटियाला हाउस अदालत को स्थानांतरित कर दी और बार के नेताओं से कहा कि वे न्याय के प्रशासन में हस्तक्षेप नहीं करें।

न्यायालय ने वकीलों अैर दिल्ली बार एसोसिएशन के कुछ सदस्यों के खिलाफ महिला वकील की याचिका का निबटारा कर दिया।

कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न ( रोकथाम , प्रतिबंध और निदान ) कानून , 2013 के तहत प्रत्येक कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न की शिकायतों की जांच के लिये समिति का गठन अनिवार्य है।

फ्लिपकॉर्ट में 77% हिस्सेदारी के बाद अब 85% की तैयारी में वॉलमार्ट

बेंगलुरुः देश की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी में 77 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने के बाद अब वॉलमार्ट 3 अरब डॉलर का निवेश कर फ्लिपकॉर्ट की 85 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने की तैयारी में है। इस बात की जानकारी दुनिया के सबसे बड़े रिटेलर ने शुक्रवार को अमेरिकी सिक्यॉरिटीज और एक्सचेंज कमिशन को दी। रिटेलर ने ये भी बताया कि वॉलमार्ट के बाकी शेयर भी उसी कीमत पर खरीदे जाएंगे जिस कीमत पर 77 फीसदी शेयर खरीदे गए थे।

वॉलमार्ट ने किस दर पर फ्लिपकॉर्ट के शेयरों को हासिल किया यह जानकारी सार्वजनिक नहीं हुई है। वॉलमार्ट की फाइलिंग इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि फ्लिपकॉर्ट के बड़े निवेशक जापानी इंटरनेट और टैलीकॉम कंपनी सॉफ्टबैंक ने शेयरों को बेचने पर कोई फैसला नहीं किया है। सॉफ्टबैंक के पास फ्लिपकॉर्ट के करीब 22 फीसदी शेयर हैं। इससे पहले मीडिया रिपोर्टस से भी ये बात साने आई थी कि वॉलमार्ट और सॉफ्टबैंक पहले की कीमत पर ही शेयर ट्रांजेक्शन के लिए वक्त निकाल कर बातचीत करने की तैयारी कर रहे थे।

एसईसी फाइलिंग के अनुसार, वॉलमार्ट 2 अरब डॉलर कैश में निवेश कर रहा है और फ्लिपकॉर्ट के मौजूदा शेयर होल्डर्स से 14 अरब डॉलर मूल्य के शेयर खरीद रहा है। वॉलमार्ट ने कहा है कि वह बोर्ड और फाउंडर की सलाह से फ्लिपकॉर्ट ग्रुप ऑफ कंपनीज के सीईओ और प्रिंसिपल एग्जिक्युटिव्ज को अपॉइंट या रिप्लेस कर सकता है। फिलहाल कल्याण कृष्णमूर्ति फ्लिपकॉर्ट के सीईओ हैं और को-फाउंडर बिन्नी बंसल ग्रुप सीईओ हैं। को-फाउंडर और एग्जिक्युटिव चैयरमैन सचिन बसंल ने कंपनी छोड़ने का फैसला किया।